मा बेटा और बहन -3

 


 मा बेटा और बहन -3



"ज्जज्ज मम्मी ववव वह मन..."


"हां हां बोलो बेटी शरमाओ मत."


"जी मम्मी मन तो करता है..."


"क्या मन करता है खुलकर पूरी बात बताओ."


"जी मम्मी मन करता है कोई लड़का मुझे पकड़कर खूब चूमे और इनको.."


"हां बेटी बोलो." मम्मी ने हौसला दिया.


"मम्म मन करता है कोई इनको पकड़ कर दबाए और चूसे." शुमैला ने अपनी


चूचियों को पकड़ कर शरमाते हुए कहा.


"पगली तो इसमे इतना शरमाने की क्या बात है. इस उमर मे तो यह मन करता ही


है. तुम्हारे भले के लिए कह रही हूँ. तुम अपने भाई को अपने खूबसूरत बदन


को दिखाओ तो अगर वह फँस गया तो तुमको कहीं बाहर जाने की ज़रूरत नही होगी."


"जी मम्मी क्या करना होगा?"


"पहले तो तुम जाओ और कोई छ्होटे कपड़े पहनो जिसमे कुच्छ दिखे."


फिर वह अपने रूम मे जा पुराने कपड़े पहन आई. सफेद शलवार जंपर था.


शलवार कसी थी और जंपर भी कसी थी और दोनो चूचियाँ कसकर बाहर को


रही थी और ऊपर से दिख रही थी. वह पास गयी तो मम्मी ने उसे पकड़ कहा,


"हां अब ठीक है, जब भाई आए तो उसके सामने ही बैठना और पैरों को


फैलाना जिससे उसे तुम्हारी चूत की झलक दिखे और चूचियों को ज़रा और


बाहर निकाल लेना जा."


फिर जब शाम को मे पहुँचा तो शुमैला ने मुझे देखा और पास आई तो मेने


उसकी चूचियों को पकड़ कहा, "हाई शुमैला कितनी प्यारी लग रही हो इन कपड़ों


में हाई सब दिख रहा है."


"भाई जान मम्मी ने पहनाए है ये कपड़े, कहा है अपने भाई को दिखाओ अपना


माल."


"हाई तेरा माल तो देख भी चुका हूँ और चख भी चुका हूँ, रानी आज तो


तुम्हारा पूरा मज़ा लूँगा, आज अपनी बहन की जवानी को खुलकर चोदुन्गा."


"भाई जान हटो भी आप तो मुझे चोदे बिना नही मनोगे?"


"अरे यार मम्मी भी चाहती है कि तुम अपनी चुद्वाओ मुझसे तो क्यों शरमाती है?"


"जी नही भाई जान मम्मी तो बस इतना चाहती हैं कि मे आपको दिखाऊ और थोड़ा


बहुत दबवाकर मज़ा लूँ. आई बात समझ मे अब जाइए और रात को मेरे रूम


मे आना हो तो मुझे इनकार नही."


फिर वह इठलाती हुई चली गयी. मे मम्मी के पास गया और पूछा तो मम्मी


बोली, "काम बन रहा है, जल्दी मत करो आज रात चोद लेना अपनी बहन को."


फिर सब नॉर्मल होने लगा. वह मुझे देख देख इठला रही थी. खैर रात के 11


बजे मे उसके रूम मे गया तो वा बेड पर लेटी कोई बुक देख रही थी. मे


उसके पास गया तो वह बुक रख मुझे देखने लगी. मे पास गया और उसको पकड़


कहा, "आज क्या कर्वओगि?"



फिर जब मे उसके पास गया तो वह मुझे देख मुस्कराने लगी. मेने उससे कहा,


"शुमैला बोल क्या करवाएगी?"


"भाईजान जो चाहो करो, अब तो मे आपकी हूँ."


"तुम झूठ बोलती हो."


"नही भाई जान सच कह रही हूँ, मे अब सिर्फ़ आपकी हूँ."


"तो ठीक है पहले तो मे तुम्हारी चूत को चाटकार मज़ा लूँगा फिर आज तुमको


चोदुन्गा भी."


"नही भाई जान प्लीज़ चाट लो पर चोद्ना नही."


"क्यों? तुम तो कहती हो कि तुम सिर्फ़ मेरी हो तो क्या बात है?"


"मुझे डर लगता है."


मे अभी कुच्छ कहने ही वाला था कि बाहर से आहट की आवाज़ आई और फिर मम्मी


की आवाज़ आई, "आमिर बेटा तुम कहाँ हो?"


"मम्मी मे यहा हूँ शुमैला के पास."


मम्मी अंदर आई. हम दोनो ठीक से बैठे थे. मम्मी पास आ शुमैला के पास


बैठी और बोली, "आमिर बेटा तुम इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हो?"


शुमैला कुच्छ घबरा रही थी. मे शुमैला को देखते बोला, "मम्मी नींद नही


आ रही थी सोचा शुमैला से बातें ही करूँ कुच्छ देर."


"हां हां बेटा ठीक है, तुम दोनो लोग बातें कर्लो मे तो सोने जा रही हूँ.


वैसे तुमलोग भी जल्दी सो जाना बाते करने के बाद."


"पर मम्मी यह मुझसे बात नही कर रही."


"अरे क्यों?"


"जो मे इससे कह रहा हूँ वह नही मान रही."


"अरे शुमैला बेटी क्या बात है. अपने बड़े भाई की बात मानलो, जो कह रहा वह


करो. बेटा मानेगी तुम्हारी बात."


शुमैला सब सुन घबरा सी रही थी. तभी मम्मी ने उसके गालों को पकड़ कहा,


"बेटी क्या कह रहा था यह?"


"ज्ज्ज..."


"क्यों तुम क्या कह रहे थे इससे?"


"मम्मी मे कह रहा था कि तुम मेरी छ्होटी और प्यारी बहन हो और मे तुमको


बहुत प्यार करता हूँ और मे इस वक़्त इससे कुच्छ प्यारी बातें करने आया


हूँ."


"अरे बेटी तुम अपने भाई को बहुत परेशान करती हो. तुमको समझाइया था दिन मे.


चलो अपने भाई को अपना माल दिखाओ."


वह मम्मी की खुली खुली बात सुन शर्मा गयी. मे खुश था. तभी मम्मी


मुझसे बोली, "बेटा तुम अपनी बहन का माल देख लो और इसे थोड़ा प्यार भी करना,


बेचारी को किसी के प्यार की बहुत ज़रूरत है."


फिर मम्मी ने उसका हाथ पकड़ कहा, "आओ बेटी मे तुमको प्यार करवा दूं भाई


से."


शुमैला घबराती और शरमाती सी बोली, "ज्ज्ज.. म्‍म्ममी आप जाइए मे....मे.."


"क्या मे मे कर रही है?"


"जी मे करवा लूँगी."


"क्या करवा लेगी, बोल अपने भाई को अपना माल दिखाई?"


"ज्जजई..."


"और उसे प्यार भी करने देना."


"ज्ज्ज.."


"ठीक है मे जा रही हूँ."


फिर मम्मी जैसे ही बाहर गयी मेने उसे पकड़ लिया और उसके होंठो को चूमते


कहा, "दिखाओ अपना माल."


"भाई जान दरवाज़ा तो बंद कर लो."


"पगली दरवाज़ा क्या बंद करना मम्मी तो खुद ही कह गयी हैं."


तब उसने मुस्कराते हुए अपने कपड़ो को अलग किया और फिर नंगी हो अपनी चूचियों


को पकड़ बोली, "लो भाई जान देखो अपनी बहन का माल."


मे उसकी चूचियों को पकड़ दबा दबा चूसने लगा. वह मुस्करती हुई मुझे


देखने लगी. कुच्छ देर बाद वह मेरे बालों मे हाथ फेरते बोली, "भाई जान


पहले मेरी चाटकार झाड़ दो फिर चूसना."


तब मेने उसे बेड पर लिटाया और उसकी चूत के पास जा चूत को देखते कहा,


"हाई कितनी प्यारी चूत है, मज़ा आ जाएगा इसको चाटकार."


"तू चाटो ना इसे भाई आपकी ही है."


फिर मेने ज़ुबान निकाल उसकी चूत को 8-10 चाटा फिर अंदर तक जीभ पेल चाटने


लगा 50-55 बार चाटा तब उसकी चूत ने फुच से पानी फेंका. नमकीन पानी


निकलते ही मे अलग हुआ तो वह हाई हाई करती बोली, "मज़ा आ गया भाई जान."






फिर मेने कुच्छ देर उसकी चूचियों को मुँह मे लेकर चूसा और फिर जब वह


एकदम मस्त हो गयी तो अपनी पॅंट खोल लंड को निकाल उसे दिया. उसने मेरे लंड को


पकड़ा और फ़ौरन मुँह मे ले लिया. वह मेरे लंड को होंठो से दबा दबा कसकर


चूस रही थी. 30-35 बार चूसा था कि मेने लंड बाहर निकाल लिया.


"क्या हुआ भाई जान?"


"अब चुद्वाओ अपनी."


"नही नही भाई जान प्लीज़.."


"अरे यार डरती क्यों है."


"नही नही मुझे नही चुद्वाना. चुस्वाकर झडवालूँगी पर चुद्वाउंगी नही."


"तब मेने उसके मुँह को ही चोद्कर अपना झाड़ा."


फिर मे गुस्सा दिखाते अपने रूम मे चला गया.


अगले दिन सुबह नाश्ते पर मम्मी ने पूछा, "बेटी रात मे भाई ने तुमको प्यार


किया था?"


वह शरमाई तो मम्मी ने मुझसे कहा, "क्यों बेटा रात मे अपनी बहन को प्यार


किया था?"


"हां मम्मी थोड़ा सा किया था."


"थोड़ा सा क्या मतलब?"


"यह कुच्छ करने ही नही देती."


"क्यों बेटी अरे मेने कहा था जो भाई करे करने देना, चलो कोई बात नही


नाश्ता हो गया चलो अब मेरे रूम मे दोनो लोग देखते हैं तुम लोग क्या करते


हो."


फिर मम्मी हम्दोनो को अपने रूम मे ला खुद बेड पर बैठी और मुझे एक ओर


बिठा शुमैला का हाथ पकड़ उसे अपने पास बिठा उसके गालो को सहलाती प्यार से


बोली, "बेटी क्या हुआ बोलो भाई तुमको परेशान करता है क्या?"


वह चुप रही तो मम्मी ने फिर कहा, "बेटी कल रात मेने देखा था कि तुम अपने


भाई की गोद मे बैठी हो."


"ज्ज्ज्जई..."


"हां हां बोलो, तुम अपने भाई की गोद मे बैठती हो कि नही?"


वह शरमाई तो मम्मी ने कहा, "अरे बेटी शरमाओ नही अपने भाई की ही गोद मे


बैठी थी ना कोई बाहर वाले की गोद मे तो नही, कोई बात नही तुम लोग जो मन


करे किया करो."


फिर मम्मी मुझसे बोली, "क्यों बेटा तुम अपनी बहन को अपनी गॉद मे बिठाते हो."


"जी मम्मी मुझे बहुत अच्छा लगता है जब यह मेरी गोद मे बैठती है. और..."


"और क्या बेटा?"


"और मे इसे अपनी गोद मे बिठाकर इसकी दोनो पकड़कर..."


"क्या तुम तो ना शरमाओ अपनी बहन की तरह."


"और मे इसकी दोनो चूचियों को पकड़ कर दबा दबा इसको चूमता हूँ."


शुमैला तो मेरी बात सुन शर्मा कर घबराने सी लगी पर मम्मी ने कहा, "और


क्या क्या किया है तुमने मेरी बेटी के साथ?"


"माँ मेने अपनी प्यारी बहन को अपना लंड पिलाया है और इसकी चूचियों का रस


पिया है और इसकी चूत को खूब चाटा है."


"अरे तुम दोनो इतना सब कर चुके हो. क्यों बेटी तुमने अपने भाई का लंड मुँह से


चूसा है और अपनी चूचियाँ पिलाई हैं?"


"ज्जज्ज..." शुमैला हिचकिचई.


"हान्न मामी यह लंड को खूब कसकर चूस्ति है और सारा पानी मुँह मे ही लेती


है और मम्मी अपनी चूचियों को खूब दबा दबाकर पिलाती है सारा रस मेरे


मुँह मे निचोड़ देती है."


मम्मी शुमैला के चेहरे को पकड़ बोली, "मे तो कह रही थी कि थोड़ा बहुत


भाई को दिखा दिया करो पर तुमने तो खूब मज़े लिए अपने भाई जान से, चलो कोई


बात नही बेटी आज तुम लोग और मज़ा लो."


"मम्मी प्लीज़ आज मे इसकी चोदुन्गा."


"अरे तो चोदो ना कोई मना करता है क्या? बेटी अपने भाई का लंड चूत मे लो


बहुत मज़ा आएगा."


यह बात सुन शुमैला खुल कर बोली, "मामी मे भाईजान का लंड मुँह मे तो


रोज़ ही लेती हूँ पर चूत मे आज पहली बार लूँगी इसलिए प्लीज़ आप भी साथ


रहिएगा."


"ठीक है बेटी आमिर बेटा चलो आज पहले मुझे चोद्कर अपनी बहन को दिखाओ फिर


इसको चोद्ना."


"अब उपेर आओ ना बेड पर यूँही खड़े रहो गे क्या? यहाँ आओ बेटा." मम्मी ने मेरा


हाथ पकड़ मुझे बिठा लिया.


"यहाँ नही हमारे दरमियाँ आओ, आज यहाँ ही केरते हैं जो केरना है. शुमैला


वैसे भी घबरा रही है, मुझे ही कुछ करना पड़ेगा." मम्मी ने नकली गुस्सा


देखते हुए मुस्कुरा कर कहा और मुझे अपने और शुमैला के बीच बिठा


लिया.


"अच्छा अब जो कहती जाऊं वैसे केरते जाओ तुम दोनो! ओके!"


हम दोनो ने खामोशी से सिर हिला दिया.


"पहले तो तुम दोनो रेलेक्ष हो जाओ कुछ नही हो गा किसी को ओके! और ये तो उतारो."


मम्मी मेरी शर्ट उतारने लगी उस ने बाज़ू उप्पेर कर


के शर्ट उतरवा ली, फिर मम्मी ने मेरी चेस्ट पे हाथ फेरा.



"देखो शुमैला तेरे भाई के जिस्म पे कैसे प्यारे कट्स हैं." मम्मी ने शुमैला


का हाथ पकड़ के मेरे चेस्ट पे रख दिया. शुमैला का दिल ऐक बार ज़ोर से धड़का


लेकिन उस ने हिम्मत नही छोड़ी और हल्के हल्के अपना गर्म गर्म हाथ मेरे चेस्ट पे


फैरने लगी. मे अब रेलेक्ष था मेरा लंड आहिस्ता आहिस्ता फूलने लगा था. तभी


मम्मी ने मेरे पैट पे हाथ फेरते हुए मेरे सेमी एरेक्टेड कॉक को ट्राउज़र के


उप्पेर से ही पकड़ लिया और बोली, "आरएे क्या केरते हो!! जवान बनो, चलो ये भी


उतारो."


और मम्मी ने मेरा ट्राउज़र भी उतार दिया. मेने हल्का सा खुद को उठा कर ट्राउज़र


उतारने मे मम्मी की मदद की. अब मे दोनो के दरमियाँ बिल्कुल नंगा बैठा था.


शुमैला की नज़ारे मेरे सेमी एरेक्टेड लंड पर थीं जो कि मम्मी के हाथ मे


था. उस का दिल अब और भी ज़ोर से धरकने लगा था.


"आमिर बेटा इस को बड़ा करो." मम्मी ने कहा.


"मम्मी आप खुद ही कर लो ना, आप को तो आता है ना." मेने मम्मी की तरफ


देखते हुए जवाब दिया.


"बड़ा होशयार हो गया है मेरा बेटा. चल तू लेट जा हम खुद ही कर लेते हैं


इस को बड़ा." मम्मी ने मुझे कंधे से पकड़ कर लिटा दिया और खुद मेरी टाँगो की


तरफ आ गई और शुमैला का हाथ जो अभी तक मेरे सीने पे था पकड़ कर मेरे


लंड पे रख दिया.


"पाकड़ो इसे!!! आज से ये तुम्हारा है."


और शुमैला ने मेरा लंड हाथ मे ले कर मुट्ठी बंद कर ली. उसे लगा के जैसे


उस ने कोई गर्म गर्म रोड पकड़ लिया है वो काफ़ी सख़्त हो रहा था और झटके ले


रहा था. मे शुमैला के हाथ की नर्मी और गर्मी अपने रोड पे महसूस कर के और


भी हार्ड होने लगा.


"ऐसे करो जान." मम्मी ने शुमैला का हाथ पकड़ के मेरे लंड पे ऊपर नीचे


किया और शुमैला अपने हाथ को हल्के हल्के अप्पर नीचे केरने लगी और मेरे लंड


की रगो को अपने हथेली मे महसूस केरने लगी.


"मम्मी ये तो बोहत बड़ा है." शुमैला ने आहिस्ता से सेरगोशी की.


"हां, और मज़े का भी." मम्मी ने शुमैला की आँखो मे देखा और थोड़ा सा


झुक कर मेरे हार्ड राक लंड के हेड पे किस की और मेरे पूरे बदन मे करेंट


सा दौड़ गया.


"चलो बेटी अब तुम्हारी बारी." मम्मी ने शुमैला को कहा और शुमैला ने ऐक


नज़र मेरी तरफ देखा. मे सिर उठा कर उस की तरफ ही देख रहा था.


शुमैला बहुत अच्छी आक्टिंग कर रही थी शरमाने की. साली कई दिन से मेरा लंड


चूस रही थी पर आज मम्मी के सामने बेचारी शर्मा भी रही थी इसलिए लग


रहा था जैसे सबकुच्छ आज पहली बार हो रहा है. शुमैला ने शेरमाते हुए


जल्दी से मेरे तने हुए लंड के सिर पे किस कर दी.


"शाबाश." मम्मी ने कहा. "अब तो तुम दोनो की शरम उतर गई ना."


"मम्मी मे अकेला ही नंगा रहूं गा क्या?" मेने मम्मी से पूछा.


"नही हम भी उतरने लगे हैं कपड़े तुम परेशान कियूं होते हो, ये लो बाबा."


और मम्मी ने अपनी कमीज़ ऐक झटके से उतार दी और उनकी बड़ी बड़ी चूचियाँ


उछल कर बाहर आ गयी.


"चलो बेटी उतारो इसे." मम्मी ने शुमैला की कमीज़ पकड़ कर कहा.


"मुझे शर्म आती है आप ही उतारो." शुमैला ने नज़रे झुकाते हुए कहा.


"ओह! हो अभी भी शर्म, लाओ इधर आओ ज़रा." और मम्मी ने शुमैला की कमीज़ भी


उतार दी. शुमैला ने बाज़ू उपर कर के मम्मी की हेल्प की.


"गुड!" मम्मी ने कहा और उस की कमर पे हाथ लेजा कर उस की ब्रा भी खोल दी.


अब शुमैला की गोल गोल पर्फेक्ट तनी हुई 32 साइज़ की चूचियाँ बाहर आ गईं.


मम्मी ने दोनो पे हाथ फेरा और कहा, "लो ज़रा मेरी ब्रा तो खोलना." मम्मी ने


अपनी कमर शुमैला की तरफ की.


और उस ने मम्मी की ब्रा खोल दी. अब दोनो के जिस्मो पे सिर्फ़ शलवार थीं.


मे कमरे की ब्लू रोशनी मे दोनो की चमकती हुई चूचियाँ देख रहा था.


"लो मेरे राजा तुम इन से खेलो हम इस से खैलते हैं." मम्मी ने शुमैला की ऐक


चूची को पकड़ कर मेरे सामने कर दिया और मेने हाथ बढ़ा कर शुमैला की


चूची को पकड़ लिया और दबाने लगा.


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