School ki zindagi Chapter 1
हाय सब .. मैं एक नई कहानी शुरू करने जा रहा हूँ .. यह एक लंबी कहानी होगी इसलिए कृपया अपनी टिप्पणी और सुझाव दें। यह एक मासूम शर्मीले लड़के की कहानी पर आधारित होगा, जो एक छोटे से गांव से बड़े शहर में चला गया.. अब देखते ह क्या चेंज एट ह उसकी लाइफ में..
अपडेट 1
इंट्रो- हेलो .. मेरा नाम राज ज.. एक छोटे से गव एम रहता हूं.. पर क्युकी मुझे या पढ़ना था या करना था .. .
मेरे मा बाप को भी इसमे कोई दीकत नहीं थी।
मेने 9वीं कक्षा तक अपनी पढाई गाव के अंग्रेजी माध्यम स्कूल एम की .. या अब मेने 10 वीं कक्षा के लिए प्रवेश लिया था नोबेल हाइट्स स्कूल (काल्पनिक) एम जो की शहर का जाना मन स्कूल था ..
मेरे बारे में (राज) - एम एक शर्मीला टाइप का लड़का हूं.. जिस्के पहले कोई जीएफ नहीं थी.. पढने म होशियार.. या कस्र्ट का भोट शोक था.. इस्ली बॉडी अच्छी एच.. ऊंचाई 5 फुट 9 इंच या 10 वीं कक्षा उमर एपी अनुमान करले के लिए एम प्रवेश लिया ज ..
शुरू करना-
मेने 1 वीक फ़्ले अच्छे से अपना हॉस्टल का रूम जमाया.. मेरा रूम सिंगल ही था... या हमारे स्कूल से पास था करीब 2 किलोमीटर.. हमारे हॉस्टल में कुछ 35 लोग रहते थे.. बॉयज हॉस्टल था.. तो बताना सब लड़के हाय...
खैर मेने अपना रूम एडजस्ट किया पुरा... या थडा थडा शहर के बर्रे एम जान ने लगा..
मुझे शहर एम अक्के लगा की याहा प लोग जल्दी जल्दी घुल मिल जाते हैं.. या दोस्ती भी जल्दी कर लेते हैं.. पर आगे क्या होता है तो वादा ही होगा..
मैंने सोमवार से स्कूल ज्वाइन किया.. ये पहला दिन ही था नया सत्र का... मेने 1 2 लोगो से बात भी की स्कूल एम.. सबका प्रकृति अच्छा था... मुझे अच्छा लग रहा था.. पहला दिन था इसलिय भट उत्साहित थी.. पर ज्यादा कुछ खास हुआ नहीं.. साड़ी टीचर्स भी सही थी.. दिखने म सब एक से एक माल (कुछ कुछ बूढ़ी मैडम को चोर के..जो जवामी एम माल रही होगी.. हा हा)
पर मेरा पहला दिन अच्छा रहा.. मैंने एक दोस्त बनाया जो फले से उसि स्कूल एम पढ़ाता ज.. या सबको जनता ज.. उसका नाम था कुशल.. कुशल भी एक औसत दिखने वाला लड़का था.. पर उसकी दोस्ती भोट लड़कों से थी क्लास मी...या कफी फ्रैंक था..इस्लिये मेरे भी उसे पहले दिन ही दोस्ती कर ली...
हॉस्टल आने के बुरे में थोड़े डर फोन चला.. या शाम को गुमने के लिए पार्क में चला गया... वो बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे तो मैं भी उनके साथ खेलेंगे.. करके सो गया...
अगले दिन एम स्कूल गया..
एम चौथी बेंच पी बेथा हुआ था कुशल के साथ..
(हमरे क्लास एम 1 बेंच पी 3 लॉग बेथ ते हे.. मगर अभी हम 2 हाय बेथे)
दूसरी अवधि खतम हुआ था .. या तीसरी अवधि स्ट्रेट हुआ था .. मगर अभी नई शिक्षक ने नहीं किया था स्कूल में मुफ्त अवधि में शामिल हों ..
सब यही मस्ती कर रहे थे.. या अपनी पानी गॉसिप कर रहे थे..
मैं- साल कुशल प्यास लग रही ज.. तेरे पास पानी की बोतल ज क्या..
कुशल- नहीं साल... वो तो नहीं ज.. म नहीं लता.. खुद दसरी की बोतल से पानी पिता हूं। हा हा हा हा..
मैं- हा हा... अच्छा चल एम किसी या से पछता हूं..
मेने देखा मेरे 2 बेंच पिचे एक लड़की के पास बोतल पड़ी ज.. मैंने उसे बोतल के लिए पुचा.. तो आवाज नहीं आ रही थी क्युकी भोट शोर हो रहा था क्लास एम.. समाज नहीं आया...
इसलिये म उसके पास चला गया.. उसकी सीट प भी 2 ही लोग थे.. वो भर की तरफ... या उसके साथ एक या लड़की और वाली साइड.. मैं उसकी बेंच पी उसके पास बेथ गया..
मैं- एक्सक्यूज़ मी क्या मैं आपकी बोतल से पानी पी सकता हूं?
लड़की- हा.. पर पानी मेरा जूठा ज..
मैं- कोई बात नहीं.. मुझे चलेगा..
फिर उसे मुझे अपनी बोतल पकाई.. उसकी आंखों में एक अलग ही नशा था.. भोट मोहक आंखों थी उसे..
दिखने में सावली थी.. या ओके लड़की थी.. पर उसमे कुछ बात थी जो उसकी तरफ अट्रैक्ट कर रही थी.. भले ही वो ज्यादा सुंदर ना वो..
मैं भी थोड़ा शर्मीला था लड़कों से ज्यादा बात की नहीं थी.. इसलिय चुप चाप पानी पिक्के अपनी सीट प अगया थैंक्यू बोल कर.. लड़की से बात करने का मन तो भोट होता था। मगर मुझे इतना विश्वास नहीं था..
खैर.. एम अपनी सीट पी वापसी अय..
कुशल- मिल गया पानी?
मैं- हा वो लड़की ह ना लास्ट बेंच पी उसकी बोतल से पी लिया..
कुशल (पिचे मुड़ते हुए)- अच्छा... भाविनी की बोतल से.. ठीक है..
मैं (मुझे आदमी) उस्का नाम भवानी ज ..
मैं- हा उस्सी की बोतल से..
फिर इसी हाय नॉर्मल दिन चला.. या स्कूल खतम होने के खराब एम हॉस्टल आज्ञा..
मुझे भाविनी अट्रैक्ट कर रही थी.. मुझे उसके बर्रे एम सोच के लुंड सेहला रहा था..
फिर मैंने सोचा की भाविनी से दोस्ती करनी पड़ेगी.. पर केसे.. वो तो चलेगा ही पता चलेगा..
अब एम थोड़ा खुलने लगा था लोगो से.. या शहर की जिंदगी भी थोड़ी समझ लगा था.. अब मुझे इतना शर्म महसूस नहीं हो रहा था।
क्लास एम माई कुशाल के साथ ही बेथ त था.. उसे मुझे भोट कुछ सिखया .. एम उसे अपना गुरु मानता था क्लास एम लड़की से बात करने म
उसे मुझे समाधान की लडकियों में भी उती ही इच्छा होती ज सेक्स की जिट्टा लड़कों में होती ज.. तो आत्मविश्वास से भरी राहा कर.. या बात कर लिया कर लड़की से..
इसी अगले दिन एम स्कूल एम गया..
हमारी न्यू टेकर जो अभी तक आई नहीं थी.. उसका आज पहला दिन था स्कूल एम.. एम सोच रहा था की कोई मस्त सी मैडम आजे तो मजा ही आएगा.. नई टीचर का नाम कोमल बता रहे क्लास के बच्चे..
इतने में एंट्री हुई एक मैडम की.. पर उसे देखते ही मेरी सारी उमीदी मिट्टी एम मिल गई.. क्यूकी वो एक बुद्धि तचेर थी जो दिखने में तो बिलकुल भी छोडने लायक नहीं थी.. मेने तो उम्मेद चोर दी थी..
पर उसे और अक्के बोला
टीचर- गुड मॉर्निंग स्टूडेंट्स मेरा नाम शोभा ज.. या एम आपको आपकी नई टीचर कोमल से इंट्रोडक्शन क्रवाना चाहता हूं जो आपको अब ये सब्जेक्ट पढेगी..
या इतने में हमें हुई कोमल मैडम की.. उसे देखते ही मतलब लुंड माई एक हलचल सी हो गई थी.. अब उसके बर्रे एम बटाता हूं
वो कुछ 27 साल के आसपास की लग रही थी.. नम कोमल.. हाइट 5 फुट 6 इंच.. दिखने म थोड़ी चब्बी सी थी.. रंग ना सवला न ज्यादा गोरा.. कुछ कुछ उसके बिच का..
उसे सारे पहनने राखी थी जो की मैरून रंग की थी। जिसमे ज्यादा कुछ तो नहीं हो रहा था। मगर उसका फिगर बखुबी दिख रहा था। उसके कर्व्स बिलकुल सही दिख रहे थे। या हलका सा साइड से उसे कमर दिख राही थी..
मतलाब ऊपर से आला तक छोडने जस्सी..उसका ब्लाउज फुल हाय था.. बैक भी लगभग कवर हाय थी.. क्यूकी स्कूल था.. टू टीचर्स ज्यादा रिवीलिंग कपडे नहीं पहचान थी..
पर सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली बात थी... उसके होठ (होंठ) जो कुछ ज्यादा ही आकर्षक लग रहे थे। लयाक या रस भरे..म ये सब मन में सोच ही रहा था इतने में उसने बोल दिया..
कोमल मैम- सुप्रभात छात्रों .. मेरा नाम कोमल ज .. या एम आपकी नई विज्ञान शिक्षक हू ..
सारे बचाओ ने वपिस खड़े होके सुप्रभात विश किया.. फिर सब बेथ गए वापस
कुशल- yrr शिक्षक से achi h.. मगर kafi सख्त दिख रही h रवैया से ..
मे-हा साल भोट सख्त लग रही ज..
इतने मम ने हम सब से एक करके परिचय लिया।
कोमल मैम- या एक बत्त सबको बतादु मुझे क्लास मैं कोई अनुशासन पसंद नहीं ज.. कोई भी शक हो तो मुझे डायरेक्ट पुचिये.. कोई बिच क्लास मैं आपस में बात नहीं करेगा.. लिखना क्लास के बहार कर दुगी सिद्ध..
जेसा की हमें लग रहा था.. कोमल मम वस्सी ही थी.. कफी सख्त थी.. खैर वो अवधि खतम हुआ.. था उसकी गंद का.. सारे म तो या उभार का आ रहा था..
फिर लंच हो गया.. या सब अपना खाना खाने लगे.. या बहार गुमने लगे..
इत्ते म भाविनी हमारे पास आई
भाविनी - हाय कुशल..
कुशुल- ही भाविनी (या दोनो ने हाथ मिलाना किया)। आप कैसे हो?
भाविनी- एम अची हु कुशल.. या तुम तुम्हारा दोस्त ज? क्या नाम ह इस्का?
कुशुल- ओह.. हा ये मेरा दोस्त राज ज..
भाविनी- हाय राज (या मेरी तराफ हाथ बढ़ाया उसे)
मैं- हाय भवानी.. आपसे मिले अच्छा लगा.. ज लड़की के हाथ.. या भाविनी मुझे आकर्षक लगती थी तो कुछ ज्यादा ही खुशी हो रही थी)
भाविनी- यर कुशुअल.. तेर्स एक कम था..
कुशल - हा बोली
भाविनी- साल वो मेरे साथ जो लड़की बेत ती ह वो भोट बोर कार्ति ह.. क्या में तेरे साथ बेत शक्ति हु क्लास एम?
कुशल- हा .. कोई समस्या नहीं ज .. राज या म हम 2 जाने ही ज .. एक जग खाली ज सीट पी ..
भाविनी- ओके.. थैंक यू.. एम लंच के खराब अपना बैग लेकर अति हु..बाय
कुशल- बाय
मी-बाय
लंच ओवर होने के खराब भवानी हमारी बेंच प अगायी बेथने के लिए..
भाविनी बिच एम बेठी थी मेरे या कुशल के..
लडकियों की वर्दी शर्ट या स्कर्ट थी..
स्कर्ट जाने से थोड़ी सी ऊपर..
या मैने नोटिस किया की जब भवानी बेटी थी.. तो उसे स्कर्ट थोड़ी ज्यादा ऊपर थी.. शायद उसे ये जान बुच का कारा हो या गली से हुआ हो मुझे पता नहीं.. उससे उसे थोड़ी सी जांघ दिख रही थी.. या हम बेथे भी 2 लास्ट बेंच पी द.. या हमारे पिचे कोई नहीं बेथा था.. उसे इस तरह से मुझे ही देख सकता था..
क्यूकी हमारी पंक्ति दीवार के पास वाली थी.. या ईएसआई 3 पंक्ति थी क्लास मी..
जिसमे मैं दीवार के पास वाली तरफ.. भाविनी बिच में.. या कुशाल बाहर वाली साइड बेथा था.. या भाविनी की जो लेफ्ट वाली जांघ है यानी की जो मेरी साइड थी.. से स्कर्ट थोड़ी ऊपर थी.. जिसे मुझसे ज्यादा तो नहीं पर थोड़ी थोड़ी जांघ दिख रही थी.. जो मेरे लिए तो भोट थी..
मैंने भाविनी से अब धीरे बटे करना शुरू किया.. मेरा आत्मविश्वास थोड़ा बढ़ा रहा था अब..
भाविनी भी अच्छे से हम दो से बात कर रही थी.. बात करते करते वो कभी कभी मजाक में मेरा हाथ पकड़ लेते या ताली बजाती तो मुझे एक अलग एहसास होता..
उसकी बिच म कभी मेरी तराफ देखती तो हमारी आई कॉन्टैक्ट होती तो मुझे ऐसा लगता उसे आंखों से की उसके अंदर बहुत हवा भरी ज. पता नहीं क्यू.. पर उसके आंखों में एक अलग ही नशा ज..
यही हमारा स्कूल ओवर हुआ.. या हम अपने अपने गर चले गए.. या अपने हॉस्टल..
अगले दिन स्कूल में
एम कुशल या भाविनी हमेशा की तरह एक ही बेंच पी बेथे .. सामान्य वर्ग चल रही थी ... इतने में भाविनी की पेंसिल आला गिर गई ...
मैं- रुक म उठा हु..
या एम आला जुक गया पेंसिल उठान..
म भाविनी के प्रति के भोट पास था.. या मैंने ऊपर देखा तो मुझे उसकी इनर जांघों का व्यू आ रहा था.. उसकी पैंटी तो नहीं दिख रही थी.. पास उसका जैसा नजर आ रहा था.. म देख ही रहा था की इत्ते मैं भाविनी ने बोला
भाविनी- क्या हुआ मिल गई क्या?? (या एक मुस्कान दीदी)
मुझमें हड़बड़ा गया.. मुझे लगा मेरी चोरी पकड़ी गई.. तो मेरे मु से निकल गया
मैं- क्या?
भाविनी- अरे पेंसिल मिल गई क्या..
मैं- हा.. मिल गई.. ये रही...
या म ऊपर अगया वापीस..
मेरे सास म सास आई की चलो इस बार तो बच गया...अगली बार से ध्यान रखना पडेगा..
या फिर ऐसे ही पीरियड खतम हुआ... हमारे बिच म अब भोट मजाक होने लगे थे.. या अब हम कफी फ्रैंक होंगे द..
नेक्स्ट पीरियड कोमल मम का था... आज उसे ब्लैक कलर की साड़ी पेहनी थी.. जो उसके शरिर को बखुबी दिख रही थी.. साइड से उसका थोड़ा पेट दिख रहा था.. यानि उसके लव हैंडल वाला पार्ट.. या उसकी सारी भी नबी के थोड़ा आला ही थी..
जब कोमल मैम पिचे मुडी तो एक गुडगुडी सी होगी शरिर एम.. पिचे से उसके ब्लाउज या सारे म बिच एम 2 इंच का गैप था.. तो उसे पेठ हलकी सी दिख रही थी..
या जब वो बोर्ड प लिखती तो उसकी गंद पूरी शेक होती इधर उधार.. पुरा बोर्ड भर जाने पर जब वो आला की बची हुई जगह प चाक से लिख रही थी..
जिस्की वजह से उसे थोड़ा आगे की तरफ जुकना पड़ा.. जिसे उसे गंद या उबर के बहार आ रही थी.. वो कुछ कुछ पल के लिए ही था.. पर वो नजरा भोट रोमांचित था..
जब वो बोल रही थी तो उसके हिलते हुए रसिले होथो को चुनने का मन कर रहा था..
ये सब चल ही रहा था की दुसरी बेंच प दो लडके आपस म बात कर रहे थे कुछ..
कोमल मम को गुसा आया या उन्मे उनमे से एक लडके को थप्पड़ लगा दिया।
जिसको देख के सब एकदम चुप होगये.. कोमल का हाथ हम लड़के गालो प छप गया था..
हम भी डर गए.. तो चुप चाप बेथे रहे.. भोट ही सख्त ज कोमल मैम इनके पीरियड एम चुप चाप ही बेथना देगा...
इसी स्कूल खतम हुआ।
या हम अपने गर जा रहे थे.. कुशल पहले ही निकल गया था.. तो म या भाविनी ही बचे थे..
भाविनी- तू केसे जाएगा हॉस्टल.. आ में चोर देता हूं अपनी स्कॉटी पी.. मेरे गर के रास्ते में ही पदा ज..
मैं- ठीक है
अब यू था.. की भाविनी स्कूटी चला रही थी या उसके पिचे बेथा था.. जिस्की वजः से मेरी इनर जांघों या उसकी बाहरी जांघों आपस में टच हो रही थी...
हम बिच म बात भी कर रहे थे.. या वो बोल रही थी तो उसकी आवाज नहीं आ रही थी.. तो मैं या फिर खिसक के बेथ गया..जिससे हुआ यू की अब मेरी भीतरी जांघों उसके गंद के उनसे को टच हो रही थी.. या जब कोई ब्रेकर आटा तो मुझे उसकी गंद हिलती हुई फील होती है मेरी थाईज पी...
भाविनी- तू कमरा प पुरा दिन टाइमपास केसे करता ज..
मैं- यही बोर होता हूं.. कुछ नहीं के लिए ज़्यादा इंट्रेस्टिंग.. शाम को पार्क एम खेलने चला जाता हूं.. या थोड़ा मोबाइल चला लेता हूं
भाविनी- ओके.. अच्छा ज.. वेसे तेरा हॉस्टल मेरे गर के रास्ते में ही पदा ज.. तो मुझे रोज तुझे पिक कर लूगी तू बोले तो..
मैं- हा ये तो या अच्छा हो जाएगा.. धन्यवाद
भाविनी- अरे थैंक यू की इसमे..
इतने में मेरा छात्रावास आज्ञा.. या भाविनी ने गाड़ी साइड एम रोकी
मैं- अच्छा तेरा मोबाइल नंबर दिया.. एम शुभ तैयार होगा तो तुझे कॉल कर दिया क्रुगा..
भाविनी- हे... लिख...9123@@@@@@
या फिर ऐसे हमने नंबर एक्सचेंज किए या एम रूम प अगया.. या वो भी उसके गर के लिए निकल गई..
दिन में थोड़ी देर सो गया या शाम को थोड़ा बहार गोंद के आया..
मैंने वापस आकार मोबाइल देखा तो उसमे भाविनी का संदेश पड़ा था..
भाविनी (पाठ) - हाय
मैं (पाठ) - हाय
अब आगे की साड़ी बल्ले टेक्स्ट पी हुई-
भाविनी- इतना लेट रिप्लाई किया.. कहा प था?
मैं- वो म बहार गया था ऐसे ही गुमने.. कुछ कम था क्या
भाविनी- नहीं मेने तो यही टेक्स्ट किया था.. बोर हो रही थी तो.. सोचा तेरा भी टाइमपास हो जाएगा।
मैं- हा.. बोर ही हो रहा था..
भाविनी- क्यू.. तू टाइमपास के लिए पोर्न नहीं देखता क्या?
(मुझे उसके इज डायरेक्ट क्वेश्चन से सरप्राइज हो गया था..)
मैं- हा .. देखता तो हूं .. पर कभी कभी .. क्या तू भी?
भाविनी- हा म भी देखती हूं..नॉर्मल ज ये सब तो.. वसे तुझे कोंसी कैटेगरी पसंद ज?
(मैं एक बार फिर शॉक एम अगया की ये आज इत्ते सीधा सवाल पुच रही ह.. मुझे तो आदत नहीं ज)
मैं- एसा कुछ ठीक नहीं ह.. कोई भी देख लेता हूं..
भाविनी- ठीक है.. अच्छा..
फिर वही हमारी कुछ नॉर्मल बीटी हुई फिर हम दोनो सो गए..
म सोने से पहला सोच रहा था आज की बात के बर्रे एम..
की भाविनी आज पोर्न की बात कर रही थी। क्या उसे भी मेरे इंट्रेस्ट एच? पता नहीं..उसको मुझे इंट्रेस्ट क्यू होगा.. उसके तो या बीएफ बन जाएंगे आराम से.. पर क्या पता उसे अट्रैक्शन हो.. सिरफ सेक्स की अट्रैक्शन.. या ये सब सोचते सोचते मुझे कब पता चलेगा मुझे पता नहीं चला.. .
शुभ म उठा तैयार हुआ.. या भाविनी को कॉल किया की वो भी नकलीकल जाए गर से..
वो मेरे हॉस्टल के बहार आगी.. आज वो खुद थोड़ा पिचे खिसक के बेटी थी.. तो मैने भी सोचा की मुझे भी थोड़ा चांस मरना चाहिए..
एम पिचे बेथा इस तरह से की मेरी जांघों से म उसकी गंद पी थोडा प्रेशर लगा रहा था.. उसे एक बार पिचे मिट्टी के देखा.. हमरा आई कॉन्टैक्ट हुआ..
मुझे उसकी आंखें नशीली सी लग रही थी थोड़ी..
मैने ब्रेकर आने प उसकी कमर पक्कड़ ली साइड से..उसकी स्कर्ट से थोड़ी ही ऊपर..उसकी कमर पी साइड का जो फैट था उसे पक्कड़ के या ऊपर से उसकी गंद मेरी जांघों को महसूस करने के लिए मुझे भुट मजा आ रहा था..कुछ दूसरा पकाडे के बुरे मेने अपने हाथ वापस हटा दिए..
इसी हम चल दिए स्कूल के लिए...
क्लास एम हम बात कर रहे थे
मैं- आज शाम को मॉल चले क्या.. भोत दिनों से गुमने नहीं गए ज
कुशल- नहीं भाई.. आज तो मुझे कुछ कम हो
मैं- अरे साल ऐसा क्या कर रहा ज. चल ना.. मज़ा आएगा
कुशल- नहीं साल.. काम ह लिखना अजता.. भाविनी तू चली जा ना
भाविनी- हा म तो फ्री हू.. आप दोनो चले क्या राज?
मैं- हा थिक ह फिर तू या म चल ले ज..
स्कूल एम सब नॉर्मल हाय हुआ.. कुछ ज्यादा ही नहीं..
छुटी में माई या भाविनी गर के लिए निकले गए
भाविनी ने मुझे गर ड्रॉप किया या कहा:
भाविनी- 4 बजे तैयार रहना
मैं- ठीक है तो... द्वारा... बाद में मिलते हैं
एम हॉस्टल रूम में आया.. या ये सोच रहा था की आज भाविनी के साथ जाने को मिलेगा...
ये मेरा पहली बार था किसी लड़की के साथ अकेले जाना..
ये तारीख तो नहीं थी.. मगर तारीख से कम भी नहीं थी मेरे लिए..
खैर शाम के 4 बजे भाविनी आई मुझे चुनने...
या क्या बताओ.. उसे देख के लग ही नहीं रहा था की वो स्कूल वाली भवानी ह...
स्कूल एम टू वू यूनिफॉर्म एम होती थी.. मगर आज वो तैयार होके आई थी.. मैंने उसे पहली बार यूनिफॉर्म के अलवा दसरी ड्रेस एम देखा रहा था..
उसके बाल खुले हुए थे..उसे पिंक टॉप पहन रखा था.. जिसमे उसके बूब्स भोट सही शेप में नजर आ रहे थे या आला जींस। या जींस भी ऊपरी कमर। जिसमे उसे गंद पुरी बहार की या आ रही थी.. जिस उसे उभार भोट सेक्सी लग रहा था या जांघों से जींस बिलकुल गले लगाती हुई.. उसकी पूरी जांघों को एककर देती हुई.. फेस पी थोड़ा हल्का मेकअप किया हुआ था
मैं-वाह भवानी.. आप अच्छी लग रही हैं
भाविनी- इतना प्यार हुई माई... या बस गुड़?
मैं- अरे तुम हॉट और सेक्सी लग रही हो..
भाविनी.. थैंक यू.. वसे तू भी कुछ कम नहीं लग रहा है..
मैं- अरे एसा तो कुछ नहीं हो
भाविनी- हा हा .. सच्ची .. चल आजा .. चलते हो
फिर हम मॉल के लिए निकल गए
रोज़ स्कॉटी के पिचे बेथने एम स्कर्ट होने की वजह से भवानी की गंद नहीं दिखी थी.. मगर आज जींस होने की वजह से उसकी गंद का परफेक्ट शेप आ रहा था जिसे देख के मुझे भोट एक्साइटमेंट हो रही थी..
फिर हम मॉल पोछे या इदर उड़ान की दुकानें एम गुमने लगे
थोडी डेर गुमने के बुरे हम गए गेमिंग जोन एम..वह थोडे गेम्स खेले..
मैं- यार ये हॉरर हाउस में क्या होता है? म कभी गया नहीं.. हमारे गव मी तो नहीं था ये
भाविनी- अरे इसमे एक जग से एंट्री लेके दुसरी जघ से एग्जिट लेना होता ज.. या बिच म अलग अलग दरवानी (डरावना) चिजे अति ह.. भोट दर लगता ज मुझे तो..
मैं- वाह.. कितना रोमांचक.. चल ना मजा आएगा..
भाविनी- नहीं साल.. मुझे तो बोहोत दर लगता है
मे- अरे चल ना.. म हू तो साथ मे
भाविनी- ठिक एच चल..
या फिर हमनें कूपन लिया.. या फिर हॉरर हाउस में एंट्री ली..
वक्त हमारे अलावा 2 है या लॉग द.. मगर वो थोड़ा आगे निकल गए.. या हम पिचे आ रहे थे उनसे थोड़ा..
अंदर पुरा अँधेरा था.. भाविनी को सच म भोत डर लग रहा था..
वो मुझे साइड हग करके ही चल रही थी.. क्या बताओ भट मजा आ रहा था..
उस्का लेफ्ट बूब साइड से मेरे चेस्ट पी प्रेस हो रहा था.. मेने भी अपना राइट हैंड पिच से गुमा के उसकी कमर पी रख लिया या उसकी पेठ या कमर सेहला रहा था..
थोड़ा आगे जाके एक भूत का स्टैचू आया जो हिल रहा था.. या अलग आवाज भी आ रही थी साथ ही साथ हवा चल रही थी..
उसे देख के भाविनी भोट ज्यादा डर गई.. या सिद्ध अक्के मुझे कसकर गले लगा लिया...
हाये.. क्या फीलिंग एच.. आप समाज ही सक्षम होंगे.. गले लगाने की वजह से उसके स्तन शुद्ध मेरी चेस्ट पी प्रेस हो रहे थे... क्या सॉफ्ट बूब्स ज या मैंने उसे पूरा अपनी बहो एम भर लिया..
भोट डेर तक वो वही रही .. उसके हाथ मेरी गर्दन के चारों ओर .. या मेरा एक हाथ उसे कमर पी या दसरा हाथ में धीरे से आगे लेजते हुए उसकी गंद पी रख दिया ..
भाविनी के कुछ ना बोले पर एम उसकी गंद को थोड़ा थोड़ा प्रेस करने लगा.. क्या गंद ज साल भवानी की..एक करके उसके दोनो गधा चेक प्रेस कर रहा था..
भाविनी (धीर से मेरे कान म) - आह राज.. आप क्या कर रहे हैं?
मेने भी थोड़ा सिचुएशन को देख के.. या थोड़ा कॉन्फिडेंस लेक बोला
मैं- मैं कुछ ऐसा महसूस कर रहा हूं जो मुझे पसंद है (या ज़ोर से हमें गंद प्रेस करदी)
भाविनी- आह.. तो आपको यह पसंद नहीं है? (या उसे मेरा एक हाथ पकाड़ के उसके स्तन पी रख दिया)
मेरे तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा.. मेरे लिए तो ये ग्रीन सिग्नल था.. मेने उसके बूब्स प्रेस किए.. भोट सॉफ्ट द उसके बूब्स.. मुझे तो मलून ही नहीं था की बूब्स इतने ज्यादा सॉफ्ट होते ज..
मैं- हाँ .. मैं उन्हें भी पसंद करता हूं .. (या एम एक हाथ से उसके स्तन या एक हाथ से उसकी गंद प्रेस कर रहा था)
भाविनी... आह धीरे... कहीं भागी नहीं जा रही हूं मैं..आह
कुछ सेकंड हम इसी पोजीशन एम रहे.. वो मेरी बॉडी या मैं उसकी बॉडी पूरी फील कर रहे थे..
या हमें पिचे से किसी के आने की आवाज आई.. तो हम दोनो न चाहते हुए भी एक दसरे से अलग हुए...
भाविनी के एक्सप्रेशन अब बदल चुके थे.. अब वो बहुत खुश लग रही थी.. या खुश तो म भी बोहोत था आज.. पहली बार किसी लड़की की बॉडी को ऊपर से ही सही पर महसूस करके..
हम थोडी डेर बहार नार्मल गममे.. फ़िर वापिस उसे मुझे ड्रॉप किया.. या अपने गर चली गई..
चूहे को 11 बजे अस्पास भाविनी ने मुझे कॉल किया..
(माँग पर)
भाविनी- हाय
मैं हाय .. आप कैसे हैं?
भाविनी- मैं ठीक हूं.. असल में मैं बहुत खुश हूं.. आप कैसे हैं?
मैं- मैं भी गुड एंड हैप्पी.. ये मेरा फर्स्ट टाइम था..
भाविनी- हा मेरा भी.. मेने अश्लील फिल्में देख के फिंगरिंग कर ज.. मगर किसी को असली मफील नहीं किया अभी तक
मे-हा.. मेने भी पोर्न देख के ही मास्टरबेट किया हा अब तक.. मगर असली जब तेरे स्तन या आस प्रेस करे तो भोट मजा आया..
भाविनी- हा यरर.. पर मुझे टेरेसे एक बात करनी ज.. इस्लीए कॉल किया ज
मैं- हा बोल.. क्या बात करनी ज?
भाविनी- देख.. अगर तू चाहता ज तो हम ये आगे भी एन्जॉय कर सकते हैं..
मैं (मन में खुश होते हुए .. की अब तो ये या अगे बढ़ेगा) - हा .. सच्ची ??
बुआविनी- हा.. पर उसके कुछ नियम ज..
मैं (थोड़ा भ्रमित होता हुआ की इसमे केसे नियम होंगे) - नियम? केसे नियम?
भाविनी- अच्छा सूरज.. पहला.. की अपने बस एक दसरे को महसूस करेंगे..
मैं- ठीक है.. या?
भाविनी- तू अपना लुंड मेरी चुत में नहीं डालेगा.. या ना हम किस करेंगे
मैं (उदास होते हुए)- ये केसी बात हुई..
भाविनी- क्यूकी ये दोनो चिज़ एम जिससे प्यार करुगी उसके लिए बचना चाहती हूं.. उसके बुरे तू करे तो मुझे कोई समस्या नहीं ज..
मैं- ठिक ह मन ली तेरी बात.. फिर क्या करना चाहिए ज?
भाविनी- तू मेरे बूब्स प्रेस कर स्कता ज.. बूब्स चूसना कर स्कता ज.. मेरी आस प्रेस कर स्कता ज या मेरी छुट मी फिंगरिंग भी कर स्कता ज.. या तू चाह तो अपने हाथो से तेरे लुंड को हिला का उसका पानी भी निकल दुगी.. बोल?
मैंने सोचा जीता मिल रहा ह उसमे ही खुश रहता है अभी के लिए.. बदमे या देखा जाएगा..
मैं- ठिक हो गया..
भाविनी- या एक बात.. ये बात सिरफ हम दोनो के बीच में रहेगी.. या किसी के नहीं..
मैं- हा.. मेरी तरफ से किसी को पता नहीं चलेगा..
भाविनी- ओके डन.. सो चल म अब सोती हु.. कल मॉर्निंग मी मिले ज.. जीएन
मैं- हान .. जीएन एसडी ..
अगले दिन सुभ म निंद से उठा तो बोहोत खुश था.. क्युकी अब मुझमे वो डर नहीं था लड़कों से बात करने का.. या ना ही अब मैं शर्मीला महसूस करता था.. भाविनी से कल की डील के खराब एम सोच रहा था की अगले मेरे साथ क्या होगा..
म नाह के टायर होके स्कूल के लिए तैयार हो गया..
या भविनी मुझे लेने के लिए स्कूटी पी..
हम स्कूल पोछे या क्लास अटेंड करें क्रने लगे..
कोमल माँ की क्लास चल रही थी... आज वो सलवार सूट पहनने की आई थी.. जिसमे उसका फिगर कुछ खास नहीं दिख रहा था
मैं (भाविनी को) - साल आज सलवार सूट एम इस्का फिगर नहीं दिख रहा ज
भाविनी- क्यू तुझे इस्का फिगर पसंद ज क्या?
मैं- हा यार गंद भोत मस्त ज इसकी या साड़ी एम कमर दिखी ज इसकी वो तो या भी मस्त
भाविनी (जेलस फील करते हुए)- ऐसा भी कुछ खास नहीं ह..
मैं- रहने द तू..
इसी बिच भवानी थोडा अगे जुक के बेथ गी .. या मेरा हाथ पकाड़ की अपनी स्कर्ट के अंदर जांघों पर रख दिया
भाविनी- मेरा फिगर अच्छा नहीं ज?
मैं (उसकी टैंगो को मसाला हुए) - तेरी तो बात ही अलग ज..
या उसे भी अपना हाथ अब मेरे लुंड के ऊपर रखा या सहलाने लगी
भाविनी- हा वो तो तेरा हाथी बता ही रहा ह..
हम बात कर रहे थे.. तो कोमल मम ने हमारी तरह देख लिया
कोमल मैम- तुम दोनों.. खड़े हो जाओ.. क्या जरूरी बात चल रही हो
मैं और भाविनी- कुछ नहीं मैम सॉरी..
कोमल मैम- क्या सॉरी? क्लास से बाहर निकलो..
हमने या बेहेस करना थिक नहीं समझा या चुप चाप क्लास के बहार गए .. हमारी क्लास वाली हरकत से भाविनी की छुट या मेरे लुंड में हरकत होगी थी।
हम गर्ल्स वॉशरूम एम गए टॉप फ्लोर पी.. ऊपर वाला फ्लोर 12वीं क्लास वालो का था।
हमने फिर भी एक बार चेक किया.. या दोनो और गस गए..
अंदर से मैंने लॉक करा..या लॉक करते ही भाविनी या मैं एक दसरे से लिपट गए.. हम एक दसरे से इतना कास के चिपके रंग द की भवानी के स्तन पूरी मेरी छाती पी दब गए मैने अपने दोनो हाथ उसमें गंद पी रख के उसे वहा से उठा लिया..
हमारी पोजीशन कुछ ऐसी थी की भाविनी दिवार के सहे थी.. मैंने उसे गंद से पकड़ कर रखा था.. भाविनी ने अपने दोनो लेग्स मेरी कमर एम लॉक कर दिए थे.. मेरा लुंड उसे उसे चुत के ऊपर फील हो रहा था ..
(मेने तु पोज़ पोर्न मूवी एम देखा था या सोचा था की कभी एम भी ये करुगा या नहीं.. मगर आज म ये कर रहा था.. हलकी एम हमें पोजीशन मी उससे छोड नहीं रहा था.. मगर फीलिंग अभी से उससे हमें कम नहीं थी)
हम इसि पोजीशन एम एक दसरे की गर्दन पी किस कर रहे थे.. पार होठ पी नहीं.. क्यूकी भाविनी के नियम के मुताबिक वो अनुमति नहीं था..
कुछ डर एसे रहने के बुरे में उससे आला उतरा.. अब मुझे उसके स्तन प्रेस कर रहा था.. या वो मेरे लुंड को ऊपर से सेहला रही थी...
मैं- आह.. बहार निकल ले ना..
भाविनी- हा..
या भाविनी ने मेरी पंत का बटन खोल के.. लुंड अंडरवियर के बहार निकला लिया..
भाविनी- आह.. ये तो मैने सोचा था उससे बड़ा हो
(या उसकी आँखों में एक चमक सी अगायी)
मैं- हाथ लगा के तो देखो
भाविनी- हाथ लगुगी भी या इसी हिलाउगी भी सले
या भाविनी अपने हाथो से मेरी मुथ मरने लगी.. मुझसे मेरी आहे कंट्रोल नहीं हो रही थी..
ये पहली बार था जब किसी लड़की का हाथ मेरे लुंड प लगा था.. उसके नरम या ठंडे हाथो से जब उसे मेरा गरम या हार्ड लुंड को पक्का तो दोनो के मुह से एक आह निकल गई.. मेरे लिए पहली बार था वेसे ही भाविनी भी पहली बार किसी का लुंड पकड रही थी.. जिससे हम दोनो को एक करंट सा लगा था..
थोड़ी देर हिलाने का बुरा मेरा निकलने वाला था.. ये पहली बार था किसी लड़की के हाथो.. इसलिये म समय से भोट पहले आने वाला था
मैं- आह .. मेरा निकले वाला ज .. आह भाविनी
भाविनी साइड एम होगी थोड़ा मगर उसने मेरा लुंड हिलाना बंद नहीं किया.. या कुछ स्ट्रोक्स बैड मेरे लुंड ने 3 4 झटके मारे या मेरा सारा माल सामने दीवार पी निकल दिया..
भाविनी- हाय ...इतना गढ़ा..केसे झटके दे रहा ज तेरा लुंड.. भाड़ में जाओ
मैं- हा .. आह ..
या म ठक भवानी की बहो म अगया..
मैं- वाह यू आर अमेजिंग भवानी
भाविनी- तेरा तो हो गया? मुझे कौन शांत करेगा?
मैं- मैं करता हूं ना अभी..
भाविनी- नहीं रहने द.. आज के लिए इतना कफी ज.. एक ही दिन में सब नहीं करना.. तुझे अपनी चुत के लिए थोड़ा तरसौगी अभी तो..
मैं- ये तो गलत बात ह यार.. खुद मेरा लुंड देख लिया हीला भी लिया.. या मुझे ना तो अपने स्तन दिखे ना अपनी चुत
भाविनी- सबर कर थोडा.. सब होगा.. खैर वो सब चोर.. चल समय होगा ज.. नया पीरियड शुरू होने वाला ज
मैं- (उदास होते हुए) यार.. ठिक ह चल..
में भवानी को नंगी तो नहीं देख पाया.. मगर आज जो उसे मजा किया था वो भी कफी था मेरे लिए..
हम फ्र क्लास एम अगे .. या बाकी की क्लासेस लेने लगे ..
बिच बिच एम माई कभी भवानी की स्कर्ट के अंदर हाथ फेर लेटा .. या वो भी मेरे लुंड को बिच बिच एम कभी सेहला देता पंत के ऊपर से ही .. ऐसे ही दिन खतम हुआ .. या हम अपने अपने गर जाएंगे ..
शाम को एम क्रिकेट खेलने चला गया पार्क एम.. आज एक लड़का (यश) आया नहीं था.. तो मी या राहुल उसे उसके गर बुलाने गए..
हमने दरवाजे की घंटी बजाई तो कुछ दूसरा बुरा एक और बहार आई.. शायद उसकी मम्मी थी..
मैं- आंटी यश खेलने नहीं आया आज तो उससे बुलाने ऐ द..
आंटी- बेटा वो तो बहार गया ज उसके पापा के साथ.. आज नहीं आ पाएगा खेल..
मैं और राहुल- ठीक है आंटी.. ठीक है..
या हम वहा से निकल गए..
आंटी के बर्रे एम थोड़ी डिटेल्स.. आंटी भोट गोरी थी.. दुड जेसी.. हाइट 5 फुट 5 इंच...उनका फेस बोहोत सुंदर था.. या ठेठ हाउसवाइफ जैसी ड्रेसिंग थी उनी.. फिगर भी अच्छा खासा लग रहा था .. बनाए रखना होगा अपने आप को.. कुल मिला के छोडने लायक माल था.. मैने सोचा की यश की माँ इत्ती सुंदर ज तो यश से दोस्ती थोड़ी ज्यादा बना की रखनी मिलेगी..
अगले दिन.. मेरा आज स्कूल जाने का मन नहीं था तो म आज रूम पी ही रुका.. मेने फोन काकरे कुशल या भाविनी को बोल दिया था की आज एम नहीं औगा।
मैं मोबाइल एम मूवी देखने लगा.. या इसी टाइमपास करने लगा...
मेरे राशन का छोटा मोटा समन खतम हो गया था.. तो मैने सोचा की पास वाली दुकान से जक्के लियाता हु.. या चला गया दुकान प लेने के लिए..
जरूरी का समान लेके एम शॉप से निकला.. या वापस हॉस्टल की ओर जा रहा था.. की रास्ते में मुझे यश की मां अति हुई दिखी उनके हाथ में 2 बैग भी थे.. .
मैंने सोचा की सही मोका ज इनसे बल्ले करने का.. तो एम चला गया उनके पास
मैं- नमस्ते आंटी
यश की माँ- नेमस्टे बेटा.. तुम तो यश के दोस्त हो न जो कल उससे बुलाने ऐ थे.. क्या नाम ज तुम्हारा?
मैं- जी.. एम वही हूं.. मेरा नाम राज है..
यश की माँ- अच्छा बेटा..
मैं- जी आंटी.. या वससे आप ये वज़न क्यू उठा रही ह बैग का.. लाए मुझे दे दिजिये
यश की माँ- अरे कोई बात नहीं मैं ले लूगी..
मैं- अरे नहीं मौसी लाए
यश माँ- थैंक यू बेटा.. वेसे फ्री क्यू? आज स्कूल नहीं गए तुम?
मैं- जी आंटी आज मन नहीं था.. इस्लिये सोचा आज छुटी करलू.. अच्छा हुआ ना.. आपकी मदद भी होगी
यश माँ- हा वो तो हो
या हम चलते चलते चाची के गर तक फच गए
मैं- लेजिये चाची पाहुच गए आपके गर.. अब म चलता हूं
यश माँ- अरे तुम मेरी मदद की तो अंदर आओ.. नशा करके जाना..
मुझे तो इसी मोके की तलाश थी तो मैंने भी हा कर दिया..
मैं- ठिक एच आंटी.. चलिये..
हम गर के अंदर गए.. आंटी का गर बोहोत बड़ा या अच्छा था.. आंटी ने मुझे सोफ़े प बेथने को बोला या नश्ता लेके ऐ
यश माँ- लो बेटा खाओ...
मैं- धन्यवाद
यश मॉम- वसे तुम कहा रहते हो..
मैं- एम पास वाले हॉस्टल में रहता हूं.. मेरा गर से गाव म हो
यश माँ- अच्छा.. तो केसा लग रहा ह याहा प?
मैं- अच्छा ज.. गाव से यहां की जिंदगी थोड़ी अलग हो
यश माँ- हाहाह.. वो तो हो
मे- वेसे यश के पास मोबाइल एच के?
यश माँ- नहीं.. क्यू क्या हुआ?
मुझे- वो हमें कॉल क्र देता अगर वो खेलने नहीं ऐ तो.. कल जेसे गर नहीं आना पदा ना..
यश मॉम- उसके लिए मेरे नंबर ले जाओ
Me-(fas gayi)- thik h.. Apke number dedo
मेने उनसे नंबर लिए या अपने हॉस्टल अगया
दिन में थोड़ी देर सोगया या फिर शाम को क्रिकेट खेलने गया..
रास्ते में मैंने यश की माँ को कॉल किया..
मैं- हेलो आंटी.. राज बोल रहा हूं.. यश आ रहा है खेलने?
यश माँ- हा आ रहा है
मैं- ठीक है। या फोन कट कर दिया
फिर थोड़ी देर क्रिकेट खेलके एम हॉस्टल अगया
अगले दिन..रविवार का दिन.. म आराम से उठा सुबह.. सुबाह के कम खतम किए या फिर चला गया खेलने..
हम सब खेलेंगे पार्क एम.. क्यूकी मुझे यश की मां को खोजने का बहना धुनना था.. तो मुझे पहले यश को पता था.. मुझे उससे ज्यादा दोस्ती करने की कोशिश करने लगा
फिर हमारा मैच खतम हुआ.. या सब अपने अपने गर जाने लगे..
यश- आज तो खाने में मजा आएगा.. मेरी माँ ने पराठे बना ज
मैं- तुझे आएगा भाई मजा तो.. मुझे तो वही रोज वाला खाना खाने ज
यश- अरे तो तू भी चल न साथ.. दोनो पराठे खाते ज.. मेरी माँ भोट अच्छा खाना बनाना ज..
मैं- (खुश होते हुए की मौसी को देखने कमोका मिलेगा) अच्छा चल...
या हम (एम या यश) चले गए यश के गर एम खाना खाने ..
हमने दरवाजे की घंटी बजाई या आंटी ने गेट खोला..
आंटी ने गाउन पहना था
यश की माँ- अरे राज बेटा.. आओ
यश- माँ में राज को बोला ज की आप भोट अच्छे परठे बनते हो.. इसे भी मन था। .तो मेने इस्को इनवाइट कर दिया
यश माँ- अच्छा किया बेटा.. आओ और... म अभी बना की लती हु
मैं- जी आंटी
हम और गए .. यश या यश की माँ आगे चल रही थी .. या मी पिचे .. एम तो यश की माँ की मटकी हुई गंद ही देख रहा था .. जब वो चल रही थी तो दोनो गधा चेक इधर उधर हो रहे थे .. मान तो कर रहा था की उनकी गंद पी एक थप्पड़ मर्दू.. मगर अभी मजबूर था..
खैर आंटी ने हमको डाइनिंग टेबल पी बिठाया..
या म या यश इंतजार करने लगे खाने का .. या अपस म बट्टे करने लगे ..
थोड़ी देर में यश की माँ आये परठे लेके.. या हमें सेवा करने लगी.. जब चाची एसा कर रही थी तो चाची को थोड़ा जुकना पड़ा.. जिसी वजह से मुझे उनका थोड़ा सा क्लीवेज दिख गया कुछ सेकेंड के लिए.. उल्लू पी एक छोटा सा तिल था जो भोट सेक्सी लग रहा था.. मैंने वो नोटिस किया.. फिर वहा से नज़र हटा ली.. फिर हम 3नो बेथे या पराठे खाने लगे
मैं- वाह आंटी..भोट स्वादिष्ट ज.. आप तो अच्छा खाना बनाते हो.. मजा आया
यश- देखा बोला था न मेने
यश की माँ- अरे बेटा.. थैंक यू.. मुझे खुशी हुई की तुम्हें खाना पसंद आया
हमने फिर फटाफट से खाना खतम किया
मैं- थैंक यू आंटी खाने के लिए.. अब म चलता हुआ
यश- अरे इत्ती जल्दी क्या ह.. अभी तो पूरा दिन पड़ा ज.. वेसे भी रविवार ज.. थोड़ी देर रुक जाना.. कुछ खेलते हुए गर म ही..
यश की माँ- हा बेटा रुक जाओ.. म भी बोर ही होती हू वेसे भी पूरा दिन.. मेरा भी मन लग जाएगा
मैं- ठीक ज फिर.. पर हम क्या खेलेंगे
यश- चलो सच हिम्मत की स्थिति खेलते हैं
मैं- अरे पर उसमे आंटी केसे खेलेगी
यश की माँ- क्यू नहीं खेलेगी... म खेल शक्ति हु
मैं- मगर फिर कुछ भी हिम्मत आया तो आपको करना पडेगा
यश की माँ- ठिक ज.. मुझे चुनौती मत करो
फ़िर हमने गेम स्टार्ट किया..
बोतल गुमाई.. या सबसे पहले आया यश प..
मैं- बोल .. टी डी या एस
यश- तो
यश ने सच तय किया किया.. या सवाल पुचने की बारी आंटी की थी..
आंटी ने थोड़ा सोचा फिर पुचा..
यश की माँ- तेरी कोई gf h?
यश- ये केसा सावल हो
मे- सावल से सावल ज.. तुझे जवाब देना पडेगा
यश- नहीं.. मेरी कोई gf नहीं हो
यश की माँ-(जल्दबाजी में) ठिक ज..
अब वपिस टर्न हुआ.. इसबार बड़ी आई मेरी..मेने भी सच चुना किया
यश-चल बता.. तुझे अपने स्कूल में पसंद है
मैं- मुझे तो अभी तक कोई भी पसंद नहीं है
यश की माँ- ये तो कोई बात नहीं होती ज.. तुम किसी का तो नाम लेना ही होगा जो तुम्हें सबसे ज्यादा पसंद हो
मैं- वो मुझे कोमल मैम अच्छी लगती ह.. मेरे स्कूल एम मुझे पढती ज
यश की माँ- क्या.. वो तो तुमसे कितनी बड़ी होगी.. मैडम को क्यू.. तुम क्लास एम कोई लड़की नहीं पसंद क्या?
मैं- नहीं आंटी.. मुझे लड़की तो इतनी कोई नहीं पसंद..
यश- ठीक ज.. चलो वापस शुरू करते हैं
इसबार आंटी की बारी थी..
यश की मां- अम्म.. एम ट्रुथ लुगी..
फिर हमने देखा पुचे.. या एक दो टर्न के खराब.. फिर से मेरे ऊपर आया..
मैं- मैं करुगा चुनने की हिम्मत करता हूं
यश- ठिक ह फिर तेरा हिम्मत ह की तुझे डांस करना हो
यश की माँ- हा ये ठीक रहेगा
मैं- पर मुझे नाचना नहीं आता.. मुझे थोड़ा सा युगल नृत्य और फिल्में एम देखा था वो
यश- तो वोही करदे
में- मगर उसमे तो पार्टनर चाहिये.. या याहा तो पार्टनर नहीं हो
यश- क्यू.. तुम माँ के साथ करलो
यश की माँ- मगर हिम्मत तो उस्का ज.. एम क्यू डांस करु
यश-करलो ना थोड़ा सा..उसका भी हिम्मत होगा..
मैं- हा प्लीज आंटी
यश की माँ-ठीक है चलो
फ़िर आंटी या म दोनो खड़े हुए या युगल नृत्य करने लगे..
हम पास नहीं ऐ ज़्यदा.. बस एक दसरे के हाथ पके हुए थे या यश की माँ का एक हाथ मेरे कंधे पर था.. मुझे तो बहुत अच्छा महसूस हो रहा था.. यश की माँ भी आरामदायक महसूस कर रही थी मेरे साथ। .
हमने अधा गंता या खेला.. उसमे कुछ दिलचस्प नहीं हुआ.. स्किप कर सकते हैं.. का उपयोग करने के लिए..
मैं- चलो आंटी अब म चलता हुआ
यश की माँ- खाया रहा करो राज.. मन लग जाता ज.. वर्ना तो म पुरा दिन बोर ही होता हूँ
यश-हा खाया रहा करो
मैं- ओके जरूर.. बाय
फिर एम रूम प आज्ञा.. शाम हो चुकी थी.. मैंने भाविनी को कॉल किया या उससे थोड़ी देर बात की.. फिर टाइमपास करना लगा
डिनर के खराब एम मूवी देखने लगा.. मूवी खतम हुई तबतक 11 बज गई थी..
मैंने सोचा क्या करू.. तो फिर ख्याल आया की यश की माँ को शुभ रात्रि संदेश करता हु..
मैं (पाठ पर) - हाय
2 मिनट खराब यश की माँ का भी जवाब आया
यश की माँ- हाय.. सोया नहीं अभी तक
मैं- नहीं निंद नहीं आ रही थी.. आप?
यश की माँ- मुझे भी.. अंकल तो गए ज.. या म बोर हो रही थी..
मैं- मैं भी बोर हो रहा था.. आप मेरे बल्ले करलो आपका भी टाइमपास हो जाएगा..
यश की माँ- हा .. पर तुम यश को मत बताना की हम बात कर रहे टेक्स्ट पी.. लिखना वो गलत समझेगा .. अभी बचा ज ना
मेरे आप टेंशन मत लिजिये आंटी.. यश मेरा दोस्त तो आप भी तो मेरी दोस्त हो.. उससे कुछ नहीं बताउगा
यश की माँ- अच्छा तो में तुम्हारी दोस्त हूँ? अपनी दोस्त की माँ को दोस्त बनाना चाहते हो?
मैं- बनाना नहीं चाहता.. आप हो मेरे दोस्त
यश की माँ- ओह आचा..ठिक ज..
मैं- क्या हुआ
यश की माँ- मेरे ज़िदा दोस्त नहीं ज.. बात भी कम होती ज लोगो से.. तो मुझे अपनी दोस्त बनाया तो मुझे खुशी हुई..
मैं- अरे खुशी तो मुझे होनी चाहिए जो आप जैसी दोस्त मिल
यश की माँ- आप जैसी मतलाब?
मैं- मैटलैब आप जैसी सुंदर
यश की माँ- एम कह सुंदर.. मेरी तो अब उमर होगी ज..
(मेने अब यश की माँ की टैरिफ करने की सोची.. क्यूकी औरतो की जित्ती टैरिफ करो वो उतनी जल्दी फसेगी)
मैं- नहीं आंटी आप बहुत सुंदर ज.. अभी भी बिलकुल यंग या फिट लगती ज
यश की माँ- साची? जूठी टैरिफ मत करो
मैं- सच बहुत आंटी.. आप बहुत सुंदर हो
यश की माँ- फिर तुम मुझे आंटी बोल रहे हो.. एम बूढ़ी लगी हुई क्या
मैं- अरे नहीं .. वो मुझे आपका नाम नहीं पता न .. इस्लीए .. हाहाहा ..
यश की माँ- अच्छा.. मेरे दोस्त बोले हो खुद को.. या मेरा नाम भी नहीं पता?
मैं- अपने बताया ही नहीं..
यश की माँ- मेरा नाम सीमा हो
मैं- ठीक है.. तुम बहुत सुंदर हो सीमा
सीमा आंटी- अच्छा बच्चू.. आंटी से सिद्ध सीमा।
मैं-तो आप ही बता की आपको क्या बुलाओ.. आंटी ही ठीक ज
सीमा आंटी - अरे मी तो मज़ाक कर रही थी.. तुम मुझे सीमा बुला सकती हो। मगर सिरफ जब हम दो हो तब.. यश के सामने आंटी की बोलना..
मैं- बिलकल आंटी.. इतना तो मुझे पता ज..
सीमा आंटी- हा.. वेसे कुछ बात तो हम तुम में.. मुझसे इतनी जल्दी दोस्ती करली.. इतनी इतनी जल्दी किसी से दोस्ती कर नहीं पति..
मैं- मेती बात ही निराली ह सीमा..
सीमा आंटी- ओहो.. बड़ा गमंद ज तुमहे
मेरे लिए ऐसी बात नहीं ज.. आप मेरी दोस्त बन गई ज अब आपको धीरे-धीरे पता लग जाएगा
सीमा आंटी- ओके.. चलो अब मैं सोती हूं.. तुम भी सोजाओ..गं राज
मैं- जीएन सीमा
अगले दिन स्कूल में
भाविनी या मेने लंच तक स्कूल अटेंड किया.. फिर हमने प्लान बनाया मूवी देखने का... दिन का टाइम था या वीकेंड भी नहीं था.. इस्ली मूवी हॉल खाली होगा... ये सोचे हमने टिकट बुक करदी... तकी हम वही थोड़ी प्यास भी बुजा सक्के
हम मॉल पाहुचे .. या वहा सिनेमा हॉल एम एंटर ह्यू .. मूवी भी हॉलीवुड थी या टाइम हॉल लगभग खाली ही था .. सिरफ जोड़े ऐ रंग 4 5 जो अपने अपने कम म लगे हुए थे ..
मेरी या भवानी की सीट थी से बीच मी.. मगर हॉल खाली था.. तो हम थोड़ी देर बैड कॉर्नर पी जेक बेथ गए..
मेने भाविनी के कमर एम एक हाथ डाला या दशहरा हाथ उनकी जंगो के बिच उसकी चुत के थोड़ा आला। या प्यार से वहा सहलाने लगा..
भाविनी भी मेरी छाती प हाथ फिरने लगी..
म धीरे धीरे हाथ ऊपर उसकी चुत प लेजाने लगा.. वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी..
मेने अब मेरा हाथ जो मैंने भाविनी की कमर पर रखा था उसे भवानी के स्तन के ऊपर रख दिया.. या उसके स्तन दबने लगा.. भाविनी भी गरम होके आहे भरने लगी
भाविनी ने मेरा हाथ जो उसके जांघों पी था.. उसे पकाड़ की उसकी चुत के ऊपर रख दिया
उसकी पैंटी भी चुत के पानी से गिली हो गई थी..
म उसकी चुत को पैंटी के ऊपर से रगड़ने लगा..
भाविनी ने अपने प्रति खोल दिए..
भाविनी- अंदर दाल अनगली
मैं- हा
या मेने एक उन्गली उसकी पैंटी को थोड़ा साइड कर उसकी चुत के अंदर दाल दी..
भाविनी- आह वाह..
मैं- केसा लगा
भाविनी- भोट आचा .. कर्ता रे .. रुक मत .. आह:
मैं अब धीरे धीरे उनगली भाविनी की छुट में और बाहर करने लगा या दसरे हाथ से उसके स्तन पके हुए लिए
भाविनी-आह सल्ले..आह:
भाविनी सीट प अपनी गंद उठा उठा के उनगली ले रही थी छुट एम या धीरे धीरे मौन कर रही थी
भाविनी का अब निकलने वाला था..
भाविनी- आह मेरा निकले वाल ज.. या तेज कर..
मैंने भी अपने हाथो की स्पीड बढ़ा दी..
फ़िर कुछ शॉट्स म भाविनी ने अपनी चुत से पानी निकल दिया.. उसकी चुत ने गंद से 2 3 झटके दिए.. या फिर वो ठक के बेथ गई.. भाविनी की सासे भोट तेज होगी थी... उसकी आंखों में अब संतोषी की भाव दिख रहे थे.. आंखों में चमक या चेहरे पर मुस्कान आ गई थी...
थोड़ी देर म भाविनी नॉर्मल हुई..
मे- मेरा भी तो पानी निकल भवानी
भाविनी- निकलती हु साले..
या भाविनी निचे गुटनो प अगेयी.. मेरे प्रति के बिच.. मेरा लुंड बहार निकला..
बहार निकलते ही मेरा लुंड सैप जेसे संसनेते हुए बहार निकला .. भाविनी को उससे देख के वापस आंखों में चमकेंगे..
या उसने मेरे लुंड प थोडा ठुका...उससे गिला करने के लिए.. या उससे हाथ म लेके हिलाने लगी.. ऊपर आला करने लगी.. एम आराम से बेठ गया.. या भाविनी मेरा लुंड हिलाने लगी..
मुझे भोट मजा आ रहा था.. म भी थोड़ा मोहन करना लगा.. 10 15 मिनट खराब मेरा पानी निकालने को हुआ.. तो भाविनी ने मेरे लिए मेरा रूमाल मंगा.. या मेरा सारा स्पर्म मेरे रूमल प चोद दिया..
हम दो खुश थे ये करेंगे.. फिर हम सामान्य रंग.. या फिल्म देखने लगे..
मूवी ज्यादा से ज्यादा खतम होगी थी.. तो समाज तो आ नहीं नहीं थी.. तो भी हम पूरी देख ही ली... क्यूकी अभी स्कूल की छुटी का समय नहीं हुआ था..
फ़िर फ़िल्म ख़तम होगी.. या हम बहार आये..
कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा.. भाविनी या म बिच बिच म मज़ा करते करते थे.. मगर अभी तब में ऊपर से ही भवानी के भूले लिए थे.. अभी तक उसे मुझे अपनी चुत गंद या स्तन नहीं दिखे थे.. पर मुझे भी कोई जल्दी नहीं थी.. ऊपर से करने में भी भोट मजा था..
इसी बिच आंटी भी मेरे थोडी बंद हुई थी.. अब वो मुझे अच्छा दोस्त मंती थी। बत्तर कर्ता .. कभी कभी थोडी डबल मीनिंग बात भी कर देता है ..चाची भी हस्ती .. या दर्द से जवाब करती ..
कोमल मम के साथ कुछ नहीं हो रहा था बस..उसकी गंद या कमर देख के जब वो साड़ी पहनने के खाया..उफ्फ क्या फिगर एच कोमल मैडम का. ऊपर से उनके होथ। मन करता ज चुस के शुद्ध होठ खा जाउ.. कितने रसिले या मोटे ज उनके होठ.. मगर फिल्हाल तो कुछ कर नहीं सकते तो देख के ही काम चलते हैं..
कभी कोमल मैम ट्रांसपेरेंट सर्री फंती तो म उनको कल्पना करके भवानी की जांघों सेहलता .. या रूम प एकजे कोमल के नाम की मुथ मार्ता ..
खैर इसी रोज़ चूहे की तरह आज भी म या यश की माँ बात कर रहे थे..
अब उनको मेरी आदत होगी थी.. मेरे चूहे को बात की बिना सोती नहीं थी यश की माँ..
मेने 10 बाजे उन्को संदेश किया मगर उनका जवाब नहीं आया.. ऐने भोट रुको किया..
आंटी- हाय .. श्री अंज लेट होग्या
मैं- क्या ही.. इत्ती डेर से कहा थे..
आंटी-वो यश के पापा के सोने का इंतजार कर रही थी
मैं- क्यू आज वो सोया नहीं... क्या कर रहे थे?
आंटी- वो हमारा निजी मामला
मैं- अच्छा.. अब अपने बेस्ट फ्रेंड को भी नहीं बताऊंगा?
आंटी- अरे बाबा.. जो पति पत्नी के बिच होता ज वो ही कर रहे थे..
मैं- क्या होता है? मुझे तो नहीं पता
आंटी- भोले मत बनो..तुम्हे अच्छे से जनता हूं..
मैं- पर आपको बताता हूं क्या समस्या ज.. आप मुझे दोस्त नहीं मंती?
आंटी- अरे तुम ही तो एक मेरे इतने अच्छे दोस्त हो.. एसा क्यू बोल रहे हो
मैं- तो फिर बता दो
आंटी- भोट ज़िद्दी हो तुम.. सुनो .. एम या यश के पापा सेक्स कर रहे थे
मैं- ओहो..क्या बल्ला ज..आज से अपने भोत का आनंद लें किया मैटलैब
आंटी- कहा एन्जॉय यार.. खैर छोरो.. कुछ या बल्ले करते हो
मैं- क्या हुआ.. आप खुश नहीं लग रही.. आप संतुष्ट नहीं हुई क्या?
आंटी- तुमको इसे कोई मतलब नहीं होना चाहिए.. वो मेरे पति ज.. ये हमारा निजी मामला ज
मैं- इत्ती रूड क्यू बन रहे हो.. मत बताना ज तो मत बटाओ.. एम तो एक दोस्त के नाटे पुच रहा था.. अब कभी नहीं पुचुगा.. द्वारा
आंटी- अरे तो तुम गुसा क्यू कर रहे हो.. प्लीज.. बात करो.. तुम्हें पता ह् न म सिरफ तुमसे बात करती हूं..
मैं- तो फिर सच बताओ..
आंटी- yrr.. ठिक ज. सुना
मैं- बोलो
आंटी- वो अब ठक जाते ज तो मुझे संतुष्ट नहीं कर पाए ज़्यदा.. या जल्दी झड़ जाते ज..
मैं- तो फिर आप क्या करते हैं?
आंटी- कुछ नहीं। पत्नी क्या कर सक्ती ज.. वो तो उनका कम करके सो जाते ज.. मेरा काम तो अधूरा रह जाता ज..
मैं- अच्छा.. तो तुम समस्या ज.. टू अप फिंगरिंग कर लिया करो..
आंटी- नहीं। ये केसी बट्टे कर रहे हो..
मैं- इसमे गलत क्या ह.. आप किसी या के साथ थोड़ी ना सेक्स कर रहे हो..
आंटी- पार फिंगरिंग में केसे कर सक्ती हु.. मैंने कभी की नहीं ज
मैं- एक बार ट्राई करके तो देखो..
आंटी- नहीं मुझसे नहीं होगा..
मैं- आप केसी बट कर रही हो.. आज कल की लड़की तो क्या करती है.. या आपको चुत में उन्गली डालने तक नहीं अति.. मुझे तो शक एच अंकल आपको ठीक से छोटे होंगे के भी नहीं..
(मेने एसे डायरेक्ट वर्ड जेसे चुट या छोटे होगे.. पहली बार यूज किए द आंटी के सामने.. पता नहीं आंटी केसे रिएक्ट कार्ति)
थोड़ी देर से आया चाची का संदेश
आंटी- वो ठिक से ही करते हुए.. या तुम ये ये शब्द क्यू बोल रहे हो?
मैं- तो जो बोले उससे वही बोलुगा ना.. आप भी खुलके बोलिए.. बताइये अंकल आपको किस चोदते ज?
आंटी- प्लीज.. ये क्यू बोल रहे हो
मैं- मैं आपका सबसे अच्छा दोस्त हूं ना.. अपने ही बोला था.. तो आप सब चिज मुझसे शेयर कर स्कती एच.. एम किसी को नहीं बटुगा..
आंटी- पर तुम मेरे बेटे के दोस्त हो.. एम केसे?
मैं- आंटी यश के दोस्त से ज्यादा.. एम आपका दोस्त हूं..आप बेझिझक होके मेरे बल्ले करी..
आंटी- ठीक है
मैं- तो बताइये.. अनक्लपको किस चोदते ज?
आंटी- वो मुझे आला सुला के.. मेरे ऊपर अजते ज.. फिर उनका डालें करके.. 2 3 मिनट ढकके लगते हैं। या फिर उनका होगा ज.. या ठक के सो जाते ज..
मैं- बस? आप इसे सेक्स कहते हो? ये तो भोट बकवास ज.. ये तो कुछ भी नहीं ज.. पता नहीं एपी केसे कार्ति होगी का आनंद लें
आंटी- एम कार्ति हू एन्जॉय मुझे पता हो
मैं- आचा। बताइये अंकल का किट्टा बड़ा ज?
आंटी- क्या
मैं- उनका लुंडो
आंटी- ची.. केसे वर्ड यूज़ कर रहे हो.. उसे पेनिस बोले ज
मैं- हिंदी मी तो लुंड ही कहते हैं.. आप भी वही बोलो.. तो बताओ.. किट्टा बड़ा ज उनका लुंड?
आंटी- वो.. दरसाल..उनका कुछ 4 इंच का होगा
मैं- क्या? बास 4 इंच
आंटी- क्यू छोटा ज क्या.. मेने किसी या का लुंड नहीं देखा
मैं- छोटा नहीं भोट छोटा ज.. मेरा भी उनसे बड़ा हो
आंटी- जुथ.. कुछ भी मत बोलो..
मैं- प्रूफ चाहीये?
आंटी- केसा प्रूफ
मैं- आपको अपने लुंड की फोटो भेजू? आप बताना बड़ा या नहीं अंकल से
आंटी- नहीं.. म केसे देख सकती हूं.. तुम तो मेरे बेटे के दोस्त हो..
में-देखने में क्या जाता ज.. रुको।
(या मैंने उन्हें अपने लुंड की फोटो भेजी)
मैं- ह ना बड़ा?..
आंटी-तुमने फोटो क्यू भेजी
मैं-देखो तो.. शर्माओ मत
आंटी- हौ.. ये तो भोट बड़ा ज.. अंकल से लगभग डबल हाय ज..
मैं- इसे कहते हैं लुंड.. अंकल की तो लुल्ली हो
आंटी- सच में तुम्हारा तो बोहोत बड़ा ज..
मैं- क्या?
चाची- लिंग
मैं- लिंग हां लुंड
आंटी- लुंड..
मैं- ये हुई ना बात.. अपको पसंद आया..
आंटी- ये केसा सॉल ज.. मुझे इस्का जवाब नहीं देना..
मैं- ठिक एच मत दो..
आंटी- चलो अब सोती हु..
मैं- इत्ता जल्दी क्यू.. अभी तो भोट समय ज.. आप आज वेसे भी देर से ऑनलाइन ऐ..
आंटी- मुझे सोना ज..
मैं- सोना ह या चुत में उन्गली करनी ज?
आंटी- ची.. ऐसे क्यू बोल रहे हो.. मेने वसे भी कभी नहीं किया ये सब
मैं- आज कोशिश करो कार्लो
आंटी- केस
मैं- बस जो म बोलता जाउ। वो आप करते जाओ
(चाची भी गरम थी)
आंटी- क्या
मैं- अपने अभी क्या कहना ज?
आंटी- यश के पापा के साथ सेक्सकर रही थी। कुछ नहीं पहचान ज करने के लिए ..
मैं- अच्छा .. आपके हाथ अपने बूब्स पी राखो
आंटी- ठीक है
मैं- प्रेस करो अपने बूब्स
आंटी- हा कर रही हूँ
मैं- केसा लग रहा ज?
आंटी- भोट आचा.. ये तो मेरे कभी बूब्स प्रेस नहीं करते
(एम भी आंटी को नंगी अपने बूब्स प्रेस करते हुए कल्पना कर रहा था.. या लुंड सेहला रहा था)
मैं- अब एक हाथ आला चुत के पास लेजाओ.. या बहार बहार से चुत सेहलाओ..
(चाची अब गरम होगी थी.. इस्ली मेरी हर बात मन रही थी)
आंटी- ठीक है.. कर रही हूं..
मैं- केसा लग रहा ह सीमा?
आंटी- अम्.. भोट आचा..
मैं- लो इस्से इमेजिन करो.. या अपनी उन्गली चुत एम डालडो..
आंटी-तुमने वापिस क्यू भजी फोटो?
मैं- जेसा बोला ह वेसा करो
आंटी- ठीक है..
मैं- केसा लग रहा हो
आंटी- आह.. बोहोत अच्छा लग रहा है राज..मेने ये पहले क्यों नहीं किया..
मैं- आपके पास में नहीं था न इसलिय..
आंटी- हा... पर तुम मेरे बेटे के दोस्त हो ये सब करना गलत तो नहीं होगा?
मैं- आप फ़िकर मत करिये.. ये बात सिरफ़ आपके मेरे बिच म रहेगी.. ये गुमरा सीक्रेट ज.. आप भी खुल के एन्जॉय करिए..
आंटी- ओके.. थैंक यू राज.. तुम मेरे सच्चे दोस्त हो...
मैं- अब 2 अंगुली डालो.. या बताओ केसा लगा
आंटी- आह.. बोहोत मजा आ रहा राज.. इतना मजा तो ये छोटे ज तब भी नहीं आता..
मैं- ओहो.. सेक्स से सिद्ध छुडाई प.. वाह
आंटी- अभी तुमने ही तो बोला की खुल के बात करू
मैं- अच्छी बात ज.. जलदी सिख गई एपी..
आंटी- ह्म्म्म..
(मेने सोचा आंटी अब बोहोत गरम ज.. अब सही मोका ज मेरे लुंड के लिए जाने का)
में- वेसे आंटी अपने बताया नहीं.. आपको मेरा लुंड केसा लगा?
आंटी,- बोहोत बड़ा हो
मैं- क्या?
आंटी- तुम्हारा लुंड बोहोत बड़ा हो
मैं- आपको पसंद आया:
आंटी-आह। हाँ.. राज..
मैं- क्या हुआ आंटी
आंटी- एम आने वाली हु राज... आह
में- निकल दो सारा पानी आंटी.. अपनी चुत को आज संतोष करदो..
फ़िर आंटी का कुछ मिनट तक जवाब नहीं आया..
आंटी- हो गया.. थैंक यू.. तुमने मुझे आज वो किया जो मैंने पहले नहीं किया था.. वो भी मेरे दोस्त के बेटे साथ..
मैं- मैं आपका भी तो दोस्त हूं.. आप चाहो तो म आपको या चिजे भी पढ़ा सकता हूं..
आंटी- जरूर.. पर आज के लिए बोहोत ज.. अब म सोती हूं.. जीएन.. और फिर से धन्यवाद..
मैं- ठीक है.. Gn
यश की माँ अब मुझे पाट ती हुई दिख रही थी.. जिस तरह से उसे बात की थी आज फोन पी.. वसे लगता था आगे चले वो मुझे अपनी चुत भी दे देगी..
एम फ्र सो गया..
अगले दिन हम स्कूल पोछे..
कुशल भाविनी या म साथ म बछोड़ी कर रे द क्लास एम..आज हमारे गेम्स पीरियड था.. तो सब खेलने चले गए..
एम या भाविनी चुपके से अलग निकल गए। खैर एम या भाविनी सबकी नजरो से बचे हुए वहा पोछे..और अंदर से रूम बंद कर दिया..
फ़िर एम या भाविनी एक दसरे से लिपट गए .. या एक दसरे को चोम्ने लगे
मैंने भविनी की शर्ट उतर दी.. या खुद भी पूरा नंगा हो गया.. भाविनी स्कर्ट या ब्रा एम थी.. उसे अभी तक उसके स्तन नंगे नहीं दिखे थे.. हमेशा ब्रा पहनने की रक्षा थी.. इस्लीए आज मैने उसे बोला की आज तेरे बूबे देख के राहुगा..
मैं- आज तो दीखेड़े तेरे बूबे
भाविनी- नहीं .. आह:
मैंने फिर अपनी 2 उनगली उसकी चुत में एक ही बार म दाल दी..
भाविनी- आह .. मदरचोद .. मारेगा क्या
मैं- खोल ब्रा नहीं तो 3श्री उन्गली भी दाल दूंगा..
भाविनी- भोट मदरछोड़ ह तू .. आह .. निकलती हु
फिर भाविनी ने अपनी ब्रा निकली.. उफ्फ्फ... क्या बताओ..उसके बड़े बड़े बूबे.. उसके ऊपर से निप्पल खड़े हुए.. मैने हाथ में लिए या दबने लगा..
इतने सॉफ्ट बूब थे.. एकदम रुई की तरह.. मैंने उसके बूब्स ऊपर निचे करके हिलाए.. एम उनका हिलाता.. तो थोड़ी देर हिलते या फिर अपनी जगाह पी.. क्या मस्त सीन था..
मेने भाविनी के डोनो निप्पल को पक्का दोनो हाथो से.. या उनको खिचने लग... भाविनी के निपल्स भोट सेंसिटिव द
भाविनी- अम्म्म .. आह .. धीरे राज .. मम्म
मैं- आज धीरे नहीं क्रुगा.. इतना तरसया तूने इनको नंगा देखने के लिए..
या एम डोनो हाथ से उनको मसाला लगा.. उस्के बूब्स पी मेरे हाथ के निशान हो गए थे.. बूब्स लाल होंगे द.. दबने से
भाविनी- ले.. मु में लेके चुस ना
या भाविनी ने अपने हाथों से मेरा चेहरा पकाड़ के आने बूब्स एम डाबा दिया
मुझमें भी उसके बूब्स चुस्ने लगा..
उसकी निप्पल को मु में होथो के बिच डाबा के खिचने लगा.. या चुस्ने लगा...
भाविनी- आह.. हा यही चुस मेरे बूब्स
मैंने अपनी जीभ बहार निकली या भाविनी के निपल्स के aspas tounge से चैटे लगा .. भाविनी भोट हॉर्नी होंगे इस्से ..
या अपनी गंद अगे पिचे कर के झटके मारने लगी..
मैंने अपनी उंगली भवानी की चुत म डाली या अंदर बहार करने लगा... या दसरे हाथ से भाविनी के बूबे दबने लगा... भाविनी ने अपने हाथ मेरे गाले म दाल दिए या मेरे बाल सेहला रही थी।
भाविनी- आह भोट मजा आ रहा ज.. करता रह..मम्म.. आह या तेज
मैंने भी उनगलियो की स्पीड बढ़ा दी या तेज से अंदर भर करने लगा..
कुछ ही डर म भाविनी- में आने वाली हूं.. आह..
या भाविनी झड़ गई .. आज भाविनी ने भोट पानी निकला था .. मेने उनगली बहार निकल के .. उसे उसकी छुट का पानी दिखया .. भाविनी ने उनगली पकाड़ के मेरे म म दाल दी ..
भाविनी- चैट के तो बता की केसा ज मेरी चुत का पानी
मैं- मिमी.. भोट अच्छा ज.. मेरा स्वाद करेगा..
बुआविनी- हा.. अभी निकलती हु..
या भाविनी ने हाथो से मेरा लुंड पक्का लिया या हिलाने लगी..
मैं- अरे रुक..
या भाविनी के हाथ पक्के लिए..
भाविनी- क्या हुआ.. मुझे रोक क्यू दिया
मैं- आज हाथो से नहीं अपने बूब्स से मेरा लुंड हिला..
भाविनी ने भी एक नॉटी स्माइल दी..
या घुटनो के बाल बेथ गई..
अब उसके बूब्स या म्यू मेरे लुंड के सामने थे.. उसके दोनो हाथ से अपने बूब्स पके.. या मैंने अपने हाथ से लुंड पकाड़ के उसके बूब्स के बिच एम दाल दिया..
अब भाविनी ने अपने दो हाथो से अपने स्तन को मेरे लुंड पी प्रेस किया.. मेरा लुंड पुरा उसके दोनो स्तन के बिच एम गस गया था..
भाविनी-एसे?
मैं- हा..आह यही कर सल्ली..
या भाविनी मुझे बूब्सजॉब देने लगी..
अपने बूबे से मेरी मुठ मारने लगी..
उसके बूब्स के बिच एम जब मेरा लुंड हिलता तो क्या मजा आता क्या बताता..
उसके इतने सॉफ्ट बूब्स या मेरा हार्ड लुंड.. आपस में रहे थे.. रागद खा रहे थे.. इसी भाविनी अपने बूब्स से मेरा लुंड हिलाती रही.. या कुछ डर में मैं आने वाला था
मैं- एम चटनी वाला हूं भाविनी .. अम्म्म .. अहो
भाविनी- अजा। मेरे बूब्स पी ही निकल तेरा मुठ
मैं- ले .. सल्ली ..
या एम भाविनी के बूब्स के ऊपर ही झड़ गया..
भाविनी खादी हुई.. या आने बूब्स से मेरा मुथ उनगली एम लेके चैट लगी..
मैं- केसा लगा
भाविनी- भोट सुपर .. थोड़ा खरा या नमकीन हो
मैं- पसंद आया तुझे
भाविनी- हा.. पर तु मेरे बूब्स टू ट्यून प्योर भर दिए अपने मुथ से
Me- अपने बूब्स p masal d to.. Cream samjh k..
भाविनी- अच्छा विचार
या भाविनी ने मेरा मुथ अपने बूब्स या निप्पल पी मसाला..
मैं-देख अब के चमक रहे ज तेरे बूब्स
भाविनी- हा। सच एम.. चल अब मेरी ब्रा पहनना डी
या भाविनी अल्टी खादी होगी
में भाविनी की ब्रा लेके उसे पहनने लगा.. उसे मुझे बताया की ब्रा केसे लगाना ज.. हुक लगाना बताय.. फिर मेने उसे ब्रा उससे लगाना दी..
फ़िर हम बहार गए .. क्यूकी गेम्स पीरियड ख़तम होने वाला था .. या बिना किसी की नार्ज़्रो में खाया हुआ .. वापिस क्लास एम अगाये बाकी सब बचाओ के साथ ..
कुछ दिन यही चलता रहा.. कुछ खास नहीं हुआ.. फिर शनिवार को हम स्कूल गए.. वहा भी कुछ खास नहीं हुआ.. शनिवार को रात को मैंने सोचा आज आंटी से हम दिन जेसी बल्ले की जाएं..
मेने चाची को संदेश किया करिब 10 बजे
मैं- हाय सीमा
आंटी- हाय राजो
मैं- अंकल सो गे?
आंटी- हा वो तो सो गई
मेने फिर आंटी को कॉल लगा दिया..
आंटी ने कॉल पिक किया..
आंटी (धीर आवाज़ में) - कॉल क्यू कर रहे हैं अभी.. ये पास मुझे हाय सो रहे ह..उठ गए तो?
मैं- तो एक काम करो.. दसरे रूम एम चली जाओ
आंटी- नहीं.. कल बत्त करेंगे.. फिर संदेश प बात करो
मैं- नहीं मैं कॉल करने के लिए पी हाय बत्त करुगा .. तुम्हारी आवाज सुन नी हो
आंटी- जिद मत करो..
मैं- बल्ले करो लिखना म आगे से कभी बत्त नहीं क्रंगा.. अब आपकी मर्जी ज
आंटी- yrr.. क्यू ज़िद कर रहे हो.. ठिक ह जाती हूं.. रुको............ लो आ गई। अब बोलो
मैं- गुड गर्ल..
आंटी- एम कहा से तुम्हें गर्ल लगती हूं.. एम तो बुद्धि हो गई हूं..
मैं- अरे एपी तो अभी भी भोट सुंदर हो
आंटी- मस्का मत लगाओ.. जूठी तारिफ करते हो
मैं- नहीं आंटी.. आप जैसी गर्लफ्रेंड हो तो स्कूल की लड़की भी पिचे चोर दो एपी
आंटी- अच्छा बच्चू.. अपने दोस्त की माँ पी लाइन मार रहे हो..
मैं- आपके मेरे बिच में हम दिन जो हुआ था.. चैट प वो भूल गए क्या?
आंटी- मुझे तो कुछ याद नहीं आ रहा..
मैं- जब आप मेरे नंगे म सोच के चुत में उन्गली कर रही थी
आंटी- तून भोट गंडे हो.. हा याद आ गया..
मैं- पर आप हमारे लिए दिन बोल रही थी की आपको पसंद आया:
आंटी- के.. क्या
मैं- मेरा लुंड
आंटी- हम्म.. वो ... वो मुझे.. वो मुझे बस.. हम समय थोड़ा मूड में थी इसलिय..
मैं- अच्छा.. अभी मूड में नहीं हो?
आंटी- नहीं.. अभी नहीं..
मैं- आजो मूड को
आंटी- केस
मैं- जो बोलुगा वो करोगे
आंटी- हम्म
मैं- कमरे का ताला करलो पहले
आंटी- ठीक है
(यश की माँ के साथ फले एसा हुआ नहीं था.. या ऊपर से उनके दोस्त के साथ सेक्स कॉल या सेक्स चैट उनके लिए भोट नया था.. इसलिये वो उत्तेजित हो जाती थी.. इस्लिये म जैसा बोलता था वस कार्ति थी)
मैं- सब करोगे जो एम बोलुगा?
आंटी- पर सिरफ फोन पी.. या फिर किसी को बताना मत प्लीज.. यश को भी नहीं
मैं- आप चिंता मत करो
आंटी- ठिक ज.. बताओ क्या करना है
मैं- अपने क्या फना हो
आंटी- नाइटी..
मैं- या अंदर?
आंटी-अंदर कुछ नहीं:
Me- nighty k upar upar se apne boobs dabao
आंटी- अम्म... हा.. दबा रही हु..
मैं- या ज़ोर से दाबाओ
आंटी- अम्म.. हा
मैं- एक काम करो ईयरफोन लगा लो..
आंटी- ठिक ज.. रुको... हा लगा लिया
मैं- अब फोन साइड एम रख दो.. या दो हाथो से बूब्स डबो अपने..
आंटी- आह.. हम्म.. यश के पापा तो कभी नहीं दबते हैं.. क्या ये अच्छे नहीं लगते..
मैं- आपके बूब्स तो बोहोत मस्त ज.. ऐप इट्टी गोरी ज.. टू बूब्स किट्टे गोररे होगे.. काश एम देख पता..
आंटी-देखोगे?
मैं- आप दिखोगे?
आंटी- अम्म्म .. ठिक ज .. फोटो भजती हु .. फोन चालू रखना ..
(फिर आंटी ने फोटो भेजा.. वसे तो रात को राखी थी.. मगर उसमे भी आंटी के अधे से ज्यादा बूब्स दीज जा.. एसा फोटो क्लिक करें भाजा था आंटी ने.. पर निपल्स नहीं दिख रहे थे)
मे- yrr.. क्या माल हो yrr ap to.. इतनी हॉट हो
आंटी- हा.. अम्म..(चाची की सांस तेज चल रही थी)
क्या म माल हु..?
मैं- आप सच्ची माल हो.. मन कर रहा ज..आपके स्तन अभी अक्के चुस लू
आंटी..आह..अम्म.. तुम ये सब बोले हो तो..आह्ह्ह.. अच्छा लगता है... अम्म्म...
मैं- अब एक हाथ से अपनी चुत सेहलो
आंटी- हम्म... जेसा तुम बोलो..अम्म... आह.. ये तो बहुत गिली हो गई ज..
मैं- फिर इस्मे उन्गली दल दे जान
आंटी- आह जान.. जान ही बुलाओ मुझे.. अच्छा..अम लग रहा ज..
मैं- और बहार करो..
आंटी की सांसे तेज चल रही थी..
आंटी- हा.. सुना ना..
मैं- बोलो
आंटी- हम दिन जो फोटो भेजी थी वो भीजो ना
मैं- नहीं..
आंटी..आह.. अम्म.. प्लीज. भेजो ना..
मैं- मुझे क्या मिलेगा बदले में
आंटी- तुम जो बोलोगे वो करुगी..प्लीज.. अम्म..
मैं- वादा करो..
आंटी- तुम जी बोलोगे वो करुगी..उम्म.. प्रॉमिस...आह..आह..पर सिरफ एक ही चिज करुगी..मम्म..
मैं- एक भी चलेगा.. ठीक एच मंजूर. बताओ किसके फोटो चाहिए
आंटी- हम दिन भीगी थी वो.. हम्म्म्म...आह
मैं- मुझे तो कुछ याद नहीं ज..
आंटी- yrr.. आह। क्यू ..कर रहे हो .. आह .. एसा ..
मैं- बताओ तो किसकी फोटो
आंटी- तुम्हारे.. लुंड ही.. ये सुन न चाहते हो ना..
आंटी के मु से उनकी ही आवाज में लुंड सुन के मेरा लुंड खड़ा होगा.. मेने भी लुंड बहार निकला..
मैं- मैं भेज तो दूंगा.. मगर अभी वो खड़ा नहीं होगा.. उसे खड़ा करना पड़ेगा..
आंटी-अम्म.. तो केसे खड़ा होगा वो..हम्म आह
मैं- लुंड मु मे लो
मुझे लगा आंटी मना कर देंगे..मगर आंटी ने तो मेरा दिल ही जीत लिया..
आंटी- ओके.. ले रही हु..
मैं- आह .. सीमा .. सच्ची एम तुझे लुंड चुनना ह मेरा?
आंटी- नहीं। ये सिर्फ हम फोन पी कर रहे हैं
मैं- ठीक है.. फोन पी हाय। चुस प्राथमिकी ..
आंटी- हा.. बोहोत बड़ा ज तेरा लुंड
मैं- तोपा चैट मेरा
आंटी- अनम...आह चैट रही हूं जान..
मैं- ऊपर से आला तक चैट अपनी जीभ से
आंटी.. हम्म्.. अम्म्म.. भोट टेस्टी ज.. अम्म्म
मुझसे तो बहुत मजा आ रहा था.. भले ही आंटी असली में मेरा लुंड नहीं चुस रही हो.. मगर उनकी आवाज से या मौन से ही मुझे भोट मजा आ रहा था
मैं- आह.. क्या छूटी तू साली.. कार्ति रह..
आंटी- अम्म.. अपको पसंद आया न.. अम्म्म अम्म अम्म स्लर्र्प slurrppp..
मैं- पुरा मु में ले..कुटिया
आंटी- आह.. म क्या तुम्हारी कूटिया हु..
मैं- हा साली.. तू मेरी कुटिया ज..
आंटी- आह्ह्हा..सल्ले.. अच्छा लग रहा है.. एसा पहले कभी महसूस नहीं हुआ..मम्मम्म
मैं- तो बनेगा तू मेरी कुटिया
आंटी- हा.. मुझे खुशी होगी.. मम्म्म..आह्ह..
मैं- चल ले फोटो..
या मेने आंटी को मेरे लुंड की फोटो भेजी..
आंटी- बोहोत अच्छा ज लुंड.. छोजने में मजा आएगा कितना..अम्म..
(एम सोच रहा था.. आंटी एसे तो बोहोत साड़ी सावित्री बंटी ज.. मगर जब चुत गिल्ली हो तब मेरी कुटिया भी बन ने को त्यार ज)
मैं- तो चुस ले ने..कुटिया
फिर मेने लुंड हिलाते हुए.. आंटी को वीडियो भी..
आंटी-.. आह.. साले.. क्या लुंड ज.. देखने में इतना मजा आ रहा है.. चुदुगी इसे तो कितना मजा आएगा..
मैं- इसे चुत में लेले..
आंटी- आह.. अम्म.. ले रही हु..
मैं- पुरा ले साली
आंटी- आह .. आआआह्ह्ह .. बोहोत बड़ा ह तेरा .. आह .. धीरे दाल .. आह .. मम्मम्म .. आह .. जान ... प्लीज... दर्द हो रहा ज
मैं- साली अभी तो फोन पी ही बात कर रहे हैं.. जब असली में डालेंगे तब क्या करेंगे..
आंटी- नहीं.. असली में नहीं.. बस आह्ह.. अम्म.. फोन पी हाय
मैं- ठिक ह.. चल.. पीठ के बल ले जा... या अपनी टंगे ऊपर काकरे फेलले.. एम टको मिशनरी पोजीशन एम छोडुगा.. तू मेरे आला.. या मैं तेरे ऊपर..
आंटी-.. हा..आह.. छोड मुझे..जानी
मैं- हा.. साली..
आंटी- मुझे... आम आहा मुझे गलियां द ना राज..
मैं- कुटिया सल्ली.. मां की लोदी.. रंडी.. केसा लगा मेरा लुंड तेरी चुत में..
आंटी- आह .. बोहोत आचा .. आहाह। यही करते रहो... आह जान... बोहोत अच्छा... लग... हम्म रहा ज....
Me- चल अब कुटिया बन जा.. मतलाब कुत्ता मुझे आजा ..
आंटी- हा। अगायी जान..
मैं- चल अब अपनी फोटो भेज हमें स्थिति मुझे..
आंटी- हा.. रुक..
फ़िर आंटी ने फोटो भेजा.. आंटी पुरी नंगी थी हम फोटो मी... या कुटिया बनी हुई थी बिस्तर पी..उसने आगे से फोटो क्लिक करके भेजा था.. उसे लाते हुए हुए बूब्स दिख रहे थे..
में साली.. क्या माल ज तू कुटिया.. तो तो रंडी बना के छोडुगा..
आंटी- आह.. तो बनेंगी.. अपनी रंडी.. अम्म.. आहः... जान.. छोड मुझे
मैं- ले.. साली.. कुटिया...ले..
आंटी- हा। आह .. आह ..आह .. या तेज़ जान .. आह .. या तेज़ ..
मुझे- तो छोड ते हुए तेरी गंद प चैट मारुगा साली..
आंटी- हा..मार.. लाल करदे मेरी गंद...
मैं- हा.ए. lllee.. साली.. Randi
आंटी- हा... यार..आह.. छोड मुझे.. छोड अपने दोस्त की माँ को..आह.. बना ले अपनी दोस्त की माँ को अपनी रंदी कुटिया..
मैं- हा साली.. ले या तेज.. फट फट फट फट...
आंटी- आह जान... अम्म। मेरा निकलने वाला ज... आह.. मेरी चुत.. आह
मैं- आजा साली.. निकल डी अपना पानी..
आंटी- आह... आआआहज... अम्म्म...आह्ह्ह... नन्नन..हम्म...आह जान..आह..
या आंटी की सांसो की आवाज़ तेज़ होगी..
या कुछ दूसरा बुरा आंटी झाड गई..
आंटी- आह। राज.. धन्यवाद.. मेरी चुत की प्यास बुझाने के लिए..
मैं- कोई बात नहीं.. एक दोस्त होने के नाते में इतना तो कर ही सकता हूं..
आंटी- हा..सच म... थैंक यू..
मैं- या बताओ।?
आंटी- yrr.. तुम मेरे बेटे के दोस्त हो.. ये सोच की मेरी छुट या ज़िदा पानी छोरी ज..
मेरा भी लुंड खड़ा होता ज सोच के.. की आप मेरे दोस्त की माँ हो.. या मेरे साथ सेक्स कॉल कार्ति हो..
आंटी- हा.. तुम्हारा लिउंड तो मुझे पसंद ज..
मैं- हा जान..
आंटी- साल राज.. पतानही तुम समझोगे या नहीं.. पर मुझे तो तुम बहुत पसंद हो.. तुम मुझे जो खुशी देते हो.. वो कोई नहीं देता.. मैं सच में तुमसे प्यार करता हूं..
मैं- तो आप मेरे प्यार कर्ता ज?
आंटी- हा.. यार.. मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं.. पर तुम मुझसे प्यार नहीं करते तो कोई बात नहीं.. बस मुझे इस खुश करा करो..
मैं, - ठिक ह सीमा .. तुझे खुश कर्ता रहुगा ..
आंटी- थैंक यू जान.. उम्म्म्माआह्ह्ह..
मैं-तुम किस लिए?
आंटी- तुम्हारे लिए..
मैं- कहा प?
आंटी- तुम्हारे होठो पर...
मैं- या लुंड के लिए?
आंटी- अरे उसके लिए 2 किस.. उम्म्माआह्ह्ह.. उम्म्माह..
मैं-टी सीमा
आंटी- हम्म.. चलो अब एम राखी हु.. कल बत्त करेंगे..
मैं- थिक एच बाय ..
आंटी- ओके बाय
फिर कॉल कट कर दीया आंटी ने...इतना मजा पहली बार आया ज..भविनी के साथ और ज.. मगर बड़ी उमर की औरतो का अलग ही मजा ज.. या उलेर से मेरे दोस्त की मां... जो मुझे मैं लव यू बोल रही थी.. उसमे तो भोट ही ज्यादा मजा ज.. उम्र तो या मजा आने वाला सीमा के साथ.. ये सोच के.. मेने एक बार या मुथ मारी.. आज की कॉल याद करते हुए.. या सीमा ने जो फोटो भजी थी वो देखते हुए... फिर म सो गया....
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