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मा बेटा और बहन compleet
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rajsharma
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Re: मा बेटा और बहन
Post 14 Oct 2014 06:58
माँ बेटा ओर बहन-10
गतान्क से आगे…………………
शुमैला को मे आज मम्मी के सामने छू रहा था. उसे बेहद मज़ा आने लगा और
मम्मी ने मेरे हार्ड लंड को अपने हाथो मे ले लिया और फिर थोड़ा सा झुक कर
लंड पे किस्सिंग करनी शुरू कर दी. मुझे मम्मी की गर्म गर्म साँसे पागल कर
रही थीं और मेरी आँखे बंद हो गईं. उधेर शुमैला मेरे और नज़दीक हो
कर मेरे दोनो हाथो से अपनी चूचियों को मसलवा रही थी और आँखे बंद
कर के लंबी लंबी साँसे ले रही थी. उस का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.
तभी मम्मी ने मुँह खोल कर मेरा आधे से ज़ियादा लंड अपने अंदर ले लिया और
चूसने लगी. मेरा बदन अकड़ने लगा. मम्मी ने दो तीन बार ही चूसा कि फॉरन
ही मेरा फोव्वारा मम्मी के मुँह मे ही छूट गया. मम्मी को मेरा नमकीन पानी
अपने मुँह मे आते महसूस हुआ लेकिन मम्मी ने मेरा लंड बाहर नही निकाला. वो
वैसे ही उसे चूस्ति रही, अंदर बाहर करती रही और मेरे कम का फुल लोड मम्मी
मुँह मे भर गया.
"आह्ह्ह्ह! गंदे! इतनी जल्दी." मम्मी ने अपने दुपट्टे से अपना मुँह सॉफ करते हुए
कहा तो शुमैला ने भी आँखे खोल कर मम्मी की तरफ देखा. उसे नही पता
चल सका कि ये क्या हुआ है.
"मम्मी आज पता नही क्या हुआ." मैने धीरे से कहा.
"हां मुझे पता है. आज तेरे हाथों मे बहन की चूचियाँ जो हैं. कैसा
लगा?" मम्मी ने कहा.
"बोहुत ही अच्छा मम्मी बड़ा मज़ा आया." मेने मस्ती से भरी आवाज़ मे कहा और
ज़ोर शुमैला की चूचियाँ को दबा दिया.
शुमैला ने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख रोकी और बोली, "क्या केरते हो भाईजान
दर्द होता है यहाँ, आहिस्ता पकडो ना." शुमैला ने
मेरे चेहरे पे हाथ फेरते हुए कहा.
"ओह! सॉरी शुमैला मे दरअसल झाड़ गया था ना पता ही नही चला."
"चलो अब तुम ज़रा शुमैला को भी वो मज़ा दो मे तुम्हे दोबारा हार्ड केरती
हूँ." मम्मी ने कहा तो मेने शुमैला को बेड पे सीधा लिटा दिया और उस की
टाँगे ज़रा सी खोल कर करवट के बल उस के उप्पेर आ गया और शुमैला के
होंठो पे किस्सिंग केरने लगा तो मम्मी मेरे सेमी एरेक्टेड लंड के पास लेट गई
और मेरे लंड पे ज़ुबान फैरने लगी जिस से लंड फिर से हार्ड होने लगा.
शुमैला ने पहले तो अपने होंठ कस के बंद किए हुए थे लेकिन उसे जब मज़ा
आने लगा मेरे चूमने का तो वो भी रेस्पॉन्स देने लगी उस ने अपने होंठ खोल
दिए. अब मेरे और शुमैला की ज़ुबाने ऐक दूसरे से खैलने लगीं. ऐसी
किस्सिंग का शुमैला को बोहत मज़ा आता था. मम्मी ने चूम के चाट के चूस के
मेरा लंड फिर से हार्ड कर दिया था और वो मुसलसल मेरा लंड उपर
से नीचे तक चाट रही थी और फिर वो मेरे लंड के नीचे थैली मे बंद बॉल्स
को ज़ुबान से चाटने लगी. मेरे साथ ये पहली बार
हो रहा था. मेरे बदन मे लहरे सी उठने लगीं और ऐक नया सा सरूर
आने लगा और मेरी किस्सिंग मे जोश सा आ गया और मेने शुमैला के पूरे
चहरे को चूमना शुरू कर दिया. फिर उस के कानो पे आया और गर्दन पे और फिर
दोनो हाथ मे शुमैला की चूचियाँ पकड़ लीं और उस के लेफ्ट निपल को मुँह
मे ले कर चूसने लगा और ज़ुबान उस पे फैरने लगा. शुमैला के दोनो निपल्स
हार्ड हो कर खड़े हो गये थे. मेरी ज़ुबान उस के निपल के गिर्द गोल गोल घूम
रही थी और वो मज़े की दुनियाँ मे आँखे बंद किए उड़ रही थी. मे
दीवानो की तरह अब उस की चूचियों को चूस रहा था, काट रहा था और दोनो
हाथो से ज़ोर ज़ोर से सहला भी रहा था.
तभी शुमैला को महसूस हुआ कि उस की टाँगो के दरमियाँ फँसी हुई छ्होटी सी
चूत से पानी का सैलाब आ गया है. और वो झडने लगी. उस ने अपनी टाँगे और
भी फैला लीं और अपने कुल्हो को ज़रा सा उठा कर अपनी चूत को अपने अप्पर
लेते हुए अपने भाई की पसलियो से लगाया और अच्छी तरह ज़ोर से रगड़ा. मेने
ये हरकत महसूस की और शुमैला की चूचियों से हाथ हटाया और उस की
शलवार उतारने लगा. शुमैला ने गांद को उठा कर मुझे अपनी शलवार उतरने दी.
इस हरकत से मेरा लंड मम्मी क मुँह से निकल गया और वो उठ कर बैठ गई और
देखने लगी क़ि मे शुमैला की शलवार उतार रहा हूँ.
"गुड! अब आए हो ना दोनो तुम पूरे मज़े मे! शाबाश बेटा आज इस को वो मज़ा
देना कि सारी ज़िंदगी याद रखे." मम्मी ने जोश से भरी आवाज़ मे कहा और
मुझे भी जोश आ गया और मेने शुमैला की शलवार उतार कर उस की टांगे
ज़रा सी और फैला दीं और झुक गया शुमैला की छ्होटी सी चूत पर मुँह
रखा.
मेने जैसे ही शुमैला की चूत को चूमा शुमैला की तो जैसे जान ही निकल
गई उस ने गांद उठा कर अपनी चूत को मेरे मुँह पे और दबा दिया. मम्मी इतने
मे शुमैला के पहलू मे आ गई और शुमैला की चूचियाँ चूसने लगी.
मेने ज़ुबान निकाल कर शुमैला की चूत के लबो पर फैरनी शुरू कर दी
शुमैला की चूत का ज़ायक़ा मेरी ज़ुबान पे आने लगा और मे भी दीवाना हो
गया. आज तो बहुत मज़ा आ रहा था. अकेले मे तो खूब चाटा था पर आज मम्मी
के सामने ही मज़ा ज़्यादा आ रहा था. मम्मी उसकी चूचियों को चूस रही थी.
शुमैला तड़प रही थी मस्ती से. मे और ज़ोर से शुमैला की चूत चाटने लगा.
शुमैला भी अपनी गांद उठा उठा कर मेरी ज़ुबान को अपनी चूत के और अंदर
लेने की कोशिश कर रही थी. उस के मुँह से हल्की हल्की आवाज़ मे तेज़ तेज़
सिसकियाँ निकालने लगीं.
मम्मी ने शुमैला को बुरी तरह कसमसाते हुए महसूस कर के कहा, "आमिर बेटा
बस करो तेरी बहन मज़े से मर जाएगी. उठो अब मे बताती हूँ क्या करना
है." मम्मी ने मेरे सिर मे हाथ फेरते हुए मुझे शुमैला की चूत से
उठाया.
मे मम्मी की तरफ देखने लगा. मेरे गालो पे शुमैला की चूत का सारा पानी
लगा हुआ था. मेने उसकी चूत से मुँह हटाया तो
शुमैला ने कसमसाना बंद कर दिया लेकिन उस की आँखूं मे से आँसू निकलने
लगे थे.
"उपेर आओ, इस की टाँगो के दरमियाँ और शुमैला की चूत पे अपना लंड
रखो." मम्मी के मुँह से ये सुन कर ऐक बार तो मुझे यकीन नही हुआ कि आज दिल
की मुराद पूरी होगी. मे बहुत खुश था कि आज बहन को चोद्ने का मौका मम्मी
दे रही हैं. फिर मे अपने घुटनो के बल उपर आ गया. अब मेरा लंड शुमैला
की चूत के बिल्कुल सामने था. मम्मी ने हाथ बढ़ा के मेरा लंड पकड़ा और
शुमैला की चूत के लबो पे फैरने लगी. शुमैला की चूत पे मेरा गरम
गरम लंड जैसे ही लगा उस ने ऐक झरजरी सी ली. मुझे भी इस मे बहुत मज़ा
आ रहा था. मम्मी को तो कई बार चोदा था पर शुमैला की कुँवारी चोद्ने का
पहला मौका था. मे थोड़ा और झुक गया अब मम्मी मेरा लंड शुमैला की चूत
की फांको के बीच ऊपर से नीचे फेरने लगी. शुमैला की गीली गीली चूत
मे गुदगुदी करने लगी.
"अया ह आअहह आ ह्म्म्म्मम." शुमैला के मुँह से बाक़ायदा सिसकियाँ निकलने
लगी.
"अरे बेटी मज़ा आने पर ऐसे ही होता है. अभी तू आहिस्ता आहिस्ता सिसक रही है
जब भाई का लंड अंदर जाकर तुझे चोदेगा तो मज़े से चिल्लाने लगेगी तू. मज़ा
आरहा है ना तुम दोनो को?" मम्मी ने शुमैला की तरफ मुँह कर के कहा.
मेने हां किया और शुमैला ने भी सर हिला दिया.
मे और शुमैला दोनो ही सरूर की दुनियाँ मे डूब चुके थे. मे ज़रा सा
अनबॅलेन्स हुआ और मेरा हार्ड लंड शुमैला की चूत के छेद मे घुस गया.
शुमैला ने बड़ी ही मुश्किल से अपनी चीख अपने होंठो मे दबाई लेकिन फिर
भी ज़रा सी निकल ही गई. मम्मी का हाथ भी मेरे लंड के साथ शुमैला की
चूत को जा लगा था.
"बस इतनी सी बात थी बेटी. आमिर आहिस्ता आहिस्ता अब और नीचे जाओ, और अंदर करो
अपना लंड अपनी बहन की चूत मे. लेकिन देखो आहिस्ता करना पहली बार है.
क्यों बेटी आज पहली बार चुद्वा रही हो ना?" मम्मी ने हाथ दोनो के बीच से
हटा कर मेरे सिर पे फेरते हुए कहा.
"जी मम्मी आज पहली बार भाईजान का अंदर जा रहा है." शुमैला ने अब खुलकर
बिना शरम के कहा.
अब मे आहिस्ता आहिस्ता अपने मोटे लंबे लंड को शुमैला की चूत मे अंदर केरने
लगा. शुमैला अपना सिर इधेर उधेर मारने लगी. उस ने आँखे ज़ोर से बंद कर
लीं थीं और टाँगो को बंद केरने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी टाँगों
के बीच मे था.
"बाअस्स्स!!! अया आह अह्ह्ह्ह!!!" शुमैला के मुँह से निकला वो दर्द से मरी जा रही
थी.
"रूको." मम्मी ने मुझ से कहा.
मे मम्मी की बात सुन वहीं रुक गया. शुमैला तेज़ तेज़ साँसे ले रही थीं.
उस की चूचियाँ उस के सीने पे पूरी तरहा फूल और पिचक रही थी. मम्मी उस
के सिर मे हाथ फैरने लगी.
"मम्मी भाई जान से कहो अपना लंड मेरी चूत से निकाले नही तो मे मर जाऊं
गी. आ आ." शुमैला ने मम्मी की तरफ देखते हुए कहा.
"बेटी यही दर्द तो लड़कियों को वह मज़ा देता है जिसके लिए लड़कियाँ कुच्छ भी
कर सकती हैं. तुम बहुत खुशनसीब हो जो तुमको तुम्हारा भाई ही तुम्हे यह
पहला दर्द दे रहा है. अभी मज़ा आएगा. अब कुछ नही हो गा. पहली बार होता है
मुझे भी हुआ था. ये बर्दाश्त कर लो तो समझो बोहत मज़ा आए गा, ज़रा सी देर
और." मम्मी ने शुमैला के बालो मे हाथ फेरते हुए उस समझाइया.
"नही, नही!!! बाकी फिर कभी इसे कहो निकाल ले,आह आह आहह!!" शुमैला ने सिर
हिलाते हुए कहा.
"अरे बेटी क्या कर रही है. अभी जब मज़ा आएगा तब देखना." मम्मी ने उसकी
चूचियों को सहलाते कहा.
"नही मम्मी आपने कहा था कि आप भाई जान से चुदवाकर मुझे दिखाइंगी. अब आप
ही चुद्वाइये भाई जान से, मुझे छ्चोड़ो." शुमैला तड़प्ते हुए बोली.
"अच्छा मे कुछ केरती हूँ!" ये कहती हुई मम्मी मेरे पास आई. मे आधा लंड
शुमैला की टाइट चूत मे फँसाए हुए वहीं झुका हुया था. मेरा अपना
वज़न मेरे हाथो पर था जो शुमैला की साइड मे बेड पे रखे थे.
"बेटा जब मे इस की किस्सिंग करने लगूँ तो तुम ऐक ही झटके से पूरा अंदर
कर देना और वहीं रुके रहना समझे." मम्मी ने मेरे कान मे सरगोशी की और
खुद जा कर शुमैला के होंठो को चूमने लगी.
इतने मे शुमैला का दर्द कुछ कम हो गया. उसे मम्मी की किस्सिंग का मज़ा आने
लगा और अपनी चूत मे फँसे हुए मेरे लंड का भी मज़ा लेते उसने ज़रा सा
अपनी गांद को उठाया. मे समझ गया कि यही टाइम है और मेने ज़ोर का झटका
दिया कि मेरा पूरा लंड शुमैला की ऊट मे घुस गया और मेरी हल्की हल्की
झांते शुमैला के सॉफ सुथरे प्यूबिक एरिया से जा लगीं और मे वहीं रुक
गया. मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा लंड किसी टाइट से शिकंजे मे फँस
गया है. शुमैला के मुँह से निकली हुई चीख मम्मी के मुँह मे ही रह गई.
वह अपना सर ज़ोर से दाई बाईं करने लगी. उस की आँखूं से आँसू निकलने
लगे. उसे महस्सूस हो रहा था कि जैसे उस की चूत मे आग लग गई हो कोई
दहकता हुआ लोहे का रोड उसकी चूत के अंदर घुसा दिया गया हो. मम्मी उस को
चूमे जा रही थी और हाथो से शुमैला की चूचियों को दबा भी रही थी
कुछ देर मे शुमैला का दर्द कम हुआ और वह कुच्छ संभल गई. उस ने ऐक ज़ोर
की साँस ली और बोली, "आअहह मम्मी मुझे तो भाई जान ने मार ही डाला था."
"बेटी अब दर्द कम हुआ ना?"
"हां अब ठीक है." शुमैला अब खुश थी.
"बेटा अब तुम अपना लंड हल्के हल्के अपनी बहन की चूत मे अंदर बाहर करो."
मम्मी ने मुझसे कहा और मे अपने लंड को शुमैला की चूत मे आहिस्ता आहिस्ता
अंदर बाहर केरने लगा.
इससे मुझे और शुमैला को मज़ा आने लगा. शुमैला की सिसकियाँ फिर से गूंजने
लगी. उस ने आँखे बंद कर लीं. मेने भी आँखे बंद कर लीं. मे आज
बहुत मस्त था. मम्मी की चूत चुदि और फैली थी पर शुमैला की तो कुँवारी
थी और बहुत ही कसी और गरम थी. मेरे लंड से मेरी बहन की चूत मे मेरी
ज़ुबान और उंगली ही गयी थी. जाने कब मेरे धक्को मे तेज़ी आ गई. हम दोनो को
ही पता ना चला लेकिन अब दर्द नही केवल मज़ा और सरूर था.
"हां हां हाआअँ और तेज़ तेज़ हा हा हा आ आ, हहाायी ऊओ आह
भाई जान हहान और तेज़." हर झटके के साथ
शुमैला के मुँह से ऐक लफ्ज़ निकल रहा था.
मम्मी शुमैला के पास से हट गई और साथ लेट कर दोनो की चुदाई देखने लगी.
मम्मी के होंठो पे मुस्कान थी. मेने हाथ बेड से हटा लिए और मे शुमैला
पे गिर गया और उसके होंठ चूसने लगा. अब धक्कों मे काफ़ी तेज़ी आ गयी थी.
मेरा लंड शुमैला की गीली चूत मे आराम से आ जा रहा था. मेरे हर झटके
मे मेरे बाल शुमैला की चूत को छू जाते थे. मेरे टेस्टिकल्स शुमैला के
कूल्हों को छू जाते. दोनो पसीने मे नहा गये थे जिस से कमरे मे फूच
फूच की आवाज़े आ रही थीं. दोनो मस्ती मे चूर ऐक दूसरे को खूब जोश से
चोद रहे थे और मम्मी हमारे पास लेटी हमारी चुदाई देख खुश हो रही थी.
वह आज बहुत खुश थी बेटी को बेटे से चुदवाकर. मे भी अपनी बहन को चोद
बहुत मस्त था.
"आमिर बेटा अंदर ही मत झाड़ जाना. झड़ने से पहले अपना लंड बाहर निकाल लेना."
मम्मी ने मुझे देखते हुए कहा.
"ओके!" मेने ने तेज़ी से झटके लगाते हुए कहा और फिर कुच्छ देर बाद मेने
अपने लंड शुमैला की चूत से निकाल लिया और साथ मे शुमैला की चूत पर
झड़ने लगा.
"आआआअ!!!!!!!!!!!!!" मेरे मुँह से एक तेज़ सिसकारी निकली और मेरा गर्म गर्म पानी
शुमैला की चूत पे और फव्वारे की तरह उसके पेट और चूचियों पे भी गिरा.
मैं तो झाड़ा ही साथ ही शुमैला की चूत ने भी मेरा लंड बाहर आते ही बहुत
सा पानी छोड़ दिया. वह भी ऐक बार फिर झड़ने लगी और उस ने अपनी टांगे जो
काफ़ी देर से हवा मे थीं बेड पे रख लीं और मे झड़ने के बाद उसके उपर
ही लेट गया. शुमैला मेरे होंठो को चूमने लगी.
"आअहह भाई जान बहुत शुक्रिया." वह मुझसे बोली.
"शुमैला तुम्हारा भी शुक्रिया." मेने आँखे बंद केरते हुए कहा और दोनो
अपनी साँसे हल्की करने लगे.
काफ़ी देर यूँ ही लेटे रहने के बाद मेने करवट ली और फिर दोनो के दरमियाँ लेट
गया तो मम्मी ने मेरा चेहरा अपनी ओर करते कहा "अब खुश है मेरा राजा बेटा?"
मेने मम्मी के होंठो को जोश से चूम लिया तो मम्मी मुझसे बोली, "ये था तुम्हारे
इतने दिनो का इनाम. अपनी मम्मी की चुदि पुरानी चूत और गांद मारने के बदले
तुमको अपनी बहन की ताज़ी कसी अन्चुदि चूत मिली है." फिर हाथ बढ़ा शुमैला
की एक चूची को पकड़ हल्के से सहलाते कहा, "हाई शुमैला तुम ठीक तो हो ना?"
"हां! मम्मी भाई जान ने तो मेरी फाड़ ही डाली." शुमैला ने हस्ते हुए कहा तो
हम तीनो हस्ने लगे.
"लेकिन मम्मी मज़ा बहुत आया." शुमैला ने छत की तरफ देखते हुए कहा और
उस ने हाथ बढ़ा कर मेरा लंड पकड़ लिया.
मेरा लंड फिर से सेमी एरएसेट हो चुका था. लंड पकड़ते ही उसके मुँह से निकला,
"हाई माँ! ये तो फिर से खड़ा हो रहा है." और फिर तीनो की हँसी निकल गई.
"बेटी इसीलिए तो कह रही थी कि बाहर के लड़के से ख़तरा तो रहता ही है मज़ा
भी पूरा नही आता. घर पर जब तक चाहो चुद्वाति रहो. बाहर वक़्त नही मिलता
जल्दी और घर पर भाई के साथ ही रात भर लेटो. अब ये तुम्हारा है अब इस से
खूब मज़े करो कियूं बेटा?" मम्मी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.
"हां मम्मी अब यह जब चाहे मेरा लंड अपनी चूत मे ले सकती है." कहते हुए
करवट ले कर मम्मी की चूचियों को चूमा और दोनो चूचियों को दोनो हाथो
मे पकड़ लिया.
"मम्मी अब आप को चोदुन्गा." मेने मम्मी की तरफ देखते हुए कहा.
"हां बाबा करेंगे लेकिन अभी मेरे यहाँ का दरवाज़ा बंद है." मम्मी ने
शलवार के उप्पेर से अपनी चूत पे हाथ लगाते हुए कहा.
"क्या मतलब? मे समझा नही यहाँ दरवाज़ा भी होता है क्या?" मेने हैरान
होते हुए पूछा और दोनो लोग हसणे लगीं.
"आरएे बोधु! लड़कियो को हर महीने मे यहाँ से ब्लड आता है जोकि गंदा
होता है और इस दौरान चुदाई नही केरते ये और 6/7 दिन आता रहता है. समझे!"
मम्मी ने उसे समझाइया.
"क्या ब्लड! लेकिन इस से कुछ होता नही क्या हर लड़की को आता है?" मेने
परेशान होते हुए पूछा.
"हां हर लड़की को आता है, थोड़ा दर्द होता है कमर मे लेकिन और कुछ नही
होता ये क़ुद्रत का नियम है. आजकल मेरे आ रहा है. जब तक मेरे आए तू अपनी
बहन को चोद कुच्छ दिनो के बाद तेरी बहन को आएगा तब तू मेरी चोद्ना." मम्मी
ने जवाब दिया.
"सब लड़कियो को ऐक साथ नही आता है ये! सब के अपने हिसाब से दिन होते
हैं." मम्मी ने मेरे गाल पे हल्की सी चपत लगाते हुए कहा.
"तुम्हारे कब आएगा शुमैला?" विकी ने कुछ सोचते हुए शुमैला से पूछा.
"आएगा तो बता दूँगी! बेशरम कहीं के." शुमैला ने मुस्कुराते हुए जवाब
दिया और करवट ले कर मुँह हम दोनो की तरफ कर लिया.
"अछा चलो अब जाओ अपने अपने कमरे मे और मुझे सोने दो." मम्मी ने मुझसे
कहा. "हां अब तो तुम दोनो को चुदाई का पहला मज़ा मिल गया ना अब तो शुमैला
नही शरमाएगी तू अपने भाई का लंड लेने मे." मम्मी ने पूछा.
"मज़ा! मम्मी भाई जान ने तो मेरी फाड़ दी है." शुमैला ने मुस्कुराते हुए कहा.
"हे शुमैला क्या फाड़ दी है?" मेने शुमैला की तरफ झुकते हुए पूछा.
"वोही मेरी शरम और क्या बेशरम कहीं के" शुमैला ने प्यार से कहा.
"क्या कहते हैं इस को बताओ ना शुमैला?" मेने फिर कहा.
"चलो भाई जान तुम तो पक्के बेशरम हो गये हो." शुमैला ने कहा.
"अच्छा अभी तो खूब बोल रही थी जब चुद रही थी. अब शर्मा रही है. प्लीज़
ऐक बार."
"चल अब जाता है अपने कमरे मे या नही?" मम्मी ने नकली गुस्सा दिखाया.
"मम्मी आप जाओ ना अपने कमरे मे मे शुमैला के साथ ही सोउँगा." मेने
शुमैला की चूचियों को पकड़ते कहा.
"हां मम्मी अब मे रोज़ रात को भाई जान के साथ ही सोया करूँगी. भाई जान अब
आप रोज़ाना मेरे रूम मे ही सोया करिएगा."
"नही मे तुम्हारे रूम मे नही बल्कि तुम मेरे रूम मे सोओगी."
"क्यों भाई जान." शुमैला ने अपनी चूचियों को देखते कहा.
"क्योंकि जैसे शादी के बाद लड़की अपने शौहर के घर जाती है वैसे ही तू अब
मेरे कमरे मे आया करेगी.
ठीक है बेटा तुम लोग जैसे चाहे रहो पर मुझे ना भूल जाना." मम्मी ने
कहा.
"ओह्ह नही मम्मी भाई जान पहले आपको चोदेन्गे फिर मेरी लेंगे. और जब चाहे आप
हमलोगो के साथ रात भर मज़ा लीजिएगा." शुमैला ने खुश होते कहा.
"ठीक है बेटा अब मे जा रही हूँ और तुम दोनो भी जल्दी सोना, एक दिन मे ही
सारा मज़ा ना ले लेना."
"ओह्ह मम्मी बस एक बार और चुद्वाउन्गि भाई जान से."
"ठीक है बेटी." और मम्मी चली गयी.
मम्मी के जाते ही शुमैला मेरे ऊपर गिरती बोली, "भाई जान हाय आज तो आपने
बहुत मज़ा दिया. सच चुद्वाने का मज़ा सबसे ज़्यादा हसीन है. भाई जान अब पहले
मेरी चूत को चाटो और अपना मस्त लंड भी पिलाओ और फिर खूब कसकर चोदो.
हाई आज रात भर मज़ा लूँगी भाई जान."
"हां यार मे भी तेरी चाटना चाहता था. सच तेरी चूत का टेस्ट बहुत
जायकेदार है. चल आ बैठ मेरे मुँह पर."
फिर वह मेरे ऊपर अपनी चूत रख बैठ गयी. तो दोस्तो ये कहानी यही ख़तम होती है फिर मिलेंगे एक ओर नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा
दा एंड
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