Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ Chapter 4
भाभी की हँसी से पूरा कमरा ही कुंदन जैसे चमक उठा था , मेरी बात सुनकर वो बहुत हंस रही थी …
तभी उन्होने मुझे प्यार से देखा ..
पता नही उनके अंदर कितना प्रेम छिपा था कि जब भी मुझे देखती थी उनकी आँखे प्रेम से पूरी तरह से तर होती थी , उनके स्पर्श मे भी प्रेम ही प्रेम था वो प्रेम की एक जीती जागती मूरत थी …
“तूने वहाँ भी मेरा ज़िकरा कर दिया ना “
अब मैं इसका क्या जवाब देता , मेरे जीवन मे उनके अलावा था ही कौन जिसका ज़िकरा करता ..
“भाभी आप भी ना आपके सिवा और किसका ज़िकरा करूँगा ..”
वो मुस्कुराइ
“अच्छा ये तो बता कि आख़िर तेरे दोस्त कैसे है “
“भाभी मुझे तो बहुत ही अच्छे लगे , नेक दिल लोग है “
“देख बेटा अमीर लोगो से तोड़ा दूर ही रहना चाहिए , मैने उनके बारे मे बहुत बुरा सुना है , सुना है कि उन्हे दिल की कोई भी कदर नही होती , वो इंसानियत से ज्यदा पैसो को महत्व देते है , और जसबतो और प्रेम की उन्हे कोई भी कदर नही होती …”
“अरे भाभी ये सब सुनी सुनाई बाते है और अगर ऐसा होता तो क्या वो लोग मुझ जैसे फटीचर से बात भी करते , लेकिन उन्होने ना सिर्फ़ प्रेम से मुझसे बात की बल्कि उन्होने मुझे अपना दोस्त भी बनाया और कौन है जिसे पैसे से प्रेम नही है , पैसे पर तो पूरी दुनिया ही वारी है…”
“वो सब ठीक है बेटा मैं बस इतना कह रही हू की कही दिल ना लगा लेना उनसे “
मैं जोरो से हंस पड़ा
“अरे भाभी मैं उनसे मोहोब्बत नही कर रहा हू जो दिल लगाउन्गा बल्कि वो तो बस मेरे दोस्त है ..”
“अच्छा..?? बेटा दोस्ती मे भी दिल लगता है वो रिश्ता तो ऐसा रिश्ता है जिसमे सबसे ज़्यादा मुहब्बत होती है , प्रेम होता है और भरोशा होता है …ऐसे उनमे दो लड़किया भी तो है ना एक तो मॉडेल बन रही है लेकिन वो दूसरी वाली क्या नाम है उसका ..??”
“नेहा “
“हाँ नेहा मुझे लगता है वो ऐसी है जिससे मुहब्बत हो जाए “
उनकी बात मे एक शरारत भी थी , मैं भी उनके साथ मुस्कुरा उठा था ..
“वो तो है बड़ी ही प्यारी लड़की है लेकिन मैं याद रखूँगा आपकी बात की उससे सिर्फ़ दोस्ती रहे और दोस्ती वाला प्रेम रहे ना की आशिक़ी वाला, ऐसे भी मेरी तो आशिक़ी सिर्फ़ एक से ही है ……….आप से “
उन्होने मेरे गालो पर हल्की सी चपत लगा दी ..
हम ऐसे ही घंटो बातें करते रहते थे दिन भर की बाते करते थे वो मुझे अपने किस्से सुनाया करती तो मैं उन्हे अपने ..
अचानक वो बोली
“सोनू मुझे एक चीज़ आज भी थोड़ी ख़टकती है , यहाँ कुछ तो अजीब है लोग हमारे उपर ऐसे प्रेम लूटाते है कि मुझे समझ ही नही आता ख़ासकर संपत की मा मुझे खुद को नानी कहलावती है जबकि वही सभी लोग उन्हे अम्मा कहते है …कुछ तो है यहाँ ..”
मैं भी उनकी बात से सहमत था
“हाँ भाभी मुझे भी ऐसा ही लगता है , ख़ासकर संपत बाकियो के लिए तो बॉस है लेकिन मेरे लिए बेहद ही नर्म रहता है ..”
“और ये जीवा कौन है ??”
“सभी तो कहते है कि वो ही इस गांग का असली बॉस है लेकिन वो कौन है , कहाँ रहता है , ये सिर्फ़ संपत को पता है… यहाँ तक कि जग्गा
को भी उसके बारे मे नही पता जो की पूरा धंधा संभालता है ..”
“अजीब बात है ना जो मुखिया है उसी का पता नही है , और ये लोग कितने पवरफुल है जो तिवारी जैसा आदमी भी इनसे डरता है ..??”
“भाभी तिवारी मंत्री है वो डरता नही है बल्कि बस इन लोगो से छोटी मोटी चीज़ो के लिए उलझता नही है , क्योकि मैने सुना है कि जीवा भाई की पहुच ग़रीब बस्तियो मे बहुत ज्यदा है और वही से तिवारी की पार्टी के भी एमएलए और एंपी है , तो उनका दबाव भी तिवारी पर रहता है और ये भी सुना है की पहले तिवारी, जीवा भाई का ही आदमी हुआ करता था फिर ना जाने क्या हुआ कि दोनो मे दुश्मनी हो गई और तिवारी ने दूसरा गॅंग जाय्न कर लिया, सुना है बहुत ही खून ख़राबा हुआ और फिर जीवा भाई खुद गायब हो गये और उनका पूरा गॅंग इस हवेली मे
आ गया … उन्होने पुराना शहर छोड़ दिया था , वही तिवारी भी इस शहर की ओर नही देखता था लेकिन जब से वो मंत्री बना है वो भी राजधानी मे आता जाता रहता है , लेकिन ये भी सुना है कि जीवा, तिवारी की गद्दारी को अभी भी नही भूला है ना ही तिवारी भूला है बस दोनो एक दूसरे से भिड़ने से बचते है ताकि दोनो का काम सही से चलता रहे ..”
मेरी बात सुनकर भाभी ने एक गहरी सांस ली
“यानी कि जीवा गायब है ताकि तिवारी उसे ढूँढ ना सके और तिवारी यहाँ सिर्फ़ सरकारी काम से आता जाता है ताकि जीवा से टकराव ना हो ..??”
“हाँ शायद ऐसा ही …..”
मैने भी हां मे सर हिलाया
“लेकिन बेटा तू इन सबमे ना पड़ना ये उनकी पर्सनल दुश्मनी है , हमे इससे क्या … दोनो ना ही भिड़े तो अच्छा है .. तू बस अपनी पढ़ाई पर
ध्यान दे तू पढ़ ले कही जॉब कर ले तो फिर हम ये शहर ही छोड़ कर चले जाएँगे “
मैने हां मे सर हिलाया और उन्होने हमेशा की तरह प्यार से मेरा माथा चूम लिया …….
अभी हम कॉलेज कॅंटीन मे बैठे थे , मेरे पास तो पैसे होते नही थे और रोज इन लोगो से खर्च करवाना मुझे अच्छा भी नही लगता था इसलिए मैं यहाँ आने से मना करता था और ये चीज़ शायद उन्हे भी समझ आ गयी थी , वो मुझे खीच कर कॅंटीन ले आए थे ..
“देखो यार तुम्हारे हालात का हमे भी पता है हम सब दोस्त है इसमे हिसाब की क्या बात है “
मोनिका ने अपने बेहद ही आकर्षित करने वाले अंदाज मे कहा
“वो बात नही है मुझे पता है कि तुम लोगो इन चीज़ो को माइंड नही करते लेकिन यार रोज रोज ऐसा अच्छा नही लगता ना कि मेरे कॅंटीन का पूरा बिल तुम लोग ही देते हो ..”
मेरी बात सुनकर नेहा ने एक नाराज़गी वाले अंदाज मे मुझे देखा
“अब तू ये सब सोचने लगा है , हमारे दिमाग़ मे ये कभी नही आया ना आएगा तू अपने दिमाग़ से ये सब निकाल दे”
ये नेहा ने कहा था और उसका अंदाज बिल्कुल मुझे धमकाने वाला था .. जिसे देखकर सभी मूह हसने लगे थे .. वही मेरा चेहरा थोड़ा उतर गया था
“अरे तू पागालु है यार पूरा , इन सब छोटी छोटी चीज़ो को माइंड मत किया कर , ऐसा कुछ नही है कि हम तेरे उपर कोई अहसान कर रहे है या ऐसा कुछ और तू दोस्त है अपना , दोस्ती मे लोग जान दे देते है और तू साले बिल नही देने दे रहा है “
अक्की की बात पर मैने सहमति मे सर हिलाया ,
“लेकिन मैं भी तुम लोगो को ट्रीट देना चाहता हू, मैं तुम्हे कॅंटीन मे तो नही खिला सकता लेकिन मैं तुम लोगो के लिए भाभी के हाथो से बना
हुआ खाना लाउन्गा , देखना यहाँ के इस पिज़्ज़ा से कई गुना टेस्टी होगा ..”
“लगता है तुम अपनी भाभी से बहुत प्यार करते हो “
नेहा मेरी आँखो मे ही देख रही थी
“बहुत … जान है वो मेरी , और उनके सिवा मेरा इस दुनिया मे है कि कौन ..”
जहाँ भाभी का नाम लेने से मेरे चेहरे मे एक खुशी आई थी वही ये याद करके की मेरा दुनिया मे भाभी के सिवा कोई भी नही है , मेरे चेहरे मे एक उदासी सी छा गई ..
मैने इन लोगो को अपनी स्टोरी बताई थी कि कैसे और किन हालत मे मैने गाँव छोड़ा था , और यहाँ आकर मज़दूरी करने लगा … हाँ ये नही बताया था कि मैने तीन पोलीस वालो को भी मारा है , बाकी सब कुछ सच ही बोला था , साथ ही ये भी कि मैं मालिक के घर मे ही रहता हूँ तो मैं तुम लोगो को अपने घर नही ले जा सकता ये मुझे इसलिए बोलना पड़ा क्योकि ये लोग भाभी की इतनी तारीफ़ सुनकर उनसे मिलने की ज़िद कर रहे थे …
ये मेरे हालात को समझते थे इसलिए मेरे दिल मे भी इनके लिए एक प्रेम का जन्म हो चुका था , ये सच मे अच्छे लोग थे …और मैं इनसे बोले गये झूठ को भी सच करना चाह रहा था मैं पूरी मेहनत से पढ़ाई करता था ताकि क्लास के टीचर्स और मेरे दोस्तो के बीच मुझे शर्मिंदा नही होना पड़े…
हम कॅंटीन मे बैठे हुए मस्ती कर रहे थे तभी एक और ग्रूप आया , उनमे एक लड़की जिसने बेहद ही छोटे कपड़े पहने थे और जिसके होठों मे एक सिगरेट थी ,
“हाई हॅंडसम… हाई मोनिका “
उसने अर्जित की ओर देखकर कहा जिसे देखकर मोनिका के चेहरे मे एक गुस्सा साफ साफ दिखने लगा था
“हाई सूस “
उस लड़की की आँखे नशीली थी , उसका स्कर्ट जाँघो को साफ साफ दिखा रहा था शायद थोड़ा और उपर हो जाता तो उसकी पैंटी भी दिखने लगती , अगर उसने पहनी हुई हो तो …लग रहा था कि अर्जित और मोनिका की उससे कुछ खास दोस्ती सी लग रही थी क्योकि उसके आने
से दोनो के चेहरे का रंग थोड़ा उतरा हुआ लग रहा था, वही अक्की और नेहा चुप हो गये थे वो तो उससे आँखे भी नही मिला रहे थे , लग रहा था की कोई पुराना याराना हो इससे …
“बेबी तुमने अभी तक इन फटीचरो का साथ नही छोड़ा ना “
वो मुझे नही बल्कि अक्की और नेहा को फटीचर बोल रही थी , इसकी माँ की ये उसके लिए फटीचर थे तो मैं क्या था :ओ
“मैं कितनी बार बोल चुका हूँ कि ये मेरे दोस्त है “
अर्जित की आवाज़ मे गुस्सा आ गया था , लेकिन वो बस हँसी
“तुम्हारे दोस्तो का स्टॅंडर्ड दिन बा दिन गिरता ही जा रहा है आज्जु डार्लिंग , पहले ये मोनिका और फिर ये ग़रीब लोग और अब तो तुमने कॉलेज के सबसे बड़े फटीचर को भी अपना दोस्त बना लिया “
इस बार वो मुझे देख कर बोल रही थी, अजीब बात थी की कोई उसे कुछ बोल भी नही रहा था .. लेकिन मैं ठहरा गाँव का ठस्स बुद्धि वाला आदमी मैने उसकी ओर रुख़ किया
“ये मेडम सूस …….. हम लोगो को फटीचर बोलने से पहले ना जा के अपना नाम बदल, सुन कर सूसू वाली फीलिंग आ रही है, और आज्जु को मत सिखा कि दोस्ती किसे बोलते है हमारा अजजु भाई ना इंसानो को पहचानता है, शायद इसलिए तेरा नही बल्कि हमारा दोस्त है समझ
गई सूसू ..”
मेरी बात सुनकर वो ही नही बल्कि सभी बुरी तरह से चौक गये कोई थोड़ी देर तक तो कुछ भी नही बोला फिर मोनिका जोरो से हंस पड़ी ,
वही सभी के चेहरे मे मुस्कुराहट आ गई थी सिवाय अर्जित के , वही सूस का चेहरा लाल हो गया था
“ए गवाँर माइंड युवर लॅंग्वेज “
उसकी बात सुनकर उसके ग्रूप के लोग भी हमारी तरफ बढ़ने लगे थे …
“सस जाने दो इसे नया बंदा है तुम्हे जानता नही अभी , ना ही हमारे बारे मे जानता है ..”
अर्जित ने तुरंत ही कहा , वो अर्जित को देखने लगी
“तो बताओ इसे पहली बार है, तुम्हारा दोस्त है इसलिए छोड़ रही हूँ वरना ……”
वो वहाँ से निकल गई
“सही जवाब दिया साली को अब से हमारे पास आने से डरेगी “
उसके जाते ही मोनिका बोल पड़ी
“चुप रहो यार, जानती भी हो इसके कारण इसे कितनी परेशानी हो सकती थी … तुम्हारा क्या है तुम्हारा बाप तुम्हे बचा लेगा लेकिन इनका क्या “
अर्जित थोड़ा अपसेट हो गया था
“ये है कौन भाई जो अक्की और नेहा को भी ग़रीब बोल रही थी “
मेरी बात सुनकर अक्की हंस पड़ा
“भाई हम लोग भी इसके सामने ग़रीब लोग ही है , हमारे बाप के पास अरबों की दौलत नही है जैसा अजजु और मोनिका के पास है हम लोग मिड्ल क्लास फॅमिली के लोग है और ये साली सस तो हमे कीड़ा मकोड़ा समझती है ..”
अक्की की बात मे एक दुख मुझे साफ साफ महसूस हो रहा था , मुझे इन सभी चीज़ो का अंदाज़ा नही था क्योकि मैने कभी इतना पैसा देखा ही नही था ना ही मेरे गाँव मे ऐसा कुछ था ,
“स्टॉप यार अक्की , तू जानता है ना की ये साली कैसी है”
अजजु फिर से थोड़ा परेशान हो गया
“अबे तो वो तेरे दोस्तो की बेज़्जती करके चली जाती है और तू चुप होके सुनता रहता है , आख़िर है कौन वो ..”
मुझे अभी तक समझ नही आ रहा था कि आख़िर अजजु चुप होकर सुन क्यो रहा था
“वो तुम्हारी होने वाली भाभी है अंकित मिया, हमारे आज्जु की फियाँसेé स्मिता तिवारी उर्फ सस ..”
मोनिका ने हसते हुए आज्जु की खिचाई की
“व्हाट ??”
मेरे दिमाग़ का बल्व ही फ्यूज़ हो गया था
“अबे तू पागल है कि इस लड़की से शादी करेगा “
मुझे सच मे अपने दोस्त के उपर दया आ रही थी
“मत पूछ यार , इसका बाप बहुत बड़ा मंत्री है दया शंकर तिवारी नाम तो सुना होगा तुमने और मेरे बाप का अच्छा दोस्त , समझ ले ये रिश्ता हम दोनो के बापो ने हमारे उपर थोप दिया है , ना ही सुस को ये पसंद है ना ही मुझे , हमारी लाइफ स्टाइल भी बहुत ही अलग है यार लेकिन क्या करे दोनो अपने पिता के सामने कुछ नही बोल सकते बस जीवन भर ये झेलना होगा ..”
आज्जु का चेहरा ही उतर गया था, वही तिवारी का नाम सुनकर मेरे कान खड़े हो गये थे ..
मैने उसके कंधे पर हाथ रखा
“कोई नही हम तुडवा देंगे तेरा रिश्ता “
सभी मुझे ऐसे देखने लगे थे जैसे कोई भूत देख लिया हो
“साले मज़ाक समझ लिया है क्या, जानता भी है कि इसका बाप कौन है और मेरा बाप कौन है, हमारी हिम्मत नही होती उनके सामने जाकर कुछ बोलने की और तू तुडवाएगा रिश्ता ..”
अजजु के चेहरे मे गुस्सा आ गया था वही मेरे चेहरे मे एक मुस्कान
“भाई तुझे दोस्त बोला है तो तेरा जीवन बर्बाद होते तो नही देख सकता ना ..”
आज्जु ने मुझे प्यार से देखा
“भाई तेरे प्यार को मैं समझता हूँ लेकिन ये गाँव नही है कि लड़के लड़की को किसी दूसरे के साथ देखा या शराब पीते देखा तो रिश्ता तोड़ देते है…. ये साले लोग तो इसे शान समझते है बे “
मैने उसकी बात सुनकर एक गहरी सांस ली ..
“कोई बात नही भाई कोई ना कोई रास्ता तो निकाल ही लेंगे , मैं गाँव का बंदा हूँ और मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नही है , मेरे दोस्त की जिंदगी बनाने के लिए अगर जान भी देनी पड़ी तो पीछे नही हटूँगा …”
मेरी बात सुनक्र सभी के चेहरे मे एक चमक सी आ गई थी , आज्जु ने भी मुझे गले से लगा लिया था , ये बात मैने अपने दिल से कही थी , मैने अपने गाँव के दोस्तो से ये बात सीखी और समझी थी की दोस्त के हर मुसीबत मे उसके साथ खड़ा होना ही असली दोस्ती है …
कॉलेज से वापस आकर मैं सीधा संपत मामा से मिलने पहुच गया था ..
मैने उन्हे सारी बात बता दी कि कैसे तिवारी की बेटी हमारे ही कॉलेज मे है और मेरे ही दोस्त की फियाँसे है …
“अबे भल्ला साहब का बेटा तेरा दोस्त है ??”
मैने कंधे उच्काये, मुझे नही पता था कि अर्जित के पिता का नाम क्या था हाँ उसका सरनेम भल्ला ही था ..
“अरे तिवारी की बेटी की शादी बहुत बड़े बिज़्नेसमॅन भल्ला के बेटे से फिक्स हुई है ये तो मैने भी सुना था, तू तो अमीर लोगो के साथ उठने बैठने लगा रे ..”
मामा ने मेरी खिचाई की
“अरे नही मामा वो बस मेरे दोस्त है , और साथ ही मुझे मेरी औकात का पता है ..”
“अरे बेटे तेरी औकात क्या है अभी तुझे नही पता , तू इन सब का बाप बनेगा एक दिन “
मामा ने मेरे कंधे पर हाथ रखा
“अरे वो सब छोड़िए मामा जी , ये बताइए कि क्या कुछ ऐसा हो सकता है कि मेरे दोस्त की भी मदद हो जाए और साथ ही हमारी भी, मतलब आपको तिवारी से खुन्नस है ना ..”
मामा ने मेरी ओर बड़े ही ध्यान से देखा
“बेटा दया शंकर कोई आम इंसान नही है, उससे खेलना किसी आग से खेलने जैसा है, थोड़ी भी चूक हुई तो जल जाएगा …”
“लेकिन मैं सच मे उसकी मदद करना चाहता हूँ “
मामा के होठों मे मुस्कान आ गयी
“ठीक है तू अपने दोस्त की मदद कर, अगर मेरी कोई ज़रूरत हो तो बताना, और रही हमारे गॅंग से उसकी दुश्मनी की बात तो हमपर छोड़ दे, बस एक चीज़ याद रखना कि दया संकर को कभी भी इस बात का पता नही चलना चाहिए कि तू मुझसे रिलेटेड है, अगर उसे ये पता
चला ना तो तुझे मारने मे एक मिनिट की देरी नही करेगा …”
आख़िर क्या था इन दोनो के बीच अभी तक किसी ने मुझे ये बताया नही था,
मैने बस उनकी बातों पर अपना सर हिलाया …….
रात मैं भाभी के पास बैठा हुआ कुछ सोच रहा था ,
“क्या हुआ सोनू कहीं खोया खोया लग रहा है “
मेरा ध्यान भाभी के उपर गया, वो एक झीनी सी साड़ी पहने हुए थी, ब्लाउस से उनका योवन बाहर झाँक रहा था, ऐसे तो मेरे दिल मे कभी भी उनके लिए कोई बुरा ख्याल नही आया था लेकिन नज़रो का क्या करे वो तो पीछे चली ही जाती है ना…….
मुझे उनके गले के पास एक हल्के से खरोच के निशान दिखाई दिए ..
“भाभी ये क्या है “
मैने उस निशान को ध्यान से देखा ऐसा लगा जैसे किसी के नाख़ून से लगे है ..
मेरी बात सुनकर भाभी के चेहरे का रंग जैसे उड़ गया था
“अरे कुछ नही बेटा बस ..”
मेरी भावे टन गई थी , मेरी भाभी मुझसे कभी झूठ नही बोलती थी ये उनका स्वाभाव नही था …
“आप मुझसे अगर झूठ बोलने की कोशिस कर रही हो तो मत बोलना, नही बोल पाओगी…”
उनके होठों मे एक मुस्कान सी आ गयी
“असल मे मेरी लड़ाई हो गई थी “
“व्हाट किससे ..??”
“वो यहाँ काम करने वाली एक औरत से “
“आख़िर कैसे “ भाभी का स्वाभाव बहुत ही शांत किस्म का था वो किसी से लड़ी होगी तो ये कोई ना कोई बड़ी बात ज़रूर रही होगी …
“अरे कुछ नही बस कुछ बाते हो गई थी, मैने भी अच्छे से मज़ा चखा दिया उसे … वो सब छोड़ और तू बता कि तू क्यो मूह लटकाए बैठा है ..??”
मैने भाभी को सभी बाते बताई, तिवारी की बेटी का नाम सुनकर तो उनका भी चेहरा थोड़ा तन गया था ..
“तुझे तो उसकी मदद ज़रूर करनी चाहिए लेकिन ..”
“लेकिन क्या भाभी “
“वो लोग बड़े लोग है बेटा पैसे वाले लोग है , उनके पास ना सिर्फ़ पैसा है बल्कि पॉवेर भी है , और हमारी हालत तो तू जानता ही है , अगर कुछ हुआ तो उस अजजु और सस का कुछ भी नही जाएगा, लेकिन तेरा ……तेरी तो जिंदगी को भी ख़तरा हो सकता है “
भाभी की बात ऐसे तो बिल्कुल ही सही थी
“लेकिन भाभी अगर दोस्ती निभाने मे अगर जान की परवाह की होती तो हरिया और सोहन ने दोस्ती नही निभाई होती, वो दोनो भी अपने जान की परवाह करते हुए हमे ऐसे ही छोड़ देते ..”
हरिया और सोहन मेरे गाँव वाले दोस्त थे जिन्होने हमे गाँव से भागने मे मदद की थी ..
मेरी बात सुनकर भाभी थोड़ी गंभीर हो गई थी
“तू सही कह रहा है सोनू लेकिन वो दोनो ही तेरे बचपन के दोस्त थे, हमारे परिवार की स्तिथि भी समान थी, लेकिन ये लोग हमसे इतने अलग भी है और साथ ही साथ तू अभी अभी तो इनसे मिला है अभी से इतना भरोशा करना क्या ठीक होगा ..”
मेरे होठों मे के मुस्कान आ गई
“भाभी हम इस शहर मे दूसरो पर भरोसा करके ही तो रह रहे है, देखो ना कालवा भाई पर भरोशा किया और अब संपत मामा पर, अंजान लोगो ने ही तो हमारी मदद की है यहाँ पर “
मेरी बात सुनकर वो मुस्कुरा उठी थी
“सही कहा सोनू, कौन कब मदद करता है पता ही नही चलता, एक वो थे जिसपर इतना भरोशा था कि माँ की बात अनसुनी करके घर छोड़ कर चली आई, और उस शख्स ने ही दिल तोड़ दिया और एक तू है जिसने मुझे इतना प्यार दिया “
फिर से भाभी की आँखे भर आई थी, भाभी की यही बात मुझे सबसे ज्यदा नापसंद थी, वो बात बात मे एमोशनल हो जाती थी..
मैने उनके गले मे अपनी बाँहे डाल दी और उनके नाज़ुक और फूले हुए गालो मे एक चुम्मन दे दिया ..
“फिर से रोना नही, जब देखो शुरू हो जाती हो “
उन्होने मुस्कुराते हुए मेरे कंधे पर हल्की सी चपत लगा दी
“क्या करू बेटा जो धोखा उस आदमी ने मेरे साथ किया और जो नाइंसाफी उनसे तेरे साथ किया है उसे भूल भी तो नही सकती ना ..”
मैने उनके गालो को प्यार से सहलाया
“भाभी वो तो खून के आँसू रोएगा उसकी चिंता आप क्यो कर रही हो, आप जैसी देवी को छोड़कर उसने उस रंडी को अपने घर मे रखा है ना देखना वही उसे लात मार्कर घर से बाहर निकालेगी, और जिस दिन मैं कुछ बन जाउ तो गाँव जाकर उसे दुनिया के सामने जलील करूँगा,
और रही हक की बात तो हाँ साले के गले से नही छीना तो मेरा नाम भी शिवा नही है “
मेरी आँखे गुस्से से लाल हो गई थी, मेरे मूह से शिवा निकला था पता नही क्यो लेकिन मैं सच मे वो बनना चाहता था जो मुझे संपत बनाना चाहता था …
भाभी ने बड़े ही प्यार से मेरे गालो पर अपना हाथ फेरा ..
“तू तो मेरा प्यारा सोनू है, मेरा बेटा है मैं नही चाहती की तू शिवा बने “
भाभी के प्यार भरे स्पर्श से मेरा गुस्सा थोड़ा शांत हो गया था
“आपके लिए तो मैं हमेशा ही सोनू रहूँगा भाभी लेकिन बुरे लोगो की दुनिया मे मैं शिवा बनकर नाम कमाउन्गा और समाज मे अंकित बनकर ..”
उन्होने मेरे गालो मे एक किस दिया
“तू जो भी करे मैं तेरे साथ हूँ सोनू”
उनका ये ममता से भरा हुआ स्पर्श मेरे दिल को बिल्कुल ही शांत कर चुका था
“भाभी मेरे लिए एक काम करना “
“जो बोल “
“कल सुबह क्या आप मेरे और मेरे दोस्तो के लिए आलू के पराठा बना सकती हो, वो मुझे रोज ही कॅंटीन मे ट्रीट देते है मुझे अच्छा नही लगता कल मैं उन्हे कुछ खिलाना चाहता हू “
भाभी ने मुस्कुराते हुए हां मे सर हिला दिया
“और भाभी आप कुछ सोचो ना कि आज्जु को उस सस के चंगुल से कैसे निकाला जाए .”
वो थोड़ी सी हँसी
“बेटा जैसा तूने बताया सूस कोई बुरी लड़की नही है, बस बेचारी है, वो भी नही चाहती कि उसकी शादी आज्जु से हो जाए”
मैने अपनी भाव चढ़ा ली थी
“वो बुरी लड़की नही है ??? भाभी तो ग़रीब लोगो से नफ़रत करती है “
भाभी के चेहरे मे मुस्कान थी
“क्योकि अभी तक उसे तेरे जैसा अच्छा दोस्त नही मिला, उसे कल पराठा खिला और उससे दोस्ती कर ले, उसके बिना कुछ नही हो पाएगा, अगर वो तुम्हारी टीम मे होगी तो मामला आसानी से निपट जाएगा … ऐसे भी कोई जल्दबाज़ी करने की ज़रूरत नही है अभी, तुम लोगो के पास पूरे 3 साल है कॉलेज पूरा हुए बिना तो तिवारी उनकी शादी नही करवाएगा “
मैने सहमति मे सर हिलाया
“हाँ ये भी सही है “
“चल अब सो जा, सुबह जल्दी उठना भी तो पड़ता है ना ..”
“मैं आपके साथ सोउंगा..”
मैं उनके बाँहो मे झूल गया था, जिसके कारण वो बिस्तर मे गिर गई , वो भी हसने ल्गी ..
“इतना बड़ा हो गया है लेकिन बच्पना नही छोड़ता..”
“मैं तो बच्चा ही हूँ आपका “
मैने पूरी ताकत से उनके गालो को अपने होठों मे भर लिया था ,उन्होने आँखे बंद कर ली और फिर मेरे गालो मे एक प्यारा सा चुम्मन देकर मुझे अपने सीने से लगा लिया, उनके वक्षो(बूब्स) की कोमलता को मैं अपने गालो मे महसूस कर रहा था, मैने उस गहराई मे अपने सर को हल्के से चलाया, पर्वतों के समान उठे हुए वक्षो मे मेरे बाल घिस रहे थे, उन्होने भी मुझे अपने सीने मे दबा लिया था, ये एक ऐसा अहसास था
जिसे पाकर मैं अपने को दुनिया का सबसे ख़ुसनशीब इंसान समझने लगता था, भाभी प्रेम से भरी हुई मेरे बालो पर अपने हाथ फिरा रही थी, और मैं उनके उरजो(बूब्स) को अपना तकिया बना नींद की आगोश मे जाने लगा था…
उन प्रेम से उमड़ती हुई छातियो मे खुद को किसी बच्चे के जैसे छिपाए हुए मुझे कब नींद ने जकड लिया मुझे पता ही नही चला ………
"वाह यार वाह, इतना शब्द तो माँ के हाथ के खाने में ही आता है"
अक्की ने अभी पराठा का पहला नीवाला ही और किया था, भाभी ने सभी के लिए परठे बनाए और हम सब कैंटीन में बैठे हुए इस्तेमाल खा रहे थे..
लेकिन अक्की की बात सुनकर जैसे अज्जू का चेहरा ही उतर गया जो की मैं समझ पा रहा था..
"ये तुम दो को क्या हुआ"
"यार माँ के हाथो का खाना क्या होता है मुझे नहीं पता, मेरी माँ तो बचपन में ही चल बसी थी अभी सौतेली माँ है जो दिन भर शरब और पार्टी में व्यस्त रहती है, उसे बस पैसे के लिए मेरे बाप को फँसा लिया साली साली ..और मेरा बाप भी छुटियो जैसे उसकी साड़ी बल्ला मानता है "
अज्जू ने चेहरा लटके हुए ही कहा, उसके बल्ले सुनकर सभी का चेहरा दुख से भर गया था, अक्की ने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा,
"भाई क्या मेरी माँ तेरी माँ नहीं है"
अक्की ने उसके कांधे को दबते हुए कहा, वो भी एक गहरी बिना छोडकर मुस्कान उठा
"फ़िकार मत कर तेरी हमें सौतेली माँ का भी इलाज कर देंगे"
मैंने बेफिक्री से कहा था जिसे सुनकर सभी हंस पाए
"सेल तू पूरी दुनिया का इलाज करेगा सस का तिवारी का और अब हम रंद का, तू अदामी है या डॉ."
सभी जल्दबाजी हुए मुझे देख रहे थे
"भाई मेरे दोस्त को जो भी दुख देगा हम उसका इलाज कर देंगे"
मेरी बात सुंकर अज्जू बडे ही प्यार से मेरी या देखा, तबी सुस कैंटीन में आते हुए दिखी, उसे एक बार हमारी या देखा
"कैसे हो भिखारियो"
उसी बल्ले सुंकर मोनिका का नाक ही लाल हो गया था
"वो सब छोड और ये खा के देख"
मैंने पराठे की या इशारा किया जिसे देख कर सभी की बड़ी बड़ी हो गई
"मैं ऐसे फालतू चिज नहीं खाती"
उसे अपना नाक सिकोड़ा, मेरी बात सुंकर तो वो भी थोड़ी चौक गई थी
"मिलेगा तो खोगी ना मैडम सुस उर्फ स्मिता तिवारी जी"
वो बुरी तरह से चौक गई थी साथ ही बाकी के लोग भी
"आलू का पराठा, मध्यम वर्ग का लोगो का खाना बिक्री औकत दीखा दी ना तूने अपनी"
उसके आवाज में ही घर के भाव थे
"सुस" अज्जू कुछ बोलता उससे पहले ही मैंने इसे इस्तेमाल किया चुप करवा दिए
“मेरी भाभी ने एक पराठा तुम्हारे लिए भी बनाया है, तुम इसे किसी रेस्टोरेंट में भी अपने घर के कुक से भी बनवा शक्ति हो लेकिन…. लेकिन जो प्यार मेरी भाभी के हाथो में है वो तुम्हें कहीं नहीं मिलेगा, खाकर देखो शव खाने का नहीं उसमे दले हुए प्यार का भी होता है "
मेरी बात सुंकर मेरे दोस्त मस्कुरा उठे वही उसके सामने बड़ी हो गई थी मैं उसके जीवन में वो पहला इंसान था जिसे उससे बात की थी, उसे आंखे बता रही थी कि मैंने कुछ ऐसा दिया है जो उसे दिया है। दुखती राग थी…
वो बिना कुछ बोले ही वहां से चली गई थी, उसके साथ आए उसके ग्रुप के बाकी लोग इस्तेमाल देखते ही रह गए वो तेजी से बहार निकली..
मेरे दोस्त भी मेरा चेहरा देखते रह गए थे..
"ये सब क्या था"
अज्जू ने अज़ीब सी आवाज़ में मुझसे कहा
"भाई मेरी भाभी ने कहा था की उससे दोस्ती कर लो वो बेचारी भी प्रेम की भुखी है"
"वो प्रेम की भुखी नहीं खून की प्यासी है .."
मोनिका ने गुसे से कहां
"दोस्तो मुझे गलत मत समाधान लेकिन मुझे लगता है की वो बेचारी है, और हमारे जैसे दोस्तों की जरूरत है, उसके दोस्तो को देखो किसी को उसकी नहीं हुई है, और उसके पैसे और स्टेटस के बने हमारे के किसी कोन में वो भी ये बात जनता है, शायद इसिलिए वो अक्की और नेहा से इतना जलती है क्योकी उपयोग पता है की उसके पास में जैसे दोस्त नहीं है, एक बार मेरे लिए उसके सामने दोस्ती का हाथ बढ़ा लो "
मेरी बात सुंकर सबी डांग थे, शायद किसी ने सस के हमें पक्ष को नहीं देखा था जिसे मैंने आज देखा था, अज्जू और मोनिका ने हा में सर हिलाया और मैं एक पराठा उठा कर उसके पिचे भागा..
कॉलेज के गार्डन में एक कोन में बैठी हुई, मुझे दिखी, उसके आंखों में अनु थे, मैं उसके बाजू में जकर बैठा और अपने तेफेन को उसके सामने कर दिया।
"तुम इसे यहाँ खा शक्ति हो, यहाँ कोई तुम्हें जज नहीं करेगा क्योकी कोई तुम्हें देख नहीं रहा है"
उसे आश्रय से मुझे देखा
"तुम खुद को समझते क्या हो"
"खुद का तो नहीं पता लेकिन मैं तुम्हें जरुर समजता हूं, तुम बाहर से जैसी भी दिखो लेकिन और से तुम एक अच्छी लड़की हो, जिसके पास अच्छे दोस्त नहीं है"
"मुझे तुम जैसे फातिचार दोस्त नहीं चाहिए, मेरा कुछ मानक है .."
"जिंदगी अपने हीब से जिनी चाहिए, न की किसी दुसरे को देखने के लिए, चलो अब खाओ .."
सुस ने एक बार मुझे घुरा और फिर पराठा का एक टुकड़ा उठा कर अपने मुह में दाल लिया
"हम्मम्म"
उसके चेहरे में एक संतोषी का भाव आ गया था, उसे झट से दशहरा टुकड़ा भी उठा लिया..
"टेस्टी है ना?"
"हम तुमने कहा था की तुम्हारी भाभी ने मेरे लिए भी एक पराठा बनाया था, क्या सच में?"
"हा बिल्कुल जब मैंने उन्हे तुम्हारे और अज्जू के रिश्ते के नंगे मुझे बताया तो हाय कहा था की तुम्हें पराठा खिलौ और तुमसे दोस्ती कर लू.."
उसे फिर से मुझे अश्चर्यचकित होकर देखा
"उन्हे कैसे पता की मैं क्या चाहता हूँ ??"
"मुझे नहीं पता लेकिन उनको ही कहा था की तुम कोई बुरी लड़की नहीं हो, बस तुम्हें प्यार नहीं मिला"
अब सुस ने मेरे हाथो से वो तेफिन ही अपने हाथो में ले लिया था, वो पराठे को ऐसे खा रही थी जैसे आज पहली बार ऐसा खाना खाया हो, मैं देखकर बस मुस्कान रहा था, ठीक में उसे खली तीफिन पक्का दिया।
"दोस्तों के लिए "
मैंने हाथ बढ़ाया, वो अपने पार से पानी निकल कर पी रही थी
"तुम अब भी मेरे लिए भिखारी ही हो"
उसे अपना नाक चादर बोला
"क्या भिखारी इस्तेमाल करते हैं जो भी मांगे मैंने तुमसे क्या मांग लिया"
वो हंस पड़ी थी
"तू इतने जिद्दी कैसे हो, मेरी बात सुनकर तो किसी को भी गुस्सा आ जाए"
"क्योकी मुझे अब पता चल चुका है कि तुम बुरी लड़की नहीं हो, हा कल मुझे तुम्हारी बात सुंकर गुस्सा आया था"
“दोस्ती की बुरी मुझे सोचेंगे लेकिन अगली बार अपनी भाभी के हाथों से बना हुआ कुछ भी लाना तो मुझे जरूर बता देना”
वो मुस्कुराते हुए खादी हुई और बड़ी ही रवैया के साथ वहां से चली गई, देख मेरे भी होन में के मुस्कान आ गई, भले ही अपने और कितना ही रवैया भर लिया हो लेकिन थी वो एक किशोर की लड़की और हरिसंवेदना ही जिस थी बस उपयोग किसी ने आजतक शायद कुरेदा नहीं था…
"तो हो गई दोस्ती"
नेहा ने अजीब से स्वर में कहा, मैं उसके ही बाजू में बैठा था वही दुसरे टेबल में अज्जू और मोनिका और अक्की बैठे थे,
लास्ट के वो टेबल जान्हा हमारी मुलकत हुई थी वो हमारी परमानेंट जग बन गई थी..
"हो जाएगी, ऐसे तुम गुस्सा क्यों हो?"
"मुझे वो लड़की बिलकुल भी पसंद नहीं है"
"यार वो भी अच्छी है बस खुद की अच्छी को पहचान नहीं पा रही है"
"ऊह और तुम्हारे बड़ा पहचान है उसकी अच्छीयो का"
मैंने एक बार नेहा को देखा उसके चेहरे में आगे ही भव जो की समझ नहीं होते थे
"तुम क्यों जल रही हो"
मैंने उसके भाव को पहचते हुए खा, और वो हड़बड़ा गया जिसे मुझसे कन्फर्म हो गया था
"मैं क्यो जलुंगी उसे"
शायद इस्तेमाल भी नहीं पता था कि वो क्या जल रही थी लेकिन शायद मुझे थोड़ा एहसास हो गया था, और मेरे होठों में एक मुस्कान आ गई थी…..
शायद जीवन में पहली बार किसी ने मुझे ऐसा देखा था, वो दोस्ती वाली जालान तो नहीं थी कुछ और ही था...
नेहा को भी शायद अभी है बल्ले का पता नहीं था लेकिन उसी का चिख चिख कर कह रही थी की दाल में कुछ तो काला है बॉस...
" अरे जनता हो आज बॉटनी वाले सर की जग कोई दुसरी फैकल्टी आ रहा है "
अक्की ने हमारा ध्यान भंग किया, वो मेरे बाजू में ही था दसरे टेबल में
"यार वो तो अच्छे टीचर द क्या हुआ उन ??"
"पटा नहीं शायद .."
वो कुछ बोल ही पता उसी से पहले एक सौंधी सी खुशबू हमारे नाक में आई, अक्की की आंखों के कमरे के गेट में जा चिपकी थी, पिंक कलर की साड़ी में एक अप्सरा सी महिला के कदम और आ रहे थे, अक्की का मुंह खुला का खुला ही रह गया था, मेरे साथ साथ ही नेहा भी इस्तेमाल देख रही थी..
"ये अक्की को क्या हो गया"
वो मेरे कानो में फुसफुसाई... मेरी नजर भी गेट में गई, हमसे हसीनों वाली औरत को देख कर शुद्ध क्लास के लड़कों का रिएक्शन लगभाग एक सा ही था..
"शुभ दोपहर बचचो मैं स्नेहा हूँ, मैं आपलोगो की नई वनस्पति शिक्षक हूँ"
जैसे सबी होश में आए और खड़े हो गए थे लेकिन अक्की अभी भी बैठा हुआ था, मानो किसी और ही दुनिया की शायर कर रहा हो..
अज्जू जो की उसके बाजू में बैठा था उसे इस्तेमाल से हिलाया तब जकार वो होश में आ पाया था..
अक्की की हलत देख हम सभी के होठों में मुस्कान आ गई थी, हम सब की जवानी अभी नई ही थी, और जवानी में अगर प्यार नहीं हुआ तो क्या हुआ, किसी को अपने दोस्त से तो किसी को पडोस वाली से को अपनी टीचर से..
ये उमर का डोर ही ऐसा होता है की प्यार आसनी से हो जाता है.. दिल में प्रेम के फूल खिल जाते हैं और हमें बयार (हवा) में लोग बह ही जाते हैं, युवाओं के नए थापीडो में युवाओ का बहना भी लाजमी भी होता है…
अक्की भी प्रेम के इस दरिया में दुबने वाला था, उसका चेहरा बता रहा था की मासूम दिल के इंसान के अंदर कुछ तो बदला होने लगे है..
स्नेहा मैडम ने आज इंट्रोडक्शन क्लास ली सभी उत्थान अपना नाम बोले बड़ी अक्की की भी आई
"मेरा नाम..अक्की उफ्फ मतलाब आकाश है.."
उसके चारे में आए भव को देख कर मैडम थोड़ी हंस पड़ी थी जिसे देख कर अक्की मानो किसी सपने में खो गया था, अज्जू के हिलाने पर वो फिर से सपने से बाहर आया..
आज का दिन भी बड़ा ही मजेदार था, आज मैंने अपने दो दोस्तों के आंखों में प्रेम की नई नई किरण देखी थी, पहली नेहा के आंखों में और अब अक्की की आंखों में ..
"क्या बात है आज बड़ा ही खुश लग रहा है"
भाभी अभी कामरे में आई थी और मुझे देखते ही समझ गए की कोई तो बल्लेबाजी थी जिसे आज मुझे खुश किया था..
मैंने उन खिचकर बस्टर में बैठा दिया था और उनके सामने बैठाकर मैंने उन आज की पूरी कहानी बताई, पहले सुस और फिर नेहा और फिर अक्की के नंगे मुझे...
वो मुस्कुराते हुए सब कुछ सुनती रही
"वाह तो नेहा और अक्की को प्यार होने लगा है, और तुझे लगता है की नेहा तुझसे प्यार करने लगी है?"
'भाभी नेहा अच्छी लड़की है लेकिन मैंने अभी तक उसके लिए कुछ भी नहीं सोचा है, लेकिन उसे आंखों में कोई तो ऐसी बात थी जिससे मुझे ऐसा लगा और खास्कर जब मैं उसके पीछे चला गया था हमें बल्ले को लेकर मैंने देखी .."
"हो सकता है की वो सच में तुमसे प्यार करने लगी हो, मेरा बेटा है ही इतना अच्छा की कोई भी उससे प्यार करने लगे"
उन्होन मुझे अपनी या खिंचा और मेरे माथे पर एक प्रेम भरा किस दे दिया ..
"लेकिन मैं किसी को अपनी जीएफ नहीं बना सकता ना"
मेरी बात सुनकर वो मुझे अज़ीब नज़रो से देखने लग
"क्यो ??"
"क्योकी मेरी प्रेमिका तो मेरी भाभी मां है"
मैने मासूमियत से कहा और वो हसने लगी, उन्होन फिर से मेरे गालो को अपने हाथो में भर लिया और है बार मेरे गल पर एक गिला चुम्मन दे दिया, उनके लार मेरे गालो को गिला कर गए थे जिस्के करन मैंने उनसे देखा, और वो मुस्कुराते हुए अपने लार को मेरे गालो से पोचने लगि
"प्यार तो मैं भी तुझसे बहुत ज्यादा करता हूं लेकिन ये जीएफ होना प्यार से थोड़ा अलग है बेटा"
"क्या अलग है"
मैं फिर मासूमियत से बोला
"हैं.. इतना बड़ा हो गया है क्या इतना भी नहीं समझौता"
'नहीं'
"बदमाश सब समझौता है तू"
"सच में भाभी, आप समझो ना"
उन मेरी आँखों में सिद्ध ही देखा, शायद मेरी आँखों में वो शरत नाच रही थी जो मेरे दिल में थी….
"बहुत बदमाश हो गया है तू"
अनहोन मेरे गल में एक अध्याय लगा दी
"सच में भाभी समाधानो ना"
वो मुझे गंभीर हो कर देखने लगी थी
"सोनू ये क्यो कर रहा है"
"इस्लिये क्योकी मैं सच में आपसे बहुत प्यार करता हूं और अगर मेरी कोई जीएफ होगी तो वो सिरफ आप ही होगी"
मेरी बात सुंकर वो थोड़ी गंभीर हो गई थी
"ऐसा नहीं बोले बेटा, मैं तो तेरी भाभी मां हूं ना"
मैंने अपना सर उनके भगवान में रख दिया, वो भी मेरे बालो को प्रेम से सहलाने लगी थी
"लेकिन भाभी क्यों नहीं हो सकता है, मैं आपसे प्यार करना चाहता हूं, बहुत ज्यादा प्यार"
"बेटा प्यार और जीएफ होने में फ़र्क है ना... तू समझौता क्यों नहीं"
उनकी आवाज में एक शिकायत थी, मैं उनकी बातो को समझ कर भी नहीं समझ पा रहा था, मेरे दिल के किसी कोन में उने पाने की तिवारी इक्का थी, लेकिन उने किस भगवान पाया जाएगा ही पता भी मैं सोया हुआ यही सोच रहा था कि आखिर मुझे हुआ क्या है, मैं भाभी से ऐसे क्यो बात कर रहा हूं, मैं उन्हे पाना चाहता हूं लेकिन कैसे...
मैंने उनके जांघो पर अपना सर रखा हुआ था मैंने उन किस कर लिया, वो अब भी मेरे बालो पर अपने हाथो को चला रही थी..
"तू अभी जवान हो रहा है सोनू, तेरे और बहुत सारे बदले हो रहे हैं लेकिन तेरा एक गलत फैसला पूरी जिंदगी का दुख बन सकता है, अपने इमोशन्स को सम्हाल बेटा, तेरी उम्र है अभी प्यार में नेहा सेहा कौन हो शक्ति है…”
"आप..."
मेरी बात सुनकर उन्होन फिर से मेरे गालो में एक हलकी अध्याय लगा दी
मैं उनके भगवान के स्वर्ग में लेटा हुआ, अपने लिए बंद किए बस अपने अंदर हुए भावनाओ को समाधान की कोषिस कर रहा था, और वो मेरे बालो में हाथ चलती हुई न जाने किस सोच में दो हुई हुई थी, दोनो हुई थी बस एक एहसास था हमारे बिच, उन्हे हाथो से मेरे ऊपर प्रेम की बारिश हो रही थी और प्रेम को मैं किसी भी करन से खोना नहीं चाहता था..मैं अपने कमरे मे गया और भाभी को देखकर बुरी तरह से चौक गया
“ये क्या हो गया है आपको “
उनके चेहरे मे चोट के निशान थे वही वो बहुत ही थकी हुई लग रही थी
“अरे कुछ नही बेटा बस यू ही “
उन्होने मुझसे सच छिपाने की बहुत कोशिस की थी, मैं जानता था की वो अपने दुखो को अपने अंदर ही दबा लेगी लेकिन मुझतक पहुचने नही देगी , इसलिए मैने उनका हाथ अपने सर मे रख दिया
“आपको मेरी कसम है बताओ की क्या हुआ है “
उनके होठों मे मुस्कान आ गयी
“मैं लड़ाई करना सीख रही हू “
“व्हाट ???”
“हा यहाँ महिलाओ को भी लड़ना सिखाया जाता है तो सोचा की क्यो ना मैं भी सीख लू, क्या पता कभी काम आ जाए , अगर मुझे लड़ना आता तो वो इनस्पेक्टर मेरे साथ ज़बरदस्ती नही कर पाता “
“तो ये तो अच्छी बात है ना, मुझसे क्यो छिपा रही थी “
“अरे तू फालतू मे दुखी हो जाता है ना बात बात पर “
उन्होने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया
“अरे इसमे दुखी होने वाली क्या बात है “
“मेरी चोट को देखकर तू कहाँ मानता “
मैने अपना सर पकड़ लिया
“अरे भाभी आप मुझे अभी तक नही समझ पाई , मुझे इससे बेहद खुशी है की आप भी लड़ना सीख रही हो , मेरी ट्रैनिंग भी अब पूरी होने वाली है , लेकिन मुझे एक चीज़ समझ नही आ रही है की आख़िर मुझे करना क्या होगा, सब तो सीखा दिया इन लोगो ने लेकिन लड़ना किससे है ये नही बताया , जहाँ तक तिवारी की बात है तो मामा कहते है की उससे दूर ही रह हम देख लेंगे , तो इतनी तैयारी किसलिए “
“बेटा लड़ाई हो ना हो लेकिन एक सिपाही को लड़ना तो आना ही चाहिए ना , कभी भी इसकी तुझे ज़रूरत पड़ सकती है इसलिए उन्होने तुझे ये सब सिखाया है , मैं तो बस इतना चाहती हू की तू अपना कॉलेज ख़त्म करे और इन सबसे दूर हो जाए “
मैने भी उनकी बात मे हामी भर दी ..
“तो आज कॉलेज मे क्या हुआ “
उन्होने बात बदली और मेरे होठों मे मुस्कुराहट आ गई
मैने उन्हे अक्की के बारे मे बताया की कैसे वो मेडम के सपनो मे खोया हुआ रहता है
“और नेहा “ भाभी ने एक शरारती निगाह से मुझे देखा
“उसका क्या ??“
“उसने तुझसे कुछ नही कहा क्या “
“नही अभी तक तो नही और मुझे भी अभी तक उससे कोई प्यार वाली बात नही हुई है, वो अच्छी लड़की है, सुंदर भी है लेकिन प्यार …अभी तो नही , ऐसी भी मेरी गर्लफ्रेंड तो आप हो ना “
उन्होने मेरे गाल पर एक चपत लगा दी थी
“फिर से शुरू हो गया तू, मैं तुझसे 4 साल की बड़ी हू मुझमे ऐसा क्या देख लिया जो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता है “
उनकी बात सुनकर मैने उनके शरीर को घूरा , भरा हुआ जिस्म मादकता की आंगड़ाई ले रहा था, भरे हुए स्तन सारी के पल्लू से झाँकते हुए ब्लाउस को फाड़ने को तैयार लग रहे थे, गोरे गोरे जिस्म मे फैला हुआ वो हल्का गुलाबी नूर उन्हे केशरी बना रहा था, और पतली कमर के नीचे वो चौड़ा कमर एक सुरहीदार मटके जैसा लग रहा था, मेरे जवान जिस्म मे जवानी की हलचल सी होने लगी थी, और मेरे कमर के नीचे जाँघो के बीच अभी तक मुरझाया हुआ मेरा लिंग उत्तेजित होने लगा था, अभी तक मैने किसी भी स्त्री को इस निगाह से नही देखा था की मेरे लिंग को कोई भी हलचल हो, मैं जवानी से ही भाभी के प्रेम मे डूबा हुआ था, मेरे गाँव के दोस्त भी मेरी ही तरह संस्कारी थे किसी भी लड़की से वो प्रेम करते थे ना की हवस की निगाहो से देखते थे, और यही कारण था की जवानी मे डूबे हुए इतने दिन होने के बाद भी मुझे अपनी जवानी के इस पहलू का अहसास अभी तक अच्छे से नही हो पाया था, जिस्म की भूख ने अभी तक मुझे खुद मे नही जकड़ा था, लेकिन इंसान भी तो एक जानवर ही होता है लेकिन जानवर अपने भूख को दबाते नही है है और ना ही ज़रूरत से ज्यदा भोगते है जब ज़रूरत होती है तब ही उनके जिस्म मे ये आग उठती है, लेकिन इंसान का इसपर कंट्रोल है जो उसे जानवरों से बहतेर भी बनती है तो कभी कभी जानवरों से गिरा हुआ भी बना देती है …
ऐसा नही था की मुझे अपने जिस्म मे उठने वाली इस संवेदना का आभास नही था, मैं पहले भी कई दफ़ा इसे महसूस कर चुका था लेकिन भाभी के जिस्म को देखने पर पता नही मैं खो सा गया था और इतनी तेज़ी से ये अहसास मेरे अंदर उतरता चला जा रहा था की मैं खुद के काबू से भी बाहर होने लगा था …
लिंग ने अपना आकार बढ़ा दिया था , वो कड़ा हो चुका था और मेरी साँसे तेज हो गई थी, मुझे याद नही की मैं कितनी देर तक भाभी के उन्नत उरोजो(बूब्स) को ही घूर रहा था..
“सोनू ..”
भाभी की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी, मेरी साँसे तेज थी , भाभी ने मुझे जैसे हल्के से चिल्लाया था मानो मुझे किसी सपने से जगाया हो, मैं भी हड़बड़ाता हुआ उनके चेहरे को देखने लगा, उनका चेहरा शर्म से लाल हुआ जा रहा था शायद उन्होने भी मेरे निगाहो को महसूस कर लिया था , उन्हें भी पता चल गया था की मैं उनके शरीर के किस हिस्से को घूर रहा था ..
इस बात से मेरे अंदर एक शर्मिंदगी का भाव आ गया
“सॉरी भाभी “
मैं अपने ही किए पर बुरी तरह से शर्मिंदा था असल मे ये मेरे कंट्रोल मे नही था, जिस्म की भूख जिसका मुझे अभी तक कुछ खास पता नही चला था आज अचानक से भड़क गया था, मेरी साँसे तेज हो चुकी थी और आँखे नीचे ज़मीन को देखने लगी थी मैं तो भाभी से नज़र भी नही मिला पा रहा था , वही मैने भाभी की भी भारी आवाज़ को सुना , साँसे उनकी भी तेज थी पता नही क्यो शायद गुस्से से या …….
मैने सर उठाया और उनके चहरे को देखा
आँखे लाल थी, और पूरा चेहरा गुलाबी हो चुका था, आँखो मे आँसू की कुछ बूंदे भी नाचने लगी थी, जख़्मो के निशान चेहरे मे अभी भी थे लेकिन वो उनकी रंगत को छिपा नही पा रहे थे, शर्म साफ साफ दिख रहा था लेकिन शर्म के साथ कुछ और भी उनके चेहरे से टपक रहा था , जैसे ही हमारी नज़रें मिली उनकी नज़रें भी नीची हो गई थी क्यो…??
क्या उनके जिस्म मे भी वही संवेदनाए उभर गयी थी जो मेरे जिस्म मे उभरी थी, शायद हा… वो भी तो जवान थी और शायद उनके भी जिस्म मे भूख होगी जिसे उन्होने मेरे प्रेम और अपनी ज़िम्मेदारियो मे कही छिपा लिया था..
हम दोनो ही चुप थे और महॉल मे एक अजीब सी शांति छा गई थी, मैं अब उनसे और बात नही कर सकता था मैं मुड़ा और अपने कमरे मे चला गया, इतने दिनों के बाद मैं आज अपने बिस्तर मे अकेले सोया था, शायद ये मेरी मासूमियत का अंत था, जिस निगाहो ने भाभी को प्रेम किया था उन्हे मा का स्थान दिया था उसने ही आज उन्हे हवस की भूख की नज़र से देखा था , और इसी की वजह से उनमे पानी भी आ चुका था …
कुछ ही देर हुआ था की मुझे किसी का हाथ अपने कंधे पर महसूस हुआ, मैं पलटा और भाभी को अपने कमरे मे मेरे बाजू मे बैठा हुआ पाया, उनकी आँखे भरी हुई थी लेकिन होठों मे एक मुस्कान थी..
“तू आज भी उतना ही मासूम है रे, अपने को ऐसे दुखी मत कर, तू अब जवान हो चुका है और तुझसे कोई ग़लती नही हुई है, ये तो होता ही है, तेरे मुझे इस तरह देखने से हमारा रिश्ता तो नही बदल गया ना, तेरे दिल मे आज भी मेरे लिए वही प्रेम और सम्मान है इसका सबूत तेरी आँखो मे आया हुआ ये आँसू है..”
भाभी की बात सुनकर मैं जैसे टूट ही गया था मैं उनसे लिपट कर रोने लगा था
“मुझे माफ़ कर दो भाभी, पता नही ये मुझसे कैसे हो गया, मैने कभी आपको ऐसी निगाहो से नही देखा था मगर आज… पता नही मुझे क्या हो गया था, मुझे सज़ा दे दो भाभी बस मुझे छोड़ कर मत जाना “
उन्होने मुझे अपने सीने मे जोरो से खिच लिया, जिन छातियो को देखकर मैं थोड़ी देर पहले उत्तेजित हो रहा था अभी मेरा सर उसी मे धंसा हुआ था लेकिन मैं उस प्रेम को महसूस कर रहा था जो उस उत्तेजना से कही ज्यदा मूल्यवान था..
“बेटा मैने कहा था ना की तुझे अब किसी गर्लफ्रेंड की ज़रूरत है, तू अब बच्चा नही रह गया तेरे अंदर भी जवानी की वो आग बढ़ने लगी है, ये सभी के साथ होता है बेटा तू अकेला नही है “
वो मेरे बालो को सहला रही थी और मैने उन्हे बहुत ही जोरो से जकड़ रखा था ..
हम थोड़ी देर तक ऐसे ही रहे फिर जब हम अलग हुए तो मैने भाभी के होठों मे मुस्कुराहट देखी वही आँसुओ से उनका चेहरा गीला हो चुका था, मैने हाथो से उनका चेहरा पोंछ लिया..
“भाभी आप मुझसे गुस्सा तो नही हो ना “
“मैं अपने सोनू से कभी गुस्सा हो सकती हू क्या “
“लेकिन आप रोई क्यो और आपका चेहरा ऐसे लाल क्यो हो रहा था “
मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराइ लेकिन उनका चेहरा फिर से लाल होने लगा था वो शर्म की लाली थी जिसे मैं अब अच्छे से पहचानने लगा था
“चल अब सो जा “
उन्होने धीरे से कहा
“मैं कभी अकेले सोता हू क्या “
मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराइ और मेरे बाजू मे सो गई , मैं उन्हे ऐसे जकड़ा हुआ था जैसे की मैं कभी उनसे अलग नही होना चाहता…… उनके वक्षो(बूब्स) पर अपना सर रखे मैं बच्चो की तरह सो रहा था , मेरे लिए तो उनका स्पर्श ही किसी स्वर्ग से कम नही था, उनमे प्रेम था असीम प्रेम …..
आज गार्डन मे मुझे सुस मिल गई
“अज्जु बता रहा था की तुम हमारी शादी तोड़ने का प्लान कर रहे हो “
पहले की अपेक्षा उसके बातों मे मेरे लिए एक दोस्ती का भाव था नफ़रत नही
“हा “
“कैसे “
“पता नही “
“वाह..” उसने सर हिलाया
“क्या हुआ ??”
“बाते बड़ी बड़ी करने से कोई बड़ा नही बन जाता मिस्टर. ?”
“मिस्टर. अंकित “
मैने मुस्कुराते हुए कहा
“हा मिस्टर. अंकित “
वो मुस्कुराइ
“यार हमारा काम है कोशिस करना, रिज़ल्ट तो उपर वाले के हाथो मे है “
“फिलॉसफी मत झाड़ो कोई प्लान हो तो बताओ “
“क्यो ना मैं पहले तुम्हारे पिता जी को समझ लू, मतलब तुम मुझे अपने घर ले जा सकती हो “
उसने मुझे घूरा
“कैसे ..??”
“दोस्त बना कर .. या फिर बाय्फ्रेंड “
उसने मुझे मुस्कुराते हुए देखा, अजीब बात थी की उसके चेहरे मे अभी भी कोई नफ़रत का भाव नही था
“अपनी औकात मे रहो समझे “
ये भी उसने मुस्कुराते हुए ही कहा था, इतना परिवर्तन भाभी के एक पराठे से…? वाह
“और मेरी औकात क्या है “
“तुम एक ग़रीब आदमी हो “
“लेकिन आदमी तो हू ना “
“अच्छा ??“
“यार तुम्हे ग़रीबो से प्राब्लम क्या है, क्या इंसान इंसान नही होते, और मुझे तो ग़रीब इंसानो मे ज्यदा इंसानियत दिखाई देती है “
उसने बस एक गहरी सांस ली
“तुम समझ नही रहे हो मेरे पिता और भाई तुम्हारी पूरी हिस्टरी निकाल लेंगे, मैने उनके डर से कोई दोस्त नही बनाती पता नही कब वो मेरे दोस्तो को ही मार दे “
सुस की आँखो मे आँसू की कुछ बूंदे आ गई थी, मैने आगे बढ़कर उन्हे अपने हाथो से पोंछ दिया ..
“मैं अपने दोस्त के लिए मरने के लिए भी तैयार हू “
मेरी बात सुनकर उसने नज़रे उठाकर मुझे घूरा
“यकीन नही होता ??”
उसने मुझे घूरते हुए कहा
“क्या??”
“यही की तुम मुझे अच्छे लगने लगे हो “
उसकी बात सुनकर मैं जोरो से हंस पड़ा वही वो भी हसने लगी , ये उसकी मासूमियत से भरी हँसी थी ना की किसी को जलील करने के बाद आई हँसी , और इस हँसी की बात ही कुछ अलग थी , उसका चेहरा खिल गया था किसी बच्चे के जैसे वो स्वच्च्छन्द रूप से खुलकर हंस रही थी ..
“सब भाभी के पराठे का कमाल है “
मैने हसते हुए कहा
“हा सही है उसमे जादू था की एक फटीचर मुझे अपना दोस्त लगने लगा है “
मैने भी उसे मुस्कुराते हुए देखा
लेकिन फिर मेरी निगाह मुझे दूर से देखती हुई नेहा पर पड़ी, मुझे सुस के साथ हँसता हुआ देखकर उसका मूह गुस्से से फूल गया था मैने उसे वेव दिया :वेव: लेकिन वो मेरी तरफ ना आकर दूसरे ओर चली गई ..
शायद मुझे समझ आ चुका था की क्यो ..
“चलो बाद मे मिलता हू प्लान बनाने के लिए “
मैं नेहा के पास जाना चाहता था ..
“अरे रूको ना कहाँ जा रहे हो “
“थोड़ा काम है “
मैने सुस से अलविदा लिया और नेहा की ओर भगा, वो एक पेड़ के नीचे बैठी हुई थी
“हाई नेहा तुम मुझे देख कर भी इग्नोर क्यो कर रही हो “
“तुम मेरे पास क्यो चले आए वो कमिनी कुत्ती छीनाल साली के पास ही रहते , साली रांड़ “
नेहा जैसी सभी सुशील लड़की के मूह से ये सब सुनकर मेरा दिमाग़ ही चकरा गया, मैं मूह फाडे उसे देख रहा था, उसने ये सब अपना चश्मा ठीक करते हुए कहा था, आँखो मे लगे चश्मे से भी उसकी आँखो की लाली साफ साफ दिख रही थी , आज मैने उसे पहली बार चश्मे मे देखा था वो एक मोटी सी बुक निकाले हुए उसे पढ़ने का बहाना कर रही थी , इतना बोलकर शायद उसे भी अपनी ग़लती का अहसास हो गया था इसलिए वो चुपचाप अपनी बुक की ओर देखने लगी थी ..
मैं भी चुपचाप वही बैठकर उसे देख रहा था
“ऐसे क्या घूर रहे हो जाओ ना उसी के पास “
“इतना गुस्सा .. आख़िर क्यो ??:?: हमारी सीधी साधी पढ़ने वाली नेहा के मूह मे इतनी गाली ?:?: बात क्या है “
“कोई बात नही है तुम जाओ ना यार मुझे पढ़ना है “
ये शहर के लोग थोड़े अजीब होते है साले अपने दिल की बात बोलने मे भी इतना टाइम लगा देते है, और दिल ने बस नफ़रत भर कर रखते है ..
मैने उसकी बुक उसके हाथ से छीनकर बाजू मे रख दिया
“अरे ये क्या “ वो अपनी बुक को पकड़ने की कोशिस करने लगी लेकिन मैने उसके हाथ नही लगने दिया
“दो इसे इधर “
“बहुत हो गया इतना भी क्या जल रही हो तुम उससे, सिर्फ़ उससे बात ही तो किया है मैने “
मेरी बात सुनकर वो जैसे जम ही गयी, थोड़ी देर तक बस मुझे ही देखती रही
“साले तेरे उससे बात करने पर मैं क्यो जलूंगी, खुद को समझता क्या है तू “
उसने जोरो से कहा लेकिन मैं उसके गुस्से से दमकते हुए चेहरे को देख रहा था वो और भी प्यारी लग रही थी ..
“तो फिर मुझे देखकर भाग क्यो गई और अब बात भी नही कर रही है, ऐसा तो मेरे गाँव की ओरते तब जलती है जब उनका पति किसी दूसरी औरत से बात कर रहा हो “
उसका चेहरा लाल हो चुका था अब वो गुस्सा था या फिर शर्म था समझ नही आ रहा था, लेकिन मुझे लगा जैसे की ये दोनो का मिश्रण था..
“तुम पागल हो गये हो कुछ भी सोच रहे हो चलो मुझे मेरी बुक दो “
“पहले तुम बताओ की तुम्हे सुस से कोई प्राब्लम है या मुझसे “
“तुम भाड़ मे जाओ “
इतना बोलकर वो उठ गई और क्लास की तरफ जाने लगी, मुझे एक चीज़ तो समझ मे आ चुकी थी की बात उतनी भी सिंपल नही है जितना की मैं सोच रहा था ज़रूर कोई बड़ी बात थी ……
मैं उसे जाते हुए देखता रहा थोड़ी देर मे मैं भी क्लास पहुचा तो सभी वही लास्ट बेंच मे बैठे हुए थे..
“कहा थे तुम दोनो “
मेरे आते ही अक्की बोल उठा था
“एक चीज़ बता की इसे सुस से क्या प्राब्लम है ??”
मैने धीरे से अक्की से कहा वो एक छोर मे बैठा हुआ था वही नेहा दूसरी छोर मे, वही हमेशा की तरह अज्जु और मोनिका बीच मे बैठे हुए थे
मेरी बात सुनकर अक्की थोड़ा गंभीर हो गया था, एक बार उसने मुझे देखा तो एक बार नेहा की ओर , नेहा का चेहरा अभी भी उतरा हुआ लग रहा था …
“बाद मे बताता हू क्लास के बाद मिलना ”
उसने आहिस्ता से कहा
उसकी बात सुनकर ही मुझे समझ आ गया था की कोई तो बड़ी प्राब्लम है सुस और नेहा के बीच मे
पूरे समय मैं बस नेहा के चेहरे को देख रहा था उसका मासूम सा चेहरा आज उतरा हुआ लग रहा था, देखकर ही लग रहा था की आज उसे पढ़ाई मे कोई भी मन नही लग रहा है, उदासी उसके चेहरे पर छाई हुई थी …….
क्लास के बाद सभी कॅंटीन चले गये वही मैं और अक्की थोड़ी देर मे आने का बोलकर चले गये थे …
“क्या बात है अक्की कोई बड़ी बात है क्या “
अक्की के चेहरे पर एक गंभीर से भाव आए
“नेहा के पिता पोलीस के अधिकारी हुआ करते थे, नेहा उनकी एकलौती बेटी है, वो एक ईमानदार अधिकारी थे, उस समय तिवारी किसी जीवा नाम के गुंडे के साथ मिलकर काम करता था वो लोग बहुत सारे ग़लत काम किया करते थे और नेहा के पिता ने उन्हे पकड़ लिया था .. सुना है की जीवा और तिवारी ने मिलकर ही नेहा के पिता को मारा था, अब तुम ही सोचो की एक लड़की के दिल मे अपने पिता के हत्यारे की बेटी के लिए कितनी नफ़रत होगी …”
अक्की की बात सुनकर मेरे दिल मे एक दर्द उठ गया, बेचारी नेहा , उसके चेहरे से कभी मुझे उस गम का अहसास ही नही हुआ जो वो अपने दिल मे लिए घूमती है, और साथ ही एक और दर्द मेरे दिल मे फैल गया कारण था की अब मैं खुद ही जीवा गैंग का एक मेंबर था ..
अगर नेहा को ये पता चल गया तो …
ना जाने वो कैसा रिएक्ट करेगी…
“कोई नही उसे दुख तो होगा लेकिन वो मान जाएगी, जब उसे पता चलेगा की तू अज्जु के काम से उससे बात कर रहा था …वो समझदार है और वक़्त ने उसे और भी ज्यदा समझदार बना दिया है “
अक्की ने मेरे कंधे मे अपना हाथ रखते हुए कहा, मैने भी सहमति मे अपना सर हिला दिया …..
सॉरी”
“क्यो”
“सुबह के लिए”
नेहा मेरे चेहरे को देखने लगी,
“इसमे सॉरी बोलने वाली क्या बात है”
“बस ऐसे ही “
“तुम पागल हो “
उसकी बात सुनकर मेरे होठों मे मुस्कान आ गइ
“हा वो तो हू, तो तुमने मुझे माफ़ कर दिया ?”
“माफी शायद मुझे माँगनी चाहिए, मुझे ऐसा बिहेव नही करना चाहिए था “
“मुझे अक्की ने बताया की तुम सुस से क्यो चिढ़ती हो “
नेहा के चहरे मे आई थोड़ी सी मुस्कान जैसे हवा मे ही गायब हो गयी थी, मैने उसके हाथो मे अपना हाथ रख दिया
“नेहा तुम सच मे बहुत ही बहादुर लड़की हो, भगवान करे तुम्हे इंसाफ़ मिले, मैं तुम्हे कोई झूठा दिलासा तो नही दूँगा लेकिन हा ये ज़रूर कह सकता हू की अगर भगवान ने सब ठीक किया तो तिवारी को उसके किए की सज़ा ज़रूर मिलेगी “
वो मुझे बड़ी बड़ी आँखो से देखने लगी
“अंकित मुझे कोई बदला नही लेना है ना ही मैं इस बात के लिए सुस को दोष देती हू, लेकिन क्या करू जब वो सामने आती है तो मैं ये भूल भी तो नही सकती की उसके पिता मेरे पिता के कातिल है, पूरी दुनिया के सामने मेरे पिता की मौत को स्वाभाविक मौत बता दिया गया, सभी को पता था यहाँ तक की पापा के दोस्तो को भी पता था की ये सब किसने किया है लेकिन सबने बस इसे एक आक्सिडेंट की तरह ही पेश किया, उस समय मैं पेट मे ही थी सोचो की मेरी मा पर क्या बीती होगी, सरकार ने उन्हे पेन्षन तो दे दिया लेकिन क्या उनके पति की जाग अब कोई पूरा कर पाएगा .. नही अंकित ..
मेरी मा सिर्फ़ मेरे लिए जी रही है अगर मैं उनके पेट मे ना होती तो शायद वो खुद जिंदा नही रहती… मुझे मेरी मा को अच्छी जिंदगी देनी है अंकित, मैं बदले की नही सोच सकती, अगर मुझे कुछ हुआ तो मेरी मा का क्या होगा वो बेचारी तो जीते जी ही मर जाएगी … इसलिए कभी मैने सुस से भी लड़ाई नही की ..”
उसका मासूम सा चेहरा आँसुओ से भीग चुका था, मैने उसे कस कर जकड़ लिया था, आज मुझे पता चला की ये भी एक जिंदगी है जिसमे लोग अपने गमो को भूलकर बस दूसरो के लिए जीते है , अपने पिता की मौत का गम तो नेहा को था लेकिन वो बदला नही लेना चाहती थी उसे अपनी मा के लिए जीना था उसे खुशी देनी थी , कुछ बनना था ताकि उसकी मा को उस पर गर्व हो सके ..
मेरे दिल मे आज नेहा के लिए एक प्रेम और एक सम्मान ने जन्म लिया था, मैं ना जाने क्यो उसके हर राह मे उसका साथ देना चाहता था उसके साथ चलना चाहता था ..
लेकिन ……..
लेकिन मेरी मंज़िल कहा थी इसका तो पता मुझे भी नही था …
“हल्लो सरमेरा नाम अंकित है मैं सुस का बाय्फ्रेंड हू “
मेरे ऐसे बोलते ही सुस जोरो से हंस पड़ी थी
मैं, सुस, अज्जु और मोनिका के साथ एक माल मे आया हुआ था, वो लोग मेरे लिए कपड़े खरीद रहे थे ताकि मुझे तिवारी से इंट्रोड्यूस करवाया जा सके ..
ऐसे मुझे भी पता नही था की मैं वहाँ जा कर क्या करूँगा लेकिन फिर भी,
ऐसे वो भी नही जानते थे की मैं तिवारी के सामने जा कर क्या उखाड़ लूँगा लेकिन वो भी मुझे उसके सामने भेजने को तैयार हो गये थे क्योकि उन्हे अपनी शादी तोड़ने का यही एकलौता अवसर दिख रहा था ..
“तुम तो पूरे कार्टून लग रहे हो यार “
सुस ने हसते हुए कहा
“पापा या भाई लोग अगर तुम्हे देखेंगे तो तुम्हे छोड़ो मुझे ना मार दे “
मैने एक महँगी ब्रॅंडेड जीन्स पहनी थी लेकिन वो कमर से इतनी नीचे थी की मुझे बड़ा ही अनकंफर्टबल लगा सो मैने उसे उठा उँचा करके पहन लिया लगभग मेरे पेट पर, और शर्ट भी इन कर ली थी ..
“अरे भाई इसे कमर से थोड़ा नीचे पहनते है और देख मैं दिखाताहू “
लेकिन मुझे वो पसंद नही आया क्योकि फ्यूषन अपनी जाग थी मुझे तो अपना कॉमफोर्टब्लेन सुस चाहिए था..
लगभग पूरा दिन घूमने पर कुछ कपड़े मुझे पसंद आए थे वही सुस और मोनिका ने मुझसे दुगुना कपड़े खुद के लिए ले लिए थे, और उनका शॉपिंग जारी ही था ..
“भाई ये लड़किया तो आज मरवाएँगी “
अज्जु ने तब कहा जब वो दोनो सेंडल लेने चले गये और हम कॉफी शॉप मे बैठे कॉफी पी रहे थे
“भाई ये लोग पूरे साल का समान आज ही लेंगी क्या ??”
मैं भी थक चुका था
“क्या पता यार जब शॉपिंग की बात आती है तो सभी लड़कियो का हाल एक जैसा ही हो जाता है, इन्हे कोई भी चीज़ जल्दी पसंद आता ही नही है फिर अलग अलग चीज़ो के लिए अलग अलग शॉप मे जाती है हर शॉप मे एक दो घंटा तो लगा ही देती है … अब देखो ना कहने को तो मोनिका को सुस बिल्कुल भी पसंद नही है लेकिन आज देखो कैसे बेस्ट फ्रेंड बनी फिर रही है दोनो इनकी दोस्ती तो शॉपिंग ने ही करवा दी …”
हम दोनो ही हसने लगे थे
तभी मेरे दिमाग़ मे भाभी का ख्याल आया, उनकी साड़ी पुरानी हो गयी थी , कोई दो साड़ी ही होंगी उनके पास वही बदल बदल कर पहनती है, शायद उन्हे भी शॉपिंग करना पसंद आए …
नही शॉपिंग का मज़ा लेना अमीरो का काम था ना की ग़रीब लोगो का, सबसे पहली ज़रूरत तो रोटी और छत की होती है फिर कपड़ो का नंबर आता है, और इस तरह की शॉपिंग … भाभी तो सोच भी नही सकती ये सब ..
लेकिन फिर भी मेरे दिल मे आया की क्यो ना उनके लिए कुछ लिया जाए शायद एक साड़ी ..
“यार चल ना एक साड़ी देखते है “
अज्जु जो की अभी अभी थोड़ा रिलॅक्स हुआ था उसने मुझे खा जाने वाली नज़र से देखा
“यार सोच रहा हू की भाभी के लिए एक साड़ी ले लू, मेरे लिए तो तुम लोगो ने ये कपड़े ले दिए भाभी के लिए मैं एक साड़ी लेना चाहता हू “
अज्जु के होठों मे मुस्कान आ गयी और वो उठ खड़ा हुआ
हम दोनो पास ही एक सेल मे चले गये जहाँ 50% ऑफ चल रहा था..
मैने अपनी जेब टटोली कोई 200र्स थे जिसे खर्च करने के लिए भाभी ने ही दिया था, मुझे एक साड़ी पसंद आई
“भैया ये कितने की है “
“500र्स “
दुकानदार ने कहा
“ऊहह सस्ती वाली दिखाओ ना “
“रेंज कितने का है “
“200र्स “
दुकानदार ने मुझे घूरा
“अबेतू ले ना मैं तो हू, पैसे की टेन्षन क्यो ले रहा है “
अज्जु की बात सुनकर मुझे अच्छा तो लगा लेकिन मैं भाभी की साड़ी के लिए उससे पैसे नही ले सकता था
“नही भाई, भाभी की साड़ी के लिए तुझसे पैसे नही ले सकता, अगर उन्हे ये पता चलेगा तो बहुत नाराज़ होगी, और गिफ्ट की कीमत नही देखते दोस्त उसमे छिपा प्यार देखते है , जितनी मेरी औकात है उसी हिसाब से मैं भाभी के लिए साड़ी ले जाउन्गा “
इसके बाद अज्जु कुछ भी नही बोला क्योकि शायद वो मेरी भावनाओ को समझ चुका था
दुकानदार ने मुझे साड़ी दिखाई और एक पसंद भी आ गयी , सच मे साड़ी यो का काम बड़ा ही अजीब होता है एक ही जैसे दिखने वाली साड़ी 3000 से 300 तक की मिल सकती है बस क्वालिटी का ही आंतर होता है , मैं ये सारी ले कर खुश था बहुत खुस ……
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