School ki zindagi Chapter 2



आज रविवार था तो एम आराम से उठा.. शुभ करीब 9 बजे...


 मैंने फोन देखा उठते ही.. तो मुझे संदेश पढ़ा था.. यश की मां यानी की सीमा आंटी का..


 सीमा आंटी- गुड मॉर्निंग जान


 मेने भी उन्को रिप्लाई करके लिख दिया..


 मैं- गुड मॉर्निंग


 या ताजा हो चला गया..


 इतने में तूरंत ही आंटी का जवाब आया..


 सीमा आंटी- दिन का खाना खाने आज गर जाना..


 मैं- ठीक है..


 फ़िर एम नाहया.. या थोडी पढाई करि.. फ़िर सोचा भाविनी को कॉल कर देता हूँ..


 मैं- हाय भवानी


 भाविनी- हाय.. क्या कर रहा है..


 मैं- कुछ नहीं.. एम तो पुच रहा था की आज शाम को कहीं चले क्या गमने?


 भाविनी- हा थिक ह चलते ह.. शाम को कॉल करती हूं


 मैं- ओके चल बाय


 (कॉल कट)


 फिर एम दिन होने का इंतजार करना लगा...


 या आंटी ने टाइम दिया था हमें टाइम प आंटी के गर पोहचा...


 मेने डोर बेल बजाई.. या आंटी ने गेट खोला..



 वाह... मेरे मु से निकल गया..


 आंटी क्या त्यार हुई थी आज.. पुरी मॉडर्न साड़ी पहनने राखी थी.. लो कट स्लीवलेस ब्लाउज जिसमे उनका क्लीवेज भोट ज्यादा दिख रहा था.. या ऊपर से पारदर्शी साड़ी..

 थोड़ा लाइट मेकअप किया हुआ.. एम तो देखता ही रह गया आंटी को..आंटी सुंदर तो थी ही.. आज गरम भी लग रही थी..


 आंटी- अब देखते ही रहेंगे या अंदर भी आओगे..


 मैं- ऐन.. हा.. आया


 या आंटी पलट के आगे चलने लगी..

 मुझे फिर से झटका लगा.. आंटी का ब्लाउज़ पुरा बैकलेस था.. तो उनकी पूरी नंगी पीठ मेरे सामने थी.. या सारे कसकर बंद राखी थी.. जिसे उनकी गंद का आकार साफ नज़र आ रहा था.. पता नहीं आंटी इतना  त्यार क्यू हुई थी.. क्या ये मेरे लिए था..?  मेंने आंटी से पुछ ही लिया


 मैं- आज तो बोहोत हॉट लग रही हो


 आंटी- थैंक यू.. तुम्हारे लिए ही त्यार हुई हु जान..


 मैं- अच्छा.. थैंक यू.. मुझे ये नज़र दिखने के लिए..


 फ़िर आंटी मुझे और लेगे..


 मैं- आंटी क्या बनाया ज खाने में


 आंटी- तुम्हारे लिए मटर पनीर की सब्जी बनाई ज..


 मैं- चलो खाते ज भोट भुक लग रही ह..


 आंटी- ठिक ज.. तुम बेथो.. अभी लाई..


 मैं- वे बाकी सब कहा ज?


 आंटी- यश या उनके पापा यश की भुआ के गर गए ज.. शाम तक आए..


 मैं- अच्छा.. तब ही आप इतना गर्म बनके गोंद रही हो गर म


 आंटी- या नहीं तो क्या.. उनके सामने तुमसे ऐसी थोड़ी मिलती..


 या आंटी मुस्कान करके गंद मटकाती हुई किचन में चली गई.. खाना लेने..


 कुछ डर में मौसी खाना लेई..हमने साथ खाना खाया.. फ़िर आंटी प्लेट्स रख के आगी..


 मैं- आंटी आइसक्रीम खाने की इच्छा ज..


 आंटी- अरे आइसक्रीम तो राखी ज.. म अभी लती हु


 मैं- ओके..क्या बात ज.. लियाये फिर..


 आंटी फिर आइसक्रीम लेके आई.. एम सोफे प बेथा हुआ था..


 मैं- आंटी अपने कल मुझे वादा किया था की जो एम 1 चिज़ बोलुगा वो आप करोगे


 आंटी- हा मुझे मलूम ज.. कल मेने बोला था.. मगर म कुछ ऐसा नहीं करने वाली..


 मैं- अरे एसा वेसा कुछ नहीं.. बस मेरी एक शार्प ज.. अपनी मेरी गोदी म बेथ के मुझे आइसक्रीम खिलानी होगी...


 आंटी- ये केसी शार्ट हो


 में- अपने कल वादा किया था आप 1 चिज़ करोगी.. तो ये ह वो चिज़..


 आंटी- ठिक ज आओ..


 फिर एम सोफे पी आराम से पर फेल के बेथ गया.. आंटी आई या साइड से मेरे ऊपर भने लगी..


 मेरे-ऐसे नहीं.. मेरी तरह मुकरके बेथो.. या अपने दोनो पर मेरे एक तरफ करके..


 आंटी- पर मेने तो सारे पहनने राखी ज.. इसमे केसे..?


 मैं- तो सारे ऊपर उठा के बेठ जाओ..


 आंटी- ठीक है..


 फ़िर आंटी अपने दोनो पर मेरे साइड म दाल के बेथ गई.. आंटी की गंड पूरी मेरे लुंड को दबा रही थी.. म ये पहले से सोच के आया था।  इस्लिये में लोअर पेहं का आया था.. जिसमे लुंड को ज्यादा तकलीफ ना हो.. या आंटी मेरा लुंड महसूस कर खातिर..


 जेसे हाय आंटी को चुत पी मेरा लुंड फील हुआ.. आंटी के मु से एक आह निकल गई..


 मैं- क्या हुआ आंटी?


 आंटी- अम्म.. कुछ नहीं।  लो आइसक्रीम खाओ जान..


 या आंटी मुझे आइसक्रीम खिलाने लगी..चाची की गांड मेरे जांघों प डबव दाल रही थी.. या आंटी की चुत मेरे लुंड प.. इसे आंटी या म दोनो गरम हो रहे थे..


 आंटी- गरमी हो रही है ना..

 या ये बोल की आंटी ने अपने ब्लाउज से साड़ी का पल्लू हटा दिया..


 अब उनके गोरे बूब्स मुझे बिलकुल मेरी आंखों के सामने नजर आ रहे थे.. एम तो वही देखता रहा..


 मेरा लुंड अब पुरा खड़ा होगा था..


 मैं- एक दूसरी आंटी मुझे थोड़ा एडजस्ट करना हो


 आंटी- क्या..


 मैं- वो मेरा लुंड..


 आंटी- ओह.. अच्छा.. मुझे भी थोड़ा चूभ रहा वो..


 फिर मेने लुंड को हाथ से पक्का.. या आंटी की गंद की दरर के बिच म सेट कर दिया..


 आंटी- हम्म..आम..अब होगया..


 मैं- हा.. अब अच्छे से सेट होगया


 आंटी- लो खाओ..


 आंटी भोट प्यार से मेरी भगवान में मुझे आइसक्रीम खिलाती थी.. एसा प्यार मुझे भाविनी के साथ महसूस नहीं होता था


 आंटी धीरे धीरे गरम भी होने लगी थी.. या धीरे धीरे अपनी गंद या छुट को मेरे लुंड प घी रही थी..


 मेने भी मौका देख के.. आंटी की कमर पक्कड़ ली दोनो हाथो से.. या धीरे से डाबा दी जो आंटी की कमर के साइड का मोटा था.. जो आंटी के लव हैंडल्स द उन्को..


 आंटी- अम्म.. आराम से..राज


 आंटी गरम होगी थी पूरी...

 तो मेने आंटी को पकाड़ के अपने से चिपका लिया.. अब आंटी के सॉफ्ट गोरे बूब्स मेरे चेस्ट में प्रेस हो रहे थे..


 आंटी- आह.. क्या कर रहे हैं राज..


 मैं- बस आइसक्रीम खा रहा हूं तो..


 आंटी- अम्म.. ठिक ज.. मुझे भी अच्छा लग रहा है तुम्हें आइसक्रीम खिलाकर.. मैंने सोचा नहीं था में किसी को ऐसी आइसक्रीम खिलाड़ी... वो भी अपने बेटे के दोस्त को तो बिल्कल भी नहीं सोचा था...


 मैं- सब लाइफ में फर्स्ट बार ही होता एच सीमा..


 आंटी- हम्म.. हा..


 फिर मैंने अपने हाथ पिछे से मौसी की गंद पी रख दीये.. या आंटी की गांड सारे के ऊपर से ही दबने लगा..


 मैं- आपकी गांड तो बोहोत मस्त हु


 आंटी- अम्मी.. बास गांड?


 मेने फिर एक हाथ ऊपर लक्के चाची के स्तन पी रखा..


 आंटी- आह... अम्म।  .ये केसे लगे तुमे?


 मैं- ये तो बहुत मस्त ज मेरी कुटिया..


 आंटी- आह.. तो डबो ना जान में..


 मुझको प्राथमिकी चाची के स्तन दबने लगा..


 आंटी- हा.. एसेही.. बोहोत दर्द..आम्..हा... ओ ज़ोर से.. भोट प्यारे ज ये


 में चल सीमा.. अब मुझे आइसक्रीम अपने होठो प लगा के.. अपने होथो से मुझे आइसक्रीम खिला..


 आंटी ने मेरी बात माने हुए.. आइसक्रीम अपने होठो पी लगी.. या अपने होथो से मेरे होठ मिलाने के लिए आई.. मैंने भी चाची को कास के पकाड़ लिया... एक हाथ गंद पी.. या एक उसकी चिकन गोरी कमर  एम..


 या फिर आंटी मुझे किस करने लगे..


 आंटी- उम्म्म..आह..उम्मम्मममुउआआह्ह्ह्ह..उम्मम


 कभी आंटी मेरे निचले होंठ चुस्ति.. कभी ऊपर वाले होंठ.. मैंने भी चाची के होठ बहुत अच्छे से चुसे.. आइसक्रीम की वजह से बोहोत मिले लग रहे हैं आंटी के होथ... या ये मेरा फला किस था... भाविनी  मुझे किस नहीं करने देती थी.. तो होतो प आंटी के साथ मेरा ये लाइफ का फर्स्ट किस था..


 या ये इतना अच्छा था.. किम इसमे पुरा खो गया.. आंटी को बहुत अच्छा चुंबन करना था था.. बोहोत भावुक चुंबन कर रही थी चाची..


 आंटी या एम करीब 5 मिनट तक किस करते रहे..


 एम बिच एम काकी के बूब्स या आस प्रेस करता रहा...


 फिर हम बिना लेने के लिए कुछ सेकंड रुके.. फिर वापसी से किस करने में खो गए... पता नहीं हम किट्टी डर तक किस करते रहे..


 हम किस एम खोये ही हुए थे.. की आवाज आई


  टिंग टोंग .. टिंग टोंग .. आंटी के घर की डोर बेल बाजी थी ..


 आंटी- कोन अग्या.. अब.. तुम रुको याहि.. म देखता हूं..


 मैं- ठिक ज..


 फ़िर आंटी ने अपनी साड़ी या पल्लू ठिक किया.. या बहार गई देखने..


 आंटी- अरे मीनाक्षी... आओ आओ

 (आंटी मन में- इसे क्या कम अब)


 मीनाक्षी चाची की पड़ौसी थी


 मीनाक्षी- अरे म बोर हो रही थी तो सोचा की थोड़ी देर आपसे गप्पे लादेन आजू..


 आंटी- अरे अच्छा किया.. आओ और..


 आंटी हो या मीनाक्षी अंदर ऐ..


 आंटी- ये यश का दोस्त ज.. राज..हॉस्टल एम रहता ज.. वो खाना इतना अच्छा नहीं मिला.. तो मैने उसे खाने प बुला लिया..


 मीनाक्षी- हाय राजो


 मैं- नमस्ते जी.. चलो आंटी एम चलता हूं..


 आंटी- ठिक ज बेटा.. द्वारा..


 या फिर म वहा से निकला... मुझे मीनाक्षी प इतना गुसा आ रहा था की पुछो मत.. आंटी के साथ बस चुदाई हो ही जाती आज तो वार्न.. ये मीनाक्षी ने सारा मूड खराब कर दिया..


 एम भी बेचारा क्या कर सकता था इस्मे.. हॉस्टल आया.. या थोड़ी देर सो गया क्योंकि शाम को भाविनी के साथ गुमने भी जाना था..




 मीनाक्षी की वजह से पुरा मूड खराब होगा था... मेरा तो जाने का मन भी नहीं था भाविनी के साथ.. आज मेरी किस्मत में छुडाई लिखी ही नहीं थी... तो मैने भवानी के साथ जाना भी कैंसिल किया...  हॉस्टल एम ही रुकने का फैसला किया..


 1 2 गंदे मेरा मूड थोड़ा सही हुआ... मेने फिर म्यूजिक ऑन किया.. या अपना वर्कआउट करना लगा.. 1 गंते मेने वर्कआउट किया.. तब तक 5 बज गए थे।  टू थोडा पार्क मी वॉक करके अजता हु..


 ये सोच के एम टीशर्ट या लोअर पहनने के निकल गया.. पार्क की या...

 10 15 मिनट ह्यू द मुझे पार्क एम गुमटे ह्यू.. जस की आप जनता ज लड़कों की नजर तो हमशा लडकियो या आंटीयो प ही रहती ज.. तो उसी तरह जब एम पार्क एम एंटर हुआ था। तो मुझे एक लड़की दिखी थी  ..


 या मैंने नोटिस किया कि उसके हाथ में बैडमिंटन रैकेट था.. यानी वो बैडमिंटन खेलने आई थी.. मगर उसके साथ कोई नजर तो आ ही नहीं रहा था..


 वो शायद किसी का इंतज़ार कर रही होगी.. मेने 10 मिनट रुको किया.. या तब तक कोई नहीं आया.. तो मैंने सोचा जक्के उससे बल्ला शुरू करू.. पर समझ भी नहीं आ रहा था.. आज दिन भी  खराब गया था.. फिर मैंने सोचा कर ही देता हूं बात.. ज़्यदा से ज्यादा मन कर देगा..और उसकी तरफ बढ़ा गया..



 मैं- क्षमा करें


 लड़की- हा


 मैं- आप बैडमिंटन खेलने के लिए किसी का इंतजार कर रहे हो?


 लड़की- हा.. वो मेरी दोस्त आने वाली थी.. वो आई नहीं अभी तक..


 मैं- अच्छा ठीक है... अगर आपको कोई ऐतराज़ ना हो तो क्या मैं आपके साथ खेल सकता हूं जब तक आपकी दोस्त ना ऐ?


 हमें लड़की ने थोड़ा सोचा.. फिर बोला..


 लड़की- मगर म तुम्हें जनता नहीं हु..


 में-जान ने म क्या ह.. मेरा नाम राज ज.. या एम इस पास वाले हॉस्टल में रहता है.. मैंने अभी नया नया ही शहर में एम स्कूल में दाखिला लिया है.. ज़्यादा दोस्तों को माही ज मेरे...  तो याहा पार्क में गुमने अजता हु कभी कभी..


 लड़की- अरे।  मेने इतनी डिटेल थोड़ी ना पुची... चलो थेके.. मेरा नाम कृतिका ज.. म भी यही पास में रहती हूं


 मैं- ओह.. कृतिका.. अच्छा नाम..


 कृतिका- ty.. चलो खेलते हैं


 मैं- हां.. ठीक है..शुरू करते हैं


 या फिर हम दो खेलने लगे.. कृतिका के नंगे म क्या बताओ.. एकदम तोता लड़की ज.. देखते ही दिल या लुंड खुश हुए ऐसी.. मेरेसे 1 2 साल ही बड़ी लग रही थी... ज्यादा गोरी भी नहीं।  पर सांवली भी नहीं थी .. बिच का रंग था .. ऊंचाई कुछ 5 5 थी .. मतलाब ऊंचाई कम थी थडी .. शरीर पतला था ... उसके स्तन अभी ज्यादा बड़े नहीं लग रहे थे .. छोटे ही थे .. या  गांड भी नॉर्मल साइज.. जेसा की नॉर्मल एवरेज लड़की की होती है..


 कृतिका ने आला वाइट शॉर्ट्स पहनने रखे थे.. जो उसकी घुटनों से थोड़ी ऊपर खतम हो रही थी... या ऊपर पिंक टॉप..मेने नोटिस किया की उसकी गांड बूब्स ज्यादा बड़े नहीं ज.. बूब्स टू टॉप एम से अच्छे से दिख  भी नहीं रहे थे... मगर उसकी गांड.. हाये.. उसकी गंद उसके शॉर्ट्स की वजह से बोहोत मस्त लग रही थी.. बोहोत परफेक्ट शेप में थी उसकी गंद.. हलकी ज्यादा बड़ी नहीं थी.. मगर बिल्कल गोल गोल थी  ..



 खैर हम दो ऐसे ही खेलते रहे।  या बिच बिच म बटे भी करते रहे...उसने बताया की वो 11वीं कक्षा में.. यानी मेरे 1 साल बड़ी ज.. या इसी नॉर्मल बल्ले हुई स्कूल या पढाई की.. कुछ डर खेलने या बट्टे करने के बुरे उसे कहा  ..


 कृतिका- चलो .. अब एम ठक गई .. मेरी दोस्त भी लगता है आज नहीं आएगी ..


 मैं- हा..अब अंधेरा भी होने लगा ज..


 कृतिका- ठीक ज.. चल बाय.. फिर कभी मिलेंगे..


 मैं- ओके.. बाय..


 या फिर एम या कृतिका पार्क से साथ बहार ऐ.. या वो उसके रास्ते या मैं मेरे रास्ते आया..


 हॉस्टल वापस आके मैने खाना खाया.. या फिर थोड़ा दर्द का छोटा मोटा काम निपटाया.. फिर फोन चलाना लगा.. करिब 10 15 बजे मुझे सीमा चाची का संदेश आया..


 सीमा आंटी- हाय.. आज संदेश नहीं किया.. नराज हो क्या?


 मैं- बात मत करो एपी.. ऐसे तो आई लव यू बोलती हो.. या अज़ अधूरा ही रहने दिया जो शुरू किया था..


 सीमा आंटी - अरे वो मीनाक्षी चली थी.. तुम ही बता उसे क्या बोलती..


 मैं- कुछ भी बना देता हूँ


 सीमा आंटी- उसे शक होगा तो.. प्लीज समझो जान

 ..

 मैं- मुझे कुछ नहीं सुन ना.. आपको मेरे प्यार ही नहीं ह..


 सीमा आंटी- प्यार ज.. तुन्ने ही तो मुझे इतना कुछ सिखाया ज.. प्लीज गुसा मत हो.. तुम जो बोलोगे वो म करुगी..


 मैं- तो जो शुरू करो उससे खतम करो..


 सीमा आंटी- जब अगली बार मोका मिलेगा तो पक्का करुगी.. पर अभी के लिए प्लीज मन जाओ..


 मैं- अगली बार नहीं.. जो आज शूरू किया ह.. वो आज ही खतम करना होगा..


 सीमा आंटी- आज केसे.. अब तो रात होगी ज.. अब केसे कर सकते हैं...


 मैं- कुछ नहीं जनता.. मुझे अभी मिलने आओ थोड़ी देर म..


 सीमा आंटी- अभी केसे आ सकती हैं?


 मैं- एक बात बताओ.. अंकल या यश सोग्ये?


 सीमा आंटी- नहीं बस सोने ही वाले ज..


 मैं- तो एक काम करो..उन्को बनाना बना दो की आपको आपकी किसी सहेली की तबियत खराब ज.. अस्पताल जाना होगा.. या चूहा वही रुकनी होगी.. फिर मेरे साथ आओ..


 सीमा आंटी- इस्मे तो जोखिम ज.. माई केसे..?


 मैं- मैटलैब एपी मेरे प्यार ही नहीं करता .. ठीक है


 सीमा आंटी- नहीं प्लीज.. एसा मत बोलो.. तुमने आज मुझे जेसे गॉड एम बिटया.. जस्से मुझसे प्यार किया.. जेसे किस की.. वेसा मुझे फले किसने महसूस नहीं किया.. मुझे बहुत अच्छा लगा.. प्लीज..  म त्यार हु .. एम बनाना बनाके अति हु ..


 मैं- ठिक ज गर से निकलके .. मुझे बहार चोरे प मिलो .. पाहुच के कॉल करना वहा ..


 सीमा आंटी- ठिक ज..


 मैं- ओके बाय


 फ़िर क़रीब 11 30 बजे सीमा आंटी ने मुझे कॉल किया..

 सीमा आंटी- एम अगायी बहार छोरे पी.. इनो बोला की कार लेके चली जाओ.. सेफ रहेगा.. तो कार लेके आई हूं.. आओ तुम भी..

 मैं- ठिक ज.. आया..


 या एम चला गया.. पेडल चोरे की या..


 2 मिनट में मैं बाहर गया था.. आंटी की कार के पास पोहुचा.. आंटी ने मुझे फटाफट और लिया.. तकी कोई देखे ना..


 सीमा आंटी- तुम मुझे मरवाओगे..


 मैं- क्यू आपको ऐसे चूहे को निकलने में मजा नहीं आ रहा क्या


 सीमा आंटी- मजा तो आ रहा है.. मगर दर भी लग रहा है..


 मैं- दार एम ही तो मजा ज..


 सीमा आंटी- हा ऐसे मुझे बोहोत एक्साइटमेंट हो रही ह.. ये सब मेरे लिए नया ज. मुझे तो याकिन नहीं हो रहा है कि एम अपने बेटे के दोस्त से प्यार करने लगी हूं।  से जुठ बोलके ऐ हु..


 मैं- आप बहुत बोल रही हो.. आपका मु बंद करना पड़ेगा..

 सीमा आंटी- वो केसे..


 या आंटी आगर कुछ बोल पति उससे पहले में आंटी को अपने पास खिचा..  आंटी भी मेरा साथ देने लगी.. वो भी शुद्ध जोश के साथ मेरे होठ चुस रही थी..


 हमने करीब 30 सेकेंड किस किया होगा.. की आंटी ने बोला

 सीमा आंटी- याह नहीं.. कही दूर चलते ज..


 मैं- ठिक एच चलो..


 या फिर आंटी ने कार स्टार्ट करी.. या हम निकले पाए... लॉन्ग ड्राइव पी.. वो भी मैं अपने दोस्त की मॉम के साथ... अब आगे पूरी रात बाकी ज.. शुरू ही इतनी अच्छी हुई तो अभी तो  पुरी चूहा बकी एच.  देखते ह क्या होता ज..



 आंटी कार चला रही थी.. या म आंटी के साइड एम बेथा था.. मुझे कार चलाना बहुत नहीं थी अभी।  इस्लिये आंटी ही चला रही थी... मैंने सोचा कुछ खाने के लिए पाइन का समान ले ले ज.. क्युकी पूरी चूहा रुकेगा तो भुक तो लगेगी हाय


 मैं- सीमा .. कुछ खाने का ले ले ले ह


 सीमा आंटी- ठीक ज.. चलो...


 फ़िर हमने दुकान से खाने पाइन का समान ख़रीदा.. या वापस आये.. कार में..


 सीमा आंटी- याहा अगे शहर के बहार एक खाली सुनसान रोड ज.. वहा कोई और जाती नहीं ज.. वहा लेलेती हु कार..


 मैं- हा मुझे तो ज्यादा पता नहीं ज आपको जहां ठीक लगे लेलो..


 सीमा आंटी- ठीक है.. चलो.. वही चलते हैं..


 हमने करीब 1 गंते ड्राइव किया.. या वहा पोहच गए...रस्ते में हमें भी प्यार की.. आंटी को मुझसे मनो प्यार ही हो गया था.. मुझे तो बस चाची को अपनी कुटिया बनाना था.. मुझसे उनसे कोई प्यार  नहीं था.. मगर उनके लिए तो उनकी जवानी वापस आई थी.. या प्यार उनके पति से न मिलने के करन.. वो मुझसे प्यार करने लगी..


 वो बिच बिच एम बताती की एम उन्हे बोहोत पसंद हु .. या इदर उडर की बट्टे...


 हम चाहते तो किसी होटल में भी रुक सकते थे.. मगर सुनसान रोड एम कार के और मजा करने का अपना अलग ही मजा ज..


 खैर हम वही पोछे.. या आंटी ने कार साइड एम लगा दी.. या लाइट्स बंद कर दी..


 सीमा आंटी- राज.. जो आज दिन में अधुरा रह गया था.. वो पूरा कर दो..


 मैं- आओ फिर से...


 सीमा आंटी- हम्म


 फ़िर आंटी ड्राइवर सीट से उठी.. या मेरी सीट पी मेरे ऊपर अक्के मेरी गॉड एम बेथ गई..


 मैं- दिन म बेठी थी वसे बेथो ना


 सीमा आंटी- हा.. मगर दिन में मैं अच्छे से महसूस नहीं कर पा रही.. मुझे महसूस करना अभी भी.. कृपया कपड़े उतारो ना..


 मैं- ठीक ज.. तुम भी उतर दो..


 सीमा आंटी- हा जान


 मैंने पहले अपने कपड़े उतारे.. या देखा आंटी ने पहले अपने सारे उतरी.. या फिर पेटीकोट.. पैंटी उन्होन अभी भी पहनी थी..


 या नेचे बस पैंटी एम.. मेरे लुंड के ऊपर अक्के बेथ गई.. अंधेरा ज़्यदा था तो ज़िदा कुछ दिख तो नहीं रहा था.. मगर आंटी की खुशबू या उनकी बॉडी जो मेरी बॉडी से रागद खा रही थी.. उसे लुंड खड़ा हो  रहा था.. मेने आंटी को ब्लाउज उतरने के लिए भी बोला.. तो सीमा आंटी ने ब्लाउज भी उतर दिया...


 अब म पुरा नंगा बेथा था.. या सीमा आंटी.. उनी मेरे दोस्त की माँ.. सिर्फ ब्रा या पैंटी में मेरे लुंड के ऊपर.. मेरी भगवान में बेटी थी...


 मैं- बल भी खोलो ना.. खुल्ले बल में अच्छी लगती हो..


 सीमा आंटी- ओके जान.. जेसा तुम बोलो..


 फ़िर आंटी ने अपने बाल भी खोल दिए.. अब आंटी अपनी गांड मेरे लुंड प गिस्ने लगी.. मैने भी चाची की कमर पकड राखी थी.. या मैं सीमा आंटी की गंद से अपने लुंड की मलिश करवा रहा था...


 मैं- इसमे कुछ कमी ज..


 सीमा आंटी- क्या कमी ज?


 मैं- दिन में आइसक्रीम थी.. मगर अभी तो आइसक्रीम नहीं ज..


 सीमा आंटी- हा.. वो तो नहीं ह.. अब क्या करें..


 मैं- कोई बात नहीं.. वो अब फिर कभी करेंगे...


 सीमा आंटी- ओके जान... तुम्हारा लुंड सेट नहीं हो रहा.. रुको एम करता हूं..


 या आंटी थोड़ा ऊपर उठी.. या मेरा लुंड हाथ म पक्का..


 सीमा आंटी- ये तो बहुत मुश्किल हो गया ज राज..


 मैं- हा उसे तुम्हारी गंद की नर्मि चाहिए.. इस्से गंद के बिच म adjuat karo..


 सीमा आंटी- अम्म.. हा।  लो..


 या सीमा आंटी ने मेरा लुंड अपनी गंद की दरर में सेट किया.. या फिर वापसी मेरी भगवान एम बेथ गई...


 लुंड चाची की चुत से भी रागद खा रहा था अब हलकी पैंटी के ऊपर से.. मगर इस सीमा चाची गरम होगी थी।


 सीमा आंटी फिर मेरे पास आई.. या मुझे किस करने लगी.. मेरे गाल पी..


 मेने ही पहले उनके गालो को चुमा.. फिर उनके बगीचा पी.. एम बगीचा पी चुमता तो सीमा चाची की बहन निकल जाती..


 सीमा आंटी- आह.. राज.. गार्डन पी किस करते हो तो बोहोत अच्छा लगता है.. छुट म एक खुजली सी हो जाती ज..


 मैं- तु तुम्हारा संवेदनशील क्षेत्र


 सीमा आंटी- अम्म.. हा.. एसा ही स्मझ लो.. हां.. आह


 फ़िर कुछ डर गार्डन पी किस।  करने के बुरे .. एम गया सीमा चाची के होथो पर ..


 या एक किस की उनके होतो पी..उन्हो भी एक चुंबन दी वापसी या मुस्कान की.. मैंने फिर उन्हे अपनी बहो में जकाद लिया...



 सीमा आंटी- अम्म्मम्म.. मुआआह्ह.. अम्म्म... पुच्छ...आह.. अम्म्मम्म मुआजाह्ह..


 सीमा आंटी मुझे किस करे जा रही थी..उनके किस से पता चल रहा था कि वो मुझसे कितना प्यार करता है.. भोट जोशीले किस कर रही थी... जेसे कोई यंग लड़की कार्ति ज... सीमा चाची से जवान लड़की को  भी पिचे चोर दे किस करने म..


 मेने भी चाची को बहो म भर रखा था..उनका नंगा पेट या मेरा नंगा पेट आपस में टच हो रहे थे..उनकी गंद या चुत मेरे लुंड की मलिश कर रही थी सीमा चाची अपनी गांड मेरे लुंड पी जिस राही थी..  उनके बड़े बड़े बूब्स जो ब्रा में थे.. वो मेरी छाती में दब रहे थे.. या आंटी मेरे होठ चुस रही थी...क्या सीन ज.. आप कल्पना कर सकते हैं..


 में अपने हाथ से सीमा आंटी की कमर सेहला रहा था.. या बिच बिच म गंद भी दबा रहा था..


 हमें पता नहीं कितने मिनट तक किस की.. सीमा आंटी या मैं सास लेने के लिए रुकते या फिर से पगलो की तरह एक दसरे को किस करने लगते हैं..


 Me- सीमा मुझे अपने बूब्स तो दीखा.. तू इतनी गोरी ज तो तेरे बूब्स कितने गोररे होगे..


 सीमा आंटी- आह .. हम्म .. जान .. तुम ही खोलो मेरी ब्रा .. अपने हाथो से ..


 मेने फिर चाची की ब्रा का हुक खोला.. या चाची की ब्रा पिच वाली सीट पे फेक दी..अब सीमा चाची के स्तन नांगे मेरे सामने थे..


 अंधेरा बोबोट था..मगर फिर भी चांद की हल्की रोशनी में मुझे सीमा चाची के स्तन नज़र आ रहे थे.. उनके स्तन इतने गोररे थे.. की चमक रहे थे चांद की रोशनी माई...


 मैं- क्या बूबे ज तेरे सीमा..


 सीमा आंटी- चुसो ना में.. बोहोत तड़पते ज मुझे ये राज..


 मेने फले तो सीमा आंटी के बूब्स हाथो म लिए.. या दबने लगा..


 सीमा आंटी- आह... इसी डबाओ.. मास्लो इनहे..आज तारस मत खाना इंपे


 मैं- हा.. साली.. आज इनको दबा दबा के लाल कर दूंगा..


 सीमा आंटी- कर दो जान.. म त्यार हूं.. आह.. जान..आराम से..


 में सीमा आंटी के बूब्स दोनो हाथो एम लेके दबने लगा.. भाविनी के बूब्स सॉफ्ट थे.. मगर आंटी के तो या ज़िदा सॉफ्ट थे.. बिलकुल रुई जेसे लग रहे थे... इतने गोररे बड़े बूब्स.. जो मैने पहली दिन सारी  के ऊपर से देखे थे.. आज वो मेरे सामने होंगे.. या मैं उन दबा रहा हूं.. मुझे तो याकिन नहीं हो रहा था.. मेरी किस्मत वकाई कफी अच्‍छी ज इस शहर में...


 एम प्योर जोश से सीमा काकी के बूब्स मसाला रहा था...


 सीमा आंटी- हा जान.. बोहोत अच्छा लग रहा है.. यही डबाओ..मैंने कभी नहीं सोचा था.. की मेरे बेटे का दोस्त मेरे नंगे बूब्स दबेगा...


 मैं- तेरे बेटे का दोस्त नहीं हूं अब.. तेरा यार हूं या तू मेरी कुटिया ह साली..


 सीमा आंटी- हा जान... बना लो मुझे अपनी कुटिया राज


 या फिर कभी फिर से मेरे होठ चुनने लगी.. हम किस रहे थे या मैं मौसी के स्तन दबा रहा था.. कभी स्तन दबाता.. कभी निप्पल को पक्का का खिचता.. तो चाची की आह निकल जाती..


 फिर मेने चुम्बन तोड़ा.. या मात्र होती चाची के स्तन पे ले गया..या आंटी पी डोनो निप्पल पी पहले एक किस किया..


 सीमा आंटी- आह .. कितना आराम मिल रहा ज.. बडवाने के बैड किस.. वाह.. बाकी करो जान..


 मैं- हा..


 या मैं सीमा आंटी के बूब्स फिर चुना लगा.. कभी बाएं वहा तो कभी राइट वाला.. आंटी के बूब्स बडे थे.. मेरे मु में प्योर नहीं आ रहे थे.. तो भी मैं जिता हो सकता था बूब मु में लेटा या चुस्ता  .. सीमा आंटी को बहुत मज़ा आ रहा था..वो अब या तेज़ से अपनी छुट मेरे लुंड प जिस रही थी...


 म अब एक हाथ से उनका एक बूब दबता या दसरा बूब मु में लेके चुस्ता .. एम तो मन्नो जन्नत एम था .. मेरे दोस्त की माँ मेरे अपने स्तन चुस्वा रही थी ..मुजे तो ये सोच के या ज्यादा मजा आ रहा था।  ..


 सीमा आंटी अब तेजी से छुट मेरे लुंड प जिस रही थी.. या कुछ सेकंड या तेजी से जिस के बाद चाची रुक गई..उनकी चुत ने 2 3 झटके मारी..


 सीमा आंटी- राज..आह..म गई..आह..जान..हा..आम.  .आह्ह्ह्ह्ह.. मैं अइइआइ.. राज.. आह्ह्ह्ह..


 आंटी ने सास को कंट्रोल किया या फिर बोला..


 सीमा आंटी- राज.. ये तो मुझे छोड के भी झड़ नहीं पाए.. पर तुमने तो बस अपने लुंड की रागद से..  पता नहीं..


 मैं- तो अभी छोड देता हूं तुझे कुटिया...ले मेरा कुंड तेरी चुत मुझे..


 सीमा आंटी- नहीं राज.. आज छुडाई नहीं..


 मैं- क्यू क्या हुआ.. ये क्या बोल रही ह?


 सीमा आंटी- जान म चाहता हूं की जब हम पहली खराब चुदाई करे तो हम आराम से बेडरूम में करे.. उसे स्पेशल बनाना चाहती हूं.. म पुरा महसूस करना चाहती हूं..  पेगा.. या तुम्हारी भी वर्जिनिटी टूटेगी.. तुम पहली बार किसी की चुत में लुंड डालोगे.. तो तुम्हारे लिए भी यादगर होना चाहिए ना...


 मैं- हा.. बात तो सही कह रही है.. चल ठीक है.. मगर अभी के लिए तू तो शांत होगी.. मेरा क्या होगा


 सीमा आंटी- राज.. तुम्हारी कुटिया के होते हुए तुम टेंशन मत लो.. तुम्हे पुरा मजा दूगी.. चली पिचे वाली सीट पर..


 मैं- ठिक एच चलो...


 या फिर हम पीछे वाली सीट प अगे


 सीमा आंटी- आराम से पर फेला के बेथ जाओ..


 मैं- थिक एच।


 फिर एम आराम से बेथ गया.. या आंटी ऐ.. या अपने गुटनो पी सीट के आला बेथी..


 सीमा आंटी- वाह..


 सीमा आंटी ने बार दर्द से मेरे लुंड को देखा था.. जो उनके चेहरे के ठीक सामने था..


 मैं- पसंद आया मेरी कुटिया..


 सीमा आंटी- हा जान.. क्या लुंड के लिए तो तुम्हारी कुटिया हमेश बन ने के लिए त्यार हूं..


 फिर सीमा आंटी ने मेरा लुंड अपने हाथो म पक्का या हिलाया..


 मैं- आह.. मज़ा आ रहा ज कुटिया..हिला साली..


 सीमा आंटी- अभी तो में कुछ करा ही नहीं ह.. अभी देखते जाओ..


 इतना बोलके आंटी ने मेरे कुंड की चमकी आला खिची।  ओड लुंड के पिंक टोपे पी एक किस किया...


 मैं- आह.. साली कुटिया.. क्या कर रही हूं.. आह.. बोहोत मजा आ रहा है...


 सीमा आंटी फिर मेरे लुंड को या किस करने लगी ऊपर से आला.. या हर किस के बुरे वो मुझे आई लव यू बोलती..

 मुझे तो बहुत मजा आ रहा था...


 मैं- सच में प्यार करता हूं मुझसे..


 सीमा आंटी किस करते हुए बोल रही थी..


 सीमा आंटी- बोहोत ज़िदा..मुआआह.. आई लव यू.. मुआह... बोहोत प्यार करता हूं तुमसे.. मुआआह..


 में मन ही मन बोहोत खुश हो रहा था..


 मैं- या दोस्त.. चाट मेरा लुंड साली कुटिया..


 सीमा आंटी- अम्म.. हां जान..सो टेस्टी...


 फिर सीमा आंटी मेरा लुंड चटने लगी... ऊपर से आला तक चैट ती.. फिर टोपे पी किस कार्ति या आई लव यू बोलती...


 मैं- आह सीमा कुटिया.. क्या चाट ती ह.. ऐसे ही चैट..


 सीमा आंटी ने चैट के मेरा लुंड पुरा गिला कर दिया था..


 सीमा आंटी- देखो जान.. मेरे चैटे से तुम्हारा लुंड गिला होगा ज.. या कितना चमक रहा ज..


 मैं- हा साली... मस्त चैट ती ह तू लुंड..


 सीमा आंटी फिर लुंड हिलाने लगी.. या साथ साथ चैटें या चुस्मे भी लगी.. मगर अभी तक मु में नहीं लिया था उन्होन मेरा लुंड.. बस चैट रही थी या किस कर रही थी..


 मैं- हा .. इसी चैट .. हिला इसे कुटिया .. अपने बूबो के बिच डबा ..


 सीमा आंटी ने मेरी बात माने हुए.. मेरा लुंड पकाड़ के अपने स्तन के बिच बड़ा।  या अपने बूब्स से मेरे लुंड की मुठ मारने लगी..


 सच बताओ तो इतना मजा आ रहा था..


 मैं- आह.. तेरे नारम गोर्रे स्तन के बिच एम मेरा लुंड दब रहा ज.. कितना मजा आ रहा है.. साली..


 सीमा आंटी- हा.. मेरी चुत ना सही.. आज मेरे बूब्स ही छोड हो जान..


 या तेज़ से सीमा चाची अपने स्तन से मेरे लुंड की मुठ मारने लगी..


 ये चलता रहा.. या कुछ डर बुरा मेरा होने वाला था..


 मैं- सीमा.. मुझे बूब्स प नहीं झड़ना.. म चाहता हूं तू अपनी गंद मेरे लुंड प घीस का मेरा पानी निकले..


 सीमा आंटी- ओके जान..जेसा तुम बोलो..


 फ़िर सीमा आंटी उठी.. या फिर से मेरी गॉड एम अक्के बेठ गई.. या मेरे लुंड पे अपनी गंद गिस्ने लगी..


 सीमा आंटी अपनी गांड की दर में अपना लुंड फासा का मेरा लुंड मसाला रही थी .. म भी उनकी गंद पकड के उन्हे अगे पिचे कर रहा था ... या मेरा ऐसा करने से कुछ डर एम चुत गया ...  की गंद पी लग गया.. आंटी ने फिर अपने पेटीकोट से मेरा मुथ अपने गंद से साफ किया.. या जो मुथ मेरे लुंड ओ लगा था.. उसे वापस आला बेथ के चैटने लगी..  .. या वो मेरा सारा मुथ चैट गई..


 मैं- केसा लगा मेरा मुठो


 सीमा आंटी- बोहोत टेस्टी... इसके लिए शुक्रिया..


 फ़िर सीमा आंटी या माई पिचे वाली सीट प बेथे बेथे ही आपस एम बोहोत बटे करने लगे.. वो मेरे कांधे प सर रख के मुझसे बहुत डर तक बात करती रही.. बिच बिच हम किस भी करते हैं.. या फिर बटे करने लगे  .. ऐसे ही शुभ के 6 बज गए.. हमने फिर निकले का फैसला किया...


 मैं- 6 बज गए ज सीमा.. चलो चलते हैं...अभी जाने म भी वापसी 1 गंता लगेगा..


 सीमा आंटी- हा सही बोल रहे हो तुम.. चलो चलते हैं..


 फिर हम निकले गए अपने गर की या..


 आंटी ने मुझे छोरे पी ही ड्रॉप किया.. या फिर निकल गई अपने गर की या.. एम भी पेडल पेडल अपने हॉस्टल पे अगया..


 पुरी चूहे जगने की वजह से मुझे बोहोत निंद आ रही थी.. तो आज स्कूल जाने का तो सवाल ही नहीं उठता था.. इसलिये में अपने रूम पोहचते ही सोने चला गया..


 मेरी निंद करीब दोहेर 1 बजे खुली.. मैं नाहया ब्रश किया.. खाना खाया.. या इसी छोटे मोटे काम की..


 मेने फोन देखा तो उसमे कुछ मिस कॉल पडे थे.. मेने चेक करा तो कुशल भवानी या सीमा आंटी के कॉल पडे थे...


 मेने भाविनी को कॉल किया


 भाविनी- कहा ह.. अज स्कूल क्यों नहीं आया..?


 मैं- अरे चूहे को सोया नहीं था तो सबह ही नंद पूरी करी.. अभी 1 बजे ही उठा था..


 भाविनी- क्यू चूहे को नंद पूरी क्यों नहीं हुई.. पूरी चूहा पोर्न देखी क्या?  हाहाहा..


 (मेने सोचा की इसे बता दू.. की पोर्न देखने की अब ज़रुरत नहीं ह मुझे.. मेरी कुटिया सीमा चाची मिल गई ज.. जो मेरे प्यार में है.. पर मेने ये बात बतानी ठीक नहीं समझी)


 मैं- (जुठ बोले हुए) हा यरर.. पोर्न देख के ही कम चलन पद रहा ज.. तू तो सेक्स कार्ति नहीं.. ना ही किस करती ज.. ना लुंड मु में लेटी ज


 भाविनी- वो मैं अपने बॉयफ्रेंड के लिए बचा के रखना चाहता हूं.. वो एक बार होगा.. फिर तू करलेना.. मुझे कोई दीकत नहीं ह...


 मैं - उसमे तो बोहोत टाइम ज... पता नहीं कब तेरा बॉयफ्रेंड बनेगा या कब तू मुझसे चुदेगी..


 भाविनी- जल्दी ही बनेगा.. तू टेंशन मत ले..


 मैं- ठिक हो


 (मैं मन में- मुझे क्या टेंशन.. मेरी जरूरी पूरी करने के लिए तो मेरी सेमा आंटी ज हाय)


 भाविनी- ठिक ह चल रखती हूं... कल तो आएगा ना स्कूल


 मैं- हा कल आउगा.. कल मिलते हैं...


 कॉल कट..


 मेने तो उम्मेद चोर दी थी की पता नहीं कब भाविनी का बॉयफ्रेंड बनेगा या कब में उससे छोड पाउगा..


 खैर मेने फिर कुशल को कॉल किया.. उससे भी थोड़ी देर इधर उधर की बट्टे की..


 फ़िर बत्त खतम करके मैं बेथ गया.. या सोचा की थोड़ी एक्सरसाइज कर देता हूं.. क्यूकी एम रोज़ 1 गंता एक्सरसाइज करता हूं बॉडी मेंटेन करने के लिए..


 तो मैने फ़िर एक्सरसाइज की.. या बिच माई आंटी का कॉल आया तो मेने उठा नहीं..


 एक्सरसाइज जब खतम हुई तो मैंने वापसी सीमा आंटी को कॉल किया..


 मैं- नमस्कार


 सीमा आंटी- कहा बिजी द.. कॉल क्यू नहीं उठा:


 मैं- एक्सरसाइज कर रहा था


 सीमा आंटी- ठिक ज.. एक्सरसाइज करके किसको पताोगे... म हू तो सही तुम्हारे लिए... तुम्हारी पर्सनल कुटिया...


 मैं- तू तो ज ही मेरी कुटिया.. पर एम तो बस खुद को फिट रखने के लिए करता हूं.. तक तुझे भी मजा दे पाउ


 सीमा आंटी- अभी असली मजा दिया कहा ह तुमने जान..


 मैं- वो भी जल्दी ही मिलेगा..


 सीमा आंटी- हा जान.. मुझे इंतजार रहेगा उसका.. स्पेशल रहेगा मेरे लिए वो


 मैं- मेरे लिए भी पहली बार होगा.. होना ही चाहिए... खास करने के लिए...


 फ़िर हमने थोड़ी देर या बल्ले करी इसी हाय .. या फ़िर कॉल कट कर दिया ..


 अब शाम का टाइम हो गया था.. तो म बहार चला गया... मैने सोचा की पार्क में चला जाता हूं.. क्या पता भी कृतिका मिल जाए.. यही सोचते हुए निकल गया पार्क की तरफ...


 पार्क एम पोहोच के मुझे बहुत लड़की या भाभिया दिखी... मगर कृतिका नजर नहीं आ रही थी.. करिब अड़े गंते एम कृतिका का इंतजार करता रहा.. मगर वो नहीं आई.. मैने वापस हॉस्टल जाने का सोचा.. की तबी मुझे..  कृतिका सामने से बहुत हुई दिखी दी...


 मेरी नज़र कृतिका पे पड़ी .. या उसे भी मुझे देखा .. हमारा आँख से संपर्क हुआ .. या मैंने उससे हाथ हिला के हैलो बोला .. उसे भी साथ में हाथ हिलाया .. या वो मेरे पास आया .. आज उसके साथ एक या  लड़की भी आई थी..


 मैं- हाय कृतिका.. केसी हो


 कृतिका- म मस्त हु.. तू बटा


 मैं- एम भी अच्छा।


 कृतिका- लो मेरी फ्रेंड से मिलो.. यही ह वो जो कल नहीं आ पाई थी...


 मैं-ही.. मेरा नाम राज ज.


 कृतिका की दोस्त- हाय।  मेरा नाम मानसी है..आपसे मिलकर अच्छा लगा।


 कृतिका की दोस्त का नाम मानसी ज.. या मानसी के नंगे म क्या बताओ.. वो कृतिका जैसी ही लगती ह...उसका फिगर कृतिका जैसा ही ज.. बस वो कृतिका से थोड़ी लंबी ज..


 मानसी ने नीला रंग का निचला या ऊपर वही नीला रंग का शीर्ष पर रखा था... मानसी की गंद कृतिका जीती ही थी.. पर कृतिका जैसी ही शेप में थी.. दोनो बहन लगती थी आपस में देखने से..


 कृतिका- तू भी खेलेगा हमारे साथ?


 मैं- नहीं.. अभी तुम दो खेल लो.. मैं जब तक बेथ जाता हूं.. तुम्हें देख लूगा


 कृतिका- हम देख लोगे मतलाब?


 मैं- मतलाब तुम्हारा खेल देख लूगा..सा बोल रहा था


 मानसी- हाहा.. ठीक है.. चलो


 फ़िर एम साइड एम अक्के बेथ गया.. या उन्हे देखने लगा...म कृतिका के साइड बेथा हुआ था आला ज़मीन पर.. मेने ऐसा जान बुच की किया था तकी कृतिका की गंद देख सकु... कृतिका आज भी वही कल वाली  सफेद शॉर्ट्स पहनने के आई थी जिसमे उसकी गंद का आकार बोहोत मस्त लग रहा था।


 कल तो म कृतिका के साथ खेल रहा था तो मैंने इतना नोटिस नहीं किया। मगर आज में कृतिका या मानसी का फिगर अच्छे से निहार रहा था।  k बूब्स कृतिका से थोड़े ज्यादा बड़े लग रहे थे..


 आज मुझे मजा या भी ज्यादा आ रहा था.. क्यूकी बैडमिंटन खेलने की वजह से जिस तरह से उन दोनो ने रैकेट पक्का हुआ था.. उनका इस्तेमाल करने के लिए ऊपर खिच रहा था.. जिस तरह उनकी हल्की सी कमर दिख रही थी।  जब वो स्मैश मार्ने के लिए ऊपर कुड़ती तो उनकी थोड़ी या ज्यादा कमर नजर अति.. या एक दो बार मुझे उनकी कभी भी दिख गई..या कुदने की वजह से जब उनके स्तन हिलते..उन्हे देख के तो मेरा लुंड खड़ा हो रहा  था ..


 म उन्हे थोड़ी देर देखता रहा.. तो मेरा लुंड खड़ा होने लगा.. मुझे लगा अभी ये मेरा खड़ा लुंड देख लेगी तो बात बड़ी जाएगी...


 इतने में मेरे फोन पी सीमा चाची का कॉल आया


 मेने कॉल पिच किया


 सीमा आंटी- कहा हो राजो


 मैं- पार्क में हूं बोलो क्या हुआ..


 सीमा आंटी- मेरे गर आओ .. 1 गंते के लिए गर खली ज.. यश अपने दोस्त के गर गया ज..


 मैं- अभी आया


 कॉल कट


 मैं- कृतिका मानसी मुझे कुछ कम आ गया ज.. तो मुझे अभी निकलेगा.. तुम दो जारी करो..


 कृतिका- ओके बाय


 मानसी- हा बाय..


 उन दो को देखने एम मजा आ रहा था या जाने का मन नहीं हो रहा था.. मगर मुझे तो उससे भी ज्यादा अच्छा नजरा... सीमा आंटी के गर देखने को मिलेगा... तो मैं चल दिया सीमा चाची के गर की या।  .


  सीमा आंटी के बुलाने के मुताबिक में उनके गर पोहचा..या मेने दरवाजे की घंटी बजाई..


  सीमा आंटी ने गेट खोला या मुझे और लिया..


  सीमा आंटी ने सारी पहनने राखी थी जैसी रोज पहचान ज..या बाल खुल्ले रख रखी थी


  मैं- क्या हुआ.. इतना क्या जल्दी ज मिलने की.. 1 हाय गंटा तो ज अभी.. कभी पूरा दिन फ्री होता तब मिल ले..


  सीमा आंटी- साल आपको देखने का मन था जान


  मैं- अच्छा.. अभी तो पूरी चूहे तुम्हारे साथ बिते थे


  सीमा आंटी- कल वाली चूहे की वजह से ही तो तुम्हारे या करीब आ गई हु जान


  मैं- अच्छा.. अब बोलती ही रहेगी क्या..


  या मैंने सीमा आंटी को अपने पास खिच लिया या हम किस करने लगे.. मैं अपने दो हाथो से उसे गंद डाबा रहा था..या सीमा आंटी मेरे होठ चुस रही थी


  मैं- क्या मस्त गंद ज तेरी कुटिया..


  या मेने सीमा आंटी की गंड प छत्ते लगा दीये.. चटक्कक.. चटक्कक..


  आंटी हर छत्ते के खराब आह कार्ति.. मेरे मरने की वजह से उनकी गंद मस्त हिल रही थी...


  सीमा आंटी- आह जान तुम्हें इतनी पसंद ज क्या मेरी गंद... अम्म्म


  मेने एक या छत्ता लगाया सीमा चाची की गंड पु

  चाटाक्क्को


  मैं- हा बोहोत पसंद ज तेरी गंद तो मुझे.. साली कुटिया


  सीमा आंटी- हा.. मेरी छुट प भी छट्टा मारो ना.. मगर हाथ से नहीं अपने लुंड से


  मैं- कपडे उतर फिरी.. समय नहीं हो


  सीमा आंटी या मेने बिना डेर करे फटाफट कपड़े उतरे.. या नंगे बिस्तर प अगे..


  मैं- बोल छोड दू तुझे आज कुटिया.. फड़ तू तेरी चुत


  सीमा आंटी- मन तो बोहोत हो रहा ह की तुम्हारा बड़ा लुंड लेलु आज अपनी छुट म.. मगर आज समय नहीं ज..


  मैं- ठीक ज.. अभी के लिए तो ऊपर से ही करवा ले..चल कुटिया बन जा.. डॉगी स्टाइल में आजा..


  या सीमा आंटी कुटिया बन गई.. या यू कहे घोड़ी बन गई... या उसके एसा करने से उसे चुत पूरी नज़र आ रही थी.. या गंद भी पूरी उभार की या नज़र आ रही थी..


  सीमा आंटी यानी मेरे दोस्त दी माँ पूरी नंगी थी मेरे सामने घोड़ी बनी हुई।


  सीमा आंटी- क्या हुआ.. देखते ही रहेंगे क्या?  मारो न चैट मेरी गंद पी.. या मेरी चुत पी


  मैं- पहले अपनी गंद हिला के तो बता सल्ली..


  सीमा आंटी मेरी बात माने हुए अपनी गंद हिलाने लगी.. कभी इशारा कभी उधार.. कभी ऊपर कभी आला.. उनकी मातकती हुई गंद देख कर मुझसे सबर नहीं हुआ..  चाटक्क...


  सीमा आंटी- आह जान.. मारो.. या तेज़


  एम सीमा आंटी की गंद पी थप्पड़ मार्ता.. स्पैंक कर्ता.. टू आंटी की गंद थोफी डेर हिलती.. फिर वापसी वेसी होती है.. या मेरे मार्ने की वजह से मौसी की गंद लाल होगी थी..


  मैं- अपनी गंद को फेल सल्ली.. तेरी चुत अच्छे से देखनी हो


  इतना कहने की डर थी की मौसी ने अपने दोनो हाथ पिच अपनी गंद पी लेके.. गंड को फेलाया.. बिच में एक भी बल नहीं था.. आंटी गोरी थी बोहोत.. इसलिये उनकी चुत भी गुलाबी थी.. या उसके ऊपर उनके  गंड का छेड.. उफ्फ.. क्या सीन था..


  मेने फिर अपना लुंड हाथ म पक्का.. या सीमा चाची की छुट प लक्के टच किया


  मेरे या आंटी दोनो के मु से एक सिस्की निकल गई.. या हम दोनो के शारिर एम मानो करंट का लग गया..


  सीमा आंटी- आह.. जान... अम्म्म... सिर्फ टच करने से ही इतना मजा आ रहा है.. तो जब तुम मेरी चुदाई करोगे तब कितना मजा आएगा... आहा... जान


  मैं अब लुंड हाथ म पकाड़ की सीमा आंटी की चुत प मार रहा था.. जिस छत चैट चैट की आवाज आ रही थी.. सीमा आंटी की चुत तो पानी चोर रही थी...


  सीमा आंटी- हा राज... अम्म।  इसी मारो अपना बड़ा लुंड मेरी चुत पी.. आह।  जान आआभ... या ज़ोर से


  मैंने सीमा आंटी के बाल पके लिए.. या लुंड को बिना चुत के अंदर डाले.. बहार से ही लुंड को उनकी चुत प गिस्ने लगा.. या शॉट्स मार्ने लगा..


  सीमा आंटी- राज... आह.. एसा लग रहा ह तुम सच में छोड़ रहे हो..


  मैं- हा सल्ली... जब लुंड और जाएगा तो सोच कितना मजा आएगा...


  सीमा आंटी- हा जान.. बाल खिचो मेरे.. कुटिया हूं न म आपकी.. मारो गंद पी थप्पड़.. आह्ह्ह... जान.. आह्ह्ह्ह.. मारो.. आह... जान..


  मैं- ले सल्ली कुटिया.. ले... या ले...


  या मैं यही सीमा चाची की गंद पी लुंड जिस्ता रहा सीमा चाची के बाल खिचते हुए.. या कुछ डर खराब हम दो झड़ गए...


  सीमा आंटी- जान.. तुम ने जादू सा कर दिया ज मेरे ऊपर.. मुझे इतना मजा तो कभी चुदाई में भी नहीं आया.. आई लव यू जान


  मैं- अभी तो चुदाई बाकी ज कुटिया तब देख कितना मजा आएगा तुझे...


  या हम किस करने लगे.. फिर हमें फटाफट कदपे जाने.. या म आंटी को बाय बोल के निकल गया वहा से.. क्यूकी यश के आने का टाइम हो गया था.. या हमें कोई रिस्क नहीं लेना था..

 


  यश के आने से पहले एम सीमा आंटी के गर से निकल गया या अपने हॉस्टल अगया.. मैंने डिनर किया.. या थोड़ी देर फोन चला के सो गया...


  अगले दिन सूबा...


  एम स्कूल के लिए तय हुआ .. या भाविनी को कॉल किया .. भाविनी भी मुझे लेने के लिए निचे अगायी ... हमेशा की तरह भवानी के पिचे बेथ गया स्कूटी पी .. उसके शरिर के भूलभुलैया लेटे हुए या बाटे करते हुए ..  इसी हम स्कूल पोहोच गए...


  स्कूल के गेट पी ही हम दोनो को कुशल भी मिल गया.. हम तीनो फिर साथ चलने लगे.. पर कुशल थोड़ा उदास लग रहा था..


  मैं- क्या हुआ कुशल.. उदासी क्यों ज..


  कुशल- अरे म कह उदास हु भाई


  मैं- जुठ मत बोल..


  कुशल- अरे सच म कुछ नहीं ज.. चल क्लास चलते हैं


  मुझे फिर भी शक हो रहा था की कुछ तो बल्लेबाजी ज.. मगर मुझे लगा कुछ पर्सनल होगा कुशल का. तो मैंने भी इग्नोर किया.. या हम टिनो क्लास की या चल दिए..


  कुशल मेरे या भाविनी से ज्यादा बात नहीं कर रहा था... पता नहीं उसे क्या होगा... खैर हम यही क्लासेस लेने लगे... शुद्ध दिन ऐसा कुछ खास हुआ नहीं।  पर बस कुशल हमने कम बात कर रहा था.. पता नहीं इसकी क्या वजह थी.. वो पूछने पर भी नहीं बता रहा था.. हमने सोचा की कल पुछते ज. आज मन नहीं था उसका ज्यादा बात करने का..


  स्कूल खतम हो गया.. या म या भवानी फ़िर स्कॉटी प निकल लिए गर की तराफ़.. म भाविनी की कमर पक्कड़ के ही बेथा था..


  मैं- या बता भवानी.. तुझे मिला बॉयफ्रेंड?


  भाविनी- नहीं साल कहा मिला.. कोई ज कहा जो मुझे प्यार करे


  मैं- म हु ना


  भाविनी- अरे हम तो बस शरिर की ज़रुरतो को पूरा करते हुए हमरे बिच प्यार थोडी ना ज


  मैं- हाहा वो भी ह.. चल कोई बता नहीं.. मिल जाएगा तेरा प्यार भी तुझे।


  हम फिर हॉस्टल पोछे..या मुझे ड्रॉप करके भवानी अपने गर चली गई...


  फिर शाम को एम पार्क एम बैडमिंटन खेलने गया... कृतिका या मानसी के साथ... अब वो भी मरसे खुलकर खुलके बात करती थी या मैं भी..



  अगल दिन स्कूल मी..


  दूसरा पीरियड फ्री था.. तो मेने कुशल से पुचने की कोशिश की क्या बात है वो मरसे कम बात क्यू कर रहा ज..या उदास क्यू ज


  मैं- क्या हुआ कुशल क्या बात एच भाई?  उदास क्यू हो


  कुशल- कुछ नहीं साल


  मैं- भाई मानता हो तो बता वर्ष


  कुशल- भाई केसा कम क्या किया ह तुने


  मैं- मैटलैब?


  कुशल- अंजन मत बन तको सब पाता हो


  मैं- पूरी बात तो बता मुझे सच में कुछ नहीं पता


  कुशल-तुने भाविनी सेट करली ना.. जीएफ बना लिया उससे..


  मैं- नहीं में नहीं बनाया उसे जीएफ..


  कुशल- जुठ मत बोल.. मनने देखा ज.. तुम दोनो भोट बात करते हो अब.. वो खाते भी साथ हो भवानी की स्कूटी पी..


  मे- अरे तू तो कुछ भी सोचा ज.. वो हॉस्टल रस्त म अटा ज इसलिये वो अजती ज.. या कुछ नहीं ज


  कुशल- तो तेरी gf नहीं ज?


  मैं- नहीं.. या होती भी तो तुझे क्या दीकत ह.. तुझे भाविनी पसंद ज क्या?


  कुशल- हा वर्ष


  मैं क्या?  ये क्या कह रहा है तू


  कुशल- हा साल सही एम.. सोच रहा हूं.. भाविनी को अपनी जीएफ बनने के लिए प्रपोज करू


  (मेने सोचा कुशल भाविनी को जीएफ बना लेगा.. फिर भाविनी इससे चुदेगी फिर मेरा भी कम होगा)


  मैं- अरे तो कर दे.. भाविनी को भी bf चाहिए अभी.. हा कर देगी..


  कुशल- सच बता?


  मैं- सच.. चल लंच म बल्ले करते ज भाविनी से


  कुशल- ठीक है


  दोपहर के भोजन पर--


  कुशल- भाविनी


  भाविनी- हा बोल


  कुशल- 2 मिनट कही या चल ना.. कुछ निजी बल्ले करनी हो


  भाविनी- ठिक ह चाली


  दोनो शैवाल ऐ फिर..


  कुशल- वर्ष भवानी।  तू मुझे बहुत अच्छा लगता है .. मैं वास्तव में आपको पसंद करता हूं .. मेरी जीएफ बनेगा की?  क्या तुम भी मुझे पसंद करते हो?


  भाविनी- ये क्या बोल रहा है अपना तो अच्छा दोस्त ह ना..


  कुशाल- to gf बन ने म क्या प्रॉब्लम h


  भाविनी-अम्म.. ठिक ह चल में सोच के भटौगी..


  कुशल- ठिक हो


  फिर वो दो वापस आ गए..


  मेने फिर कुशल से अकेले एम पुचा जब स्कूल की छुट्टी होगी थी


  मैं- क्या बोली वो


  कुशल- वो बोली की सोच के बतेगा


  मैं- हा कर दूंगा.. तू टेंशन मत ले


  कुशल - ठिक एच भाई


  फ़िर एम या भाविनी भी निकल गए स्कूटी पर..


  मैं- क्या हुआ.. तूने एसा क्यू बोला सोच के भटौगी.. तुझे तो बीएफ चाहिए था ना.. तो कुशल अच्छा नी लगता क्या?


  भाविनी- अरे कुशल से स्मार्ट एच.. एम तो कबसे उससे बॉयफ्रेंड बनाना चाहती थी.. मगर मुझे लगा वो मुझमे इंट्रेस्टेड नहीं ज


  मैं- ओह.. तो फिर एसा क्यू बोला की सोच के बताउगी


  भाविनी-म लड़की हु.. एक दम से केसे हा कर देती.. शाम को उससे बहार मिलने बुलागी.. या हा बोल दुगी


  मैं- हाहा .. ये भी सही ह ..


  फिर भाविनी ने मुझे हॉस्टल ड्रॉप किया..


  मैंने रूम प एकके थोड़ा आराम किया... दिन में कुशल का कॉल आया


  कुशल- सुन भाई .. भाविनी ने मिलने बुलाया ज।  तू भी चल ले..फिल्म का प्लान हो


  मैं- मैं क्या करुगा बिच म


  कुशल- चल ना साल..


  मैं- अरे तू पर्सनल टाइम स्पेंड कर उसके साथ.. तू जा.. आप फिर कभी चलेंगे..


  कुशाल- ठिक ह चाली


  मैं- मगर मुझे सब बनाना क्या हुआ..


  कुशल- बिलकुल भाई..


  (फोन कट)


  फिर मेने एक्सरसाइज कर.. फिर थोड़ा स्कूल का होमवर्क किया...


  मेरा भी मन हो रहा था छुडाई करने का.. मैंने सोचा सीमा आंटी को पता हु.. कुछ बात बने अकेले तो. मेने उन्हे कॉल लगा


  मैं- ही मेरी कुटिया केसी हो


  सीमा आंटी- बस आपकी याद आ रही ह जान..


  मैं- मेरी या मेरे लुंड की


  सीमा आंटी- दोनो की...जां


  मैं- कुछ हो सकता है क्या?


  सीमा आंटी- आज तो मुश्किल ज.. यश गर पी ही ज..


  मैं- कुछ करो साल.. चुदाई नहीं तो कुछ या ही सही.. 1 2 गंदे के लिए ही


  सीमा आंटी- एक काम करते ज मैं मेरी दोस्त से मिलने का बनाना बनाती हूं.. या किसी होटल पी मिलते ज।


  मैं- हा यर थिक रहेगा... कॉल करना मुझे निकले हाय..


  (कॉल कट)


  म भी फिर नहया या त्यार हुआ .. या थोडी डेर एम मुझे सीमा चाची का संदेश अगया मिलने के लिए छोरे प ..


  मैं निकल गया चोरे पी पेडल.. वहा पोहुच के आंटी ने मुझे और लिया कार एम.  या हम होटल जाने लगे..


  हम शहर से थोड़ा बाहर एक होटल में गए...


  होटल एम सब चाची की सुंदरता को ही देख रहे थे..


  रिसेप्शनिस्ट- जी मैम.. आपको रूम चाहिए


  सीमा आंटी- हा माई या मेरा बेटा दशरे शहर एम शादी एम जा रहे ज.. या रास्ते में वहा रुके ह बाकी के लिए थोड़ी देर..


  रिसेप्शनिस्ट- नो प्रॉब्लम मैम.. ये लिजिये रूम की चाबियां..


  या सीमा आंटी ने कीज़ ली या हम ऊपर चले गए रूम की या..


  रूम के अंदर पोछे.. या मेने रूम और से लॉक कर दिया..


  मैं- अच्छा.. तो म आपका बेटा हु


  सीमा आंटी- अरे तुम तो मेरी जान हो.. बेटा तो बस किसी को शक ना हो इसलिय..


  मैं- हाहाह.. बोहोत स्मार्ट एच तू..


  सीमा आंटी- थैंक यू


  फ़िर सीमा आंटी मेरे पास आई.. या मेरे गले में अपने हाथ दाल के मेरे चिपक गई.. मैंने भी सीमा चाची की कमर पकड़ी..  बोहोत टाइट हग कर रखा था हमने एक दसरे को..


  में एक हाथ से चाची की गंद प्रेस करने लगा..


  मैं- क्या गंद ज तेरी.. कुटिया..दीवाना कर देता हूं


  सीमा आंटी,- दीवानी तो म हो गई हु आपकी या आपके लुंड की..


  या हम किस करने लगे.. कभी मैं चाची के होठ चुस्ता.. तो कभी चाची मेरे होठ छूटी.. कभी ऊपरी होंठ से कभी निचले होंठ...म शुद्ध जोश से यश की माँ के होठ चुस रहा था..


  सीमा आंटी- अम्म्म .. मुआउउआआह्ह्ह .. अम्म्मम्मम्म .. हुआआह .. मुआआह .. अम्म


  थोड़ी देर हम किस करते रहे.. फिर मेने या आंटी ने कपड़े उतरे...


  हम बिस्तर प अगे नांगे.. आंटी की बॉडी पूरी चिकन या गोरी.. बोहोत अच्छी खुशबू आ रही थी सीमा आंटी के बलो से.. एम आला लेटा हुआ था.. या आंटी मेरे ऊपर चढ गई थी या मुझे प्योर फेस पी किस कर  राही थी.. म भी आंटी के नेक पी किस कर रहा था..

 

  होप यश ने मीनाक्षी आंटी से बदला लेगा मीनाक्षी आंटी को अपने कुटिया बनाके...

  देखना चाहते हैं कि यश मीनाक्षी और सीमा को एक ही समय में एक ही बिस्तर पर चोदेगा...

  त्रिगुट ....

 


  हम बिस्तर प अगे नांगे.. आंटी की बॉडी पूरी चिकन या गोरी.. बोहोत अच्छी खुशबू आ रही थी सीमा आंटी के बलो से.. एम आला लेटा हुआ था.. या आंटी मेरे ऊपर चढ गई थी या मुझे प्योर फेस पी किस कर  राही थी.. म भी आंटी के नेक पी किस कर रहा था..

  या आंटी को कमर से पुरा बहो में भर रखा था..


  सीमा आंटी बोहोत मचल रही थी मेरी बहो म..फिर वो मेरी भगवान एम अक्के बेठी.. या मेरा फेस पकाड़ के अपने बूब्स प डाबा दिया..


  सीमा आंटी- राज.. प्यार करो मेरे बोबो को.. दबाओ इनहे.. कट्टो.. भोट तड़पते ह ये..


  मैं भी चाची के स्तन चूसने लगा.. एक हाथ से एक बोब्बा दबया..


  आंटी ही भर रही थी..


  सीमा आंटी- आह .. हा .. एसेही छूसो इनहे ... डबो .. ज़ोर से मास्लो इने ..


  मुझमें भी ज़ोर ज़ोर से मौसी के बूबे दबने लगा.. या निप्पल से बूब्स को मु में भर के चुस्ने लगा...


  फ़िर मेने जीभ बहार निकली या चाची के निपल्स को अपने होथो के बिच डाबा के उन्हे बहार की या खिचने लगा ..


  सीमा आंटी- आह .. जान ..... अम्म्मम .. आह्ह्ह .. यही करो ..


  एम आंटी के एक निप्पल को होथो एम डाबा के खिचता.. या दसरे निप्पल को हाथो म अंगुठे के बिच डाबा के मसाला रहा था..


  सीमा आंटी- आह्ह्ह..आह..असी..हा करो..


  कुछ डर तक एम चाची के स्तन चुस्ता या मसाला रहा.. उनके गोरे स्तन लाल होंगे द मेरे दबने से...मेरे स्तन चुनने से चाची बोहोत खुश हो गई थी..


  सीमा आंटी-तुम तो दर्द भरे स्तन चुस्ते हो.. लग ही नहीं रहा की पहली बार कर रहे हो


  (अब उन्हे केसे बताओ की भाविनी के बूब्स एम बोहोत बार चुस चुका हूं..)


  मैं- अश्लील एम देख देख के या मुथ मार मार के ये कल्पना करता था.. अपने आप सिख गया..


  सीमा आंटी- अब मुझे भी चुन लेने का मोका दो...


  मैं- क्या चुनना ज तुझे मेरी कुटिया


  सीमा आंटी- आपकी कुटिया को आपका बड़ा लुंड चुना ज जान...


  मैं- जा फिर आला..


  फिर एम बेड प तकिया लगा के आराम से बेथ गया पर फेला के..


  या आंटी मेरे पेरो के पास अपना मु लक्के.. मेरे लुंड को चुम्ने लगी..


  Metope ki skin niche utar k.. Pink hisse ko chat..


  सीमा आंटी- जी जान..


  या सीमा आंटी वेसा ही करने लगी.. एक अग्यकारी कूटिया की तः.. उन्होनें हाथ से मेरी लुंड के तोप्पे की चमड़ी आला उतरी.. या फिर गुलाबी उनसे को चाटने लगी..


  Me- ched to chat


  या आंटी मेरे लुंड के छेद को जहां से मुत ता हूं..उससे अपने जीभ टिकी करके..चटने लगी..


  मैं- केसा हो


  सीमा आंटी- खरा ज.. मुझे बहुत पसंद आया..


  मैं- मुझे भी मजा आ रहा है.. मेरा लुंड इतने सुंदर मु के अंदर जा रहा ज.. या लुंड चाटने वाली भी मेरे दोस्त की मां ज.. ये सोच के तो मजा आ रहा ज..


  सीमा आंटी- हा जान मुझे भी ये सोच के या मजा आ रहा ह की माई मेरे बेटे के दोस्त का लुंड चाट रही हु... अम्म्मम्म।  Sluuurp sllluuurrpp .. अम्म मुहं .. पुच्छ ... अन्नम


  या सीमा आंटी ने मेरा लुंड मु में लिए या चुना लगी..मेरा लुंड चुस्ते वक्त उसके बाल बिच एम आ रहे थे.. तो मैंने अपने दो हाथो से उसे बल अपनी मुठी एम पकाड़ लिए... अब मेरा चेहरा भी कंट्रोल कर  स्कता था .. उसके बाल पकडे से .. तो म आंटी के मु को चोदने लगा .. मेरा लुंड चाची के मु में और बाहर हो रहा था ..या चाची मेरी आंखों में अंखे दल के देख रही थी .. वो लुंड पुरा से  नहीं ले पा रही थी.. मगर कोषिश पूरी कर रही थी..


  म उसका मु पकड़ के लुंड जीता हो खातिर उत्तरा डाल्टा या थोडी डेर यही रखता ..


  सीमा आंटी- गुउ गुउ.. गुगुउ गुउउउउ.मि.  .mmmm mmmm


  मैं- क्या हुआ कुटिया


  सीमा आंटी ने मुझे थोड़ा पिछे किया.. या लुंड बहार निकला..


  सीमा आंटी- (तेज़ सास लेटे हुए) मुझे सास नहीं आ रही थी जन्न..


  मैं- चल अब चैट ले इसे


  सीमा आंटी- जी


  या आंटी फिर मेरा लुंड पकाड़ के ऊपर से आला तक चटने लगी..या मुझे आंखों में देखती..


  क्या सेक्सी सीन था..


  सीमा आंटी अब गरम हो गई थी.. मैंने भी ज्यादा समय बर्बाद नहीं किया या चाची को कहा


  मैं- चल अब चुदई शुरू करते हुए ज कुटिया...बता कोंसी पोजीशन एम चुदना चाहेगी..


  सीमा आंटी- मैं आपकी कुटिया हूं।  तो मुझे कुटिया बना के ही छोडो जाने


  या आंटी खादी हुई.. या बेड प कुटिया बन गई.. या अपनी गंद ऊपर करके अपने चुत दिखने लगी...


  आंटी की गोरी गंद देख के मुझ से कंट्रोल नहीं हुआ या मेने आंटी की गंद पी एक थप्पड़ मारा..


  सीमा आंटी- आउच..


  मेंव फिर एक या छटा उनकी गंद पी लगा दिया .. छटाकक्क .. फिर से चाची की गंद हिल गई .. उनकी गोरी गंड पी मेरे मार्ने की वजह से .. मेरा हाथ छप गया था .. लाल होगा था ...


  फिर मेने अपना लुंड पक्का.. या आंटी की चुत पी जिसने लगा ऊपर से..


  में- केसा लग रहा ह मेरी कुटिया..


  सीमा आंटी- क्यू तड़पा रहे हो जान.. करो ना..


  मैं- क्या करू


  सीमा चाची- सेक्स


  मैं- खुल के बोल


  सीमा आंटी- दाल दो न अपना लुंड मेरी चुत मी.. बना दो मुझे अपनी कुटिया.. छोडो मुझे जान...


  मैंने भी चाची की कमर पक्की दोनो हाथो से.. या लुंड को चुत पी सेट करके और डालने लगा...


  मैं- तु तो तंग ज सल्ली..


  सीमा आंटी- ये मुझे कहा चोदते ज.. यश हुआ था उसके बुरे तो बिलकुल कम हो गया सेक्स।  या इनका भी छोटा...


  मैं- अच्छा ह ना.. अब तू जब चाहा मेरा लुंड लेलेना साली कुटिया...


  या मेने चाची की कमर पक्कड़ के लुंड या अंदर दाल दीया ..


  सीमा आंटी- आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अम्म्म.  जानेन.. आह्ह्ह..मनमम्म..बोहोट..आह्ह्ह.  मज़ा ..आ रहा ज.. थोड़ा दर्द.. भी हो... रहा।  है.. रुकना मति


  मेने फ़िर चाची की कमर तंग पकड़ी या एक ज़ोर का ढकका मार्के पुरा लुंड चाची की चुत एम दाल दीया ..


  मैं- आह.. सालि.. कुटिया.. क्या चुत ह तेरी..मज़ा आ गया..


  सीमा आंटी- आह्ह्ह..आह.  .जान... बोहोत बड़ा.. है..आह.. तुम्हारा .. लुंड... छुट पहली बार.. आह.. इतनी खुली ह जान... मम्म।  आआआहाहाहः छोडो मुझे


  मैंने फिर धीरे धीरे ढाके मार्ने शुरू किया.. 3 4 सेकंड में एक ढका...


  सीमा आंटी ने मंगलसूत्र पहनने रखा था.. तो मेरे हर ढकके के साथ मौसी का मंगलसूत्र झूल जाता था.. जो बहुत सेक्सी लग रहा था


  मैंने फिर ढाके की स्पीड थोड़ी तेज कर...


  सीमा आंटी- आह्ह्ह्ह.. हाआ..छोड़ो.. तेज तेज छोडो मुझे जान... आह्ह्ह..हाआ.  .


  म आंटी की कमर पक्कड़ की चाची को छोड रहा था मेरे जंघे चाची की गंद पी तकरा रही थी.. जिसे थाप थाप थाप की आवाज आ रही थी.. या आंटी की चुत गिली होने की वजह से।  ..तो पच पच पच की आवाज आ रही थी...


  मैं- केसा लगा मेरा लुंड अपनी चुत मुझे.. साली कुटिया..


  सीमा आंटी- आह.. बोहोत.. मजा आ रहा है..जान.. आह्ह्ह् आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ः यही छोडो...


  मैं- साली तुझे जिस दिन पहली बार देखा था तब सोच लिया था की तुझे कुटिया बनाउगा अपनी..


  सीमा आंटी- आह.. जान.. हा.. बना लो मुझे अपनी कुटिया..आह.. छोडो मुझे.. मारो मेरी चुत..


  मैंने फिर सीमा आंटी की कमर छोड़ के उनके बाल पके लिए... या बाल खिचे... जिनसे वो थोड़ी ऊपर चली...


  सीमा आंटी- आह.. जान.. दर्द हो रहा है..आह..पर रुको मत..छोड़ो... मुझे..आह्ह्ह्ह्ह.. अपनी कुटिया को..आहहाह आह्ह्ह..


  मेने फिर ढकके की गति बढ़ा दी या चाची को तेज तेज चोदने लगा .. उनके स्तन शुद्ध झूल रहे थे .. अगले पिचे ... या मंगलसूत्र गाले में लेहरा रहा था ... देख के ही मजा आ रहा था ये दृश्य ..  ऊपर से चाची की चुत में मेरा लुंड...


  आंटी की गांड से मेरी जांघों तकरणे से जो थाप थाप की आवाज आ रही थी.. उसमे बहुत मजा आ रहा था..


  मैं- आह.. ले साली.. केसा लगा अपने बेटे के दोस्त का लुंड...


  सीमा आंटी- बोहोत आचा... आह.. जान... छोडो... मुझे... यही करो... आह... बस थोड़ी देर या.. एम झड़ने वाली हूं..


  मेने थोडे शॉट्स या लगा...


  सीमा आंटी- एम आने वाली हु जान... आह... आह्ह्ह..


  या आंटी की बॉडी झटके मारने लगी...


  मैंने भी ढकके तेज की... या फुल स्पीड मी सीमा आंटी को चोदने लगा..उनकी कमर पक्का के..


  सीमा आंटी- आह .. म एआई जान ..


  मैं- मैं भी आया... सीमा... आह्ह.. सल्ली..


  मेरा पहली बार था इसलिये मैं आंटी के साथ ही झड़ गया.. आंटी जब झड़ी तो उनकी चुत ने मेरे लुंड को या कस के जकड लिया.. तो मेरा भी पानी निकल गया..


  मैं- आह्ह..ले सल्ली.. मेरा मुथ तेरी चुत मुझे..


  सीमा आंटी- आह.. जान।  गरम ज तुम्हारा मुठ बोहोत.. इतना सारा मुझे महसूस हो रहा ह मेरे अंदर... आह्ह्ह..


  हम दो हाफने लगे... आंटी पेट के बाल बिस्तर पी गिर गई अल्टी... या म भी लुंड चाची के चुत के अंदर ही रख के.. आंटी के ऊपर चलो गया..


  मैं- मजा आया सीमा.. तेरी चुत छोड के..


  सीमा आंटी- मजा तो मुझे आया ज.  तुम्हारा लुंड लेके.. धन्यवाद जान.. आई लव यू..


  या आंटी मुझे किस करने लगे..


  फिर हम थोड़ी देर बेथे.. आंटी ने मेरा लुंड साफ किया कपड़ों से.. या खुद को भी थिक किया.. फिर हमने कपड़े पहनने..


  आंटी- जान... 2 जाने होने वाले ज.. हममे चलना चाहिए.. आज के लिए थैंक्स जान..


  या आंटी फिर से मुझे गले मिल के मुझे चुम्ने लगी..

  मैं भी चाची को स्मूच करने लगा..


  सीमा आंटी- उम्मह्ह्ह.. मुह्ह्ह्ह..चलो जान अब निकलते हैं..


  मैं- हा चलो..


  फिर हम दो होटल से निकले.. या आंटी ने मुझे वापस चुराए प चोरा.. या वो भी अपने गर निकल गई..

 


  रात को हॉस्टल में आने के बुरे में खाना खाया... या फिर थोड़ी देर मूवी देखी.. इतने में कुशल का कॉल आया..


  कुशल- हाय भाई


  मैं- हाय भाई.. क्या बोला भाविनी ने?


  कुशल-उसने हा बोल दिया साल.. या किस भी किस


  (मुझे मन में सोचा की मुझे किस करने के लिए नहीं की कुशल को करदी... मतलब अब मुझे भी करेगा... मजा आएगा)


  मैं- क्या बात कर रहा ज.. ये तो खुशखबरी ज.. अब तो तुझे पार्टी देगा मिलेगी


  कुशल- बिलकल भाई तेरी पार्टी पक्की.. चल अब स्कूल एम बता रहा हूं पूरी बात


  मैं- ओके बाय


  फिर मेने भाविनी से भी बात की कॉल पी


  मैं- हाय भवानी


  भाविनी- हाय..


  मैं- बोहोत खुश लग रही ह क्या हुआ?


  भाविनी- साल मैंने कुशल को हा बोल दी आज.. या मूवी के टाइम हमने किस भी किया.. मेरा पहला किस था।  मुझे भुट मजा आया..


  मैं- अच्छा ज.. माजी होंगे त्रे तो..


  भाविनी- हा यर्र.. ट्यून हाय सेटिंग करवाई ज..ty


  मैं- तो मुझे तोहफा भी मिलना चाहिए


  भाविनी- ठीक.. मिलेगा.. मुझे पता ज तुझे क्या चाहिए.. हेहेहे..पर फले कुशल के साथ


  मैं- हाहाहाह.. ध्यान रखना फिर उसका.. चल बाय..


  एम फिर थोड़ा होमवर्क करने लगा की सीमा चाची का संदेश आया..


  सीमा आंटी- क्या कर रहे हैं जाने


  मे- तेरे नंगे म ही सोच रहा था कुटिया


  सीमा आंटी- जान मेरी चुत तो शाम वाली चुदाई सोच सोच की गिली हो रही ज..


  मैं- बोल तो अभी छोडने आ जो तुझे तेरे गर..


  सीमा आंटी- नहीं नहीं.. रिस्क ज जान.. रना मन तो मेरा भी ज..


  में-हा बात तो सही ज.. अगली बार तक इंतजार करो फिर..


  सीमा आंटी- हा जान आपकी कुटिया आपके लुंड को अपनी छुट में लेने के लिए तब तक तड़पती रहेगी..


  मैं- हाहा.. मेरी कुटिया तू तो जल्दी ही ट्रेन होगी


  सीमा आंटी- एपी एम जादू हु.. चुदाई से मुझे आपका गुलाम बन ने पी मजबूर कर दिया ज..


  मैं- अच्छा तो मेरी गुलाम ज.. सल्ली कुटिया


  सीमा आंटी- हा जान में आपकी कुटिया हूं.. आपकी गुलाम हूं.. आप जो बोलोगे वो म करुगी


  मैं- तू बस बट्टे करता है


  सीमा आंटी- आजमा के देख लो याकिन नहीं होता तो


  मैं- आजमा के भी देख लेंगे सीमा..


  फिर हम थोड़े ऐसे ही बट्टे की.. सीमा आंटी मेरी गुलाम बन ने को भी त्यार थी.. मतलब सीमा चाची के साथ अगे बहुत मजा आने वाला था.. मुझे सोच का ही खुशी हो रही थी..  रहा था...


  फिर रात हुई थी तो मैं सो गया था.. शुभ एम उठा.. या स्कूल के लिए तैयार हुआ..फिर भवानी मुझे लेने आई.. या हम चल लिए स्कूल के लिए..


  क्लास एम माई कुशाल या भाविनी एक ही बेंच पी बेथे .. भाविनी बिच एम बेठी थी .. कुशल या भवानी बिच बिच एम हाथ पकाते या इसे दोनो ही थोड़ा थोड़ा शर्मते .. फिर हमने साथ में लंच किया..


  लंच के खराब था गेम्स पीरियड तो सब गेम्स खेलने के लिए मैदान में चले गए.. कुशल भी चला गया.. मैंने चुपके से भाविनी को साइड एम बुलाया..


  मैं- भाविनी.. इधर आ..सुन


  भाविनी- हा बोल.. क्या हुआ


  मैं- अच्छा.. इत्ती जल्दी भूल गई.. मेरा उपहार कहा ज?


  भाविनी- वो तो फले म कुशल के साथ करुगी फिर ही करुगी तुम्हारे साथ..


  मैं- अरे सेक्स नहीं कर सकती तो कर ही सकता हूं न:


  भाविनी- किस.. हा वो तो कर सकती हूं..पर अभी केसे


  मैं- चलो वही.. बाथरूम एम तीसरी मंजिल वाले


  भाविनी- ठिक ह पर सिर्फ 5 मिनट


  मैं- हा चल..


  फ़िर हम दसरो की नज़र से बचे हुए तीसरी मंजिल के बाथरूम में फिरे.. या अंदर से गेट लॉक कर दिया..


  गेट लॉक करके.. में भवानी को दीवर से चिपका दिया.. या मेरे दोनो हाथ उसके चेहरे के साइड एम रख दिए दीवर प..


  भाविनी- क्या इरडा ज मि.


  मैं- इरदा तो तेरे होथो को चुनने का हो


  भाविनी- तो चुम्मो ना....

  इतने बोले की डर थी की मैने भाविनी को कमर से पक्का या उसे गले लगा लिया..


  भाविनी- आह धीरे...


  फ़िर हमारी आँखे मिली.. भाविनी के अच्छे वेसे ही इत्ती नशीली थी.. आज तो या भी नशीली लग रही थी..


  मैंने अपने होते उसके होठ प रखे 2 सेकेंड के लिए.. या वह हलका सा किस देके पिचे हो गया.. ये करते वक्त हमने संपर्क नहीं तोड़ा.. भाविनी की आंखों में हवा साफ नजर आ रही थी..


  मैंने फिर से उसके होथ पी किस किया पर है बार 5 7 सेकेंड के लिए.. हम दोनो के ही होथ इज टाइम बैंड द..


  फ़िर वापिस एम पिच होगा .. अब भाविनी भी जोश में थी .. उसे भी मेरे बल्लो एम हाथ डाला .. या मेरे बाल सेहला के चुंबन करने लगी ..


  मैं भी बदले में उससे किस कर रहा था.. या मैंने अपने हाथ उसकी शर्ट ऊपर करके उसकी नंगी कमर पी दाल दीये थे.. क्या चिकनी ज भवानी की कमर..पकड़ता हू तो लगता ह की पक्कात ही राहु.. छोरू ही ना  .. भाविनी की चिकनी नंगी कमर..


  मेने एक हाथ उसे नंगा कमर पी या दशहरा हाथ उसे गंद पे ले गया या दबने लगा .. अब चुंबन या तीव्र होगी थी .. एम भाविनी के निचले होंठ को चुस रहा था या छबा रहा था ..भाविनी भी कभी मेरे ऊपरी होंठ  कभी निचले होंठ..


  किस करते हुए वो आई कॉन्टैक्ट नहीं तोड रही थी.. या किस के टाइम जो उसकी आंखों में नशा था वो साफ नजर आ रहा था.. भाविनी की किस सीमा आंटी जितनी अनुभव तो नहीं थी.. मगर जवान लड़की को किस करने का भी  अपना मजा ज.. या बड़ी उमर की औरतो को किस करना का भी अपना मजा ज..


  करीब 10 मिनट तक हम किस करते रहे.. वो 10 मिनट ऐसे लग रहे थे कि कभी खतम ही ना हो.. बस किस करते रहे... मगर हमें जोखिम नहीं लेना था।  तो हमें वहा से निकलना थिक समझौता..


  हम रास्ते में निकल गए...


  मैं- किस केसी लगी?


  भाविनी- अम्म्म.. वो..कुशाल अच्छी चुंबन करता ज तुमसे तो.. तुम्हारी एम इतना मजा नहीं आया..


  मैं- हाहाहाह .. ठिक ह .. कोई बात नहीं


  या हम भी बाकी बचाओ के साथ फिर खेलने लगे..


  फिर स्कूल की छुटी हुई या हम अपने अपने गर चले गए.. या मैं अपने हॉस्टल में..


  होस्टल जक्के मेने थोड़ा आराम किया फिर कसरत करा 1 गंता .. फिर थोड़ा छोटा मोटा कम करने लगा .. तब तक 4 बज गए थे .. या सीमा चाची का कॉल अग्या ..


  सीमा आंटी- आज आओगे गर?


  मैं- गर प कोई नहीं ह क्या?


  सीमा आंटी- यश ज.. मगर तुम्हारे साथ वक्त गुजारना चाहती हूं


  मैं- ठीक ज.. 6 बजे तक आता हूं..


  सीमा आंटी- थैंक यू जान.. आई लव यू.. By


  मेने 2 गंते खराब का समय इस्लिये दिया था.. तकी एम थोडी डेर पार्क एम जक्के कृतिका या मानसी का गेम भी देख सकु.. गेम तो बना था मुझे तो उनकी गंद या कमर देखनी थी...


  मैं फिर थोड़ी देर खराब पार्क में निकल गया.. मुझे कृतिका या मानसी रास्ते में ही मिल गई.. फिर हम पार्क में जक्के बैडमिंटन खेलेंगे...  बोलके सीमा चाची के घर निकल गया..


  मेने सीमा आंटी के घर की घंटी बजाई.. या यश ने गेट खोला..


  अंदर से सीमा चाची ने पुचा..


  सीमा आंटी- कोन आया ज बेटा


  यश- माँ राज आया ज..


  यश-आ राज..अंदर आ..


  फिर मैं और गया.. हम थोड़ी देर बेथे.. हम 3नो ने बाते की नॉर्मल हाय.. पढाई की या स्कूल की..


  सीमा आंटी- बेटा शेक पियोगे म बना की लती हु


  यश- हा माँ शेक बोहोत अच्छा बनाती ज.. बनाओ माँ


  मैं- हा.. मुझे भी मन ज.. वे किसका शेक बना रही हो आंटी


  सीमा आंटी- केले का शेक बनाउगी..


  मैं- मुझे पसंद तो वो.. (या सीमा आंटी को आंख मार दी)


  सीमा आंटी- ठिक ह म अभी बना की लती हु..


  या आंटी और चली गई.. इतने में सीमा आंटी ने उनके रिश्तों को फोन लगा.. यश के चचेरे भाई भाई बहन को..


  सीमा आंटी- यश ले तेरे भाई से बात करले..


  यश भी फोन लेके आया.. या उनसे बात करने लगा..


  मैं- यश तू बात कर में आंटी की मदद कर देता हूं


  यश- हा थिक ह जा.. (या फिर से फोन पी बात करने लगा)


  मैं किचन में गया.. आंटी शेक बना रही थी.. उनकी गंद सारी एम देखे मुझे उनकी गंद दबाने का मन हो रहा था.. तो मैं उनके करिब गया या पिचे से उन्को गले कर लिया..


  मैं (उनके कान ने) - क्या कर रही ह कुटिया..


  सीमा आंटी- क्या कर रहे हैं यश देख लेगा..


  मैं- दार लग रहा ह क्या


  या मेरे पास है अगे लेजेके सीमा आंटी के बूब्स दबने लगा..


  सीमा आंटी- आह .. जान .. यश बहार ही बेथा ज .. वो और अगया तो ..


  मैं- चुप सल्ली.. तुझे मेरे विश्वास नहीं ह क्या


  सीमा आंटी- है ना जाने


  मैं- तो मैं जैसा बोलता हूं वैसा कर..


  सीमा आंटी- ठीक है..


  या मैं जक्के गेट प खड़ा होगा.. की बहार से यश मुझे थोड़ा सा देख खातिर..


  या आंटी ने फटाफट मेरी जींस खोली या लुंड चुनोने लगी..


  यश वेसे भी फोन प बात कर रहा था तो उसे ज्यादा ध्यान हमारी तारफ नहीं था.. म बिच बिच मैं बहार नजर रख रहा था..


  आंटी बोहोत प्यार से मेरा लुंड चुन रही थी राही थी.. मेने भी चाची के बाल पके या उनके मु में लुंड डालने लगा..


  सीमा आंटी- गु गु .. अम्म ..स्लुउउर्प्प .. अम्म्म ..मुआह्ह्ह्ह .. पुच ... जेसी जाग कर रही थी मगर धीरे ..


  मैं- चुस सल्ली कुटिया...


  यश - मॉम कितनी डेर


  मैं- बस बन ही गया यश शेक..


  यश- ठिक हो


  या मेने आंटी को इशारा कारा की जल्दी करे..


  सीमा आंटी फ़िर फुल स्पीड मी मेरा लुंड चुनोने लगी.. या म भी आंटी के बाल पकाड़ के उनके मु को फुल स्पीड एम छोड रहा था...


  इतने में यश की फोन प बात खतम होगी थी.. या वो किचन की या आने लगा..


  मेने बोला- बस 5 सेकंड या .. यश आ रहा ज..


  सीमा आंटी कुछ नहीं बोली या बस लुंड छुस्ती रही.. या मेरे लुंड ने पानी छोड दिया..


  मेने फटाफट लुंड पंत म डाला.. या वेसे ही खड़ा होगा..या आंटी खादी होके जल्दी से किचन स्टैंड प चली गई.. या शेक ग्लास माई भरने लगी..


  यश अँदर अक्के बन गया माँ


  सीमा आंटी- हा बेटा.. लो..


  या आंटी दो गिलास एम शेक भरके.. हमको देने के लिए मूडी.. या हम ग्लास दी..


  यश- माँ अपने पी लिया


  सीमा आंटी- हा बेटा.. पी लिया मैंने केला शेक...

  (मुझे देखते हैं)


  यश- अरे माँ केसे पिया ज.. देखो थोड़ा सा अभी भी आपके होठो के आला लगा ज..


  अब यश को क्या पता था की वो शेक नहीं.. मेरा मुथ ह.. जो अभी अभी आंटी ने मेरा लुंड चूस का निकला ज..


  सीमा आंटी- अरे ये केसे लग गया..


  या अपनी जुबान होथो पी फेर कर जो मुथ लगा हुआ था उनके होथो के पास.. वो चैट लिया..


  सीमा आंटी- यमम्म... बोहोत टेस्टी ज (या मुझे देखा)


  यश- माँ आप तो अच्छा शेक ही बनाती हो..ले राज तू भी पाई


  माँ- आज केला ताज़ा था.. इस्लिये आज ज़िदा अच्छा बना ज शेक..


  मैंने भी फिर शेक पिया...


  मैं- बोहोत टेस्टी एच आंटी..मज़ा अग्या..


  सेम्मा आंटी- थैंक यू बेटा..


  फिर हम बहार हॉल एम जाने लगे..

  यश अगे .. फिर उसके पिचे आंटी या आखिरी म माई ..


  आंटी गंद मटका के चल रही थी.. मुझे वो पहला दिन याद आया.. जब चाची के घर में पहली बार आया था या आंटी की मटका हुई गंद देखी थी.. मगर तब कुछ कर नहीं सकता था.. हमारा समय मेरा  की गंद प थप्पड़ मारने का बहुत मन था.. जो पुरा नहीं हो सका.. यही बात मेरे मन में आया..

  मैंने सोचा हमें दिन का काम आज पुरा करूगा...


  या मेने आंटी की मातकती हुई गंद प चाटक्कक करके एक थप्पड़ चिपका दिया...


  ये आवाज सुन के यश या आंटी दोनो ने पिचे देखा एक साथी


  मैंने फिर चलकी से अपना एक हाथ अपने दसरे हाथ रख दिया... जेसे मैंने अपने हाथ प मारा हो..


  मैं- मचर कट रहा था हाथ पी.. तो मार दीया..


  यश- ठीक है

  या यश अगे देखने लगा..


  सीमा आंटी ने मुझे घुर के देखा.. या फिर से गंद मटकाती हुई मेरे आगे चलने लगी..