त्यागमयी माँ और उसका बेटा अध्याय 8

 




त्यागमयी माँ और उसका बेटा  अध्याय 8




नमिता घर पहुँची तो राज पढ़ाई कर रहा था । वह माँ को देखकर ख़ुश हुआ और उठ कर उसको बाहों में लेकर चूमने लगा। नमिता भी उत्तेजित थी सुषमा की बातों से, सो उसने भी उसके होंठों को चूसना चालू किया।राज हाथ बढ़ाकर उसके चूतरों को दबाकर अपने जाँघों से सटा लिया और उसका लोअर के ऊपर से खड़ा लौडा नमिता के पेट पर गड़ने लगा। अब नमिता ने अपना हाथ उसके लौड़े पर रखा और उसको दबाने लगी। 

राज: माँ आज इसको चूस लो ना। बहुत मन कर रहा है। 

नमिता: नहीं बेटा, अभी नहीं जब समय आएगा तो ज़रूर चूसूँगी। 

राज: माँ, आप बहुत गंदी है , मेरी कोई बात नहीं मानती ।

नमिता: तू बात ही ऐसी करता है, मैं क्या करूँ! अच्छा बता पढ़ाई कहाँ तक पहुँची?

राज उसके चूतरों को सहलाते हुए बोला: माँ अभी ख़त्म हो जाएगा फिर दुहरा लूँगा। मुझे हर हालत में आपका ८०% का टार्गट पूरा करना है। फिर आपकी पैंटी उतार कर आपकी बुर देखनी है । 

नमिता हँसते हुए : सिर्फ़ देखेगा? और कुछ नहीं करेगा? ये कहते हुए उसने उसका लौड़ा मसल दिया ।

राज मज़े में बोला: माँ आप देखना मैं क्या क्या करता हूँ? 

नमिता: अच्छा चल अब मैं कपड़े बदल कर खाना लगती हूँ।

राज: माँ प्लीज़ आज मेरे सामने कपड़े बदलो ना ? 

नमिता: नहीं, तू बदमाशी करने लगेगा। 

राज: नहीं मैं नहीं करूँगा, प्रॉमिस । 

नमिता हँसते हुए: अच्छा चल पर कोई बदमाशी नहीं, ठीक है?

राज उसको छोड़कर उठा और बोला: प्रॉमिस। 

नमिता उसके आगे चलने लगी और राज उसके पीछे चलते हुए उसके चूतरों का मटकना देखते हुए चलने लगा। 

वह बोला: माँ आपके चूतर बहुत मस्त मटक रहे हैं। ज़रा और ज़ोर से मटकाओ ना। 

नमिता हँसते हुए अपनी गाँड़ मटका कर चलने लगी। और वह मस्ती से उसकी मटकती गाँड़ देख कर बोला: माँ आप तो चलती फिरती आग हो। आऽऽहहह बेचारा मेरा लौड़ा । ये कहते हे उसके नमिता के कमरे में आकर अपना लोअर और चड्डी नीचे किया और बिस्तर पर बैठ कर अपने खड़े लौड़े को हिलाने लगा। 

नमिता उसकी हालत देख कर हसने लगी। फिर वह अपनी साड़ी खोल दी और राज उसको ब्लाउस पेटिकोट में देख कर मस्ती से अपना हिलाने लगा। अब वह धीरे धीरे एक एक हुक खोल कर अपना ब्लाउस भी उतार दी।

राज: आह्ह्ह्ह्ह्ह माँ क्या माऽऽऽऽऽऽल हो आप। वह हिलाए जा रहा था। 

अब नमिता ने पेटिकोट भी उतार दिया । ब्रा और पैंटी में अपनी माँ का गोरा और भरा बदन देखकर वह मस्ती से बोला: माँ ज़रा मटक कर चल के दिखाओ ना जैसे फैशन परेड में मॉडल चलती हैं ।

नमिता: तू मुझे मॉडल बनाने जा रहा है क्या? 

राज: प्लीज़ चल के दिखाओ ना। 

अब नमिता भी हँसते हुए बोली: चल तू भी क्या याद करेगा। देख।

अब वह कमरे के एक छोर से दूसरे तक अपनी गाँड़ मटका कर किसी मॉडल की भाँति चलने लगी। 

राज ज़ोर से हिलाकर बोला: माँ आऽऽऽऽऽऽहहह ब्रा भी उतार दो ना।

नमिता ने चलते हुए अपनी ब्रा का हुक खोला और अब टॉप्लेस सिर्फ़ पैंटी में ही मॉडल की तरह चलने लगी। उसकी बड़ी बड़ी गोरी गोल छातियाँ जिस तरह से हिल रही थीं वह किसी को भी पागल करने वाली थीं । और राज का अब बुरा हाल था , वह माँ की मटकती हुई गाँड़ और उसकी हिलती छातियाँ देखकर ज़ोर ज़ोर से मूठ्ठ मारने लगा। 

नमिता को उस पर दया आ गयी और वह घुटनों के बल उसके लटकते पैरों के पास बैठी और उसका लौड़ा ख़ुद हिलाने लगी। राज के हाथ उसकी नंगी छातियों पर आ गए । वह उनको ज़ोर से दबाने लगा। अब नमिता का हाथ ज़ोर ज़ोर से चलने लगा। और राज आऽऽऽऽऽऽऽहहहह। हम्मम्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा। उसके लौड़े से झटकों से निकालता हुआ वीर्य नमिता के मुँह पर गिरने लगा । अब नमिता से भी नहीं रहा गया और उसने अपना मुँह खोला और उसका कामरस पीने लगी। बाद में उसने अपनी जीभ से उसके सुपाडे को चाट कर साफ़ भी किया। नमिता का हाथ अपनी बुर पर पहुँच गया था और वह उसने पैंटी को साइड करके ऊँगली कर रही थी। वह जिस अवस्था में बैठी थी उसमें राज उसे नहीं देख पा रहा था। अब वह भी उसके सुपाडे को जीभ से चाटते हुए झड़ने लगी। उसकी उँगलियाँ भी उसके रस से गीली हो गयीं। 

जब वह खड़ी हुई तो राज ने उसकी पूरी गीली पैंटी को देखा और बोला: माँ आप भी झड़ गयीं क्या?

नमिता: नहीं झड़ूँगी ये सब देखकर। कहते हुए उसने उसके लौड़े को चूम लिया। 

फिर वह बाथरूम में जाते हुए बोली: चल अब तू जा मैं खाना लगाकर तुझे बुलाती हूँ। 

बाथरूम में जाकर उसने पैंटी भी उतार दी फिर वह फ़्रेश हुई और तौलिया लपेट कर बाहर आयी। राज अभी भी बैठा हुआ था। 

नमिता: तू गया नहीं?

वह कुछ नहीं बोला पर बैठा रहा। अब नमिता आलमरी से एक ब्लाउस निकाली और उसको पहन ली। फिर उसने एक पेटकोट लिया और उसको भी ऐसा पहनी कि तौलिया बाद में गिरायी और राज को कुछ नहीं दिखा। 

फिर वह राज के पास आयी और बोली: क्या हुआ उठता क्यों नहीं? थक गया क्या?

राज उठकर नंगा ही अपने कमरे की ओर जाने लगा अपना लौड़ा हिलाते हुए और बोला: माँ बहुत मन कर रहा है आपको चोदने का। 

नमिता ने उसके पीछे चलते हुए उसके चूतरों पर एक चपत लगाईं और बोली: उसका भी टाइम आएगा। 

और वह किचन में चली गयी और राज फ़्रेश होने लगा। 

खाना खाने के समय कुछ ख़ास नहीं हुआ। 

खाने के बाद हमेशा की तरह वह पढ़ने बैठ गया और नमिता थोड़ी देर TV देखकर आराम करने चली गयी। 

उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ। राज कुछ कापी वग़ैरह लेने बाज़ार गया और वहाँ उसको नदीम मिल गया। 

राज: अरे तुम कब आए? 

नदीम: कल ही आए। और सुनाओ कैसा चल रहा है? आंटी पटी या नहीं? 

राज: बस तुझे तो एक ही बात की पड़ी है? जब पट जाएगी तो बता दूँगा। 

नदीम: यार बड़ा मन है उनको चोदने का। दिलवाएगा ना उनकी बुर?

राज: अरे पहले मुझे तो मिले फिर ना दिलवाऊँगा तुमको? 

नदीम: और कब आएगा अम्मी की लेने? वह तुझे और तेरे लौड़े को याद करती रहती है। 

राज अपने खड़े हो रहे लौड़े को पैंट में अजस्ट करके बोला: यार अभी दो पेपर बचे हैं उसके बाद प्रोग्राम बनाऊँगा। 

नदीम: प्रतीक का क्या हाल है? 

राज: उससे ज़्यादा बात नहीं होती । वह तो शीला मैडम की बजाने में लगा है। 

नदीम: चल फिर मिलते हैं बाद में । वह ये कहकर चला गया। 

राज भी घर आ गया । उस रात को और कुछ नहीं हुआ । 

दूसरे दिन सुबह नमिता राज को चाय देने गयी और दोनों ने थोड़ी देर प्यार किया एक दूसरे को। 

नमिता: तय्यारी हो गयी?

राज: माँ मेरी तो पूरी तय्यारी हो गयी और रिज़ल्ट भी सही आएगा आज। आप तय्यार हो ना ? आज तो पैंटी भी उतरेगी। 

ये कहते हुए वह अपना लौड़ा लोअर के ऊपर से दबा कर माँ को दिखाया । 

नमिता हंस दी और नाश्ता लगाती हूँ कहकर बाहर चली गयी। 

राज को नाश्ता और दहीं शक्कर खिलाकर स्कूल के लिए विदा करके वह नहाने गयी। वह सोच रही थी कि आज अपने बेटे के सामने वह पूरी नंगी हो जाएगी। उसकी बुर ये सोच कर गरम हो उठी। 

फिर उसने हाथ फिर के देखा कि बुर साफ़ तो है ना। उसने पिछले दिनों ही बाल साफ़ किए थे। क़रीब क़रीब साफ़ ही थे। फिर नहाकर उसने कपड़े पहने और ऑफ़िस के निकल गयी। 

ऑफ़िस में आज कुछ ख़ास काम नहीं था. जो भी थोड़ा बहुत काम था उसने निपटाया और वह सोच ही रही थी कि अब क्या करे अभी तो सिर्फ़ ११ ही बजे थे। उसी समय फ़ोन बजा: नमिता कैसी हो? मैं राकेश बोल रहा हूँ। 

( अगर आपको याद हो ये राकेश नमिता का ज़ेठ है और इसकी पत्नी का नाम निर्मला और बेटी का नाम शीना है जो राज से एक साल बड़ी है। ये राकेश पिछले दिनों एक बार आया था और नमिता को चोद गया था। वह दूसरे शहर में रहता है) 

नमिता: नमस्ते भाई सांब कैसे हैं?

राकेश : मैं ठीक हूँ , आज यहीं आया हूँ अपने दोस्त के बेटे के लिए लड़की देखने। 

नमिता: भाभी भी आयीं हैं क्या? 

राकेश: नहीं वह नहीं आयी है। तुम भी साथ होती तो हम लोगों को आराम हो जाता। 

नमिता: मैं कैसे आ सकती हूँ। अभी ऑफ़िस में हूँ और फिर राज भी २:३० बजे तक स्कूल से आ जाएगा। मैं नहीं आ पाऊँगी। 

राकेश: अरे भाभी हम तो आपके ऑफ़िस के सामने वाले होटेल में ही हैं। और लड़की और उसका परिवार भी अभि आ जाएँगे। आपको हम हर हाल में१ बजे के पहले ही फ़्री कर देंगे। 

नमिता अब कुछ कह नहीं पायी और उस पास के होटेल में राकेश के कमरे में पहुँची। 

वहाँ राकेश बड़े सलीक़े से उससे मिला और अपने दोस्त का परिचय कराया। 

राकेश: ये मयंक हैं और मेरे बड़े भाई जैसे हैं। इनके लड़के के लिए ही लड़की देखने आए हैं। और मयंक ये मेरे छोटे भाई की पत्नी है, जिसके बारे में मैंने तुम्हें बताया था। 

नमिता उनके सामने के सोफ़े में बैठ गयी। मयंक क़रीब ४८ साल का एक हट्टा कट्टा आदमी था। 

थोड़ी देर बाद लड़की और उसके पिता आए और नमिता को पता चला कि उसकी माँ का स्वर्गवास हो चुका है। 

सबको लड़की बहुत पसंद आयी । थोड़ी देर बाद वो दोनों वापस चले गए, ये तय हुआ कि लड़का और लड़की जल्द ही मिलेंगे। 

अब १२ बज गए थे, नमिता भी खड़ी हो गयी जाने के लिए। 

राकेश बोला: अरे बहु ऐसे कैसे चली जाओगी, यार कुछ मिठाई मंगाओ तुम्हारे लड़के की बात अब आगे बढ़ गयी है। 

मयंक: हाँ यार ऑर्डर करो। कुछ ठंडा और मीठा भी। 

राकेश: अभी मंगवाता हूँ । 

नमिता ना ना करते रह गयी , ओर वो नहीं माने। 

थोड़ी देर में ही वेटर ठंडा और केक लाया। 



राकेश ने अपने बैग से जिन की बोतल निकाली और ठंडे लिम्का में मिला दिया और तीन गिलास बनाए। 

राकेश और मयंक पीने लगे। पर नमिता ने पीने से मना कर दिया। 

अब राकेश उसके बग़ल में बैठकर उसकी जाँघ सहलाता हुआ बोला: अरे थोड़ी सी पी लो। ख़ुशी का मौक़ा है।

नमिता ने बार बार मना किया। पर राकेश ने उसको बहुत मनुहार करके पिला दिया। 

नमिता का सर थोड़ा सा घूमा पर उसे हल्का सा नशा भी हुआ। 

तभी राकेश ने एक और गिलास उसे थमाया और वह मज़े से पी गयी। अब राकेश ने उसकी जाँघे सहलायी और बोला: नमिता मज़ा आ रहा है ना? नशा चढ़ा?

नमिता झूमती हुई बोली: हाँ बहुत अच्छा लग रहा है। अब चलती हूँ। 

राकेश: अरे चले जाना, अभी थोड़ा मज़ा तो कर लें। 

ये कहते हुए उसने नमिता को अपनी गोद में खींच किया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए। अब उसने नमिता की चूचि दबायी और नमिता का हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रख दिया। 

नमिता फुसफुसाई : : क्या कर रहे हैं? मयंक जी भी हैं यहाँ ?

राकेश: अरे ये तो अपना यार है, इससे भी क्या पर्दा? हम दोनों साथ में मज़ा लेते हैं। हमने एक दूसरे की बीवियाँ भी चोदीं हैं। 

नमिता नशे में भी चौंक गयी। 

नमिता: भाई सांब ये क्या कह रहे हैं? 

राकेश ने मयंक को कहा: क्यों भाई मैंने सही कहा ना? 

मयंक हँसते हुए उठा और आकर नमिता के बग़ल में बैठ गया और बोला: हाँ ये सही बोल रहा है। हम दोनों साथ ही मज़े करते हैं। 

अब मयंक ने भी उसकी दूसरी जाँघ सहलाना शुरू किया । 

नमिता नशे के बावजूद समझ गयी कि वह आज इन दोनों से चुद कर रहेगी। 

अब दोनों मर्दों ने उसकी चूचियाँ दबानी शुरू की और नमिता के साड़ी का पल्लू गिरा कर उसकी चूचियाँ दबाने लगे। मयंक ने भी उसका हाथ अपने लौड़े पर रख दिया और अब नमिता के दोनों हाथों में एक एक लंड था और वह उनको सहलाकर मस्त होने लगी। उन्होंने अब उसका ब्लाउस खोल दिया और उसकी ब्रा भी निकाल दी। 

मयंक: वाह क्या मस्त माल हो तुम नमिता। इतनी मस्त चूचियाँ बहुत दिन बाद देखी हैं। वह अब उसकी एक चूचि दबाया और मुँह में लेकर चूसने लगा। उधर राकेश भी उसकी दूसरी चूचि चूसने लगा। नमिता भी मस्ती से भरके उनके लौड़े मसलने लगी। 

अब मयंक उसे उठाके बिस्तर पर लिटा दिया और अपने कपड़े खोलकर अपना काला मोटा लौड़ा उसके मुँह के पास लाया और नमिता ने मुँह खोल कर उसे अंदर कर लिया और चूसने लगी। उधर राकेश ने उसका पेटिकोट उठाया और पैंटी नीचे करके निकाल दी। 

अब राकेश ने उसकी बुर में मुँह घुसेड़कर उसकी बुर चाटने लगा। 

फिर मयंक राकेश को हटाया और नमिता को पेट के बल लिटा दिया। 

फिर नमिता को उसने अपने चूतर उठाने को कहा और उसके मस्त चूतरों को दबाने लगा और चूमने भी लगा । 

फिर नमिता की चूतरों के दरार में अपना मुँह डाल दिया और उसकी गाँड़ और बुर चाटने लगा। नमिता भी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी। तभी राकेश उसके सामने आ कर बैठ गया और नमिता उसका लौड़ा चूसने लगी। अब मयंक ने उसकी बुर में अपना लौड़ा डाल कर उसकी चुदायी चालू कर दी।

नमिता: हाय्य्य्य्य्य्य धीरे से आऽऽऽहहहह । 

मयंक: आऽऽह्ह्ह्ह्ह क्या बुर है ह्म्म्म्म्म्म बहुत मक्खन है आऽऽह्ह्ह्ह्ह । अब वह उसकी ज़बरदस्त चुदायी करने लगा। नमिता भी मस्ती से अपनी गाँड़ पिछेकर के उसके धक्कों का जवाब धक्कों से देने लगी। कमरा फ़च फ़च की आवाज़ से भर गया । नमिता राकेश का लंड भी चूसे जा रही थी। उसके मुँह से अब ह्म्म्म्म्म्म्म्म की आवाज़ निकल रही थी। 

अब मयंक आह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगा। नमिता अभी भी प्यासी थी। 

अब राकेश उठा और उसकी बुर को पोछा और फिर अपना लंड अंदर डालकर उसको चोदने लगा। मयंक भी उठकर उसकी चूचियाँ दबाने लगा। अब राकेश भी पूरी ताक़त से चुदायी करने लगा। नमिता फिर से मस्त होकर चुदवाने लगी । थोड़ी दी बाद नमिता आऽऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मैं गयीइइइइइइइइइइइइइ करके झड़ने लगी। उधर राकेश भी झड़ने लगा। अब तीनों थोड़ी देर बाद आराम करने लगे। फिर नमिता जल्दी से उठी और तय्यार होने लगी। 

राकेश: चलो ना एक राउंड और हो जाए , अभी तुम्हारी गाँड़ का तो मज़ा लिया ही नहीं। प्लीज़ रुको ना।

नमिता: नहीं नहीं मुझे जाना होगा। मुझे देर हो रही है। 

राकेश उसको अपनी बाहों में लेकर बोला: रुको ना यार । ये कहते हुए उसने पेटिकोट के ऊपर से उसकी गाँड़ में एक ऊँगली डाल दिया। 

नमिता आऽऽऽहहह करके उसे धक्का दी और साड़ी पहनकर तय्यार हो गयी। 

राकेश: नमिता , मैं उर्मिला और शीना के साथ तुम्हारे घर आऊँगा, अगले कुछ दिनों में । शीना भी चुदायी के लायक हो गयी है। मैं चाहता हूँ कि उसकी सील उसका भाई राज ही तोड़े। ठीक है ना?

नमिता: मैं कुछ नहीं जानती। आपकी बातें अजीब लगती हैं। 

मयंक: अरे शीना तो मस्त माल हो गयी है। मैंने राकेश से कहा है कि वह मेरी बहु चोदेगा और मैं उसकी बेटी शीना को चोदूंग़ा। 

नमिता हैरानी से उनको देख कर बोली: आपको जो करना है करो मुझे अभी जाना है। 

वह अब बाहर निकल गयी । वह सोचने लगी कि उसे शराब नहीं पीनी चाहिए थी। पता नहीं क्यों वह मान गयी पीने के लिए। उसे लगा कि शायद उसे राकेश का लंड पसंद आ गया है। वह चोदता भी मस्त है। उसे अपने आप पर शर्म आयी और वह घर पहुँचकर अपने कपड़े उतारी और नहाने लगी। बाद में वह बस एक ब्लाउस और पैंटी पहनी और फिर पेटिकोट भी पहन ली। 

अब वह राज के आने के पहले खाने की तय्यारी कर ली। 

अब वह TV देखते हुए राज का इंतज़ार करने लगी।

नमिता को दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी और उसके निपल्ज़ कड़े हो गए और बुर में भी हलचल सी हुई क्योंकि वह आज अपने बेटे के सामने पूरी नंगी होने वाली थी। राज अंदर आया और बैग को सोफ़े पर पटक कर धम से बैठ गया। उसका चेहरा थोड़ा सा अजीब सा हो रहा था। 

नमिता थोड़ी सी परेशान होकर पूछी: क्या हुआ सब ठीक तो है? 

राज: हाँ माँ सब ठीक है। 

नमिता: फिर परेशान क्यों है? 

राज: माँ मेरे एक दोस्त की माँ का देहांत हो गया है। इसलिए थोड़ा सा अप्सेट हूँ। वह बहुत रो रहा था। वह गाँव में ही रहती थी। 

नमिता उसको अपने पास खींच कर अपनी गोद में लिटा लेती है। फिर उसका मुँह चूमकर बोली: बेटा इस दुनिया में ये सब तो होता ही है। तेरे पापा के ऐक्सिडेंट के बाद भी मुझे जीना तो पड़ा है ना। चल बस अब इस बात को छोड़ और ये बता कि पेपर कैसे हुआ? 

नमिता अपने गोद में लेटे राज के बाल सहलाते हुए बोली। 

राज मुस्कुराया: माँ बहुत बढ़िया । ज़रा आप अंदाज़ा लगाओ कितना मिला होगा?

नमिता: ८०% । 

राज: ८२ % । अब माँ , आप अपना वादा निभाओगी ना? 

नमिता उसके गाल चूमने को झुकी और राज ने उसके होंठों को अपने होंठ से चिपका लिया। अब वह उसके होंठ चूसे जा रहा था। 

फिर राज अपने होंठ अलग किया और बोला: बोलो ना आप वादा पूरा करोगी ना? 

नमिता हँसते हुए: तू मेरे होंठ चूसेगा तो मैं कैसे बोलूँगी?

हाँ , आज तक जैसे मैंने अपने सारे वादे निभाए हैं, यह भी निभाऊँगी। ये कहते हुए उसने नीचे झुक कर फिर से राज के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। राज हाथ बढ़ाकर ब्लाउस में बिना ब्रा के क़ैद उसकी चूचियाँ दबाने लगा। अब नमिता का हाथ भी उसकी क़मीज़ के अंदर चला गया और वह उसकी थोड़े से बालों वाली छाती सहलाने लगी। अब नमिता ने उसके निप्पल सहलाने शुरू किए। फिर उसकी क़मीज़ उठकर उसके निपल्ज़ को मुँह में लेकर चूसने लगी। 

राज: आऽऽहहहह माँ। बहुत अछ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हा लग रहाआऽऽऽ है। 

नमिता : हम्म। 

अब नमिता का हाथ उसकी पैंट के ऊपर से उसके खड़े लौड़े पर गया और वह उसको दबाकर मस्ती से भर गयी। 

राज भी उसके ब्लाउस के हुक खोल दिया और नमिता को बोला: माँ दूध पिलाओ ना। 

नमिता ने अपनी एक चूचि अपने हाथ में ली और उसके मुँह में डाल दी। राज उसे छोटे बच्चे के जैसे चूसने लगा। नमिता भी अब गरम होने लगी और उसके पैंट का बेल्ट खोल दी और उसका हुक निकाल कर ज़िपर नीचे को और उसकी चड्डी में हाथ डाल कर उसका लौड़ा पकड़ ली और सहलाने लगी। राज भी मस्ती में आकर उसकी चुचि ज़ोर से चूसने लगा और दूसरे हाथ से उसकी चूचि दबाने लगा ।

नमिता: आऽऽहहहह धीरे से चूस ना। क्या खा ही जाएगा? 

चल अब भूक लगी है तो पहले खाना खा ले। 

राज: माँ एक बार झड़ जाऊँगा तब खाएँगे ना, प्लीज़। 

नमिता: ठीक है बाबा , जैसी तेरी मर्ज़ी। 

वह अब भी उसके लौड़े को सुपाडे के पास से सहला रही थी और उसका प्रीकम अपनी ऊँगली में महसूस की । इस रस को उसने उसके सुपाडे पर मल दिया। 

राज: माँ चलो ना बिस्तर पर चलो। आज आपको पूरा नंगी देखूँगा। 

नमिता : चल ठीक है उठ फिर, तभी तो मैं भी उठूँगी। 

राज हँसते हुए उठा और बोला: माँ आज आपको गोदी में उठाकर ले चलता हूँ। 

नमिता: देख गिरा मत देना, अच्छी ख़ासी भारी हूँ मैं। 

राज ने नमिता को अपनी गोद में उठाया और उसके खुले ब्लाउस में से निकली हुई चूचियाँ चूसते हुए वह उसको बिस्तर पर लेज़ाकर लिटा दिया। फिर उसने अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा होकर नमिता की चूचि चूसने लगा। 


नमिता भी गरम हो चुकी थी और उसके बालों पर हाथ फेर कर उसके गाल और गर्दन को चूमे जा रही थी। अब राज ने नमिता के पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसके पेट और नाभि को चूमते हुए उसका पेटिकोट नीचे खिसकाया ।नमिता की गदरायी हुई जाँघों से जब वह नीचे पहुँचा तो राज ने उसकी जाँघों को चूमना चालू किया। फिर उसकी पैंटी को सूँघने लगा और नमिता की गीली हो चुकी पैंटी को चाटने भी लगा ।फिर नीचे होकर पेटिकोट उतार दिया। अब वह उसकी पिंडलियों को चाट रहा था और पैर के अंगूठे और उँगलियाँ भी चाट रहा था। 

नमिता सीइइइइइइइ। आऽऽऽऽहहह करे जा रही थी। 

राज: माँ अब पैंटी उतार दूँ?

नमिता हँसते हुए पेट के बल हो गयी और बोली: ले अब उतार दे। 

राज: माँ क्या अभी भी छिपाओगी अपना ख़ज़ाना? 

नमिता ने कुछ नहीं बोला और अपने चूतर उठा दिए ताकि वह पैंटी निकाल सके। राज तो उसकी पैंटी में से ही चूतर देख कर मस्त हो चला था। उसने उसके चूतरों को चूमना चालू किया । फिर उसने पैंटी उतार दी और निकाल कर उसे सूँघने लगा। 

वह बोला: आह्ह्ह्ह्ह माँ क्या मादक गंध है आपकी बुर की। सच में पागल हो जाऊँगा। ह्म्म्म्म्म्म्म 

नमिता चुपचाप अपने चूतरों को नीचे ले आइ और उसने अपनी जाँघें जोड़ रखी थीं। अब राज उसके चूतरों को दबाया और बहुत देर तक मस्ती लेते रहा उन पर हाथ फेरकर। फिर उसने उसके चूतरों को अलग किया और उसमें अपना मुँह डालकर उसकी गाँड़ सूँघा और फिर मस्त होकर उसे चूमने और फिर जीभ से कुरेदने लगा। 

नमिता : हाऽऽऽयय्यय क्या कर रहाआऽऽऽऽहै। 

राज: म आपकी गाँड़ सूंघ रहा हूँ और चाट भी रहा हूँ। मस्त रसिलि गाँड़ है। 

अब उसने गाँड़ में एक थूक लगाकर एक ऊँगली डाल दी और बोला : 

माँ , पापा कितने दिनों में आपकी गाँड़ मारते थे।

नमिता: आऽऽहहह वह तो हफ़्ते में एक आध बार ही , ऐसा कोई पक्का नहीं था ।तू क्यों पूछ रहा है?

राज:इसलिए कि मैं भी अपनी माँ की गाँड़ रेग्युलर्ली मारूँगा। 

नमिता: आऽऽह बेटा ऊँगली तो निकाल ले। बिना क्रीम या तेल के दुखता है। 

राज उठकर ड्रेसिंग टेबल से क्रीम लाकर ऊँगली और गाँड़ में लगाकर अब दो ऊँगली अंदर डालता है। 

नमिता: आऽऽहहहह अब ठीक है। हाय्य्य्य्य्य ।

राज: माँ गाँड़ मार दूँ? बहुत मन कर रहा है?

नमिता: नहीं बेटा परसों तेरा सबसे महत्वपूर्ण पेपर है गणित का। अभी अपना ध्यान ना भटका। माँ कहीं भागी जा रही है क्या?

राज: ठीक है माँ जैसे आप चाहो। देखो अब दो उँगलियाँ कितने आराम से जा रही हैं। अब तो मेरा लौड़ा भी आराम से चला जाएगा ।

नमिता: आऽऽहहहह बस अब निकाल ले, हाऽऽय्यय ।

राज ने उँगलियाँ निकाली और सूंघ कर बोला: माँ आपकी गाँड़ कि गंध भी बहुत मादक है। फिर उसने चादर से अपनी उँगलियाँ पोंछी और नमिता को सीधा होने को कहा।

नमिता जाँघों को जोड़े हुए ही सीधा हो गई। 

अब राज के सामने पहली बार वह पूरी नंगी पड़ी थी। जाँघें जुड़ी होने के कारण उसको बुर का हिस्सा नहीं दिख रहा था। पर बुर के ऊपर पेड़ू में सफ़ाई से बनाए हुए सुंदर कटे बाल दिख रहे थे। 

राज ने उन बालों पर हाथ फेरा, और बोला: माँ ये क्या कलाकारी बनाई हुई है आपने बालों की। 

नमिता की साँस उत्तेजना के कारण फूल रही थी और उसकी बड़ी छातियाँ ऊपर नीचे हो रही थीं।

अब राज बोला: माँ जाँघे फैलाओ ना, मुझे आपका ख़ज़ाना देखना है।

नमिता ने अपने घुटने मोड़े और अभी भी जाँघे चिपका रखी थी। 

फिर उसने देखा कि राज अब उसकी टांगो के पास ही आकर बड़ी उत्सुकता से उसकी ओर देख रहा है। 

अब वह उसको देख कर मुस्करायी और अपनी जाँघें धीरे से थोड़ी सी फैला दी। अब नमिता की फूली हुई बुर राज की आँखों के सामने थी। उसके बीच में एक लम्बी सी लकीर सी दिख रही थी। पूरी चिकनी और मस्त बुर को देख कर वह अपना लौड़ा हिलाने लगा। 

फिर नमिता ने अपनी जाँघों को और फैलाया और अब उसे उसकी बुर की पूत्तियाँ साफ़ दिख रही थी। 

फिर नमिता ने अपनी बुर की फाँकों को अपनी दोनों हाथ की उँगलियों से अलग किया और बोली: ये जो गुलाबी छेद दिख रहा है यही हैं मेरी बुर। और यही तेरा जन्म स्थान भी है। 

फिर उसने एक ऊँगली अपने छेद में डालकर कहा: तू यहीं से पैदा होकर बाहर आया था। 

फिर उसने अपना हाथ अपनी बुर से हटा लिया। 

राज बिलकुल आँखें फाड़े अपनी माँ की बुर और उस छेद को देखे जा रहा था जहाँ से वह कभी बाहर आया था। उसका लौड़ा जैसे झड़ने के करीब ही था। उसने अपना हाथ वहाँ से हटा दिया।

अब नमिता ने अपनी पूरी जाँघें फैला दी और राज उसकी बुर को पास से देखने लगा। उसने अपना हाथ फेरा और सोचा कि कितना छोटा सा छेद है। अब वह अपने पंजे को उसकी बुर की लम्बाई में फेरा और उसकी नरमाहट ने उसको बहुत उत्तेजित कर दिया। अब वह उसकी रेशमी बुर के चिकनेपन का अहसास अपनी हथेली पर कर रहा था 

फिर वह झुका और अपने जन्म स्थान की एक मस्त चुम्मी लिया और बोला: माँ आह कितनी मस्त और नरम है आपकी बुर। 

नमिता : आऽऽह । पसंद आयी तुझे ? 

राज: म्म्न्म्म्म्म्म बहुत मस्त है। 

अब वह लगातार उसकी चूमे जा रहा था। 

वह बोला: माँ एक बार फिर से फैलाओ ना अपनी बुर को। 

नमिता हँसते हुए बोली: तू ख़ुद ही फैला ना।

राज ने अब उसकी बुर की फाँकों को फैलाया और अपना मुँह वहाँ रख कर उसको चूमने लगा । अब वह उसके छेद को चाटने लगा ऊपर से नीचे तक। उसको बुर की clit दिखी तो वह उसपर जीभ फेरा और मस्ती से उसे छेड़ने लगा। नमिता उचक गयी आऽऽह्ह्ह्ह्ह करके। 

राज अब अपनी जीभ से उसकी बुर चोदने लगा। 

नमिता की अब चीखे गूँज रही थीं - आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माआऽऽऽऽऽऽऽर्रर्र डालाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ रेएएएएएएएएएए । बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽ रुक जाआऽऽऽऽऽऽऽऽ मैं तो गईइइइइइइइइइइ कहकर वह उसके सिर को अपने बुर में दबा दी और अपनी जाँघें भी भींच लीं। राज की तो मानो साँस ही रुक गयी। तभी नमिता का फ़ौवारा छूटने लगा और राज का पूरा मुँह उसके पानी से भर गया। वह उसको मज़े से पी गया। नमिता ने अब अपना बदन ढीला छोड़ दिया और राज की साँस में साँस आयी। 

वह नमिता के इतने ज़बरदस्त ऑर्गैज़म को हैरानी के साथ महसूस किया था।अब वह नमिता के लस्त पड़े बदन को देख रहा था। नमिता की बुर भी पूरी गीली दिख रही थी। 

नमिता: आऽऽऽऽह बेटा क्या मज़ा दिया है आज तूने अपनी माँ को। कहाँ से सीखा इतना मस्त चाटना ? 

राज: माँ आयशा आंटी की भी चाटी थी उन्होंने ही clit के बारे में बताया था। 

नमिता: आऽऽहहह तभी मैं सोची कि पहली बार में तूने इतना मज़ा कैसे दिया मुझे। पर तेरा तो वैसे ही खड़ा है, ला मैं मूठ्ठ मार देती हूँ। 

राज: माँ आज नियम तोड़ कर चूस दो ना। 

नमिता: नहीं फिर तू चुदायी की भी ज़िद करेगा। 

राज: माँ पक्का चुदायी परसों गणित के पेपर के बाद ही होगी। मेरा आख़री पेपर तो वही है ना। 

नमिता: अच्छा चल आज नियम तोड़ देती हूँ । चल लेट जा तेरा लौड़ा चूस ही देती हूँ।

राज बहुत ख़ुश होकर नमिता को चूम लिया और लेट गया। अब नमिता उठी और बाथरूम जा कर फ़्रेश हुई और वापस आकर राज के ऊपर लेट गयी। अब उसके होंठ राज के होंठ पर थे और वो दोनों प्रगाढ़ चुम्बन से जैसे बंध से गए। काफ़ी देर होंठ चूसने के बाद नमिता का अगला हमला उसके निपल्ज़ पर हुआ और वो मज़े से आऽऽहहह करने लगा। फ़िर नमिता उसके निपल्ज़ को अपने दाँतों से हल्के से काटी और राज की ह्म्म्म्म्म्म्म निकल गयी। अब वह नीचे आयी और राज के पेट को चूमते हुए उसके पेड़ू पर उगे बालों को चुमी और जीभ से चाटी। 

राज आह्ह्ह्ह्ह्ह किए जा रहा था। फिर नमिता उसके लौड़े को जोकि क़रीब उसके नाभि तक पहुँचा हुआ था , ना छूते हुए बग़ल के झाँटो को चूमते हुई उसकी जाँघ और लौड़े के जोड़ को चुमी और चाटी । राज ने ऐसा अहसास कभी नहीं किया था। वह उइइइइइइइइ कहकर मस्ती से नमिता की चूचियाँ दबाने लगा। अब नमिता की जीभ उसके बड़े बड़े बॉल्ज़ पर घूम रही थी। वह भी मस्ती से अपनी कमर हिलाकर अपने मज़े को दुगुना करने लगा। एक एक करके नमिता ने उसके पूरे आँड मुँह में लेकर चूसे। फिर वह उसके लौड़े को नीचे से लेकर ऊपर तक चाटने लगी। अब वह उसके सुपाडे के पास आकर उसके निचले हिस्से को चाटी और फिर ऊपर आकर उसने पूरा सुपाड़ा मुँह में भरकर उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। 

राज : हाऽऽय्य्य्य्य्य माँआऽऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽऽ चूस रहीइइइइइइ होओओओओओओओ। मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाऽऽऽ हैएएएएए।

नमिता अब पहली बार उसका लौड़ा चूसने लगी और उसने अपने चूसने में अपनी पूरी कला लगा दी। वह चाहती थी कि उसके द्वारा आज जो पहली बार उसके लौड़े की चुसाई हो रही है वह राज को ज़िंदगी भर याद रहे। अब उसका मुँह ऊपर नीचे हो रहा था। और आधे से भी ज़्यादा लौड़ा वह चूस रही थी। 

राज मस्ती से नीचे से कमर उछाल रहा था। 

नमिता अब अपनी ऊँगली उसकी गाँड़ के छेद के आसपास ले गयी और वहाँ उसकी गाँड़ को छेड़कर उसको और उत्तेजित करने लगी। 

अब नमिता ने डीप थ्रोट देना शुरू किया जिसमें उसकी महारत थी। राज तो जैसे उछल ही गया। अब उसका सुपाड़ा नमिता के टॉन्सिल के बीच में रगड़ रहा था। 



राज आनन्द से भर गया और कमर हिला कर आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽऽऽऽ मैं गयाआऽऽऽऽऽऽऽऽ । 

ये कहते हुए वह झड़ने लगा। नमिता भी पूरी मस्ती से उसका एक एक बूँद कामरस पी गयी। 

फिर वह उसके बॉल्ज़ सहलाते हुए उसके सुपाडे की आख़री बूँद भी चाट ली। 

राज भी मस्ती से अलसाया हुआ लेटा हुआ था और नमिता उसके बग़ल में आकर लेट गयी। 

नमिता: बोलो मज़ा आया? 

राज: आह माँ , बहुत बहुत मज़ा आया। क्या चूसती हैं आप? 

नमिता: पर आज तूने नियम तो तुड़वा ही दिया। 

राज: पर माँ चुदायी की ज़िद तो नहीं की ना। 

नमिता: हाँ वह तो है। अच्छा चलो अब खाना खा लो फिर पढ़ने बैठो।


राज उस दिन पूरी तरह से पढ़ाई में लगा रहा । शाम को जब नमिता उसको चाय देने गयी तो वह पढ़ाई में इतना लीन था कि उसे पता ही नहीं चला उसके आने का। नमिता उसके पास जाकर खड़ी हुई और उसका सिर अपने पेट पर दबा कर उसके खुरदरे गाल को अपने नरम पेट पर महसूस की और उसके गाल पर हाथ फेरती हुई बोली: शेव बढ़ गयी है बेटा, कल कर लेना। 

राज अपने गाल को उसके पेट पर रगड़ते हुए बोला: माँ म्म्म्म्म्म्म कितना नरम पेट है आपका। हाँ कर लूँगा ।

नमिता उसे चूमते हुए बोली: चल अब चाय पी ले। 

राज: माँ आप बहुत अच्छी है। आह्ह्ह्ह्ह क्या मज़ा दिया था दोपहर को आपने। बहुत मस्त चूसती है आप। 

नमिता: क्या यही सब सोच रहा है या पढ़ भी रहा है? और ये क्या इसको खड़ा भी कर लिया? उसने राज के लौड़े को लोअर के ऊपर से दबाते हुए कहा।

राज हँसते हुए: माँ ऐसी सेक्सी औरत सामने हो तो और क्या होगा , ये हमेशा खड़ा ही रहेगा। 

उसने नमिता के गोल गोल चूतरों पर हाथ फेरते हुए कहा। 

नमिता: चल अब पढ़ाई कर। मैं ज़रा पड़ोस में राजू के घर से आती हूँ। 

राज: माँ आजकल आपकी सुषमा आंटी से बहुत बन रही है? 

नमिता थोड़ा चौक कर बोली: बस ऐसे ही किसी से तो बात करने का मन होता है। 

अब नमिता मन ही मन मुस्कुरा के बाहर आयी, इस बेचारे को क्या पता कि हम दोनों क्या गुल खिला रही है। 

अब वह तय्यार हुई और सुषमा के घर पहुँची। 

सुषमा ने उसके गले लगाकर उसका स्वागत किया। 

नमिता: घर में और कौन है?

सुषमा पानी का गिलास लाके उसे देती हुई: बस मैं और आप। 

नमिता पानी पीकर बोली: आ ना फिर मेरी गोद में ही बैठ जा। 

सुषमा हँसते हुए उसकी गोद में बैठ गयी और नमिता ने उसके होंठ के ऊपर अपने होंठ रख दिये और चूमते हुए उनको चूसने भी लगी। जब दोनों को साँसे तेज़ हो गयी तो सुषमा ने अपना मुँह हटा लिया और बोली: दीदी आज हो सकता है राजू जल्दी ही वापस आ जाए। 

यह कह कर वह उसकी गोद से उतर कर पास ही बैठ गयी। 

नमिता: ओह कोई बात नहीं। अच्छा ये बता कि घरेलू चुदायी कैसी चल रही है?

सुषमा हँसने लगी: वह दीदी क्या नाम दिया है आपने । हा हा ठीक चल रही है। कल रात को दोनों ने दो दो राउंड किया। दूसरे राउंड में एक साथ मेरी बुर और गाँड़ मारे। राजू तो पहली बार मेरी गाँड़ मार कर पागल हो हो गया है। आज भी सुबह स्कूल जाने के पहले भी चुदायी की उसने मेरी बुर की। फिर दोपहर को भी गाँड़ मारी। आह्ह्ह्ह्ह मेरा तो बुरा हाल कर दिया है इस साँड़ ने। अभी फिर रात को दोनों चढ़ जाएँगे। 

नमिता: साली ये क्यों नहीं बोलती कि मस्त मज़ा ले रही है दो दो लौडों का। मज़े हैं तेरे।

सुषमा: नहीं दीदी ज़रा ज़्यादा ही हो जा रहा है। मैं कोई २० या २५ साल की लड़की तो हूँ नहीं।

नमिता: ह्म्म्म्म्म राजू कितनी देर चोदता है?

सुषमा: दीदी, आधा घंटा तो रगड़ता ही है। उसके पहले आधा घंटा तो फ़ोर प्ले ही करता है। 

नमिता: आह मस्ती से करता है इसका मतलब। 

ये कहते हुए नमिता ने अपनी बुर खुजा के सुषमा को अपनी मस्ती जतायी। 

सुषमा: क्या दीदी बुर खुजा रही हो ? राज के साथ कहाँ तक पहुँची?

नमिता: कल वह मेरी बुर चूसा और मैंने भी उसका लौड़ा चूस ही लिया। 

सुषमा: अब चुदायी का क्या प्लान है? 

नमिता: बस परसों उसका पेपर ख़त्म होगा उसके बाद वह कहाँ रुकेगा? हालाँकि मैंने उसको कहा है कि क्लास में पहले तीन में आएगा तभी मुझे चोद सकता है। पर शायद वह ना माने। देखो क्या होता है?

सुषमा: तू चाहे तो मैं अपने राजू की सेवाएँ दे सकती हूँ। वो ऐसे ही साँड़ जैसे हमेशा खड़े करके घूमता रहता है। कल बोल रहा था कि उसका स्कूल में कई बार खड़ा हो जाता है मेरे बारे में सोचकर। 

नमिता: ना बाबा मेरे घर का साँड़ ही मेरे लिए काफ़ी है। उसको ही शांत कर लूँ तो बड़ी बात होगी। 

सुषमा: हाँ वह तो है। 

तभी बेल बजी और राजू अंदर आया । सुषमा दरवाज़ा खोलने गयी ।तभी सुषमा की फुसफुसाते हुए आवाज़ आयी: अरे छोड़ ना नमिता आयी है। 

नमिता मन हीं मन मुस्करायी और तभी राजू आया और नमिता की आँख उसके पैंट पर पड़ ही गई जहाँ अच्छा ख़ासा तंबू सा बना हुआ था। उसने सोचा कि सुषमा सही कह रही है कि ये साँड़ तो हमेशा चढ़ायी के लिए तय्यार रहता है। राजू ने नमिता को नमस्ते की और नमिता ने भी जवाब में पूछा: कैसे हो बेटा?

राजू: जी ठीक हूँ आंटी। 

अब नमिता उठी और बोली: अच्छा चलती हूँ, तू भी कभी आना ना। 

फिर राजू से बोली: तुम भी आया करो और राज से थोड़ा पढ़ाई कर लिया करो। वह तो तुमसे १ साल बड़ा ही है ना?

राजू: जी आंटी आऊँगा।

अब नमिता उठी और सुषमा उसको छोड़ने आयी। 

नमिता फुसफुसाई: ये तो अभी तेरी लेगा ही, खड़ा कर के घूम रहा है। 

सुषमा: जानती हूँ अभी एक घंटे तक मुझे छोड़ने वाला नहीं। दरवाज़े पर ही मेरी साड़ी के ऊपर से बुर पकड़ लिया था। जब मैंने कहा की आप बैठी हो तभी छोड़ा उसने। 

अब नमिता उसकी बुर को साड़ी के ऊपर से दबा कर बोली: हैपी चुदायी । और हँसती हुई अपने घर में घुस गयी। उसने अपने कपड़े उतारे और सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में आ गयी।

फिर वह किचन में खाना बनायी और राज को आवाज़ दी खाने के लिए। 

दोनों ने शांति से खाना खाया और बातें भी करते रहे।

राज: माँ सुषमा आंटी कैसी हैं?

नमिता: वह ठीक है। आज राजू भी मिला था, मैंने उसको कहा है कि तुमसे पढ़ाई में मदद ले लिया करे। 

राज: माँ वह तो पढ़ाई में ऐसा ही है। पर ठीक है अगर माँगेगा तो मदद कर दूँगा। 

अच्छा आज रात का क्या प्रोग्राम है?

नमिता बनते हुए: कैसा प्रोग्राम? तेरा गणित का पेपर है , ख़ूब तय्यारी कर और मैं अभी TV देखूँगी फिर सो जाऊँगी। 

राज उठकर हाथ धोया और नमिता की कुर्सी के पीछे आकर खड़ा हो गया और उसकी चूचियों को ब्लाउस के ऊपर से दबाकर बोला: देखो माँ ऐसा मत बोलो प्लीज़. मैं तो रात को सोने के पहले आऊँगा और आपकी बुर चाटूँगा । आप भी मेरा लौड़ा चूस देना। 

नमिता हँसते हुए बोली: अच्छा जैसे तुम चाहोगे कर दूँगी। पर कोर्स ख़त्म करो ।

ये कहते हुए नमिता ने उसका लौड़ा लोअर के ऊपर से ही दबा दिया जो वह उसकी गर्दन पर रगड़ रहा था ।

राज : अच्छा माँ चलता हूँ। सोने के पहले आऊँगा। आज आप नंगी ही सोना। 

नमिता: चल भाग अब और पढ़ाई कर। ये कहते हुए उसने उसके लौड़े को लोअर के ऊपर से ही चूम लिया। 

राज: आऽऽऽऽऽहहह मेरी सेक्सी माँ । कहते हुए उसकी चूचियाँ दबाकर चला गया। 

नमिता बाद में अपना काम निपटायी और TV देखने के बाद बाथरूम में जाकर अपने कपड़े उतारकर नंगी हो गयी। फिर अपनी बुर और गाँड़ को अच्छी तरह से साफ़ करके नंगी ही आकर बिस्तर पर लेट गयी और चादर ढक लिया। अब वह राज का रास्ता देखते हुए सो गयी। 

राज रात के क़रीब १२ बजे आया , वह पूरा नंगा था ,तो नमिता गहरी नींद में सो रही थी। उसका लौड़ा पूरा तना हुआ था। 

फिर उसने सोचा कि वह इतनी गहरी नींद सो रही है , क्या उठाना ठीक होगा। 

फिर उसने धीरे से चादर नीचे से उठाई और देखा कि वह नंगी ही सो रही थी। अब उसका पूरा लौड़ा खड़ा होकर हिलने लगा। वह एक करवट लेती थी और उसके चूतर राज की ओर थे। राज ने हाथ बढ़ाकर चूतरों को सहलाया और नमिता आऽऽह करके उठ गयी। 

जब वह सीधी हुई तो राज को देखकर मुस्कुरायी और अपनी बाहें फैला दी। राज उसकी बाहों में समा गया। अब वह दोनों आमने सामने लेते हुए थे और राज के होंठ नमिता के होंठ पर चिपक गए। अब वह एक दूसरे को चूमे जा रहे थे। अब नमिता ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और राज उसे चूसने लगा। वह उसकी जीभ से अपनी जीभ भी रगड़ने लगा। 

फिर नमिता ने अपना मुँह खोला और अब राज ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और नमिता उसकी जीभ वैसे ही चूसने लगी मानो लौड़ा चूस रही हो ।अब नमिता उसके ऊपर आ गयी और राज के हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसकी कमर तक सहलाने लगे और फिर उसके गोल गोल चूतरों को दबाने लगे । 

नमिता ने ऊपर से उसका होंठ चूसे जा रही थी और उसके हाथ राज के निपल्ज़ को दबा रहे थे। 

अब नमिता ने अपने मुँह से थूक निकाला और राज के मुँह में थोड़ी दूर से थूक गिराने लगी। राज को थूक अपने मुँह में गिरते हुए दिख रहा था और वह उत्तेजना से भरते ही जा रहा था।

उसका लौड़ा जो कि नमिता के पेट और उसके पेट के बीच में दबा हुआ था, प्रीकम छोड़ने लगा। 

नमिता को अपने पेट पर हल्का सा गीलापन का भी अहसास हुआ। अब नमिता ने अपनी छातियाँ उठाईं ताकि राज उनको दबाकर उसे मस्त कर दे। राज ने वैसा ही किया। अब वह उसके निपल्ज़ भी दबाने लगा। नमिता की आह्ह्ह्ह्ह्ह निकल गयी। फिर नमिता ने अपनी एक चूचि उसके मुँह पर रख दी और राज उसे चूसने लगा। नमिता भी हाय्य्य्य्य्य करे जा रही थी। फिर नमिता ने दूसरी चूचि उसके सामने की और वह उसे भी चूसने लगा ।


नमिता : बेटा मज़ा आ रहा है? 

राज: माँ मेरा तो पानी ही छूट जाएगा। आह ऊपर से हटो मेरा लौड़ा दब रहा है। 

नमिता हँसते हुए उठी और बोली: अभी से पानी छोड़ देगा? चल हट गयी। 

राज: माँ और चूचि पीनी है। दो ना। 

नमिता ने अपने हाथ में एक चूचि पकड़ ली और उसके मुँह पर लगा दी। वह अब उसे पीने लगा। नमिता अभी भी चुचि पकड़ी हुई थी। राज सोचा आह क्या दृश्य है? माँ मुझे अपने हाथ से ही चूचि पिला रही है। उसका लौड़ा और ज़ोर से हिलने लगा। 

नमिता: क्या हुआ बेटा? क्या तुम्हारा रुक नहीं रहा है?

राज: हाँ माँ , मेरा लगता है कि पानी निकल जाएगा। 

नमिता उसकी उत्तेजना को देख कर बोली: चल अब चूचि छोड़ दे । मैं तेरा लौड़ा चूस लेती हूँ। 

ये कहते हुए वह नीचे को होकर राज के लौड़े के सुपाडे के छेद के ऊपर लगे प्रीकम को अपनी जीभ से चाटी और फिर उसका पूरा लौड़ा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। राज उसकी चूचियाँ ऊपर नीचे होते देख रहा था और वह बहुत मज़े से उसका लौड़ा चूस रही थी। उसने उसके बॉल्ज़ भी अपनी हथेली में लेकर सहलाए और सुपाडे के चारों ओर जीभ भी घुमाती रही चूसने के वक़्त। 

अब राज आऽऽह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽऽऽ कहकर अपनी कमर उछालकर जैसे उसके मुँह को चोदने लगा। नमिता की भी स्पीड बढ़ गयी और उसका सिर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगा। अब राज आऽऽऽऽऽहहहह माँ आऽऽऽऽ मैं झड़ाआऽऽऽऽऽऽ कहते हुए अपने वीर्य को झटके से अपनी माँ के मुँह में छोड़ने लगा। 

नमिता भी मज़े से उसका रस पीती चली गयी। जब उसने पूरा लौड़ा निचोड़ लिया तब वह मुस्कुराते हुए बोली: ह्म्म्म्म्म क्या मस्त स्वाद है तेरे रस का, मज़ा आ गया बेटा ।

राज हाँफते हुए: माँ , पापा का रस स्वादिष्ट नहीं था क्या?

नमिता: उनका भी ठीक था पर तेरा स्वाद ज़्यादा बढ़िया है। 

फिर वह उठ कर बाथरूम में गयी और वापस आकर राज के साथ लेट गयी। 

नमिता ने देखा कि उसका लौड़ा अभी भी खड़ा है। उसने उसे सहलाना चालू किया। असल में वह ख़ुद बहुत गरम हो चुकी थी और उसकी बुर बिलकुल भीगी हुई थी। 

राज नमिता की चूचियाँ दबाने लगा और जल्दी ही उनके होंठ फिर से जुड़ गए। दोनों अब भी आमने सामने लेटे हुए थे। राज ने एक हाथ नमिता के चूतरों पर फिराया और जल्दी ही उसकी गाँड़ सहलाने लगा। फिर वह पीछे से ही उसकी बुर में भी दो ऊँगली डाला तो वह उसके अंदर चली गयी। 

अब वह उसकी बुर में उँगलियाँ अंदर बाहर करने लगा। 

नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बेटाआऽऽऽऽऽ चिल्लाने लगी। 

अब नमिता उसके कान में बोली: चल ६९ करते हैं। 

राज मुस्कुराया और बोला: हाँ माँ ज़रूर। 

अब नमिता फिर से उठी और अपने चूतरों को उसके सीने की ओर करके अपना मुँह उसके लौड़े पर रख दिया और उसे चूसने लगी। फिर उसने अपनी कमर हिला कर अपनी बुर राज जे मुँह पर रख दी। 

राज भी मस्ती से उसकी बुर को चाटने लगा। अब नमिता भी अपनी कमर हिलाकर अपनी बुर उसके मुँह पर रगड़ने लगी । राज ने अपनी जीभ निकाली और उसकी बुर को मानो जीभ से ही चोदने लगा। 

उधर नमिता भी उसका पूरा लौड़ा अपने मुँह मेंलेकर मज़े से चूसे जा रही थी। 

राज ने उसके बुर मेंअपनी तीन उँगलियाँ डाल दी और उनको अंदर बाहर करने लगा। 

नमिता की ह्म्म्म्म्म्म्म निकलने लगी। अब नमिता ने अपना मुँह नीचे किया और उसकी टाँगे ऊपर को खिंची। राज ने भी अपने पैर ऊपर उठा दिए। अब नमिता उसकी गाँड़ चाटने लगी। 

राज : आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽऽऽऽ क़याऽऽऽऽऽऽऽऽ कर रही होओओओओओओओ। 

नमिता अब अपने थूक से भीगे उसकी गाँड़ में एक ऊँगली डाल कर अंदर बाहर करने लगी। 

राज: हाय्य्य्य्य्य्य्य्य आऽऽऽऽऽऽऽऽहहह 

नमिता फिर से उसका लौड़ा चूसने लगी और गाँड़ में ऊँगली भी कर रही थी। 

उधर राज भी नमिता की गाँड़ सूँघने लगा और उसे जीभ से चाटने भी लगा। उसकी तीन उँगलियाँ उसकी बुर को अभी भी चोद रही थी। 

फिर नमिता ने उसे वही डीप थ्रोट का मज़ा दिया और उसके हलक तक लौड़ा घुस गया । 

राज: आऽऽऽहहह माँआऽऽऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽऽ चूउउउउउउउउस रहीइइइइइइइइ होओओओओओओओओ।

राज ने भी अब नमिता के clit पर अपनी जीभ का हमला किया और नमिता भी आऽऽऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ मैं गयीइइइइइइइइइ। कहकर झड़ने लगी। 

राज भी अब अपना पानी नहीं रोक पाया और उसका भी झड़ने लगा। वह भी चिल्लाया: माँआऽऽऽऽऽऽऽऽ मैं भी गयाआऽऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽहहहह ।

नमिता उसका पूरा रस पीती जा रही थी और राज भी उसका पानी पी गया। 

अब राज बोला: आऽऽह माँ अब उठो ना, मैं दब रहा हूँ। 

नमिता आऽऽऽह करके उठी और उसके बग़ल में लस्त होकर लेट गयी। 

थोड़ी देर बाद राज उठा और नमिता के बाथरूम में फ़्रेश होकर आया। उसके आने के बाद नमिता भी उठी और बाथरूम में जाकर वापस आइ तो राज वहाँ लेता हुआ था। उसका मोटा लम्बा लौड़ा अब नरम सा होकर एक जाँघ पर जैसे आराम कर रहा था।

राज नमिता को देख कर बोला: माँ यहीं सो जाऊँ? 

नमिता: देख अगर तू शांति से सोएगा तो ठीक है। पर अगर मस्ती करनी है तो जा अपने कमरे में। 

राज: माँ मैं चुपचाप सोऊँगा। प्रॉमिस ।

नमिता हँसते हुए बोली: चल फिर सो जा। चल लेट जा। 

अब वह लेट गया और नमिता उसके पास लेती और दोनों एक दूसरे को छू नहीं रहे थे। 

नमिता ने उसे एक चादर उढ़ाई और ख़ुद भी एक चादर ओढ़ ली। 

अब दोनों सो गए।


सुबह राज उठा तब ५ बजे थे , उसने देखा कि नमिता गहरे नींद में थी और उसकी दोनों चूचियाँ चादर से बाहर आकर नंगी दिखाई दे रही थी। वह उनको देख कर सोचने लगा कि क्या मस्त बड़ी बड़ी चूचियाँ है। पर उसने उसे डिस्टर्ब नहीं किया और उठकर अपने खड़े लौड़े को सहलाते हुए अपने कमरे के बाथरूम में गया और बाद में पढ़ने बैठ गया। 

नमिता क़रीब एक घंटे के बाद उठी और फ़्रेश होकर ब्लाउस और पेटिकोट पहनी और किचन में जाकर चाय बनायी। जब वह चाय लेकर राज के कमरे में गई तो वह पढ़ाई में बिलकुल ही मस्त था। उसने राज को चाय दी और ख़ुद भी बिस्तर पर बैठ कर चाय पीने लगी। 

चाय पीते हुए नमिता बोली: बेटा आज तो दिन भर पढ़ेगा ना? कल आख़री पेपर है । फिर तीन चार दिन आराम करना और उसके बाद फ़ाइनल परीक्षा की तय्यारी करना। 

राज: ठीक है माँ , पर तीन चार दिन आराम नहीं करूँगा और ना ही आपको करने दूँगा। बस हर समय चुदाई करूँगा। 

नमिता हँसते हुए: ओह ऐसा क्या? 

राज : बिलकुल ऐसा। 

नमिता उठते हुए बोली: अच्छा बाबा चल अब पढ़ना चालू करो। 

राज: जी माँ पर मेरी बात याद रखिएगा। 

नमिता: परसों तेरा रिज़ल्ट आएगा और तुझसे टॉप तीन में आना पड़ेगा, तभी तुम्हें ये करने की इजाज़त मिलेगी। 

राज: माँ आप ग़लत हो। नया प्रोग्राम अनाउन्स हुआ है , कल आख़री पेपर के बाद गणित के नम्बर भी मिलेंगे और टॉप तीन के नाम भी बताए जाएँगे। मुझे पूरा विश्वास है कि में टॉप तीन में ज़रूर रहूँगा। 

नमिता: ओह तो कल ही रिज़ल्ट मिल जाएगा? चलो देखते हैं क्या होता है? चलो अब पढ़ो। 

नमिता कमरे से बाहर आयी और किचन में नाश्ते की तय्यारी करने लगी। 

बाद में नाश्ता करके राज फिर से पढ़ने चला गया और नमिता ऑफ़िस के लिए तय्यार होने लगी। तभी उसका फ़ोन बजा। सुधाकर था। 

नमिता: हैलो । 

सुधाकर: क्या हाल है? कहाँ हो?

नमिता: घर पर हूँ और अभी ऑफ़िस के लिए निकल रही हूँ। 

सुधाकर: आज ऑफ़िस नहीं आओ। मुझे अभी तुम्हारे घर के पास वाले चौक पर मिलो। 

नमिता: क्यों क्या हुआ? 

सुधाकर: वहाँ मिलो फिर बताऊँगा। 

नमिता: ठीक है। मैं आती हूँ ।

नमिता तय्यार हुई और राज को बाई कहकर चली गई। 

चौक पर सुधाकर की कार खड़ी थी, वह उसने जाकर बैठ गयी। 

सुधाकर: आज तो बड़ी हसीन लग रही हो ।

नमिता: अच्छा क्या बात है आज सुबह सुबह ही मूड में हैं? 

सुधाकर: असल में ऑफ़िस का टेन्शन ज़रा पिछले दिनों ज़रा बढ़ गया था। मनीष भी अमेरिका में है और मुझे भी कल ही अमेरिका जाना है। 

नमिता: ओह आप भी जा रहे हैं , वापस कब आएँगे?

सुधाकर: करीब १० दिन तो लग ही जाएँगे। 

नमिता: ओह काफ़ी लंबा प्रोग्राम है। ये तो बताइए हम अभी कहाँ जा रहे हैं?

सुधाकर: मेरे फ़ार्म हाउस में । 

नमिता : वहाँ क्यों? 

सुधाकर उसकी जाँघ को दबाते हुए बोला: तुम्हारी सेवा जो करनी है।

नमिता ने कनखियों से उसके पैंट के सामने के भाग को देखा और वहाँ उभार देखकर आह भरी और बोली: ये क्या, आज सुबह सुबह ये प्रोग्राम बना लिया? 

सुधाकर : दरअसल कई दिन से मूड था तुम्हारे साथ फ़ार्म हाउस में मज़ा करने का। आज अवसर मिला तो प्लान बना लिया। 

वह उसकी जाँघ दबाते हुए उसकी बुर को साड़ी के ऊपर से ही दबा दिया। फिर उसने नमिता को कहा: ज़रा लौड़े को दबाओ ना। मूड बन जाएगा। नमिता उसके लौड़े को पैंट के ऊपर से दबाने लगी। थोड़ी देर में वो फ़ार्म हाउस पहुँच गये।


वहाँ बाहर चौक़ीदार ने दरवाज़ा खोला। कार अंदर पहुँची और दोनों नीचे उतरे। नमिता अपनी ज़िंदगी में पहला फ़ार्म हाउस देख रही थी। वह उसकी हरियाली और सुंदरता देख कर दंग रह गयी। अंदर मकान में भी बहुत सजावट की हुई थी। फिर सुधाकर उसे पीछे एक स्विमिंग पूल दिखाया जो कि ऊपर से ही ढका हुआ था। सुधाकर उसको पीछे से जकड़ लिया और बोला: आज नंगे होकर नहाएँगे? ठीक है ना?

नमिता : छी आप भी ना, उलटे सीधे विचार कहाँ से लाते हैं। 

सुधाकर उसकी गर्दन चूमते हुए और उसकी छाती दबाते हुए बोला: आऽऽहहह जाऽऽऽंन क्या मस्त गदरायी हुई हो । देखो मेरा लौड़ा भी तुम्हारी चूतरों के स्पर्श से ही कैसा पागल हो रहा है। 

वह उसकी गाँड़ पर अपना लौड़ा रगड़ने लगा। 

सुधाकर: तुम्हें तैरना आता है? 

नमिता: हाँ गाँव के तालाब में तैरती थी पर कई साल हो गए , पता नहीं अब तैर पाऊँगी कि नहीं। 

सुधाकर: इंसान तैरना सीख जाए तो वह कभी नहीं भूलता। 

नमिता: आऽऽऽहहह थोड़ा धीरे से दबायिये ना। यहाँ के नौकर कहाँ हैं?

सुधाकर: उनको सुबह ही मैंने कह दिया था की खाना वग़ैरह बनाकर चले जाना। वह अब शाम को आएँगे। यहाँ हम दोनों के बीच में इन कपड़ों के अलावा कोई नहीं है।

नमिता हँसने लगी और बोली: तो अब क्या करें? 

सुधाकर: कपड़े उतारें और स्विमिंग करें। 

नमिता: आप भी ना । स्विमिंग सूट नहीं है यहाँ? हम वो पहन लेते हैं। 

सुधाकर: क्या यार तुम भी ना? अब स्विमिंग सूट की क्या ज़रूरत है? जब सिर्फ़ हम दोनों ही हैं यहाँ। 

ये कहते हुए उसने उसको घुमाया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूमने लगा। नमिता भी उसका साथ देने लगी। जल्द ही उसकी जीभ नमिता के मुँह के अंदर आ गयी जिसे वह चूसने लगी। अब सुधाकर के हाथ उसकी चिकनी कमर को सहला रहे थे और फिर नीचे जाकर उसके गोल चूतरों को सहलाने लगे। नमिता की बुर भी गीली होने लगी। उसने भी हाथ बढ़ाकर पैंट के ऊपर से ही उसका लौड़ा पकड़ लिया और दबाकर मज़े से भरने लगी। 

सुधाकर: रानी चलो ना कपड़े खोलो। 

नमिता इठला कर बोली: आज तो आप ही खोलो मेरे कपड़े। 

वह हँसते हुए बोला: ज़रूर , क्यों नहीं। 

अब उसने नमिता की साड़ी खोल दी। फिर उसके हाथ उसके ब्लाउस पर थे और हुक खुलते चले गए । नमिता ने भी अपने हाथ उठाकर ब्लाउस उतारने में उसकी मदद की। सुधाकर अब उसकी उठी हुई बाहँ देखकर उत्तेजित हो गया, और उसकी बग़ल सूंघकर गरम हो गया और फिर वह वहाँ जीभ से चाटने लगा।

सुधाकर: आऽऽह रानी क्या मस्त गंध है तुम्हारे बदन की। 

नमिता अब ब्रा और पेटिकोट में थी। 

नमिता ने सुधाकर को कहा: अपने कपड़े भी तो उतारिए। 

वह बोला: तुम ही उतार दो ना मेरी जान।

नमिता उसकी टी शर्ट उतारी और और पैंट की बेल्ट खोलकर पैंट उतार दी। अब उसका तगड़ा बदन और बालों से भरी छाती और मोटी मोटी जाँघों के बीच पूरी फूली ही चड्डी और उसमें लगा हुआ सफ़ेद प्रीकम देखकर नमिता की बुर ने तो पानी ही छोड़ना शुरू कर दिया। नमिता ने सोचा कि क्या मस्त मर्द है। 

अब सुधाकर भी नमिता के पेटिकोट के नाड़े को खोला और उसकी पेटिकोट नीचे गिरा दिया और नमिता की गीली पैंटी देखकर सोचने लगा कि क्या सेक्सी औरत है , एकदम से चुदासि हो चली है। ब्रा और पैंटी में क्या मदमस्त दिख रही है। 

अचानक़ नमिता ने उसे हैरान कर दिया , वह पानी में कूद गयी। 

अब वह वहाँ से उसको बुलाने लगी। कमर भर पानी में वह तैरने लगी, और जल्दी ही अपनी लय पा ली। उसे तैरने में बड़ा मज़ा आने लगा। अब सुधाकर ने अपनी चड्डी उतार दी और अपना मोटा लम्बा लौड़ा हिलाते हुए पानी में छलाँग लगा दी। 

वह तैरते हुए नमिता के पास पहुँचा और नमिता को बोला: अरे तुम तो बहुत अच्छा तैर लेती हो।

नमिता: जी आप भी अच्छा तैरते हो। 

दोनों एक दूसरे के पास खड़े हो गए कमर भर पानी में और वह नमिता को भींचकर चूमने लगा। नमिता का हाथ उसकी पीठ पर से उसके बालों से भरे ठोस चूतरों पर आया और वह चौंक गयी कि वह नंगा था। अब वह अपना हाथ सामने लायी और उसके लौड़े को पकड़कर सहलाने लगी। वह भी नमिता की ब्रा का हुक खोलकर उसकी एक चूचि दबाते हुए दूसरी मुँह में लेकर चूसने लगा।उसकी ब्रा उसने बाहर फेंक दिया पूल के बाहर। नमिता की आऽऽह निकलने लगी। वह अब उसके लौड़े को ज़ोर से दबाकर मस्ती से भरने लगी। अब वह उछल कर पूल की दीवार पर बैठ गया और उसका मोटा काला लौड़ा नमिता के सामने ऊपर नीचे हो रहा था।

नमिता पानी में ही खड़ी होकर अपना मुँह खोला और उसके सुपाडे को अपने मुँह में ले ली और चूसने लगी। उसकी जीभ उसके पेशाब के छेद पर अठखेलियाँ करने लगी। वह अपनी जीभ उसके सुपाडे पर ऊपर से नीचे घुमा रही थी। सुधाकर आह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म कर उठा। 

फिर उसने उसके बड़े बॉल्ज़ सहलाते हुए उसके लौड़े को चूसना शुरू किया। सुधाकर भी अपने हाथ को उसकी नंगी चूचियों पर रखकर दबाने लगा। नमिता के ऊपर नीचे होते सिर को देखकर वह मस्त हो रहा था। उसकी उँगलियाँ नमिता के बड़े निपल्ज़ को दबा रही थीं। नमिता अब और गरम हो गयी थी और उसकी बुर उसको तंग कर रही थी। 

थोड़ी देर बाद उसने नमिता को बाहर आने को कहा। वह बाहर आयी और सुधाकर के पास आयी जो पूल के बग़ल में रखे एक लकड़ी के तख़्त पर जिसमें कुशन भी था लेटा हुआ था। वह अपना लौड़ा सहला रहा था। नमिता के आते ही वह उठा और नमिता को उसपर लिटा दिया और नीचे आकर उसकी पैंटी खोलने लगा। अब उसकी मादक बुर उसकी नज़रों के सामने थी। इस तरह खुले में ऐसी नंगी लेटी हुई नमिता बहुत ही कामुक लग रही थी। उसने अपना मुँह उसकी जाँघों के बीच डाल दिया और उसकी बुर को चूमते हुए चाटने लगा। नमिता की सिसकारियाँ गूँजने लगीं। अब वह नमिता की जाँघों के बीच बैठ कर उसकी चुदायी में लग गया। नमिता भी उसका साथ अपनी कमर उछलके दे रही थी। फ़च फ़चऔर आऽऽहहहह ह्हाऽऽऽऽयह ह्म्म्म्म्म्म्म की आवाज़ें वहाँ भर गयी थी।

सुधाकर पूरे जोश में आकर नमिता की दोनों टाँगें उसके सिर की ओर उठाकर धमासान चुदायी करने लगा। अब तो नमिता की आहें गूँजने लगीं। आऽऽऽऽऽऽहहहह मारोओओओओओओओ और ज़ोर से चोदोओओओओओओओओओओ आऽऽऽऽऽहहहह मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ गयाआऽऽऽऽऽ हाय्य्य्य्य्य्य मैं तो गयीइइइइइइइइ अब वह झड़ने लगी तभी ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म आऽऽह्ह्ह्ह्ह करके वह भी झड़ गया। 

जब वह उसके ऊपर से उठा तो उसने देखा कि उसकी बुर से उसका गाढ़ा सफ़ेद रस अब भी बाहर गिरे जा रहा था। 

अब नमिता ने आऽऽह करके अपनी टाँगें सीधी की और बोली: आऽऽह आज क्या हो गया था आपको ? बाप रे क्या ज़बरदस्त चुदायी की है आपने। मेरी तो अभी भी साँस फूल रही है। 

सुधाकर उसकी चूचियाँ दबाकर बोला: तुम माल ही इतनी मस्त हो कि साला लौड़ा शांत होने का नाम ही नहीं लेता। 

नमिता हँसते हुए उठी और बाथरूम में चली गयी और बाद में वहाँ से एक तौलिया लपेट कर आयी और बोली: हाय मैं तो भूल ही गयी कि मेरे पास कपड़े तो है हीं नहीं। मेरी ब्रा और पैंटी भीग गयी है। 

सुधाकर ने उसका तौलिया खिंचा और उसको नंगी करते हुए बोला: तुम्हें मेरी बीवी के कई कपड़े मिल जाएँगे। तुम्हें कुछ पसंद आएँ तो ले भी जाना। अब दोनों नंगे ही वापस मकान की तरफ़ चले। नमिता आगे चल रही थी और सुधाकर उसके मटकते हुए चूतरों का मज़ा ले रहा था । 

वह बोला: क्या मस्त गाँड़ है किसका लौड़ा साला खड़ा नहीं होगा। 

नमिता मस्ती से और जानबूझकर ज़ोर ज़ोर से गाँड़ मटकाने लगी। सुधाकर हँसते हुए अपने लौड़े को हिलाकर बोला: क्या बच्चे की जान लोगी?

नमिता: ये और बच्चा , साला अंदर घुसता है तो जैसे कलेजा मुँह में आता है।

अब दोनों हँसते हुए बेडरूम में आ गए थे। सुधाकर ने उसको एक आलमारी खोल कर दिखाई और उसमें रखे कपड़े दिखाकर बोला: जान, जो कपड़ा चाहे ले लो और पहनो। यहाँ पड़े पड़े ख़राब ही होंगे। अब नमिता ख़ुद ही आलमारी देखने लगी। उसने एक से एक सेक्सी नायटी और ब्रा और पैंटी भी थीं। 

सुधाकर मुस्कुरा कर बोला: सभी आलमारी देखो , एक से एक समान पड़ा है। 

नमिता ने अब दूसरी आलमारी खोली तो उसने आदमी के कपड़े थे। वह सुधाकर के ही थे। अगली आलमारी का समान उसे समझ नहीं आया और वह बोली: ये सब क्या है? 

वह बोला: ये सेक्स का मज़ा बढ़ाने की चीज़ें हैं।

नमिता वहाँ चाबुक , रबर के दस्ताने , डिल्डो, कई चमड़े की बेल्ट्स वग़ैरह देखी। 

उसे याद आया कि कई बार राज का पापा उसको ऐसी ही बेल्ट से बाँध कर उसको चोदता था। 

सुधाकर: चलो अब कुछ खा लेते हैं। नौकर खाना बना कर गया है। 

वो दोनों नंगे हीं खाना खाए। नमिता ने राज को फ़ोन किया और बोली: आज तुम अकेले ही खाना खा लो। मैं नहीं आ पाऊँगी।

बाद में दोनों बिस्तर पर लेटे थे तभी नमिता बोली: आप कल ही अमेरिका जा रहे हैं?

सुधाकर उसकी चूची दबाते हुए बोला: हाँ। क्यों क्या हुआ?

नमिता ने उसके नरम लौड़े को सहलाते हुए कहा: ये फ़ार्म हाउस तो ऐसे ही ख़ाली रहेगा जब तक आप और मनीष वापस नहीं आते?

सुधाकर: हाँ , क्या बात है बोलो ना?

नमिता: कल राज के पेपर’s ख़त्म हो रहे हैं। अगर आप इजाज़त दें तो मैं उसे यहाँ ले आऊँ दो तीन दिन के लिए। उसने भी ऐसी शानदार जगह कभी नहीं देखी है। 

सुधाकर: हाँ हाँ क्यों नहीं, मैं तो राज को भी मनीष की तरह अपना बेटे सा ही मानता हूँ। ज़रूर ले आओ उसको और ख़ूब घूमो फिरो। इसके पीछे एक जंगल भी है वहाँ भी पिकनिक कर सकते हो। चाहो तो एक दो परिवार और बुला लेना। मेरे नौकर को मैं बोल दूँगा वह सब इंतज़ाम कर देगा। उसका मोबाइल नम्बर भी तुमको दे दूँगा। 

नमिता बहुत ख़ुश हो गई और बोली: आपने वैसे भी मेरे ऊपर कई अहसान किए हैं। मैं आपका ये अहसान कभी नहीं भूलूँगी। 

सुधाकर ने उसे अपनी बाहों मेंखींच लिया और उसके होंठ चूमते हुए उसकी चूतरों को दबाते हुए बोला: जान, ख़बरदार आज के बाद ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया तो। यह सही है की मैं कई लड़कियों को चोदता हूँ अपर तुम मेरे लिए स्पेशल हो। 

नमिता ने भी उसकी चौड़ी छाती में अपना सिर छुपा लिया और उसके लौड़े को सहलाकर खड़ा कर ली। 

अब नमिता उठी और उसके लौड़े को बड़े प्यार से चूसने लगी ।

सुधाकर भी उसकी चूचियाँ दबाते हुए मज़े से अपना चूसवा रहा था। 

अब उसने नमिता को कहा : चलो ज़रा कुतिया बनो मैं पीछे से चोदूँगा । 

नमिता चौपाया बन गयी और अपना पिछवाड़ा उठा दी । सुधाकर उसके चूतरों को चूमा और एक दो थप्पड़ भी मारा और फिर अपना लौड़ा बुर में लगाकर उसको अंदर पेल दिया। अब नमिता ने भी अपनी गाँड़ पीछे करके उसका पूरा लौड़ा निगल लिया ।

अब ज़बरदस्त चुदायी का माहोल बन ही चुका था। उसने नमिता की ठुकाई चालू की और नमिता भी गाँड़ हिला हिला कर उसका पूरा साथ देने लगी। क़रीब आधे घंटे चली तूफ़ानी चुदायी ने पलंग की भी हालत ख़राब कर दी। वह भी पूरे टाइम चूँ चूँ ही करता रह गया। इसके अलावा वहाँ आऽऽह और चोदोओओओओओ राजाआऽऽऽ फाड़ दोओओओओओओओ नाआऽऽऽ और साथ ही ले सालीइइइइइइइइ और लेएएएएएए आह्ह्ह्ह्ह। हम्म्म्म्म्म्म वग़ैरह आवाजें भी गूँज रही थीं ।

फिर मैं गाइइइइइइइइइइइइ और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मैंभीइइइइइइइइ। के साथ दोनों स्खलन का मज़ा लेते हुए एक दूसरे में समा से गए। 

बाद में साफ़ सफ़ाई के बाद नमिता किचन में गयी और चाय बना लायी जो दोनों नंगे ही पिए। सुधाकर ने उसे अपनी गोद में बिठाकर ही चाय पी। 

सुधाकर: जान एक बात बोलूँ? बुरा तो नहीं मानोगी?

नमिता: बोलो ना ?

वह: शादी कर लें क्या हम?

नमिता: आज से चार साल पहले भी आपने यही पूछा था तब भी मैंने कहा था की हमारे बच्चे इसे किस तरह से लेंगें पता नहीं।

सुधाकर: देखो उस समय वो छोटे थे अब समझदार हो गए हैं। शायद मान जाएँ?कोशिश करूँ क्या? मनीष से बात करूँ? तुम भी राज से बात करो। 

नमिता: पता नहीं हिम्मत भी होगी कि नहीं बात करने की। और आपकी बेटी जो अपनी नानी के यहाँ पढ़ रही है? वह मान जाएगी?

सुधाकर: पता नहीं उससे तो मैं साल में दो तीन बार ही मिल पाता हूँ। अब कह रही है कि यहाँ आकर रहेगी मेरे और मनीष के साथ और कॉलेज भी यहीं पढ़ेगी।

नमिता: फिर उसकी राय भी ज़रूरी होगी। 

वह नमिता की चुचि सहलाते हुए बोला: सच कितना अच्छा होता अगर हम सब साथ रहते! 

नमिता: हाँ ये तो है, चलो देखते हैं क्या होता है भविष्य में । 

फिर दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार किए और कपड़े पहनकर बाहर आए । सुधाकर ने नमिता को नौकर का नम्बर दे दिया और उसके सामने ही फ़ोन करके सब बता दिया। बाहर आकर उसने चाबी नमिता को दे दी और दरबान को भी बता दिया कि ये लोग कल ही आएँगे दो तीन दिनों के लिए। 

अब कार में भी वह नमिता के हाथ को सहलाता रहा और फिर नमिता को उसके घर के पास वाले चौक पर छोड़ कर वह चला गया। नमिता भी अपने घर को चल पड़ी। वह सोच रही थी कि राज को कल ही सब बताऊँगी और सर्प्राइज़ गिफ़्ट दूँगी। उसकी अपनी माँ से पहली चुदायी एक शानदार फ़ार्म हाउस में होगी और उसके लिए यादगार बन जाएगी। यह सोच कर घर में घुसते हुए वह मुस्कुरा उठी।



नमिता घर पहुँची तो सीधे अपने कमरे में गयी और वहाँ उसने अपने कपड़े उतारे और नहाकर ब्लाउस और पेटिकोट पहना। सुधाकर के फ़ार्म हाउस से वह बिना ब्रा और पैंटी के ही आयी थी पर साड़ी को अच्छे से लपेटकर चौक से घर तक वह आराम से आ गयी ।

अब वह शाम की चाय बना कर राज के कमरे में गयी और उसे बहुत ध्यान से पढ़ते देख कर वह ख़ुशी से भर उठी। 

नमिता ने उसे प्यार करते हुए कहा: बेटा खाना खा लिया था?

राज: हाँ माँ खा लिया? 

फिर वह उसकी कमर में हाथ डालकर उसके नरम कमर और पेट के स्पर्श का आनंद लेने लगा। और बोला: आप आज इतना व्यस्त कहाँ हो गईं ?

नमिता: वो वो ऑफ़िस में आज ज़्यादा ही काम आ गया था। असल में सुधाकर कल अमेरिका जा रहे हैं तो काफ़ी काम निपटाना था। 

राज ने अब उसके चूतरों को पेटिकोट के ऊपर से सहलाया और बोला: ओह तो फिर कल से आपकी छुट्टी?

नमिता: हाँ कुछ ऐसा ही समझ लो। 

राज ने अपनी पास खड़ी नमिता का पेटिकोट ऊपर किया और उसके नंगे चूतरों को सहलाते हुए बोला: आह माँ तो इसका मतलब तीन दिनों की आपकी भी मेरे साथ छुट्टी? वाह मज़ा आएगा फिर तो पूरे दिन चुदाई करेंगे। 

ये कहते हुए उसने उसके चूतरों के बीच से उसकी बुर में भी ऊँगली कर दी। 

नमिता : आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या करता है? हाथ निकाल। नालायक है एकदम। बदमाश कहीं का। 

ये कहकर उसको धक्का देकर अलग दूर खड़ी हुई और अपना पेटिकोट नीचे कर ली।

नमिता अब बिस्तर पर बैठ कर चाय पीने लगी।

नमिता: बेटा पूरा कोर्स पढ़ लिया? तय्यारी हो गई?

राज: हाँ माँ अभी दोहराना भी चालू कर दिया। 

नमिता: चलो आज अच्छी तरह से पढ़ लो और कल से तो तुम्हारी तीन दिन की छुट्टी हो ही जाएगी। 

राज: हाँ माँ चलो अब आप जाओ नहीं तो मैं फिर से मस्ती के मूड में आ जाऊँगा। ये देखो खड़ा होने लगा है ।वह अपने लौड़े को दिखा कर बोला।

नमिता उठी और उसको चूमते हुए बाहर चली गयी। 

किचन का काम ख़त्म करके वह TV देख रही थी। तभी सुषमा का फ़ोन आया और वह बोली: क्या हाल है ?

सुषमा: बस दीदी सब ठीक है। आप कैसी हैं? 

नमिता: मैं तो ठीक हूँ। तुम्हारी ठुकाई कैसी चल रही है? दोनों लगे हुए हैं क्या?

सुषमा: अरे राजन तो टूर पर है बस अभी राजू का ही राज है और वह तो बस चढ़ा ही रहता है मेरे ऊपर । 

नमिता: ओह, कितने राउंड कर लेता है?

सुषमा: वह तो पाँच बार झड़ता है और मुझे भी दो तीन बार तो झड़वा ही लेता है। और एक बार तो रोज़ गाँड़ भी मारता ही है। 

बाक़ी समय चूसवाते रहता है। 

नमिता: ह्म्म्म्म्म तो तेरे तो मज़े ही हैं। 

सुषमा: हाँ वो तो है पर आज आपकी याद आ रही थी। हम लोग भी तो काफ़ी समय से मज़ा नहीं किए। मुझे तो आपकी चपटी की बहुत याद आ रही है। 

नमिता : मुझे भी तेरी चपटी को चूमने का मन कर रहा है। 

सुषमा: कल तो जब राजू मुझे चोद रहा था तो उसके पापा दूसरे शहर में अपने होटेल के कमरे से स्काइप पर हमें देख रहे थे और वहाँ ख़ुद अपना हिला रहे थे। सच बड़ा उत्तेजक दृश्य था। 

नमिता: आह्ह्ह्ह्ह्ह उनको तो मज़ा ही आ गया होगा। वो तो हमेशा तुमको चुदवाते हुए देखना चाहता था। 

सुषमा: हाँ यही बात है। वह बहुत उत्तेजित हो गए थे। 

नमिता: चल मज़ा कर तू तो। 

सुषमा: तेरा कहाँ तक पहुँचा? राज ने चोद लिया क्या?

नमिता: नहीं रे कल उसका पेपर ख़त्म होगा तो फिर तीन दिन की छुट्टी होगी उसकी , तभी लगता है कि वह करेगा मेरे साथ। 

सुषमा: तो कल चुदेगी उससे ? चलो हैपी फ़किंग विध युअर सन।

गुड नाइट।

नमिता भी हँसते हुए बोली: गुड नाइट। 

फिर वह राज को खाने के लिए आवाज़ दी। 

जब दोनों खाना खा रहे थे तब राज बोला: माँ बताओ ना कल क्या क्या करेंगे? 

नमिता: क्या क्या का मतलब? कहना क्या चाहते हो?

राज: अरे कैसे चुदायी करेंगे? 

नमिता: ओह जैसे सारी दुनिया करती है। 

राज: माँ आप भी ना कुछ ठीक से बताती ही नहीं। 

नमिता: चल अब फ़ालतू की बातें छोड़ और पढ़ने बैठ। उलटा सीधा सोचेगा तो कल का पेपर गड़बड़ हो जाएगा। 

राज उठते हुए बोला: ठीक है माँ अब जाता हूँ पढ़ने। और हाँ आज रात को नहीं आऊँगा मेरा बहुत कोर्स दुहराना है। 

वह नमिता के पास आकर उसको प्यार किया और गुड नाइट बोलकर चला गया । नमिता ने भी उसे प्यार किया और गुड नाइट करके बिदा किया। 

रात को और कुछ नहीं हुआ। 

सुबह नमिता ने राज को चाय दी और पूछा: बेटा तय्यारी हो गयी? 

राज: हाँ माँ हो गयी। 

नमिता: चल फिर फ़्रेश हो जाओ। मैं नाश्ता बनाती हूँ। 

नमिता ने उसे प्यार किया और किचन में आ गयी। 

बाद में नाश्ता कराके राज को उसने दहीं शक्कर दे कर बिदा किया। 

राज ने जाते हुए माँ से प्यार किया और अचानक उसकी पेटिकोट के ऊपर से उसकी बुर को दबा दिया और बोला: माँ आज ये तो ले के ही रहूँगा। आज कोई बहाना नहीं सुनूँगा। 

नमिता: अच्छा बेटा जो चाहे कर लेना। बस अभी पूरे ध्यान से पेपर देना। चल अब इसे छोड़ । 

नमिता ने उसका हाथ अपनी बुर् से हटाते हुए कहा: अच्छे से पेपर देना। जा ऑल दी बेस्ट। 

राज उसका मुँह चूम कर चला गया। 

अब नमिता नहाने चली गयी और फिर तय्यार होकर बाज़ार गयी और कुछ खाने पीने का सामान ख़रीदा और फिर घर आकर एक छोटा सा सूटकेस निकाली और अपने और राज के दो जोड़ी कपड़े और अंडर गर्मेंट्स वग़ैरह रखा । वैसे फ़ार्म हाउस में तो सब मिल जाएगा पर वह कुछ तय्यारियाँ कर ही लेना चाहती थी। 

जब पूरी तय्यारी हो गयी तो वह थोड़ा आराम करने लगी। 

अब नमिता ने सोचा कि आज ऑफ़िस तो जाना नहीं है क्या किया जाए? 

तभी उसको सुषमा की याद आयी , राजन तो टूर पर था और शायद वह अकेली ही होगी ,राजू तो स्कूल में होगा। 

उसने सुषमा को फ़ोन लगाया। 

सुषमा: हेलो क्या हाल है?

नमिता: ठीक हूँ बस साली चपटी खुजा रही है। 

सुषमा: तो आ जाइए ना अभी उसकी खुजली मिटा देती हूँ। 

नमिता: सच? अकेली है क्या?

सुषमा: बिलकुल अकेली हूँ। 

नमिता : अभी आयी। 

नमिता ने डिल्डो निकाला और पर्स में रखा और मन ही मन मुस्करायी कि आज उसको इस नक़ली लौड़े का मज़ा भी देगी। 

नमिता सुषमा के घर मैं घुसी और सुषमा अभी बस एक तौलिए में ही थी, वह अभी नहा के आयी थी। 

नमिता: अभी नहायी हो? 

सुषमा: हाँ नहा कर बाहर आयी तो आपका फ़ोन आया तो सोचा कि कपड़े क्यों पहनूँ। उसने आँख मारते हुए कहा ।

नमिता मुस्कुराते हुए उसका तौलिया खिंची और उसका नंगा और थोड़ा गीला सा गोरा चमकता बदन देख कर मस्ती से बोली: यार तू तो रेग्युलर चुदायी से अब मस्त भरने लगी है। तेरे मम्मे भी तेरे चोदू बेटे ने चूस चूस के और बड़े कर दिए है । 

सुषमा: हा हा जल्दी ही आपसे भी बड़े हो जाएँगे। 

अब नमिता ने अपनी बाँह फैलायी और सुषमा उसकी बाहों में आ गयी और उनके होंठ एक दूसरे में जैसे समा गए। पूरे ज़ोर से वो एक दूसरे के होंठ चूस रहीं थीं। उनकी जीभ भी एक दूसरे के मुँह में घुसी जा रही थीं। दोनों के हाथ अब एक दूसरे की चूचियों पर आ गए। 

सुषमा: आऽऽहहह कपड़े खोलिए ना दीदी प्लीज़। 

नमिता हँसते हुए अपने कपड़े निकाल कर पूरी नंगी हो गयी। 

अब नमिता उसको बिस्तर पर गिरा दी और सुषमा पर चढ़ गई और फिर से चुम्बन की लम्बी प्रक्रिया चालू हुई। चूचियाँ दबाते हुए सुषमा ने अपने मुँह को नीचे करके नमिता की एक चूचि अपने मुँह में भर ली और चूसने लगी। उसका दूसरा हाथ नमिता की पीठ पर घूम रहा था। 

नमिता अब सुषमा की दोनों चूचियाँ दबाये जा रही थी। वह अपनी बुर सुषमा की बुर से रगड़े जा रही थी। सुषमा ने अब उसके चूतरों को दबाना चालू किया। उसकी ऊँगली उसके दरार में जाकर उसकी गाँड़ के छेद को सहला रही थी। फिर उसकी उँगलियाँ नीचे जाकर उसकी बुर का गीलापन का अहसास भी कर रही थी। नमिता की आऽऽऽहहह निकल गयी। अब वह नीचे आकर उसकी चूचि चूसने लगी। फिर नीचे होकर उसके पेट और कमर को चूमंते हुए उसकी जाँघों को चूमने लगी। फिर अपनी जीभ से उसकी जाँघ और बुर के जोड़ को चाटा और सुषमा की आऽऽह्ह्ह्ह्ह दीदीइइइइइ निकल गयी। 

नमिता अब अपनी जीभ से उसकी बुर के बाहरी फाँकों को चाटने लगी।सुषमा आऽऽऽहें भरने लगी। अब नमिता उसकी फाँकों को फैलायी और अंदर के हिस्से में जीभ डाल कर उसको चाटने लगी। जैसे ही उसकी जीभ उसके clit से टकराती सुषमा की सिसकी निकल जाती। अब सुषमा ने अपनी टाँगें ऐसे उठा ली और फैला भी ली,मानो चुदवा रही हो। नमिता अब मज़े से उसकी बुर में दो ऊँगली डाल दी और अपनी जीभ से उसके clit के आसपास के हिस्से को कुरेदने लगी। 

अब वह आऽऽऽऽऽऽऽह करने लगी । 

अचानक नमिता उठी और अपने पर्स से उसने ८ इंचि डिल्डो निकाला और उसको मुँह में लेकर थूक से गीला की और उसके स्विच को चालू की। अब ह्म्म्म्म्म्म की आवाज़ के साथ वह हिलने लगा। सुषमा आँखें फाड़े यह देख रही थी , वह बोली : दीदी इतना बड़ा क्या अंदर डालोगी? मेरी फट जाएगी। 

नमिता: हा हा क्या राजन का और राजू का इतना बड़ा नहीं है?

सुषमा: नहीं दीदी राजन का तो ६ इंच का है और राजू का ७ इंच का । पर ये तो बड़ा मोटा और लंबा है।

नमिता हँसते हुए बोली: राज का इतना ही बड़ा है। 

सुषमा: सच? इतना बड़ा? आपको दुखेगा नहीं अंदर लेने में ? 

नमिता: वह तो आज पता चलेगा जब अंदर लूँगी। 

सुषमा: आऽऽह दीदी आज आप भी अपने बेटे से चुदोगी? 

जानती हो मैं बहुत ख़ुश हूँ कि मैं अपने बेटे से चुदवा रही हूँ। हम दोनों ही बहुत मज़े से मस्ती करते है । मेरे जीवन में इतनी ख़ुशी पहले कभी नहीं आयी जितना अब अपने बेटे से चुदवाने के बाद आयी है। 

नमिता: आह चल अब इसे अंदर ले। 

ये कहते हुए उसने डिल्डो को उसकी बुर के मुँह पर रखा और धीरे से उसका सुपाड़ा अंदर करके वाइब्रेटर चालू कर दी। 

सुषमा आऽऽहहह दीदीइइइइइइइइ चिल्लायी। 

अब नमिता ने आधा लौड़ा उसके बुर के अंदर ठेल दिया और सुषमा हाय्य्य्य्य्य्य्य्य मरीइइइइइइइइ कर उठी। 

नामित अब धीरे से पूरा लौड़ा अंदर कर दी और सुषमा अब अपनी कमर उछालके चुदायी का मज़ा लेने लगी। 

नमिता ने अपनी एक ऊँगली में थूक लगाया और उसकी गाँड़ में डाल दिया और अब सुषमा डबल चुदायी से मस्त हो कर आऽऽऽहहहह चोदोओओओओओओओओ आऽऽऽहहह फाड़ दोओओओओओओओ चिल्लाने लगी। नमिता ने झुक कर उसकी चूचियाँ चूसीं और सुषमा बहुत उत्तेजित होकर आऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह हाय्य्य्य्य्य्य्य करके झड़ने लगी। 

फिर नमिता ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। 

सुषमा भी लस्त होकर पड़ी थी। 

अब नमिता उसके पास लेट गयी और उसके बदन में हाथ फेरते हुए बोली: कैसा लगा मेरा लौड़ा ?

सुषमा: बहुत बढ़िया। कहाँ से मिला आपको?

नमिता: मेरे पति लाए थे मेरे लिए विदेश से । कहते थे मेरा तो इतना बड़ा नहीं है पर अगर तुम्हें बड़े लौड़े से चुदवाना हो तो ये तुम्हें मज़ा देगा। वो कई बार ख़ुद भी मुझे इससे मज़ा देते थे। 

सुषमा: ओह कभी तुम्हें ये तो नहीं कहा कि वो तुमको किसी और से चुदता देखना चाहते थे? जैसे मेरे पति चाहते थे और अब मुझे राजू से चुदते देख कर मज़े लेते हैं।

नमिता उसकी चुचि चूमते हुए बोली: नहीं ऐसा तो कभी नहीं कहा। अच्छा और बताओ तुम तीनों का कैसा चल रहा है। 

सुषमा: मुझे तुमको एक बात बतानी है। जैसे हम दोनों बाई सेक्शूअल है ना ,वैसे ही आजकल राजन और राजू भी बाइसेक्शूअल हो गए हैं।

नमिता हैरानी से : वो कैसे? 

पिछले दिनों मैं जब शाम को बाज़ार गयी थी तो थोड़ी देर हो गयी थी।हम सबके पास घर की एक एक चाबी है। जब मैं आयी 

तो इनको मेरे आने का पता नहीं चला। मैंने देखा कि ये दोनों अपने लोअर नीचे किए हुए थे और एक दूसरे का लौड़ा हिला रहे थे। मैं चुपचाप देखती रही। फिर राजन झुके और राजू का लौड़ा चूसने लगे। मैं हैरान रह गयी। मैंने पूछा कि क्या कर रहे हो आप दोनों?

दोनों थोड़ा सा हड़बड़ाए जैसे चोरी पकड़ी गयी हो पर बाद में बोले कि मेरा इंतज़ार कर रहे थे और राजन ने मुझे कहा कि आओ मेरा लौड़ा चूसो, मैं जब चूसने लगी तो वह ख़ुद राजू का चूसने लगे। राजू भी मस्ती से मेरी चूचि दबाते हुए मज़ा ले रहा था। 

नमिता: ओह तो अब पूरा परिवार सब तरह का मज़ा ले रहा है।

नमिता : अच्छा ये बताओ कि तुम्हारी उनके साथ की दिनचर्या क्या है? 

सुषमा भी उसकी चूचि सहलाते हुए बोली: तुम्हें तो पता ही है कि हम तीनों एक साथ सोते हैं और वो भी पूरे नंगे। सुबह वह पहले उठता है और हमारे लिए चाय बनाता है। वह पहले अपने पापा को उठाता है और चाय देता है। मैंने देखा है कि राजन चाय पीने के पहले उसका लौड़ा चूमता और चूसता है। मैं सोने का नाटक करती हूँ। फिर वह मुझे उठाता है और मैं भी उसका थूक लगा लौड़ा चूसती हूँ। फिर चाय पीने के बाद हम फ़्रेश होते हैं। उस समय मुझे दोनों का लौड़ा खड़ा ही दिखता है। अब वो मेरे ऊपर चढ़ाई करते हैं। एक चोदता हैं दूसरा चूस्वाता है।फिर दूसरा भी चोदता है। इस तरह सुबह ही एक राउंड हो जाता है। 

नमिता: ओह शुरुआत ही दिन की चुदायी से ही होती है।फिर उसके बाद? उसने सुषमा के चूतरों को दबाते हुए कहा। 

सुषमा: राजन तो ऑफ़िस चला जाता है।राजू बाद में जाता है। 

नाश्ता करने के बाद एक बार फिर मुझसे चिपट कर प्यार करता है और या तो मुझे चोदता है और अगर मेरा मूड ना हो तो अपना लौड़ा चूसवाता है। वह दोपहर को आता है और आते ही मुझे चोदता है, दो दिनों से तो दोपहर को वह गाँड़ ही मारता है। 

फिर शाम को राजू फिर या तो चूसवाता है या चोदता है । रात को सोने के पहले वह और राजन मेरी ज़बरदस्त चुदायी करते हैं । वैसे आजकल वह टूर पर हैं तो ये अकेला ही लगा रहता है ,जो कि उसका पापा भी स्काइप पर देखते है, जैसे कि मैंने कल बताया था। इस तरह कई बार हो जाता है हम लोगों का ।

नमिता हँसते हुए बोली: यार तेरे तो मज़े हैं। दो दो लौड़े खा रही है। तेरी बातों ने मुझे गरम कर दिया है आ मुझे भी ठंडा कर दे। 

सुषमा हँसते हुए उठी और उसकी बुर पर मुँह डालकर चूमने और चूसने लगी ।नमिता भी आऽऽहहह करने लगी। थोड़ी देर बाद सुषमा ने उसकी बुर में तीन उँगलियाँ डाली और उसके clit को जीभ से रगड़ते हुए , उँगलियाँ अंदर बाहर करने लगी। नमिता भी चूतरों को उछालकर आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह करके जल्द ही झड़ गयी।

थोड़ी देर तक एक दूसरे को प्यार करने के बाद वो अलग हुई और बाथरूम में एक साथ गयीं। सुषमा कोमोड पर बैठ कर मूती और फिर नमिता भी मूति । अब सुषमा ने नीचे झुक कर नमिता की बुर और गाँड़ को को साबुन से धोया और फिर हैंड शॉवर से धोकर साफ़ किया। फिर नमिता ने उसकी बुर और गाँड़ साफ़ की। 

सुषमा: जानती हो राजू को कई बार मेरे साथ नहाना भी होता है। वह बहुत उत्तेजित हो जाता है और यहीं इस दीवाल के सहारे मैं आगे को झुक जाती हूँ और वो पीछे से मेरी चुदायी करता है।

नमिता हँसने लगी और बोली: तुम हो ही सेक्सी वह भी क्या करे? 

फिर दोनों बाहर आए और उन्होंने कपड़े पहने और अब नमिता ने डिडलो अपने पर्स में रखा और बोली: चलती हूँ , बहुत मज़ा आया आज तेरे साथ।

अब दोनों एक बार फिर से चिपक गयीं और चुम्बन की लम्बी प्रक्रिया के बाद वह दोनों अलग हुईं और नमिता अपने घर चली गयी। 

घर आकर नमिता ने अपने कपड़े बदले और बाहर जाने के लिए तय्यार हुई। उसने हल्का सा मेक अप भी किया । वह आज राज को बहुत सेक्सी दिखना चाहती थी। उसने स्लीवलेस ब्लाउस पहना। अंदर ब्रा और पैंटी भी बड़ी सेक्सी थी। फिर उसने एक सुंदर सी साड़ी पहनी। अब शीशे में अपने आप को देखा और सोची कि हाँ अभिसारिका तय्यार है अपने साजन से मिलन के लिए। वह यह सोच कर मुस्कुरा उठी। 

तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी। वो जानती थी कि राज घर के अंदर आ गया है। वह कमरे से बाहर निकली ---


राज अन्दर आया और नमिता को साड़ी में एकदम तय्यार देखकर हैरानी से बोला: माँ कहाँ जा रही हो? बिलकुल तय्यार लग रही हो। 

नमिता: अरे सब बता दूँगी। पहले बता कि तेरा पेपर कैसा हुआ? 

राज: माँ आज तो २४/२५ मिले हैं। इतना अच्छा तो मैंने भी नहीं सोचा था। 

नमिता ख़ुश हो कर उसको अपने गले से लगा ली और बोली: शाबाश बेटा, सच आज तूने मुझे ख़ुश कर दिया। 

राज भी नमिता से लिपट कर बोला: माँ ये नहीं पूछोगी कि क्लास में कौन सा रैंक आया? 

नमिता: ज़रूर ही पहले तीन में आया होगा?

राज ने उसे चूमते बोला: माँ,मैं पहले नम्बर पर आया हूँ। मैंने क्लास में टॉप किया है। 

नमिता ख़ुशी से उसको चूमने लगी और बोली: सच !! आज मैं कितनी ख़ुश हूँ कि मेरा बेटा मेरे सपनो को पूरा कर रहा है। 

ये कहते हुए उसकी आँखों से ख़ुशी के आँसू निकलने लगे। 

राज भी बहुत अच्छा महसूस कर रहा था कि वह नमिता को इतनी ख़ुशी दे रहा था। 

थोड़ी देर चिपके रहने के बाद राज उससे अलग हुआ और बोला: माँ आपने बताया नहीं कि आप तय्यार होकर कहाँ जा रही हैं ?

और आप रोज की तरह ब्लाउस और पेटिकोट में क्यों नहीं हैं? आज तो मैंने अपना इनाम लेना है आपसे। मुझे तो आज आपको नंगी करके चोदना है। 

नमिता हँसकर बोली: सिर्फ़ मैं नहीं,हम दोनों ही बाहर जा रहे हैं। और जहाँ तक तेरे ईनाम का सवाल है वो तो तुझे मिलना ही है।मैंने तो कहा ही था कि अगर तू टॉप तीन में आ आएगा तो मैं तुझे अपने आप को सौंप दूँगी। 

राज: ओह पर हम जा कहाँ रहे हैं? ये तो बताओ। 

नमिता: बता दूँगी, थोड़ा सर्प्राइज़ भी रहने दे ना। चल अब खाना खा लेते हैं। 

खाते हुए नमिता ने उसके दोस्तों का रिज़ल्ट भी पूछा तो वह बोला: माँ प्रतीक तो बस पास हो गया है। और श्रेय भी फ़र्स्ट डिविज़न में आया है। 

खाना खाने के बाद नमिता ने उसे तय्यार होने को कहा और सूट्केस खोल कर दिखायी और बोली: देख तेरे सब कपड़े रख लिए हैं तीन दिनों के लिए। 

राज फिर से बोला: माँ बताओ ना प्लीज़ कहाँ जा रहे हैं?

नमिता रहस्यमय हँसी के साथ बोली: बस अभी पता चल जाएगा। चल सब खिड़की बंद कर ले, अब निकलना है। 

राज भी तय्यार हुआ और एक जींस और टी शर्ट डालकर सूट्केस उठाकर बाहर आया। 

नमिता ने सुधाकर के sms से उसके ड्राइवर का नम्बर लिया और फ़ोन मिलाकर बोली: चौक पर आ जाओ । 

असल में आज सुबह ही सुधाकर का sms आया था कि क्योंकि वह तो बाहर जा रहा है इसलिए नमिता उसकी कार और ड्राइवर का इस्तेमाल के सकती है। उसी ने ड्राइवर का नम्बर भी दिया था। 

नमिता और राज जब चौक पर पहुँचे तो कार खड़ी थी और दोनों कार में बैठ गए। नमिता ने उसे पहले ही बता रखा था कि फ़ार्म हाउस जाना है , सो वह चल पड़ा। 

राज के लिए यह सब बड़ी बात थी। उसने देखा कि कार शहर से बाहर निकल गयी है तो वह प्रश्न भरी निगाह से नमिता को देखा तो वह मुस्करायी । थोड़ी देर बाद फ़ार्म हाउस आ गया वहाँ सुधाकर का नाम पढ़ कर वह बोला: ओह तो ये अंकल का फ़ार्म हाउस है, अंकल का परिवार भी होगा क्या ? 

नमिता: नहीं मनीष और उसके पापा बाहर गए हैं। और उनकी बेटी अभी नाना के पास रहती है। 

राज: ओह तो अभी यहाँ और कौन है?

नमिता मुस्करायी और फुसफुसा कर बोली: बस हम दोनों। और उसने राज की जाँघ दबा दी। राज के अंदर एक उत्तेजना की लहर दौड़ गयी। 

दरबान ने मेन गेट खोला और कार अंदर मकान के पास जा कर रुक गयी। वो दोनों उतरे और ड्राइवर ने सूटकेस निकाला। नमिता बोली: आपको अगर ज़रूरत हुई तो मैं फ़ोन कल करूँगी । आज और ज़रूरत नहीं है। 

ड्राइवर के जाते ही नमिता ने घर का दरवाज़ा चाबी से खोला, और दोनों अंदर आए। राज की तो आँखें ही फट गयी। क्या शानदार मकान था , बड़ा सा हाल और तीन बेडरूम बड़े बड़े और बहुत ही उम्दा क़िस्म की सजावट!!! बेडरूम के गद्दे में उछलकर वह बोला: माँ देखो कितना मस्त कुशन है। 

नमिता मुस्करायी और सोची कि कल इसी कुशन पर ही सुधाकर ने उसको बुरी तरह से चोदा था और आज उसका बेटा उसे चोदेगा। उसकी बुर थोड़ी सी गीली होने लगी। 

फिर नमिता बोली: आ बाहर चल और देख क्या बढ़िया पूल है। 

राज नमिता के साथ पीछे गया और कवर्ड पूल देख कर दंग रह गया। 

नमिता: कैसा लगा?

राज: माँ यह तो बहुत शानदार है। 

नमिता: चल नहाएगा पूल में ? 

राज: क्यों नहीं , बहुत मज़ा आएगा।

नमिता : चल फिर कपड़े उतार। 

राज: अपनी टी शर्ट निकालते हुए बोला: आप भी नहाओगी ना? 

नमिता : हाँ क्यों नहीं। ऐसा कहते हुए उसने अपनी साड़ी खोल दी। 

राज की पैंट भी उतर चुकी थी और चड्डी में उसका शांत लौड़ा भी काफ़ी बड़ा लग रहा था। 

नमिता भी अब ब्लाउस उतार चुकी थी और फिर उसने पेटिकोट भी उतार दिया और राज का लौड़ा उसको ब्रा और पैंटी में देख कर पूरी तरह से तन गया था। 

नमिता: चल अब चड्डी भी उतार दे , यहाँ हम दोनों के अलावा कोई नहीं है। 

राज थोड़ा चौका। माँ चड्डी भी उतार दूँ? कोई आ गया तो? 

नमिता: तूने देखा नहीं मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया है और यहाँ कौन आएगा? मकान वाले तो विदेश में हैं। 

ये कहते हुए नमिता ने अपनी ब्रा उतार दी और अब राज ने भी अपनी चड्डी उतार कर अपने लौड़े को सहलाया। अब नमिता ने भी अपनी पैंटी उतार दी और पूरी नंगी होकर राज को अपना हुस्न दिखाने लगी। फिर वह झुक कर पानी को छू कर बोली: मस्त ठंडा है , बहुत मज़ा आयेगा ।

राज ने नमिता की झुकी हुई अवस्था में पीछे से उसके बड़े बड़े गोरे गोल मांसल चूतर देखे और उसके नीचे उसकी बुर का भी दर्शन किया और उत्तेजनावश नमिता को उसी अवस्था में पीछे से ही जकड़ लिया।झुकी हुई नमिता को अपनी गाँड़ में राज के खड़े लौड़े अहसास हुआ, और वह सिहर उठी।

वह खड़ी हुई और राज उसकी छातियाँ पकड़कर उसके गाँड़ पर अपना लौड़ा लगाकर मस्ती से उसे वहाँ रगड़ने लगा।

नमिता की बुर भी गीली हो चुकी थी और वह बोली: चलो पानी में चलते हैं। गाँव में जो तैरना सीखा था याद है या भूल गए?

राज: हाँ माँ याद है ।

ये कहकर वह पानी में उतरा और नमिता भी उसके पीछे पीछे पानी में उतरी। अब वो दोनों तैरने लगे। 

फिर कमर तक के पानी में आकर दोनों आराम करने लगे। राज नमिता को बाहों में लेकर उसके होंठ चूसने लगा। उसका खड़ा लौड़ा नमिता के पेट में ठोकर मार रहा था। अब राज के हाथ उसकी कमर को सहलाते हुए नीचे जाकर उसके विशाल चूतरों को सहलाने लगा। नमिता ने भी हाथ बढ़ा कर उसके लौड़े को पकड़ लिया और सहलाने लगी। 

अब राज झुका और उसकी चूचियाँ चूसने और दबाने लगा। 

नमिता आऽऽहहह कर उठी ।अब नमिता को याद आया कि कल ऐसे ही वह सुधाकर से यहाँ मज़ा ली थी और आज उसकी जगह उसका अपना बेटा है। अब वह राज के बदन से लिपटी हुई थी। राज ने अपना हाथ उसकी बुर में रखा और उसे सहला कर वह बोला: माँ आपकी बुर कितनी नरम है। 

नमिता: आऽऽहहह बेटाआऽऽऽऽ । 

राज: माँ अच्छा लग रहा है ना? वह उसकी गीली बुर में दो ऊँगली डाल दिया। 

नमिता: आऽऽहहह हाँ बेटा बहुत अच्छा लग रहा है। 

राज: माँ चलो ना बाहर चलते हैं । 

नमिता को याद आया कि कल उसने सुधाकर का लौड़ा कैसे चूसा था । वह बोली: चल यहाँ दीवाल पर बैठ और मैं पानी में ही रहकर तुझे मज़ा देती हूँ। 

राज उछलकर पूल के बाहर आकर दीवाल पर बैठ गया और नमिता पूल में ही रहते हुए उसकी टांगों के बीच आ गयी और उसके पेट को चुमी और फिर नीचे आकर उसका लौड़ा चूमने लगी। अब वह जीभ से पूरे लौड़े की लम्बाई में चाटने लगी और फिर उसके बॉल्ज़ भी एक एक करके चूसी। आख़िर में वह उसका पूरा लौड़ा चूसने लगी। फिर वह उसके सुपाडे पर जीभ फिराते हुए उसके पेशाब के छेद को जीभ से रगड़ने लगी। 

राज मज़े से भरकर ह्म्म्म्म्म्म्म्म कहने लगा। वह नमिता की छातियाँ दबाने लगा। नमिता भी उसका लौड़ा चूसते हुए उसके बॉल्ज़ को पंजे मेंलेकर सहला रही थी । 

अचानक राज बोला: आह्ह्ह्ह्ह माँ अब रुको। और मैं नीचे आता हूँ। अब वह पानी में कूद गया और नमिता को बोला: अब आप बाहर जाओ और यहाँ बैठो । उसने नमिता को गोद में उठाया और उठाकर उसे दीवाल पर बैठा दिया और ख़ुद पानी में खड़ा होकर उसकी छातियाँ दबाने और चूसने लगा। 

फिर उसने नमिता को अपनी जाँघें फैलाने को कहा और उसकी टाँगें उठाकर उसकी बुर में अपना मुँह डाल दिया और उसकी फाँकों को चाटने लगा। 

नमिता उइइइइइइइ कर उठी।अब उसने अपनी बाहँ पीछे करके अपनी जाँघों को उठाकर राज के कंधों पर रख दिया और वह मस्ती से उसकी बुर चूसे जा रहा था। नमिता भी अपनी कमर उछालके उसके मुँह से रगड़े जा रही थी।

नमिता: आऽऽऽऽह बस कर नाआऽऽऽऽऽ नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी आऽऽह्ह्ह्ह्ह । 

राज अपना मुँह हटा कर बोला: चलो माँ अब अंदर चलते हैं, मुझे अब आपको चोदना है। 

नमिता जब उठी तो उत्तेजना के मारे उसके पैर काँप रहे थे। राज ने तौलिए से उसका बदन पोंछा और फिर अपने बदन को भी पोंछ कर सुखाया और फिर नमिता को अपनी गोद में उठाकर उसके होंठों को चूसते हुए बेडरूम की ओर ले चला। 

वहाँ उसको बिस्तर पर लिटा कर वह उसके ऊपर आ गया और उसकी छातियाँ सहलाते हुए उसके होंठ चूसता रहा। फिर वह उठ कर उसकी टाँग़ों के बीच आ गया और नमिता ने अपने घुटने मोड़ कर जाँघों को फैला दिया , मानो कह रही हो आओ डालो मेरे अंदर अपना मस्त लौड़ा।राज का लौड़ा इतना कड़ा हो गया था कि उसे दुखने लगा था। आज उसकी कई दिनों की तमन्ना जो पूरी होने जा रही थी। वह मस्ती में आकर अपना सुपाड़ा उसकी बुर पर रगड़ने लगा। नमिता आऽऽहहह कर उठी। 

अब राज बोला: माँ आप ख़ुद ही मेरे लौड़ा अपनी बुर पर रखो ना। आज पहली बार मैं आपको चोदूंग़ा । 

नमिता ने मुस्कुरा कर अपने एक हाथ से अपनी बुर फैलायी और दूसरे हाथ से उसका लौड़ा पकड़ा और उसको अपने छेद पर सेट किया, और बोली: ले बेटा , धक्का मार और अंदर डाल। 

राज शरारत से मुस्कुराया और बोला: माँ क्या डालूँ? और कहाँ डालूँ?


नमिता भी प्यार से मुस्कुराती हुई बोली: आऽऽह बदमाश , अपना लौड़ा डाल अपनी माँ की बुर में । आह्ह्ह्ह्ह

राज ने शॉट लगाया और नमिता हाय्य्य्य्य्य्य धीरेएएएएएए से बेटाआऽऽऽऽऽ। तेरा बहुत बड़ा है।

राज: आऽऽह माँ आपकी बुर कितनी टाइट है, आऽऽहहह मज़ा आ गया। 

राज ने फिर से धक्का लगाया और इस बार पूरा लौड़ा उसने जड़ तक अंदर कर दिया। 

नमिता की सिसकारियाँ गूँजने लगी।

राज: आऽऽहहह माँ बहुत मज़ा आ रहा है आपको चोदने में आऽऽह क्या मक्खन सी बुर है आऽऽहहह। 

अब राज उसके ऊपर आकर उसकी चूचियाँ पीते हुए धक्के मारने लगा। नमिता भी गरम होकर नीचे से अपनी कमर उछाल कर चुदवाने लगी। 

नमिता: आऽऽऽह बेटा तू बहुत अच्छा चोद रहाआऽऽऽऽ है। हाय्य्य्य्य मेरी प्यास ऐसे ही बुझाते रहना आऽऽऽऽऽहहह।

राज के पोवेरफ़ुल धक्कों से नमिता बहुत मस्ती से भर गयी और उसकी बुर से फ़च फ़च की आवाज़ आने लगी। पलंग भी चूँ चूँ कर उठा। अचानक नमिता को लगा कि वह अब और नहीं रुक सकती तो वह राज के चूतरों को अपनी तरफ़ दबाने लगी जैसे उसके आँड भी अंदर घुसा लेगी। वह चिल्लायी: आऽऽऽऽहहह चोद हाऽऽऽऽयहय फाड़ दे मेरीइइइइइइइइइ बुर । मरीइइइइइइइइइइ मैं तो ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म उइइइइइइइइ मैं गयीइइइइइइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ। 

राज भी उसकी आवाज़ों से गरम हो गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाकर झड़ने लगा। उसने अपना वीर्य उस बुर के अंदर छोड़ा जहाँ से वह जन्म लिया था। 

फिर वह हाँफते हुए उसकी बग़ल में लेट गया। 

अब नमिता भी उसकी तरफ़ करवट लेकर उससे चिपक गयी । 

राज उसकी कमर सहला रहा था और उसकी चूचि चूस रहा था। नमिता ने भी हाथ नीचे लेज़ाकर उसके लौड़े को सहलाया और देखा कि वह अभी भी आधा खड़ा ही है। उसके हाथ में दोनों का कामरस लगा जिसे वह अपने मुँह में लेकर चाट ली। राज अपनी माँ की इस हरकत से मस्ती से भर गया। अब वह नमिता के बड़े चूतरों को दबाने लगा। फिर उसकी उँगलियाँ उसके गाँड़ के छेद से खिलवाड़ करने लगी। वह बोला: माँ आपकी गाँड़ भी मारनी है। आह्ह्ह्ह्ह कितनी मखमली है । ये कहते हुए उसने एक ऊँगली डाल दी उसकी गाँड़ में। 

नमिता: आह मार लेना अब तो मैं पूरी तेरी हूँ ना। जो करना है मेरे साथ कर ले।रात को सोते समय आख़री चुदाई गाँड़ मारकर ही करना। तेरा बहुत मोटा है ना इसलिए दुखेगा और एक बार सो जाऊँगी तो सुबह तक ठीक हो जाएगा ।

नमिता की चूचि पीते हुआ उसका फिर से खड़ा हो गया और वह बोला: माँ मेरा तो फिर खड़ा हो गया है।

नमिता उसका लौड़ा पकड़ कर बोली: तेरी उम्र में खड़ा ज़्यादा रहता है नरम कम ही रहता है। 

राज: माँ एक बार और चोदने का मन कर रहा है, प्लीज़।

नमिता: चल ठीक है लेट अब मैं चढ़ती हूँ तेरे ऊपर। 

ये कहते हुए वह राज के ऊपर आ गयी और उसके लौड़े को हाथ में लेकर सहलायी और फिर उसके सुपाडे पर थूक गिरायी और उसको वहाँ मली और फिर अपनी कमर उठाकर उसके मूसल को अपनी बुर के छेद में रखी और नीचे होने लगी जिससे उसका लौड़ा उसकी बुर के अंदर घुसता चला गया। जब वह पूरा घुस गया तब वह अपनी कमर हिलाकर उसकी पूरी लम्बाई और मोटायी का अहसास अपने बुर में करने लगी। 

राज भी उसकी झूलती हुई चूचियों को दबाकर मस्ती से भर गया।

अब नमिता उसके लौड़े पर ऊपर नीचे होकर चुदायी का भरपूर मज़ा ले रही थी। 

राज: आऽऽऽहहह माँ क्या चोद रही हो? आह्ह्ह्ह्ह्ह मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है। मस्त बुर है आपकी, क्या पकड़ लिया है उसने मेरे लौड़े को । आऽऽऽहहहह क्या टाइट बुर है। ह्म्म्म्म्म्म कहकर वह भी नीचे कमर उछालने लगा। 

अब नमिता आगे को झुक कर अपनी एक चूचि उसके मुँह में दे दी और ज़ोर ज़ोर से चूतरों को उठाकर उसकी जाँघ में पटकने लगी। राज का मस्ताना लौड़ा बुर के अंदर आग सी लगा रहा था और वह भी हाय्य्य्य्य्य्य्य किए ला रही थी। 

तभी राज बोला: माँ मैं ऊपर आता हूँ और वह नमिता को लिपटाये हुए ही पलट गया और ऊपर आ कर धुआँधार चुदायी चालू किया। नमिता भी नीचे से चूतरों को उचका कर उसका पूरा साथ देने लगी। नमिता ने अपनी दोनों टाँगे राज के कंधों पर रख दी और वह बैठकर उसकी बुर फाड़ने लगा।

अब फिर से पलंग हिलने लगा और दोनों की चीख़ें और मस्ती भरी आवाज़ें कमरे में गूँजने लगी। थोड़ी देर बाद आह्ह्ह्ह्ह्ह हाय्य्य्य्य्य करके दोनों झड़ गए। 

अब नमिता बिलकुल ही थक गयी थी और बोली: मुझे बाथरूम जाना है पर मैं उठ भी नहीं पा रही हूँ। 

राज ने उसको गोदी में उठाया और उसको बाथरूम में ले गया और कामोड पर बिठा दिया और नमिता सी सी की आवाज़ के साथ मूतने लगी। राज बोला: माँ थोड़ी सी खड़ी हो ना आपकी सुसु देखना चाहता हूँ। 

नमिता बोली: चल हट। इसने क्या देखना है?

राज : माँ थोड़ा सा खड़ी हो ना, प्लीज़। 

नमिता आधी खड़ी हुई जिससे उसे बुर से निकलती हुई धार दिख जाए। राज ने अपना हाथ उस धार पर रख दिया और गरम मूत के अहसास से भर गया और उसने उसकी बुर को उसकी मूत से रगड़ दिया। अब नमिता उठी और वह उसके सामने मूतने लगा और नमिता का हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रख दिया। नमिता उसको सूसू कराने लगी। 

वह बोली: बेटा जब तू छोटा था तो ऐसे ही तुझे सूसू कराती थी। अब फ़र्क़ ये हो गया है कि तेरा ये नूनी से लौड़ा बन गया है। फिर वह उसके लौड़े को हिलाकर उसकी आख़िरी बूँद भी गिरायी और उसके लौड़े को पकड़कर वह हैंड शॉवर से उसके लौड़े और बॉल्ज़ के आसपास की जगह को अच्छे से साफ़ की ।

अब राज ने भी नमिता की बुर और गाँड़ साफ़ की और नमिता राज के साथ शॉवर लेकर तौलिए से राज का बदन पोंछी और राज भी नमिता का बदन पोछा । नमिता ने आलमारी से सुधाकर की बीवी का एक गाउन निकाला और पहन ली। यह एक ऐसा गाउन था जिसमें बस दो रस्सियाँ थीं सामने से बाँधने की। राज भी अपना लोअर पहना। 

अब दोनों सोफ़े पर बैठे और नमिता फ़्रीज़ से कुछ खाने का समान निकाली और कोल्ड ड्रिंक भी निकाली और दोनों बातें करते हुए खाने लगे। 

राज उसके गाउन से दिख रही नंगी जाँघ सहलाते हुए बोला: माँ 

आज आपको चोद कर बहुत मज़ा आया। आपको कैसा लगा?

नमिता: उसके गाल चूमते हुए बोली: बेटा मैं भी बहुत मज़ा ली। तू तो चुदायी का एक्स्पर्ट हो गया है। 

राज: माँ आप मुझसे हमेशा ऐसे ही चुदवाओगी ना?

नमिता: हाँ बेटा मेरा और है ही कौन तेरे सिवा?

राज: माँ एक बात पूँछुँ आप ग़ुस्सा नहीं होना?

नमिता: हाँ हाँ पूछ ले। 

राज: माँ आप पहले भी इस फ़ार्म हाउस में आ चुकी हो ना? 

नमिता: हाँ आ चुकी हूँ। 

राज: माँ आप कल सुधाकर अंकल के साथ यहाँ आयीं थीं ना? 

नमिता: तुझे कैसे पता?

राज: माँ वो आपको चाबी जो दिए हैं, इसीलिए बोला। 

नमिता: हाँ कल आयी थी।

राज: माँ क्या आपको वह कल चोदे थे?

नमिता एक मिनट की चुप्पी के बाद आह भरी और बोली: हाँ चोदे थे।

राज उसका हाथ अपने हाथ मेंलेकर उसको सहलाते हुए बोला: माँ आपको अंकल अच्छे लगते हैं?

नमिता: हाँ लगते हैं। वो तो अब भी मुझसे शादी करने को तय्यार हैं। पर मैं नहीं मानती कि तुझपर और मनीष और उसकी बहन पर क्या बीतेगी?

राज: माँ मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है अगर आप उनसे शादी करो तो, पर मेरी ये खुराक मुझे मिलती रहनी चाहिए। उसने नमिता की बुर को गाउन के अंदर हाथ डालकर दबाते हुए कहा। 

नमिता: हाँ ये भी एक समस्या है किशादी के बाद तू मेरे साथ कैसे ये सब कर पाएगा?

राज: चलो माँ इसका भी हाल ढूँढ ही लेंगे। माँ वैसे खाने में क्या है? नमिता: बहुत कुछ बनाकर गया है कुक । थोड़ी देर में खाएँगे। 

राज: माँ आपको अपना वादा याद है ना?

नमिता: कौन सा वादा ?

राज: आपने कहा था कि सोने से पहले आप गाँड़ मरवाओगी?

नमिता: हाँ हाँ याद है बाबा। चल अभी TV देखते हैं, राज नमिता की गोद में लेटकर TV देखने लगा और उसके हाथ गाउन के अंदर जाकर नमिता का भूगोल नापने लगे। नमिता भी लोअर के अंदर हाथ डालकर उसके लौड़े से खेलने लगी। 

कोई देखता तो सोचता कि दो प्रेमी लेटे हुए प्रेम क्रीड़ा कर रहे है। कोई सोच भी नहीं सकता था कि ये माँ बेटा हैं।


खाना खाने के बाद राज और नमिता उन्हीं कपड़ों में पूल के आसपास लगे बग़ीचे में एक दूसरे को पकड़े हुए घूमते रहे। राज के हाथ बार बार नमिता के गाउन के अंदर और बाहर घूम रहे थे और उसके उभारों और गहराइयों को दबा रहे थे। नमिता भी उसे बीच बीच में चूम लेती थी। और उसके लोअर के ऊपर से उसके लौड़े को भी दबा देती थी। 

राज: माँ एक बात पूँछुँ? सुधाकर अंकल से आप कब से चुदवा रही हो?

नमिता: तेरे पापा के इंतक़ाल के ५/६ महीने बाद से ही। 

राज: माँ क्या वह बहुत अछ्चि चुदायी करते है ? 

नमिता: बेटा औरत जब किसी को पसंद करती है तो उसे उसके साथ सेक्स करने में मज़ा आता है, चाहे वह बहुत बड़ा चुदक्कड ना भी हो। 

राज समझ गया कि माँ बात को गोल कर गयी है, उसने भी आगे दबाव नहीं डाला। 

वह फिर बोला: माँ आप तो मनीष से भी चुदवायी हो ना?

नमिता हैरान होकर: ये क्या हो रहा है? तुम मुझे ऐसे सवाल क्यों पूछ रहे हो? 

राज: माँ मुझे पता है कि आपने मनीष से भी कई बार चुदावाया है, और मुझे इस सबसे कोई परेशानी नहीं है। पर आप बोल रही थी कि आप अंकल से शादी करने की सोच रही हो तो बताओ आपके दोनों बेटे यानी मैं और नया बेटा मनीष के साथ आपके सम्बंध कैसे होंगे? 

नमिता को लगा कि राज का लौड़ा ज़रा ज़्यादा ही तन गया था। वह अभी भी लोअर के ऊपर से ही उसे सहला रही थी। 

नमिता: तुम ठीक कह रहे हो, ये भी एक कारण था जिसकी वजह से मैंने सुधाकर को मना किया। 

राज: माँ ,मगर मेरी राय यह है कि अगर आप अंकल से शादी कर लेती हो तो हमारी ज़िंदगी ज़्यादा रोमांचक हो जाएगी। 


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