मा बेटा और बहन -2

 


होंठो को चूमने पर वह और मस्त हुई तो मेने उसके होंठो को अपने मुँह मे


लेकर खूब कसकर चूसा. 3-4 मिनट होंठ चूसने के बाद अलग हुआ तो वह


हाँफती हुई बोली, "ऊऊहह आआहह स भाई जान आहह बहुत अच्छा लगा हाई


भाई जान इनको मुँह से करो."


"क्या करें?"


"भाई जान मेरी चूचियों को मुँह से चूस चूस कर पियो."


मे खुश होता बोला, "लाओ पिलाओ अपनी चूचियों को."


फिर मे उसको अलग कर लेट गया तो वह उठी और मेरे ऊपर झुक अपनी एक चूची


को अपने हाथ से पकड़ मेरे मुँह मे लगा बोली, "लो भाई जान पियो इनका रस्स."


मे उसकी चूची को होंठो से दबा दबा कसकर चूस रहा था. वह अपने हाथ


से दबा पूरी चूची को मेरे मुँह मे घुसाने की कोशिश कर रही थी. 3-4


मिनट बाद उसने इसी तरह दूसरी चूची भी मेरे मुँह मे दी. दोनो को करीब


दस मिनट तक चुसाती रही और मे उसकी गांद पर हाथ लगा उसके चुतर


सहलाता पीता रहा.


फिर वह मुझे उठा मेरी गोद मे पहले की तरह लेट गयी और फिर मेरे हाथ को


अपनी एक चूची पर लगा दबाने का इशारा किया. मे दबाने लगा तो उसने मेरे


चेहरे को पकड़ अपनी दूसरी चूची झुकाया. मे उसका मतलब समझ उसकी एक


चूची को मसलने लगा और दूसरी को पीने लगा. वह अब मुझे ही देख रही थी. वह


मेरे सर पर हाथ फेर रही थी.


वह मेरे कान मे फुसफुसा भी रही थी, "हहाअ आहह हाई भाई जान बहुत अच्छा


लग रहा है हाउ आप कितने अच्छे हैं."


"तू भी बहुत अच्छी है."


"भाई जान एक बात तो बताओ? अभी जब आपसे खाने को पूछा था तो आप किनका


रस पीने को कह रहे थे?"


"जिनका रस पी रहा हूँ, तेरी चूचियों का."


"हाई भाई जान आप कितने वो है."


तभी किचन से मम्मी की आवाज़ आई वह शुमैला को बुला रही थी.


शुमैला हड़बड़ाकर उठा बैठी और अपने कपड़े ठीक करती बोली, "जी मम्मी."


"बेटी क्या कर रही हो?"


"कुच्छ नही मम्मी आ रही हूँ." वह बहुत घबरा गयी थी और मुझसे बोली,


"हाई भाई जान दरवाज़ा खुला था कहीं मम्मी ने देख तो नही लिया?"


"नही यार वह तो किसी काम से बुला रही हैं?"


"बेटी अगर फ्री हो तो यहाँ आओ."


"आई मम्मी." और वह चली गयी तो मे भी साँसे दुरुस्त करने लगा.


अपनी बहन की चूचियों का रस पीकर तो मज़ा ही आ गया था. मे फिर जल्दी


से किचन के पास गया. मम्मी रोटी सेक रही थी. शुमैला उनके पास खड़ी हुई.


वह अभी भी तेज़ी से साँसे ले रही थी.


मम्मी उसे देखकर बोली, "क्या हुआ बेटी, तू थकि लग रही है?"


"नही तो मम्मी मे ठीक हूँ."


"क्या देख रहे थे तुम लोग?"


"फिल्म मम्मी, मम्मी बहुत अच्छी फिल्म थी."


"अच्छा अच्छा बेटी तुम्हारे भाई जान कहाँ हैं?"


"वह तो अभी टीवी ही देख रहे हैं. मम्मी कुच्छ काम है क्या?"


"नही बेटी क्यों?"


"मे जाउ टीवी देखने भाई जान अकेले बोर हो जाते हैं."


"बहुत ख्याल रखती है अपने भाई जान का. जा देख जाके भाई के साथ. मुझे अभी


10 मिनट और लगेगें."


वह खुश हो जल्दी से बाहर निकली तो मेने उसे पकड़ अपनी गोद मे उठाया और टीवी


रूम मे ले आया. वह मेरे गले मे बाँहें डाले मुझे ही देखे जा रही थी.


अंदर आ मे बैठा और उसे अपनी गोद मे बिठा उसके होंठो को चूम उसकी दोनो


चूचियों को दबाने लगा. दो मिनट बाद उसके बटन खोलना चाहा तो वह बोली,


"नही भाई जान बटन ना खोलो ऐसे ही करो . मम्मी आ सकती हैं."

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साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,

मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ .. 

मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,, 

बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ 

(¨`·.·´¨) Always 

`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving & 

(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !

`·.¸.·´ -- raj sharma

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rajsharma

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Re: मा बेटा और बहन

Post  11 Oct 2014 22:54


मे उसकी चूचियों को मसल उसे मज़ा देते बोला, "यार नंगी पकड़ने मे ज़्यादा


मज़ा आता है."


"ओह्ह भाई जान अभी नही खाने के बाद मम्मी तो 2 घंटे के लिए सो जाती हैं तब


आपको जी भरके नंगी पिलाउन्गि. भाई जान ब्रा अलग कर दीजिए फिर कमीज़ के अंदर


हाथ डालकर पकडिए."


"तू कितनी समझदार है."


फिर मेने उसकी ब्रा खोलकर अलग कर दी तो उसने ब्रा को कुशन के नीचे च्छूपा


दिया फिर अपनी कमीज़ को ऊपर उठाया और मेरे हाथों को अंदर किया. मेने उसकी


दोनो चूचियों को पकड़ लिया और दबा कर उसके होंठ, गाल गले पर चूमने लगा..


वह अपने हाथ पिछे कर मेरे गले मे डाले अपनी चूचियों को देख रही थी.


तभी किचन मे कुच्छ आहट हुई तो वह मेरे हाथ हटाती बोली, "अब रहने दो


भाई जान मम्मी आने वाली हैं."


मे जानता था मम्मी कुच्छ नही कहेंगी लेकिन फिर भी मेने उसे छोड़ दिया तो


उसने अपने कपड़े ठीक किए और अलग होकर बैठ गयी. एक मिनट बाद मम्मी आई


और शुमैला के पास बैठ गयी. वह मुझे देख मुस्काराई तो मे भी मुस्काराया


और इशारा किया कि काम बन गया.


तभी मम्मी ने कहा, "बेटा तुम लोग खाना खाओगे?"


"खा लेते है मम्मी आपको आराम भी करना होगा." शुमैला बोली.


"चलो फिर खाना खा लिया जाए."


तब शुमैला उठकर गयी तो मम्मी मुझसे बोली, "क्या किया बेटा?"


"मम्मी बहुत मस्त है शुमैला की दोनो चूचियाँ, हाई मम्मी दोनो का खूब रस


पिया."


"ठीक है खाना खा लो फिर मे सोने का बहाना कर अपने रूम मे चली जाउन्गि


तब तुम यही फिर करना लेकिन बेटा नीचे हाथ लगाया या नही?"


"अभी नही मम्मी."


"ठीक किया, नीचे वाला माल रात मे ही चूना. आज रात तुम्हारी और शुमैला


की है. अभी एक दो घंटे उसकी चूचियों का मज़ा ही लो. रात मे नीचे का.


अगर अभी नीचे वाली को कुच्छ किया तो वह बेचैन हो जाएगी और चुदाई का असली


मज़ा रात मे ही है. उसे अपना दिखाया या नही?"


"अभी नही मम्मी."


"अब उसे अपना दिखाना और मान जाए तो उसके मुँह मे भी देना. अगर ना माने तो


कोई बात नही मे सीखा दूँगी मुँह मे लेना."


फिर हम सब खाना खाने लगे. खाने पर वह मुझे देख रही थी. खैर खाने के


बाद वह बर्तन सॉफ करने लगी. मे टीवी देखने जाता बोला, "शुमैला मे टीवी


देखने जा रहा हूँ अगर तुमको देखना हो तो आ जाना."


"ठीक है भाई जान आप चलिए मे अभी आती हूँ. बर्तन धोकर कपड़े बदल


लूँ फिर आती हूँ. इन कपड़ो मे परेशानी होती है."


"हां बेटी जाओ बर्तन सॉफ करके भाई जान के साथ टीवी देखना और मुझे डिस्टर्ब ना


करना. मे दो घंटे सोउंगी. और शुमैला बेटी घर मे इतने कसे कपड़े ना


पहना करो. जाओ कोई ढीला सा स्कर्ट और टी-शर्ट पह्न लो." मम्मी तो सोने की बात


कह चली गयी.


मे टीवी देखने लगा. 10 मिनट बाद शुमैला आई तो उसे देख मे दंग रह


गया. लाल रंग का स्कर्ट और वाइट टी-शर्ट मे उसने मेक- अप किया हुआ था.


होंठो पर स्किन कलर की लिप स्टिक थी और पर्फ्यूम से उसका बदन महक रहा था.


मे उसे देखता रहा तो वह मुस्कराते हुए बोली, "भाई जान क्या देख रहे हो?"


"देख रहा हूँ कि मेरी बहन कितनी खूबसूरत है."


"जाइए भाई जान आप भी, मुझे टीवी देखना है."


फिर वह आकर मेरे पास बैठी. उसके बैठने पर मेने उसे देखा और मुस्कराते


हुए उसके हाथो को पकड़ा तो वह अपना हाथ छुड़ा उठकर आगे सिंगल बेड पर


लेट गयी. मे सोफा पर बैठा उसे देखता रहा. उसकी चूचियाँ ऊपर को तनी


हुई थी. टी-शर्ट छ्होटी थी जिससे उसका पेट दिख रहा था. स्कर्ट भी घुटनो से


ऊपर था. वह टीवी की तरफ देख रही थी. तभी उसने अपने पैर घुटनो से मोदे तो


उसका स्कर्ट उसकी कमर पर आ गया और उसकी चिकनी गोरी गोरी राने दिखने लगी.


वह अपनी चिकनी राने दिखाती अपने हाथों को अपनी चूचियों पर बाँधे थी.


8-10 मिनट तक वह ऐसे ही रही.


फिर वह मेरी ओर देख बोली, "भाई जान यह अच्छी फिल्म नही है, मे बोर हो रही


हूँ."


मे उठकर उसके पास जाकर बैठा और उसकी कमर पर हाथ रख बोला, "शुमैला


इस वक़्त कोई अच्छा प्रोग्राम नही आता." और कमर पर हल्का सा दबाव डालता बोला,


"एक घंटे बाद एक अच्छा प्रोग्राम आता है."


"ओह्ह भाई जान तो एक घंटे तक क्या करें?"


"अरे यही प्रोग्राम देखते हैं ना, आओ सोफे पर चलो ना वही बैठकर देखते


हैं दोनो लोग." मेने उसका हाथ पकड़ उसकी नशीली हो रही आँखों मे झाँकते


कहा.


वह मुझे रोकती बोली, "भाई जान मे यही लेटकर देखूँगी, थक गयी हूँ ना आप


भी यही बैठिए ना."


मेने उसे मुस्करा कर देखा और कहा, "ठीक है शुमैला तुम सच मे थक गयी


होगी बर्तन धोकर." और उसकी कमर के पास ही बैठ गया.


अभी मे चुप बैठा था. वह टीवी देखते देखते एक दो बार मुझे भी देख लेती


थी. 4-5 मिनट बाद उसने करवट ले ली तो उसकी पीठ और चूतर मेरी तरफ हो


गये. अब मे भी आगे कुच्छ करने की सोच धीरे से उसके साथ ही लेट गया और


अपना हाथ उसके ऊपर रखा. हाथ उसके ऊपर रखा तो उसने चेहरा मोड़ मुझे


देखा और मुझे अपनी बगल मे लेटा देख मुस्काराकार बोली, "क्या हुआ भाई जान


आप भी थक गये हैं?"


"हां शुमैला सोच रहा था थोडा लेटकर आराम कर लूँ."


"ठीक है भाई जान लेटीये ना, आज तो वैसे भी कोई काम नही है."


कुच्छ देर लेटा रहा फिर धीरे धीरे उसकी स्कर्ट को ऊपर खिसकाने लगा. वह चुप


रही और थोड़ी ही देर मे उसका स्कर्ट ऊपर कर दिया और उसकी पैंटी दिखने लगी.


कुच्छ देर बाद जब उसकी पैंटी को खिसकाना चाहा तो उसने मेरे हाथो को पकड़


लिया और टीवी देखती रही. मे समझ गया कि वह शर्मा रही है. मेने सोचा


ठीक है रात मे देखूँगा नीचे वाली, अभी चूचियों का ही मज़ा लिया जाए.


फिर हाथ को उसकी टी-शर्ट के पास लाया और आगे कर उसकी एक चूची को पकड़ा.


वह चुप रही तो फिर मे धीरे धीरे दबाने लगा. दोनो चूचियों को 4-5 मिनट


तक दबाया फिर उसकी टी-शर्ट को ऊपर करने लगा तो उसने मेरी हेल्प. दोनो


चूचियों को टी-शर्ट से बाहर कर दिया था. वह ब्रा पहले ही उतार चुकी थी.


चूचियों को नंगी करने के बाद उसका कंधा पकड़ अपनी तरफ किया तो वह चुप


चाप सीधी होकर लेट गयी. उसकी आँखें बंद थी और मे उसकी तनी तनी


चूचियों को देख रह ना सका और झुककर एक को मुँह मे ले लिया. अब मे दोनो


चूचियों पर जीभ चला चला चाट रहा था. मे अपनी बहन की दोनो


चूचियों को चूस नही रहा था बल्कि चाट रहा था.




जब 6-7 मिनट तक चाट्ता रहा तब वह भी मस्ती से भर गयी और अपनी एक


चूची को अपने हाथ से पकड़ मेरे मुँह मे घुसेड़ती फुसफुसाकर बोली,


"भाई जान."


"क्या है शुमैला?"


"ववव आह इनको...."


"क्या बताओ ना तुम तो बहुत शरमाती हो."


"भाई जान इनको मुँह से चूस्कर पियो जैसे खाने से पहले कर रहे थे." वह


शरमाते हुए बोली.


"तुमको अच्छा लगा था अपनी चूचियों को अपने भाई को चूसाने मे?"


"हां भाई जान बहुत मज़ा आया था, और पियो इनको."


"पगली, शरमाया मत कर. अगर तुझे अपनी इस मस्त जवानी का मज़ा लेना हो तो


शरमाना नही. चलो खुलकर इनका नाम लेका कहो जो कहना है."


"भाई जान हाई पियो हाई पियो अपनी बहन की चूचियों को." और शरमाते हुए


बोली, "ठीक है ना भाई जान?"


"बहुत अच्छे चलो एक काम करो यह सब कपड़े अलग करो अड़चन होती है."


"नही भाई जान पूरी नंगी नही."


"अरे देख तेरी मस्त चूचियाँ मेरे सामने है ही फिर क्या?"


"नही भाई नीचे नही उतारुन्गि."


"अच्छा चलो पैंटी पहने रहो और सब उतार दो."


"मम्मी ना आ जाएँ दरवाज़ा बंद कर लो."


"अरे अगर दरवाज़ा बंद कर लिया तो मम्मी कुच्छ ग़लत समझेंगी. डरो नही मम्मी


कम से कम 2 घंटे बाद ही उठेंगी."


तब उसने अपनी टी-शर्ट और स्कर्ट अलग कर दिया और केवल पैंटी मे ही लेट गयी.


फिर मे उसकी एक चूची को मसल दूसरी को चूसने लगा. 20-25 मिनट


मे ही वह एकदम मस्त हो चुकी थी तब मेने कुच्छ आगे ट्राइ करने की सोचा.


"शुमैला."


"जी भाई जान."


"मज़ा आया ना."


"जी बहुत आहह, आप कितने अच्छे हैं."


"और चूसू कि बस?"


"अब बस भाई जान अब कल फिर."


"क्यों रात मे नही पिलाओगी अपनी चूचियों को?"


"रात मे कैसे?"


"मे चुपके से तुम्हारे रूम मे आ जाउन्गा."


"ओह्ह भाई जान फिर तो मज़ा आ जाएगा, हाई मे तो रात भर आपको पिलाउन्गि."


"पर मेरा भी तो एक काम करो."


"क्या भाई जान?"


"देखो मेने तुमको इतना मज़ा दिया है ना इससे मेरा यह बहुत परेशान हो गया


है. तुम अपने हाथ से इसे थोड़ा प्यार करो तो इसे भी क़रार आ जाए." और अपने


लंड पर हाथ लगाया.


वह यह देख शरमाने लगी तो मेने उसके हाथ को पकड़ अपने लंड पर रखते


कहा, "अरे यार तू शरमाती क्यों है."


"नही भाई जान नही मे इसे नही पकडूँगी." और उसने अपना हाथ हटा लिया.


"क्या हुआ जान?"


"भाई जान आपको जो करना हो कर लो मे इसे नही पाकडूँगी मुझे डर लगता है."


"अच्छ ठीक है चल तू ज़रा अपनी चूचियों को मेरे मुँह मे दे."


फिर मे सीधा लेट गया और वह मेरे पास आ अपनी चूचियों को पकड़ मेरे मुँह


मे देने लगी. मेने उसकी चूचियों को चूस्ते हुए अपनी पॅंट को अलग किया फिर


अंडरवेर को खिसका लंड बाहर किया. लंड बाहर कर अपने हाथ से लंड सहलाने


लगा. मेने देखा कि शुमैला की आँखें मेरे लंड पर थी. 2-3 मिनट बाद


शुमैला से कहा, "शुमैला मेरी बहन हाई मेरा लंड सूखा है ठीक से हो


नही रहा प्लीज़ इस पर अपना थूक लगा दो तो यह चिकना हो जाएगा और आराम से


कर लूँगा."


वह कुच्छ देर सोचती रही फिर धीरे से मेरे पैरों के पास गयी और झुककर मेरे


लंड पर खूब सा थूक उंड़ेल दिया. थूक लगा वह फिर मेरे पास आई तो मे


लंड सहलाते बोला, "हां शुमैला अब सही है तुम्हारा थूक बहुत चिकना है.


आहह चुसाओ अपनी हाई तुम्हारी चूचियों को पीकर मूठ मारने का मज़ा ही कुच्छ


और है."


मे उसकी चूचियों को चूस अपनी मूठ मारता रहा फिर थोड़ी देर बाद बोला,


"शुमैला हाई ऐसे नही निकलेगा प्लीज़ एक काम करो"


"जी बताएँ भाई जान."


"यार अपने हाथ से नही होता और तू करेगी नही, तुम प्लीज़ अपनी पैंटी उतारकर


मुझे दे दो ना."


"नही नही हाई नही भाई जान."


"पगली मे तुमको देखूँगा नही बस अपनी पैंटी दे दो. क्या मेरे लिए इतना भी


नही करोगी."



तब उसने कुच्छ सोचते हुए अपने स्कर्ट के अंदर हाथ डाला और फिर पैंटी उतारी


और मेरी ओर कर दी. मेने पैंटी पकड़ी और उसे सूंघते हुए उसे मस्त करने के


लिए कहा, "हाई शुमैला मेरी बहन कितनी मस्त और नशीली खुश्बू आ रही है


तुम्हारी पैंटी से हह आह अब तुम्हारी पैंटी को प्यार करूँगा तो मेरा निकलेगा.


फिर उसकी पैंटी को दो-चार बार नाक पर लगा सूँघा और फिर उसे दिखाते हुए


उस जगह को खोला जहाँ पर उसकी चूत होती है. उस जगह को देखा तो वह कुच्छ


पीली सी थी. मेने उस पीली जगह को उसे दिखाते कहा, "शुमैला देखो तुम्हारी


पैंटी यहाँ पीली है, शायद यहाँ पर तुम्हारा पेशाब लग जाता होगा."


वह शर्मकार नीचे देखने लगी तो मेने आगे कहा, "सच शुमैला तुम्हारी चूत


की खुश्बू इस पैंटी से कितनी प्यारी आ रही है. हाई इसे चाटने मे बहुत मज़ा


आएगा."


फिर मे उसकी पैंटी को मुँह मे ले चूसने और चाटने लगा तो वह हैरानी से


मुझे देखने लगी. कुच्छ देर चाट कर बोला, "शुमैला लग रहा है जैसे सच


मे तुम्हारी चूत चाट रहा हूँ."


वह और ज़्यादा शर्मा गयी तब मेने दो टीन बार और पैंटी को चाता फिर उसकी


पैंटी से अपने लंड को रगड़ते हुए कहने लगा, "ले हाई ले शुमैला की पैंटी पर


ही निकल जा हाई यह तो मेरी सग़ी और छ्होटी बहन है यह तुमको अपनी चूत नही


देगी. हाई जब यह मेरा पकड़ नही रही है और मुझे अपनी चटा नही रही है


तो तुझे कैसे देगी."


और फिर मे तेज़ी से झड़ने लगा. खूब पानी निकला था जिसे वह देख भी रही


थी और शर्मा भी रही थी. जब मे झाड़ गया तो उसे पकड़ उसके होंठ चूमकर


बोला, "थॅंक यू शुमैला अगर तुम अपनी पैंटी ना देती तो मेरा निकलता नही और


मुझे मज़ा नही आता. प्लीज़ अब तुम अपनी सभी गंदी पैंटी मुझे दे दिया करना."


वह कुच्छ बोल्ड हो बोली, "भाई जान गंदी क्यों?"


"अरे जो पहनी हुई होगी उसी मे तो तुम्हारी चूत की मस्त खुश्बू होगी ना."


वह फिर शर्मा गयी और धीरे से बोली, "हाय चलिए, भाई जान थोड़ा सा और


चूस दीजिए ना."


तब मेने फिर उसकी चूचियों को 10 मिनट तक और चूसा फिर उससे बोला, "जा


देखकर आ मम्मी सो रही हैं ना."


वह गयी और थोड़ी देर बाद आ बोली, "हां भाई जान सो रही हैं मम्मी."


"शुमैला मेरी जान तुम्हारी चूचियाँ बहुत अच्छी हैं, इनको चूस्कर मज़ा आ


गया यार ज़रा सा अपनी नीचे वाली भी चटा दो ना."


"हाई भाई जान नही नही यह ठीक नही है."


"अरे यार तुम डरो नही बस केवल देखूँगा और एक बार चाटूँगा फिर कुच्छ नही


करूँगा. प्लीज़ शुमैला."


"भाई जान आप नही मानते तो मे आपको केवल दिखा सकती हूँ लेकिन छूने नही


दूँगी, बोलिए?"


"ओके, ठीक है, दिखाओ हाई देखें तो मेरी बहन की चूत कैसी है हाई जिस


चूत की खुश्बू इतनी प्यारी है वह देखने मे कितनी खूबसूरत होगी?"


वह मेरी बात सुन शर्मा गयी और फिर धीरे से अपने स्कर्ट को पकड़ा और मेरे


सामने खड़ी हो स्कर्ट ऊपर उठाने लगी. मे उसकी चूत देख मस्त हो गया और


लंड तेज़ी से झटके लेने लगा. मे उसकी खूबसूरत चूत देख अपने होंठो पर


जीभ फेरता बोला, "आह शुमैला मेरी जान मेरी प्यारी बहन तुम्हारी चूत बहुत


खूबसूरत है, हाई कितनी प्यारी सी छ्होटी छ्होटी फाँक और कितनी गुलाबी सी


एकदम गुलाब की कली सी चूत है. हाई शुमैला वह कितना खुशनसीब होगा जो इस


कली को फूल बनाएगा. आअह उसे कितना मज़ा आएगा जब वह मेरी बहन की प्यारी सी


चूत पर अपनी जीभ लगा चाटेगा."


वह मेरी इस तरह की बात सुन मस्त हो और कुच्छ शरमाते हुए बोली, "ओह्ह


भाई जान आप कैसी बातें कर रहे हैं? अब देख लिया अब बस अब चलिए आराम से


टीवी देखते हैं."


फिर वह स्कर्ट नीचे कर सामने बेड पर करवट के बल लेट गयी तो मे भी उसके


पिछे लेट उसकी गांद पर लंड सटा उसे अपनी बाँहो मे दबोच लिया. वह


कसमसाई तो मेने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और दबाते हुए उसे मस्त करने


के लिए उसके कान मे फुसफुसाने लगा.


"शुमैला मेरी बहन तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हारी चूचियाँ बहुत कड़क है


और तुम्हारी चूत का तो जवाब ही नही."


वह शरमाती सी बोली, "भाई जान टीवी देखिए ना?"


"ओह्ह देख तो रहा हूँ, हाई शुमैला अगर तुम इज़ाज़त दो तो तुम्हारी चूत को


हाथ से छू कर देख लूँ."


"ओह्ह भाई जान आप भी."


"प्लीज़ शुमैला."


"भाई जान देखिए आप ......ओके भाई जान लेकिन भाई जान अभी नही प्लीज़ अभी टीवी


देखिए रात को जब मम्मी सो जाए तब आप आ जाइएएगा मेरे रूम मे तब आप


देखिएगा भी और छू भी लीजिएगा."


"हाई ठीक है शुमैला, ऊहह हाई रात तक इंतेज़ार करना होगा इस प्यारी चूत


के लिए."


फिर मेने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और उसको मसलता रहा और टीवी देखता


रहा. 15-20 मिनट बाद वह अलग होते बोली, "भाई जान अब हटिए मम्मी उठने वाली


होंगी."


फिर वह उठकर टाय्लेट गयी और वापस आ ठीक से बैठ गयी. फिर मेने भी अपने


कपड़े सही किए और थोड़ी देर बाद मम्मी आ गयी.


मम्मी भी हमारे साथ टीवी देखने लगी. 10 मिनट बाद मम्मी बोली, "शुमैला बेटी


जा चाइ बना ला."


वह गयी तो मम्मी ने मुझसे कहा, "आमिर बेटे कुच्छ काम बना तुम्हारा?"


"मम्मी बहुत काम बन गया."


"अच्छा क्या क्या हुआ?"


"मम्मी आज तो शुमैला की दोनो चूचियों को चूस चूस्कर खूब मज़ा लेकर


झाड़ा और उसकी चूत को भी देखा लेकिन उसने छूने नही दिया."


"अरे तो केवल चूचियों का ही मज़ा लिया अपनी बहन की."


"हां मम्मी वैसे उसने कहा है कि रात को अपने रूम मे बुलाएगी."


"अच्छा ठीक है बेटा तुम उसके कमरे मे जाकर ही मज़ा देना. कोशिश करना कि


तुम उसे आज ही चोद लो, और अगर ना चोद पाओ तो एक काम ज़रूर करना."


"क्या मम्मी?"


"तुम अपनी अंडरवेर उसके रूम मे ही छोड़ देना और अपनी कोई और आइटम भी वही


छोड़ देना बाकी मे देख लूँगी."


"ठीक है मम्मी."


फिर शुमैला चाइ लेकर आ गयी. हम सब चाइ पीने लगे. फिर सब कुच्छ नॉर्मल हो


गया. मे बाहर चला गया.



रात को वापस आया फिर सबलोगो ने खाना खाया और फिर शुमैला बर्तन धोने लगी


तो मम्मी ने मुझसे कहा, "बेटा आज तू अपनी बहन की लेगा, तुझे उसके सामने अपनी


मम्मी तो अच्छी नही लगेगी."


"ओह्ह मम्मी आप कैसी बात करती हो, आप तो पहले हैं और शुमैला बाद मे.


आज आप अकेले सो जाओ आज शुमैला को कोशिश करके चोद लूँ तो फिर कल आपको."


"ठीक है बेटा अगर वह ना माने तो ज़बरदस्ती मत करना, अगर वह डर गयी तो


तुम्हारा काम बिगड़ जाएगा, जितना करवाए उतना करना बाकी मे कल तुम्हारा पूरा


काम बनवा दूँगी."


फिर मम्मी शुमैला से बोली, "बेटी मे सोने जा रही हूँ, तुम बर्तन धोकर


सोना, आमिर बेटा जाओ तुम भी सोओ जाकर."


"आप चलिए मम्मी मे ज़रा टीवी देखूँगा."


फिर मम्मी चली गयी तो मे किचन मे घुस गया और शुमैला के पिछे खड़ा


हो उसकी गांद मे लंड लगाया. वह अपनी गांद को मेरे लंड पर दबाती मुझे


देख मुस्करती बोली, "ओह्ह भाई जान क्या है, जाइए आप टीवी देखिए मे काम कर


रही हूँ."


"तुमको रोका किसने है हाई आज तो मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा दिन था और अब


रात भी सबसे हसीन होगी."


"क्यों भाई जान?"


"हा आहह आज रात मेरी खूबसूरत जवान बहन मेरे साथ बिस्तर पर होगी ना


इसलिए." और उसकी चूचियों को पकड़ा.


"ओह्ह भाई जान चलिए हटिए, आप चलिए मे आती हूँ."


"मेरे साथ ही चलना हाई यार जल्दी धो बर्तन और चलो देख ना यह कितना


तड़प रहा है." और अपने लंड पर हाथ लगाया.


वा मेरी पॅंट को देखते बोली, "ओह्ह भाई जान आप चलिए फिर मेरी चूस्कर इसे


सही कर लीजिएगा."


"तुम तो बस अपनी चूचियों को ही चुस्वाति हो शुमैला यार अब बहुत चूसी है


तुम्हारी चूचियाँ अब अपनी चूत चटवाना." और उसकी चूत छूने की कोशिश की


तो वह मेरा हाथ हटाने लगी.


"भाई जान मुझे अपनी चुसवाने मे बहुत मज़ा आया था." वह मेरा हाथ अपनी


चूचियों पर रखती बोली.


"अरे यार तुम एक बार अपनी चूत को अपने भाई से चटवाकर तो देखो चूचियों


से ज़्यादा मज़ा चूत मे होता है." मेने कसकर चूचियों को मसला.


"भाई जान आप कहते है तो सच होगा लेकिन मुझे बहुत डर लगता है." वह अपनी


चूचियों को देखते बोली.


"अच्छा तू एक बात बता, तुझे अपनी चूत चट्वाने मे क्या डर लगता है?"


"व्व वह वो भाई जान...."


"हां हां बताओ ना."


"ज्ज्ज्जई भाई जान वा मुझे मेरा मतलब है मुझे शरम आती है." उसने सर


झुकाया.


"पगली शरम क्यों लगती है?" मेने उसके चेहरे को हाथो से पकड़ अपनी ओर


किया.


"आप मेरे भाई है ना." उसने यह कहते हुए मुझे देखा और सर फिर झुका लिया.


मे उसके गालो को पकड़ उसके होंठो को चूम बोला, "अरे यार शरमाने की क्या


बात जब चूचियों को चुस्वा चुकी हो और चूत दिखा चुकी हो तो क्या शरम.


चल पगली अब मुझसे शरमाने की कोई ज़रूरत नही. चलो अब चलते है."


फिर मैने उसे गोद मे उठाया तो वह मेरी गोद से उतरते हुए बोली, "ओके भाई जान ठीक


है आप जैसे चाहे वैसे मज़ा लीजिएगा अपनी प्यारी छोटी बहन का पर आप


छोड़िए तो."


"अब क्या है?"


"आप अपने रूम मे चलिए मे वही आती हूँ."


"शुमैला तुम्हारे रूम मे चलते हैं ना?"


"भाई जान मेरे रूम मे अटॅच टाय्लेट नही है, आपके रूम मे टाय्लेट है ना,


वरना टाय्लेट के लिए बाहर आना पड़ेगा."


"अच्छा ठीक है जल्दी आना."


फिर मे अपने रूम मे आया और बेड पर लेट गया और अपनी बहन के आने का


इंतेज़ार करने लगा. मे लेटा हुआ अपनी मम्मी के बारे मे सोच रहा था कि


बेचारी मम्मी आज अकेले तड़प रही होगी. तभी दरवाज़े पर आहट हुई तो मेने


देखा और देखता ही रह गया.


दरवाज़े पर शुमैला खड़ी थी. उफ्फ कितनी हसीन लग रही थी वह. उसके बदन


पर एक सफेद झीना सा छ्होटा कुर्ता था जो उसकी कमर तक ही था और अंदर ब्लेक्ज


ब्रा पहने थी. नीचे भी वह केवल काली पैंटी पहने थी और कुच्छ नही. उसने


मेक-अप भी किया था. होंठो पर लाल लिपस्टिक थी और आँखों मे काजल और


पर्फ्यूम भी लगी थी. मे उसे पागलों की तरह देखता रहा. अपनी छ्होटी बहन को


तीन सेक्सी कपड़ो मे देख सबकुच्छ भूल गया.


जब मे उसे देखता रहा तो वह मुस्काराकार बोली, "भाई जान अब देखते ही रहिएगा


या अंदर आने को भी कहिएगा."


मे उसकी बात सुन बेड से उतर उसके पास गया और दरवाज़ा बंद कर उसे गोद मे


उठाया और फिर बेड पर लिटाया और उसके पास बैठ उसे देखने लगा. वह इस तरह


अपने आपको देखता पा मुस्कराती हुई बोली, "क्या बात है भाई जान अब देख भी


चुको."


"शुमैला मेरी जान क्या बात है यार इस वक़्त तू बहुत प्यारी लग रही है मन


कर रहा है कि देखता ही रहूं."


"भाई जान अब देखना बंद करिए, कल पूरा दिन देख लीजिएगा, अब जो करना हो


करिए मुझे सोना है और सुबह कॉलेज जाना है."


तब मेने उसके होंठो को कुच्छ देर तक चूसा. वह भी मेरे होंठो को चूस्ति


रही फिर मेने उसके कुर्ते को उतारा और ब्रा को अलग किया तो दिन मे जी भरकर


चूसी गयी दोनो चूचियाँ ऊपर को तनी तनी मुझे ललचाने लगी. मेने दोनो


हाथो से शुमैला की दोनो चूचियों को पकड़ा फिर धीरे धीरे सहलाने लगा.


मे चूचियों को सहलाते हुए शुमैला को देख रहा था. वह भी मुझे ही देख


रही थी और मुस्करा भी रही थी.









मेने उसकी चूचियों को धीरे धीरे सहलाते हुए उसके होंठो को चूमा बोला,


"शुमैला तुम्हारी चूचियाँ बहुत प्यारी है."


वह मुस्काराई और मेरे हाथो पर अपना हाथ रख दबाव ज़्यादा करते हुए बोली,


"भाई जान मेरी चूचियाँ आपके लिए है. लीजिए मज़ा अपनी बहन की चूचियों


का, दबा दबाकर भाई जान."


मेने उसकी चूचियों को 6-7 मिनट तक दबाया और वह बराबर मुझे देखती


रही. फिर वह मेरा हाथ पकड़ बोली, "भाई जान अब बस भी करिए."


"हाई बहुत अच्छा लग रहा है."


"अब फिर दबा लीजिएगा, अब ज़रा इनको मुँह मे लेकर चूसिए ना."


"तुमको चुसवाना अच्छा लगता है?"


"हां भाई जान बहुत मज़ा आया था दिन मे."


"ठीक है जब मन हो तब चुस्वा लिया करना."


फिर झुककर उसकी एक चूची को जीभ से चाटने लगा. कुच्छ देर बाद दूसरी को


भी चाटा और फिर एक को मुँह मे लेकर चूसने लगा. 4-5 मिनट बाद दूसरी को


भी खूब चूसा. वह अब आँखें बंद कर सिसकते हुए मेरा सर अपनी चूचियों


पर दबा रही थी. कुच्छ देर बाद उसके निपल को मुँह मे लेकर जब पीना शुरू


किया तो वह एकदम मस्त हो हाई हाई करने लगी. अब वह अपनी चूचियों को अपने


हाथ से दबा दबा मुझे पिला रही थी.


"हाई भाई जान हाई मेरे प्यारे भाई जान और और हाई बहुत मज़ा है पिलाने मे,


पियो सारा रस पी जाओ."


10 मिनट तक दोनो निपल चूसे फिर मुँह अलग कर उसकी बगल मे लेट गया.


थोड़ी देर मस्ती की लौ मे रहने के बाद उसने आँखे खोल मुझे देखा और


मुस्कराते हुए बोली, "शुक्रिया भाई जान."


"मज़ा आया ना?"


"बहुत हाई आपको मज़ा आया मेरी चूचियों का रस पीने मे?"


"अरे यार तुझे मालूम नही कि जब बच्चा होता है तभी इनमे रस होता है."


"ओह्ह भाई जान मुझे नही पता था. तो क्या आपको मज़ा नही आया?"


"अरे यार मुझे तो बहुत मज़ा आया, मे तो रस के बारे मे बता रहा था,


हां अभी तुम्हारी चूत मे रस ज़रूर होता है, अगर तुम मुझे अपनी चूत का


रस पिला दो तो मुझे मज़ा आ जाए."


वह मुझे देखने लगी फिर चुप हो गयी और कुच्छ सोचने लगी. कुच्छ देर बाद


उसने मुझे देखा और मुस्काराकार बोली, "ठीक है भाई जान आप आज अपनी बहन की


चूत चाट कर दिखाइए उसमे कितना मज़ा है."


मे खुश हो गया और उसे चूम नीचे उसकी कमर के पास गया. फिर धीरे धीरे


उसकी पैंटी को उतारने लगा. उसने चूतर उठा पैंटी अलग करवाई तो उसकी चूत


देख मस्त हो गया. एकदम चिकनी लग रही थी. शायद अभी क्रीम से थोड़े बहुत


रोएँ भी सॉफ कर आई थी. मेने उसे बेड पर टेक लगा बिठाया और उसकी गांद


के नीचे तकिया रख दिया जिससे उसकी चूत उभर आई. फिर उसकी टाँगो के बीच


लेटा और उसकी चूत के दोनो फाँक उंगली से खोल देख कर मुस्काराया तो वह भी


मुस्करा दी.


"भाई जान क्या देख रहे हो?"


"देख रहा हूँ कितनी प्यारी है हाई इसको तो बस चाटने का मन कर रहा है."


"तो चाटिये ना भाई जान अब किस बात की देर है? लो चाटो."


उसने अपनी कमर उचकाई तो मेने उसकी चूत पर हाथ फिराया. चूत पर हाथ


रखते ही मेरे बदन मे सनसनी दौड़ गयी. वह भी मचल सी गयी. उसके मुँह


से एक आह निकल गयी. मे उसकी चूत को हाथ लगा मस्त हो गया. मम्मी की चूत


से कहीं ज़्यादा खूबसूरत चूत थी शुमैला की. मन तो कर रहा था कि हाथ


रखे चूत को देखता रहूं.


शुमैला की चूत को 4-5 बार सहलाया तो वह बोली, "भाई जान अच्छा लग रहा


है."


"हाई बहुत प्यारी चूत है, हेया छ्होटी सी फाँक वाली गुलाबी गुलाबी." और फिर


उंगली से दोनो फाँक खोलकर देखा तो च्छेद देख बोला, "और दोनो फाँक कितने


मस्त है और हाई कितना प्यारा च्छेद है, हाई शुमैला मेरी जान ऐसी चूत तो


बस रात भर चाटने के लिए होती है."


"भाई जान हाई आपकी बहन आपके सामने ऐसे ही चूत खोले लेटी है और आप


चाट क्यों नही रहे?"


"चाटुन्गा चाटुन्गा यार हाई देखने से ही इतना मज़ा आ रहा है."


फिर चेहरे को उसकी चूत पर झुकाया और नाक को उसकी चूत पर सून्घ्ता हुआ


बोला, "हाई आहह कितनी प्यारी, नशीली खुश्बू आ रही है तेरी चूत से, आहह


हाई तुम्हारी पैंटी की खुश्बू से ज़्यादा मस्त खुश्बू चूत मे है."


वह मुझे अपनी चूत की खुश्बू सूंघते देख खुश हो गयी और मेरे सर पर


हाथ लगा धीरे से बोली, "ओह भाई जान हाई आप कितने अच्छे हैं, आप अपनी बहन


को कितना प्यार करते हैं हाई और प्यार करिए अपनी बहन को आपकी बहन अब


आपकी दीवानी हो गयी है."


कुच्छ देर तक चूत की खुश्बू लेने के बाद उसकी चूत को चूमा तो वह एकदम से


फडक गयी और उसकी गांद तकिये से उछल गयी और वह मेरा सर अपनी चूत पर


दबाते हाई हाई करती बोली, "ओह्ह हाई आहह ब्ब्भ्ह्ह्हाऐज्जाआन उुउऊहह भाई जान


हां हां और और ऐसे ही करिए हाई बहुत अच्छा."




फिर दो तीन बार चूमने के बाद जीभ निकाली और उसकी रानो को चाटा फिर जीभ


को उसके दोनो फांको पर ऊपर नीचे तक चला चला 4-5 मिनट चाटा. वह इतने


मे ही एकदम पागल सी हो गयी थी. दोनो फांकोंको चाट चाट्कर थूक से


भिगोने के बाद उसको देखने लगा. चूत से ज़ुबान हटी तो उसने आँखे खोल मुझे


देखा फिर मुस्कराती बोली, "भाई जान बहुत अच्छा लगा."


"अभी चाटूँगा तो और अच्छा लगेगा."


"हाई भाई जान अभी चाटा नही क्या?"


"कहाँ मेरी जान अभी तो ऊपर से मज़ा लिया है." और चूत की फाँक मे उंगली


चलाई.


वह अपने पैर कसकर फैलाती बोली, "हाई आह आज तो मज़े से पागल हो जाउन्गि,


भाई जान इसमे तो चूचियाँ चुसवाने से ज़्यादा मज़ा है."


फिर मेने उसकी फांको मे अपनी ज़ुबान ऊपर से नीचे चलाई और उसके क्लिट को


ज़ुबान से चाटा. क्लिट को ज़बान लगते ही वह एकदम बेहोश सी हो गयी थी. क्लिट को


चाटने के साथ ही उसके छेद मे ज़ुबान डाल डाल पूरी चूत को चूस्कर


चाटने लगा. अब वह मज़े से भारी चूटर को ऊपर की ओर उच्छाल सिसकती हुई


हाई हाई कर रही थी.


फिर हाथ ऊपर कर उसकी दोनो चूचियों को पकड़ दबा दबा चाटने लगा. 8-10


मिनट इसी तरह चाटा कि वह एक तेज़ सिसकारी ले हाई भाई जान बोलती झडने लगी.


मुँह पर उसकी चूत का नमकीन पानी लगा तो मुँह चूत से हटा उसकी चूत को


देखने लगा. चूत से धीरे धीरे नमकीन पानी रिस रहा था. झड़ती चूत बहुत


प्यारी लग रही थी. मे अभी भी उसकी चूचियों को पकड़े था और उसकी चूत


को भी होंठो से कभी कभी मसल देता था.


कुच्छ देर बाद वह जब नॉर्मल हुई तो मुझे देख मुस्काराई और मेरे चेहरे को


पकड़ ऊपर की ओर किया. मे उसके पास गया तो वह मेरे होंठो को चूम कर बोली,


"भाई जान यह कैसा मज़ा दिया आपने, मे तो आसमान पर उड़ रही हूँ."


"मज़ा आया ना चट्वाने मे?"


"हां भाई जान यह तो सबसे हसीन मज़ा था. चूचियों से ज़्यादा मज़ा चूत मे


है."


"हां शुमैला इसीलिए तो कह रहा था, मुझे भी बहुत मज़ा आया, देखो मेरा


लंड कैसा कड़क हो रहा है, हाई अब इसका पानी भी निकालना पड़ेगा वरना यह


मुझे सारी रात सोने नही देगा."


वह यह सुन मुझे देखने लगी. फिर धीरे से मुस्कराई और बोली, "भाई जान जैसे


दिन मे आपका पानी निकला था वैसे ही मेरा भी पानी निकला था अभी."


"हां जब मज़ा आता है तो पानी निकलता है और यही पानी निकलने पर ही असली


मज़ा आता है, मेने तुम्हारा पानी चाट कर निकाला है अब अपना पानी निकालूँगा तो


मुझे भी मज़ा आएगा."


"आप अपना पानी कैसे निकलेंगे?"


"कई तरीके होते है. जैसे मे अपने हाथ से अपना पानी निकालु या तुम अपने


हाथ से निकाल दो या तुम अपने मुँह मे लेकर चाटकार भी निकाल सकती हो और


सबसे प्यारा तरीका है कि तुम्हारी चूत मे इसे डालकर निकालु. सबसे ज़्यादा


मज़ा इसी मे आता है."


"हाई भाई जान कैसे?"


"इसमे तुम्हारा पानी भी निकल जाएगा और मेरा पानी तुम्हारी चूत मे निकलेगा तो


तुमको बहुत मज़ा आएगा. बोलो निकालें इस तरह से?"


"हाई नही भाई जान मुझे डर लगता है."


"ओह्ह तो कोई बात नही मे अपना पानी खुद निकालूँगा."


फिर अपना अंडरवेर उतार उसकी बगल मे लेटा और उसे देखते हुए मूठ मारने


लगा. वह कुच्छ देर बाद बोली, "भाई जान मे कर दूं?"


"हाई करो ना बहुत मज़ा आएगा तुम्हारे हाथ से."


तब वह उठी और मेरे लंड को पकड़ लिया फिर धीरे धीरे हाथ ऊपर नीचे करने


लगी. उसके हाथ मे लंड जाते ही मज़ा बढ़ा. 5-6 बार सहलाया तो मे बोला,


"हाई शुमैला अगर तुम इसे अपने मुँह मे लेकर देखो तो मज़ा आ जाएगा तुमको.


लंड चाटने मे लड़कियों को बहुत मज़ा आता है."


मेरी बात सुन उसने मुझे देखा. वह हिचकिचा रही थी. फिर उसने मुस्काराकार अपने


चेहरे को मेरे लंड पर झुकाया और होंठो को सूपदे के पास लाई. कुच्छ देर तक


रुकी फिर अपनी गरम ज़बान निकाल सूपदे पर लगाया और फिर मुझे देखा. वह कुच्छ


शरमाने सी लगी तो मे उसकी हिम्मत बढ़ाता बोला, "क्यः हुआ शुमैला लो ना


मुँह मे. लो बहुत मज़ा आता है चाटने मे. अगर अच्छा ना लगे तो मत


चाटना. अरे कोई ज़बरदस्ती नही है मे तो तुम्हारा भाई ही हूँ कोई बाहर वाला


या तुम्हारा शौहर नही जो बुरा मानूं."


तब उसने मुँह खोला और सुपाडे को अंदर लिया. फिर उसने केवल सुपाडे को तीन


चार बाद अंदर बाहर किया और शायद उसे अच्छा लगा था क्योंकि उसके बाद उसने


अपनी ज़बान बाहर निकाली और पुर लंड को चारो ओर से ज़बान लगा लगा चाटने


लगी.मे मस्त हो गया और आहह हाई करने लगा. कुच्छ देर तक उसने लंड को


ज़बान से ही चाटा.


फिर उसने लंड को अपने मुँह मे लिया और कसकर चूसने लगी. अब तो मे समझ


गया कि अब घर मे जन्नत हो गयी है. वह अपना मुँह तेज़ी से लंड पर ऊपर


नीचे चलाती चाट रही थी. मेने उसके सर को पकड़ा और अपनी गांद उच्छाल


उच्छाल उसके मुँह को ही चोद्ने लगा. वह भी तेज़ी से चाट रही थी.


10 मिनट बाद मे हांफता सा बोला, "हाहह बॅस बस्कर शुमैला अब निकाल दे


अपने मुँह से बाहर अब झडने वाला है. आहह हाई मे गया."


फिर उसने लंड को मुँह से बाहर किया और देखने लगी. मेरे लंड ने दो चार


झटके लिए और फ़च से झड़ने लगा. वह बहुत गौर से देख रही थी. मे


लेटा था इसलिए सारा पानी मेरे ऊपर ही गिर गया. दो मिनट बाद लंड एकदम


लूज हो गया और वह भी नॉर्मल हुई. तब मेने उसकी पैंटी से अपना लंड और


पानी को पोच्छा और पैंटी को अपने बेड के नीचे डाल दिया. मे मम्मी की बात सोच


रहा था कि शुमैला का कोई कपड़ा अपने रूम मे मम्मी को मिले तो वह उसे


फँसाए.


फिर शुमैला को अपनी बाँहों मे भर लिया और अपने ऊपर लिटा लिया. वह मेरे


ऊपर थी और उसकी चूचियाँ मेरे सीने से दब रही थी और चूत लंड के ज़रा


ऊपर पेट पर थी. मे उसके दोनो गुदाज़ चूतर पर हाथ लगा सहलाता हुआ उससे


बातें कर रहा था.


"शुमैला मेरी बहन कैसा लगा लंड चाटने?"


"भाई जान...."


"आए शर्मा मत बता ना अपने भाई जान का लंड कैसा लगा? अगर अच्छा नही लगा


तो फिर नही कहूँगा चाटने को."


"नही नही भाई जान."


"क्या नही नही?"


"व्व वो मेरा मतलब है भाई जान बहुत अच्छा लगा चाटने मे. भाई जान प्लीज़


अब मे रोज़ रात को आपके साथ ही लेटुंगी. आप प्लीज़ रोज़ मेरी चूत को


चाटियेगा और मे आपका लंड."


"ठीक है जान तुम्हारा हर तरह से मे ख्याल रखूँगा. अब बताओ क्या इरादा


है?"


"भाई जान जो आप चाहें."


"मैं तो तुमको अभी खूब मज़ा देना चाहता हूँ. बोलो लोगि मज़ा?"


"जी भाई जान बिल्कुल बोलिए क्या करेंगे?"


"अब तुम्हारी चूत को अपनी उंगली से चोद्कर तुमको मज़ा दूँगा."


"हाई भाई जान उंगली से कैसा लगता है?"


"उंगली से भी मज़ा आता है. तुमको लगेगा कि कोई तुम्हारी चूत को चोद रहा


है."


"हाई भाई जान कोई कौन, मेरे भाई जान क्यों नही?"


"हाई तुम मेरा लंड अपने अंदर लो तो ऐसा ही कहता."


"मुझे डर लगता है भाई जान प्लीज़ आप उंगली से करिए."


तब उसे एक कुर्सी पर बिठाया और उसके सामने बैठ उसकी चूत को खोल ज़ुबान लगा


चाटने लगा. वह अपने पैरों को मेरे कंधों पर रखे थी. मेने कुच्छ देर तक


चूत को चाटा फिर एक उंगली को उसकी चूत मे कच से पेल दिया. उसके मुँह से


हाई निकला. फिर उंगली को अंदर बाहर कर शुमैला की चूत को फिंगर फक करने


लगा. उसे मज़ा मिला और वह चूत को उचका उंगली से चुद्वाती रही. मे एक हाथ


से उसकी चूचियों को दबा दबा उसे फिंगर फक कर रहा था.


इस बार वह पहले से भी ज़्यादा झड़ी. जब वह झाड़ रही थी तो उसने मेरी उंगली


को अपनी चूत मे ही दबा लिया और होंठो को कसे झड़ती रही. उसने टाँगो को


मेरी गर्देन पर कस रखा था और मे उसकी रानो को चाट रहा था. उसकी गांद


बहुत तेज़ी से झटके ले रही थी.


जब वह झाड़ कर नॉर्मल हुई तो उसने आँखे खोल मुझे देखा. मे भी उसे ही


देख रहा था. उसने मुस्कराते हुए अपने पैर मेरे कंधे से हटाए और रानो को


चौड़ा किया तो मेने अपनी उंगली उसकी चूत से बाहर निकाली. वह उसकी चूत के


रस से सराबोर थी. मेने उंगली उसे दिखाई फिर अपने मुँह मे ले अपनी उंगली


चाट ली और बोला, "हम्म क्या मज़ेदार रस है मेरी बहन का."


वह यह देख मुस्काराई और बोली, "भाई जान मुझे भी चाटाओ रस."


तब मेने उसकी चूत मे उंगली डाल घुमाया और फिर उंगली निकाल उसके मुँह के


पास कि तो उसने मेरी उंगली मुँह मे ले चूसी और बोली, "हां भाई जान बहुत



फिर मेने उसे गोद मे उठाया और बाथरूम मे गया. फिर उसकी चूत और अपना


लंड धोकर सॉफ किया और वापस आया. मे बेड पर लेटा तो वह मेरी बगल मे


लेट मुझसे चिपकती मेरे होंठो को चूम बोली, "भाई जान आप बहुत अच्छे हैं."


"तू भी बहुत अच्छी है मेरी जान."


"भाई जान अब मे अपने रूम मे जाती हूँ."


"हाई अभी तो 2 बजे है अभी और रूको ना."


"भाई जान आज नही. कल फिर आउन्गि."


"कल दिन मे तो तुम कॉलेज जाओगी ना?"


"जी तभी तो अभी जा रही हूँ. भाई जान कल पूरी रात अपने भाई जान के पास


रहूंगी."


"सच?"


"और क्या मे अपने भाई जान से झूठ बोलूँगी? भाई जान कल आपकी बहन रातभर


आपके बेड पर आपकी बाँहों मे रहेगी."


"रातभर बिना कड़ों के पूरी नंगी अपने नंगे भाई जान की बाँहों मे रहना


होगा और लंड को चाटकार चूत चटवानी होगी?"


"जी भाई जान जो जी मे आए करिएगा पर अब आज नही, कल."


"ओके."


फिर उसे अपने से अलग किया तो उसने अपना कुर्ता पहना और ब्रा लेकर पैंटी उठाने


लगी तो मे बोला, "इसे छ्चोड़ दो यही हाई रात भर यह तुम्हारी याद दिलाएगी."


वह मुस्काराई फिर बिना पैंटी पहने नीचे से नंगी अपनी गांद मुझे दिखाती


दरवाज़े तक गयी और पलट कर मुझे देखा और मुस्काराकार मुझे देखा और


दरवाज़ा खोला और फिर बाहर देखा फिर चुपके से निकल गयी.


अगले दिन सुबह मे देर से उठा. शुमैला कॉलेज जा चुकी थी. मेने फ्रेश होकर


नाश्ता किया. कुच्छ देर बाद मम्मी आई और मुस्काराकर बोली, "क्यों बेटा खूब


मज़ा लिया रात भर नये माल का?"


"मम्मी आप भी."


"मेने उसे तुम्हारे रूम मे जाते और वापस आते देखा था."


"जी मम्मी पर चोदा नही है."


"क्या क्या किया?"


"अभी चूचियों को चूस्कर चूत को चाटा और उंगली से चोदा है."


"अपना माल दिखाया या नही?"


"दिखाया अरे मम्मी अपना उसके मुँह मे दे दिया है."


"अरे तुम दोनो तो एक दिन मे ही बहुत आगे तक जा चुके हो."


"हां मम्मी अब आप उसे चुद्वा दीजिए. वह चुद जाएगी, कह रही थी कि उसे


शरम आती है. ओह्ह मम्मी उसकी चूत इतनी प्यारी है कि क्या बताऊ."


"अरे बेटा 17 साल का कसा माल है, अन्छुआ भी है. मज़ा तो आएगा ही. आज ही


कोशिश करूँगी तेरा काम बनाने की."


"मम्मी उसकी पैंटी मेरे रूम मे है."


"बस बन गया काम, तू पैंटी मेरे रूम मे रख दे."


मेने पैंटी मम्मी के रूम मे रख दी और यूनिवर्सिटी चला गया.


दिन मे जब शुमैला वापस आई तो मम्मी ने उसे बुलाया और उसे घूरने लगी.


वह डर गयी और चुप रही. मम्मी ने उसे घूरने के बाद कहा, "शुमैला."


"ज्जजई मम्मी."


"यह तुम्हारी है ना?" मम्मी ने उसकी ब्लॅक पैंटी उसे दिखाते कहा.


वह पैंटी देख घबरा गयी और हकलाने लगी. तब मम्मी ने उसका हाथ पकड़ा और


अपने रूम मे ला उसे बैठा खुद उसके पास बैठती बोली, "बेटी यह तेरे भाई के


रूम से मिली है."


"मम्मी मुझे नही पता वहाँ कैसे गयी."


"ऐसा तो नही तुम गयी हो भाई के रूम मे?"


"न्न्न नही मम्मी."


"ओह्ह मुझे लगता है तुम्हारा भाई ही इसे ले गया होगा अपने रूम मे. मुझे लगता


है वह च्छूप च्छूप कर तुमको देखता भी है."


"ज्ज्ज मम्मी."


"बेचारा वह भी क्या करे तू है ही इतनी खूबसूरत की कोई भी लड़का तुमको


देखना चाहेगा."


वह शरमाई तो मम्मी ने आगे कहा, "क्यों बेटी कॉलेज मे लड़के तुमको देखते


होंगे."



वह फिर शरमाई तो मम्मी ने उसका चेहरा पकड़ कहा, "अरे बेटी शर्मा नही, मे


तुम्हारी सहेली भी हूँ, मे ही तुमको सब कुच्छ समझाउंगी बताओ?"


"ज्जई मम्मी लड़के देखते तो है."


"कुच्छ कहते या करते तो नही?"


"नही मम्मी मे किसी से बात नही करती और ना ही देखती हूँ पर.."


"पर क्या?"


"वह लड़के उल्टा सीधा बोलते रहते हैं."


"क्या कहते हैं?"


"जी यही कि कितनी खोबसूरत है और इसका माल कितना कसा है."


"बहुत बुरे होते हैं वह लड़के, बेटी तुम कभी उनके चक्कर मे मत आना,


जानती हो ऐसे लड़के लड़कियों को अपने जाल मे फँसाकर उनकी इज़्ज़त से खेलते


हैं."


"जी मम्मी."


"बेटी तुम जवान हो और जवानी मे हर लड़की चाहती है कि कोई उसे खूब प्यार


करे. अगर तुम्हारा मन करे तो तुम मुझे बताना."


"ज्जजई."


"हां बेटी, इस उमर मे ऐसा होता है यह कोई ग़लत बात नही. लेकिन बाहर के


लड़के लड़कियों को बर्बाद कर देते है. बेटा तुम्हारा भाई तुमको बहुत प्यार करता


है. वह तुमको च्छुपकर देखता भी है. तुम उसे ही दिखाओ ना अपना कसा माल."


"मम्मी."


"हां बेटी मे सही कह रही हूँ, इस उमर मे अगर कोई लड़का लड़की को प्यार


करता है तो उसे बहुत मज़ा आता है. अगर इस वक़्त कोई लड़का तुमको प्यार करे तो


तुमको लगेगा कि तुम जन्नत मे हो. तुम रात मे अकेले सोती हो अगर कोई लड़का


तुम्हारे साथ सोए तो तुम बहुत खुश होगी. इसीलिए कह रही हूँ कि बाहर के


लड़को के साथ कभी मत मिलना जुलना."


"जी मम्मी नही मिलूंगी."


"तुम्हारा मन करता हो कि कोई लड़का तुम्हारे साथ सोए तो तुम अपने भाई को


अपना कसा माल दिखाओ और अगर वह तुमको प्यार करेगा तो कोई डर नही होगा.


इसमे बदनामी भी नही होती और कोई जान भी नही पाता."


शुमैला मन मे बहुत खुश थी. मम्मी तो उसके मन की बात कर रही थी. वह


शरमाने की आक्टिंग करती बोली, "मम्मी हाई नही."


"जा अपनी कोई पुरानी छोटी कुरती पहन आ जिससे तुम्हारी दोनो कम से कम आधी


बाहर निकल आए और अंदर ब्रा नही पहनना और नीचे मियानी फटी रखना जिससे


तुम्हारे भाई को सब कुच्छ दिखे."


"मम्मी! हाई नही भाई क्या सोचेगा?"


"पगली देख तू अगर घर से बाहर किसी के चक्कर मे पड़ी तो तेरे भाई की


कितनी बदनामी होगी, इसीलिए कह रही हूँ. कोई बात नही देखो बेटी मुझसे मत


शरमाओ. अगर तुम्हारा मन करता है कि कोई लड़का तुमको प्यार करे तुमको चाहे


तो मुझे बताओ मे घर पर ही तुम्हारे लिए लड़के का इंतज़ाम कर दूँगी.


बोलो?"


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