Meri Doctor Maa Aur Behne Chapter 5

 



Meri Doctor Maa Aur Behne  Chapter  5


कहते हैं पुराना शरब का नशा कुछ ज्यादा होता है..रोहित को ऐसा ही लगा रहा था.. अपनी मम्मी से लुंड चुसबाने में ज्यादा मजा आ रहा था..



 कुछ डेर तक सौम्या रोहित का लुंड इसी तरह पूरी इमंदरी से चुन्नी राही फिर रोहित ने अपना कार्यक्रम बड़ाने का सोचा क्योकी उसका लुंड अब पूरी तरह से तैयर था छुडाई के लिए...



 उसे अपना लुंड सौम्या के मुह से बहार निकला और उसे अपने सारे कपड़े उतर के रख दिए और जेक उसने दरबजे को बंद कर दिया..क्योकी यूज है बात का डर था की अगर कोई और उठा और उसमें मैंने दिया तो अच्छा नहीं  लगेगा..



 अब बिस्तर के ऊपर सौम्या और रोहित पूरी तरह नंगे लेते थे..और दो अभी मां बड़े नहीं बस एक मर्द और एक औरत...



 रोहित ने सौम्या के दोनो टैंगो को अपने कंधे पे रखा और अपने लुंड का सुपारा सौम्या के छुट के मुहाने से टिकाया... सौम्य की छुट पहले से ही गिली थी ..क्योकी रोहित ने अपनी उंगली से इस्तेमाल करने वाले ही  सौम्या अपने अच्छे बैंड किए गए लेति थी और रोहित तो बस अब अपना लुंड सौम्या की चुत में डालना चाहता था...



 रोहित ने अच्छे से स्थिति लिया और अपने लुंड को धीरे से सौम्या की चुत के और सरकार दिया…



 सौम्या…माधोशी में उह्ह्ह..आह्ह्ह..करने लगी..लेकिन उपयोग बहुत ही मजा आ रहा था..भी वो भूल चुकी थी की उसके बड़े का लुंड उसकी चुत के और जा रहा है…



 रोहित ने अपना लुंड आधा सौम्या की छुट में दाल के मम्मी को उह..आह्ह्ह...करते देख रुक

 गया और उसके ऊपर चलो के उसकी चुचियों को पाकर के…



 रोहित : मम्मी...क्या दर्द हो रहा है...



 सौम्या : नहीं..तुम आगे बढ़ो...



 रोहित : अगर आपको दर्द हो रहा हो तो निकल लू बहार...



 सौम्या : अबे..आधा और दाल के अब तर्पण चाहता है...इस चुत ने तेरे बाप का 10 इंच का

 लुंड भी और लिया है...



 सौम्या प्योर जोश में आ गई थी और अब उसकी जबान भी अब किसी चुडक्कर लेडी की तरह हो गई थी... अब वो किसी किमत पर बीच में नहीं छोडना चाहती थी..ऐसे ही उन पुलिसवालों ने उसे गांद की तो बैंड बाजा दी को  प्यासा ही छोड़ दिया था..



 रोहित को सौम्या के मुह से ऐसी बात सुनके अच्छा लगा..और वो भी थोड़ा मूड में आ गया….  रोहित ने सौम्या के मुह से ऐसी बाते सुनते ही एक और ढकके में अपना पुरा लुंड सौम्या की चुत में दाल दिया...



 रोहित : अब मजा आया मम्मी...



 सौम्या: हा ठीक है..लेकिन ऐसे ही काम नहीं चलेगा...अब जब और दाल ही दिया है तो जोर जोर से ढकके लगा..



 रोहित ने मम्मी के मुह से ये बात सुनी और अपना हाथ सौम्या के मंसल जंजो पे रखा

 और जोर से ढकके मारने लगा...



 सौम्या : हा बेटा...और जोर से...छोड़ो अपनी मम्मी को शुद्ध जोश से...



 रोहित जैसे ही सौम्या की बात सुनता उसकी गति बढ़ जाती थी... कुछ डर तक ढकके मारने के

 बाद रोहित ठक गया...

 सौम्या समाज गई ये बात और उसे रोहित को इसरा किया की वो उसके आला आ जाए और सौम्या


 अब रोहित के ऊपर थी…सौम्या ने अपनी चुत को रोहित के लुंड पे अपने हाथो से सेट किया और बस बैठा उसपे..रोहित का लुंड सरसरता हुआ..सौम्या की चुत के और चला गया…




 सौम्या, रोहित के ऊपर चलो..और अपनी मोती चुतर को उसके लुंड पे उचलने लगी… रोहित को बहुत ही मजा आ रहा था..सौम्या भी बरसो की भुखी थी और इतने सैलून के बाद शुद्ध जोश मिला था का उपयोग करें  मैं चुदना चती थी…




 रूम के अंदर छप...छप की आवाज गुंज रही...जैसे ही सौम्य अपने चुतर को ऊपर उठाती


 रोहित का लुंड बहार निकलता और फिर सौम्या मुझे अपनी छुटकारे को आला कार्ति और रोहित का लुंड में उसमे समा जटा…।




 अगले 10 मिनट तक सौम्य अपनी चुतर को ऐसी ही बेहतरी रही और रोहित के लुंड से खेलती रही…  सौम्या भी निधल होके उसके ऊपर चलो गई...दो ऐसे कुछ डर तक संत होके लेटे रहे...




 रोहित ने अपने मन की इच्छा जाहिर की…




 रोहित : मम्मी...मुझसे आपकी गांड भी मरनी थी...बहुत मस्त लगती है मुझे...




 सौम्या: नहीं बेटा..आज नहीं फिर कभी...आज उसका बहुत बुरा हाल है...




 रोहित : क्यों क्या हुआ...हा अपने किसी से अपनी गांद मारवे थी..




 सौम्या : मैंने अपनी मर्जी से कुछ नहीं किया... दो पुलिसवालों ने जबर्दस्ती मेरी गांद मार ली..जब मैं क्लिनिक से घर आ रही थी...




 रोहित को अजीब लगा..उसने अपने ऊपर से मम्मी को अलग किया और...




 रोहित : ऐसी हिम्मत कैसे हुई सैलून की...आप मुझे लोकेशन बताओ मम्मी...मेरे दोस्त के पापा पुलिस इंस्पेक्टर है...मैं उनकी मदद से उन को छोडूंगा नहीं...




 सौम्या: रहने दो बेटा...इसमे मेरी ही बदनामी होगी...और हमारा नाम खराब हो जाएगा..




 रोहित ;  लेकिन मम्मी...उनकी इतनी औकत...




 सौम्या : चलो एक तो अच्छा काम किया उन्होनें तुम्हारे लिए..




 रोहित : क्या?




 सौम्या : आज अगर उन मेरी आग नहीं भरके होती है तो मैं तुमसे कैसे चुदती...




 रोहित : हा ये बात तो है... लेकिन मैं आपकी गांड नहीं मार पाया आज...




 सौम्या : अब तो ये मम्मी तुम्हारी है...जब मन हो मार लेना...घर की बात है..




 और फिर दो हसने लगे….




 रोहित गहरी नींद में था….सुबाह हो चुकी थी…अभी बिस्तर पे वो अकेले ही सोया हुआ था…तभी


 उसके मोबाइल पे कॉल आया..और मोबाइल की आवाज सुनके रोहित की आंख खुली और उसे उठके मोबाइल में देखा तो रवि का कॉल था…




 रोहित ने मोबाइल पे बात करनी सुरू की….




 रोहित : हाय रवि..कैसा है इतनी सुबाह कॉल किया...




 रवि : यार रात भर मनीषा दीदी के नंगे में ही सोच रहा था और मुथ मार रहा था।




 रोहित : ऐसा क्यों?




 रवि : जब भी ये सोचा की धुन मनीषा दीदी से बात आ गई बड़ी है...बस यही सोच रहा था कि अभी तू उन्हे छोड रहा होगा..




 रोहित : नहीं यार... अभी नहीं।




 रवि : क्यों भाई… क्यों नहीं किया…लोहा गरम था मार देता हाथोड़ा…ऐसा मौका बार नहीं आता…




 रोहित : मौका नहीं मिला..कल रात.




 रवि : और मैंने रात में तुम्हें परेशान नहीं किया...ये सोच के किट यू लगा होगा..




 रोहित : चलो आज ना कल तो मौका मिलेगा ही...




 रवि : अब तुमसे नहीं होगा बिक्री मुझे ही कुछ करना होगा..




 रोहित : ओके..बेटा देखते हैं...




 रवि : और बता... कुछ नया...




 रोहित : हा..मैं तो बताना ही भूल गया की मोहित अंकल आया है और स्नेहा दीदी भी साथ में आई है...




 रवि : क्या बात कर रहा हो….




 रोहित : सही बोल रहा हूं…..कल रात ही आए दो...




 रवि : स्नेहा दीदी..वो अमेरिका बाली दीदी...?




 रोहित: हा भाई...क्या हुआ तुम्हें?




 रवि : अबे क्या माल है वो... मैने तो उनका फोटो ही देखा है अभी तक...




 रोहित : तुमको सेल सब माल ही लगता है...




 रवि : अबे सही बोल रहा हूँ... अभी मनीषा दीदी को छोर... स्नेहा दीदी के पिचे ही लगा यार..




 रोहित : क्योन ?




 रवि : अबे मनीषा दीदी तो ये है ना... कभी भी मौका मिल जाएगा..लेकिन स्नेहा दीदी तो वापस चली जाएगी ना.




 रोहित : इस्का मतलाब…तू अब उन्हे भी….. बिक्री एक नंबर का हरामी है..




 रवि: अब तुझे जो बोलना है बोल लो..लेकिन मुझे स्नेहा दीदी से मिल्बा दे यार।




 रोहित : ओके..भाई देखते हैं... अभी तो मैं तो के ही उठा हूं...




 रवि : चल तू कोशिश कर...फिल्म दिखने ला..या कहीं घुमने लेके आ दीदी को।




 रोहित : चलो देखते हैं...




 और रोहित ने फोन काट कर दिया….भी उसे बात खत्म ही किट ही कि बाबू उसका नौकरी चाय लेके उसके कामरे आया…




 बाबू : आप उठ गए बेटा... बहार सब लोग नास्ते पे आपका इंतजार कर रहे हैं...




 रोहित : तो मैं भी वही आता हूं... साथ में ही चाय लेंगे...




 बाबू : ओके...मैं आपका प्लेट लगा देता हूं..



 रोहित अपने बस्टर से आला उतरा और टॉयलेट गया और आगे


डाइनिंग रूम में सब लोग यानी… मोहित अंकल, सौम्या, मनीषा और स्नेहा कुर्सी पर बैठे एक दसरे से बाते कर रहे थे.. जैसे ही रोहित वहा पे पहूचा किसी बात पे हम लोग जोर से हसने लगे…


 रोहित : क्या बात है.. बहुत हसी मज़ाक चल रहा है...


 मनीषा : तुम्हारे नंगे मुझे ही बात चल रही है...


 रोहित : तो मुझे सब लोग रहे हैं….


 स्नेहा : ऐसी कोई बुरी बात नहीं है...मेरे प्यारे भाई.. बुरा मत मानो।


 मोहित अंकल : रोहित मुझे अपने कुछ दोस्तों से मिलना है... अगर तुम फ्री हो तो स्नेहा को

 घुमा लाओ कही से…


 मनीषा दीदी: ये हमेश फ्री ही रहता है...


 रोहित : मनीषा दीदी... आप हमें मेरे पिछे परी रहती है..


 मनीषा दीदी: मैंने गलता क्या बोला… दिन भर तो तुम एडहर-उधार में समय बिटते हो आजकल।


 रोहित : अभी मेरी छुटी चल रही है तो मैं क्या करूं..


 सौम्या;  ओके..अब बस..रोहित बेटा तुम स्नेहा दीदी के साथ चले जाओ...


 रोहित ने देखा की मम्मी हमसे नजर चुरा रही है... शायद उन रात का याद आ गया होगा..


 रोहित : स्नेहा दीदी..क्या प्लान है आपका।


 रोहित ने अपना नस्ता सुरु करते हुए पोछा…


 स्नेहा दीदी: पहले तो मुझे किसी अच्छे से मंदिर ले चलो और उसके बाद मैं कोई अच्छी सी भारतीय फिल्म देखना चाहती हूं..


 रोहित : ओके...अच्छा...मैं अपने दोस्त रवि को टिकट लेने के लिए बोल देता हूं..


 स्नेहा दीदी: ये रवि कौन है?


 मनीषा दीदी: इसके बचपन का दोस्त है...मेरे भाई जैसा ही है...


 स्नेहा दीदी : ओके... थिक है..दो से भले तीन..


 फिर सब लोग बुरा करने लगे… बाबू सबके लिए नास्ता और चाय पड़ोस रहा था…


 रोहित बहुत खुश था की स्नेहा दीदी उसके साथ घूमने को जा रही है... और वो रवि के लिए भी खुश था की इस्तेमाल भी स्नेहा दीदी का साथ मिल जाएगा...


 सब लोग तयार होके अपने काम से चले गए..यानी सौम्या और मनीषा अपने क्लिनिक को चली गई और मोहित अंकल अपने दोस्त से मिलने के लिए...रोहित भी तैयार होके स्नेहा दीदी के रूम में गया..जहां वो भी तैयार हो रही थी।  .रोहित ने दरबजे पे दस्तक नहीं किया और स्नेहा के कमरे का दरबाजा खुला हुआ था..और स्नेहा दीदी कपूर चेंज कर रही थी...उनको कपरे चेंज करते देखते रोहित दरबजे के पास ही रुक गया और की स्नेह दीदी।


 स्नेहा दीदी इस बक्त नहीं के बाद बाथरूम से निकल के आई थी और अपने कपरे चेंज कर रही थी … स्नेहा दीदी अपने बदन पे तौलिया लपेटे हुई थी और बेड पे उनकी ब्रा और पैंटी पड़ी हुई … रोहित तो जैसे सही सही।  .


 स्नेहा दीदी ने अपने तौलिये को थोड़ा आला किया और उसकी बड़ी बड़ी चुचियां आगे आने लगी …

 अब स्नेहा दीदी ने अपनी रेड कलर की ब्रा बेड से उठा के पहन ली..अब स्नेहा दीदी रोहित के सामने टॉवल में और ब्रा में थी..रोहित को स्नेहा दीदी की चुचियां नजर तो नहीं आ रही थी लेकिन साइड से बड़े बड़े होने  का पुरा अनुमन लग रहा था उपयोग..


 अब स्नेहा दीदी ने अपने तौलिये को अच्छा गिरा दिया…. रोहित का मुह खुला रह गया..स्नेहा दीदी की बड़ी और चौदी चूर उसके सामने थी..उसका मन किया की पिच से जेक वो स्नेहा दीदी को पाकर ले और अपना लुंड  में दाल दे...बहुत ही मनमोहक देखा था वहां..लेकिन

 स्नेहा ने जल्दी से अपनी लाल रंग की रंगोली की पैंटी उठाई और उसे पहनने के लिए...


 अब रोहित के आंखों के सामने ब्रा और पैंटी में थी...बिस्तर पे स्नेहा दीदी के कपड़े फटे हुए थे उस समय झुक्कर उसमे से अपने लिए सही कपरे तलाश करने लगी और उसके बाद उसमें जाने महसूस से  चुतर दिख रही थी और वो इसे देखने अपने लुंड को पंत के ऊपर से ही रागदान लगा...


 स्नेहा को वहा पाए कपड़े उतने पसंद नहीं आए और उसने अलमारी में दुसरे कपड़े की तरफ बड़ी और जैसे ही उसे अलमारी खोला उसने दरवाजे पे खरे रोहित को देखा...






 स्नेहा, रोहित को देखकर बोली..






 स्नेहा : हैं रोहित तुम यहां...तैयार भी हो गए।






 रोहित : हां दीदी... मैं आपका इंतजार कर रहा था... आप तैयार हो जाए मैं ड्राइंग रूम


 मैं इंतजार करता हूं...






 स्नेहा दीदी: कोई नहीं… अब आ ही गए हो… तो मेरी मदद कर दो…






 रोहित : लेकिन दीदी..आप तराह है...






 स्नेहा : तो क्या हुआ...इतने कपरे में लोग स्विमिंग नहीं करते...मुझे कोई दीकत नहीं है..तुम भी बुरा मत मानो की तुमने मुझे ब्रा पैंटी में देख लिया।






 रोहित..स्नेहा दीदी के मुह से ऐसी बात सुनके अंदर ही अंदर कुश हो रहा था की स्नेहा दीदी तो कफी फ्रैंक है...






 रोहित : ओके दीदी बतो क्या मदद करू






 स्नेहा : जरा मेरे लिए ड्रेस सेलेक्ट कर दे… कौन सा पहनु…






 रोहित ने ब्लू टी-शर्ट टॉप और स्कर्ट स्नेहा दीदी के लिए सेलेक्ट किया...उसने ये सोचा की अगर सिनेमा हॉल में मौका मिला तो दीदी के अंदर हाथ डालने में आसन होगी..






 रोहित : दीदी..ये पाहन लिजिये..इसमे आप कभी अच्छी लगी...






 स्नेहा : थैंक्स..चलो तुमने मेरा काम आसन कर दिया...






 रोहित ;  अब आप कपड़े पहन लिजिए मैं बहार इंतजार करता हूं...






 स्नेहा : अरे नहीं..बैठो यही पे अभी एक मिनट में तैयार हो जाती हूं..






 रोहित की नजर स्नेहा दीदी के बड़े बड़े मम्मे और चुतर पे ही टिके हुए थे..जो उनकी लाल रंग की ब्रा और पैंटी में और ही मनमोहक लग रही थी..






 स्नेहा दीदी ने जल्दी ही अपनी सुडोल चुचियों को जो ब्रा में फरफरा रही थी टी-शर्ट के अंदर छिपी हुई... और फिर स्नेहा दीदी ने स्कर्ट अपने उन उन चुतर को भी कपड़े से धक लिया...






 अब वो तैयार थी...और रोहित की तरफ़ मुर्के बोली..






 स्नेहा : रोहित...बोलो कैसी लग रही है...






 रोहित : आप तो मुझे ऐसे भी अच्छी लगती है दीदी..






 स्नेहा : क्या मतलब...तुमहरा मत बिना कपड़ों के...?






 रोहित : मेरा मतलब ये नहीं था … दीदी






 स्नेहा ;  मैं सब समझती हूं तुम्हारा मतलब...तुम लड़कों को तो हमशा लड़की नंगी ही अच्छी लगती है।






 रोहित : लेकिन आप मुझे तो कपड़े में गजब की लगती है दीदी..






 स्नेहा : चलो अच्छा लगा सुनके की तुम्हारे कपड़े में अच्छी लगती हूं..






 रोहित क्या बोलता बेचारा...सच तो ये था की इस्तेमाल स्नेहा दीदी को पूरी तरह से नंगा करके चुम्ने का कर रहा था..लेकिन खुले में कैसे बोल सकता था...






 रोहित ;  स्नेहा दीदी..पहले कहां जाना है...






 स्नेहा : अभी टाइम क्या हो रहा है….






 रोहित : 10 बज रहे हैं..






 स्नेहा : यही मॉर्निंग शो का टाइम है... चलो किसी पुराने से थिएटर में मॉर्निंग शो देखते हैं...






 रोहित : दीदी क्या आप पागल हो गई हो... बड़े गंदे लोग जाते हैं वहां।






 स्नेहा : हैं गंदे लोगन से इतनी नफ़रत क्यों है तुम...






 रोहित : दीदी..बस वहां जाना सुरक्षित नहीं है..






 स्नेहा : मैंने आज तक नहीं देखी है फिल्म ऐसे जगा पे.. प्लीज अरेंज करो ना..






 रोहित : ओके..मैं देखता हूं...रवि को बोले है इंतजार करने के लिए...बॉक्स में वहन ज्यादा लोग नहीं होते हैं...और परिवार के लिए जग होता है...






 रोहित ने कॉल किया रवि को..दुसरी तरह से ही रवि की आवाज सुनाई पड़ी इस्तेमाल...






 रोहित : रवि...स्नेहा दीदी..को मॉर्निंग शो देखना है...






 रवि : मॉर्निंग शो ..matlab एडल्ट मूवी..






 रोहित : हा यार...उसने इंडिया में ऐसी फिल्म नहीं देखी है...इसलिय देखना चाहती है...


 रवि : बेटा जुगर लग गया मतलाब….आज तो स्नेहा दीदी का स्वद जरूर लेंगे…



 रोहित : अबे सुन पहले... पहले ये बता..कही पे हिंदी की एडल्ट फिल्म लगी..क्योकी वो वही देखना चाहती है..


रवि : हा सावित्री सिनेमा में "ये प्यास कब बुझेगी" लगी है...






 रोहित स्नेहा दीदी की तरफ देखते हुए..






 रोहित : दीदी..'ये प्यास कब बुझेगी लगी है'






 स्नेहा : सही है..बोलो टिकट ले ले.






 रोहित: हा ठीक है..तू फिल्म का तीन टिकट ले कर रख हम पाहुच रहे हैं..हा टिकट बॉक्स का ही लेना... वहां लोग नहीं आते हैं... नहीं तो लेने के देने पर जाएंगे...






 रवि : ओके बेटा...मैं तैयार हूं...और मेरा कंडोम भी तैयार है...






 रोहित : चुप कर...






 स्नेहा : क्या बोला उसे...






 रोहित : बोल रहा था...दीदी कैसे देखेंगे ये फिल्म..






 स्नेहा ;  अभी तो देख सक्ती हु हॉल में जेक..एक बार बड़ी हो गई फिर कौन जाने दूंगा...






 रोहित : अभी भी घर बाले नहीं जाने देते..






 स्नेहा : इसलिये तो मैंने अपने प्यारे भाई से बोला..






 और स्नेहा दीदी रोहित के कांधे पे हाथ रखने लगी और दोनो रूम से निकल के आला

 आए और रोहित ने अपनी कार निकली और सिनेमा हॉल की तरफ चले गए...

 रोहित की नज़र गाड़ी ड्राइव बढ़ते हुए स्नेहा दीदी की तारफ चली जाती थी….ब्लू टीशर्ट में जो की लूज थी लेकिन स्नेहा दीदी के मुम्मे इतने बड़े बड़े फिर अपना आकार अच्छे से बटाला रही थी .. उसके सामने साफ नजर  और रोहित की नजर उसी पेट हाय... गाड़ी में कंपन की बजा से बीच बीच में ऊपर आला भी हो रही थी …… और उनकी जंघे स्कर्ट में थोड़ी सी दिख रही थी क्योकी स्नेहा दीदी के बैठने की बजा से उनकी स्कर्ट थोड़ी ऊपर आ  थी और रोहित को उनकी मोती जंघे नजर आ रही थी…..




 रोहित गडी ड्राइव करते हुए स्नेहा दीदी के शरीर पर ही अपनी नजरे गदाये हुए थे...ये बात स्नेह से छुपी नहीं रही।




 स्नेहा दीदी : रोहित आगे रोड पे ध्यान दो….




 रोहित : दे ही तो रहा हु दीदी..क्यों क्या हुआ...




 रोहित मस्कुराते हुए बोला...




 स्नेहा दीदी: नहीं...तुम्हारी नजर कहीं और है...




 रोहित : कहां पे दीदी?




 स्नेहा दीदी: मेरे ऊपर….क्यों




 रोहित : क्या देख रहा था मैं




 स्नेहा दीदी ने एक हल्की चपत लगते हैं बोली...




 स्नेहा दीदी: क्यों ..तुम मेरे स्तन की तरह नहीं देख रहे थे अभी... और वहां रूम पे भी तुम्हारी नजर वही पे टिकी हुई थी..मैंने नोटिस किया था...




 रोहित : क्या करू दीदी... आपके है ही इतने सेक्सी की नजर चली ही जाति है...




 स्नेहा दीदी: ऐसी बात है क्या... अच्छी मेरी अच्छी है या मनीषा की...




 रोहित : आपकी दीदी...




 स्नेहा दीदी: मुझे बनाओ मत... या माखन मत लगाओ मुझे...




 रोहित ;  सही में दीदी..मैंने मनीषा दीदी को ऐसा नहीं देखा कभी...लेकिन आप मुझे बहुत ही सेक्सी लगा है




 स्नेहा दीदी: और तुम्हारी गर्लफ्रेंड की बॉडी कैसी है...




 रोहित : मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है दीदी...




 स्नेहा दीदी: क्या बोल रहे हैं रोहित... ऐसा हो




 सकता है की तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड ना हो...




 रोहित : सही बोल रहा है दीदी...ये इंडिया है, यूएस में आसन से मिल जाता है लेकिन यह... अगर आप लकी हो तो आपको अपनी पसंद की लड़की मिलती है...




 स्नेहा दीदी: बहुत अजीब लगता है...वैसे तुम्हें कैसी गर्लफ्रेंड चाहिए...




 रोहित : आप जैसी….




 स्नेहा दीदी;  तुम फिर से सुरू हो गए...




 रोहित : सच में दीदी..मैं सही बोल रहा हूं...




 स्नेहा दीदी: अच्छा चलो मन लिया तो तुम्हारे मुझे क्या अच्छा लगता है...




 रोहित : छोडो दीदी..आप बुरा मन जाएगी...




 स्नेहा दीदी: नहीं बोलो मैं बुरा नहीं मानूंगी...




 रोहित : आपके बूब्स मुझे बहुत ही अच्छे लगते हैं...जब भी ये हिलती है माधोश कर देती है..




 स्नेहा दीदी : ओके..चलो आगे बोलो...




 रोहित : आपकी आंखें मुझे बहुत अच्छी लगती है... स्नेहा दीदी जल्दबाजी हुई...




 स्नेहा दीदी : अच्छा और...




 रोहित : आपका सुंदर चेहरा….




 स्नेहा दीदी;  और…




 रोहित : आपकी जंघे… मुझे बहुत मस्त लगेगा और लंबी टंगे..




 स्नेहा दीदी: और…




 रोहित : आपकी बड़ी और चौड़ी चुतर….




 स्नेहा दीदी : और...




 रोहित : और कुछ तो मैंने देखा नहीं है न दीदी...




 स्नेहा दीदी: क्या देखना है और...




 रोहित : आपकी चुत… सॉरी दीदी।




 स्नेहा दीदी: तो इसमे बुरी बात क्या है...देखने का मन है अभी...




 रोहित ने सर हिला के हमी भारी ... और स्नेहा दीदी ने अपनी स्कर्ट को थोड़ा सा ऊपर किया और उनकी पैंटी रोहित को नजर आई ... रोहित को विश्वास नहीं हो रहा था की इतनी आसनी से स्नेह दीदी उसे अपने मन से...




 रोहित ने अपनी कार थोडी सी साइड में करके रोक दी...उसको सुनता था वहां और उसके गाड़ी में ब्लैक ग्लास लगा था...




 स्नेहा दीदी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी पैंटी को थोड़ा सा अपने चुत के ऊपर से हटा और उनकी गुलाबी चुत रोहित के आंखों के सामने थी…




 रोहित उसकी गुलाबी चुत देख के मस्त हो चुका था...लेकिन फिर भी अच्छे से देखना


 चाहता था...




 रोहित : दीदी जरा पैंटी निकल के दिखो ना...




 स्नेहा दीदी: यहां पर कोई देख लेगा….




 रोहित को भी ये बात समझ में आ गई और उसे अपनी गाड़ी को एक सनसन रेट पे दाल दिया और थोड़ी डेर में जब उसे गाड़ी रोकी तो वो एक सुन रास्ता था…..




 स्नेहा दीदी को भी लगा की यहां कोई दीकत नहीं है... और उसे अपनी पैंटी निकल के बहार कर दिया और ब स्नेहा दीदी की छुट रोहित के आंखों के सामने था और रोहित बड़े प्यार से इस्तेमाल किया...




 रोहित की नजर स्नेहा दीदी की चुत पे थी, और उसका मन कर रहा था की वो अपना लुंड निकला के स्नेहा दीदी की गुलाबी चुत में दाल दे...  तयार हो रही थी तो बस उन्हे इस्तेमाल करने के लिए


 सुलगना था….




 रोहित : दीदी...क्या मस्त चुत है आपकी...एकदम गुलाबी...मैंने आज तक ऐसी चुत नहीं देखी..




 स्नेहा दीदी: कितनी चुत देखी है तुमने… आज तक।




 रोहित : किसी और की नहीं...बस मैंने मम्मी की और मनीषा दीदी की छुट ही देखी है...




 स्नेहा दीदी: क्या?  तुमने चाची और मनीषा के साथ सेक्स भी किया है?

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