मा बेटा और बहन-1

  




मा बेटा और बहन-1


हेल्लो दोस्तों मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और मस्त कहानी लेकर 


हाजिर हूँ हाई मेरा नाम आमिर है और मेरी उमर 20 साल है . मेरी एक छ्होटी बहन


शुमैला है. वह अभी सिर्फ़ सत्रह साल है और कॉलेज मे है. मोम अब 40 की


हैं. मोम स्कूल मे टीचर हैं और मे यूनिवर्सिटी मे हूँ. हमलोग


करांची से है. पापा का 2 साल पहले इंतेक़ाल हो गया था. अब घर मे सिर्फ़


हम तीन लोग ही हैं.


यह अब से 6 मंथ पहले हुआ था. एक रात मम्मी बहुत उदास लग रही थी. मे


समझ गया वह पापा को याद कर रही हैं. मेने उनको बहलाया और खुश करने


की कोशिश की. मम्मी मेरे गले लग रोने लगी. तब मेने कहा, "मम्मी हम दोनो


आपको बहुत प्यार करते हैं, हमलोग मिलकर पापा की कमी महसूस नही होने


देंगे."


शुमैला भी वहाँ आ गयी थी, वह भी मम्मी से बोली, "हां मम्मी प्लीज़ आप दिल


छ्होटा ना करिए. भाई जान हैं ना हम दोनो की देखभाल के लिए. भाई जान


हमलोगो का कितना ख्याल रखते हैं."


"हां बेटी पर कुच्छ ख्याल सिर्फ़ तेरे पापा ही रख सकते थे."


"नही मम्मी आप भाई जान से कह कर तो देखिए."


खैर फिर बात धीरे धीरे नॉर्मल हो गई. उसी रात शुमैला अपने रूम मे थी.


मे रात को टाय्लेट के लिए उठा तो टाय्लेट जाते हुए मम्मी के रूम से कुच्छ


आवाज़ आई. 12 बज चुके थे और मम्मी अभी तक जाग रही हैं, यह सोचकर उनके


रूम की तरफ गया. मम्मी के रूम का दरवाज़ा खुला था. मे खोलकर अंदर गया


तो चौंक गया.


मम्मी अपनी शलवार उतारे अपनी चूत मे एक मोमबत्ती डाल रही थी. दरवाज़े के


खुलने की आवाज़ पर उन्होने मूड कर देखा. मुझे देख वह घबरा सी गयी. मे भी


शर्मा गया कि बिना नॉक किए आ गया. मे वापस मुड़ा तो मम्मी ने कहा, "बेटा


आमिर प्लीज़ किसी से कहना नही."


"नही मम्मी मे किसी से नही कहूँगा?"


"बेटा जब से तेरे पापा इस दुनिया से गये हैं तब से आज तक मे.."


"ओह्ह मम्मी मे भी अब समझता हूँ. यह आपकी ज़रूरत है पर क्या करूँ अब


पापा तो हैं नही."


फिर मे मम्मी के पास गया और उनके हाथो को पकड़ बोला, "मम्मी दरवाज़ा बंद कर लिया करिए."


"बेटा आज भूल गयी."


फिर मे वापस आ गया.


अगले दिन सब नॉर्मल रहा. शाम को मे वापस आया तो हमलोगो ने साथ ही चाइ


पी. चाइ के बाद शुमैला बोली, "भाई जान बाज़ार से रात के लिए सब्ज़ी ले आओ


जो खाना हो ."


मे जाने लगा तो मम्मी ने कहा, "बेटा किचन मे आओ तो कुच्छ और समान बता


दूँगी लेते आना."


मे किचन मे जा बोला, "क्या लाना है मम्मी?"


मम्मी ने बाहर झाँका और शुमैला को देखते धीरे से बोली, "बेटा 5- 6 बैगन


लेते आना लंबे वाले."


मे मम्मी की बात सुन पता नही कैसे बोल पड़ा, "मम्मी अंदर करने के लिए?"


मम्मी शर्मा गयी और मे भी अपनी इस बात पर झेंप गया और सॉरी बोलता बाहर


चला गया. सब्ज़ी लाकर शुमैला को दी और 4 बैगन लाया था जिनको अपने पास


रख लिया. शुमैला ने खाना बनाया फिर रात को खा पीकर सब लोग सोने चले


गये. तब करीब 11 बजे मम्मी मेरे रूम मे आ बोली, "बेटा बैगन लाए थे?"


"हां मम्मी पर बहुत लंबे नही मिले और मोटे भी कम है."


"कोई बात नही बेटे अब जो है सही हैं ."


"बहुत ढूँढा मम्मी पर कोई भी मुझसे लंबे नही मिले."


"क्या मतलब बेटा."


मे बोला, "मम्मी मतलब यह कि इनसे लंबा और मोटा तो मेरा है."


तब मम्मी ने कुच्छ सोचा फिर कहा, "क्या करें बेटा अब तो जो किस्मत मे है वही


सही." फिर मेरी पॅंट के उभार को देखते बोली, "बेटा तेरा क्या बहुत बड़ा है?"


"हां मम्मी 8 इंच है."


"ओह्ह बेटा तेरे पापा का भी इतना ही था. बेटा अपना दिखा दो तो तेरे पापा की याद


ताज़ी हो जाए."


"लेकिन मम्मी मे तो आपका बेटा हूँ."


"हां बेटा तभी तो कह रही हूँ. तू मेरा बेटा है और अपनी माँ से क्या शरम.


तू एकदम अपने पापा पे गया है . देखूं तेरा वह भी तेरे पापा के जैसा है या


नही?"


तब मेने अपनी पॅंट उतारी और अंडरवेर उतारा तो मेरे लंबे तगड़े लंड को देख मम्मी एकदम से खुश हो गयी. वह मेरे लंड को देख नीचे बैठी और मेरा लंड


पकड़ लिया और बोली, "हाई आमिर बेटा तेरे पापा का भी एकदम ऐसा ही था. हाई


बेटा यह तो मुझे तेरे पापा का ही लग रहा है. बेटा क्या मे इसे थोड़ा सा प्यार


कर लूँ?"


"मम्मी अगर आपको इससे पापा की याद आती है और आपको अच्छा लगे तो कर


लीजिए."


"बेटा मुझे तो लग रहा है कि मे तेरा नही बल्कि तेरे पापा का पकड़े हूँ."












फिर मम्मी ने मेरे लंड को मुँह मे लिया और चाटने लगी. यह मेरे साथ पहली


बार हो रहा था इसलिए मेरे लिए सम्हाल्ना मुश्किल था. 6-7 मिनेट मे ही मे


उनके मुँह मे झर गया. 1 मिनट बाद मम्मी ने लंड मुँह से बाहर किया और


मेरे पास बैठ गयी.


मे बोला, "सॉरी मम्मी आपका मुँह गंदा कर दिया."


"आहह बेटा तेरे पापा भी रोज़ रात मेरे मुँह को पहले ऐसे ही गंदा करते थे फिर


मेरी च.." मम्मी इतना कह चुप हो गयी.


मैं उनके चेहरे को देखते बोला, "फिर क्या क्या करते थे पापा? मम्मी जो पापा इसके बाद करते थे वह मुझे बता दो तो मे भी कर दूं. आपको पापा की कमी नही महसूस होगी."


मम्मी मेरे चेहरे को पकड़ बोली, "बेटा यह जो हुआ है एक माँ बेटे मे नही


होता. लेकिन बेटा इस वक़्त तुम मेरे बेटे नही बल्कि मेरे शौहर हो. अब तुम मेरे


शौहर की तरह ही करो. वह मेरे मुँह मे अपना झाड़कर अपने मुँह से मेरी


झारते थे फिर मुझे.."


"मम्मी अब जब आप मुझे अपना शौहर कह रही है तो शरमा क्यों रही हैं.


सब कुच्छ खुलकर कहिए ना."


"बेटा तू सच कहता है, चल अब मेरी चूत चाट और फिर मुझे चोद जैसे तेरे


पापा चोदते थे."


"ठीक है मम्मी आओ बिस्तर पर चलो."


फिर मम्मी को अपने बेड पर लिटाया और उनको पूरा नंगा कर दिया. मम्मी की


चूचियाँ अभी भी सख़्त थी. 2-3 साल से किसी ने टच नही किया था. मेने


चूत को देखा तो मस्त हो गया. मम्मी की चूत कसी लग रही थी. 40 की उमर


मे मम्मी 30 की ही लग रही थी. मम्मी को बेड पर लिटा अपने कपड़े अलग किए फिर


मम्मी की चूचियाँ पकड़ उनकी चूत पर मुँह रख दिया. चूचियों को दबा दबा


चूत चाट अपने झड़े लंड को कसने लगा.


8-10 मिनट बाद मम्मी मेरे मुँह पर ही झाड़ गयी. वह अपनी गांद तेज़ी से उचका


झाड़ रही थी. मे मम्मी की झड़ती चूत मे 1 मिनट तक जीभ पेले रहा फिर


उठ कर ऊपर गया और चूचियों को मुँह से चूसने लगा.


"हाअ आहह बेटा चूस अपनी मम्मी की चूचियों को. हाई पियो इनको हाई कितना


मज़ा आ रहा है बेटे के साथ."


मेरा लंड अब फिर खड़ा था. 4-5 मिनट बाद मम्मी ने मुझे अलग किया और फिर


मेरे लंड को मुँह से चूस्कर खड़ा करने के बाद बोली, "बेटा अब चढ़ जा अपनी


माँ पर और चोद डाल."


मेने मम्मी को बेड पर लिटाया और लंड को मम्मी के छेद पर लगा गॅप से अंदर


कर दिया.


अब मे तेज़ी से चुदाई कर रहा था और दोनो चूचियों को दबा दबा चूस भी


रहा था. मम्मी भी नीचे से गांद उच्छाल रही थी.


मे धक्के लगाता बोला, "मम्मी शाम को जब आपने बैगन लाने को कहा था तभी


से दिल कर रहा था कि काश अपनी मम्मी को मैं कुच्छ आराम दे सकूँ. मेरी


आरज़ू पूरी हुई."


"बेटा अगर तू मुझे चोदना चाहता था तो कोई गोली लेता आता. अब तू मेरे अंदर


मत झड़ना. आज बाहर झड़ना फिर कल मे गोली ले लूँगी तो ख़तरा नही होगा तब


अंदर डालना पानी. चूत मे गरम पानी बहुत मज़ा देता है."


करीब 10 मिनट बाद मेरा लंड झड़ने वाला हुआ तो मेने उसे बाहर किया और


मम्मी से कहा, "ःआह मम्मी अब मेरा निकलने वाला है."


"हाई बेटा ला अपने पानी से अपनी मम्मी की चूचियों को भिगो दे."


फिर मे मम्मी की चूचियों पर पानी निकाला. झारकर अलग हुआ तो मम्मी अपनी


चूचियों पर मेरे लंड का पानी लगाती बोली, "बेटा तू एकदम अपने बाप की तरह


चोद्ता है. वह भी ऐसा ही मज़ा देते थे. आहह बेटा अब तू सो जा."


फिर मम्मी अपने रूम मे चली गयी और मे भी सो गया.


अगले दिन मम्मी बहुत खुश लग रही थी. शुमैला भी मम्मी को देख रही थी.


नाश्ते पर उसने पूछ ही लिया, "मम्मी आप बहुत खुश लग रही हो?"


"हां बेटी अब मे हमेशा खुश रहूंगी."


"क्यों मम्मी क्या हो गया?" वह भी मुस्कराती बोली.


"कुच्छ नही बेटी तुम्हारा भाई जान मेरा खूब ख्याल रखता है ना इसलिए."


"हां मम्मी भाई जान बहुत अच्छे हैं."


फिर वह कॉलेज चली गयी और मे यूनिवर्सिटी.


उस रात मम्मी ने गोली ले ली थी और अपनी चूत मे ही मेरा पानी लिया था. हम


दोनो माँ बेटे 1 महीने इसी तरह मज़ा लेते रहे.



एक रात जब मैं मम्मी को चोद रहा था तो मम्मी ने मुझसे पूछा


, “आमिर बेटा एक बात तो बता.”क्या मम्मी” बेटा अब शुमैला बड़ी हो रही है उसकी शादी करनी है. इस उम्र मैं


लड़कियों की शादी कर देनी चाहिये वरना अगर वो कुछ उल्टा सीधा कर ले तो बहुत बदनामी होती है. मम्मी आप सही कह रही हो. अब उसके लिये कोई लड़का देखना होगा. हाँ बेटा, अच्छा एक बात तो बता तुमको शुमैला कैसी लगती है? क्या मतलब मम्मी? मतलब तुझे अच्छी लगती है तो इसका मतलब वो किसी और को भी अच्छी लगेगी और उसे कोई लड़का पसंद कर लेगा तो उसकी शादी कर देंगे. हाँ मम्मी शुमैला बहुत खूबसूरत है. तू उसे कभी कभी अजीब सी नज़रो से देखता है? मैं अपनी चोरी पकड़े जाने पर घबरा कर बोला, नही नही मम्मी ऐसी बात नही है?” कल तो तू उसकी चूचियों को घूर रहा था. नही मम्मी. पगले मुझसे झूठ बोलता है. सच बता. मैं शर्माते हुये बोला, मम्मी कल वो बहुत अच्छी लग रही थी. कल वो छोटा सा कसा कुर्ता पहने थी.


जिसमें उसकी चूचियाँ बहुत अच्छी लग रही थी. तुझे पसंद है शुमैला की चूचियाँ? मैं चुप रहा तो मम्मी ने मेरे लंड को अपनी चूत से जकड़ कर कहा, “बताओ ना वो थोड़े ना सुन रही है?” हाँ मम्मी. उसकी चूचियों को कभी देखा है? नही मम्मी.”देखेगा?”कैसे?” पगले कोशिश किया कर उसे देखने की जब वो कपड़े बदले तब या जब वो नहाने जाये तब.””ठीक है मम्मी पर वो दरवाज़ा बंद करके सब करती है. हाँ पर तू जब भी घर पर रहे तब पजामा पहना करो और नीचे अंडरवेयर मत पहना कर. अपने लंड को पजामे मैं खड़ा कर उसे दिखाया करो. सोते समय मैं लंड को पजामे से बाहर निकाल कर रखना मैं उसको तुम्हारे रूम मैं झाड़ू लगाने भेजू तो उसे अपना लंड दिखाया करो और तुम अब उसकी चूचियों को घूरा करो और उसे छुने की कोशिश किया करो.


मैं मम्मी की बात सुन कर मस्त हो गया उसे तेज़ी से चोदने लगा. वो तेज़ी से चुदती हुई हाए हाए करते हुये बोली, हाँ बहन को देखने की बात सुन कर इतना मस्त हो गया की मम्मी की चूत की धज्जीयां उड़ा रहा है. फिर मेरी कमर को अपने पैरो से कस कर बोली, चोद अपनी मम्मी को हाअआआआ आज मुझे चोद कल से अपनी बहन पर लाइन मारो और उसे पटा कर चोदो. फिर 4-5 धक्के लगा कर मैं झड़ने लगा. झड़ने के बाद मैं मम्मी से चिपक कर बोला, मम्मी शुमैला तो मेरी छोटी बहन है, भला मैं उसके साथ ऐसा कैसे….? जब तू अपनी माँ के साथ चुदाई कर सकता है तो अपनी बहन के साथ क्यों नही? मम्मी आपकी बात और है.”क्यों?” मम्मी आप पापा के साथ सब कर चुकी हैं और अब उनके ना रहने पर मैं तो उनकी कमी पूरी कर रहा हूँ. लेकिन शुमैला तो अभी नासमझ और अनजान है, यही कहना चाह रहा हूँ? मम्मी.


बेटा अब तेरी बहन 18 की हो गई है. इस उम्र मैं लड़कियों को बहुत मस्ती आती है. आजकल वो कॉलेज भी जा रही है. मुझे लगता है की उसके कॉलेज के कुछ लड़के उसको फँसाने की कोशिश कर रहे हैं. पड़ोस के भी कुछ लड़के तेरी बहन पर नज़रे जमाये हैं. अगर तू उसे घर पर ही उसकी जवानी का मज़ा उसे दे देगा तो वो बाहर के लड़कों के चक्कर मैं नही पड़ेगी और अपनी बदनामी भी नही होगी. माँ आप सही कह रही हो मैं अपनी बहन को बाहर नही चुदने दूँगा. सच मम्मी शुमैला की बहुत मस्त चूचियाँ दिखती हैं. मम्मी अब तो उसे तैयार करो. करूँगी बेटा, मैं उसे भी यह सब धीरे धीरे समझा दूँगी. फिर अगले दिन जब मैं सुबह सुबह उठा तो देखा की वो मेरे रूम मैं झाड़ू लगा रही थी. मैं उसे देखने लगा. वो कसी हुई कमीज़ पहने थी और झुककर झाड़ू लगाने से उसकी लटक रही चूचियाँ हिलने से बहुत प्यारी लग रही थी. तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ी. मुझे अपनी चूचियों को घूरता पा वो मूड गई और जल्दी से झाड़ू लगा कर चली गई.


मैं उठा और फ्रेश होकर नाश्ता कर टी.वी देखने लगा. उस दिन छुटी थी इसलिये किसी को कही नही जाना था. मम्मी भी टी.वी देख रही थी. शुमैला भी आ गई और मैने उसे अपने पास बिठा लिया. मैं उसकी कसी कमीज़ से झाँक चूचियों को ही देख रहा था. मम्मी ने मुझे देखा तो चुपके से मुस्कुराते हुये इशारा करते कहा की ठीक जा रहे हो. शुमैला कभी कभी मुझे देखती तो अपनी चूचियों को घूरता पा वो सिमट जाती. आख़िर वो उठकर मम्मी के पास चली गई. मम्मी ने उसे अपने गले से लगाते हुये पूछा, क्या हुआ बेटी? कुछ नही मम्मी. वो बोली. तू यहाँ क्यों आ गई बेटी जा भाई के पास बेठ. मम्मी ववववाह भाईजान. वो फुसफुसाते हुये बोली. मम्मी भी उसी की तरह फुसफुसाई, क्या भाईजान. मम्मी भाईजान आज कुछ अजीब हरकत कर रहे हैं. वो धीरे से बोली तो मम्मी ने कहा, “क्या कर रहा तेरा भाई? मम्मी यहाँ से चलो तो बताऊ. मम्मी उसे ले कर अपने रूम की तरफ गई और मुझे पीछे आने का इशारा किया. मैं उन दोनो के रूम के अंदर जाते ही जल्दी से मम्मी के रूम के पास गया. मम्मी ने दरवाज़ा पूरा बंद नही किया था और पर्दे के पीछे छुपकर मैं दोनो को देखने लगा.


मम्मी ने शुमैला को अपनी गोद मैं बिठाया और बोली, क्या बात है बेटी जो तू मुझे यहाँ लाई है? मम्मी आज भाईजान मुझे अजीब सी नज़रों से देख रहे जैसे कॉलेज के..क्या पूरी बात बताऊ शुमैला बेटी. मम्मी आज भाईजान मेरे इनको बहुत घूर रहे है, जैसे कॉलेज मैं लड़के घूरते हैं.” इनको. मम्मी ने उसकी चूचियों को पकड़ा तो वो शर्माते हुये बोली, “सच मम्मी. अरे बेटी अब तू जवान हो गई है और तेरी यह चूचियाँ बहुत प्यारी हो गई हैं इसीलिये कॉलेज मैं लड़के इनको घूरते हैं. तेरा भाई भी इसीलिये देख रहा होगा की उसकी बहन कितनी खूबसूरत है और उसकी चूचियाँ कितनी जवान हैं. मम्मी आप भी..वो शरमाई. अरे बेटी मुझसे क्या शर्म. बेटी कॉलेज के लड़कों के चक्कर मैं मत आना वरना बदनामी होगी. अगर तू अपनी जवानी का मज़ा लेना चाहती है तो मुझको बताना.


मम्मी आप तो जाइये हटिये. अच्छा बेटी एक बात तो बता, जब भाईजान तेरी मस्त जवानीयों को घूरते हैं तो तुझे कैसा लगता है? मम्मी हटिये मैं जा रही हूँ. अरे पगली फिर शरमाई, चल बता कैसा लगता है जब तुम्हारे भाईजान इनको देखते हैं? अच्छा तो लगता है पर..पर वर कुछ नही बेटी, जानती है बाहर के लड़के तेरे यह देखकर क्या सोचते हैं? क्या मम्मी? यही की हाये तेरे दोनो अनार कितने कड़क और रसीले हैं. वो सब तेरे इन अनारो का रस पीना चाहते हैं. मम्मी चुप रहिये मुझे शर्म आती है. अरे बेटी यही एक बात है इनको लड़के के मुँह मैं देकर चूसने मैं बहुत मज़ा आता है. जानती हो लड़के इनको चूस कर बहुत मज़ा देते हैं. अगर एक बार कोई लड़का तेरे अनार चूस ले तो तेरा मन रोज़ रोज़ चूसाने को करेगा और अगर कोई तेरी नीचे वाली चूत को चाट कर तुझे चोद दे तब तू बिना लड़के के रह ही नही पायेगी. अब मैं जा रही हूँ मम्मी मुझे नही करवाना यह सब. हाँ बेटा कभी किसी बाहर के लड़के से कुछ भी नही करवाना वरना बहुत दर्द और बदनामी होती है. हाँ अगर तेरा मन हो तो मुझे बताना.”मम्मी..”अच्छा बेटी चल अब कुछ खाना खा लिया जाये तेरा भाई भूखा होगा. जा तू उससे पूछ क्या खायेगा, जो खाने को कहे बना देना. फिर मैं भाग कर टी.वी देखने आ गया.


थोड़ी देर बाद शुमैला आई और मुझसे बोली, भाईजान. जो खाना हो बता दीजिये मैं बना देती हूँ. मम्मी आराम कर रही हैं. मैं उसकी चूचियों को घूरते हुये अपने होठों पर जुबान फेरते हुये बोला, क्या क्या खिलाओगी? वो मेरी इस हरक़त से शरमाई और नज़रे झुका कर बोली, जो भी आप कहें. मैने उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बिठाया और चूचियों को घूरता हुआ बोला, खाऊगा तो बहुत कुछ पर पहले इनका रस पीला दो. क्या भाईजान किसका रस? वो घबराते हुये बोली. मैं बात बदलता हुआ बोला, मेरा मतलब है पहले एक चाय ला दे फिर जो चाहे बना लो. वो चली गई. मैं उसको जाते देखता रहा. 5 मिनिट बाद वो चाय लेकर आई तो मैने उससे कहा अपने लिये नही लाई. मैं नही पीऊगी. पीओं ना लो इसी मैं पी लो. एक साथ पीने से आपस मैं प्यार बड़ता है. वो मेरी बात सुन कर शरमाई फिर कुछ सोच कर मेरे पास बैठ गई तो मैने कप उसके होठों से लगाया तो उसने एक सीप लिया फिर मैंने एक सीप लिया. इस तरह से पूरी चाय ख़त्म हुई तो वो बोली, अब खाने का इंतज़ाम करती हूँ.


मैने उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुये कहा, अभी क्या जल्दी है थोड़ी देर रूको बहुत अच्छा प्रोग्राम आ रहा है देखो. मेरे खींचने पर वो मेरे उपर आ गिरी थी. वो हटने की कोशिश कर रही थी पर मैने उसे हटने नही दिया तो वो बोली, हाय भाईजान हटिये क्या कर रहे हैं? कुछ भी तो नही टी.वी देखो मैं भी देखता हूँ. ठीक है पर छोड़िये तो ठीक से बैठकर देखूं. ठीक से बैठी हो, शुमैला मेरी छोटी बहन अपने बड़े भाई की गोद मैं बैठकर देखो ना टी.वी. वो चुप रही और हम टी.वी देखने लगे. थोड़ी देर बाद मैने उसके हाथो को अपने हाथो से इस तरह दबाया की उसकी कमीज़ सिकुड कर आगे को हुई और उसकी दोनो चूचियाँ दिखने लगी. उसकी नज़र अपनी चूचियों पर पड़ी तो वो जल्दी से मेरी गोद से ऊतर गई और तभी मम्मी ने उसे आवाज़ दी तो वो उठकर चली गयी.


मैं भी पहले की तरह पर्दे के पीछे छुप कर देखने लगा. वो अंदर गई तो मम्मी ने पूछा, क्या हुआ बेटी आमिर ने बताया नही क्या खायेगा? वो मम्मी भाईजान ने.. क्या भाईजान ने, बताओ ना बेटी क्या किया तेरे भाई ने? वो भाईजान ने मुझे अपनी गोद मैं बिठा लिया था और फिर ओर फिर.. और फिर क्या? और और कुछ नही. अरे अगर तेरे भाई ने तुझे अपनी गोद मै बिठा लिया तो क्या हुआ, आख़िर वो तेरा बड़ा भाई है. अच्छा यह बता उसने गोद मैं ही बिठाया था या कुछ और भी किया था? और तो कुछ नही मम्मी भाईजान ने फिर मेरे इन दोनो को देख लिया था. मुझे लग रहा है मेरे बेटे को अपनी बहन की दोनो रसीली चूचियाँ पसंद आ गई हैं तभी वो बार बार इनको देख रहा है. बेचारा मेरा बेटा, अपनी ही बहन की चूचियों को पसंद करता है. अगर बाहर की कोई लड़की होती तो देख लेता जी भर कर पर साथ में वो डरता होगा. अच्छा बेटी यह बता जब तुम्हारे भाईजान तेरी चूचियों को घूरता है तो तुमको कैसा लगता है? ज्जज्ज जी मम्मी वो लगता तो अच्छा है पर… पर क्या बेटी. अरे तुझे तो खुश होना चाहिये की तुम्हारा अपना भाई ही तुम्हारी चूचियों का दीवाना हो गया है.


अगर मैं तेरी जगह होती तो मैं तो बहाने बहाने से अपने भाई को दिखाती. “मम्मी.”हाँ बेटी सच कह रही हूँ. क्या तुझे अच्छा नही लगता की कोई तेरा दीवाना हो और हर वक़्त बस तेरे बारे मैं सोचे और तुझे देखना चाहे. तुझे चोदना चाहे. मम्मी आप भी. अरे बेटी कोई बात नही जा अपने भाई को बेचारे को दो चार बार अपनी दोनो मस्त जवानीयों की झलक दिखा दिया कर. वैसे उस बेचारे की ग़लती नही, तू है ही इतनी कड़क जवान की वो क्या करे. देख ना अपनी दोनो चूचियों को लग रहा है अभी कमीज़ फाड़कर बाहर आ जायेगी. जा तू भाई के पास जाकर टी.वी देख और बेचारे को अपनी झलक दे मैं खाने का इंतज़ांम करती हूँ. खाना तैयार होने पर में तुम दोनो को बुला लूँगी.” नेक्स्ट पार्ट नेक्स्ट टाइम आप को मेरी यह कहानी केसी लगी. आप मुझे जरुर बताये.






मे मम्मी की बात सुन वापस आ टीवी देखने लगा. थोड़ी देर बाद शुमैला आई तो


मेने कहा, "क्या हुआ शुमैला खाना रेडी है?"


"जी भाई जान खाना मम्मी बना रही हैं."


"अच्छा तो आ तू टीवी देख."


वह मेरे पास आ गयी तो मेने उसे अपनी बगल मे बिठा लिया. इस बार मे चुप


बैठा टीवी देखता रहा. 5 मिनट बाद वह बार बार पहलू बदलती और मुझे


देखती. मे समझ गया कि अब सही मौका है. तब मेने उसके गले मे हाथ


डाला और बोला, "बहुत अच्छी मूवी है."


"जी भाई जान."


फिर उसे अपनी गोद मे धीरे से झुकाया तो वह मेरी गोद की तरफ झुक गयी. तब


मेने उसे अपनी गोद पर ठीक से झुकाते कहा, "शुमैला आराम से देखो टीवी मम्मी


तो किचन मे होगी?"


"जी भाई जान ठीक से बैठी हूँ." शुमैला यह कहते हुए मेरी गोद मे सर


रख लेट गयी.


वह टीवी देख रही थी और मे उसकी चूचियाँ. तभी उसने मुझे देखा तो मे


ललचाई नज़रों से उसकी चूचियों को देखता रहा. वह मुस्काई और फिर टीवी की


तरफ देखने लगी. अब वह शर्मा नही रही थी. तब मेने उसकी कमीज़ को नीचे


से पकड़ा और नीचे की तरफ खींचा. वह कुच्छ ना बोली. मे थोड़ा सा और


खींचा तो उसकी चूचियाँ ऊपर से झाँकने लगी. अब मे उसकी गदराई कसी


चूचियों को देखता एक हाथ को उसके पेट पर रख चुका था. हमलोग 3-4 मिनट


तक इसी तरह रहे.


फिर वह मेरा हाथ अपने पेट से हटाती उठी तो मेने कहा, "क्या हुआ शुमैला?"


"कुच्छ नही भाई जान अभी आती हूँ."


"कहाँ जा रही हो?'


"भाई जान पेशाब लग आई है अभी आती हूँ करके."


वह चली गयी और मे उसकी पेशाब करती चूत के बारे मे सोचने लगा.


तबी वह वापस आई तो उसे देख मे खुश हो गया. उसने अपनी कमीज़ का ऊपर का


बटन खोल दिया था. मे समझ गया कि अब वह मेरी किसी हरकत का बुरा नही


मानेगी. वह आई और पहले की तरह मेरी गोद मे सर रख टीवी देखने लगी. मेने


फिर चुपके से हाथ से उसकी कमीज़ नीचे करी और फिर धीरे से उसके खुले


बटन के पास हाथ लगा कमीज़ को दोनो ओर फैला दिया. मे जानता था कि वह


सब समझ रही है पर वह अंजान बनी लेटी रही. जब कमीज़ को इधर उधर


किया तो उसकी आधी चूचियाँ दिखने लगी. वह अंदर बहुत छ्होटी सी ब्रा पहने


थी जिससे उसके निपल ढके थे.


मे समझ गया कि मैं अब कुच्छ भी कर सकता हूँ वह बुरा नही मानेगी. फिर भी


मेने पहली बार की वजह से एकदम से कुच्छ भी करने के बजाए धीरे धीरे ही


शुरुआत करना ठीक समझा. फिर एक हाथ को उसकी रान पर रखा और 4-5 बार


सहलाया. वह चुप रही तब मेने उसकी कमीज़ के दो बटन और खोल दिए और अब


उसकी ब्रा मे कसी पूरी चूचियाँ मेरी आँखों के सामने थी. अब मेरी गोद मे


मेरी 17 साल की बहन शुमैला लेटी थी और मे उसकी चूचियों को ब्रा मे


देख रहा था. ब्रा का हुक नीचे था जिसे अब मे खोलना चाह रहा था.


मेने दो तीन बार उसकी पीठ पर हाथ ले जाकर टटोला तो मेरे मंन की बात


समझ गयी और उसने करवट ले ली. तब मेने उसकी ब्रा का हुक अलग किया. फिर उसका


कंधा पकड़ हल्का सा दबाया तो वह फिर सीधी हो गयी और टीवी की तरफ देखती


रही. मे कुच्छ देर उसे देखता रहा फिर ब्रा को उसकी चूचियों से हटाया तो उसने


शर्मा कर अपनी आँखे बंद कर ली.


उसकी दोनो चूचियों को देखा तो देखता ही रह गया. एक गुलाबी रंग की बहुत


टाइट थी दोनो चूचियाँ और निपल एकदम लाल लाल बहुत प्यारा लग रहा था.


मे उसकी चूचियों को देख सोच रहा था कि सच इतनी प्यारी और खूबसूरत


चूचियाँ शायद कभी और नही देख पाउन्गा. वह आँखें बंद किए तेज़ी से


साँसे ले रही थी. मेने अभी उसकी चूचियों को च्छुआ नही था केवल उनका


ऊपर नीचे होना देख रहा था. चूचियों का साइज़ बहुत अच्छा था, आराम से


पूरे हाथ मे आ सकती थी. मम्मी की चुचियो के लिए तो दोनो हाथो को लगाना पड़ता था.


मेने उससे कहा, "शुमैला."


वह चुप रही तो फिर बोला, "शुमैला ए शुमैला क्या हुआ? तू टीवी नही देख रही.


देखो ना कितना प्यारा सीन है."


वह फिर भी चुप आँखें बंद किए रही तो मे फिर बोला, "शुमैला देखो ना."


"ज्ज्ज्ज्ज ज्ज जी भाई जान देख तो रही हूँ."


"कहाँ देख रही हो. देखो कितनी अच्छी फिल्म है."


तब उसने धीरे से ज़रा सी आँखे खोली और टीवी की तरफ देखने लगी. कुच्छ देर


मे उसने फिर आँखे बंद कर ली तो मेने उसके गालों को पकड़ उसके चेहरे को


अपनी ओर करते कहा, "क्या हुआ शुमैला तुम टीवी नही देखोगी क्या?"


वह चुप रही तो उसके गालों को दो तीन बार सहला कर बोला, "कोई बात नही अगर तुम


नही देखना चाहती तो जाओ किचन मे मम्मी की हेल्प करो जाकर."


उसने मेरी बात सुन अपनी आँखे खोल मुझे देखा फिर टीवी की ओर देखते बोली, "देख


तो रही हूँ भाई जान."


इस बार उसने आँखें बंद नही की और टीवी देखती रही. थोड़ी देर बाद मेने एक


हाथ को धीरे से उसकी एक चूची पर रखा तो वह सिमट सी गयी पर टीवी की ओर


ही देखती रही. हाथ को उसकी चूची पर रखे थोड़ी देर उसके चेहरे को देखता


रहा फिर दूसरे हाथ को दूसरी चूची पर रख हल्का सा दबाया तो उसने फिर


आँखे बंद कर ली.


मेने दो तीन बार दोनो चूचियों को धीरे से दबाया और फिर उसके निपल को


पकड़ मसाला तो वह मज़े से सिसक गयी. दोनो निपल को चुटकी से मसल बोला,


"शुमैला, लगता है तुमको फिल्म अच्छी नही लग रही, जाओ तुम किचन मे मैं


अकेला देखता हूँ."


इतना कह उसकी चूचियों को छ्चोड़ दिया और उसे अपनी गोद से हटाने की कोशिश की


तो वह जल्दी आँखे खोल मुझे देखती घबराती सी बोली, "हाई न्न्न नही तो


भाई जान बहुत अच्छी फिल्म है, हाई भाई जान देख तो रही हूँ. आप भी देखिए


ना मे भी देखूँगी."


वह फिर लेट गयी और सर मोड़ कर टीवी देखने लगी. मेने उसका चेहरा अपनी ओर करते


कहा, "शुमैला."


"जी भाई जान देखूँगी फिल्म मुझे भी अच्छी लग रही है."


"हाई शुमैला तू कितनी खूबसूरत है. हाई तेरी यह कितनी प्यारी हैं."


"क्या भाई जान?"


"तेरी चूचियाँ?"


वह अपनी चूचियों को देखती बोली, "हाई भाई जान आपने इनको नंगी कर दिया


हाई मुझे शरम आ रही है."


"कोई नही आएगा. तुझे बहुत मज़ा आएगा." और दोनो चूचियों को पकड़ लिया और


दबा दबा उसे मस्त करने लगा.


वह मेरे हाथो पर अपने हाथ रख बोली, "भाई जान मम्मी हैं."


"वह तो किचन मे है. तू डर मत उनको अभी बहुत देर लगेगी खाना बनाने


मे."


फिर उसकी दोनो चूचियों को मसलता रहा और वह टीवी की ओर देखती रही. वह


बहुत खुश लग रही थी. 10 मिनट तक उसकी चूचियों को मसल्ने के बाद


झुककर दोनो चूचियों को बारी बारी से चूमा तो उसके मुँह से एक सिसकारी


निकल गयी.


"क्या हुआ शुमैला?'


"कुच्छ नही भाई जान हााआहह भाई जान."


"क्या है शुमैला?"


"भाई जान."


"क्या है बता ना?"


"भाई जान मम्मी तो नही आएँगी?"


"अभी नही आएँगी, अभी उनको आधा घंटा और लगेगा खाना बनाने मे."


"भाई जान इनको.."


"क्या बताओ ना तुम तो शर्मा रही हो." और मैने झुककर उसके होंठो को चूमा.


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