Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ Chapter 3

 



     Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ Chapter 3



मैं सुबह संपत और उसके गिरोह के साथ खड़ा था



वो एक दूसरे को देखने लगे और फिर सभी एक साथ मिलकर जोरो से हंस पड़े …



मैं उन लोगो का चेहरा देखता रह गया



“अबे साले तुझे गॅंग का मेंबर बनना है ना कि कॉलेज मे अड्मिशन लेने जा रहा है .. कुछ ऐसा नाम रख जो कि हमारे गॅंग के हिसाब से सही लगे ..”



सभी का चेहरा सोचने वाला हो गया था



“भाई पप्पू हॅटेला कैसा रहेगा ..”



कोई एक बोला, लेकिन संपत ने उसे घूर कर देखा



“ये तेरे जैसा कोई चिंदी नही है जो चिंदी सा नाम दे रहा है , ये चमन चूतिए वाला नाम आपने गान्ड मे घुसा ले ..”



संपत की बात सुनकर सभी हसने लगे और वो बोलने वाला भी बिना किसी शर्म के दाँत निकालने लगा ..



“सला क्या नाम रखे इसका ..”



संपत अपना सर खुजलाने लगा था



तभी हवेली के आँगन मे बने हुए मंदिर का घंटा बजा..



मैने देखा कि भाभी शिव लिंग पर पानी चढ़ा रही थी और आस्था से अपने आँखे बंद किए हुए थी…



शायद वो मेरे लिए ही कोई दुआ माँग रही थी , शायद मेरी सलामती के लिए या ये कि मैं इस बुरे रास्ते मे भी अपने को बचा कर रखू…



“शिवा ..”



मेरे मुख से अचानक ही निकल गया ..



संपत ने एक बार मंदिर की ओर देखा और उसके होठों मे एक मुस्कान खिल गई ,



“वाह ये हुई ना बात तू आज से हमारा शिवा है , जो उस तिवारी की इट से इट बजा कर रख देगा , उस दानव को उसके करमो की सज़ा देगा ..



हर हर महादेव ..”



“हर हर महादेव …” सभी जोरो से चिल्ला पड़े थे ..


वही मेरी नज़र भाभी पर पड़ी हम दोनो ही हैरत से सभी को देख रहे थे आख़िर ये लोग मुझ जैसे बच्चे पर इतना क्यो भरोसा दिखा रहे थे ..???





दिन बीतते गये और भाभी वहाँ की महिलाओ के साथ रम गई वही मुझे बड़ी ही कठिन ट्रैनिंग दी जा रही थी , 1 ही महीने मे मैने गन चलाना सिख लिया था , मेरा निशाना भी बड़ा ही अच्छा था और साथ ही साथ मेरा शरीर भी अच्छा विकसित हो रहा था ,



मुझे समझ नही आ रहा था की आख़िर ये सब क्यो, लेकिन ये हो रहा था …



एक दिन अचानक संपत ने मुझे बुलाया



“शिवा मैं सोच रहा था कि तुम्हे कॉलेज जाय्न कर लेना चाहिए “



मैने बड़े ही आश्चर्य से उसे देखा



“बात ऐसी है ना कि हमारे पूरे गॅंग मे कोई भी ज़्यादा पढ़ा लिखा नही है , कम से कम तू पढ़ लिख लेगा तो हम तिवारी जैसे आदमी पर भारी

पड़ जाएँगे …”



“लेकिन मामा तिवारी से लड़ना ही क्यो है “



मामा मुस्कुराने लगे



“समझ जाएगा तू फिकर मत कर अभी कॉलेज जाने की तैयारी कर ले और तूने जो नाम बताया था ना उसी नाम से जाएगा तू कॉलेज “



“अंकित ??”



“हाँ वही अंकित के नाम से जाना तू “



“लेकिन मेरे पास उससे रिलेटेड कोई भी डॉक्युमेंट्स नही है “



संपत जोरो से हंस पड़ा



“फिकर मत कर सब एक साप्ताह मे आ जाएगा, तेरा आधार कार्ड से ले कर स्कूल की सारी मारक्शीट तक सभी आ जाएगी..”



मैं बस उसे आँखे फाडे देखता रहा ,



ऐसे इस बात से भाभी बहुत ही खुस थी और दिल के किसी कोने मे मैं भी , लेकिन फिर भी मुझे अब इस जीवन से भी प्यार होने लगा था , मैं सिर्फ़ भाभी और संपत के लिए कॉलेज जा रहा था क्योकि यहाँ इतने दिन रहते हुए मेरे दिमाग़ मे लोगो ने बस यही भरा था की मैं कोई स्पेशल आदमी हू जिसे कोई बहुत ही बड़ा जनहित का काम करना है …









स्वर्गीय रतन चंदानी मेमोरियल आर्ट आंड साइन्स कॉलेज ..



मेरे सामने एक बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था, आज मेरा यहाँ पहला दिन था, संपत मामा ने सब कुछ जुगाड़ लगा दिया था, मैने बीएससी करने

के लिए यहाँ आया हुआ था, ये कॉलेज इस सिटी का जाना माना कॉलेज था और इसकी स्थापना यान के एक बड़े बिज़्नेस मॅन राज चंदानी ने अपने पिता के याद मे बनवाया था..



मैने एक गहरे सांस भारी , मैं थोड़ा नर्वस भी था क्योकि पढ़ाई छोड़े बहुत दिन हो चुके थे , मैं कहा डॉन बनने के सपने देखने लगा था और कहा फिर से वही किताबो का बोझ धोना पड़ेगा , दूसरी तरफ यहाँ मेरा कोई दोस्त भी नही था जिसके साथ मैं थोड़ी मस्ती कर सकता , खैर

सब कुछ सही हो जाएगा यही सोचकर मैं अपने क्लास मे गया और एक पिछे की सीट पर बैठ गया .. क्लास अभी खाली ही थी ..



थोड़ी ही देर मे कोई 50-60 बच्चे वहाँ आ चुके थे ,लेकिन अभी भी लास्ट मे रखी इस सीट मे कोई नही बैठा था , मुझे लगा की शायद मुझे यहाँ अकेले ही बैठना होगा , मैं अपने स्कूल के दोस्तो को मिस करने लगा था , यहाँ सभी किसी ना किसी के साथ था सिर्फ़ मैं ही अकेला था , सभी एक दूसरे से बात कर रहे थे ,ये सामान्य सी बात थी कि यहाँ अधिकतर यही के स्कूल्स के बच्चे आते थे या आस पास के छोटे शहरो और

गाँवो से , और सभी ग्रूप्स मे आते थे , मुझे लगा की मैं किसी दूसरी दुनिया मे पहुच गया हू , ये सभी लोग मुझसे बहुत अलग भी थे ,

अधिकतर तो इंग्लीश मे बात करने वाले थे और मैं ठहरा शुद्ध देसी इंसान ..




सच बोलू तो मुझे शहर आए इतने दिन हो गया था लेकिन मुझे कभी नही लगा कि मैं एक गाँव से आया हुआ हू क्योकि मैं जान भी रहा वो लोग या तो बेहद ही ग़रीब थे या फिर बिना पढ़े लिखे गुंडे , लेकिन आज ये सब मुझसे बहुत ही अलग लग रहे थे , मैने एक सस्ती सी जीन्स और शर्ट पहनी थी जो मुझे लगता था की ये मेरे गाँव के सबसे अच्छे और रहीस या पढ़े लिखे लोगो के बच्चे पहनते थे, लेकिन इन लोगो के कपड़ा भी बड़े ही शानदार थे , लड़कियो को तो जीन्स पहने इतने करीब से मैने आज ही देखा था कुछ तो स्कर्ट मे भी थी ..



इन सब को देखकर मैं और भी नर्वस हो गया था मुझे समझ आ गया था कि मुझे पूरा कॉलेज इस लास्ट की बेंच मे बैठकर अकेले ही बितानी है मेरा कोई भी दोस्त यहाँ नही बनने वाला सभी मेरे स्टॅंडर्ड के बहुत उपर के लोग है , और स्टॅंडर्ड आख़िर मैं मेनटेन भी कैसे करता , कॉलेज की फीस संपत मामा दे रहे थे , मेरा और मेरी भाभी का पूरा खर्च तो वही उठा रहे थे अभी तक मैने उनके लिए कोई काम भी तो नही किया था ..



“कहा फँसा दिया मामा सला मैं गन चलाते हुए ही ठीक था “



मैने अपने मन मे कहा ,



आख़िर पहली क्लास शुरू हुई , ये केमिस्ट्री की क्लास थी एक सिर अंदर आए ..



“आज आप लोगो की पहली क्लास है बच्चो आप सभी का हमारे कॉलेज मे वेलकम , मेरा नाम पवन है और मैं आप लोगो का केमिस्ट्री का टीचर हू .. क्योकि आज पहली क्लास है तो पढ़ाई करने से अच्छा है क्यो ना हम आप सभी का इंट्रोडक्षन ले ले ,आप सभी अपना नाम बोलिए,

आपके 12त स्टॅंडर्ड का पर्सेंट और साथ ही की आप जीवन मे आगे क्या बनना चाहते है “



पर्सेंट इसलिए भी पुछा जा रहा था क्योकि यहाँ दो ही टाइप के लोगो का अड्मिशन होता था या तो जिसने 95% से उपर लाए हो या फिर जिसने मॅनेज्मेंट को अच्छे ख़ासे पैसे खिलाए हो



सिर के बोलने के बाद एक एक करके लोग उठाने लगे और अपना अपना इंट्रोडक्षन देने लगे तभी कुछ लोग क्लास के बाहर आए



“मे आइ कम इन सर “



उनमे से एक ने कहा सिर ने पहले तो उन्हे घूरा



“पहली क्लास मे ही लेट हो तुम लोग , ये कोई टाइम होता है क्या आने का “



“सॉरी सर “



सभी ने एक साथ कहा



“ठीक है अंदर आ जाओ लेकिन याद रखना आज पहली और आख़िरी बार है अब लाते आए तो अंदर आने नही दूँगा “


मैने देखा की वो दो लड़कियो और दो लड़को का एक ग्रूप था ,वो देखने से ही बड़े ही ज़हीन लोग लग रहे थे , दो लड़कियो मे एक ने पिंक और दूसरे ने ब्लॅक स्कर्ट पहनी थी दोनो ही चेहरे से अच्छे घर के लग रहे थे वही उनके चेहरे की चमक और खूबसूरती ऐसी थी कि एक बार को क्लास मे सभी की नज़रे उनपर ही जाकर टिक गई थी , साथ ही दोनो लड़के भी बड़े ही ड्रेसिंग लग रहे थे , वो अंदर तो आ गये लेकिन फिर आँखे घूमाकर बैठने के लिए जगह देखने लगे , पूरा क्लास भरा हुआ था सिवाय मेरे और मेरे बाजू वाले टेबल के एक टेबल मे दो लोग

आराम से बैठ सकते थे और अड्जस्ट करके 3 भी , लास्ट मे खाली टेबल को देखकर सभी की आँखे चमक गई ..वही मेरे दिल की धड़कने अचानक से ही बढ़ गई , मैने तो सोचा था कि मैं पूरे कॉलेज अकेले ही रहने वाला हूँ और ये साले तो बड़े ही हाइ क्लास लग रहे थे पता नही लेकिन मैं और भी नर्वस होने लगा था ,मैं ठहरा गाँव का एक सीधा साधा आदमी पता नही क्यो मेरे दियंग मे अजीब तरह की बाते आ रही थी, मुझे लगा जैसे मैं खुद को इन सबसे इन्फीरियर महसूस कर रहा था और यही कारण था की मेरे दिल की धड़कने भी तेज हो गयी थी ,



“बॉस क्या हम दोनो यहाँ बैठ सकते है ?“



एक लड़के ने कहा, मैने बस हां मे सर हिला दिया



दोनो लड़के मेरे बाजू मे बैठे वही दोनो लड़किया बाजू वाले टेबल मे , बैठते ही उन्होने एक दूसरे के साथ खुसुर फुसुर शुरू कर दी थी किसी ने अभी तक मुझसे कोई बात नही की थी वही लोग एक एक करके अपना इंट्रोडक्षन दे रहे थे , मुझे देख के आश्चर्य भी हुआ कि साले यहाँ

सभी के सभी 90% के उपर वाले ही है ,जब संपत मामा ने मेरी मारक्शीट मे 96% डलवाए थे मैने उनसे कहा था कि मामा ये थोड़ा ज्यदा हो जाएगा ,लेकिन यहाँ आने के बाद पता चला की लोग सच मे इतना लाते भी है ..



अब आख़िरी नंबर. हम लोगो का था , लड़कियो ने शुरू किया ,पहले पिंक वाली खड़ी हुई



“हाई माइसेल्फ नेहा , मेरा पर्सेंटेज 95.56 है और मैं आयेज जाकर बॉटेनी से पीएचडी करना चाहती हू क्योकि मुझे नेचर से बहुत प्यार है और ख़ासकर प्लॅंट्स से “



वो बैठी और ब्लॅक वाली खड़े हो गई



“हाई माइसेल्फ मोनिका, मेरा पर्सेंटेज 92 , और मैं आगे चलकर मोडीलिंग करना चाहती हू ..”



उसकी बात सुनकर सभी का ध्यान उसपर चला गया वो थी भी बहुत खूबसूरत और साथ ही उसका आटिट्यूड और कॉन्फिडेन्स भी कमाल का था , लड़को की नज़र देख कर ही मैं समझ गया था की ये इस क्लास के सभी लड़को के दिल का धड़कन बनने वाली है



उसके बाद साइड वाला लड़का खड़ा हुआ



“हाई मेरा नाम है अर्जित और मेरा पर्सेंटेज है 85% (सभी उसकी ओर देखने लगे क्यो कि ये अब तक का सबसे कम था ,समझ मे आता था कि इसके बाप ने अच्छे पैसे दिए होंगे ) और मैं आगे चलकर राज चंदानी जैसा बिज़्नेस मॅन बनना चाहता हू और इसके साथ ही साथ मैं

मोडीलिंग भी करना चाहता हू “



क्लास की कुछ लड़किया उसे ऐसे देख रही थी कि उनकी आँखो से ही पता चल रहा था कि वो इस लड़के से कितना इंप्रेस है ..



मैने एक बार अर्जित की ओर देखा सच मे उसकी पर्सनॅलिटी मे कोई बात तो थी , लंबा-चौड़ा , गोरा-नारा , हत्ता-कत्ता लड़का था ,साथ ही दिखाने मे भी बहुत ही हॅंडसम था



फिर मेरे बाजू मे बैठा लड़का उठा



“हाई दोस्तो मेरा नाम आकाश है आप मुझे प्यार से अक्की भी बोल सकते है , मेरा पर्सेंटेज 96 था और मैं आगे केमिस्ट्री से पीएचडी करना चाहता हू , मुझे केमिकल्स और उसके कॉंबिनेशन्स बेहद ही पसंद है मैं उनही पर रिसर्च करना चाहता हू “



उसकी आवाज़ बहुत ही सॉफ्ट थी , एक छर्हरे बदन का लड़का था मेरे ही जैसा था लेकिन उसके चेहरे , आवाज़ और आँखो मे एक मासूमियत थी , साथ ही साथ एक चर्म भी था… मैने इतने देर मे पवन सर को पहली बार किसी का इंट्रो सुनकर खुस होते देखा था , शायद वो इसलिए भी क्योकि वो खुद भी केमिस्ट्री के टीचर थे ..



इन सबके बाद मेरी बारी आई , मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा था , लोग इंट्रो सुन सुनकर ऐसे भी बोर हो चुके थे और मैं इंटो देने वाला अंतिम शख़्श था



“जी मेरा नाम अंकित है (मेरे मूह से सोनू निकलने वाला था फिर एक बार शिवा याद आया लेकिन फिर याद आया कि यहाँ के लिए मेरा नाम अंकित है ) ..



जी मेरा पर्सेंटेज ..(मैं थोड़ी देर सोच मे पड़ गया ) जी वो 96 है “



और मैं चुप हो गया , मेरी अजीब बातों ने सभी का ध्यान मेरी ओर खीच लिया था सभी मुझे अजीब निगाहो से घूर रहे थे और साथ ही मेरे साथ बैठे लोग भी जो अभी तक मेरी तरफ कोई भी ध्यान नही दे रहे थे ..



“तुमने बताया नही कि तुम आगे जाकर क्या करना चाहते हो “



पवन सर ने कहा और मैं थोड़ा सोच मे पड़ गया कि ये क्या मुसीबत है



“सर कुछ भी कर लूँगा बस मेरी भाभी माँ को वो पसंद आए, रोज़ी रोटी चलनी चाहिए ..ऐसे भी तो मज़दूरी ही कर के गुज़रा कर रहे है, पढ़

लेंगे तो शायद कुछ अच्छी कमाई कर ले ”



एक बार को ऐसा लगा जैसे सभी को साँप ही सूंघ गया हो..



लेकिन फिर पवन सर ना जाने क्यो ताली बजाने लगे , मैं खुद भी शॉक मे था कि आख़िर उन्हे क्या हुआ है



“बहुत बढ़िया , देखो बच्चो हमारे साथ एक ऐसा शख्स भी है जिसने अपनी विषम परिस्थितियो के बावजूद हिम्मत नही हारी और 96% के साथ इस कॉलेज मे हमारे साथ है , इसे कहते है स्पिरिट , इसे अपनी नही बल्कि अपनी फॅमिली की चिंता है .. गुड बेटे तुम्हारी भाभी माँ को तुम्हारे उपर गर्व होगा और तुम उन्हे एक अच्छी जिंदगी दे पाओगे जैसा मेहनत तुमने 12त मे किया था वैसा ही यहाँ भी करना और अच्छे ग्रेड से

ग्रॅजुयेट होना हम तुम्हे स्कॉलरशिप दिलवाएँगे ताकि तुम आगे की पढ़ाई कर सको… ग़रीबी मे भी पढ़ने का हौसला इसे कहते है बच्चो इससे कुछ सीखो आप लोग भी ..”



पूरे क्लास मे तालियो की गड़गड़ाहट गूँज उठी थी , मुझे खुद भी यकीन नही हो रहा था कि लोग फेक मारक्शीट से मिले फेक नाम वाले इंसान के फेक ग्रेड के उपर तालिया बजा रहे थे … किसी ने सच ही कहा है की जो दिखता है वो बिकता है ….



क्लास मेरे इंट्रो के साथ ही ख़त्म हो गई , मैं अभी इन सबसे सम्हल पता उससे पहले ही मेरे बाजू वाला शख्स बोल पड़ा ..



“हाई आइ आम अक्की , तुमने कॉन से स्कूल से पढ़ाई की है “



वो अपना हाथ मेरे ओर बढ़ाते हुए बोलने लगा उसके बाद ही अर्जित ने मुझसे हाथ मिलाया.. वही मोनिका और नेहा ने मुझे दूर से ही हाई कहा , ये सब करते हुए मैं अपने दिमाग़ मे उस स्कूल का नाम सोच रहा था जो की मेरे मारक्शीट मे था ..



“गवर्नमेंट स्कूल “



मुझे बस इतना ही याद आया था स्कूल का नाम भी मैं भूल गया था..



“वाउ गवर्नमेंट स्कूल से भी पढ़ कर तुमने बहुत अच्छा मार्क लाया है , और वो भी काम करते हुए यू आर ग्रेट मान”



पिंक ड्रेस वाली परी बोल उठी जिसका नाम नेहा था , लेकिन इन सबमे मुझे समझ आ गया था की लोग मुझे इतना भाव क्यो दे रहे थे , मेरा पर्सेंट और साथ ही ये कि मैने मज़दूरी करते हुए पढ़ाई की है , अब हँसी तो मुझे भी आ रही थी लेकिन मैं उसे रोके हुए था , मेरे कपड़ा ऐसे भी ग़रीबो वाले ही थे और अभी के हालात मे मैं था भी एक ग़रीब ग़ुरबत मे पड़ा हुआ आदमी . और संपत मामा की बनाई मारक्शीट के मार्क ने उसमे चार चाँद लगा दिए थे. देखने से ऐसा लग रहा था की मैने बहुत ही मेहनत और संघर्ष करके ये मार्क लाए है और इतने बड़े कॉलेज मे अड्मिशन के काबिल बन पाया हू ..



“थॅंक्स …”



मैने नम्रता के साथ कहा



“तो तुम क्या काम करते थे स्कूल के टाइम पर “



अर्जित ने पुछा, ये साले अमीर लोगो को ग़रीबो के जीवन मे थोड़ा ज्यदा ही इंटेरेस्ट होता है



“वो मैं समान ढुलाई का काम करता था , ट्रॅक्स मे समान डालना और उतारने का काम था ..”



मैने लाला के पास किए काम का बयान कर दिया था , वो लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैं कोई एलीयन हूँ ..



“ओह माइ गॉड ये तो बहुत ही मेहनत का काम होता है यार , तुम पढ़ते कब थे , टाइम मिल जाता था ??”



इस बार भी नेहा ही थी उसके आवाज़ मे एक दर्द था , दर्द मेरे लिए , उसका मासूम सा चेहरा उसके दुख को और भी खिल कर बाहर

निकल रहा था ..जब इतना हो ही चुका था तो मैने सोचा की क्यो ना थोड़ा और मिर्च मसाला लगा दिया जाय..



“हाँ काम से आता था उसके बाद खोली मे बैठकर रात मे पढ़ लेता था, अधिकतर वहाँ लाइट नही होती थी तो स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ा करता था “



मैने ये सुन रखा था की कई महान इंसानो ने स्ट्रीट लाइट के नीचे पड़कर काबिलियत हासिल की थी वही चीज़ मैने यहाँ चिपका दी थी ..



“ओह माइ गॉड ..”



दोनो लड़कियाँ एक साथ बोल उठी



“कोई नही दोस्त तू फिकर मत कर अब हम तेरे साथ है , तुझे किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो हमे बोल देना , और आज से तू अपना दोस्त है, आज से हमारा 4 का नही बल्कि 5 का ग्रूप होगा , क्यो दोस्तो “



अर्जित ने बहुत ही गर्मजोशी के साथ कहा, और सभी ने एक स्वर मे हाँ से हाँ मिलाया ..



भगवान सच मे दयालु है , कुछ झूठ से ही सही लेकिन मुझे ऐसे दोस्त मिल गये थे जो सच मे ग़रीबो की और उनके मेहनत की इज़्ज़त करते थे , उनके दर्द के लिए जिनके दिल मे संवेदनाए थी, शायद अब मेरा कॉलेज अकेले इस लास्ट बेंच मे बैठकर नही बीतेगा , ये लोग मुझे बड़े ही

सच्चे लगे थे और मैं इनके साथ खुश भी था , ये मेरे साथ एक दोस्त की तरह ही व्यवहार करने लगे थे शुरू मे मैं ही थोड़ा नर्वस था लेकिन

कुछ ही देर मे मुझे लगा की ये भी मेरे पुराने दोस्तो की ही तरह है बस थोड़े अलग परिवेश मे पले बढ़े है ..



अब मेरे होठों मे एक मुस्कान थी और साथ ही दिल मे एक जोरो की इक्षा जागी कि जल्दी से घर जाकर सब कुछ भाभी को बताऊ …


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