Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ Chapter 2

 




       Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ Chapter  2





अगले दिन जब मैं काम पर गया तो मुझे वहाँ वो इनस्पेक्टर दिखा जो उस दिन बस स्टॅंड मे था ,मैं समान से भरे हुए बोरे उठा कर एक ट्रॅक मे डाल रहा था ,वो इनस्पेक्टर लाला के साथ कुछ बाते कर रहा था ,मैने उसे देखते हुए भी अनदेखा कर दिया लेकिन ना जाने कैसे उसकी

नज़र मुझपर पड़ ही गई ..



थोड़ी देर मे ही वो मेरे पास पहुचा साथ मे लाला भी था ,



“तू वही है ना जो उस रात बस स्टॅंड मे मिला था “



वो थोड़ी दूर खड़े मुझे घूर रहा था, मैने बस हाँ मे सर हिलाया ..



“लाला जानता है उस रात ये और इसकी एक छमिया मुझे मिले थे साले ने दो कॉन्स्टेबल को मार दिया था वो तो कालवा वहाँ आ गया वरना

,इसकी उस माल को नंगा करके नचाता “



उसकी बात सुनकर मेरा दिमाग़ खनकने लगा था मैने उस इनस्पेक्टर को घूरा ..



“क्या घूर रहा है बे मारेगा मुझे “



वो आगे आ ही रहा था कि लाला ने उसे रोक दिया ..



“अरे पांडे साहब जाने भी दीजिए नया लड़का है थोड़ी गर्मी ज्यदा है इसमे “



“साले की गर्मी तो मैं निकालूँगा, मेरे हत्थे चढ़ा तो फिर देखना क्या हालत करता हूँ साले की “



इतना बोलकर वो तो चला गया फिर लाला मुझे घूर्ने ल्गा, मैं अपना काम ही कर रहा था की उसने मुझे अपने पास बुलाया ..



“क्यो बे शहर मे नया नया आया है और इतनी गर्मी दिखा रहा है ,जानता है कि ये इनस्पेक्टर क्या कर सकता है “



“जानता हूँ साहब लेकिन ये साला नही जानता कि मैं अपनी भाभी के लिए क्या कर सकता हूँ ..”



वो मुझे और भी अजीब निगाहो से घुरने लगा था



“क्या कर सकता है “



“जान से मार दूँगा साले को अगर उनपर नज़र भी डाली तो “



लाला कुछ समझने की कोशिस कर रहा था तभी कालवा की आवाज़ आई ,



“बोला था ना इस लड़के को कोई दूसरा काम दो आग है साले मे “



कालवा वही थोड़ी दूर खड़े हुए हमारी बाते सुन रहा था ..


“हुम्म आग तो है ,चल टेस्ट भी कर लेते है ,ले जा इसे हामिद के पास ,वो देख लेगा “



कालवा ने सर हिलाया वही लाला ने किसी को फोन लगाया और कालवा मुझे लेकर एक बाइक मे बैठा कर कही ले गया ,मुझे दो तीन चीज़े अभी भी समझ नही आ रही थी पहला कि कालवा के पास ये बाइक कहाँ से आई दूसरा कि ये साला कालवा जब दूसरी जगह पर काम

करता है तो फिर यहाँ आया कैसे ..



और मैने ये पुच्छ ही लिया



“अरे छोटे मैं तो लाला के पास आया था काम से और ये मेरे सेठ की बाइक है…”



“आपका सेठ कॉन है “



“है एक कभी ले चलूँगा तुझे वहाँ पर साला चूतिया आदमी है वो पूरे का पूरा, चल अभी हामिद से मिल ,तू उसको पसंद आ गया तो तुझे गॅंग मे शामिल कर लेगा “



“गॅंग भाई ये कैसा धंधा है ..”



“साले इस शाहर मे अगर किसी भी चीज़ मे सबसे ज़्यादा पैसा है तो यहीं है ,पैसे से नहाएगा तू “



“भाई मुझे पैसे उतने ही चाहिए जितने मे मैं अपनी और अपनी भाभी की जिंदगी बेहतर कर सकूँ ,हम सुकून से जी ले यही बहुत है “



कालवा ने गाड़ी मे अचानक से ब्रेक मार दिया ..



“साले मतलब तुझे जीवन भर मज़दूरी ही करना है “



“भाई मुझे कोई ग़लत काम नही करना है “



कालवा ने मुझे ध्यान से देखा



“चल ठीक है तुझे अगर यही करना है तो यही कर ,तुझे फिर से छोड़ देता हू लाला के पास, कभी अगर ज़रूरत पड़ी तुझे मेरी तो बताना मैं तुझे हामिद से मिलवा दूँगा “



“जी भाई “



मैं ग़रीब था मेरे पास पैसो की ज़रूरत भी थी लेकिन मैं किसी भी कारण से ऐसा काम नही कर सकता था जिससे मेरी भाभी को कोई

परेशानी हो आख़िर ग़लत काम करके मैं उनके सामने कैसे जाता..



शाम जब मैं घर पहुचा तो फिर से शरीर का अंग अंग दर्द दे रहा था और कल से ज़्यादा दर्द दे रहा था ,पूरा शरीर ही टूटा हुआ लग रहा था, भाभी मुझे देखते ही समझ गई थी कि मेरे शरीर मे दर्द हो रहा है , उन्होने मुझे बिस्तर मे लेटने के लिए कहा और अपनी शर्ट भी उतारने की हिदायत दे दी , उन्होने सरसो का तेल गर्म करके मेरे शरीर पर मलना शुरू कर दिया ..



“अरे भाभी इन सबकी क्या ज़रूरत है “



“देख तू काम करना चाहता है ,ठीक है मैं मना नही करूँगी लेकिन ,तुझे दर्द हो रहा है ये मैं नही देख सकती बस ,अब चुप चाप लेटा रह और मुझे मालिश करने दे “



“अरे भाभी आप भी ना बच्चो जैसे जिद्दी हो रही हो “



मेरी बात का उन्होने कोई भी जवाब नही दिया वो बस चुप चाप मालिश करती रही ,उन्होने मेरे पीठ पर तेल लगाया और साथ ही साथ मेरे हाथ और पैरो मे भी अच्छे से मालिश कर दी ..



उन्होने मुस्कुराते हुए कहा



“पहले से भी अच्छा हो गया हूँ मैं ,लेकिन मालिश के कारण नही बल्कि आपके प्यार के कारण “



उन्होने मेरे गालो जो जोरो से खींचा



“बहुत मस्का मारना सीख गया है ,चल खाना बना दिया है खा ले “



मैं रोटियाँ ख़ाता रहा और भाभी मेरे लिए गर्म गर्म रोटिया देती रही ..



“आप क्यो नही खा रही हो ??”



“पहले तू तो खा ले “



“नही आपको भी मेरे साथ ही खाना होगा”



दो तीन रोटियाँ खाने के बाद मैने कहा



“अरे बाबा रुक तो जा पहले तू खाना खा ले “



“चलो आप भी खाओ “



मैने रोटी का एक टुकड़ा उनके मूह के पास लाया और उन्होने अपना मूह खोल दिया, रोटी का टुकड़ा अंदर चला गया था वो उसे चबाने लगी थी. लेकिन उनके आँखो मे पानी की कुच्छ बूंदे आ रही थी



“क्या हुआ भाभी ??”



“इतना प्यार आज तक मुझे किसी ने नही किया रे , तेरे भैया ने मेरा हुष्ण देख कर मुझसे प्रेम कर लिया था लेकिन वो प्रेम बस उनका वहम ही निकला , वो प्रेम नही शायद जिस्म की भूख थी , या फिर महज जवानी मे होने वाला एक आकर्षण , उन्होने हमेशा मेरी खुशी से पहले अपनी खुशी को प्राथमिकता दी , उनके लिए शरीर की संतुष्टि के ही मायने थे , जब तक उनका शांत नही होता तब तक तो बहुत ही प्यार

दिखाते लेकिन जब हो जाता तो बस ऐसे दिखाते जैसे उन्होने मुझसे शादी करके मुझपर अहसान किया हो , मैं एक ग़रीब घर की लड़की थी

लेकिन गैरत वाली थी अगर मुझे पता होता की वो शादी के बात अपनी दौलत का रोब मुझपर दिखाएँगे तो मैं कभी उनसे शादी नही करती ..”



वो रोने ही लगी थी , मैने उनके कंधे पर हाथ रखा ..



“मेरी वजह से तू भी दर दर की ठोकर खा रहा है , तेरे भैया को मुझपर गुस्सा था जो वो तुझपर भी निकाल रहे थे ,वरना तुझे कभी ऐसे नही

जीना पड़ता और गाँव वाले भी तेरे साथ खड़े होते “



मैं उनकी बात सुनकर थोड़ा सा हंसा , वो मुझे अजीब निगाहो से देखने लगी ..



“भाभी मुझे पता है कि अगर आप नही होती तो मेरा क्या होता , वो तो चाहते थे कि पूरी जायदाद खुद ही हड़प ले लेकिन आपके कारण नही

कर पाए मैं जानता हूँ की आप मेरे लिए उनसे भी लड़ जाती थी “



वो मुझे देखने ल्गी



“ हाँ भाभी मैं जानता हूँ , मैने आप लोगो की बाते भी सुनी थी जब माँ पिता जी का देहांत हुआ था ,जब वो आप से कह रहे थे कि इसे कुछ भी करके रास्ते से हटाना है ताकि पूरी जायदाद पर कब्जा कर लिया जाए , लेकिन आपने उन्हे मना कर दिया था यहाँ तक कि धमकी भी दे दी

थी कि अगर उन्होने ऐसी कोई कोशिश भी की तो आप सबको उनके इरादो के बारे मे बता देंगी ..”



“तूने वो सब सुना था “



भाभी आश्चर्य मे थी और मैं मुस्कुरा रहा था



“हाँ भाभी तभी से मुझे समझ आ गया था कि आप कितनी अच्छी हो , अगर आप नही होती तो शायद मैं भी नही होता इसलिए अपने को ऐसा

दोष मत दिया करो आप मेरे लिए क्या हो ये तो मैं बता भी नही सकता , आइ लव यू भाभी ..”



मैने ये उनकी आँखो मे देखते हुए कहा था ..



वो बस मुझे भीगी हुई आँखो से देख रही थी , उन्होने मेरे गालो पर अपने कोमल हाथ रख दिए ,और थोड़ा आगे आकर उन्होने मेरे गालो पर एक चुम्मन दे दिया



“मैं भी तुझसे बहुत प्यार करती हूँ बेटा “



जब भी वो एमोशनल होती थी तब वो मुझे बेटा कहती थी ..



मैने ऐसा गाँव वालो से सुन रखा था कि मेरी भाभी एक बांझ है , मतलब उन्हे बच्चा नही हो सकता , इस बारे मे मैने कभी उनसे बात नही की थी लेकिन शायद वो मुझे ही अपना बेटा मानती थी .. ये सोचकर ही मेरे होठों मे एक मुस्कान आ गई ..










मैं अभी अपने काम मे ही लगा हुआ था कि शोभा भाभी मुझे दौड़ते हुए आते दिखी …



“सोनू सोनू “ वो जोरो से चिल्ला रही थी



“क्या हुआ भाभी “मैं उनके पास पहुच गया था



“सोनू तेरी भाभी को कुछ लोग उठा कर ले गये “



“क्या ..?” उनकी बात जैसे मुझे कुछ समझ मे ही नही आई थी …



“कुछ लोग..”



“कॉन……. कॉन थे वो लोग ??”



मैं बुरी तरह से सदमे मे था



“पता नही बेटा लेकिन जब मैं और आरती काम के लिए निकले तो बीच मे उन्होने हमे रोका और आरती को उठा कर ले गये …”



तब तक लाला भी वहाँ पहुच गया था



“ज़रूर ये इनस्पेक्टर पांडे की करामात होगी ..”



तभी मुझे वहाँ कालवा दिखा ,वो भी बात सुन रहा था ,उसने मुझे अपनी बाइक मे बिठाया और गाड़ी दौड़ा दी ..



मेरा खून जल रहा था ,चेहरा और दिल गुस्से की आग से धधक रहे थे ,



“मुझे पता है कि वो लोग कहाँ गये होंगे..”



उसने गाड़ी एक वीरान इलाक़े मे खड़ी कर दी ,एक बड़े गोदाम जैसी जगह थी और बाहर एक जीप खड़ी थी उसकी नंबर प्लेट मे पोलीस लिखा हुआ था , मैं तेज़ी से आगे बढ़ा और गोदाम का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हुआ वहाँ मैने जो भी देखा उसे देख कर मेरा दिमाग़ ही सुन्न हो गया था …



अंदर वो इनस्पेक्टर और दो उस दिन वाले सिपाही थे जिन्हे मैने मारा था उनके साथ ही साथ कुछ और भी लोग थे जो कि किसी गुंडे जैसे लग रहे थे ..



उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो वो इनस्पेक्टर जोरो से हंस पड़ा



“देखो देखो कौन आया है , इस साले के सामने ही इस छमिया के जिस्म की धज्जिया उड़ाउंगा फिर इसकी चमड़ी निकाल कर साले के अंदर

की पूरी गर्मी निकालूँगा ,पकडो साले को ..”



मैने पास ही पड़ा हुआ एक रॉड उठा लिया था वो गुंडे जैसे लोग मुझे पकड़ने के लिए दौड़े मैं भी उनकी ओर प्युरे ताकत से भाग रहा था ,वही थोड़ी दूर ज़मीन मे पड़ी हुई भाभी के जिस्म मे नाम मात्र का ही कपड़ा रह गया था ,दोनो सिपाही उनका हाथ पकड़े हुए थे और उन्हे ज़मीन मे लिटा दिया था ,साड़ी शरीर से निकाल दी गई थी ब्लाउस भी जैसे फाड़ दिया गया हो .. एक नज़र उनके उपेर पड़ते ही मेरा खून उबाल

मारने लगा था , वो लोग मेरे पास आ चुके थे मैने जोरो से रॉड घुमाया लेकिन ये क्या ,किसी ने पीछे से मुझे लात मार दी मैं लड़खड़ाता हुआ गिर गया था..


दो लोग जो सामने से आ रहे थे और एक जिसने मुझे पिछे से लात मारी थी तीनो ने मिलकर मुझे दबोच लिया था , उन्होने मुझे अपने काबू मे

कर लिया था और पकड़कर इनस्पेक्टर के पास ले गये ,भाभी की आँखो मे दहशत नाचते हुए दिखाई देने लगी थी ..



“इसे छोड़ दो तुम लोग जो बोलोगे मैं करूँगी ..”



भाभी की बात सुनकर सभी जोरो से हँसने लगे, मुझे बुरी तरह से मारा गया था , आँखो के सामने अंधेरा छा गया था लेकिन भाभी की बात सुनकर मुझे फिर से एक झतका लगा ..



मैने अपना पूरा ज़ोर लगाया था अपनी आँखो को खोलने के लिए लेकिन नाकाम रहा था , सामने की हल्की हल्की सी तस्वीर मुझे दिखाई दे रही थी ,लेकिन सब कुछ धुँधला धुँधला सा ही था ,



“तेरे साथ ही सब करूँगा मेरी जान और एक एक कर सभी करेंगे लेकिन थोड़ा रुक तो जा ,इस साले को बहुत ही गर्मी चढ़ि थी ना तो पहले

उसे तो उतारने दे ,पानी डालो रे इसके उपर आँखे खुलवाओ इसकी इसके सामने ही इसकी छमिया की इज़्ज़त उतारते है ..”



तभी मेरे उपर किसी ने थोड़ा पानी डाला मेरी आँखे थोड़ी और खुली , इनस्पेक्टर मेरे पास ही खड़ा हुआ था उसने अपने हाथो से मेरे मूह को दबोच लिया था ..



“क्यो बे मादरचोद बहुत अकड़ थी ना तेरे अंदर अब देख तेरा और इस आइटम का क्या हाल करता हूँ “



“रुक जा मादरचोद “ मेरे पास इतनी ताकत नही बची थी कि मैं कुछ ज़ोर से बोल पाता ,मैने धीरे से ही कहा



“अभी भी जान है साले मे “ वो इनस्पेक्टर हसने लगा ,



“कोई बात नही जान होनी चाहिए तभी तो ये सब देख पाएगा ..”



वो भाभी तक पहुच चुका था ,भाभी के रोने की आवाज़ मेरे कानो मे स्पष्ट थी ..



“प्लीज़ उसे छोड़ दीजिए उसे जाने दीजिए, आप जो बोलोगे मैं वो करूँगी ..”



वो फिर से गिडगिडाइ



“जाने दूँगा मेरी जान पहले तेरे मज़े तो ले लूँ “



इनस्पेक्टर ने भाभी के स्तनों को मसलना शुरू कर दिया था ,मुझे बस भाभी के रोने की आवाज़ आने लगी ,दिमाग़ पूरी तरह से सुन्न हो चुका था ,मैने आँखे बंद कर ली और अपने आप से ही बाते करने लगा



“क्या तुझे ऐसी नामर्दों वाली जिंदगी चाहिए ,क्या तेरी भाभी के साथ कोई कुछ करे उसे तकलीफ़ दे और तू यू ही आँखे बंद करके बैठा रहेगा

,क्या तू एक नामर्द है , क्या इसके बाद तू जी पाएगा … “




मेरी आँखे झट से खुली सामने इनस्पेक्टर भाभी के जिस्म से साड़ी को हटा चुका था और पूरे हवस के आगोश मे आकर उनके पेट पर अपना मूह चला रहा था ..



मेरा दिमाग़ शांत हो चुका था एक बार मैने भाभी के चहरे को देखा , उनकी आँखो से दर्द साफ साफ झलक रहा था , वो बेचारी मेरी जान बचाने के लिए चुप हो चुकी थी और अपने जिस्म का ईस्तमाल करने की इजाज़त दे चुकी थी , हमारी नज़रे मिली उनकी आँखो मे मेरे लिए अब भी वही प्यार था और उसी प्यार ने मेरे अंदर एक हिम्मत और ताक़त का संचार कर दिया ,मैने नज़र घुमाई तो मुझे इनस्पेक्टर के कपड़े

एक ओर पड़े हुए दिखाई दिए , वही उसका रेवोल्वेर भी रखा हुआ था , बाकी के लोग भाभी के जिस्म की नुमाइश का मज़ा उठा रहे थे यही समय था और मैं तुरंत ही उठा और पूरी ताकत लगा कर उस रेवोल्वेर को पकड़ने के लिए झपटा ,बस जैसे पलक सी झपकी हो और मेरे

हाथो मे एक पिस्टल थी इससे पहले कोई भी कुछ समझ पाता मैने दो गोलियाँ सीधे इनस्पेक्टर पर चला दी …



ढाय धाय



गोलियाँ सीधे उसके माथे पर लगी और उसकी खोपड़ी ही खुल गई ,वो सीधे भाभी के उपर गिर गया ,भाभी के चहरे पर बस खून ही खून

दिखाई देने लगा था ,उसके बाकी के साथी कोई हरकत करते उससे पहले ही मैने अपनी बंदूक तान दी ..



“खबरदार अगर कोई हिला तो भुन कर रख दूँगा “



सभी सकते मे आ चुके थे ,लेकिन वो ट्रेंड लोग थे एक ने तुरंत अपनी पिस्टल निकाली और तभी किसी ने उसे पिछे से उसके सर पर एक रॉड दे मारा , वो कोई नही बल्कि कालवा ही था जो मेरे साथ आया हुआ था , उसने उसके हाथो से पिस्टल ले ली और बाकियो पर तान दी ,



“तुम ये ठीक नही कर रहे हो कालवा , इसका साथ देकर तुम भी नही बचोगे , जानते हो ना इनस्पेक्टर किसका आदमी था ,और पोलीस वाले

को मारने के कारण ये तो जाएगा ही जाएगा लेकिन तुम भी इसके साथ जाओगे याद रखना ..”



एक सिपाही चिल्लाया



“सब जानता हूँ कि ये किस नेता का कुत्ता था और उसके ही दम मे उच्छलता था , लेकिन मादरचोद मैने इसे पहले भी समझाया था कि मजदूरो से पंगा ना ले इस साले ने मेरी बात नही सुनी .. सोनू “



कालवा ने मुझे एक इशारा किया और मैने दो गोली और चला दी दोनो सिपाहियो को गोली लगी एक के माथे पर और दूसरे के सीने पर ,भाभी भी अब खड़ी हो चुकी थी लेकिन उनकी आँखो मे ख़ौफ़ साफ साफ दिखाई दे रहा था , उनका प्यारा सोनू अब एक कातिल बन चुका था वो भी पोलीस वालो का ..



“अब तुम किसके साथ हो बे , पोलीस वाले के साथ मरोगे या फिर भागो गे “



कालवा ने वहाँ आए बाकी के 3 लोगो से कहा



“कालवा भाई वो सब तो ठीक है लेकिन तुम जानते हो दया संकर तिवारी मंत्री है और ये इनस्पेक्टर पांड्या उसका खास आदमी था , पूरी

ताकत लगा देगा इस लड़के को खोजने मे और साथ मे तुम भी पिस जाओगे ..”



“तू मेरी फिकर मत कर बेटा तू अपनी फिकर “



“भाई हम किसी को कुछ नही बताएँगे हमे जाने दो , हम भी तो हामिद के ही आदमी है तुम तो हमे पहचानते हो “



उनमे से एक ने कहा , कालवा थोड़ी देर के लिए सोच मे पड़ गया और मुझे देखने लगा



“कालवा भाई अगर इन लोगो को छोड़ दिया तो ये तो जाकर सभी को बता देंगे “



मेरा डर भी स्वाभाविक था



“फिकर मत कर ये लोग मूह नही खोलेंगे ये हामिद के आदमी है और हामिद मेरा दोस्त है , लेकिन तुम लोग जाकर हामिद को ये बता देना

कि इनस्पेक्टर पांडे को किसने मारा है “



उसके होठों मे एक अर्थपूर्ण मुस्कान खिल गई थी जिसे मैं समझ नही पा रहा था, वो लोग भागे , भाभी तब तक अपनी साड़ी पहन चुकी थी ..



“यहाँ से जल्दी निकलना होगा और साथ ही ये इलाक़ा भी छोड़ना होगा , खबर तुरंत फैल जाएगी कि तुमने पांडे को मारा है और फिर तुम्हारे लिए बच पाना आसान नही होगा ..”



कालवा की बात सुनकर भाभी की हालत खराब हो गई थी वही मेरे दिल मे ज़रा भी डर नही था ..



“लेकिन कहाँ जाएँगे ??”



कालवा मुस्कुरा उठा



“अगर तिवारी से कोई बचा सकता है तो एक ही आदमी है यहाँ के भगवान 


कालवा मुझे और भाभी को संपत के पास ले गया, शहर से दूर एक वीरान सी जगह थी, लेकिन एक बड़ी सी हवेली थी, हमे एक कमरे मे बैठने के लिए बोलकर कालवा कही चला गया …



“सोनू मेरे कारण तुझे कितनी मुसीबतो का सामना करना पड़ेगा रे, जी करता है कि खुद को मार ही डालु “



भाभी की बात सुनकर मैं सकते मे आ गया था



“खबरदार अगर ऐसा सोचा भी तो , आपको एक खरोच भी आए तो मेरी जान निकल जाती है और आप मरने की बात कर रही हो , अगर आपको कुछ हो गया तो सोचा है मेरा क्या होगा , मैं तो जीते जी ही मर जाउन्गा, आप मेरी भाभी माँ हो अब आँसू पोछो और एक मुस्कान मुझे दिखाओ .”



उन्होने प्यार से मेरे गालो पर अपना हाथ फेरा..



“ये दुनिया जिस्म की भूखी है बेटा , यहाँ लोग प्रेम का मतलब भी नही समझते , सभी को जिस्म की चाहत है भले ही वो प्यार से मिले या फिर

छीन कर लिया जाए , तेरा भाई भी वैसा ही था , पता नही तू किस मिट्टी का बना है जिसने मुझे प्रेम किया ना कि मेरे जिस्म से “



वो बेहद ही एमोशनल हो गई थी , मैने उनकी आँखो मे देखा वो प्रेम का पूरा दरिया था , भीगी हुई आँखे रो रो कर लाल हो गई थी , चेहरे की रंगत भी उड़ गई थी लेकिन मज़ाल है कि उनकी खूबसूरती मे थोड़ी भी कमी आई हो … वो चाँद की तरह थी अगर दाग भी लग जाए तो दाग ही सुंदर हो जाता है , चेहरे मे लगे कुछ चोट के निशान भी वैसे ही सुंदर हो गये थे , उन चोटो से थोड़े थोड़े खून का रिसाव तो हो रहा था

लेकिन वो वही जम से गये थे , उनके ब्लाउस के कुछ भाग फट चुके थे और साड़ी भी जल्दबाज़ी मे पहनी गई थी ,इन सबके बावजूद वो मेरे लिए किसी देवी की तरह सुंदर थी और उनकी सुंदरता से उनका मातृत्व झलक रहा था उन्हे देखकर ही मेरी आँखो मे आँसू आ गये लगा कि

अभी उनके पैरो मे गिर जाउ उनके शरण मे अपना पूरा जीवन बिता दूं ..



वो मेरी आँखो मे आए आँसुओं को अपने उंगली के सहारे से पोच्छने ल्गी ..



“अब तू क्यो रो रहा है ..”



इस बार उनके होठों मे मुस्कान थी जैसे उन्हे पता हो कि मेरी आँखो मे आए हुए इस आँसू की वजह क्या है ,मैं भी बस हल्के से मुस्कुरा गया….



तभी कमरे का गेट खुला और एक बड़ी बड़ी मुन्छो वाला व्यक्ति वहाँ दाखिल हुआ साथ ही कालवा भी था …



उसने एक बार मुझे देखा तो एक बार भाभी को उपर से नीचे तक देखा और फिर कालवा को देखने लगा ..



उसकी आँखो मे कुछ ऐसा था जो मुझे समझ नही आ रहा था कि आख़िर बात क्या है ..



“तो लड़के तुमने मार दिया पांडे को “



“जी ..”



“सही किया, साला था ही हरामी, क्या नाम है तुम्हारा “



“जी सोनू “



“सोनू…?? नाम से ही बच्चा लग रहा है और काम बड़े बड़े , और तुम्हारा नाम? “



उसने भाभी की ओर देखा, भाभी थोड़ी सहम सी गई थी संपत का चेहरा था ही ऐसा ख़ूँख़ार वो तो चेहरे से ही कोई छटा हुआ बदमाश लगता था ..



“आरती “



“आरती .. हहा तभी वो पांडे तुम्हारी आरती उतारने ले गया था “



वो एक गंदी सी हँसी हंसा, कालवा भी मुस्कुरा उठा लेकिन मेरी आँखो मे आग आ गई थी, संपत ने मेरी आँखो को देखा ..


“सही कहता था तू कालवा इस साले की आँखो मे ही आग है.. ठीक है जब तक मामला शांत नही हो जाता तुम दोनो यही रहो और तुम

लड़के अपना नाम बदल लो और मेरे गॅंग मे शामिल हो जाओ क्या है ना मैं मुफ़्त मे किसी के लिए कुछ भी नही करता ..



मैने सर हिलाकर हामी भरी..



“फिकर मत कर मेरे रहते तुम दोनो को तिवारी तो क्या उसका बाप भी छु नही पाएगा …”



संपत एक दमदार आवाज़ मे बोला ..



“धन्यवाद भैया “



भाभी के मूह से निकल गया जिसे सुनकर संपत के चेहरे मे एक मुस्कान आ गई



“भैया नही मामा, मामा बोलना अब से तुम दोनो मुझे “



संपत की बात सुनकर हम दोनो ही एक दूसरे को देखने लगे ..



“जी मामा ..”



“गुड चलो तुम दोनो का कमरा दिखा देता हूँ “



सच मे वो एक बड़ी सी हवेली थी , मुझे और भाभी को लेकर संपत आगे आगे चल रहा था वही कालवा ने हमसे विदा ले लिया था , हवेली के आँगन मे कई लोग बैठे हुए थे सभी के हाथो मे बड़ी बड़ी बंदुके थी और सभी की निगाहे मेरे और भाभी के उपर ,मुझे ये भी शक़ हो रहा था की कही भाभी को यहाँ लाकर मैने कोई ग़लती तो नही कर दी ..



खैर जो भी हो जब खाई मे कूद ही गये है तो देखा जाएगा और जैसे संपत ने हमसे बात की और हमे मामा बुलाने के लिए कहा उससे मुझे

थोड़ी आत्मीयता की भी फीलिंग हुई ..



दूसरे मंज़िल पर हमे आजू बाजू के दो कमरे दिखाए गये, दोनो कमरे हमारी झोपड़ी से बड़े थे



“तुम दोनो अपना कमरा सॉफ कर लेना, और कल से तुम औरतों के साथ काम करोगी और तुम मेरे साथ चलना तुम्हे थोड़ी ट्रैनिंग की ज़रूरत होगी ,और हाँ नाम बदल लेना जिसे सुनकर लोग डरे ना कि हंस दे ..”



वो बड़ी ही आत्मीयता से मुस्कुराया, ना ही मुझे और ना ही भाभी को कुछ समझ आ रहा था, संपत का हमारे लिए ये आत्मीय व्यवहार दोनो को ही समझ नही आ रहा था ..



हम अभी भाभी के कमरे मे जाकर बैठे थे, सभी चीज़े अपनी सही जगह पर रखी हुई थी , एक बिस्तर लगा हुआ था एक इंसान के रहने के लिए बहुत जगा थी , उसी कमरे से सटा हुआ एक दूसरा दरवाजा भी था जो कि मेरे कमरे की ओर खुलता था , मैं भी अपने कमरे मे चला गया था दोनो दरवाजा बंद कर लेते थे भविस्य की चाह मे लेकिन मुझे अपने पास भाभी की कमी खल रही थी ,वो झोपड़ी इतनी छोटी थी कि हमे

एक दूसरे के पास रहने की आदत सी लग गई थी , मैने दोनो कमरे के बीच के दरवाजे को खोल दिया , मैने देखा की भाभी की आँखे बंद थी और वो अपने बिस्तर मे लेटी हुई थी लेकिन उनके चेहरे से लग रहा था कि वो किसी बहुत ही गहरे सोच मे डूबी हुई है , मैं उनके पास जा कर बैठ गया ..



वो चौक गई



“तू कैसे अंदर आ गया “ उन्होने देखा कि उनके कमरे का दरवाजा अभी भी बंद था ..



मैने मुस्कुराते हुए हमारे कमरे के बीच के दरवाजे की ओर इशारा किया , पता नही उन्हे क्या हुआ वो थोड़ा सा उठी और मेरे गले मे अपनी बाँहे डालकर झूल गई , इसका असर ये हुआ कि मैं भी उनके साथ बिस्तर मे गिर गया , मैं उनके उपर था और वो मेरे नीचे वो मुझे कस कर जकड़े हुए थी ..



“अरे भाभी ये क्या कर रही हो “



उनके ऐसा करने से तो मैं भी चौक गया था ,लेकिन उन्होने कुछ भी नही कहा बल्कि मुझे अपने से और जोरो से सटाने लगी ..



मैने भी उनसे अलग होने के लिए कोई ज़ोर नही दिया बल्कि बस उनके उपर ही लेटा रहा , थोड़ी ही देर मे उन्होने अपना बंधन थोड़ा ढीला किया और प्यार से मेरे बालो को सहलाने लगी ,



मैने अब अपना चेहरा थोड़ा उपर किया …



उनकी आँखो मे आँसू के दो तीन कतरे थे जो उनके गालो से होते हुए लुढ़क रहे थे , मेरे होठ उनके उन आँसुओ को अपने अंदर समाने लगे थे , मैं हल्के हल्के उनके गालो पर अपने होठों को चला रहा था , उनका लाल चेहरा और भी खिल गया था , होठों मे एक बड़ी सी मुस्कान

खिल गई थी लेकिन अब भी आँखो से एक दो आँसू टपक ही जाते थे , उनका चेहरे मेरे लार और उनके आँसू से गीला हो रहा था , लेकिन इन सबमे मेरे अंदर एक उत्तेजना ने जन्म ले लिया , वो उत्तेजना थी और अधिक की कामना की उत्तेजना ..



मैं थोड़ा उत्तेजित होने लगा था , मेरे होठ प्रेम से आँसुओ को पीने की बजाय थोड़ा गालो को काट भी रहे थे , ऐसा लग रहा था कि मैं इन गालो

को खा ही जाउ , और मेरे अंदर क्या हो रहा था शायद भाभी ने उसे समझ लिया था उन्होने मुझे खुद से अलग किया ..


“सोनू इतना अधीर होना सही नही है , ये तेरे अंदर के प्रेम को मार देगा और …”



वो चुप हो गयी और मैं उनकी बातों को समझने की कोशिस करने लगा ..मेरी आँखे ही बोल रही थी कि मुझे उनकी बाते समझ नही आई है ..



उन्होने प्यार से मेरे बालो को सहलाया



“बेटा प्रेम अधीर नही होता वासना होती है , प्रेम मे अधिरता वासना को जन्म दे सकती है “



मैं बुरी तरह से चौक गया था



“भाभी आप ये क्या कह रही हो मैने कभी आपको गंदी नज़रो से नही देखा है “



“मुझे पता है सोनू, लेकिन जिस्म की वासना भी तो कुछ पाने की वासना से ही जन्म लेती है ना , जैसे अभी तू मेरे गालो को काटने की इक्षा कर रहा था …”



उनकी बातों को सुनकर जैसे मुझे मेरी ग़लती का आभास हुआ ..



“मुझे माफ़ कर दो भाभी मैं …”



उन्होने मेरे होठों पर अपनी उंगली रख दी



“मैं समझती हूँ तुझे खुद ही नही पता था कि तू क्या कर रहा था , लेकिन अब तू जवान हो गया है बेटा अब तुझे एक गर्ल फ्रेंड की ज़रूरत है “



उनके होठों मे के शरारती सी मुस्कान खिल गई



“क्या भाभी आप भी मेरी गर्लफ्रेंड तो एक ही है और वो हो आप ,मेरी बहन, मेरी माँ, मेरी भाभी और मेरी गर्लफ्रेंड भी सब कुछ आप ही हो “



भाभी के बुझे हुए चेहरे मे अचानक से हँसी आ गई वो जोरो से हंस पड़ी ..



“चल बदमाश…”



“भाभी आपको ये संपत कैसा लगा ??”



मेरी बात सुनकर जैसे वो फिर से उसी मनोस्तिति मे पहुच गयी जहाँ वो पहले थी , उनका चेहरा फिर से गंभीर होने लगा था ..



“ये इतना बड़ा गुंडा होकर जिस तरह से हमारी मदद कर रहा है और जिस भाषा मे हमसे बात कर रहा है वो सच मे थोड़ा अजीब सा है .. “



मैने भी सहमति मे अपना सर हिलाया..



“सोनू अगर वो लोग तुझसे कोई ग़लत काम करवाए तो सॉफ मना कर देना बेटा , मैं नही चाहती कि तू ग़लत राह पर चल पड़े जहाँ से वापस आना ही मुस्किल हो जाए और तुझे अपना कॉलेज भी फिर से शुरू करना होगा शायद अलग नाम से तू कुछ बन जाएगा तो हम कही भी आराम से रह लेंगे..”



मैने हाँ मे सर हिलाया तभी मुझे याद आया कि संपत ने मुझे एक नया नाम सोचने के लिए कहा था..



“भाभी आप मेरे लिए एक नया नाम सोचो ..”



वो थोड़ी देर सोचने लगी



“ हुम्म अंकित कैसा रहेगा ..”



मैं भी खुस हो गया



“वाह क्या बात है वैसे अंकित ही क्यो..??”



“बस ऐसे ही मैं आरती और तू अंकित “



हम दोनो ही जोरो से हंस पड़े थे


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