रिश्तो पर कालिख Chapter 1

 


रिश्तो पर कालिख  Chapter 1



राजस्थान एक ऐसा स्टेट जो अपने रंगो के लिए मशहूर है यहाँ एक ओर तो रेत का समंदर एक तरफ़ अरावली की विशाल पहाड़िया ऑर एक ओर मेरा शाहर है उदयपुर.


यहाँ की फ़िज़ा अपने अंदर वो सारे रंग समेटे हुए है जो किसी भी मौसम को ख़ुशगवार बना देता है.


यहा मेरा एक प्यारा सा घर है जिसके पेड़ो जिसके आँगन में खेलते हुए मेरा बचपन बीत रहा है..


में अपने बारे में बता डूब मेरा नाम जय गुप्ता है थोड़ा सावला हूँ लेकिन दिखने में बुरा नही हूँ.,मैने अभी अपना स्कूल ख़तम किया है ओर उदयपूर के एक प्राइवेट कॉलेज में दाखिला लिया है.


मेरे पापा किशोर गुप्ता एक बिज़नेस मॅन है हमारा डाइमंड्स का बहोत बड़ा बिज़्नेस है जो कि अलग अलग सिटीज में फैला हुआ है.



मेरी मम्मी संध्या गुप्ता वो एक हाउसवाइफ है लेकिन वो एक हाउसवाइफ के साथ साथ एक एनजीओ भी चलाती है.


मेरे बड़े भैया. राज गुप्ता जो कि पापा के साथ उनके बिज़्नेस में हाथ बटाते है, काफ़ी खुश मिज़ाज है.. मुझे आज भी वो एक बच्चे की तरह ट्रीट करते है.


मेरी भाभी नेहा गुप्ता जितनी वो सुंदर है उस से ज़्यादा उनका दिल सुंदर है वो हमेशा मेरा ख्याल रखती है वो पहले एक डॉक्टर थी लेकिन शादी के बाद उन्होने वो बंद कर दिया.



मेरी बड़ी बहन रूही गुप्ता बिल्कुल एक बार्बी डॉल की तरह वो मेरे ही कॉलेज में है मुझ से एक साल सीनियर , वो मेरे बिना एक पल नही रह सकती चाहे जब वो घर के बाहर हो या घर के अंदर वो हमेशा मेरे साथ रहती है.



मेरी छोटी बहन नीरा गुप्ता मासूम इतनी कि गुस्से से आप उसकी तरफ़ देख नही सकते उसको देखते ही गुस्सा हवा हो जाता है , ऑर जितनी वो मासूम है उस से कही ज़्यादा वो शैतान है,एक बार उसने एक छिपकली पकड़ के मेरी टी शर्ट में डाल दी जब में सो रहा था...खूब उत्पात मचाती है लेकिन सब से ज़्यादा वो मुझे प्यारी है, में अपनी जान से भी ज़्यादा अपनी छोटी बहन को प्यार करता हूँ उसकी आँखो में आँसू का एक क़तरा मेरे पूरे वजूद को हिला देता है.


सवेरा...... एक ऐसा शब्द जो अहसास दिलाता है,रात के ख्तम होने का.


ऐसा ही एक दिन सवेरे सवेरे.



ज़य....जय...उठ भी जा कितना सोएगा , जल्दी से उठ आज बहोत काम है.


में..रूही दीदी सोने दो ना आज तो सनडे है क्यो मुझे उठा रही हो.


रूही..उठ जा गधे.. आज नीरा का बर्त डे है उसको लेकर मंदिर जाना है.


में नीरा का नाम सुनते ही तुरंत खड़ा हो जाता हूँ.


में ..क्या दीदी पहले नही उठा सकती थी क्या? नीरा कहाँ है क्या वो उठ गयी?


रूही..गधे इसीलिए तुझे उठाया है वो महारानी अभी तक सो रही है..जाक्र उसे बर्तडे विश कर ऑर उठा उसको.


में तुरंत भाग के नीरा के कमरे में पहुँचता हूँ.


उसे देखते ही में वही रुक जाता हूँ कितनी मासूमियत झलक रही थी नीरा के चेहरे से आज वो 19 साल की हो गयी है,ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो, में उसे अपनी गोद में उठाए उठाए पूरे घर में भागा करता था.उसकी एक मुस्कुराहट पर में नाचने लगता था आज पूरे 19 साल हो गये नीरा को मेरे जीवन में आए हुए.


में धीरे से उसके बेड की तरफ़ जाता हूँ उसके सिरहाने बैठ के उसके चेहरे पर आए उसके बाल हटा कर प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरने लगता हूँ.


रूही ये सब दरवाजे पर खड़ी होकर देख रही थी . फिर रूही ने धीरे से मुझे आवाज़ लगाई जय....


मैने उनकी तरफ़ देखा तो वो आपनी आँखे गुस्से से बड़ी बड़ी करके मुझे इशारे से नीरा को उठाने को कह रही थी..मैने उनको रुकने का इशारा किया ऑर नीरा के माथे को चूम कर धीरे से उसके कान में कहा,... हॅपी बर्त डे माइ स्वीट एंजल ऑर नीरा ने अपनी आँखे खोल कर मुझे अपने गले से लगा लिया ऑर कहने लगी .


नीरा..भैया बर्तडे तो विश कर दिया लेकिन मेरा गिफ्ट कहाँ है.


में..पहले तैयार हो जा मंदिर जाना है उसके बाद तू जो बोलेगी वो लेकर दूँगा तुझे गिफ्ट में.


नीरा..भैया गिफ्ट आप को देना है इसलिए पसंद भी आप करोगे ऑर लेने भी जाओगे अकेले आप.


में..ठीक है महारानी जी जैसी आपकी इक्षा.


उसके बाद हम सभी मंदिर जाने के लोए तैयार होने में लग गये....


हम लोग मंदिर जाने के लिए तैयार हो गये में अपने रूम से सीढ़िया उतर कर हॉल में आया तो नीचे मम्मी ऑर पापा हॉल में ही थे. पापा ने एक वाइट कुर्ता ओर चूड़ीदार पाजामा पहना था ऑर मम्मी ने एक लाल रंग की बँधेज वाली साड़ी पहनी थी वो इस साड़ी में बहोत खूबसूरत लग रही थी. थोड़ी देर में भाभी ऑर भैया भी वहाँ आगये भैया ने भी कुर्ता ओर चूड़ीदार पहना था. जबकि भाभी ने गोल्डन रेड कलर की साड़ी ऑर उसके मॅचिंग का ब्लाउस पहना था जो कि उनकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था.


फिर रूही ऑर नीरा नीचे उतरी वो दोनो ही जन्नत. से आई परी की तरह खूबसूरत लग रही थी.


रूही ने जीन्स ओर एक पिंक कलर की कुरती पहनी थी.


ऑर नीरा ने एक येल्लो कलर की फ्रोक


में दोनो की खूबसूरती में लगभग खो सा गया .


तभी पापा की आवाज़ से मेरा ध्यान भंग हुआ .


पापा..जय हम सभी लोग एक कार में तो आ नही पाएँगे तू एक काम कर या तो दूसरी कार उठा ले या फिर बाइक से हमारे साथ चल.


में..पापा मुझे कार चलाना पसंद नही है वेसए भी सुबह सुबह ताज़ी हवा में बाइक चलाने का मज़ा कुछ ऑर ही है में बाइक से आ जाउन्गा पापा,


पापा..तो फिर ठीक है हम लोग कार में आते है तू तेरी बाइक संभाल.



रूही..पापा में भी जय के साथ बाइक पर ही आउन्गि.


पापा..ठीक है चलो फिर जल्दी नही तो मंदिर में भीड़ ज़्यादा हो जाएगी.


ऑर उसके बाद हम मंदिर के लिए निकल पड़ते है मेरे पास रॉयल एनफील्ड. बाइक थी.


रूही अपने पैर एक तरफ़ करके मेरे कंधे पर हाथ रख कर बैठ गयी बीच रास्ते में ऐसी काई जगह आई जहाँ मुझे तेज़ी से ब्रेक लगाने पड़ते थे.


ऑर इसी वजह से रूही मुझ से बिल्कुल चिपक जाती थी..मुझे काफ़ी अजीब लग रहा था एक तो सुबह सुबह की ठंड ऑर उस पर रूही के बदन की गर्मी मेरी सोच बदल रही थी मेने अपनी सोच पर शर्मिंदा होते हुए अपने सिर को झटका दिया ऑर गाड़ी सीधा मंदिर की पार्किंग में लगा दी...


मंदिर में पहुँच कर हमने पूजा करवाई ऑर वहाँ सभी ग़रीबो को नीरा के हाथ से मिठाई फ्रूट ऑर पैसे बटवाए सभी को वो स्नेह से देती जा रही थी ऑर बदले में उनका आशीर्वाद लेती जा रही थी.


में उस के पीछे पीछे सब सामान का टोकरा उठाए घूम रहा था वो उस टोकरे में से खुल्ले हाथो से दान कर रही थी.

फिर हम भगवान का आशीर्वाद ले कर निकलने लगे ऑर पापा ने अपनी जेब में से चेक बुक निकाल कर उसमें 5 लाख का अमाउंट भर के मंदिर की दान पेटी में डाल दिया.उसके बाद हम घर की तरफ़ निकल पड़े इस बार रूही की जगह. मेरे साथ बाइक पर नीरा बैठी थी वो बिल्कुल मुझ से चिपक कर बाते कर रही थी.



नीरा...भैया शाम को क्या गिफ्ट दोगे मुझे



में...गिफ्ट बता के थोड़े ही लाउन्गा अब..तूने ही तो कहा था कि आप अपनी पसंद से लेकर आना.


नीरा...भैया ऐसे तो आप कुछ भी उठा कर ले आओगे , मुझे ऐसी चीज़ चाहिए जो हमेशा मुझे आपकी याद दिलाती रहे.



में--हाँ मेरी स्वीटू में ऐसा हे कुछ लाउन्गा तो गिफ्ट के बारे में ज़्यादा सोच मत.



ओर फिर हम घर पहोच गये...


घर पहोच कर मम्मी किचन में घुस गयी क्योकि पापा ओर भैया के शोरुम जाने का टाइम हो गया था. में भी मम्मी के पास किचन में चला गया मम्मी ने मुझे भाभी को बुलाकर लाने के लिए कहा.


में फट से भागते हुए भाभी के रूम की तरफ़ चला गया भाभी के रूम का दरवाजा खोलते ही मेरे होश उड़ गये भाभी इस समय एक रेड पेटिकोट में थी ऑर उपर एक वाइट ब्रा में खड़ी थी,


में उनको बस देखता ही रह गया उनका ध्यान अपने मोबाइल में था उनके उभार ब्रा को फाड़ कर आने के लिए तड़प रहे थे तभी भाभी ने मेरी तरफ़ देख लिया ऑर वहाँ पड़ी साड़ी उठा कर अपनी चुचियों को ढकने लगी.


मैने उन से सॉरी कहा ऑर वहाँ से चुप चाप निकल गया ...मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था आज सुबह से ही सब कुछ गड़बड़ हो रहा रहा था ...


पहले रूही का चिपकना फिर नीरा का बिल्कुल चिपक कर बात करना ऑर ये अब भाभी को इस हालत मे देख लेना .


मेरा सिर फटने लगा था मन में इतनी ग्लानि आ गयी थी कि में भाग कर अपने रूम में चला गया.....


उधर भाभी किचन में आकर मम्मी का काम में हाथ बटा रही थी.


भैया ऑर पापा नाश्ता कर के शोरुम के लिए निकल गये .


इधर रूही मेरे कमरे में आ जाती है.



रूही--क्या हुआ तेरे चेहरे पर 12 क्यो बजे हुए है किसीने कुछ कह दिया क्या.


रूही मुझ से बिल्कुल सॅट कर बैठी थी उसकी जांघे मेरी जाँघो से टच हो रही थी.



में--कुछ नही दीदी बस ऐसे ही सिर दुख रहा था.



रूही--अरे मेरे भाई सुबह सुबह ठंडी हवा लग गयी तेरे सिर में रुक में तेरा सिर दबा देती हूँ .


फिर रूही मेरे सिर को खेंच के अपनी गोद मे रख लेती है मेरा मूह रूही की नाभि के पास आगया था ऑर मेरे कानो के उपर रूही के दोनो बूब्स का दबाव पड़ने लगा.


रूही के बदन को खुसबू मेरी मर्यादा की नीव हिला रही थी मेरे पूरे बदन में तूफान उठ रहा था रूही के जिस्म की गर्मी मेरे होश उड़ा रही थी...


तभी मैने खूद को काबू में रख कर रूही की गोद में से सिर हटा लिया ऑर बेड पर सीधा लेट गया उसके बाद रूही मेरे सिर को धीरे धीरे दबा रही थी ऑर अब जाकर मेरी सांस में सांस आई थी. थोड़ी देर मे मुझे नींद आगयि....


रूही मेरा सिर दबा रही थी ऑर उसके कोमल हाथो के जादू से कब मुझे नींद आगयि मुझे पता ही नही चला.


ज़य भैया उठ जाओ शाम के 4 बज गये है कब तक सोते रहोगे ये आवाज़ में लाखो लोगो की भीड़ में भी पहचान सकता हूँ ये नीरा की आवाज़ थी...


में तुरंत उठ के बैठ जाता हूँ.


नीरा--भैया शाम को घर में पार्टी है ऑर आप अभी तक सो रहे हो , मेरे लिए गिफ्ट लाओगे या नही.



में--अरे मेरी गुड़िया तेरे लिए गिफ्ट भी लाउन्गा ऑर तेरी पार्टी की तैयारी भी करूँगा ऑर ये कह कर में बाथरूम में घुस गया.... फ्रेश होने के बाद में रूम में चॅंग कर रहा था... नीरा अब रूम में नही थी मैने अपना, टवल हटा दिया ऑर वहाँ लगे मिरर में अपने शरीर को देखने लगा.


मेरा शरीर पूरी तरह से फिट था 5 11 की हाइट के साथ मेरी शरीर की बनावट बिल्कु शानदार लग रही थी मेने अपने लिंग की तरफ़ देखा वो अभी सोया हुआ था लेकिन अभी भी वो काफ़ी बड़ा लग रहा था.तभी अचानक मेरे रूम का दरवाजा खुल गया वहाँ नेहा भाभी खड़ी थी ऑर में उनके सामने पूरा नंगा खड़ा था .


मैने तुरंत टवल उठाया ओर अपनी कमर पर बाँध लिया.


में--क्या करती हो भाभी कम से कम दरवाजा तो बजा देती.



भाभी--तुमने बजाया था क्या सुबह , ऑर मुझे क्या पता था क तुम बिल्कुल नंग धड़ंग रूम में घूम रहे होगे , अब जल्दी से अपने कपड़े पहनो मम्मी बुला रही है नीचे.


भाभी चली गयी ऑर मैने जेसे ही अपने लिंग की तरफ़ देखा उसने टवल में टेंट बना रखा था मेने टवल हटाया ऑर वो बिल्कुल सीधा खड़ा था जो कि लगभग 7 इंच से ज़्यादा का लग रहा था .


मैने अपने लिंग पर धीरे से चाँटा मारते हुए कहा ...साले जगह देख कर खड़ा हुआ कर.



ओर फिर में कपड़े पहन कर रूम से बाहर निकल आया ,नीचे उतरते ही भाभी ने मम्मी को बोला मम्मी जय भैया आगये.



मम्मी --तू बस सोता रहा कर सारे दिन... अभी जा मार्केट ऑर में कुछ सामान मंगवा रही हूँ वो लेकर आ ऑर नेहा को भी साथ लेजा इसको भी थोड़ी शॉपिंग करनी है....


नेहा भाभी ऑर में बाइक पर मार्केट के लिए निकल गये.


भाभी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा हुआ था.


भाभी..जय सॉरी आज जो कुछ भी हुआ वो नही होना चाहिए था..



में...भाभी आप उस बारे में ज़्यादा सोचो मत,बस मुझ से कभी नाराज़ मत होना...आप लोगो का प्यार ही मेरे लिए सब कुछ है.



भाभी...पागल में तुझ से कभी नाराज़ नही हो सकती , ऑर ना ही घर का कोई ऑर आदमी तुझ से नाराज़ हो सकता है.


फिर हम यही सब बाते करते करते मार्केट में पहुँच गये, वहाँ से शाम की पार्टी के लिए खाने पीने का सामान लिया...ऑर घर की तरफ़ चल दिए.


भाभी...जय कहीं गाड़ी रोक ना आज पानी पूरी खाने का मन कर रहा है.



में...हाँ भाभी अभी थोड़ा सा आगे एक पानी पूरी वाला है हम वहाँ रुकते है.


थोड़ी दूर चलने पर वो स्टाल आ गई ऑर में ऑर भाभी वहाँ जा कर खड़े हो गये.



भाभी....पानी पूरी वाले से....भैया थोड़ा तीखा ज़्यादा रखना


फिर उसने हम दोनो को एक एक प्लेट दी लेकिन मैने उसे सिर्फ़ भाभी को खिलाने के लिए कहा.


में भाभी को पानी पूरी खाते हुए देख रहा था उन्होने होंठो पर डार्क रेड कलर की लिपस्टिक लगा रखी थी ऑर उनके होंठ बिल्कुल रस से भरे हुए लग रहे थे जैसे कोई स्ट्रॉबेरी हो..


में उनको लगातार देखे ही जेया रहा था. भाभी ने इशारा किया ऑर इस तरह से देखने का कारण पूछा.


मैने धीरे से कहा..


में--भाभी आप आज बहुत ब्यूटिफुल लग रही हो , मन करता है बस ऐसे ही देखे जाउ.


भाभी मुस्कुरा देती है ऑर मेरी पीठ पर एक चपत लगा कर बोलती है.



भाभी...अच्छा में तुझे बस आज ही ब्यूटिफुल लग रही हूँ क्या , बाकी दिन में अच्छी नही लगती??


में...ऐसी बात नही है भाभी लेकिन तीखा खाने के बाद आपका चेहरा बिल्कुल लाल हो गया है ऑर ये बिल्कुल इस तरह से लग रहा है जैसे सुबह सूरज निकलते वक़्त की लालिमा हो.



भाभी...हट पागल हर कुछ भी बोलता है....ले ये एक पतासी मेरे हाथ से खा.


भाभी ने वो पतासी मेरे मूह की तरफ़ बढ़ा दी मेने अपना पूरा मूह खोल दिया भाभी की सॉफ्ट सॉफ्ट उंगलिया मेरे होंठो से लगती हुई ...मेरी जीभ से टच होने लगी.


ये मेरे लिए पहला अनुभव था ऑर मुझे काफ़ी अच्छा भी लगा.



भाभी...क्यो बच्चू कैसा लगा...मज़ा आया.



में...भाभी आपकी फिंगर बड़ी टेस्टी है ऑर ये कह कर में हँसने लगा.


भाभी ने मेरी पीठ पर मुक्का मारते हुए कहा.



भाभी...मैने तुझे पतासी टेस्ट करने के लिए खिलाई थी ना कि मेरी उंगलिया टेस्ट करने के लिए , चल अब घर काफ़ी पतासी खाली .


फिर उसके बाद हम दोनो घर की तरफ़ निकल गये.


घर पहुँच कर मैने वो सारा सामान किचन में रखा ओर बाहर आकर हॉल में बैठ कर टीवी देखने लगा.


बाहर गार्डन में पार्टी की तैयारी चल रही थी. वैसे तो पापा पार्टी बहुत बड़ी करना चाहते थे लेकिन नीरा ने उन्हे ऐसा करने से मना कर दिया था क्योकि फिर बर्त दे पार्टी तो साइड में रह जाती है ऑर बिज़्नेस पार्टी शुरू हो जाती है .


इसीलिए पार्टी में सिर्फ़ ख़ास ख़ास लोग ही आए थे ऑर कुछ रिश्तेदार...



में अपने रूम में रेडी हो रहा था मैने आज सूट पहना था , जिसमें में काफ़ी अच्छा लग रहा था .


फिर में जाकर नीरा के कमरे की तरफ़ बढ़ गया . मैने दरवाजा नॉक करा तो नीरा ने अंदर आने के लिए कहा.


अंदर नीरा रेडी हो रही थी.



नीरा--भैया आपको मेरे रूम में आने के लिए नॉक करने की क्या ज़रूरत है.



में--अरे यार आज सारे दिन से गड़बड़ हो रही है इसलिए नॉक करना ज़रूरी समझा.



नीरा--कैसी गड़बड़ भैया क्या हुआ मुझे भी तो बताओ , ऐसा क्या देख लिया जो आप दरवाजा नॉक करने लगे.



में...कुछ नही नीरा ऐसी कोई बात नही है वो तो बस नोर्मली मैने डोर नॉक किया था..मुझे लगा शायद तू तैयार हो रही होगी इस लिए.



नीरा...भैया अभी में इतनी बड़ी भी नही हुई हूँ कि आप मुझ से शरमाने लगो ...मुझे याद है जब मम्मी अपने एनजीओ के कारण बाहर चली जाती थी तो आप मुझे कितने प्यार से नहलाते थे , इसलिए मेरे रूम में आपको आने के लिए कभी नॉक ना करना पड़े इस बात का ध्यान रखना.



में--ओके स्वीटी में आगे से ऐसा नही करूँगा , अब तू कितनी देर में बाहर निकलेगी.



नीरा--भैया में तो रेडी हूँ चलो चलते है बाहर.


उसके बाद वो मेरे सामने से होती हुई बाहर निकलने लगी ऑर में उसके पीछे.


तभी मेने देखा नीरा के ड्रेस के पीछे वाले हुक नही लगे हुए थे पिछे से उसकी पिंक कलर की ब्रा नज़र आ रही थी.


मैने उसको आवाज़ लगाई.


में--नीरा रुक ड्रवाजा बंद कर के इधर आ.


नीरा--क्या हुआ भैया आप इतने परेशान क्यो दिख रहे हो.



में--नीरा वो तेरी ड्रेस पिछे से......



नीरा--क्या हुआ भैया मेरी ड्रेस को क्या हुआ ये अच्छी नही लग रही.


में नीरा को ये बताते हुए झिझक रहा था कि उसकी पूरी पीठ दिख रही है.


नीरा--अब कुछ बोलो भी या ऐसी ही खड़े रहोगे ये ड्रेस अगर अच्छी नही लग रही तो अभी इसको चेंज कर लेती हूँ.



में--घबराते हुए .....नीरा ये ड्रेस तुझ पर बहुत अच्छी लग रही है पर...



नीरा--क्या पर पर लगा रखा है सॉफ सॉफ बोलो क्या बात है....अगर नही बोलना तो में बाहर जा रही हूँ.



में उसके कंधे पर हाथ रखता हूँ ऑर ड्रेसिंग टॅबेल की तरफ ले जाता हूँ उसका चेहरा मेरी तरफ था ऑर पीठ मिरर की तरफ़ .



में--अब यहाँ से मूड कर देख में क्या बोलना चाहता हूँ.


नीरा मूड कर देखती है ऑर बोलती है.



नीरा--ओहूओ भैया आप भी ना... सीधे सीधे नही कह सकते थे कि तेरी ड्रेस के हुक खुले हुए है.


में--में कहना तो चाहता था लेकिन कह नही पा रहा था.


नीरा--चलो अब अपना मूह बंद करो मेरी ड्रेस के हुक लगा दो , में रूही दीदी का ही वेट कर रही थी क्योकि ये हुक मुझ से नही लग रहे थे अब आप इनको लगा दो.



में--पर में कैसे....



नीरा---ज़्यादा होशियार बनने की ज़रूरत नही है चलो जल्दी लगाओ फिर बाहर भी जाना है.


ऑर ये कह कर मेरी तरफ अपनो पीठ कर के खड़ी हो गयी ऑर मिरर में से मुझे देखने लगी.



में घबराते घबराते उसके हुक लगाने लगा...मेरा ध्यान बार बार उसकी ब्रा पर चला जाता जिसका भी बस 1 ही हुक लगा हुआ था...


में--नीरा ये तेरे अंदर....भी हुक ढंग से नही लगा हुआ.



नीरा--भैया आप लगा दो जहाँ भी नही लगा हुआ.


मैने हिम्मत करके नीरा की ब्रा पकड़ ली उसकी ब्रा पकड़ते वक़्त मेरे हाथ काँप रहे थे.


अचानक मेरा हाथ उसकी नंगी पीठ से टच हो गया ...मुझे ऐसा झटका लगा जैसे कोई बिजली के नंगे तार को छु लिया हो.


नीरा--भैया जल्दी करो ना क्या कर रहे हो आप.



में--रुक में कर रहा हूँ.


किसी तरह मेने हिम्मत करके उसकी ब्रा के हुक लगा दिए ऑर ड्रेस के भी हुक लगाने के बाद मैने चैन की साँस ली....


हम दोनो बाहर हॉल में आ गये वहाँ हमे रूही भी मिल गयी.


रूही--कहाँ रह गये थे तुम दोनो?? बाहर सारे मेहमान आ चुके है अब जल्दी बाहर चलो.


फिर हम बाहर गार्डन में आ गये वहाँ काफ़ी सजावट की हुई थी सभी पेड़ो पर रंग बिरंगी लाइट जल रही थी एक तरफ खाने की टॅबेल लगी हुई थी ऑर गार्डन के बीच में एक टॅबेल ऑर पड़ी थी जिस पर एक बड़ा सारा केक रखा हुआ था.


वहाँ आए सभी मेहमान एक एक कर के नीरा को बर्त डे विश करने लगे .


फिर नीरा को पापा ने बुलाया..,



पापा--नीरा बेटा इधर आओ हम लोग कब से तुम्हारा इंतजार कर रहे थे...अब जल्दी से केक काटो ऑर पार्टी को शुरू करो.


नीरा--जी पापा.


उसके बाद नीरा वो केक काटती है, ऑर सभी मेहमान तालियाँ बजाने लगते है ...फिर वो सबको अपने हाथो से केक खिलाती है


फिर वहाँ आए लोग नीरा को एक एक करके अपने साथ में लाए गिफ्ट्स देने लगते है. लेकिन नीरा को जिस चीज़ का सब से ज़्यादा इंतजार था वो था मेरा गिफ्ट,पापा ने उसको एक बेशक़ीमती डाइमंड्स का नेकलेस दिया जिसे नीरा ने वही पहन लिया फिर सभी परिवार वालो ने कुछ ना कुछ गिफ्ट्स नीरा को दिए.


लेकिन उसके चेहरे पर उदासी सॉफ दिखाई दे रही थी क्योकि अभी तक मैने जो उसे गिफ्ट नही दिया था.


फिर वहाँ आए लोग नीरा को एक एक करके अपने साथ में लाए गिफ्ट्स देने लगते है. लेकिन नीरा को जिस चीज़ का सब से ज़्यादा इंतजार था वो था मेरा गिफ्ट,पापा ने उसको एक बेशक़ीमती डाइमंड्स का नेकलेस दिया जिसे नीरा ने वही पहन लिया फिर सभी परिवार वालो ने कुछ ना कुछ गिफ्ट्स नीरा को दिए.


लेकिन उसके चेहरे पर उदासी सॉफ दिखाई दे रही थी क्योकि अभी तक मैने जो उसे गिफ्ट नही दिया था.



नीरा रूही से...



नीरा--दीदी भैया कहाँ चले गये उन्होने तो अभी तक केक भी नही खाया.



रूही--मुस्कुराते हुए...होगा यहीं कहीं पार्टी में ही मेहमानो के साथ लेकिन तू उसकी चिंता क्यो कर रही है.थोड़ी देर में आज़ाएगा तो उसे भी केक खिला देना .



नीरा--ओहूओ दीदी आप तो कुछ समझती नही हो , भैया ने अभी तक मेरा बर्त डे गिफ्ट नही दिया है.



रूही--अच्छाअ...तभी में सोचु तू इतनी परेशान क्यो हो रही है, जब तक तुझे उसका गिफ्ट नही मिलेगा तब तक तुझे तेरा बर्त डे कंप्लीट नही लगता.



नीरा--हाँ दीदी आप सही कह रही हो , लेकिन भाई गया कहाँ.


में--क्या हुआ मेरी गुड़िया इतनी उदास क्यो लग रही है.



नीरा--आप कहाँ चले गये थे , पहले आप ये केक खाओ.


लेकिन में उसके हाथ से केक लेकर उसके मूह में डाल देता हूँ. ऑर फिर बचा हुआ टुकड़ा खुद खा जाता हूँ.




नीरा--चलो अब मेरा गिफ्ट निकालो कहाँ है.



में--अरे यार तेरा गिफ्ट तो में भूल गया, मुझे माफ़ कर दे मेरी बहन.



नीरा--गुस्से से... सुबह से में आप से कह रही हूँ गिफ्ट के लिए ऑर आप मेरा गिफ्ट भूल गये .


ऑर उसके बाद नीरा वहाँ से अपने रूम की तरफ़ भागने लगती है.



में--अरे नीरा रुक कहाँ भाग रही है.



नीरा--मुझे आप से बात नही करनी भैया, मुझे समझ जाना चाहिए था कि आप मुझ से बिल्कुल भी प्यार नही करते.


ऑर अपने रूम का दरवाजा खोल कर अंदर जा कर दरवाजा लॉक कर लेती है.



में--नीरा दरवाजा खोल ,दरवाजा क्यो बंद कर लिया.



नीरा--मुझे आप से कोई बात नही करनी भैया... मेरे बर्त डे वाले दिन ही आपने मेरा दिल तोड़ दिया.



में-- लेकिन तेरा गिफ्ट तो लेले.



नीरा--नही चाहिए आपका कोई भी गिफ्ट.



में--अच्छा एक काम कर सामने वाली दीवार को देख.



नीरा--मुझे कुछ नही देखना आप जाओ यहाँ से.



में--अच्छा बस एक बार सामने दीवार पर देख तेरा गिफ्ट वहीं पर है.



थोड़ी देर बाद दरवाजा खुलने की आवाज़ आती है ऑर में रूम के अंदर चला जाता हूँ मेरे रूम के अंदर घुसते ही नीरा मुझे बाहो में भर लेती है ऑर मेरे चेहरे को बेतहाशा चूमने लग जाती है.



नीरा--भैया आपका ये गिफ्ट अब तक का सब से बेस्ट गिफ्ट है.


ओर फिर उसकी आँखो में आँसू आजाते है .


में उसके आँसू पोंछते हुए कहता हूँ.



में--नीरा तू मेरी जान है, ऑर मेरी जान की आँखो में आँसू अच्छे नही लगते है.



नीरा--भैया में आपको अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करती हूँ ....मुझे कभी छोड़ के मत जाना हमेशा मेरे पास रहना बोलो रहोगे ना पास ....खाओ मेरी कसम.




में---तेरी कसम नीरा में हमेशा तुझे अपने दिल के पास रखूँगा , जब कभी तेरी आँखो से आँसू निकलेंगे तो ये मान लेना तेरा भाई भी उस वक़्त खून के आँसू रो रहा होगा.


तेरी कसम ....में पूरी दुनिया से अकेला तेरे लिए लड़ जाउन्गा . तुझ पर उठी हर बुरी नज़र तुझ पर पड़ने से पहले उसका सामना मुझ से होगा..तेरी कसम मेरी बहना तेरी कसम....,



वहाँ रूही कब से खड़ी हम लोग की बाते सुन रही थी फिर अचानक वो बोलती है.



रूही--नीरा तू कितनी ख़ुसनसीब है जो तुझे इतना प्यार करने वाला भाई मिला.



में--दीदी क्या में आपका भाई नही हूँ क्या??


ऑर में अपनी बाहे फैला लेता हूँ मेरी दोनो बहने मेरी बाहों में समा चुकी थी,हम तीनो की आँखो में आँसू थे लेकिन वो बस खुशी के आँसू थे उन में दुख ओर दर्द की ज़रा सी भी मिलावट नही थी.....


तभी रूही ने नीरा से पूछा..



रूही--नीरा तेरा गिफ्ट तो दिखा ऐसा क्या दिया है भाई ने तुझे.


नीरा दीवार की तरफ़ देखने का इशारा करती है रूही को.



वहाँ एक बड़ा सा वॉलपेपर लगा हुआ था जिसमें बीचो बीच जय ऑर नीरा की एक बड़ी सी फोटो थी मस्ती करते हुए बाकी कुछ फोटो उन दोनो के बचपन की थी..


रूही--वास्तव में ऐसा प्यार भरा गिफ्ट तुझे आज तक किसी ने नही दिया होगा ...ऑर सब से बड़ी बात में भी इन तस्वीरों में शामिल हूँ.



में--हम लोगो का बचपन साथ में बीता है दीदी जितना में नीरा को प्यार करता हूँ उस से कही ज़्यादा आप मुझ से प्यार करती है.



नीरा--ऑर में तुम दोनो को ...


नीरा की ये बात सुनकर हम दोनो हँसने लगे.


रूही अब चलो तुम दोनो खाना खा लो फिर तुम्हे कल कॉलेज भी जाना है ऑर नीरा को स्कूल.


उसके बाद हम बाहर आकर खाना खाने लग जाते है...


खाना खाने के बाद हम सब को गुड नाइट कहते है ऑर अपने अपने रूम में घुस जाते है,



उधर भाभी के रूम में...



नेहा रूम के अंदर घुसते ही अपनी साड़ी उतार के बेड पर फेक देती है तभी राज भी अंदर आजाता है ऑर नेहा से कुछ कहता है...



राज---नेहा क्या बात है आज तो तुम बिजलियाँ गिरा रही थी बाहर पार्टी में .


नेहा अपने ब्लाउस के हुक खोलते हुए..



नेहा--अच्छा आप पर कितनी बिजली गिराई मेने पहले ये बताओ.


राज--मेरा तो तुम बुरा हाल कर देती हो तुम्हारे हुस्न की आग में मैं खुद को जलता हुआ महसूस करता हूँ.


नेहा ब्लाउस उतार देती है ऑर राज नेहा को पीछे से पकड़ के उसकी गर्दन पर किस करने लगता है ऑर उसके पेट पर भी धीरे धीरे हाथ फैरने लगता है..



नेहा--ऊफफफहूऊ अभी छोड़ो मुझे पहले मुझे फ्रेश होने दो उसके बाद जो करना है वो करना में मना नही करूँगी.


फिर राज बेड पर बैठ जाता है ऑर नेहा अपनी ब्रा राज के चेहरे पे खोल के फेक देती है ऑर अपनी 34 साइज़ की चुचियाँ मसलने लगती है.


नेहा--सारा दिन ब्रा के अंदर रहने से इनका देखो कितना बुरा हाल हो जाता है.


राज बेड से उठता है ऑर एक चुचि को सहलाते हुए कहता है...


राज--देखो तो कैसे लाल हो गये है ऑर ये तुम्हारी निप्पेल का तो ऑर बुरा हाल हो गया है कैसे बिल्कुल सीधी खड़ी हो गयी ब्रा उतरते ही.



राज नेहा के बोबे सहलाते सहलाते नेहा की निपल अपनी उंगलियो के बीच में ले लेता है ऑर जैसे ही अपना मूह निप्पेल के पास लेजाने लगता है नेहा दूर हट जाती है..


नेहा--मैने सिर्फ़ देखने के लिए कहा था कुछ ऑर करने के लिए नही.


ऑर राज वापस जाकर बेड पर बैठ जाता है ऑर नेहा अपने कपड़े निकालने के लिए अलमारी खोल देती है,


फिर वो अपना पेटिकोट वही उतार कर बस पैंटी में बाथरूम के अंदर घुस जाती है.


थोड़ी देर बाद जब वो वापस निकलती है तो एक ब्लॅक ट्रॅन्स्परेंट नाइटी पहन कर बाहर निकलती है.



राज उसको देखते ही खहो जाता है उस ने अंदर सिर्फ़ एक ब्लॅक पैंटी पहनी थी ऑर उसके बूब्स नाइटी के ट्रॅन्स्परेंट होने की वजह से बिल्कुल सॉफ दिखाई दे रहे थे उसकी नाइटी बस उसके बूब्स के उपर तक ही टिकी हुई थी ऑर नीचे उसकी केले के तने जेसी चिकनी टांगे पूरी तरह से उस शॉर्ट नाइटी में नुमाया थी.


राज अपने बेड से उठता है ऑर नेहा को अपनी गोद में उठा लेता है नेहा भी उसकी कमर को अपनी टाँगो से जकड के एक बेल की तरह उस से लिपट जाती है.


राज अपने बेड से उठता है ऑर नेहा को अपनी गोद में उठा लेता है नेहा भी उसकी कमर को अपनी टाँगो से जकड के एक बेल की तरह उस से लिपट जाती है.


राज नेहा की खुश्बू सूंघने लगता है वो नेहा के बूब्स की घाटी में अपना मूह घुसा कर वहाँ की कोमलता का अहसास करने लगता है.


फिर राज नेहा को बेड पर बैठा देता है ऑर खुद ज़मीन पर बैठ कर नेहा को देखने लगता है.


राज--नेहा तुम कितनी खूबसूरत हो तुम्हे पा कर में दुनिया का सब से खुश नसीब आदमी बन गया हूँ.



नेहा--मैने आपका ऑर पूरे परिवार का प्यार पाने के लिए ही हॉस्पिटल से रेसिग्नेशन दिया था अगर आज में वहाँ होती तो आप लोगो का प्यार मुझे नसीब नही होता ,


अब मुझ से उतनी दूर मत बैठो प्यार करो मुझे समा जाओ मुझ में.


ऑर फिर राज खड़ा होता है ऑर अपने कपड़े उतारने के बाद सिर्फ़ एक वी शेप अंडरवेर में नेहा के सामने खड़ा हो जाता है नेहा फुर्ती से राज को अपनी तरफ़ खीच लेती है ऑर राज की अंडरवेर उतार कर उसके लिंग को सहलाने लगती है नेहा अपने कोमल हाथो से. राज के लिंग की चमड़ी उपर नीचे करने लग जाती है , फिर वो उसकी गोलियाँ अपनी मुट्ठी में भर कर धीरे धीरे दबाने लगती है.


राज का लिंग अब पूरी तरह से अपने आकर में आजाता है जो कि तकरीबन 6 इंच लंबा ऑर 2 इंच मोटा हो जाता है...


नेहा राज के लिंग को अपने मुँह में भर लेती है ऑर अंदर बाहर करने लग जाती है ..फिर अचानक नेहा राज के लिंग को पूरा का पूरा अपने मुँह में भर का राज की गोलियाँ दबाने लगती है.


राज अपनी आँखे बंद करके मस्ती के आलम में खहो जाता है फिर जब उसे लगता है वो इस तरह से ज़्यादा देर टिक नही पाएगा तो राज अपना लिंग नेहा के मुँह में से निकाल कर नेहा को बेड पर सीधा लेटा देता है,ओर खुद उसके उपर आ जाता है .


नेहा के होंठो को राज अपने होंठो से ऐसे चूसने लगता है जैसे नेहा के होंठो पर शक्कर की मिठास आ गयी हो.


उनकी जीभें एक दूसरे की जीभ का स्वाद लेने में जुटी हुई थी राज ऑर नेहा इस खेल को तब तक खेलते रहते है जब तक उन दोनो की साँसे उखड़ने नही लगती, जब दोनो अलग होते है तो एक दूसरे की तरफ़ प्यार भरी नज़रों से देख रहे होते है.


उसके बाद राज नेहा की नाइटी उतार देता है ऑर उसके निप्पल को अपने मुँह में भरकर चूसने लगता है ऑर अपने एक हाथ से नेहा के दूसरे बोबे को मसलने लगता है.


जब दोनो बूब्स का रस वो पी लेता है तो नेहा की नाभि में अपनी जीभ डाल देता है नेहा की नाभि नेहा का सब से सेन्सिटिव पॉइंट था वहाँ जीभ लगते ही नेहा पलंग पर तड़पने लग जाती है ऑर राज का सिर वहाँ से हटाने लगती है लेकिन राज नाभि के अंदर पूरी तरह से अपनी जीभ रगड़ कर ही वहाँ से बाहर निकालता है.


नेहा की पैंटी पूरी तरह से उसके चूत रस से भीग जाती है राज नेहा की चूत को पैंटी के उपर से ही सूंघने लगता है , ऑर अपने हाथ से उसकी पूरी चूत को पकड़ लेता है..


इस तरह से अपनी चूत पर हुए हमले को नेहा सह नही पाती ऑर झड़ने लगती है.


उसका पूरा शरीर अकड़ जाता है ,उसकी चूत खूब सारा पानी छोड़ देती है जिस से उसकी पैंटी पूरी तरह से भीग जाती है .


राज नेहा की पैंटी उतार के नेहा की चूत पर अपना मुँह लगा लेता है ऑर उसकी चूत का सारा रस चाटने के बाद नेहा के उपर आ जाता है,


फिर राज अपने लिंग को नेहा की चूत पर सेट करता है ऑर एक जोरदार धक्का लगाकर अपना पूरा लिंग नेहा की चूत की गहराई में उतार देता है.


फिर राज नेहा को चोदना स्टार्ट कर देता है, पूरा रूम नेहा की सिसकियो से ऑर उन दोनो के मिलन से हो रही ठप ठप..से गूंजने लगता है काफ़ी देर चुदाई करवाने के बाद नेहा बोलती है मुझे उपर आने दो .


राज नेहा को अपने उपर ले लेता है ऑर नेहा राज के लिंग को अपनी चूत पर सेट करके उस पर बैठने लगती है , उस पर बैठने के बाद नेहा अपनी कमर राज के लिंग पर चलाने लगती है.


जैसे वो घुड़सवारी कर रही हो राज नेहा के बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाने ऑर मसलने लगता है नेहा की स्पीड ऑर ज़्यादा तेज हो जाती है दोनो अपने चरम पर पहुँच चुके थे तभी दोनो के जिस्मो ने झटका खाना शुरू कर दिया दोनो बुरी तरह से झड चुके थे ये बिल्कुल ऐसा अहसास था जैसे बारिश की बूंदे तपती हुई ज़मीन पर पड़ती है ऑर उसकी फुहारो से सारी गर्मी ख़तम हो जाती है.


नेहा अभी भी राज के उपर लेटी लेटी गहरी घेरी साँसे ले रही थी ऑर राज नेहा की पीठ सहला रहा था नेहा की चूत में भरा रस राज की जाँघो से रिस्ता हुआ बेड की चादर पर गिरने लग जाता है.


नेहा--आइ लव यू राज


राज--आइ लव यू टू माइ सेक्सी वाइफ


फिर नेहा राज पर से उतर कर बाथरूम में चली जाती है ऑर वापस एक नॉर्मल नाइटी पहन कर वापस आजाती है, राज भी अपना नाइट सूट पहन चुका था फिर दोनो एक दूसरे की बाहो में बाते करने लगते है .


राज--जान कल मुझे ऑर पापा को दुबई जाना पड़ेगा हफ्ते भर के लिए. तुम अपना ख्याल रखना.



नेहा--मेरा ख्याल रखने के लिए यहाँ सब लोग है आप अपना ख्याल रखना ऑर मुझे फोन करते रहना.



नेहा--जान एक बात कहूँ.


राज--हाँ जान बोलो.



नेहा--राज में अब एक बच्चा करना चाहती हूँ रोज रोज में वो पिलस खा खा कर तंग आ गयी हूँ..



राज --जान बच्चा तो में भी चाहता हूँ लेकिन बस कुछ महीने ऑर रुक जाओ हम लोग हमारा सारा काम एक जगह पर ही शिफ्ट करने में लगे हुए है ..जो भी दूसरे सिटी में हमारे शोरूम्स है वो हम ब्रांच के रूप में किसी ऑर को संभला देंगे .


उसके बाद हम दोनो बच्चा कर सकते है..क्योकि में नही चाहता हमारे बच्चे का बचपन मेरी आँखो के सामने ना बीते .

पापा को हमेशा ये अफ़सोस रहता है कि वो उनके बच्चो का बचपन ढंग से देख ही नही पाए.....




03-04-2020, 10:12 AM, #11


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RE: Incest Sex Kahani रिश्तो पर कालिख

अगले दिन सुबह रूही मुझे उठा रही थी.



रूही--जय जल्दी उठ आज कॉलेज जाना है आज पहले दिन ही लेट पहुँचना चाहता है क्या???



में---दीदी सोने दो ना क्या कॉलेज कॉलेज कह कर डरा रही हो.




रूही--तुझे नही जाना है तो बोल दे क्योकि नीरा भी तेरा इंतजार कर रही है स्कूल छोड़ने के लिए.




में--क्या यार दीदी हमेशा इंपॉर्टेंट बात आप लास्ट में क्यो करती हो....में बस 15 मिनिट्स में रेडी हो कर नीचे आता हूँ.


फिर रूही चली जाती है ऑर में बाथरूम में घुस जाता हूँ , ऑर रेडी होकर नीचे हॉल में आ जाता हूँ.




नीरा--भैया क्या है ये सब में कब से आपका वेट कर रही हूँ...



में--तू तो चुप कर तुझे अगर स्कूल जाना था तो मुझे जल्दी जगाने नही आ सकती थी क्या.



नीरा--में तो आने वाली थी पर रूही दीदी ने मुझे रेडी होने के लिए बोल दिया था...अब जल्दी चलो नाश्ता आप कॉलेज की कॅंटीन में कर लेना...पहले आप मुझे स्कूल ड्रॉप करो.


उसके बाद हम तीनो एक ही बाइक पर बैठ कर निकल जाते है... नीरा को उसके स्कूल ड्रॉप करने के बाद में ऑर रूही कॉलेज के लिए निकल जाते है.



कॉलेज की पार्किंग में बाइक खड़ी करने के बाद में ऑर दीदी अपने अपने क्लास रूम्स की तरफ़ बढ़ जाते है आज पहला दिन था इस लिए बस इंट्रोडक्षन ही चल रहा था जो भी प्रोफेसर आता वो सारा टाइम बस इंट्रो में ही निकाल देता...आख़िर थक हार के में कॉलेज की कॅंटीन की तरफ़ बढ़ जाता हूँ ऑर अपने लिए कॉफी ऑर समोसा ऑर्डर कर देता हूँ


तभी कुछ सीनियर वहाँ आते है ऑर एक टॅबेल पर बैठ जाते है ऑर न्यू स्टूडेंट से उनका इंट्रो लेने लगते है. कभी वो किसी से गाना गवाते कभी वो किसी को डॅन्स करने के लिए कहते.


में ये सब होते देख रहा था तभी रूही भी कॅंटीन में आजाती है रूही को देखते ही वो सीनियर्स आहे भरने लग जाते है.


एक लड़का--भाई ये करोड़पति बाप की बेटी है ये ब्रा कौनसी कंपनी की पहनती होगी.



दूसरा लड़का---अबे ब्रा छोड़ ये पैंटी किस कंपनी की पहनती होगी ...

ऑर इतना बोलकर वो ज़ोर ज़ोर से हँसने लगते है.


मेरा मन तो कर रहा था उन मादरचोदो का मुँह तोड़ दूं लेकिन रूही ने मुझे ऐसा कुछ भी करने से मना कर दिया था.


एक लड़का--भाई ये छमिया आज किस के साथ गुटरगूं कर रही है... कहीं इसने इस लड़के के साथ सेट्टिंग तो नही कर ली है.


दूसरा लड़का--ये तो कोई नया मुर्गा लगता है, चलो इसका इंट्रो लेते है.


वो लोग अपनी चेर्स लेकर हम लोगो के पास आकर बैठ जाते है.


एक लड़का--ओये हीरो कौन्से एअर में है तू.



में--अपने शब्द चबाते हुए..,,फर्स्ट एअर में बोलता हूँ.



दूसरा लड़का---चल कोई गाना सुना.


मैने पूछा कौनसा गाना सुनना है.


लड़का--चिकनी चमेली सुना दे.



में--चिकनी चमेली ....ये तो मेरा पसन्द का गाना है...इस पर तो में आप को डॅन्स भी कर के दिखा सकता हूँ.


लड़का---चल तो फिर खड़ा हो ऑर दिखा अपना जलवा.



मेरे खड़े होते ही उनमें से एक लड़के ने रूही का हाथ पकड़ लिया .....


मैने फुर्ती से पास की टॅबेल से एक कोल्ड ड्रिंक की बॉट्टेल उठा ली ऑर उस लड़के के सिर पर दे मारी.


कॅंटीन में बिल्कुल सन्नाटा छा गया, कोई कुछ समझ हे नही पाया कि क्या हुआ.


फिर उनमें से एक लड़का उठा....वो लड़का पूरी तरह से उठ पाता उस से पहले मेरे मुक्के का जोरदार प्रहार सीधा उसकी नाक पर हुआ...


तभी कॅंटीन में कॉलेज स्टाफ ऑर प्रिन्सिपल आ जाते है.


प्रिन्सिपल को रूही सारी बात बता देती है कि किस तरह से ये लड़के यहाँ रेजिंग ले रहे थे ऑर लड़कियो को छेड़ते है.



प्रिन्सिपल उन लड़कों को अपने ऑफीस में आने के लिए कहते है ऑर जिस लड़के के सिर पर मैने बॉट्टेल मारी थी ....उसे वो हॉस्पिटल पहुचाने का बोलकर वहाँ से चले जाते है...


लड़का--तूने हम लोगो पर हाथ उठा कर अच्छा नही किया इसका बदला हम जल्दी ही लेंगे.



में--चल भाग अब यहाँ से वरना चलने के लायक नही रहोगे.


ऑर उसके बाद वो लोग वहाँ से चले जाते है कॅंटीन में बैठे सभी लड़के लड़किया मेरे पास आकर थॅंक्स कहते है..ऑर मुझ से दोस्ती कर लेते है.


इस तरह से कॉलेज के पहले ही दिन मैने अपनी कॉलेज की गॅंग रेडी कर ली.



रूही--क्यो लड़ाई की तूने उन लड़को से.



में---में लड़ाई नही करता दीदी लेकिन उस लड़के ने आपका हाथ पकड़ के ग़लत किया , उसके बाद मेरा रुकना नामुमकिन था.



रूही--चल अब घर चलते है नीरा के स्कूल का टाइम भी हो गया है.



फिर हम दोनो नीरा की स्कूल को तरफ बाइक पर चल पड़ते है....रूही आज कुछ ज़्यादा ही मुझ से चिपक कर मेरी बाइक पर बैठी थी.....


हम लोग नीरा की स्कूल पहुँच गये नीरा भी वहाँ बाहर ही खड़ी होकर हमारा इंतजार कर रही थी.



नीरा--आप लोग कहाँ घूमते रहते हो , आज आप पूरा 10 मिनिट्स लेट हो.



में--अबे 10 मिनिट ही तो लेट है...



नीरा--ऑर अगर इन 10 मिनिट्स में मेरे साथ कुछ हो जाता तो.




में--पागल अपना मुँह बंद रख , ओर चुपचाप गाड़ी पर बैठ...कुछ नही होगा तुझे.



रूही--अब तुम दोनो लड़ना बंद करो ऑर जल्दी से घर चलो , मेरा तो भूख के मारे हाल खराब है.



फिर हम लोग घर की तरफ़ निकल जाते है .



घर पहुँच कर रूही अपने कमरे में चली जाती है चेंज करने के लिए ऑर नीरा मुझे अपने साथ बिठा लेती है ऑर हम टीवी देखने लग जाते है...इस समय टीवी पर डोरेमोन आ रहा था, ऑर ये नीरा को बहुत पसंद था.


तभी भाभी भी आजाती है कॉफी ऑर नाश्ता लेकर ऑर मेरे बगल में बैठ जाती है.



भाभी--नीरा अभी भी बच्चो वाले शो देखती है,अब तो तू 18 साल की होगयि है.



नीरा--उमर बढ़ने का ये मतलब थोड़े ही है जो चीज़े मुझे पसंद है वो में छोड़ दूं.

कल आप कहोगी कि जय भैया से प्यार करना छोड़ दे.



भाभी--अरे मेरी प्यारी ननद ऐसा तो में कभी सोच भी नही सकती ..अब ये नाश्ता ऐसे ही ठंडा करना है या तुम लोग इसे खाना शुरू करोगे, ऑर ये रूही कहाँ रह गयी.



नीरा--दीदी चेज करने गयी है.



भाभी--जय पापा ऑर तुम्हारे भैया हफ्ते भर के लिए दुबई गये है...क्यो ना हम लोग कहीं पिक्निक पर चले.


में कुछ बोलना ही चाहता था कि नीरा बोल पड़ी.



नीरा--हाँ जय भैया किसी मस्त जगह चलते है अभी 4 दिन की छुट्टियाँ भी हो गयी है.



में--4 दिन की छुट्टियाँ किस खुशी में.???



नीरा--दो दिन की छुट्टी तो में स्कूल से ले लूँगी ऑर अगले दो दिन किसी महापुरुष की जयंती है इसलिए छुट्टी रहेगी.




में--वाह मेरी बिल्ली पिक्निक का नाम सुनते ही तेरी छुट्टियाँ शुरू हो जाती है.


तभी रूही भी वहाँ आजाती है



रूही--हाँ जय हम लोगो को कहीं चलना चाहिए ऑर वैसे भी अभी कुछ दिन तक कॉलेज में भी लेक्चर नही होने वाले.




में--लेकिन मम्मी से तो पूछ लो क्योकि पापा ऑर भैया दोनो ही यहाँ नही है वो घर बंद एक मिनिट के लिए नही करेंगी.



नीरा--मम्मी को पटाने की ज़िम्मेदारी मेरी...में उन्हे चलने के लिए मना लूँगी.



में--तो फिर ठीक है , तू बात कर ले मम्मी से.



वो भाग कर मम्मी के रूम में चली जाती है ऑर मम्मी का हाथ पकड़ कर रूम से बाहर खीच कर ले आती है.


मम्मी--क्या बात है....तुम लोगो को पता है ये समय मेरे सोने का है और ये महारानी मुझे यहाँ ले आई.




नीरा--मम्मी हम पिक्निक पर जाने का प्रोग्राम बना रहे है, आप भी चलोगि हमारे साथ???




मम्मी--यहाँ मुझे फ़ैसला करने के लिया बुलाया है या अपना फरमान सुनाने के लिए,

कोई कहीं नही जा रहा तुम्हारे पापा जब तक नही आजाते .


और फिर मम्मी वही बैठ जाती है.


नीरा--मम्मी आप तो कहीं जाती नही जब से में देख रही हूँ आप कभी मार्केट भी नही जाती,हमेशा इस घर में पड़ी रहती हो..ना तो खुद कहीं जाती हो और ना हमे कहीं जाने देती हो.




मम्मी--तेरा ये एमोशनल ब्लॅकमेन्ल करने वाला जादू मुझ पर नही चलेगा ....तुम लोगो के जाने का फ़ैसला सिर्फ़ तुम्हारे पापा कर सकते है.




नीरा---ठीक है मम्मी ....में पापा से बात करती हूँ लेकिन पहले मेरी कसम खाओ पापा से बात करने के बाद जो में कहूँगी वो आप को करना पड़ेगा.



मम्मी--लेकिन तेरे पापा मानेंगे ही नही तुम लोगो को कही भी अकेले भेजने के लिए.



नीरा--आप कसम खाओ पहले उसके बाद भी अगर वो मना कर देंगे तो आप भी उस कसम से आज़ाद हो जाओगी.



मम्मी--में क्या पागल हुई हूँ जो तेरी बातो को मानने के लिए मुझे तेरी कसम खानी पड़ेगी अगर मेरे बस में होता तो तुम लोगो को कभी नही रोकती.



नीरा--आप बस एक बार कसम खाओ,फिर मेरा जादू देखो.



मम्मी---तेरी कसम....अब खुश.



नीरा.... बहुत खुश.


नीरा पापा को फोन मिला देती है.



पापा--हाँ बेटा क्या हुआ इस वक़्त फोन किया है मेरी मीटिंग शुरू होने ही वाली है.



नीरा---पापा में बात को ज़्यादा घुमा फिरा के नही कहूँगी ....हम लोगो को पिक्निक पर जाना है 4 दिन के लिए और आपकी रज़ामंदी चाहिए.



पापा--तू पिछले जनम में कोई गुंडी वंडी थी क्या....रज़ामंदी माँग रही है या धमकी दे रही है.


अब में भी बात को ज़्यादा घुमा फिरा के नही बोलूँगा ...तुम लोग कहीं नही जा रहे जब तक हम वापस घर नही आजाते.



नीरा--बोल लिया आपने ....आपकी इन्ही बातो के पीछे मम्मी कभी घर से बाहर नही निकलती और जब वो हमारे साथ जाने को रेडी होगयि है तो आप बीच में अपनी टाँग अड़ा रहे हो.



पापा--क्या कहा तूने तेरी मम्मी भी जाना चाहती है??तू मुझ से झूठ तो नही बोल रही है??


नीरा--आपकी कसम पापा में मम्मी को भी हमारे साथ ले जाउन्गी..



पापा--अगर ऐसी बात है तो जाओ और मज़े करो...लेकिन अगर मुझे पता चला कि तूने मुझ से झूठ बोला है तो याद रखना तेरा स्कूल जाना भी बंद करवा दूँगा.



नीरा--ठीक है पापा में आपकी कसम झूठी नही खा सकती..में मम्मी को भी अपने साथ लेकर जाउन्गी.



पापा--चल ठीक है अब मेरी मीटिंग का टाइम होगया है में फोन रख रहा हूँ.



इधर मैने मम्मी को पकड़ रखा था और रूही दीदी ने उनके मुँह पर हाथ रख रखा था मम्मी अपना पूरा ज़ोर लगा रही थी हम लोगो से छूटने के लिए और पापा को सच बताने के लिए..और जैसे ही नीरा ने फोन रखा और हम सब हँसने लगते है.



मम्मी--ये क्या बदतमीज़ी है तुम लोगो ने झूठ बोलकर उनसे पर्मिशन माँगी है में अभी फोन करके उन्हे सब सच बता देती हूँ.



नीरा--एक ही साँस में,,,,मम्मी आपने मेरी कसम खाई है जो में बोलूँगी वो आप करोगी और आपको अब कसम पूरी करने के लिए हम लोगो के साथ चलना पड़ेगा अगर आप कसम पूरी नही करोगी तो कसम टूटने की वजह से में मर जाउन्गि और अगर में मर गयी तो पापा की खाई हुई कसम भी टूट जाएगी ...सोच लो आगे क्या होगा.


मम्मी मुँह फाडे नीरा की तरफ़ देखे जा रही थी उनको अहसास होगया था कि वो अब कुछ नही कर सकती ..,और उनकी ये हालत देख कर हम सभी मुस्कुराए जा रहे थे.



मम्मी--कहाँ जाना है....



और हम सभी एक साथ...हुर्र्रेयययी... चिल्ला देते है.....


हम सभी ने ऋषिकेश जाने का फाइनल किया. हम सभी ने आज रात को ही निकलने का प्लान बनाया, अभी दिन के 2 बजे थे और फिर भाभी और रूही शॉपिंग के लिए निकल गयी, में मेरे लेपटॉप पर वहाँ रुकने के लिए बुकिंग करने लगा


मम्मी और नीरा ज़रूरी सामान की पॅकिंग कर रही थी और साथ ही साथ नीरा को बातें भी सुनाए जा रही थी.




मम्मी--तुझे शर्म नही आई मुझे बेवकूफ़ बनाते हुए...मुझे तो बनाया जो बनाया तूने तेरे पापा को भी बेवकूफ़ बनाया???



नीरा--ऊओहू मम्मी अगर में ऐसा नही करती तो ना आप कभी घर से निकल पाती और ना ही कभी हम इस तरह से पिक्निक पर जा पाते, सोचो कितना मज़ा आएगा वहाँ हम सब को.




मम्मी--मुझे बहलाने की कोशिश मत कर तेरी माँ हूँ में...पता नही हर बार तेरे झाँसे में कैसे आ जाती हूँ में.




नीरा--आप खूब सारा प्यार जो करती हो मुझ से. आपकी इतनी लाडली हूँ तो आप तो मेरी बात मनोगी ही.




मम्मी--हाँ मेरी बच्ची लाडली तो तुम हम सब की है जान है तू मेरे घर की....तभी गुस्से मे....मुझे फिर फसा लिया तूने अपने जादू में,बोल देती हूँ तुझे ये मीठी मीठी बातो में मुझे फसाने की कोशिश मत किया कर.




नीरा---क्या मम्मी हर समय मुझ पर गुस्सा करती रहती हो...कभी थोड़ा प्यार से भी बात कर लिया करो...आपकी बातो से ऐसा लगता है जैसे में मंदिर में मिली थी आपको.




मम्मी--गुस्से से चुप हो जा वरना मेरा हाथ उठ जाएगा तुझ पर ...तुझे इतना प्यार दिया और तो बदले में ये सिला दे रही है मेरी ममता का.

मम्मी की आँखो में अचानक से आँसू छल्छला आए थे.



नीरा--मम्मी सौरी माफ़ कर दो मुझे में तो आपका अच्छा बेटा हूँ ना...मेरी बात का बुरा लगा मेरी प्यारी मम्मा को.


और नीरा कस कर गले से लगा लेती है मम्मी को .



मम्मी --बस बस काफ़ी नौटंकी हो गयी तेरी अब चुपचाप सामान पॅक करवा नही तो बाहर जाकर वो बिल्ली वाला नाटक देख(डॉरेमन).




नीरा इस बार बिल्कुल शांत हो कर मम्मी के साथ पॅकिंग करवाने लग जाती है.




उधर भाभी और रूही भी आजाती है ...वो लोग सारा सामान अच्छे से पॅक कर के रख देती है.



में--मम्मी ऊओ मम्मी वहाँ होटेल में बुकिंग हो गयी है अब चलने की तैयारी करो हमे जल्दी निकलना होगा खाना हम बाहर ही कहीं खा लेंगे.




मम्मी--ठीक है सामान गाड़ी में भरो फिर बैठे बैठे क्या टाइम पास कर रहे हो तुम सब.

और हम सब मम्मी की ये बात सुनकर खिलखिला के हंस देते है.



सारा सामान गाड़ी में भरने के बाद में सब से आगे ड्राइविंग सीट पर मेरे पास वाली सीट पर नीरा पीछे वाली सीट पर भाभी मम्मी और रूही बैठ गये मम्मी उन दोनो के बीच में बैठी थी.


हम लोग चल पड़े और जल्दी ही हम हाइवे पर पहुँच गये. हम घर से 7 बजे निकल गये थे इस हिसाब से कल दिन तक हम वहाँ पहुँच जाएँगे.


में लगातार हाइवे पर गाड़ी भगाए जा रहा था नीरा सो चुकी थी पीछे मम्मी और और रूही भी सो चुकी थी बस भाभी जाग रही थी.


भाभी ने मुझ से कहा .




भाभी--जय कहीं साइड में गाड़ी रोको ना.



में--क्या हुआ भाभी.



भाभी--मेने कह दिया ना साइड में गाड़ी रोको. कोई मजबूरी होगी तभी रोकने के लिए कह रही हूँ ना.


मैने फिर गाड़ी साइड में लगा दी और भाभी फट से बाहर उतर गयी , भाभी ने आज जीन्स और एक टॉप पहना हुआ था उतरते वक़्त जब मैने बॅक व्यू मिर्रर में देखा भाभी गाड़ी के पास ही खड़ी हो गयी और अपनी जीन्स उतारने लगी.जीन्स घुटनो तक करने के बाद उनकी वाइट पैंटी पूरी तरह से दिख रही थी ...फिर भाभी ने अपनी पैंटी भी घुटनो तक सरका दी अब उनकी पूरी गान्ड मुझे दिखाई दे रही थी..मेरा बुरा हाल हो रहा था , उनकी बिल्कुल गोरी गान्ड और उसके बीच में वो लकीर जो दोनो को अलग कर रही थी मुझ पर गजब ढा रही थी,,,भाभी अब नीचे बैठ कर पेशाब करने लगी उनके पेशाब करने की आवाज़ एक सीटी की तरह मुझे सुनाई दे रही थी फिर वो खड़ी हो गयी और अपने कपड़े सही करने के बाद मेरी तरफ़ खिड़की में आई.


भाभी--जय मेरे हाथो पर थोड़ा पानी डालना.


मैने तुरंत अपने पास पड़ी बॉट्टेल में से उनके हाथ धुलाए और मैने बोला.



में--क्या बात है भाभी बड़े जोरो की लगी थी क्या आवाज़ काफ़ी दूर तक आरहि थी.

चलो अब आप गाड़ी में बैठो में भी थोड़ा हल्का हो जाता हूँ.


उसके बाद में गाड़ी में से उतरा और थोड़ा आगे जाकर मुतने लगा. जब वापस आया तो भाभी डर्राइविंग सीट पर बैठी थी और उनके चेहरे से लग रहा था जैसे आज वो मुझे खा ही जाएँगी. मेरे आते ही वो सीट पर से उतर गयी और जैसे ही में बैठने लगा तडाक मेरे सिर पर एक चाँटा पड़ा.



में--अपने सिर को मसल्ते हुए...क्या हुआ मारा क्यो.



भाभी--तुम्हारे बॅक व्यू मिरर में से मुझे सब नज़र आ गया, आज जो तुमने किया है उसका बदला तो में ज़रूर लूँगी.


फिर उसके बाद भाभी अपने कदम पटकती हुई गाड़ी में बैठ गयी .


अभी रात का 1 बज गया था और हम लोगो ने कुछ भी नही खाया था....फिर मैने गाड़ी आगे बढ़ा दी भाभी लगातार पीछे से मेरे बाल खिचे जा रही थी, आगे जाकर ठीक ठाक सा ढाबा दिखा वहाँ जा कर मैने अपनी गाड़ी रोकी और सब को जगा दिया.....



ढाबे पर गाड़ी लगाने के बाद हम सब ने मुँह हाथ धहो कर खाने का ऑर्डर दिया ..


खाना खाते खाते ऐसे ही मस्ती मज़ाक चलती रही..फिर रूही ने कहा जय अब गाड़ी में चलाउन्गी तू काफ़ी थक भी गया है.

मैने उसे चाबी देकर मम्मी को आगे बैठने को कहा क्योकि वो भी काफ़ी देर सो चुकी थी.और अब में बीच में और भाभी और नीरा मेरी अगल बगल बैठ गयी.


भाभी ने मेरे पास बैठते ही मेरी बाँह पर च्युन्टी काट ली और हँसने लगी.

फिर गाड़ी चलने लगी रूही गाड़ी अच्छी चलाती है. इस बात का मुझे पूरा भरोसा था क्योकि रूही ने ही मुझे गाड़ी चलाना सिखाया था. इस लिए में निश्चिंत हो कर सो सकता था.


थोड़ी देर में ही मुझे नींद आ गयी और मेरे साथ साथ भाभी भी सो गयी , नीरा तो वैसे ही नींद की राजकुमारी है इसलिए वो तो सब से पहले सोती है.


थोड़ी देर बाद अचानक मेरी आँख खुली. मेने देखा मेरे दोनो कंधो पर भाभी और नीरा ने अपने सिर रख रखे थे और नीरा तो बिल्कुल मुझ से चिपकी हुओ सो रही थी उसके उभार मुझे मेरी कोहनी पर महसूस होने लगे थे.


मैने अपने उपर काफ़ी कंट्रोल किया लेकिन तभी भाभी भी मेरी तरफ़ और सरक गयी उनके भी बोबे मेरी कोहनी से टच होने लगे.



मेरा बुरा हाल हो रहा था तभी नीरा जो मुझे पकड़ कर सो रही थी उसका एक हाथ फिसलता हुआ सीधे मेरे लिंग पर जा कर गिरा .



मेरा दिमाग़ बुरी तरह से खराब हो चुका था और लिंग महराज अपना सिर झुकाने को तैयार नही थे. मैने अपने आपको काबू में रखा और नीरा का हाथ अपने लिंग पर से हटा के साइड कर दिया.और मैने रूही को कहा.



में--रूही दीदी गाड़ी मुझे चलाने दो आप काफ़ी स्लो चला रही हो.




रूही--हाँ भाई धीरे तो चला रही हूँ क्योकि काफ़ी दिनो बाद में हाइवे पर गाड़ी चला रही हूँ तो थोड़ा डर लग. रहा है.


में--ठीक है तो फिर आप गाड़ी साइड में लगाओ क्योकि मेने भी काफ़ी देर आराम कर लिया है.



फिर रूही गाड़ी साइड में लगाकर बाहर आ जाती है. और मेरे उठते टाइम मेरा लिंग भाभी के चेहरे से रगड़ता हुआ निकलता है . में गाड़ी से बाहर निकल के चैन की साँस लेता हूँ और खुद से कहता हूँ आज तो इज़्ज़त लूटने से बच गयी बेटा......


उसके बाद में साइड में जाकर पेशाब करने लगता हूँ इस से मुझे कुछ सुकून मिलता है.


में गाड़ी में बैठ जाता हूँ और रूही मम्मी को भी जब तक पीछे भेज देती है.

और खुद आगे आकर बैठ जाती है. हम लोग ऐसे ही चलते रहते है मस्ती मज़ाक करते करते और कब हम लोग ऋषिकेश पहुँच जाते है कुछ पता नही चलता.


वहाँ मैने एक रिजोर्ट में बुकिंग करवाई थी जो कि काफ़ी हरी भरी जगह था.


वहाँ जाकर में रूम में सामान रखवा देता हूँ और कुछ खाने के लिए ऑर्डर कर देता हूँ, हम को वहाँ पहुँचते पहुँचते रात हो गयी थी इस लिए हम सब ने आराम करने का फ़ैसला लिया और सब अपने अपने रूम्स में सोने चले गये.



अगले दिन सुबह....



में फ्रेश होकर रेडी हो गया और बाकी सब भी फ्रेश हो चुके थे.



नीरा--क्या भैया ये कौनसी पिक्निक हुई अगर होटेल में ही रुकना था तो हमारे उदयपूर में एक से एक आलीशान होटेल्स है इतनी दूर आने की क्या ज़रूरत थी??



में--सबर कर तुझे यहाँ पूरी पिक्निक का मज़ा दिलवा कर ही घर लेकर जाउन्गा.


फिर हम लोग अपनी गाड़ी लेकर होटेल की गाड़ी के पिछे पीछे चलने लगे वो गाड़ी हमे जंगल के अंदर ले जा रही थी.


फिर हम एक जगह रुक गये उस गाड़ी में से 3 आदमी निकले और टेंट बनाने लग गये.और एक आदमी गाड़ी में से लकड़िया निकाल रहा था टोटल 2 टेंट लगाए गये थे फिर वो लोग शाम को आने का बोलकर चले गये.



में-- अब ठीक है नीरा अब तो खुश है तू.



नीरा-- बहुत खुश भैया एक आप ही हो जो मेरे दिल की बात होंठो पर आने से पहले समझ लेते हो.



में---आख़िर तू मेरी स्वीतू जो है चलो अब आस पास घूमने चलते है होटेल वाले बता रहे थे यहाँ एक नदी भी है.




भाभी--नदीइई.....वाउ तब तो खूब मज़ा आएगा.



फिर हम लोग आगे बढ़ गये काफ़ी दूर से ही नदी के पानी की आवाज़ हमारे कानो में पड़ने लग जाती है...हम सभी तेज़ी से उस ओर चलने लगते है.



सामने देखते ही मन खुशी से झूम उठता है...ये एक पहाड़ी नदी थी और इसका पानी बिल्कुल काँच की तरह क्रिस्टल क्लियर था वहाँ बड़े बड़े काफ़ी पत्थर भी थे नदी ज़्यादा गहरी भी नही थी और ना ही वहाँ पानी तेज बह रहा था, हम लोग वहाँ पड़े पत्थरो पर बैठ गये...मम्मी मेरे साथ ही बैठी थी.




मम्मी--आज कितने सालो के बाद में ये सब देख रही हूँ कभी सोचा नही था में दुबारा. प्रकृति की ये निराली छटा देख पाउन्गी...बस उलझ कर रह गयी थी परिवार के बन्धनो. में जो मुझे घर से बाहर पैर निकालने की इजाज़त नही देते थे.




में--मम्मी हम सब जानते है आप हमारे कारण कभी घर से बाहर नही निकलती थी ...हमेशा आपने अपनी ख़ुसीयो का बलिदान दिया है हमारी देख भाल करने के लिए...लेकिन अब और नही आज के बाद आप कभी खुद को एक पिंजरे के पन्छि की तरह नही रखोगी.


आप हमेशा खुश रहोगी तभी हम भी खुश रह पाएँगे...खाओ मेरी कसम मम्मी अब से जो कुछ भी आपने हमारे पीछे खो दिया है आपने वो हर लम्हा आप खुल कर जियोगी खाओ मेरी कसम मम्मी खाओ मेरी कसम.



मम्मी--- तेरी कसम....मेरे बच्चे तेरी कसम...अब में खुदको पूरी तह से बदल लूँगी अगर मेरे बच्चो को तकलीफ़ होती है मुझे इस तरह देख कर तो में वो सब करूँगी जो मेरे बच्चो की खुशी होगी...तेरी कसम ...आज के बाद तुम लोगो को तुम्हारी माँ में एक हस्ती खेलती लड़की नज़र आएगी जो ना जाने कहाँ खो गयी थी.



उसके बाद वो रोने लगती है और में उनको अपने गले से लगा लेता हूँ ...उनके आँसू पोछते हुए ..



में--भगवान ने मेरा नसीब इतना अच्छा बनाया है जो मुझे इतना अच्छा परिवार मिला ,अब आप रोना बंद कर दो माँ और हम लोगो के साथ जिंदगी का फिर से मज़ा लो.


फिर मम्मी भाभी को आवाज़ लगाती है और कॅंप में चलने को कहती है भाभी जाना तो नही चाहती थी लेकिन मम्मी की आँसुओ से भरी आँखे देख कर खुद को उनके साथ जाने से रोक नही पाई....,


मम्मी और भाभी के जाने के बाद में रूही और नीरा के पास चला गया,दोनो आज बेहद खुश लग रही थी.



नीरा--आइ लव यू भैया आप दुनिया के सब से अच्छे भाई हो...और रूही दीदी दुनिया की सब से अच्छी बहन....में आज बेहद खुश हूँ भैया थॅंक यू वेरी मच.



और फिर वो मुझ से लिपटकर मेरे पूरे मुँह पर किस करने लग जाती है तभी अचानक वो मेरे होंठो पर भी किस कर देती है....


नीरा--आइ लव यू भैया आप दुनिया के सब से अच्छे भाई हो...और रूही दीदी दुनिया की सब से अच्छी बहन....में आज बेहद खुश हूँ भैया थॅंक यू वेरी मच.



और फिर वो मुझ से लिपटकर मेरे पूरे मुँह पर किस करने लग जाती है तभी अचानक वो मेरे होंठो पर भी किस कर देती है....


मुझे एक ज़ोर दार झटका लगता है उसके किस करने से , नीरा भी ये बात समझ चुकी थी कि उस से ग़लती हो गयी है.


वो मुझ से अलग होजाति है और तभी रूही बोल पड़ती है.



रूही--नीरा तो बिल्कुल गधि है कोई ऐसे किस करता है क्या देख तो सही क्या हाल किया है इसके चेहरे का पूरे चेहरे पर तूने अपनी लिपस्टिक चिपका दी है...


में बताती हूँ किस कैसे करते है फिर रूही भी मेरे पूरे चेहरे पर अपनी लिपस्टिक चिपका देती है और हँसने लग जाती है जबकि में ये समझ नही पा रहा था कि ये अचानक हो क्या रहा था.



में--तुम दोनो मुझे समझ क्या रखा है....जब मन करा मेरे चेहरे पर अपनी लिपस्टिक से पुताई कर देती हो.


मेरा ये कहता हुआ और दोनो जंगली बिल्लियो की तरह मुझ पर टूट पड़ती है मेरा पूरा चेहरा उन लोगो ने अपनी लिपस्टिक से रंग दिया था.



में--खीजते हुए ये क्या पागल पन है तुम दोनो मेरा सेक्षुयली हरासमेंट कर रही हो थाने में जा कर तुम दोनो के खिलाफ एफआइआर कर्वाउन्गा में.



तभी नीरा बोलती है.



नीरा--भैया ज़्यादा मत बोलो अभी तो बस सेक्षुयल हारेसमेंट किया है ज़्यादा बोलोगे तो हम दोनो मिलकर आपका रेप भी कर सकते है



में-इधर आ रेप की बच्ची .



फिर में भाग कर उसे पकड़ लेता हूँ और उसको अपनी गोद में उठा कर नदी में फेक देता हूँ....


फिर रूही की तरफ़ बढ़ता हूँ और उस से कहता हूँ तुझे भी करना है मेरा रेप ....वो बचकर भागने लगती है और में उसके पीछे भागने लग जाता हू और जैसे ही में रूही को पकड़ता हूँ मेरा हाथ सीधा रूही के बूब्स पर पड़ जाता है एक तरह से अंजाने में रूही का पूरा बूब पकड़ लेता हूँ और...उसको भी गोद में उठाकर नदी में फेक देता हूँ.



में--गर्मी निकली या दुबारा से पानी में गिरने का इरादा है.



तभी मुझे कोई धक्का दे देता है और में भी पानी में गोते लगाने लग जाता हूँ जब बाहर देखता हूँ तो मम्मी और भाभी दोनो खिल खिला कर हंस रही होती है. मम्मी इस समय किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी उन्होने एक स्किन टाइट जीन्स और एक शानदार एमब्राय्डरी करी हुई शॉर्ट कुरती पहन रखी थी और ये कपड़े भाभी के थे जो उन्होने कॅंप में जाकर चेंज कर लिए थे मम्मी किसी भी सूरत में भाभी से कम नही लग रही थी....



भाभी ने आज एक ग्रीन साड़ी और बॅक लेस ब्लाउस डाला था.


तभी मम्मी भाभी को भी धक्का दे देती है भाभी सीधा मेरे उपर आकर गिरती है.,


पानी में गिरने की वजह से उनकी साड़ी पानी के उपर ही रह जाती है और पानी के अंदर वो सिर्फ़ पैंटी में ही होती है उनको संभालने के चक्कर में मेरा हाथ पानी के अंदर उनकी जाँघो से होता हुआ उनकी चूत तक पहुँच जाता है ...और में घबरा कर अपना हाथ हटा लेता हूँ और भाभी अपनी साड़ी पानी के अंदर ठीक करने लगती है.



फिर मम्मी भी पानी में कूद जाती है और हम सब घंटो उस शीतल नदी में मस्ती करते रहते है....


हम लोग अब पानी में से निकल गये... मेने देखा रूही की निपल उसके कपड़ो में से भी नज़र आ रही थीं. मेने अपना ध्यान वहाँ से हटाया और कॅंप की तरफ़ चलने लगा . कॅंप में पहुँचने के बाद हम सब ने अपने कपड़े बदल लिए ...और हम लोग आपस में बाते करने लगे तभी रिजोर्ट की गाड़ी हमे आती हुई दिखाई दी ...


उस में से 2 आदमी उतरे और एक टॅबेल वहाँ लगा दी फिर वो गाड़ी में से खाना उतारने लग गये थे.

उसके बाद उन में से एक आदमी वहाँ पड़ी लकड़ियाँ जलाने लग जाता है.


और पूरी तरह से कॅंप फाइयर का महॉल तैयार हो जाता है फिर एक आदमी मेरी तरफ़ बढ़ता है और कहता है.




आदमी--सर ये वाइयरलेस अपने पास रखिए आप लोगो को किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो आप हमे बता देना ,

और आपने नदी तो आज देख ही ली होगी आज...और कल आपको यहाँ से इस दिशा में 2 किमी जाना पड़ेगा वहाँ एक छोटा सा झरना है उसे देख कर आप लोगो को आनंद आज़ाएगा.


मैने उसे थॅंक्स कहा और 500 का एक कड़कता हुआ नोट उसे दे देता हूँ. वो खुशी खुशी वहाँ से चला जाता है.


उसके बाद में झरने वाली बात सब से छुपा कर रखना चाहता था क्योकि कल में सब को वो दिखा कर सर्प्राइज़ देना चाहता था.



हम सभी ने खाना खाया और आग के चारो तरफ़ पड़े कुछ पत्थरों पर बैठ गये.



मम्मी--वाह मज़ा आगया इस तरह से जीने का एक अलग ही मज़ा है.



नीरा--अब तो आप हमे कभी नही रोकोगि ना.




मम्मी--रोकने का सवाल ही पैदा नही होता में तो खुद तुम लोगो के साथ चलूंगी.



भाभी मेरे सामने की तरफ़ बैठी थी पानी के अंदर जब से वो घटना हुई उसके बाद से भाभी ने मुझ से बात नही करी थी.



रूही--भाभी क्या बात है आप इतना चुप चुप क्यों हो आपको ये जगह पसंद नही आई क्या.



भाभी--अरे नही रूही ऐसी कोई बात नही है यहाँ तो इतना सुकून है कि दिल करता है यहीं एक छोटा सा घर बना कर रहने लगूँ.



नीरा--तब तो हमे भी आपके घर में रहने दोगि ना भाभी...और हँसने लगती है.



भाभी--हाँ हाँ क्यो नही और वैसे भी तू तो पढ़ाई की चोर है तेरा तो पढ़ाई से पीछा ही छूट जाएगा.



नीरा--ऐसे बात नही है भाभी...में जब स्कूल में होती हूँ तो मेरा सारा ध्यान बस पढ़ाई में ही होता है...लेकिन जब में आप लोगो के साथ होती हूँ ख़ास कर मेरे स्वीट से भैया के साथ तब मुझे पढ़ाई वधाई कुछ याद नही रहता..



रूही--हँसते हुए ....चलो बहुत हो गयी बाते अब एक गेम खेलते है ट्रूथ आंड डेर.


फिर हम पाँचो उस टॅबेल को बीच में रख देते है और वहाँ पड़ी एक केचप की बॉट्टेल टॅबेल पर आधी रख देते है.

F

रूही--जिस किसी के भी सामने इस बॉट्टेल का मुँह होगा उसको एक टास्क दिया जाएगा ट्रूथ और डेर में से और टास्क देने वाला वो होगा जो बॉट्टेल के पीछे खड़ा होगा.


फिर रूही ने वो केचप की बोटल घुमाई तो उसका मुँह रूही और भाभी के बीच में हो गया


इस लिए बोटल को रूही ने फिर से घुमाया इस बार बोटल का मुँह मेरी तरफ़ था और बोटल के पिछे रूही खड़ी थी.


रूही---ज़ोर ज़ोर से हँसते हुए.....में काफ़ी दिनो से इसी दिन की तलाश में थी आज में वो पता लगा कर रहूंगी जो किसी ने आपसे नही पूछा, अगर पूछा भी होगा तो आप हमेशा टाल जाते हो. आपका टास्क है ट्रूथ और सवाल भी में ही पूछूंगी. आप हम सब में से किस को अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करते हो ...याद रखना सवाल का जवाब आपको पूरी ईमानदारी से देना होगा और अगर आप जवाब ना देना चाहो तब भी हम ये गेम जारी रख सकते है लेकिन फिर इसको खेलने का कोई मतलब नही निकलेगा.



में-- कुछ सोचते हुए...मेरे लिए तो सभी लोग मेरी जान से भी अज़ीज है लेकिन एक सच्चाई एक और भी है....में नीरा और आपके लिए किसी की जान ले भी सकता हूँ.


उसके बाद सब मुझे देखने लग जाते है .


महॉल सीरीयस होता देख भाभी बोलती है इस बार में बोतल घुमाती हूँ और सब अपनी अपनी जगह बदल लेते है..बोतल रुकते ही बोतल का मुँह नीरा की तरफ़ था और सवाल पुछ्ने वाली भाभी थी....



भाभी--तो मेडम नीरा जी आपसे सवाल ये है कि वैसे तो हम सब जानते है कि आप सब से ज़्यादा प्यार किस को करती हो..लेकिन में तुम्हे डेर का टास्क दूँगी ताकि तुम मुझे खुद अपने बारे में बताओ.



नीरा--ये क्या है भाभी ऐसा भी कोई करता है क्या फिर भी में खुद ही सच बता देती हूँ.


सच ये है कि में कभी चाहती ही नही हूँ कि में कभी भी मेरे परिवार को एक मिच्योर्ड लड़की के रूप में दिखूं..में हमेशा अपने परिवार के लिए अपने भाई के लिए एक मासूम बच्ची बनी रहना चाहती हूँ..में कभी नही चाहती कि इनका ध्यान मेरी तरफ़ से कभी हटे ...जैसे एक छोटे बच्चे का ध्यान पूरा परिवार रखता है में चाहती हूँ वैसे ही पूरा पटिवार मेरा ध्यान रखता रहे और मुझे प्यार करता रहे.



मम्मी--घर जाने के बाद मेरे साथ किचन में हाथ बटाना चालू कर देना अब से बहुत हो गया लाड प्यार...


और हम सब ज़ोर ज़ोर से हँसने लगते है और मम्मी नीरा को प्यार से गले लगा कर उसके माथे को चूम लेती है.


अब हम लोगो ने फिर से अपनी अपनी जगह चेंज कर ली थी. इस बार मैने बोतल घुमाई और बोतल का मुँह भाभी की तरफ था और बोतल के पीछे मम्मी खड़ी थी.



मम्मी--नेहा तू मेरी बहू है और में चाहती हूँ तू खुद ही अपना टास्क चुन ले.



भाभी--मम्मी में डेर चुनना चाहूँगी.


मम्मी आपको पता है ही कि शादी से पहले में एक डॉक्टर थी खूबसूरत होने के साथ साथ में अपने हुनर में भी माहिर थी इस वजह से जब मेरी शादी हो गयी और मैने मेकप करना शुरू कर दिया तो लोगो की गंदी नज़रे मुझ पर पड़ने लग गयी थी (ये बात उन्होने मेरी तरफ़ देख कर कही थी) और इसीलिए मैने वहाँ से रीजाइन कर दिया था क्योकि में राज और मेरे बीच किसी को भी आते बर्दाश्त नही कर सकती थी.


इसी बात पर हम सभी तालिया बजाने लगते है और रूही भाभी को गले लगा लेती है.

हम लोग फिर से अपनी अपनी जगह चेंज कर लेते है.



बोतल फिर से घूमने लगती है और जब रुकती है नीरा की खुशी का कोई ठिकाना नही होता.


बोटल का मुँह मम्मी की तरफ़ होता है और बोतल के पीछे खड़ी नीरा ज़ोर ज़ोर से उच्छल रही होती है.


नीरा--आप का टास्क है ट्रूथ...और मेरा सवाल है जब भी में आपको ये कहती हूँ के आप मुझे मंदिर के बाहर से उठा कर लाई हो तब आप गुस्सा क्यों हो जाती हो....क्या आप मुझे या हम तीनो में से किसी को बाहर से उठा के लाई हो......


मम्मी का चेहरा बिल्कुल उतर गया था.उनकी आँखो में भी आँसू भर गये थे फिर वो कुछ कहती है.



मम्मी--नीरा से....तू मेरे प्यार का इस तरह से फ़ायदा उठाएगी मुझे अंदाज़ा नाही था...मैने तुझे हज़ार बार कहा है तू मुझ से ऐसी बाते मत कर, लेकिन तू मानती नही है. शायद मेरी जान लेकर ही तुझे समझ में आएगा कि में तुम लोगो से कितना प्यार करती हूँ. अब काफ़ी हो गया तुम्हारा खेल में जाकर सो रही हूँ ...तुम लोगो को जो करना है वो करो. और रोती हुई कॅंप के अंदर चली जाती है.


में नीरा को घूर कर देखता हूँ तो उसकी आँखो में से भी आँसू छलक जाते है. फिर में भागकर अंदर कॅंप में जाता हूँ मम्मी के पास जो अंदर बैठी बैठी सूबक रही थी.


में अंदर जाते ही उनको अपने गले से लगा लेता हूँ और मेरे गले से लगते ही वो फुट फुट कर रोने लगती है और कहने लगती है...तू मेरा बेटा है में कही से नही लाई तुझे तू मेरा बेटा है....


मुझे उनकी बात समझ में नही आरहि थी.. में उनके आँसू पोछते हुए कहता हूँ.


में--मम्मी आप रोना बंद करो मुझे बहुत ज़्यादा घबराहट हो रही है...उस का छोटा सा मज़ाक आप को इतना दुख देगा इसका मुझे अंदाज़ा नही था आप प्ल्ज़ रोना बंद करो.


अब में भी उनके साथ रोने लग गया था फिर में बोलता हूँ आपने मेरी कसम खाई थी आप कभी भी हमारे लिए खुद को तकलीफ़ नही दोगि. अगर ऐसे ही रोटी रहोगी तो मुझे मरा मान लेना.


मेरी ये बात सुनते ही मम्मी मेरे मुँह पर हाथ रख देती है और कहती है तुझे मेरी भी उमर लग जाए मेरे बच्चे ...में कभी नही रोउंगी लेकिन तू नीरा को समझा दे मुझ से ऐसी बात ना करे.



में--में उसे अभी समझाता हूँ और डाट भी लगाता हूँ...


तभी रूही भी अंदर आजाती है और मम्मी के पास जाकर बैठ जाती है. और में बाहर चला जाता हूँ मम्मी रूही से कुछ बोलती है.



मम्मी--रूही तू तो सब जानती है तू ही फ़ैसला कर तुम चारो में मैने कभी कोई अंतर रखा है...तुम सब को मैने बराबर प्यार दिया फिर नीरा को ऐसा क्यो महसूस होता है कि हम तुम मे से किसी को उठा कर लाए है .



रूही--मम्मी बीती हुई बातो को भूल जाओ उनको याद करने से सिर्फ़ तकलीफे ही मिलेंगी हमारी खुशहाल ज़िंदगी में ऐसा तूफान आएगा कि सब तहस नहस हो जाएगा.बस आप इन बातो को मत दोहराओ ये राज बस हम 4 लोगो को ही पता और ये हमारे दिलो में ही दफ़न रहना चाहिए.

......................................

उधर में नीरा के सामने कॅंप में खड़ा था और नीरा लगातार रोए जा रही थी.



में--नीरा ये क्या बदतमीज़ी है तूने क्यो मम्मी का दिल दुखाया.



नीरा--भैया में पहले ये बात उनसे मज़ाक में बोला करती थी लेकिन उनका रियेक्शन पहले भी ऐसा ही रहता था ...में जब भी उन से ये सवाल करती थी वो बुरी तरह से भड़क जाती थी मुझे लगा आज सही मोका है ये जानने का वो ऐसा क्यो करती है.वो ये भी तो कह सकती थी कि तुम लोगो को कोई कही से नही लाया तुम सब मेरे ही बच्चे हो.


में--नीरा मुझे गुस्सा मत दिला मेरा दिमाग़ वैसे ही खराब हो रखा है और ये फालतू की बात को बंद कर , और जाकर मम्मी से सॉरी बोल.


और फिर में उठ कर बाहर निकल जाता हूँ.


नीरा भी मेरे जाते ही मम्मी के कॅंप में चली जाती है.


में चलते चलते नदी के किनारे आकर बैठ जाता हूँ...आज से पहले इतना दुख मैने कभी नही देखा था मेरी मम्मी मेरे सामने बेबस रो रही थी और में कुछ नही कर सकता था.....


में नदी किनारे बैठा अविरल बहती उस जल धारा को पूरे ध्यान से देखे जा रहा था नदी का कल...कल..बहता शीतल जल दिमाग़ के साथ मेरे दिल को भी सुकून पहुचा रहा था . लेकिन मेरी आँखो से भी एक धारा बहने लगी थी..ये आँसू उस दर्द के लिए थे जो मैने अपनी माँ के चेहरे पर देखा था.,,, कितना दर्द झलक रहा था उनके चेहरे से, आज कितना खुश थी वो हमारे साथ लेकिन ये खुशी भी ज़्यादा देर नाही ठहर सकी.


में इसी सोच में डूबा हुआ था तभी किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया.


जब मैने पलट कर देखा तो वहाँ नेहा भाभी खड़ी थी और एक टक मुझे ही देखे जा रही थी उनको इस तरह देख के में फुट फुट कर रोने लगा.


भाभी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे सिर में प्यार से हाथ फेरने लगी . मेरे आँसू लगातार बहे ही जा रहे थे....उन्होने मुझे खुद से अलग किया और मेरी आँखो में आए आँसू पोछने लगी.



भाभी---जय मत रो अगर तू ही रोने लग जाएगा तो हम सब को कौन संभालेगा , मम्मी को कौन संभालेगा मत रो...जय मत रो..



लेकिन मम्मी का नाम सुनते ही मेरा रोना और बढ़ गया और साथ में हिचकिया भी आने लगी थी...


भाभी मेरी हालत देख कर काफ़ी ज़्यादा परेशान हो गयी थी..


उन्होने मेरा चेहरा अपने उभारों में दबा लिया और मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगी लेकिन जब उन्हे लगा कि इस से भी मेरा रोना बंद नही हो रहा तो उन्होने वो कर दिया जो में सोच भी नही सकता था.


उन्होने मेरे सिर के बाल पकड़ कर एक नज़र मेरे चेहरे पर डाली


फिर मेरे होंठो पर किस करने लग गयी वो मेरे होंठो को चूसे जा रही थी उन्होने मेरा एक हाथ अपनी कमर पर रख दिया और जिस हाथ से उन्होने मेरे बाल पकड़ रखे थे...उस हाथ से मेरा दूसरा हाथ पकड़ कर अपने उभारों पर रख दिया...



ये मेरे लिए काफ़ी ज़्यादा शॉकिंग था वो मेरे हाथ को पकड़ कर अपने बोबे मसलवा रही थी मुझ से और मेरे होंठो को लगातार चूसे जा रही थी ...मेरा रोना अब रुक गया था...और में भी उनके साथ किस में साथ देने लग गया .


जैसे ही उनको पता चला के मेरा रोना बंद हो गया है और में काफ़ी ज़ोर से उनके बोबे दबा रहा हूँ तो वो एक दम से मुझ से दूर हट जाती है और हाफने लगती है... में जैसे ही उनको बाहो में भरने के लिए आगे बढ़ता हूँ वो मेरे सीने पर अपनी हथेली रख कर मुझे वही रोक देती है और कहती है....



भाभी--जय बस अब रुक जाओ, मैने ये सब तुम्हें उस दौरे से बाहर निकालने के लिए किया था ....और कुछ नही.


हमारे बीच जो कुछ भी हुआ. वो बस तुम्हे उस दुख के पल से बाहर निकालने के लिए मैने किया था..


हमारे बीच अब भी वही पुराना मारियादा का रिश्ता है और कुछ. नही...में तुमहरे भैया से अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करती हूँ ....इसलिए अपने मन में कोई ग़लत फ़हमी मत रखना. अब चलो यहाँ से और भूल जाना के कभी ऐसा कुछ हमारे बीच में हुआ था......


में और भाभी कॅंप के पास पहुँच गये...मम्मी वाले कॅंप में अभी भी रूही और नीरा बैठी थी.

मुझे देखते ही रूही खड़ी हो गयी और कहने लगी.



रूही--कहाँ चला गया था तू बिना बताए . हम लोगो को तेरी चिंता हो गयी थी...वो तो अच्छा हुआ जो भाभी ने तुझे नदी की तरफ़ जाते हुए देख लिया.



में--कुछ नही दीदी आज थोड़ा सा मन खराब हो गया था...आप अब कहाँ जा रही हो.



रूही--में और भाभी दूसरे वाले कॅंप में ही और तुम तीनो इस वाले कॅंप में रहोगे.


इतना बोलकर वो कॅंप से बाहर चली गयी.



मम्मी--में थोड़ी देर बाहर ही हूँ जब तक तुम दोनो सोने की तैयारी करो...


इतना कह कर मम्मी भी बाहर चली गयी.


अंदर में और नीरा थे नीरा बड़ी मासूमियत से मुझे देखे जा रही थी.


नीरा--भैया मुझे से आप नाराज़ हो.



में--क्यो में क्या किसी से नाराज़ नही हो सकता.



नीरा--भैया मुझे माफ़ कर दो में अब कभी भी मम्मी का दिल नही दुखाउंगी.




में--देख नीरा मेरा अभी मूड बिल्कुल खराब है और में नही चाहता में तुझसे कुछ भी ग़लत कह दूं.




नीरा--भैया आप कुछ भी कर सकते हो आप चाहो तो मुझे थप्पड़ भी मार सकते हो.

लेकिन प्ल्ज़ मुझ से नाराज़ मत होना.




मैने नीरा की इस बात का कोई जवाब नही दिया और अपनी टी शर्ट खोल कर बेग में से मेरा नाइट सूट निकालने लग जाता हूँ.


तभी अचानक तडाक एक ज़ोर दार आवाज़ मुझे सुनाई देती है और एक और तडाक की आवाज़ आती है.

वो आवाज़ नीरा की थी वो खुद के गालो पर बेरहमी से चाँटा मार रही थी .


मैने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और कहने लगा.



में---ये क्या कर रही है तू पागल तो नही होगयि है.




नीरा--हाँ में पागल हो गयी हूँ...आप सब के प्यार में पागल हो गयी हूँ...आप लोग मेरी ग़लती पर मुझे सज़ा भी नही देते....मुझे जो चाहे वो सज़ा दे दो बस मुझ से नाराज़ मत हुआ करो. मुझे माफ़ कर दो भैया मुझे माफ़ कर दो...और ये कह कर वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है...



में तुरंत उसे अपने सीने से लगा लेता हूँ तब जाकर वो रोना थोड़ा कम करती है.


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