Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ Chapter 1
कभी वो मुझे मेरी माँ सी लगती थी तो कभी बहन का प्यार देती थी ,वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी थी जिससे मैं दिल खोलकर अपनी बाते कर सकता था ,माँ बाप के जाने के बाद वही तो थी जिसने मुझे सम्हाला था ,हर दर्द मे साथ थी वो और हर खुशी उससे ही शुरू होती थी
,जिस भाई से मैं इतना डरता था वो उसकी पत्नी थी , लेकिन मुझे अभी उनसे कोई भी डर नही लगता ,असल मे तो उनके होते मैं ऐसा होता
कि मुझे कोई भी डर कभी छु भी नही सकता ,वो थी मेरी भाभी माँ …
माँ इसलिए क्योकि उन्होने मुझे माँ वाला प्यार भी दिया था ,मैं अभी अभी तो अपनी जवानी की दहलीज मे कदम रख रहा था जब मेरे एकलौते भाई ने अपने पसंद से और घर वालो के विरुध जाकर शादी कर ली थी ,मेरे परिवार ने उन्हे अपने से अलग ही कर दिया था ,मेरी माँ का रो रो कर बुरा हाल कर दिया था, मुझे नही पता था की समाज के ये बंधन आख़िर क्यो है लेकिन एक लड़की जिसने मेरे भाई को अपनाने केलिए अपने परिवार को छोड़ा था वो मेरे लिए बेहद खास ही थी …
उनकी शादी को एक साल हो चुका था, मैं उस समय स्कूल मे ही था कभी कभी स्कूल से छूट कर तो कभी स्कूल ना जाकर मैं उनके पास पहुच जाता था, वो बड़े प्यार से मुझे अपने पास बिठाती दुनिया भर की बाते करती और फिर आख़िर मे उनकी आँखे ही भर जाती ..
“सोनू काश मम्मी पापा भी मुझे अपना पाते जैसे तूने मुझे अपना लिया “
मैं क्या कहता, मैं तो उनके हाथो से बने खाने के लिए वहाँ चला जाता था और फिर खाने के बाद मिलने वाली मिठाई के लिए, मैं चुप ही रहता लेकिन जब वो रोने लगती तो उनकी प्यारी आँखो मे आए आँसू मुझे मेरे दुशमन ही लगते थे
“अरे भाभी माँ आप भी क्यो मम्मी पापा की टेन्षन ले रहे हो ,वो कुछ भी बोले आपका ये सोनू हमेशा आपके साथ है ..”
मैं बस इतना ही बोलता था और भाभी के चहरे मे खुशी खिल सी जाती जैसे उन्हे कोई जन्नत मिल गई हो ,वो मुझ पर और भी प्यार लूटाती थी ,भाभी पास के ही गाँव की थी, भाई के कॉलेज के पास एक छोटी सी दुकान चलाती थी ,बेहद ही ग़रीब घर की थी पता नही कैसे लेकिन भाई का उनपर दिल आ गया ,जात अलग थी तो भाई को भी शादी करने मे परेशानी हुई ,भाभी एक ग़रीब परिवार की थी वही हम थे अपने गाँव के पंडित ,दूर दूर तक हमारे परिवार के चर्चे थे ये मेरे बापू मुझे बोला करते थे..
“तू कही अपने भाई जैसे जात के बाहर की लुगाई ना ले आना “
कभी कभी बोलते हुए उनकी आँखे पता नही कहाँ खो जाती थी
“अरे बापू भाभी बहुत ही अच्छी है आप लोग उन्हे क्यो इतनी नफ़रत से देखते हो “
मैं बोल उठता था ..
और फिर बापू का लेक्चर हो जाता था चालू, जात पात की कई कहानिया शुरू हो जाती थी ..
“मैं तो उस रांड़ के हाथो से पानी तक ना पियू “
बापू का इस तरह भाभी के लिए बोलना मुझे कभी सोभा नही देता
“बापू वो मेरी भाभी माँ है उन्हे ऐसा कुछ मत कहा करो “
“तेरी इतनी मज़ाल तू मुझसे ज़ुबान लड़ाता है वो भी उस रांड़ के लिए ,तेरे भाई को तो खा गई है मादर्चोद अब तुझे भी अपने बस मे कर लिया है क्या उसने “
बापू की बात से मेरा दिल ही भर जाता, मुझमे समझ ही थी कि आख़िर मेरी प्यारी सी भाभी ने ऐसा क्या अपराध कर दिया है ,लेकिन मैं उनके लिए लड़ जाता था और बदले मे मुझे मिलती थी जोरदार मार …
कभी बापू से तो कभी माँ से ..फिर मैं अपना चेहरा लटकाए हुए पहुच जाता था अपनी प्यारी भाभी के पास …भाई तो मुझसे 10 साल का बड़ा था उससे कुछ बोलते मेरी हालत ही ख़सती हो जाती थी लेकिन भाभी मुझे समझती थी मेरी एक एक रग का उन्हे पता था ..
“क्या हुआ सोनू फिर से पापा ने तुझे मारा “
मैं दौड़ता हुआ जब गाँव से दूर बने उनके घर मे जाता वो मेरा चेहरा देख कर ही बता देती थी कि मैं आज मार खा कर आया हूँ ..
“देखो ना पापा आपको रांड़ बोल रहे थे ,मुझे अच्छा नही लगता अगर आपको कोई कुछ भी बोले “
पता नही मेरी मासूमियत थी या मेरा भोलापन लेकिन मुझे रांड़ शब्द की असलियत उस समय नही पता थी मुझे बस इतना ही पता था कि ये एक गाली है ..
वो बेचारी मेरी बात सुनकर थोड़ी उदास सी हो जाती ..
“तू क्यो उनसे बहस करता है, आख़िर जानता है ना की उनसे बहस करने से मार खाएगा “
वो धीमी सी आवाज़ मे बोलती थी
“तो क्या आपको वो गाली देंगे तो मैं सुनूँगा “
मैं थोड़ा गुस्सा हो जाता
“अरे तो क्या हुआ सुन लिया कर ना “
“कैसे सुनू आप मेरी भाभी माँ हो “
मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ती थी, कभी कभी मेरे गालो को खिच लेती ..
“तू इतना प्यार करता है अपनी भाभी माँ से “
वो मुझे अपलक निहारती
“प्यार का तो नही पता लेकिन मुझे पसंद नही कि आपको कोई कुछ भी बोले “
“अच्छा तो अपने भाई से क्यो नही कहता जो पापा ने कहा “
भाई की बात सुनकर ही मैं घबरा जाता था..
“उन्हे क्यो बीच मे लाती हो “
“अरे क्या हुआ ??”
वो मुस्कुराते हुए कहती थी
“उनसे मुझे डर लगता है “
और वो जोरो से हंस पड़ती, मेरे बालो को प्यार से सहलाती
“भला क्यो ...??”
“पता नही बस लगता है “
“अच्छा और मुझसे ??”
वो फिर से मेरे चेहरे को बड़े ही प्यार से देखती थी
“आप तो मेरी भाभी माँ हो, आपसे क्यो डरुन्गा “
वो मुझे कभी कभी खिचकर अपने सीने से लगा लेती ,तो कभी सिर्फ़ मेरे गालो मे एक प्यारा सा चुम्मन दे देती
“अच्छा मेरा प्यारा सोनू ..”
मैं खुश हो जाता था ,ऐसा प्यार तो मेरी माँ ही मुझे करती थी ,माँ जैसा प्रेम और बहन जैसी केर करने वाली ये आद्भुत सी औरत एक वो ही तो थी मेरी भाभी माँ ………..अपडेट 2
बात तब की है जब मैं स्कूल से निकला था और तभी माँ पापा की एक कार आक्सिडेंट मे मौत हो गई ,कहते है ना कि जब दुख आता है तो हर तरफ़ से आता है मेरे साथ भी वही हुआ था..
माँ पापा का साया छिन जाने से मुझे लगा कि मैं अनाथ हो गया लेकिन तभी भाई सामने आया और उसने पापा का पूरा कारोबार खुद के अंडर ले लिया,लेकिन पता नही उसके दिल मे क्या था वो मुझसे ठीक से बात भी नही करता ,लेकिन भाभी का साया ही था जिसने मुझे कभी अनाथ होने नही दिया था ..
मैने अभी कॉलेज जाना शुरू ही किया था ,एक दिन मैं कॉलेज से आया ही था कि लगा की भाभी और भैया जो कि अब हमारे पुराने घर मे रहते थे उनके बीच कोई बहस सी हो रही है ..मैं बस ध्यान लगा कर सुनता रहा ..
“अरे कमाऊ मैं और वो बैठा बैठा बस खाएगा क्या ??”
ये मेरे भाई की आवाज़ थी जो कि बहुत ही गुस्से मे लग रहे थे
“वो अभी बच्चा ही है अभी अभी तो स्कूल से निकला है ,उसे पढ़ने दीजिए ना ,वो कहाँ ये सब काम कर पाएगा..”
मेरी भाभी ने भाई को समझाने की कोशिस की थी
“तुम उसका ज़्यादा सपोर्ट मत करो ,आख़िर मैने भी तो उस उम्र मे काम करना शुरू कर दिया था,उसकी उम्र मे मैने परिवार की पूरी
ज़िम्मेदारी ले ली थी ,पापा मुझे सर आँखो मे बिठाते थे लेकिन फिर ..जीवन ही बर्बाद हो गया “
भाई की आवाज़ मे एक अलग ही बात थी जो मुझे उस समय तो समझ नही आई
“क्या बर्बाद हो गया आपका जीवन “
भाभी की आवाज़ थोड़ी दब सी गई
“क्या बर्बाद हुआ ,साली तुझे पता नही क्या कि मैं किसलिए बर्बाद हुआ हूँ ..तेरी चूत के चक्कर मे मेरा पूरा जीवन ही बर्बाद हो गया ,मेरे माँ बाप ने मुझे छोड़ दिया,साली बापू सही था तू थी ही रांड़ जिसने अच्छे परिवार का अच्छा मर्द देखा तो बस फँसा लिया,साली मेरे भाई को भी
अपनी चूत के चक्कर मे फाँसना चाहती है क्या ..”
भाई की बात सुनकर मैं बिल्कुल ही स्तब्ध था ,मैं इतना तो बड़ा हो चुका था कि मुझे रांड़ और चूत जैसी बातों का मतलब पता था और ये भी कि वो क्या बोल रहा है वो भी उस लड़की से उसने उसके साथ इतना बुरा समय भी बिताया था जब भाई को घर से धक्के मार कर निकाल दिया गया था..
“आप पागल हो गये हो क्या,आप तो मुझसे प्यार करते थे फिर इन सालो मे क्या बदल गया है आपके अंदर ,ना तो आप मुझे पहले जैसा प्यार करते है ना ही मेरी कोई इज़्ज़त है ,और सोनू तो मेरे भाई जैसा है उसके लिए आप ऐसा बोल रहे है “
वो फुट फुट कर रो रही थी लेकिन भाई के दिल मे थोड़े भी रहम ने जनम नही लिया
“साली रांड़ मैं भी तेरे हुस्न का अँधा हो गया था ,साली 5 साल हो गये शादी को एक बच्चा भी नही दे पा रही है मुझे और कहती है कि प्यार क्यो कम हो गया ,साली तुझसे शादी करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी ग़लती थी ,मुझे फुटपात मे लाकर छोड़ दिया था ,वो तो अच्छा हुआ की ये माँ पापा मर गये वरना आज भी दो वक्त की रोटी के लिए इधर उधर दौड़ता रहता ,साली ग़रीब घर की लड़की है ना तू अपनी औकात तो
दिखाएगी ही ,जब मैं काम मे जाता था तब सोनू को बुलाती थी ,साली उसका भी लौंडा अपनी चूत मे लेती रही होगी मज़ा तो आता होगा ना रंडी साली तुझे भी ,भागकर मुझसे शादी कर ली शादी से पहले ही अपनी चूत मुझे दे दी था तूने याद है ना,साला मेरा भी भेजा खराब था जो
तेरे जैसी रांड़ से शादी कर ली ..”
मैं जैसे बेहोश ही हो गया था …
ऐसा लगा जैसे कोई मेरे माथे पर कुछ लगा रहा है ,मैने तुरंत ही आँखे खोली सामने सिसकती हुई भाभी बैठी थी …
“अब कैसा है मुन्ना “
उन्होने बड़ी ही मुस्किल से ये बोला था ,आँखो के आँसू रह रह कर उनके नाज़ुक से गालो मे उतर जाते थे ,सारी के पल्लू से अपना मूह छुपा
छुपा कर वो रो रही थी
मैं बिल्कुल ही आश्चर्यचकित होकर उन्हे देख रहा था इतना सब कुछ होने के बाद भी वो मेरा ध्यान रख रही थी ,मैने पास ही खड़े सोहन को
भी देखा ,सोहन मेरे बचपन का दोस्त था लेकिन दुनिया दारी मे मुझे कही आगे था ..
“सोनू भाई तुम्हारे भाई का चक्कर तुम्हारे पड़ोस की उस लड़की चंचल से है ,मैं कई दिन से उन्हे देख रहा हू लेकिन कुछ बोला नही सोच कि सब ठीक हो जाएगा ,वो साली बहुत ही गंदी लड़की है भाई उसके चक्कर मे भैया ने भाभी को घर से निकाल दिया ताकि उनका रास्ता साफ
हो जाए और पूरी जायजाद खुद हड़पने के लिए तुझे भी निकाल दिया, भाभी और तेरे रिश्ते के बारे मे बुरा भला बोलकर ..”
मैं अब भी मूह फाडे उसकी बात सुन रहा था, मुझे मेरे कानो पर यकीन नही था मेरा भाई ऐसे कैसे कर सकता था, जिस भाभी को मैने अपनी माँ समझा था अपनी बड़ी बहन समझा था उसके ही बारे मे वो ऐसे कैसे बोल सकता था…लेकिन ये हुआ था और पूरे गाँव ने देखा भी था…
“भाभी आप फिकर मत करो हम पंचायत बुलाएँगे और देखते है कि भैया कैसे जायदाद का बटवारा नही करते “सोहन फिर से बोला ,वो गुस्से
मे था ,मुझे भी गुस्से मे होना था लेकिन मैं बस बेसूध था मुझे कुछ समझ ही नही आ रहा था की ये आख़िर हो क्या रहा है ..
तभी भाभी बोल उठी
“नही भैया, मैं कुछ भी नही करूँगी , मैं ये गाँव ही छोड़ कर चली जाउन्गी ,सोनू को उसका हक मिल जाए बस ..जिसके सहारे घर परिवार
सब छोड़ कर आई थी वो ही ऐसा निकल गया तो अब मेरे पास बचा ही क्या है जीने के लिए ,मैं कही भी चली जाउन्गी ,कुछ भी करके गुज़ारा कर लूँगी “
भाभी को ऐसी हालत मे मैने आज तक नही देखा था….. पहले मा पापा के बुरा भला कहने को भी मैने देखा था ,गाँव वालो की तरह तरह की बातों को भी मैने सुना था लेकिन ये ...भाभी कभी नही टूटी थी लेकिन आज उन्हे देखकर ऐसा लगा जैसे वो टूट चुकी है ,जिससे प्यार किया था उसने ही जब इल्ज़ाम लगा दिया, वो ही जब नही रहा तो उनकी दुनिया मे आख़िर और क्या बचा था ……..
“भाभी आपके बारे मे कोई ऐसे कैसे कुछ भी बोल सकता है , जब तक मैं हू तब तक आप यही रहोगी और मैं देखता हूँ कि कैसे भाई उस लड़की को घर मे लाता है और आपकी जगह देता है साले को वही काट दूँगा ..”
मेरा भी खून आख़िर खौलने लगा था मुझे भी समझ आ चुका था कि बात क्या हुई है ..
“नही सोनू तुझे मेरी कसम है तू कुछ भी नही करेगा , आख़िर जब प्यार ही नही रहा तो उनके साथ रहना भी किसी लाश के साथ रहने जैसा ही होगा ..”
उनकी बात मुझे समझ नही आ रही थी
“भाभी उस आदमी ने आप पर इतना बड़ा इल्ज़ाम लगाया है मैं उसे जिंदा नही छोड़ूँगा “
मैं अभी खड़े होने की हालत मे भी नही था लेकिन जैसे तैसे खड़ा हो गया ..
“सोनू तुझे मेरी कसम तू ऐसा कुछ भी नही करेगा, उसने गाँव के लोगो को अपने पक्ष मे कर लिया है, और गाँव के सभी गुन्डो को अपनी
तरफ़ कर लिया है तू वहाँ जाएगा तो वो लोग तुझे नही छोड़ेंगे “
भाभी ने मेरा हाथ अपने सर पे रख दिया, मेरा खौलता हुआ खून ठंडा तो हो ही नही रहा था लेकिन भाभी की कसम ने कही ना कही मुझे
थोड़ा ठंडा ज़रूर कर दिया था ..
“भाभी लेकिन ..”
“लेकिन वेकीन कुछ नही तू कही नही जाएगा बस ,और रही बात मेरी तो मैं आज ही ये गाँव छोड़ कर चली जाउन्गी ,और कल तू पंचायत
बुला कर अपने हिस्से की ज़मीन ले लेना “
उनकी बात ऐसी लगी जैसे दिल मे कोई तलवार सी चल गई हो ..
“भाभी आप मुझे छोड़ कर चली जाएँगी ??”
मेरा गला ही भर गया था ,माँ तो छोड़ कर चली गई थी ,बहन थी ही नही जिसके अंदर ये दोनो रूप देखा करता था जो मेरे लिए प्रेम की जीती जागती प्रतिमा थी वो भी मुझसे दूर जाने वाली थी..
“हां बाबू मैं इस अपमान के साथ नही जी सकती ,जिसे मैने अपना छोटा भाई समझा ,अपने बेटे की तरह जिसे प्यार दिया उसके साथ मेरा
नाम बदनाम किया जा रहा है ,मैं ऐसी जगह नही रह सकती “
वो फिर से फुट फुट कर रोने लगी थी ,पास खड़ा सोहन भी कुछ भी बोल रा था…
“अगेर आप की यही इच्छा है तो मैं भी आपके साथ जाउन्गा “
आख़िर कार मैने कहा ,भाभी और सोहन दोनो ही मुझे देख रहे थे
“तू पागल हो गया है ये तेरा घर है ,वो तेरी ज़मीन है जिसपर तेरे भाई ने कब्जा किया हुआ है तू ये सब छोड़ कर कैसे जा सकता है “
भाभी की बात स्वाभाविक थी लेकिन मैं अपने दिल से जानता था कि मेरे लिए क्या ज़रूरी है ..
“आपके बिना मुझे ये सब मिल भी जाए तो क्या ?? आप जहाँ रहोगी मैं भी वही रहूँगा ,आप कहती थी ना कि आप मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो ,तो सुनो मैं भी आपके लिए कुछ भी कर सकता हू ,”
भाभी मुझे बस देखती ही रह गई थी ,जिसे उन्होने एक बच्चा ही समझा था वो आज अचानक से बड़ा हो गया था ……
तभी कोई और भी उस घर मे आया ,वो हरिया था मेरे बचपन का दोस्त ,ऐसा लग रहा था जैसे वो दौड़ते हुए आया हो उसकी साँसे तेज थी ..
“सोनू ,भाभी …..”
“क्या हुआ हरिया ऐसे हाँफ क्यो रहा है..” उसे देखते ही सोहन ने कहा
“राजू भैया (मेरा भाई ) आप लोगो को मारने के लिए आ रहा है ,मैने सुना है कि वो लोग इस घर को आग लगाने वाले है और आप दोनो को
जान से मारने की बात कर रहे थे ..”
उसकी बात सुनकर हम तीनो ही स्तब्ध थे …तभी भाभी अचानक से उठी और मेरा हाथ पकड़ लिया ..
“चल सोनू ..”
“मैं आपको आपका हक दिला कर ही जाउन्गा, मैं मरने से नही डरता “
मेरी बात सुनकर उनके चहरे मे चिंता की लकीरे और भी बढ़ गई थी
“वो तू दिला सकता है ,लेकिन आज नही बेटा ,अगर तुझे मेरी वजह से कुछ हो गया तो मैं खुद को कभी माफ़ नही कर पाउन्गी चल जल्दी से चल..”
उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचा ..
“लेकिन कहाँ “सोहन ने कहा था ..
“जहाँ किस्मत ले जाए ..”
भाभी ने कहा ,हमारे लिए अभी यही सही रास्ता था और हरिया और सोहन की मदद से हम गाँव के बाहर चले आए ,उन्होने हमे शाम की आख़िरी बस मे बैठा दिया था जो शहर को जा रही थी, वो बस आख़िर कहाँ जा रही थी मुझे नही पता था और उसका अंतिम ठिकाना कहाँ
था वो भी नही, लेकिन वो जहाँ भी जा रही थी वही हमारा ठिकाना होने वाला था ………
वो रात का समय था जब मैं और भाभी शहर के बस स्टॅंड मे पहुचे थे ,कुल जमा पैसो के नाम पर वही था जो कि सोहन और हरिया ने मिलकर दिया था ,वही भाभी और मेरा एक बॅग था जिसमे हमारे कुछ कपड़े ही थे ,हम कहाँ जाएँगे उसकी खबर हम दोनो को ही नही थी ,यात्रियो के बैठने की जगह मे हम दोनो बैठे हुए थे, मेरे पूरे शरीर पर अब भी चोटो के निशान थे पूरा शरीर दर्द से भरा हुआ था लेकिन
असली दर्द तो दिल मे लगा था ,बदले की आग भड़क रही थी लेकिन उस मासूम से चहरे को देखकर सब कुछ ख़त्म हो जाता था जो की
अभी भी बदहवाशी की स्तिथि मे थी …
भाभी के मासूम से चहरे मे आँसू अचानक से ही आ जाते ,मैं उनकी मनोदशा को समझ सकता था या फिर शायद नही ?,उन्होने कभी एक इंसान पर जान से भी ज्यदा भरोशा करके अपना सब कुछ छोड़ा था आज भी वो उसी हाल मे आ गई थी ,लेकिन फ़र्क इतना था कि तब वो
वफ़ा मे आकर सब छोड़ आई थी और आज बेवफ़ाई के कारण ..
मैने उनके कंधे पर हाथ रखा और वो फुट पड़ी ,वो मेरे कंधे पर सर रखे रोने लगी थी ,दिल का गुबार जितना खाली हो जाए उतना ही अच्छा होता है ,मैने भी उन्हे रोने ही दिया, आँसू तो मेरे भी आ रहे थे लेकिन ये आँसू उन्हे देखकर ही आ जाते थे ..
रात बीतती गई और वहाँ सन्नाटा पसर्ता गया, दो पोलीस वाले हमे ध्यान से देख रहे थे, दोनो की ही नज़रों को मैं पहचान सकता था मैं अब बड़ा हो चुका था, कॉलेज मे पढ़ने लगा था, वो मेरी भाभी के जिस्म को देखकर एक दूसरे से बात कर रहे थे कभी हल्के हल्के हंस भी लेते थे,
जानकर भी मैं चुप था,
आदमी एक जानवर ही है और कहते है कि ये जानवर अकेले मे ही निकलता है, वही शायद उनके साथ भी हुआ जब पूरा स्टॅंड ही सूना हो
चुका था कुछ भिखारियो के अलावा वहाँ कोई भी नही था वो दोनो हमारे पास आए ..
“ये यहाँ क्या कर रहे हो घर से भागे हो क्या “
एक पोलीस वाले ने बेहद ही कड़ाई से कहा
“अरे घर से क्या भागे होंगे साले इसे देख, माँग मे सिंदूर ,गले मे मन्गल्सुत्र और अपने से छोटे लड़के के साथ रात मे घूम रही है साली रांड़
होगी और ये इसका ग्राहक या फिर दल्ला “
उसके होंटो मे एक शैतानी हँसी आई
“तमीज़ से बात करो ये मेरी भाभी है “
उनकी बात से मैं भी जोश मे आ चुका था, वही भाभी थोड़ी घबरा सी गई थी, उन्होने मेरा हाथ खिचा, लेकिन मैं था जो झुकने को तैयार ही नही था
“अरे मादरचोद… लौन्डे का भाव तो देखो ,चलो हमारे साथ स्टेशन ,साले तेरी इस आइटम को अभी रंडी बना कर अंदर कर दूँगा और तुझे
उसका दल्ला बना कर, साले तेरा हाथ पैर तोड़ दूँगा “
पहला गरजा और उसकी गरज का असर भाभी पर पड़ा ..
“नही नही हम तो बस यहाँ बैठे थे, इसे माफ़ कर दीजिए ये तो नादान है “
भाभी की बात सुनकर दोनो ही जोरो से हँसे, वही वहाँ बचे कुछ भिखारी बस तमाशा ही देख रहे थे “हाँ साली माफ़ कर देंगे चल उधर कोने मे चल, थोडा तेरा रस तो निचोड़ ले .”
एक ने भाभी के जिस्म को देखकर कहा
“मादर चोद “
मैं उठ खड़ा हुआ था और उसके कॉलर को पकड़ चुका था ,मेरी आँखे गुस्से मे लाल थी ,
“पोलीस वाले का कॉलर पकड़ता है साले “
दूसरा चिल्लाया
अब पता नही दिन भर का गुस्सा था या क्या था मैने एक खीच कर झापड़ उसके गालो पर जड़ दिया …सभी बस मूह फाडे मुझे ही देख रहे थे ..
“मादरचोद पोलीस वाले पर हाथ उठाता है “
दूसरा कुछ करता उससे पहले एक लात उसके पेट पर पड़ चुका था ,वो बिल्कुल ही बेहाल सा नीचे पड़ा था, तभी एक घुसा पहले के पेट मे
भी लगा दिया ,वो भी एक ही घुसे मे तड़पता हुआ नीचे पड़ा हुआ था ..
ये सब देख कर भाभी की हालत भी खराब हो चुकी थी उन्होने मेरा हाथ खिचा जैसे बोल रही हो कि भागो यहाँ से ..
मुझे भी मेरी ग़लती समझ आने ल्गी थी लेकिन अब देर हो चुकी थी क्योकि एक पोलीस की गाड़ी तभी हमारे पास आई …और दोनो की हालत देखकर वही रुक गई
“ये क्या हो रहा है ..”
एक इनस्पेक्टर वहाँ से निकला उसे देख कर दोनो ही उठ खड़े हुए, दोनो ने उसे सलाम ठोका ..
“साहब ये साली रंडी है और ये उसका दल्ला है, दोनो यहाँ ग्राहक खोज रहे थे “
एक सिपाही बोल उठा उसकी बात सुनकर मेरा माथा फिर से खनक गया था, मैं उसे एक और घुसा लगा देता लेकिन भाभी ने मेरा हाथ थाम लिया ..
वही इनस्पेक्टर ने एक बार भाभी के जिस्म को गौर से देखा, पता नही ऐसा क्या था उनके जिस्म मे जो हर कोई उन्हे ही घूर रहा था, उसने
अपनी जीभ अपने होंटो पर चलाई ..
“वाह ये रांड़ तो मस्त लग रही है, कितना लेती है रे एक रत का “
उसकी आवाज़ मे कुछ ऐसा था कि मैं काबू से बाहर होने ल्गा था , मेरा मन किया की साले का मूह तोड़ दूं ,वही भाभी ये सब सुनकर भी मेरा हाथ जोरो से जकड़े हुए थी ..
वो इनस्पेक्टर मुझे देखने लगा
“क्यो बे बहुत दम दिखा रहा है, ले चलो साले को थाने इसका दम निकालते है वही इस रंडी के भी मज़े लेंगे इसी के सामने “
उसका इतना कहना ही था कि मैने ज़ोर लगाया और मेरा बाजू जो कि अभी तक भाभी के हाथो मे था वो छूट गया मैं आगे बढ़ने ही वाला था की एक आवाज़ आई ..
“ए इनस्पेक्टर, सालो चोर उचक्को को तो पकड़ते नही हो और सीधे साधे लोगो को परेशान करते हो ..”
हम सभी उसी आवाज़ की ओर देख रहे थे, एक काला कलूटा, लंबा चौड़ा आदमी सामने खड़ा था, चहरे मे हल्की दाढ़ी थी वही बड़ी बड़ी
मुन्छे …“कालवा, ये तेरा मामला नही है इसमे मत पड़ “
इनस्पेक्टर गरजा
“मैं बहुत देर से इन लोगो को देख रहा हूँ, बेचारे परेशान लगते है और पोलीस वाले मदद करने की बजाय इनका ईस्तमाल करना चाहते हो ..”
“देख कालवा ..”
“तू देख इनस्पेक्टर ग़रीब लोगो को छेड़ा ना तो तेरे सभी छेद बंद कर दूँगा समझ ले “
कालवा की आवाज़ मे वो बात थी की वहाँ खड़ा हुआ हर शख्स चुप हो गया, पोलीस वाले भी बस इनस्पेक्टर पर नज़र जमाए हुए थे वही
इनस्पेक्टर को समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे जैसे वो कुछ सोच रहा था…
“कालवा बोला ना कि ये तेरा मामला नही है, तू क्यो भगवान बनने की कोशिस कर रहा है, साला पूरा शहर तो भूखे नंगो से भर गया है “
“यही भूखे नंगे तुम अमीरो का काम करते है समझ लेना, मजदूरो की सर्की ना तो फिर क्या होगा तू जानता है, छोड़ उसे और जा अपने रास्ते “
कालवा की आवाज़ मे एक धृड़ता थी, इनस्पेक्टर ने मुझे गौर से देखा फिर एक नज़र भाभी के जिस्म पर डाली ..
“साले आज तू बच गया लेकिन कभी मेरे हाथ आया ना तो देख तेरी गर्मी कैसे निकलता हूँ और इस रांड़ की तो ..”
“ए…. लड़की से इज़्ज़त से बात कर “
कालवा फिर से चिल्लाया, इनस्पेक्टर बिना कुछ बोले ही वहाँ से चला गया था …..
इस बार कालवा हमारे सामने था ..
‘क्या रे इतनी रत को यहाँ क्या कर रहे हो “
मैने अपनी पूरी की पूरी स्टोरी उसे सुना दी ,कालवा ने एक बार भाभी पर उपर से नीचे नज़र डाली , ये आदमी भी अंजान ही था, उसके मूह से शराब की बदबू भी आ रही थी , लेकिन फिर भी मुझे कालवा मे एक अजीब सा भरोसा हो गया था वो यहाँ हमारे लिए किसी संकटमोचन जैसा साबित हुआ था ..
“हूंम्म तो बेटा तुम्हारी स्तिथि तो बहुत ही गंभीर है, रहोगे कहाँ कुछ सोचा है “
मैने ना मे सर हिलाया
“देखो इस शहर मे कोई भी किसी के लिए मुफ़्त मे कुछ भी नही करता, मैं तुम्हे सस्ते मे एक खोली दिलवा दूँगा वही रह जाओ, लेकिन अभी तुम्हे उसके लिए कुछ पैसे देने होंगे, कुछ पैसे है तुम्हारे पास ..
“जी है लेकिन थोड़े ही है ..”
“कोई बात नही, झोपड़ पट्टी की खोली सस्ती ही होगी, एक महीने का किराया आज दे दो, बाकी दूसरे महीने के लिए मैं तुम्हे कल ही किसी
काम मे लगवा दूँगा, अब तुम जवान हो तो इससे तो काम नही करवाओगे, खुद मेहनत करो और इसे भी पालो ..”
मैने उसकी बात मे सर हिलाया, हम उसके पिछे पिछे जाने ल्गे ,एक ही घंटा हुआ होगा उसने हमारे हाथ मे एक चाबी थमा दी और कुछ पैसे
ले लिए …उसके जाने के बाद हम कमरे मे आ गये ,उसे देखकर मेरी आँखो से आँसू ही निकल गये थे, वही हाल भाभी का भी था ……
“तुम्हे कहाँ महलो मे रहना था और मेरे कारण तुम इस झोपडे मे रहना पड़ रहा है, दुनिया की सारी मुसीबाते मैने तुम पर डाल दी, अब भी
वक़्त है सोनू तू चले जा मुझे छोड़ कर “
भाभी फफक पड़ी थी ..मैने पूरे कमरे मे नज़र डाली ,एक ही कमरा था वो भी टूटा फूटा सा, जर्जर होती सी दीवारे थी ,हल्की रोशनी वाला एक बल्ब लगा था वो ही पूरे कमरे को प्रकाशित करने के लिए काफ़ी था, कोई समान वहाँ नही था, ज़मीन फर्श की थी ,मैने एक कोने मे अपना समान डाला ,भाभी अभी भी बुत बने हुए वही खड़ी थी ..
मैने उनकी बाँहो को अपने हाथो मे पकड़ा..
“भाभी अब यही हमारी जिंदगी है ,अगर आप के साथ रहने के लिए मुझे स्वर्ग छोड़ कर नर्क मे जाना पड़े तो मैं ख़ुसी खुशी वहाँ चले जाउन्गा क्योकि मैने जानता हूँ जहाँ आप जैसी औरत हो वो वही स्वर्ग बना देगी ,मेरा भाई चूतिया था जिसने आपकी कद्र नही की मैं उसके जैसा चूतिया नही हू …”
भाभी नम आँखो से कुछ देर मुझे यू ही देखती रही और फिर मुझे खुद के बाँहो मे घेर लिया, वो मेरे सीने मे सर रखकर रोने लगी …
“तू कितना बड़ा हो गया रे, अपनी भाभी से इतना प्यार करता है मेरा सोनू ,जब मैं आई थी तो तू एक मासूम सा बच्चा था और आज एक पूरे मर्द जैसे मेरी इज़्ज़त की रक्षा कर रहा है ..”
मैने भी अपनी बाँहो मे उन्हे समा लिया था, मैने उन्हे अपने से और भी जोरो से चिपकाया जैसे मैं नही चाहता कि वो मुझसे दूर चले जाए …
ये एक नये सफ़र की शुरूआत थी और एक पुराने सफ़र का अंत भी
बिस्तर तो हमारे पास नही था हम दोनो फर्श मे ही लेट गये थे,शरीर की थकान इतनी थी कि नींद कब आई पता ही नही चला,दीवार से सॅट कर भाभी सो गयी थी वही मैं उनके बाजू मे ही सोया था ,कमरा इतना बड़ा भी नही था कि हम कही दूर दूर सो सकते,दो लोगो के सोने के
बाद थोड़ी जगह और बची थी ,उसमे हमे अपने बाकी के समान को रखना था ,खैर अभी तो हमारे पास कुछ था ही नही ….
मेरी नींद किसी के दरवाजा खटखटाने से खुली ,मेरे साथ भाभी भी जाग गई थी ,आवाज़ देने वाली कोई औरत थी..मैने दरवाजा खोला ..और वो हमे देखकर मुस्कुराइ ..
“तो तुम लोग हो जिन्हे कालवा रात मे लाया “
मैने हां मे सर हिला दिया
“ओह देखने मे तो अच्छे घर के लगते हो भाग कर आए हो क्या ..”
अब मैं उनसे क्या कहता ,मैं कुछ जवाब देता उससे पहले ही वो बोल पड़ी ..
“अरे छोकरि तेरा नाम क्या है..”
“जी जी आरती ..”भाभी ने बड़े ही सभ्य तरीके से कहा
“ओह्ह तो चल यहाँ सुबह सुबह ही पेट साफ कर ले वरना फिर भीड़ हो जाएगी ,सरकारी सुलभ है पास ही ,पूरी बस्ती वही आती है तो भीड़
लग जाता है ,सभी औरतें सुबह जल्दी ही जाती है वहाँ ,वही से नहा कर भी आ जाना ..”
भाभी ने हाँ मे सर हिलाया और अपने बॅग से कुछ कपड़े निकाल कर उसके साथ चली गई ,मैं फिर से वही सो गया था लेकिन इस बार मुझे
फर्श के कठोरता का आभास होने लगा था ..
1 घंटे बाद वो वापस आ गई ,उनके चहरे मे एक मुस्कान थी,
मुझसे नज़र मिलते ही उन्होने कहा
“यहाँ की औरते तो हमारे गाँव जैसी ही है ,लगता है मैं यहाँ अच्छे से रह लूँगी ,यहाँ औरते मिलकर एक सहकारी समूह चलाती है जिससे सरकारी मदद भी मिलती है ,वो लोग मिल्कर कपड़े सीलने का काम करती है “
उनके आँखो मे आई चमक से मुझे बहुत राहत मिली ,थोड़ी देर मे कालवा भी आ गया ,मैं उसके साथ चला गया,सच मे मुझे मेरे गाँव की ही याद आ गयी लोग कुछ ऐसे ही थे लेकिन यहाँ के सभी लोग बस मजदूर ही थे मुझसे मिलने और मेरी कहानी जानने का कौतूहल सभी के
अंदर था ,वहाँ मुझे पता चला कि कालवा एक तरह से यहाँ का डॉन ही है और जो औरत सुबह आई थी वो उसकी बीवी थी ..
कालवा ने मुझे 9 बजे तक अपने साथ चलने को कहा,खाना भी कालवा के घर से आ गया था ,
“देख जहाँ ले जा रहा हू वो यहाँ के बाप है ,उनके सामने ज्यदा बोलना मत समझा “
कालवा ने जाते हुए मुझसे कहा
‘जी भाई “
थोड़ी देर मे बाकी के लोग भी साथ हो लिए ,हम फिर से उसी स्टेशन के पास थे,बस स्टॅंड के पिछे एक गोदाम था कालवा वही मुझे काम
दिलवाने वाला था ,मुझे बाहर ही रुकवा कर कालवा अंदर गया थोड़े देर मे मुझे भी बुला लिया गया ..
“लाला साहब यही लड़का है जिसके बारे मे मैने बताया था “
लाला ने मुझे उपर से नीचे तक देखा ..
“हूंम्म दिखने मे तो कुछ खास नही है फिर भी पोलीस वाले को मार दिया “
उन्होने मुझे घुरते हुए कहा“साहब मारने के लिए शरीर नही बल्कि जिगर चाहिए “
मैने बहुत ही शालीनता से जवाब दिया ,वही कालवा मुझे घूर्ने ल्गा था जैसे मुझसे कोई गुनाह हो गया हो ,लेकिन शायद लाला को मेरी बात पसंद आ गयी थी ..
“हुम्म बढ़िया ,चलो ठीक है इसे लोडिंग वाले काम मे लगा दे ..”
“साहब कुछ कम मेहनत वाला काम दे दीजिए ना नया लड़का है “कालवा ने लाला से रिक्वेस्ट किया
“अरे नया है तो क्या साला मैं कोई धर्मशाला तो खोल के नही बैठा हू जो है वो करेगा तो करे वरना जाए यहाँ से “
लाला ने साफ साफ शब्दो मे जवाब देदिया था ,मुझे नौकरी करनी ही थी चाहे जो भी हो जाए ,मैने कालवा को आँखो से ही इशारा किया कि मुझे काम करने मे कोई दिक्कत नही है …
और मैने जीवन का पहला कम किया, बोरियो को ट्रको मे उतारने चढ़ाने का काम ,ऐसे लगा जैसे हड्डिया टूट गई हो,तब जाकर मुझे 300 रुपये दिए गये ,पहली बार अपनी कमाई को हाथो मे लेकर मैं फूले नही समा रहा था,मुझे याद आया कि घर मे खाने के लिए कुछ नही है वही
बिस्तर भी नही है ,लेकिन 300 मे आख़िर क्या क्या आ सकता था ,
कालवा ने मुझे देसी दारू ऑफर की लेकिन मैने उसे साफ मना कर दिया,मैने दारू कभी नही पी थी और पीने का कोई इरादा भी नही था ,मैं तो बस जल्दी से जल्दी जाकर भाभी के हाथो मे अपनी ये कमाई देना चाहता था ,बाकी के लोग दारू पीने चले गये थे और मैं घर की ओर
भागा ..
घर या वो एक कमरे की खोली ही अब मेरा घर थी ,वो मेरे लिए किसी महल से कम भी ना थी क्योकि वहाँ मेरी प्यारी भाभी माँ रहती है ..
कमरे का दरवाजा खटखटाना नही पड़ा क्योकि वो पहले से ही खुली हुई थी ,वहाँ मुझे दो महिलाए बैठी हुई दिखाई दी ..
भाभी मुझे देखते ही खुश हो गयी थी ..
“अच्छा आरती हम चलते है …”वो दोनो ही मुस्कुराते हुए निकल गयी ..
मैं देखे कर हैरान था ,कोने मे एक चूल्हा बना दिया गया था वही एक घड़ा भी रखा हुआ था ,कुछ बर्तन और राशन समान के डिब्बे ..
“ये क्या है भाभी ..”
वो मुस्कुराइ
“अरे यहाँ के लोग दिल के बहुत अच्छे है देखने मे ग़रीब ज़रूर है लेकिन दिल के बहुत ही बड़े लोग है ,पास की राशन की दुकान वाले से मेरी पहचान करवा दी उसने उधार मे समान दे दिया और ये बिच्छाने के लिए बिस्तर भी पास . दुकान से उधार मे ले आई ,शोभा(कालिया की बीवी) बोली कि जब तुझे पहली पगार मिलेगी तो सब लौटा देना ,जानता है यहाँ पर कपड़े सीलने का बड़ा सा समूह है सूपरवाइज़र ने तो
मुझे देखते ही काम पर रख लिया …अब सब ठीक हो जाएगा सोनू दिल लगाकर काम करूँगी और तू फिर से पढ़ना शुरू कर सकता है अब “
मैं खुश था इसलिए क्यो कि ये सब हो रहा था, नही, बल्कि इसलिए क्योकि इससे भाभी के चहरे मे चमक थी ,वो खुस थी और उनकी ख़ुसी के लिए मैं कोई भी कीमत चुकाने को तैयार था …
मैने जेब से अपनी पहली कमाई निकाली और उनके आगे कर दिया ..
“भाभी ये मेरी पहली कमाई “
इसे देखकर वो बहुत ही भावुक हो गई लेकिन जैसे उन्होने मेरे हाथो को उन्होने ध्यान से देखा ..
“तेरे हाथो मे तो छाले पड़ गये है..”
उनकी आँखो से पानी गिरने लगा था..
“हां आदत नही है ना इसलिए कुछ दिन मे आदत हो जाएगी “
उन्होने खिचकर मुझे अपने सीने से ल्गा लिया..
“नही नही तू कल से ऐसे काम मे नही जाएगा मैं कैसे भी करके कुछ कमा लूँगी तू बस पढ़ाई कर, ये दिन देखने के लिए तो नही आया था ना मेरे साथ “
“ओहो भाभी आप भी ना, दोनो मिलकर कमाएँगे तब तो यहाँ से निकल पाएँगे ,वरना क्या सारी जिंदगी यही रहना है “
“नही सोनू तुझे मेरी कसम है तू ऐसा काम नही करेगा “
मैने उनके चहरे को अपने हाथो से जकड लिया ,उनका वो प्यारा सा चेहरा उनके ही आँसुओ से भीग चुका था ,बड़ी बड़ी आँखे अभी भी नम थी ,मुझे अपने भाई की किस्मत पर दुख होता है कि उसने इन्हे छोड़ दिया था ,इतनी सुंदर, ममता से भरी हुई थी मेरी भाभी ,मैने बड़े ही प्यार से उनके गालो मे एक किस किया ,मेरे होंठो मे उनके आँसू भी लग गये थे थोड़ा सा नमकीन सा स्वाद मेरे जीभ मे लगा ..
“भाभी मैं अब बच्चा नही हूँ पूरा मर्द बन गया हू ,आप क्यो फिक्र करती हो ,मैं पढ़ुंगा भी और कमाउन्गा भी ,और अपनी भाभी को रानी बनाकर रखूँगा “
मेरे बात से उनके होंठो मे एक मुस्कान तो तैरि लेकिन आँखे अभी भी गीली ही थी ,उन्होने मेरे गालो पर अपना हाथ रख दिया और बड़ी ही ममता से सहलाया ..
“इतना प्यार क्यो करता है तू अपनी भाभी से “
मैने उन्हे पास बिछे हुए बिस्तेर मे बिठा दिया और उनके गोद मे सर रखकर लेट गया …
“क्योकि आपने मुझे जितना प्यार दिया उतना तो मेरी माँ ने भी मुझे नही दिया,आप मेरे लिए मेरी माँ हो मेरी बड़ी बहन भी हो ,और मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी …”
वो बड़े ही प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी और थोड़ा झुक कर उन्होने मेरे माथे पर एक किस किया ..
“चल अब प्यार जताना हो गया हो तो कुछ खाने के लिए बना दूं बहुत भूख लग रही है “
मैं भी उनके गोद से उठ गया था…
“भूख तो मुझे भी बड़ी तेज लगी है लेकिन खाएँगे क्या ???”
वो थोड़ी देर सोची फिर ध्यान से राशन की ओर देखने ल्गी
“सब्जिया तो है नही आज खिचड़ी ही खा लेते है “
जब सोने का समय आया तो मैं थोड़ा असमंजस मे फँस गया था ,बिस्तर एक ही था जो की ज़मीन मे बिच्छा हुआ था और भाभी उसमे सो नही रही थी ..
“मुझे कुछ नही पता बिस्तर मे तू सोएगा मैं फर्श मे ही सोउंगी “
उन्होने ज़िद की
“क्या भाभी आप भी आप बिस्तर मे सोइए मैं फार्स मे सोउंगी “
“अरे तू इतनी मेहनत कर रहा है तेरे शरीर को ज्यदा आराम की ज़रूरत है “
उन्होने मुझे लगभग डाँटते हुए ही कहा ..
“अच्छा अगर आप बिस्तर मे नही सोवोगि तो मैं भी नही सोता जाओ “
मैने झूठमूठ ही सही अपना मूह फूला लिया था ..वो मेरे गालो को अपने हाथो मे भर ली .और जोरो से हिला दिया
“बदमाश कही का …चल ठीक है दोनो ही सो जाते है “
मैने एक बार उन्हे देखा, वो बस मुस्कुरा रही थी , उन्होने बिस्तर बिच्छाया और फिर कोने मे सो गई बिस्तर मे थोड़ी सी ही जगह बची थी ..
“आजा यहाँ सो जा “
मैं थोड़ा घबरा रहा था ..
“अरे इतना बड़ा हो गया है अभी भी मुझसे घबराता है ,चल आ “
मैं उनके बाजू मे जाकर लेट तो गया था लेकिन उनका जिस्म मेरे जिस्म से छु रहा था और वही मुझमे थोड़ी अजीब सी फीलिंग का जन्म हो
रहा था ,उन्होने मेरा चेहरा अपनी ओर किया और मेरे माथे मे एक किस कर दिया ..
“सोजा बेटे …”
उनके चहरे मे आई वो प्यारी सी मुस्कान इतनी प्यारी थी कि मैं बस उसे देखता हुआ खो ही गया था ..
“क्या हुआ ?? ऐसे क्यो देख रहा है “
“आप बहुत ही प्यारी हो भाभी “
मैं अब भी उन्हे देख रहा था ..वो बस मुस्कुराइ
“चलो सो जाओ “
वो पलट कर सो गई ,
उन्होने अभी एक पुरानी साड़ी पहनी थी और ब्लाउस, उनकी पीठ का कुछ हिस्सा मुझे दिख रहा था लेकिन उनके लंबे बाल बिखरे हुए थे,पता नही मेरे अंदर क्या हुआ मैं उनसे सॅट गया और बालो को एक तरफ़ करके उनके खुले हुए कंधे पर एक किस कर दिया …
“सोनू ..”
भाभी ने हल्के से कहा लेकिन वो पलटी नही मैने अपने हाथ को उनकी कमर से लपेट लिया और उनसे बिल्कुल ही सॅट कर सोने ल्गा …
मेरे पूरे शरीर मे काम की वजह से आज तगड़ा दर्द था और बिस्तर कोमल तो नही लेकिन फर्श से तो बेहतर था मेरी नींद लगने ल्गी थी और मेरा एक पैर भाभी की कमर को घेर चुका था ,नींद मे अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे हाथो को पकड़ा है ,शायद मेरे हाथ भाभी के
पेट से उठते हुए उनके वक्ष स्थलो(बूब्स) तक पहुचने वाले थे इसलिए भाभी ने बड़े ही प्यार से उसे पकड़कर नीचे कर दिया था ,मेरे चहरे मे
बस एक मुस्कान थी और आँखो मे अब गहरी नींद….
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