एक अनोखा बंधन----6

 एक अनोखा बंधन----6



थॅंक यू.” ज़रीना ने कुर्सी पर बैठते हुवे कहा. निशा भी ज़रीना के साथ ही एक दूसरी कुर्सी खींच कर बैठ गयी. चाची बिस्तर पर टाँग लटका कर बैठ गयी.


“क्या तुम मुस्लिम हो?” चाची ने पूछा.


“जी हां” ज़रीना ने जवाब दिया.


“एक तो खून ख़राबा मचा रखा है तुम लोगो ने देश में. कभी भी कही भी बॉम्ब लगा देते हो. अब हमारे रिश्तो में भी दरार डालने लग गये तुम लोग. चाहती क्या हो तुम.” चाची ने कटाक्ष किया.


ज़रीना को बहुत गुस्सा आया ये सुन कर. चेहरा गुस्से से लाल हो गया उसका. गुस्सा स्वाभाविक भी था क्योंकि उसके अस्तित्व पर चोट की गयी थी. मगर वो चुप रही. कुछ नही कहा. वादा जो किया था आदित्य से सब कुछ शांति से सुन ने का. प्यार में क्या कुछ नही सहना पड़ता.


ज़रीना को बहुत गुस्सा आया ये सुन कर. चेहरा गुस्से से लाल हो गया उसका. गुस्सा स्वाभाविक भी था क्योंकि उसके अस्तित्व पर चोट की गयी थी. मगर वो चुप रही. कुछ नही कहा. वादा जो किया था आदित्य से सब कुछ शांति से सुन ने का. प्यार में क्या कुछ नही सहना पड़ता.


“कब से जानती हो उनको” सिमरन ने पूछा.


“ कॉलेज में थे साथ और हम दोनो के घर भी साथ साथ थे.” ज़रीना ने कहा.


“तो क्या तुम्हे नही पता था कि वो शादी शुदा हैं.” सिमरन ने पूछा.


“ये पता होता तो मैं आज यहा नही बैठी होती और ना ही आपको ये सवाल करने की ज़रूरत पड़ती.” ज़रीना ने सिमरन की आँखो में देखते हुवे कहा.


“झूठ कह रही हो तुम. भैया की पड़ोसी हो कर तुम उनकी शादी के बारे में नही जानती ऐसा कैसे हो सकता है” निशा ने कहा.


“हमारे परिवारों में बनती नही थी. कभी एक दूसरे के बारे में जान-ने का मोका ही नही मिला.” ज़रीना ने कहा.


“फिर ये प्यार का नाटक कैसे हो गया तुम दोनो के बीच. जब ऐसा था तो” चाची ने कहा.


“प्यार की शायद कोई वजह नही होती और जहा वजह ढुंडी जाती है वाहा प्यार नही होता.” ज़रीना ने जवाब दिया.


“वजह तो बहुत बढ़िया है तुम्हारे पास प्यार की. आदित्य के पेरेंट्स तो मारे गये गोधरा हादसे में. अब उसका घर और कारोबार सब कुछ तुम्हारे हाथ में आ सकता है. इन बातों के लिए इस बात को आसानी से इग्नोर किया जा सकता है की आदित्य पहले से शादी शुदा है.” चाची ने कहा.


“क्या हम यहा इस समश्या का हल करने के लिए बैठे हैं या फिर ‘मूड स्लिंगिंग’ के लिए.” ज़रीना ने कहा.


“तुम्हारे हिसाब से क्या हाल है इस समस्या का” सिमरन ने पूछा.


“मुझे नही पता…बस इतना जानती हूँ कि आदित्य मेरी जींदगी है.”


“तुम्हे शरम नही आती मेरे सामने ऐसी बाते करते हुवे. मेरे पति को अपनी जींदगी बताती हो. क्या ऐसी बाते करके हाल धुन्दोगि तुम इस समश्या का.” सिमरन भड़क गयी.


“हाल तुम बता दो सिमरन… मुझे सच में कुछ नही पता.” ज़रीना ने कहा.


“हाल सिर्फ़ एक ही है. मेरे पति का पीछा छ्चोड़ दो. तुम्हे पहले नही पता था उनकी शादी के बारे में माँ लेती हूँ मैं. मगर अब तो पता है ना. सब कुछ जान ने के बाद भी तुम क्यों हमारे बीच आना चाहती हो.” सिमरन ने कहा.


“क्योंकि जीना नही छ्चोड़ सकती मैं. आदित्य मेरी जींदगी है.” ज़रीना ने जवाब दिया.


“बेशर्मी की हद है ये तो. क्या यही संसकार दिए हैं तुम्हारे पेरेंट्स ने तुम्हे. और कैसे पेरेंट्स हैं तुम्हारे जिन्होने तुम्हे भैया के साथ अकेले मुंबई भेज दिया. वो सब भी लगता है इस खेल में शामिल हैं.” निशा ने कहा.


ज़रीना ने निशा की तरफ देखा. कुछ कहना चाहती थी मगर इतना भावुक हो गयी थी अपने अम्मी अब्बा की बात पर कि आँखे टपक गयी उसकी, “अब क्या कहूँ तुम्हे.” ज़रीना बस इतना ही बोल पाई.


“सच कड़वा होता है ना ज़रीना…वरना तुम रोने की बजाए निशा की बात का जवाब देती.” सिमरन ने कहा.


“हां बताओ कैसे भेज दिया तुम्हारे घर वालो ने तुम्हे आदित्य के साथ अकेले. ये तो वही लोग कर सकते हैं जिनकी कोई इज़्ज़त नही होती. दफ़ा हो जाओ हमारे आदित्य की जींदगी से वरना वो हाल करेंगे तुम्हारा की याद रखोगी जींदगी भर. हमारे होते हुवे सिमरन का हक़ कोई नही छीन सकता.”


“बस!.. बंद करो तुम सब ये बकवास.” ज़रीना ज़ोर से चिल्लाई. ज़रीना की आवाज़ बाहर रघु नाथ और आदित्य को भी सुनाई दी.


“क्या जानते हो तुम लोग मेरे बारे में. पंचायत लगा कर बैठ गये हो सिर्फ़ मुझे नीचा दिखाने के लिए. मेरे पेरेंट्स और मेरी बहन दंगो में मारे गये थे. अकेली हो गयी थी मैं…बिखर चुकी थी. आदित्य ने संभाला मुझे और जीने की उम्मीद दी. कब प्यार हो गया मुझे आदित्य से पता ही नही चला. मगर छ्चोड़ो अब ये सब. रखो अपने आदित्य को अपने पास. मुझे नही चाहिए कुछ भी. आप सब खुश रहें.” ज़रीना उठ कर चल दी वाहा से. मगर आदित्य को दरवाजे पर खड़ा देख कर रुक गयी और रोने लगी.


“तो आप लोगो ने रुला ही दिया मेरी…..” आदित्य अपना सेंटेन्स पूरा नही कर पाया क्योंकि ज़रीना ने थप्पड़ जड़ दिया था उसके गाल पर. थप्पड़ इतनी ज़ोर का था कि सभी को उसकी गूँज सुनाई दी.


“क्यों नही बताया मुझे कि तुम शादी शुदा हो. बता देते एक बार तो कभी ये प्यार ना करती मैं.” ज़रीना ने बहुत भावुक अंदाज में कहा.


आदित्य नज़रे झुकाए खड़ा रहा. कुछ भी नही कह पाया ज़रीना को.


“संभलो अपनी बीवी को आदित्य. मेरे पीछे मत आना आज के बाद. अगर आए तुम तो मेरा मारा मूह देखोगे. नही चाहिए मुझे तुम्हारा प्यार.” ज़रीना निकल गयी कमरे से बाहर.


आदित्य इतना शॉक्ड था कि समझ नही पाया कि क्या करे. वही मूर्ति की तरह खड़ा रहा. आदित्या की तरह सिमरन, निशा और चाची भी शॉक्ड थे.


आदित्य चलने ही लगा था ज़रीना के पीछे की चाची ने उसका हाथ थाम लिया. “जो हुवा अछा हुवा आदित्य. यही हाल था इस दुविधा का. जाने दो उसे.”


“मैं मर जाउन्गा चाची जी. जी नही पाउन्गा उसके बिना. प्लीज़ छोड़िए मुझे.” आदित्य ने कहा.


“ऐसा क्या जादू कर दिया है उसने तुम पर की तुम ये सब बोल रहे हो.”


“चाची जी मैं बाद में बात करूँगा आकर. पहले उसे रोक लूँ. अगर वो कही खो गयी तो मैं कही का नही रहूँगा.” आदित्य ने कहा और बाहर की तरफ भागा.




आदित्य भाग कर घर से बाहर आया मगर उसे ज़रीना कही दीखाई नही दी. आदित्य सीधा होटेल पहुँचा. मगर ज़रीना वाहा भी नही थी.


“कहा चली गयी तुम ज़रीना…क्या फिर से हम जुदा हो गये. क्या पहली बार की लड़ाई से हमने कुछ नही सीखा. तुम ऐसे छ्चोड़ कर नही जा सकती मुझे.” आदित्य ने कहा.


होटेल से निकल कर अदित्य ने ज़रीना को हर तरफ देखा. कोलाबा का चप्पा चप्पा छान मारा मगर वो उसे कही नही मिली. थक हार कर वो वापिस चाचा के घर आ गया ये सोच कर कि क्या पता वो वापिस आ गयी हो गुस्सा थूक कर. ऐसा सोचना था तो अजीब मगर प्यार हर उम्मीद का दामन थाम लेता है.


जब अदित्य घर आया तो सिमरन वाहा से जाने की तैयारी कर रही थी. अदित्य को देख कर तुरंत आई उसके पास, “कहा है ज़रीना, वो ठीक तो है ना.”


“कुछ कह नही सकता. मुझे वो कही नही मिली. कोलाबा का चप्पा चप्पा छान मारा मगर उष्का कही पता नही चला. होटेल भी नही पहुँची वो.”


“हे भगवान सब मेरी वजह से हुवा है. मैने भी बहुत कुछ बोल दिया उशे. आप दोनो के प्यार की पूरी कहानी नही जानती मगर इतना ज़रूर समझ गयी हूँ कि आप दोनो का प्यार इतना अनमोल है कि उसमे किसी छेड़ छाड़ की गूंजायस नही है. मैं पापी बन गयी हूँ आप दोनो के प्यार में तूफान खड़ा करने के कारण. आप दोनो मुझे माफ़ कर दीजिएगा. मैं जा रही हूँ वापिस. अब इस बाल-विवाह नामक कृति से मैं भी आज़ाद होना चाहती हूँ. कोई शिकवा नही है आप दोनो से. बल्कि ख़ुसी है कि इतना अनमोल प्यार देखने को मिला मुझे. आपको ज़रीना मिले तो मेरी तरफ से माफी माँग लेना उस से.मैने बहुत दिल दुखाया है उसका.”


“कैसे जा रही हो देल्ही…टिकेट बुक करवा रखी है क्या?” अदित्य ने कहा.


“नही टिकेट तो मिल ही जाएगी एरपोर्ट से. देल्ही मुंबई की मॅग्ज़िमम फ्लाइट्स होती हैं.”


“हां वो तो है. आपको छ्चोड़ने चलता मगर ज़रीना के लिए परेशान हूँ. मुझे माफ़ कर दीजिएगा आप.मुझे यकीन है की बहुत अछा लाइफ पार्ट्नर मिलेगा आपको.”


“आप से अछा नही मिल सकता जानती हूँ. पर आपकी अनभिलासा नही करूँगी अब क्योंकि वैसा करना पाप होगा. आप ज़रीना के हैं और ज़रीना आप की है. दुख बहुत है आपको खोने का मगर आप दोनो का प्यार देख कर ये दुख ख़ुसी में बदलता जा रहा है.


मुझे यकीन है कि ज़रीना जल्द मिल जाएगी आपको.”


“हां वो गुस्से में बैठी होगी कही चुप कर. मैं उसे ढूंड ही लूँगा. वापिस होटेल जा कर देखता हूँ, हो सकता है वो आ गयी हो.”


आदित्य होटेल पहुँचा तो उसकी ख़ुसी का ठीकाना नही रहा. रिसेप्षन से उसे पता चल गया की ज़रीना कमरे में है.


आदित्य खुश था कि ज़रीना कमरे में है. तुरंत भाग कर आया वो कमरे पर. मगर ज़रीना का थप्पड़ और उसकी कही बातें बार-बार उसके कानो में गूँज रही थी. आदित्या ने रूम की बेल बजाई. ज़रीना उस वक्त बिस्तर पर पड़ी थी पेट के बल. आँखो से आँसुओं की नदिया बह रही थी. बेल को अनशुना कर दिया ज़रीना ने और ज्यों की त्यों पड़ी रही बिस्तर पर. आदित्य बार-बार बेल बजाता रहा मगर ज़रीना ने दरवाजा नही खोला.


“ज़रीना दरवाजा खोलो…मैं बहुत परेशान हूँ. मुझे और परेशान मत करो. प्लीज़ दरवाजा खोलो…मेरा दिल बैठा जा रहा है…तुम ठीक तो हो ना…मुझे चिंता हो रही है तुम्हारी.” आदित्य ने कहा.


ज़रीना धीरे से उठी बिस्तर से और लड़खड़ाते कदमो से दरवाजे की तरफ बढ़ी और दरवाजा खोला.


“क्यों आए हो यहा…अपनी बीवी के पास नही रह सकते क्या…कहा था ना मैने की मेरे पीछे आए तो मेरा मरा मूह देखोगे.?”


“ज़रीना प्लीज़…ऐसी बाते मत करो. तुम्हारे बिना नही जी सकता ये तुम आछे से जानती हो.”


“पर अब तुम्हे जीना होगा. तुम कहते हो कि तुम वो शादी नही निभा सकते और मैं कहती हूँ कि मैं ये प्यार नही निभा सकती. प्लीज़ चले जाओ यहा से. नही चाहिए तुम्हारा प्यार मुझे.”


“ये क्या पागल पन है ज़रीना…और…और ये हाथ में खून कैसा है.” आदित्या की नज़र ज़रीना के दायें हाथ से टपकते खून पर गयी.


“सज़ा दी है खुद को तुम्हे थप्पड़ मारने की.” ज़रीना ने सुबक्ते हुवे कहा.


“तुम कौन होती हो खुद को यू सज़ा देने वाली. दीखाओ मुझे…अफ कितना खून बह रहा है.” आदित्या ने ज़रीना का हाथ पकड़ने की कोशिस की.


“खबरदार जो मुझे छुवा तो…कोई हक़ नही है तुम्हारा मेरे उपर अब.”


“अगर कोई हक़ नही है तो फिर क्यों सज़ा दी तुमने खुद को. पागल मत बनो दीखाओ मुझे…कितना खून बह रहा है.”


“आइ कॅन टेक केर ऑफ माइसेल्फ मिस्टर अदित्य. तुम अपनी बीवी को सम्भालो जाकर और अपने परिवार में खुश रहो.”


“ये क्या बकवास कर रही हो. अब मैं थप्पड़ मारूँगा तुम्हे अगर यू ही बकवास करती रही तो.”


“तो मारो ना रोका किसने है. मुझे जान से मार डालो. तुमने ही बचाया था मुझे एक दिन मरने से, तुम्हे हक़ है मुझे मारने का.”


“क्या सिर्फ़ इश्लीए हक़ है क्योंकि तुम्हे मैने बचाया था. क्या प्यार का हक़ नही है.”


“वो प्यार अब बिखर चुका है अदित्य. वो हक़ नही दूँगी तुम्हे मैं.”


“ग्रेट…तुम सच में पागल हो गयी हो. अरे अब सब कुछ ठीक हो चुका है. सिमरन समझ गयी है हमारे प्यार को. वो हमारे बीच से हट गयी है.”


“मुझे ये मंजूर नही है अदित्य.”


“क्यों मंजूर नही है तुम्हे क्या जान सकता हूँ.”


“तुमने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई और अब पूछ रहे हो कि क्यों मंजूर नही है. क्या ग़लती है सिमरन की?.... और क्या ग़लती है मेरी? … सब तुम्हारी ग़लती है. मुझसे इतनी बड़ी बात ना छिपाते तो ये दिन नही देखना पड़ता. मेरे चरित्र को छलनी छलनी कर दिया गया आज. कभी मुझे मेरे मज़हब के कारण जॅलील किया गया तो कभी मुझे लालची लड़की की संगया दी गयी जो की तुम्हारी दौलत के पीछे पड़ी है. चलो ये सब भी सह लिया. मगर मेरे अम्मी, अब्बा का क्या कसूर था. बिना सोचे समझे उन्हे भी भला बुरा कहा गया. बहुत गहरी चोट लगी है दिल पे मेरे आज…जिनके घाव कभी नही भर पाएँगे. काश उन दंगो में अपने अम्मी, अब्बा और फ़ातिमा के साथ मैं भी मर जाती तो ये दिन तो नही देखना पड़ता.”


“ज़रीना!” आदित्या चिल्लाया और थप्पड़ जड़ दिया ज़रीना के गाल पर.


“तुम नही जानते अदित्य क्या बीती है मेरे दिल पर आज. तुम मेरी जगह होते तो समझते. सिमरन का हक़ पहले है तुम पर. वो पहले आई थी तुम्हारी जींदगी में.”


“क्या नही समझा तुम्हारे बारे में जान जो ये सब बोल रही हो. तुम्हारे दिल में उठी हर हलचल मेरे दिलो दिमाग़ में तूफान मचा देती है. तुम ना भी कहो तब भी समझ सकता हूँ तुम्हारे दर्द को…क्योंकि हम जुड़ चुके हैं एक दूसरे से. जो चोट तुम्हारे दिल पर लगी है आज वही चोट मेरे दिल पर भी लगी है. खुद को मुझसे जुदा करके मत देखो. हम दो जिश्म एक जान है ज़रीना. तुम मुझसे दूर गयी तो मर जाउन्गा. मान लो की सिमरन को अपना भी लूँ तो भी कभी उसे खुश नही रख पाउन्गा. घुट-घुट कर जीएगी वो मेरे साथ. क्योंकि मेरी आत्मा तुम हो जान. मेरे दिल के मंदिर में तुम्हे भगवान बना कर बैठा चुका हूँ. उष मंदिर में किसी और की तस्वीर नही लगा पाउन्गा. सिमरन और मेरा रिश्ता इस समाज ने बनाया था पर तुम्हारा और मेरा रिश्ता भगवान ने बनाया है. भगवान के फ़ैसले का ही आदर करना होगा हमें. और सिमरन अब समझ गयी है. उस से मेरी बात हो गयी है. अब कोई रुकावट नही है हमारी शादी में.”


“उसकी आँखो में बेन्तेहा प्यार देखा है मैने तुम्हारे लिए. अभी हम किसी बंधन में नही बँधे हैं. तुम आराम से उसके साथ अपनी जींदगी की शुरूवात कर सकते हो.” ज़रीना ने कहा.


“मेरी आँखो में देख कर कहना ज़रा ये बात.” आदित्य ने कहा.


“अदित्य तुम कुछ भी कहो…पर मैं ये प्यार नही निभा सकती. किसी के पति को छीन-ने का इल्ज़ाम नही लेना चाहती अपने सर पर. ना ही ये इल्ज़ाम लेना चाहतीं हू की किशी लालच के कारण पड़ी हूँ मैं पीछे तुम्हारे.”


“बंद करो ये बकवास तुम.”


“ये बकवास नही है. अपने दिल पर पत्थर रख कर बोल रही हूँ.”


“मुझे खुद से दूर करने की बजाए एक खंजर गाढ दो मेरे सीने में तो ज़्यादा अछा होगा. अरे मैं कैसे निभा लूँ शादी सिमरन से जबकि मेरे मन मंदिर में तुम हो. तुम मेरी जींदगी हो जान. नही जी सकता हूँ तुम्हारे बिना. मर जाउन्गा तुमसे अलग हो कर तो पता चलेगा तुम्हे की क्या हो तुम मेरे लिए.”


ज़रीना कदमो में बैठ गयी अदित्य के और रोने लगी, “मैं भी कहा जी सकती हूँ तुम्हारे बिना. सोच कर भी डर लगता है.पता नही ये उलझन क्यों आ गयी हमारे जीवन. बड़ी मुश्किल से तो एक साल बाद मिले थे. अभी शांति से प्यार के मीठे दो बोल भी नही बोल पाए थे एक दूसरे को की ये सब हो गया. ऐसा क्यों हो रहा है हमारे साथ अदित्य.”


“उठो पहले तुम. मेरे कदमो में अछी नही लगती तुम.” आदित्य ने ज़रीना को कंधे से उठाते हुवे कहा.


“क्या हम सिमरन के गुनहगार नही बन जाएँगे. उस से मिली नही थी तो कुछ फरक नही पड़ता था. उस से मिली तो उसकी आँखो में तुम्हारे लिए प्यार देखा. खुद को एक लुटेरा महसूस कर रही हूँ. जिसने अचानक तुम्हारी जींदगी में आकर तुमको सिमरन से छीन लिया. मैं मर जाना चाहती थी आज. पर पता नही क्यों रुक गयी. क्योंकि मेरी जींदगी पर तुम्हारा हक़ है इश्लीए शायद खुद को मार नही पाई.”


“जान अगर मैं भी सिमरन को चाहता तो तुम्हारा सोचना सही होता. मैने कभी इतने सालो में सिमरन को सोचा तक नही…चाहने की तो दूर की बात है. अब वो मुझसे प्यार कर बैठी तो इसमे मेरा तो कोई कसूर नही है. मैं तो उस से मिला तक नही. और एक बात बता दूं. मम्मी, पापा की मौत के बाद मैं भी बिखर चुका था. तुम मिली मुझे तो जीने का हॉंसला सा हुवा. हम दोनो की हालत एक जैसी थी जब हम मिले थे. हम मिले और दो कदम साथ चल कर हमें एक दूसरे से प्यार हो गया. जान हम किसी कीमत पर जुदा नही हो सकते. ये तुम भी जानती हो और मैं भी जानता हूँ.”


ज़रीना अदित्य के सामने थी और अदित्य की आँखो में देख रही थी. दोनो खो गये थे एक दूसरे में. कब आँसू टपक गये दोनो के एक साथ उन्हे पता ही नही चला.


“बोलो ज़रीना क्या जी पाओगि मेरे बिना?”


“ऐसा सोच भी नही सकती अदित्य….मत पूछो ऐसी बात.” ज़रीना सुबक्ते हुवे बोली.


“फिर क्यों भाग आई थी मुझे छ्चोड़ कर वाहा से तुम.”


“मरने के लिए निकली थी वाहा से…जीने के लिए नही.”


आदित्य ने आगे बढ़ कर बाहों में जाकड़ लिया ज़रीना को, “ओह जान कभी छ्चोड़ कर मत जाना मुझे चाहे कुछ हो जाए. नही जी सकता हूँ तुम्हारे बिना ये बात समझ लो आछे से आज.”


“मैं भी कहा जी सकती हूँ तुम्हारे बिना. क्या हाल हुवा मेरा तुम्हे थप्पड़ मार कर सिर्फ़ मैं ही जानती हूँ. मुझे माफ़ कर दो प्लीज़.”


“माफी ऐसे नही मिलेगी”


“क्या करना होगा मुझे?”


आदित्य ने ज़रीना के चेहरे को अपने दोनो हाथो में थाम लिया. ज़रीना सिहर उठी. वो समझ गयी थी कि अदित्य क्या करना चाहता है. उसने अपनी आँखे बंद कर ली. उसके होन्ट खुद-ब-खुद थिरकने लगे.


आदित्य ज़रीना के थिरकते होंटो को देख कर मुश्कुरा उठा, “क्या चूम लूँ इन थिरकते लबों को.”


“मुझसे मत पूछो…कुछ भी नही कह पाउन्गि.” ज़रीना आँखे बंद किए हुवे ही बोली.




आदित्य ने बिना वक्त गवायें अपने होन्ट ज़रीना के थिरकते लबों पर टीका दिए. ज़रीना सर से लेकर पाँव तक सिहर उठी… ऐसा लग रहा था जैसे की आदित्य ने शितार के तार छेड़ दिए हों.


दोनो के होन्ट दहक्ते अंगारों की तरह एक दूसरे से टकरा रहे थे. दोनो के प्यार का पहला चुंबन उनके प्यार की ही तरह अद्वित्य और सुंदर था. वक्त जैसे थम सा गया था. बहुत देर तक दीवानो की तरफ चूमते रहे दोनो.


दोनो को ऐसा चुंबन करने का पूरा अधिकार था. प्यार जो करते थे बेन्तेहा एक दूसरे को. होंटो की भासा भी बहुत प्यारी होती है. इसे भी होन्ट ही बोलते हैं और होन्ट ही सुनते हैं. चुंबन के उन पलों में दोनो के होन्ट बहुत कुछ कह रहे थे एक दूसरे को. लबों की हर हरकत कुछ कहती थी जिसे दोनो अपनी आत्मा की गहराई तक महसूस कर रहे थे.


वैसे तो कुछ भी और कहना मुश्किल हो रहा है दोनो के इस पहले चुंबन के बारे में. मगर इतना ज़रूर कह सकता हूँ की प्यार ही प्यार था दोनो के बीच चुंबन के उन पलों में जो की दोनो के प्यार को एक और गहराई दे रहा था. ये बात किस करते वक्त दोनो ही बखूबी समझ रहे थे.


चुंबन में लीन ज़रीना और आदित्य दीन दुनिया सब कुछ भूल गये थे. वक्त का अहसास भी खो गया था. वो चुंबन किसी मेडिटेशन से कम नही था. जिस तरह मेडिटेशन में लीन हो कर हम अपने अंदर बहुत गहराई में उतर जाते हैं ठीक उसी तरह ज़रीना और आदित्य अपने अंदर भी उतर गये थे और एक दूसरे की आत्मा को भी छू रहे थे. ये एक अद्विद्य घटना थी. वैसे ये प्यार करने वालो के साथ रोज होती है.


जब दोनो की साँसे उखाड़ने लगी तो एक दूसरे से अलग हुवे. दोनो की आँखे नम थी और साँसे बहुत तेज चल रही थी. एक दूसरे की बाहों में बने हुवे थे दोनो और बड़े प्यार से एक दूसरे को देख रहे थे. साँसे एक दूसरे से टकरा रही थी.


“ज़रीना चाहे कुछ हो जाए…मुझसे जुदा होने की बात सोचना भी मत. तुम जानती हो ना…मर जाउन्गा तुम्हारे बिना मैं.”


“ओह आदित्य प्लीज़ ऐसा मत कहो…..”


दोनो ने एक दूसरे की आँखो में देखा. आँखो ही आँखो में जाने क्या बात हुई. दोनो की आँखे नम हो गयी देखते-देखते और अचानक दोनो के होन्ट फिर से खुद-ब-खुद एक दूसरे से जुड़ गये.


किसी ने सच ही कहा है, भावनाओ में बह कर दो प्रेमियों में जो प्यार होता है वो होश में रहकर कभी नही हो सकता. प्यार की गहराई में उतरने के लिए दीवानेपन की बहुत ज़रूरत होती है.


अचानक आदित्य को कुछ ध्यान आया और उसने ज़रीना के होंटो से अपने होन्ट हटा लिए. “हाथ पर क्या किया तुमने?”


“चाकू से चीर दिया था.”


“पागल हो गयी थी क्या तुम… रूको मैं अभी आता हूँ.”


“आदित्य कही मत जाओ प्लीज़…हो जाएगा ठीक अपने आप.”


आदित्य ने ज़रीना की बात को अनसुना कर दिया और कमरे से बाहर आ गया. कुछ देर बाद वो वापिस आ गया. वो केमिस्ट से मरहम-पट्टी ले आया था.


“लाओ हाथ आगे करो.”


“नही डेटॉल मत लगाना बहुत जलन होती है इस से….प्लीज़” ज़रीना छोटे बच्चे की तरह गिड़गिडाई.


“हाथ चीरते वक्त सोचना चाहिए था ये…ये लगाना ज़रूरी है. लाओ हाथ आगे करो.”


“नही प्लीज़…” ज़रीना गिड़गिडाई.


आदित्य ने हाथ पकड़ा ज़बरदस्ती और घाव को डेटॉल से सॉफ किया.


“आअहह….धीरे से बहुत जलन हो रही है.”


“दुबारा ऐसा मत करना कभी…समझी”


“समझ गयी.” ज़रीना ने मासूमियत से कहा.


डेटॉल से घाव साफ करने के बाद आदित्य ने बेटडिन लोशन लगा कर पट्टी बाँध दी हाथ पर. “सब ठीक हो जाएगा.”


“आदित्य मैं सिमरन से मिलना चाहती हूँ.”


“छ्चोड़ो अब ज़रीना…क्या अपनी और ज़्यादा बेज़्जती करवाना चाहती हो.”


“सिमरन ने मुझे कुछ नही कहा ऐसा आदित्य. मुझे उस से मिलकर सॉरी तो बोलना चाहिए ना. प्लीज़ कुछ करो…मैं उस से मिलना चाहती हूँ.”


“वो तो देल्ही के लिए निकल रही थी. शायद एरपोर्ट पहुँच भी गयी हो.”


“तो हम एरपोर्ट ही चलते हैं. वही मिल लेंगे.”


“ठीक है फिर चलो जल्दी…वैसे तुम्हारा सॉरी बोलना नही बनता है क्योंकि सारी ग़लती मेरी है. फिर भी तुम कहती हो तो चलो.”


दोनो तुरंत होटेल से बाहर आए और एरपोर्ट के लिए टॅक्सी लेकर चल दिए. जैसे ही वो दोनो एरपोर्ट पहुँचे सिमरन अपनी टॅक्सी से उतर रही थी. आदित्य की नज़र उस पर पड़ गयी.


“वो रही सिमरन. अछा हुवा की यही बाहर ही मिल गयी..आओ जल्दी” आदित्य ने ज़रीना से कहा.


वो दोनो तुरंत टॅक्सी से निकल कर सिमरन की तरफ बढ़े.


“सिमरन!” आदित्य ने आवाज़ दी.


सिमरन चोंक कर रुक गयी और पीछे मूड कर देखा. ज़रीना और आदित्य उसकी तरफ बढ़े आ रहे थे.


“सिमरन…क्या थोड़ी देर रुक सकती हो, ज़रीना तुमसे कुछ बात करना चाहती है.” आदित्य ने कहा


सिमरन ने ज़रीना की तरफ देखा. दोनो ने आँखो ही आँखो में कुछ कहा. ज़रीना की आँखो में रिक्वेस्ट थी और सिमरन की आँखों में उस रिक्वेस्ट के लिए मंज़ूरी.


“हां शुवर…” सिमरन ने कहा.


ज़रीना ने आदित्य को वाहा से दूर जाने का इशारा किया. आदित्य बात समझ कर वाहा से हट गया.


ज़रीना सिमरन के करीब आई और बोली, “मुझे माफ़ कर दो सिमरन. तुम्हारा हक़ अंजाने में छीन लिया मैने. अगर कोई सज़ा देना चाहो तो दे दो मुझे. ख़ुसी-ख़ुसी सह लूँगी. अपने प्यार की कसम खा कर कहती हूँ कि मरने के लिए निकली थी वाहा से. पर पता नही क्यों मर नही पाई. ये जींदगी आदित्य ने दी है मुझे. उसे ही हक़ है इसे लेने का. हां पर एक हक़ तुम्हे भी है. मुझे जो सज़ा देना चाहे दे दो. पर प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.


मुझे सच में नही पता था कि आदित्य पहले से शादी शुदा है वरना मैं हरगिज़ दिल नही लगाती आदित्य से. और सिमरन मैं किसी लालच के कारण आदित्य के साथ नही हूँ. बस एक ही लालच है, वो है अपनी जींदगी का. जी नही सकती आदित्य के बिना. इसलिए आज मरने जा रही थी. अब तुम बताओ मेरी क्या सज़ा है”


सिमरन ने ज़रीना के चेहरे पर हाथ रखा और बोली, “तुम्हे आज इतना कुछ सुन-ना पड़ा वाहा उस कमरे में. वो सज़ा क्या कम थी जो और माँग रही हो. तुम जब आदित्य को थप्पड़ मार कर वाहा से गयी तो मुझे रीयलाइज़ हुवा की हम लोग क्या पाप कर रहे थे. कितना गिर गये थे हम सब. मुझे खुद ना जाने क्या हो गया था. शायद चाची जी और निशा की बातों का असर था मुझ पर. माफी तो मुझे माँगनी चाहिए तुमसे. मेरे कारण तुम्हे इतना अपमान सहना पड़ा. क्या कुछ नही सुना तुमने आज. थ्री विमन वर डेस्ट्रायिंग दा कॅरक्टर ऑफ वन विमन, नतिंग कॅन बी मोर पैंफुल्ल दॅन दिस.”


“सिमरन तुम्हे मेरे दुख का अहसास हुवा और मुझे क्या चाहिए. मगर इस से मेरा गुनाह कम नही हो जाता. अंजाने में ही सही पर गुनाह तो हुवा है मुझसे. पता नही मैं कैसे माफ़ करूँगी खुद को.” ज़रीना ने कहा.


“प्यार करती हो ना आदित्य से…तो खुद को गुनहगार मत मानो तुम. प्यार खुदा की देन है और ये किसी भी हालत में गुनाह नही हो सकता. तुम अपने दिल से ये बात निकाल दो कि मेरा कुछ छीन लिया तुमने. हां पहले-पहले मुझे भी यही लग रहा था. मगर आज जब तुम दोनो का प्यार देखा तो समझ में आया कि असल में प्यार क्या है. मैं तो आदित्य से एक तरफ़ा प्यार करती हूँ. आदित्य की आँखो में मैने अपने लिए कुछ नही देखा. बल्कि मेरे लिए उतनी क्न्सर्न भी नही देखी जितनी तुम्हारी आँखो में है. ऐसे में मैं उनके गले में पड़ जाउ 7 साल पहले हुई शादी का वास्ता दे कर तो बिल्कुल ग़लत होगा. ज़बरदस्ती रिश्ते निभाए जा सकते हैं ज़रीना कोई बड़ी बात नही है. ऐसा बहुत लोग कर रहे हैं दुनिया में. मगर ज़बरदस्ती बनाया हुवा रिश्ता कभी प्यार का वो फूल नही खिला पाएगा जिसकी कि एक पति पत्नी के रिश्ते में संभावना होती है. आदित्य की नज़रो में तुम्हारे लिए बेन्तेहा प्यार देखा है मैने. तुम दोनो का साथ लिखा है भगवान ने. जाओ दोनो खुश रहो. भगवान मेरी सारी ख़ुसीया तुम दोनो को दे दे.” आँखे टपक गयी सिमरन की ये आखरी कुछ लाइन्स बोलते हुवे.


ज़रीना ने फ़ौरन सिमरन के होंटो पर हाथ रख दिया, “बस…तुम्हारी और कोई ख़ुसी नही चाहिए हमें. जितना लिया है…वही बहुत ज़्यादा हो गया है. दुवा तो मैं करती हूँ कि मेरे हिस्से की सारी ख़ुसीया अल्लाह तुम्हे दे दे.”


“बस-बस अब और मत रुलाओ मुझे. जाओ अपने आदित्य के पास. और तुम दोनो मुझे भूल मत जाना. मिलते रहना मुझसे. तुम दोनो से कोई गिला शिकवा नही है अब. बल्कि प्यार है तुम दोनो से. जाओ अब मैं बहुत भावुक हो रही हूँ.”


ज़रीना ने सिमरन को गले लगा लिया और बोली, “काश दंगो में मर जाती मैं तो तुम्हे कोई भी तकलीफ़ नही होती.”


“बस थप्पड़ मारूँगी तुम्हे मैं अब. दुबारा मत कहना ऐसा.”


आदित्य ये सब देख कर रोक नही पाया खुद को और आ गया दोनो के पास.


आदित्य को देख कर सिमरन बोली, “आप ज़रीना का ख्याल रखना. पता नही कैसा नाता जुड़ गया है इसके साथ. इसे हमेशा खुश रखना. ये खुश रहेगी तो मैं भी खुश रहूंगी. कोई तकलीफ़ नही होनी चाहिए मेरी ज़रीना को.”


ये सुन कर आदित्य की आँखे नम हो गयी और वो भावुक आवाज़ में बोला, “थॅंक यू सिमरन. थॅंक यू वेरी मच…कुछ नही सूझ रहा कि क्या कहूँ तुम्हे.”


“कुछ कहने की ज़रूरत नही है. ये बताओ की शादी कर चुके हो या करने वाले हो?”


ज़रीना, सिमरन से अलग हुई और बोली, “ये तुम तैय करोगी अब कि हम कब शादी करें.”


“मेरी तरफ से तो आज कर लो…”


“सिमरन तुम्हारे पेरेंट्स तो कोई समस्या नही करेंगे ना. कोई क़ानूनी उलझन तो पैदा नही करेंगे ना.”


“वो सब मुझ पर छ्चोड़ दो. और क़ानूनी अड़चन कोई नही है तुम्हारे सामने. बाल-विवाह को कोर्ट नही मानता. सिर्फ़ एक अप्लिकेशन से अन्नुलमेंट हो जाएगा. तुम दोनो बिना किसी चिंता के शादी करो. कोई दिक्कत नही आने दूँगी मैं. बाल-विवाह का कोई लीगल स्टेटस नही है.”


“बहुत जानकारी है लॉ की तुम्हे?” आदित्य ने कहा.


“लॉ स्टूडेंट हूँ ना. इश्लीए” सिमरन ने हंसते हुवे कहा.


“चाचा, चाची छोड़ने नही आए?”


“नही वो लोग आ रहे थे पर मैने ही मना कर दिया. अच्छा मैं लेट हो रही हूँ. कही फ्लाइट मिस ना हो जाए.” सिमरन ने कहा


“हां-हां तुम निकलो…हम मिलते रहेंगे.” ज़रीना ने कहा.


सिमरन ने ज़रीना के माथे को चूमा और बोली, “गॉड ब्लेस्स यू. हमेशा खुश रहना. किसी बात की चिंता मत करना.”


सिमरन ने आदित्य की तरफ देखा और बोली, “आप भी अपना और ज़रीना दोनो का ख़याल रखना.”


“बिल्कुल आपका हुकुम सर आँखो पर.” आदित्य ने हंसते हुवे कहा.


सिमरन चल पड़ी दोनो को वही छ्चोड़ कर. आदित्य और ज़रीना दोनो उसे जाते हुवे देखते रहे.




सिमरन और ज़रीना की ये मुलाक़ात और उनकी वो बातें किसी चमत्कार से कम नही थी. काई बार चमत्कार हमें वाहा देखने को मिलता है जहा पर उसकी उम्मीद तक नही होती. सिमरन चली गयी थी एरपोर्ट के अंदर. मगर जाते जाते ज़रीना और आदित्य के लिए एक शुकून भरी जींदगी छ्चोड़ गयी थी. वो दोनो अब बिना गिल्ट के साथ रह सकते थे. सिमरन ने ना बल्कि दोनो को माफ़ किया था बल्कि खुले दिल से दोनो के प्यार को स्वीकार भी किया था. ये किसी चमत्कार से कम नही था.


जींदगी में जब तूफान आता है तो इंसान का सुख चैन सब कुछ छीन कर ले जाता है. मगर तूफान हमेशा नही रहता. तूफान के बाद शांति भी आती है.


सिमरन के जाने के बाद ज़रीना और आदित्य कुछ देर तक एक दूसरे की तरफ देखते रहे. दोनो की आँखो में शुकून था और चेहरे पर शांति के भाव थे. तूफान के थमने के बाद अक्सर इंसान को एक अद्भुत शांति की अनुभूति होती है. कुछ ऐसा ही ज़रीना और आदित्य के साथ हो रहा था.


“चले होटेल वापिस…मेरे होन्ट बेचैन हो रहे हैं.”


“क्या मतलब?” ज़रीना ने हैरानी में पूछा.


“हमारी पहली किस कितनी प्यारी थी ना. खो गये थे हम एक दूसरे में.” आदित्य ने मुश्कूराते हुवे कहा.


“प्लीज़ ऐसी बाते मत करो वरना तुम्हारे साथ होटेल जाना मुश्किल हो जाएगा.” ज़रीना शर्मा गयी किस की बात पर. उसके चेहरे पर उभर आई शरम की लाली देखते ही बनती थी.


“कितनी देर तक किस की थी हमने. तुम्हारे होन्ट तो अंगरों की तरह तप रहे थे. तुम्हारे होंटो की तपिस से मेरे होन्ट झुलस गये हैं क्या तुम्हे खबर भी है.”


“प्लीज़ आदित्य और कुछ मत कहो मैं सुन नही पाउन्गि.” ज़रीना ने अपने सीने पर हाथ रख कर कहा.


“ये नया रूप देखा तुम्हारा जो की बहुत सुंदर है. मुझे नही पता था कि मुझे गमले और हॉकी से मारने वाली शर्मा भी सकती है.” आदित्य ने ज़रीना को कोहनी मार कर कहा.


“आदित्य अब बस भी करो.”


“ठीक है…मैं टॅक्सी बुलाता हूँ. डिन्नर होटेल में ही करेंगे.”


आदित्य ने एक टॅक्सी रोकी और दोनो उसमें बैठ कर होटेल की तरफ चल दिए. रास्ते भर ज़रीना गुमशुम रही. कभी-कभी आदित्य की तरफ देख कर हल्का सा मुश्कुरा देती थी. मगर ज़्यादातर वो चुपचाप और खोई-खोई सी रही. आदित्य जान गया था की कोई बात ज़रीना को परेशान कर रही है. पर उसने टॅक्सी में कुछ पूछना सही नही समझा. उसने तैय किया की वो होटेल जा कर ही ज़रीना से बात करेगा.


प्यार में एक दूसरे के चेहरे पर हल्की सी शिकन भी बर्दास्त नही कर पाते प्रेमी. यही वो चीज़ है जो रिश्ते में और ज़्यादा गहराई और सुंदरता लाती है. एक दूसरे की चिंता और फिकर ही वो इंसानी जज़्बा है जो प्रेमी जोड़ो में कूट-कूट कर भरा होता है.


होटेल के रूम में घुसते ही आदित्य ने ज़रीना का हाथ पकड़ लिया और बोला, “तुम कुछ परेशान सी हो जान. बात क्या है?. क्या मुझसे कोई भूल हो गयी है.”


“नही आदित्य तुमसे कोई भूल नही हुई है. बस वक्त ही कुछ अज़ीब है.” ज़रीना ने कहा.


“मैं कुछ समझा नही जान…खुल कर बताओ ना क्या बात है.”


“आदित्य…मैं शादी किए बिना वापिस अपने घर नही जाना चाहती. लोगो की नज़रो का सामना और नही कर सकती मैं. ऐसा लगता है जैसे की मैं कोई गुनहगार हूँ.”


“अरे अब तो सब सॉल्व हो गया. शादी में ज़्यादा देरी नही होगी. मैं गुजरात पहुँचते ही किसी वकील से मिल कर कोर्ट में अप्लिकेशन लग्वाउन्गा.”


“कोर्ट के फ़ैसले कितनी जल्दी आते हैं ये तुम भी जानते हो और मैं भी. जब तक ये क़ानूनी अड़चन दूर नही होगी हमारी शादी नही हो सकती. तब तक अपने ही घर में रहना मेरे लिए मुश्किल रहेगा. तुम नही जानते मैं कैसे लोगो की नज़रो का सामना करती हूँ. एक तो मेरा मुस्लिम होना ही गुनाह है उपर से लड़की हूँ…लोगो की नज़रो में नफ़रत और गली होती है मेरे लिए. तुम ही बताओ कैसे वापिस जाउन्गि मैं वाहा.” ज़रीना सूबक पड़ी बोलते-बोलते.


“समझ सकता हूँ जान. तुम्हारे किसी भी दर्द से अंजान नही हूँ मैं. जो बात तुम्हे दुख पहुँचाती है वो मेरे तन बदन में भी हलचल मचा देती है. तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा.”


“पर सब ठीक होने तक मैं कैसे रह पाउन्गि तुम्हारे साथ.”


“तो क्या मुझे छ्चोड़ कर जाना चाहती हो कही.”


“नही ऐसा तो मैं सपने में भी नही सोच सकती. रहूंगी तुम्हारे साथ ही चाहे कुछ हो जाए.”


“इस दुनिया की चिंता करेंगे तो जीना मुश्किल हो जाएगा. छ्चोड़ो इन बातों को. मैं देल्ही जा कर आउट ऑफ कोर्ट सेटल्मेंट की बात करूँगा सिमरन के घर वालो से. शायद बात बन जाए. सिमरन तो हमारे साथ है ही.”


“हां कुछ ऐसा करो की हम जल्द से जल्द शादी के बंधन में बँध जायें.”


“मैं तुम्हे तुम्हारे अहमद चाचा के यहा छ्चोड़ कर देल्ही चला जाउन्गा.”


“अकेले तो तुम्हे कही नही जाने दूँगी मैं. चाहे कुछ हो जाए.”


“अच्छा बाबा तुम भी साथ चलना.”


“वो तो चलूंगी ही.”


“अरे यार हमने ये सब पहले क्यों नही सोचा. हम सिमरन के साथ ही देल्ही जा सकते थे. चलो कोई बात नही कल चल देंगे हम देल्ही. सही कहा तुमने ये मामला कोर्ट में अटक गया तो हमारी शादी अटक जाएगी...कोर्ट के बिना ही ये मसला हल करना होगा. अब जबकि सिमरन हमारे साथ है तो कोई ज़्यादा दिक्कत नही होनी चाहिए.”


ज़रीना हल्का सा मुश्कुराइ मगर अगले ही पल उसके चेहरे पर फिर से शिकन उभर आई.


“अब क्या हुवा जान. कोई और बात भी है क्या जो तुम्हे परेशान कर रही है.”


“नही और कुछ नही है चलो खाना खाते हैं.”


“नही कुछ तो है. तुम्हारे चेहरे पर ये शिकन इशारा कर रहा है कि कुछ और बात भी है जो की तुम्हे अंदर ही अंदर खाए जा रही है.”


“नही तुम्हे दुख होगा रहने दो.”


“बोलो ना क्या बात है जान. इस प्यारे रिश्ते में अब कोई भी बात पर्दे के पीछे नही रहनी चाहिए. बोलो ना प्लीज़ क्या बात है?”


“हमारे बीच शादी से पहले ही सेक्स शुरू हो गया. मेरे अम्मी-अब्बा ज़िंदा होते आज अगर और उन्हे इस बारे में पता चलता तो वो मुझे जान से मार देते.” ज़रीना नज़रे झुका कर बोली.


“क्या कहा तुमने सेक्स शुरू हो गया हाहहहाहा….. इस से ज़्यादा लोटपोट कर देने वाला चुटकुला नही सुना मैने कभी. अरे पागल हमने भावनाओं में बह कर बस किस ही तो की है एक दूसरे को. वो किस सेक्स के दायरे में नही आती.”


“तुम्हे क्या मैं बेवकूफ़ लगती हूँ या फिर तुम्हे ये लगता है कि मेरा दिमाग़ खिसका हुवा है. मेरे मज़हब ने मुझे शादी से पहले किसी बात की इज़ाज़त नही दी. किस तो बहुत बड़ी बात होती है.”


“हां मानता हूँ जान. शादी से पहले सेक्स में उतर जाना ग़लत है. पर हमारी किस पवित्र थी. उस पर कोई इल्ज़ाम बर्दास्त नही करूँगा मैं.”


“सॉरी आदित्य मेरी परवरिश ऐसे माहॉल में हुई है जहा शादी से पहले सेक्स से जुड़ी हर चीज़ को ग्लानि से देखा जाता है.” ज़रीना ने कहा.


“तो क्या तुम हमारी किस को अब ग्लानि से देख रही हो?”


“नही मैं ये पाप भी नही कर सकती क्योंकि इस प्यार में वो अब तक का सबसे हसीन पल था मेरे लिए. ऐसा लग रहा था जैसे मैं तुम्हारे बाहुत करीब पहुँच गयी हूँ.”


“और क्या तुमने एक बात नोट की.”


“कौन सी बात.”


“तुमने कहा था कि मुझे चुंबन लेना नही आता मगर तुम्हारे होन्ट तो खूबसूरत चुंबन की एक दास्तान लिख रहे थे मेरे होंटो पर.”


ज़रीना का चेहरा लाल हो गया ये सुन कर. वो कुछ देर खामोश रही. फिर अचानक नज़रे आदित्य के कदमो पर टिका कर बोली, “हमने कुछ ग़लत तो नही किया ना आदित्य.”


“मैं तो इतना जानता हूँ ज़रीना कि प्यार भगवान है. अगर इस प्यार में बह कर हम कुछ कर बैठे तो वो हरगिज़ ग़लत नही हो सकता. बल्कि मैं तो बहुत खुश हूँ उस चुंबन के बाद. रह रह कर मेरे होंटो पर मुझे अभी तक तुम्हारे होंटो की छुवन महसूस हो रही है. बहुत प्यारा अहसास मिला है जींदगी में ये.”


“अच्छा खाना मॅंगा लो. भूक लग रही है.”


“एक बात तो तुम्हे बतानी ही पड़ेगी. चुंबन लेना कहा से सीखा तुमने.”


“हटो…मैं इस बात को लेकर परेशान हूँ और तुम्हे मज़ाक सूझ रहा है.”


“उस वक्त तो तरह-तरह से मेरे होंटो से खेल रही थी अब परेशान हो रही हो हहेहहे. मेरी ज़रीना गिरगिट की तरह रंग बदलती है.”


“आदित्य अब तुम्हारी खैर नही…” ज़रीना ने कहा. प्यार भरा गुस्सा था उसकी आवाज़ में.


आदित्य भाग कर टाय्लेट में घुस्स गया और कुण्डी लगा ली.


“निकलो बाहर. तुम्हारी जान ले लूँगी मैं आज.”


“उस से पहले खाना खिला दो मुझे. खाने का ऑर्डर कर दो. मैं नहा कर ही निकलूंगा बाहर अब हाहहाहा.”


ज़रीना पाँव पटक कर रह गयी.




प्यार हमें हर तरह के रंग दीखता है. लड़ाता भी है, हँसाता भी है, रुलाता भी है और कभी-कभी प्यारी सी नोक झोंक पैदा कर देता है रिश्ते में. प्यार का हर रंग अनमोल और अद्विद्या है. चुंबन का भी अपना ही महत्व है. चुंबन तो बस एक बहाना है प्यार का मकसद हमें ऐसी जगह ले जाना है जहा हम बस एक दूसरे में खो जायें. क्योंकि प्यार एक दूसरे में खो कर ही होता है…अपने आप में होश में रह कर नही………


आदित्य नहा कर चुपचाप दबे पाँव बाहर निकला वॉशरूम से. ज़रीना बिस्तर पर आँखे बंद किए पड़ी थी.


“खाने का ऑर्डर कर दिया क्या?”


“हां कर दिया…आता ही होगा?” ज़रीना ने कहा.


आदित्य ज़रीना के पास आकर बैठ गया और बोला, “क्या हुवा फिर से चेहरे पर 12 बजा रखे हैं…अब कौन सी नयी समस्या है तुम्हारी.”


“कुछ नही…बस सोच रही थी की सिमरन के घर वाले मान तो जाएँगे ना.”


“बातचीत करने से हर मसला हाल हो जाता है ज़रीना. हम एक कोशिस करेंगे बाकी भगवान की मर्ज़ी.”


“आदित्य तुम मुझे चिढ़ा क्यों रहे थे…तुम्हे शरम नही आती ऐसा बोलते हुवे. मैं तुमसे नाराज़ हूँ.”


“उफ्फ अभी तक नाराज़ हो. जाओ नहा कर आओ फटाफट… दीमाग ठंडा हो जाएगा. और किसी बात की चिंता मत करो सब ठीक होगा.” आदित्य ने कहा.


……………………………………………………………….


अगली सुबह आदित्य और ज़रीना मुंबई एरपोर्ट के लिए निकल पड़े. दोपहर 12 बजे वो देल्ही में थे. सिमरन कारोल बाग में रहती थी. उन्होने कारोल बाग में ही एक होटेल में रूम ले लिया.


कुछ घंटे रेस्ट करने के बाद ज़रीना को होटेल में ही छ्चोड़ कर आदित्य सिमरन के घर आ गया. सिमरन घर में सब कुछ बता चुकी थी इश्लीए आदित्य का कोई ख़ास स्वागत नही हुवा.


“तो तुम अब जले पर नमक छिड़कने आए हो” सिमरन के पापा ने कहा. सिमरन एक तरफ खड़ी सब सुन रही थी.


“जी नही मैं माफी माँगने आया हूँ. आप मुझे माफ़ कर दीजिए. सिमरन ने आपको सब कुछ बता ही दिया है. हम सभी के लिए यही अछा है कि हम बैठ कर आपस में ही इसका हल निकाल लें. कोर्ट जाने से हमारा वक्त ही बर्बाद होगा. मानता हूँ मेरा स्वार्थ है इसमें पर इसमें आप लोगो का भी भला ही है”


सिमरन के पापा कुछ बोले बिना उठ कर चले गये. सिमरन ने आदित्य को इशारा किया मैं समझाती हूँ इन्हे तुम चिंता मत करो.


आदित्य चुपचाप वही बैठा रहा. कोई एक घंटे बाद सिमरन सिमरन कमरे में दाखिल हुई.


“आप अभी जाओ…कल इसी वक्त आ जाना तब तक मैं पापा को मना लूँगी. वो मेरी बात नही टालेंगे.”


“ठीक है सिमरन…सॉरी तुम लोगो को डिस्टर्ब करने के लिए पर मेरे पास कोई चारा नही था. ये मामला कोर्ट में पता नही कब तक लटका रहेगा. तुम तो लॉ स्टूडेंट हो ये बात बखूबी समझ सकती हो.”


“हां मैं समझ रही हूँ. पापा भी समझ जाएँगे. कल से आगे नही जाएगी बात.”


“थॅंक यू सिमरन…चलता हूँ मैं.”


“ज़रीना कहा है?”


“साथ ही आई है. होटेल में छ्चोड़ कर आया हूँ. वो अकेले मुझे कही जाने ही नही देती.”


“ये तो अच्छी बात है ना. उसे देल्ही घूमाओ आप आज. कल आएँगे तो निराश नही जाएँगे यहा से.”


“जानता हूँ. आपके होते हुवे निराशा हो ही नही सकती. चलता हूँ मैं.” आदित्य घर से बाहर निकल आया.


अगले दिन जब आदित्य सिमरन के घर पहुँचा तो सिमरन के पापा ने उसे देख कर गहरी साँस ली और बोले, “ठीक है मैं कुछ लोगो को बुलाता हूँ. आज ही ये किस्सा निपटा देते हैं. और ये मैं तुम्हारे लिए नही बल्कि अपनी बेटी के लिए कर रहा हूँ. इसका भी इस बंधन से आज़ाद होना ज़रूरी है ताकि हम इसका घर बसाने की सोच सकें तुमने तो उजाड़ने में कोई कसर नही छ्चोड़ी.”


आदित्य ने चुप रहना ही सही समझा.जब आप मूह तक पानी में डूबे हों तो मूह बंद ही रखना चाहिए वरना दिक्कतें और ज़्यादा बढ़ सकती हैं. आदित्य ये बात बखूबी समझ रहा था.


कुछ लोग इकट्ठा हुवे उस घर में और स्टंप पेपर पर आदित्य और सिमरन को वैवाहिक संबंध से आज़ाद कर दिया. स्टंप पेपर की एक कॉपी सिमरन के पापा ने रख ली और एक आदित्य को थमा दी.


आदित्य अपनी खुशी छुपा नही पाया और सिमरन के पापा के पाँव छू लिए आगे बढ़ कर, “ये अहसान मैं जींदगी भर नही भूलूंगा.”


“हम भी तुम्हे जींदगी भर नही भूलेंगे.”


आदित्य को सिमरन कही दीखाई नही दे रही थी. वो उसे बाइ करना चाहता था जाने से पहले. उसने सिमरन के बारे में पूछना सही नही समझा क्योंकि माहॉल गरम था. वो स्टंप पेपर को लेकर चुपचाप बाहर आ गया.


बाहर आकर उसने पीछे मूड कर देखा तो पाया की सिमरन छत पर खड़ी थी. जैसे ही दोनो की नज़रे टकराई सिमरन ने हंसते हुवे हाथ हिला कर अलविदा कहा.


आदित्य की आँखे नम हो गयी सिमरन को देख कर. “मुझे माफ़ करना सिमरन. तुम्हारे सच्चे प्यार को ठुकरा दिया मैने. लेकिन कोई चारा नही था सिमरन. मेरे रोम-रोम में ज़रीना बस चुकी है. मैं चाहूं तो भी खुद को ज़रीना से जुदा नही कर सकता क्योंकि मर जाउन्गा उस से जुदा होते ही. यही दुवा करता हूँ की हमेशा खुस रहो तुम. जींदगी में कोई भी गम या दुख तुम्हारे पास भी ना भटक पाए. हे भगवान सिमरन को हमेशा खुश रखना.”


आदित्य आँखो में नमी लिए आगे बढ़ गया. होटेल तक पहुँचते-पहुँचते आँखो की नमी सूख चुकी थी और धीरे-धीरे उनमें एक अद्भुत चमक उभरने लगी थी. अब आदित्य और ज़रीना की शादी में कोई रुकावट नही थी. आदित्य ये बात सोच-सोच कर झूम रहा था. पाँव ज़मीन पर नही टिक रहे थे उसके.


आदित्य होटेल की तरफ बढ़ते हुवे ये गीत गुनगुना रहा था:


♫♫♫♫…….ऐसा लगता है मैं हवाओ में हूँ….आज इतनी ख़ुसी मिली है


आज बस में नही है मन मेरा…आज इतनी ख़ुसी मिली है……♫♫♫♫


आदित्य ने जब होटेल के कमरे की बेल बजाई. ज़रीना ने भाग कर दरवाजा खोला.


“क्या हुवा आदित्य?”


“तुम्हे क्या लगता है…”


“जल्दी बताओ ना प्लीज़…मेरी साँसे अटकी हुई हैं जान-ने के लिए.”


आदित्य ने जेब से निकाल कर स्टंप पेपर दिखाया और बोला, “अब हमारी शादी में कोई रुकावट नही है जान. हम जब जी चाहे शादी कर सकते हैं.”


“सच!” ज़रीना उछल पड़ी ये बात सुन कर.


“हां अब तुम जी भर कर खेलना मेरे होंटो से…जितना जी चाहे उतना झुलसा देना इन्हे अपने अंगरो से. मैं उफ्फ तक नही करूँगा. तुम्हारी किस का कोई जवाब नही.”


“आदित्य तुम मार खाओगे अब मुझसे.”


“अपने होने वाले पति को मारोगी तुम.”


“पागल हो क्या…मज़ाक कर रही हूँ.”


“पता है मुझे…अब ये बताओ कब बनोगी मेरी दुल्हनिया.”


“आज, अभी…इसी वक्त…बनाओगे क्या बोलो.”


“ख़ुसी-ख़ुसी……बस एक बात बात बताओ हिंदू रीति रिवाज से शादी करना चाहोगी या फिर मुस्लिम रीति रिवाज से.”


“उस से कुछ फरक पड़ेगा क्या?”


“बिल्कुल भी नही?”


“फिर क्यों पूछ रहे हो.”


“यू ही तुम्हारा व्यू लेना चाहता था इस बारे में.”


“मेरा कोई व्यू नही है इस बारे में सच कह रही हूँ मैं. तुम मुझे जैसे चाहो अपनी दुल्हन बना लो. वैसे तुम्हारे भगवान के मंदिर में शादी करना चाहती हूँ मैं तुमसे. तुम मुझे एक साल बाद मंदिर में ही तो मिले थे.”


“पक्का…”


“हां पक्का.”


“ठीक है फिर. हम देल्ही से ही शादी करके चलते हैं. तुम अब अपने घर में मेरी दुल्हन बन कर ही प्रवेश करोगी.”


“आज जाकर दिल को शुकून मिला है. अल्लाह अब कोई और मुसीबत ना डाले हमारी शादी में.”


“कोई मुसीबत नही आएगी. बी पॉज़िटिव. जींदगी में उतार चढ़ाव तो चलते रहते हैं. तुम्हारी मौसी को भी बुला लेंगे हम.”


“नही…नही मौसी को मत बुलाओ. किसी को वाहा भनक भी लग गयी तो तूफान मचा देंगे लोग. तुम नही जानते उन्हे. जीतने कम लोग हों उतना अच्छा है.”


“ह्म्म बात तो सही कह रही हो.”


“जान बस और वेट नही होता मुझसे. मैं अभी सब इंटेज़ाम करके आता हूँ. हम कल सुबह शादी कर लेंगे”


“हां आदित्या बस अब और नही. मुझे मेरा हक़ दे दो ताकि दुनिया के सामने सर उठा कर जी सकूँ.”


आदित्य निकल तो दिया होटेल से शादी का इंटेज़ाम करने के लिए पर उसे इस काम में बहुत भाग दौड़ करनी पड़ी. मंदिरों के पुजारी तैयार ही नही थे शादी करवाने के लिए.आदित्य दरअसल हर जगह ज़रीना का नाम ले कर ग़लती कर रहा था. ज़रीना का नाम सुनते ही पुजारी मना कर देते थे. लेकिन दुनिया में हर तरह के लोग रहते हैं. एक जगह पुजारी ना बल्कि तैयार हुवा शादी करवाने को बल्कि बहुत खुश भी हुवा हिंदू-मुस्लिम का ये प्यार देख कर.


“बेटा मैं तो शोभाग्य समझूंगा अपना ये शादी करवा कर. तुम लोग सुबह ठीक 11 बजे आ जाना यहा.”


“पंडित जी हम दोनो यहा किसी को नही जानते. कन्या दान कैसे होगा..कोन करेगा.”


“उसका इंटेज़ाम भी हो जाएगा. मेरे एक मित्र हैं वो ख़ुसी ख़ुसी कर देंगे ये काम. तुम चिंता मत करो बस वक्त से पहुँच जाना. दोपहर बाद मुझे एक पाठ करने जाना है.”


“धन्यवाद पंडित जी. आप चिंता ना करें. हम वक्त से पहुँच जाएँगे.”


मंदिर में शादी का इंटेज़ाम करने के बाद आदित्य कपड़ो के शोरुम में घुस गया और ज़रीना के लिए लाल रंग की एक सारी खरीद ली. सारी लेकर वो ख़ुसी ख़ुसी होटेल की तरफ चल दिया.


होटेल पहुँच कर उसने ज़रीना को सारी दीखाई तो ज़रीना ने कुछ ख़ास रेस्पॉन्स नही दिया.


“क्या हुवा…क्या सारी पसंद नही आई?”


“मैं ये नही पहन सकती. ये शेड मुझे पसंद नही”


“हद है इतने प्यार से लाया हूँ मैं ज़रीना और तुम ऐसे बोल रही हो.” आदित्य सारी को बिस्तर पर फेंक कर वॉशरूम में घुस गया.


आदित्य वॉशरूम से बाहर आया तो ज़रीना उस से लिपट गयी.



“नाराज़ क्यों होते हो आदित्य. मेरी ज़ींदगी का इतना बड़ा दिन है और मैं अपनी पसंद का कुछ पहन-ना चाहती हूँ तो क्या ये ग़लत है. ये दिन जींदगी भर याद रहेगा हमें. देखो याद रखो कोई लड़ाई नही करनी है हमें. लड़ाई का परिणाम देख चुके हैं हम.”


“लड़ाई तो बेसक करेंगे जान पर एक दूसरे को छ्चोड़ कर नही जाएँगे. अब हम शादी के बंधन में बँधने जा रहे हैं. ये बात गाँठ बाँध लेते हैं की कभी एक दूसरे का साथ नही छ्चोड़ेंगे. क्योंकि छ्चोड़ेंगे भी तो पछताना भी हमें ही पड़ेगा.”


“हां ये तो हम देख ही चुके हैं. दूसरी सारी ले लेते हैं ना आदित्य…प्लीज़.”


“अरे पागल प्लीज़ क्यों बोल रही हो. एनितिंग फॉर यू. चलो अभी लेकर आते हैं तुम्हारी मन पसंद सारी. मेरी ज़रीना दुल्हन बन-ने जा रही है कोई मज़ाक नही है”


“आदित्य बहुत खर्चा करवा रही हूँ तुम्हारा. शरम सी तो आती है पर क्या करूँ. 10 लाख की एफडी है मेरे नाम…वो दहेज में दे रही हूँ तुम्हे. पूरी भरपाई कर लेना.”


“ये क्या बकवास कर रही हो ज़रीना. तुम्हारा मेरा क्या अलग-अलग है.”


“मुझे ताना दिया गया था इस बात का आदित्य. बहुत बुरा लगा था मुझे. मैं कोई तुम्हारी दौलत के पीछे नही हूँ. तुम तो जानते ही हो ना, मेरे अब्बा का भी तो अच्छा बिज़्नेस था. दंगो ने सब तबाह कर दिया.”


“मैं जानता हूँ जान. दुनिया तो कुछ भी कहती है. सचाई तो हम जानते हैं ना. चलो अब तुम्हारे लिए प्यारी सी सारी लेकर आते हैं.”


“तुम भी तो कुछ नया खरीद लो ना. शादी में पुराने कपड़े नही पहने जाते.” ज़रीना ने कहा.


“ऐसा है क्या…चलो फिर मैं भी खरीद लेता हूँ.”


शादी हो रही थी दोनो की. ये बात सोच कर ही झूम उठते थे दोनो. बहुत मुश्किल से ये खुशी पाने जा रहे थे दोनो. एक लंबा इंतेज़ार किया था दोनो ने. ज़रीना ने अपनी मन पसंद सारी खरीदी. आदित्य ने भी अपने लिए एक नयी पॅंट शर्ट ले ली. ख़ुसनसीब थे दोनो जो की एक साथ अपनी शादी की शॉपिंग कर रहे थे. ये अवसर हमारे समाज में हर किसी को नही मिलता.


शॉपिंग करने के बाद वो जब होटेल की तरफ जा रहे थे तो एक अज़ीब सी सुंदर सी मुस्कुराहट थी दोनो के चेहरे पर. चेहरे के ये भाव उनके दिलो में बसी ख़ुसी का इज़हार कर रहे थे.


होटेल पहुँच कर दोनो बिस्तर पर गिर गये. आदित्य एक कोने पर था और ज़रीना दूसरे कोने पर. बहुत थक गये थे दोनो.


“ज़रीना!”


“हां आदित्य”


“आइ लव यू सूऊऊ मच.”


“आइ लव यू टू.”


“शादी तो कर रहा हूँ तुमसे मगर अब एक चिंता सता रही है.” आदित्य ने कहा.


ये सुनते ही ज़रीना के चेहरे पर चिंता की लकीरे उभर आई. वो आदित्य की तरफ मूडी और बोली, “कैसी चिंता आदित्य.”


“रहने दो तुम्हे बुरा लगेगा” आदित्य ने कहा.


“बोलो आदित्य प्लीज़…मेरा दिल बैठा जा रहा है.” ज़रीना ने कहा.


“उस दिन के चुंबन से मेरे होन्ट अभी तक झुलस रहे हैं. शादी के बाद मेरा क्या होगा ज़रीना. कैसे झेलूँगा मैं तुम्हारे अंगारों को. यही चिंता सता रही है.”


“आदित्य मैं मारूँगी तुम्हे तुमने दुबारा ऐसा मज़ाक किया तो. अब से कोई चुंबन नही होगा हमारे बीच.”


“क्यों नही होगा!...ऐसा क्यों बोल रही हो.”


“बोल दिया तो बोल दिया.”


आदित्य ने ज़रीना का हाथ थाम लिया और उसे अपने तरफ झटका दिया. दोनो बहुत करीब आ गये. चेहरे बिल्कुल आमने सामने थे. साँसे टकरा रही थी दोनो की.


“छ्चोड़ो मुझे आदित्य.”


“तुम्हारे होंटो के अंगारों से झुलस जाना चाहता हूँ मैं. रख दो ये अंगारे मेरे होंटो पर जान मैं फिर से उसी अहसास को जीना चाहता हूँ.”


“ना मेरे होन्ट अंगारे हैं और ना मैं इन्हे कही रखूँगी छ्चोड़ो मुझे.”


“उफ्फ गुस्से में तो तुम और भी ज़्यादा सुंदर लगती हो. मन तो कर रहा है तुम्हारे होंटो पर होन्ट रखने का पर तुम्हारी मर्ज़ी के बिना नही रखूँगा.”


“मेरी मर्ज़ी कभी नही होगी अब. तुम मज़ाक उड़ाते हो मेरा. छ्चोड़ो मुझे.”


“कभी सपने में भी नही सोचा था कि इस नकचाढ़ि को प्यार करूँगा और इसके होंटो पर अपने होन्ट रखूँगा. कॉलेज टाइम में ऐसा विचार भी आता तो मुझे उल्टी आ जाती. इतनी नापसंद थी तुम मुझे.”


“ये…ये..ये…तुम बड़े मुझे पसंद थे. सर फोड़ने का मन करता था तुम्हारा.उस वक्त तुमसे प्यार का सोचने से पहले स्यूयिसाइड कर लेती मैं. बहुत ज़्यादा बेकार लगते थे तुम मुझे.”


“आज ऐसा क्या है ज़रीना कि हम एक साथ इस बिस्तर पर पड़े हैं एक दूसरे के इतने करीब.”


“तुमने ज़बरदस्ती रोक रखा है मुझे अपने करीब. कॉन तुम्हारे करीब रहना चाहता है.”


“चलो फिर छ्चोड़ दिया तुम्हारा हाथ. जाओ जहा जाना है.” आदित्य ने ज़रीना का हाथ छ्चोड़ दिया.


ज़रीना आदित्य के पास से बिल्कुल नही हिली. आँखे बंद करके वही पड़ी रही.


“क्या हुवा जान…जाओ ना. मैने तुम्हारा हाथ छ्चोड़ दिया है.”


ज़रीना ने आदित्य की छाती में ज़ोर से मुक्का मारा.


“आउच…इतनी ज़ोर से क्यों मारा.” आदित्य कराह उठा.


“तुम्हे पता है ना कि मैं तुमसे दूर नही रह सकती इश्लीए ये सब मज़ाक करते हो.” ज़रीना ने कहा.


“अफ जान निकाल दी मेरी. बहुत ख़तरनाक हो तुम.” आदित्य ने कहा.


ज़रीना ने आदित्य की छाती पर हाथ रखा और उसे मसल्ते हुवे बोली, “ज़्यादा ज़ोर से लगी क्या?”


“तुम जब मारती हो तो ज़ोर से ही मारती हो.”


“तुम मुझे यू सताते क्यों हो फिर. शरम भी आती है किसी को ये बाते सुन कर.”


“किसको शरम आती है? इस कमरे में तुम्हारे और मेरे शिवा भी कोई है क्या.”


“आदित्य तुम इतने शैतान निकलोगे मैने सोचा नही था.” ज़रीना ने कहा.


“ऐसा तो नही था कभी. तुमने दीवाना बना दिया मुझे जान. तुम मेरा पहला प्यार हो. तुमसे पहले ज़्यादा इनटरेक्षन नही रहा लड़कियों से.”


“जानती हूँ मैं. मेरा तो इंटेरेस्ट ही नही था किसी से दोस्ती करने में. मैं भी बस तुम्हे जानती हूँ. मेरा पहला और आखरी प्यार तुम ही हो.”


“इतनी प्यारी बात कर रही हो. एक प्यारी सी किस दे दो ना और जला दो मेरे होंटो को एक बार फिर से.”


“जल कर राख हो जाओगे रहने दो हिहिहीही.” ज़रीना ने हंसते हुवे कहा.


“तुम मुझे खाक में मिला दो तो भी चलेगा. तुम्हारे हुस्न की आग में जलना चाहता हूँ मैं.”


“अछा.”


“हां.”


“तुम कही झुटि तारीफ़ तो नही करते मेरी.”


“लो कर लो बात. कॉलेज में तुम मशहूर थी अपने हुस्न के लिए. तुम्हारी ही चर्चा हुवा करती थी हर तरफ लड़को में. ये बात और थी की तुम मुझे बिल्कुल पसंद नही थी.”


“क्या मैं इश्लीए पसंद नही थी कि मैं मुस्लिम थी?”


“ज़रीना कैसी बात कर रही हो.”


“बोलो ना आदित्य मैं नापसंद क्यों थी तुम्हे.”


“ये तो मैं भी पूछ सकता हूँ कि क्या तुम मुझसे नफ़रत इश्लीए करती थी क्योंकि मैं हिंदू था.”


“पहले मेरे सवाल का जवाब दो ना प्लीज़. पहले मैने सवाल किया है.”


“हां ज़रीना झूठ नही बोलूँगा. उस वक्त मुस्लिम लोगो से चिढ़ता था मैं. देश में कही भी टेररिस्ट अटॅक होता था तो बहुत गालिया देता था मैं. काई बार मन में ख़याल आता था कि मेरे पड़ोस में भी टेररिस्ट रह रहे हैं. तुम लोगो से लड़ाई और ज़्यादा नफ़रत पैदा करती थी तुम्हारे प्रति.”


“झूठ नही बोल सकते थे…इतना कड़वा सच बोलने की क्या ज़रूरत थी.” ज़रीना रो पड़ी बोलते-बोलते.


“जान…तुमने सवाल सच जान-ने के लिए किया था या फिर झूठ. अब तुम बताओ कि तुम क्यों नफ़रत करती तू मुझसे.”


“मुझे कभी किसी हिंदू के नज़दीक जाने की इच्छा नही होती थी, क्योंकि मुझे यही लगता था कि ये लोग हमें दबाते हैं इस देश में. माइनोरिटी होने के कारण हमारे साथ हर जगह भेदभाव होता है. कॉलेज में मेरे सभी मुस्लिम फ्रेंड्स ही थे. और हम लोगो के परिवारों का लड़ाई झगड़ा होने के कारण तुमसे नफ़रत और ज़्यादा बढ़ गयी थी.”


“शूकर है शादी होने से पहले ये राज खुल गये.” आदित्य ने कहा.


“तो क्या अब हम शादी नही करेंगे.” ज़रीना ने बड़ी मासूमियत से पूछा.


“तुम बताओ क्या इरादा है तुम्हारा?”


एक पल को खामोसी छा गयी दोनो के बीच. दोनो बहुत करीब पड़े थे एक दूसरे के. कुछ कहने की बजाए दोनो एक दूसरे की आँखो में झाँक रहे थे. कब उनके होन्ट मिल गये एक दूसरे से उन्हे पता ही नही चला. दोनो के होन्ट एक साथ हरकत कर रहे थे. 10 मिनिट तक बेतहासा चूमते रहे दोनो एक दूसरे को. जब उनके होन्ट जुदा हुवे तो बड़े प्यार से देख रहे थे दोनो एक दूसरे को.


“मिल गया जवाब.” आदित्य ने हंसते हुवे पूछा.


“हां मिल गया. यही कह सकती हूँ कि प्यार के आगे ये बातें कुछ मायने नही रखती.”


“हां हम एक दूसरे के करीब आए तो हम जान पाए एक दूसरे को. वरना तो जींदगी भर नफ़रत बनी रहती. हम आस आ हुमन बिएंग एक दूसरे से नफ़रत नही करते थे. बल्कि डिफरेंट रिलिजन से होने के कारण एक दूसरे को नापसंद करते थे. हम एक महीना साथ रहे तो धरम की झूठी दीवार गिर गयी. दीवार गिरने के बाद हम उसके पीछे खड़े असली इंसान को देख पाए. काश इस देश में हर कोई ऐसा कर पाए. मैं अपने पहले के विचारों के लिए शर्मिंदा हूँ.”


“मैं भी शर्मिंदा हूँ आदित्य. अच्छा हुवा जो कि हमें प्यार हुवा और हम एक दूसरे को जान पाए. प्यार में बहुत ताक़त होती है ना आदित्य.”


“हां बहुत ज़्यादा ताक़त होती है. ये प्यार ज़रीना जैसी लड़की को भी किस करना सीखा देता है. ऑम्ग फिर से बहुत प्यारा चुंबन दिया तुमने.”


“हटो छोड़ो मुझे…तुम फिर से शैतानी पर उतर आए.”


आदित्य और ज़रीना बिस्तर पड़े हुवे प्यार के उस कोमल अहसास को पा रहे थे जिसके लिए ज़्यादा तर लोग जीवन भर तरसते हैं. दोनो की आँखों में बहुत सारे सपने थे आने वाली जींदगी के लिए और दिलों में ढेर सारी उमंग थी.



जब दिल में बहुत ज़्यादा ख़ुसी हो तो अक्सर आँखो की नींद खो जाती है. दिल हर वक्त बेचैन सा रहता है. ऐसा ही कुछ हो रहा था आदित्य और ज़रीना के साथ.एक तो चुंबन की खुमारी थी उपर से होने वाली शादी की ख़ुसी. दोनो पर अजीब सा नशा कर दिया था प्यार ने.


अचानक ज़रीना को कुछ ख़याल आया, “आदित्य हम जब से मार्केट से आयें हैं यही पड़े हैं. क्या हमने खाना खाया?”


“अरे खा लेंगे खाना भी. जब तुम पास हो तो भूक प्यास किस कम्बख़त को लगती है.”


“अरे कैसी बात कर रहे हो. खाना खा कर हमे जल्दी सो जाना चाहिए. सुबह जल्दी उठ कर हमें तैयार भी तो होना है.” ज़रीना ने कहा.


“मैं तो किसी भी वक्त उठ कर मॅनेज कर लूँगा. तुम लड़कियों को ही वक्त लगता है तैयार होने में.”


“मेरी शादी हो रही है…तैयार होने में वक्त तो लगेगा ना.”


“अछा बाबा मैं ऑर्डर देता हूँ. तुम एक गरमा गरम चुंबन तैयार रखो. खाने के बाद स्वीट डिश की तरह काम आएगा.”


“जी हां जनाब बिल्कुल. मेरा तो यही काम रह गया है. चलिए अपना रास्ता देखिए… मुझे और भी बहुत काम हैं.”


“काम कैसा काम?”


“मुझे बहुत कुछ सोचना है कल के बारे में. मुझे ये भी नही पता अभी कि शादी के लिए तैयार कैसे होना है.”


“हो जाएगा सब…तुम चिंता मत करो…मैं खाने का ऑर्डर देता हूँ…क्या लोगि तुम.”


“मॅंगा लो कुछ भी ज़्यादा भूक तो है नही.”


“ओके.” आदित्य ने फोन उठा कर खाने के लिए बोल दिया.


खाना खाने के बाद ज़रीना बिस्तर पर पसर गयी और बोली, “अब यहा कोई भी आने की जुर्रत ना करे. हमें नींद आ रही है.”


“हहहे….झूठ बोल रही हो तुम.नींद नही आने वाली आज…चाहे कुछ कर लो तुम. मेरी बाहों में रहोगी तो शायद नींद आ भी जाए. अकेले तो बिल्कुल भी नही सो पाओगि तुम”


“कुछ भी हो यहा नही आओगे तुम अब.”


“कोई बात नही जान. आज रात छ्चोड़ देता हूँ तुम्हे अकेला. कल से देखता हूँ कैसे भगाओगि मुझे तुम बिस्तर से.”


“कल की कल देखेंगे.” ज़रीना ने होंटो पर प्यारी सी मुश्कान बिखेर कर कहा.


प्यार ने धीरे धीरे एक हसीन कामुक रस भर दिया था दोनो की जींदगी में. इन्ही बातों के कारण ज़रीना आदित्य से शरमाने लगी थी. हर पल उनका रिश्ता नया रूप ले रहा था और नये रंग में रंग रहा था. प्यार हर तरह के रंग भरने की कोशिस करता है प्रेमियों की जींदगी में. ज़रीना खुस थी मगर अपने संस्कारों के कारण झीजक और शरम उसके अस्तित्व को घेरे हुवे थी. ये बातें उसके चरित्र की सुंदरता को और ज़्यादा बढ़ाती थी. आदित्य भी अंजान नही था अपनी ज़रीना के इस स्वाभाव से. मन ही मन मुश्कूराता था वो ज़रीना की इन बातों पर. तभी तो उसे छेड़ता था बार बार. काम रस भी प्रेमियों की जींदगी में उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की प्रेम रस.


ज़रीना करवटें बदलती रही रात भर. बड़ी मुश्किल से आँख लगी थी उसकी. यही हाल आदित्य का भी था. ज़रीना तो सुबह 5 बजे ही उठ गयी. 6 बजे आदित्य की आँख खुली तो उसने देखा कि ज़रीना गुम्सुम और उदास बैठी है बिस्तर पर. आदित्य ज़रीना के पास आया और बोला, “क्या हुवा जान…इतनी परेशान सी क्यों लग रही हो?”


“आदित्य दुल्हन की तरह सजना मुझे आता ही नही. समझ में नही आ रहा की क्या करूँ.”


“हे जान परेशान क्यों होती हो. तुम तो बिना सजे सँवरे ही मेरे दिल पर सितम धाती हो. ज़्यादा कुछ करने की ज़रूरत नही है. थोड़ा बहुत सज लो काम बन जाएगा.”


“मज़ाक मत करो. जींदगी भर हमारे साथ मेमोरी रहेगी इस दिन कि. मैं दुल्हन की तरह दिखना चाहती हूँ आदित्य.”


“अछा मैं कुछ करता हूँ तुम चिंता मत करो.” आदित्य ने कहा.


आदित्य ने होटेल रिसेप्षन पर इस बारे में बात की. रिसेप्षनिस्ट ने एक लड़की को फोन मिलाया, “हाई जिम्मी…यहा एक लड़का लड़की ठहरे हुवे हैं होटेल में. दोनो आज मंदिर में शादी कर रहे हैं. क्या तुम लड़की को दुल्हन की तरह सज़ा दोगि आकर.”


“दोनो घर से भागे हुवे हैं क्या?” जिम्मी ने पूछा.


“उस से कुछ फरक पड़ेगा क्या?”


“नही वैसे ही पूछ रही हूँ. मैं आ रही हूँ 30 मिनिट में.”


“ओके थॅंक यू सो मच.” रिसेप्षनिस्ट ने कहा.


“बात बन गयी…वो आ रही है आधे घंटे में.”


“थॅंक यू सो मच डियर. आपका नाम क्या है.”


“आइ आम मनीष फ्रॉम शिमला. हमारे होटेल की ब्रांच शिमला में भी है. शादी के बाद हनिमून के लिए आप वाहा आ सकते हैं. हम आपके लिए स्पेशल कन्सेशन देंगे.”


“सो नाइस ऑफ यू मनीष जी. कभी वक्त लगा तो ज़रूर आएँगे.”


आदित्य वापिस कमरे में आ गया और बोला, “सब इंटेज़ाम हो गया है. तुम्हे सजाने के लिए एक लड़की आ रही है, जिम्मी नाम है उसका.मैं नहा धो कर तैयार हो जाता हूँ जल्दी से वो आएगी तो मुझे बाहर जाना होगा.”


“हां हां तुम जल्दी करो कही हम लेट ना हो जायें. 11 बजे मंदिर पहुँचना है याद है ना.”


“जानेमन मैं तो तैयार हो जाउन्गा अभी…सारा वक्त तो तुम्हे ही लगना है हहेहहे.” आदित्य मुश्कूराता हुवा वॉशरूम में घुस्स गया.


आदित्य नहा कर नये कपड़े पहन कर बाहर आया तो देखा कि सोफे पर एक लड़की बैठी है.


“आदित्य ये जिम्मी है. अब तुम बाहर जाओ जल्दी मुझे भी तैयार होना है.


आदित्य ने जिम्मी को गुड मॉर्निंग विश किया और चुपचाप बाहर आ गया. कोई 10 बजे जिम्मी रूम से बाहर निकली और बोली, “तुम्हारी दुल्हन तैयार है…जाओ देख लो जाकर. तुम्हे ऐतराज ना हो तो क्या शादी में मैं भी आ सकती हूँ.”


“मुझे भला क्यों ऐतराज़ होगा. हम वैसे भी अकेले हैं. कोई साथ होगा तो अछा ही लगेगा.” आदित्य ने जिम्मी को उस मंदिर का पता बता दिया जहा शादी होने जा रही थी.


“थॅंक्स…मैं पूरे 11 बजे वाहा पहुँच जाउन्गि. बाइ.” जिम्मी ने कहा.


आदित्य कमरे में आया तो ज़रीना को देखता ही रह गया, “ऑम्ग मेरी ज़रीना आज कतल कर देगी मेरा. अफ क्या लग रही हो तुम.”


ज़रीना ने अपना चेहरा हाथो में छुपा लिया शरम के मारे, “मुझे छेड़ो मत ऐसे नही तो शादी नही करूँगी तुम्हारे साथ.”


“अच्छा” आदित्य शरारती अंदाज़ में ज़रीना की तरफ बढ़ा.


“छूना मत मुझे… सारा मेक अप खराब हो जाएगा.” ज़रीना पीछे हट-ते हुवे बोली.


“प्लीज़ जान थोड़ा करीब तो आने दो. बहुत प्यारी लग रही हो तुम. सच में बहुत सुंदर सजाया है जिम्मी ने तुम्हे. तुम्हे मेरी नज़र ना लग जाए.” आदित्य ने कहा.


ज़रीना बस हल्का सा मुश्कुरा दी आदित्य की बात पर और बोली, “हमें चलना चाहिए आदित्य. कही हम लेट ना हो जायें. देल्ही के ट्रॅफिक का कोई भरोसा नही है.”


“एक मिनिट ज़रा जी भर कर देख तो लेने दो मुझे अपनी दुल्हनिया को.” आदित्य ने कहा.


“उफ्फ तुम्हारे देखने के चक्कर में हमारी शादी ना डेले हो जाए.”


“क्या बात है बड़ी जल्दी में हो शादी की. लगता है मुझे जला कर राख करने की जल्दी है तुम्हे. अच्छी बात है. मैं खुद तड़प रहा हूँ खाक में मिल जाने के लिए.” आदित्य ने कहा.


“आदित्य तुम मुझे बार-बार इन बातों में मत उलझाया करो. हम लेट हो रहे हैं और तुम्हे मज़ाक सूझ रहा है.”


“ओके ओके जान अब गुस्सा मत करो. तुम वैसे ही बहुत प्यारी लग रही हो. गुस्सा करोगी तो जान निकल जाएगी मेरी. गुस्से में तो तुम और ज़्यादा प्यारी लगती हो. चलो चलते हैं. मैने एक टॅक्सी कर ली है मंदिर तक जाने के लिए.”


“ठीक है चलो अब ज़्यादा देर मत करो.”


ज़रीना और आदित्य हंसते मुश्कूराते होटेल से बाहर आए और टॅक्सी में बैठ कर मंदिर की तरफ चल दिए. जब वो मंदिर पहुँचे तो हैरान रह गये. मंदिर सज़ा हुवा था.


“लगता है कोई और कार्यकरम भी है मंदिर में.” आदित्य ने कहा.


“आदित्य कोई गड़बड़ तो नही होगी ना.”


“अरे नही पागल कोई गड़बड़ नही होगी. मंदिर के पंडित जी मुझे भले व्यक्ति लगे. ज़्यादा ओल्ड नही हैं वो. यंग पुजारी हैं. तभी शायद उन्होने हमारे प्यार को समझा.” आदित्य ने कहा.


आदित्य और ज़रीना मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़े ही थे कि उन्हे पंडित जी मिल गये.


“नमस्कार पंडित जी” आदित्य ने कहा. ज़रीना ने भी सर हिला कर नमस्कार किया.


“आओ आदित्य आओ. हम तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रहे थे. तुम कह रहे थे कि तुम्हारा यहा कोई नही मगर देखो भगवान की क्या लीला है. तुम दोनो की कहानी सुन कर बहुत लोग इकट्ठा हो गये हैं यहा पर. मुझे उम्मीद है तुम दोनो को बुरा नही लगेगा.”


“नही पंडित जी कैसी बात कर रहे हैं आप.”


“आओ मैं सभी से तुम्हारा परिचय करवाता हूँ.”


“अपना परिचय भी दे दीजिए पंडित जी.” आदित्य ने कहा.


“मेरा नाम रवि है आदित्य. आओ बाकी मित्रो से भी मिल लो.” रवि ने कहा.


“आओ ज़रीना.” आदित्य ने ज़रीना से कहा. ज़रीना थोड़ी घबराई सी लग रही थी.


अगले ही पल उन्हे बहुत सारे लोगो ने घेर लिया.


“ये हैं आलोक जी. इन्हे जैसे ही मैने बताया कि तुम दोनो की शादी है कल तो मेरे बोलने से पहले ही कन्यादान के लिए तैयार हो गये.ये ही कन्यादान करेंगे.” रवि ने कहा.


“और मैं खुद को ख़ुसनसीब समझूंगा.” आलोक ने कहा.


“ख़ुसनसीब तो हम समझेंगे खुद को आलोक जी.” आदित्य ने कहा.


ज़रीना और आदित्य ने आलोक को हंस कर हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.


“ये हैं जावेद जी. ये यहा हैं तो चिंता की कोई बात नही है. ये तो तुम दोनो को फरिश्ता मानते हैं”


आदित्य और ज़रीना ने जावेद को हंस कर हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.


“ये है मिनी. हम इसे छुटकी कहते हैं.”


मिनी ने आगे बढ़ कर ज़रीना को गले लगा लिया और बोली, “मैं तुम्हारी तरफ से हूँ शादी में. खुद को अकेली मत समझना.”


“थॅंक यू मिनी.” ज़रीना ने कहा.


“ये हैं विवेक जी. तुम दोनो की कहानी सुन कर बहुत भावुक हो गये थे. दिल के बहुत अच्छे हैं. बिज़ी होने के बावजूद भी ये यहा आने से खुद को रोक नही पाए.”


“ये हैं सिकेन्दर जी. ये यहा खुशी खुशी केटरिंग का इंटेज़ाम कर रहे हैं.”


“केटरिंग.” आदित्य हैरान रह गया.


“हां केटरिंग. तुम दोनो की शादी है..पार्टी तो होनी ही चाहिए ना.”


“जी हां सरकार खाने पीने का अपनी तरफ से अच्छा परबंध किया है.”


आदित्य और ज़रीना ने हाथ जोड़ कर सिकेन्दर का शुक्रिया किया.



“ये हैं सौरव दा. इन्होने कोल्ड ड्रिंक का परबंध किया है यहा पर. इतनी गर्मी में कोल्ड ड्रिंक सभी को थोड़ी राहत देगी.”


“आदित्य और ज़रीना ने सौरव का भी हाथ जोड़ कर शुक्रिया अदा किया.


,, ये हैं राज शर्मा मेरे दोस्त आज ही किसी काम से मेरे पास आए थे जब इन्होने तुम्हारे प्यार के बारे मे सुना तो तुमसे मिलने के लिए बेताब हो गये ये कहानियाँ लिखते है और अब तुम्हारी कहानी को भी ये अपने ब्लॉग पर डालने वाले है


आदित्य और जरीना ने राज शर्मा को हाथ जोड़ कर प्रणाम किया


“ये हैं मनोज जी. इतने खुश हैं आपकी शादी से की सुबह से यही के चक्कर काट रहे हैं.”


आदित्य और ज़रीना ने मनोज को हंसते हुवे हाथ जोड़ कर प्रणाम किया.


“ये हैं नाइस विका जी. इतने खुस है ये तुम दोनो की शादी से कि संगीत का आयोजन कर दिया है इन्होने यहा. हल्का-हल्का मध्यम म्यूज़िक चलता रहेगा ताकि मंदिर में किसी को तकलीफ़ ना हो.”


आदित्य और ज़रीना ने हाथ जोड़ कर विका को भी नमस्कार कहा.


“ये हैं मनीष जी. इन्होने शादी के फोटोस खींचने का जिम्मा ले लिया है.” रवि ने कहा.


आदित्या और ज़रीना ने मनीष को भी हाथ जोड़ कर नमस्कार कहा.


“ये हैं रोहन जी. राजनीति में अच्छी पकड़ है इनकी मगर फिर भी एलेक्षन हार गये. ये भी ख़ुसी ख़ुसी आए हैं यहा”


आदित्य और ज़रीना ने रोहन को भी हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.


“लास्ट बट नोट दा लिस्ट ये हैं रोहित पांडे. बहुत बिज़ी थे ये भी. लेकिन शादी में आने से खुद को रोक नही पाए.”


आदित्य और ज़रीना ने रोहित को भी हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.


“वैसे आप इन सबको कैसे जानते हैं पंडित जी.” आदित्य ने पूछा.


“यू ही एक दिन अचानक मिल गये थे सभी. कब दोस्ती हो गयी पता ही नही चला. चलो अब शुभ मुहूरत का वक्त निकला जा रहा है. आओ जल्दी से पहले तुम दोनो के फेरे करवा दूं बातें तो होती रहेंगी.” रवि ने कहा.


रवि उनको मंडप की तरफ ले जा ही रहा था कि जिम्मी भी आ गयी. साथ में होटेल के रिसेप्षनिस्ट मनीष भी थे.


रवि आदित्य और ज़रीना को मंडप में ले आया और उन दोनो को अग्नि के सामने बैठने को कहा. ज़रीना और आदित्य ने एक दूसरे की तरफ देखा. दोनो की ही आँखे नम थी. ये ख़ुसी के आँसू थे. आदित्य ने ज़रीना का हाथ थाम लिया और उसे बैठने का इशारा किया.


पूरा एक घंटा लगा पूरे प्रोसेस में. सभी लोग उन दोनो के हर फेरे पर ताली बजा रहे थे. आदित्य और ज़रीना ने सोचा भी नही था कि इतनी रोनक लग जाएगी उनकी शादी में. उनकी शादी धूम धाम से हो रही थी. फेरो के बाद सभी ने मंदिर के एक कोने में इकट्ठा हो कर सवादिस्ट खाने का आनंद लिया.


खाना इतना था कि मंदिर में आ रहे दूसरे लोग भी खाना खा सकते थे. कुछ खा भी रहे थे. आदित्य और ज़रीना ने मंदिर के बाहर बैठे ग़रीब लोगो को अपने हाथो से खाना दिया. बहुत खुस थे दोनो इश्लीए भगवान के हर बंदे के साथ अपनी ख़ुसी बाँटना चाहते थे.


सभी का हाथ जोड़ कर शुक्रिया करके आदित्य और ज़रीना टॅक्सी में बैठ कर होटेल की तरफ चल दिए.दोनो के चेहरे पर शुकून था और एक प्यारी सी मुश्कान हर वक्त उनके चेहरे पर चिपकी हुई थी.


“कितने अच्छे लोग थे सभी. आलोक भैया तो बहुत एमोशनल हो रहे थे कन्यादान के वक्त.” ज़रीना ने कहा.


“हां इन लोगो के आने से जो रोनक लगी उसे हम जींदगी भर नही भूल पाएँगे. हम तो तन्हा चले थे होटेल से लोग जुड़ते गये कारवाँ बनता गया.”


“आदित्य बहुत खर्चा किया लोगो ने हमारे लिए. हमें कुछ तो देना चाहिए था उन्हे.”


“मैने पंडित जी से पूछा था पर उन्होने मना कर दिया. उन्होने कहा कि हमारे प्यार के बदले में तुम हमें कुछ दोगे तो ये व्यापार बन जाएगा. प्लीज़ इसे प्यार ही रहने दो.”


“ह्म्म बहुत अच्छा लगा इन लोगो का साथ.”


“हां सही कहा.”


अचानक बाते करते करते ज़रीना बिल्कुल खामोश हो गयी. उसने अपना चेहरा खिड़की की तरफ घुमा लिया.


“क्या हुवा जान…अचानक चुप क्यों हो गयी.”


ज़रीना ने आदित्य की तरफ मूड कर देखा. उसकी आँखे नम थी. वो ख़ुसी के आँसू नही लग रहे थे.


आदित्य ने ज़रीना के हाथ पर हाथ रखा और बोला, “क्या बात है जान…क्या मुझसे कोई भूल हो गयी.”


“नही आदित्य तुमसे कोई भूल नही हुई. बस यू ही उदास हूँ.”


आदित्य ने टॅक्सी में होने के कारण कुछ और पूछना सही नही समझा. जब वो होटेल पहुँचे तो कमरे में आते ही ज़रीना फूट पड़ी. रोते हुवे वो सोफे पर बैठ गयी.


“क्या हुवा जान…कुछ बताओ तो सही.”


“अम्मी-अब्बा और फ़ातिमा की याद आ रही है आज आदित्य. अपने अम्मी-अब्बा के गले लग कर रोना चाहती थी मैं आज पर वो इस दुनिया में नही हैं. कितनी बदनसीब हूँ मैं.”


आदित्य ज़रीना के सामने फार्स पर बैठ गया और उसका हाथ थाम कर बोला, “जान तुम्हारा दर्द समझ सकता हूँ. हम दोनो ने अपने पेरेंट्स को एक साथ खोया है. अगर तुम्हारे अम्मी अब्बा और मेरे मम्मी पापा जींदा होते तो बहुत ज़्यादा नाराज़ होते हम दोनो से. मगर मुझे यकीन है कि हम एक ना एक दिन मना ही लेते उनको.”


“हां आदित्य वही तो. वो नाराज़ रहते मगर इस दुनिया में तो रहते. कभी ना कभी हम उन्हे मना ही लेते. तुम्हे नही पता कैसे संभाला मैने खुद को मंदिर में. ये दंगे क्यों होते हैं आदित्य. कोई इन्हे रोकता क्यों नही.”


“भीड़ जब पागल हो जाती है तो उसे रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है. और जब भीड़ किसी के बहकावे में आ जाए तो स्तिथि और भी गंभीर हो जाती है. ये दंगे क्यों होते हैं नही कह सकता क्योंकि इतना ज्ञानी नही हूँ मैं. हां इतना ज़रूर कह सकता हूँ क़ि दंगे इंसान को हैवान बना देते हैं. मैने तुम्हे बताया था ना कि जब मुझे अपने मम्मी पापा की मौत का पता चला तो मेरा खून खोल उठा था. मेरे अंदर बदला लेने की आग भड़क उठी थी. मैं भी भीड़ में शामिल हो जाना चाहता था. लेकिन फ़ातिमा का रेप नही देख पाया ज़रीना. मुझे यही लगा कि किसी के साथ ऐसा नही होना चाहिए. 5 लोग भूके भेड़ियों की तरह नोच रहे थे उसे.”


“बस आदित्य बस प्लीज़ चुप हो जाओ…नही सुन सकती ये सब. बहुत प्यार करती हूँ मैं फ़ातिमा से. उसके बारे में ऐसा कुछ नही सुन सकती.”


“सॉरी जान तुमने सवाल किया तो बातों बातों में ये बात आ गयी ज़ुबान पर. छ्चोड़ो अब ये सब. मैं हूँ ना तुम्हारे साथ.”


“हां तुम हो तभी तो जींदा हूँ आदित्य.”


“आज इतने ख़ुसी के दिन क्या ऐसे उदास रहोगी.”


“सॉरी अचानक ख़याल आया तो रोक नही पाई मैं खुद को. मंदिर में सब लोग थे तो खुद को संभाले हुवे थी. सबके सामने नही रोना चाहती थी. तुम्हारे सामने खुद को संभाल नही पाई क्योंकि पता है मुझे की तुम संभाल लोगे मुझे.”


“मुझ पर इतना विश्वास रखने के लिए शुक्रिया आपका. अब अगर आपका वीदाई वाला रोना धोना बंद हो गया हो तो मैं अपना कार्यकरम शुरू करूँ.”


“कॉन सा कार्यकरम?” ज़रीना ने अपने आँसू पोंछते हुवे कहा.


“मज़ाक कर रहा हूँ. मैं ये चाहता हूँ कि बीती बातें भूल जाओ अब. बड़ी मुश्किल से ये ख़ुसी पाई है हमने. इसे जी भर कर जीना चाहिए हमें आज. ये दिन दुबारा नही आएगा.”


“सॉरी आदित्य…खुद को रोक रही थी बहुत… पर रोकते-रोकते बिखर गयी. प्लीज़ बुरा मत मान-ना.”


आदित्य उठ कर सोफे पर बैठ गया और ज़रीना को अपने सीने से लगा कर बोला, “कोई बात नही जान. हमारे बीच सॉरी की कोई ज़रूरत नही है. समझ रहा हूँ मैं सब कुछ. अछा ये बताओ अभी घर चलें या फिर कल.”


“क्या अभी टिकेट मिल जाएगी”


“मिलनी तो चाहिए. अछा होगा अगर अपनी शादी के दिन हम अपने घर में रहें. वहीं तो हमें प्यार हुवा था.”


“चलो फिर जल्दी चलो…आज के दिन का ज़्यादा से ज़्यादा वक्त मैं अपने घर में बिताना चाहती हूँ.”


“हां चलो”


“क्या मैं शादी के जोड़े में ही चलूं?”


“और नही तो क्या? जैसे हैं वैसे ही चलेंगे. कोई दिक्कत की बात नही है”


आदित्य और ज़रीना ने अपना समान समेटा होटेल से और एरपोर्ट के लिए चल दिए. 5 बजे की फ्लाइट थी. 6:30 पर वो वडोदरा एरपोर्ट पर उतर गये. 7:15 पर टॅक्सी ने उन्हे उनके घर के बाहर उतार दिया. जैसे ही वो दोनो टॅक्सी से उतरे घनश्याम मोदी ने उन्हे देख लिया.


“जिसका शक था वही बात निकली. तो तुम दोनो शरम हया त्याग कर साथ रह रहे थे यहा. और अब शादी करके आ गये. आदित्य तुमसे ऐसी उम्मीद नही थी. शादी की भी तो किस से. तुम्हारे पेरेंट्स बिकुल पसंद नही करते थे इन लोगो को. वो क्या हम भी पसंद नही करते थे. जो लोग देश में आग लगाते हैं उनसे तुमने रिश्ता जोड़ लिया. लगता है ट्रेन हादसे को भूल गये तुम.”


“अंकल क्या आपने किसी अपने को खोया था उस ट्रेन हादसे में.” आदित्य ने पूछा.


“नही”


“तो क्या आपने उसके बाद फैले दंगो में खोया किसी को.”


“नही." घनश्याम ने जवाब दिया


“मैने अपने पेरेंट्स खोए गोधरा ट्रेन हादसे में. उसके बाद बढ़के दंगो के कारण ज़रीना के पेरेंट्स और बहन को जान से हाथ धोना पड़ा. सबसे ज़्यादा कड़वाहट तो हम दोनो में होनी चाहिए थी एक दूसरे के प्रति. जबकि ऐसा नही है. हमने कड़वाहट को प्यार में बदल लिया है अंकल और आप बेवजह दिल में कड़वाहट बनाए हुवे हैं. क्या ये शोभा देता है आपको. छोटा हूँ मैं बहुत आपसे. आप ज़्यादा समझदार हैं. अपने जीवन को शांति और अमन फैलाने में लगायें ना की कड़वाहट फैलाने में. कुछ ग़लत कह दिया हो तो माफ़ कीजिएगा.”


ज़रीना जो अब तक चुपचाप सब सुन रही थी अचानक बोली, “अंकल कभी आपसे बात नही हुई. क्योंकि घर पास पास हैं इश्लीए रोज कभी ना कभी दिख जाते थे आप. आपने भी मुझे अक्सर देखा होगा. क्या ट्रेन में आग मैने लगाई थी? या फिर मेरे अम्मी-अब्बा गये थे ट्रेन फूँकने के लिए. हमे तो कुछ पता भी नही था कि कॉन सी ट्रेन… कैसी ट्रेन फूँक दी गयी. प्लीज़ बहुत सज़ा मिल चुकी है मुझे. और सज़ा मत दीजिए. आपकी अपनी बेटी समझ कर मुझे माफ़ कर दीजिए.”


घनश्याम मोदी के पास कहने को कुछ नही था. वो बिल्कुल चुप हो गया. कुछ भी कहने की हिम्मत नही जुटा पाया. चुपचाप अपने घर में घुस गया.


“चलो ज़रीना अंदर चलते हैं.” आदित्य ने कहा.


“देखा आदित्य कैसे भाग गये अंकल बिना कुछ कहे.” ज़रीना ने कहा.


“देखो सही और ग़लत हम सभी जानते हैं बस स्वीकार करने की हिम्मत नही जुटा पाते. छोड़ो इन बातों को…. चलो प्यार से अपने घर में प्रवेश करते हैं.”


ज़रीना ने ताला खोला और वो कदम अंदर रखने ही वाली थी कि आदित्य ने टोक दिया, “रूको एक बात मैं भूल ही गया. एक मिनिट यही रूको.”


“समझ गयी मैं. मैं भी भूल गयी थी. हहेहहे”


आदित्य अंदर गया और भाग कर एक लोटे में चावल डाल कर लाया और ज़रीना के कदमो में रख कर बोला, “हां अब इसे गिरा कर अंदर आओ.”



ज़रीना ने प्यार से ठोकर मारी उस लोटे को और अंदर आ गयी. आदित्य ने फॉरन दरवाजा बंद किया और ज़रीना को बाहों में भर लिया.


“अरे छ्चोड़ो ये क्या कर रहे हो.”


“कब से तड़प रहा हूँ मैं अब और नही रुका जाता.”


“लंबे सफ़र से आए हैं हम. थोड़ा आराम तो कर लें.” ज़रीना ने कहा.


“मुझे अपनी जान से प्यार करना है. ढेर सारा प्यार. आराम करने का मन नही है अभी.”


“देखो वाहा वो क्या है दीवार पर” ज़रीना ने कहा.


जैसे ही आदित्य ने दीवार पर देखा ज़रीना आदित्य को धक्का दे कर एक कमरे में घुस्स गयी.


आदित्य भागा उसकी तरफ मगर अंदर से कुण्डी लग चुकी थी.


“जान प्लीज़…बाहर आओ तुरंत. ऐसे मत तड़पाव मुझे." आदित्य ने दरवाजा पीट-ते हुवे कहा.


ज़रीना ने अंदर घुसते ही अपने दिल पर हाथ रखा. दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा था. “तुम्हे क्या हो गया अचानक ये. मुझे डर लग रहा है तुमसे.” ज़रीना ने कहा.


“जान ये सब क्या है. शादी से पहले भी दूर भागती थी और शादी के बाद भी दूर भाग रही हो. क्यों तडपा रही हो मुझे. मैं तड़प तड़प कर मर जाउन्गा. प्लीज़ दरवाजा खोलो.” आदित्य ने कहा.


ज़रीना ने अंदर से आवाज़ दी, “पहली बार बहुत डर लग रहा है तुमसे.”


“अरे डरने की क्या बात है. अच्छा दरवाजा तो खोलो मैं कुछ नही करूँगा.”


“पक्का.” ज़रीना ने कहा.


“हां पक्का.”


ज़रीना ने दरवाजा खोला डरते-डरते.


“ये हुई ना बात. अब तुम्हारी खैर नही” आदित्य ने ज़रीना का हाथ पकड़ लिया.


“नही आदित्य प्लीज़…तुमने वादा किया था कि कुछ नही करोगे.” ज़रीना गिड़गिडाई और छटपटाने लगी.


ज़रीना पूरी कोशिस कर रही थी अपना हाथ छुड़ाने की मगर आदित्य ने बहुत कस कर पकड़ रखा था उसका हाथ. छटपटाहट में ज़रीना की सारी का पल्लू सरक गया नीचे. आदित्य की नज़र ज़रीना के ब्लाउस पर पड़ी तो उसने फॉरन हाथ छ्चोड़ दिया ज़रीना का, “सॉरी पता नही मुझे क्या हो गया है.”


आदित्य ज़रीना को वही छ्चोड़ कर ड्रॉयिंग रूम में आकर सोफे पर बैठ गया. उसे ये फील हुवा कि वो ज़रीना के साथ ज़बरदस्ती कर रहा है.


ज़रीना एक पल को वही खड़ी रही फिर अपना पल्लू सही करके आदित्य के पास आकर उसके कदमो में बैठ गयी. अपना सर उसने आदित्य के घुटनो पर रख दिया.


“नाराज़ हो गये मुझसे?" ज़रीना ने प्यार से पूछा


“मैं बहुत तड़प रहा हूँ तुम्हारे लिए जान. तुम मुझसे दूर रहो अभी... नही तो कुछ कर बैठूँगा मैं.”


“ठंडे पानी से नहा लो सब ठीक हो जाएगा हहेहहे.” ज़रीना ने हंसते हुवे कहा.


“अछा मतलब कि तुम मेरे लिए कुछ नही करने वाली.”


“मुझे कुछ समझ में नही आ रहा कि क्या करूँ.”


“मुझे भी कहा कुछ समझ आ रहा है. बस पागल पन सा सवार है. शायद सेक्स ऐसा ही जादू करता है.”


“तभी तो डर लग रहा है मुझे तुमसे.”


“चलो छ्चोड़ो ये सब. हम आराम करते हैं. तुम नहा लो थक गयी होगी.”


“हां थक तो बहुत गयी हूँ. पर पहले तुम नहा लो. तब तक मैं खाने को कुछ बना देती हूँ. किचॅन का काम करके ही नहाना ठीक रहेगा.” ज़रीना ने कहा.


“अरे मेरी नयी नवेली दुल्हन काम करेगी. मैं बाहर से ले आता हूँ कुछ.”


“नही तुम कही नही जाओगे. मैं अपने आदित्य के लिए कुछ ख़ास बनाउन्गि आज.”


“चिकन कढ़ाई बना रही हो क्या.”


“दुबारा मत बोलना ऐसी बात. नोन-वेग के नाम से भी नफ़रत है मुझे.”


“उफ्फ गुस्से में कितनी प्यारी लग रही हो तुम. यार अब एक किस तो दे दो कम से कम. शादी के दिन कितना तडपा रही हो तुम मुझे.”


“मैं तो तुम्हारे भले की सोच रही थी कि कही जल कर राख न हो जाओ. हहेहहे.”


“राख ही कर दो. कुछ तो करो मेरी बेचैनी को दूर करने के लिए.”


“नहा लो चुपचाप जा कर. मुझे किचन में बहुत काम है.” ज़रीना उठ कर चल दी.


“उफ्फ लगता है आज मेरी जान ले लोगि तुम.”


ज़रीना किचन में आ गयी और अपने काम में लग गयी. आदित्य कुछ देर चुपचाप सोफे पर बैठा रहा. फिर अचानक उठा और किचन में आकर ज़रीना को पीछे से जाकड़ लिया.


“मैं यहा तड़प रहा हूँ आपके लिए और आप खाना बना रही हैं.”


“आप नहा लीजिए ना जाकर. आपकी तड़प थोड़ी शांत हो जाएगी.”


“इस तड़प का इलाज सिर्फ़ आपके पास है. चलिए छ्चोड़िए ये सब.” आदित्य ने ज़रीना को गोदी में उठा लिया.


“आज अचानक इतनी दीवानगी कहा से आ गयी.”


“ये दीवानगी तो हमेशा से थी. बस थामे हुवे था खुद को. शादी से पहले मैं बहकना नही चाहता था.”


“किस मे आदित्य.”


“क्या कहा तुमने?”


“किस मे.”


“ऑम्ग ये कैसे हो गया.”


“अपने दीवाने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ मैं.”


“वैसे मुझे पता है तुम मुझे किस दे कर टरकाने के चक्कर में हो. पर ऐसा नही होगा.”


“ओह गॉड तुम तो पीछे पड़ गये मेरे.”


“जी हां शादी की है आपसे कोई मज़ाक नही. पीछे नही पड़ूँगा आपके तो कुछ मिलने वाला नही है मुझे... ये मैं जान गया हूँ.” आदित्य ज़रीना को बेडरूम में ले गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.


हम सब की सीमा यही समाप्त होती है. बेडरूम में झाँक कर वाहा के सीन का वर्णन करने से दोनो डिस्टर्ब हो जाएँगे. हमें दोनो को अकेला छ्चोड़ देना चाहिए अब. पर ये क्या कुछ आवाज़े आ रही हैं अंदर से. शायद प्रेम-रस में डूब गये हैं दोनो. भगवान से यही दुआ है कि ये दोनो दुनिया की बुरी नज़र से बचे रहें और ये ख़ुसनूमा प्यार दोनो के बीच हमेशा बना रहे.


प्यार एक ऐसी ताक़त है जो कि इंसान को भगवान बना देता है. ये हमारे चरित्र को निखारता है. जीवन की बहुत सारी बुराईयाँ प्यार की आग में जल कर खाक हो जाती हैं. यही देखा हमने इस अनोखे बंधन में. नफ़रत करते थे आदित्य और ज़रीना एक दूसरे से. धरम एक बहुत बड़ा कारण था इस नफ़रत के पीछे. प्यार ने धरम की दीवार भी गिरा दी और दोनो के दिलों में मौजूद नफ़रत को भी ख़तम कर दिया. ये कोई चमत्कार नही है. ऐसा रोज हो रहा है इस देश में. हां पर हर कोई ज़रीना और आदित्य की तरह प्यार की मंज़िल तक नही पहुँच पाता. तभी इसे एक अनोखा बंधन नाम दिया मैने. ये बंधन कुछ ऐसा है कि अगर आदित्य और ज़रीना चाहें तो भी नही तौड सकते इसे. प्यार ही कुछ ऐसा हो गया है दोनो को एक दूसरे से. दुआ यही है कि ऐसा प्यार भगवान हर किसी को दे. अल्लाह से भी यही फरियाद है. भगवान से भी यही प्रार्थना है. दोस्तो कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा


समाप्त


0 टिप्पणियाँ