त्यागमयी माँ और उसका बेटा अध्याय 6

 




त्यागमयी माँ और उसका बेटा  अध्याय 6






नमिता ने राज के हाथों से पेपर लिया और नम्बर चेक किया और उसकी आखें फट गयी।उसने देखा कि उसको ९६% नम्बर मिले हैं। वह ख़ुशी से उसको अपनी बाहों में लेकर उसका गाल चूम ली। वह भी हँसने लगा। 

नमिता: मैं तेरा उतरा हुआ चेहरा देख कर डर गयी थी, बदमाश , नाटक कर रहा था? मुझे एक पल के लिए लगा कि तुझे अच्छे नम्बर नहीं मिले हैं। 

राज हँसते हुए: माँ इतनी पढ़ाई की थी नम्बर तो आने थे। आज शीला आंटी भी बहुत ख़ुश हुई मेरे नम्बर देख कर। 

नमिता: तूने कोई बदतमीज़ी तो नहीं की उनके साथ?

राज: नहीं माँ कुछ नहीं किया। 

अभी भी वह दोनों चिपके हुए थे। 

अब नमिता बोली: चल हाथ मुँह धो ले मैं खाना लगती हूँ।

राज ने माँ की एक छाती दबाते हुए कहा: माँ मेरा इनाम ? 

नमिता: अरे ले लेना मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ।

राज अपनी माँ के ब्लाउस का हुक खोलने लगा , नमिता ने उसे मना नहीं किया । अब उसने ब्लाउस खोल कर निकाल दिया। नमिता ने हाथ उठाकर उसकी सहायता की ब्लाउस निकालने में।

अब राज के सामने नमिता सिर्फ़ ब्रा और पेटिकोट में थी। उसकी पारदर्शी ब्रा से उसकी चूचियाँ साफ़ साफ़ दिखाई से रही थी। वह बहुत कामुक लग रही थी। 

राज उसकी चूचियों को ब्रा में क़ैद देख कर अपना लौड़ा मसलने लगा। फिर बोला: माँ अब आप ऐसे ही रहो और खाना लगाओ। 

नमिता मुस्कुरा कर बोली: ठीक है, जैसा तुम चाहो, इतने अच्छे नम्बर लाकर तुमने मुझे इतना ख़ुश कर दिया है कि मुझे तुम्हारी ये बात भी मंज़ूर है।

राज अपने कमरे में फ़्रेश होने गया, और नमिता किचन में जाकर खाने की तय्यारी करने लगी। जब राज बाहर आया तो देखा कि माँ ने टेबल पर खाना लगा दिया था। वह टेबल पर उसका इंतज़ार कर रही थी। राज उसकी कुर्सी के पीछे से उसके पास आकर झुक कर उसको चूमने लगा। अब उसका हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों पर घूम रहा था। उसने सिर्फ़ उनको सहलाया पर दबाया नहीं। वह चाहता था कि इन लमहों का पूरा आनंद ले वह जी भर के। 

नमिता भी मुस्कुरा कर उसके गाल को चुमी और बोली: चल अब खाना खा ले।

राज हँसकर माँ के मम्मों से हाथ हटाकर उसके गाल और गर्दन को चूमकर खाने के लिए कुर्सी पर आ कर बैठ गया। 

नमिता: आज तेरे ताऊ जी आए थे, कोई कोर्ट केस था। तुझे पूछ रहे थे। 

राज: माँ वो लोग बहुत दिन से यहाँ नहीं आए ना?

नमिता: हाँ, वह कह रहे थे कि जल्दी ही तेरी ताई और शीना को साथ लेकर आएँगे ।शीना अब कॉलेज जाने लगी है। वह तुझसे एक साल बड़ी है ना।

राज: ओह,और क्या बोल रहे थे?

नमिता सोची वह तो बहुत कुछ बोल रहे थे, यहाँ तक कि राज से शर्मिला और शीना की चुदायी की बात कर रहे थे।

नमिता: बस और कुछ ख़ास नहीं। कल तो तेरी छुट्टी होगी परसों तो फ़िज़िक्स का पेपर है ना? बहुत कठिन होता है ना?

राज: हाँ माँ बहुत लोगों को ये कठिन लगता है, पर मेरा तो यह प्रिय विषय है। और इसमें अच्छे नम्बर आए तो ये ब्रा भी हट जाएगी। और ये मस्त दूध मेरे हाथों और मुँह में होंगे। हैं ना माँ ?

नमिता मुस्कुरा के बोली: बिलकुल मेरे बेटे। वैसा ही होगा। पर आज से ही तुमको पढ़ाई में जुटना होगा। 

राज: बस माँ अभी आपको पढ़ूँगा और फिर किताब पढ़ूँगा। ये कहते हुए वह आँख मारकर बेशर्मी से हसने लगा।

फिर खाने के बाद राज नमिता को पकड़कर उसके बेडरूम में ले गया। और ख़ुद नमिता के बिस्तर पर लेट गया।नमिता ने देखा कि उसका लोअर पूरी तरह से उसके खड़े लौड़े को दर्शा रहा था और राज भी उसको छुपाने की कोई कोशिश नहीं कर रहा था। 

नमिता जानती थी कि आज वह काफ़ी उत्तेजित है।

वह आकर उसके पास बैठ गयी और राज लेटे हुए उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ जो कि ब्रा के बाहर निकलने को बेताब थीं देखकर अपना लौड़ा मसल रहा था।

नमिता झुककर उसके गाल को चूमी और उसके टी शर्ट को उठाकर उसकी मर्दाना छाती को सहलाने लगी। फिर उसने राज के निपल्ज़ को सहलाया और झुक कर उसके ऊपर अपनी जीभ फिराने लगी। राज के लिए यह अनुभव नया था और वह भी उसकी माँ ये सब कर रही थी, यह सोचकर वह मस्ती से भर गया। 

अब नमिता ने अपना हाथ उसके पेट पर फिराया और उसकी नाभि में ऊँगली डाली। फिर हाथ नीचे लेज़ाकर उसने उसके लोअर की इलास्टिक में हाथ डाला और उसकी लोअर और चड्डी के अंदर हाथ लेज़ाकर उसका लंड पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी। 

राज की आऽऽहहह निकल गयी। नमिता मुस्कुराती हुई उसके पेट और नाभि को चूमने लगी। 

राज भी हाथ बढ़ाकर उसकी ब्रा से बाहर झाँक रही चूचियों पर टूट पड़ा और उनको मसलने लगा। नमिता भी हाऽऽयय्यय कर उठी।

अब राज ने नमिता को अपने ऊपर खिंच लिया और उसकी गर्दन गाल और होंठ चूसने लगा। नमिता ने अपने होंठ हटा लिए। अब वह नशीली निगाहों से राज को देख रही थी। 

राज: माँ मेरी लोअर और चड्डी उतार दो ना प्लीज़।

नमिता उठी और उसको नीचे से नंगा कर दिया। नमिता ने देखा कि सच में उसका लंड उसके ताऊ के लंड जैसा ही मोटा और लम्बा था। वह अब उसके लंड पर हाथ फेरने लगी और उसके बॉल्ज़ को भी हाथ से दबाकर मस्ती से भर गयी। 

राज उठा और उसको अपनी गोद में खिंच लिया और उसकी चूचियाँ दबाके उसके बदन को सब जगह चूमने लगा। नमिता के चूतर उसकी लौड़े को दबाकर दोनों को मस्ती से भर रहे थे। 

अब राज बोला: माँ आपकी बुर गीली हो गयी या नहीं?

नमिता शर्माकर बोली: तू ये सब करेगा तो गीली नहीं होगी क्या?

राज: माँ फिर तो पैंटी भी गीली हो गयी होगी?

नमिता: हाँ मगर तू क्यूँ पूछ रहा है?

राज: माँ प्लीज़ अपनी पैंटी उतार दो ना। आपके चूतर जब बिना पैंटी के मेरे लौड़े को दबाएँगे तो ज़्यादा मज़ा आएगा और मुझे आपकी पैंटी सूंघनी भी है।

नमिता दिखावटी झुँझलाहट दिखाते हुए बिस्तर से नीचे आयी और अपना पेटिकोट जाँघों तक उठाकर अपनी पैंटी उतार दी। पर उसने ध्यान रखा कि उसकी बुर के दर्शन राज को ना होने पाएँ। 

राज पैंटी लेकर उसको सूँघने लगा। अपनी माँ के पसीने, पेशाब और सेक्स की मादक गंध से वह मस्त हो गया। उसके अकड़े हुए लौड़े को नमिता फिर से हाथ में ले ली और मूठियाने लगी। राज ने अब नमिता को लिटा दिया पीठ के बल और बोला: माँ मैं आपकी जाँघों के बीच अपना लौड़ा रगड़कर अपना वीर्य निकालना चाहता हूँ।

नमिता ने कहा: सिर्फ़ आधी जाँघ ही नंगी करूँगी, ठीक है?

राज : ठीक है माँ, आप जैसा कहो वैसा ही होगा। 

अब नमिता ने अपने पेटिकोट को आधा उठा किया और अपनी जाँघों को आधा नंगा कर दी। उसने पेटिकोट को अपनी बुर के आसपास मोड़ दिया ताकि ग़लती से भी राज को बुर के दर्शन नहीं हो सके।

अब राज नमिता के ऊपर आकर चोदने की मुद्रा में आ गया। और उसने अपना लौड़ा माँ की जाँघों के बीच फँसा दिया।और उसकी चूचियाँ दबाते हुए अपने लौड़े को जाँघों के बीच रगड़ने लगा और कमर उछालकर मानो उसको चोदने लगा। 

अब नमिता की भी हालत ख़राब हो रही थी, उसकी बुर भी बुरी तरह से गरम हो चली थी। राज भी ह्म्म्म्म्म्म करके अपनी कमर हिला रहा था।उसके हाथ उसकी चूचियों को बुरी तरह से दबा रहे थे। वह अपनी जीभ से नमिता के गाल होंठ गर्दन चाट रहा था और नमिता को लग रहा था कि उसकी बुर में मानों सेकडों चिटियाँ चल रही हैं। 

राज भी माँआऽऽऽऽऽऽऽ मैं झड़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽहहहह कहके अपना रस उसकी जाँघों पर गिराने लगा। और आह्ह्ह्ह्ह करके बिस्तर पर लुढ़क गया। 

नमिता भी अपने जाँघों पर चिपचिपा रस को महसूस की और समझ गयी कि वह झड़ गया है। उसने लम्बी साँस ली और अपने पेटिकोट को उठाकर बाथरूम में गयी। उसने वहाँ पेटिकोट को सिर के ऊपर से उतार दिया और अब पूरी नंगी होकर अपने जाँघ साफ़ की और फिर से पेटिकोट पहनकर वह ब्रा और पेटिकोट में ही बाहर आयी। उसकी पैंटी भी कहीं बिस्तर पर ही रखी थी। 

राज: माँ, सॉरी मैंने अपना तो रस गिरा दिया पर आपका बदन तो अभी भी गरम होगा। आप अपने बुर को हाथ नहीं लगाने देती नहीं तो मैं आपका भी रस गिरा देता। 

नमिता: कुछ नहीं होता। चल तू तो ख़ुश है ना? तेरे अच्छे नम्बर का तुझे ईनाम तो मिलना ही था ना?

राज: माँ मैं तो आपके मम्मों को ब्रा में देखकर और उनको सहला कर ही धन्य हो गया हूँ। बस अभी जाता हूँ और परसों के पेपर के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देता हूँ। मुझे हर हाल में परसों अच्छे नम्बर लाना है और आपके इन मम्मों को नंगा देखना है और मुँह मेंलेकर बहुत देर तक चूसना है। 

ये कहते हुए उसने माँ की छातियों को ब्रा के ऊपर से सहला दिया। 

नामित: ज़रूर बेटा, तुमको सब मिलेगा जो मैंने कहा है बस तुम्हारा रिज़ल्ट अच्छा आना चाहिए। 

यह कहते हुए नमिता ने उसके गाल चूम लिए।

अब राज माँ को आराम करने का बोलकर अपने कमरे में गया और पढ़ने बैठ गया। 

इधर नमिता बहुत गरम हो गयी थी,उसने अपना कमरा बंद किया और बिस्तर पर लेट कर अपनी ब्रा के अंदर हाथ डालकर अपनी चूचियाँ मसलने लगी और निप्पल्स भी दबाने लगी। फिर उसने तीन उँगलियाँ अपनी बुर में डाल दीं और आह्ह्ह्ह्ह्ह करके उनको अंदर बाहर करने लगी। वह अपनी clit को भी रगड़ कर अपनी आग शांत करने लगी। जल्दी ही वह घुटी हुई चीख़ निकाल कर झड़ गयी। फिर अपना रस और उँगलियाँ पेटिकोट में ही पोंछ कर सो गयी।

शाम को वह उठकर फ़्रेश हुई और पैंटी और ब्लाउस पहनी और पेटिकोट भी बदल ली। फिर चाय बना कर राज के कमरे में गयी। राज पूरे ध्यान से पढ़ाई कर रहा था। उसने माँ को देखा और मुस्कुरा कर बोला: आओ माँ मेरी गोद में बैठो। साथ ही चाय पिएँगे। 

नमिता उसकी गोद में जा बैठी और वह उसको चूमा और एक ही कप से माँ बेटा चाय पीने लगे। फिर दूसरे कप से भी एक दूसरे का जुठा पी कर प्यार में डूब से गए थे। 

राज: माँ नींद आयी ? 

नमिता: हाँ मस्त नींद आयी।

राज: माँ मूठ्ठ मारी थी ना?

नमिता: हठ, तुझे सब जानना है मेरे बारे में?

राज: बोलो ना माँ , मारी थी ना?

नमिता लाल होकर : हाँ , तूने इतना गरम कर दिया था कि बिना उसके नींद आ ही नहीं सकती थी।

अब नमिता उठते हुए बोली: चल अब मैं जाती हूँ तू पढ़ाई कर, खेलने जाएगा?

राज: नहीं माँ खेलने नहीं जा सकता, बहुत ज़्यादा कोर्स है।


फिर राज ने नमिता के चूतरों पर हाथ फेरा और बोला: माँ , फिर पैंटी पहन ली? बिना पैंटी के आपके चूतरों को दबाना ज़्यादा अच्छा लगता है। अभी देखो ना पैंटी बीच में आ रही है।

नमिता: अच्छा बाबा, पैंटी पहनना भी छुड़वा देगा तू ऐसा लगता है मुझे।

राज: माँ घर में नहीं पहनिए , बाहर जायिये तो पहन लीजिए।

नमिता उसके गाल चुमी और ठीक है बेटा, जो हुक्म, मेरे आका, कहकर हँसते हुए चली गयी।

राज भी ख़ुश होकर फिर से पढ़ने बैठ गया। 

नमिता जाकर साड़ी भी पहनी क्योंकि उसको पड़ोसन का फ़ोन आया था की वह उसके घर आ रही है।

शाम को नमिता से मिलने उसकी पड़ोसन आयी और अपना दुखड़ा सुनाने लगी कि उसका बेटा दसवीं में आ गया है और पढ़ायी से उसका मन भटक सा गया है। नमिता सोची कि हर घर की क्या यही कहानी है? वह उसे यह तो बता नहीं सकती थी कि उसने इस समस्या का क्या अजीब सा हल निकाला है।

पड़ोसन के जाने के बाद वह खाना बनाने लगी और फिर TV देखने लगी। 

अब उसने सोचा कि राज को खाना खाने के लिए बुला लिया जाए, तो वह अपने कमरे में गयी और उसने अपनी साड़ी और ब्लाउस उतार दिया और अब वह ख़ुद को शीशे में देखी और मुस्करायी कि वह अपने बेटे के लिए इस रूप में आ रही है। तभी उसे याद आया कि वह पैंटी पहनने के लिए भी मना किया है। तब उसने पैंटी भी उतार दी। अब वह अपने बेटे के लिए पूरी तरह से तैयार थी। 

उसने टेबल पर खाना लगाया और राज को आवाज़ दी। वह आया तब वह फ्रिज से बोतल निकाल रही थी। उसके चूतरों को पेटिकोट में देख कर राज मस्ती से अपना हाथ उनपर रख कर उनको दबा दिया। नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह करके उठी और बोली: बदमाश, धीरे से नहीं दबा सकता है? 

राज: माँ धीरे से दबाऊँगा तो आपको मज़ा ही नहीं आएगा। यह कहकर वह उसको अपने से चिपका लिया और उसके चूतरों पर हाथ फेरते हुए उनकी बीच की दरार में उँगलियाँ डाल दिया। 

नमिता ने उसको धक्का देकर अपने से अलग किया और बोली: ख़बरदार , कोई नियम नहीं तोड़ेगा तू , समझा?

राज हँसते हुए: अच्छा हिटलर अम्माँ , जैसा हुक्म आपका। लेकिन देखो माँ ,बिना पैंटी के आपके चूतर कितने अच्छे लगते हैं छूने में!

माँ कुर्सी पर बैठी और वह पीछे से आकर फिर से उसकी ब्रा के ऊपर से आधी से ज़्यादा नंगी चूचियाँ दबाने लगा।फिर उसने उसकी बाँह उठाई और उसके बग़ल को सूंघने लगा। फिर जीभ निकाल कर उसकी बग़लों को एक एक करके चाटने लगा। 

नमिता: खाना खाएगा या फिर ये ही सब करते रहेगा?

राज: माँ जो इनको सहलाने में मज़ा है वो किसी और चीज़ में कहाँ?

नमिता: अच्छा अगर दबाना हो गया हो तो चल खा ले।

राज हँसते हुए खाना खाने लगा।

डिनर के बाद दोनों सोफ़े पर बैठ कर बातें करने लगे।

राज: माँ आज बहुत दिन बाद प्रतीक पेपर देने आया था और वह पेपर कम दे रहा था और शीला आंटी को ज़्यादा देख रहा था। 

नमिता: तू इन सबकी तरफ़ ध्यान मत देना नहीं तो अपना पेपर ख़राब कर लेगा। 

राज: माँ पेपर ख़त्म होने के बाद प्रतीक बोला था कि वह स्टाफ़ रूम में जाकर शिला आंटी से बात करेगा। माँ मेरी बहुत इच्छा हो रही है कि मैं उसको पूछूँ कि वह क्या उनसे मिला और क्या हुआ?

नमिता: देखो बेटा, तुम्हारा ध्यान इन बातों से बटेगा इसलिए तुम इन सब से दूर रहो।

राज अपनी माँ को खींचकर अपनी गोद में लिटा लिया और उसके होंठ चूमकर उसकी छाती दबाने लगा और नमिता भी अपने गाल पर उसका लौड़ा महसूस करने लगी।

राज: माँ मैं तो बस मज़े के लिए ही पूछूँगा। मेरे पास तो अब आप हो ।

नमिता: अच्छा चल पूछ ले।

राज ने फ़ोन को स्पीकर मोड में रखकर प्रतीक को फ़ोन लगाया ताकि नमिता भी सुन सके। 

प्रतीक: हाय राज क्या हाल है?

राज: अरे बस सब बढ़िया, तू सुना कैसी रही शीला आंटी से मुलाक़ात? 

प्रतीक: अरे बहुत बढ़िया रही। वह बतायी कि उसके पति को आर्मी ने इमर्जेन्सी में वापस बुलवा लिया गया है और वह मुझे बहुत प्यासी लगी। 

राज ने नमिता को आँख मारते हुए उसकी चुचि दबा दी और बोला: ओह फिर क्या कुछ हो पाया?

प्रतीक: हाँ बहुत कुछ हा हा । 

राज: मतलब?

प्रतीक: अरे यार उसकी चूचियों को पूरा नंगा करके ख़ूब दबाया और चूसा। 

अब राज ने नमिता को उठाया और अपना लोअर नीचे करके अपना लौड़ा बाहर निकाला और नमिता उसको सहलाने लगी। राज अभी भी उसकी चूचियाँ दबा रहा था।

राज: वाह, बढ़िया, दोस्त। और चुदायी हुई की नहीं?

प्रतीक: अरे बिलकुल हुई पर यार जल्दी वाली हुई। 

राज नमिता के नीचे वाले हिस्से में हाथ ले गया और नमिता ने अपने चूतर उठा दिए । अब वह नमिता के चूतरों को दबाते हुए उसकी गाँड़ भी दबाने लगा।

राज: मतलब?

प्रतीक: साली को घोड़ी बनाया और उसकी साड़ी और पेटिकोट उठाकर उसकी पैंटी को नीचे किया और पीछे से ही खड़े खड़े ही चोदा । साली मस्त रँडी की तरह चूतर हिला हिला के चुदवा रही थी। हम जल्दी में थे वरना और ज़्यादा मज़ा आता।

राज ने नमिता को खड़े किया और उसकी पीठ अपने ओर करके उसके चूतरों को ज़ोर ज़ोर से दबाया और फिर अपनी माँ को अपने खड़े लंड पर बैठा लिया। अब वह उसकी चुचि दबाते हुए उसके चूतरों, बुर और गाँड़ पर अपना लौड़ा घिसने लगा। 

राज: आऽऽऽहहह कितनी देर चोदा?

नमिता उनकी बातों और उनकी अश्लील संवादों से हैरान भी हो रही थी और गरम भी होती जा रही थी।

प्रतीक: वही क़रीब २० मिनट। जल्दबाज़ी का काम था ना मेरे यार।

राज अब नमिता को ऊपर नीचे करके अपना लौड़ा पेटिकोट के ऊपर से ही उसकी बुर और गाँड़ में रगड़े जा रहा था। 

राज: आगे का क्या प्रोग्राम बना?

प्रतीक: हा हा वही उसके बेटे के साथ विडीओ गेम खेलने जाऊँगा और उसकी बुर फाड़ के आऊँगा ।

राज: ओह चलो भाई मज़ा करो। 

अब नमिता उसके लौड़े पर ख़ुद ही उछल रही थी और मज़े से भरी जा रही थी। 

प्रतीक: और यार आंटी की बुर कब दिला रहा है? 

नमिता चौक कर उसे देखी, कि ये क्या कह रहा है? 

राज थोड़ा सा परेशान होकर: अबे कुछ भी बोलता है? तू मुझे बता कि तू अपनी माँ को मुझे कब दिला रहा है?

प्रतीक: अरे यार तू उनकी बुर आज मार ले , मुझे क्या, अगर तुझे वो दे दे तो। इसी बहाने मुझे भी उनकी बुर मिल जाएगी। 

राज: हा हा चल अब रखता हूँ। 

नमिता अब बहुत गरम हो चुकी थी और वह अब अपनी बुर उसके लौड़े पर रगड़ कर अपने आप को झड़ने के क़रीब के आयी और चिल्लायी: हाऽऽऽऽऽऽऽहह्यय आऽऽऽहहह मैं तो गयीइइइइइइइइइ उइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽ। राज भी गरम हो गया अपनी माँ की आवाज़ों से और वह भी ह्म्म्म्म्म्म्म माँआऽऽऽऽऽऽ मैं भी झड़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ कहते हुए उसके पेटिकोट में अपना वीर्य गिराने लगा। राज ने नमिता को अपने गोद में भींच लिया और बहुत देर तक उससे चिपका रहा जब तक दोनों की सांसें सामान्य नहीं हो गयीं।

अब नमिता उठकर अपने बाथरूम में गयी और साफ़ सफ़ाई करके बिस्तर पर लेट गयी। राज भी अपने कमरे में गया और सफ़ाई करके वापस माँ के पास आया और लेटी हुई माँ से लिपट गया और चूमकर बहुत सारा प्यार किया।

नमिता भी उसको चूमते हुए बोली: ये प्रतीक क्या मुझे चो- मतलब करने के लिए बोल रहा था?

राज: माँ , ये बहुत दिन से मेरे पीछे पड़ा है कि मैं उसकी माँ को पटा लूँ और वो आपको पटा ले। पर मैंने कभी हाँ नहीं की है।

नमिता: जब मैं तेरी हो जाऊँगी तब क्या तू मुझे दूसरों से करवाएगा?

राज: माँ ये क्या करना या करवाना बोलती रहती हो ? साफ़ साफ़ बोलो ना चुदवाऊँगा क्या?

नमिता: अच्छा चल वही सही, तू सच मुझे अपने दोस्तों से चुदवाएगा?

राज: माँ अभी ऐसा बिलकुल सोचा नहीं है। पर हाँ एक बार नदीम और आयशा आंटी को यहाँ बुलाकर मैं आयशा आंटी को और आप को नदीम से एक ही बिस्तर पर चुदवाने की मेरी बड़ी तमन्ना है। पर सब कुछ आपके ऊपर है , अगर आप चाहोगी तभी वरना बिलकुल नहीं।

नमिता : ओह ठीक है। चल अब बहुत मस्ती हो गयी। अब पढ़ने बैठ जा। गुड नाइट। 

राज भी माँ मो प्यार करके गुड नाइट बोलकर पढ़ने चला गया। 

नमिता सोचते हुए कि क्या उसको राज के दोस्तों से भी चूदना पड़ेगा? वह नींद की आग़ोश में समा गयी।


अगली सुबह नमिता उठी और फ़्रेश होकर चाय बनायी और दोनों कप लेकर राज के कमरे में पहुँची। राज अभी भी सो रहा था और उसका लौड़ा लोअर में पूरा तना हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था। नमिता उसका मॉर्निंग इरेक्शन देखकर मन ही मन मुस्करायी और बिस्तर पर बैठ कर उसको उठाने लगी। राज उठा और ब्लाउस और पेटिकोट में माँ को देखकर उसको अपनी बाहों में खींचकर अपने से लिपटा लिया और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। 

नमिता: आज देर तक सो रहा है, सब ठीक है ना?

राज: माँ रात बहुत देर हो गयी थी पढ़ते हुए इसी लिए आज नींद नहीं खुली। 

नमिता: चल जा फ़्रेश होकर आ जा फिर चाय पिएँगे। देख कैसा तंबू तना हुआ है तेरा? ये कहते हुए नमिता ने हँसते हुए उसके लौड़े को पकड़कर हिला दिया। 

राज : आऽहहह माँ । कहते हुए बाथरूम चला गया। 

वापस आकर वह कुर्सी में बैठा और नमिता को अपने गोद में खींचकर बोला: माँ ब्लाउस क्यों पहन लिया? पैंटी भी पहनी हैं क्या? ये कहते हुए उसने अपनी गोद में रखे उसके चूतरों को छूकर पैंटी की मौजूदगी की जाँच करने लगा। 

नमिता हँसते हुए बोली: पैंटी नहीं पहनी है, ब्लाउस के बिना बाद अजीब लगता है, प्लीज़ पहने रहने दे ना। 

राज: माँ ठीक है, मगर जब मुझे इच्छा होगी तो ब्लाउस उतार देंगी ना आप?

नमिता: हाँ बाबा उतार दूँगी, जब भी तू बोलेगा। 

अब राज और नमिता एक ही कप से चाय पीने लगे।

राज के हाथ नमिता के पेट पर घूम रहे थे।

नमिता को भी अपने चूतरों के नीचे उसके लौड़े का अहसास हो रहा था पर वह अभी पूरा खड़ा नहीं था। 

अब नमिता बोली: अच्छा अब तू पढ़ाई कर , तेरी तो छुट्टी है पर मैं तो आधे दिन के लिए ऑफ़िस जाऊँगी। 

राज ने हाँ में सिर हिलाया और सोचा कि क्या पता आज भी सुधाकर अंकल माँ को चोदेंग़े !!

नमिता घर की साफ़ सफ़ाई में लग गयी। फिर नहा धोकर उसने नाश्ता बनाया। अभी भी वह ब्लाउस और पेटिकोट में ही थी। 

अब उसने राज को आवाज़ दी नाश्ता करने के लिए। 

राज किचन में आकर उससे लिपट गया और उसकी गाँड़ और चूतरों को दबाने लगा। फिर उसने ब्लाउस के हुक खोले और ब्रा के अंदर के कबूतरों को दबा कर मस्ती से भर गया। उसका खड़ा लौड़ा उसकी गाँड़ को ठोकर मार रहा था। 

नमिता: आऽऽऽहन ये सुबह सुबह तू क्या करने लगा? चल मैं नाश्ता लगा रही हूँ। 

वह उसकी गर्दन चूमता बोला: माँ कल अच्छे नम्बर लाकर इनको खा जाऊँगा। उसकी चूचियाँ मसलते हुए बोला।

नमिता: कल की कल देखेंगे, अभी पढ़ाई कर और जल्दी से नाश्ता कर के भिड़ जा।

राज आहें भरकर बोला: चलो ठीक है। नाश्ता कर लेते हैं। पर आज आपके हाथ से खाऊँगा। 

नमिता: चल ठीक है मैं ही खिला देती हूँ।

टेबल पर नाश्ता लगाकर नमिता ने अपनी कुर्सी राज के पास कर ली। अब वह उसको अपने हाथ से खाना खिलाने लगी। राज भी मस्ती में आकर उसकी ऊँगली हल्के से काट देता। नमिता हँसते हुए उसको एक चपत लगा देती। 

तभी राज बोला: माँ आप अगला कौर ख़ुद चबाओ और मेरे मुँह में डालो। 

नमिता हँसते हुए अगला कौर अपने मुँह में डालकर चबायी , तभी राज ने उसके मुँह के पास अपना मुँह लाकर खोल दिया और नमिता ने अपने मुँह का चबाया हुआ कौर उसके मुँह में डाल दिया। 

राज ने अपने मुँह में खाना लेकर उसको निगल लिया। नमिता को उसपर बहुत प्यार आया और वह उसको चूम ली। इस तरह हँसते हुए दोनों ने नाश्ता समाप्त किया और राज वापस पढ़ने चला गया। 

नमिता ने भी साड़ी पहनी और तय्यार होकर राज को बाई करने उसके कमरे में गयी। तब राज कुर्सी पर बैठे हुए अपनी माँ का पेट चूमने लगा। फिर हाथ बढ़ाकर उसके चूतरों को दबाने लगा और बोला:

माँ पैंटी पहन ली। क्या होता अगर पैंटी के बिना चली जातीं? 

नमिता: चल छोड़ अब जाने दे ।

राज: एक शर्त पर।

नमिता: अब क्या हुआ?

राज: मैं मुँह खोलता हूँ, आप अपना थूक मेरे मुँह में डालो।

नमिता: छी ये कैसी बात हुई, ये भला क्यों?

राज: माँ मैं आपके सब रस का पान करना चाहता हूँ। माँ प्लीज़ । ये कह कर उसने अपना मुँह खोल दिया। नमिता ने हिचकते हुए अपना थूक उसके मुँह में डाल दिया जिसे वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए पी गया। फिर उसने नमिता के हाथ ऊपर किए और उसकी बग़लें एक एक करके चाटने लगा। वह उसकी गंध से मस्त हो गया। 

वह बोला: देखो, एक और रस आपके बदन का पी लिया। 

नमिता ने उसके लौड़े को खड़ा देखकर पकड़कर कहा: इस हालत में तू पढ़ पाएगा?

राज: मैं ठंडे पानी से नहा कर अपनी उत्तेजना शांत कर लूँगा। आप जायिये अब। 

नमिता उसके गाल को चूमकर बाहर निकल गयी। 

राज बाथरूम में जाकर नहाने लगा।

नमिता ऑटो में थी तभी गुप्ता का फ़ोन आया। वह राज के पेपर का पूछ रहा था। नमिता ने ख़ुश होकर बताया की उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ है। 

गुप्ता: तो फिर तुमने उसको अपने मम्मों का मज़ा लेने दिया या नहीं?

नमिता: हाँ बिलकुल लेने दिया। वह भी आगे के मज़े का सोच कर बहुत ख़ुश है और बहुत मेहनत कर रहा है। 

गुप्ता: करेगा ही उसका सपना जो पूरा होने जा रहा है।

नमिता: और आप कैसे हैं?

गुप्ता: बस लंड हाथ में लिए बैठे है कि कब तुम आओगी और उसे शांत करोगी। 

नमिता: छी कुछ भी बोलते रहते हैं। अच्छा रखती हूँ। 

उसने फ़ोन काट दिया। सच तो ये था कि वह कुछ देर और बात करती तो क्या पता चुदासि हो जाती और उसके पास ही चली जाती। 

ऑफ़िस पहुँच कर वह अपने काम में लग गयी। करीब ११ बजे सुधाकर का फ़ोन आया: कैसी हो? कहाँ हो?

नमिता: जी ठीक हूँ और ऑफ़िस में हूँ।

सुधाकर: मैं तो आज मुंबई आया हूँ, पर आज तुमको एक मेरा काम करना होगा, एक विदेशी कस्टमर jhon आया हुआ है साउथ अफ़्रीका से, वह वहाँ का बड़ा सरकारी अधिकारी है। वह हमें एक बड़ा ऑर्डर देगा, बस उसको ख़ुश करना होगा। 

नमिता: छी आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हो?

सुधाकर: अरे पूरी बात तो सुनो। मैंने इस काम के लिए अपनी साक्षी को मना लिया है। पर समस्या यह है कि साक्षी अंग्रेज़ी नहीं बोल पाती तो तुम उसकी इतनी मदद कर देना। बाक़ी का काम साक्षी संभाल लेगी। तुम उसके ऑर्डर के काग़ज़ भी चेक कर लेना। साक्षी के बस की तो यह बात है नहीं। उसे तो अपना जवान बदन चुदवाने के अलावा कुछ भी नहीं आता।

नमिता: कब जाना होगा? 

सुधाकर: अभी बस एक दो घंटे की बात है। तुम्हें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उसने मुझे कहा है कि उसको २०-२२ साल की लौड़ियाँ चाहिए। इसीलिए मैंने साक्षी को चुना है। 

नमिता: ओह ठीक है।

सुधाकर: थैंक्स एंड बाई करके फ़ोन काट दिया। 


नमिता ने अपना पर्स उठाया तभी साक्षी उसके पास आयी और बोली: चलें? अभी सर का फ़ोन आया था। 

नमिता ने उसे देखा , वह २२ साल की एक भरी हुई जवान लड़की थी, उसने अभी स्कर्ट टॉप पहना था। उसे पता था कि सुधाकर ख़ुद भी इसकी चुदायी करता था और अब पता चला की वह इसको इस तरह के काम में भी उपयोग करता है। वह दोनों बाहर आए और ऑटो लेकर Jhon के होटेल पहुँचे। उसके कमरे मेंजाकर घंटी बजाते ही उन्होंने देखा कि दरवाज़े पर एक काला विशाल शरीर का अधेड़ सामने खड़ा था। 

नमिता: हाय ( फिर उसने और jhon ने सारी बातें अंग्रेज़ी में की जो बेचारी साक्षी के समझ से बाहर थी) आप कैसे हो?

जौन: बढ़िया। आइए आप अंदर आइए। 

दोनों अंदर आकर बैठ गयी। 

साक्षी: दीदी ये तो साला राक्षश है।बहुत तंग करेगा। 

नमिता: ये तो सर को हाँ करने के पहले सोचना था। 

जौन नमिता को पूछा: मैंने तो सुधाकर को एक लड़की के लिया कहा था उसने दो भेज दी , सच में बहुत बढ़िया आदमी है। 

नमिता : नहीं नहीं आप ग़लत समझ रहे हैं , असल में इसे अंग्रेज़ी नहीं आती इसलिए मैं इसके साथ आयी हूँ। आप मुझे ऑर्डर की कापी दे दो मैं वह पढ़ती हूँ, जब तक आप इसको अंदर बेडरूम में के जाओ। 

जौन: ओह ऐसा क्या? मुझे तो तुम भी बहुत अच्छी लगी । 

नमिता: नहीं नहीं आप इसको हो ले जाओ। सुधाकर ने इसको इसीलिए भेजा है।

नमिता ने साक्षी को कहा: जाओ तुम इसके साथ अंदर बेडरूम में और इसको ख़ुश करो जैसा सर ने कहा है। 

साक्षी : पता नहीं ये साँड़ मेरा क्या हाल करेगा? दीदी बचा लेना मुझे अगर मैं आपको बुलायी तो आ जाना मेरी मदद के लिए। 

नमिता: कुछ नहीं होगा। जा मज़ा कर। 

अब जौन साक्षी के साथ बेडरूम में घुस गया। उसने जाते जाते पेपर’s नमिता को दे दिया और वह पढ़ने लगी।

थोड़ी देर बाद नमिता को साक्षी की घटी हुई चीख़ सुनाई दी। उसके कान खड़े हो गए। वह बेडरूम की ओर देखी तभी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मरीइइइइइइइइइइ की आवाज़ आयी। अब नमिता उठकर बेडरूम के दरवाज़े से सट के खड़ी हो गई। उसने कान लगा कर सुनने की कोशिश की और उसे ठप्प ठप्प की आवाज़ सुनाई दी। वह मुस्कुराई और वापस आने लगी तभी हाय्य्य्य्य्य्य्य्य छोड़ोओओओओओओओ की आवाज़ सुनाई दी। अब वह घबरा कर अंदर देखने की कोशिश की तभी उसको की होल दिखा और उसने उसमें अपनी आँख लगा दी। अंदर का दृश्य बड़ा ही अजीब सा था। जौन पूरा नंगा था और उसके बालों से भरी छाती ऊपर नीचे हो रही थी। वह पूरी नंगी साक्षी के ऊपर सवार था और उसने उसकी टाँगे उठाकर उसके सर के पास रख कर उसकी जाँघों के बीच अपना लंड घुसाकर चोद रहा था। नमिता को वहाँ से उसकी बुर में उसका लौड़ा अंदर बाहर होते दिख रहा था। उसके बड़े बालस उसकी बुर के नीचे लटकते हुए साफ़ दिख रहे थे। जो बात उसको हैरान कर रही थी वह था उसका साइज़ । उसका लौड़ा बहुत मोटा था और वह उसकी बुर को पूरा फैलाकर उसमें घुसा जा रहा था। साक्षी की बुर पूरी तरह से खुली हुई लग रही थी। 

साक्षी का मुँह उसे नहीं दिख पा रहा था। पर उसकी दर्द भरी चीख़ें उसकी कान में पड़ रही थी। अचानक jhon ने चुदायी को स्पीड बढ़ा दी और साक्षी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह छोड़ोओओओओओओओओओ कह कर चिल्लायी। तभी उसकी बुर से सफ़ेद रस गिरने लगा जो उसके लंड से निकल कर बुर में छूट रहा था। नमिता का हाथ अपने बुर में चला गया और उसने अपनी बुर खुजा डाली। फिर वह उसके ऊपर से उठा और साक्षी की फटी हुई बुर उसके बिर्य से भरी हुई उसके सामने थी। 

साक्षी बिस्तर पर लाश की तरह पड़ी हुई थी। तभी जौन घुमा और नमिता ने अपने जीवन का सबसे बड़ा लंड देखा जो झड़ने के बाद भी अभी भी खड़ा था। वह कम से कम १० इंच लम्बा और बहुत मोटा था। उसने सोचा कि बेचारी साक्षी , क्या हालत हो गयी है उसकी।

जौन बाथरूम गया और बाहर आकर नमिता को बोला: बड़ी कमज़ोर लड़की निकली ये तो। तुम्हारा शरीर तो मस्त भरा हुआ है मैं तुमको fuck करना चाहता हूँ। 

नमिता: ओह नहीं, मैं ये नहीं कर सकती। 

उसका मन उसके लंड का साइज़ देखकर ही डर गया था।

तभी अंदर से कराहने की आवाज़ आयी और नमिता अंदर गयी तो वह अपने कपड़े पहन रही थी। 

फिर वह नमिता से लिपट कर रोने लगी। नमिता ने पूछा: क्या हुआ?

साक्षी: दीदी उसका तो बहुत बड़ा और मोटा है , मेरी तो फट गयी और बहुत दर्द हुआ। 

नमिता ने उसको सहारा दिया क्योंकि वह लँगड़ा कर चल रही थी,और बाहर आकर उसको और पेपर’s लेकर वहाँ से निकल पड़ी। 

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त्यागमयी माँ और उसका बेटा complete

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Smoothdad

Novice User

Re: त्यागमयी माँ और उसका बेटा

Post  19 Jun 2016 22:04


नमिता ने साक्षी को उसके घर छोड़ा और वापस अपने घर आ गयी। 

राज उसको देखकर बहुत ख़ुश हुआ । वह माँ के लिए पानी लाया। 

नमिता पानी पीती हुई बोली:बेटा पढ़ाई कहाँ तक पहुँची? 

वह उसके बग़ल में बैठ गया और बोला: माँ क़रीब क़रीब एक बार कोर्स ख़त्म होने वाला है। रात से दोहराना शुरू कर दूँगा। माँ कल भी अच्छे नम्बर आएँगे। फिर इनको ख़ूब चूसूँगा। उसने नमिता को गोद में गिरा लिया और उसकी चूचियाँ दबाते हुए बोला।

नमिता भी चुदायी देख कर आयी थी और गरम भी थी। उसने उसकी गोद में लेटे हुए अपने गाल पर उसके लौड़े का अहसास किया और उसकी बुर खुजाने लगी। 

अब राज ने उसकी साड़ी का पल्लू गिराया और उसके ब्लाउस के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। फिर उसने उसका ब्लाउस खोला और उसकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से दबा कर मस्त हो गया। उसका लौड़ा झटका मारने लगा।अब उसने उसकी बाहँ उठाया और उसकी बग़ल सूँघा और चाटा । फिर उसने दूसरी बाँह उठाके उसको भी सूँघा और चाटा। वह बोला: माँ आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मादक गंध है आपके पसीने की। प्लीज़ थूक भी निकालो ना जैसे सुबह निकाले था मुझे चाटना है।

नमिता ने अपने मुँह से थूक निकाला और राज झुक कर उसे चाटने लगा और फिर माँ के होंठ भी चूस लिया। नमिता बहुत गरम हो चुकी थी उसकी बुर गीली ही गई थी। वह अपना हाथ साड़ी के ऊपर से अपने बुर पर लेज़ाकर खुजा दी। 

राज ने देखा तो बोला: माँ मैं खुजा दूँ?

नमिता हँसते हुए उसको एक चपत मारी और बोली: चल हट, नालायक कहीं का। 

राज: माँ मेरी एक बात मानोगी?

नमिता: बोल क्या बात है?

राज: माँ आपके मुँह से गन्दी बात सुनकर मस्त होना चाहता हूँ।

नमिता: मतलब?

राज: जैसे माँ इसको आप किस नाम से बुलाओगी? उसने अपने लौड़े की तरफ़ इशारा किया।

नमिता: ये कैसा सवाल है? ये यो मेरे बेटे का प्यारा सा हथियार है। 

ये कहते हुए वह उसे सहला दी और दबा दी। 

राज: नहीं नहीं आप इसको उसके असली नाम से बुलाओ ना।

नमिता उसके लंड को दबाते हुए बोली: अच्छा , लंड । बस हो गया ख़ुश?

राज: माँ और भी एक नाम है ना?

नमिता: आह लौड़ा , बस अब ख़ुश?

राज: और माँ इसका क्या नाम है? उसने उसकी बुर को पेटिकोट के ऊपर से इशारा करके कहा। 

नमिता: आह, चूत या बुर ।

राज: और उसके नीचे वाले छेद को?

नमिता: गाँड़। 

राज : आऽऽऽऽऽऽह माँ आपके मुँह से ये शब्द बड़े उत्तेजित करते है मुझे। 

राज उसकी चुचि दबाके बोला: और ये?

नमिता: चुचि ।

राज: माँ ये बताओ जब हम सेक्स करते है तब उसको क्या बोलते हैं?

नमिता: चुदाई। 

राज : आऽऽह्ह्ह्ह्ह माँ आऽऽऽऽऽप बहुत अच्छी हो। कहते हुए उसकी गर्दन और चुचि चूमने लगा।राज अब उसकी ब्रा मेंक़ैद चुचि दबाकर बहुत उत्तेजित हो गया था । 

वह बोला: माँ उठो अब मेरा रस निकाल दो बहुत इच्छा हो रही है। 

नमिता उठी तो राज ने उसकी साड़ी उतार दी, ब्लाउस तो पहले ही खुला हुआ था । अब वह चूतरों को सहलाकर पैंटी को ऊपर से ही छूकर बोला: माँ पैंटी भी उतार दो ना, प्लीज़। 

नमिता चुपचाप आधा पेटिकोट उठाकर अपनी पैंटी भी निकाल दी जिसको उसके हाथ से लेकर राज फिर से सूँघने लगा। 

वह बोला: माँ क्या मस्त गंध है। आपके बुर की, आऽऽऽह ।

अब वह भी खड़ा हुआ और नमिता ने उसका लोअर उतार दिया। अब चड्डी में उसका फूला हुआ बड़ा सा लौड़ा बहुत ही कामुक दिख रहा था। नमिता ने उसकी चड्डी में एक बड़ा सा धब्बा देखा और उसकी चड्डी उतार दी। 

राज: माँ आप भी मेरी चड्डी सूँघो ना, प्लीज़। 

नमिता हैरानी से उसको देखी पर बिना कुछ बोले उसकी चड्डी सूंघी और राज को दिखाकर उसकी चड्डी में लगा प्रीकम भी चाट ली। 

राज का लौड़ा ऊपर नीचे होने लगा। वह आऽऽऽऽऽऽऽऽहहह माँ क्या करूँ इसका कहके अपना लौड़ा हिलाने लगा। 

अब नमिता सोफ़े पर चढ़ गयी और चौपाया बन गयी और अपने चूतरों को पेटीकोट समेत उठाके राज को इशारा की। राज उसके पीछे अपना लौड़ा सेट किया और पेटिकोट के ऊपर से ही अपना लौड़ा उसकी गाँड़ वाले एरिया में रगड़ कर उत्तेजना से ह्म्म्म्म्म्म आऽऽऽहहह माँआऽऽऽऽ करके अपनी कमर हिला कर मस्त हो रहा था। 

नमिता को भी उसका नंगा लौड़ा उसकी बुर के दाने clit पर और गाँड़ के छेद पर महसूस हो रहा था। वह भी पीछे से कमर हिलाकर अपनी उत्तेजना में पेटिकोट के ऊपर से ही मानो चुदवा रही थी। अब राज की हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से चूचियाँ भी मसल रहा थे। अचानक नमिता आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मैं गईइइइइइइइइइ करके झड़ने लगी। उधर राज भी अपना लौड़ा उसके पिछवाड़े में रगड़ते हुए हाऽऽय्य्य्य्य माँआऽऽऽऽऽ कहकर झड़ गया और उसके पेटिकोट पर अपना रस उँडेल दिया। 

थोड़ी देर हाँफने के बाद दोनों बाथरूम गए अपने अपने कमरों में और सफ़ाई करके बाहर आकर थोड़ा आराम किए। 

फिर नमिता ने खाना लगाया और दोनों खाना खाए। 

राज: माँ आज बहुत मज़ा आया, आपके साथ।

नमिता: तेरी हरकतें बढ़ती ही जी जा रही हैं।

राज: माँ अब तो बस आख़िरी हरकत का इंतज़ार है।

नमिता: अच्छा?

राज: माँ जब तक आपको चोदूँगा नहीं शांति थोड़े ना मिलेगी! 

नमिता: ओह आजकल कितनी गन्दी बातें करने लगा है तू? 

राज: माँ अब तो आप भी मेरे साथ गन्दी बातें करने लगी हो, सच जब आप ये सब बोलती हो ना तो मैं बहुत मस्ती से भर जाता हूँ।

नमिता: ख़ुद तो गंदा है ही मुझे भी गन्दी बना दिया।

राज खाना खा कर उठा और सोफ़े पर बैठ गया। 

नमिता भी आकर उसके पास बैठने लगी तो उसने उसे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। अब वह उसके गाल चूमने लगा। 

वह बोला: माँ, सच बताओ आज मज़ा आया या नहीं? 

नमिता: हाँ बहुत मज़ा आया। पर इसके आगे अभी और नहीं होगा, क्योंकि नियम नहीं तोड़ना है। 

राज: ठीक है माँ । अच्छा अब जाता हूँ बहुत पढ़ना है अभी ताकि कल आपके नंगे मम्मों को चूस सकूँ। 

नमिता: बदमाश कहीं का , चल जा अब । ये कहते हुए वह उठी और अपने कमरे में जाकर आराम करने लगी।

राज भी पढ़ने बैठ गया। उस दिन और रात को आगे कुछ नहीं हुआ। डिनर करके फिर से राज पढ़ने बैठ गया और नमिता भी सो गयी। 

अगले दिन राज का दूसरा पेपर था वह भी फ़िज़िक्स का! 


अगली सुबह नमिता जब चाय लेकर राज के कमरे में गयी तो वह बहुत ध्यान से पढ़ रहा था। 

राज: गुड मोर्निंग माँ । 

नमिता: गुड मोर्निंग । उसने चाय रखकर उसके गाल चूमे और बोली: बेटा कब उठे?

राज: माँ सुबह ४ बजे। 

नमिता: ओह तो चल चाय पी ले। 

राज किताब पढ़ते हुए हो चाय पीने लगा। 

नमिता: बेटा कोर्स दुहरा लिया क्या?

राज: बस माँ अभी हो जाएगा। 

नमिता चुप चाप चाय पीकर उसको पढ़ता छोड़के वापस किचन में आ गई। और अपने काम मेंलग गयी। 

नमिता ने राज को समय पर नाश्ते के लिए आवाज़ दी। 

वह आया और किताब पढ़ते हुए ही नाश्ता करने लगा। 

नमिता ने उसको बिलकुल डिस्टर्ब नहीं किया ।

बाद में राज जब स्कूल जाने लगा तो उसने उसे दही शक्कर खिलाया और प्यार करके विदा किया। राज जाते हुए थोड़ा सा गम्भीर दिख रहा था।

नमिता: क्या बात है बेटा, सब ठीक है? थोड़ा परेशान दिख रहा है?

राज : माँ कुछ नहीं , बस आज का पेपर थोड़ा कठिन है ना इसलिए थोड़ा चिंतित हूँ।

फिर फीकी हँसते हुए बोला: कहीं ईनाम हाथ से नहीं निकल जाए।

नमिता: बेटा, परेशान ना हो, अगर पेपर इतना कठिन है तो मैं तुझे थोड़ी छूट दे दूँगी। ईनाम तो तुझे मिलेगा ही। चल जा बिना तनाव के पेटर दे। 

राज: सच माँ ईनाम मिलेगा अगर नम्बर थोड़े से ऊपर नीचे भी हो गए?

नमिता उसको प्यार की और उसके दोनों हाथ अपने ब्लाउस के ऊपर से अपनी छातियों पर रख कर बोली: हाँ बेटा , आज तुझे ये दे दूँगी चाहे थोड़े कम नम्बर ही क्यों ना आएँ । ठीक है? अब मज़े से जा और बिना परेशानी के पेपर दे के आ।

राज माँ की बात से खिल उठा और उसकी छातियाँ दबा कर बोला: थैंक्स माँ , आपने मेरा टेन्शन दूर कर दिया। अच्छा बाई। 

नमिता भी उसको बाई कहकर अपने से लिपटा कर प्यार की और विदा की।

राज के जाने के बाद नमिता तय्यार हुई और ऑफ़िस को चली गयी। 

ऑफ़िस में वह अपने काम में व्यस्त हो गयी। उसने साक्षी का पता किया तो पता चला कि वह आज आयी नहीं है। 

उसने सोचा बेचारी गाय को उस बड़े साँड़ ने ज़बरदस्त तरीक़े से घायल किया है। 

तभी सुधाकर का बुलावा आया कि साहब बुला रहे हैं। 

वह उठकर उसके कैबिन में गयी। सुधाकर फ़ोन पर बात कर रहा था। वह बैठी और सुधाकर फ़ोन रख कर बोला: कलवाला ऑर्डर देख लिया?

नमिता: जी देख लिया है और सिस्टम में एंट्री भी कर दिया है।

सुधाकर: मैं तुम दोनों के कल के काम से बहुत ख़ुश हूँ। 

नमिता: पर बेचारी साक्षी की हालत बहुत ख़राब हो गयी थी। वह तो पूरा साँड़ था। 

सुधाकर: मुझे भी इसका कोई अन्दाज़ नहीं था क्योंकि मैं कभी उससे मिला नहीं हूँ। बस फ़ोन पर ही बात हुई थी। आज जब मेरी साक्षी से बात हुई तो वह बतायी कि उसने तो फाड़ ही दी है उसकी बुर। 

नमिता: हाँ वह बहुत चिल्लायी थी।

सुधाकर: हाँ आज फिर मैं ऑफ़िस आने से पहले अभी उसी के घर से ही आ रहा हूँ। मैंने उसकी बुर देखी काफ़ी बुरी हालत में है। लगता है साले का लंड गधे के जितना बड़ा था। 

नमिता: हाँ साक्षी की बात से तो ऐसा ही लगता है। 

उसने ये नहीं बताया कि वह उसका १० इंचि देख चुकी है। 

सुधाकर: साक्षी की बुर देखकर मैंने डॉक्टर बुलाया और उसने क्रीम दी है वह मैं अभी उसकी बुर में लगा के आ रहा हूँ।

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Smoothdad

Novice User

Re: त्यागमयी माँ और उसका बेटा

Post  19 Jun 2016 22:05


नमिता मुस्कुरा कर: उसकी बुर की तो सेवा कर दी, अपने हथियार की सेवा करवाए की नहीं?

सुधाकर हँसते हुए: हा हा , वह भी हो गयी। उसने बड़े प्यार से मेरा लौड़ा चूसा और पूरा रस पी लिया। इसी लिए तो इतना शांत बैठा हूँ। वैसे साक्षी बहुत अच्छा चूसती है। 

नमिता: चलो आपको मज़ा आ गया ये बढ़िया हो गया।

सुधाकर: हाँ सो तो है। तुमने तो बहुत दिन से मेरा लौड़ा नहीं चूसा है अच्छे से?

नमिता: आपको छोटी उम्र की लौंडियाँ तो मिली हुई है, उनसे ही मज़ा लीजिए। अच्छा अब मैं जाती हूँ। अपना काम ख़त्म करके आज भी जल्दी जाऊँगी। 

सुधाकर: हाँ हाँ कोई बात नहीं। चली जाना। पर ये तो बताओ आज पैंटी किस रंग की पहनी है?

नमिता: ये क्या बात हुई?

सुधाकर: प्लीज़ बताओ ना।

नमिता: काले रंग की।

सुधाकर: वाह ! गोरे रंग की जाँघों पर काली पैंटी तो ग़ज़ब ढा रही होगी। चलो ना ज़रा साड़ी उठाके दिखा दो एक मिनट के लिए। 

नमिता हैरान होकर: क्या बच्चों जैसे बात कर रहे हैं? 

सुधाकर: प्लीज़ प्लीज़ एक बार दिखा दो ना।

नमिता: दरवाज़ा खुला है, कोई आ गया तो?

वह: अरे बंद कर दो ना उसको ।’

नमिता ने दरवाज़ा बंद किया और अपनी साड़ी और पेटिकोट उठाकर उसको अपनी पैंटी दिखायी। 

सुधाकर उसकी गोरी और गदरायी जाँघों के बीच काली पैंटी देख कर बहुत उत्तेजित हुआ और बोला: आऽऽऽह क्या मस्त माल है । अब ज़रा घूम कर पीछे का भी दिखाओ ना?

नमिता घूम गयी और उसके बड़े बड़े गोल गोल गोरे चूतरों में पैंटी को देखकर वह घायल ही हो गया।

वह बोला: आऽऽहहह क्या गाँड़ है । पर रानी तुम पीछे से सिर्फ़ एक पतली पट्टी वाली सेक्सी सी पैंटी क्यों नहीं पहनती? उसमें तुम्हारे पूरे चूतर नंगे दिखेंगे। इसमें तो आधे आधे छुप ही जाते हैं।

नमिता हँसते हुए बोली: आपने कभी लेकर दी है मुझे ऐसी पैंटी ? और हाँ ,अगर देखना हो गया हो तो साड़ी नीचे कर लूँ?

वह: हाँ नीचे कर लो। मैं तुम्हारे लिए एक से एक पैंटी और ब्रा लाउँगा रानी, पहनोगी ना?

नमिता: आपका काम तो इनको उतारने से होता है तो पहनाना क्यों चाहते हैं?

वह हँसते हुए : हा हा सच कहा। पहले पहनाओ और फिर उतारो। 

नमिता ने दरवाज़ा खोला और चलती हूँ कहकर बाहर चली गयी। 

नमिता अपने ऑफ़िस का काम निपटायी और बाहर निकली तभी बारिश होने लगी। वह सोची कि अभी राज को आने में एक घंटा है इसलिए वह शांति से खड़ी होकर बारिश के बंद होने का इंतज़ार करने लगी। 

तभी एक कार आकर रुकी और उसमें उसकी पड़ोसन का पति बैठा था। वह कभी कभी उसको देखती थी आते जाते। वो राजन था और उसकी पत्नी कभी कभी उसके घर आती थी और वह भी कभी कभी उसके घर जाती थी। उनका एक बेटा भी था जो दसवीं में पढ़ता था जिसके लिए सुषमा याने राजन की बीवी परेशान रहती थी। 

राजन: आइए भाभीजी आपको घर छोड़ दूँगा। मैं भी घर खाना खाने जा रहा हूँ। 

नमिता थोड़ा संकोच की फिर सोची कि आख़िर पड़ोसी है क्या हर्ज है लिफ़्ट लेने में?

वह आकर उसकी बग़ल वाली सीट में बैठ गयी। 

राजन ने कार आगे बढ़ाई।

नमिता ने नोटिस किया कि वह उसकी छातियों को चोरी से देख रहा है बीच बीच में । उसने आह भरी सब मर्द एक जैसे ही होते हैं। उसकी अच्छी ख़ासी बीवी है पर वह है कि उसको लाइन मार रहा है। 

नमिता ने साड़ी ठीक को और अपनी छातियाँ पूरी ढक ली। 

राजन: राज की पढ़ाई कैसी चल रही है।

नमिता: बहुत अच्छा कर रहा है वह आजकल । 

राजन: हमारा बेटा राजू तो पढ़ता ही नहीं। उसका ध्यान यहाँ वहाँ ही भटकता रहता है।

नमिता: इस उम्र में बच्चे थोड़ा बहक जाते हैं उनका ध्यान रखना पड़ता है।

राजन: हाँ सही कहा भाभीजी आपने। 

नमिता: सुषमा उस दिन काफ़ी परेशान थी , उसकी पढ़ाई के लिए। 

राजन: वह पढ़ाई में कभी भी बहुत अच्छा नहीं था पर पास तो हो जाता था, आजकल तो वह सभी टेस्ट में फ़ेल हो रहा है। 

नमिता: हाँ इस उम्र में मोबाइल है और इंटर्नेट और सोशल मीडिया भी इनको भड़काने का काम करता है। मैंने तो अभी तक राज को मोबाइल दिलाया ही नहीं है।

राजन: अरे ये तो मोबाइल और लैप्टॉप सब लेकर रखा है। 

नमिता: फिर तो आपको इसका और ध्यान रखना होगा। 

राजन: जी हाँ सही कहा आपने। चलिए घर आ गया । 

नमिता उसको धन्यवाद देकर जाने लगी। तो वह बोला: भाभीजी क्या आपके पास कुछ समय होगा आज? 

नमिता: जी क्या हुआ?

राजन: मैं आपको अभी फ़ोन करूँगा और हो सका तो आपके आप सुषमा के साथ आऊँगा ।

नमिता: ओह ठीक है। अभी राज को आने में क़रीब ४० मिनट हैं।

अब वह दोनों अपने अपने घर चले गए।

अभी नमिता फ़्रेश बाई हुई थी कि सुषमा का फ़ोन आ गया। 

सुषमा: नमिता, मैं और राजन थोड़ी देर के लिए आ जाएँ क्या?

नमिता: हाँ क्यों नहीं। आ जाओ।

सुषमा: थैंक्स करके फ़ोन काट दी।

पाँच मिनट बाद वो दोनों नमिता के साथ ही बैठे थे। 

नमिता: क्या हुआ सुषमा , आप दोनों परेशान लग रहे हो ?

सुषमा: अब क्या बोलूँ? बोलने में भी हिचक हो रही है। 

नमिता: ऐसा क्या हो गया? बोलो ना जो भी मन में है।

राजन: असल में क्या है पिछले कुछ दिनों में हमें जो भी हमारे बेटे के बारे में पता चला है उसने हमें हिला दिया है। 

नमिता: ऐसा क्या पता चला है आपको?

राजन: हमने नोटिस किया था कि पिछले एक दो महीने से वह ज़्यादा समय लैप्टॉप पर ही लगाता था। वह शाम को भी खेलने नहीं जाता था। मुझे लगा कि कहीं पोर्न साइट पर तो नहीं जाता है इसलिए मैंने उसका लैप्टॉप माँगा और चेक भी किया पर शायद वह हिस्ट्री डिलीट कर देता था इसलिए मैं कुछ ख़ास पता नहीं कर पाया। 

फिर भी मैंने उसपर नज़र रखने का सोचा था। 

फिर एक हादसा हुआ और हम लोग हैरान रह गए। 

सुषमा: असल में तीन चार दिन पहले मैं सीढ़ियों से गिर गयी। राजू उस समय घर पर ही था। वो भाग कर आया और मुझे सहारा देकर बिस्तर पर लेटा दिया और इनको फ़ोन लगाया। ये अभी पास ही थे सो वापस आ गए। इन्होंने कहा है मैं दर्द की क्रीम लाता हूँ और किचन के एक दवाई के बॉक्स में चेक किए। तभी इनको याद आया कि दवाई तो राजू के कमरे में है क्योंकि उसको कुछ दिन पहले चोट लगी थी तब वह लेकर गया था। 

राजन: मैं जब उसके कमरे में पहुँचा तो मुझे दवाई मिल गयी। पर उस समय उसका लैप्टॉप चालू था। शायद अपनी माँ के गिरने की आवाज़ सुनकर वह भाग कर बाहर आया था। इसी हड़बड़ी में लैप्टॉप खुला रह गया था।

मैंने लैप्टॉप में सुषमा की एक फ़ोटो देखी जिसमें वह पूरी नंगी थी। मैंने ध्यान से देखा कि सिर तो उसका था पर बदन किसी और का था। मैं तो सन्न रह गया कि आख़िर इस लड़के के दिमाग़ में चल क्या रहा है 

नमिता: ओह ये तो बड़ी अजीब हरकत है। 

राजन: वही तो, अब मैं थोड़ा सा परेशान हुआ और मैंने कई विडीओ शॉर्ट कट देखे , जब उनको क्लिक किया तो मैं तो पागल ही हो गया। 

नमिता: क्या था उन विडीओ में ?

सुषमा: अब क्या बताऊँ उस नालायक ने मेरे नहाते हुए का विडीओ बनाया हुआ था। और तो और हमारे बेडरूम में भी कैमरा लगा कर हमारी सेक्स की भी विडीओ बनाकर रखा हुआ था। 

राजन: मेरा तो सिर ही घूम गया कि ये कैसा लड़का है जो अपनी माँ को नंगी नहाते हुए देख रहा है और अपने माँ बाप को सेक्स करते हुए देख रहा है। मेरा ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था और मैं नीचे आया तो देखा कि वह अपनी माँ की टाँग की चोट पर बर्फ़ लगा रहा था और इतनी भोली शक्ल बना रखी थी कि कोई सोच भी नहीं सकता कि वह इतना कमीना लड़का है। 

नमिता: फिर आपने क्या किया?

राजन: मैंने उसको उठाया और बाथरूम में जाकर एक कैम ढूँढा और फिर बेडरूम में भी एक कैम ढूँढा और उसको एक थप्पड़ लगाकर पूछा कि ये सब क्या है?

वह रोने लगा और बाद में ये पता चला कि उसको इंटर्नेट से ये ख़याल आया कि इस तरह कैम लगाकर अपने माँ बाप की सेक्स विडीओ बनायी जा सकती है।

वह कुछ लड़कों से चैट किया था और वो उसको बताए थे कि वो भी ऐसा करते हैं। 

सुषमा: जब इन्होंने मुझे ये सब बताया तो मेरे तो पैर से ज़मीन ही निकल गयी थी। बहुत समय लगा मुझे सामान्य होने में । मैंने तो उससे १० दिन बात ही नहीं की थी। 

नमिता: ओह, अब क्या करता है वह दिन भर? स्कूल जाता है या नहीं?

सुषमा: इन्होंने उसका लैप्टॉप छीन लिया है। और वह बस हर समय अपने कमरे में ही रहता है पागल सा हुआ जा रहा है। 

नमिता: ओह, मुझे लगता है उसे एक मनोवैज्ञानिक की ज़रूरत है। आप उसको डॉक्टर गुप्ता को दिखाइए । वह ज़रूर कोई हल निकाल देगा। 

सुषमा: तुम उनको कैसे जानती हो?

नमिता हकला सी गयी, वह उनको राज के बारे में सब नहीं बताना चाहती थी। वह बोली: वह मेरे परिचित हैं और आप चाहो तो मैं उनसे बात कर सकती हूँ।

सुषमा: हाँ प्लीज़ करो ना। 

नमिता उठकर थोड़ी दूर चली गयी क्योंकि उसको पता था कि वह उससे अश्लील बातें भी कर सकता है। उसने फ़ोन लगाया। 

गुप्ता: हेलो, जानू कैसी हो? 

नमिता: सर अभी मैं अकेली नहीं हूँ। आप मेरी बात ध्यान से सुनिए।

गुप्ता: अरे हम तो तुम्हारी सब बात ध्यान से ही सुनते हैं , तुम ही हो कि हमारा ध्यान नहीं रखती। देखो अब भी लंड सहला रहे है तुमको याद करके। 

नमिता: सुनिए तो मैं आपके पास एक केस भेज रही हूँ । फिर वह उसको थोड़ा सा संक्षेप में राजू के बारे में बतायी। 

गुप्ता: ओह तो ठीक है उनको बोलो कि वह तीनों कल दस बजे मेरे क्लीनिक में आ जाएँ। और राज कैसा है? 

नमिता: वह अब बहुत ठीक है, मैं आपसे बाद में बात करूँगी। बाई।

अब नमिता राजन और सुषमा को बोली: आप तीनो कल १० बजे उनसे मिलो और उनको सब कुछ साफ़ साफ़ बता दो। वह कोई ना कोई हल निकाल देंगे। 

अब वो दोनों उसको थैंक्स कहकर चले गए। 

नमिता ने देखा कि राज के आने में अब १५ मिनट हो रह गए थे। 

वह अपने कमरे में गयी और अपनी साड़ी उतार दी और पैंटी भी उतार दी। फिर उसने ब्लाउस और पेटिकोट मेंख़ुद को देखा और सोचने लगी कि आज ती राज उसकी चूचियों का बुरा हाल ही कर देगा। वह राजू और राज की तुलना करने लगी। उसने सोचा कि आह क्या ज़माना आ गया है? 

फिर वह सोचने लगी कि राज आज थोड़ा सा नर्वस दिख रहा था पता नहीं उसका पेपर कैसा हुआ होगा।

उसने सोचा कि अगर थोड़ा कम नम्बर भी आए तो भी वह उसे अपनी चूचियाँ दे ही देगी मज़ा लेने के लिए। उसने सोचा कि कम से कम वह राजू से तो बेहतर है।

आज पता नहीं वह कैसे मूड में होगा और पता नहीं चूचियाँ पीने के बाद वह अपना संयम तो नहीं खो देगा और उसे चोद तो नहीं डालेगा। फिर वह सोची कि उसे राज से आख़िर में चुदवाना तो है ही फिर क्या फ़र्क़ पड़ता है कि आज चुदवाऊँ या कुछ दिन बाद। 

यह सोचकर उसकी बुर गरम हो गयी। वह पेटिकोट के ऊपर से बुर खुजाने लगी। 

पर वह फिर से सोची कि ये जो वह अपने आप और राज पर बंधन लगा रही है , आख़िर उसकी ही भलाई के लिए है। उसने सोच लिया कि नहीं वह नहीं चुदवायेगी आज किसी भी हालत में। उसे राज को अपना बदन आख़िरी पेपर के बाद ही देना होगा। वरना वह हर समय बस उसे चोदने की फ़िराक़ में ही रहेगा और पढ़ाई नहीं कर पाएगा। 

उसने अपने मन को मनाया और उसके आने का इंतज़ार करने लगी। 


तभी दरवाज़ा खुला और राज अंदर आया--------------- 

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casanova0025

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Re: त्यागमयी माँ और उसका बेटा

Post  27 Jun 2016 09:37


please update

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Smoothdad

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Re: त्यागमयी माँ और उसका बेटा

Post  29 Jun 2016 09:49


नमिता सोफ़े पर बैठकर राज का इंतज़ार कर रही थी और TV भी देख रही थी। दरवाज़ा खुला और राज अंदर आया और आकर नमिता को सोफ़े पर बैठा देखा और धीरे से आकर उसके पीछे से उसको हाउ करके डरा दिया। नमिता को उसके आने का पता ही नहीं चला TV की आवाज़ में। नमिता हँसी और बोली: बड़ा ख़ुश दिख रहा है।

राज आकर माँ के सामने घुटनों पर बैठ गया और उसके पेट में अपना मुँह घुसा दिया, और बोला: ख़ुशी की बात ही है। देखो मेरा बैग खोलकर पेपर ऊपर ही रखा है। 

नमिता ने बैग खोला और सामने रखे पेपर को निकाला और उसको देखी और उसकी आँखें फट गयीं। २४/२५ यानी की ९६% !!! 

वह ख़ुशी से झूम उठी और नीचे झुककर उसके पेट मेंघुसे हुए अपने बेटे के गाल और गर्दन और उसका सिर चूमने लगी। 

वह बोली: बेटा आज मैं बहुत ख़ुश हूँ । सच अब मुझे विश्वास हो गया है कि तुम मेरा और अपने पापा का सपना ज़रूर पूरा करोगे। शाबाश मेरे बेटे। मुझे तुम पर गर्व है। 

वह और ज़ोर से उससे लिपट गयी और उसको चूमे ही जा रही थी । 

राज ने अपना सिर उसके गोद से उठाया और उसकी आँखों में देख कर बोला: माँ आपको इतना ख़ुश मैंने बहुत दिन बाद देखा है। सच मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। 

नमिता: हाँ बेटा आज मैं बहुत ख़ुश हूँ। 

अब राज ने अपना मुँह उसकी गोद में नीचे की ओर घुसा दिया और उसकी जाँघों को फैला दिया पेटिकोट के ऊपर से उसकी बुर की जगह में अपना मुँह डाल दिया और बोला: माँ फिर अपनी बुर दे दो ना आज प्लीज़, बहुत मन कर रहा है इसको देखने चूमने और चोदने का।

नमिता: चल हट बदमाश कहीं का, कोई नियम नहीं टूटेगा। समझा आज जो मिलना है वही मिलेगा। 

राज आँख मारकर बोला: माँ क्या मिलेगा आज?

नमिता ने उसका हाथ अपनी छाती पर रख कर कहा: आज ये मिलेगा तुझे । 

राज थोड़ा ऊपर होकर उसकी आँखो में देखकर बोला: माँ ये क्या नाम बोलो ना?

नमिता: बदमाश, तू नहीं सुधरेगा। चल चूचियाँ मिलेंगी आज तुझे बस, अब ख़ुश?

राज हँसता हुआ खड़ा हुआ तो उसकी पैंट सामने से बहुत फुली हुई दिख रही थी। 

वह बोला: माँ देखो क्या हाल है मेरे लौड़े का? इसको आराम दे दो ना।

नमिता ने उसके पैंट के ऊपर से लौड़े को पकड़ा और बोली: बेचारा इस तंग जगह में फंसा हुआ है। इसको बाहर निकालने से ही आराम मिलेगा। यह कहकर वह उसकी बेल्ट खोलने लगी और फिर उसने उसकी पैंट उतार दी और अब वह चड्डी में था और उसका खड़ा लौड़ा उसमें से बहुत कामुक दृश्य दिखा रहा था। नमिता ने लौड़े को चड्डी के अंदर हाथ डालकर टेढ़ा किया और फिर चड्डी उतार दी। उसका लौड़ा अब उसके सामने झटके मारते हुए ऊपर नीचे हो रहा था। 

नमिता ने पूरा लंड अपने हाथ में लेकर उसके हर हिस्से को सहला कर महसूस किया और उसके भारी बॉल्ज़ भी हथेली में कप बनाकर उनको पकड़कर सहलायी । राज अपने हाथ को कमर में रख कर अपनी माँ की हरकतों को देखकर मस्ती से भरे जा रहा था। 

राज: माँ लौड़ा चूस नहीं सकती तो क्या हुआ उसकी मिट्ठि तो ले सकती हो। 

नमिता ने उसके लौड़े को सहलाते हुए राज की आँखों मेंदेखा और बोली: हम्म आज के नम्बर को देखते हुए ये तो बनता है बेटा। 

अब वह उसके लंड को ऊपर उसके पेट की ओर झुका दी और उसके गोरे मोटे हिस्से को पूरी लम्बाई में छोटे चुम्बन देने लगी और नीचे से ऊपर की ओर चूमती गयी। फिर ऊपर से नीचे तक चूमती हुई वापस आयी और उसके बॉल्ज़ भी चूमने लगी। 

राज के लिए यह दृश्य दुनिया का सबसे उत्तेजित करने वाला दृश्य था वह आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽऽऽ कहकर अपनी कमर हिलाने लगा। तभी नमिता ने देखा कि उसके सुपाडे पर छेद पर एक सफ़ेद सी बूँद प्री कम चमक रही थी। वह अब उसके सुपाडे को चूमती हुई उस बूँद को अपने मुँह में लेकर निगल गयी। अब उसकी बुर पूरी तरह गीली हो गयी थी। उसके निपल्ज़ भी अब कड़क हो उठे थे। 

अब वह अपना मुँह उसके लंड से हटायी और बोली: ठीक है बस? 

राज झुक कर अपने माँ के होंठ चूम लिया और बोला: आऽऽऽऽह माँ बहुत अच्छा लगा, थैंक्स। 

फिर वह माँ को अपनी गोद में उठाकर नमिता के बेडरूम में ले गया और उसको बिस्तर पर लिटा दिया। अब वह अपनी क़मीज़ भी खोल कर पूरा नंगा हो गया। फिर वह नमिता के बग़ल में लेट गया और नमिता के आधे शरीर के ऊपर अपना मुँह रख कर उसके पेट को चूमने लगा। नमिता भी उसके बालों पर उँगलियाँ फेर रही थी। 

अब वह उसके ब्लाउस भी उतारने लगा। नमिता ने हाथ उठाकर उसको ब्लाउस निकालने में उसकी मदद की। वह नमिता की नयी सेक्सी ब्रा से ख़ुश हो गया और बोला: माँ ये मेरे लिए ही पहनी है ना? 

नमिता: और किसके लिए पहनूँगी? 

राज ने उसकी बाहँ उठायी और उसकी बग़ल चूमने लगा। बारी बारी से उसकी बग़ल सूंघकर और चाट कर वो मदमस्त हो चला था।

अब वह उसको बोला: माँ ज़रा पेट के बल लेट जाओ ना। नमिता उसको देख कर बोली: क्या इरादा है?

राज हँसते हुए: कुछ ख़ास नहीं, सब नियम के अंदर। 

नमिता पलट कर पेट के बल लेट गयी। अब राज उसकी नंगी और गुदाज पीठ को सहलाने लगा और बोला: माँ मुझसे मालिश करवा लिया करो जब आप थक जाया करो। 

नमिता: ह्म्म्म्म्म तू मालिश के साथ साथ क्या क्या करेगा मुझे अच्छे से पता है। 

राज हँसने लगा और उसकी पीठ को चूमने लगा। गर्दन से लेकर नीचे उसकी चूतरों के उभरे हुए हिस्से तक उसके होंठ घूम रहे थे। फिर उसने पेटिकोट के ऊपर से उसके बड़े चूतरों को दबाना चालू किया जैसे आटा गूँथ रहा हो। नमिता की आऽऽहहह निकल गयी। 

अब वह नीचे पैरों के अँगूठों को चूसने लगा । नमिता झटके से आह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी। अब राज के होंठ इंच दर इंच उसकी टांगों को चूमते हुए ऊपर जांने लगे। जब वह पिंडलियों से होकर उसके घुटनों तक पहुँचा तब नमिता ने उसको कहा: सुनो मेरे पेटिकोट को मोड़ लो मेरी जाँघों तक नहीं तो तुम नियम तोड़ दोगे। 

राज: ठीक है आप अपना चूतर उठाओ । जब वह चूतर उठायी तब उसने उसके पेटीकोट को मोड़कर उसकी ऊपरी जाँघों के बीच फँसा दिया। अब नमिता ने कमर नीचे कर दिया। राज अब उसकी जाँघों को चूम रहा था और गदराये हुए मांसल बदन का आनंद लेने लगा। अब वह पेटकोट के ऊपर से उसके चूतरों को मसलने लगा, और एक हाथ उसकी दरार में डाल दिया । नमिता: हाऽऽऽऽऽऽऽयहय क्या कर रहा है? हाऽऽऽथ निकाऽऽऽऽऽल वहाँ से उइइइइइइइइओओ। 

राज ने अपनी उँगलियाँ उसकी बुर और गाँड़ में पेटिकोट के ऊपर से दबा दिया और उसकी उँगलियाँ पेटिकोट मेंलगे गीले रस से गीली हो गई। वह उनको चाट कर बोला: माँ आपकी पेटिकोट में आपके बुर का रस लगा है , मैं उसे चाट रहा हूँ।

नमिता: आह्ह्ह्ह्ह्ह बस कर , अब ऊपर आ जा। 

राज: अच्छा चलो अब पलटो और पीठ के बल लेट जाओ। 

नमिता जल्दी से पलट गयी क्योंकि उसकी बुर की खुजली बहुत बढ़ गयी थी। अब राज उसके ऊपर आ गया और उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही चूमने लगा। 

राज: माँ अब इस ख़ज़ाने के दर्शन कर लूँ? वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए बोला।

नमिता: आऽऽऽऽहहह हाँ कर ले। 

अब राज ने अपना हाथ पीछे लेज़ाकर उसकी ब्रा के हुक खोले। 

नमिता भी साँस रोक कर उसकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगी। 

अब राज ने ब्रा को उतरा और नमिता के बड़े बड़े गोरे दूध जिनके आगे काले बड़े लम्बे निपल थे उसकी आँखों के सामने थे। 

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Smoothdad

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Re: त्यागमयी माँ और उसका बेटा

Post  29 Jun 2016 09:50


राज बिना पलक झपकाए उन गोरे दूधिया चूचियों को देखे जा था था जैसे उनको हमेशा में लिए अपनी आँखों में भर लेना चाहता हो। 

फिर उसने अपना दोनों हाथ उनपर रखा और उनके सॉफ़्ट्नेस को महसूस किया । आह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त चूचियाँ थीं बड़ी बड़ी बिलकुल नरम और साथ ही फ़र्म भी। कहीं कोई कमी नहीं थी इन चूचियों में। 

अब वह उनको दबाकर उन्हें महसूस कर रहा था और माँ को देख रहा था किउसकी आँखें भी मज़े से मुंदी सी जा रही थीं। फिर उसने निप्पल को मसला। अब नमिता हाऽऽऽऽऽऽयय्यय करके उससे लिपटने लगी। जब वह उनको जी भर कर मसल लिया तो उसने उसकी एक चुचि को हाथ में लिया और बोला: माँ देखो आपके दुद्दु मेरे हाथ मेंही नहीं आ रहे हैं ,अब मैं इसको वैसे ही पी लूँ जैसे जब मैं छोटा था तब पिया करता था?

नमिता: आह्ह्ह्ह्ह हाँ पी ले। 

राज : माँ आप उठकर बैठो और अपने हाथ से मुझे वैसे ही पिलाओ जैसे तब पिलाती थी जब मैं छोटा था। 

नमिता भी अब बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और वह उठ बैठी और राज उसकी गोद में लेट गया और अब नमिता ने झुक कर उसका मुँह चूमा और फिर अपने एक स्तन को अपने हाथ मेंलेकर उसके निपल को राज के मुँह में दिया। राज का लौड़ा झटके मारने लगा। 

वह उसकी चुचि को मुँह में लेकर चूसने लगा। फिर वह दूसरी चुचि दबाकर मस्त हो गया।नमिता उसके लौड़े को सहलाने लगी । थोड़ी देर चूसने के नाद नमिता ने अपना दूसर स्तन भी उसके मुँह में दिया, जिसे वह चूसने लगा। नमिता की भी हालत बहुत ख़राब हो रही थी । उसकी बुर पानी छोड़े जा रही थी। उसने खुलेआम अपना एक हाथ उसके सिर को अपनी गोद से एक तरफ़ को हटाया और अपनी बुर खुजाने लगी। 

राज समझ गया कि वह बहुत उत्तेजित हो चुकी है, इसलिए वह उसको पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर आकर उसकी चूचियों को चूसने लगा। अब वो एक हाथ से एक चुचि दबा रहा था और दूसरी को चूस रहा था। उसका लौड़ा पेटिकोट के ऊपर से उसकी बुर को ठोकर मार रहा था । उसने नमिता की टाँगें फैलाकर उसके बीच में अपना लौड़ा रखा और उसको पेटिकोट के ऊपर से ही रगड़ने लगा। 

नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह हाय्य्य्य्य्य्य चिल्ला रही थी।वह राज के चूतरों को दबाने लगी। राज मी कमर हिलाये जा रही थी। उसकी चुचि पीकर राज भी मस्त हो गया था और जल्दी ही आऽऽहहह ह्म्म्म्म्म्म करने लगा। 

अब नमिता भी झड़ने के क़रीब आ गयी थी। वह चिल्लायी : आऽऽऽऽऽऽह उइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽ मैं झड़ीइइइइइइइइइइइ ।

राज भी हाँन्न्न्न्न्न्न्न माँआऽऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगा। 

उसका रस उसके पेटिकोट को भर गया और नमिता का भी रस उसके पेटिकोट को भीगा गया। नतीजा ये हुआ कि पेटिकोट नीचे से पूरा कामरस से भीग गया था। 

अब राज भी उसकी बग़ल में लेट गया। नमिता भी अब राज के लौड़े को सहलायी और देखी किवह अभी भी खड़ा था । उसने उस पर हाथ फेरा तो उसकी उँगलियाँ उसके चिपचिपे रस से बजे गयी। अब वह राज के सामने ही अपनी ऊँगली चाटने लगी। राज को बड़ी ख़ुशी मिली ये देख कर कि वह उसे इतना प्यार करती है कि उसका रस भी चाट रही है। 

फिर वह उठी और बाथरूम में जाकर कोमोड पर बैठी तभी राज अंदर आ गया और बोला: माँ मैं आपको सु सु करते देखना चाहता हूँ। 

नमिता: नहीं नियम नहीं टूटेगा। थोड़ी दिन और इंतज़ार कर ले।

तभी वह बोला: अच्छा सु सु करो , आवाज़ तो सुन लेने दो । 

नमिता की सु सु निकलने लगी। उसकी सीटी सी आवाज़ निकलने लगी। जिसको सुन कर राज बहुत उत्तेजित हो गया। 

फिर वह उठी और अपना पेटिकोट उपर करके नाड़ा बाँध ली। 

राज: माँ पेटिकोट तो बदल लो पूरा गीला हो गया है। 

नमिता: तेरे जाने के बाद बदलूँगी नहीं तो तू पता नहीं क्या करेगा। 

राज उसके कोमोड से उठने के बाद ख़ुद मूतने लगा और नमिता को बोला: माँ मुझे ही सु सु करा दो। 

नमिता हँसते हुए उसके लौड़े को पकड़कर उसको सु सु कराने लगी। 

राज भी अपनी माँ के नंगे दूध को सहलाने लगा सु सु करते हुए। 

उसको सु सु कराके नमिता ने एक एक्स्पर्ट की भाँति उसका लौड़ा अच्छे से हिलायी और आख़री बूँद भी नीचे गिरा दी। 

राज: माँ आप तो बड़ी अनुभवी लगती हो इस काम में भी। 

नमिता हँसते हुए: तेरे पापा भी यह सब कुछ करवा चुके हैं। 

राज: पापा और क्या क्या करवा चुके है। आपसे। 

नमिता: सब करवा चुके हैं। 

अच्छा अब चल बाहर जा, मैं भी कपड़े बदलूँगी और फिर खाना खाते है। 

राज झुक कर उसकी चुचि चूसा और ठीक है कह कर वह चला गया। 

नमिता ने अपना पेटिकोट बदला और सफ़ाई करके खाना लगाने लगी। 

फिर ब्रा, ब्लाउस और पेटिकोट पहन कर वह खाना लगाने लगी। तभी राज भी आ गया और दोनों ने खाना खाया। 

फिर राज पढ़ने चला गया और नमिता आराम करने लगी।


शाम को जब नमिता उठी तब वह किचन में जाकर चाय बनाई और राज के कमरे में गयी। वहाँ वह पढ़ने में मग्न था। 

नमिता: चल बेटा अब चाय पी ले। वह उसको चाय देते हुए बोली।

राज ने अपना सिर किताब से उठा कर माँ को देखा कि वह ब्लाउस और पेटिकोट में है।

उसने माँ के चूतरों पर अपना पंजा जमा दिया और उसको सहलाते हुए बोला: माँ बिना पैंटी के आपके चूतरों को सहलाने में बहुत मज़ा आता है। 

नमिता: अच्छा और क्या क्या करने में तुझे बहुत मज़ा आता है?

राज: आपके मम्मे चूसने में भी। 

नमिता: आज दोपहर को इनको चूस चूस करके लाल तो कर दिया है तूने, बदमाश कहीं का।

राज: माँ फिर से वही बदमाशी करने की इच्छा हो रही है। 

नमिता: चल हट, अभी पढ़ाई कर , रात को सोने के पहले फिर मस्ती कर लेना। वैसे परसों कौन सा पेपर है तेरा?

राज: केमिस्ट्री है और आपका टार्गट ८५% है, याद है ना अगर इतने आ गए तो आप सिर्फ़ पैंटी में मेरे सामने आएँगी। 

नमिता हँसते हुए: हाँ याद है। और मुझे पक्का विश्वास है कि मेरा बेटा अच्छे नम्बर ज़रूर ही लाएगा।

राज: माँ वो तो लाना ही है क्योंकि आपको पैंटी में देख कर आपकी बुर को पैंटी के ऊपर से छू कर और सूंघ कर मदहोश जो होना है।

राज या सब बोलते हुए उसके चूतरों को दबा रहा था। अचानक उसने उसकी चूतरों के दरार में अपना हाथ डाल दिया और उसकी बुर और गाँड़ को सहलाने लगा। 

नमिता झटके से पीछे हटी और उसको एक चपत लगाई और बोली: तू और तेरी बदमाशी से मैं भर पायी। कहा ना अब रात को ही करना। चल पढ़ाई कर ले। 

ये कह कर वह जाने लगी। तभी राज बोला: माँ एक मिनट, देखो मैं क़रीब २ घंटे से लगातार पढ़ रहा हूँ। तो मेरा कुछ मनोरंजन तो कर दो। 

नमिता दरवाज़े के पास रुक गयी और बोली: कैसा मनोरंजन?

राज: माँ, आप बुर नहीं दिखाना चाहती तो कोई बात नहीं, पर अपने मस्त चूतर तो दिखा सकती हैं ना? प्लीज़ एक बार पेटिकोट उठा कर अपने पिछवाड़े का दर्शन तो करा दो। 

नमिता: देख ये सब करूँगी तो फिर से तू उत्तेजित हो जाएगा और अपनी पढ़ाई से ध्यान हटा बैठेगा।

राज : नहीं माँ, अल्टा होगा , मैं फ़्रेश हो जाऊँगा और ज़्यादा मज़े से पढ़ूँगा। 

नमिता: ओह, सच कह रहा है, तेरी पढ़ाई का हर्ज नहीं होगा?

राज: पक्का नहीं होगा। 

नमिता: उफ़्फ़्फ तेरे से मैं कभी जीत नहीं सकती,बाबा। चल ले देख ले , पर बस एक झलक, ठीक है?

राज: माँ, उससे क्या फ़ायदा? दिखाना है तो अच्छे से दिखाओ, वरना मत दिखाओ।

नमिता: अच्छा चल २ मिनट , काफ़ी है देखने के लिए, ओके?

राज: ओके माँ , ठीक है।

अब नमिता घूम गयी और उसने अपना पेटिकोट ऊपर उठा दिया कमर से भी ऊपर। और राज के सामने बड़े बड़े मोटे गोल गोल बहुत गोरे मांस के पिंड थे, वह अपना लौड़ा रगड़ते हुए आँखें फाड़कर अपनी माँ का नंगा पिछवाड़ा देखे जा रहा था। 

तभी वह बोला: आह्ह्ह्ह्ह माँ क्या चूतर है आपके? बहुत मस्त। माँ,प्लीज़ एक बार गाँड़ भी दिखा दो ना? प्लीज़, प्लीज़।

नमिता ने कहा: अब तू हद से ज़्यादा आगे नहीं बढ़ रहा है क्या?

राज: प्लीज़ माँ एक बार, चूतरों को फैलाओ ना, गाँड़ दिखाओ।

नमिता ने आह भरी और अपने दोनों हाथ अपने दोनों चूतरों पर रखा और उनको फैलाया और अपने गाँड़ के भूरे छेद को अपने बेटे को दिखाने लगी। 

राज को लगा कि वह झड़ ही जाएगा। आऽऽऽहहहह क्या दृश्य था कि उसकी अपनी माँ अपने चूतरों को फैलाकर अपनी गाँड़ ख़ुद ही दिखा रही थी। 

राज: आऽऽऽहहह माँ तुम्हारी गाँड़ कितनी सुंदर है। सच माँ बहुत बढ़िया माल हो आप। 

नमिता ने अब अपना पेटिकोट नीचे गिरा दिया और बोली: नालायक अपनी माँ को माल बोलता है?

राज: माँ , माल को माल बोलने में क्या बुरायी है? अच्छा ये तो बताओ कि पापा आपकी गाँड़ मारते थे क्या?

नमिता: हाँ मारते थे, वह भी तेरी तरह इसके दीवाने थे। 

चल अब पढ़ने बैठ जा । अगर नहीं पढ़ पाएगा तो मैं तेरी मूठ्ठ मार दूँ? उसने उसके लौड़े को देखते हुए कहा जिसे अब राज ने बाहर निकाल लिया था और मूठिया रहा था।

राज: नहीं माँ मैं अभी ठंडा पानी डाल कर इसको ठंडा करूँगा। 

नमिता : चल ठीक है अब देख लिया ना? चल अब पढ़ने बैठ जा। 

राज: हाँ माँ बस अभी बैठ जाऊँगा। लेकिन रात को सोने से पहले थोड़ा मज़ा करेंगे, ठीक है ना?

नमिता: ठीक है। कर लेना ,मैंने कौन सा मना किया है?

नमिता के जाने के बाद वह बाथरूम मैं जाकर ठंडे पानी से अपने लौड़े को शांत किया और फिर पढ़ने बैठ गया। 

नमिता घर के काम में लग गयी और खाना बनाने लगी। तभी उसका मोबाइल बजा। सुषमा थी उसकी पड़ोसन।

नमिता: बोल सुषमा कैसी है? 

सुषमा: ठीक हूँ। डॉक्टर गुप्ता से मिली थी उसिके बारे में बात करनी थी। मैं आ जाऊँ क्या?

नमिता: नहीं नहीं, राज घर पर है, तू अकेली है क्या? 

सुषमा: हाँ मैं अकेली हूँ। 

नमिता:मैं आती हूँ। फिर बात करेंगे। 

थोड़ी देर बाद वह राज को बोली: मैं ज़रा पड़ोस से आती हूँ। 

राज ने हाँ में सिर हिला दिया। 

नमिता सुषमा के घर पहुँची और सोफ़े पर बैठ गयी। 

नमिता: हाँ बोल क्या हुआ गुप्ता के यहाँ?

सुषमा: कल हम तीनों गए थे । वह पूरी बात सुना,राजू के बारे में और वह हमको कल फिर बुलाया है। ये कहकर कि कल वह ज़रा ज़्यादा समय लेगा। 

नमिता: आज क्या बातें हुईं?

सुषमा: आज तो पहले मैं और राजू के पापा ही मिले । राजू को हमने बाहर बिठा दिया था। राजू के पापा ने उनको राजू की हरकतों के बारे में बताया कि कैसे वह मेरी नहाते हुए और हमारे बेडरूम की गंदी विडीओ बना रहा था। और कैसे उसका पढ़ाई से तो ध्यान ही हट गया था। तो गुप्ता बोले कि वह राजू से अभी हमारे सामने बात करेगा । 

नमिता: फिर?

सुषमा: फिर उसने राजू को भी अंदर बुलाया और राजू ने सब सच मान लिया कि उसने इंटर्नेट में चैट करके ये सब हरकतें की है। 

नमिता: ओह, फिर क्या बोला गुप्ता?

सुषमा: उसने कल फिर बुलाया है। विस्तार से इस पर बात करेगा और वह भी सिर्फ़ राजू से । पता नहीं हमको क्यूँ बुलाया है?

नमिता: चलो कर लो कल का भी सेशन उसके साथ। शायद कोई रास्ता निकल ही आए। 

फिर थोड़ी देर और बात करके नमिता अपने घर आ गयी। 

नमिता को उत्सुकता हुई उसने गुप्ता को फ़ोन किया: हेलो कैसे हैं 

गुप्ता: अरे बस तुमको याद करके लंड हिला रहे हैं।

नमिता: छी आप भी ना , बस हमेशा गंदी बात ही करते हैं। ये बताइए कि राजू और उसके माँ बाप से मिलने के बाद आपका क्या विचार है। 

गुप्ता: ये तो कल पता चलेगा। कल हम राजू से अकेले मेंबात करेंगे। तुमको अगर सुनना है कि हमारी क्या बात हुई तो आ जाओ और सुन लो पूरी बात। 

नमिता: मैं सुनकर क्या करूँगी? 

गुप्ता: अरे सुनोगी तब तो समझोगी कि आजकल के लड़कों के दिमाग़ में क्या चल रहा है। शायद इससे तुमने अपने बेटे का मन समझने में भी मदद मिले। 

नमिता: इसका राज से क्या सम्बंध?

गुप्ता: सम्बंध तो आज कल के लड़कों की मानसिकता से है। शायद तुम्हें कुछ ज़्यादा साफ़ दिखे आज के लड़कों की सोच और उनके समझने का अन्दाज़।

नमिता: ऐसा क्या? पर सुषमा को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा कि मैं उसके व्यक्तिगत मामलों में टाँग अड़ाऊँ। 

गुप्ता: अरे उसको पता ही नहीं चलेगा। मैंने उनको ११ बजे बुलाया है, तुम १५ मिनट पहले आ जाना । बाक़ी का मैं संभाल लूँगा। 

नमिता : ठीक है, हो सका तो मैं ज़रूर आऊँगी। 

फिर उसने फ़ोन काट दिया। 

अब उसने राज को खाना खाने को बुलाया और दोनों ने खाना खाया। 

राज: माँ सुषमा आंटी क्या बोल रही थी?

नमिता: बेटा, हर घर की अपने परेशानियाँ होती हैं। उसका लड़का पढ़ने मेंशुरू से ही अच्छा नहीं है सो बेचारी परेशान रहती है।

राज: ओह, चलो मेरा तो हो गया , मैं पढ़ने जा रहा हूँ, पर सोने के पहले एक बार आऊँगा आपके दुद्दु पीने। 

नमिता: ठीक है आ जाना।

राज: माँ आप आज मेरे लिए सिर्फ़ पेटिकोट पहन कर ही रहना। ऊपर से पूरी नंगी रहना।

नमिता: भाग यहाँ से , कुछ भी कहते रहता है।

राज उठकर नमिता को चूमा और पढ़ने चला गया। 

नमिता अपना काम ख़त्म करके थोड़ी देर TV देखी फिर अपने कमरे में जाकर बाथरूम में गयी और फ़्रेश होकर उसने अपने आप को शीशे मैं देखा और सोचने लगी कि ऐसा आख़िर उसमें क्या है जो राज उसपे फ़िदा रहता है। 

उसने ब्लाउस में कसे अपने बड़े कबूतरों को देखा और मुस्कुरा उठी। उसे राज की बात याद आइ कि वह बोल रहा था कि सिर्फ़ पेटिकोट में ही रहना।उसने अपना ब्लाउस उतारा और ब्रा में अपने कबूतरों को देख कर वह मस्त हो गयी। फिर उसने ब्रा भी उतार दी और अपनी चूचियों को देख कर मुस्करायी । ये ही तो उसके अंग हैं जिसपर उसका बेटा पूरा फ़िदा है। वह अब पेटिकोट भी उतार दी और और अपने नंगे बदन को देख कर ख़ुद ही मुग्ध हो गयी। उसका बिलकुल संतुलित भरा हुआ और गोरा शरीर उसके सामने चमक रहा था। उसके पेट में कहीं भी अतिरिक्त चरबी नहीं थी। उसका पेड़ू और उसने क़रीने से कटे हुए बाल जैसे उसकी बुर को चार चाँद लगा रहे थे। उसकी बुर का ऊपरी सिरा ही दिख रहा था। उसने अपने बुर पर हाथ रखा और उसके चिकनेपन के अहसास से वह मस्त हो गई। उसने अपने बुर के बालों को हमेशा साफ़ रखा था। अब वह घूमी और शीशे मेंअपनी चिकनी पीठ और अपने बड़े नितम्ब देखी और मुस्कुराती हुई सोची कि उसका बेटा इनका भी तो दीवाना है। 









अब उसने अपने बालों को लपेटा और उनको बिना गीले किए नहाने लगी । उसने अपने सब अंगों विशेष कर चुचि के निचले हिस्से को और बुर और गाँड़ को अच्छे से साफ़ किया। तौलिए से पोछते हुए वह सोच रही थी कि आज राज कैसे उसके साथ मस्ती करेगा, क्या पता?

उसकी बुर गीली होने लगी। 

अब उसने फ़ैसला किया कि वह राज की इच्छा के अनुसार ऊपर से नंगी ही रहेगी। अब वह बेडरूम में नंगी आयी और उसने आलमारी से एक लाल बिलकुल ही पतला सा साटिन का पेटिकोट निकाला और पहन ली। फिर उसने अपने बदन में एक शानदार सेंट लगाया और बिस्तर पर लेट गयी और एक पतली सी चादर ओढ़ ली। 

अब वह एक अभिसारिक़ा की तरह अपने बेटे का इंतज़ार करने लगी। रात के १० बज चुके थे। लेटे हुए उसकी नींद लग गयी। 

अचानक नमिता को अहसास हुआ कि वह अकेली नहीं है, उसने देखा कि राज उसके बग़ल में लेटा हुआ उसको मुग्ध दृष्टि से देख रहा था। 

वह उसको देखकर मुस्करायी और उसको अपनी बाहों में ले ली। राज भी उसको अपनी बाहों मेंलेकर उसके गाल और गर्दन चूमने लगा। फिर चादर के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाकर बोला: माँ नंगी हो ना? देखो आपके निपल चादर से दिख रहे हैं। 

नमिता: तू बोला था ना कि ऊपर से नंगी रहना तो मैं तेरी बात कैसे टालती ?

राज मस्ती से उसके होंठ चूसने लगा और अबकि बार नमिता ने भी अपने होंठ नहीं हटाए और वह भी उसका चुम्बन में साथ देने लगी। 

राज पहली बार माँ का चुम्बन में योगदान पा कर मस्ती से उसके होंठ चूसने लगा। अब नमिता ने अपनी जीभ उसके होंठों पर फिरायी और राज उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। नमिता ने अपनी पूरी जीभ उसके मुँह में घूसेड दी। अब राज भी अपनी जीभ उसकी जीभ से रगड़ने लगा। फिर जैसे ही नमिता की जीभ वापस उसके मुँह के अंदर गयी, राज ने अपनी जीभ नमिता के मुँह में डाल दी और नमिता उसकी जीभ चूसने लगी। अब वह दोनों वासना की आँधी में बह चले थे। राज ने नमिता को पूरी ताकत से भींच रखा था। उसका लौड़ा चादर के ऊपर से नमिता की जाँघों को ठोकर मार रहा था। 

अब राज ने अपना मुँह नमिता के मुँह के ऊपर लाया। अब वह नमिता की आँखों में झाँकते हुए उसने थूक निकाला और उसे नमिता के मुँह में डाला और नमिता हँसते हुए उसे पी गयी। 

राज अब उसकी चादर नीचे किया और सामने उसके बड़े बड़े स्तन देखकर मस्ती से उसमें अपना मुँह घुसा दिया । अब वह उसकी गोलाइयों को चूमने लगा। उसने हाथ में पकड़कर दोनों चूचियाँ दबाया और उनके निपल्ज़ को भी ख़ूब ऐंठकर नमिता की बुर गीली कर दिया। फिर राज बड़े देर तक एक एक करके उसकी चूचि पीता रहा। 

फिर उसका हाथ नीचे उसके पेट पर पड़ा और उसकी नाभि में ऊँगली डाल दिया। नमिता करवट से लेटी हुई थी इसलिए जब उसका हाथ अब नीचे उसके चूतरों तक पहुँचा वह उनको दबा कर मस्त हो गया।

वह बोला: माँ आपके चूतर बहुत मस्त है। इनको दबाने मे बहुत मज़ा आता है। ये कहते हुए उसकी गाँड़ के छेद को पेटिकोट के ऊपर से सहलाने लगा। 

नमिता: आऽऽऽऽह क्या कर रहा है? वहाँ से हाथ हटा ।

राज: माँ , ये गाँड़ तो आपने दूर से आज दिखायी थी, अभी पास से दिखा दो ना।

नमिता: नहीं बस एक बार दिखा दी ना। बाक़ी बाद में देख लेना।

राज: माँ प्लीज़ एक बार प्लीज़। मैं बस पेटिकोट उठा दूँगा और देख लूँगा। आप पेट के बल लेट जाओ। 

नमिता : आह नालायक तू मानेगा तो है नहीं! ये कहते हुए वह पेट के बल लेट गयी। 

राज नीचे आकर बोला: माँ पैर उठाओ ना। 

नमिता ने पैर उठाए तो वह घुटनों तक पेटिकोट उठाने में कामयाब हो गया। अब उसने कहा: माँ थोड़ा कमर भी उठाओ ।

नमिता ने कमर उठायी और राज ने पेटिकोट को उसकी कमर तक उठकर उसके चूतरों को पूरा नंगा कर दिया। 

राज की आँखें जैसे इस दृश्य को देखकर पागल सी हो गयी।

नामित ने अपनी जाँघें सटा ली। वह बोला: आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माँ क्या चूतर है। आपके ? कितने गोरे , कितने गोल गोल, और कितने मांसल। 

ये कहते हुए वह उनको ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और अपने लौड़े को मसलने लगा। वह वहीं पलंग पर खड़ा हुआ और एक झटके में अपना लोअर और चड्डी निकाल दिया और अपना लौड़ा लहराता हुआ सामने आ गया ।फिर वह नमिता के चूतरों के एक एक हिस्से को चूमने लगा। फिर वह उसको दाँतों से हल्के हल्के काट कर भी मस्त हो गया। 

नमिता: हाऽऽऽऽय काट क्यों रहा है? आऽऽऽहहहह ।

राज ने अब उसके चूतरों को फैलाया और उसकी गाँड़ के चिकनी छेद को देखकर जैसे दीवाना हो गया। अब उसने अपना मुँह उसकी चूतरों की दरार में डाल कर उस पूरे हिस्से को जीभ से चाटने लगा। फिर उसकी जीभ उसके गाँड़ के छेद पर चलने लगी। 

नमिता: आऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह छोड़ हाऽऽय्यय क्याआऽऽऽऽ कर रहाआऽऽऽऽ है। उईइइइइइइइइ। 

राज ने अब एक ऊँगली में थूक लगाया और उसकी गाँड़ में डाल कर उसको अंदर बाहर करने लगा। 

नमिता: आऽऽऽऽहहह निकाआऽऽऽऽऽल ।

राज: माँ मज़ा लो ना। मुझे भी आपकी गरम गाँड़ मस्त लग रही है। 

नमिता को बुर ने पानी छोड़ना चालू कर दिया था। उसका अपना बेटा आज उसकी गाँड़ में ऊँगली कर रहा है, यही बात उसको बहुत उत्तेजित कर रही थी।

वहीं राज भी अपना लौड़ा लाकर नमिता के चूतरों पर रगड़ने लगा। 

अब नमिता चिल्लायी: नहीं नहीं, नियम पालन करना है तुमको। 

उसको अंदर नहीं डाल सकते तुम। 

राज: माँ, गाँड़ की तो बात नहीं हुई थी, सिर्फ़ बुर की चुदायी की बात हुई थी। 

नमिता: नहीं नहीं, किसी भी तरह को चुदायी अभी नहीं हो सकती। 

राज: ठीक हाँ माँ , मैं ऐसे ही आपके चूतरों पर रगड़ कर अपना पानी निकाल देता हूँ।

नमिता कुछ नहीं बोली। अब राज उसकी पीठ पर पूरा आ गया और उसकी छातियों को दबाने लगा और अपना लौड़ा उसके चूतरों के दरार में रगड़ने लगा मानो उसकी गाँड़ मार रहा हो। उसकी जाँघें नमिता की जाँघों से रगड़ रही थी। उसने नमिता के निपल्ज़ ऐंठने शुरू किए और लौड़े को उसके गाँड़ के आसपास रगड़ने लगा। वह उसकी पीठ और गर्दन को चूमे हाँ रहा था। 

नमिता सोच रही थी कि क्या उसको हाँ कर दे और उससे चुदवा लेवे? आह क्या खुजली उठ रही थी बुर के अंदर, जैसे सैकड़ों चिटियाँ घुस गयीं हों। पर उसने अपने को नियंत्रित किया और अपने चूतरों को इस तरह से हिलाने लगी कि राज के लौड़े को ज़्यादा रगड़ मिले जिससे वह झड़ सके। अचानक राज अपने कमर को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा, और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म्म्म मैं झड़ाआऽऽऽऽऽऽऽ कहकर अपना रस उसकी गाँड़ में और चूतरों पर गिराने लगा। 

नमिता ने भी कमर हिलाके उसका साथ दिया। 

अब वह उसकी पीठ से हट कर वापस माँ की तरफ़ करवट लेकर लेट गया था । 

नमिता भी थोड़ी देर बाद उठी और अपना पेटिकोट नीचे की और उसका रस अपने पेटिकोट में पोंछ ली। राज नमिता को देखे जा रहा था । नमिता झुक कर उसको चुमी और बोली: मज़ा आया बबुआ?

राज उसकी लटकती छाती को मुँह मेंलेकर चूसा और बोला: आऽऽऽऽऽह बहुत मज़ा आया।

नमिता: चल अब जाके सो जा और सुबह उठकर पढ़ लेना। 

राज: नहीं माँ, अभी मैं कम से कम २ बजे रात तक पढ़ूँगा।

नमिता: चल ठीक है अब जा , मैं भी सोऊँगी। 

राज एक बार फिर नमिता को चूमा और अपना लौड़ा हिलाता हुआ बाहर चला गया। अपने कमरे में बाथरूम में जाकर राज ने अपनी सफ़ाई की और फिर कपड़े पहन लिए। फिर उसने सोचा कि आज माँ झड़ी नहीं है। शायद ऊँगली करेगी या तो बाथरूम में या सोने के पहले। पता नहीं क्यों वह उत्तेजित हो गया और नमिता के कमरे की खिड़की के पास जा कर अंदर झाँका। उधर नमिता बाथरूम में जाके अपना पिछवाड़ा साफ़ की , उसकी बुर में आग लगी थी। उसने सोचा कि बाथरूम में ही ऊँगली कर ले पर फिर रुक गयी और फिर एक तौलिया लपेट कर बाहर आयी। उसकी चूचियाँ नंगी थीं और तौलिया उसने क़मर में लपेटा हुआ था। 

राज ने नमिता को बाथरूम से बाहर आते देखा तो वह समझ गया कि वह ऊँगली नहीं करी है। उसे लगा कि अब कुछ मस्त देखने को मिलेगा। ये सोच कर उसका लौड़ा खड़ा हो गया। उधर नमिता आलमारी से एक ब्लाउस निकाली और पहन ली लेकिन हुक नहीं लगायी। फिर वह एक पेटिकोट निकाली और अब उसने अपना तौलिया गिरा दिया और उसका नंगा दूधिया बदन राज के सामने था पूरे शबाब पर। आह्ह्ह्ह्ह क्या पिछवाड़ा था, राज का लौड़ा पूरा खड़ा हो चुका था। । उधर नमिता ने अपना पेटिकोट ऊपर से पहनना शुरू किया और फिर नाड़ा बाँध कर मुड़ी। अब उसके खुले ब्लाउस से झाँकती हुई बड़ी बड़ी चूचियाँ बहुत मादक दिख रही थी। 

अब उसने एक दूसरी आलमारी खोली और उसमें एक लोकर खोला। । राज हैरान था कि इस समय वह लोकर से क्या निकालेगी? 

अब वह शायद जो ढूँढ रही थी उसे मिल गया था । उसे हाथ में लेकर वह मुड़ी और राज की आँखें फटी की फटी रह गयी। 

नमिता के हाथ में इस समय एक बहुत बड़ा क़रीब ८ इंच का डिल्डो था यानी ( नक़ली )रबर का लौड़ा । नमिता उसको लाकर बिस्तर पर रखी और फिर उसने दो बैटरी ड्रेसिंग टेबल से निकालकर उसमें फ़िट की , और फिर चालू करके चेक करी। ह्म्म्म्म्म्म्म की आवाज़ से वह डिल्डो हिलने लगा। 

राज आँखें फाड़े ये सब देख रहा था और उसने अपना लोअर और चड्डी नीचे कर ली और अपने लौड़े को हिलाने लगा। 


अब नमिता मुस्कुरायी और डिल्डो को हाथ में लेकर उसने उसकी पूरी लम्बाई और मोटाई को महसूस किया । अब उसने बत्ती बंद कर दी और बिस्तर पर लेट गयी और फिर अपने पेटिकोट का नाड़ा खोला और अपनी दो ऊँगली बुर में डालकर हिलाने लगी। दूसरा हाथ उसने अपनी चूचि पर रखा और उसको दबाने लगी। 

बत्ती बंद होने के बाद भी बाहर की स्ट्रीट लाइट की रोशनी जो अंदर आ रही थी, उसने राज सब देख पा रहा था। अब नमिता की आऽऽहहहह कमरे में गूँजने लगी। अब नमिता ने उस डिल्डो को पकड़ा और उसको पेटिकोट के अंदर खिसका दिया। अब नमिता ने डिल्डो को अपनी बुर के अंदर किया और उसको ऊपर नीचे करने लगी। उसका एक हाथ अभी भी चूचि पर था और दूसरा हाथ डिल्डो को हिला रहा था। 

राज को उसका हाथ पेटिकोट के अंदर में हिलता हुआ दिख रहा था। 

तभी नमिता ने वाइब्रेटर चालू किया और कमरे में ह्म्म्म्म्म्म्म्म की आवाज़ गूँजने लगी। साथ ही नमिता की सिसकारियाँ भी गूँजने लगी। 

राज के कान में नमिता की आऽऽऽऽऽऽऽहहह मरीइइइइइइइ।

राआऽऽऽऽऽऽऽऽऽज मेरे बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ। चोदोओओओओओओओओओ मुझेएएएएएएएए उईइइइइइइइ हाऽऽऽऽय्यय के साथ साथ उसकी कमर भी उछलने लगी। नमिता जल्दी ही घुटी हुई चीख़ें निकालकर झड़ने लगी। 

उसके मुँह से अपना नाम सुनकर और चोदने का सुन कर राज बहुत उत्तेजित हो गया और दरवाज़े को हल्का से धक्का दिया, ये देखने के लिए कहीं खुला हो तो वह अभी ही माँ को चोद देगा। पर आऽऽह दरवाज़ा बंद था। वह फिर खिड़की से झाँका।उधर नमिता कुछ देर वैसे ही पड़ी रही। डिल्डो की आवाज़ बंद थी पर वह बुर के अंदर ही था अभी भी।अब नमिता ने आऽऽह भरी और बिस्तर पर उठ कर बैठ गयी। अब उसने उठने से पहले नाड़ा बांधा और बाथरूम में चली गई । राज भी मस्त होकर अपने कमरे में गया और मूठ्ठ मारने लगा। फिर रस निकाल कर बाथरूम में साफ़ करके पढ़ने बैठ गया ।

नमिता भी साफ़ करके सोने चली गयी। सोते समय वह सुषमा, राजन और राजू के बारे में सोच रही थी, पता नहीं गुप्ता क्या गुल खिलाएगा कल? वह सो गयी।


नमिता सुबह उठी और फ़्रेश हुई और सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में ही हर रोज की तरह चाय बनाकर राज के कमरे में गयी। वह अभी सो रहा था और हमेशा की तरह उसके लोअर में तंबू तना हुआ था। वह मुस्करायी और सोची कि ये लड़कों की जवानी भी क्या चीज़ होती है? उसने राज को हल्के से हिलाया और वह उठा और झुकी हुई नमिता के बिना ब्रा के ब्लाउस से झाँकती गोलाइयों और बीच को गहरी घाटी को देख कर वह उसकी छाती में अपना मुँह घुसा दिया और बोला: गुड मोर्निंग माँ। 

नमिता ने उसके गाल चूमते हुए उसके लौड़े को लोअर के ऊपर से पकड़कर हिलाते हुए कहा: तुझे भी और इस मोटू को भी गुड मॉर्निंग ।

राज उसके द्वारा अपना लौड़ा पकड़े जाने से ख़ुश होकर अपनी कमर हिलाकर बोला: माँ आप बहुत अच्छी हो। मैं कितना लकी हूँ कि मेरी माँ सुबह सुबह मुझे लौड़ा पकड़कर उठा रही है। 

अब नमिता भी मज़े लेते हुए उसकी कमर से लोअर के इलास्टिक को ऊपर करके उसके अंदर हाथ डाली और उसके नंगे लौड़े को पकड़ ली और उसको सहलाने लगी। 

अब राज की कमर हिलने लगी जैसे वह उसकी मुट्ठी को चोद रहा हो। 

अब नमिता हँसते हुए अपना हाथ निकाली और राज को उसमें से निकला हुआ प्रीकम दिखाई और उसको चाट ली। 

राज बहुत उत्तेजित हो गया और ब्लाउस के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। 

नमिता: चल अब उठ जा, बहुत मस्ती हो गयी, अब पढ़ने बैठ जा ।

राज उठा और बाथरूम जाकर फ़्रेश हो कर आया । नमिता चाय पीते हुए उसका इंतज़ार कर रही थी। 

फिर उसके आने के बाद वो दोनों चाय पिए और नमिता उसको पढ़ने को बोलकर अपने रोज के काम में लग गयी। 

बाद में नाश्ता करने के बाद वह राज को पढ़ने बैठायी और उसको बाई करके ऑफ़िस के लिए तय्यार हुई। 

जैसे हो वह बाहर निकलने वाली थी कि सुधाकर का फ़ोन आया और वह बोला: जानू कहाँ हो?

नमिता: बस ऑफ़िस के लिए निकल रही हूँ। 

वह बोला: रहने दो, आज ऑफ़िस में छुट्टी है, वह अपना बाबू देसाई मर गया है। 

नमिता: ओह बेचारा । ठीक है मैं नहीं जाती। 

सुधाकर: मैं आज अगर वहाँ होता तो दिन भर चुदायी कर सकते थे, पर आज मैं बाहर हूँ। मेरा बैड लक । 

नमिता ने हँसते हुए फ़ोन काट दिया। अभी वह सोच ही रही थी कि क्या गुप्ता से बात करे, तभी उसका ही फ़ोन आ गया। 

गुप्ता: तो आ रही हो ना थोड़ी देर में? 

नमिता: सोच रही हूँ कि आऊँ या नहीं?

गुप्ता: अरे आओ ना, कितने दिन हो गए तुमसे मिले हुए?

नमिता: अच्छा, आती हूँ!

फिर नमिता गुप्ता के क्लीनिक पहुँची। गुप्ता उसे अंदर के कमरे मेंले गया और उसको बाहों में भर के चूमने लगा। नमिता ने भी उसके चुम्बन का जवाब चुम्बन से ही दिया। उसके चूतरों को सहलाते हुए वह बोला: कितने दिन बाद आज आयी हो? 

फिर वह उसको अपना पूरा सेट अप दिखाया और बोला: देखो इस कमरे में सुषमा बैठेगी,अकेली। इसमें भी देखो कैमरा लगा है। ये TV है जिसमें उसे वह कमरा दिखेगा जिसमें मैं और राजू बैठेंगे। उसने TV आन किया और उसने गुप्ता की कुर्सी और सामने रखी एक कुर्सी दिख रही थी।

फिर वह उसे दूसरे कमरे में ले गया जहाँ राजन ने बैठना था। वहाँ भी कैमरा और TV था। TV में गुप्ता का कमरा ही दिख रहा था। 

अब वह उसको एक और कमरे में ले गया वहाँ एक बड़ा TV था। उसने TV चालू किया तो उसमें उसे तीनों कमरे दिखने लगे। 

वह बोला: यहाँ तुम बैठोगी, और एक साथ राजन, सुषमा और राजू और मुझे भी देख सकोगी। मैं और राजू एक ही कमरे में रहेंगे। 

नमिता: ओह, आप उनको बताएँगे कि उनको देखा जा रहा है? 

गुप्ता: नहीं, और तुम्हारे यहाँ होने का तो उनको पता ही नहीं चलेगा। 

फिर वह बोला: हाँ मैं भी सबको अपने लैप्टॉप में देखूँगा। पर मेरा लैपटॉप की पिक्चर किसी को नहीं देखेगी। 

अब वह उसको उस कमरे में बैठाया और झुक कर उसको चूमा और उसकी चूचि दबाकर बोल: ओके डार्लिंग, इस सेशन के बाद मिलेंगे। 

नमिता चुप चाप से बैठ गयी। 

थोड़ी देर बाद राजू अपने माँ बाप के साथ गुप्ता के चेम्बर में आ गया। 

नमिता को सब कुछ साफ़ दिख रहा था और आवाज़ भी आ रही थी। 

अब गुप्ता ने उनसे थोड़ी देर जेनरल बात की फिर वह राजन और सुषमा को अलग अलग कमरों में बैठा दिया और उनको बोला: अपने TV मेंमुझे और राजू को देखते रहो। 

अब गुप्ता और राजू कमरे में अकेले थे और राजू को पता नहीं था कि उसके माँ बाप और नमिता उनको देख और सुन रहे है। 

गुप्ता: हाँ बेटा, अब आराम से बैठो और देखो हम दोनों खुल कर दोस्त की तरह बातें करेंगे और तुम मुझसे कोई बात नहीं छिपाना और झूठ तो बोलना ही मत। अगर तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारी मदद करूँ। 

राजू: जी अंकल ठीक है,पूछिए।

गुप्ता: तुम्हारे पापा कहते है कि तुम्हारा मन पढ़ाई में शुरू से ही नहीं है, कोई ख़ास बात।

राजू: जी सच है। मैं बस ग्रैजूएट होना चाहता हूँ चाहे सेकंड डिविज़न ही सही। क्योंकि मैं पापा की इच्छा के अनुसार engineer या CA नहीं बनना चाहता। 

गुप्ता: फिर क्या करोगे?

राजू: मैं स्टेट लेवल का बैड्मिंटोन चैम्पीयन बनना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मैं कोचिंग लूँ और बैड्मिंटोन को ही अपना करीयर बनाऊँ। पर पापा को समझ ही नहीं आता।

गुप्ता: ओह फिर?

राजू: मैं इसीलिए डिप्रेशन में हूँ। 

गुप्ता: तो फिर क्या किया?

राजू: मैंने पापा से लैप्टॉप लिया और अपनी इंटर्नेट की दुनिया में ही जीने लगा । मुझे अब किसी चीज़ में मज़ा नहीं आता था। तब मैंने इंटर्नेट के काल्पनिक दुनिया को ही अपना जीवन बना लिया। मेरी पढ़ाई का और भी सत्यानाश होने लगा। 

गुप्ता: पापा ने मना नहीं किया? या माँ ने ?

राजू: पापा तो अक्सर टूर पर रहते हैं और माँ की मैं सुनता ही नहीं। वो बहुत लाड़ करती हैं ना मुझसे।

गुप्ता: फिर क्या हुआ?

राजू: ऐसे ही मुझे कुछ चैट फ़्रेंड मिले। उनसे मैं बैड्मिंटोन की ही बातें करता था। पर बाद में कब सेक्स की बातें शुरू हो गयी मुझे याद नहीं। 

गुप्ता: ओह, फिर क्या हुआ?

राजू: फिर मेरी दोस्ती एक समीर नाम के लड़के से हुई वह मुंबई का रहने वाला है। उसने मुझसे इन्सेस्ट की बातें शुरू की। मुझे तो इन्सेस्ट का मतलब ही नहीं पता था, उसने मुझे बताया।

गुप्ता: क्या बताया उसने?

राजू: यही कि जब परिवार के सदस्य एक दूसरे से सेक्स करते है तो उसको इन्सेस्ट कहते है।

गुप्ता: ओह फिर क्या हुआ?

राजू: उसने मुझे बताया कि वह अपनी माँ को चो-- मतलब सेक्स करता है। 

गुप्ता: बेटा तुम चोदना शब्द का इस्तेमाल कर सकते हो, अंग्रेज़ी में भी लोग फक ही कहते है। इसमें कोई बुरायी नहीं है।

उधर नमिता ने सुषमा और राजन को देखा , उनके चेहरे में हैरानी के भाव थे।

राजू: जी वह अपने माँ को चोदता था। 

गुप्ता: क्या उसके पापा को पता था?

राजू: जी हाँ , और कई बार वह तीनों एक साथ चुदायी करते थे।

नमिता ने देखा कि राजन और सुषमा का मुँह खुला का खुला रह गया था। गुप्ता ने भी उन दोनों के हाव भाव देखे।

गुप्ता: हो सकता हो वह झूठ बोल रहा हो ?

राजू: मैं भी यही सोचता था पर एक दिन उसने अपनी माँ को कैम में दिखाया और मुझसे परिचय कराया। फिर मेरे सामने उसने अपनी माँ के दूध दबाए और उनके हाथ में अपनी पैंट से अपना लंड निकाल कर पकड़ाया। मैं तो हैरान रह गया। उसकी माँ मुस्कुरा रही थी। थोड़ी देर उसका लंड सहला कर वह चली गई।

गुप्ता ने देखा कि राजू का लंड खड़ा हो रहा है । 

उसने TV में देखा तो उसके माँ बाप के शक्लें देखने लायक हो रही थी। 

गुप्ता/ फिर क्या हुआ?

राजू: वह मुझे भी बोलता था कि मैं भी अपनी माँ को कैम पर दिखाऊँ। मैंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। फिर वह माँ की फ़ोटो माँगने लगा। मैंने उसे माँ की फ़ोटो दिखा दिया। अब वह माँ के बारे में गंदा गंदा बोलने लगा। पर पता नहीं मुझे क्यों बुरा नहीं लगता था, बल्कि मैं बहुत उत्तेजित हो जाता था।

यह कहकर राजू ने अपने खड़े हो चुके लौड़े को अजस्ट किया पैंट के अंदर। 

गुप्ता हँसते हुए: जैसे अभी उत्तेजित हो गए हो? एक काम करो उसे बाहर निकाल लो और धीरे से सहलाते हुए पूरी बात बताओ। 

राजू: अंकल मुझे शर्म आएगी। 

गुप्ता: यार देखो मेरा भी खड़ा हो गया है। चलो मैं भी बाहर निकाल लेता हूँ तुम भी बाहर निकालो। 

गुप्ता खड़ा हुआ और पैंट की बेल्ट और हुक खोलकर पैंट कान चड्डी के साथ नीच किया और अपना काला लौड़ा बाहर निकाल कर उसको सहलाने लगा। अब राजू की भी हिम्मत बढ़ गयी और वह भी अपने पैंट से अपना लौड़ा बाहर कर लिया और उसको सहलाने लगा। 

गुप्ता ने केम में तीनों का रीऐक्शन देखा। सुषमा का हाथ अपने मुँह पर था जैसे कह रही हो, हे भगवान ये क्या हो रहा है? मैं अपने ही बेटे का लंड देख रही हूँ? और आऽऽह कितना बड़ा और मोटा है? 

राजन ने भी अपना लंड सहलाया और सोचा कि सच में जवान हो गया है यह तो। नमिता भी मस्ती से उसका मस्त लंड देख रही थी। 

गुप्ता: हाँतो फिर क्या हुआ? वह तुम्हारी माँ को गंदा गंदा क्या बोलता था?

राजू: जैसे क्या माल है? क्या मस्त चुचि होगी? क्या मस्त बुर होगी? चोदने में बहुत मज़ा आएगा। 

नमिता ने देखा कि सुषमा का चेहरा लाल हो गया था, ये सोचकर कि उसका बेटा ऐसी बातें कर रहा है उसके बारे में।

राजन भी अपना लौड़ा सहला कर ये सुन रहा था। 

गुप्ता: फिर क्या हुआ?

राजू: उसने मुझसे पूछा कि क्या माँ को कभी नंगी देखे हो?

मैं बोला कि नहीं। तब उसने मुझे बाथरूम में कैमरा लगाने का सुझाव दिया। पहले तो मैं बहुत डरा पर बाद में माँ को नंगी देखने की इच्छा के कारण मैंने कैमरा लगा दिया और माँ को नंगी देख कर मूठ्ठ मारने लगा। 

गुप्ता: तुमने माँ की नंगी फ़ोटो समीर को दिखायी?

राजू: जी पर उसका चेहरा बिगाड़ कर ताकि वह कभी उसका ग़लत उपयोग ना कर सके।

गुप्ता: ये तुमने सही किया।

सुषमा के चेहरे का रंग उड़ गया ये सोचकर कि उसका बेटा उसकी नंगी तस्वीर किसी और को दिखा चुका है। 

राजन अब उत्तेजित हो चुका था, और अपना लौड़ा मसल रहा था पैंट के ऊपर से ही।

गुप्ता: उन नंगी फ़ोटो को देखकर वह सुषमा के बारे में गंदी बात बोलता था?

राजू: हाँ बहुत गंदी बात करता था। जैसे क्या बुर है आह चोदने से ज़्यादा मज़ा तो चूसने में आएगा। आह कितनी मस्त गाँड़ है क्या गंध होगी चाटने में तो मस्त होगी। गाँड़ मारने में भी मज़ा आएगा । 

यह कहते हुए राजू ने लौड़े को ज़ोर ज़ोर से हिलाना शुरू किया। सुषमा का अब बुरा हाल हो रहा था। वह अपने बेटे के मुँह से अपने बारे में ये सुनकर गरम होने लगी थी। वह अपनी चुचि दबाने लगी और बुर को भी खुजा उठी। राजन भी बहुत गरम हो गया , अपने बेटे के मुँह से अपनी माँ के बारे में ये सब सुनकर। उसने भी पैंट खोली और अपने लौड़े को बाहर निकाल लिया और सहलाने लगा।

नमिता बड़ी हैरानी से अपने सामने तीन तीन लौड़े देखकर मस्ती से भर गयी। राजन का सामान भी तगड़ा था। नमिता सुषमा की हालत देख कर मुस्कुरा दी। 

गुप्ता भी ये सब देखकर मन ही मन मुस्कुराया और बोला: फिर ये बेडरूम में कैमरा का ध्यान तुम्हें कैसे आया?

राजू: पापा जब भी टूर से आते तो माँ के साथ धमाके दार चुदायी करते थे। बहुत आवाज़ें भी आती थीं। मैंने कई बार छिपकर देखने की कोशिश की पर सफल नहीं हुआ। तब मैंने एक कैमरा बेडरूम में भी लगा दिया आ

गुप्ता: ओह, फिर?

राजू: पापा टूरपर जाते थे तब मैंने माँ को पापा के साथ फ़ोन सेक्स करते हुए सुना और माँ को अपनी बुर में ऊँगली करते भी देखा। पापा के आने के बाद मैंने उनकी चुदायी भी देखी। और कई बार मूठ्ठ भी मारी। 

नमिता ने राजन और सुषमा को देखा और दोनों बहुत उत्तेजित दिख रहे थे। राजन तो अब ज़ोर से मूठ मार रहा था और सुषमा भी अब अपना कुर्ता हटाकर सलवार के ऊपर से बुर में ऊँगली डाल रही थी। नमिता ख़ुद भी बुर सहला रही थी। 

इधर गुप्ता और राजु भी मूठ्ठ मार रहे थे।

गुप्ता: हम्म तो क्या तुम्हारे मन में कभी अपनी माँ को चोदने का भी ख़याल आया?

गुप्ता ने देखा कि सुषमा और राजन का हाथ रुक गया था और वो साँस रोक कर राजू के जवाब का इंतज़ार कर रहे थे। 


राजू: अंकल, सच तो ये है कि मेरी इच्छा यह है कि मैं समीर की तरह ही अपने पापा और माँ के कमरे में ही सोऊँ और जैसे समीर अपनी माँ का दूसरा पति है , वैसे ही मैं भी माँ का दूसरा पति बनूँ और पापा के साथ ही उनको ख़ूब चोदूँ । 

राजन और सुषमा यह सुनकर अपने हाथ अब ज़ोर से चलाने लगे। 

नमिता समझ गयी कि उसके पड़ोस में अब एक और इन्सेस्ट परिवार बनने वाला है 

गुप्ता: अगर तुम्हारे पापा या माँ इसके लिए राज़ी हो जाएँ तो तुममें क्या परिवर्तन आएगा?

राजू: मैं अपना पूरा ध्यान अपने बैड्मिंटोन के करीयर में लगा दूँगा और पढ़ाई भी इतनी तो कर ही लूँगा की पास तो हो ही जाऊँ। 

गुप्ता: हम्म और अगर वो तुम्हारी बात ना माने तो?

राजू: पता नहीं मैं क्या करूँगा ? आधा पागल तो हो ही गया हूँ, शायद पूरा ही पागल हो जाऊँ। 

गुप्ता: चलो मैं कोशिश करता हूँ कि तुम्हारे घर वाले माने जाएँ। अब तुम चाहो तो अपना रस निकाल सकते हो। ये लो टिशू पेपर। 

अब राजू आँखें बंद करके आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽऽऽऽ कहकर ज़ोर से हिलाकर झड़ने लगा। उसका ढेर सारा वीर्य उसके हाथ में और पेपर में गिरा। नमिता, सुषमा और राजन आँख फाड़के उसके गाढ़े रस को निकलते देख रहे थे। अब राजन भी ज़ोर ज़ोर से हिलाके झड़ने लगा, उसने जेब में रखा रुमाल निकाल कर उसमें ही अपना रस गिराया। 

नमिता भी उत्तेजित थी , पर सुषमा तो ऊँगली डालकर झड़ ही गयी। बाद में अपने रुमाल से अपनी ऊँगली साफ़ की। 

गुप्ता इस मैच में रेफ़री की भाँति neutral था, उसने अपना लौड़ा अंदर कर लिया। 

थोड़ी देर बाद गुप्ता सुषमा और राजन को अपने कमरे में ही ले आया। 

राजू को तो पता नहीं था कि उन दोनों ने उसकी सब बातें सुनी और देखी भी हैं। उधर वो दोनों एक दूसरे से भी आँख नहीं मिला पा रहे थे। 

गुप्ता: देखिए राजन जी आपके बेटे को आपकी सहायता की ज़रूरत है। अब इसका फ़ैसला आप ही को करना है कि आप क्या चाहते हैं। 

फिर उसने राजू को बाहर भेजा और सुषमा को बोला: आपने देखा कि वह आपका दीवाना सा हो गया है। आपको उसके लिए कुछ करना ही चाहिए।

सुषमा: मगर गुप्ता जी , जो वह माँग रहा है वह मैं कैसे से सकती हूँ, आख़िर वह मेरा बेटा है?

गुप्ता: देखिए आजकल कई लोग इन्सेस्ट में विश्वास करने लगे हैं। हालाँकि खुल कर कोई बोलता नहीं। अब ये तो आपके घर की बात होगी किसी को क्या मतलब कि आपके घर में क्या चल रहा है?

राजन: देखो अभी यहाँ बात करने का कोई मतलब नहीं है, हम घर जा कर इसपर बात करेंगे। 

फिर वो उसकी फ़ीस देकर फिर आने का कहकर चले गए। 

गुप्ता अब नमिता के पास गया और बोला: क्या लगता है, सुषमा मान जाएगी?

नमिता: राजन तो बिलकुल तय्यार है इसके लिए और वह सुषमा को मना ही लेगा। आप ठीक बोले कि मेरे पड़ोस का परिवार भी इन्सेस्ट हो गया । 

गुप्ता: मज़ा आया कि नहीं इस सब में ?

नमिता ने अपनी बुर सहलायी और बोली: उधर घर पर राज मेरी चुचि और गाँड़ दबा दबा कर मुझे पागल कर रहा है। इधर आज तीन तीन लौड़े देखकर मेरी बुर बहुत गरम हो चुकी है, चलो इसे ठंडा करो अभी। 

ये कहते हुए उसने गुप्ता के लौड़े को पैंट के ऊपर से ही पकड़ लिया। 

गुप्ता भी मस्त होकर उसकी चुचि दबाकर बोला: चलो बिस्तर पर , पर याद हैं ना चोदना तो तुम्हें ही है मुझे। 

नमिता हँसते हुए पलंग के पास जाकर अपने पूरे कपड़े उतार दी और उधर गुप्ता भी नंगा जो गया और बिस्तर पर लेट गया।उसका लंड खड़ा था और ऊपर नीचे हो रहा था। नमिता उसपर लेट गयी और गुप्ता ने उसकी चूचियाँ पकड़ ली और दबाने लगा। वह उसके होंठ भी चूस रहा था। फिर उसने उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू की। नमिता भी मस्ती से भरकर उसके निपल्ज़ को दबाने लगी और जीभ से निपल्ज़ को छेड़ने लगी। 

उसने हाथ बढ़ाकर उसका लौड़ा पकड़ लिया और सहलाने लगी। 

अब वह नीचे होकर उसके लौड़े को सहलायी और फिर मुँह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी देर तक वह उसका लंड चूसी फिर उसके बॉल्ज़ भी चाटने लगी । अब गुप्ता बोला: रानी आओ ना तुम्हारी बुर मैं भी चाट दूँ , आओ बैठो मेरे मुँह पर। 

नमिता अपने चूतरों को उठाके उसके मुँह पर ऐसे बैठी जैसे पेशाब करने के लिए बैठी हो। गुप्ता ने उसकी बुर और उसके दाने (clit) को जीभ से छेड़कर उसको मस्त कर दिया। वह आऽऽहहहह करके चिल्ला उठी। 

अब नमिता को लगा कि वह झड़ जाएगी। इसलिए वह उठी और उसके लौंडे पर अपनी बुर रखकर उसको अंदर कर ली। गुप्ता ने भी नीचे से धक्का मारा और अपना लौड़ा अंदर ठूँस दिया। अब नमिता ऊपर नीचे होकर चुदायी करने लगी। गुप्ता उसकी लटकती हुई चूचियाँ दबाने लगा। 

नमिता मस्त होकर आऽऽह्ह्ह्ह्। हाय्य्य्य्य्य्य करने लगी। गुप्ता भी नीचे से धक्का मार रहा था और नमिता उछल कर अपनी कमर दबाकर पूरा लौड़ा अंदर करके चुदवा रही थी। 

फिर नमिता और गुप्ता झड़ने के क़रीब आ गए और चिल्लाकर ह्म्म्म्म्म्म्म्म और उइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगे। 

फिर नमिता उसके ऊपर लुढ़क गयी। अब दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही पड़े रहे और फिर बाथरूम से फ़्रेश होकर नमिता ने कपड़े पहने और गुप्ता को फिर मिलूँगी कहकर चली गयी। नमिता आज चुदवा कर हल्का महसूस कर रही थी। राज के साथ वह उत्तेजित तो हो जाती है पर चुदायी नहीं हो पाने के कारण अशांत सी हो जाती थी। आज थोड़ी सी शांति सी महसूस कर रही थी।

घर पहुँचकर वह राज के कमरे में गयी और उसे पढ़ता देख बोली: बेटा सब ठीक है?

राज: हाँ माँ सब ठीक है। आपका ऑफ़िस कैसा रहा?

नमिता: ठीक ही था। 

वह उसे क्या बोलती कि आज कौन से ऑफ़िस गयी थी। 

राज उसको बोला: माँ आओ ना मेरी गोद में बैठो , थोड़ा प्यार करूँगा। 

नमिता चुदायी से थकी हुई थी सो बोली: बेटा अभी मैं थोड़ा कपड़े बदल कर आती हूँ और फिर प्यार कर लेना। 

राज: हाँ माँ , आप आज बस आप मेरी एक हाफ़ पैंट पहनो बस। 

वह उठा और इलास्टिक वाली हाफ़ पैंट माँ को दिया नमिता हँसते हुए बोली: मैं ये पहनूँगी?

राज: हाँ माँ प्लीज़ ये और ये मेरी टी शर्ट । नीचे कुछ नहीं। 

नमिता: ओह चल ट्राई करती हूँ। पर एक घंटे बाद ही आऊँगी , थोड़ा आराम करके।

राज : ओके माँ ।

नमिता उसको चूम करके चली गयी 

राज को पता नहीं क्यों लग रहा था कि माँ थकी दिख रही थी शायद चुदवा के आइ थी। वह सोचने लगा कि उसके कारण शायद वह उत्तेजित हो जाती होगी और बाहर जा कर सुधाकर से या मनीष से चुदवा लेती होगी। 

नमिता अपने कमरे में जाकर लेट गयी और इसकी आँख लग गयी। जब वह उठी और बाथरूम में फ़्रेश होकर उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और राज की हाफ़ पैंट और टी शर्ट पहनी । अब उसने शीशे में अपने आप को देखा और उसके टी शर्ट में उसके निपल्ज़ कड़े से दिख रहे थे। उसकी चूचियाँ ब्रा के बिना थोड़ी सी अपने वज़न से नीचे की ओर झुकी दिख रही थी। उसकी पैंट से उसकी मादक जाँघें और उभरे हुए चूतर बड़े कामुक दिख रहे थे। वह मुस्कुराती हुई किचन में गयी और खाने की तय्यारी करने लगी। 

राज बाहर आया और नमिता को किचन में अपने कपड़ों में देखा और देखते ही रह गया। वह पीछे से आकर माँ के चूतरों को दबाकर बोला: माँ आप बहुत सेक्सी लग रही हो। वह उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। फिर उसने हाथ बढ़ाकर उसकी बिना ब्रा की छातियाँ दबाने लगा। अब वह निपल्ज़ भी मसलने लगा। राज अपना लौड़ा उसकी गाँड़ में अड़ा दिया। 

राज: माँ क्या मस्त चूचियाँ है आपकी , इनको दबाकर दिल ही नहीं भरता। वह उनको दबाते हुए बोला 

नमिता: आऽऽऽहहह कितनी ज़ोर से दबा रहा है ? ज़रा धीरे भी दबा सकता है ना तू? 

राज: माँ आपके पास आकर पागल हो जाता हूँ। 

आज आप मुझसे एक बार चुदवा लो ना, प्लीज़। 

नमिता: फिर वही बात? नियम मानो समझे?

राज : माँ कल के पेपर के बाद तो आप सिर्फ़ पैंटी में होंगी मेरे सामने। ठीक है ना?

नमिता: बिलकुल तू नम्बर ले आ। और मैं अपनी शर्त को पूरा करूँगी।

चल पहले खाना खा ले फिर ये सब कर लेना। 

राज ने हाथ बढ़ाकर नमिता की टी शर्ट उतार दी। नमिता उसको सवालिया निगाहों से देखने लगी। 

राज बोला: माँ आज ऐसे ही खाना खाएँगे। 

नमिता चुपचाप अपनी छातियाँ हिलाते हुए खाना लगाने लगी। अब वह कुर्सी पर बैठी और उसकी बड़ी छातियाँ टेबल पर रखी हुई दिख रही थीं।

अब राज और नमिता खाना खाने लगे। राज की आँखें उसकी छातियों पर ही जमी हुई थी। 

राज: माँ देखो ना आपकी चूचियाँ क्या मस्त दिख रही है । 

नमिता: हम्म तुझे पसंद है बस मेरे लिए यही बहुत है। 

राज: माँ जल्दी हीं हम पूरे नंगे होकर भी खाना खाएँगे। 

नमिता: ह्म्म्म्म्म । 

खाने के बाद राज बोला: माँ मेरा काफ़ी कोर्स अभी बचा है। मैंने रात को ही आपसे एक बार मज़ा लूँगा। 

नमिता: ठीक है बेटा, तो मैं ये टी शर्ट पहन लूँ? 

राज उसके पास आया और उसकी चूचियों को बारी बारी से चूसा और फिर उसने ख़ुद उसको टी शर्ट पहना दिया 

राज पढ़ने बैठ गया। नमिता आराम करने चली गयी।



राज और नमिता फिर शाम की चाय पर मिले पर थोड़ा चूमा चाटी के अलावा कुछ ज़्यादा नहीं हुआ । राज का ध्यान कोर्स ख़त्म करने में लगा था रात को डिनर के बाद भी रात को सोने से पहले मिलने का कहकर वह चुपचाप चला गया अपने कमरे में। रात को वह गुड नाइट करने आया और उससे लिपट गया और प्यार करते हुए बोला: माँ मैं नर्वस हो रहा हूँ। 

नमिता ने उसके बालों पर हाथ फेरा और कहा: बेटा इतनी पढ़ाई की है फिर नर्वस क्यों हो रहा है? 

राज: माँ मुझे इस विषय में हमेशा डर लगता है। 

नमिता उसको खींच कर अपनी छाती से चिपकाकर बोली: सब ठीक होगा बेटा,परेशान मत हो। 

राज: माँ तुम तो मेरा ईनाम काट ही दोगी अगर नम्बर अच्छे नहीं आए तो? वह उसका ब्लाउस खोलकर उसके दूध पीते हुए बोला। 

नमिता: नहीं अब मैं जान गयी हूँ कि तेरा ध्यान वापस से पढ़ाई में आ गया है। मैं तुझे ईनाम दूँगी ही, चाहे रिज़ल्ट कुछ भी आए, बस अब ख़ुश???

राज ख़ुशी से उसके दूसरे दूध को भी चूमा और बोला: बस माँ अब कोई टेन्शन नहीं है। आऽऽहहहह मैं कल इसको पैंटी में देखूँगा और बहुत चुमूँगा और सूँघूँगा। उसने उसकी बुर को पेटिकोट के ऊपर से दबाकर मुट्ठी में भींचते हुए कहा। 

नमिता: आऽऽऽहहह छोड़ ना, मार डालेगा क्या। हाय्य्य्य्य इतनी ज़ोर से क्यों दबाया? 

राज: सॉरी माँ ज़्यादा ख़ुश हो गया था। अच्छा माँ , एक बात मानोगी?

नमिता: बोल क्या बात है?

राज: माँ, आपके पास ऐसी पैंटी है जिसमें पिछले हिस्से में सिर्फ़ एक रस्सी सी होती है? 

नमिता: नहीं मेरे पास ऐसी पैंटी नहीं है। 

राज: माँ कल एक ख़रीद लेना प्लीज़। मुझे आपको कल ऐसी पैंटी में ही देखनी है। 

नमिता: ओह अच्छा देखूँगी।

राज: नहीं माँ ले ही लेना प्लीज़।


नमिता ने हाथ बढ़ा कर उसका लौड़ा पकड़ लिया जो लोअर में पूरा खड़ा था और बोली: अच्छा बाबा ले लूँगी। तू तो पीछे ही पड़ जाता है। अच्छा अभी बोल मूठ्ठ मार दूँ? 

राज: माँ पहले चूस लो फिर मार देना। 

नमिता: चूसूँगी नहीं हाँ चूम लूँगी । जब इसके अगले पेपर में अच्छे नम्बर लाएगा तब चूसूँगी। 

राज: माँ क्या फ़र्क़ पड़ेगा आज ही चूस दो ना? 

नमिता: नियम नहीं तोड़ेंगे बेटा हम। 

राज: ठीक है माँ चलो ऐसा ही सही। 

अब राज बिस्तर पर लेट गया। नमिता का ब्लाउस खुला हुआ था। उसकी चूचियाँ बिना ब्रा के इधर उधर डोल रही थीं। राज की आँखें उसी पर चिपकी हुई थीं। नमिता उठी और उसके लोअर को उतार दी और उसके चड्डी में क़ैद शैतान को देखकर मस्ती से अपनी जीभ को होंठों पर फेरी और झुक कर उसकी चड्डी में चमकते हुए प्रीकम को चाट ली। राज के हाथ अभी भी उसके बदन पर फिर रहे थे। नमिता ने उसकी चड्डी के अंदर हाथ डाला और उसके लौड़े को पकड़कर टेढ़ा किया और चड्डी को नीचे खिसकायी। अब उसका लौड़ा ऐसे ऊपर नीचे होने लगा जैसे कि उसमें स्प्रिंग लगा हो। 

उसने अपने हाथ में उसको पकड़ लिया और उसकी पूरी लम्बाई और मोटाई का अहसास करने लगी। अब उसकी बुर पनियाने लगी थी। 

उसने अपने आप को ऐसे पोज़ में रखा ताकि राज उसकी चूचियाँ दबा पाए। राज के हाथ अब उसकी चूचियाँ दबाने लगे। 

फिर नमिता ने अपनी जीभ निकाली और उसके लौड़े को पूरी लंबाई में चूमना और चाटना चालू किया। राज मस्ती से भरा जा रहा था। 

नमिता ने काफ़ी देर लौड़ा मसला पर वह झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। नमिता ने राज की आँखों में देखा और मुस्करायी और अपना ब्लाउस निकाल दिया। अब उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ हिले जा रही थीं। 

अब उसने उसके लौड़े के ऊपर अपनी छातियाँ रखी और अपने दोनों हाथों में अपने एक चुचि को लेकर उसके बीच में उसका लौड़ा रखी और अपनी चुचियां ऊपर नीचे करने लगी। राज मस्ती से माँ की चूचियों में फंसा अपना लौड़ा देख कर बहुत उत्तेजित हो गया। अब वह भी नीचे से अपनी कमर उछालके उसकी चूचियों को चोदने लगा।

नमिता की बुर गीली होने लगी थी। नमिता ने अब अपनी जीभ भी बाहर निकाली और जब उसका लौड़ा ऊपर आता तो वह उसके सुपाडे को जीभ से चाट देती। राज अब मस्त हो गया और बहुत मज़े से उसकी चूचियों में अपना लौड़ा रगड़ने लगा और ह्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा। उसके लौड़े का रस नमिता के जीभ और मुँह में गिरने लगा। जल्दी ही उसका मुँह ढेर सारे वीर्य से सन गया। अब वह अपने जीभ से उसका रस चाट ली। उसका पेटिकोट उसकी बुर के पानी से गीला हुए जा रहा था। 

फिर उसने अपने ब्लाउस से अपना मुँह पोंछा। फिर बाथरूम जाकर सफ़ाई करके बिना ब्लाउस के बाहर आयी और आकर बिस्तर पर बैठ गयी। अब राज ने उसके गोद में अपना सिर रखा और उसकी चूचियों को चूमने लगा। नमिता ने अपने ब्लाउस से ही उसका लौड़ा भी साफ़ कर दिया। अब राज उठा और बोला: माँ आज तो आपने बहुत मज़ा दिया । आपकी नरम चूचियों में लौड़ा चोदने का मज़ा पागल कर देने वाला था। 

नमिता: सच मज़ा आया? 

राज: हाँ माँ। बहुत बहुत। 

नमिता: चल अब जा पढ़ाई कर , कल अच्छे नम्बर लाना।

राज: हाँ माँ , अब जाता हूँ पढ़ाई करने। थैंक्स वेरी मच ।

नमिता उसके लौड़े को हल्के से दबाकर बोली: बाई बाई। गुड नाइट। 

राज : गुड नाइट माँ बाई बाई। वह भी उसकी चुचि दबाकर बोला।

राज के जाने के बाद नमिता ने एक ब्लाउस निकाल कर पहना और सोने को कोशिश करने लगी। बुर बहुत गरम थी, आख़िर उसने ऊँगली की और झड़ने के बाद सो गयी। 

सुबह वह जब राज को चाय देने पहुँची तो वह पढ़ाई में डूबा हुआ था। 

राज माँ से लिपट कर गुड मॉर्निंग बोला।नमिता ने उसे प्यार किया और चाय दी।

नमिता: बेटा कोर्स पूरा दोहरा लिया? 

राज: जी माँ पूरा हो ही गया है।

नमिता: चल अब नहा ले , मैं नाश्ता बनाती हूँ। 

वह उसे चूमकर बाहर आ गयी। 

राज नाश्ता करके माँ के हाथ से दहीं शक्कर खा कर स्कूल के लिए तय्यार हो गया। 

नमिता: बेटा, बेस्ट ओफ़ लक। पूरे ध्यान से करना। 

राज: माँ एक बात बोलूँ ? 

नमिता: आइ लव यू । 

राज को अपने गले लगा कर वह बोली: हाँ बेटा जानती हूँ। 

राज: माँ वह पैंटी ज़रूर पहन ले लेना ।

नमिता: हट बदमाश भाग यहाँ से । 

राज हँसते हुए चले गया। नमिता भी घर के काम में लग गयी। 

नमिता भी तय्यार होकर ऑफ़िस चली गयी। वहाँ ऑफ़िस में एक सामान्य दिन था , सुधाकर बहुत सी मीटिंग्स में व्यस्त था। वह १२ बजे निकल गयी क्योंकि उसको राज की पसंद की पैंटी लेनी थी।

वह पास की एक दुकान में गयी जहाँ से वह हमेशा ब्रा व पैंटी लेती थी। वह एक सलीम नाम के आदमी की दुकान थी जिसमें उसकी बीवी भी रहती थी और महिलाओं को वह ही सामान देती थी। 

नमिता इसकी दुकान में घुसी तो सिर्फ़ सलीम ही था । 

नमिता: आदाब भाई जान, भाभी नज़र नहीं आ रहीं ?

सलीम: अरे उसकी तबियत थोड़ा नासाज़ है। वही औरतों वाली तकलीफ़। जिसने हम मर्द बिचारे भूक़े प्यासे रह जाते हैं। 

नमिता का चेहरा उसकी बात से शर्म से लाल हो चला था, वह समझ गयी थी वह उसके पिरीयड आने की ओर इशारा कर रहा था। 

नमिता: मैं बाद में आ जाऊँगी। 

सलीम: अरे बहन आपको क्या चाहिए बताइए ना। इसने क्या शर्माना?

नमिता सोची कि अगर नोर्मल ब्रा या पैंटी लेनी होती तो कोई बात नहीं थी, पर उसे तो राज की पसंद की नॉटी पैंटी लेनी थी। 

नमिता: जी वो कुछ पैंटी दिखा दीजिए। 

सलीम: अभी लो बहनजी। ज़रा साइज़ बता दीजिए ना?

नमिता: ३२ साइज़ की ।

वह अंदर जाकर कुछ डिब्बे लाया और उसको पैंटी दिखाने लगा। नमिता ने देखा कि वह सादी सी दिखने वाली पैंटी लाया था। 

नमिता: भाईजान,कुछ अच्छी सी दिखायीये ना। ये तो बड़ी सादी सी हैं।

सलीम: बहनजी, अच्छी तो है, यहाँ कौन आपकी साड़ी के अंदर झाँक कर देखेगा कि आपने कैसी पैंटी पहनी है? ये कहकर वह खि खि कर हँसने लगा। 

नमिता: छि भाईजान आप भी कुछ भी बोलते हैं। मैं बाद में आ जाऊँगी।

सलीम: अरे मैं तो मज़ाक़ कर रहा था , आप बुरा मान गयी। अभी और सैम्पल लाता हूँ। 

अब वह और डब्बे लाया और उसने और थोड़ी फ़ैन्सी पैंटी दिखायी। 

नमिता ने देखा कि एक पैंटी में सामने से जाली लगी थी जो शायद ही बुर को छिपा पाती । 

सलीम: बहनजी ये ठीक रहेगी, आप की दिखेगी भी और छिपेगी भी। 

वह फिर से खि खि करके हँसने लगा। 

नमिता सोची कि क्या कमीना आदमी है। 

नमिता ने दूसरा डब्बा खोला उसने उसे ऐसी पैंटी दिखी जिसने बस सामने एक छोटा सा पट्टा था और पीछे भी पट्टा सा था। अगली पैंटी वैसी ही थी जैसी उसे चाहिए थी। सामने छोटी सी पट्टी और पीछे एक रस्सी जो गाँड़ की दरार में ही धँस जाए। 

नमिता ने थोड़ा शर्माते हुए कहा: भाईजान ये दे दीजिए। 

सलीम ने उसको उठाया और आगे पीछे देखा और बोला: बहनजी ये आपको आ जाएगी? थोड़ी छोटी नहीं लग रही ? वैसे भी इसमें छुपाना तो क्या होगा दिखाना ही ज़्यादा होगा। वह फिर खि खि करके हँसने लगा। नमिता के गाल लाल हो गए। 

नमिता: क्या क़ीमत होगी इसकी? 

सलीम: आप चाहें तो पीछे के कमरे में जाकर ट्राइयल ले सकती हैं। उसने अपना लौड़ा खुजाते हुए कहा। नमिता का ध्यान अनायास ही उसके पैंट के सामने वाले हिस्से पर चला गया जहाँ वक बड़ा सा तंबू बन गया था। उसने सोचा कि कितना कमीना है यह इंसान।

नमिता: नहीं नहीं ठीक है ये सब । बस दे दीजिए। 

उसने वह ख़रीद ली और जल्दी से दुकान से बाहर आ गयी।

नमिता की आँखों मेंबार बार उसका तंबू आ रहा था। 

घर पहुँची तो थोड़ी देर आराम करी और फिर राज के आने के पहले वह उठ गयी और बाथरूम जाकर पूरी नंगी हो गयी। अब वह अपने बदन को देखकर मुस्कुराती हुए सोचने लगी कि आज राज तो पागल ही हो जाएगा। फिर उसने अपनी बुर और गाँड़ का हिस्सा बहुत अच्छे से साफ़ किया और फिर नंगी ही अपने कमरे में जाकर उसने एक छोटा सा ब्लाउस निकाला जो कई साल पहले वह पहनती थी। वह आज भी एकदम नया सा था क्योंकि वह उसको टाइट हो गया था। 


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