माँ का आँचल और बहन की लाज़ —-1

 

माँ का आँचल और बहन की लाज़ —-1

फ्रेंड्स आपने मेरे द्वारा पोस्ट की गई कहानियो को काफ़ी सराहा है इसके लिए मैं आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ और अब आपके लिए एक और नई कहानी लेकर पेश हुआ हूँ दोस्तो जैसे कि आप जानते हैं कि मैं कोई लेखक नही हूँ ये कहानी आकाश ने लिखी है और मुझे जो कहानी अच्छी लगती है उसे आपके साथ शेअर कर लेता हूँ लेकिन इसका मतलब ये नही है कि मैं मेहनत नही करता अरे भाई कॉपी पेस्ट या हिन्दी मे कॅन्वेर्ट करने मे भी मेहनत लगती है हा हा हा हा हा हा हा हा शुउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ हँसो मत यार अब मैं सीरियस हो जाता हूँ और कहानी की तरफ आता हूँ ………………………..दोस्तो…………….

माँ का आँचल कितने थोड़े से कपड़ों का है..पर कितना बड़ा सहारा देता है अपने बच्चो को…कभी .उसके अंदर की गर्मी..कभी .उसके अंदर की शीतलता तो कभी उसके अंदर की शांति ..क्या कहीं और मिल सकती है..?? कितना पवित्र , कितना निर्मल और स्वच्छ …


पर वक़्त भी क्या क्या खेल खेलता है इंसानों के साथ ..यही पवित्र आँचल कभी कभी कितना मैला हो जाता है … उसकी शीतल छाया भी शीतलता दे नहीं पाती..उसकी जगह ले लेती है दुर्गंध भरी वासना,,हवस और धन लोलुप्ता …


शशांक के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ …


अचानक एक पल में ही उसका हंसता खेलता परिवार ताश के पत्त्तो की तरह ढह गया … ऐसी आँधी आई सब कुछ आँधी की तेज़ झोंको में उड़ गया …


रह गया सिर्फ़ उसकी माँ का आँचल और उसकी बहेन की लाज़…


शशांक खुद 20 साल का जवान पर जीवन की लड़ाई में एक अबोध बच्चा …. माँ के आँचल को क्या मैला होने से बचा सका ..क्या अपनी बहेन की लाज़ की रक्षा कर सका …????


दोस्तो इन सभी सवालों का जबाब धीरे धीरे मिलता रहेगा आने वाले अपडेट्स मे


रात के करीब 10 बज चुके हैं….शिव-शांति के घर की लाइट्स बूझ चूकि हैं ….और सब अपने अपने कमरों में अपने में ही मस्त हैं …..


शिवानी नाइटी पहेने बेड पर लेटी है….आँखें बंद हैं ..पर उसकी कल्पना की दुनिया अभी भी पूरी तरेह खूली है… उसके ख़यालों में है शशांक ..उसका अपना चहेता , प्यारा और हँसमुख भाई … उसके बारे सोचते सोचते ना जाने कब उसके दायें हाथ की उंगलियाँ नाइटी के अंदर से उसकी एक दम टाइट चूत के उपर पहुँच जाती है …अपनी हथेली से उसे हल्के हल्के दबाती है … दो तीन बार …बाया हाथ सीने के अंदर घूसेड कर अपनी टेन्निस बॉल के साइज़ की चूचियों को भी हल्के हल्के दबाती जाती है …”भैया ..ऊवू मेरे प्यारे भैया …आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कब वो दिन आएगा ..तुम मुझे अपनी बाहों में भर लोगे….उफफफ्फ़ भाइय्या …”


भैया की रट लगाते ही उसकी उंगलियाँ चूत पर तेज़ी से फिसलना चालू हो जाती हैं…उसकी टाँगें फैल जाती हैं ..चूत की फांके भी खूल जाती हैं …और उंगलियाँ उस संकरे दरार के अंदर ही अंदर चूत के होंठों के बीच घीसती जाती है …चूचियों का मसलना भी तेज़ हो जाता है… उसकी साँसें भी जोरों से चलती हैं …”अया ..उउउहह भैया ..भैया …..” और फिर उसकी चूतड़ उछलती है …चूत से पानी की धार फूट पड़ती है ….थोड़ी देर तक आँखें बंद किए लेटी रहती है ….टाँगे फैली ..दोनों हाथ भी फैले ….उसे अपने अंदर से पानी चूत से बाहर निकलता हुआ महसूस होता है ..एक अजीब हलकापन उसे महसूस होता है …..और इसी हालत में आँखें बंद किए नींद के झोंकों में खो जाती है …


शशांक भी अपने कमरे में लेटा हुआ सोच रहा है … उसके जहेन में शांति छायि है..उसकी माँ का चेहरा बार बार आता है…”माँ तुम इतनी सुंदर हो …उफफफफ्फ़ पागल हो जाऊँगा …माँ …क्या वो दिन कभी आएगा जब तुम मेरी बाहों में होगी …तुम्हारे आँचल की ठंडक मेरे बदन की गर्मी शांत करेगी…. माँ ..माँ ….मैं मर जाऊँगा माँ ….” और वो महसूस करता है उसके बॉक्सर के अंदर एक तंबू बना है… उसका 8 ” पूरे का पूरा कड़क था …शशांक करवट लेता है ..अपनी जांघों के बीच तकिया रख अपने कड़क लौडे से पिल्लो को जोरों से दबाता है …तकिये के अंदर उसका लॉडा धँस जाता है … काफ़ी देर तक इसी पोज़िशन में लौडे को रखता है …फिर बॉक्सर के सामने के बटन खोल अपने हाथों से अपने लंड की चमड़ी तेज़ी से उपर नीचे करता है … लंड और भी कड़क हो जाता है ..और फिर एक तेज़ पिचकारी छोड़ता हुआ झटके देता हुआ , कमर और चूतड़ उछालता हुआ झाड़ता जाता है ..


शशांक हांफता हुआ पड़ा रहता है ….आँखें बंद है … और कुछ देर बाद वो नींद की आगोश में खो जाता है….


शिव और शांति अपने कमरे में लेटे हैं अगल बगल …शांति शिव के दाहिने हाथ पर सर रखे लेटी है …और शिव का बाया हाथ शाँति के कोमल बदन को सहला रहा है ….शांति आँखें बंद किए इस स्वर्गिक सूख का आनंद ले रही है …शिव शांति को अपनी तरफ खींचता है ..दोनों आमने सामने हैं ..दोनों की साँसें एक दूसरे से टकरा रही हैं …शिव उसके होंठों को चूमता है , अपनी एक टाँग उसकी टाँग के उपर रख ता है …


” शांति ….” अपना सारा प्यार अपनी ज़ुबान में भर उस से बोलता है


” ह्म्‍म्म..जानू…. क्या…? ” शांति उसके सीने पर अपना हाथ फिराते हुए पूछती है ..


” शांति .. ” और ज़्यादा प्यार , और ज़्यादा मीठास है इस बार उसकी ज़ुबान में …


” अरे बाबा कुछ बोलॉगे भी यह फिर मेरा नाम ही लेते रहोगे सारी रात ? ” शांति हंसते हुए बोलती है


अब शिव अपना हाथ उसकी जांघों के बीच की दरार में रखता हुआ , उसकी चूत सहलाता है ..शांति कांप उठती है ..एक सीहरन सी होती है उसे


” शांति ..आज जो भी हूँ मैं सिर्फ़ तुम्हारी बदौलत ..तुम ना आती मेरी जिंदगी में ..मैं जाने क्या करता ..??” और यह कहते हुए उसे अपनी बाहों में जाकड़ लेता है और उसके होंठों को चूस्ता है …


” उफ्फ तुम भी ना …” शांति अपने होंठों को उस से अलग करती है और हान्फते हुए कहना जारी रखती है


” क्या करते .? अरे मेरी जगेह कोई दूसरी होती …उस से भी ऐसी ही मीठी बातें करते ..”


” नहीं शांति ..तुम जानती हो अच्छी तरेह कोई और तुम्हारी तरेह नहीं होती ..तुम लाखों में एक हो …मैं खुश किस्मत हूँ तुम्हारे जैसी बीवी मुझे मिली ..” और वो उसकी चूत जोरों से दबा देता है …


” हाई ..क्या कर रहे हो जानू … ” और वो शिव से और भी करीब चिपक जाती है


” मैं भी तो कितनी खुशकिस्मत हूँ शिव ….तुम ने मुझे समझा और इतना प्यार दिया …मुझे भी तो कोई और थोड़ी ना मिलता ..इतना प्यार करनेवाला ….”


“ह्म्‍म्म ..मैं तुम्हें क्या इतना प्यार करता हूँ ..??”


” ऑफ कोर्स जानू ..देखो ना यह तुम्हारा तंबू इस बात की गवाही दे रहा है … ” शांति उसके लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए कहती है ….उसका 7″ लंड बिल्कुल कड़क था उसके पाजामे के अंदर …मानो फुंफ़कार रहा हो बिल के अंदर जाने को…


दोनों एक दूसरे को देखते हैं … एक टक … और दोनों के हाथ चलते रहते हैं …शिव शांति की चूत पर लगा है ..और शांति उसके लंड पर … बातें बंद है ..सिर्फ़ सिसकारियाँ और साँसें चल रही हैं …


इस दौरान दोनों के कपड़े कब बेड के नीचे आ जाते हैं ..किसी को पता नहीं ..दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से चीपके हैं ..एक दूसरे में समा जाने को बेताब ..


शांति की चूत गीली है … शिव अपनी उंगलियाँ शांति की गीली चूत से बाहर निकालता है और चाट लेता है …उसे देख शांति और भी मस्त हो जाती है …और चूत और भी गीली हो जाती है . वो भी उसके लंड को अपने मुँह में भर उसके सुपाडे को जोरों से चूस्ति है …..शिव तड़प उठता है..मानो उसका पूरा रस शांति के मुँह में जानेवाला हो ..


वो उठ बैठता है … शांति उसकी तरेफ देखती है …शिव आँखों से इशारा करता है


शांति समझ जाती है उसे क्या करना है ..दोनों की अंडरस्टॅंडिंग इतनी अच्छी थी ..बोलने की ज़रूरत नहीं होती ..बस सिर्फ़ स्पर्श और आँखों की ज़ुबान चलती ..


शांति बेड से नीचे आ जाती है …शिव उसे पीछे से जाकड़ लेता है ..उसका लंड उसके चूतड़ो के बीच धंसा है …और दोनों हाथ से चूचियाँ मसल रहा होता है ..दोनों इसी पोज़िशन में आगे बढ़ते हैं और बेड से थोड़ी दूर जा कर रुक जाते हैं ..वहाँ एक स्टूल रखा है….शांति अपना एक पैर उस स्टूल पर रखती है … उसकी चूत पूरी तरेह खूल जाती है …थोड़ी सी आगे की ओर झूकती है …चूत ख़ूलने में जो थोड़ी कसर थी ..अब वो भी नहीं है …शिव का लंड उसके चूतड़ो के बीच से फिसलता हुआ उसकी चूत की फाँक पर आ जाता है …


शिव अपने लंड को हाथों से थामता है … और बुरी तरेह शांति की चूत की फांकों के बीच घिसता हुआ चूत के अंदर डाल देता है ..शांति आह भर लेती है ..मस्ती की किल्कारी लेती है ..उसका पूरा बदन कांप उठता है


शिव थोड़ा झूकता है ..उसकी कमर के गिर्द अपने हाथ रख उसे थामता हुआ जोरदार धक्का लगाता है ..पूरा लंड अंदर घुसाता है ..शांति इस प्रहार से अकड़ जाती है ..सारा शरीर झन्झना उठता है ..उसका बदन थरथरा उठता है …


अब शिव लगातार धक्के लगाए जा रहा है..शांति सिसकारियाँ ले रही है…”उफफफ्फ़ ..जानू ..अया ….तुम भी ना …उउउः और ज़ोर से ..हां मेरी जान …आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह तुम्हारे जैसा लंड भी तो मुझे नहीं मिलता …उफफफफफफफफफफफ्फ़ ..मैं मर गाईए …..आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह “


शिव उसकी सिसकारियों से और भी मस्ती में आ जाता है .. झूकते हुए हाथ नीचे कर उसकी चूहियाँ भी दबाने लगा …निचोड़ने लगा … शांति ने अपना चेहरा थोड़ा पीछे और उपर कर लिया ..शिव ने उसके होंठों को भी अपने होंठों से जाकड़ लिया …. हाथ कभी चूचियाँ मसलता तो कभी कमर जाकड़ लेता ..धक्के का ज़ोर बढ़ाता जाता ..थप..थप की आवाज़ों से कमरा गूँज़ रहा था ….जांघे और चूतड़ टकरा रहे थे …और चूत और लंड में घनघोर मिलाप हो रहा था ….एक एक अंग उनका इस चुदाई में शामिल था …


” आआह शांति …शांति मेरी रानी ..मेरी जान ..आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कितना मज़ा है तेरे अंदर ..उफफफफफ्फ़ “


“हां मेरे राजा ..सब तुम्हारा ही तो है ..ले लो ना ..सब कुछ ले लो ..मैं तो निहाल हो गयी …आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..उउउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..हाआँ मेरे राजा ..हां ..बस और ज़ोर …..आआआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..”


शिव समझ गया शांति अब झड़नेवाली है ..उसका भी झड़ना अब करीब ही था ..


उस ने अपना लंड अंदर डाले रखा और सीधा खड़ा हो गया …शांति को भी सीधा कर एक दूसरे से चिपके बेड पर ले आया ….अब शांति को लिटा कर उसके उपर आ गया ..शांति ने अपनी टाँगें फैला दीं …शिव ने अपना गीला लंड उसकी चूत में घूसेड दिया और उसे अपनी बाहों में जकड़ते हुए फिर से धक्के लगाना शूरू कर दिया ..हर धक्के में शांति उछल पड़ती .. और अब शिव ने अपने लंड को जड़ तक उसकी चूत में डालते हुए उसे बूरी तरेह अपने से चिपका लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा …बस पागलों की तरेह चूमता जाता ..शांति भी अपनी बाहें उसकी गले के गिर्द डाल कर और भी चिपक गयी ..उसका लंड अंदर झटके खा रहा था …शिव उसकी चूत में ही झाड़ रहा था ..शांति भी चूतड़ उछाल रही थी ..पानी लगातार निकल रहा था उसकी चूत से ….दोनों एक दूसरे से चिपके थे ..दोनों के शरीर और शरीर के रस एक दूसरे में समाए जा रहे थे ….


फिर शांति के सीने में शिव शांत हो कर अपना सर रख हांफता हुआ पड़ गया ….


शांति अपने हाथ उसके सर के पीछे रखते हुए उसके बालों को सहलाने लगी


” देखा ना ….कोई दूसरा कभी मुझे इतना प्यार देता ….??” शांति ने शिव की आँखों में झाँकते हुए कहा ….


शिव ने कुछ कहने की बजाय उसके होंठों को चूम लिया …उसके सीने पर उसकी मुलायम चूचियों को महसूस करते हुए आँखें बंद किए मुस्कुराता हुआ पड़ा रहा ..


दोनों एक दूसरे की बाहों में पड़े पड़े कब नींद की गोद में चले गये ..पता नहीं ….


तो फ्रेंड्स कहानी का आगाज़ कैसा लगा ज़रूर बताना और मेरा साथ भी देना


शिव-शांति के घर सुबह की पहली सुनेहरी किरणों के साथ एक सुनहरे दिन की शूरूआत होती है…


शिव अकेला बिस्तर पर पड़ा है…शांति के नशीले होंठों और मदमस्त चूत के रस के खुमार अभी भी है ….उसकी आँखें बंद है पर होंठों पर हल्की मुस्कुराहट …. और तभी शांति चाइ का ट्रे लिए उसके बगल बैठ ती है ….उसके होंठों पर अपने ताज़े ब्रश किए टूथ पेस्ट की तरोताज़ा सुगंध लिए होंठ रख देती है ….यह जानी पहचानी सुगंध शिव को आँखें खोलने का संकेत था … उस ने आँखें खोली ..और शांति को अपनी बाहों मे ले लिया ….शाँति भी थोड़ी देर उसके सीने से लगी रही … फिर सीने पर प्यार से मुक्के लगाती हुई उठ गयी …


” उफफफफफफ्फ़..अब बस भी करो ना शिव… चलो उठो चाय पी लो ..मुझे बच्चों को भी चाइ देनी है … बीचारे मेरा वेट करते होंगे ..” और उसने ट्रे में रखी केटली से शिव के कप में चाइ भर दी और उसकी ओर बढ़ाया …


शिव अभी भी अपने होंठों पर शांति के होंठों का स्वाद अपनी जीभ फिराते हुए ले रहा था


” शांति … तुम्हारा यह टूथ पेस्ट बड़ा ही टेस्टी है यार …पहले वाला इतना टेस्टी नहीं था ….बस एक बार और ..प्लीज़ ..”


इतना कहते हुए शिव ने अपने एक हाथ से चाइ का प्याला थाम लिया और अपने होंठ शांति के होंठों पर रख उसे हल्के से चूसने लगा ….


” हद हो गयी … तुम तो एक बच्चे से भी गये गुज़रे हो … मैं कितने बच्चों को सम्भालूं ?? ..” शांति ने झट से अपने आप को अलग किया ट्रे उठाया और कमरे से जाते जाते कह गयी..” यह टूथ पेस्ट मैने ख़ास तुम्हारे लिए ही लिया है…. “


शिव मुस्कुराता हुआ फिर से अपने होंठ पर जीभ फिरा रहा था….और साथ में गरमा गरम चाइ की चुस्कियाँ भी लेता जा रहा था….


शांति शशांक के कमरे के अंदर आ जाती है… और उसके बेड के बगल साइड-टेबल पर चाइ का कप रखते हुए उसे उठाती है …


” गुड मॉर्निंग बेटा ….चलो उठो चाइ पी लो .. ठंडी हो जाएगी … उठो शशांक …”


शशांक आँखें मलते हुए उठता है….और उसकी नज़र अपनी खूबसूरत माँ पर पड़ती है …चेहरा बिल्कुल फूलों की तरेह तरो-ताज़ा और चहकता हुआ ….उसका मन भी खिल उठता है ….


” गुड मॉर्निंग मोम … एक बात पूछूँ ममा..???”


“हां बेटा पूछ ..पर जल्दी कर मुझे तेरी फटाके को भी चाइ देनी है ना ….पता नहीं उठ गयी हो और बस फूटने की तैय्यारि में ही होगी…”


फटाके के जिक्र से शशांक जोरों से हंस पड़ता है ..और पूरी तरेह जाग जाता है…


” हा हा हा.! ममा बस यही तो पूछना था ..आप हमेशा इस तरेह खुश रहती हो और खुशियाँ बीखेरती रहती हो… हाउ कॅन यू डू इट मोम …और एक दो बार नहीं ..आइ ऑल्वेज़ सी यू स्माइलिंग … आप की स्माइल कितनी मस्त है…सारा घर हंसता रहता है …”


” अब इतने अच्छे बेटे और एक फाटका बेटी के होते हुए मैं तो हमेशा हँसती ही रहूंगी ना …”


शांति ने बड़े टॅक्टफुली शशांक को जवाब दे दिया ….


” वाह मोम तुस्सी ग्रेट हो जी..सुबेह सुबेह इतनी तारीफ कर आप ने तो मेरा मुँह ही बंद कर दिया ..ठीक है जाओ और देखो तुम्हारी फटका बेटी क्या फटका छोड़ती है…”


शांति अपने सुबेह के आखरी और सब से मुसीबत वाली पड़ाव की ओर बढ़ती है… शिवानी अब तक सुबेह की गहमा गहमी और शांति की चहलकदमी से जाग गयी थी और आँखें बंद किए अपनी मोम का इंतेज़ार कर रही थी … थोड़ा डिंमग गर्म भी हो रहा था …”अब तक क्यूँ नहीं आई..???”


” उठ जा बेटा …. चाइ पी ले ..” शांति ने उसकी तरफ चाइ का प्याला बढ़ाया ..


शिवानी ने मुँह फेर लिया ….


“जाओ मैं नहीं पीती छाई ..” शिवानी ने गुस्से से कहा …


” अले अले ..मेरी रानी बेटी सुबेह सुबेह इतनी गरम ..?? पर क्यूँ..??” शांति ने शिवानी के बाल सहलाते हुए उस से पूछा.


” और नहीं तो क्या ….मैं हू ना सब से बेकार …सब को चाइ पीला दी और मैं कब से यहाँ पड़ी हूँ ….किसी को मेरा ख़याल भी है..?? “


” ओह कम ऑन शिवानी ऐसी बात थोड़ी है बेटी..मैं तो तेरे साथ चाइ पियूँगी .तभी तो तेरे पास सब से लास्ट में आई ..” शांति ने मौके की नज़ाकत समझते हुए यह तीर फेंक दिया…


मोम के साथ चाइ पीने की बात सुन शिवानी का गुस्सा बिल्कुल ठंडा हो गया …..जितनी जल्दी आया था उतनी ही जल्दी गायब भी हो गया ..फटका फूटने से पहले ही शांत हो गया ..


“ओह मोम तुस्सी ग्रेट हो..आज तो बस भैया को मैं सुनाऊँगी ..”


और फिर दोनों माँ -बेटी अगल बगल बेड पर बैठे चाइ की चुस्कियाँ लेते हैं …


शांति सोचती है यह शिवानी अपने भाई से कितना प्यार करती है..हर छोटी मोटी बात उसे अपने भैया को ज़रूर सुनाना होता है …


सुबेह की चाइ का दौर ख़तम होता है और सब तैय्यार हो कर नाश्ते के टेबल पर बैठते हैं …


शिवानी अपने प्यारे भैया के बगल बैठी है … उसकी नज़र शशांक के चेहरे पे लगी है …


शशांक का तरो-ताज़ा शेव किया चेहरा सुबेह की ताज़गी लिए आफ्टर शेव लोशन की सुगंध बीखेरते हुए दम दमा रहा था .. इस मादक खूशबू से शिवानी मदमस्त हो जाती है और उसके पास अपना चेहरा ले जाते हुए कहती है …


” भैया ..भैया …” पर उसके भैया की नज़र तो किचन के अंदर है..जहाँ शांति नाश्ता तैय्यार कर रही थी ….वो शिवानी की बात अन्सूनि कर देता है …


पर वो कहाँ मान ने वाली थी .. उसके चेहरे को अपने हाथों से थामते हुए अपनी तरफ घूमती है और उसके गाल पर अपने गाल लगाते हुए कहती है ” मैने कहा भैया गुड मॉर्निंग .. “


” ओह यस वेरी गुड मॉर्निंग शिवानी…आज तो बड़ी चहेक रही है तू … सुबेह सुबेह क्या हो गया ..??”


वो भी शिवानी की गालों पर अपनी गाल लगाते हुए कहता है ..


” ह्म्‍म्म ..चलो तुम्हें मेरा ख़याल तो आया …अरे आज दो बातें बड़ी मस्त हुई ….” शिवानी ने भैया की जाँघ पर अपने हाथ रखते हुए कहा ..


” अच्छा ..?? पर बता भी क्या हुआ ..?” शशांक ने थोड़ा झुंझलाते हुए कहा …


शशांक की बात से शिवानी उस से फ़ौरन अलग हो जाती है और गुस्से से बोल पड़ती है


” जाओ नहीं बताती …यहाँ कोई मेरी बात सुन ना ही नहीं चाहता …” और उसने मुँह फेर लिया .


शशांक समझ गया उसकी प्यारी गुड़िया सी बहेन को उसका झुंझलाना अच्छा नहीं लगा ..


वो फ़ौरन मौके की नज़ाकत समझते हुए उसका चेहरा अपनी तरफ खींचता है ..उसकी आँखों में देखते हुए कहता है


” बता ना शिवानी..प्लीज़ ..” उसकी आवाज़ में मिश्रि घूली थी


” हां यह हुई ना बात ..ऐसे ही प्यार से पहले ही पूछते तो क्या तुम्हारी शकल बीगड़ जाती ??” शिवानी बोल उठती है ..


” अच्छा बाबा सॉरी ,सॉरी सॉरी …अब तो बता दे..”


” यू नो भैया आज मोम ने मेरे साथ बैठ कर सुबेह की चाइ पी…..कितना मज़ा आया …रोज तो अकेले पीना पड़ता था ….और यू नो शी वाज़ लुकिंग सो प्रेटी आंड फ्रेश …. उफ़फ्फ़ पापा ऐसे ही उन पर जान नहीं छिड़कते और पापा ही क्यूँ ..आप भी तो ….” और वो भैया की ओर देख एक बड़ी शरारती और प्यारी सी स्माइल देती है ….


” तू भी ना शिवानी..कुछ भी बोलती है … एनीवेस अब बता दूसरी बात क्या हुई ..?? “


” दूसरी बात …दूसरी बात ह्म्‍म्म .भैया आप ने जो आफ्टर शेव लोशन लगाया है ना ..उफफफ्फ़ बड़ी प्यारी है ….” और फिर से अपनी नाक भैया के गालों पर सटाते हुए एक लंबी सांस लेती है ..मानो उसके गालों पर लगे आफ्टर शेव लोशन की महक अपने में समा लेना चाहती हो..


” एक दम पागल है तू शिवानी …. एक दम पागल … ऐसा भी कोई बोलता है क्या ..??”


” बस मुझे अच्छा लगा मैने बोल दिया …. “


” देख शिवानी तू बड़ी शैतान हो गयी है ….चल चूप चाप बैठ और नाश्ता कर ..हमें कॉलेज जल्दी जाना है … आज मेरा पहला पीरियड है आंड आइ डॉन’त वॉंट टू मिस इट …”


तब तक मोम नाश्ता ले आती है , शिव भी आ जाते हैं और दोनों भाई बहेन की ओर देख मुस्कुराते हुए कहते हैं


” अरे भाई सुबेह सुबेह क्या चल रहा है तुम दोनों के बीच ..??”


” अरे कुछ नहीं पापा … यह शिवानी है ना ..बस कुछ भी बोलती है …”


” हा हा हा ! अरे शशांक अभी तो उसे बोलने दे यार …फिर जब ससुराल जाएगी तो इतना बोलने का मौका कहाँ मिलेगा ..” शिव ने मज़किया लहज़े में जवाब दिया ..


” ओह पापा ..अब आप फिर चालू हो गये ना अपनी फवर्ट टॉपिक पर….पर आप सब कान खोल कर सुन लीजिए मैं कोई ससुराल वासुराल नहीं जाने वाली ….समझे आप सब …? ” और उसकी आँखों से मोटी मोटी आँसू के बूँद टपकने लगते हैं ..


शिव बेचारा घबडा जाता है उसकी यह हालत देख …


” अले अले मेरी गुड़िया …अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था ..उफ्फ … अरे तुझे तेरी मर्ज़ी के खिलाफ कोई कुछ नहीं करेगा यार ….चल चूप हो जा ..प्लीज़ .. “


” ठीक है ..पर आगे आप मज़ाक में भी ऐसा मत बोलना ” वो अभी भी सूबक रही थी और अपने भैया की ओर बड़े प्यार से देखे जा रही थी …


” हां शिवानी … पापा ठीक कह रहे हैं … चल जल्दी से नाश्ता कर ले ..” और शशांक अपने हाथों से उसे खिलाता है …शिवानी बस एक टक उसे निहारती हुई नाश्ता शूरू करती है …


इस तरेह प्यार करते , रूठते , मनाते , हंसते , खिलखिलाते शिव -शांति के परिवार के दिन की शुरुआत होती है …


नाश्ते का दौर ख़तम होता है …


शशांक अपने रूम में क्लास के लिए ज़रूरी नोट -बुक्स वग़ैरह लेने को जाने लगता है और जाते जाते शिवानी से बोलता भी जाता है..” शिवानी..तू जल्दी बाहर आ जा मैं बाइक निकालता हूँ ….आज देर नहीं होनी चाहिए ..”


“हां भैया ….तुम चलो मैं बस आई..”


पर हमेशा की तरेह होता यह है के शशांक बाहर बाइक लिए खड़ा है और अपनी प्यारी दुलारी और शोख बहेन का बेसब्री से इंतेज़ार कर रहा होता है ….


” उफफफ्फ़ ..यह शिवानी भी ना …..अगर आज मुझे देर हुई तो उसे छोड़ूँगा नहीं ..” शशांक गुस्से में बड़बड़ाता जा रहा है और बार बार रिस्ट . पर नज़रें घूमाता जा रहा है ..


और इस से पहले की शशांक का गुस्सा उबाल तक पहूंचे ..सामने दरवाज़े से शिवानी भागती हुई बाहर आती है …..वो जानती है के अब अगर ज़्यादा नखरे दीखाई तो उसकी ख़ैरियत नहीं …


” लो मैं आ गयी … अब चलें ..?”


शशांक उसकी ओर देखता है ….उसकी नज़रें फटी की फटी रह जाती है ….. टाइट जीन्स , नीचे गले तक का मॅचिंग टॉप….. जितना बदन ढँकता उस से कहीं ज़्यादा उसकी जवानी का उभार बाहर छलक रहा था ….


पर अब इतना टाइम नहीं था के उस समय वो शिवानी से कुछ कहता …. बस एक टेढ़ी नज़र से उसे देखता है ” चल बैठ ..तू भी ना …कॉलेज जा रही है यह कोई फॅशन परेड ..?”


बड़बड़ाता हुआ खुद बाइक पर बैठता है और शिवानी भी उसके पीछे बैठ जाती है…कहना ना होगा अच्छी तारेह चीपकते हुए …


” क्या भैया …..फॅशन परेड में कोई ऐसा ड्रेस थोड़ी पहनता है … वहाँ तो बस …..” और जोरों से खिलखिला उठती है


” देख ज़्यादा बन मत ..चूपचाप बैठ ..और हां ज़्यादा मत चीपक ..बाइक चलाने में दिक्कत होती है..”


” उफ्फ भैया जब देखो मुझे डाँट ते रहते हो..यह मत पहेन ..ऐसे बैठ ..वैसे उठ .आप बड़े जालिम हो ” और उसकी पीठ पर हल्के से मुक्के लगाती है ….और थोड़ा पीछे खिसक जाती है ” लो अब ठीक है ना..?”


पीछे खीसकते हुए शिवानी अपने दोनों हाथ उसके दोनों जांघों पर रखती है और उसके जांघों को अच्छे से जाकड़ लेती है ….


शशांक पीछे मूड कर कुछ बोलता उसकी इस हरकत पर , उस से पहले ही शिवानी बोल उठ ती है ..


” भैया ..सामने देखो …बाइक चलाने पर ध्यान दो ….” इस बार नसीहत देने की बारी शिवानी की थी .और मन ही मन अपनी इस छोटी सी जीत पर मुस्कुरा उत्त्ती है


शशांक अंदर ही अंदर खीजत हुआ चूपचाप बाइक चलता है …


रास्ते भर शिवानी उसकी जांघों को सहलाती रही…..कुछ इस तरेह जैसे शशांक को यह महसूस हो कि शिवानी अपने आप को बॅलेन्स कर रही हो जिस से कि वो बाइक से गिर ना जाए … कभी कभी उसकी उंगलियों की टिप उसके पॅंट के अंदर के उभार को भी छू लेती …शशांक को अच्छा भी लग रहा था , पर अंदर ही अंदर कुढता भी जा रहा था अपने बहेन की इस हरकत से …उसे तो अपनी मोम चाहिए थी ..उसके सामने तो जन्नत की हूर भी कुछ नहीं ..शिवानी तो दूर की बात थी…


पर शिवानी भी आखीर उसी की बहेन थी ..उस ने भी कसम खा ली थी कि उसे पीघला के ही रहेगी..चाहे सारी जिंदगी क्यूँ ना निकल जाए …


दोनों भाई-बहेन अपने मिशन पर जी जान से जुटे थे…


कॉलेज पहूंचते ही दोनों अपने अपने क्लास की ओर चल पड़ते हैं ..और जाते जाते शिवानी को बोलता है ” देख मैं यहीं रहूँगा शाम को…तू यहीं आ जाना …”


” ओके ब्रो’ …” शिवानी बोलती है और जाते जाते उस से गले लगा कर उसके गाल चूम लेती है …


” उफ्फ ..यह लड़की है यह तूफान …” बड़बड़ाता हुआ अपने गाल पोंछते हुए क्लास की ओर चल पड़ता है…


इधर शिव-शांति अपने कार में अपनी दूकान की ओर चल पड़ते हैं ..


शिव के ज़िम्मे सेल्स था ..इसलिए उसकी ऑफीस नीचे ग्राउंड फ्लोर पर ही थी …इस से उसे अपने सेल्स स्टाफ और कस्टमर्स पर नज़र रखने में सहूलियत होती थी ..शांति पर्चेस देखती ..इसलिए उसकी ऑफीस फर्स्ट फ्लोर पे थी ..जहाँ उनका स्टोर था.


दोनों सीधा अपने अपने ऑफीस की ओर जाते हैं और अपने अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं ..


लंच टाइम पर शिव सीधा अपनी प्यारी बीवी के ऑफीस में जाता है …


शांति अपनी चेर पर बैठे कुछ सप्लाइयर्स के कोटेशन्स देख रही थी …तभी शिव अंदर आता है और शांति के टेबल के सामने रखी कुर्सी खींच बैठ जाता है ..


” उफ़फ्फ़ …आज कल कस्टमर्स कितने चूज़ी हो गये हैं ….” शिव अपने माथे का पसीना पोंछते हुए कहता है


” होंगे ही ना शिव..आज कल उनके पास कितना चाय्स है … दूकानों की चाय्स..कपड़ों की चाय्स , ब्रांड की चाय्स ….”


” पर इतने चाय्स होते हुए भी एक बात है शांति ..अपनी दूकान में भीड़ लगी रहती है … मान ना पड़ेगा शांति ..तुम्हारा स्टॉक इतना नायाब और एक्सक्लूसिव है …. उन्हें इतना वाइड रेंज और कहीं नहीं मिलता ..”” शिव ने अपनी बीवी की तारीफ करते हुए कहा .


” हां शिव ..मैं उन्हें हमेशा औरों से कुछ अलग देना चाहती हूँ …तभी तो मैने इस बार हॅंडलूम के खास डिज़ाइन्स मँगवाए …”


शिव अपनी कुर्सी से उठता है , शांति की तरेफ बढ़ता है ..शांति उत्सुकतावश आँखें बंद कर लेती है …


” हां शांति …तभी तो मैं कहता हूँ ना तुम्हारे बिना मैं कुछ भी नहीं ..” और खड़े खड़े ही उसकी बंद आँखों को चूमता है …उसका चेहरा अपने हाथों में लेता है ..उसके गाल चूमता है और फिर शांति को अपने हाथों से थामते हुए अपने सामने खड़ी करता है , सीने से लगा उसके होंठों को बेतहाशा चूमता है….


शांति भी कुछ देर तक उसके चौड़े सीने से अपना मुलायम और गुदाज सीना लगाए आत्मविभोर हुए , आँखें बंद किए खो जाती है …आनंद के सागर में गोते लगाती है…


” आआआः ..अब बस भी करो ना शिव …देखो कोई आ गया तो..?? चलो मुझे तो जोरों की भूख लगी है “


शिव शांति के इस प्यार भरे उलाहने से वापस धरती पर आ जाता है….दोनों साथ साथ ऑफीस के डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ते हैं ….लंच उनका इंतेज़ार कर रहा होता है…


शाम के 4 बज चूके हैं ..आज शशांक की क्लास थोड़ी जल्दी ही छूट गयी ..लास्ट पीरियड वाले सर ने जल्दी ही क्लास छोड़ दिया था …


वो अपनी बाइक पर बैठा शिवानी का इंतेज़ार करता है ..उसे आने में अभी कुछ देर और है..करीब आधे घंटे और..


वो वहाँ बैठा उसी का बारे सोचता है ….वो अपनी बहेन से बहोत प्यार करता है..पर सिर्फ़ एक छोटी भोली भली नाज़ुक सी गुड़िया सी बहेन की तरेह ..उसके लिए कुछ भी कर सकता था …उसके हर नखरे उठाता , सहता और उसे हमेशा खुश देखना चाहता ..


पर इधर कुछ दिनों से उसे शिवानी के व्यवहार ने परेशान कर दिया था ….वो समझता था कि शिवानी क्या चाहती थी .पर लाख कोशिश के बावज़ूद उसे अपनी बहेन के बारे ऐसे सेक्षुयल विचार नहीं आते … उसके लिए वो इतनी कोमल , नाज़ुक और ज़हीन थी कि उसे किसी भी तरेह की कोई तकलीफ़ और दर्द देने के बारे सोच ही नहीं सकता …उसके सामने वो एक गुड़िया थी जिसके साथ सिर्फ़ प्यार और दुलार किया जा सकता . जिसको फूल जैसे संभाल के रखना चाहिए …हमेशा सुगंधित और तरो-ताज़ा वरना कहीं उस फूल की पंखुड़िया नीकल ना जायें …


इन्ही उधेड़बून में खोया था के शिवानी आ जाती है ..


शशांक के पीठ पर एक हल्का सा मुक्का लगाती है ….


” ओह भैया ..कहाँ खो गये हो …अरे बाबा मैं आ गयी …चलो ना घर …”


शशांक अपने ख़यालों से वापस आता है ..


” हां मेरी गुड़िया ….तेरे आने की खबर तो सारे शहेर वाले जान गये .. अफ ..कितने जोरों का मुक्का लगाई रे ..” शशांक ने दर्द होने का नाटक किया ….


” अरे उफफफ्फ़. सॉरी भैया..क्या सही में ज़ोर से लगा ..?? लाओ मैं पीठ सहला दूं ” शिवानी ने यह सुनेहरा मौका हाथ से लपक लिया ….. शशांक के पीछे चीपक कर बैठ गयी और उसकी पीठ सहलाने लगी ….” कहाँ लगी ..बताओ ना प्लीज़..”


” अरे बाबा अब ज़्यादा नौटंकी मत कर … अब ठीक है ..कहीं कोई दर्द वर्द नहीं ..ठीक से बैठ , घर चलते हैं …वहाँ बातें करेंगे …आज तुझ से काफ़ी कुछ कहना है ..” शशांक ने कहते हुए अपनी बाइक किक की और बाइक स्टार्ट कर एक व्रूम – ज़ूम की आवाज़ के साथ कॉलेज से बाहर निकलती गयी.


” ओह भैया …आज क्या हो गया ….कहीं मैं ग़लत तो नहीं सुन रही ….आप ने क्या कहा वो ..मुझ से बातें करेंगे ..??” शिवानी का दिल उछल पड़ा था ..शशांक से अकेले में बात करने की संभावना से …उसे विश्वास नहीं हो रहा था


” अरे हां बाबा ..मैं क्या अपनी गुड़िया से बातें नहीं कर सकता ..?” शशांक ने बाइक को धीमी करते हुए कहा …


“अरे क्यूँ नहीं ..पर रोज तो आप बस नसीहतें ही देते हो…बातें तो कभी नहीं करते …” शिवानी ने शिकायती लहज़े में कहा


” चलो आज तुम्हारी शिकायत दूर कर देता हूँ …अब चूप चाप बैठ ” और शशांक ने बाइक की स्पीड बढ़ाते हुए घर की ओर बढ़ता जाता है..


“ओह्ह्ह..भैया….आइ लव यू ..यू आर छो च्वीत ,,,” शिवानी उस से और चीपक कर बैठ जाती है और अपने भाई के कंधे पर अपना सर रखे बाइक पर बैठे हवा के झोंको का आनंद लेती जाती है ..


थोड़ी देर में ही दोनों घर पहून्च जाते हैं ….शशांक बाइक रोकता है ..शिवानी उतर जाती है और घर के अंदर दाखील होती है…शशांक गाड़ी स्टॅंड पर खड़ी कर उसके पीछे पीछे अंदर जाता है ..


अंदर शांति सोफे पर अढ़लेटी बैठी है ..सर सोफे पर टीकाए …उसे देख दोनों भाई बहेन पहले तो चौंक जाते हैं ., पर फिर शशांक के चेहरे पर एक बड़ी चौड़ी मुस्कान आ जाती है ….


” अरे मोम आप अभी यहाँ ..? दूकान पर डॅड अकेले हैं ..?? क्या हुआ ..?” शशांक थोड़ी चिंता करते हुए पूछता है …


मोम को देख शिवानी का चेहरा थोड़ा मुरझा जाता है..उसके शशांक से खूल कर बातें करने की संभावना पर ठेस जो लग गयी थी ..


“कुछ नहीं बच्चों..थोड़ा सर में दर्द था ..इसलिए मैं जल्दी आ गयी..”


” ओह गॉड .. अच्छा हुआ आप आ गयीं …. लाइए मैं सर दबा देती हूँ ..”शिवानी ने अपनी मोम के बगल बैठते हुए कहा ..


” अरे नहीं शिवानी ..तू क्यूँ तकलीफ़ करती है ..मैं दबाता हूँ ना मोम का सर ..तू जा किचन में और एक दम कड़क चाइ बना …चल उठ ..” शशांक ने यह सुनेहरा मौका अपने मोम से चीपकने का लपक लिया ..


शिवानी समझ गयी …वो बड़ी शरारती ढंग से मुस्कुराती हुई उठती है और भैया को आँख मारती है और किचन की ओर जाते हुए कहती जाती है ” हां भैया ..ज़रा अच्छे से दबाना … ” और कमर मटकाते हुए किचन की ओर बढ़ जाती है ….


शांति अपने दोनों बच्चो की प्यारी हरकतों पर हँसती जाती है …


शशांक मोम के बगल आ जाता है ..अपनी मोम का सर अपने सीने पर रखता है और हल्के हल्के अपनी हाथों की उंगलियों से दबाना शूरू करता है …


मोम के शरीर की सुगंध …उनके मुलायम पीठ का स्पर्श अपने शरीर पर , शशांक खो जाता है इस स्वर्गिक आनंद में ..और उसके हाथ बड़े प्यार से अपनी मोम का सर दबाता रहता हैं..


शांति भी उसके प्यार से आत्मविभोर है …वो सोचती है कितनी खुशनसीब है वो ..इतना प्यार करनेवाला पति..इतने प्यारे प्यारे बच्चे … उसने ज़रूर पीछले जन्म में कोई पुन्य का काम किया होगा ..और सोचते सोचते उसे नींद आ जाती है , और वो शशांक के कंधो पर सर रखे रखे सो जाती है ..उसका सर शशांक के कंधो पर था ..आँचल नीचे गिरा था ..उसका सीना शशांक की नज़रों के सामने था ….उसकी सुडौल चूचियाँ उसकी साँसों के साथ उपर नीचे हो रही थीं …शशांक एक टक उन्हें निहार रहा था ….


उस की उंगलियाँ शांति के सार से फिसलते हुए कब उसके सीने पर पहून्च गयीं ..शशांक को कुछ मालूम नहीं था …उस ने मोम के सीने को सहलाना शूरू कर दिया ..उफफफफफफफ्फ़ …यह उसका किसी औरत को इतने करीब से छूने का पहला मौका था …पॅंट के अंदर खलबली मची थी ..उसका पूरा बदन सीहर उठा था …


तभी शिवानी चाइ का ट्रे लिए आती है …शशांक घबडा जाता है पर अपने पर काबू करते हुए फ़ौरन अपने हाथ हटा ता हुआ शिवानी के हाथ से चाइ की ट्रे लेता है …पर बड़ी सावधानी से ..उसकी मोम का सर अभी भी उसके सीने पर था …


शिवानी अपनी आदत से मजबूर कुछ बोलना चाहती है.. पर शशांक उसे इशारा कर चूप रहने को कहता है ..और मोम की ओर इशारा कर धीमी आवाज़ में कहता है ” चूप कर शिवानी .मोम को सोने दे …”


पर शिवानी कहाँ चूप रहती ..उस ने अपना चेहरा शशांक के बिल्कुल करीब ले जाते हुए फूसफूसाते हुए कहती है ..” भाई ..मोम को बेड रूम में हम दोनों ले जाते हैं … वहाँ आराम से उन्हें सोने दो ….यहाँ हम दोनों की बातों से इन्हें डिस्टर्ब होगा..” और अपनी चमकीली दांतें बाहर कर मुस्कुराती है …


शशांक को भी यह आइडिया पसंद आ जाता है….उसने हामी में अपना सर हिला दिया …शिवानी खील उठी ..


दोनों भाई बहेन बड़ी सावधानी से शांति को अपनी अपनी बाहों से उठाते हैं , शशांक उन्हें एक बच्ची की तरेह अपने सीने से चिपकाता हुआ गोद में भर लेता है , शिवानी उनका पैर थामती है , धीरे धीरे दोनों बेड रूम की ओर बढ़ते जाते हैं ….शशांक अपनी मोम के स्तनों का दबाव अपने सीने पर महसूस करता है …..उफफफफफफफ्फ़ ..वो आनंदविभोर है इस अनुभूति से … उसकी आँखें भी आधी बंद हो जाती हैं …एक अजीब ही सुख था इस स्पर्श में …


दोनों बड़ी सावधानी से शांति की नींद में बिना किसी खलल के बेड रूम तक पहुचाते हैं ..और उसे बेड पर लीटा देते हैं …


शांति के बाल बीखरे हैं , आँचल नीचे गीरा है ..हाथ बेड पर फैले हुए … .क्या द्रिश्य था ….शशांक उसे निहारता रहता है ..


शिवानी उसे हल्के से झकझोरती है ..और बाहर निकलने का इशारा करती है ….शशांक सर हिलाता है ..हामी में ..


जैसे दोनों बेड रूम से बाहर आते हैं शिवानी शशांक से लिपट जाती है , उसके गालों को चूमने लगती है …. शशांक भी अपने गाल उसकी ओर बढ़ा देता है ..पर शायद शिवानी इसे शशांक की स्वीकृति समझ उसके होंठों पर अपने होंठ लगाती है …..शशांक बड़े प्यार से उसका चेहरा अपने हाथों से थामता हुआ अलग करता है और पीछे हट जाता है ….


” हां शिवानी इसी बारे में तुम से बातें करनी है ….” वो प्यार से उसे झीड़कते हुए कहता है


शिवानी का चेहरा मुरझा जाता है ……


शशांक उसे उसके कंधों से थामता हुआ ड्रॉयिंग रूम में सोफे की ओर बढ़ता जाता है…


शिवानी शशांक के सीने पर अपना पूरा बोझ डाले , अपनी गोल गोल सुडौल चूतड़ उसकी पॅंट से चिपकाए अपने मुरझाए चेहरे पर फिर से एक शरारती मुस्कान लिए उसके साथ साथ आगे बढ़ती है सोफे की तरफ .


शशांक झुंझला उठता है अपनी बहेन की इस हरकत से ..पर अपने आप को संभालता है ….उसका लंड अंदर ही अंदर शिवानी के चूतड़ो की दरार से टकराता जाता है …पर शशांक अपने आप को बड़ी मुश्किल से कंट्रोल किए सोफे पर बैठता है ….और शिवानी की कमर को थामते हुए उसे अपने बगल कर लेटा लेता है …


शिवानी के चेहरे को अपनी हथेलियों से बड़े प्यार से थामता है और उसके गाल चूम लेता है ..शिवानी फिर से आँखें बंद कर लेती है और सोचती है ” आज लगता है ऊँट पहाड़ के नीचे और मेरी चूत इसके लंड के नीचे आने ही वाली है..”


पर शशांक तो किसी और ही मिट्टी का बना होता है ….उसका लंड उसकी चूत पर तो नहीं पर हां उसकी हथेल्ली की हल्की चपत उसके गालों पर पड़ती है ..और शिवानी अपने लंड और चूत के सपनों से वापस आ जाती है …


” देख शिवानी ..तू जानती है ना मैं तुझे कितना प्यार करता हूँ ..? “शशांक बड़े प्यार से उसे कहता है ..


” तो क्या मैं नहीं करती आप से..?”


“हां करती हो..शिवानी ..पर उस तरेह नहीं जैसे कोई बहेन अपने भाई से करती है ….देख , ना मैं ना तू ..कोई भी अब बच्चा नहीं रहा ….क्यूँ अपने आप को धोखे में रख रही है गुड़िया ..?? प्लीज़ होश में आ जा … “


” भैया मैं पूरे होश-ओ-हवास में हूँ ..और आप भी जानते हो मैं कोई बच्ची नहीं रही …”


” तभी तो कह रहा हूँ ना मेरी बहना ….क्यूँ तू मेरे पीछे पड़ी है ..अपने क्लास में तुझे कोई लड़का पसंद नहीं ..? मेरी रानी बहना ..अपना बॉय फ्रेंड बना ले ..”


” भैया एक बात पूछूँ ..? “


” हां पूछ ना शिवानी ..” शशांक उसके बालों को सहलाता हुआ कहता है..


” आप की क्लास में भी तो कितनी हसीन, जवान और खूबसूरत लड़कियाँ हैं ..मैं जानती हूँ आप किसी को भी आँख उठा कर नहीं देखते …आप ने अब तक अपनी गर्ल फ्रेंड क्यूँ नहीं बनाई..?”शिवानी की बात से शशांक चौंक जाता है …..उसकी गुड़िया अब गुड़िया नहीं रही ..वो भी अब इन बातों को समझती है … उसे ऐसे ही फूसलाया नहीं जा सकता ..कूछ ना कूछ तो करना पड़ेगा …


शशांक कुछ देर खामोश रहता है और शिवानी की तरेफ देखता है …


” क्यूँ भैया चूप क्यूँ हो गये ..?? ” शिवानी भी शशांक की आँखों में झाँकते हुए कहा …


” तू क्या जान ना चाहती है..सच या झूट..?? “


” भैया …मैं आप का सच और झूट सब जानती हूँ ..पर मैं आप के मुँह से सुन ना चाहती हूँ..हिम्मत है तो बोलिए ना ..” शिवानी ने शशांक को लल्कार्ते हुए कहा ..


शशांक आज शिवानी की बातों से एक तरफ तो हैरान था पर दूसरी तरेफ मन ही मन उसकी इतनी बेबाक , स्पष्ट और निडर तरीके से बात करने के अंदाज़ का कायल भी हो गया था ….


शिवानी अब बड़ी हो गयी थी …


“ह्म्‍म्म ठीक है तो सुन ..मैं मोम से बहोत प्यार करता हूँ शिवानी ..बे-इंतहा ….उनके सामने मुझे कोई और नज़र नहीं आता … तू भी नहीं ..” शशांक ने भी शिवानी की ही तरेह उसे दो टुक जवाब दिया .


पर शिवानी उसके जवाब से ज़रा भी विचलित नहीं हुई….बलके उसकी आँखों में उसके लिए आदर और प्रशन्शा के भाव थे..


” भैया …मेरे प्यारे भैया ..बस उसी तरेह मैं भी आप को प्यार करती हूँ बे-इंतहा ….मुझे भी कोई आप के सामने नहीं दीखता ….और एक बात , आप ने जिस तरेह मोम के बारे मुझे बिना कुछ छुपाए सब कुछ बताया …मेरी नज़र में आप और भी उँचे हो गये हो…आप ने मुझ से झूट नहीं कहा ..कोई भी बहाना नहीं बनाया ..मेरी भावनाओं की कद्र की …और सूनिए ..मैं आप से कुछ भी एक्सपेक्ट नहीं करती ….बस सिर्फ़ आप मुझे इस तरेह नसीहतें मत दें ..आप अपनी राह चलिए ..मैं अपनी राह ….शायद हम दोनों की राह शायद कहीं , कभी मिल जाए..???”


शिवानी इतना कहते कहते रो पड़ती है … उसकी आँखों से आँसू की धार फूट पड़ती है ..


शशांक उसे अपने गले से लगा लेता है …उसकी पीठ सहलाता है ..उसकी आँखों से आँसू पोंछता है और कहता है ..


” शिवानी ….शिवानी ..मत रो बहना ..एक प्यार करनेवाला ही जानता है प्यार का दर्द ..मैं समझता हूँ …पर तू भी समझती है ना मेरी मजबूरी ..?? “


” हां भैया मैं समझती हूँ ..अच्छी तरेह समझती हूँ ..आज के बाद मैं आप को कभी भी परेशान नहीं करूँगी भैया ,,कभी नहीं …मुझे अपने प्यार पर भरोसा है … जैसे आप को अपने प्यार पर भरोसा है ……”


उफफफफफ्फ़ कैसा प्यार है इन दोनों भाई बहेन का …. प्यार में तड़प , दर्द और सब कुछ झेलने को तैयार …सिर्फ़ एक मिलन की आस में …..


…दोनों की आँखों में आँसू थे ..कैसी विडंबना थी …. कैसा त्रिकोण था ….सभी प्यार करते एक दूसरे से ..बस सिर्फ़ नज़रिए का फ़र्क था …


” अरे कहाँ हो शशांक -.शिवानी ..?? “


मोम की आवाज़ ने दोनों भाई बहेन को जगा दिया ..वापस ले आया हक़ीकत की दुनिया में ..जहाँ हसरतें हमेशा पूरी नहीं होतीं ..पर फिर भी लोग अपनी अपनी हसरतो के ख्वाब का सहारा लिए आगे बढ़ते जाते हैं ..एक बड़ी आशा के साथ के शायद कभी..???? इसी शायद पर ही तो उनकी दुनिया अटकी है …


दोनों भाई-बहेन मोम के कमरे की ओर बढ़ते हैं ..


मोम बीस्तर पर पीठ के बल अढ़लेटी है ..


” अरे मैं यहाँ कब आई …मैं तो सोफे पर थी ना ..?”


“हां मोम …पर तुम इतनी गहरी नींद में थी कि हम ने तुम्हें अपनी बातों से डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा ..मैं और भैया ने तुम्हें उठा कर यहाँ लिटा दिया..” शिवानी ने उन से कहा


“ओह माइ गॉड मैं भी कितनी गहरी नींद में थी ..तुम लोग उठा कर मुझे यहाँ ले आए और मैं सोती रही ..उफ़फ्फ़ .मैं भी ना ….अच्छा यह बताओ अभी टाइम क्या हुआ है..?? “शांति ने उनसे पूछा.


” मोम अभी शाम के सिर्फ़ 8 बजे हैं ..पर यह तो बताओ मोम आप का सर दर्द कैसा है अब ..? ” शशांक ने पूछा


” अब तेरे जैसा सर दबानेवाला हो तो फिर सर दर्द तो क्या कोई भी दर्द कहाँ टीक सकता है बेटा..?? ” मोम ने जवाब दिया ..


” ओह मोम ..क्या बात है.. ” शशांक के चेहरे पर चमक आ जाती है … और वो अपनी मोम से लिपट जाता है ..


शिवानी मुस्कुराती है भैया को देख ..और मोम उसे प्यार से धक्का देते हुए हटाती है


” अच्छा चलो हटो बहोत आराम हो गया ..मैं जाती हूँ किचन में कुछ बना लूँ खाने को ..तेरे पापा भी अब आते ही होंगे ..”


शांति किचन की तरेफ जाती है और इधर शिवानी अपने भैया से फिर से चीपक ती है …


” वाह भैया ..लगे रहो …. पर कुछ ख़याल इधर भी कर लो भाई…..”


शशांक उसे धक्का देते हुए अलग कर देता है


” देख अब तू मार खाएगी ….अभी तू ने कहा था ना मुझे परेशान नहीं करेगी ..?”


“वाह जब बेटा अपनी मोम से चीपक सकता है ..बहेन भाई से चीपक नहीं सकती ..??? बड़ी ना-इंसाफी है …”


” उफ्फ तू भी ना शिवानी ….” वो उसकी ओर बढ़ता है उसे मारने को..पर शिवानी भागते हुए किचन में घूस जाती है …


तभी फोन के घंटी की चीख सुनाई पड़ती है ….


” अरे कोई देखो किस का फोन है …” मोम किचन से आवाज़ देती है ..


शशांक भागता हुआ ड्रॉयिंग रूम की ओर जाता है फोन रिसीव करने को…..


शशांक अपने लंबे लंबे कदमों से भागता हुआ फ़ौरन फोन उठाता है …आवाज़ शिव की थी ..


” हां पापा क्या बात है ..?” शशांक ने पूछा..उसकी आवाज़ में चिंता सॉफ झलक रही थी


” शशांक बेटा , कोई खास बात नहीं .. तेरी मोम कहाँ है ?..”


” मोम तो किचन में हैं पापा .उन्हें बुलाऊं क्या ..?”


” नहीं रहने दे ..मोम को बोल देना मैं काफ़ी देर से आऊंगा …कुछ पेंडिंग काम हैं , शो रूम में दीवाली का स्टॉक अरेंज करना है …बोल देना वो समझ जाएँगी.और तुम लोग खाना खा लेना ..मेरा वेट मत करना …”


” ओके पापा ..पर ज़्यादा देर मत करना ..टेक केर..”


और फोन रख देता है.


मोम अभी भी किचन में ही थी..शशांक किचन के अंदर जाता है..मोम के बगल खड़ा हो जाता है ..


” किसका फोन था बेटा .?” शांति उसकी ओर देखते हुए पूछती है .


“पापा का था मोम ..आज रात देर से आएँगे ..कह रहे थे दीवाली का स्टॉक अरेंज करने का मामला है ..हम लोग खाने पर उनका वेट नहीं करें..”


” हां बेटा दीवाली सर पर है…कस्टमर्स को नये नये डिज़ाइन्स और चाय्स चाहिए.मैं समझती हूँ “.


मोम कुक भी कर रही थी और साथ में शशांक से बातें भी करती जाती .


वो अभी भी उन्हीं कपड़ों में थी जिसे पहेन वो सुबेह दूकान गयी थी ..और शाम को घर वापस आई थी..


साड़ी और ब्लाउस में सिलवटें पड़ी थीं , बाल बीखरे हुए थे …चेहरे और आँखों पर एक हल्की अलसाई सी थकान की छाया ….आँचल संभाले नहीं संभलता ..बार बार हाथों पर आ जाता …और उनकी अभी भी सुडौल और मांसल चूचियाँ शशांक की आँखों के सामने आ जाती …


शशांक उन्हें एक टक निहारता जा रहा था ..उनकी यह चाबी वो मंत्रमुग्ध हो कर एक तक देखे जा रहा था ..उसकी आँखों में अपने मोम के लिए प्यार , चाहत , तड़प सॉफ सॉफ झलक रहे थे …


अभी तक शिवानी एक कोने में खड़ी उनकी बातें सुन रही थी ..भैया की आँखों में मोम के लिए उसका प्यार और प्यास देख ..उस ने भैया के लिए रास्ता साफ करते हुए किचन से बाहर निकल जाती है और जाते जाते कहती जाती है


” मोम मैं टीवी देखने जा रही हूँ.मेरा फवर्ट शो बस आने ही वाला है.” जाते जाते भैया को आँख मारना नहीं भूलती …


शिवानी के बाहर निकलते ही , थोड़ी देर वो मोम को देखता रहता है फिर पीछे से शांति के कंधों पर हाथ रखते हुए हल्के से जाकड़ लेता है और उनके गाल चूम लेता है


” क्या बात है .आज अपनी इस बूढ़ी मोम पर मेरे बेटे को बड़ा प्यार आ रहा है…? सर भी कितने अच्छे से दबाया तू ने …” शांति ने पीछे मुड़ते हुए उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा ..


” कम ऑन मोम बूढ़ी और आप..? अरे जवान लड़कियाँ भी आप के सामने कुछ नहीं …क्या फिगर आप ने मेनटेन किया है ..सच बोलता हूँ मोम …जी करता है आप को मैं अपनी गर्ल फ्रेंड बना लूँ ..”


” वाह रे वाह ..अब मेरे इतने हॅंडसम बेटे की किस्मेत इतनी तो फूटी नहीं कि मेरी जैसी बूढ़ी उसकी गर्ल फ्रेंड बने ..क्या सारी जवान लड़कियाँ मर गयी हैं..?”


” हां मोम आप के सामने तो वो सब मुर्दे के ही समान तो हैं …”


“ह्म्‍म्म..बातें बनाना भी अच्छी सीख गया है तू …” और इतना कहते हुए शांति उपर शेल्फ से कुछ सामान लेने को अपने पंजों से उपर उचकति है , नतीज़ा यह होता है उसके भारी भारी और मांसल चूतड़ , नज़दीक खड़ा शशांक के अब तक तन्ना उठे लंड से छू जाते है ..शांति को अपने चूतड़ पर चूभान महसूस होती है ….वो चौंक जाती है ..शशांक सीहर उठ ता है …


शांति पीछे मुड़ती है ..शशांक को देखती है ..उसकी आँखें बंद थीं और चेहरे पर एक अजीब मस्ती और आनंद की झलक थी


” शशांक…! ” उसकी आवाज़ में कुछ झुंझलाहट , कुछ आश्चर्य और कुछ कौतुहाल ..सभी का मिश्रण था


शशांक चौंक जाता है और उसकी आँखें खुलती है ..अपने आप को मोम से बिल्कुल चिपका हुआ पाता है …


शशांक फ़ौरन अलग हो जाता है और मोम की झिड़की से .. पॅंट के अंदर भी सब कुछ सीकूड जाता है ..


शशांक को खुद नहीं मालूम था कब उसके पॅंट ने तंबू का शेप धारण कर लिया था …अपनी मोम के सामने वो अपने होशो-हवास खो बैठता था … बिल्कुल खो जाता था अपनी माँ के रूप और आकर्षक फिगर पर …


शांति कुछ देर चूप रही , फिर नॉर्मल होते हुए कहा ” बेटा तू अब जा और तुम दोनों भाई बहेन थोड़ी देर में डाइनिंग टेबल पर आ जाओ ..मैं भी बस कुछ देर में आती हूँ ..सब साथ बैठ कर खाएँगे…”


” हां मोम ..” कहता हुआ शशांक फ़ौरन किचन से बाहर आ जाता है ..वो अपनी इस हरकत पर बहोत शर्मिंदा था … पर क्या करे वो भी अपनी मोम की चाहत के सामने लाचार था ..विवश था …


इधर शांति भी भौंचक्की थी .. उसे डांटना चाहती थी ..पर फिर इसे उसकी उम्र का तक़ाज़ा समझ अनदेखा कर देती है … पर अपने दिमाग़ के कोने में उस से कभी बात करने की ज़रूरत का ध्यान रख लेती है ..


वो ड्रॉयिंग रूम में बैठे टीवी देख रही शिवानी का पास बैठ जाता है..उसका चेहरा अभी भी उतरा हुआ


था …. शिवानी उसे देखती है ..शशांक का चेहरा देख वो भाँप जाती है मामला कुछ गड़बड़ है…


पर उस ने उस समय कुछ कहना यह पूछना ठीक नहीं समझा … उसका मन तो बहोत किया ..पर फिर उसके भैया के लिए प्यार और इज़्ज़त ने उसका मुँह बंद रखा ..वो समझती थी कि उसके पूछने से शशांक के ईगो को बहोत ठेस (चोट ) लगेगी …


वो अंजान बनते हुए चहकति हुई कहती है ..”उफ्फ भैया क्या इंट्रेस्टिंग सीरियल है …तुम भी देखो ना.. ” उसकी जाँघ पर हाथ मारती है…


उसकी इस हरकत पर शशांक झुंझला जाता है और कहता है ” शिवानी ..क्या बच्पना है यार.. ऐसे सीरियल तुम्हें ही मुबारक….टीवी बंद करो और चलो ..मोम खाने को बोल रही हैं …”


” भैया ..प्लीज़ मेरी सीरियल बस अब ख़त्म ही होनेवाली है …तुम जाओ ना हाथ मुँह धो लो तब तक , मैं भी आती हूँ ..”


“ठीक है बाबा मैं जाता हूँ ..यू आंड युवर सीरियल्स ..माइ फुट..”


शशांक उठता है जाने को , पर शिवानी उसके जाने के पहले उसके गाल चूम लेती है


” थॅंक्स माइ च्वीत च्वीत ब्रो..”


शशांक भून भुनाता हुआ उठता है ” तू कभी नहीं सुधरेगी ….”


और शिवानी की गाल पर हल्की सी चपत लगाता हुआ वॉश लेने अपने बेड रूम में चला जाता है …


पर शिवानी चौंक जाती है भैया के इस रवैय्ये से ….जिस जागेह उसने चपत लगाई वहाँ उसने अपनी हथेली से पोन्छा और और अपनी हथेली चूम ली ..भैया ने आज पहली बार उसके गाल चूमने पर प्यारी सी चपत लगाई थी ..वरना हमेशा बड़ी बेदर्दी से अपने गाल पोंछ लेते थे ….


शिवानी का चेहरा खील उठ ता है …


तभी मोम की आवाज़ आती है ” अरे कहाँ चले गये सब…मैने टेबल पर खाना लगा दिया है ..तुम लोग आ जाओ ,,मैं भी फ्रेश हो कर आती हूँ..”


शशांक भी तब तक वॉश ले चूका था …और शिवानी का सीरियल भी उसे अगले एपिसोड में फिर मिलने का वादा करते हुए ख़त्म हो चूका था…


डाइनिंग टेबल पर दोनों मोम का इंतेज़ार करते हैं… !


शशांक और शिवानी दोनों अगल बगल बैठे मोम के आने का इंतेज़ार कर रहे थे…थोड़ी देर दोनों चूप थे ..पर शिवानी ने शांत रहना सीखा ही नहीं था …उसका शैतानी दिमाग़ भला शांत कैसे रह सकता …


उसका मुँह बंद था ..पर हाथ और पैरों ने हरकत चालू कर दी ……उसके शशांक के बगल वाले पैर के अंगूठे ने शशांक के घूटने से नीचे नंगे पैर की पिंडली को कुरेदना चालू कर दिया और हाथ की उंगलियाँ सीधा पहून्च गयीं उसके बॉक्सर के उभार पर और वहाँ सहलाना चालू कर दिया ..शशांक इस एक दम से हमले पर चिहूंक उठा …(शशांक जब अपने बेड रूम में वॉश करने को आया था उस ने एक लूस टॉप और बॉक्सर पहेन ली थी )


” उफफफफ्फ़ …शिवानी ..यार तू क्या कर रही है ..मोम आती होगी.”


” अरे बाबा तुम चिंता क्यूँ करते हो भैया ..मोम को कुछ पता नहीं चलेगा ..तुम बस चूप रहो ..” और शिवानी ने अपना काम जारी रखा …


” तू भी ना शिवानी…पर तुम ने कहा था ना मुझे परेशान नहीं करोगी..?” तब तक शिवानी के हाथ पैर ने काफ़ी काम कर दिया था .शशांक का बॉक्सर बूरी तरेह उभरा हुआ था…


“हां कहा तो था भैया …” शिवानी ने बड़ी कॉन्फिडॅंट्ली कहा


“तो फिर यह क्या है..” शशांक ने झुंझलाते हुए कहा


” यू नो ब्रो’ मैने कहीं पढ़ा है ‘एवेरितिंग इस फेर इन लव आंड वॉर ‘ और आप तो जानते हो , आइ आम इन लव “


शिवानी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी ..


” हे भगवान मुझे इस पागल लड़की से बचा ….” उस ने अपने हाथ जोड़े और भगवान की ओर उपर देखा


तब तक शांति भी फ्रेश हो कर डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ते हुए बोलती है


” अरे क्या हो गया शशांक बेटा ..यह भगवान को क्यूँ याद किया जा रहा है…” उन्होने एक चेर खींचा और बैठते हुए कहा .


” अरे कुछ नहीं मोम आज कल भैया बड़े धार्मिक हो गये हैं ना ..खाने से पहले भगवान को याद कर रहे हैं …” शशांक कुछ बोलता उसके पहले ही शिवानी ने अपना जुमला छोड़ दिया ….और अपनी उंगलियों से उसके लंड को थोड़ी और ज़ोर से थाम लिया ..शशांक सीहर रहा था …


शिवानी के बात पर शांति जोरों से हंस पड़ती है …”ओके ओके ..चलो मज़ाक बंद और खाना शूरू करो..”


कहना ना होगा ..शशांक की नज़र अपनी मोम पर टीकी थी ….फ्रेश हो कर आने के बाद उन्होने निघट्य पहेन ली थी … नाइटी के अंदर उनकी शेप्ली बॉडी की छटा …बाल जुड़े में बड़ी सफाई से बँधे …पूरी शरीर से एक बड़ी मादक सी खूशबू ….शशांक की नज़रें अटक सी गयीं अपने मोम की इस छटा पर ..


शांति शशांक की ओर देखती है ..उसे अपनी ओर एक टक देखते हुए पाती है ..उसे थोड़ा अनईजी फील होता है ..पर आखीर माँ से पहले वो भी एक औरत ही थी ..एक जवान , खूबसूरत और हॅंडसम लड़के का इस तरेह देखना…. उसे थोड़ा गर्व भी महसूस हुआ .. इस उम्र में भी उसमें काफ़ी खूबियाँ हैं …


मुस्कुराते हुए वो बोलती है..”बेटा चल जल्दी खाना शूरू कर …और हां शिवानी तुम भी …”


” हां मोम ..” बोलता हुआ शशांक खाना शूरू करता है ..शिवानी भी अपने खाली हाथ से खाना शूरू करती है ..पर उसका दूसरा हाथ अभी भी अपने क्रिया कलाप में व्यस्त था ..


शशांक का बूरा हाल था ..उपर मोम का सेक्सी अवतार और नीचे शिवानी का सेक्सी व्यवहार …उसका लंड एक दम कड़क खड़ा था ..शिवानी ने उसे बॉक्सर के उपर से ही बूरी तरेह जाकड़ रखा था अपनी हथेली से ..शिवानी को भी मज़ा आ रहा था …उसका किसी लंड को थामने का यह पहला मौका था …और वो भी ऐसा वैसा लंड नहीं ..पूरे का पूरा 8″ उसकी हथेली में था..उसकी टाइट चूत गीली हो गयी थी ..


शशांक अपने पर काफ़ी कंट्रोल करते हुए खाना खा रहा था ..पर एक इंसान की भी कोई लिमिट होती है …शशांक ने महसूस किया के यह दो तरफ़ा हमला अब उसके सहेन की सीमा पर कर रहा है … इस के पहले की उसके लंड से पीचकारी छूट ती ..वो उठ खड़ा होता है


” मोम बस अब और भूख नहीं …मैं उठता हूँ..”


और वो फ़ौरन उठता हुआ बाथरूम की तरेफ हाथ धोने को चल पड़ता है …पर अपनी पीठ मोम की तरेफ करते हुए ..कहीं उनकी नज़र बॉक्सर पर ना पड़ जाए ..बाथरूम के अंदर जाते ही शशांक ने अपने लंड को बॉक्सर से बाहर किया …लंड इतना कड़क था के हिल रहा था…उस ने जल्दी जल्दी अपने हाथ चलाए , दो चार बार में ही उसकी पीचकारी छूट गयी …..उसने राहत महसूस की…”उफफफफफ्फ़..यह शिवानी भी ना….”


शिवानी भैया के इस हाल पर अंदर ही अंदर मुस्कुराती है …पर चेहरे पर कोई भी भाव नहीं … बिल्कुल नॉर्मल ….


” यह शशांक को आज क्या हुआ है शिवानी ..कुछ अजीब नहीं लग रहा तुझे ..??” मोम खाते हुए पूछती है ..


” पता नहीं मोम ..मैं क्या जानू..मुझ से तो ढंग से बात भी नहीं करते …आप ही पूछ लो ना ..” शिवानी ने बड़ी सफाई से अपना पत्ता साफ कर लिया …


” ह्म्‍म्म्म..ठीक है …मैं बात करूँगी आज … अभी तो शिव के आने में भी देर है … तू खाना खा कर बर्तन समेट लेना … मैं शशांक के कमरे में उस से बात करती हूँ …आज कुछ परेशान सा लग रहा है …” शांति खाना ख़त्म करते हुए कहती है.


” हां मोम यह ठीक रहेगा … “


शिवानी ने कितनी सफाई से अपने प्यारे भाई के लिए उसकी प्रेयसी से अकेले में मिलने का रास्ता सॉफ कर दिया ..


तब तक शशांक बाथ रूम से बाहर आ चूका था और अब काफ़ी रिलॅक्स्ड लग रहा था …


” मोम मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ ..पापा को तो आने में देर है ..आप भी अपने कमरे में आराम कीजिए ..” कहता हुआ अपने कमरे की ओर जाता है..


” बेटा अगर तू सो नहीं रहा तो मैं तुझ से कुछ बात करना चाहती हूँ …मैं तेरे कमरे में आती हूँ..”


शशांक मोम की इस बात पर चौंक पड़ता है … पर चेहरे पर चौंकने की कोई झलक नहीं दिखाता और मोम से कहता है …


” वाह मुझ से बात करेंगी ..थ्ट्स ग्रेट मोम ..पर मेरे कमरे में क्यूँ ? आप के सर में दर्द था ..आप अब भी थकि सी नज़र आ रही हैं ..आप अपने कमरे में लेटो ना ..मैं ही आप के पास आ जाता हूँ..”


” ठीक है मैं जाती हूँ ..तू जल्दी आ जा , शिव के आने तक का टाइम अपने पास है..”


शिवानी टेबल से बर्तन समेट रही थी ..पर मोम से बचते हुए शशांक की ओर देखती है और बड़ी जोरों से आँख मारती है ….


शशांक उसे घूँसा दिखाता है …..और मोम के कमरे की ओर चल पड़ता है….


किचन वाली बात से वो काफ़ी घबडाया सा था ….पर वो सोच लेता है चलो जो होगा देखा जाएगा … मैने प्यार ही तो किया है ना …


और धड़कते दिल से अंदर जाता है कमरे में …


शशांक ने मन में ठान लिया था कि आज मोम को सब कुछ सॉफ सॉफ बता देगा ..उसकी नज़रों में उसका अपनी माँ के लिए आकर्षण कोई पाप नहीं था ..यह तो उसका प्यार था …उसकी माँ से नहीं ..बल्कि एक सुंदर , सुगढ़ और सेक्सी औरत से ..जो उसकी माँ भी थी , पर एक औरत पहले … माँ के आँचल को वो दाग भी नहीं लगने देगा … अगर उसकी माँ की औरत ने उसे स्वीकार किया तो ठीक , वरना उसकी किस्मेत …उस ने आज सर पर कफ़न बाँध लिया था ..चाहे इधर यह उधर …


शशांक नपे तुले कदमों से मोम के कमरे में प्रवेश करता है…मोम बड़े सहज ढंग से अपनी नाइटी को अछी तरेह समेटे पलंग पर अढ़लेटी थी ..हमेशा की तरेह पीठ टीकाए और पैर सामने की ओर बड़े टरतीब से फैलाए … उसकी इस सुगढ़ता में भी एक अलग ही आकर्षण था …


शशांक उसके पैर के पास , चेहरा मोम की ओर किए चूप चाप बैठ जाता है …


” अरे बेटा वहाँ उतनी दूर क्यूँ बैठा है…आ मेरे पास आ “…और शशांक को अपने बगल बिठा लेती है


” हां बोलिए मोम ..आप कुछ कहना चाहती थी ना..? ” शशांक की आवाज़ में एक आत्म विश्वास था ..एक दृढ़ता थी …शांति उसकी ऐसी आवाज़ से काफ़ी प्रभावीत होती है पर उसे आश्चर्य भी हुआ ..वो तो सोची थी बेचारा डरा सहमा सा होगा …पर यह तो बिल्कुल निडर और बेधड़क है ….शांति ने सावधानी से काम लेने की सोची.


” अरे कुछ नहीं बेटा ..मैं देख रही हूँ तू आज बड़ा परेशान सा लग रहा था..खाना भी ठीक से नहीं खाया … तबीयत तो ठीक है ना.? ” शांति ने उस से पूछा .


” कुछ नहीं मोम ..मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक है … खाना मैने बिल्कुल पेट भर के खाया , और खाना तो बहोत टेस्टी था मोम….बल्कि आप बताइए आप की तबीयत ठीक है ना…आप के सर में दर्द था …”


अब तक शशांक काफ़ी आश्वश्त हो चूका था और बड़ी कॉन्फिडॅंट्ली उस ने मोम को जवाब दिया ..


शांति को कुछ समझ में आ रहा था मामला उतना सीधा नहीं जितना वो समझती थी ..अगर शशांक उसे सिर्फ़ सेक्स की भावना से देखता होता तो उसके बात करने का लहज़ा इतना स्पष्ट और आत्मविश्वास से भरा नहीं होता ..बात कुछ और ही है ….पर फिर किचन में जो हादसा हुआ वो क्या था ? ..शांति सोच में पड़ गयी ..पर बात तो करना था …शांति ने चूप्पि तोड़ी..


” हां शशांक अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ … तुम ने कितने प्यार से मेरा सर दबाया …. अच्छा यह बता तू हमेशा मेरी ओर एक टक क्या देखता रहता है बेटा ..मैं क्या कोई अजूबा हूँ ..?? ” शांति ने अपने प्रश्न की दिशा को सही रास्ते पर मोड़ने की कोशिश करते हुए पूछा..


” हा हा हा !! मोम आप भी ना ..कैसी बातें करती हो….आप और अजूबा ..??? आप अजूबा नहीं मोम आप नायाब हो …कम से कम मेरी नज़रों में ..” शशांक ने बेधड़क जवाब दिया


” अच्छा नायाब ..? पर किस मामले में “


” हर मामले में..” उस ने फ़ौरन जवाब दिया …


“फिर भी …. कुछ तो बता ना …मेरी ईगो ज़रा बूस्ट होगी….” मोम ने उसे उकसाया ..


शशांक फिर हंस पड़ा मोम के ईगो वाली बात से …” क्या क्या बताऊं मोम…आप की हर बात नायाब है…” शशांक ने मोम की आँखों में देखते हुए कहा ..


” अरे कुछ तो बता ना बेटा ..मैं भी तो सूनू ….प्लीज़ ..” शांति ने ” प्लीज़ ” में काफ़ी ज़ोर देते हुए कहा …


” ह्म्‍म्म्मम..ठीक है पहला नंबर तो आप की पर्सनॅलिटी का है ..कितना आकर्षक है ..अभी भी आप की फिगर इतनी अच्छी है…आप ने कितने अच्छे से अपने आप को मेनटेन कर रखा है…दूसरी बात आप की सुंदरता ..तीसरी बात आप हमेशा कितना खुश रहती हो … आपके चेहरे पे हमेशा मुस्कुराहट रहती है …चौथी बात आप की नाक ..कितनी शेप्ली है … आप के चेहरे की सुंदरता को चार चाँद लगा देता है… पाँचवी बात ……”


” बस बस बस …..बाप रे बाप इतनी पैनी नज़र है तुम्हारी ….” शांति ने हंसते हुए शशांक के मुँह पर हाथ रख उसे चूप करती है ….”इतनी बात तो तेरे पापा ने भी नहीं बताई मुझे आज तक….”


” नहीं मोम ..अभी और भी सुनिए मैने यह सब बात आप को एक औरत की तरेह देख कर बताया …आप . मेरे लिए सुंदरता की देवी हैं ….”


” ह्म्‍म्म..पर बेटा अगर तुम मुझे एक देवी की तरेह देखते हो तो फिर किचन में तुम ने अपनी देवी का अपमान कर दिया ना …” शांति ने बड़ी टॅक्टफुली शशांक की ही बात पकड़ते हुए असली मुद्दे पर आ गयी …


” हां मोम ..मैं समझता हूँ मुझ से बड़ी ग़लती हुई ….पर मैं क्या करूँ ..आप की पूरी पर्सनॅलिटी ऐसी है कि मुझे हर तरेह से प्रभावीत करती है…मेरा दिल , मेरा दिमाग़ ..मेरा एक एक अंग उस से प्रभावीत हो जाता है..आप एक संपूर्ण औरत हैं….और सब से बड़ी बात मैं आप से बेइंतहा प्यार करता हूँ ..बेइंतहा ….”


शशांक मोम की आँखों में झाँकता हुआ कहता है.. उसकी ओर एक तक देखता रहता है..बिना पलक झपकाए और फिर एक दम से चूप हो जाता है ..शांति भी उसके दो टुक जवाब से सन्न रह जाती है …थोड़ी देर तक रूम में सन्नाटा छा जाता है….दोनों की धड़कनों की आवाज़ भी सॉफ सुनाई देती है….


शांति समझ जाती है कि मामला सही में उतना आसान नहीं था … शशांक उस पर मर मिटा है ….यही बात अगर उस से किसी और ने कही होती ..तो यह उसके औरत होने की बहोत बड़ी उपलब्धी होती …उसके औरत होने का कितना बड़ा सम्मान होता ..पर यही बात उसके बेटे के मुँह से …उफफफ्फ़ …मैं क्या करूँ ..शांति एक बड़े चक्रव्यूह में फँसी थी ..उसके चेहरे से परेशानी झलक उठती है … वो उसे डाँट फटकार कर चूप कर सकती थी ..पर वो अब तक शशांक की बातों से जान गयी थी कि डाँटने से बात और भी बीगड़ सकती है ..कहीं शशांक कुछ कर ना बैठे ..उस पर जुनून सवार था अपनी मोम का ….


पर कुछ तो करना ही था ….


शांति ने शशांक के चेहरे को अपने हाथों से थामते हुए अपनी ओर किया , उसकी आँखों में देखते हुए कहा ..


” पर बेटा मैं तुम्हारी माँ हूँ ..क्या कोई अपनी माँ से इस तरेह प्यार करता है..??.”


शांति की आवाज़ में एक माँ की ममता , प्यार , दर्द और विवशता भरी थी .


” मैं जानता हूँ मोम ..पर मैने कहा ना आप के दो रूप हैं एक मोम का और दूसरा एक औरत का …मैं आप की औरत से प्यार करता हूँ…… एक मर्द की तरेह ..मैं भी तो एक मर्द हूँ ना माँ “


शशांक की आवाज़ में कितना दर्द ,कितनी कशिश और तड़प थी शांति भी आखीर एक औरत थी , समझ सकती थी ..


जिस तरेह बिना किसी हिचकिचाहट ,बिना किसी रुकावट , जितने सॉफ सॉफ लफ़्ज़ों और जितनी सहजता से शशांक अपनी बात कहता जा रहा था..शांति दंग थी .. वो महसूस कर सकती थी कि शशांक जो भी कह रहा है….यह उसके दिल की गहराइयों से निकली आवाज़ है ..


शांति की मुश्किल बढ़ गयी थी ..वो बहोत बड़े पेश-ओ-पेश में थी …


उसकी बातों ने उसे झकझोर दिया था ….


पर वो एक व्याहता औरत और माँ भी थी …जो उसे इस हद तक जाने को रोक रहा था …वो बहोत परेशान हो जाती है ….


” मोम तुम परेशान मत हो …” शशांक शांति की परेशानी समझता था ” देखो तुम यह मत समझना कि मुझ पर कोई जुनून सवार है ..बिल्कुल नहीं मोम..मैं पूरे होश-ओ-हवास में हूँ …आप के लिए मेरा प्यार सिर्फ़ सेक्स नहीं …एक पूजा है …मैं आप की इज़्ज़त पर कभी भी आँच नहीं आने दूँगा …. आप मुझे एक औरत का प्यार नहीं दे सकतीं ..मत दीजिए ..पर मुझे मत रोकिए ….मेरी जिंदगी..मेरी शांति मेरा सब कुछ मत छीनिए प्लीज़ …..आप का प्यार मेरा सहारा है ….जब तक आप के अंदर की माँ आपके अंदर की औरत को इज़ाज़त नहीं देती ,,मैं आप को शर्मिंदगी का एक भी मौका नहीं दूँगा …बिलीव मी ..एक भी मौका नहीं दूँगा ..पर मुझे कभी मत कहना कि मैं आप से प्यार नहीं करूँ ..कभी नहीं…आइ लव यू ..आइ लव यू …मोम आइ लव यू ..”


और वो फूट पड़ता है..उसकी आँखों से आँसू की धार बहती है …. फफक फफक के रोता है शशांक ..बच्चों की तरेह ..


शांति के अंदर की औरत शशांक की हालत पर रो पड़ती है ..इतना प्यार ..उफफफफफफफ्फ़ ..कितनी अभागन है यह औरत ….उसे ले नहीं सकती ..


पर एक माँ अपने बेटे की हालत पर बहोत दूखी हो जाती है …. उसे गले लगाती है ..” मत रो बेटे , मत रो ..समय का इंतेज़ार करो बेटा …समय बड़ा बलवान है …. सब ठीक करेगा “


दोनों माँ बेटे आँसू बहा रहे हैं ..बेटा अपने प्यार की मजबूरी पर …माँ अपने बेटे की हालत पर..


और एक औरत बस मूक दर्शक है ..सन्न है…….क्योंकि शांति की औरत उसकी माँ और पत्नी की छवि के अंदर जाने कब से दबी पड़ी है ..कभी उठ पाएगी …?????????


आज शशांक ने शांति की औरत की बेबसी और लाचारी को ललकार दिया था …


शशांक अपने आँसू पोंछता है … मोम के चेहरे को अपने हथेली से थामता है और उसके माथे को चूमता हुआ कहता है ” मोम …आप का आँचल मैला नहीं होगा …विश्वास रखो … ” वो उठ ता है और बाहर निकल जाता है..


शांति के होश-ओ-हवस गूं हैं अपने बेटे का अपने पर प्यार देख …. कहाँ तो वो अपने बेटे को समझना चाहती थी पर वाह रे बेटा….उस ने तो उसे ही प्यार का पाठ समझा दिया अच्छी तारेह …काश वो भी उसे प्यार कर पाती….काश…….


शांति को एक गाना याद आता है ” ना उम्र की सीमा हो ना जन्म का हो बंधन … जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन” कितना सटीक गाना था यह उसकी मजबूरी पर ……


तभी बाहर कार के हॉर्न की आवाज़ आती है ….शांति की तंद्रा भंग हो जाती है …शायद शिव आ गये थे


वो बीस्तर से उठ ती है हाथ मुँह धो कर वापस आ जाती है एक पत्नी के रूप में …


अपने पति का इंतेज़ार करती है….


जैसे ही शशांक बाहर आता है उसकी नज़र बाहर दरवाज़े पर खड़ी शिवानी पर पड़ती है …अपनी भवें सीकोडता हुआ उसे देखता है ….


” तू यहाँ क्या कर रही है ..??” थोड़े गुस्से से उस से पूछता है…पर शिवानी की आँखों में भी आँसू छलकते देख चूप हो जाता है …


” मैने सब कुछ देखा भी और सुना भी भैया ….आप सच में कितना प्यार करते हो ना मोम से ..??इतना तो शायद मैं भी नहीं कर पाऊँ कभी किसी से …”


” हां मेरी गुड़िया ..मैं बहोत प्यार करता हूँ ..बहोत … ” अभी भी शशांक का चेहरा थोड़ा उदासी लिए होता है ….


” कम ओन भैया ..चियर अप ….आप क्या सोचते हैं मोम चूप बैठेंगी…कभी नहीं …आप देखना आप को आप का प्यार मिलेगा और भरपूर मिलेगा …” शिवानी ने अपने प्यारे भैया का मूड ठीक करने को आँखों से आँसू पोंछ मुस्कुराते हुए कहा….


” आर यू शुवर शिवानी..? उफ़फ्फ़ अगर ऐसा हो गया तो मेरी जिंदगी के वो पल सब से हसीन पल होंगे.. तेरे मुँह में घी शक्कर ..” शशांक ने आहें भरते हुए कहा ….


” अरे बिल्कुल होगा भैया और हंड्रेड परसेंट होगा …आख़िर मेरे ही भैया हो ना आप…और मेरी चाय्स भी कोई ऐसी वैसी थोड़ी ना होती है …जिस पर मैं मरती हूँ ..वो जिस पर मारे उस की तो खैर नहीं …और एक बात भैया ..मुझे अपने मुँह में घी शक्कर नहीं चाहिए …कुछ और ही चाहिए .” शिवानी अपने भैया के गालों पर पिंच करते हुए एक बड़ी शरारती मुस्कान चेहरे पे लाते हुए बोलती है ….


शशांक उसकी इस बात पर उसे आँखें फाड़ कर देखता है और उसके गालो पे हल्की सी चपत लगाता है


” तू भी ना शिवानी…कुछ भी बोल देती है ….” फिर हँसने लगता है और अपने गालों को जहाँ उस ने पिंच किया था , सहलाता है …और थोड़ा झुंझलाते हुए कहता है


“अरे बाबा तू कैसे बोलती है यार ..मेरी समझ में तो कुछ नहीं आता … “


” अब सब कुछ क्या यहीं खड़े खड़े बताऊं ??…पापा आते ही होंगे ..चलो तुम्हारे कमरे में ..मैं बताती हूँ मेरे भोले भैया ..” और शिवानी उसका हाथ थामे उसे घसीट ती हुई उसी के कमरे में ले जाती है…


शिवानी अंदर घूस्ते ही झट पलंग पर लेट जाती है..और शशांक के लिए जगेह बनाते हुए उसे भी अपने पास आने का इशारा करती है….पर शशांक उसके बगल में लेटने की बजाए एक कूर्सी खींच पलंग से लगाते हुए उसकी बगल बैठ जाता है …शिवानी उसकी ओर देखते हुए थोड़ा मुस्कुराती है और मन ही मन सोचती है :


” आख़िर कब तक .अपने आप को बचाओगे भैया ….? जब मेरे छूने से ही तुम्हारे अंदर इतना तूफान आ सकता है के तुम बाथरूम के अंदर तूफान के झोंके शांत करो….फिर यह तूफान मेरे अंदर शांत होने में देर नहीं …”


” अरे क्या सोच रही है ..चल जल्दी बता ना ….”


” बताती हूँ बाबा बताती हूँ…देखो मोम कोई ऐसी वैसी औरत तो हैं नहीं के तुम ने बाहें फैलाई और वो तुम्हारी बाहों के अंदर घूस जायें ..? हां मैने जितना देखा और सुना तुम दोनों की बातें ..मोम को तुम ने हिला दिया है…उनको सोचने पर मजबूर ज़रूर कर दिया है “


” अच्छा ..?? पर यार शिवानी तुम इतनी छोटी सी प्यारी सी गुड़िया ..तुम्हें इतना सब कैसे पता हो जाता है…”शशांक ने उस की ओर हैरानी से देखा ….


” ह्म्‍म्म्मम..भैया आप भी तो मोम की नज़र में एक बच्चे हो..फिर भी आप ने अपनी बातों से साबित कर दिया ना के आप भी एक मर्द हो अब ….बच्चे नही..??” शिवानी ने करारा जवाब दिया शशांक को …


शशांक फिर से हैरान हो जाता है …और उसकी आँखों में शिवानी के लिए प्रशन्शा झलकती है ..


” बात तो तू पते की करती है……अब मेरी गुड़िया भी लगता है औरत बनती जा रही है…”


शशांक की इस बात से शिवानी की आँखों में चमक आ जाती है , और मन ही मन फिर सोचती है


” लगता है अब इस औरत को यह मर्द जल्दी ही अपनी बाहों में लेगा …बस तू तैय्यार रह…”


” लो तू फिर कहाँ खो गयी शिवानी…. मोम सोचने पर मजबूर .हैं .? क्यूँ ..हाउ डू यू से दट ..?”


” अरे भोले भैया जब मोम तुम से गले लग रो रहीं थी उन्होने क्या कहा था ..???”


” क्या कहा था….? शिवानी मैं तो बस सिर्फ़ बोलता जा रहा था ..मुझे कुछ होश नहीं वो क्या बोल रही थीं..कुछ याद नहीं उन्होने क्या बोला …बता ना प्लीज़ ..”


शिवानी लेटे लेटे ही खीसकते हुए शशांक के बिल्कुल करीब आ जाती है और अपने हाथ उसके जांघों पर रखते हुए कहती है ..


” याद करो उन्होने कहा था ना ‘ बेटा समय बड़ा बलवान है ..सब ठीक करेगा ..??’ …. “


” हां यार कहा तो था मोम ने ” शशांक याद करते हुए बोलता है ..फिर अचानक उसे मोम की इस बात की गहराई समझ में आती है और वो खुशी से चिल्लाता हुआ बोल उठता है


” …ओह गॉड..ओह गॉड…! ओह शिवानी …मैं सही में कितना बेवकूफ़ हूँ …कितनी बड़ी बात कही मोम ने …..शी नीड्स टाइम ….शी जस्ट वांट्स मी टू हॅव पेशियेन्स …. वेट आंड . …उफ़फ्फ़ ..शिवानी मान गये यार तू सही में गुड़िया नहीं …तू तो मेरी फ्रेंड , फिलॉसफर , गाइड है यार…..माइ बेस्ट फ्रेंड “


और वो अपनी कुर्सी से उठता हुआ शिवानी को गले लगा लेता है ..उसके गाल चूम लेता है ..बार बार गले लगाता है और गाल चूमता है …और बोलता जाता है “उफफफफ्फ़ ,,इतनी सी बात मुझे समझ नहीं आई …”


भैया के इस बादलव से शिवानी कांप उठ ती है ..उसका रोम रोम खुशी से झूम उठ ता है ….और भैया से लिपट ते हुए उसकी आँखों में झान्कति है और बोलती है


” भैया देखा ना समय कितना बलवान होता है..मैने भी वेट आंड . वाली पॉलिसी अपनाई ..और आज मेरी सब से प्यारी चीज़ मेरी बाहों में है ..बस तुम भी ऐसा ही करो ..”


” यस शिवानी …यस यस ..यू अरे सो राइट …” शशांक भी उसकी आँखों के अंदर झाँकता हुआ कहता है.


शिवानी अपनी आँखें बंद किए शशांक के सीने पर अपना सर रखे.. उस पर हाथ फिराते हुए भर्राई आवाज़ में कहती है :


” बस भैया तुम भी वेट करो , बी पेशेंट ..मोम को टाइम दो …. “


शशांक शिवानी का चेहरा अपने हाथों से उपर उठाता है और कहता है


” हां शिवानी ..”


थोड़ी देर उसे एक टक देखता है और फिर बोलता है


“.तू जानती है तेरी नाक बिल्कुल मोम की जैसी है ..सो शेप्ली आंड सेक्सी..”


ऐसा बोलता हुआ वो उसकी नाक उंगलियों के बीच थामता हुआ प्यार से सहलाता है ….


” भैया और तुम जानते हो ना तुम जिस तरेह अपनी आँखें डालते हुए बातें करते हो , दुनिया की कोई भी औरत तुम पर मर मिटेगी ..”


” मैं दुनिया की किसी औरत को नहीं जानता ..बस सिर्फ़ अपनी मोम को जानता हूँ और अब उसकी तरेह एक और भी है मेरी बाहों में ..बस उसे …”


ऐसा बोलते हुए वो शिवानी को अपने सीने से चीपका लेता है और उसके होंठों को चूम लेता है …


शिवानी कांप उठती है … सीहर उठ ती है ….खुशी से पागल हो जाती है..आज उसे मन की मुराद मिल गयी …


तभी बाहर किसी के चलने की आहट होती है ….पापा आ गये थे शायद ..


शिवानी फ़ौरन अपने को शशांक से अलग करती है …बीस्तर से उठ ती है ..


और शशांक की ओर बड़ी हसरत भरी निगाहों से देखती हुई झूमते हुए..नाचते हुए कमरे से बाहर निकल जाती है .


शशांक बीस्तर पर नीढाल होता हुआ लेट जाता है ..हाथ पैर फैलाए


” उफ्फ क्या दिन था आज … कितना कुछ हो गया…”


और सोचता हुआ आँखें बंद कर लेता है ….नींद उसे थपकी देती है , वो उसकी गोद में खो जाता है….


शशांक बॅक स्ट्रोक लगाते हुए तैर रहा है ..उसकी जंघें शांति की जांघों से टकरा रही हैं ..उसके स्विम्मिंग ट्रंक की उभार उसकी मोम की जांघों के बीच चूत से टकराता हैं , …. .वो स्ट्रोक लगाए जा रहा है …जैसे जैसे स्ट्रोक लगाता है ,उसका उभार शांति की चूत से घिसता जाता है , शांति आनंद विभोर है … उसके सारे शरीर में सीहरन हो रही है..वो .कांप रही है …किलकरियाँ ले रही है ..” हां .हां मेरे बेटे ..हाँ मुझे किनारे ले चलो ..मुझे बचा लो ..”


शशांक के स्ट्रोक्स ज़ोर पकड़ते है ..जैसे जैसे किनारा नज़दीक आता है स्ट्रोक्स और ज़ोर और ज़ोर पकड़ते जाते हैं……शांति की चूत और तेज़ घीसती जाती है शशांक के उभार से ……. .. शांति जोरों से चीख उठ ती है ” शशााआआआआआंक..” उस से और भी चीपक जाती है ..उसकी मुलायम चूचियाँ शशांक के कठोर सीने से लगी हुई एक दम सपाट हो जाती हैं….उसके चूतड़ शशांक के उभार पर बार बार उछाल मारते हैं ….वो हाँफ रही है ……पैर और जंघें थरथरा रही हैं…


शांति की नींद टूट जाती है….उसके चेहरे पे एक शूकून है ….वो उठ जाती है….उफफफफफफफ्फ़..उसकी पैंटी बूरी तरेह गीली थी….


वो उठ ती है और दबे पावं बाथ रूम की ओर जाती है …अपनी गीली पैंटी उतारती है ….उसकी चूत के होंठ अभी भी फडक रहे थे ….उस ने अपनी चूत सॉफ की , दूसरी फ्रेश पैंटी पहनी और बाथ रूम से बाहर आ गयी…


दबे पावं फिर से बीस्तर पे लेट जाती है …वो काफ़ी हल्का महसूस कर रही थी … अब वो किसी भी असमंजस की स्थिति में नहीं थी …उसकी सारी उलझनें भंवर की अतः गहराइयों में डूब गयीं …

इस सपने ने शांति को उसके भंवर से निकाल दिया था …वो मुस्कुराती है … उसे उस विशाल और विस्तृत झील के समान अपनी जिंदगी का किनारा मिल गया था ….


शांति आँखें बंद कर लेती है , सपने के सुनहरे पलों को संजोए फिर से सो जाती है…


आज फिर एक सुबेह होती है शिव-शांति के घर …. पर आज की सुबेह और कल की सुबेह में कितना फ़र्क था ….


एक ही दिन में कितना कुछ बदल गया था …


आज सब से खुश थी शिवानी…..उसने तो मानों दुनिया जीत ली थी ….भैया का उसके होंठों का चूमना……. उसके होंठ अभी भी याद कर फडक उठ ते ….उसके पावं तो ज़मीन पे पड़ते ही नहीं थे …झूम रही थी शिवानी ….अपने लूज टॉप और लूज स्लॅक्स में बहोत ही प्यारी लग रही थी …उसकी गदराई चूचियाँ टॉप के अंदर उसकी ज़रा भी हरकत से हिल उठ ती …बाहर निकलने को तैयार …


आज दीवाली की सुबेह उसकी जिंदगी में रोशनी भरी थी …जगमगा उठी थी …मन में फुलझारियाँ फूट रहीं थीं … और चूत में पटाखे …….


इधर शशांक भी अपने आप को बड़ा हल्का महसूस कर रहा था….उस ने मोम के सामने अपने प्यार का इज़हार कर दिया था..बिल्कुल ख़ूले लफ़्ज़ों में ….उसे अपने गालों पर झन्नाटेदार थप्पड़ की पूरी आशंका थी…..पर थप्पड़ के बजाय उसे मिली मोम की चुप्पी…. और यह मोम का चूप रहना भी शशांक के लिए मोम की स्वीकृति से कम नहीं थी..उस ने ठान लिया था कि अब वो अपने किसी भी हरकत से मोम को परेशान नहीं करेगा…कल शाम किचन वाली हरकत तो किसी भी सूरत में नहीं …वो अपने मोम को साबित कर देगा उसका प्यार सिर्फ़ वासना नहीं ….एक पूजा है …


और शांति भी खुश है..उसके चेहरे पर एक शूकून है….जो किसी असमांजस की स्थिति से बाहर आ एक निष्कर्ष पर पहूंचने के बाद चेहरे पर आती है …शांति , शशांक और अपने संबंधो के बारे एक फ़ैसले पर पहून्च चूकि थी ….कोई कन्फ्यूषन नहीं था अब..


सभी अपने अपने कमरों से तैय्यार हो कर डाइनिंग टेबल पर नाश्ते के लिए आते हैं….


शिव और शांति तो पूरी तरेह से तैय्यार हैं दूकान जाने को …शांति आज जीन्स और टॉप में थी..इस उम्र में भी अच्छी फिगर के चलते बहोत सूट करता था उसके बदन पर… उसका ड्रेस सेन्स भी लाजवाब था ..जीन्स ना बहोत टाइट था ना लूज..बस सिर्फ़ उसके अंदर की आकृति की झलक दीख जाती …और टॉप भी बस वैसा ही ..उसके दूध से सफेद सीने का उभार लोगों के मन में हलचल पैदा कर देता … इतना भी नीचा नहीं कि चूचियाँ बाहर नीकल आयें ….बस घाटी तक पहून्च कर थामा था टॉप का गला ..लोगों को उसके अंदर नायाब गोलाई का अंदाज़ा दे देती….


दोनों , बच्चों से गले मिलते हैं और एक दूसरे को दीवाली की शुभकामनायें देते हैं…


शशांक मोम से गले मिलता है , उसके गाल चूमता है ,और दीवाली विश करता है…


शशांक चौंक जाता है..मोम का रवैया कुछ बदला बदला सा था … … रोज सुबेह जब वो मोम से गले मिलता और उसके गाल चूमता ….मोम एक मूरत की तरेह खड़ी रहती और छोटी सी बस निभाने वाली मुस्कान ले आती… मानो यह भी एक ज़रूरी काम हो ..बस निबटा दो …


पर आज तो मोम ने खुद ही अपने गाल उसकी तरफ किए …बड़े प्यार से मुस्कुराया और काफ़ी देर तक उसके होंठों से अपने गाल लगाए रखा..उसकी मुस्कुराहट में भी एक चमक सी नज़र आई . शशांक को कुछ समझ नहीं आ रहा था ..आख़िर एक रात में ही क्या हुआ मोम को..???


शिव और शांति अपने बच्चों की तरफ हाथ हिलाते हुए बाहर निकल जाते हैं …..


पर जाते जाते शांति दोनों बच्चों को हिदायत देना नहीं भूलती ” देखो तुम दोनों ज़रा ख़याल रखना …और शिवानी तुम दिया वग़ैरह जला देना ..शशांक तुम भी शिवानी को हेल्प कर देना ..हो सकता है हमें आने में कुछ देर हो जाए ..”


” यस मोम …सब हो जाएगा डॉन’ट वरी ” शिवानी बोलती है …


जैसे ही पापा और मोम कार से निकलते हैं शिवानी से रहा नहीं जाता , वो उछलते हुए शशांक के गले से लिपट जाती है और अपने पैर उसकी कमर के गिर्द लपेटे हुए उसे चूमती है , बार बार , कभी गले को , कभी गाल को और कभी शशांक के होंठो को , वो पागल हो जाती है


” ओह भैया ,,भैया यू आर छो स्च्वीत …आइ लव यू ….दीवाली मुबारक हो ….”


शशांक इस अचानक हमले से बौखला जाता है


” यह लड़की ..उफफफफ्फ़ …पटाखे से भी ज़्यादा ही फट रही है …”


” हां भैया ..तुम ने ठीक कहा पटाखे से भी ज़्यादा … “


“ओके ओके ….आइ नो आइ नो ” ..और वो भी एक प्यारा सा किस उसके होंठों पर जड़ देता है , उसे अपनी मजबूत बाहों से थामते हुए उसे पास रखी एक कुर्सी पर बिठा देता है ..और खुद भी एक कुर्सी खींच उसके बगल बैठ जाता है….


शिवानी उत्तेजना से हाँफ रही थी …..


शशांक भी शिवानी के इस प्यारे से हमले से अपने आप को पूरी तरह बचा नहीं पाया था, उसके उभरे हुए बॉक्सर का शेप इसकी बात की चीख चीख कर गवाही दे रहा था …


थोड़ी देर तक कोई कुछ नहीं बोलता …एक दूसरे को देखते रहते हैं …


शिवानी की साँस नॉर्मल होती है ..शशांक चूप्पि तोड़ता हुआ बोलता है


” अच्छा शिवानी तू तो अब मेरी फिलॉसफर , गाइड और बेस्ट फ्रेंड है ना …??” शशांक थोड़ा माखन लगाता है ..


” हां वो तो हूँ ..” शिवानी अपना सीना तानते हुए कहती है ..


” ह्म्म्मी तो फिर बता ना ..आज मोम को अचानक क्या हो गया ..तुम ने देखा ना कितने प्यार से मुझे देख रही थी और कितनी देर तक मुझे अपनी गाल चूमने दिया ..??” शशांक पूछता है


” देखा ना भैया ..मैने कहा था ना मोम को टाइम दो ..एक ही रात में कितना बदलाव आ गया ..जस्ट वेट फॉर सम मोर टाइम माइ बिलव्ड ब्रो’ …सम मोर टाइम …और तुम देखोगे और कितना बदलाव आता है..” शिवानी प्यार से उसकी ओर देखते हुए कहती है ….उसकी आँखों में भैया का प्यार और चाहत झलक रहे थे…


” हां शिवानी तू ठीक ही कहती है …” शशांक भी उसकी ओर देखता है ..


दोनों की नज़रें टकराती है …शिवानी के दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है….


इस बार शशांक को शिवानी कुछ और भी नज़र आती है ..सिर्फ़ एक पटाखा बहेन नहीं …


शिवानी के लूज टॉप के अंदर उसकी तेज़ साँसों और दिल की तेज़ धड़कनों के साथ हिलती हुई उसकी गदराई चूचियाँ , उसके गोरे और लाली लिए गाल , बड़ी बड़ी आँखें और सब से ज़्यादा उसकी शेप्ली नाक …आज शशांक को अपनी बहेन की जवानी के उभार भी दिखते हैं …


वो एक टक उसे देखता है…… शिवानी का मन शशांक के अगले कदम की कल्पना में झूम उठ ता है ..उसकी सांस और तेज़ हो जाती है ..शरीर में झूरजूरी सी महसूस होती है…


उसका सीना धौंकनी की तरेह उपर नीचे हो रहा था …उसकी चूचियाँ भी साथ साथ उछल रही थीं ..


शशांक खड़ा हो जाता है .. हाई उसे एक बच्चे की तरेह अपने गोद में उठा लेता है ….उसका सर अपने कंधे पर रख लेता है और उसके कान में फुसफुसाते हुए कहता है ..


” शिवानी ..”


” हां भैया ..क्याअ .??.” उसकी आवाज़ भर्राई हुई थी


” आइ लव यू टू…”


यह चार शब्द शिवानी को उसके होश-ओ – हवास खो देने पर मजबूर कर देते हैं..


शिवानी , शशांक से बूरी तरेह चीपक जाती है ..उसके कमर को अपने पैरों से और गले को अपने हाथों से और भी जाकड़ लेती है … उस से ऐसे चिपकती है जैसे किसी पेड़ से लता …शिवानी के स्लॅक्स इतने पतले हैं कि शशांक को अपनी कमर के गिर्द शिवानी की जांघों की गर्मी , उसका मुलायम और मांसल स्पर्श इस तरेह लगता है मानों वो नंगी है….


दोनों एक दूसरे को चूमते जा रहे हैं ….चाट ते जा रहे हैं ..कहाँ , कितना और कब किसी को कुछ होश नहीं रहता ..पागल हो गये हैं दोनों…


शिवानी हाँफ रही थी… तभी वो अपना एक हाथ नीचे करते हुए भैया के बॉक्सर पर ले जाती है और वहाँ कड़क उभार को जोरों से दबाती है ….मुट्ठी में भर लेती है , और अपनी उखड़ी उखड़ी सी आवाज़ में सर उठा कर शशांक की ओर देखते हुए कहती है


” भैया …”


“हां शिवानी बोल ना ..” शशांक भी उसकी आँखों में झाँकता हुआ कहता है..


शिवानी और जोरो से उसके बॉक्सर के उभार को दबाती हुई बोलती है


” मुझे यह चाहिए ..मेरी दीवाली गिफ्ट , दो ना भैया…” अपनी ज़ुबान में जितनी मीठास , प्यार और चाहत ला सकती थी शिवानी ने लाते हुए कहा …और फिर नज़रें झूका लीं …


शशांक पहले तो आँखें तरेरते हुए उसे देखता है …..फिर उसके चेहरे को अपनी हथेली से थामते हुए अपने चेहरे के सामने करता हुआ कहता है


” शिवानी ..अभी नहीं ..अभी नहीं …..मेरी बहना ….अभी नहीं ….तुम्हें बहोत दर्द होगा ..मैं यह दर्द तुम्हें नहीं दे सकता …प्लीज़ अभी नहीं..”


” प्लीज़ भैया ..मैं यह दर्द हंसते हंसते झेल लूँगी .. आप का दिया दर्द भी तो मेरे लिए दवा से भी बढ़ के है ..” शिवानी उसकी मिन्नत करती है ….


” कुछ तो समझो शिवानी ..बस कुछ दिन और रुक जाओ ….प्लीज़..” शशांक समझाने की कोशिश करता है


” ठीक है भैया ..मुझे बस दीवाली गिफ्ट चाहिए …वरना मैं अपने अंदर मोम बत्ती डाल कर , आप के लिए रास्ता सॉफ करूँगी अभी के अभी ..फिर जो दर्द होगा मुझे ..आप बर्दाश्त कर लेना …” शांति ने एमोशनल ब्लॅकमेल का रास्ता अपनाया.. .उसकी इस .धमकी ने कुछ असर किया ..


शशांक जानता था शिवानी के लिए यह कुछ मुश्किल काम नहीं था ..अपनी ज़िद में कुछ भी कर सकती थी …और उसकी संकरी सी..पतली सी चूत में कॅंडल अंदर जाना और उसकी झिल्ली का फटना …यह सोच कर ही शशांक कांप उठा ..


वो बनावटी गुस्सा दिखाता हुआ उसके चेहरे पर एक हल्का सा थप्पड़ लगाता है


” तू पूरी पागल है ..पूरी ….”


” हां मैं पागल हूँ भैया ..मैं हूँ पागल …. बस मुझे दीवाली गिफ्ट चाहिए और अभी चाहिए ..अभी चाहिए ..भैया प्लीज़ अभी चाहिए ..” वो शशांक की गोद में कांप रही थी ….और बार बार शशांक के उभार को दबाती जा रही थी ..शशांक भी उसकी इस हरकत से सीहर उठ ता है


वो फिर से शिवानी का चेहरा अपनी तरफ करता है ….उसकी आँखों में देखता है ….उसे ऊन आँखों में एक बड़ी बेताबी , हसरत और ललक दिखाई दी … मानो भैया से गिफ्ट की भीख माँग रही हो…


” उफफफफ्फ़..यह लड़की ….” शशांक अपने मन ही मन कहता है ..


उसे अपने सीने से चीपका लेता है ….गोद में भर लेता है …उसके होंठों को अपने होंठों से जाकड़ लेता है ..उन्हें चूस्ते हुए अपने कमरे की ओर बढ़ता जाता है ….


शिवानी अपने आप को उसके मजबूत कंधों और चौड़े सीने पर छोड़ देती है…… अपने आप को भैया के सुपुर्द कर देती है ….. उसका पूरा शरीर ढीला है शशांक की बाहों में ….


आनेवाले पलों की कल्पना मात्र से शिवानी झूम रही है ..सीहर रही है ….


शशांक अपने कमरे का दरवाज़ा अपने पैर से धकेलते हुए पूरा खोल देता है और शिवानी को अपने कंधों पर लिए अंदर प्रवेश करता है…..


शशांक धीरे धीरे चलता हुआ अपने बेड तक पहूंचता है …अभी भी बिस्तर बेतरतीब हैं ….सुबेह उठने के बाद वैसे का वैसे ही पड़ा था उसका बीस्तर …..शशांक उसे लिटा देता है , उसके हाथ शिवानी के गले को थामे लिटा ता है..शिवानी की गर्दन तकिये पर है और उसके बीखरे बाल तकिये के बाहर और भी बीखर जाते हैं … … बिछी चादर , सलवटें पड़ीं और उस पर शिवानी अपने चमकते ,काले और महेकते बीखरे बालों सहित लेटी…ऐसा लग रहा था शिवानी भी शशांक के बीस्तर से कोई अलग चीज़ नहीं ..उसके बीस्तर का ही हिस्सा हो….उसके के जीवान का ही एक हिस्सा …शिवानी के होंठों पर हल्की सी मुस्कुराहट और आँखें बंद थीं ..


शिवानी के हाथ फैले हुए हैं ..दोनों टाँगें सीधी और थोड़ी फैली …. शशांक के अगले कदम की प्रतीक्षा में ….


स्लॅक्स के अंदर उसकी गीली पैंटी सॉफ दीख रही थी …


शशांक उस से लगता हुआ उसकी ओर चेहरा किए बगल में लेट जाता है …थोड़ी देर तक उसे निहारता रहता है….. उसके होंठों को चूमता है …और शिवानी के बालों को सहलाता हुआ कहता है …


” शिवानी …..”


” हां भैया ..बोलो ना ..” दोनों की आवाज़ भर्राई सी है….


” तू क्यूँ ज़िद पे आडी है बहना …अपने भाई को क्यूँ तकलीफ़ देने पर आमादा है..??”


” भैया …मैं जानती हूँ दर्द मुझे होगा और तकलीफ़ आप को …. पर कभी ना कभी तो होना ही है ना ..?क्या मैं जिंदगी भर कुँवारी रहूं ..?”


” शिवानी कुछ दिन और रुक जा ना..थोड़ी और बड़ी हो जाएगी ना …फिर आसानी होगी…”


” नहीं भैया ..मैं और नहीं रुक सकती ..बस मुझे आज चाहिए ..और भैया …मुझे अपने से ज़्यादा आप पर भरोसा है..मैं जानती हूँ आप मुझे कुछ भी दर्द महसूस नहीं होने दोगे …. इतने प्यार से , हिफ़ाज़त से मेरे कुंवारेपन को और कौन तोड़ेगा भैया … मुझे इतना अच्छा , प्यारा और यादगार गिफ्ट कौन देगा भैया ….प्लीज़ आप मुझे इस पल के महसूस से मत रोको .प्लीज़….”


और फिर शिवानी करवट लेती हुई शशांक के उपर आ जाती है ..उस से लिपट जाती है , अपने टाँगों के बीच उसके बॉक्सर के उभार को जकड़ती है और अपनी गीली पैंटी से बूरी तरेह दबाती जाती है


शशांक कराह उठा ता है इस अचानक मस्ती के झोंके से ….

” उफफफफफफफ्फ़..शिवानी…शिवानी तू क्या कर रही है…..आआआः …तू बहोत ज़िद्दी है …..”


” हां भैया ….मेरे प्यारे भैया …. आज मैं अपनी ज़िद मनवा के रहूंगी ……” वो शशांक को चूमती जाती है और अपनी गीली पैंटी से और जोरों से दबाती है ….


शशांक का उभार कड़ा और कड़ा होता जाता है..उसे ऐसा महसूस होता है उसके बॉक्सर को फाड़ते हुए उसका कड़ा लंड कभी भी बाहर आ जाएगा …..


वो सिहर जाता है…और धीमी आवाज़ में कहता है ..


” पर शिवानी मैने भी तो आज तक यह काम नहीं किया ….तुम्हें बहोत दर्द होगा बहना …..”


” मैं जानती हूँ भैया ..आज हम दोनों अपना अपना कुँवारापन एक दूसरे को गिफ्ट करेंगे …उफफफफ्फ़ …उुउउहह .भैया कितना अच्छा कोयिन्सिडेन्स है …… “


अपनी गदराई चूचियों को शशांक के सीने से रगड़ते हुए शिवानी बोलती है…


शशांक की हिचक और विरोध कमजोर पड़ते जा रहे थे ….. वो भी इस आनंद और मस्ती के ल़हेर में बहता जा रहा था ….


अपनी टूट ती आवाज़ में शशांक कराहता है


” अयाया शिवानी ….ऊवू ..तू यह क्या कर रही है बहना ..उफ़फ्फ़..देख ऐसा मत सोचना मेरा दिल नहीं करता …बहोत दिल करता है शिवानी ..बहोत …पर फिर तेरा दर्द ..??”


” कम ऑन भैया …दर्द तो होना ही है भैया ….पर आप का दिया दर्द भी तो कितना मीठा होगा …आप यह मीठा दर्द मुझे महसूस करने दो ना ..प्लीज़ …”


और अब तक लोहे के समान हो चूके कड़े उभार को शिवानी अपने एक हाथ से जोरों से जकड़ते हुए अपनी गीली पैंटी पर दबाते हुए रगड़ देती है ….


शशांक का पूरा बदन झन झना उठता है…सीहर जाता है , उसकी रही सही रुकावट का बाँध फूट जाता है ….


वो आआहएं भरता है ” आआआआआआः ..शिवाााआआआआआअनी…”


और फिर वो भी उसे अपने में जाकड़ लेता है पूरी तरेह…शिवानी उसकी जाकड़ में खो जाती है …अपने आप को भूल जाती है उसकी मजबूत बाहों में….. ..कुछ देर तक उसके सीने पर अपना सर रखे उसे निहारती रहती है …फिर कुछ सोचती है ..और .शिवानी अपने को अलग करती है , एक झटके में अपना टॉप और स्लॅक्स उतार देती है ….


नंगी हो जाती है बिल्कुल…और घूटनों के बल , जंघें फैलाए शशांक के सामने बैठ जाती है ..


शशांक के सामने उसकी गदराई और अनछुइ जवानी बे-परदा है …सिर्फ़ शशांक के लिए ….सिर्फ़ शशांक से मिलनेवाले मीठे दर्द के अहसास के लिए …


थोड़ी देर दोनों एक दूसरे को देखते हैं ..दोनों की आँखों में आग सुलग रही थी … एक ऐसी आग जिसकी लपट में दोनों झुलसने को बेताब हो उठ ते है…यह थी जवानी की आग…..


शशांक के सामने शिवानी का मक्खन जैसा पेट , जांघों के बीच टाइट फाँक , फाँक के बीच गीलापन , कड़क उछलती हुई गथीली चूचियाँ , फड़कते हुए रस से भरपूर होंठ …बड़ी बड़ी आँखें हसरत , ललक और चाहत से भरी …..


शिवानी ने अपने को पूरी तरेह उसके सामने रख दिया…..कुछ भी बाकी नहीं था अब …यह .शशांक की मर्दानगी को शिवानी की चुनौती थी ….


शशांक उठ ता है और खुद भी नंगा हो जाता है .. वो भी घूटनों के बल शिवानी के सामने बैठ जाता है…


उसकी मर्दानगी भी नंगी हो जाती है … ऐसी मर्दानगी जिसके आगोश में कोई भी औरत हंसते हुए अपना सब कुछ लुटा दे ..शिवानी बस आँखें फाडे उसे देखती है ..चौड़ा सीना , गठिला बदन ..मजबूत बाहें और फनफनाता और कडेपन से हिलता हुआ 8″ का लंड ..


शशांक ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली ….


वो उस से लिपट जाती है …उसके सीने पर सर रखे , अपनी बाहों से उसे जाकड़ लेती है …आँखें बंद और सर सीने में छुपा ….उसकी औरत ने आत्मसमर्पण कर दिया उस मर्द को ….शिवानी कांप रही थी


शशांक उसे फिर से अपनी गोद में उठाता है ..और उसे लिटा देता है …


पहली बार दोनों को नंगे शरीर से स्पर्श का अद्भुत और रोमांचक अनुभव होता है …नंगे शरीर की गर्मी , उसकी कोमलता , उसकी मांसलता का अहसास होता है…. शिवानी इस आनंद से चीख उठ ती है ….


उसकी चूत से पानी रिस रहा था ..उसकी चूचियाँ शशांक के हाथों के स्पर्श मात्र से कड़ी हो गयी थी…उसकी घुंडिया कड़ी हो गयी थी…


शशांक उसके उभरे स्तन को मुँह मे लेता हुआ घूंड़ी के उपर अपनी जीभ फिराता है..शिवानी कांप उठ ती है …. उसका सर दबाती है अपनी चूची की तरेफ ….शशांक उसे अपने मुँह में भर लेता है ..चूस्ता है ..शिवानी को ऐसा महसूस होता है उसका सब कुछ अब बाहर निकल जाएगा ‘..उसके चूतड़ अपने आप उछल पड़ते हैं …. शशांक का लंड शिवानी की जांघों के बीच टकराता जाता है …


शशांक का भी बूरा हाल है….


उसका कडपन अब उस से सहेन नहीं होता ..उसे लगता है इसे अब गर्मी चाहिए …उसे अब किसी कोमल घर्षण की ज़रूरत है ..और यह कोमल और मुलायम घर्षण उसे शिवानी के अंदर ही मिल सकता है …उफ़फ्फ़ यह कितना नॅचुरल रिक्षन था …किसी को बताने की ज़रूरत नहीं होती ..अपने आप होता जाता है…


वो शिवानी के चूतड़ो को उठाता है ..उसके नीचे तकिया रखता है ..शिवानी पैर फैलाती है ..उसकी कसी चूत में पतली सी फाँक दीखती है ..गुलाबी फाँक …बिल्कुल गीली …


शशांक उसकी जांघों के बीच आ जाता है , अपना कड़क हिलता हुआ लंड हाथों में लेता है ..शिवानी अगले कदम की कल्पना से सीहर उठती है ..आँखें बंद कर लेती है ..


शशांक सुपाडे को उसकी पतली फाँक पर लगाता है …. लंड की गर्मी शिवानी को महसूस होती है ..चूत बहोत गीली है , बहोत फिसलन है , बहोत कसी है ..लंड पर ज़ोर लगाता है शशांक , सुपडा अंदर जाता है ….शिवानी की जाँघ फैल जाती हैं … शशांक थोड़ा थूक लगाता है ….और ज़ोर लगाता है …शिवानी भी टाँगें पूरी फैला देती है….चूतड़ उपर उठाती है …उसका लंड और भी अंदर जाता है …


उफफफफफ्फ़ कितनी गर्म है , कितना टाइट है शिवानी की चूत , शशांक को ऐसा महसूस होता है मानो किसी के हथेलियों ने उसके लंड को बूरी तरेह जाकड़ रखा हो ..करीब आधे से ज़्यादा लंड अंदर है …


शिवानी की आँखों में पीड़ा है ..दर्द है पर होठों पर मुस्कान ..दर्द भरी मुस्कान …


शिवानी की आँखों से दर्द से भरे आँसू टपकते हैं ..पर होठों पर अभी भी मुस्कान है ….दर्द आख़िर मीठा है ना ….

शशांक उसकी ओर देखता है …..उसके आँसू को चूम लेता है ..चाट जाता है …

शिवानी आत्मविभोर है ….


शशांक फिर से धक्का लगाता है अब पूरा लंड जड़ तक अंदर है , शिवानी का शरीर अकड़ जाता है …


शिवानी की जाँघ थरथरा रही हैं … चूत की फांके फडक रही हैं … आँखों से आँसू बह रहे हैं और होंठों पे फिर भी मुस्कान है…. दर्द भरी मुस्कान


शशांक उसे अपने सीने से लगाए उसे चूम रहा है ..लंड अंदर ही है …


अंदर ही अंदर चूत रिस रहा है ..खून और रस से भरा …. शशांक का लंड और गीला होता है और उसकी चूत थोड़ी और ढीली हो जाती है …

शशांक अपना लंड आधा बाहर निकालता है और फिर धीरे धीरे अंदर करता है ..इस बार उतनी कसी नहीं थी ,लंड पतली फाँक को चीरते हुए पर आराम से अंदर जाता है …


शिवानी का दर्द कम होता जा रहा है ….


उफ़फ्फ़ यह कैसा दर्द है ….दवा से भी ज़्यादा कारगर …


अब शशांक के धक्के ज़ोर पकड़ते हैं ….शिवानी सिहर उठ ती है … हर धक्के पर , कांप उठ ती है


शशांक की कमर को अपने पैरों से जाकड़ लेती है ..और अपनी चूत की तरफ खींचती है …बार बार चूतड़ उपर करती है ….शशांक के धक्कों से ताल मिलाते हुए …


शशांक अब उसकी चूतड़ को नीचे से थामता हुआ थोड़ा और ज़ोर लगाता है अपने धक्के में ….शिवानी अब उछल रही है


शशांक को चूत के अंदर की गर्मी , उसके फांकों की कसी हुई पकड़ , और शिवानी का यह मचलता , मदमाता और मस्ती से भरा रूप पागल कर देता है उसे….


उसके धक्के ज़ोर और तेज हो जाते हैं …शिवानी भी पागल हो जाती है ..वो जैसे हवा में तैर रही थी …हर धक्के में उछल जाती और चीत्कार उठ ती .है …दर्द और मस्ती के मिले जुले अहसास से …


शशांक के हर धक्के में वो आनंद विभोर हो उठती है……दर्द अपनी सीमायें लाँघता हुआ अब एक आनंद से भरी अनुभूति की ओर पहूंचता है ..शिवानी मस्ती की उँचाइयों पर है ….


शशांक के धक्के तेज होते हैं और तेज ..शिवानी को कुछ होश नहीं रहता .वो किल्कारियाँ लेती है ,कभी सिसकियाँ लेती है ..कभी चिल्ला उठ ती है …उसे समझ नहीं आता यह कैसा दर्द है जिसमें सिर्फ़ मस्ती ही मस्ती है ….उफफफफ्फ़..यह क्या हो रहा है ……और वो जोरों से फिर से चिल्लाति है ..”भैय्ाआआआआआआआअ ..ऊओह…..”


शशांक भी शिवानी की मस्ती से पागल हो उठ ता है …


दोनों एक दूसरे से लिपट जाते हैं …शशांक अंदर ही अंदर चूत में झटके खाते हुए झाड़ता जाता है ..झाड़ता जाता है ….


शिवानी आँखें बंद किए अपने भैया के गर्म गर्म वीर्य की फूहार को महसूस करती है अपनी चूत में .इस गर्म से अहसास से शिवानी का पूरा शरीर गंगना उठता है …उसका भी रस निकलता है …चूतड़ उछलते है ..टाँगें काँपति हैं ..जंघें बार बार थरथराती हैं..


दोनों एक दूसरे से लिपटे …हान्फते हुए .. एक दूसरे की बाहों में सारी दुनिया से बेख़बर पड़े हैं ..मानों उन्हें सब कुछ मिल गया हो …. सब कुछ …एक चरम सूख की अनुभूति है उनकी आँखों में…उनके चेहरे में …


खोए हैं , सब कुछ भूल कर …इस पल उन्हें सिर्फ़ एक दूसरे का अहसास है …हम तुम और कुछ नहीं…


सारा संसार बस उन दोनों में सिमट कर रह गया है…


थोड़ी देर बाद दोनों वापस हक़ीकत की दुनिया में लौट आते हैं …


शशांक , शिवानी के थके थके से पर मुस्कुराते चेहरे पर नज़र डालता है ..उसके होंठों को चूमता है


” बहुत दर्द हुआ…???” शशांक पूछता है , उसकी आवाज़ में शिवानी के दर्द का अहसास भरा था ..


” भैया ….” शिवानी का गला रुंधा हुआ था और उसकी आँखों में फिर आँसू थे ….पर यह दर्द के नहीं , चरम सूख के आँसू थे .. ” यह दर्द जब तुम्हारे जैसे मर्द से मिलता है ना ….इस दर्द का अहसास उस औरत की जिंदगी का सहारा बन जाता है भैया …..ऊओह भैया ..भैया आइ लव यू सो मच..”


और शिवानी अपने भैया से फिर से लिपट जाती है ..उसके सीने में सर रखे सिसकती है और यह सिसकना अपने आप हो जाता है ..उसकी अंदर की भावना फूट पड़ती है ..एक औरत अपने को पूरी तरह समर्पित कर देती है …अपने मर्द का आभार मानती है ….


शशांक उसके सर पर हाथ फेरता है ..उसका चेहरा अपनी हथेली से थामता हुआ उपर उठाता है ,उसके होंठ चूम लेता है , उसकी आँखों से आँसू पोंछता है उसे गले लगाता है और बोलता है..


” आइ लव यू टू , शिवानी ….आइ लव यू सो मच ….”


शशांक और शिवानी दोनों का यह पहला अनुभव उनके जीवन का एक यादगार पल था….ऐसे यादगार पल कम लोगों को ही नसीब होते हैं… ख़ास कर लड़कियों के लिए …


शिवानी को इतने प्यार , लगाव और कोमलता से कौन उसके कुंवारेपन को तोड़ता ….कोई दूसरा अपनी मर्दानगी दीखाने की कोशिश में ही जुटा रहता और उसे देता सिर्फ़ बेशुमार दर्द और पीड़ा … पर शशांक के प्यार ने इस दर्द और पीड़ा को एक सुखद , मादक और आनंद से भरे महसूस में बदल दिया था …


और शशांक की बात करें तो शिवानी ने भी अपने दर्द और पीड़ा का उसे अहेसास नहीं होने दिया ..उसका संपूर्ण आत्मसमर्पण और उसके लिए शिवानी के प्यार ने उसकी मर्दानगी का पूरा सम्मान करते हुए उसे अपने पूरे दिल से अपनाया ..कहीं कोई हिचक नहीं थी ..कोई भी झीझक नहीं था …एक दूसरे में दोनों कितने खो गये थे…एक दूसरे का कितना ख़याल था …


काफ़ी देर तक दोनों पड़े रहते हैं …चूप चाप ..मानों उस बीते हुए क्षणों को…उस गुज़रे हुए पलों को अपने जहेन में समाए जा रहे हों …उस मीठी याद को संजोए जा रहे हों …एक अद्भुत अनुभव का स्वाद मन मश्तिस्क में बिठाते जा रहें हो …


शशांक चूप्पि तोड़ते हुए कहता है


” कैसी लगी मेरी दीवाली गिफ्ट ..शिवानी..?”


शिवानी उसकी ओर देखती है…. उसे गले लगाती है और फिर आंसूओं की धारा फूट पड़ती है ….सिसकती है और अपने रूंधे गले से भर्राइ आवाज़ में बोलती है


” भैया बता नहीं सकती .

…मेरे पास शब्द नहीं है भैया ..देख नहीं रहे मेरे आँसू बोल रहे हैं ….मेरा रोम रोम सिसक रहा है तुम्हारे आभार से ? तुम ने जो दिया ना भैया मुझे , किसी भी औरत के लिए इस से नायाब तोहफा और कुछ नहीं हो सकता ..कुछ नहीं …तुम ने एक औरत को उसके औरत होने पर फक्र करने का मौका दिया ..हां भैया ….इस से ज़्यादा मुझे और क्या मिलेगा …बोलो ना ..बोलो ना भैया ..?”


और वो फिर उस से लिपट कर बहोत भावक हो जाती है और उसकी आँखों से लगातार आँसू की धारा बहती है यह उसके आभार के आँसू थे …एक औरत का अपने मर्द का आभार.


शशांक की आँखें भी नम हो जाती हैं और फिर वो बोलता है


” तुम ने भी तो मुझे अपना सब कुछ कितने प्यार से दे दिया शिवानी …बे झिझक ..पूरी तरेह …मुझे भी कितना अच्छा लगा ..मुझे तुम ने कभी भी अपने दर्द और पीड़ा का अहेसास ही नहीं होने दिया .. .मैने तुम्हें दर्द दिया तुम ने उसे प्यार से स्वीकार किया …मेरे प्यार को समझा , उसे इज़्ज़त दी ….हां शिवानी …आइ आम रियली सो हॅपी ..आइ फील सो फुलफिल्ड … “


थोड़ी देर दोनों फिर एक दूसरे की ओर खामोशी से देखते हैं ..


शिवानी खामोशी तोड़ती है ..और फिर पूछती है


” अच्छा भैया ..एक बात पूछूँ..?”


” हां पूछो ना शिवानी …” शशांक उसकी ओर देखते हुए कहता है


” बूरा तो नहीं मनोगे ना ..??”


” अब देख पहेलियाँ मत बूझा , वरना ज़रूर बूरा मान जाऊँगा …जल्दी पूछ ना ..” शशांक अपनी बेसब्री जाहिर करते हुए बोलता है ..


” तुम किसे ज़्यादा प्यार करते हो..मुझे या मोम को..?” और ऐसा कहते अपना सर उसके सीने में छुपा लेती है ….


थोड़ी देर शशांक चूप रहता है , कुछ नहीं कहता … शिवानी सोचती है शायद उसे बूरा लगा होगा , उसे मनाने के लिए बोल उठती है


” देखो बूरा लगा ना भैया ..ठीक है मत बोलो अगर बूरा लगा हो तो …मुझे किसी से क्या लेना देना ..मेरा भैया मुझे प्यार करता है ना ..बस मैं खुश हूँ ….”


” अरे नहीं नहीं शिवानी ऐसी कोई बात नहीं ..मुझे तेरे सवाल का कोई बूरा नहीं लगा ..मैं तो सिर्फ़ सोच रहा था तुझे कैसे समझाऊं ..तुम दोनों का फ़र्क ..अच्छा हां तो सुन ..और सच पूछो तो मैं खुद चाहता था तुम्हें यह बताना…”


शिवानी उठ कर बैठ जाती है ..और अपना पूरा ध्यान उसकी ओर लगाते हुए कहती है ..


” अच्छा ..?? फिर तो जल्दी बताओ ना भैया ..प्लीज़ जल्दी..” और फिर उसके गले में बाहें डाल अपना चेहरा उपर कर लेती है और फिर से बोलती है ” हां बोलो ना ..”


शशांक उसकी ठुड्डी अपनी उंगलियों से उपर करता है और बोलता है


” देख शिवानी ..प्यार तो प्यार ही होता है ना बहना ..कोई किसी से कम यह ज़्यादा कैसे कर सकता है ?..प्यार की कोई सीमा भी होती है क्या ..?? तुम्हारे लिए यह किसी और के लिए होगा शिवानी ..मेरे लिए नहीं ..मैं किसी को कम या ज़्यादा प्यार नहीं कर सकता..सिर्फ़ प्यार कर सकता हूँ बे-इंतहा ….और मैं तुम दोनों को प्यार करता हूँ शिवानी ..बे-इंतहा ….”


और फिर चुप हो जाता है ….


शिवानी शशांक का जवाब सून झूम उठ ती है …उसे उसकी जिंदगी मिल गयी थी , उसके प्यार का मकसद मिल गया था ..बिल्कुल पूरी तरेह …वो फूली नहीं समाती …और अपने नंगे बदन से अपने भैया के नंगे बदन के उपर लेट जाती है … और अपनी टाँगों के बीच उसके ढीले लंड को अपनी जांघों के बीच कर जांघों से रगड़ती है और उसे चूमती है ..कभी होंठों को , कभी गालों को ,,कभी उसकी गर्दन को…अपना बे-इंतेहा प्यार को उसके बे-इंतेहा प्यार से मिलने की जी जान से कोशिश में जूट जाती है …


“उफफफफ्फ़..तू भी ना शिवानी ..एक दम पागल है .. अरे बाबा मेरी बात तो पूरी हुई नहीं अभी … और तू टूट पड़ी ..अरे पूरी बात तो सून ले ..”


” मुझे नहीं सून नी पूरी बात ..बस अधूरी ही मेरे लिए इतना ज़्यादा है भैया ..पूरी सुन कर तो मैं मर जाऊंगी…”


‘” पर मुझे तो कहना है ना ..मैं जिस से प्यार करूँ उसे मेरी हर बात सून नी पड़ेगी ना ..”


शिवानी अपने जांघों की हरकतें जारी रखती है और मुँह की हरकतों पर रोक लगाते हुए बोलती है


” अच्छा बाबा बोलो ..ज़रा सूनू तो और क्या बाकी है तुम्हारे प्यार में ..” अपना चेहरा उसकी ओर कर लेती है


” बाकी कुछ भी नहीं शिवानी …बस थोड़ा सा फ़र्क है …” शशांक शिवानी के गालों को अपनी उंगलियों से दबाते हुए कहता है…


” ह्म्म्म्म … वो क्या कहा भैया..फ़र्क ??” ” फ़र्क ” शब्द सून कर शिवानी की पूरी हरकतें बंद हो जातीं हैं …वो एक दम से चौंक जाती है


शशांक उसके इस अचानक बदलाव पर हंस पड़ता है ….


” अरे मेरी प्यारी बहना चौंको मत फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि मैं मोम की पूजा करता हूँ ..उसे सुंदरता की देवी मानता हूँ …..और तू तो मोम की ही दूसरी अवतार है ना ..पूरी की पूरी उनका ही रूप …तो जब ओरिजिनल सामने है तो पूजा ओरिजिनल से ही करूँगा ना ….और प्यार दोनों से ….समझी ना..?”


” ऊवू भैया ..मैं तो डर गयी थी .. हां बाबा मुझे आप की पूजा उूजा की कोई ज़रूरत नहीं ..मुझे तो आप का प्यार चाहिए ..वो तो भरपूर मिल रहा है ..उफ्फ भैया यू अरे सो स्वीट ..और मैं भी तो उनकी पूजा करती हूँ ..शी ईज़ माइ रोल मॉडेल … “


शशांक भी शिवानी की बातों से अश्वश्त हो जाता है ….अब कोई भी रुकावट नहीं थी ..कोई भी शंका नहीं था ….


दोनों फिर से लिपट जाते हैं एक दूसरे से ….


शिवानी की जंघें फिर से हरकत में आ जाती हैं और नतीजा यह होता है उसका लंड फिर से तन हो जाता है …और शिवानी की चूत गीली हो जाती है .


दोनों एक दूसरे को खा जाने को , एक दूसरे में समा जाने की होड़ में लगे हैं …


कराह रहे हैं ..सिसक रहें हैं …शशांक उसकी चूचियों को चूस रहा है ..मथ रहा है .. दबा रहा है ….


शिवानी उसके लंड को घीस रही है , जांघों से दबा रही है….अपने हाथों में भर अपनी चूत पर घीस रही है ..अपने अंदर लेने की कोशिश में जुटी है …


शशांक से रहा नहीं जाता ..’


उसे अपने नीचे कर लेता है …

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शिवानी अपनी टाँगें फैला देती है ..उसकी जांघों पर उसके कुंवारेपन टूट ने के निशान अभी भी हैं..खून के कतरे लगे हैं … उसकी चूत में हल्की सी बहोत पतली फाँक है ..गुलाबी ..खून के कतरे वहाँ भी हैं …और बहोत गीली है अब


शशांक अपने लंड को हाथ से थामता हुआ उसकी चूत पर ले जाता है ,


शिवानी भी अपनी हथेली से उसे थामती है , अपनी चूत में लगाने में उसकी मदद करती है


” हां भैया ..हां अब रुकना मत …प्लीज़ अब डाल दो ना ..मेरे दर्द की परवाह मत करो..प्लीज़ डालो ना…”


शशांक को उसकी परवाह है ..वो झट तकिया उसकी चूतड़ के नीचे रख देता है …चूत थोड़ी और फैल जाती है..पर अभी भी फाँक संकरी ही है ..शिवानी जांघे और भी फैला देती है ….


” उफफफफ्फ़ भैया देर मत करो ना ….आओ ना …” शिवानी उसके कमर को अपने हाथों से जाकड़ लेती है और अपनी चूत की ओर खींचती है ..


शशांक भी साथ साथ दबाव बनाता है अपने लंड पर …फतच से रस , वीर्य और खून से सराबोर चूत में उसका लंड फिसलता हुआ जाता है …पर अंदर अभी भी काफ़ी टाइट है ..रास्ता सॉफ था ..पर संकरा था


शिवानी चीख उठ ती है .


“आआआः …हां भैया ..हां तुम रूको मत ..उफफफफफफ्फ़ ..यह कैसा मज़ा है ..अयाया “


शशांक लंड बाहर करता है और फतच से फिर अंदर डालता है ..


शिवानी चिहुनक उठ ती है …” हां भैया …हां और ज़ोर से ..और ज़ोर से …डरो मत मुझे अब अच्छा लग रहा है …दर्द बिल्कुल नहीं है …हां हां …”


शशांक के धक्के ज़ोर पकड़ते जाते हैं ..शिवानी उसकी गर्दन में बाहें डाले उसे अपनी ओर खींचती है ..उस से चिपकती है ….


शशांक उसकी चूचियों में मुँह लगाता है ..चूस्ता है , चाट ता है ..दबाता है और साथ में उसकी चूत के अंदर लंड भी अंदर बाहर करता जाता है


दोनों मस्ती और आनंद के सागर में डुबकियाँ लगा रहे हैं ..एक दूसरे के बाहर और अंदर का पूरा मज़ा ले रहे हैं ..इस बार किसी को कोई झिझक नहीं ..कोई हिचक नहीं ….


शिवानी के चूतड़ हर धक्के में उछल जाते हैं …उसका लंड जड़ तक पहून्च जाता है ..जंघें आपस में टकराते हैं ..थप थप की आवाज़..कराहों की आवाज़ , सिसकियों और किल्कारियों से कमरा गूँज रहा है …


” हाआंन्न नननननननननननणणन् ….ऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह भैय्ाआआआआआआआअ ..” शिवानी उछल जाती है , वो इतनी उत्तेजित है, उठ बैठ ती है उत्तेजना से , शशांक का लंड अंदर लिए ही उस से लिपट जाती है बैठे बैठे , और अपने चूतड़ उछालते हुए रस की फुहार छोड़ती जाती है …शशांक का लंड भी उसके रस की धार से धार मिलाता हुआ पीचकारी छोड़ता है …


दोनों एक दूसरे से चीपके हैं और एक दूसरे को अपने रस से सराबोर कर रहें हैं …


शशांक शिवानी के होंठों को चूमता हुआ उसके उपर लेट जाता है ..


हाँफ रहे हैं दोनों , उनका सब कुछ एक हो जाता है ..साँसें..दिल की धड़कनें ..शरीर ..सब कुछ ..


और दोनों एक दूसरे की बाहों में सब कुछ भूल कर नींद के आगोश में चले जाते हैं …


दोनों भाई .बहेन एक दूसरे की बाहों में बेसूध पड़े सो रहे थे…उनके चेहरे पे हल्की सी मुस्कान और एक संतुष्ती थी , सब कुछ शांत था….. जैसे तेज़ तूफान के बाद सागर शांत हो जाता है…आज उनके अंदर से भी प्यार एक तूफान की शकल लिए उनके बाहर आ गया था …अब वह दोनों शांत थे…


शिवानी की नींद खुलती है ..अलसाई आँखों से दीवाल पर लगी घड़ी की ओर देखती है …दोपहर का एक बज रहा था …


” ओह माइ गॉड …पूरी सुबेह निकल गयी ….उफफफफ्फ़ कैसा खेल था यह हम दोनों का ….समय का कुछ अंदाज़ा ही नहीं रहा ..” शिवानी सोचती है , फिर बगल में सो रहे शशांक पर नज़र डालती है …


वो अभी भी गहरी नींद में था …एक बच्चे की तरेह शांत और निर्दोष चेहरा …. शिवानी ने उसे जगाना ठीक नहीं समझा …वो उठ ती है ….उसकी नज़र नीचे जाती है उसकी जांघों पर ..जांघों पर उन दोनों के तूफ़ानी मिलन के निशान सॉफ झलक रहे थे …वीर्य, खून के कतरे …और खुद उसके रस की सूखी पपड़ियाँ …उन्हें देख मुस्कुराती है …फिर बीस्तर से उठ ती है ….उसके सारे बदन में एक मीठा सा दर्द का अनुभव हो रहा था … जैसे उसके बदन को किसी ने बड़े प्यार से रौंद दिया हो .


वो बीस्तर छोड़ देती है और कपड़े पहेन बाहर निकल जाती है , दबे पावं…अपने बाथरूम जा कर अपनी चूत और जांघों को अच्छी तरेह सॉफ करती है ..,हॉट शवर लेती है ….और अब उसे काफ़ी हल्का महसूस होता है…फ्रेश टॉप और स्लॅक्स पहेन शशांक के कमरे में जाती है और उसे उठाती है


“भैया उठो ….”


शशांक जागता है अंगड़ाइयाँ लेता है …और फिर जमहाई लेते हुए पूछता है


“ह्म्‍म्म…टाइम क्या हुआ शिवानी …लगता है काफ़ी देर हो गयी है ..”


” हां भैया 2.00 बज रहे हैं ….चलो जल्दी उठो , फ्रेश हो जाओ ..मैं खाना लगाती हूँ …मुझे तो जोरों की भूख लगी है ..”


शशांक फ्रेश हुई शिवानी पर नज़र डालता है…उसके चेहरे पर अब कोई थकान नहीं थी ..एक दम तरो-ताज़ा और चमकता हुआ चेहरा … उसके बदन से खूशबू का झोंका उसकी उनिंदे चेहरे पर भी एक ताज़गी ले आता है , वो उसे खींच कर अपनी गोद में ले लेता है , उसके बालों को सून्घ्ता है …


शिवानी थोड़ी देर अपना सर उसके सीने से लगाए रखती है .उसे सूंघने देती है अपने बाल ..फिर अपने को अलग करती है ..


” उफफफफफफ्फ़..भैया अब तो छोड़ो ….मैं कहाँ भागी जा रही हूँ…चलो जल्दी उठो , मुझे बहोत काम करना है ..दीवाली का भी तक कुछ भी इंतज़ाम नहीं हुआ ….मोम के आने से पहले सब कुछ ठीक करना है ना ..प्लीज़ अब उठो..”


उसे अपने हाथों से पकड़ उठाती है और उसके बाथरूम की ओर उसे धकेलते हुए ले जाती है …


” यार तू तो मोम से भी ज़्यादा मस्त दीखने लगी है….”


” हां बस दीखाऊँगी अपना रुआब…. चलो जल्दी करो … एक अच्छे बच्चे की तरेह ….”


शशांक भी एक अच्छे बच्चे की तरेह हाथ जोड़ता है “हां मेरी अम्मा …जाता हूँ बाबा जाता हूँ …”


शिवानी किचन की ओर चली जाती है ..और फ्रीज़ से खाना निकाल कर गर्म करती है …


थोड़ी देर बाद शशांक नहा धो कर फ्रेश बॉक्सर ओर टॉप में बाहर आता है और डाइनिंग रूम की ओर जाता है ..


वहाँ शिवानी उसका इंतजार कर रही थी ..


वो सामनेवाली कुर्सी खींच उसके सामने बैठ जाता है ..दोनों चूप हैं ….खाना शूरू करते हैं ..कोई कुछ नहीं बोलता है ..मानों उनके पास अब कहने को कुछ नहीं बचा ..उनकी सारी मुरादें , इच्छायें और बातें पूरी हो गयीं थीं..उन्हें क्या मालूम था कि यह एक ऐसी आग थी जो कभी बूझती नहीं ,,जितना बूझाओ और भी भड़क उठ ती है ….


शिवानी चूप्पि तोड़ती है ..


” भैया …”


” हां शिवानी ..बोलो ना ” शशांक मुँह में कौर डालते हुए बोलता है


“तुम मुझे कितना बे-शरम समझ रहे होगे ना ..??”


” क्यूँ…शिवानी..ऐसा क्यूँ..??”


“मैं कैसी बेशरामी से चिल्ला रही थी …पर भैया ..सच बोलूं तो यह सब अपने आप हो गया ..उस समय मैं अपने होश-ओ-हवस खो बैठी थी….”


” हां शिवानी ..मैं भी तो होश खो बैठा था ….मैं भी तो कितना बेरहम हो गया था ….शायद हम दोनो के प्यार ने तुम्हें बे-शरम और मुझे बेरहम बना दिया …”


” हां भैया तुम ठीक कहते हो…हमारा प्यार….. “


और फिर दोनों चूप चाप खाना खा कर उठ जाते हैं …


दोनों भाई बहेन दीवाली की तैयारी में जूट जाते हैं ….


पूरे घर में दिया सजाने में काफ़ी टाइम लग जाता है….


शाम हो चूकि थी ..अंधेरा घिर आया था और दिए की रोशनी से सारा घर जगमगा उठा था ..शिवानी के लिए तो इस बार दिए से उठ ती लौ ने सिर्फ़ उसके घर को ही नहीं बल्कि उसके जीवन में भी एक नयी रोशनी ले आई थी ..वो बहोत खुश थी…


वो दिए की थाली अंदर रख कर शशांक के पास आती है…. उसकी ओर बड़े प्यार से देखती है और बोलती है ..


” भैया , पापा और मोम आते ही होंगे ..चलो तैयार हो जाओ …मैं भी तैयार हो जाती हूँ ..बताओ ना मैं क्या पहनूं..??””


” अरे तू तो कुछ भी ना पहनेगी ना तब भी कितनी अच्छी लगेगी …तेरा फिगर भी कितना मस्त है ..बिल्कुल मोम की तरेह ….” शशांक उसे छेड़ते हुए कहता है ..


शिवानी उसके गाल पर एक प्यारा सा चपत लगाती है …


” ह्म्‍म्म्म ..लगता है आज तुम ने मुझे कुछ ज़्यादा ही देख लिया …..अच्छा बाबा मज़ाक छोड़ो ना …बताओ ना क्या पहनूं ..?'”


” हां यार तुम ठीक बोल रही हो..मैने तुम्हें बिना कपड़ों के इतना देख लिया कि अब तू कपड़ों में अच्छी लगती ही नहीं …..” शशांक फिर छेड़ता है उसे ..


” ओओओः भैया तुम भी ना ..” उसके सीने पर मुक्का लगाती हुई बोलती है ‘” जल्दी बोलो ना , पापा मोम के आने का टाइम हो रहा है ..कुछ तो सोचो ना … “


” ठीक है बाबा ..तू साड़ी पहेन ले …. वो शिफ्फॉन वाली है ना …”


और फिर शिवानी बिना देर किए मूड कर भागती हुई अपने कमरे की ओर चली जाती है अपने भैया की पसंद की साड़ी पहेन ने..


शशांक भी अपने कमरे में जाता है चेंज करने को …


शशांक गले वाला कुर्ता और मॅचिंग चूड़ीदार पाजामा पहेनता है …


दोनों भाई बहेन तैय्यार हो कर बाहर हाल में आते हैं ..दोनों एक दूसरे को बस एक टक देखते रहते हैं ..


शिवानी साड़ी में कितनी अच्छी लग रही थी . साड़ी नाभि से नीचे बाँध रखी थी उस ने ..पतली झीनी शिफ्फॉन उसके स्लिम फिगर में कितनी फॅब रही थी ….ब्लाउस छोटा सा …बस ब्रा को ढँकते हुए … उसकी हर चीज़ जितनी ढँकी थी उतनी ही दीखती भी थी …


यही तो है साड़ी का कमाल ..जितना ढँकती है उस से ज़्यादा उघाड़ती है….


शशांक का भी मस्क्युलर फिगर सिल्क के कुर्ते से उभर कर बाहर आ रहा था ..


शिवानी आरती की थाली हाथ मे लिए शशांक के साथ बाहर बरामदे में खड़ी अपने पापा और मोम का इंतेज़ार करती है …


थोड़ी ही देर में दोनों आ जाते हैं…


शिव और शांति कार से उतरते हैं , उनका घर दिए से सज़ा है ..जगमगा रहा है और दोनों भाई बहेन उनके स्वागत में खड़े हैं …


शिव शांति खुशी से फूले नहीं समाते अपने बच्चों के प्यार से ….


शशांक और शिवानी उनकी आरती उतारते हैं और उनके पैर छूते हैं


दोनों अपने मोम और पापा से गले मिलते हैं … आशीर्वाद लेते हैं ..


शांति जब शशांक को गले लगाती है , सीने से लगाती है ..उसके गाल चूमती है .. थोड़ा चौंक जाती है ..आज शशांक उस से गले लगता है..पर अपने आप को थोड़ा अलग रखता है अपनी मोम के सीने से ..रोज की तरेह चीपकता नहीं ….शांति समझ जाती है …. उसे यह भी समझ आ जाता है शशांक को कितनी परेशानी हो रही है अपने आप को रोकने में ….उसका शरीर इस कोशिश से कांप रहा था … किसी चूंबक से लोहे को जबरन अलग किया जाए तो बार बार वो चूंबक की ही तरफ जाएगा …पर ज़ोर अगर ज़्यादा हो तो लोहा हिलता ही रहेगा , चूंबक से चीपकने को……कुछ ऐसी ही हालत शशांक की थी …


शांति उसके इस बदलाव से कांप उठ ती है ….” उफफफ्फ़ …मुझ से इतना प्यार..?? ” उसकी आँखें भर आती हैं ..वो फ़ौरन अपना चेहरा दूसरी ओर करते हुए अपने कमरे की ओर जाने लगती है


” बच्चों तुम वेट करो ..मैं भी तैयार हो कर आती हूँ..” जाते जाते शांति कहती है..


हॉल में शिवानी और शशांक रह जाते हैं


शिवानी अपने भैया की हालत समझ जाती है ….वो बोल उठ ती है


” हां भैया तुम सही में मोम की पूजा करते हो ..यही फ़र्क है प्यार और पूजा में ….”


” शिवानी ….. “शशांक उसकी ओर देखता हुआ कहता है” अपनी सुंदरता की देवी पर , अपनी मोम के आँचल में कोई भी आँच नहीं आने दूँगा ..कभी नहीं …”..शशक की आँखों में एक दृढ़ता , एक निश्चय है …


” हां भैया मैं जानती हूँ …और मैं यह भी जानती हूँ कि आप की पूजा जल्द ही सफल होगी …”


थोड़ी देर में शांति और शिव दोनों बाहर आते हैं .. उनके साथ दीवाली मनाते हैं ..फुलझड़ियाँ छोड़ते हैं ..पटाखे चलाते हैं ..और यह दीवाली उनके जीवन में नयी रोशनी ..नयी आशायें और रिश्तों के नये रूप का धमाका ले कर आती है…


शिव शांति का परिवार बड़े जोश और उत्साह से दीवाली की जगमग रोशनी में , पटाको और फुलझड़ियों की चकाचौंध में डूबा है , चारों एक दूसरे के आनंद में शामिल हैं ….


शिवानी के तन -मन में तो पहले ही फुलझड़ियाँ फूट चूकी थीं , पटाखो की गूँज ने धमाका कर डाला था …वो अभी भी उन धमाकों की आवाज़ों में खोई थी ..


शशांक के करीब आने , उस से गले लग जाने का कोई भी मौका नहीं चूकती …


शशांक भी अपनी बहेन की खुशी में पूरा साथ दे रहा था…


पर शशांक ने अपनी मोम से शारीरिक करीबी की पतली सी लक्ष्मण रेखा हमेशा बरकरार रखी …..


शिवानी और शांति इस बात को अच्छी तरेह समझ रहे थे ..शांति को शशांक के अंदर इस लक्ष्मण रेखा को ना लाँघने की कोशिश में हो रहे धमाकों का भी अंदाज़ा था ..आख़िर वो उसकी माँ भी थी ना..और एक माँ से ज़्यादा अपने बच्चे को कौन जान सकता है ….और माँ अपने बच्चे का ख़याल ना करे यह भी कैसे हो सकता है…??


शांति के अंदर भी इस सवाल ने धमाका मचा रखा था …इन धमाकों से अपने आप को कैसे बचाए ?? ..कब तक बचाए ..??? और क्यूँ बचाए ????.इस आखरी सवाल ने उसे बूरी तरेह झकझोर दिया था …..


काफ़ी देर तक दीवाली की धूम मचती रही , पटाको का धमाका चलता रहा , पर शांति अपने अंदर और बाहर हो रहे दोनों धमाकों से बहोत परेशान हो जाती है …


” चलो भी अब …बहोत हो गया ….और रात फाइ काफ़ी हो चूकि है ….” शांति ने सब से कहा … सब अंदर जाते हैं …खाना वाना खा कर अपने अपने कमरे में घूस जाते हैं…


गुड नाइट करते समय भी शशांक ने अपनी लक्ष्मण रेखा बरकरार रखी…पर उसकी आँखों में दर्द , पीड़ा और एक दृढ़ सहनशक्ति झलक रही थी …शांति अच्छी तरेह महसूस कर रही थी ..उसके अंदर भी धमाकों का शोर ज़ोर और ज़ोर पकड़ता जेया रहा था….शांति को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे इन धमाकों से उसके कान फॅट जाएँगे …..धमाकों के शोर उसकी बर्दाश्त से बाहर हो रहे थे..


शिव के साथ अपने कमरे में शांति कपड़े बदल लेट जाती है …पर उसके मश्तिश्क में अभी भी उन धमाकों की गूँज कम नहीं हो रही थी ..


शिव रोज की तरेह पलंग पर लेट ते ही थोड़ी देर शांति से दूकान की बात करते करते गहरी नींद में सो जाता है…


पर शांति की नींद उसके अंदर के धमाकों ने हराम कर रखी थी …नये सवाल उठ खड़े हो रहे थे और नये धमाके पुराने धमाकों के साथ जूड़ते जा रहे थे .. क्या बेटे के ख़याल में अपने पति को धोखा दे दे ?? ..उस पति को जो उसे इतना प्यार करता है.??..जिसे वो भी इतना प्यार करती है ..??


उसकी औरत उसे संभालती है उसे जवाब मिलता है “प्यार बाँटने से कम नहीं होता शांति …और बढ़ जाता है …एक से प्यार करने का मतल्ब यह थोड़ी है कि तुम दूसरे से कम प्यार करोगी ..?और वो भी कोई पराया मर्द नहीं तुम्हारा अपना खून ..अपना बेटा …आख़िर वो शिव का भी तो बेटा है ना ..क्या तुम शिव के बेटे को ऐसे ही छोड़ दोगि आग में झूलस्ने को ..??”


“पर फिर भी यह ग़लत है ना …!!!” शांति का संस्कार चीख उठता है….


” ग़लत सही कुछ भी नहीं शांति ..सब अपने विचारो का खेल है… मुस्लिम समाज में चचेरे ,ममेरे , मौसेरे भाई -बहेन आपस में शादी करते हैं …क्या ग़लत है..?? तेलुगु समाज में लड़की अपने मामा से शादी करती है ..क्या ग़लत है..???”


शांति चुप है , उसके पास कोई जवाब नहीं …


उसकी औरत उसे समझाती है ” शांति अपने बेटे को संभाल लो ..उसे अपना प्यार दे दो शांति ..वरना वो टूट जाएगा …आख़िर कब तक अपने आप को इस आग से बचाएगा ..इस से पहले की सब कुछ इस आग में झुलस कर स्वाहा हो जाए ..इस आग को बूझा दो शांति ….बूझा दो ….इसे ठंडा कर दो…””


” हे भगवान यह कैसी उलझन है…” शांति मन ही मन चिल्ला उठ ती है ..उसे लगता है उसके कान के पर्दों के चिथड़े हो जाएँगे ..अपने कान बंद कर लेती है …पर फिर भी धमाके बंद नहीं होते …


लगातार उसके कानों में उसकी औरत की आवाज़ आती रहती है “प्यार बाँटने से प्यार कम नहीं होता……….आग बूझा दे ..आग बूझा दे ..शांति ….शांति ..अपने बेटे को बचा ले…शांति …”


और फिर वो चूप चाप अपने पलंग से उठ ती है….शिव की ओर देखती है … वो अभी भी गहरी नींद में है……. .शांति की नज़र उस के चेहरे पर गढ़ी है…….वो मन ही मन बोलती है .


.” शिव मैं तुम्हारे बेटे के पास जा रही हूँ , उसे भी मेरा प्यार चाहिए शिव …वो मेरे प्यार का भूखा है , उसके बिना मर जाएगा …मैं तुम्हारे बेटे को , तुम्हारे ज़िगर के टूकड़े को, नयी जिंदगी दूँगी ..उसे बचा लूँगी शिव ..उसे कुछ नहीं होगा …कुछ नहीं होगा ..कुछ नहीं …”


शांति आगे बढ़ती है …. कमरे का दरवाज़ा खोलती है …अपने संस्कारों की बेड़ियाँ तोड़ डालती है….परंपराओं की जंजीरें काट फेंकती है …..और उसके कदम अपने आप शशांक के कमरे की ओर बढ़ते जाते हैं….


इधर शशांक भी अपने पलंग पर लेटा है ….नींद उसकी आँखों से भी दगा कर रही है …वो भी अपने अंदर के धमाकों से परेशान है ..


.”मोम ..मैं आखीर अपने सब्र का बाँध कब तक रोकू …उफ्फ ..कहीं टूट ना जाए ..कहीं मैं कुछ ऐसा ना कर बैठूं जिस से तुम्हारा आँचल मैला हो जाए ..मोम ..मोम मुझे बचा लो ….मोम …”


वो भी मन ही मन चिल्ला रहा है , बीलख रहा है ..रो रहा है…


तभी उसे अपने दरवाज़े पर किसी के बड़ी धीमी आवाज़ में खटखटाने की आवाज़ सुनाई पड़ती है ..


वो चौंक जाता है ..इतने रात गये कौन हो सकता है ..?


फ़ौरन उठ ता है…….”ज़रूर बदमाश शिवानी होगी ” बुदबुदाता हुआ दरवाज़े की ओर जाता है


दरवाज़ा खोलता है ..


बाहर मोम खड़ी थी……


एक पल के लिए शशांक को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं होता …. मोम ..उसकी देवी ..उसके सपनों की रानी..उसकी हसरत , उसकी दुनिया उसका सब कुछ ..खुद उसके सामने खड़ी है…वो अपनी आँखें मलता है दुबारा देखता है…..हां यह उपर से नीचे तक वोही है ..


मोम की आँखों में माँ की चिंता , एक औरत की हसरत और प्यार सब कुछ देख और समझ लेता है शशांक …


शशांक एक हाथ से दरवाज़ा खोलता है और दूसरे हाथ से मोम के कंधे पर हाथ रखे उसे अंदर खींचता है ….दरवाज़ा बंद कर देता है …मोम को अपनी गोद में उठाता है …और बड़े नपे तुले कदमों से बीस्तर के पास जा कर उसे लीटा देता है..


मोम की आँखों में अब कोई चिंता नहीं है ..शशांक की मजबूत बाहों के सहारे गोद में आते ही शांति को महसूस हो जाता है के उसके लंबे कदम जिन्होने उसके वर्षों की संस्कारों और परंपराओं को लाँघते हुए पीछे छोड़ दिया है…उसे सही ठिकाने तक पहूंचाया है .


शांति को उसकी मजबूत बाहों में बिल्कुल वैसा ही महसूस हो रहा था जैसा उसे उस रात सपने में हुआ था ….उसने इन बाहों में अपने आप को कितना महफूज़ पाया …इन बाहों का सहारा लिए वो जिंदगी के किसी भी तूफान का सामना कर सकती थी ..किसी भी भंवर से खींच निकालने की ताक़त उन बलिष्ठ भुजाओं में थी…. एक औरत को एक मर्द की मजबूत बाहों का सहारा मिल गया था ….. उसकी मंज़िल मिल गयी थी …शांति अब निश्चिंत है ..उसके अंदर धमाके अब शांत हैं …..


शशांक , शांति को बीस्तर पर लीटा कर उसकी बगल में बैठता है…उसे निहारता है ..अपनी मोम का यह बिल्कुल नया रूप अपनी आँखों से पीने की कोशिश करता है..बस देखता ही रहता है ….


शांति की बड़ी बड़ी आँखें खूली हैं ..चेहरे पे हल्की सी मुस्कुराहट है…. आँखों में एक ताज़गी है ..जो लंबी दूरी तय करने के बाद अपनी मंज़िल तक पहूंचने पर किसी की आँखों मे होती है… शांति ने भी तो सालों की मान्यताओं , नियमों को ठोकर मारते हुए एक लंबी दूरी तय कर आज शशांक के बीस्तर तक आई थी …उसके पाओं ने अपने कमरे से शशांक के कमरे तक सिर्फ़ चार कदमों का ही फासला तय किया था ..पर उसके दिल-ओ-दिमाग़ ने सालों से चली आ रही एक लंबी और विस्तृत परंपरा को लाँघने का लंबा सफ़र तय किया था ..


शशांक सब समझता था उसकी आँखों से शांति का आभार , उसकी पूजा , उसकी प्रशन्षा और सब से ज़्यादा उसके लिए असीम प्यार आँसू बन कर टपक रहे थे ….


अपनी मोम की ओर एक टक देखते हुए वो बोल उठता है…..” उफफफफफ्फ़ मोम …अट लास्ट……..”


उसके इन चार शब्दों में शांति ने उसकी तड़प , उसका आभार , उसका प्यार सभी कुछ महसूस किया ..


” हां शशांक अट लास्ट ….. तुम्हारे प्यार ने मुझे यहाँ तक आने को मजबूर कर दिया ….मेरे कदम खींचे चले आए ..हां शशांक …”


और अब शशांक अपने आप को रोक नहीं पाया …उसने लक्ष्मण रेखा तोड़ दी …..


मोम को अपनी बाहों में जाकड़ लिया ….उसके सीने में मुँह छुपाता हुआ फूट पड़ा ” हां मोम ..यस मोम …आइ लव यू ..आइ लव यू …उफफफफफफ्फ़ …मोम …..आइ लव यू सो मच ….. “


” हां शशांक मैं जानती हूँ ..मैं समझती हूँ ..मैं महसूस करती हूँ ..बेटा…मेरी अंदर की औरत को तुम ने जगा दिया है शशांक …अपना सारा प्यार भर दो मेरी झोली में ….भर दो ….”


शांति अपनी बाहें उसके पीठ से लगाते हुए शशांक को अपने सीने से चीपका लेती है ….बार बार उसे अपनी तरफ खींचती है ..शशांक उसकी पीठ के नीचे बाहें डाले उसे बार बार अपनी तरफ खींचता है ..दोनों के सीने से चिपकते हैं…शांति की मदमस्त चूचियाँ अपनी सारी गोलाई और कोमलता लिए उसके सीने में सपाट हो जाती है , स्पंज की तरेह …. ..


शशांक उसे बार बार गले लगाता है . सीने से चिपकाता है….उसे चूमता है ..चाट ता है चूस्ता है शांति आँखें बंद किए इस प्यार को अपने अंदर महसूस करती है….अपने अंदर समा लेने की जी जान कोशिश में जुटी रहती है ….


शशांक प्यार लूटा रहा था शांति उसे अपनी झोली में समेट रही थी ….


अचानक शांति , शशांक को अपने उपर से हटा ती है ..शशांक चौंकता है


शांति कहती है ..” शशांक अपने प्यार के बीच अब यह परदा क्यूँ ??….शांति और शशांक के बीच कोई दूरी क्यूँ ??..उनके महसूस के बीच रुकावट क्यूँ ?? ……मुझे पूरे का पूरा शशांक चाहिए …..और शांति भी शशांक को पूरी मिलेगी …पूरी की पूरी बेपर्दा ……नंगी …..पूरी तरेह शांति …”


एक झटके में शांति अपनी नाइटी उतार फेंकती है , शशांक के सामने बिल्कुल बे परदा ..बिल्कुल नंगी ….सिर्फ़ शांति ……


शशांक की आँखें फटी की फटी रह जाती है शांति को देख……उफफफफफफफफ्फ़ ……सही में वो उसके सुंदरता की देवी है ….संगमरमर की मूर्ति की तारेह तराशा हुआ शरीर , शरीर कम एक देवी की मूर्ति ज़्यादा …..भारी भारी गोलाकार चूचियाँ ..गुलाबी घूंडिया ….दूधिया रंग …लंबी गर्दन …मुस्कुराता चेहरा ….भरे भरे होंठ ….मांसल पेट ….गहरी नाभि…..लंबी सुडौल टाँगें …भारी भारी जंघें ..जांघों के बीच हल्की सी फाँक लिए गुलाबी चूत , बीखरे बाल …..हाथ फैलाए ….


शशांक उसकी बाहों में जाने को अपने हाथ फैलाता है ..फिर रुक जाता है …..सोचता है इस संगमरमर की इतनी निर्मल , स्वच्छ और पवित्र मूर्ति उसके कपड़ों के स्पर्श से मैली ना हों जायें ….


अपने कपड़े उतार फेंकता है , अब सिर्फ़ शशांक , शांति के सामने है …नंगी और निर्मल शांति की बाहों में नंगा और निर्मल शशांक आ जाता है ..जिस तरह वो अपनी माँ की कोख से निकला था ..


दोनों एक दूसरे से बूरी तारेह चीपक जाते हैं …चीपके चीपके ही बीस्तर पर आ जाते हैं….मानों इतने दिनों से रुका हुआ प्यार का बाँध फूट पड़ा हो….. दोनों इस फूटे हुए बाँध के बहाव में बहते जाते हैं ….


एक दूसरे को चूमते हैं , गले लगते हैं ….ताकते हैं …अलग होते हैं …निहहरते हैं ..फिर सीने से लगते हैं ….उफफफफफफ्फ़ ..इस बहाव के झोंके में दोनों पागल हैं…


शांति को शशांक लीटा देता है….उसके उपर आ जाता है ..उसका तन्नाया लंड शांति की जांघों के बीच फँसा है …शांति की भारी भारी चूचियाँ अपने मुँह में ले लेता है , चूस्ता है …


.”हां शशांक अपनी मोम का दूध चूस ले बेटा ..चूस ले ..पूरा चूस ले ..” अपने हाथों से अपनी चूची दबाते हुए उसके मुँह में अंदर धँसाती है …..” ले ले मेला बेटा ..मेला दूध्दू पी ले ..”


शशांक का सर अपनी चूची की तरफ खींचती है …


दूसरी चूची शशांक हाथ से मसल रहा है ….


शांति कराह रही है..सिसकारियाँ ले रही है ..मस्ती की झोंकों में उसके चूतड़ उछल रहे हैं और उसकी गीली चूत शशांक के कड़े , लंबे और मोटे लंड को नीचे से घीसती जाती है ….शशांक इस प्रहार से सीहर उठ ता है..उसका सारा शरीर कांप उठ ता है….


शांति के होंठों को अपने मुँह में भर लेता है ..अपने होंठों से चूस्ता है..अपनी जीभ अंदर डाल देता है ..उसकी जीभ शांति की मुँह के अंदर उसकी तालू , उसके जीभ , उसके दाँत शांति के मुँह का कोना कोना चाट ता है …..शांति की जीभ अपने होंठों से जाकड़ लेता है ..उसे जोरों से चूस्ता है..शांति के मुँह का पूरा लार अपने अंदर ले लेता है..शशांक अपनी माँ का सब कुछ अपने अंदर ले रहा है..


शांति की चूत से लगातार पानी रीस्ते जा रहा है शांति तड़प रही है शशांक की बाहों में ..बार बार चूतड़ उछाल रही है ..लंड को अपनी चूत से घीसती जा रही है..उसे अंदर लेने को बूरी तरेह मचल रही है……


शहांक का लंड और भी तन्नाता जाता है…मानों उखड़ जाएगा ..उस से अलग हो जाएगा और अपनी माँ की चूत में घूस जाएगा …


वो फिर से शांति को चीपका लेता है अपने बदन से …उसके कठोर और मांसल शरीर शांति की कोमलता को स्पंज की तरह दबा रखा है ….वो इस तज़ुर्बे को अपने अंदर ले रहा है…देर तक चीपका रहता है..शांति उसके नीचे तड़प रही है ..बार बार उसके कड़क लंड को अपनी चूत से घीस रही है ..चूत के होंठ कितने फैले हैं ….उफफफफफफ्फ़ …शशांक का सुपाडा उसकी चूत के सतह पर चूत की पूरी लंबाई को घीस रहा है …शांति का बदन उसकी बाहों में उछल मार रहा है ..कांप रहा है ..


शांति अपनी टाँगें फैलाटी है …तभी अचानक शशांक का तननाया लंड उसकी बूरी तरेह गीली चूत के अंदर चला जाता है ………..


उफफफफफ्फ़…आआआः ..यह कैसा सूख है …शशांक के लिए बिल्कुल नया अनुभव..कितना गर्म , कितना मुलायम , बिल्कुल मक्खन की तरेह ….उस ने भी अपने आप को छोड़ दिया ..शांति अपनी चूतड़ उपर और उपर उठाती जा रही है….उसके लिए भी एक नया ही तज़ुर्बा था ..इतना कड़क . लंबा और मोटा लंड अपनी चूत में लेने का……उसकी चूतड़ उपर उठ ती जा रही है..लंड की लंबाई ख़त्म ही नहीं होती …


शशांक मोम की भारी भारी मुलायम चूतड़ो को अपने हाथ से थामता है , हल्के से अपना लंड अंदर डालता है …शांति की चूत को उसके लंड की जड़ मिल जाती है…उसकी पूरी लांबाई वो ले लेती है …


शांति इस तज़ुर्बे से थरथरा उठ ती है ..आँखें बंद किए शशांक के कमर को मजबूती से जाकड़ लेती है..उसका लंड कहीं बाहर ना निकल जाए ….शशांक भी लंड अंदर डाले अपनी माँ की चूत की गर्मी , उसका गीलापन , उसकी कोमलता महसूस करता है ..


आआआआः जिस चूत से वो निकला था ..उसी चूत में आज वो फिर से अंदर है ..अपने पूरे होश-ओ-हवस में ……उफफफफफफ्फ़ इस महसूस से शशांक पागल हो उठता है ..उसका पूरा शरीर इस सोच से सीहर उठ ता है …


वो लंड अंदर किए ही शांति को चूम रहा है ,उसके होंठ चूस रहा है..उसकी चूचियाँ दबा रहा है ..


शांति ने भी अपने आप को पूरी तरेह उसके हवाले कर दिया है ….


उसका लंड उसकी चूत के अंदर ही अंदर और भी कड़क होता जाता है ….


शांति इस महसूस से किलकरियाँ लेती है ..उसकी जाँघ फडक उठ ती हैं


अब शशांक से रहा नहीं जाता ,अपना लंड पूरा बाहर निकालता है , शांति की चूतड़ थामे जोरदार धक्के लगाता है..


उसका लंड मोम की कोख तक पहून्च जाता है..शशांक अपने लंड को उसकी कोख पर घुमाता है , उसे महसूस करता है ..शांति इस धक्के से निहाल हो जाती है ….जिस कोख ने उसे जन्म दिया उसी कोख को उसका बच्चा अपने लंड से छू रहा है ,टटोल रहा है…इस चरम सूख के अनुभव से शांति सीहर उठ ती है , उसके सारे बदन में झूरजूरी होने लगती है ….. शांति अपने आप को रोक नहीं पाती है


“आआआअह….उउउः शशााआआआआंक” चीख पड़ती है शांति ……


..चूतड़ उछाल उछाल कर झड़ती जाती है …झड़ती जाती है ….शशांक का लंड अपनी मोम के रस से सराबोर है ..


तीन चार धक्कों के बाद वो भी अपनी पीचकारी छोड़ते हुए मॉं की कोख को अपने गर्म गर्म वीर्य से नहला देता है …..


अपने बेटे के पवित्र रस से माँ की कोख पूरी तरेह धूल जाती है..


शांति कांप रही है , सीहर रही है , चीत्कार रही है आनंद विभोर हो कर किल्कारियाँ ले रही है


मानों उसके अंदर दीवाली की फूल्झड़ियाँ फूट रही हों


शशांक उसके सीने में , अपनी माँ की स्तनों में अपना चेहरा धंसाए हांफता हुआ लेट जाता है .


शांति अपने हाथ उसके सर पर रखे उसे अपने सीने में और भी अंदर भर लेती है …. आँखें बंद किए इस अभूत्पूर्व आनंद के लहरॉं में बहती जाती है….खो जाती है….


कुछ देर बाद शांति अपने होश में आती है …..उसका शरीर कितना हल्का था ..जैसे हवा में झोंके ले रही हो…


शशांक मोम की गोद की गर्मी पा कर सो गया था ..गहरी नींद में


शशांक के सर को अपनी हथेलियों से थामे बड़ी सावधानी से अपने सीने से हटा ती है और बीस्तर पर कर देती है …शशांक अभी भी नींद में हैं….उसका माथा चूमती है ….. बदन पर चादर डाल देती है ….खूद नाइटी पेहेन्ति है और दबे पाओं कमरे से बाहर निकल जाती है .


अपने कमरे में जाती है , शिव अभी भी गहरी नींद में था .


शांति उसके बगल लेट जाती है …


इस बार उसकी नींद उसे धोखा नहीं देती ….वो भी सो जाती है …


सूरज की पहली किरणों के साथ ही आज शशांक के जीवन में भी एक सुनहरे सवेरे का उदय होता है… एक ऐसी सुबेह जो उसकी जिंदगी में खुशियाँ , प्यार और मुस्कुराहटो का खजाना ले आती है ..उसके जीवन में रंगिनियाँ भर देती है …


उसका दिल-ओ-दिमाग़ , दीवाली के फूल्झड़ियों की चमक , दियों की शीतल रोशनी और पटाखो की चकाचौंध से जगमगा उठा था….दिल की गहराइयों तक पटाखो के धमाके गूँज रहे थे …


शांति और शिवानी के प्यार ने उसकी झोली , बे-इंतहा और बेशुमार खुशियों से भर दी थी …


उसकी नींद खुलती है ….अपने उपर चद्दर रखी हुई पाता है..उसकी आँखें मोम की ममता भरे लाड से आँखे नम हो जाती हैं ….वो कितना खुशनसीब है , कल रात मोम ने अपनी औरत का प्यार और माँ की ममता दोनों शशांक पर लूटा दी थी….. शशांक के प्यार को इतने ख़ूले दिल से स्वीकार कर लिया था …समेट लिया था..कुछ भी तो मोम ने बाकी नहीं रखा ..पूरे का पूरा उन्होने अपने में समा लिया और बदले में जो उन्होने दिया ..शायद शशांक समेट भी ना सके जीवन भर … उसकी औरत के प्यार का तो बदला चूका सकता था शशांक..पर माँ की ममता ..?? इसका बदला क्या कभी चूका सकता था ????


” मोम ….यू आर ग्रेट ..मोम आइ आम सो लकी … लेकिन मोम ..मैं आप के आँचल को कभी भी मैला नहीं होने दूँगा मोम ..कभी नहीं ….” उसकी आँखों से लगातार आभार के आँसू टपकते हैं…


वो पूरी तरेह जाग जाता है , अपने बदन से चादर हटा ता है , आँसू पोंछता है और अपनी हालत देख एक लंबी मुस्कुराहट उसके होंठों पर आ जाती है …


शशांक बिल्कुल नंगा था….उसका लंड भी सुबेह की ताज़गी को अपने लंबे , कड़क और हिलते हुवे आकार से सलामी दे रहा था …


तभी उसका दरवाजा एक जोरदार झटके के साथ ख़ूलता..है..वो झट अपनी चादर ओढ़ फिर से आँखें बंद कर सोने का नाटक करता है …


उसका लंड चादर के अंदर ही तंबू बनाए लहरा रहा था ..’


शिवानी अंदर आती है …शशांक के तंबू पर उसकी नज़र जाती है ..उसके होंठों पर एक बड़ी शरारती मुस्कान आ जाती है…वो फ़ौरन दरवाज़ा बोल्ट करते हुए …वापस उसके बगल खड़ी हो कर एक टक उसके लहराते हुए लंड को निहारती है …


फिर उसके बगल बैठ जाती है ..चादर के अंदर हाथ डालती है और शशांक के लंड को बूरी तरेह अपने हथेली से जाकड़ लेती है …उसे सहलाती हुई बोलती है ..


” गुड मॉर्निंग भैया ….वाह क्या बात है ..दीवाली की फूल्झड़ी अभी भी लहरा रही है …”


और तेज़ी से उसके लंड की चमड़ी उपर नीचे करती है …


शशांक सीहर उठ ता है


” उफफफफफफफफफ्फ़.यह लड़की …ना सुबेह देखती है ना शाम , बस हमेशा एक ही काम ..” शशांक प्यार से झुंझलाता हुआ जुमला कसता है….


” क्या बात है , क्या बात है..सुबेह सुबेह इतना शायराना मूड ..? ” शिवानी के हाथ और तेज़ चलते हैं


” शिवानी ..अरे बाबा यह सुबेह सुबेह .?? कुछ तो सोचो मोम कभी भी आ जाएँगी चाइ ले कर ….मुझे कपड़े तो पहेन ने दे ना यार..” वो खीझता हुआ कहता है …पर उसकी आवाज़ खोखली है ….वो भी मज़े में था ..


” अरे मोम की चिंता मत करो भोले राजा ..आज दीवाली के दूसरे दिन दूकान बंद है ..भूल गये क्या..? मोम और पापा आज देर से उठेंगे ….अभी तो सिर्फ़ 7 बजे हैं..9-10 बजे से पहले कोई चान्स नहीं उनके उठने का ..” वो मुस्कुराती हुई उसकी आँखों में देखती है ..पर अचानक अपने हथेली में कुछ खटकता है … हाथ की हरकत रोक लेती है … उसके लंड को देखती है ..जिस पर उसका वीर्य सूख कर पपड़ी बना था ..और उसकी जड़ तक कुछ और पपड़िया भी थीं ..जो चूत में अंदर जाने पर ही आती हैं …चूत रस से भींगे होने पर …


वो सोचती है ” मैं तो कल रात इसके पास आई नहीं ..फिर कौन हो सकता है …क्या मोम ..?? कोई तीसरी का तो कोई चान्स ही नहीं था,उसे इतना तो शशांक पर विश्वास था..ज़रूर कल रात मोम आई थी यहाँ “”


इस कल्पना से शिवानी बहोत खुश हो जाती है…उसके भैया की पूजा सफल हुई …


वो फिर से उसके लंड को बड़े प्यार से सहलाती है और शशांक से बोलती है


” भैया ….??”


” अब क्या है….?” शशांक उसका सहलाना अचानक बंद होने से थोड़ा झल्ला गया था


“अरे बाबा झल्लाओ मत ना ..इतने प्यार से तो तुम्हें सुबेह जगाने आई हूँ …अच्छा यह बताओ कल रात मोम आई थीं क्या आप के पास..?”


शशांक इस सवाल से अपने चेहरे पर कोई भी भाव नहीं आने देता , जैसे कुछ नहीं हुआ …


” अरे नहीं बाबा ..कोई नहीं आया …पर टू क्यूँ पूछ रही है..”


शिवानी उसके लंड को सहलाना फिर से बंद करती है और उसे थामे उसे दिखाती हुई बोलती है


” फिर यह आप के वीर्य की पपड़ी..??” और फिर लंड की जड़ में अपनी उंगली लगाती है ” और यह चूत के रस की जमी हुई पपड़ी ..? भैया झूट मत बोलो ..मेरे और मोम के अलावा यहाँ और कोई तो है नहीं ….डरो मत भैया . मुझे तो खुशी होगी …आपकी पूजा सफल हुई ..”


शशांक समझ गया अब और कोई बहाना अपनी बहेन के सामने नहीं चलनेवाला


वो चूप चाप मुस्कुराता हुआ ” हां ” में सर हिला देता है ….


शिवानी खुशी से झूम उठ ती है …शशांक का अपने पर विश्वास देख वो फूली नहीं समाती …


वो उस से लिपट जाती है , उसे चूमने लगती है


” ओओओओह्ह भैया आइ आम सो हॅपी फॉर यू ..सो हॅपी ….मैं सब समझ गयी ..अब आप कुछ मत बोलो , कुछ मत करो …लो मैं तुम्हें अपनी तरफ से गिफ्ट देती हूँ तुम्हारे विक्टरी पर ..तुम बस चूप चाप लेटे रहो….”


शशांक आँखें बंद किए लेटा रहता है …शिवानी की गिफ्ट की कल्पना में खोया हुआ ….


शिवानी अपने कपड़े उतार फेंकती है …अपनी नंगी और सुडौल टाँगें शशांक के मुँह के बगल फैला देती है और अपना मुँह उसके लंड के उपर ले जाती है ..उसके खड़े लंड के सुपाडे पर जीभ फिराती है ..शशांक चिहूंक जाता है..उसके गीली जीभ के स्पर्श से और फिर गप्प से लंड को मुँह में भर चूस्ति है ….उसका लंड काफ़ी मोटा और लंबा था ..पूरा लंड शिवानी की मुँह में नहीं जाता ..आधा ही जाता है …आधे लंड को चूस्ति जाती है आइस क्रीम की तरेह …और बाकी हाथ से थामे सहलाती है ..


शशांक इस दोहरे हमले से कांप उठ ता है ….कराह उठ ता है ….


शिवानी भी अपने मुँह में किसी के लंड को पहली बार अंदर लेने के आनंद से , एक बिल्कुल नयी तरेह के तज़ुर्बे से मस्त है ..क्या महसूस था ..ना कड़ा , ना मुलायम , ना गीला ना सूखा ….उफ़फ्फ़ …अद्भूत आनंद …वो चूसे जा रही है….मानो पूरे का पूरा लंड खा जाएगी ..हाथ भी तेज़ी से चला रही है..उसकी चूत भी गीली होती जा रही है …रस शशांक की फैली बाँहो को छूता है ..


शशांक उसकी टाँगें फैलाता है ..चूत की गुलाबी और गीली फाँक दीखती है उसे…उस से रहा नहीं जाता


शशांक उसकी जांघों को हाथों से फैलाता हुआ अपने मुँह पर ले आता है …उसकी चूत अब उसके मुँह पर है …टूट पड़ता है शिवानी की चूत पर ..अपने होंठों से उसकी चूत को जकड़ता हुआ जोरो से चूस्ता है ….शिवानी सीहर जाती है ..उसे लगता है उसके शरीर से सब कुछ निकल कर शशांक के मुँह में उसकी चूत से बहता हुआ चला जाएगा …


शिवानी की टाँगें थरथरा जाती हैं ..शशांक जांघों पर अपनी पकड़ बनाए है और चूस्ता जाता है ..चाट ता जाता है अपनी बहेन की चूत


शिवानी भी उसके लंड को ज़ोर और जोरों से चूस्ति है ..कभी दाँतों से हल्के काट ती है ..कभी जीभ फिराती है …हाथ भी चलाती जाती है उसके लंड पर


दोनों मस्त हैं , लंड और चूत की चुसाइ हो रही है..दोनों के मुँह में रस लगातार जा रहे हैं..उसे पीते जा रहे हैं …गले से नीचे उतारते जा रहे हैं


फिर शशांक का लंड कड़ा और कड़ा हो जाता है और अपनी चूतड़ उछालता हुआ शिवानी के मुँह में अपनी पीचकारी छोड़ देता है …शिवानी उसके लंड को मुँह खोले अंदर लिए है और अपने हाथों से कस कर थामे है ,,उसका लंड शिवानी के हाथों में झटका देता हुआ उसके मुँह में खाली होता जा रहा है..शिवानी के गालों पर ..उसके होंठों पर , उसके चेहरे पर शशांक के वीर्य के छींटे पड़ते हैं ..


इधर शिवानी अपनी चूतड़ के झटके लगाते झड़ती जाती है ..शशांक के मुँह में उसकी चूत का रस भरता जाता है ..शशांक गटकता जाता है….


दोनो भाई बहेन एक दूसरे का रस अपने अपने अंदर लेते जा रहे हैं ….


थोड़ी देर में दोनों खाली हो जाते हैं …


शिवानी अपने चेहरे पर लगे वीर्य के छींटों को हथेली से पोंछती है , और चाट जाती है …पूरा चाट जाती है ….


फिर दोनों आमने सामने हो जाते हैं , एक दूसरे से लिपट जाते है ..चूमते हैं ..चाट ते हैं


और हान्फते हुए एक दूसरे के उपर पड़े रहते हैं …


काफ़ी देर तक दोनों एक दूसरे पर चूप चाप पड़े रहते हैं ….


” भैया ….” शिवानी बोलती है


“हां शिवानी..बोलो ना ..??”


” इस बार की दीवाली कितनी अच्छी रही ..है ना..? “


” क्यूँ शिवानी …” शशांक जान बूझ कर अंजान बनता हुआ पूछ ता है


शिवानी उसके सीने से लगे अपने सर को उपर उठा ती है ..उसकी आँखों में झाँकते हुए , उसके गालों को सहलाते हुए बोलती है


” देखो ना भगवान ने हम दोनों की बात सुन ली ..मुझे आप का प्यार मिल गया और आप को मोम का ….”


” हां शिवानी तू बिल्कुल ठीक कहती है …पर एक बात तो मुझे समझ में आ गयी अछी तरेह …”शशांक अपनी बहेन के गाल सहलाता हुआ बोलता है


” क्या भैया …बताओ ना ..”वो भी उसके गालों को सहलाते हुए बोलती है


शशांक पहले शिवानी के चेहरे को अपने हथेली से थामता है , उसके होंठ चूस्ता है ..फिर बोलता है


” प्यार बाँटने से ही तो प्यार मिलता है शिवानी ..मैने तुम्हें तुम्हारा प्यार दिया ख़ूले दिल से ..मुझे भी मेरा प्यार मिल गया ..”


क्या इस से बढ़ कर और कोई प्यार हो सकता है ??


” हां भैया .. यू आर सो राइट ब्रो’ ..सो राइट ..”


और दोनों फिर एक दूसरे का प्यार महसूस करने , एक दूसरे को बाँटने में जूट जाते हैं ..एक दूसरे से चीपक जाते हैं ,


शशांक का लंड फिर से तन्ना जाता है …शिवानी की चूत गीली हो जाती है …


शिवानी उठ ती है ..शशांक लेटा रहता है..उसका लंड हवा से बातें कर रहा है..लहरा है …हिल रहा है कडेपन से


शिवानी उपर आ जाती है ..अपनी गीली चूत को अपनी उंगलियों से फैलाती है


अपनी टाँगें शशांक के जांघों के दोनों ओर करती है और उसके लंड के सुपाडे पर अपनी गीली चूत रख देती है ….वो उसके लंड पर धँसती जाती है


उफफफफफफ्फ़..क्या तज़ुर्बा था दोनों के लिए ….कितना टाइट ..कितना गर्म ,कितना मुलायम ..शशांक कराह उठ ता है


शिवानी चीख उठ ती है दर्द से ..अभी भी उसकी चूत कितनी टाइट थी ..


शशांक को मोम की चूत और शिवानी की चूत का फ़र्क महसूस होता है


मोम की चूत मक्खन की तरेह थी उसका लंड धंसता जाता था


शिवानी की चूत में मक्खन जितनी मुलायम नहीं , कुछ कडापन लिए है ..उसके अंदर उसका लंड चीरता हुआ जाता है ..उफफफफफ्फ़ दोनों नायाब थे ….एक जवानी की दहलीज़ पर दूसरी …जवानी के उतार पर….. पर जवानी का पूरा रस अभी भी बरकरार…


अयाया ..शिवानी थोड़ी देर चूत अंदर धंसाए रहती है ..पूरे लंड की लंबाई महसूस करती है अपने अंदर


उसकी चूत और गीली हो जाती है


शशांक की जांघों पर उसका रस रिस्ता हैं …उफफफफ्फ़ क्या तज़ुर्बा था दोनों के लिए


शिवानी के धक्के अब तेज़ होते हैं ..अपना सर पीछे झटकाती है ..बाल बीखरे हैं …हर धक्के में उसका सर पीछे झटक जाता है…बाल लहरा उठ ते हैं ..मानों वो किसी नशे के झोंके में , किसी जादू के असर में अपना सब कुछ भूल चूकि हो ..अपने होश खो बैठी हो …उसका कुछ भी उसके वश में नहीं …


शशांक भी नीचे से चूतड़ उछाल उछाल कर उसकी चूत में अपना लंड चीरता हुआ अंदर करता है..


उफफफफफ्फ़ ..दोनों एक दूसरे को आनंद देने में ..एक दूसरे में समा जाने की होड़ में लगे हैं …


जवान हैं दोनों ..धक्के में जवानी का जोश , तड़प और भूख सब कुछ झलक रहा है


फिर शिवानी अपनी चूत में लंड अंदर किए शशांक से बूरी तरेह लिपट जाती है ..उसे चूमती है ..शशांक के सीने से अपनी चूचियाँ लगाती है ..दबाती है ..शशांक अपनी बाँहे उसकी पीठ से लगा उसे अपने से चीपका लेता है …


शिवानी चीत्कार उठ ती है ..”भैय्ाआआआआआआआआअ ….” और अपने चूतड़ उछालती हुई शशांक के लंड को भीगा देती है अपनी चूत के रस से ….


शशांक उसे अपने नीचे कर लेता है …लंड अंदर ही अंदर किए हुए


तीन चार जोरदार धक्के लगाता है ..शिवानी उछल जाती है ..शशांक अपनी पीचकारी छोड़ता हुआ अपना लंड उसकी चूत में डाले हुए उसके उपर ढेर हो जाता है ..हांफता हुआ ..


शिवानी अपनी टाँगें फैलाए उसके नीचे पड़ी है ..हाँफ रही है …


शशांक उसकी चूचियों पर सर रखे है ….आँखें बंद किए अपनी बहेन की साँसों को अपनी साँसों से महसूस करता है ..दोनों एक दूसरे से लिपटे खो जाते हैं एक दूसरे में ..


भाई बहेन का प्यार एक दूसरे को भीगा देता है ..दोनों पसीने से लत्पथ हैं ..दोनों के पसीने मिलते जाते हैं…. जवानी का जोश और तड़प कुछ देर के लिए शांत हो जाता है ….


दोनों के चेहरे पर संतुष्टि की झलक है ..एक दूसरे के लिए मर मिटने की चाहत है …प्यार की पराकाष्ठा पर हैं दोनों मे ..


शिवानी उसे चूमती है और बोलती है ..” भैया क्या प्यार यही है ??”


” हां शिवानी हमारा और तुम्हारा प्यार यही है ..”


और फिर दोनों एक दूसरे की बाहों में खो जाते हैं .


दोनों भाई-बहेन को एक दूसरे की बाहों में छोड़ते हैं ..और ज़रा चलें शिव-शांति के कमरे में..देखें दोनों पति-पत्नी क्या कर रहें हैं …


आज शांति को जल्दी उठने की कोई चिंता नहीं …. पर उसे बाथरूम जाने की तलब जोरों से लगी है ….वो अलसाई , आधी नींद में उठ ती है और टाय्लेट के अंदर जाती है …नाइटी उपर उठाते हुए टाय्लेट-सीट पर बैठ ती है ….उसकी चूत के होंठों पर , जांघों पर सभी जगेह कल रात के तूफ़ानी प्यार के निशान मौज़ूद थे…


उन्हें देख वो मुस्कुराती है .. शशांक के साथ बीताए उन सुनहरे पलों की याद आते ही सीहर उठ ती है …उफ़फ्फ़ कितना प्यार करता है मुझ से….


मेरी झोली में अपना सारा प्यार एक ही दिन लूटा देने को कितना उतावला था ..कितनी तड़प थी शशांक में …. इस कल्पना मात्र से ही उसकी चूत फड़कने लगते हैं …..वो उठ ती है और अच्छी तरेह अपनी चूत और जांघों की सफाई करती है … शशांक के लंड के साइज़ ने भी उसे मदमस्त कर दिया था ..उफ़फ्फ़ कितना लंबा, मोटा और कड़ा था ..जितना प्यार करता था साइज़ भी वैसा ही था ……


फिर से शशांक के लंड को अपनी चूत के अंदर होने की कल्पना मात्र से ही उसकी चूत रीस्ने लगती है…उफ़फ्फ़ …..यह कैसा प्यार है…


वो फिर से अपनी चूत पोंछती है और अपने बीस्तर पर शिव के बगल लेट जाती है….


इधर शिव भी रात की अच्छी नींद से काफ़ी रिलॅक्स्ड महसूस कर रहा था ..उसकी आँखें भी खूल जाती हैं …..पर सुबेह की ताज़गी का आनंद उसके लंड को भी आ रहा था ..और नतीज़ा …उसके पाजामे के अंदर तंबू का आकार लिए उसे सलामी दे रहा था …


उसके होंठों पर मुस्कुराहट आती है ….शांति अभी अभी टाय्लेट से आई थी ..उसके चेहरे पर भी एक शूकून , आनंद और मस्ती थी ..उसके चेहरे पर भी मुस्कान थी …और बीखरे बाल , नाइटी के अंदर से झान्कति हुई उसकी सुडौल चूचियाँ …शिव की नज़र उस पर पड़ती है ..उसे एक टक निहारता रहता है …


शांति की नज़रें उसकी नज़रों से टकराती हैं …शांति को आनेवाले पलों की झाँकी शिव की आँखों में सॉफ सॉफ नज़र आ जाती है ….


” ऐसे क्या देख रहे हो शिव ..मुझे कभी देखा नहीं .??” शिवानी की आवाज़ में कल रात की मस्ती , और अभी सुबेह का अपने पति के लिए उमड़ता हुआ प्यार लाबा लब भरा था…उसे अच्छी तरेह महसूस हो गया , प्यार बाँटने से और भी बढ़ जाता है….


” ह्म्‍म्म्म..देखा तो है शांति पर सुबेह सुबेह इतने इतमीनान से तुम्हारे रूप को पी जाने का मौका कभी कभी ही मिलता है…” कहता हुआ शिव की नज़र और भी गहराई लिए शांति को नंगा करती जा रही थी ..


शांति उसकी इस पैनी और उसे उसके नाइटी को भेदती हुई अंदर तक झान्कति नज़र से अपने अंदर कुछ रेंगता हुआ महसूस करती है ….


अपना सर शिव के सीने के उपर छुपा लेती है , और बोलती है


” बड़े बे-शरम हो तुम भी… कोई ऐसे भी देखता है भला..”


शिव उसके इस बात पर मर मिट ता है , शांति को अपनी तरफ खींचता है और अपनी टाँगें उसकी जांघों के उपर रखता है …उसका तननाया लंड नाइटी के उपर उपर ही शांति की चूत से टकराता है …


शांति सीहर उठ ती है …


” शांति ..क्या बात है , आज तो तुम एक नयी नवेली दुल्हन की तरेह शरमा रही हो..उफ्फ तुम्हारी यही बात तो मुझे मार डालती है मेरी रानी….. हमेशा नये रूप और रंग में अपने आप को ले आती हो..” और शिव उसे अपने से और भी चीपका लेता है शांति का चेहरा अपनी हथेलियों से थामता है ..उसकी आँखों में झँकता हुआ उसके होंठों पर अपने होंठ रख चूसने लगता है …


शशांक के साथ की मस्ती की खुमार अभी भी उसके अंग अंग में भरा था ..और अब शिव का प्यार ..शांति झूम उठ ती है और अपने आप शिव से और चीपक जाती है ..वो मचल उठ ती है और फिर वो भी उसके होंठ चूस्ति है …


शिव उसकी नाइटी के बटन खोल देता है ..सामने से शांति का बदन उघड़ जाता है ..उसकी सुडौल चूचियाँ उछल ते हुए शिव के सीने से टकराती हैं …


अब शिव से रहा नहीं जाता …वो खुद भी अपने पाजामे का नाडा खोल देता है ..पाजामा और ढीला टॉप उतार देता है …और नंगा हो जाता है …


उसके होंठ शांति के होंठों से चीपके हैं ..एक हाथ बारी बारी दोनों चूचियाँ मसल रहा है और दूसरा हाथ नीचे उसकी चूत को भींचता हुआ जाकड़ लेता है ..धीरे धीरे दबाता है शांति की फूली फूली ,मुलायम मखमली चूत को …


शांति कांप उठ ती है , सीहर जाती है …वो और भी ज़्यादा लिपट जाती है शिव से ….


शिव को अपनी हथेली में शांति की चूत के रस का महसूस होता है ….वो अपना लंड थामता है और शांति की चूत की फाँक में घीसता है…..शांति उछल पड़ती है …


“आआआआह …क्या कर रहे हो …..” शांति फूसफूसाती है


” अपनी पत्नी की चूत का मज़ा ले रहा हूँ मेरी जान ..उफफफ्फ़ आज कितनी फूली फूली और फैली भी है …”


शिव भी अपनी भर्राई आवाज़ में बोलता है ..


” पहले भी तो लिया है जानू तुम ने ….आज तुम्हारा भी तो लेने का अंदाज़ कितना निराला है ..” शांति बोलती है …


शांति के इस बात से शिव और भी मस्ती में आ जाता है ..उसका होंठों को चूसना , उसकी चूचियों को दबाना और भी ज़ोर पकड़ लेता है …लंड से चूत की घीसाई भी तेज़ हो जाती है ….


शांति कराह रही है..सिसकारियाँ ले रही है ..मस्ती में डूबी है…


शिव का लंड और भी अकड़ जाता है ..


वो शांति की नाइटी उतार देता है


शांति के नंगे बदन को चिपकाता है ..थोड़ी देर तक शांति के नंगे बदन को अपने नंगे बदन से महसूस करता है ….


शांति की पीठ अपनी तरफ कर लेता है ….खुद थोड़ा नीचे खिसकते हुए अपना लंड उसकी जांघों के बीच लगाता है …


दोनों एक दूसरे को अच्छी तरेह जानते थे…शांति समझ जाती है शिव को क्या चाहिए ..वो अपने घूटनों को अपने पेट की तरफ मोड़ लेती है ..उसकी चूत की फांके खूल जाती है …..फैल जाती है


शिव अपना लंड उसकी गुलाबी , गीली और चमकती हुई चूत के अंदर डाल देता है …पीछे से …


ऐसे में उसका लंड शांति की चूत की पूरी लंबाई और गहराई तक पहूंचता है ..शांति की चूत का कोना कोना उसके लंड को महसूस करता है ,


लंड जड़ तक चला जाता है ..उसके बॉल्स और जंघें शांति के भारी भारी , मुलायम और गुदाज चूतड़ो से टकराते हैं …उफफफफफ्फ़ ..क्या एहसास था यह …..


शिव को उसकी चूत और चूतड़ दोनों का मज़ा मिल रहा था


शिव लेटे लेटे ही उसकी टाँग उपर उठाए धक्के लगाए जा रहा था …शांति आँखें बंद किए बस मस्ती में डूबी जा रही थी


आहें भर रही थी ..सिसकारियाँ ले रही थी …चीत्कार रही थी ..


और फिर शिव दो चार जोरदार धक्कों के साथ अपनी पीचकारी छोड़ता है ….शांति की चूत और चूतड़ उसके वीर्य से नहला उठते हैं ….शांति भी उसके वीर्य की गर्मी और तेज़ धार अपनी चूत के अंदर सहेन नहीं कर पाती और काँपते हुए पानी छोड़ती जाती है ..


शिव , शांति की पीठ से चीपके , हाथ शांति के मुलायम पेट को जकड़े उसकी गर्दन पर अपना सर रखे हांफता हुआ पड़ा रहता है …


शांति पहले बेटे और अब पति को अपना सारा तन और मन लूटा देती है …एक चरम सूख और आनंद में डूब जाती है….


शिव-शांति के परिवार के सभी सदस्य अब तक पूरी तरेह जाग उठे थे…तन , मन और दिल , हर तरेह से …जब वे नाश्ते के टेबल पर आते हैं ..उनके चेहरे से सॉफ झलक रहा था…


चेहरा दिल का आईना होता है….यह बात अच्छी तरेह सभी के चेहरे पे लीखा था ..


शिवानी चहेकते हुए अपने मोम और पापा से गले मिलती है ..जब कि हमेशा उसके चेहरे पे गुस्से और झुंझलाहट की झलक रहती थी ..खास कर सुबेह …


शांति उसके गले लगती है ..गाल चूमती है और उसके दमदामाते चेहरे को देख बोलती है …


“ह्म्‍म्म्मम…अरे यह मैं आज क्या देख रही हूँ..शिवानी सुबेह सुबेह इतनी चहक रही है..क्या बात है!.”


” हां मोम कल दीवाली कितनी अच्छी रही ..हम सब साथ साथ थे ….शायद यह पहला मौका था जब हम सब साथ थे..है ना मोम..??” शिवानी ने बड़ी होशियारी से अपनी खुशी के असली राज़ को छुपाते हुए कहा …और शशांक की तरेफ देख मुस्कुराने लगी ..


शशांक की आँखों में उसके जवाब के लिए वाह वाही दीखती है और वो बोल उठ ता है


” वाह क्या बात कही तू ने शिवानी …ह्म्‍म्म्म मैं देख रहा हूँ तेरा दिमाग़ भी काफ़ी खुल गया है…”


” क्या मतलब ‘तेरा दिमाग़ भी..?’ ..” क्या मेरा दिमाग़ बंद पड़ा था ….जाओ मैं नहीं बोलती तुम से ..” और शिवानी बनावटी गुस्से से चूप हो कर बैठ जाती है…


” अरे नहीं बाबा …मेरा यह मतलब थोड़ी ना था ..मेली प्याली प्याली बहेना ….” शशांक मस्का लगाता है


शिवानी उसे घूरती है …” फिर क्या मतलब था ..? “


” अरे मैं तो दीवाली की फुलझाड़ी छोड़ रहा था यार ..अभी भी तेरे साथ फूल्झड़ी छोड़ने की बात भूल नहीं पा रहा हूँ ना …तू तो कुछ समझती ही नहीं यार…” शशांक का मस्का इस बार सही निशाने पे था ….


फूल्झड़ी से उसका क्या मतलब था शिवानी को पूरी तौर पे समझ आ गया ..उसके चेहरे पर फिर से लंबी और चौड़ी मुस्कान आ गयी …और वो खिलखिला उठी ….


” ओह यस भैया ..यू आर ग्रेट ….कितनी देर तक हम पताखे और फूल्झड़िया चला रहे थे …उफफफ्फ़ मज़ा आ गया ….”


शांति शशांक की इस सूझ बूझ की कायल हो गयी थी .वो हमेशा शिवानी के होंठों पे अपनी चिकनी चूपड़ी बातों से हँसी ले आता था ..और आज भी यही हुआ …


उस ने शशांक को गले लगाया और उसके भी गाल चूमे …


शशांक अपनी मोम से गले मिलता है , अभी भी वो लक्ष्मण रेखा बरकरार है ..पर उसकी आँखों में इस पतली सी रेखा बरकरार रखने का कोई दर्द , कोई पीड़ा नहीं , और ना उसके शरीर में किसी भी तरेह का कोई तनाव या कोशिश की झलक है ..यह बस अपने आप हो जाता है

उसकी आँखों में अपनी मोम के लिए सम्मान , आभार और प्यार झलकता है ….


शांति को उसकी बातें समझ में आ जाती है ..वो कितनी खुश हो जाती है अपने बेटे के व्यवहार से .


शशांक ने शिवानी और शांति दोनों को कितनी सहजता से कल के हुए रिश्तों मे इतने बड़े बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया जता देता है ..दोनों को उनकी ही भाषा में ..अलग अलग तरीके से….


किसी के चेहरे पे कोई तनाव नहीं ..कोई भी अपराध के भाव नहीं ….शशांक ने दोनों को कितना अश्वश्त कर दिया था अपने व्यवहार से ..किसी को किसी पर कोई शक़ यह शंका नहीं है ….सभी अपने में खुश हैं …


पर शिवानी कहाँ मान ने वाली थी….उसके दोनों हाथ भले ही टेबल पर थे ..पर टाँगों ने अपनी हरकत ब-दस्तूर चालू रक्खी थी …उसने अपनी मुलायम मुलायम पावं के अंगूठे को अपने बगल बैठे शशांक की पिंदलियों पर उपर नीचे करती जा रही थी …


शशांक इस हरकत से पहले तो झुंझला जाता है…उसकी तरफ आँखें तरेरता हुआ देखता है ..पर शिवानी उसे अनदेखा करते हुए अपने काम में लगी रहती है …और नाश्ता भी करती जा रही थी ..


शशांक के पास इसके अलावा और कोई चारा नहीं था के चूप चाप आनंद लेता रहे …और उस ने ऐसा ही किया …नाश्ते के साथ शिवानी की हरकतों का भी मज़ा ले रहा था …


नाश्ता ख़त्म करते हुए सब से पहले शिव उठ ता है…अपनी रिस्ट . पर नज़र डालता है …


” ओह्ह्ह्ह..11 बाज गये …अच्छा बच्चो तुम लोग आराम से छुट्टियाँ मनाओ…और शांति तुम भी आराम कर लो ,दीवाली के बिज़ी दिनों में तुम भी काफ़ी थक गयी होगी ,,मैं ज़रा दूकान से हो आता हूँ …स्टॉक वग़ैरह चेक कर लूँ ..” बोलता हुआ अपने कमरे की ओर चल पड़ता है …


” ओके शिव …पर जल्दी आ जाना , आज डिन्नर हम लोग बाहर ही करेंगे …”


डिन्नर बाहर करने की बात सुनते ही शिवानी उछल पड़ती है और मोम को गले लगा लेती है


” ओह मोम थ्ट्स ग्रेट ….बिल्कुल सही आइडिया है आप का ….बाहर खाना खाए भी कितने दिन हो गये .है ना भाय्या .? ” उस ने अपने प्यारे भैया की भी हामी चाहिए थी .उसके बिना उसकी बात का वज़न नहीं होता …


” अरे हां शिवानी ..यू आर आब्सोल्यूट्ली राइट ….” भैया ने भी अपनी हामी की मुहर लगा दी …


अब शिवानी मोम को छोड़ भैया से लिपट जाती है …” ओह भैया यू आर सो स्वीट ..”


और उसके गालों को चूम लेती है ..


शशांक एक बड़े ही नाटकिया अंदाज़ से मुँह बनाता हुआ अपने गाल पोंछ लेता है ..मानो शिवानी के होंठों ने उसके गाल मैले कर दिए हों….


शांति की हँसी छूट जाती है शशांक के इस अंदाज़ पर शिवानी का चेहरा गुस्से से लाल हो जाता है


शशांक देखता है मामला गड़बड़ है


” अरे शिवानी …क्या यार तू बात बात पे गुस्सा कर लेती है ..मैं तो मज़ाक कर रहा था .है ना मोम ??…ले बाबा अब जितना चाहे चूम ले मेरे गाल मैं नहीं पोंच्छूंगा …”


और अपने कान पकड़ता हुआ गाल उसकी ओर बढ़ा देता है …शिवानी मुँह फेर लेती है


शशांक अपने कान पकड़े पकड़े ही शिवानी के फिरे मुँह की ओर घूमता है और अपनी आँखों से इशारा करता है मानो उसे कह रहा हो ” मान भी जा यार..” और अपना सर झूकए खड़ा रहता है अपनी प्यारी बहेन के सामने ..


शिवानी भी भैया का यह रूप देख अपनी हँसी रोक नहीं पाती और उसे फिर से गले लगती है और उसके गाल चूमती है ” फिर ऐसा मत करना भैया ….”


शशांक फिर से अपने गालों को अपनी हथेली से पोंछता है ..पर इस बार अपनी हथेली चूम लेता है ….और बोलता है ” ह्म्‍म्म्मम..शिवानी ने लगता है दीवाली की मीठाइयाँ कुछ ज़्यादा ही खाई हैं …”


इस बात पर फिर से सब हंस पड़ते हैं …..


और इसी तरेह हँसी , खुशी , प्यार और तिठोली में शिव-शांति के परिवार के दिन गुज़रते जाते हैं …


शशांक और शिवानी के रिश्तों में गर्मी , जोश और जवानी के उमंगों की ल़हेर ज़ोर पकड़ती जाती है …..


शांति और शशांक के रिश्ते भी और मजबूत होते जाते हैं और नयी उँचाइयों की ओर बढ़ते जाते हैं. ….


इन मधुर रिश्तों के नये आयामों में शिवानी, शशांक और शांति एक दूसरे में खो जाते हैं ..पर रिश्तों की बंदिशें कायम रखते हैं …पूरी तरेह …


शिवानी को शशांक और शांति के रिश्तों का शूरू से ही पता है..पर शांति को यह नहीं पता के शिवानी को पता है….. शांति को शशांक और शिवानी के रिश्तों का पता नहीं …और शिवानी को अपने व्यवहार से शांति को यह जताना है उसे शशांक और शांति के बारे कुछ मालूम नहीं ..कितनी बारीकी है इन रिश्तों के समीकरणों में …इन बारीकियों को समझते हुए रिश्तों को निभाने में एक अलग ही मज़ा ..आनंद और रोमांच से भरी मस्ती थी ….अब तक इस खेल में तीनों माहीर हो चूके थे ..


और शिव बस अपने दूकान और शांति जैसी बीबी में ही खोया था ….


जहाँ शिवानी शशांक के प्यार से और मेच्यूर , समझदार होती जाती है , अपनी अल्हाड़पन को लाँघते हुए जवानी की ओर बढ़ती जाती है .वहीं शांति अपनी ढलती जवानी की दहलीज़ को लाँघते हुए वक़्त को फिर से वापस आता हुआ महसूस करती है…. शशांक के साथ का वक़्त उसे फिर से जवानी , अल्हाड़पन और अपने प्रेमिका होने का एहसास दिलाता है ..इस कल्पना मात्र से वो झूम उठ ती है …..उसके लिए वक़्त फिर से वापस आता है …और इस वक़्त को वो पूरी तरेह अपने में समेट लेती है …इस वक़्त में खो जाती है ..यह वक़्त सिर्फ़ उसका और शशांक का है ….शांति और शशांक का …..


शशांक इन दोनों रिश्तों के बीच बड़ी अच्छी तरेह ताल मेल बना कर रखता है ….उन दोनों को उनके औरत होने पे फक्र होने का एहसास दिलाता है …और खुद भी समय के साथ और भी परिपक्व होता जाता है ..


शशांक का ग्रॅजुयेशन ख़त्म हो चूका है..और अब उसी कॉलेज में रीटेल मार्केटिंग में एमबीए कर रहा है ..उस ने एमबीए के बाद अपनी मोम और डॅड के साथ ही काम करने की सोच रखी है …


शिवानी ग्रॅजुयेशन के फाइनल एअर में है….दोनों अभी भी साथ ही कॉलेज जाते हैं …बाइक पर ..पर शिवानी के हाथों की हरकत अब कुछ कम है…नहीं के बराबर ..और . क्यूँ ना हो.?? :


शिव कुछ दिनों के लिए शहेर से बाहर हैं दूकान के काम से ..शाम का वक़्त है….शांति आज कल दूकान से जल्दी वापस आ जाती है ….सेल का काम संभालने को एक मॅनेजर रखा है ..वोही संभालता है शोरूम …


शशांक और शांति को शिव के रहते इस बार मिलने का मौका नहीं मिला था कुछ दिनों से ..दोनों तड़प रहे थे …मानों कब के भूखे हों….


शिवानी उनकी तड़प समझती है …और शाम की चाइ साथ पीते ही उठ जाती है और बोलती है ..


” देखो भाई..आज कॉलेज में मैं काफ़ी थक गयी हूँ..मैं तो चली अपने रूम में सोने ..कोई मुझे जगाए नहीं …” और शशांक की तरफ देख मोम से आँखें बचाते हुए आँख मारती है ..और इठलाती हुई अपने कमरे की ओर चल पड़ती है..


थोड़ी देर शशांक और शांति एक दूसरे की ओर देखते रहते हैं ..उनकी आँखों में एक दूसरे के लिए तड़प और प्यास सॉफ झलक रहे हैं ..


” शशांक मैं चलती हूँ… चलो खाना ही बना लूँ ..” और मुस्कुराते हुए उठ जाती है …


शशांक भी मुस्कुराता है और बोलता है


” पर मोम तुम ने इतनी अच्छी साड़ी पहेन रखी है ..दूकान से आने के बाद चेंज भी नहीं किया ..किचन में गंदी हो जाएगी ना ..नाइटी पहेन लो ना ..वो सामने ख़ूला वाला..???”


” ह्म्‍म्म्म..मेरे बेटे को मेरे कपड़ों का बड़ा ख़याल है ……ठीक है बाबा आती हूँ चेंज कर के ..”


वो अपने रूम की ओर जाती है पर जाते जाते पीछे मूड कर शशांक को देख एक बड़ी सेक्सी मुस्कान लाती है अपने होंठों पर ..


शशांक भी मुस्कुराता है और अपने कमरे की ओर जाता है चेंज करने को..


शांति फ्रेश हो कर नाइटी पहेन किचन में है ..खाना बना रही है


शशांक भी आ जाता है…


शांति नाइटी में बहोत ही सेक्सी लगती है ..उसके अंदर का उभार पूरी तरेह झलक रहा है …उसने ब्रा और पैंटी भी नहीं पहनी थी …


शशांक उसे पीछे से अपनी बाहों में लेता है …उसने भी बहोत ढीला टॉप और बॉक्सर पहेन रखा था


मोम के बदन की गर्मी और कोमलता के स्पर्श से उसका लंड तन्ना जाता है …सामने से उसके हाथ मोम की चूचियाँ सहला रहे है ..नाइटी के अंदर से ..मोम चूप चाप उसकी हरकतों का मज़ा ले रही है और साथ में खाना भी बनाती जाती है ..


आज भी उसका लंड शांति को अपने गुदाज और मुलायम चूतड़ो के अंदर चूभता हुआ महसूस होता है …पर आज वो चौंक्ति नहीं है उस शाम की तरेह ..आज और भी अपनी टाँगें फैला देती है..सब कुछ बदल गया है समय के साथ …..


शशांक अपना चेहरा शांति की गर्दन से लगाए है ..शांति की गालों से अपने गाल चिपकाता है और बड़े प्यार से घीसता है ..


अपने बॉक्सर के सामने के बटन्स खोल देता है … लंड उछलता हुआ बाहर आता है . शांति की चूतड़ो की दरार में हल्के हल्के उपर नीचे करता है ..नाइटी के साथ अंदर धंसा है ..


उसे मालूम है शांति को किचन में चुदवाने में काफ़ी रोमांचक अनुभव होता है …


शांति बड़ी मस्ती में है ..खाना बनाए जा रही है..और मज़े भी ले रही है …


शशांक उसकी नाइटी एक हाथ से उपर कर देता है ..शांति की गोरी गोरी . चूतड़ नंगी हो जाती है ..उसका लंड और भी कड़क हो जाता है ..चूत से पानी टपक रहा है …शांति थोड़ा आगे की ओर झूक जाती है , उसकी गुलाबी चूत बाहर आती है …बिल्कुल गीली और गुलाबी


शशांक एक छोटी किचन वाली स्टूल नीचे लगा कर बैठ जाता है और मोम की जांघों को अपने हाथों से अलग करता हुआ अपना मुँह चूत मे लगता है..शांति कांप उठ ती है …टाँगें और भी फैला देती है ..


शशांक अपने होंठों से उसकी चूत के होंठों को जाकड़ लेता है और बूरी तरेह चूस्ता है ..शांति का पूरा रस उसके मुँह के अंदर जाता है ….शशांक इस अमृत जैसे रस को पीता जाता है ..पीता जाता है ..


शांति मस्ती की चरम पर है …


अब तक उसका खाना बनाने का काम काफ़ी कुछ हो चूका था …बाकी काम उस से अब और किया नहीं जाता ..वो गॅस बूझा देती है …


और आँखें बंद किए टाँगे फैलाए कराहती है :” हां शशांक चूस बेटा और चूस …”


शशांक होंठ अलग करता है …


अपनी उंगलियों से चूत की फाँक फैलाता है …उफ्फ क्या मस्त चूत है मोम की …गीली ..चमकीली , मुलायम ..अपनी जीभ फिराता है …चाट ता है पूरी लंबाई तक …


शांति तड़प उठ ती है ..पानी की नदी बहती है उसकी चूत से


उसकी चूत कांप उठ ती है , थरथरा उठ ती है


और शांति बोल उठ ती है


” शशांक..बेटा अब डाल दो ना अपनी मोम के अंदर , और कितना तड़पाओगे ..? “


शशांक मोम का आग्याकारी बेटा है ना


” हां मोम लो ना ..मैं तो कब से तैय्यार हूँ ..”


वो उठ ता है स्टूल से , मोम सीधी हो जाती है , दोनों अब आमने सामने हैं


शशांक अपनी बॉक्सर उतार देता है ..मोम की नाइटी सामने खोल देता है और उसे कमर से थामता हुआ मोम को किचन के प्लॅटफॉर्म पर बिठा देता है


मोम टाँगें फैला देती है


शशांक टाँगों के बीच अपना तननाया लंड थामे आ जाता है


मोम को कमर से जकड़ते हुए उसकी फूली , फूली मुलायम चूत के अंदर लंड डालता है


” आआआः ..हाआँ ..हाआँ शशांक बस करते रहो …” और शांति भी शशांक को उसके कमर से जाकड़ लेती है अपनी तरफ खींचती है ….अपना चेहरा उपर कर लेती है ..उसका चेहरा पूरी तरेह शशांक के सामने है ..शशांक समझता है मोम क्या चाहती है


वो अपना चेहरा मोम की तरफ झुकाता है और मोम के होंठों पर अपने होंठ लगाए चूस्ता है..बूरी तरेह ..उसके मुँह के अंदर का रस अपने मुँह में लेता है


लंड अंदर बाहर हो रहा है ..ठप ठप , फतच फतच की आवाज़ें आ रही हैं


शशांक की जीभ मोम के मुँह में है ..वहाँ भी चाट ता है ..


मोम उस से चीपकि है , लंड के धक्कों के साथ अपनी चूतड़ भी उछालती है


उफफफफ्फ़ दोनो एक दूसरे को महसूस कर रहे हैं पूरी तरेह , अंदर से भी ..बाहर से भी …


फिर मोम , शशांक से और ही चीपक जाती है ….बिल्कुल उसके अंदर समान जाने की कोशिश में जुटी है


शांति के चूतड़ झटके खाते हैं ..उछलते हैं और शशांक को जाकड़ कर उसके लंड को अंदर लिए लिए झड़ती जाती है ..झड़ती जाती है शांति


शशांक का लंड भी मोम के रस से नहला उठ ता है …और वो भी झाड़ता जाता है , चूत के अंदर ही अंदर झटके खाता हुआ..


दोनों किचन के प्लॅटफॉर्म पर एक दूसरे से चीपके हैं ..


शांति की टाँगें शशांक के चूतड़ो को जकड़े है , शशांक की बाहें शांति की कमर से जकड़ी हैं…दोनों हाँफ रहे हैं ..एक दूसरे को चूम रहे हैं चाट रहे हैं …..


फिर सब कुछ शांत हो जाता है


सिर्फ़ दोनों की साँसें और दिल की धड़कनें आपस में बातें कर रही हैं …


जाने कब तक …


काफ़ी देर तक शांति और शशांक एक दूसरे में खोए रहते हैं ..एक दूसरे से लिपटे ..एक दूसरे की साँसों ,दिल की धड़कनों और जिस्मों को आँखें बंद किए महसूस करते रहते हैं…


तभी शिवानी के कमरे से कुछ आहट सुनाई पड़ती है , शांति चौंक पड़ती है और शशांक को अपने से बड़े प्यार से अलग करती है …


” उम्म्म..मों क्या ..तुम से अलग होने का जी ही नहीं करता …” शशांक बोलता है ..


” बेटा , जी तो मेरा भी नहीं करता ..पर क्या करें …” और वो खड़ी हो जाती है..अपनी नाइटी ठीक करती है ….शशांक से अलग होते हुए कहती है …”लगता है शिवानी उठ गयी है…उसे जोरो की भूख लगी होगी …तुम भी हाथ मुँह धो कर आ जाओ ..मैं भी बाथरूम से आती हूँ , फिर हम सब साथ डिन्नर लेंगे ..” शांति , शशांक के गालों को चूमते हुए बाहर निकल जाती है ..


शशांक भी अपने रूम में चला जाता है फ्रेश होने..


जैसे बाहर निकलता है बाथ रूम से , उसके कमरे में शिवानी आ धमकती है ..


” सो हाउ वाज़ दा शो भाय्या..?” एक शैतानी से भरी मुस्कान होती है उसके चेहरे पर..


” जस्ट ग्रेट शिवानी ..आंड थॅंक्स फॉर एवेरितिंग , तुम्हारे बिना यह सब पासिबल नहीं था …”


” थॅंक्स क्यूँ भैया .प्यार में हमेशा लेते नहीं कभी कुछ देना भी चाहिए ..है ना ? अपने लिए तुम्हारा प्यार मोम से शेअर करती हूँ …किसी और से थोड़ी ना ..आख़िर वो मेरी भी मोम हैं ना .आइ टू लव हर सो मच ..हम सब के लिए कितना करती हैं ..हम उन्हें इतना भी नहीं दे सकते .? “


” वाह वाह …क्या बात है ..आज तो शिवानी बड़ी प्यारी प्यारी बातें कर रही है प्यार और मोहब्बत की ….अरे कहाँ से सीखा यह सब …?” शशांक की आँखों में शिवानी के लिए प्यार और प्रशन्शा झलकते हैं ..


” तुम्हीं से तो सीखा है भैया …”


” मुझ से..??? ..ह्म्‍म्म ..वो कैसे ….??”


शिवानी कुछ बोलती उसके पहले ही शांति की आवाज़ सुनाई पड़ती है दोनों को


” अरे बाबा कहाँ हो तुम दोनों ..खाना कब से लगा है ..ठंडा हो जाएगा …जल्दी आ जाओ….”


शिवानी की बात अधूरी रह जाती है …


” अब चलो भैया पहले खाना खा लें फिर बातें करेंगे , देर हुई तो मोम चिल्ला चिल्ला के सारा घर सर पे उठा लेंगी…”


शशांक इस बात पर जोरदार ठहाका लगाता है और फिर दोनों हंसते हुए बाहर निकलते हैं डाइनिंग टेबल की ओर …


खाना खाते वक़्त कुछ खास बात नहीं होती .सब से पहले मोम उठ ती हैं और रोज की तरेह शिवानी को बर्तन समेटने की हिदायत दे अपने कमरे में चली जाती हैं …उनको सोने की जल्दी थी ..


” भैया तुम चलो मैं बस आई …”शिवानी बर्तन समेट ते हुए बोलती है ..


” जल्दी आना शिवानी..” कहता हुआ शशांक अपने कमरे की ओर चल देता है..


अपने कमरे में आ कर शशांक लेट जाता है..और शिवानी के बारे सोचता है ” आज कल कितना चेंज आ गया है इस लड़की में ..कैसी बड़ी बड़ी बातें करती है …कल तक तो सिर्फ़ हाथ चलाती थी आज दिल और दिमाग़ भी चला रही है…” और उसके होंठों पे मुस्कुराहट आ जाती है…


तभी शिवानी भी आ जाती है और शशांक को मुस्कुराता देख बोलती है


” ह्म्‍म्म्मम..यह अकेले अकेले किस बात पर इतनी बड़ी मुस्कान है भैया के चेहरे पर..? “


शशांक की नज़र पड़ती है शिवानी पर …उस ने बहोत ही ढीला टॉप और लूज़ और पतला सा पाजामा पहेन रखा था


टॉप के अंदर उसकी चूचियाँ उछल रही थी उसकी ज़रा सी भी हरकत से …इतने दिनों में उसकी चूचियों की गोलाई काफ़ी बढ़ गई थी …पतले से पाजामे के अंदर उसकी लंबी सुडौल टाँगें और मांसल जंघें बाहर झलक रही थी ..शशांक की नज़र थोड़ी देर इन्ही चीज़ों के मुयायने में अटक जाती है…


” अरे भैया क्या देख रहे हो…. सारी रात तो पड़ी है ..देख लेना ना जी भर …चलो ना पहले अपनी अधूरी बात हम पूरी कर लें ..??” कहते हुए शिवानी उसके बगल बैठ जाती है , शशांक उसके और करीब आ जाता है और अपनी टाँग उसकी कूल्हे और जाँघ से चिपकाता हुआ लेटा रहता है ..


” ह्म्‍म्म्म..तो बात शूरू करें ..? पर तू यह बता के तेरी किस बात का मैं जवाब पहले दूं ..आते ही सवालों की बौछार कर दी तुम ने ..” शशांक पूछता है..


” तुम भी ना भैया ..बस बात टालो मत …तुम बस चूप रहो ..मैं बोलती हूँ …मैं बोल रही थी ना के मोम से तुम्हारा प्यार शेअर करना मैने तुम्ही से सीखा है …मैं बताती हूँ कैसे ….बस चूप चाप कान खोलो और सुनो …और यह अपने हाथों की हरकत बंद रखो..?” और शशांक का हाथ जो उसकी मुलायम और गुदाज़ जांघों को सहला रहे थे अपने हाथ में लेते हुए हटा देती है बड़े प्यार से…


” ओके बाबा ओके…चलो सूनाओ अपनी राम कहानी …” शशांक उठ बैठ ता है और पीठ सिरहाने से टीकाए उसकी ओर ध्यान से देखता है ..


” देखो तुम किस तरेह हम दोनों के बीच अपना भर पूर प्यार लूटा रहे हो..? कम से कम मुझे तो ज़रा भी एहसास नहीं होता के तुम मुझे कम और मोम को ज़्यादा प्यार करते हो….तुम में हम दोनों के लिए बे-इंतहा प्यार है भैया …बेशुमार …इतना बेशुमार प्यार जो तुम ने मुझे दिया ..मैं क्या मोम से शेअर नहीं कर सकती …इस से मेरे लिए तुम्हारा प्यार तो कभी कम नहीं होगा ना..?? “


शशांक फिर से शिवानी की बातों से हैरान रह जाता है … इतनी बड़ी बात और इतना बड़ा दिल …जब की ज़्यादातर औरतें इतनी दरिया दिल नहीं होतीं … किसी से भी अपना प्यार बाँट नहीं सकती …


” ओह माइ गॉड ..शिवानी आइ आम इंप्रेस्ड ..पर शिवानी इतना भरोसा तुम्हें मुझ पे है ..??”


” हां भैया मुझे अपने से ज़्यादा आप पर भरोसा है ..मैं अगर कभी बहेक भी गयी तो मुझे पूरा यकीन है आप मुझे संभाल लोगे …” शिवानी एक तक शशांक की ओर देखते हुए बोले जा रही है..


” पर क्यूँ शिवानी..??”


” भैया ..आप के साथ इतने दिनों से कॉलेज जाती हूँ , वापस घर आती हूँ और फिर आप को कॉलेज में भी देखती हूँ..लड़कियाँ आप पर मरती हैं ..आप की एक नज़र को तरसती हैं ..पर आप ने आज तक किसी की ओर आँख उठा कर नहीं देखा ….आप चाहते तो एक से एक मुझ से भी ज़्यादा स्मार्ट और सुंदर लड़कियाँ आप की गर्ल फ्रेंड्स होतीं ..पर इन सब को दर किनार कर दिया आप ने ..और चुना सिर्फ़ मुझे और मोम को …क्या मैं समझती नहीं ….अब अगर मैं आप पर विश्वास नहीं करूँ तो फिर इस दुनिया में किसी पर भी विश्वास करना ना-मुमकिन है….”


शशांक अवाक़ रह जाता है अपनी कल तक गुड़िया जैसी बहेन की बातें सुन …उसकी आँखें भर आती हैं ..


पर उसकी इन बातों ने एक बड़ा सा सवाल खड़ा कर दिया ..जिसका जवाब किसी के पास नहीं था ..ना उसके पास ना शिवानी के पास ..आखीर इस बे-इंतहा प्यार का अंत क्या होगा ..?? आखीर कब तक हम इसे निभाएँगे …कब तक ..???


शशांक इस सवाल से परेशान हो जाता है ….और अपने इस प्यार की बे -बसी पर आँसू बहाता हुआ शिवानी की तरेफ एक टक देखता रहता है….


शिवानी उसकी आँखों में आँसू देख चौंक जाती है….


” अर्ररीईईईई? यह क्या भैया ..क्या मैने कुछ ग़लत कहा ..??आप रो क्यूँ रहे हो..??”


शशांक अपने आँसू पोंछता है और बोलता है


” नहीं शिवानी तुम ने कुछ भी ग़लत नहीं कहा ..बस इसलिए तो मैं रो रहा हूँ बहेना …”


” मेरी तो कुछ समझ में नहीं आता भैया ..मैं तो समझी थी आप खुश हो जाओगे ..पर यहाँ तो बात उल्टी ही हो गयी ..”


” शिवानी ….तू जान ना चाह ती है ना मेरी आँखों में आँसू क्यूँ हैं..?? “


” बिल्कुल भैया …” भैया की आँखों में आँसू देख उसकी आवाज़ भी रुआंसी है…


” तो सून ..क्या तुम ने कभी सोचा है मेरे और तुम्हारे इस बे-इंतहा प्यार का नतीज़ा क्या होगा ..?? मेरे और मोम के बीच तो कोई खास प्राब्लम नहीं …किसी की भी अपनी जिंदगी को कोई फ़र्क नहीं पड़ता .पर तुम क्या जिंदगी भर मुझे ही प्यार करती रहोगी…तुम्हारी अपनी जिंदगी भी है ना शिवानी ..क्या तुम शादी नहीं करोगी ..? कब तक हम दोनों यह आँख मिचौली का खेल खेलते रहेंगे शिवानी ..कब तक ..बोलो ना बहेना कब तक..?????”


शिवानी अपने भैया की बात से ज़रा भी परेशान नहीं होती …चेहरे पे शिकन तक नहीं आती …


शशांक फिर से हैरान हो जाता है अपनी बहेन के रवैय्ये से ..


” क्यूँ तुम्हारे पास है इसका जवाब ?शिवानी बोलो ना क्या जवाब है तुम्हारे पास ..??”शशांक शिवानी के कंधों को झकझोरता हुआ पूछता है …


शिवानी शशांक के हाथों को अपने कंधों से अलग करती है …उसकी तरफ देखती है थोड़ी देर …


और फिर जब उसे जवाब देती है … शशांक के पास उसके जवाब का कोई भी जवाब नहीं …..


उसे इतना तो समझ आ गया शिवानी के जवाब से ….. शिवानी अब गुड़िया नहीं …उसने समझ लिया है प्यार एक आग का दरिया है गुड़िया का खेल नहीं…!!!


शशांक के सवाल से शिवानी ज़रा भी विचलित नहीं हुई थी …बिल्कुल वैसे भाव थे उसके चेहरे पर जैसे उसे इस सवाल का इंतेज़ार था ….और जवाब भी उसके पास तैय्यार था …


उस ने कहा ” हां भैया शादी ज़रूर करूँगी … इस शादी से हमारा प्यार और भी मजबूत हो जाएगा ..हमारी दूरी भी मिट जाएगी… हां बिल्कुल मिट जाएगी..” शिवानी शशांक को एक टक देखे जा रही थी ..


शशांक उसकी शादी करने की बात से बहोत खुश हो जाता है……पर दूरी मिटने वाली बात से थोड़ा चौंक जाता है …


शिवानी भाँप लेती है शशांक का चौंकना …और फिर बोलती है ..


“भैया इसमें चौंकने वाली क्या बात है , क्या तुम चाहते हो मैं हमेशा कुँवारी ही रहूं ..? “


“”अरे नहीं शिवानी..तू जानती है अच्छी तरेह मैं ऐसा कभी नहीं चाहता …मैं जानता हूँ तुम भी मोम की तरेह अपने पति और मेरे बीच अच्छी तरेह ताल मेल बना सकती हो ….प्यार बाँट सकती हो….पर यह तुम्हारी दूरी कम होनेवाली बात से ज़रा चौंक गया था ..”


” हां भैया दूरी तो कम होगी ही ना …क्योंकि मैने सोच लिया है शादी मैं तुम से ही करूँगी …सिर्फ़ तुम से ….” शिवानी का चेहरा बिल्कुल शांत था …उसकी आवाज़ में एक दृढ़ता थी …एक निश्चय था ..जो काफ़ी सोच विचार के बाद ही आता है….


शशांक पर मानों बिजली गिर गयी थी … पहाड़ टूट पड़ा था …


” किययाया..?? क्या कहा तुम ने ..ज़रा फिर से बोल तो..? मैने ठीक सुना ना ..?? ” उसकी आवाज़ में अधीरता , घबडाहट और आश्चर्य के भाव कूट कूट कर भरे थे …आवाज़ कांप रही थी ..


: ” हां भैया तुम ने बिल्कुल ठीक सूना ..मैं शादी तुम से ही करूँगी ..वरना मैं जिंदगी भर कुँवार रहूंगी …. ” शिवानी का चेहरा बिल्कुल वैसा ही था कोई बदलाव नहीं ..भाव शून्य ..


” मुझ से शादी करेगी तू..अरे कुछ समझ भी आता है तुझे क्या बक रही है… “


इस बार शिवानी चूप है ..कुछ नहीं बोलती बस शशांक की ओर देखती रहती है ..उसकी आँखों में अपने लिए असीम प्यार , तड़प और चाहत की झलक दीखाई देती है शशांक को …


शशांक समझ जाता है इसे इतनी आसानी से समझाना मुश्किल है …


वो उसके करीब जाता है उसका चेहरा अपने हाथ में बड़े प्यार से थाम लेता है …उसके बाल सहलाता है …और बोलता है


” देख शिवानी मैं समझता हूँ तेरे दिल का हाल..पर बहेना यह कैसे संभव है ….अगर यह हो सकता था तो क्या मैं नहीं चाहता तुझ से शादी करना ..? शादी की बात छुपाई नहीं जा सकती ना शिवानी ..सारी दुनिया को मालूम हो जाएगा …आपस में सेक्स की बात छुप सकती है ..पर शादी की बात? ..तुम ही बताओ ना ?” शशांक बड़ी नर्मी और प्यार से समझाता है शिवानी को…


” ह्म्‍म्म्म..तो इसका मतलब हुआ भैया, कि अगर शादी की बात भी अगर किसी तरह छुपाई जा सके तो तुम मुझ से शादी करोगे ..?? ” शिवानी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट आती है ..उसे एक बड़ी धीमी और पतली सी रोशनी की किरण झलकती है..


पर शशांक एक बड़ी द्विविधा में फँस जाता है…वो कुछ नहीं बोल पाता , चूप रहता हुआ शिवानी की इन बातों का उसके पास कोई जवाब नहीं..


” बोलो ना भैया ..प्लीज़ बोलो ना ..तुम चूप क्यूँ हो गये ……? ” शिवानी उसकी ओर बड़ी हसरत लगाए देखती है …


” तू समझती क्यूँ नहीं बहेना ..? आख़िर हम सगे भाई बहेन हैं ना …” शशांक बोलता है..पर उसकी आवाज़ खोखली है ..उसमें कोई भी दृढ़ता नहीं ..कोई वज़न नहीं …


” भैया जब तुम सग़ी बहेन को चोद सकते हो..उसकी चूचियों से खेल सकते हो..उसकी चूत में अपना लंड डाल सकते हो..फिर शादी क्यूँ नहीं कर सकते..? क्या तुम्हारा प्यार सिर्फ़ वासना है …मेरे शरीर से खेलने का सिर्फ़ एक बहाना है..??”


” शिवानी तू क्या बक रही है यार..तेरा दिमाग़ तो सही है ना…” शशांक झल्लाता हुआ बोलता है .


” भैया ..मेरा दिमाग़ आज ही तो सही है ..वरना आज तक तो मैं पागल की तरेह तुम्हें कुछ और ही समझ बैठी थी ..” उसकी आँखों में अब वो प्यार और तड़प नहीं वरन एक बहोत ही निराशा की झलक दीखती है शशांक को…जैसे अपनी जिंदगी से हताश हो गयी हो…


शशांक के सवाल से शिवानी ज़रा भी विचलित नहीं हुई थी …बिल्कुल वैसे भाव थे उसके चेहरे पर जैसे उसे इस सवाल का इंतेज़ार था ….और जवाब भी उसके पास तैय्यार था …


उस ने कहा ” हां भैया शादी ज़रूर करूँगी … इस शादी से हमारा प्यार और भी मजबूत हो जाएगा ..हमारी दूरी भी मिट जाएगी… हां बिल्कुल मिट जाएगी..” शिवानी शशांक को एक टक देखे जा रही थी ..


शशांक उसकी शादी करने की बात से बहोत खुश हो जाता है……पर दूरी मिटने वाली बात से थोड़ा चौंक जाता है …


शिवानी भाँप लेती है शशांक का चौंकना …और फिर बोलती है ..


“भैया इसमें चौंकने वाली क्या बात है , क्या तुम चाहते हो मैं हमेशा कुँवारी ही रहूं ..? “


“”अरे नहीं शिवानी..तू जानती है अच्छी तरेह मैं ऐसा कभी नहीं चाहता …मैं जानता हूँ तुम भी मोम की तरेह अपने पति और मेरे बीच अच्छी तरेह ताल मेल बना सकती हो ….प्यार बाँट सकती हो….पर यह तुम्हारी दूरी कम होनेवाली बात से ज़रा चौंक गया था ..”


” हां भैया दूरी तो कम होगी ही ना …क्योंकि मैने सोच लिया है शादी मैं तुम से ही करूँगी …सिर्फ़ तुम से ….” शिवानी का चेहरा बिल्कुल शांत था …उसकी आवाज़ में एक दृढ़ता थी …एक निश्चय था ..जो काफ़ी सोच विचार के बाद ही आता है….


शशांक पर मानों बिजली गिर गयी थी … पहाड़ टूट पड़ा था …


” किययाया..?? क्या कहा तुम ने ..ज़रा फिर से बोल तो..? मैने ठीक सुना ना ..?? ” उसकी आवाज़ में अधीरता , घबडाहट और आश्चर्य के भाव कूट कूट कर भरे थे …आवाज़ कांप रही थी ..


: ” हां भैया तुम ने बिल्कुल ठीक सूना ..मैं शादी तुम से ही करूँगी ..वरना मैं जिंदगी भर कुँवार रहूंगी …. ” शिवानी का चेहरा बिल्कुल वैसा ही था कोई बदलाव नहीं ..भाव शून्य ..


” मुझ से शादी करेगी तू..अरे कुछ समझ भी आता है तुझे क्या बक रही है… “


इस बार शिवानी चूप है ..कुछ नहीं बोलती बस शशांक की ओर देखती रहती है ..उसकी आँखों में अपने लिए असीम प्यार , तड़प और चाहत की झलक दीखाई देती है शशांक को …


शशांक समझ जाता है इसे इतनी आसानी से समझाना मुश्किल है …


वो उसके करीब जाता है उसका चेहरा अपने हाथ में बड़े प्यार से थाम लेता है …उसके बाल सहलाता है …और बोलता है


” देख शिवानी मैं समझता हूँ तेरे दिल का हाल..पर बहेना यह कैसे संभव है ….अगर यह हो सकता था तो क्या मैं नहीं चाहता तुझ से शादी करना ..? शादी की बात छुपाई नहीं जा सकती ना शिवानी ..सारी दुनिया को मालूम हो जाएगा …आपस में सेक्स की बात छुप सकती है ..पर शादी की बात? ..तुम ही बताओ ना ?” शशांक बड़ी नर्मी और प्यार से समझाता है शिवानी को…


” ह्म्‍म्म्म..तो इसका मतलब हुआ भैया, कि अगर शादी की बात भी अगर किसी तरह छुपाई जा सके तो तुम मुझ से शादी करोगे ..?? ” शिवानी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट आती है ..उसे एक बड़ी धीमी और पतली सी रोशनी की किरण झलकती है..


पर शशांक एक बड़ी द्विविधा में फँस जाता है…वो कुछ नहीं बोल पाता , चूप रहता हुआ शिवानी की इन बातों का उसके पास कोई जवाब नहीं..


” बोलो ना भैया ..प्लीज़ बोलो ना ..तुम चूप क्यूँ हो गये ……? ” शिवानी उसकी ओर बड़ी हसरत लगाए देखती है …


” तू समझती क्यूँ नहीं बहेना ..? आख़िर हम सगे भाई बहेन हैं ना …” शशांक बोलता है..पर उसकी आवाज़ खोखली है ..उसमें कोई भी दृढ़ता नहीं ..कोई वज़न नहीं …


” भैया जब तुम सग़ी बहेन को चोद सकते हो..उसकी चूचियों से खेल सकते हो..उसकी चूत में अपना लंड डाल सकते हो..फिर शादी क्यूँ नहीं कर सकते..? क्या तुम्हारा प्यार सिर्फ़ वासना है …मेरे शरीर से खेलने का सिर्फ़ एक बहाना है..??”


” शिवानी तू क्या बक रही है यार..तेरा दिमाग़ तो सही है ना…” शशांक झल्लाता हुआ बोलता है .


” भैया ..मेरा दिमाग़ आज ही तो सही है ..वरना आज तक तो मैं पागल की तरेह तुम्हें कुछ और ही समझ बैठी थी ..” उसकी आँखों में अब वो प्यार और तड़प नहीं वरन एक बहोत ही निराशा की झलक दीखती है शशांक को…जैसे अपनी जिंदगी से हताश हो गयी हो…


उसकी ऐसी हालत देख शशांक कांप उठ ता है ..


और आखरी दाँव चलाता है


” देख शिवानी … मोम की तू कितनी इज़्ज़त करती है और प्यार भी…..है ना ..?”


शिवानी हां में अपना सर हिलाती है ..


” तो फिर तू भी जैसे मोम अपने पति और मेरे बीच अपना प्यार बाँट सकती है ..तू क्यूँ नहीं ?? शिवानी…प्लीज़ ..समझो ना मेरी बात ..इसमें सब की भलाई है ..” शशांक गिड़गिडाता हुआ बोलता है ..


” भैया …मैं मोम की इज़्ज़त करती हूँ और उनके इस रवैय्ये की भी प्रशन्शा करती हूँ..पर मेरे मुझमे और उनमें एक बड़ा फ़र्क है …”


आज शिवानी पूरी तरेह तैयार थी ..उसके पास शशांक की हर बात का जवाब था.


” क्या फ़र्क है शिवानी ….??”


” मोम ऑलरेडी शादी-शुदा हैं , बच्चे हैं….उनके पास कोई चारा नहीं …..पर मेरी तो शादी नहीं हुई है ना…और शयाद मोम को भी अगर तुम उनकी शादी से पहले मिलते ना भैया तो वो भी वोही करतीं जो मैं करना चाह रही हूँ …. जब मेरे पास तुम्हारे जैसे मर्द से शादी का ऑप्षन है ..मैं किसी और से शादी सिर्फ़ नाम के लिए क्यूँ करूँ ..क्यूँ मैं जिंदगी भर एक दोहरा जीवन बीताऊं ..क्यूँ ..बोलो ना भैया क्यूँ ..?”


” उफफफफ्फ़ ..पर यह ऑप्षन कहाँ है शिवानी तेरे पास…हम कैसे शादी कर सकते हैं ..? सारी दुनिया हम पे थूकेगी ..”


” मैं जानती हूँ भाय्या ,,अचही तरेह जानती हूँ …बस मुझे सिर्फ़ तुम्हारी हां चाहिए ….तुम इस लिए डरते हो ना कि सारी दुनिया को ना मालूम हो..अगर हम कोई ऐसा उपाय सोच लें ..यह ऐसा कोई रास्ता निकल आए तब तो तुम्हें कोई ऐतराज़ नहीं ना ..? हां और एक बात मोम और तुम्हारे बीच मैं नहीं आऊँगी .मैं अपना प्यार सिर्फ़ उन से बाँट सकती हूँ और किसी से नहीं …..बोलो ना भैया ..प्लीज़ …?” अब शिवानी गिड्गिडा रही थी शशांक के सामने ..


उफफफ्फ़ इतना प्यार ..इतना तड़प ..शशांक ने कभी नहीं सोचा था कि उसकी यह इतनी नटखट बहेन भी इतनी बड़ी बड़ी बातें कर सकती है ..


शिवानी की बातों ने उसे झकझोर दिया था ..उसके सारे तर्कों को टुकड़े टुकड़े कर दिया था ..उनकी धहाज़्ज़ियाँ उड़ा दी थीं ….


शिवानी की बातें उसकी खोखली मान्यताओं का मज़ाक उड़ा रही थीं ..


” भैया प्लीज़ जवाब दो ..भैया …प्लीज़……”


शशांक से अब और नहीं रहा जाता ..उसकी बहेन की बातें उसे हथोडे की तरेह चोट कर रही थीं …वो तिलमिला उठा था ….भला उसकी इतनी हिम्मत कहाँ कि इस प्यार की झोली को खाली जाने दे ..बहेन आज अपनी लाज़ को दर किनार कर उसके सामने खड़ी थी ..प्यार की भीख माँग रही थी ..उसकी लाज़ तो बचानी ही है ना ……


वो हां में अपना सर हिलता है….


शिवानी खुशी से झूम उठ ती है ..मानों उसे स्वर्ग मिल गया हो…


शशांक से लिपट जाती है शिवानी..उसकी आँखों से आँसू की धारा फूट ती है …फफक फफक कर रोती है…


” मैं जानती थी ..भैया मैं जानती थी…. “


थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहते हैं ..एक दूसरे की गर्मी और प्यार को अपने में समा लेने की कोशिश में हैं ..


शिवानी धीरे से अलग होती है …अपने आँसू पोंछती है ..और शशांक से बोलती है


” भैया तुम्हें भगवान पर भरोसा है ना..??”


शशांक फिर हां में सर हिलाता है


” तुम देखना अगर हमारा प्यार सच्चा है ना ..तो भगवान ज़रूर कोई ना कोई रास्ता निकालेंगे ..ज़रूर ..तुम विश्वास करो…”


और तभी दरवाज़े पर किसी के होने की आहट आती है …


दोनों चौंक पड़ते हैं , दरवाज़े की ओर देखते हैं ..


सामने मोम खड़ी थीं ..!!!!!!


मोम को सामने देख दोनों के चेहरे पे हवाइयाँ उड़ने लगीं..दोनों सकते में आ गये …


मों के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे ..वो बिल्कुल चुप थीं , धीरे धीरे नपे तुले कदमों से आगे बढ़ती गयीं …


जब वो पास आईं …दोनों फिर से अवाक़ रह गये …उनकी आँखें फटी की फटी रह गयीं


मोम की आँखों से आँसुओ की अवीरल धारा फूट रही थी…आँसू बहे जा रहे थे ..आँखों से लगातार निकल निकल कर गालों से होते हुए उनकी नाइटी भींगती जा रही थी …..उनकी तरफ से आँसू रोकने की कोई कोशिश नहीं थी …आँसू बस बहे जा रहे थे…


शांति उन दोनों के बीच खड़ी हो जाती है …


शिवानी और शशांक को अपने गले से लगाती है …और अब फूट पड़ती है ….उसकी हिचकियाँ निकल जाती हैं….


शिवानी और शशांक अभी भी भौंचक्के से मोम को देख रहे थे ..पर उनकी आँखों में आँसू देख उनका डर मिट गया था ….पर आश्चर्यचकित ज़रूर थे मोम के इस रूप को देख …


तभी मोम कहती हैं..” हां बेटी तू ने बिल्कुल ठीक कहा ..मैं भी वोही करती जो तुम अभी कर रही हो..हां शिवानी ..बिल्कुल वोही करती …”


थोड़ी देर बाद अपने आप को अलग करती है और आँसू पोंछती है , उन दोनों के बीच एक कुर्सी खींच बैठ जाती है और कहती है …


” शिवानी बेटा ..तेरा प्यार देख मेरा दिल भर आया ….तू अपना सब कुछ लूटाने को तैय्यार है…अपना सब कुछ …मैने सब कुछ देखा और सुना ..मैं काफ़ी देर से तुम दोनों की बातें सुन रही थी …पर शिवानी तुम शशांक को ग़लत मत समझो बेटी ..वो भी हम दोनों को उतना ही प्यार करता है ……मैं जानती हूँ …अगर तुम किसी और से शादी कर भी लेती ना ..वो हम दोनों के लिए सारा जीवन कुर्बान करने को तैय्यार बैठा है शिवानी ….वो कभी किसी और से शादी नहीं करता …उसका प्यार समझो….”


शिवानी एक दम से सकते में आ जाती है मोम की बाते सुन कर और भैया को अपनी बड़ी बड़ी आँखों से एक सवालिया नज़र से देखती है …


शशांक बोलता है..” हां शिवानी मोम ठीक कह रही हैं ..मेरे जीवन में जब तुम दोनों हो मुझे किसी और की ज़रूरत ना आज है ना कभी होगी ..हां शिवानी…”


शिवानी शशांक से लिपट जाती है और अपना चेहरा उपर करते हुए शशांक से बोलती है ” भैईय अगर माफ़ कर सको तो मुझे माफ़ कर दो…मैने जाने क्या क्या कह दिया …उफफफ्फ़ ..मैं अभी भी कितनी ना समझ हूँ ..भैया ..”


शशांक उसके चेहरे को अपने हाथ से थामता हुआ कहता है ” माफी कैसी शिवानी….वो सब बातें तुम्हारा गुस्सा यह घृणा नहीं थी बहेना .वो भी तुम्हारा प्यार था जो तुम्हें इस हद तक ले आया था ..मैं समझता हूँ ..”


“भैया ..मैं कहती थी ना अगर मैं भटक भी जाऊंगी तो आप मुझे संभाल लोगे..?? देखा ना आप ने मुझे संभाला ना.. “


” हां बेटी शशांक जैसे मर्द बिरले ही होते हैं ….हम दोनों खूश नसीब हैं हमें इस जन्म में ही ऐसा प्यार करने वाला नसीब हुआ…वरना लोग तो जान जन्मान्तर तक सच्चे प्यार के लिए भटकते रहते हैं , मैं तो अब इस जन्म में शशांक को पति के रूप में अपना नहीं सकती…पर तू किस्मेत वाली है …तेरे पास यह विकल्प अभी भी है….”


दोनों फिर से भौंचक्के हो कर मोम की तरफ देखते हैं ….मोम यह क्या बोल रही हैं ..????


थोड़ी देर तक कमरे में सन्नाटे की गूँज भर जाती है…


…उनके लिए प्यार अब इस हद तक पहून्च चूका था जहाँ सेक्स सिर्फ़ शारीरिक भूख मिटाने का एक वजह नहीं रह जाता … उनके लिए सेक्स अपनी ज़ज़्बातों का एहसास दिलाने का एक ज़रिया बन जाता है .. ..जहाँ बातों का सहारा काफ़ी नहीं था …उनके लिए प्यार अब अपनी पराकाष्ठा पर था ..जहाँ प्यार अपने आप का संपूर्ण समर्पण था ….और इस हद तक पहूंचने के बाद सेक्स सिर्फ़ भूख नहीं रह जाती …बल्कि एक मात्रा भाषा रह जाती है एक दूसरे को इस हद तक एहसास दिलाने की…..जहाँ तन , मन और मश्तिश्क सब मिल जाते हैं …कुछ भी बाकी नहीं रहता …और एक दूसरे के लिए कुछ ही करने की हिम्मत आ जाती है ….


शांति अपने को इस मनोस्थिति में होने का प्रमाण उन दोनों को देती है ….खुद अगर इस प्यार को खूल कर जीवन पर्यंत भोग नहीं सकती तो अपनी बेटी को क्यूँ इस से वंचित रखें ..


और वो सन्नाटे को तोड़ती हुई बोलती है ..


” देखो तुम दोनों मेरी बातें ध्यान से सुनो , और जैसा मैं बोलूं वैसा ही करो ..मैने तो जितना मेरी किस्मत में था ..शशांक का प्यार अपनी झोली में भर लिया ..पर जब शिवानी के पास इस प्यार को खूल कर भोगने का रास्ता है …तो वो क्यूँ ना भोगे .?”


” ओह मोम यह कैसे हो सकता है ..?” दोनों एक साथ पूछ बैठ ते हैं..


” हो सकता है बच्चों, हो सकता है…” और फिर शिवानी की तरफ देखती है..” शिवानी तुम ने कहा था शशांक से भगवान ज़रूर कोई रास्ता निकलेंगे.? रास्ता दिखाई देता है मुझे …”


” वो कौन सा रास्ता है मोम ..??” शशांक पूछता है


” यहाँ तो मुमकिन नहीं ….यहाँ मतलब अपने देश में ..यहाँ कभी ना कभी कोई हमें जान ने वाला मिल सकता है …तुम दोनों बाहर चले जाओ …और वहाँ शादी कर लो … रही शिव की बात ..तो बच्चों समय बड़ा बलवान है ….. .कुछ दिनों के बाद उसे भी यह रिश्ता मंज़ूर हो ही जाएगा ..मैं धीरे धीरे उसे समझाऊंगी …और तब हम अपना यहाँ का कारोबार समेट कर तुम्हारे साथ आ जाएँगे …पर यह बाद की बात है ……हां पर एक बात का ख़याल हमेशा , जीवन भर रखना ..मेरे और शशांक के बारे शिव को कभी पता नहीं चलना चाहिए ..वो मुझ से बहोत प्यार करता है …पता नहीं वो इसे झेल पाएगा या नहीं ..”


और शांति चुप चाप बाहर निकल जाती है ….अपना प्यार पीछे छोड़ते हुए ..अपनी बेटी को सौंपते हुए …


शिवानी और शशांक चुप हैं ..वो समझते हैं मोम पर क्या बीट रही होगी ..पर एक आशा थी ना …शायद मोम और डॅड भी उनके पास आ जायें..???


उस रात शिवानी फिर से अपना प्यार मोम से बाँट ती है …..शशांक मोम के पास जाता है …शायद आखरी बार ….यह रात शांति के लिए एक यादगार रात हो जाती है…उसके जीवन भर का सहारा ..पता नहीं उसे फिर कभी शशांक का प्यार नसीब हो या नहीं..???


उस रात शशांक के वीर्य और मोम की चूत के रस से उन दोनों के आँसू भी मिल जाते हैं…..उनका मिलन उस रात संपूर्ण मिलन हो जाता है….शायद कभी ना भूलने वाला…दोनों एक दूसरे का एहसास पूरी तरेह अपने में समेट लेते हैं…….


शशांक अगले दिन से ही अपने आगे की पढ़ाई के लिए यूके की यूनिवर्सिटीस में अप्लाइ करना शूरू कर देता है …कुछ दिनों के बाद उसे शफ्ल्ड यूनिवर्सिटी से आक्सेप्टेन्स लेटर मिल जाता है …शशांक जाय्न कर लेता है वहाँ..


शिवानी अपना ग्रॅजुयेशन कंप्लीट कर वो भी उसके पास चली जाती है ..अपने प्यार के पास ….जहाँ उनके बीच संबंधों की कोई रुकावट नहीं…. जहाँ ” ना जन्म का हो बंधन ” पूरी तरेह सार्थक हो जाता है…


शांति अपना प्यार बाँट लेती है अपनी बेटी से …


वो जानती है ना … प्यार बाँटने से कम नहीं होता …..

मित्रो पाठको यहाँ पर ये कहानी ख़तम होती है जल्द ही मिलेंगे एक ओर नई कहानी के साथ


दा एंड !


 

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