पापी परिवार--20
"आईईईईई !! चूस बेटा. पूरा चूस डाल अपनी आंटी को" हाहाकार करती नीमा ज़ोर से चीखती है. निकुंज की इस प्राणघातक क्रिया ने उसके रोंगटे खड़े कर दिए थे और वह मदहोशी में अपने नुकीले दांतो से अपने कोमल होंठ काटने लगी थी, उन्हें चबाने लगी थी.
अपनी यौवन से भरपूर आंटी की चूत को अपने होंठो के दरमियाँ ताक़त से भींचने के साथ ही निकुंज अपनी दोनो उंगलियों से उसकी सन्कीर्न परतें अत्यंत बेरहमी से चोदना शुरू कर देता है. वह अपनी लंबी लपलपाटी जीभ को नीमा के गीले ओर सुंगंधित छेद में पूरी गहराई तक ठेल रहा था और जो छेद के भीतर उमड़ते गाढ़े रस को खीचते हुए बाहर ला कर, उसके होंठो के सुपुर्द कर रही थी.
"उन्न्ह उन्न्ह" नीमा की आँखें नातियाने लगती हैं. वह पूर्व से ही बहुत ज़्यादा कामोउत्तेजित थी और अभी उसकी दोस्त का बेटा निकुंज मात्र अपनी जीभ और होंठो के इस्तेमाल से ही उसकी संकुचित चूत को और भी ज़्यादा कुलबुला रहा था. तो जब उसका विशाल लंड उसकी चूत में घुसेगा तब नीमा की क्या हालत होगी. वह यह सोच-सोच कर सिहर्ती जा रही थी.
निकुंज ने कहीं सुना था. एक निश्चित उम्र के पार निकलने के उपरांत भारतीय नारी अपनी चूत पर उगने वाले बालो की सफाई करना छोड़ देती है. या तो अपनी अधेड़ उम्र का ख़याल कर वह इसे उचित नही समझती या फिर अपनी काम-इक्षाओं के घटने की वहज से उसका ध्यान इस ओर नही जा पाता.
"मगर नीमा आंटी की चूत इस वक़्त बिल्कुल चिकनी है. ऐसा क्यों ?" चूत चाटने में व्यस्त निकुंज का मन इस बात पर भी विचार कर रहा था "उनके पति तो बरसो से विदेश में रह रहे हैं. लौट कर आते होंगे तो भी दोनो मिया-बीवियों के बीच संतुष्टि-पूर्वक चुदाई का होना संभव नही हो पाता होगा. फिर क्यों आंटी अपनी झान्टे बना कर रखती हैं. इन का कहीं और लफडा तो नही चल रहा. मों कह भी रही थी कि नीमा नॉर्मल नही है और मैं उसके जैसी नही बन सकती" निकुंज की सोच के घोड़े किसी भी नतीजे पर नही पहुच पाते हैं "मोम से ही पुछुन्गा और इसी बहाने उनके साथ वक़्त बिताने का मौका भी मिल जाएगा" ऐसा ख़याल मन में आते ही वह वापस चूत चूसने पर अपना ध्यान केंद्रित कर देता है.
"आंटी !! इतनी कोमल चूत तो मैने आज तक नही चूसी" तारीफ़ करने के बाद निकुंज उस गुलाबी चूत के ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर, दाएँ-बाएँ लगभग हर जगह अपनी खुरदूरी जीभ को तेज़ी से रगड़ता है "चाट-ते हुए ऐसा लग रहा है जैसे मक्खन की टिकिया पर मैं अपनी जीभ घुमा रहा हूँ" वह चूत की फांको के ऊपर उभर आए भंगूर को हसरत भरी निगाहों से देख कर कहता है.
"ओह्ह्ह बेटा !! चूत तो हर औरत की एक-समान ही होती है बस रंग का अंतर उन्हे एक दूसरे से अलग करता है" निकुंज द्वारा मिली अपनी चूत की प्रशन्शा से नीमा गदगद हो उठी.
"निकुंज !! मैने तुम्हे बचपन से ले कर तुम्हारी जवानी तक बढ़ता देखा है. तुम्हे कभी पराया नही समझा, बेनाम रिश्ते की एक डोर हमारे बीच बँधी थी लेकिन आज हम दोनो वे सारी मर्यादें लाँघ कर बिल्कुल नंगे हैं, अभी तुम मेरी चूत चाट रहे हो, मैने भी कुच्छ देर पहले तुम्हारा लंड चूसा था. यह बात हमेशा याद रखना कि जिन रिश्तो के तुम सबसे ज़्यादा क्लोज़ होगे, उनके संग ऐसे पल बिताने से ज़्यादा मज़ा तुम्हे कहीं और नही मिल पाएगा. उसने जुड़ी हर चीज़, हर बात तुम्हे पसंद आएगी, अत्यधिक रोमांच महसूस होगा और शायद यही वह वजह है कि तुम्हारी आंटी की चूत तुम्हे अब तक की सबसे अच्छी चूत लगी" इतना कह कर नीमा चुप हो जाती है, उसके कथन में जो ग़ूढ रहस्य छुपा था वह निकुंज कयि दिनो से महसूस कर रहा था और उसे फॉरन समझ आ जाता है कि क्यों वह अपनी सग़ी मा और बहेन के बारे में सोच कर हर पल उत्तेजित बना रहता है मगर वह नीमा पर अपनी मंशा ज़ाहिर नही होने देता और सब कुच्छ भूल कर पुनः अपनी मंज़िल की ओर प्रस्थान कर लेता है.
"आप बहुत समझदार हो आंटी" बस इतना सा जवाब दे कर वह अपनी जीभ को नीमा की चूत की लकीर के ऊपरी हिस्से पर फेरने लगा. वह जानता था कि हर स्त्री का भज्नासा उसके चरम का केन्द्र-बिंदु होता है, इसके पश्चात ही वह किसी अनुभवी व्यक्ति की तरह उसके सूजे व मोटे भंगूर को अपनी जीभ से बड़ी कोमलता के साथ चाटने लगता है, उसे अविलंब छेड़ने लगता है और फॉरन सोफे पर नंगी बैठी उसकी आंटी अपने ह्रष्ट-पुष्ट चूतड़ हवा में उच्छालते हुए अपनी चूत उसके मूँह पर रगड़ने लगती है, अपनी चूत से उसका मूँह चोदने लगती है.
"तुम .. ओह्ह्ह हां .. तुम भी बहुत समझदार हो निकुंज !! मेरे बेटे समान हो, खेलो मेरे भंगूर से, खा जाओ उसे .. खा जाओ बेटे" निकुंज की जीभ का तरल स्पर्श, उसकी त्रिकन अपने अति-संवेदनशील भज्नासे पर झेलना नीमा के बस के बाहर हो गया और वह चिल्लाने लगती है. निकुंज को अपनी आंटी की आहों से कहीं ज़्यादा आनंद उनकी अश्लील बातें सुन कर आ रहा था, जिस में वे कथन तो ख़ासे पसंद आते जिस में माँ शब्द का जिकर होता.
"ज़रूर आंटी" चूत को चूम कर निकुंज ने कहा और फॉरन उसकी चुसाई बेहद प्रचंडता से करने लगता है. उसकी गीली जीभ से तर नीमा का मोटा एवं सूजा भंगूर चमक रहा था और निकुंज उसे अपने होंठो के बीच दबा कर चूसने में अपना संपूर्ण बल झोंक देता है, साथ ही चूत की चिपकी अती-संकीर्ण परतों के भीतर उसकी दोनो उंगलियाँ भी तेज़ी से अंदर बाहर होती जा रही थी.
"उफफफ्फ़ निकुंज !! बेटा .. मैं .. मैं झड़ने वाली हूँ, रुकना नही" नीमा के जिस्म में कपकपि दौड़ने लगी, चूत की गहराई में ऐन्ठन बढ़ने के प्रभाव से कामरस बहने की मात्रा में अचानक वृद्धि हो गयी और जिसका एक भी कतरा निकुंज व्यर्थ नही जाने दे रहा था. अपने एक हाथ से निकुंज का सर थामे व दूसरे से अपनी दाईं चूची की गुंडी मसलती हुई नीमा जल्द ही सोफे पर पसर जाती है.
"आहह निकुंज !! मैं गयी .. चूसो मुझे मेरे बेटे .. मेरे लाल चूस डालो" नीमा की गान्ड का छेद सिकुड गया, उसकी दोनो टांगे निकुंज की कमर से लिपट गयी और वह तेज़ी से झड़ने लगती है. उसके जिस्म में झटके लग रहे थे, अजीब सी खलबली मच गयी थी.
स्खलन-स्वरूप नीमा की चूत की फूली फांको से बाहर आती गाढ़े सुगंधित रस की लंबी-लंबी फुहारे सीधे निकुंज अपने कड़क होंठो के ज़रिए, सुड़ाक कर अपने गले से नीचे उतारता रहा. रस के स्वादिष्ट ज़ायके की प्रशन्शा तो वह पहले ही अपनी आंटी से कर चुका था और वह तब तक उसे तत्परता से चूस्ता है, चाट-ता है, जब तक चूत का बहाव पूरी तरह से रुक नही गया. अंत-तह निकुंज फर्श से उठ कर खड़ा हो जाता है.
सोफे पर अध-लेटी पड़ी नीमा की आँखों में अखंड सनुष्ति की खुशी झलक रही थी, शायद इससे बढ़िया और लंबा स्खलन आख़िरी बार अपने बीते जीवन में उसने तब मेशसूस किया था जब वह अपने पति से बिच्छाद रही थी. विदेश जाने से पूर्व का वह पूरा साप्ताह वे दोनो नंगे ही रहे थे और उस दौरान उन्होने जी भर कर अनगीनती चुदाई की थी.
"ओह्ह्ह निकुंज तुम कहाँ थे अब तक ?" अपनी हम्पाइ की परवाह किए बगैर नीमा ने अपनी बाहें फैला कर निकुंज से पुछा "मेरे बच्चे !! तूने तो अपनी आंटी का दिल जीत लिया है" बोल कर वह उसे अपने ऊपर खीच उसका पूरा चेहरा चूमने लगती है. स्वयं के यौवन का स्वाद उसे कतयि बुरा नही लगता.
"आंटी !! अभी मंज़िल तक नही पहुचा हूँ. अधूरा काम पूरा करने के बाद चाहे जितनी शब्बासी ले लूँगा" निकुंज ने मुस्कुरा कर कहा और उसका इशारा समझते ही नीमा अपना हाथ नीचे की दिशा में बढ़ा कर उसका विशाल खड़ा लंड पकड़ लेती है.
"अरे वाह !! यह तो बिल्कुल तैयार है" बोलते हुए नीमा की आँखों में चमक आ गयी थी. जाने कितने बरसो की प्यास से आज उसको पूरी तरह छुटकारा मिलने वाला था.
"तैयार कैसे ना होता !! अभी कुच्छ देर पहले ही तो मन भर कर गाढ़ी मलाई खाई है" बदले में निकुंज भी उसकी चूत को अपने हाथ के विकराल पंजे में भींच कर कहता है और दोनो के ठहाकों से पूरा अथितिकक्ष गूँज उठता है.
इसके पश्चात ही निकुंज नीमा को सोफे से उतार कर उसे पलटाता है और उसके दोनो घुटने मुड़वा कर वापस उसे सोफे पर चढ़वा देता है. अब नीमा के चूतड़ हवा में काफ़ी ऊपर उठे हुए हैं और निकुंज का लंड भी ठीक उनके समानांतर आ चुका था.
नीमा के मुड़े घुटनो के बीच अत्यधिक गॅप होने से उसके चुतडो की दरार काफ़ी हद तक खुली हुई थी. अचानक निकुंज की नज़रें अपनी आंटी के गुदा-द्वार पर पड़ती हैं और वह उस गहरे भूरे रंग के छिद्र की खूबसूरती निहारने से खुद को रोक नही पाता. निकुंज आगे को झुक कर अपनी नाक उससे सटा देता है और एक अजीब सी गंध फॉरन उसके टट्टो में उबाल ला देती है.
"न .. नही नही निकुंज !! वहाँ मत डालना बेटे" अपनी गान्ड के छेद पर होती हलचल महसूस करते ही नीमा की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है और कहीं निकुंज अपना मोटा लंड उस कुंवारे छेद में ना घुसेड दे, घबरा कर वह उसे टोक देती है.
"फिकर ना कीजिए आंटी !! मैं बस चेक रहा हूँ कि इस छेद का स्वाद कैसा होता है ?" निकुंज का जवाब सुन कर नीमा को तुरंत ही अपने बेटे विक्की की याद आ जाती है.
"जाने आज कल के बच्चो को क्या होता जा रहा है. एक मेरा बेटा है जो हमेशा मेरी गान्ड के छेद के पिछे पागल रहता है और अब यह निकुंज भी मगर ना तो मैने पहले कभी इसमें लंड डलवाया है और ना ही फ्यूचर में कभी डलवाउंगी. पता नही कितना दर्द होता होगा" वह सोच मग्न थी और तभी निकुंज की जीभ उसे अपने गुदा-द्वार पर रेंगती महसूस होती है.
"उफफफ्फ़ !! मान जाओ निकुंज" नीमा ने गुदगुदाते हुए कहा तो बदले में निकुंज उसे छेड़ने के उद्देश्य से वह छिद्र अपने कड़क होंठो की मदद से चूसने लगता है.
"आईईईई" एक बार फिर नीमा के जिस्म में कपकपि दौड़ गयी और वह निकुंज से रहम की मिन्नतें करने पर मजबूर हो जाती है.
"बस आंटी !! थोड़ी देर और. आप का आस होल तो कमाल का है." निकुंज रोमांच में भर कर कहता है. यकीन से परे की क्यों वह उस गंदे छेद को इतना आनंदतीरेक हो कर चाट रहा है वह खुद हैरान था. अजीब सी गंध, कसैला सा स्वाद और साथ ही उसकी गतिविधियों के प्रभाव से थिरकते उसकी आंटी के सुडोल चूतड़, कमरे में गूँजती उनकी दर्ज़नो सिसकियाँ. सब कुच्छ उसके बढ़ते कौतूहल के मुख्य विषय बनते जा रहे थे.
"ब.. बेटा !! मत सता अपनी आंटी को, मैं .. प.. पागल हो जाउन्गि" नीमा सोफे की दोनो पुष्ट को अपने हाथो में जाकड़ कर कहती है. उसकी चूत जो कुछ लम्हे पहले ही शांत हुई थी दोबारा कामरस से लबालब भर चुकी थी "झाड़ जाउन्गि निकुंज !! अब छोड़ .. छोड़ अपनी आंटी को. पेल दे अपना विशाल लंड मेरी चूत में" वह चीख कर उससे विनती करती है.
"ठीक है !! मगर अगली बार मैं आप की बिल्कुल नही सुनूँगा. जो मेरा मन चाहेगा, आप को भी वही करना होगा" नीमा से प्रण लेने हेतु निकुंज बोला "हां मेरे लाल !! जैसा तू कहेगा, तेरी आंटी वही करेगी. बस अब बुझा दे मेरी चूत की सारी अगन" अत्यंत सिहरन से काँपते नीमा के लफ्ज़ सुन कर निकुंज के चेहरे पर मुस्कान च्छा गयी, उसकी आंटी उसके इशारों पर नाचने जो लगी थी.
निकुंज अपना विकराल लंड जो तन कर उसके पेट से चिपका हुआ था, अपने दाहिने हाथ से पकड़ कर नीमा की चूत के गीले मुख पर उसका फूला सुपाडा रगड़ने लगता है और नीमा फॉरन उसके सुपाडे को राह दिखाने के उद्देश्य से अपनी टाँगो की जड़ को थोड़ा और चौड़ाती है, उसकी इस इस्थिति में उसकी चूत की सूजी फाँकें स्पष्ट-रूप से निकुंज की आँखों के सामने आ जाती हैं और वह उन फांकों के मध्य अपना सुपाडा पूरी तरह स्थापित कर लेता है.
"ओह्ह्ह निकुंज" नीमा ने अपने निचले होंठ को अपने दांतो के बीच भर लिया जब निकुंज के लंड का मोटा सुपाडा उसकी कोमल चूत के चीरे को फैलाते हुए उसके अंदर प्रवेश करता है. दोनो के जिस्म एक साथ झुलस उठते हैं, अनुमान लगाना कठिन है कि किसका बदन ज़्यादा तप रहा था.
"ह्म्म्म" नीमा सोफे की पुष्ट को अपने दोनो हाथो की मजबूती से पकड़ अपना होंठ चबती है. तत-पश्चात निकुंज भी अपनी कमर को झटके देना आरंभ कर देता है और धीरे धीरे उसका विशाल लंड चूत के अति-संकीर्ण चिपके मार्ग पर फिसल कर उसकी गहराई को नापने लगता है. चूत की कसी परतें तो जैसे स्वयं उसके लंड को जाकड़ रही थी और पिछे की ओर ज़ोर लगाती नीमा भी अपनी दोस्त के बेटे की मदद करते हुए अपनी तड़पति चूत लगातार उसके विशाल लंड पर धकेलने का प्रयत्न करती है.
"निकुंज तुम .. तुम बहुत अच्छे से कर रहे हो बेटे" नीमा की फूली सांसो के मद्देनज़र उसके अल्फ़ाज़ रुक रुक कर उसके गले से बाहर आते हैं "सच कहती हूँ, मेरी खुश-नसीबी है जो मुझे तुम्हारे विशाल लंड से चुदने का मौका मिला और मेरी तरह हर वह स्त्री यही कहेगी जो भविश्य में तुम्हारे मूसल को झेलेगी !! चोदो निकुंज .. फाड़ डालो अपनी आंटी की चूत को" उसका व्यभिचारपण अब खुल कर निकुंज से सामने आ चुका था.
अपनी आंटी द्वारा प्रशन्शा पाने के उपरांत स्वतः ही निकुंज के धक्को में काफ़ी कठोरता आ जाती है और वह तेज़ी से अपनी रफ़्तार बढ़ाते हुए उसकी चूत की सन्करि दीवारो को चीर कर अति-बलपूर्वक अपना विशाल लंड उसके भीतर ठोकता है, जिससे उसकी आंटी का सर सोफे के मुलायम गद्दे में धँस कर रह जाता है. वह करीब-करीब अपना संपूर्ण लंड उसकी सकुचाती चूत के अंदर ठेलने में सफल हो चुका था.
"उनह .. उनह" नीमा अपनी चूत पर पड़ते टातड़-तोड़ झटको के मनभावन प्रहारो से रीरिया सी जाती है. यह प्रथम अवसर था जब उसकी चूत ने इतनी बलिष्ठ वास्तु को अपने अंदर समेटा था और अब भी उसे लग रहा था जैसे उसकी चूत उसके मूँह समान बन कर लंड के सूजे सुपाडे को चूस्ति ही जा रही हो. भीतर गहराई में लंड का आकार उसे पहले से कहीं ज़्यादा फूलने का एहसास करवा रहा था और जल्द ही उसकी चूत पूरी तरह से भर कर अपने बच्चेदानी से वह निकुंज का सुपाडा बेहद तेज़ गति से टकराता महसूस करती है.
"तुम्हे .. तुम्हे मेरे मुताबिक चलने की कोई ज़रूरत नही निकुंज !! जैसे तुम्हारा मन चाहे वैसे तुम अपनी आंटी को चोद सकते हो" चूत के अंतिम छोर पर सुपाडा भिड़ाने के उपरांत अत्यधिक आनंद से ओत-प्रोत निकुंज का जिस्म गन्गना उठा था और कुच्छ पल को उसका पूरा शरीर वहीं अकड़ कर रह जाता है. नीमा तो स्वयं मस्ती के भंवर में गोते खा रही थी, उसे लगा जैसे निकुंज उसके चरम को पीड़ा समझ कर थम गया हो और वह फॉरन उसे टोक कर उसका उत्साह-वर्धन करते हुए अति-व्यग्रता से अपने चूतड़ पिछे की दिशा में धकेल अपनी सपंदानशील चूत अपनी दोस्त के बेटे के लंड से बिल्कुल चिपका देती है.
चुदाई के इस कामुक खेल की बागडोर हाथ में आते ही निकुंज अपना आधा लंड बहार खीच कर पुरज़ोर ताक़त से वापस उसे अंदर ठेल देता है. अधेड़ उमर होने के बावजूद नीमा की गीली चूत उसे लगातार और भी ज़्यादा कस्ति जाती महसूस हो रही थी और धीरे धीरे उसका हर धक्का चूत की जड़ तक पहुचते हुए उसका भाला नुमा सुपाडा ठीक उसकी आंटी की बच्चेदानी पर निर्मम चोट देने लगता है.
"फ़च्छ-फ़च्छ !! फ़च्छ-फ़च्छ" नीमा की ऐंठ-ती चूत की गहराई से गाढ़े रस का उदगम होना शुरू हुआ और निकुंज के मोटे एवं विशाल लंड के प्रचंड झटको से कुच्छ ही लम्हो में वह रस भहर छलक कर उसके टट्टो को भिगोने लगा जो नीमा के झुके होने की वजह से उसके सूजे भंगूर से निरंतर रगड़ खा रहे थे. नीमा की आहें हौले हौले अब चीख-पुकार में बदलती जा रही थी और उसके गोल मटोल स्तनो के तने चुचक हिलते हुए स्वयं उसके होंठो को छुने की व्यर्थ कोशिश कर रहे थे.
"उन्न्नह निकुंज !! रुकना नही बेटे .. मेरे लाल .. मैं दोबारा झड़ने वाली हूँ. ठोक अपना लंड अपनी आंटी की चूत में .. चोद डाल मुझे" चिल्लाने के साथ ही नीमा के जबड़े भिन्च जाते हैं और वह स्खलन के सुखद एहसास अपने चरमोत्कर्ष को पाने लगती है. उसकी आँखें पनिया गयी थी और उसके गुदा-द्वार में मंत्रमुग्ध कर देने वाली सनसनी मच रही थी. निकुंज के ताबड-तोड़ धक्के अब भी ज़ारी थे और नीमा के गरम कामरस की असहनीय जलन से पिघल कर उसके लंड का फूला सुपाडा भी गाढ़े वीर्य की बौछारे चूत की अनंत गहराई में उगलने लगता है.
"आह आंटी !! मैं भी" बस इतने से शब्द ही उस नौ जवान युवक के भर्राये गले से बाहर निकल पाते हैं और वह अपनी मा की सबसे अच्छी दोस्त अपनी नीमा आंटी की नंगी पीठ पर ढेर हो जाता है. दोनो के काँपते जिस्मो में अविस्मरणीय आनंद का संचार हो रहा था. अंत-तह खुद ब खुद नीमा की चूत सकुचाते हुए निकुंज के सूजे सुपाडे से सारा वीर्य निचोड़ कर दोनो के रस का मेल अपनी बच्चेदानी में क़ैद कर लेती है.
निकुंज अपने शरीर का पूरा भार अपनी नीमा आंटी की पीठ पर डाले ज़ोर-ज़ोर से हाँप रहा है, स्वयं नीमा अपनी चढ़ि सांसो को अंश मात्र भी काबू में नही कर पाई थी. दोनो के दिलों की बढ़ी धड़कने ताल से ताल मिला कर कोई नयी धुन बनाने की रिहर्सल में जुटी थी और उनके तंन और मन दोनो की असहनीय पीड़ा से वे अब पूर्णा रूप से मुक्त हो चुके थे.
दोनो नंगे प्राणियों के हालात जल्द ही सुधरे और निकुंज का विशाल लंड सिकुड कर नीमा की स्थिर चूत से खुद ब खुद बाहर आ गया, साथ ही चूत की गहराई में बचे दोनो के पापी संसर्ग का सबूत भी बह कर सोफे पर गिरने लगा.
"अब उठो भी निकुंज !! कितने भारी हो तुम, कम से कम अब तो अपनी आंटी पर रहम खाओ" नीमा ने टोका तो निकुंज उसके बदन से हट कर फर्श पर खड़ा हो जाता है और उसके बाद वह भी सोफे से नीचे उतर गयी.
"छोटा हो कर कितना भोला बॅन रहा है चाहे कुच्छ देर पहले सिर्फ़ शरारत ही शरारत की हों" नीमा बड़े लाड से निकुंज के शुषुप्त लंड को अपने हाथ की मुट्ठी में भींच कर उसे पुच्कार्ति है.
"आप ने ही इसकी यह हालत की है !! पहले अपने मूँह से और फिर अपनी चूत से" बदले में निकुंज भी हँसने लगता है.
दोनो अपनी-अपनी बातों में मशगूल थे और तभी निकुंज का सेल बजने लगा, उसने रिंग-टोन की आवाज़ आती दिशा में अपना सर घुमाया तो फॉरन उसे याद आ गया कि सोफे से कुच्छ दूर ज़मीन पर पड़े उसके लोवर में उसका सेल रखा हुआ है.
"एक मिनिट आंटी !! मेरा सेल मेरे लोवर में है" वह बोला तो नीमा ने उसके लंड को छोड़ दिया "मैं चाइ बना कर लाती हूँ, तुम रिलॅक्स करो" इतना कह कर वह नंगी ही किचन में चली जाती है.
"ह्म्म्म !! मुझे पता था घर से ही होगा" सेल की स्क्रीन पर आते नाम को देख कर निकुंज ने खुद से कहा.
"हेलो"
लाइन की दूसरी तरफ उसकी मा कम्मो थी.
"निकुंज !! कहाँ हो तुम और सुबह-सुबह अकेले बिना किसी को बाताय क्यों चले गये ?" कम्मो उसे डाँट-ते हुए बोली.
"वो मोम !! रात में मेरे जूनियर का कॉल आया था और हम दोनो अभी ऑफीस के एक इंपॉर्टेंट अधूरे प्रॉजेक्ट को पूरा करने में लगे हुए हैं. मैं कपड़े साथ लाया हूँ और अब यहीं से ऑफीस चला जाउन्गा" चतुर निकुंज बेहद सफाई से अपनी मा को झुटि कहानी सुना देता है.
"लेकिन बता कर तो जाता बेटे !! निक्की तैयार बैठी है पार्क जाने को और आज से तो मैं खुद तुम दोनो के साथ जाने वाली थी" कम्मो फिकर के साथ घर के हालात से भी उसे रूबरू करवाती है.
निकुंज :- "सॉरी मोम !! सब सो रहे थे तो मैने जगाया नही, कल से पक्का साथ चलेंगे. आप निक्की से कह दीजिए कि वह अपने कॉलेज चली जाए, काफ़ी दिनो से नही गयी"
"ठीक है कह दूँगी !! अगर वक़्त मिले तो लंच करने घर आ जाना वरना शाम तक भूखा बना रहेगा, बाहर तो तू कुच्छ खाने से रहा" कम्मो की आवाज़ में शुरू से अपने बेटे के लिए केर शामिल है और निकुंज भी स्पष्ट रूप से यह समझ रहा है. जब कि सच तो यह था अब कम्मो एक पल को भी निकुंज से दूर नही रह पा रही थी और उसकी लालसा-मई आँखें हमेशा अपने पुत्र को स्वयं के समीप देखने को तरसने लगी थी.
"कोशिश करूँगा मोम !! ओके रखता हूँ, लव यू" काफ़ी लंबे अरसे बाद निकुंज के मूँह से अपने लिए लव शब्द का उच्चारण सुन कर कम्मो का मन खुशी से झूम उठने को हुआ मगर सामने बैठी निक्की की वजह से वह खुद पर काबू कर लेती है "इंतज़ार करूँगी" बस इतना जवाब में कह कर वह मुस्कुरा दी.
"बेटा निकुंज !! इतनी मेहनत के बाद चाइ से बेटर दूध रहेगा, बोलो लाओ ?" अचानक नीमा किचन से चिल्लाती कर पुछ्ती है तो निकुंज के साथ उस जनाना आवाज़ के कुच्छ अंश कम्मो के कान से भी जा टकराते हैं और इसके पश्चात ही कॉल कट हो जाता है.
"उफ़फ्फ़ !! कहीं मोम ने ?" जहाँ आशंका से निकुंज घबरा गया "उम्म !! कॉन है ये निकुंज का जूनियर जिसके घर में मौजूद औरत की आवाज़ कुच्छ जानी-पहचानिसी लगी और फिर ऑफीस का प्रॉजेक्ट बनाने में कैसी मेहनत ?" वहीं कम्मो भी सोच में पड़ गयी.
"लो बेटा दूध पियो" नीमा किचन से बाहर आ कर कहती है "किसका कॉल था जो तुमने जवाब ही नही दिया ?" उसने पुच्छा.
"ऑफीस से था आंटी और मुझे निकलना होगा" निकुंज एक साँस में दूध का पूरा ग्लास खाली करते हुए झूठ बोलता है, उसे पता था उसकी नीमा आंटी स्वयं उसकी मा को कभी नही बताएँगी कि वा उनके घर आया था.
"इस हालत में ऑफीस जाओगे, रूको मैं अपने हाथो से तुम्हे नहला देती हूँ" नीमा ने उसके लोवर और टी-शर्ट की ओर इशारा किया. उसके कथन में बेहद कामुकता व्याप्त थी.
"फिर कभी नहा लूँगा आंटी और चाहो तो बदले में आप मेरे हाथो से नहा लेना" निकुंज मन मार कर कहता है. हलाकी नीचे पार्किंग में खड़ी उसकी कार में उसके ऑफीस वाले कपड़े पहले से मौजूद थे लेकिन फ्रेश होने के लिए अब वह अपने घर जाना चाहता था.
"हां क्यों नही बेटा !! मुझे बहुत खुशी होगी" इतना बोल कर नीमा उसकी बलिष्ठ नंगी छाति से लिपट जाती है और कुच्छ लम्हे के रसीले व गहरे चुंबन के उपरांत निकुंज फर्श पर बिखरे अपने कपड़े पहेन कर, अलविदा कहते हुए नीमा के फ्लॅट से बाहर निकल जाता है.
"वाकाई आज तो मज़ा आ गया !! यकीन नही होता कि अभी कुच्छ देर पहले मैने मोम की सबसे अच्छी दोस्त की चुदाई कर डाली. वैसे मानना पड़ेगा नीमा आंटी लाखो में एक है" कुच्छ ऐसा ही सोचते हुए निकुंज मल्टी की पार्किंग में पहुच जाता है.
"घर जा कर कोई फायदा तो नही लेकिन मोम का रिक्षन जानना भी ज़रूरी है. कहीं उन्हें शक ना हो गया हो कि मैं नीमा आंटी के घर आया था और यदि उन्हें शक हुआ होगा तो मेरे झूठ से वे बहुत दुखी हुई होंगी" गली के अंतिम छोर पर वह कार को मैन रोड की दिशा में मोड़ने लगता है के तभी सामने से चले आ रहे ऑटो में बैठे किसी जाने-पहचाने चेहरे से उसकी आँखों का जुड़ाव हुआ, उस चेहरे ने भी निकुंज को हैरत भरी निगाहो से घूरा और उसके अगले ही पल बाद उसकी कार उस ऑटो को क्रॉस कर जाती है.
"यह लड़की कौन थी ?" फॉरन निकुंज रियर-व्यू मिरर से पिछे देखता है मगर तब तक ऑटो उसी गली के अंदर मूड चुका था जिस गली से उसने अपनी कार मैन रोड पर टर्न की थी.
"मैने इस लड़की को कहीं देखा है और वह भी मुझे देख कर चौंक उठी थी मगर कहाँ देखा है याद नही आ रहा" कुच्छ देर तक निकुंज के मश्तिश्क में उस लड़की का चेहरा घूमता रहा और जब बहुत सोचने के बावजूद वह उसके बारे में कोई अनुमान नही लगा सका तो थक हार कर उसने सोचना ही छोड़ दिया.
"हुहन !! होगी कोई, मुझे क्या" वह अपनी बेवकूफी पर झुंझला कर कहता है "इस वक़्त मुझे मोम के बारे में सोचना चाहिए और मैं क्या यह फालतू की चीज़ो में खोया हुआ हूँ" अब निकुंज अपने बचाव के उपाए ढूँढने लगा था और लगभग 30 मिनिट का छोटा सा सफ़र तय करने के उपरांत वह अपने घर आ पहुचता है.
घर के बाहर कोई भी वेहिकल खड़ा ना देख निकुंज की घबराहट थोड़ी कम हुई "ह्म्म !! तो मोम अभी अकेली हैं" वह दबे पाव हॉल में प्रवेश करता है और शीघ्र ही अपने कमरे में घुस जाता है.
वहीं कम्मो अपने कमरे की सफाई कर रही थी जब निकुंज की कार घर के बाहर पार्क हुई और अपने पति को लौट कर आया समझ वह अपने काम में जुटी रहती है.
"लगता है हॉल में बैठ गये हैं" पति दीप के लिए चाइ बनाने के उद्देश्य से कम्मो अपने कमरे से बाहर निकली और रेलिंग से नीचे झाँक कर देखा "हॉल तो खाली है, कहीं निकुंज तो नही आ गया ?" ऐसा सोचते ही उसके कदम वहाँ ठहेर नही पाते और तेज़ी से सीढ़ियाँ उतर कर वह हॉल में चली आती है.
"निकुंज ही है" फ्रिड्ज से ठंडे पानी की बोतल और डाइनिंग टेबल से ग्लास उठा कर अत्यधिक प्रसन्नता से अभिभूत कम्मो बिना दरवाज़ा खटखटाए ही अपने पुत्र के कमरे में दाखिल हो गयी मगर अंदर का द्रश्य देखते ही उसका मश्तिश्क काम करना बंद कर देता है.
बेड की पुष्ट से अपनी पीठ टिकाए उसके बेटे निकुंज के जिस्म पर सिवाए उसकी फ्रेंची के कुच्छ और मौजूद ना था और वह उसे अपने माथे पर अपना हाथ रखे किसी गहेन सोच में डूबा हुआ नज़र आ रहा था.
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कम्मो अधर में लटक गयी, कमरे के भीतर तो वह आ चुकी थी मगर क्या उसका वहाँ रुक जाना उचित होगा. आनन-फानन में वह खुद से सवाल करती है "अच्छा मौका है पागल !! अभी तेरा जवान बेटा अध-नंगा है. आगे बढ़ और ऐसा शो कर की जैसे तुझे उसकी इस अवस्था से कोई फ़र्क ही नही पड़ा हो" उसके अंतर्मंन ने फॉरन उसे जवाब दे दिया और अत्यंत तुरंत उसके थामे पैर वापस चलायमान हो जाते हैं.
यह जो हो रहा था सब निकुंज के प्लान मुताबिक था, अपने कमरे में आते ही सर्वप्रथम उसने फ्रेंची को छोड़ अपने सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में पटक दिए थे और फिर बेड पर जा कर लेट गया था. उसकी मा उसके पास ज़रूर आएगी यह वह पहले से ही जानता था और आख़िरकार कमरे में होती खटपट से उसे अंदाज़ा हो जाता है कि कम्मो उसके समीप आ पहुँची है.
"क्या बात है निकुंज !! तू तो अपने दोस्त के साथ डाइरेक्ट ऑफीस निकलने वाला था" कम्मो ने अपने पुत्र को उसके कमरे में अपनी उपस्थिति से अवगत करवाया.
"आप कब आई मोम ?" निकुंज बड़ी ही स्थिरता से प्रश्न पुछ्ता है जैसे उसकी मा की आँखों के सामने उसका यूँ अध-नंगा होना उनकी दैनिक-दिनचर्या में शामिल हो.
"बस आती जा रही हूँ. खेर अच्छा हुआ जो तू घर आ गया अब नाश्ता कर के ऑफीस जाना, तेरी बहने भी खा कर अपने कॉलेज निकल गयी हैं. तेरे पापा का कॉल आया था कह रहे थे शाम तक लौट पाएँगे" बात को घुमा-फिरा कर तोड़-मरोड़ कर कम्मो अपना कथन पूरा करती और जिसका मात्र एक ही इशारा होता है "हम दोनो के अलावा घर पर कोई और मौजूद नही"
"आज मेरा मार्केट विज़िट है मोम तो जाउ या ना जाो कुच्छ फ़र्क नही पड़ने वाला" बोलते हुए निकुंज बेड के कोने से सेंटर की दिशा में खिसक गया "आप बैठो ना, खड़ी क्यों हो ?" अपने बेटे के नज़दीक आने के इंतज़ार में तो कम्मो कब्से तैयार खड़ी थी और मौका मिलते ही वह ठीक उसकी नंगी दाईं जाँघ से चिपक कर बिस्तर पर बैठ जाती है.
"ले .. ले पानी पी" निकुंज की जाँघ से खुद की कमर टच होते ही कम्मो का सम्पूर्न जिस्म थर्रा उठा और जो स्वयं निकुंज ने भी स्पष्ट रूप से महसूस किया मगर बिना कोई रिक्षन दिए वह चुप-चाप ग्लास अपने हाथ में पकड़ कर ठंडा पानी पीने
"तू वह सब छोड़, ये बता नाश्ता अभी करेगा या बाद में ?" बात को टालने की कोशिश करते हुए कम्मो अपनी नज़र कमरे में रखी अन्य वस्तुओ से जोड़ कर बोली.
"नाश्ता कहीं भागा नही जा रहा मोम !! पहले आप मेरे सवाल का जवाब दो" निकुंज ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मा का चेहरा अपनी ओर घुमाना चाहा मगर उसके काँपते हाथ ने कम्मो के बाएँ कंधे के पार निकालने से पहले ही अपना बल खो दिया और अपने बेटे का हाथ अपने कंधे पर मेशसूस कर कम्मो की आँखें कुच्छ पल के लिए बंद हो जाती हैं.
हलाकी यह सिर्फ़ एक साधारण से एहसास को जाग्रत कर देना वाला टच था लेकिन अभी वर्तमान के हालात बिल्कुल नॉर्मल नही थे और वे दोनो मा-बेटे भी इस बात से अंजान नही रहे थे.
"मोम !! मेरी तरफ देखो ना" नीमा की जम कर चुदाई करने के उपरांत पूर्व में जिस आतमविश्वास की निकुंज के अंदर कमी थी वह अब काफ़ी हद तक ख़तम हो चुकी थी और तभी कंधे से उपर उठते उसके हाथ की उंगालयों का कोमल स्पर्श कम्मो की गरदन को गुदगुदाने लगा था.
"मैने पहले कहा था ना कि मैं ...." कम्मो के भराए गले से बाहर आते बाकी के शब्द जैसे उसके मूँह में दफ़न हो कर रह जाते हैं और वह अपने बाएँ कान और अपनी लचीली गर्दन को आपस में चिपकते हुए अपने पुत्र के हाथ के विशाल पंजे को उनके दरमियाँ कस कर दबा लेती है.
"लेकिन मोम आप ने यह भी कहा था कि आप उन्हे पहनने की कोशिश ज़रूर करोगी" निकुंज अपने पंजे को और भी ज़्यादा लहरा कर कहता है तो खुद ब खुद उसकी इस सनसनाती क्रिया को रोकने के उद्देश्य से कम्मो उसके चेहरे की ओर देखने पर विवश हो जाती है.
"लेकिन अब मेरा मन बदल गया है" वह हौले से फुसफुसाई लेकिन चाह कर भी अपने बेटे की आँखों में झाँक नही पाती.
"आख़िर क्यों मोम !! कहीं आप यह तो नही सोच रही कि आप के इस सुडोल शरीर पर वे छोटे से अंडरगार्मेंट्स अड्जस्ट नही हो सकेंगे ?" निकुंज की फ्रेंची के अंदर उफान खाते उसके विशाल लंड की शुरूवाती अकड़ ने उसे अपनी सग़ी मा से यह अशीलता भरा प्रश्न पुच्छने पर विवश कर दिया. माना अब तक कम्मो ने अपनी आँखें उसकी टाँगो की जड़ से नही जोड़ी थी मगर वह कब तक खुद को रोक पाएगी, ऐसा निकुंज का तर्क था.
"चल हॅट पागल कहीं का !! क्या कोई बेटा अपनी मा के शरीर का इस तरह से आंकलन करता है ?" अत्यधिक लाज्वश कम्मो के गाल निकुंज के सवाल को सुन कर बेहद लाल हो उठे और स्वतः ही उसकी आँखें चोर दृष्टि से अपने बेटे की बालो से भरी नंगी छाति का छुप-छुप कर दीदार करने लगती हैं.
"मैने ग़लत क्या कहा मोम !! एक बार को वह ब्रा आप के बदन पर फिट हो सकती है मगर पैंटी नही हो पाएगी" कह कर निकुंज अपनी जाँघ को हौले-हौले हिलाते हुए अपनी मा की कमर पर उसका मामूली सा एहसास करवाता है जैसे संकेत कर रहा हो कि वाकाई में वह छोटी सी पैंटी उसकी मा की कमर पर नही चढ़ पाएगी.
"क्या ?" निकुंज के बेशरम अल्फ़ाज़ और निरंतर उसकी जाँघ की असहनीय सहलहट से विचलित कम्मो की अपलक आँखें जो उस वक़्त अपने पुत्र की लुभावनी छाति से टिकी थी फॉरन उसकी जाँघ पर पहुचने का लक्ष साधते हुए नीचे की दिशा में फिसलने लगती हैं मगर बे-ख़याली में शायद कम्मो यह भूल गयी थी कि मनुष्य के शारीरिक ढाँचे के हिसाब से उसके गुप्ताँग का क्रमांक उसकी जाँघ से पहले आता है और नतीजन एक मा की विस्मृत आँखें उसके सगे बेटे की फ्रेंची में उभरे उसके विशाल लंड के तंबू पर चिपक कर रह जाती हैं.
"उफफफ्फ़" लाख कोशिशो के बावजूद भी कम्मो के मूँह से दबी सिसकारी छूट पड़ी और अत्यंत कामुकता से अभिभूत वह मा अपनी चूत की अनंत गहराई में सिहरन की आनंदमयी ल़हेर दौड़ती महसूस करती है.
निकुंज की आँखों ने जब अपनी मा के चेहरे की बदलती आकृति को देखा तो काँपते हुए खुद ब खुद उसके विकराल लंड ने फ्रेंची के भीतर ठुमकना शुरू कर दिया. नीमा की चुदाई के दौरान फ्रेंची पर लगे उसके गाढ़े वीर्य के दर्ज़नो दाग-धब्बे उसकी मा उसे बड़े ध्यान-पूर्वक परखती दिखती है.
"मोम !! नीमा आंटी का ड्रेसिंग सेन्स कितना ज़बरदस्त है ना. आइ मीन उनका लिविंग स्टाइल, फ्रॅंक नेचर, उनकी चाय्स सब पर्फेक्ट है. पहली मुलाक़ात में तो कोई पहचान ही नही सकेगा कि वे दो बच्चो की मा होंगी और यहाँ तक कि कल मैं खुद हैरत में पड़ गया था" निकुंज ने अपने डगमगाते सैयम को काबू में करने का प्रयत्न शुरू किया और जैसे उसकी मा की नज़र किधर है उसे पता ही ना हो एक दम नॉर्मल टोन में वह बोला.
"अच्छा !! लेकिन वह तो मुझसे सिर्फ़ 4 साल ही छोटी है" कम्मो ने फॉरन निकुंज के कथन पर गौर किया और फ्रेंची के तंबू पर जमी उसकी आँखें पल भर में वापस अपने बेटे के चेहरे पर लौट आई.
"फिर भी मोम !! वे काफ़ी यंग दिखती हैं" कम्मो का रिक्षन देख निकुंज समझ गया कि उसकी मा को नीमा आंटी की प्रशन्षा पच नही पा रही "उस जीन्स-टॉप में उनका फिगर बहुत हॉट नज़र आ रहा था ना ?" चतुरता से उसने इस विवादित विषय पर स्वयं अपनी मा की राय जाननी चाही जो इस वक़्त क्रोध में तिलमिलाती उसे बेहद खूबसूरत नज़र आ रही थी.
"अगर कोई औरत सरे बाज़ार नंगी घूमेगी तो तुम मर्दो का उसकी ओर आकर्षित होना जायज़ है" कम्मो ने नीमा के साथ अपनी ईर्ष्या की जलन में निकुंज को भी लपेट लिया.
"आप की सोच का नज़रिया ही ग़लत है मोम !! आप आंटी के फॅशन की समझ को नग्नता का रूप दे रही हो" निकुंज इस वार्तालाप से मन ही मन मुस्कुरा रहा था और बीच-बीच में अपनी मा का ध्यान अपने खड़े लंड की तरफ मोड़ने हेतु कभी अपना पेट सहलाता तो कभी फ्रेंची की दोनो कीनोर से बाहर निकल आई अपनी झाँटे खुजाने लगता.
"नीमा का पति उसके साथ यहीं इंडिया में रहता होता तो मैं मानती उसके फैशन को मगर यह क्या बात हुई कि पति विदेश में मेहनत करे, पैसा कमाए और उन्ही पैसो से तुम छोटे-छोटे कपड़े खरीद कर मर्दो को रिझाती फ़िरो" वह भूंभूनाई "थोड़ा और खिसक !! मुझे भी ऊपर ठीक से बैठने दे" काफ़ी समय से बिस्तर के नीचे पैर लटकाए बैठी कम्मो की पीठ में अब दर्द होने लगा था तो वा निकुंज से डिमॅंड करती है.
"हां हां मोम !! आप रिलॅक्स हो कर बेड पर बैठ जाओ" निकुंज बिस्तर के सेंटर में खिसक कर बोलता है. उसका तो जैसे बिन माँगे जॅक पॉट लगा गया था, अब उसकी मा बड़े आराम और स्पष्ट रूप से उसकी टाँगो की जड़ को निहार सकती थी.
"तो क्या नीमा आंटी अपने हज़्बेंड की गैर-हाज़री में गुलच्छर्रे उड़ाती हैं. मैं नही मानता मोम" कहने के उपरांत वह पुनः अपनी झाँटे खुजाता है और इस बार उसके हाथ के साथ उसकी मा की आँखें भी उसके बड़े से तंबू पर पहुँच जाती हैं.
"मैने ऐसा तो नही कहा !! हां पहले मैं थोड़ा नाराज़ थी लेकिन नीमा को सोचना चाहिए. उसके दो जवान बच्चे हैं और वह अगर फैशन के नाम पर भी छोटे कपड़े पहने कर घर से बाहर निकलेगी तो अपने आप मर्दो की जमात में चर्चा का विषय बनेगी. जैसे तुम बेशर्मी से उसे हॉट आंटी की संगया दे रहे थे वैसे ही ना जाने कितने लोग देते होंगे" कम्मो ने अपनी बात का स्पष्टीकरण किया और कामुकतावश अपने होंठ चबाने लगती है. उसकी कछि सामने से गीली हो कर उसकी काँपती चूत के मुख से बुरी तरह चिपक चुकी थी.
"मानता हूँ मोम !! आप अपनी जगह सही हो बट नीमा आंटी भी ग़लत नही हैं. अगर ग़लत कोई है तो वह है लोगो की गंदी सोच" निकुंज ने अपनी हार स्वीकार करते हुए अपने कान पकड़ने का अभिनय किया "सॉरी मों !! जो मैने आप पर उन अंडरगार्मेंट्स को पहेन्ने के लिए ज़बरदस्ती प्रेशर डाला, वैसे मुझे तो उनमें कुच्छ ग़लत नही लगा लेकिन अगर आप कंफर्टबल ना हो तो मत पहेनना" निकुंज बोला और फॉरन कराह कर अपनी फ्रेंची अड्जस्ट करने का भ्रम पैदा करते हुए उसकी दाईं कीनोर नीचे खीचने लगता है और उसके ऐसा करते ही कम्मो को उसके टट्टो की हल्की सी झलक देखने को मिल जाती है.
"क्या हुआ निकुंज !! कोई दिक्कत है क्या ?" जान-बूझ कर अंजान बनने का नाटक तो स्वयं कम्मो भी कब से कर रही थी जब कि उसे अच्छे से मालूम था कि उसके बेटे को उसकी झान्टो ने परेशान कर रखा है.
"कुच्छ नही मोम !! आज सुबह से यहाँ बहुत खुजली हो रही है" कह कर वह अत्यधिक पीड़ा के भाव अपने चेहरे पर लाते हुए अपनी मा की आँखों के सामने ही बिना किसी अतिरिक्त शरम के अपना हाथ फ्रेंची के अंदर डाल लेता है और फिर मनचाहे ढंग अपनी झाँटे खुजलाना आरंभ देता है.
"बस कर निकुंज वरना इन्फेक्षन हो जाएगा वहाँ" कहते वक़्त कम्मो की गान्ड का छेद तेज़ गति से सिकुड रहा था और उसकी गोल मटोल चुचियाँ उसकी बेकाबू सांसो के प्रभाव से ऊपर- नीचे हो कर झूला झूलने लगती हैं.
"अपना अंडरवेर देख, कितना गंदा हो चुका है" निकुंज का कोई जवाब ना पा कर कम्मो उसका ध्यान उसकी फ्रेंची पर लगे दाग-धब्बो पर केंद्रित करती है "उतार इसे, मैं धो देती हूँ" अपने सगे पुत्र का विशाल लंड नंगा देखने के उद्देश्य से ऐसा कह कर कम्मो अपने हाथ को आगे बढ़ाते हुए निकुंज की कलाई थाम लेती है. डाइरेक्ट लंड छुने की वह काम-लूलोप अपनी हिम्मत नही जुटा सकी थी.
"मेरा हाथ छोड़ो मोम !! मुझे जी भर कर खुज़ला लेने दो" बोल कर निकुंज दोबारा अपना हाथ हिलाने लगता है मगर इस बार उसकी मा का हाथ भी इस घिनोने कार्य में उसका साथ दे रहा था.
"मैं कहती हूँ रुक जा निकुंज" कम्मो ने उसे डाँट लगा कर कहा "चल उतार इसे, मैं 2 मिनिट में धो दूँगी !! पहने रहेगा तो ज़्यादा खुजली होगी" अगले ही पल बदल कर वह मोम हो गयी.
"मैं धो लूँगा मोम !! आप फिकर ना करो" निकुंज अपनी शरम दर्शाता है.
"जब मैं यहाँ मौजूद हूँ तो तू क्यों धोयगा" कम्मो अपनी पापी लालसा को पूरा करने के लिए प्रयत्न पर प्रयत्न करती जा रही थी.
"मोम !! आप समझो मैं नंगा हो जाउन्गा" निकुंज अपने अभिनय को अंतिम मोड़ दे कर बोला.
"तो क्या एक मा अपने बेटे को नंगा नही देख सकती और तू तो ऐसे कह रहा है जैसे अभी तूने पूरे कपड़े पहन रखे हों" कम्मो ने फॉरन अपने हाथ को उसकी कलाई से हटाते हुए अपनी उंगलियों से उसकी फ्रेंची की स्ट्रीप को पकड़ कर कहा "रुक मैं ही उतारती हूँ. बड़ा आया अपनी मा से शरमाने वाला" वह अपना दूसरा हाथ भी फ्रेंची की दिशा में आगे बढ़ाती है. एक गहरी साँस ले कर उसने अपनी बंद होती आँखों को बल-पूर्वक खोले रखने का प्रयास किया और इसके उपरांत ही वह फ्रेंची का फ्रंट पार्ट नीचे खींच देती है.
"मोम" निकुंज की आवाज़ के साथ ही उसकी मा की आह भी कमरे में गूँज उठी.
फ्रेंची का फ्रंट पार्ट नीचे खीचते ही निकुंज का विशाल एवं तना लंड नंगा हो कर कम्मो की अचंभित आँखों के सामने फड़फड़ाने लगता है. जिसकी तमन्ना उस कामुक मा ने अपने दिल में काफ़ी लंबे अरसे से पाल रखी थी और वह दोबारा अपने सगे पुत्र के लंड का दीदार करने में पूर्ण-रूप से सफल हो गयी थी.
"मोम !! मैं कर लूँगा. आप क्यों परेशान हो रही हो ?" निकुंज हौले से फुसफुसाया और फॉरन अपने लंड को छुपाने के प्रयास में कम्मो की विपरीत दिशा की ओर करवट लेने की कोशिश करता है मगर उस स्थिति में उसकी मा फ्रेंची को उसकी गान्ड से नीचे भी खीच सकती है ऐसा सोच वह पुनः अपनी पीठ के बल लेटने पर विवश हो जाता है.
हलाकी कमरे का माहॉल गरम और रंगीन बनाने हेतु पहेल करते हुए स्वयं निकुंज ने ही अपनी अश्लील हरक़तो से कम्मो को छेड़ना आरंभ किया था लेकिन उसकी मा उसे पूरा नंगा करने पर उतारू हो जाएगी यह उसने कतयि नही सोचा था.
"अच्छा !! अपने बच्चे के कपड़े धोने में उसकी मा को किस बात की परेशानी" कम्मो अपने पुत्र के फूले सुपाडे को बड़े गौर से देखते हुए कहती है जो गाढ़ा रस बाहर उगलता हुआ उस निर्लज्ज मा को बेहद सुंदर नज़र आ रहा था. माना उसके कथन का अर्थ सही था मगर निकुंज अब बच्चा नही बल्कि एक बलिष्ठ शरीर और उससे भी कहीं ज़्यादा कठोर लंड का स्वामी बन चुका था और प्रमाण-स्वरूप अपनी सग़ी मा के समक्ष नंगा बैठा था.
"उफ़फ्फ़ मोम !! आप समझो. मुझे शरम आ रही है" कहते हुए निकुंज ने अपने दोनो हाथ कम्मो के हाथो पर रख दिए ताकि अपनी मा की उंगलियों की मजबूत पकड़ से अपनी फ्रेंची की स्ट्रीप छुड़वा सके.
"अच्छा ले छोड़ दिया !! चल अब बता तुझे शरम की बात की आ रही है ?" अचानक कम्मो फ्रेंची की स्ट्रीप को अपनी उंगलियों की पकड़ से मुक्त कर उससे सवाल करती है और मौका पाते ही निकुंज ने तेज़ी से फ्रेंची ऊपर खीच कर अपनी इज़्ज़त वापस ढँक ली.
"वो मोम !! अगर आप इसे उतार दोगि तो मैं नंगा हो जाउन्गा ना" उसने धीमे स्वर में जवाब दिया. अपनी मा की विध्वंसक क्रिया पर उसे बेहद आश्चर्य हो रहा था और अब तक उसके दिल की धड़कने ठीक से सामान्य नही हो पाई थी.
"नंगा तो मैने तुझे बचपन में हज़ार बार देखा है और कुच्छ दिन पहले तेरी जवानी में भी देख लिया. भूल गया हो तो पुणे टूर की याद दिलाऊ ?" अपनी बातों के ज़रिए कम्मो अपने बेटे की मनो-स्थिति भाँपने की कोशिश करती है और उसने प्रत्यक्ष-रूप से जाना वाकाई उसका लाड़ला शरम से बहाल था. स्वयं उस कलयुगी मा के जिस्म में भयानक कपकपि दौड़ रही थी और बुरी तरह हाँपते हुए वह अपनी ललचाई नज़रों को निकुंज की फ्रेंची के तंबू से हटा नही पा रही थी.
"आप को कुच्छ कहने की ज़रूरत नही मोम !! मुझे ऑलरेडी सब याद है" अपनी मा द्वारा पुणे में बिताई रात का उल्लेख सुन निकुंज सिहर उठा और फॉरन उस विषय को वहीं समाप्त करने का प्रयत्न करता है. वह जानता था अगर उसने एक पल को भी अपना ध्यान उस रात की तरफ मोड़ा तो यक़ीनन उसका सैयम टूटने लग जाता.
"फिर क्या दिक्कत है !! गंदे अंडरवेर को पहने रहेगा तो तुझे इन्फेक्षन हो सकता है बेटे. चल अब ज़िद मत कर और इसे उतार कर अपनी मा को दे दे" कम्मो प्यार से उसे समझाती है. फ्रेंची की स्ट्रीप छोड़ कर जो ग़लती उसने की थी अब उसे अपनी बेवकूफी पर पछ्तावा हो रहा था. कितने जतन के बाद वह अपने बेटे का लंड वापस देखने में कामयाब हुई थी मगर उसकी एक भूल ने उसके चेहरे पर आई सारी खुशी मानो गहेन मायूसी में बदल दी थी.
"बेटा !! मैं मा हूँ तेरी और मेरे होते हुए भी तू परेशान रहे यह मैं कभी नही सह पाउन्गि" निकुंज को शांत बैठा देख कम्मो ने एहसासो के सहारे उसे मनाना चाहा "पुणे में तू अपना लंड खड़ा ना होने की वजह से दुखी था तब तेरी मा ने उसे अपने मूँह से चूस कर तेरी उदासी को दूर किया और यह बात मैं तुझे बता भी चुकी हूँ कि उससे पहले मैने कभी लंड नही चूसा था, तेरे पापा का भी नही. अभी तुझे खुजली से दिक्कत महसूस हो रही है तो तेरी मा तेरा अंडरवेर धो देगी. जब-जब तू परेशान होगा निकुंज कोई तेरे साथ हो या ना हो लेकिन तेरी मा ज़रूर तेरे साथ होगी" बे-ख़याली में कम्मो दो बार लंड शब्द का उच्चारण कर जाती है मगर उसे इस बात की कोई परवाह नही थी. उसका मक़सद तो किसी भी हालत में अपने बेटे को संपूर्ण रूप से नंगा देखने का था.
कम्मो की इस बात ने निकुंज की रूह कंपा दी और वह खुद को धिक्कारने लगता है कि क्यों उसने खुजली वाला नाटक शुरू किया और उसकी मा उसके अभिनय को सच मान बैठी. वह अपनी मा की मर्यादा और उसकी इज़्ज़त से भली-भाँति परिचित था भले चाहे उसके खुद के मन में अपनी मा के प्रति ग़लत भाव आ गये थे मगर एक मा होने के नाते कम्मो जान-बूच्छ कर उसका ग़लत इस्तेमाल कभी नही करेगी शायद यह निकुंज भूल गया था.
"मुझे पता है !! आप मुझे प्राब्लम में नही देख सकती" निकुंज ने अपने दोनो हाथो को अपनी कमर पर रखते हुए कहा "आप सही हो मोम !! मुझे इन्फेक्षन होने का ख़तरा है" बोल कर वह अपनी उंगलियाँ फ्रेंची की स्ट्रीप में डाल कर शीघ्रता से उसे अपनी टाँगो से बाहर निकाल देता है.
"निकुंज !! तूने अपनी मा की बात मानी. मुझे बहुत खुशी हुई" कम्मो अत्यंत तुरंत निकुंज की नंगी छाति से लिपट कर कहती है. उसकी आँखें चमक उठी थी जब उसने अपने बेटे को स्वयं अपने मन से अपनी फ्रेंची उतारते देखा था. अगर निकुंज की नज़र उस वक़्त अपनी मा के चेहरे पर होती तो यक़ीनन वा जान जाता कि उसके साथ छल-कपट किया गया है.
"आप की बात को कैसे टालता मोम !! लो अब इसे धो दो" कम्मो के प्यार भरे आलिंगन को स्वीकार करते ही निकुंज की घबराहट अचानक से बढ़ गयी. सर्व-प्रथम तो वह अपनी सग़ी मा के सामने पूर्ण-रूप से नंगा होने पश्चात खुद के जिस्म में बेहद रोमांच आता महसूस कर रहा था और दूसरे कम्मो की गोल मटोल तनी चूचियाँ उसकी छाति में बुरी तरह धँस कर उसके टटटे उबलवाने लगी थी. नतीजन निकुंज का लंड अब और भी ज़्यादा विकराल हो कर उसकी मा के नंगे मुलायम पेट पर चोट कर देता है.
"उफ़फ्फ़ !! यह क्या चुभा मुझे ?" जानते हुए कि अभी उसके पेट से कौन सी वस्तु टकराई है कम्मो ने सिसक कर निकुंज को अपनी बाहों से आज़ाद कर दिया और अपने प्रश्न के ज़रिए अब वह अपने पुत्र के विशाल लंड को उसी की आँखों के सामने खुल कर निहार सकती थी.
"निकुंज !! तेरी मा ने तुझे ज़रा सी छूट क्या दे दी तू तो शैतानी करने पर उतर आया" कम्मो ने मुस्कुरा कर निकुंज के खड़े लंड की ओर देखते हुए कहा तो बदले में अत्यधिक उन्माद से ओत-प्रोत उसके बेटे का लंड ज़ोर-ज़ोर से झटके खाने लगा और फॉरन उसके सूजे सुपाडे से रस बाहर छलक कर लंड की अत्यंत गोरी खाल पर बह जाता है.
"मोम !! आप अंडरवेर धोने जा रही थी ना ?" निकुंज ने अपनी मा का ध्यान बंटाने के उद्देश्य से अपनी फ्रेंची उसके सुपुर्द करनी चाही ताकि कम्मो उसके लंड की विशालता से संबंधित अन्य कोई प्रश्न ना पुच्छ ले. इतना तो वा जानता था कि उसकी मा को उसके खड़े लंड की स्थिति का पता काफ़ी पहले से लग चुका था.
"हां वो तो मुझे धोना है मगर तू भी मेरे साथ बाथरूम चलेगा" कम्मो ने जैसे विस्फोट किया. उसे अच्छी तरह मालूम था कि उसके बातरूम में जाने के उपरांत अवश्य ही निकुंज अपनी नयी फ्रेंची पहेन लेगा और वह फिर से मॅन मसोस कर रह जाएगी "अब जो भी होना है सब मेरी प्लॅनिंग के मुताबिक होगा" उसने खुद से कहा.
"मैं .. मैं क्या करूँगा बाथरूम जा कर ?" सवाल करते हुए निकुंज हकलाने लगा.
"अरे बुध्धु !! अभी कितना गंदा अंडरवेर पहेन रखा था तूने तो क्या अब इसे उतारने के बाद अपना लंड नही धोएगा ?" कम्मो ने अपने पुत्र को अपने अपने प्रश्न से चौंका दिया. वह खुद हैरान हुई की उसके मूँह से दोबारा लंड शब्द का इतना स्पष्ट उच्चारण कैसे हो गया मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
"हमे हमारे शरीर के सभी प्राइवेट पार्ट्स हमेशा सॉफ-सुथरे रखने चाहिए. क्या तूने साइन्स की बुक में नही पढ़ा और ऐसा ना करने का अंजाम देख. कैसे पागलो जैसे खुजा रहा था अभी थोड़ी देर पहले" इस बार वह अपनी भाषा में सुधार करती है लेकिन अपने बेटे के हैरान चेहरे की आकृति को नही बदल पाती.
"हां मोम !! मैने पढ़ा है" अब निकुंज इससे ज़्यादा और क्या कहता. वह तो बस प्रार्थना कर सकता था कि जल्द ही उसकी मा बाथरूम में चली जाए और उसकी जान छूटे. मगर एक विशेष तथ्य जो उसके मश्तिश्क को झकझोर रहा था और वह था उसकी मा का कड़ा सैयम जो किसी भी दृष्टिकोण से कम्मो के चेहरे पर उत्तेज्नात्मक भाव नही आने दे रहा था.
"देखो जानते हुए भी कितना बड़ा जंगल उगा रखा है बेवकूफ़ ने" कम्मो ने अपनी कामुक बातों का सिलसिला ज़ारी रखा और अपनी प्रथम उंगली व अंगूठे के मध्य उन बालो को पकड़ कर कहती है "मैं तो उसी रात तुझे टोकने वाली थी जब पहली बार तेरा लंड देखा था लेकिन जाने क्या सोच कर चुप रह गयी थी. अब चल ना बैठा क्यों है और वहीं अपनी इन झान्टो को भी काट लेना" यह पहला अवसर था जब कम्मो ने जान-बूझ कर लंड शब्द का इस्तेमाल किया और अपने पुत्र के लंड के आस-पास के एरिया को छुआ भी. अपनी मा की इस शर्मनाक कार्यवाही से निकुंज मानो उसी पल झड़ने को तैयार हो जाता है लेकिन समझदार कम्मो की मौजूदगी उसे झड़ने नही देती. वह समय से पूर्व अपना हाथ उसकी झाटों से हटा चुकी थी.
इसके बाद कम्मो ने ज़बरदस्ती अपने बेटे के हाथ को थाम कर अपने साथ उसे भी बिस्तर से नीचे उतार लिया. अगर वह पहेल नही करती तो निकुंज कभी उसके साथ बाथरूम में नही आता. खुले आम वह लज्जाहीन मा अपने नंगे पुत्र के साथ ऐसे मटक-मटक कर चल रही थी जैसे यह बात उसके लिए बेहद तुच्छ हो और चन्द कदमो का फासला तय करने के उपरांत ही वे दोनो बाथरूम के अंदर पहुच जाते हैं.
"तू यहीं रुक मैं अभी आती हूँ" कहते हुए कम्मो ने मन भर कर निकुंज के लंड को निहारा जैसे उसे अपने जीवन की अंतिम विदाई, आख़िरी अलविदा कह रही हो और फिर पलट कर वापस कमरे में आती है. बिस्तर के पास रखा स्टूल जो स्वयं उसके घुटने तक आ रहा था उसे उठा कर लगभग दौड़ते वह पुनः बाथरूम में प्रवेश कर गयी.
"निकुंज !! इस पर बैठ जा बेटे और मैं तुझे डेटोल आंटी-सेपटिक वॉश की बोटल भी ला कर देती हूँ" कम्मो का आदेश मान कर निकुंज स्टूल पर बैठ जाना ही उचित समझता है. उसकी मा की अजीबो-ग़रीब गतिविधियाँ उसे सकते में डाल रही थी और कहीं कम्मो ने अपना मानसिक संतुलन तो नही खो दिया है ऐसा सोच-सोच कर उसका मश्तिश्क फटा जा रहा था लेकिन मज़ाल है जो उसके लंड में नाम-मात्र का भी ढीलापन आया हो. वह तो तंन कर ना जाने कब से उसके पेट से चिपका हुआ था.
"ले बेटा डेटोल वॉश और देख कितनी बदबू आ रही है तेरे अंडरवेर से" फ्रेंची को अपनी नाक से लगा कर दो-चार गहरी साँसे लेने के बाद कम्मो ने टेढ़ा सा मूँह बनाया बल्कि सच तो यह था कि वह अपने पुत्र के गुप्ताँग की मादक सुगंध सूंघ कर बहुत ज़्यादा कामुत्तेजित हुई थी और जिसके प्रभाव से उसका पूरा जिस्म लहरा उठा था. यह बात फॉरन निकुंज ने नोट कर ली और पहली दफ़ा में ही वह अपनी मा की वास्तविक स्थिति से पूरी तरह वाकिफ़ हो जाता है.
"मोम !! तभी तो आप इसे धोने की ज़िद कर थी" उसने साधारण सा जवाब दिया. हलाकी अब वह अपनी मा की कामुक हालत का जानकार था मगर फिर भी अपने मन को बदल पाना उसके लिए संभव नही हो पाया था.
"संसार की हर मा जो अपने जवान बेटे को इस तरह नंगा देखेगी तो ज़रूरी नही कि उस मा के शरीर और उसकी क्रियाओं में कोई भी परिवर्तन ना आए और फिर मोम ने सिर्फ़ मेरे भले के लिए ही मुझे नंगा किया है. अब ऐसे में यदि उनकी काम लालसाएँ जागने लगी हैं तो इस में उनका क्या दोष" निकुंज गांबीरता-पूर्वक सोच रहा था "मैं सब कुच्छ जानते हुए भी अंजान बना रहूँगा और अपनी तरफ से उन्हें ज़रा भी तकलीफ़ नही पहुचने दूँगा. मैं खुद से वादा करता हूँ कि उनका बेटा हमेशा उनकी इक्षाओ का सम्मान करता रहेगा" अपनी सोच को विराम देते हुए निकुंज मन ही मन मुस्कुराने लगता है.
"निकुंज !! यह ले पानी मगर पहले अपने लंड को अच्छे से धो लेना और इसके बाद आंटी-सेपटिक वॉश यूज़ करना" कम्मो ने पानी से भरा मग अपने बेटे की ओर बढ़ा कर कहा और इसके उपरांत वह एक गारेलू काम-काज करने वाली नारी की तरह अपनी सारी को अपनी गोरी मांसल पिंदलियो तक ऊपर उठाते हुए, सारी का वह हिस्सा अपने पेटिकोट के अंदर ठूंस लेती है. साथ ही उसने अपना पल्लू भी कसा ताकि निकुंज अपनी मा के फर्श पर बैठे होने से उसकी चूचियों का उभार ना देख ले. तत-पश्चात वा अत्यंत सुंदर मा नीचे ज़मीन पर अपने घुटनो के बल बैठ जाती है.
"एक मा हो कर यदि मैं अपने सगे बेटे को रिझाऊ तो वह इसे अपनी मा का छिनाल्पन समझेगा. माना मैं भी नीमा की तरह ही अपने पुत्र के साथ चुदाई करने को उत्सुक हूँ मगर मेरा मात्रत्व मुझे पहल करने की इजाज़त कभी नही देगा. बस मैं अपनी तरफ से निकुंज को छु सकती हूँ, चूम सकती हूँ या कभी-कभार बहाने बना कर उसे नंगा देख सकती हूँ मगर इसके आगे मेरी हद्द की समाप्ति है" कम्मो अपने बेटे की फ्रेंची पर साबुन रगड़ते हुए सोचती है.
"वैसे भी निकुंज भोला है. मुझसे बहुत प्यार करता है और तभी मेरे दुखी होने के नाटक को सच समझ स्वयं अपनी इक्षा-अनुसार अपना अंडरवेर उतार कर अपनी मा के सामने नंगा हो गया. मैने अपनी आँखें दर्ज़नो बार उसके लंड से जोड़ी और जानते हुए भी इस उसकी मा की दृष्टि कहाँ है अब तक निकुंज ने मुझ पर किसी भी प्रकार का कोई शक़ नही किया. चाहु तो एहसासो के बंधन में बाँध कर उसे अपने साथ चुदाई करने को अभी और इसी वक़्त राज़ी कर लूँ मगर मेरा ऐसा करना उसके दिल को चीर कर रख देगा, यक़ीनन उसे अपनी मा से सदा के लिए नफ़रत हो जाएगी. हां मैं इतना अवश्य करूँगी कि अगर नुकूँज अपनी ओर से मुझे बाध्य करे, विवश करे तो मैं अपना तंन, मन और धन अपना सर्वस्व उस पर न्योचछावर करने को हमेशा तैयार रहूंगी" कम्मो की सोच भी ख़तम हो गयी मगर इस जटिल समास्या का कोई भी हल अब तक नही निकल पाया था.
"हो गया मोम !! क्या अब डेटोल वॉश लगा लूँ ?" निकुंज के लफ्ज़ सुन कर कम्मो ने अपना सर ऊपर उठाते हुए अपने बेटे के लंड पर अपनी निगाहें डाली और फॉरन उसे एक तरकीब सूझी.
"अरे ठीक से तो धो पागल !! अभी तेरी झान्टे पूरी तरह से कहाँ भीगी हैं. रुक मैने तेरी अंडरवेर में साबुन रगड़ दिया है और मुझे लगता है कि तेरे लंड को धोना भी तुझे अब तेरी मा को ही सीखाना पड़ेगा !! भोन्दु कहीं का" कम्मो बिना किसी अतिरिक्त झेंप के खुल कर अपने पुत्र के समक्ष अश्लीलता भरे शब्दो का प्रयोग करती है और निकुंज के विशाल लंड को धोने की बाग-डोर स्वयं अपने हाथो में लेते हुए उसने उसका सैयम तोड़ने का मन बनाया था.
"मॉम !! कम से कम यह काम तो मुझे खुद करने दो" निकुंज घबरा कर बोलता है. वह किसी भी सूरत में अपनी मा के हाथो का कोमल स्पर्श अपने खड़े लंड पर महसूस नही करना चाहता था. उसे अनुमान था कि उसकी सहेन-शक्ति तुरंत जवाब दे जाएगी.
"चल फटाफट खड़ा हो जा बाद में मुझे घर के बाकी अधूरे काम भी पूरे करने हैं" निकुंज की एक ना सुनते हुए कम्मो ने उसे आदेश दिया और साथ में बड़ी चतुराई से उसके सामने अपनी अन्य ज़िम्मेदारियों का दिखावा भी करती है ताकि उसका बेटा उस पर तनिक भी संदेह ना कर सके.i
इसके बाद उस चंचल मा ने बड़ी ही सहजता के साथ अपने बेटे के विशाल लंड पर पानी से लबालब भरे कयि सारे मग उडेल कर लगभग उसका संपूर्ण निचला धड़ भिगो दिया और तत-पश्चात वह अपना कांपता हाथ उसके अत्यधिक फूल चुके टट्टो पर रखते हुए उन्हे हौले-हौले सहलाने लगती है.
"उफ़फ्फ़ मोम" निकुंज पर तो जैसे वज्रपात हो गया. उसकी आह को सुन कम्मो भी फॉरन अपनी चूत की संकीर्ण मास-पेशियों में बेहद खिचाव आता महसूस करती है और खुद ब खुद उस मा के छर्हरे शरीर का पूरा भार उसकी एडियों से हट कर उसके पैरो के पंजो पर एकत्रित हो जाता है.
"मैं कितनी चरित्रहीन मा हूँ जिसने अपने जवान बेटे को दो बार अपनी मर्ज़ी से नंगा कर दिया और जाने कितनी ओछि-ओच्चि हरक़तें भी उसके साथ कर रही हूँ. क्यों निकुंज !! है ना तेरी मा सच में बेशरम ?" कम्मो ने अपनी उंगलियों को उसकी घुँगराली झान्टो के घुछो में उलझाते हुए पुछा तो निकुंज का मूँह फॅट पड़ता है. उसे लगता है जैसे उसकी मा के वे शब्द नुकीला खंजर बन कर उसके दिल को बुरी तरह से भेद गये हों.
"मोम" उसकी टीस भरी चीख कम्मो के कानो से जा टकराई और स्वतः ही वह लंड से अपनी दृष्टि हटा कर निकुंज की आँखों में झाँकने लगती है.
"अगर दोबारा कभी आप ने ऐसी बात कही ना मोम तो याद रखना आप मुझे हमेशा के लिए खो दोगि. मेरी मा दुनिया की सबसे अच्छी मा है और अपने बेटे से बहुत प्यार करती है. बस इसके अलावा मैं कुच्छ नही जानता और ना जानना भी नही चाहता" निकुंज ने अपने हाथ को अपनी मा के मुलायम गाल पर फेरते हुए कहा तो कम्मो का मन खुशी से झूम उठता है.
"पगले !! तो क्या तेरी मा तुझे अपने से दूर कभी जाने देगी. कभी नही निकुंज, कभी नही" आंटी-सेपटिक वॉश को अपने हाथ के पंजे में इकट्ठा कर कम्मो जवाब देती है. अब वह आनंदित थी, उसे कोई भय ना था और जल्द ही वह मा अपनी सुंयोजित अधूरी पापी लालसा को शिखर पर ले जाने हेतु बड़ी तेज़ गति से अपने पुत्र के लंड को मसल्ने, रगड़ने, दबाने, मुठियाने इत्यादि सभी कार्य एक के बाद एक क्रमांक से करना शुरू कर देती है.
"आह मोम !! थोड़ा धीरे करो" कम्मो के अनुभवी हाथो की तत्परता और उसे उसके पुत्र के लंड की सेवा में यूँ खोया देख निकुंज अपनी कामुक सिसकियों को अपने भर्राये गले से बाहर आने से कतयि नही रोक पा रहा था और जब उसे लगा कि अब वह किसी भी पल झाड़ सकता है तो वह अपनी मा को टोक देता है.
"मोम क्या सोचेंगी" निकुंज ने खुद से कहा "यदि मैं काबू नही कर पाया तो यक़ीनन मेरे वीर्य के सारे छींटे मा के चेहरे और उनके जिस्म पर गीरेंगे" वह सोचता है.
"क्या हुआ निकुंज !! दर्द हो रहा है क्या बेटे ?" कम्मो ने लंड की अखंड फड़फड़ाहट को पहचान कर भी अंजान बनते हुए पुछा. उसका अधीर चेहरा निकुंज की टाँगो की जड़ के बेहद करीब था और उसके गुलाबी होंठो से बाहर निकलती उसकी गरम साँसे उसके पुत्र के फूले सुपाडे से निरंतर टकरा रही थी. आंटी-सेपटिक वॉश के कारण बना झाग और बेहतरीन चिकनाई की मदद से कम्मो के दोनो हाथ कोमलता-पूर्वक निकुंज के लंड की गोरी सतह पर बेहद आसानी से फिसलते जा रहे थे और यही वो मुख्य वजह थी जो उसका बेटा अब अपने चरम को महसूस करने लगा था.
"ओह्ह !! नही .. नही मोम दर्द तो नही हो रहा मगर ...." निकुंज ने अपने जबड़ो को ताक़त से भींचा परंतु अपना कथन पूरा नही कर पाया.
"मगर क्या बेटे !! बता मुझे ?" पुच्छ कर कम्मो के चेहरे पर शरारती मुस्कान छा जाती है. अपने वर्तमान जीवन की सबसे पसंदीदा और अनमोल वास्तु, अपने सगे बेटे के लंड से खेलते हुए उसकी मा का मूँह तो ना जाने कितनी देर से पनिया रहा था और कयि बार अपनी लार को नीचे टपकते देख वह प्रसन्नता से फूली नही समाई थी.
"कुच्छ नही मोम !! बस ऐसे ही सोचा कि आप फर्श पर बैठे-बैठे थक गयी होंगी" निकुंज बात को घुमा कर बोला. अत्यधिक उन्माद से खुद ब खुद उसकी कमर झटके खाती हुई उसकी मा के हाथ की मुट्ठी की कसावट के साथ ताल से ताल मिलाने लगी थी और वह अपनी मा का खूबसूरत चेहरा अपने उबलते टट्टो में निरंतर उमड़ते जा रहे वीर्य से कतयि गंदा नही करना चाहता था. अपने कथन के अर्थ से उसने कम्मो को फॉरन फर्श से उठ जाने का संकेत दिया था.
"तू यह सब सोचना छोड़ बेटे !! मैं ठीक हूँ" कम्मो ने स्थिति-अनुसार अपने हाथो की सहलाहट को कम करते हुए निकुंज से सवाल किया. वह नही चाहती थी कि उसका बेटा अपना अमूल्य वीर्य बेकार में व्यर्थ कर दे "बुरा ना माने तो एक बात पुच्छू ?" वह बोली.
"हां क्यों नही मोम !! आप को मेरी इजाज़त लेने की कभी कोई ज़रूरत नही है" निकुंज अपनी मा का समर्थन करता है जैसा उसने कुच्छ वक़्त पहले खुद से प्रण किया था परंतु वह घबरा भी रहा था कि उसकी मा इस विषम परिस्थिति के अनुरूप कोई उट-पटांग सवाल उससे ना पुच्छ ले.
"बेटे !! कल तूने माल से लौट-ते वक़्त कहा था कि तू पुणे की उस रात को भूल नही पाता. क्या हक़ीक़त में तेरी मा ने तेरे लंड को इतने अच्छे से चूसा था ?" कम्मो की कछि उसकी सकुचाती चूत के कामरस से भीग कर अपनी सोखन-शक्ति हर तरह से खो चुकी थी और उसके तने गोल मटोल मम्मो का अब उसके ब्लाउस में क़ैद हो कर रह पाना ना-मुमकिन था. अनेको बार वा अपने होंठो पर अपनी लंबी जिह्वा फेरने को मजबूर थी ताकि उसके मूँह से बहती उसकी अनियंत्रित लार का बहाव वह निकुंज की नज़रों से छुपा सके.
"मुझे तो लगता है तूने सिर्फ़ अपनी मा का दिल रखने के लिए ऐसा कह दिया होगा वरना पहली ही बार में कोई औरत लंड को इतनी सटीकता से कैसे चूस सकती है ?" उनके मर्यादित रिश्ते की पवित्रता को तार-तार कर देने वाला प्रश्न पुच्छ कर वह कलयुगी मा जवाब की प्रतीक्षा में अपने पुत्र की आँखों में झाँकने लगती है.
निकुंज की उत्तेजना को कम्मो का यह सवाल इस कदर भड़का देता है कि यदि वह अपनी आंटी नीमा की चुदाई के दौरान दो बार नही झाड़ा होता तो वाकयि उसका लंड इसी वक़्त स्खलित हो जाना था. उसकी हड़बड़ाहट इस बात के मद्देनज़र तीव्रता से बढ़ रही थी कि शूरवात से ही उसकी मा ने उसके मश्तिश्क और उसके लंड, दोनो पर पूर्ण-रूप से अपना क़ब्ज़ा कर रखा था.
"वो मोम" निकुंज अधर में लटक गया. अगर वह ना में अपना उत्तर देता तो उसके द्वारा पूर्व में कही गयी हर बात झुटि साबित हो जानी थी और अगर हां में अपना जवाब देता तो अपनी मा के समक्ष बेशरम साबित होता "मैने इसलिए ऐसा कहा क्यों कि मुझे पहली बार ब्लोवजोब का एहसास मिला था" बस इतना कह कर वह चुप्पी साध लेता है.
"जानता है निकुंज !! तेरी मा भी हमेशा उस रात को याद करती है" सत्यता स्वीकारते हुए कम्मो ने दुबारा अपने बेटे के लंड को पानी से धोना शुरू किया "मैने कयि बार उन पॅलो को भुलाने का प्रयत्न किया मगर हर बार नाकाम रही. रह-रह कर मेरी आँखों में वही दृश्य दिन-रात घूमता रहता है. निकुंज सच तो यह है !! तेरी मा को तेरे नंगे शरीर से प्यार हो गया है बेटे और वह हमेशा तुझे अपनी आँखों सामने इसी रूप में देखने को तसरती है" उसने रुवान्सि हो कर अपनी सारी का पल्लू अपनी कमर से बाहर खीचा और पानी से भीगे अपने पुत्र के लंड को अपने पल्लू की कीनोर से पोंछने लगती है.
"तो मोम मेरी तरफ आकर्षित हैं" धीरे-धीरे सारी बात निकुंज की समझ में आ गयी. आज क्यों उसकी मा ने उसे नंगा किया, क्यों वह इतने जतन से उसके लंड को धो रही है और क्यों उसकी मा को बिल्कुल भी शरम महसूस नही हो रही जबकि उसका बेटा एक जवान मर्द है ना कि कोई छोटा सा बच्चा.
निकुंज ने अपनी मा के चेहरे पर नज़र डाली जो शुरूवात से उसे उसके जीवन का सबसे मनमोहक, सबसे खूबसूरत चेहरा लगता था. सारी का पल्लू ब्लाउस से हटने के उपरांत उसकी मा की दोनो चूचियों का काफ़ी बड़ा हिस्सा वह बेहद उतावले पन से देखता है. हल्का सा उभरा पेट और उस पेट की शान बढ़ती उसकी गहरी गोल नाभि. घुटने मुड़े होने से सॉफ नज़र आती उसकी गोरी-गोरी पिंदलियाँ और सबसे सुंदर उसकी मा के मांसल व गदराए चूतड़ जो वह पुणे तौर में अपने हाथो के पंजो में भींच कर मेशसूस भी चुका था.
"ले हो गया" कह कर कम्मो अपने बेटे की फ्रेंची धोने लगती है. अपनी सत्यता से निकुंज को रूबरू करवाने के बाद वह उससे आँख नही मिला पा रही थी और जैसे ही निकुंज बाथरूम से बाहर जाता है कम्मो ज़ोर-ज़ोर से हाँपने लगती है. उसकी कामुतेज्जित चूत ने उसकी कछि के साथ उसका पेटिकोट और यहाँ तक कि उसके साड़ी भी भिगो दी थी.
"मैं नाश्ता लगाती हूँ" कम्मो काम से फ़ुर्सत हो कर कमरे में आई तो पाया निकुंज अब तक नंगा था. सिर्फ़ एक नज़र अपने बेटे पर डाल कर वह फॉरन उसके कमरे से बाहर जाने लगती है.
"मोम" कमरा छोड़ने से पहले ही निकुंज अपनी मा को आवाज़ देता है.
"ह्म्म" कम्मो के कदम वहीं रुक जाते हैं मगर पलट कर अपने बेटे की ओर देखने की उसकी हिम्मत नही हो पाती.
"मुझे दर्द हो रहा है मोम" निकुंज का कहना हुआ और सुन कर उसकी मा बिजली की गति से पलट कर खड़ी हो जाती है "क .. कहाँ दर्द हो रहा है निकुंज ?" उसकी मा की घबराहट और ज़ुबान की लड़खड़ाहट ने सॉफ ज़ाहिर किया कि वह अपने पुत्र से कितना प्यार करती है और स्वयं निकुंज भी इस एहसास से वाकिफ़ हो जाता है.
"यहाँ हो रहा है मोम" अपने खड़े लंड की ओर इशारा कर वह बोला.
"क्या ?" कम्मो का मूँह खुला रह गया "कैसा दर्द हो रहा है बेटे ?" वह तेज़ गति से चल कर उसके करीब आ पहुचती है.
"यहाँ बैठो मोम !! बताता हूँ" निकुंज की बात मान कर उसकी मा ने एक पल का इंतज़ार नही किया और बिस्तर के किनारे अपने पाव फर्श पर लटका कर बैठ जाती.
"देखो ना मोम कितना पेन हो रहा है" कम्मो के बिस्तर पर स्थापित होते ही निकुंज बिस्तर से उतर कर खड़ा हो गया.
"सॉफ-सॉफ बता निकुंज !! कहाँ और कितना दर्द हो रहा है ?" पुच्छ कर कम्मो स्वयं अपने हाथो के ज़ोर से अपने बेटे की कमर को पकड़ कर ठीक उसे अपने सामने खड़ा कर लेती है. अब निकुंज का लंड उसकी मा के चेहरे से कुछ ही इंच दूर था.
"यहाँ मोम !! उफ़फ्फ़" निकुंज ने दर्द भरे भाव अपने चेहरे पर लाते हुए अपने फूले सुपाडे पर अपनी उंगली रख कर इशारा किया.
"कैसा दर्द बेटा ?" उत्तेजना-वश कम्मो की साँसे वापस उखडने लगती है. धुलने के उपरांत उसके बेटे का लंड एक-दम फ्रेश और चमकदार हो गया था और उसकी अत्यंत गोरी चमडी पर उभरी नीली नसो के तनाव से वह मा प्रत्यक्ष-रूप से उस विशाल लंड को बेहद फडफडाता और झटके खाता महसूस कर रही थी. हलाकी लंड की अखंड लंबाई और मोटाई से कम्मो पहले से ही परिचित थी मगर जाने क्यों उसे लंड की विकरालता में और भी ज़्यादा इज़ाफ़ा होता नज़र रहा था.
"मोम" उसने अपनी मा को पुकारा और जैसे ही कम्मो उसकी आँखों में देखती है फॉरन निकुंज अपने लंड को पकड़ कर उसका फूला सुपाडा अपनी मा के कोमल गुलाबी होंठो से सटा देता है "अपने होंठ खोलो मोम !! उस दिन आप ने इसे खड़ा करने के लिए चूसा था आज इसे तनाव-मुक्त करने के लिए चूसो" कह कर वह अपनी मा के रेशमी घने बालो को अपने दूसरे हाथ की उंगलियों से सहलाने लगता है.
कम्मो को उसका मनवांछित वरदान मिल गया. स्वयं उसके पुत्र ने उसे विवश किया कि वह उसका लंड चूसे और यही तो वह कब से चाहती थी. चिपचिपा मोटा सुपाडा उसके होंठो से इस कदर चिपक चुका था कि यदि वह इनकार जताने के लिए भी अपना मूँह खोलती तो खुद ब खुद सुपाडा उसके होंठो के अंदर प्रवेश कर जाता.
"उफफफ्फ़ मोम" कम्मो के होंठ खुलते ही निकुंज के मूँह से मस्ती भरी सिसकारी छूट गयी और उसका संपूर्ण सुपाडा बिना किसी रोक-टोक के उसकी मा के गरम मूँह के भीतर चला जाता है. अपने पुत्र की उस मादक सीत्कार की ध्वनि ने जैसे कम्मो के कानो में रस घोल दिया था और वह अपने मूँह के भीतर अपने बेटे के संवेदनशील सुपाडे पर अपनी जिहवा को गोल गोल घुमा कर, उसके सुपाडे पर लगा सारा गाढ़ा रस चाट लेती है.
"उम्म्म" लंड की अत्यधिक मोटाई आड़े ना आए इस प्रयास में वह मा अपने जबड़ो को जितना खोल सकती थी खोलती है और अपने बेटे के लंड का गरम-जोशी से स्वागत करते हुए अपनी पहली ही कोशिश में लगभग आधा लंड अपने छोटे से मूँह के अंदर समाने में सफल हो जाती है.
चुदाई के दौरान नीमा ने अपनी जिन बातों के ज़रिए निकुंज को अनाचार की परिभाषा से अवगत करवाया था, अभी इस वक़्त उन्हे सोच कर निकुंज की उत्तेजना में बेहद तीव्र गति से बढ़ोतरी होती जा रही थी. वह बड़े गौर से अपनी मा की कजरारी आँखों में झाँकते हुए उसे अपना लंड चूस्ते देख रहा था और यह कामुक दृश्य उसके पूरे जिस्म में कपकपि की ल़हेर दौड़ा देता है.
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