Meri Doctor Maa Aur Behne Chapter 6

 



Meri Doctor Maa Aur Behne  Chapter  6



रोहित : नहीं दीदी... बस मैंने उन कपड़ों को बदलो करते और नहीं देखा है...।




 रोहित : रोहित सच में तुमने उन्हें कबल नहीं और कपड़े बदलते हुए... सच सच बोलना...




 रोहित : सच में दीदी...हा मनीषा दीदी को जीजू के साथ भी देखा है...




 स्नेहा दीदी: ओह हो..ये हुई ना बात...तो क्या मनीषा और मौसी की चुत गुलाबी नहीं है...




 रोहित: नहीं दीदी...गोरी है...लेकिन गुलाबी नहीं है आप जैसी...




 स्नेहा दीदी: और जब तुम्हारे जीजू मनीषा को छोड रहे थे तब तुम्हारे जीजू का लुंड मनीषा के चुत में आते जाते देखा होगा...




 रोहित : हा दीदी..देखा था….




 स्नेहा दीदी..रोहित के सर पर एक हाथ मरती है….




 स्नेहा दीदी: बहुत ही बदमाश है तू… छुप छुप के दसरे की छुडाई देखता रहता है…




 रोहित : क्या करे दीदी..जिसी इतनी मस्त बहने हो वो देखे भी नहीं ऐसा कैसे हो सकता है...




 स्नेहा दीदी : ओके बाबा... थिक है..इसमे कुछ भी गलत नहीं है मेरे हिसब से...




 रोहित : थैंक यू दीदी...




 स्नेहा दीदी: जीजू का लुंड कितना बड़ा था…. मतलब लंबी कितनी थी…




 रोहित : सच बताउ दीदी तो जीजू का लुंड बहुत छोटा था..और पाता भी यही कुछ 5-6 इंच...




 स्नेहा दीदी: तू तो ऐसा बोल रहा है जैसा तेरा बहुत बड़ा हो...




 रोहित: ये मुझे नहीं पता...लेकिन जीजू से तो जरूर बड़ा है मेरा...




 स्नेहा दीदी: कितना बड़ा है तेरा...दिखा मुझे...




 रोहित : यहाँ पे...हम रोड पे है...




 स्नेहा दीदी: लेकिन यहां कोई तो नहीं आ जराहा है...मैंने तो अपना दिखया तुझे..अब तुझे क्या दीकत है..



 रोहित : ओके दीदी... अभी दिखता हूं...आप नहीं मानेगी...

  



 रोहित ने अपने पंत का जिप खोला और एक हाथ और दाल के उसे अपना लुंड बहार निकला लिया..



 स्नेहा दीदी उसका लुंड देखते ही खुश हो गई….क्योकी रोहित का लुंड 9 इंच के बराबर में था… और स्नेहा दीदी के चेहरे के भाव बताता रहे थे की उन्हे ये पसंद आया था…स्नेहा

 दीदी जोश में अपनी एक उंगली छू के अंदर दाल छुकी थी और इस्तेमाल और बाहर करने लगी थी...रोहित भी अपने लुंड को ऊपर करने लगा..वैसे इतनी कामुक बाते और स्नेहा दीदी का चुत देखके उसका लुंड कर वैसा ही  ..



 स्नेहा दीदी से रहा नहीं गया और हमें रोहित से स्नेहा दीदी: रोहित...मेरे भाई तुम्हारा तो बहुत बड़ा लुंड है...



 रोहित : सही में दीदी….



 स्नेहा दीदी: हा..सही में।



 रोहित : आपने इससे बड़ा लुंड देखा है….



 स्नेहा दीदी: हा देखा है..लेकिन अभी तेरा लुंड मेरे सामने है...मैं पकाडू इसे...



 रोहित : क्यों नहीं दीदी...ये आपा ही है...



 स्नेहा दीदी ने बिना बक्त गबाये हुए अपना हाथ रोहित के लुंड पे रखा और ऊपर आला करने लगी … रोहित तो जैसे जन्नत में था… स्नेहा दीदी रोहित के ऊपर घुकी हुई थी और उनकी बड़ी से शरीर से रोहित



 रोहित : दीदी... अगर आप बुरान अ माने तो क्या मैं आपका बूब्स दबा सकता हूं...



 स्नेहा दीदी: इसमे पुछे की क्या जरूरत है...मन कर रहा है ना दबा ले...



 रोहित ने अपने दोनो हाथ स्नेहा दीदी के दोनो बड़े मम्मे पर रखे और इस्तेमाल बहुत ही प्यार से कपड़े के ऊपर से ही दबने लगा…..



 स्नेहा दीदी को इस बात की जैसी परवाह नहीं थी की वो घर में नहीं है..बहार एक सुन्से रास्ते पे है...और किसी भी बक्त कोई वहां से गुजर सकता है...



 स्नेहा दीदी आगे को घुक के रोहित के लुंड को पाकर कर उसकी चमारी को ऊपर आला कर मुठिया रही थी और रोहित भी मौके का फैसला उठा के स्नेहा दीदी की दोनो मस्त

 चुचियों को दबा रहा था…



 रोहित का मन हुआ की वो स्नेहा दीदी के मुम्मे को आजाद कर दे और इस्तेमाल दबाय… तो उसे दीदी से ही पूछ लिया..



 रोहित : दीदी..क्या मैं आपका टॉप निकल डू...



 स्नेहा दीदी: नहीं अभी रुको...



 कुछ डेर तक स्नेहा दीदी रोहित के लुंड के साथ हाथो से खेलती रही फिर उसका मन हुआ की

 मुखमैथुन किया जाए...वो रोहित से बोली...



 स्नेहा दीदी : रोहित मैं इसे मैं लेना चाहता हूं...



 रोहित : इस से बढ़िया बात क्या हो सकती है दीदी...आज जरूर अपने मुह में लिजिये इसे...



 स्नेहा दीदी ख़ुश हो गई और उसने रोहित को अपना जोड़ा फूटने के लिए बोली और उसे जैसे ही अपनी टैंगो को कार की सीट पर रखा ..  केद उर कर दिया…



 अब रोहित स्नेहा दीदी के सामने आधा नंगा था … स्नेहा दीदी उसके जोड़े के बीच में आ गई और थोड़ा सा घुमा के लिए अपना मुह रोहित के लुंड पे लगा दिया उसने और उसे अपने मुंह से लार से सराबोर करने लगा...  से रोहित का लुंड बिलकुल चमक रहा था…



 स्नेहा दीदी की उम्र घुके होने की बजा से रोहित को स्नेहा दीदी के ब्लू टॉप से ​​उनकी दोनो

 चुचियां साफ नजर आ रही थी... लेकिन कुछ नहीं कर सकता था...



 स्नेहा दीदी लुंड चुनने में माहिर थी और उसे बहुत ही प्यार से रोहित के लुंड को अपने मुह के अंदर लेति और निकलती थी….



 स्नेहा दीदी अपने कम में लगी थी और रोहित नजर कभी स्नेहा दीदी पेट ही तो कभी

 रोड पे..की कही कोई यहां से गुजरे हुए उन देख ना ले...



 रोहित का मन हुआ की स्नेहा दीदी अपने स्तन से उसके लुंड की छुडाई करे… और उसे स्नेह दीदी से अनुरोध किया..



 रोहित : दीदी... आप अपने चुचियों को मेरे लुंड प्रति कृषि न बहुत मजा आएगा...



 स्नेहा दीदी: तू उस्ताद है...मैं तुमको कम समझ रही थी...



 रोहित : आप जैसी बहनो के होते हुए..कोई भाई कैसे चुप रह सकता है...



 स्नेहा दीदी: तो क्या तुम मनीषा के साथ भी ये सब करना चाहता है..



 रोहित : कर्ण तो चाहता हूं... लेकिन दीदी नहीं मांगेगी...



 स्नेहा दीदी: चिंता मत करो..मैं अभी यहां हूं ना..मैं तुम्हारी मदद करुंगी..और देखता हूं की मनीषा कैसे नहीं मानता है...



 रोहित : थैंक यू दीदी..आप मेरी प्यारी दीदी हो...



 स्नेहा दीदी ने रोहित की बात मान ली और उसे अपने ब्रेस्ट को टॉप के अंदर से सिद्ध बहार कर लिया और अपने बड़े बड़े दोनो चुचियां बाहर आई तो रोहित किन अजर उस पर टिकी हुई थी …  जोश में आ गया ……उसका लुंड और भी तन गया..



 स्नेहा दीदी ने अब अपने दोनो चुचियों को पक्का के रोहित के लुंड को उसके बीच में

 दबया और ..phr अपनी चुचियो से रोहित को छुडाई का आनंद देने लगी … दीदी की बड़ी बड़ी चुचियां रोहित के लुंड के ऊपर आला हो रही थी और रोहित भी अपने लुंड को आला से ऊपर दक्का लगा रहा था …  समय था उसके लिए…





 कुछ डेर तक स्नेहा दीदी ने उसी तरह से रोहित के लुंड को अपनी चुचियों के साथ रागरती रही फिर उसे अपने मुह को रोहित के लुंड से लगा और जोर से उसके लुंड को अपने मुंह के और लगा बाहर कर



 और फिर रोहित के लिए वो समय आ गया जहान से रखना मुश्किल हो गया और रोहित के लुंड से पिचकारी निकली और...


 स्नेहा दीदी के हाथ..मुह और उसकी चुचियों के ऊपर गिरी..स्नेहा दीदी ने अपने मुह और चुचियों पर लगे हुए वीर्या को साफ किया...



 फिर उसे रोहित के लुंड को भी साफ किया और अपने कपड़े थिक बढ़ने लगी..रोहित ने फिर से स्नेहा दीदी के चुचियों को पक्का कर दबया और वो इस्तेमाल करने में मुझे लेने लगा...तो स्नेह दीदी ने इस्तेमाल किया...



 स्नेहा दीदी: अभी मैं इंडिया में ही हूं...तुम्हें बहुत टाइम मिलेगा..



 रोहित : ओके दीदी..बाद में...



 फिर रोहित ने अपने कपड़े थिक किए और घर देखी तो फिल्म का टाइम हो गया था और उसे गाड़ी को सिनेमा हॉल की तरफ घुमा दिया...


 रवि सिनेमा हॉल के बहार टिकट लिए हुए इंतजार कर रहा था... जैसा था वैसा ही बॉक्स का टिकट लेने के लिए वैसा ही था...उसका लुंड ये सोच के खरा हो रहा था की  स्नेहा दीदी आज उसके साथ बगल में बैठे के वयस्क फिल्म देखेंगे….





 ये एहसास बार बार उतेजित कर रहा था और वो अपने हाथ से अपने लुंड को पंत के ऊपर से डबा कर संत कर रहा था…





 रोहित अभी तक नहीं आया था और फिल्म सुरू हो चुकी थी…लेकिन उपयोग फिल्म कौन सी देखनी थी तो स्नेहा दीदी का करीब चाहिए था….और संजोग से ये मौका मिल गया था..फिल्म देखने के लिए गया था लोग नहीं  और जो भी आए थे सब के सब आला स्टाल में ही बैठे रहे थे…



 तबी उसे देखा की रोहित अपनी गाड़ी को सिनेमा हॉल के कैंपस के अंदर लेके आया..रवि घाट से उसके पास पाहुचा...उसने स्नेहा दीदी को नमस्ते किया और रोहित पे गुसाने लगा..



 रवि: फिल्म सुरु हो चुकी है...कहां रुका था इतनी...डर।



 रोहित : कहीं नहीं...ट्रैफिक ज्यादा था ना..इस्लिये आने में टाइम लग गया...



 रवि : ओके..कोई बात नहीं... चलिये दीदी..मूवी सुरू हो चुकी है..



 स्नेहा : चलो...बरना कुछ समझ में नहीं आएगा...



 रवि मान ही मन सोच रहा था वैसा भी मुझे कौन सी ये फिल्म समाधान है...



 क्या बक्त अच्छा ये था जब वो हॉल के अंदर घुस रहे थे तो वहां कोई नहीं था और है बज से उन कोई सरमिंडीगी महसूस नहीं हुई की एक बड़े घर की लड़की वयस्क फिल्म देखने को हॉल में आई है...



 जैसे ही ये तीनो बॉक्स में घुसने लगे वहां पे एक मोटा सा आदमी...जिसी बड़ी बड़ी मुंहे थी और तोंड आने को निकली हुई थी खरा था...



 टिकटचेकर : कहन घुसे जा रहे हो भाई..टिकट तो दिखाओ..



 रवि : तुम लो टिकट...



 और उसे अपना टिकट उसके हाथ में थामा दिया...वो मोटा पहले टिकट देखा फिर जैसे ही उसे नजर स्नेहा दीदी के ऊपर गई...वो घुर कर देखने लगा...



 टिकट चेकर: क्यों मुझे आए हो…



 उसे रोहित के कांधे पे हाथ रख के कहां...



 रोहित समझ नहीं पाया उसकी बात..लेकिन रवि उसकी बात का मतलब समझ गया था और उसे रोहित को अंदर आने का इसरा कर के टिकट चेकर से बोला...



 रवि : सब तो माजे तो हाय आते है भाई...



 टिकट चेकर: लेकिन सबकी किस्मत आप जैसी नहीं होती है...उसने रवि से धीरे से बोला, स्नेहा दीदी और रोहित जेक अपने सीट पे बैठा चुके थे...



 रवि: अच्छा ये तो बताओ..और कोई तो नहीं आएगा यहां पे..भी।



 टिकट चेकर: क्या कोई नहीं आएगा आप मुझसे रहेंगे...बस मेरा ख्याल रखना...



 रवि मुस्कुराते हुए और चला गया और वो भी अपनी सीट पे जेक बैठा गया ... स्नेहा दीदी रोहित और रवि के बीच में बैठी हुई थी और उसे नजर सामने परदे पेट ही जहान पे एक लड़का एक था अधर सी महिला के होथन को।



 रवि … तो फिल्म देखने आया ही नहीं था..वो तो बस अपनी तिरछी नजरों से स्नेहा दीदी के बड़े बड़े मम्मे पे अपनी नजर गडे हुए थे…



 स्नेहा दीदी सामने परदे पे चल रहे लव सीन देखने में बिजी थी और रवि स्नेहा दीदी के बड़े बड़े मम्मे को देखने में बिजी था...



 ऊपर में स्नेहा दीदी के उठे हुई चुचियों को देखने के रवि से रहा नहीं जार आहा था और वो थोड़ा सा स्नेहा दीदी की तरफ झुक गया और अपनी कोहली को स्नेहा दीदी के पास रखा अभी भी उसमें  था।



 रवि में देखा रोहित की भी नजर सामने फिल्म पे थी और स्नेहा दीदी की भी..तो उसे देखने अपनी कोहनी को थोड़ा और उम्र कर के स्नेह दीदी की चुची से सात दिया...उसके तन बदन में एक करंट दौड़ गई...



 उसने एस अनुभव का इस से पहले बस एहसास ही किया था और आज का उपयोग स्नेहा दीदी की चुचियों को इतने नजदिक से टच करने का मौका मिल रहा था….



 जैसे ही उसे ये देखा की उसे कोहनी स्नेहा दीदी के बड़े चुचियों से टच करने के बुरे भी स्नेहा दीदी की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई तो उसे हिम्मत खराब गई और उसे अपनी कोहनी का दबाव स्नेहा दीदी के मां और उसे भी  स्नेहा दीदी बस आगे की तरफ ही नजर टिके हुए हैं...



 रवि की हिम्मत और बड़ी और उसे अपना एक हाथ स्नेह दीदी की जंगों के ऊपर रख दिया ... जब स्नेहा दीदी की तरफ से कोई विरोध नहीं हुआ तो अपने हाथों को स्नेहा दीदी की ऊपर फेरे लगा...



 स्नेहा दीदी ये सब देख और समझ रही थी पर उन्हे भी माजा आ रहा था…



 रवि ने अब अपना एक हाथ स्नेहा दीदी के चुचि पे ऊपर ही रख दिया और हिम्मत करके अब प्रेस कर दिया..अब तो स्नेहा दीदी का ध्यान इस तरह आना ही था...



 स्नेहा दीदी ने रवि के कान के पास आके हलके से बोली..



 स्नेहा दीदी: क्या कर रहे हैं..हाथ हटाओ...



 रवि: प्लीज दीदी ऐसा मत बोलिए अपने आपको नहीं रोक पा रहा हूं...बस थोड़ा सा..



 स्नेहा दीदी: रोहित क्या सोचेगा..गलत है ये..



 रवि : कुछ गलत नहीं है दीदी..बस आपको मजा आ गया है ना... प्लीज इसे दबने दिजिये...


 और वो बिना रुके हुए और हिम्मत दिखते हुए स्नेहा दीदी की चुची को जोर से दबने लगा...



 स्नेहा दीदी ने उसका हाथ पकड लिया और फुसफुसाते हुए बोली...




 स्नेहा दीदी : टॉयलेट जेक मेरा इंतजार करो….



 रवि की जैसे मन की मुराद पूरी हो रही थी...उसने झट से स्नेहा दीदी की चुचियों को छोटा और बोल पड़ा...



 रवि : आप जल्दी आई दीदी..वेट कर रहा हूं मैं...



 और फिर रवि वहां से उठा कर टॉयलेट तारफ बढ़ा गया...



 रवि टॉयलेट में पाहुच कर स्नेहा दीदी के आने का इंतजार कर रहा था... अभी कुछ 2 मिनट हाय गुजरे की स्नेहा दीदी टॉयलेट में पहुच गई टॉयलेट कफी बड़ा था...



 रवि की जैसी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा स्नेहा दीदी को टॉयलेट में भूत देखकर।



 रवि : थैंक्स..दीदी...



 और रवि ने आगे बढ़कर स्नेहा दीदी के गाल पे एक चुंबन जार दिया..स्नेहा दीदी तयार होके ही आई थी आज चुदने के लिए...



 स्नेहा दीदी: बस … जल्दी करो… नहीं तो कोई आ जाएगा



 रवि : ओके दीदी..जल्दी ही करते हैं...



 और उसे स्नेहा दीदी की टॉप को निकालने की कोषिश की... स्नेहा दीदी: पहले अपना समान तो दिखो रवि.. अभी तक बच्चे हो या जबान हो चुके हो..



 रवि ने अपने जींस का जिप खोला और अपना लुंड निकल कर स्नेहा दीदी की आंखों के सामने में कर दिया...



 स्नेहा दीदी ने रवि के लुंड को हाथ में पक्का और इस्तेमाल हिलाने लगी...रवि का लुंड पहले से ही खरा था..और स्नेहा दीदी का हाथ लग गया ही और खरा हो गया..



 स्नेहा दीदी किसी विशेषज्ञ की तरह से उसके लुंड उलट पलट के देखता रह... फिर उसे रवि के लुंड को अपने मुह के अंदर कर लिया..रवि को ऐसा लगा जैसा वो जन्नत की सैर कर रहा है...


 और रवि मस्ती से अपना लुंड स्नेहा दीदी से चुसबाने लगा … स्नेहा दीदी कुछ डर तक उसके लुंड को चुनौती रही … फिर जब रवि को लगा की आगर ज्यादा दीदी ने उसके लुंड को चुसा तो वो स्नेहा के... और



 रवि : दीदी...अब बस थोड़ा आगे बढ़ते हैं...


 स्नेहा दीदी : बहुत जल्दी हर मन गए...



 रवि : आप है ही इतनी मस्त दीदी की जल्दी से बस आपको चोदने का मन कर रहा है...



 स्नेहा दीदी: ठीक है..चलो..आगे बढ़ते हैं...



 स्नेहा दीदी खारी हो गई और उसे अपना स्कर्ट ऊपर कर लिया और उसकी बड़ी बड़ी चुतर रवि के आंखों के सामने था…



 रवि ने स्नेहा दीदी की छुत्रों को पहले अपने हाथ से सहल्या और फिर उसे स्नेहा दीदी की पैंटी को थोड़ा सा साइड करके अपना मुह स्नेहा दीदी की मस्त चुत से लगा दिया … स्नेहा दीदी की चुत से बहुत सुंदर रही  को सुन के रवि और मधोश हो रहा था...



 और इन दोनो को हलत में देख कर कोई और मधोश हो रहा था... कौन?



 और कोई नहीं..टिकट चेकर ने स्नेहा और रवि को टॉयलेट में जाते देख लिया था..सेक तो इस्तेमाल से ही था..लेकिन वो उसके पीछे से टॉयलेट के दरबाजे पे आके खरा हो गया था और

 वही से दोनो को अपना काम करते देख उसका भी मन खराब होने लगा ... लेकिन अभी वो पुरा देखा देखने में दिलचस्पी था ... इसलिये बस वही पे खरा होकर सही बक्त का इंतजार कर रहा था ...



 मैं रवि स्नेहा दीदी की बड़ी बड़ी चुनौतियों के बीच अपनी नाक घुसे हुआ था और स्नेहा दीदी की गांद और चुत का सुन रहा था... फिर उसे अपना जीवन निकल के स्नेहा दीदी की हसीन चुत के मुहाने पर।  ..ये सोच के आज उसकी किस्मत खुल गई की स्नेहा दीदी की चुत और गान और उसके सामने खुली हुई थी...



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 जवाब

 बकचोदइंजीनियर

 मेहमान

 

 #17 29-12-2019, 07:16 अपराह्न

 स्नेहा दीदी आगे को झुकी हुई थी और उनकी बड़ी बड़ी चुत्तर कयामत लग रही थी और फेल जाने की बजा से..



 रवि अब अपनी जीवन को स्नेहा दीदी की छुट किप हांक में दाल के उपयोग और करने की कोषिश

 करने लगा ... स्नेहा दीदी भी सिसकारी मार रही थी और जोश में अपनी चुचियों को

 डबा रही थी…


 उधार टिकटचेकर भी अपना लुंड बहार निकला चुक्का था और इस्तेमाल सहला रहा था..उसका आदमी तो कर रहा था की वो भी कुद जाए उसके बीच में..लेकिन यूज ये सब देखकर भी बहुत मजा आ गया।






 रवि ने एक हाथ आगे करके स्नेहा दीदी की लतकाती हुई चुचिओं पे अपना हाथ रखा और फिर इस्तेमाल दबने लगा..इधर अपने जीवन से उसे चुत को भी छोड़ रहा था..स्नेहा दीदी


 सिसकारियां मार रही थी..






 स्नेहा दीदी: रवि अब और अपना हाथियार दाल दो जल्दी..अब बरदस्त नहीं हो रहा..






 रवि : ठीक है दीदी...






 और रवि ने स्नेहा दीदी की बात माने हुए अपना लुंड उसकी चुत से लगा..थोड़ा सा उसके ऊपर इस्तेमाल रगदा और फिर रवि ने स्नेहा दीदी की चुत के छेद से अपने लुंड को लगाकर धीरे से एक बिन्दका दिया में  ज्यादा लुंड स्नेहा दीदी की छुट के अंदर चला गया…














 रवि ने स्नेहा दीदी की छतर को अपने हाथ से पक्का और तबरतोद डक्के लगाने लगा... फच फच की आवाज से बाथरूम गंज उठा..स्नेहा दीदी की चुत पहले से ही पनिया गई

 मैं



 थी और रवि का लुंड स्नेहा दीदी की चुत में अब आसन से घुस रहा था ... कुछ डर तक स्नेहा दीदी को वैसे ही खरे खड़े होने के बाद अवी ने स्नेहा दीदी को थी आला फ्लोर पे लेने के लिए और बोला।  तबी रवि को वहा पे कोने में कुछ बोरी मिल दिखा..उसने अपना लुंड स्नेहा दीदी की छुट से बहार निकला और..कोने से बोरियां उठा के उसे फर्श पे लगा दिया..






 अब स्नेहा दीदी को उसके लिए जाने को बोला और जैसा ही स्नेहा दीदी उसपे लेति रवि उसके बगल में जाने दें कर स्नेहा दीदी की टैंगो को ऊपर कर साइड से उसे अपना लुंड स्नेहा दीदी की चुत में घुसया और दक्के देने ला...






 उधार टिकट चेकर प्योर जोश में अपने बड़े से लुंड को झटके दे रहा था… रवि ने स्नेहा दीदी का टॉप उसकी चुचियों से हटा दिया था और उनी दोनो चुचियों को भी दबा रहा था और अपना लुंड भी जोर से साथ उनके साथ  अंदर दाल रहा था…






 अब रवि ठक चुक्का था और बस उसे माल निकले ही बाला था..तो उसे स्नेहा दीदी को बोल दिया।






 रवि: दीदी अँदर तो नहीं गिराना है ना...






 स्नेहा दीदी: नहीं पागल..और नहीं...






 स्नेहा दीदी ने लुंड बहार निकले का इसरा किया और उसे अपना टॉप भी उतर दी ..रवि भी पूरी तरह से नंगा स्नेहा दीदी के सामने था और स्नेहा दीदी भी .. स्नेहा दीदी ने रवि को इसरा किया और बोर किया और दिया  …स्नेहा दीदी उसके ऊपर उल्टा जाने दें और अब रवि के


 मुह के एक उम्र स्नेहा दीदी की छुट थी और रवि का लुंड स्नेहा दीदी के सामने … स्नेहा दीदी ने रवि के लुंड को अपने मुह में लिया और अपने मुह के अंदर बाहर करने लगी…






 उधार टिकट चेकर के मोबाइल पे रिंग आया..मोबाइल साइलेंट था इसलिय उसकी आज स्नेहा और रवि को नहीं सुना दी..






 टिकट चेकर : हा बोल गोपाल..






 गोपाल: अबे श्याम क्या मुठ मार रहा है... बहुत हॉट देखा चल रहा है फिल्म में।






 श्याम: अबे देखा तो बहुत ही गर्म चल रहा है लेकिन बिलकुल लाइव..






 गोपाल: क्या लाइव...कहां?  कैसे?






 श्याम : तू ऊपर बॉक्स में आ फिर बताता हूं...






 गोपाल : अभी आता हूं..






 श्याम ने फोन कट कर दिया...गोपाल उसी के साथ आला का टिकट चेकर था...वो उसका


 इंतजार करने लगा और अपना हाथ फिर पे लुंड पे ले जेक मुथियाने लगा...






 रवि स्नेहा दीदी की चुस जर अहा था और स्नेहा दीदी रवि के लुंड को चुने जा रही थी, इस बात से अंजान की कोई उनको देख रहा है….






 स्नेहा दीदी प्योर जोश में रवि के लुंड को चुस रही थी और रवि स्नेहा दीदी की छुट में अपना जीभ डाले इस्तेमाल मजा देने में व्यस्त था ... उन दोनो को ये नहीं पता था की श्याम


 (टिकट चेकर) बड़ी डेर से खरा उन्हे देख रहा है और अपना अपना लुंड पकडे उपयोग हिला


 रहा है।






 श्याम अपना लुंड निकले हुए उपयोग हिला रहा था और उसे देखा की स्नेहा रवि के लुंड

 छुटे हुए आखिरकार हमसे से वीर्य निकल ही दिया


 और स्नेहा अभी भी रवि के ऊपर लेटी..उसके लुंड पे लगे हुए जूस को चैट करने में लगी थी..की तबी गोपाल भी वहां पे पहुच गया।




 गोपाल की नजर टॉयलेट के अंदर नहीं गई थी और उसे श्याम के मुखातिब होते हुए बोला..



 गोपाल : क्या हुआ दोस्त...कहा लाइव चल रहा है...



 श्याम ने सामने की तरफ इसरा किया….



 श्याम: लेट होग ऐ … इनकी चुदाई खतम हो चुकी है..



 उसे इसलिये बोला क्योकी अब वहन पे सामने स्नेहा ने रवि के लुंड में लगे शुद्ध वीर्य को चैट छुकी थी और रवि भी शांत होके स्नेहा के ऊपर से बढ़ने का रहा था…



 गोपाल: अरे साला….क्या माल है….यार…



 उसकी नजर जैसे ही स्नेह के लिए बदन पे गई...वो भी अपने लुंड को हाथ से रोके नहीं पाया...



 श्याम : बोला था ना... अब क्या?




 गोपाल : अभी तो बहुत कुछ बाकी है... यहां कोई नहीं है इनके अलाबा... चलो हम भी लग जाते हैं..और अपना हाथ साफ कर लेते हैं इसपे।



 श्याम: लेकिन यार..कोई लफ्दा नहीं ओ जाए...



 गोपाल : अब जो होना है हो जाए….. लेकिन मैं इस माल को छोर नहीं सकता… चल आ जा मेरे पिचे..



 और गोपाल तेजी से शौचालय के अंदर घुस गया...और अंदर जाते ही रवि को दांते लगा



 गोपाल : अबे हरामी क्या चल रहा है यहां पे...?



 स्नेहा दीदी और रवि तो देख पूरी तरह से चौक गए... क्योकी हम इतने खो गए थे चुदाई में की उन ख्याल ही नहीं रहा की कोई और भी आ सकता है..और इस बक्त दोनो पूरी तरह से एक दुसरे हैं  हुइ द…



 गोपाल और श्याम को और आते देख कर स्नेह जलदी से हरबद्रकर रवि के ऊपर से उठी और उसे अपना ऊपर उठ के अपने साइन को हमें से ढकने की...



 गोपाल ने रवि को पकारके उठा और एक मंत्र राशिद कर दिया उपयोग..



 गोपाल : सेल क्या ये रंडी खाना समझौता है….बस यहां पे लेक छुडाई सुरु कर दी…



 रवि को कुछ समझ में नहीं आ रहा था और उसके मुह से कुछ निकला नहीं पा रहा था...



 रवि : वाह यू टू….



 गोपाल : चुप कर बिक्री...कोई और भी है तेरे साथ...



 श्याम: हा एक और लड़का इसके साथ आया था...



 वी लोग बात कर ही रहे थे की तबी रोहित वहां पे पहूच गया...रवि और स्नेहा दीदी को नंगे देखकर और दो बाहरी आदमी को भी टॉयलेट में देख कर रोहित को समझ में आ गया की ये कुछ और कर गए थे।



 रोहित : क्या हुआ दीदी... और रवि?



 रोहित अंजान बनते हुए उनसे पूछा…. गोपाल और श्याम को भी समझ में आ गया की लड़की कोई रंडी नहीं बाल्की रोहित की बहन है..वैसे भी लड़की उनको देखने में किसी बड़े घर की लग रही थी ना की कोई।



 गोपाल के मन के कुछ चल रहा था… इन सब बदलते हुए मौहाल को देख के।  गोपाल, श्याम के पास जकर उसके कान में कुछ बोला और श्याम ने पहले तो थोड़ी से आनाकनी की लेकिन फिर उसकी बात मान गया।



 इधर स्नेहा दीदी अभी तक अपनी नंगी बॉडी को अपने टॉप से ​​किसी तरह से ढके हुई थी।  रोहित ये सब कुछ देख थोडा सा अजीब फील किया लेकिन उपयोग मजा भी आया की चलो रवि ने स्नेहा दीदी को छोड दिया।



 गोपाल समय बरबाद नहीं करना चाहता था...उसने अपने आप को बोल्ड किया और स्नेह की तरफ़ मुखातिब होना चाहता था।



 गोपाल : और तुम्हारे अपने घर पर जग नहीं मिला चुदने के लिए जो यहां सिनेमा हॉल के टॉयलेट में आ गई...



 स्नेहा दीदी बोले भी तो क्या..वो तो में सब की बजा से वैसा ही सकते में थी...



 गोपाल : देख रानी... हमें कोई दीकत नहीं है तू किसी से भी चूड़े... तेरी मर्जी। लेकिन हम दो को भी खुश कर दो नहीं तो...



 रोहित ने जैसे ही उसे बोले सुना..आगे बदकर उसे गोपाल को गले से पक्का लिया और..तमतमाते हुए बोला.



 रोहित : सेल तुम्हें पता नहीं की ये मेरी दीदी है और इनसे अगर है तो गला तोड़ दूंगा।



 रोहित कदम काठी में हम से तगरा था...इसलिये उसे ये हिम्मत दिखी... लेकिन गोपाल और श्याम ने पहले ही इनसे निपटाने का सोच लिया था। श्याम अब रोहित के सामने आके बोला।



 श्याम: देखो लदने से कुछ नहीं होगा यहां पे बेटा… अगर अपनी बहन का इतना ही

 ख्याल होता वयस्क फिल्म दिखने के लिए नहीं लता का उपयोग करेगा।



 गोपाल अपना गाला उस के हाथ से छुदते हुए स्नेहा दीदी की तराफ देखा और मुस्कुराते हुए रोहित से बोला…



 गोपाल : देख भाई... अगर तुम लोग हमारी बात नहीं मानेंगे तो हम यहां पे पुलिस और

 मीडिया वालों को बुला लेंगे..उनके सामने ये बात आते ही ट्यून बॉक्स का टिकट लेके एक एडल्ट फिल्म देखने किसी लड़की के साथ आया था.. बात क्लियर हो जाएगी की बस इसे चुनने के मसद से ही आया था..



 श्याम : कोई गलत बात नहीं है इसमे... जिसी ऐसी बहन हो वो बिना छोडे रह कैसे सकता है...



 गोपाल : हा यही बात मैं भी सोचता हूं...तू भी जरूर छोटा होगा अपनी बहन को...क्यों हो


 गोपाल रोहित के मुहतीब होके बोलता है...दसरे से इस तरह की बात सुनके रोहित को सरम आ रही थी।


 उधार रवि ने मौका देख अपने कपरे पहन लिए थे।






 श्याम : देखो भाई हम चोदने से ज्यादा चुदते देखने में मजा आता है... और हम तुम्हारे साथी से चुदते हुए


 तुम्हारी बहन को तो देखा लिया...अब जरा तुम इसे छोड के हम दिखा दो।






 गोपाल : हा अगर ऐसा किया तो तुम लोग बिना किसी हैंगमे के चुप चाप अपने घर जा सकते हो।






 रोहित : तुम ऐसा मुझसे कैसे बोल सकते हैं।






 गोपाल ;  तो थिक है हमने इसका वीडियो उतर लिया है तेरे यार से अभी भी मीडिया वाले को बुला के दे देते हैं...हमारी बात मान लो और हमलोग तुम्हें मौका दे रहे हैं अपनी दीदी को चुनने की।






 जहान गोपाल और श्याम मन ही मन खुश हो रहा था की उनकी बात मनने के अलाबा में लोगों के पास और कोई चारा नहीं है वही पे रोहित मन ही मन में खुश हो रहा था की इसी बहाने उपयोग स्नेहा दी का बड़ा चोदने।






 रोहित को पहले ये देखना था की ये गलत है लेकिन क्या करें मजबूरी है...






 रोहित : मैं ये कैसे कर सकता हूं अपनी दीदी के साथ।






 श्याम : अबे ज्यादा ड्रामा मत कर..और सुरु हो जा.  ऐसी बहन हो तो साला मैं रोज़ उसकी छुडाई करू।






 रोहित को लग गया की ये लोग बिना छुडाई के नहीं मानेगे...और उसे अपने कदम स्नेहा दीदी की तरफ़ बड़े..स्नेहा दीदी के पास जेक उससे उनसे कहा।






 रोहित : क्या करू दीदी….






 स्नेहा दीदी: जैसा भी वो है मान लो… और कोई रास्ता नहीं है अपने पास।






 रोहित को पता था की स्नेहा दीदी मना नहीं करने वाली है, इसलिये तो शायद उसे अभी तक अपने कपड़े नहीं पहनने और कबल कपड़ों से


 अपने बदन को ढके हुए थे।






 गोपाल को ये डेरी बरदस्त नहीं हो रहा था..






 गोपाल : अबे जल्दी कर...






 रोहित ने स्नेहा दीदी का हाथ पक्का और अपनी तरफ़ खिचा, स्नेहा दीदी उसे तरफ बड़ी और उसे अपने कपड़े छोड़ दिए और उसे


 उन्नत चुचिया सबके सामने थी और उनकी पूरी हुई चुत जिस से रस तपक रहा था सामने मुझे थी।






 रोहित ने अपना हाथ स्नेहा दीदी की चुटार पर रखा और उपयोग सहलाने लगा… फिर बिना डर ​​किए हुए उसे स्नेहा दीदी को निचे बिछे हुए बोर पर लीता दिया और उनके जांघो के बीच आ गया… अब रोहित ने बिना दिया  दिया और अपने खरे लुंड को थोड़ा हाथ में हिला के स्नेहा दीदी की चुत से लगा ही था की गोपाल बोल पारा।






 गोपाल : बस बेटा... यहाँ पे नहीं पिचे दाल अपने हाथी को...






 रोहित : मैटलैब?






 गोपाल : मतलाब ..ये की इसकी चुत छुड़ते तो हम देख चुके हैं, तू उसे गांद मारेगा..चल अपने लुंड कोई स्की गांद पे लगा।






 स्नेहा दीदी ने समझ लिया की ये उसकी गांद चुदाई देखना चाहते हैं और घोड़ी बन कर रोहित के सामने में बैठ गई..रोहित के सामने स्नेहा दीदी की बड़ी बड़ी चुतर थी।






 रोहित ने अपना हाथ स्नेहा दीदी की चुटार पे फेरा और फिर स्नेहा दीदी की चुत से थोड़ा सा रस निकल के उनके गढ़ के छेद पे लगा...






 उसके फिर से थोड़ा रास स्नेहा दीदी की चुत से लिया और इस्तेमाल अपने लुंड के ऊपर लगा और अपने लुंड के सुपारे को स्नेहा दीदी की गांद के मुहाने पे लगा दिया.. जैसे ही उसे आपने दिया क्या होगा  सी गांद की छेद फेल गई और रोहित का सुपारा स्नेहा दीदी की गांद में समा गया।






 रोहित का ये पहला अनुभव था..और स्नेहा दीदी की मस्त गांद में उसका लुंड घुस रहा था और इस्तेमाल चाहो किसी बहने स्नेहा दीदी की गांद चोदने को मिला रहा था...और ही अंदर वो बहुत खुश था।






 रवि वही खरा हुआ अख़्सोस कर रहा था की उसे स्नेहा दीदी की गंद नहीं मारी…..और दसरी तारफ गोपाल और श्याम पंत के ऊपर से ही अपना लुंड सहला रहे थे।






 रोहित ने जैसा ही देखा की उसका सुपारा और आसन से चला गया ..उसने स्नेहा दीदी की कमर को दो हाथो में पक्का और ताबरतोर ढकके देने लगा...अगले ही पल रोहित का पूरा लुंड स्नेहा दीदी की गढ़ के अंदर था  हल्के दर्द को महसूस कर रहा है, लेकिन उसे रोहित को रोका नहीं और रोहित रुकने वाला भी नहीं था।






 रोहित का पुरा लुंड स्नेहा दीदी की गंद के और घुस चुक्का था और रोहित तबरतो अपने लुंड को और बहार कर रहा था... स्नेहा दीदी की चुचियां हर ढकके पे झूल रही थी ... रोहित की स्नेहा दीदी  झटके में बाहर की तरफ खिचता और फिर से इस्तेमाल पूरा और ढकेल देता था... स्नेहा दीदी के मुह से अब जोर से उह... आह... निकल रही थी।






 रोहित या रवि की नजर गोपाल के तारफ नहीं गई जो की अपने मोबाइल पे इस गांद छुडाई को शूट कर रहा था...रवि अपने सोया लुंड को सहला रहा था...उसका मन भी स्नेह दीदी की गांद मार्ने का था लेकिन उसका समय।






 रोहित और स्नेहा दीदी को किसी और की परवाह नहीं थी ... रोहित अपने लंबे समय को स्नेहा दीदी की मस्त छुरों के बीच और बाहर करने में लगा था ... और वो किसी और दुनिया में खोया था..स्नेहा दीदी भी से मूड दीदी भी  दोनो के साथ फिल्म में देखने का प्लान बनायी थी जो उसकी गान और चुदाई के साथ खतम हो गई थी..अब वो पूरी तरह से खुश थी का उपयोग दो-दो जवान लुंड के साथ


 माजे करने का मौका मिला।






 रोहित अपनी पूरी तकत से दक्के लगाये जार अहा था और स्नेहा दीदी की दोनो मस्त चुचियान उसके हर ढकके पे किसी पेंडुलम की तरह से दोल रही थी और साथ ही स्नेहा दीदी की चुटार भी उसके हर मस्त टाइप से कंपने।






 रोहित अपने लुंड को पुरा स्नेहा दीदी की गंद के अंदर से खिचता और फिर से उनकी गांद के छेड़ पे टीका के जोर से ढकके लगता है


 था….इधर गोपाल और श्याम दोनो ने अपने लुंड बहार निकल लिए और अपने लुंड को हाथो में लेके हिला रहे थे।





 दोनो ने एकदसरे के आंखो में देखा और इशारा किया और फिर अपना लिया और फिर अपना लुंड जाने दिया।  और अपने लुंड का वीर्य स्नेहा दीदी की chutron ke upar udhel diya…



 


 गोपाल से अब रहा नहीं गया….



 गोपाल : चलो बेटा...तुमने बड़े ले लिए अब हमारी बारी है...



 रोहित : ये क्या बक रहे हो...तुमने कहा था की अगर मैं तुम्हारी बात मानूंगा तो तुम

 कुछ नहीं करोगे..



 श्याम: वही तो अभी भी कह रहा है... मेरी बात करेंगे तो हम कुछ नहीं करेंगे और इसकी चुदाई के बाद वीडियो डिलीट कर देंगे नहीं तो तुम्हें पता ही है...



 रोहित को मालुम था की स्नेहा दीदी की अगर ये चुदाई कर भी देते हैं तो कोई फिरक नहीं परने वाला है लेकिन अगर वीडियो इनके पास रहा तो मुसीबत हो जाएगी...



 रोहित ने स्नेहा दीदी की तरफ देखा तो स्नेहा दीदी ने इसरे से हा कर दी….क्या दीकत हो सकती थी आज वो पूरी तरह से चुदने को तयार होके ही आई थी...



 श्याम और गोपाल आगे बढ़े और दोनो स्नेहा दीदी के दो तारफ खरे हो गए ... रवि का लुंड फिर से खरा हो गया था ये सब देखे ...  नहीं था … अभी जब स्नेहा दीदी को कोई प्रेसानी नहीं थी अपनी छुडाई करबने में इस्तेमाल करने के लिए क्या फार्क भाग था और वो तो इनलोगो का एहसान माना रहा था की इनकी बजा से ही सही लेकिन स्नेह स्नेह और मार्ने दीदी का उपयोग करने के लिए …



 स्नेहा दीदी भी आज पूरी चुदाई के मूड में थी..और उसे गोपाल और श्याम के ठोस लुंड जैसे ही देखे उसे चुत में सुरसुरत होने लगी...



 रवि और रोहित के लुंड का मजा तो ले ही चुकी थी...मन ही मन उसे लिया था की एन दोनो के लुंड का भी मजा ले के ही जाएगी आज...



 स्नेहा को देखना भी था की यहां के लोग कितने थे तक जा सकते हैं, उसे ऐसे ही फिल्म देखने का प्लान बनाया था..और जैसा उसे सोचा था आज बिलकुल वैसा ही हो रहा था उसके साथ... साथ में भरपुर ड्रामा भी  …यानी छुडाई भी और चुदाई का सीन भी बना रहा था उसके लिए…



 स्नेहा ने आपको दोनो के हवाला कर दिया...लेकिन वो ऐसा शो भी कर रही थी की वो मजबूरी में ऐसा कर रही है..



 स्नेहा दीदी: रोहित इनके मोबाइल से वीडियो डिलीट कर दो।



 रोहित : हा..अपना मोबाइल दो हम वीडियो डिलीट करना है..



 रोहित ने दोनो से उनका मोबाइल मंगा...दोनो का पूरा ध्यान स्नेहा दीदी के पागलपन बदन पे था और उनहोने रोहित को अपना मोबाइल दे दिया..रोहित ने झट से उनका मोबाइल लिया और सारे मोबाइल को सर्च कर के अच्छे से जो भी वीडियो था सब  के सब वीडियो डिलीट कर दिए और उधार गोपाल ने स्नेहा को पिच से पक्का हुआ था और श्याम ने स्नेहा को आगे से पक्का हुआ था…



 श्याम के दोनो हाथ स्नेहा दीदी के ठोस चूचो पे टिके हुए थे और वो नंगे ही प्यार से स्नेहा की दो कबूतों को सहला रहा था ... पिछे से गोपाल अपने लुंड को स्नेहा की दोनों चुतों के बीच फासा के उपयोग...  नहीं हो रहा था की इतनी मस्त माल इस्तेमाल बैठे बिठाये ही यहां सिनेमा हॉल में मिल जाएगी….



 स्नेहा खरे खरे ठक चुकी थी उसने उनसे अनुरोध किया की जगह देर से जाते हैं...



  और उन दोनो ने स्नेहा की बात मन कर आला में देर से गए और श्याम ने अपना लुंड स्नेहा दीदी की मुह की उम्र कर दिया और स्नेहा दीदी ने बिना एक भी पल गबाये उसके लुंड को अपने मुह के अंदर ले लिया ...  की जांगो को थोड़ा सा ऊपर

  उत्थान और उसे अपने खरे लुंड को स्नेहा दीदी की गांद की छेद के ऊपर लगा दिया…।



  गोपाल ने स्नेहा की पहले से गिली गांद के छेद में अपने लुंड का सुपारा लगा और उसके ऊपर एक जोर का ढाका दिया… गोपाल का लुंड सरकारा हुआ आधा और को चला गया…।



  गोपाल ने अपने लुंड को थोड़ा सा बहार की तरफ खिचा और फिर से एक जोर का ढकका दिया और इस बार उसका पुरा का पुरा लुंड स्नेहा दीदी की गंद के अंदर समा गया...  गोपाल का मोटा और लुंबा लुंड...जो स्नेहा दीदी

  की गांद के शुद्ध अंदर की साथ को भी टच कर रहा था..और गोपाल के हर ढकके पर उसका लुंड उसकी गांद को रागरता हुआ और हिट कर रहा था...वैसे स्नेहा दीदी की मुह में श्याम का लुंड था से उसके मुंह से  आवाज भी नहीं निकल शक्ति थी...



  अब श्याम का भी स्नेहा दीदी की चुदाई के लिए तयार हो चुका था... और वो भी अपना बक्त

  जया नहीं करना चाहता था..उसने गोपाल से कहा की स्नेहा को अपने ऊपर लिटा ले और उसकी गांद मारे और वो ऊपर से उसकी चुत में अपना लुंड डालेगा ...  एक साथ बजाना चाहते हैं...लेकिन स्नेहा दीदी को उनकी बाते देखते हैं हम दोनो भी चुप चाप बस उन्हें चुदते हुए देख रहे हैं...



  अब स्नेहा दीदी गोपालके ऊपर चित होकर लेति हुई थी उनकी चुत ऊपर की या खुली हुई थी और गोपाल आला से उनके गांद में अपना लुंड घुसे हुए था और तबर्तोद अपना लुंड उनकी गांद में पेले जा रहा था।  श्याम भी अपने लुंड को स्नेहा दीदी की खुली हुई चुत के मुहाने पे टिकाया और उसे भी एक जोर का ढका दिया उसका लुंड भी स्नेहा दीदी की चुत में

  बिना किसी खास मुश्किल के आसन से समा गया..फिर क्या है उसे भी अपने लुंड को और बाहर करना सुरु कर दिया और अपने हाथो से स्नेहा दीदी की हिलती दोलती चुचियों को भी दबने लगा...



  स्नेहा दीदी बड़े माजे से अपने दोनो साइड से चुदाई का मजा ले रही थी..दिखाने को उसे ऐसा बना रखा था की हम लोग बस जबर्दस्ती इस्तेमाल छोडे जा रहे हैं और वो बेमन से चुदबा रही है...



  लेकिन गोपाल और श्याम को सब की परवाह नहीं थी हम दो अपनी पूरी तकत से स्नेह दीदी की गांद और चुट का लुफ्त उठा रहे थे ...  बार स्नेहा दीदी गोपाल के ऊपर उलटे लेटी … और स्नेहा दीदी ने अपनी चुत को गोपाल के लुंड से टीका कर उसके ऊपर बैठ गई और फिर उसके लुंड के ऊपर कुदने लगी … गोपाल का लुंड स्नेह दीदी की लगा और।  श्याम भी स्नेहा दीदी के पिचे आ गया और उसे अपना लुंड स्नेहा दीदी के पहले से फैली हुई गान के छेद से लगा और उसे अपने लुंड को स्नेहा दीदी की गंद के और सरकार दिया…।



  फिर इसी पोज़ में स्नेहा दीदी की अगले 10 मिनट तक चुदाई की और फिर श्याम ने स्नेहा दीदी की गांद में अपना पानी चोड़ा और जैसा ही स्नेहा दीदी को लगा की गोपाल भी पानी चोदने वाला है उसके ऊपर से और  उसके उठते ही गोपाल के लुंड ने भी पानी छोड़ दिया और उसकी पिचकारी स्नेहा दीदी की चुचियों पर पड़ी।



  रवि और रोहित ने चेन की सांस ली चलो खेल खतम हुआ... स्नेहा दीदी ने भी जल्दी से अपने

  कपड़े पहनने और रवि और रोहित के साथ बाथरूम से बहार निकल आई..फिर हम लोग वह रुके नहीं और बस जल्दी से कार पार्किंग में आए और अपनी गाड़ी निकल के वहां से घर की तरफ चल दिए...


  वहान बाथरूम में दो यानि गोपाल और श्याम ..माधोशी की हलत में लेटे हुए थे


  उसने तो समझ में ही नहीं आ रहा था की सच में उन लोगों ने इतनी मस्त यानी अपने लाइफ की


  Behtreen chudai kiye hai hakeekat me…




  दोनो ने अपने कपड़े पहने और उसे अपना मोबाइल चेक किया उसमे से वीडियो डिलीट हो चुका जिसे उसे रिकॉर्ड किया था।  वैसा भी उन्हे वीडियो का क्या करना था उनहे तो जो चाहिए था वो मिल चुका था।






  दो अपने अपने काम पर निकल गए।






  डॉक्टर सौम्या का क्लिनिक:






  सुबाह में घर से नाश्ता करके डॉ.  सौम्या और मनीषा, अपने क्लिनिक चली गई और मोहित अंकल अपने काम से निकले गए...रोहित और स्नेहा भी उन लोगों के पिचे फिल्म देखने चले गए।






  इधर डॉ.  सौम्या क्लिनिक तो पहुच गई थी लेकिन उसका मन नहीं लग रहा था और हम से खरा भी नहीं हुआ जा रहा था।  रात की छुडाई के बाद उसका ये हाल था।  रात में उन पुलिस वालों ने उसकी गांद की बहुत बुरी तरह से बंद बाजा दी थी.दुसरी तारफ मनीषा पूरी तारो ताजा लग रही थी...चुदाई तो उसकी भी हुई थी रात में लेकिन इस चुदाई का मन था इस्तेमाल बहुत नहीं दिन से बहुत नहीं दिन से थी  .






  सौम्या ने एक दो मरीज का चेकअप किया और फिर अपने केबिन में आ गई...उसने मनीषा को बुलाया...जैसे ही मनीषा उसके केबिन में आई..






  सौम्या : मनीषा बेटी..मेरी तबियत ठीक नहीं है और सर भी बहुत भारी लग रहा है...






  मनीषा : आप आराम कर लो मम्मी...






  सौम्या: मैंने भी यही सोचा है..मैं घर जा रही हूं..तुम सब संभल लोग ना..






  मनीषा: हां मम्मी... आप घर जाके आराम किजिये मैं संभल लुंगी सब कुछ।






  सौम्या : तो ठीक है..दिकात हो तो रोहित को कॉल कर लेना...वो तुम्हारे मदद के लिए आ जाएगा..






  मनीषा : कोई दीकत नहीं होगी मम्मी...






  सौम्या ने मनीषा को सब समझ के अपनी कार से घर को निकल गई...उसने जाते हुए...मनीषा को बोल दिया की दोफर में एक बार राउंड लगा ले सारे पेशेंट का..






  वैसा भी आज नए मरीज नहीं आए, कुछ कंसल्टेंसी के मरीज आए थे जिन्हे मनीषा और सौम्या ने मिल्कर पहले ही निता लिया था … बाकी छोटे मोटे कमो के लिए जूनियर डॉक्टर या नर्स द हाय।




  सौम्या वहां से निकल गई अपने घर की तरफ। कुछ डर तक बाहरी मरीज को देखने के बाद… मनीषा ओपीडी से निकल कर राउंड लेने को चली गई…




  हर एक रूम चेक करने के बाद … फाइनली मनसिहा पाहुची उस कामरे में जहां पे पवन एडमिट था।




  आपको ये किरदार याद ही होगा...ये पवन वही है जिसे सौम्या से अपना लुंड चुस्बा के ही बांध लिया था..वैसे इस्का आदमी तो सौम्या की चुत मरने का था...लेकिन सौम्य ने बात की अनुमति नहीं दी इस्तेमाल...  तक इसे ना जाने कितनी बार सौम्या का ख्याल करके मुठ मारा था... और बिलकुल थिक हो जाने के बाद भी हॉस्पिटल से जाने का मन नहीं था उसका..उसने सौम्या की चुदाई का जैसा मन बना लिया था...




  मनीषा उसके रूम में लास्ट मी आई क्योकी..उसके रिपोर्ट के उससे वो थिक हो चुका था... मनीषा ने नर्स से पूछा की ये मरीज क्यों नहीं गया है तो नर्स भी कुछ नहीं बता पाई..बस इतना ही कहा की कुछ कुछ  मनोवैज्ञानिक समस्या है और वो बोल रहा है एक दो दिन में वो पूरी तरह से संतोष हो जाएगा फिर जाएगा जहां से…..




  मनीषा ने भी सोचा चलो अच्छा है..बिना कुछ किया अपनी मर्जी से वो बिल पे करना चाहता है तो बुरा ही क्या है….




  मनीषा को पवन और सौम्या के बीच हुई किसी भी बात के नंगे में मालुम नहीं था … बस अभी ये पता चला था की… ये रोगी अभी ये रुकना चाहता है..और उसके यहां दुसरे बिस्तर खाली द इस्लिये उन दी कोई दी कोई  की यूज डिस्चार्ज कर दे….




  जस्ट रूटीन चेकअप के लिए राउंड के बक्ट सीनियर डॉक्टर हर मरीज के रूम में जेक उसका चेकअप करते थे… और अभी सौम्या के नहीं होने से मनीषा को ये काम करना पड़ा था…।




  जब मनीषा ..पवन के रूम में पाहुची उस बक्त वो अकेले थी ... क्यों की वहां कोई इमरजेंसी वाली बात नहीं थी इसलिय दशरे जूनियर स्टाफ लंच को चले गए थे ..और मनीषा ने भी सोचा था की मरीज को देख के लंच करेगा...




  जैसे ही मनीषा ने पवन के कमरे के अंदर पाहुची...वो पवन की हरकत देख चौक


  है।  क्योकी हमें बक्त पवन किसी और काम में व्यस्त था...




  काम?  मतलाब …सौम्या को याद करके खुदा मुठ मारा करता था वो…और इस बक्त बी उसि


  काम में लगा था जब मनीषा उसके कमरे में आई...गनीमत ये थी की पवन ने चादर से अपने लुंड को कवर किए हुए था जिस से कोई अगर और आटा तो काम से काम उसका लुंड नहीं देख पता..लेकिन कोई चादर के और भी  और हिलते उसके लुंड को देखकर ये तो कह ही सकता था की बक्त वो मुथ मारने में लगा हुआ था।




  मनीषा के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी .. लेकिन अस्पताल में भर्ती कोई मेरीज अगर मुथ मार रहा हो ये अजीब जरूर है..पवन ने भी जैसे ही .. मनीषा को कमरे के अंदर देखा सकपाका गया …  के अंदर तने हुए उसे चुचियों को देख सौम्या की याद आ गई और वो बेशरम होके अपने लुंड से हाथ नहीं हटा...




  सामने में खड़ी मनीषा नंगी ही नजर आ रही थी का प्रयोग करें। लग रहा था की डॉक्टर के ड्रेस में सामने खड़ी मनीषा ने अपने चुचियों को उसके सामने आजद कर दिए हैं और उसे आपने पैंटी को आला कीच में और उसके लिए भी चुना है।  और चुनियों को खोले उसके लुंड को आगे बढ़ने के लिए बोल रही है...वो तो बस अपने सपनों की दुनिया में था की तबी मनीषा की आवाज ने हमें सपनों की दुनिया से बहार निकला...




  मनीषा: ये क्या हरकत है...कर रहे हैं यहां पर।




  पवन सपनों से बाहर आते हुए अपना हाथ बहार निकला लिया




  पवन : क्या?  कुछ नहीं डॉक्टर।




  मनीषा : क्या मतलब कुछ नहीं...तुम अभी चादर के अंदर क्या कर रहे थे...तुम यहां ठीक होने आए हो ये सब करने...




  पवन : सॉरी डॉक्टर...लेकिन मैं तो बस...ऐसे हाय।




  मनीषा : क्या ऐसे ही...




  पवन : मैडम..दर्द हो रहा था इसलिय..




  मनीषा : दर्द क्यों होगा... क्या समस्या है तुम्हारा...




  पवन : मैडम...बकी प्रॉब्लम तो ठीक हो गया..लेकिन थोड़ा सा दर्द है...




  मनीषा : कहां पे..दर्द है तुम्हें...




  पवन : मैडम... आप नहीं देख पाएंगे... किसी नर्स को बुला लिजिए।



  मनीषा : मैं क्यों नहीं देख सकती….दिखाओ मुझे

  पवन ने मन में सोचा चलो बड़ी डॉक्टरनी नहीं तो यही डॉक्टर सही है.. कुछ मजा लिया जाए इस से ही...






  पवन : मैडम.. पहले दरबाजा बंद कर दिजिये प्लीज...




  मनीषा : क्यो...मैं दरबाजा क्यो बंद करू..




  पवन : हैं मैडम... कोई देखेंगे तो क्या कहेगा






  मनीषा ने दरबाजे की छिटकनी लगा दी... और फिर से पवन के पास आके खड़ी हो गई।






  मनीषा : चलो अब दिखो कहां पे दीकत है..शर्माओ मत...





  पवन ने सही मौका डेका और बिना हिचक के अपने ऊपर पाए गए चादर को हटा दिया और उसका लुंड तो पहले से ही बहार निकला हुआ था... और मनीषा के वहां पे खरे होने की वजह से पूरी तरह से तन के खरा।




  मनीषदेखा बिना पलक झपके बस उसके मुसल लुंड निहारे जा रही थी ... और उसे ऐसे देख कर पवन के आंखें में चमक बढ़ रही थी ... आज बड़ी डॉक्टर नहीं छोटी के साथ ही रास लीला कर ली जाए ...




  मनीषा : इसमे कैसे दर्द हो सकता है….




  पवन: बहुत दर्द है..मैडम…बरदस्त नहीं हो रहा… इसलिये अपने हाथ से सहला रहा था। लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ..




  मनीषा : तो इसमे मैं क्या कर सकती हूं...




  पवन : आप ही चाह तो कुछ कर सकती है मैडम...आप कुछ किजिये आप डॉक्टर है...प्लज मैडम...




  मनीषा: मैं कुछ नहीं कर सकती, मैं जा रही हूं




  पवन: ऐसा मत बोलिए मैडम, बड़ी डॉक्टर मैम रहती तो मुझे ऐसे छोर के नहीं जाति।




  मनीषा : क्या मतलब है तुम्हारा, मम्मी क्या करती हैं?




  पवन तो तब पता चला की तुम हमें बड़ी वाली डॉक्टर की बेटी है..ओह मां और बेटी दोनी ही माल है।




  पवन : वो होती तो एस्के दर्द को संत कर देता है




  मनीषा : कैसे ?




  पवन: अपने हाथों से और कैसे, पहले भी किया था मेरा मदद




  मनीषा : क्या?




  मनीषा को उसकी बात पे विश्वास ही नहीं हो रहा था की मम्मी उसके लुंड को टच की होगी और यूज सहल्या भी होगा, लेकिन उसका लुंड बहुत तगरा था और मनीषा बस यूज देखे जा रही थी और उसे भी मैन यूज टच हो गया  .




  पवन: मैं सच कह रहा हूं, ऐसे सहला के इसका पानी निकल दिया था फिर दर्द कम हो गया




  मनीषा : ये तो तुम खुद भी कर सकते हो




  पवन: वही कोशिश कर रहा था लेकिन हुआ ही नहीं कुछ, अब आप कुछ करेंगे तो ही होगा




  मनीषा ने न चाहते हुए भी अपना हाथ उसके मुसल लुंड के ऊपर रखा... मनीषा के हाथ लगते ही उसका लुंड फैनफने लगा।  पवन मन ही मन खुशी से झूम उठा...




  मनीषा को समझ में नहीं आ रहा था की ये आदमी मस्ती के मूड में इसलिय किसी तरह से अपने लुंड में दर्द का होना कर रहा है या सच में दर्द रहा है।  रहा था..रात की छुडाई ने उसकी छुट की खुजाली बड़ा दी थी..




  मनीषा बस छुडाई के नंगे में सोची हुई पवन के लुंड को हाथो से पकाकर उपयोग

  मुथ्याने लगी...उसकी उनग्लियां पवन के लुंड के ऊपर आला होने लगी।पवन मस्ती में डूबा अपने आंखों को बैंड किए हुए था।  मनीषा का मन कर रहा था की उसके लुंड को अपने मुह में ले ले, लेकिन उसे अपने आपको कंट्रोल किया।


  एक मिनट तक मनीषा उसके लुंड की चमारी को ऊपर निचे कारती रही और उसके सुपारे को सहलाती रही। फिर मनीषा पवन की तरफ देख कर बोली।




  मनीषा : अब कैसा लग रहा है तुम्हें...




  पवन : आपके हाथ लगने से थोड़ा आराम तो मिला है मुझे लेकिन दर्द अभी भी है मैडम... कुछ और किजिये।




  मनीषा: अब मैं क्या कर सकती हूं…..इस से पहले भी हुआ तुम्हें।




  पवन : हा मैडम हुआ था पहले….




  मनीषा : तो कैसे संत हुआ था...




  पवन: पहले तो बस मेरी बीबी हाथ लगती थी तो दर्द ठिक हो जाता था...




  मनीषा : फिर उसके बाद...




  पवन : जब वो अपने मुह में लेटी थी तो दर्द कम हुआ...




  मनीषा : तुम ये चाहते हो की मैं इसे अपने मुह में लू?




  पवन : बहुत महरबानी होगी मैडम...आप तो डॉक्टर है..




  मनीषा: मैं ऐसा नहीं कर सकती, मैं डॉक्टर नहीं हूं, पत्नी से ही करबना, मैं बस इतना पानी निकल जाती हूं..और कुछ नहीं करूंगी



  और ये बोले हुए मनीषा ने पवन के लुंड को जोर से ऊपर आला करने लगी अपने दो हाथो से।


  पवन तो जैसे आसमां की सैर कर रहा था….इतनी खूबसूरत डॉक्टर और अपने हाथो से उसके लुंड को सहला रही है वैसा इस्तेमाल करें लग गया की ये अभी अभी नहीं मानेगी और ज्यादा जोर लगाना सही नहीं है।




  पवन का मोटा लुंड भी अपने सही साइज में आ गया था..उसका फुला हुआ सुपारा जब जब मनीषा की उंगलीयों से तकराता..पवन के बदन में जैसा झुरझुरी सी दाऊद जराही थी...




  मनीषा पवन के लुंड से खेल रही थी और उसके चुचियां उसके कपड़ों के और दूर दूर रहे थे..उसकी चुत गिली हो रही थी और उसकी चुत से पानी टपकने लगा था..सच तो ये था कि मोहित अंकल ने रात में उसके बाद उसे छोड़ दिया  अंदर के सोए हुए सेक्स की भुख को जगा दिया था और आज सूबा से ही मनीषा चुदने को तयार बैठी थी..लेकिन अपने आप पर नियंत्रण था और उसे बहुत मुश्किल से अपने पे कंट्रोल किया था अस्पताल में क्यों ये वहां था  नहीं कर शक्ति थी।




  उसने पवन के लुंड को जोर से ऊपर आला करते हुए हमें मुकम तक पाहुचा दिया जहान उपयोग लगा की अब इसका लुंड पानी छोड़ दूंगा।



  पवन को भी लगा गया था की उसके लुंड झरने वाला है और उसे सरेंडर कर दिया... पवन के लुंड से उसके विर्या की धार निकली और मनीषा की उंगलीयों को भींगो गई।



  मनीषा ने भी चेन की सांस ली उपयोग लगा वो नियंत्रण नहीं कर पायेगी और कहीं आगे न बढ़ जाये लेकिन अपने आपको रोका और अपने हाथ को चादर से साफ करके हमें काम से निकल गई।

  चले अब देखते हैं सौम्या क्या कर रही है घर पे … अरे ये क्या …… चले सुरु से बताते हैं आपको…।




  सौम्या की तबियत थिक नहीं थी और वो घर चली गई थी ... जैसे ही सौम्या घर पर पाहुची उसे देखा की मोहित अंकल भी घर पे ही, उससे उनसे पूछ ही लिया...




  सौम्या: भैया आप अभी तक घर पर ही है...आप तो किसी से मिलने को जाने वाले थे।




  सौम्या, मोहित अंकल को भैया ही कह कर बुलाती थी।  मोहित हमें बक्त ड्राइंग रूम में बैठा के टीवी देख रहा था, उसे जैसे ही सौम्या को देखा उसका चेहरा खिल गया...उसने सौम्या को जबाब दिया..




  मोहित अंकल: हैं सौम्या..चलो अच्छा हुआ तुम आ गई..अकेला बोर हो रहा था मैं.  गया था एक आदमी से मिलने लेकिन वो अभी दिल्ली से बाहर गया हुआ है।




  सौम्या: चलिये अच्छा है..आपको आराम का मौका मिला गया।




  मोहित अंकल : लेकिन तुम कैसे आ गई... तुम्हारा तो नहीं रहता है आज?




  सौम्या: नहीं..भैया छुट्टी नहीं लेकिन मेरा सर बहुत भारी लग रहा था..इस लिए चली आई मनीषा संभल लेगी सब कुछ।




  मोहित अंकल : अच्छा...सर बहुत दर्द कर रहा है तो बोलो मैं क्रीम लगा देता हूं...कोई बम है घर में...




  सौम्या : आप रहने दिजिये मैं बाबू को बोल देती हूं….




  मोहित अंकल : अरे इसमे क्या है...तुम मुझे बम लेक दो मैं लगा देता हूं...




  सौम्या : ठीक है.. अगर आपको बुरा न लगे तो कोई बात नहीं... मैं अभी देता हूं...




  सौम्य अपने कामरे में गई और वहां से उसे झंडू बम की बहन निकली और लेकर फिर से ड्राइंग रूम में आ गई.उसने वो बम लेकर मोहित अंकल के हाथ में दिया..मोहित अंकल कुछ पालन के लिए हमें सीसी को देखते रहे  को देखा और बोले..




  मोहित अंकल: लेकिन तुम्हारे ज्यादा आराम मिलेगा अगर तुम थोड़ा चलो जाओ... चलो ऐसा करते हैं तुम चलो जाओ..और मैं तुम्हारे सर में बम लगा देता हूं...




  सौम्या से थोड़ा अजीब लगा लेकिन उसे हमी भर दी….दोनो सौम्या के बेडरूम में गए..और सौम्य बिस्तर पे चलो गई..उसने अपने कपड़े भी नहीं बदले ... और मोहित अंकल उसके सिरहाने बैठे और उन फूलों की मदद से सीसी में  से बाम को निकल के


  सौम्या के सर के ऊपर लगा और फिर अपनी सॉलिड उनलियों से उसे मलिश करने लगे...




  सौम्या ने अपनी आंखे बंद कर ली थी और सोने की कोशिश कर रही थी...उसकी आंखे बंद देख कर मोहित अंकल की नजर सौम्या के बड़े बड़े कबूतों पे जाम गए थे...सौम्य की सांसों के साथ उसकी चुचियां भी ऊपर थी।  क्या उसे शर्ट पहनना था और उसे चुचियां उसमे पूरी कासी हुई थी... और उसके सांसों के ऊपर आला होने के साथ उसमें रही थी।  लुंड पंत के अंदर फुफकर्ण लगा था और पूरी तरह से तयार लग रहा था….




  सौम्या की चुचियां और उसे उसको ऊपर आला देख मोहित अंकल अपने आपको रोक नहीं पा रहे थे...मोहित अंकल अपने एक हाथ से सौम्या के सर की मलिश कर रहे थे और दसरी हाथ से वो अपना लुंड पंत के ऊपर से...




  सौम्य अपनी आंख बंद किए गए सोने की कोशिश कर रही थी ...उसने शायद ये नहीं सोचा था की मोहित भैया के मन में उसके नंगे में कुछ गलत ख्याल भी आ सकता है ...  थोड़ा आराम तो मिला रहा था... लेकिन रात की उसकी जबर्दस्त चुदाई एक के बाद एक गान और और चुत में ... तन की भूल को जगा दिया था और है बक्त भी उसकी छुट और थी गान और मैं जलन मच लं राही।  .जब उसके पति जिंदा थे तो उसे चुदाई हर दिन किया करते थे...ये सब सोचते हुए कब उसकी आंख लग गई इस्तेमाल पता ही नहीं चला...।




  मोहित के मन में उसके मोटे मोटे मुम्मो को पकड़ने का बिचार आ रहा था…अखिर वो कब तक आपको आपको रोका और उसे अपना हिम्मत दिखा ही दी…मोहित अंकल ने अपना एक हाथ जो कुछ डर पहले उनके लुंड को थल से...  सौम्या के चुचियों के ऊपर रख दीये... अब उनका हाथ सौम्या के सांसों के साथ साथ उसकी चिचियां के साथ ऊपर आला होने लगी...



  सौम्या को नींद आ गई थी इसलिय इस्तेमाल है बात का एहसास भी नहीं हुआ…..

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