आग्याकारी माँ -------- 1

 




                    आग्याकारी माँ  -------- 1


                           सतीश




                             सोनाली



                                   श्वेता


            
                       शिप्रा



                                          बसंती


                                    शीला


 

                "आग्याकारी माँ"



………सतीश



पात्रपरिचाय:-
अविनाश- उम्र ४५ वर्ष.
एक बहुत बड़ा बिजनेसमैन, गुड लुकिंग लेकिन गलत संगत मे पड़ने के कारन उसे हैवी ड्रिंकिंग की आदत पड़ गइ... कई बार तो वो इतनी पी लेता की उसे कुछ अपना होश ही नहीं रहता और उसके दोस्त उसे घर तक छोड़ने आते...

सोनाली- उम्र ४०, फिगर- ३४-३०-३६

एक अच्छी पढ़ीलिखी औरत, बहुत ही खूबसूरत और क़ातिलाना सांचे मे ढला हुआ जिस्म, जिसे देख कर बुड्ढे भी जवानी की दुहाई माँगते है जहाँ से वो गुज़रती वहां के लोगो को अपने हुस्न का दीवाना बना देती.. उसने अपना फिगर मेन्टेन करके रखा है योग ओर एक्सरसाइज के द्वारा... कोई भी उसे देख कर ये नहीं कह सकता की उसकी उम्र ४० की होगी, उसकी उम्र ३० साल से भी कम लगती थी..,

उम्र के साथ ही सोनाली की बदन की आग बढ़ती जा रही थि, पर उस आग को शांत करने वाला रोज शराब के नशे मे आता और आते ही बिस्तर पर गिर पडता... और सोनाली ऐसे ही तड़प कर रह जाति, २ साल से ऊपर हो गया था उसे सेक्स करे रोज रात को उसे अपनी उंगलि, और अब कुछ समय से डिलडो से अपने बदन को शांत करना पडता, वो चाहती तो बाहर भी मुह मार सकती थी पर अपनी फॅमिली की इज्जत की बजह से उसने कभी भी बाहर ट्राय नहीं किया... और ऐसे ही अपनी जिस्म की आग को मिटाने की कोशिश करने लगी... पर जिस्म की आग भला हाथ और डिलडो से कभी शांत हुई है... उसके लिए तो एक असली लंड की जरुरत होती है...
श्वेता- उम्र-२०, फिगर- ३4-२८-३4
एक सिंपल लड़की है, जवानी पुरे शबाब पर थि, उसके अंग अंग से जवानी छलकती थी... कॉलेज में हर लड़का उसके पीछे पड़ा था पर वो किसी को भी लिफ्ट नही देती थी... बेचारे सभी लड़के उसके दूध और गांड देख कर आहें भरते रहते है..


सतीश- स्टोरी का हीरो है, अपने डैड की तरह गुड लुकिंग एंड मस्कुलर बॉडी का मालिक जो की उसने जिम मे २ साल की मेहनत से बनाई थी...
उम्र-१९, हाइट-५ फट. ९ इंच और सबसे खास उसका हथियार 9 इंच" लम्बा 4 इंच' मोटा, न जाने अब तक कितनो की सील तोड़ चुका था...
सतीश बहुत चुदक्कड़ किस्म का बंदा था, अगर किसी चुत पर उसके लौडे का दिल आ जाता तो वो उसे ठोंक कर ही रहता...
शिप्रा- उम्र-१८ फिगर- २८-२६-३०
नन्ही चुलबुली सी लडकि, जिस पर अभी अभी जवानी आनी शुरू हुई थी...
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कहानी के बाकि के किरदार समय आने पर इंट्रोडुस करा दिए जाएंगे...

रात के १२ बज रहे थे, सतीश और शिप्रा अपने अपने रूम मे सो रहे थे जब कि दूसरी तरफ सोनाली अपने रूम मे अपनी चुत की आग को बुजाने मे लगी थी... टेबल लैंप की दूधिया रौशनी मे उसका नंगा दूधिया जिस्म और भी मादक और कामुक लग रहा था... उसके ३४ साइज के वेल शेप्ड मख़मली बॉब्स और उन पर पिंकिश निप्पल जो की अभी तन कर १" के करीब हो गई थी, किसी भी साधू और मुनि का पानी निकालने के लिए काफी था.... और कमरे का दृश्य(सीन) तो किसी मुर्दे को भी जिंदा कर देता, कमरे में सोनाली पूरी नंगी लेटी हुई थि, उसका सुन्दर चेहरा इस समय सेक्स की आग मे झुलस कर लाल पड़ गया था, वो अपने एक हाथ से अपनी चूचियां एक-२ करके मसल रही थि, और दूसरा हाथ निचे उसकी चुत मे ५ इंच" के डिलडो को अंदर बाहर करने मे लगा हुआ था... पुरे रूम मे सोनाली की सिसकियाँ गुंज रही थी.... अब सोनाली तेजी के साथ अपनी चुत मे डिलडो को अंदर बाहर करने लगती है, सिसकियाँ और तेज हो जाती हे, और सोनाली की आँखें भी मजे की अधिक्ता के कारन बंद हो जाती हे.... उसको देख कर कोई भी बता सकता था की अब वो अपने ओर्गास्म की तरफ है... तभी डोर बेल बजती है पर सोनाली उसको इग्नोर करके अपनी मस्ती मे लगी रहती है और हाथ की स्पीड और तेज कर देती है... पर गेट पर खड़े बन्दे को वेट करना शायद पसंद नहीं था तभी तो वो एक के बाद लगतार बेल बजाते जाता है.... बेल के लगातार बजने पर सोनाली ये सोच कर की कही सतीश या शिप्रा मे से कोई न जाग जाए, बड़ी मुस्किल से बेड से उठती है और निचे पड़ी ब्लैक कलर की नाइटी उठा कर पहन लेती है और गेट खोलने चल देती है....

सोनाली- कमीना कही का खुद तो कुछ करता नहीं और जब मे खुद अपनी प्यास बुजा रही हूँ तो भी साला गलत वक़्त पर अपनी गांड मराने आ गया...

वैसे सोनाली कभी गाली नहीं देती थी लेकिन अपने ओर्गास्म पर आकर रह जाने के कारन ग़ुस्से मे उसके मुह से ये वर्ड्स अनायास निकल गए थे... और गुस्सा आना लाज़मी भी है क्योकि
अगर आप किसी लड़की को ओर्गास्म की स्टेज तक लेकर उसे छोड़ दे तो वो आपको गाली ही देगि, प्यार तो नहीं करेगी ना...

सोनाली गेट ओपन करती है, सामने अविनाश ही था रोज की तरह बेहोषी की हालत में... और साथ में उसका दोस्त कम बिज़नेस पार्टनर दुष्यंत था, जो की रोज की तरह उसे घर छोड़ने आया था....

सामने का दृश्य देख कर दुष्यंत की तो आज लॉटरी लग गई थि, क्योकि जो नाइटी सोनाली ने अपने बॉडी पर डाली थी वो सेमि ट्रांसपेरेंट टाइप की थि, और जिसके अंदर उसने कुछ नहीं पहना था, और उस नाइटी मे से उसकी आधी से ज्यादा क्लीवेज नाइटी से एक्सपोस हो रहे थे...

दुश्यंत अपने चेहरे पर कमिनि मुस्कान के साथ- नमस्ते भाभी जि, मेरे लाख समझाने के बाद भी आज फिर ईसने कुछ ज्यादा ही पी ली...

सोनाली उसकी नजर से समझ जाती है की वो उसकी बॉडी को खा जाने वाली नजर से घुर रहा है...

सोनाली थँक्स कहकर अविनाश का हाथ पकड़ कर अपने कंधे मे डाल लेती है और उसे सहारा देते हुए अंदर ले जाने लगती है... सोनाली को अविनाश को अंदर ले जाने मे दिक्कत हो रही थी...

दुश्यंत- अरे भाभी आप क्यों परेशान हो रही हो में छोड़ आता हूँ इसे रूम में... और दुश्यंत आगे बड़कर अविनाश का दूसरा हाथ अपने कंधे पर रखता है, और दूसरा हाथ जानकर उसका दूसरे हाथ (जिधर से सोनाली उसे अपने ऊपर डाले हुए थी ) के कंधे पर रखकर निचे लाते हुए सोनाली की चूचि पर फेर देता है....

ये सब इतनी तेजी से हुआ की न तो सोनाली को कुछ कहने का मौका मिला और न ही कुछ करने का... पर अपने चूचि पर दुश्यंत का हाथ पड़ते ही उसका बदन एक दम सिहर उठता है... और वो उसके तरफ देख कर- नहीं इसकी जरुरत नहीं है में इन्हे खुद ले जाउंगी...

दुश्यंत- एज यु विश्, मैं तो बस आपकी मदद करना चाहता था... और इसी के साथ दुश्यंत अपना हाथ हटाते हुए जान बुज कर सोनाली के दूध को हलके से दबा देता है... सोनाली उसकी इस हरकत पर उसे घूर कर देखती है तो दुश्यंत ऐसे शो करता है की जैसे ये अन्जाने में हुआ हो, और फिर वो सोनाली को गुड नाईट बोलकर निकल जाता है....

सोनाली अविनाश को लेकर अपने रूम की तरफ बढ़ जाती है... और रूम में मे पहुच कर अविनाश को बेड पर लिटा देती है... और फिर में डोर को लॉक करके आती है, फिर अविनाश के शूज और शॉक्स उतार कर उसे ठीकसे बेड पर लिटा देती है... और फिर थोड़ी देर अपनी किस्मत को कोसने के बाद अपनी नाइटी को उतार कर फेक देती है और अपना अधुरा काम पूरा करने में लग जाती है यानी की चुत की खुजली मिटने में, उसके हाथ और चुत में फिर एक जंग छिड़ जाती है...
उसी रात जहाँ एक तरफ सोनाली अपने जिस्म की आग बुजाने में लगी हुई थी... वही दूसरी तरफ लगातार बेल्ल बजने के कारन सतीश की आँख भी खुल गई थि, सतीश को समझते देर न लगी की गेट पर उसके डैड हैं जो की रोज की तरह लेट नाईट ड्रिंक करके आये हे, इसलिये सतीश दोबारा सोने के लिए लेट गया पर बहुत देर ट्राय करने के बाद भी उसे नींद नहीं आई, तभी उसे प्रेशर लगा तो वो उठ कर अपने रूम के टॉयलेट में चला गया और हल्का होने के बाद वापस अपने बेड पर आकर लेट गया, और सोने की कोशिश करने लगा अभी आँख लगने ही वाली थी की उसे जोर की प्यास लगती है, वो अपने बेड की साइड में रखी टेबल पे रखी बोतल को उठता है, पर बोतल बिलकुल खली थि, इसलिए सतीश अपने रूम से निकलकर निचे पानी लेने के लिए चल देता.... सीढ़ियों पे से ही उसकी नजर अपनी माँ के बेडरूम के थोड़े से खुले डोर से आती रौशनी पर पड़ती है...

सतीश- माँ इतनी लेट नाईट लाइट जला कर क्या कर रही हे... खैर मुझे क्या? अभी तो पानी पीलु पहले क्योकि- ये प्यास है बड़ी...

ओर सतीश किचन की तरफ बढ़ जाता है... और पानी पीने के बाद वो सीढ़ियों की तरफ चल देता है... सीढ़ियों और किचन के बीच मे ही उसके माँ डैड का रूम था अभी वो अपने माँ के रूम से जरा सा आगे बड़ा ही था की तभी उसके कान में एक आवाज़ पड़ी और उसके कदम एक दम ठिठक गए और तभी उसे दूसरी आवाज़ सुनाई दि... आवाज हलकी होने के कारन उसे कुछ समझ नहीं आया... पर उसके कदम उसके माँ के रूम की तरफ बढ़ गए और उसने थोड़ेसे खुले डोर को हलके से खोला और फिर अंदर का सिन देख कर उसके होश उड़ गये... उसकी आँखें आस्चर्य की अधिक्ता के कारन फैलती चलि गई... और अभी थोड़ी देर पहले तर किया हुआ गला वापस ऐसे सुक्ख गया जैसे वर्षो का प्यासा हो.....
सामने का दृश्य देख कर उसकी साँसे थम सी गई...

सामने उसकी माँ उसकी आँखों के सामने अपने नंगे जिस्म में वासना का नंगा नाच कर रही थी... एक पल को तो सतीश वहां से हटा पर दूसरे ही पल वो वापस गेट पर आकर अंदर का दृश्य देखने लगा...

सतीश (अपने आप से)- नहीं ये गलत है मुझे अपनी माँ को इस हालत में नहीं देखना चाहिए... वैसे ही सतीशने उनके डोर को बिना नॉक करे खोलकर पाप किया है और अब में माँ को ऐसा देखकर महापाप नहीं कर सकता...

सतीश का हरामी दिमाग- अबे कोई पाप नहीं है बे... सामने का दृश्य देख भूल जा की सामने जो नंगी औरत है वो तेरी माँ है... और बता की आज तक तूने अपनी लाइफ में इतना हसीन जिस्म देखा है... साले देख उसके बॉब्स को कितने बड़े, गोल और सुड़ौल हे... कितना मजा
आएगा जब वो चूचियां तेरे हाथ में होंगीं और तू उन्हें मसल रहा होगा...

सतीश- नहीं मे इस बारे में सोच भी नहीं सकता वो मेरी माँ हे... तुम मुझे बहका रहे हो...
ह. द.(हरामी दीमाग )- अबे ध्यान से देख सामने जो है वो किसी की माँ बहन नहीं हो सकती, वो तो एक लाचार औरत है, जिसका पति उसकी सेक्स की आग को कम नहीं करता... देख इस औरत को इसे देख कर ही लगता है की ये बर्षो से किसी मर्द के स्पर्श को तड़प रही है, बरसो की प्यासी है ये औरत... और देख इसे अगर ये एक इशारा भी कर दे तो लोगो की भीड़ लग जायेगी पर ईसने अपने परिवार की इज्जत के लिए इस आग में झुलसना क़बूल किया... तु इसकी प्यास बुजा सकता है..
सतीश- “मैं... मैं कैसे,.. ये मेरी माँ है”
ह.दी.- “आगे कुछ बोलने से पहले अपने शार्ट में बने टेंट को देख ले...
सतीश अपने शार्ट की तरफ देखता है तो उसे पता चलता है की उसका लंड पूरा खड़ा हो कर उसके शार्ट में टेंट बना रखा है...
सतीश चौकते हुये- ये कैसे खड़ा हो गया, वो भी अपनी माँ को देख कर...
ह.दी- दोस्त लंड की कोई माँ और बहन नहीं होति, इसे बस चुत से मतलब होता है चाहे वो किसी की भी हो... और इसे तुम जितनी जल्दी समझ लोगे उतने ही ज्यादा तुम जिन्दगी को एन्जॉय करोगे.... जैसे की अभी अपनी माँ को देख कर, कर रहे हो...
सतीश- शायद तुम सही कह रहे हो... क्योकि मुझे पता ही नहीं चला की कब मेरा हाथ मेरे लंड को सहलाने लगा...
अब सतीश अंदर का सिन देख के बहुत गरम हो गया था और अपने शार्ट को निचे खिसका देता है, और अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाना शुरू कर देता है... रूम में सोनाली अपने एक हाथ से अपनी चुत में तेजी से डिलडो को अंदर बाहर कर रही थी जबकि दूसरे हाथ से अपनी चुत की क्लीट को रगड रही थी... पूरे रूम में उसके मुह से निकलती सिसकारियां गुंज रही थी जिन्हे सुनकर गेट पर खड़ा सतीश और भी गरम होकर अपने लंड को तेजी से हिलाने लगा... अन्दर सोनाली की आँखे पूरी मस्ती में बंद हो गई थी और वो तेजी से अपनी चुत को चोदने लगि, सोनाली मस्ती में अपने चूतडो को उछाल-२ कर डिलडो को अपने अंदर लेने लगी थी और थोड़ी देर में ही उसका जिस्म अकड जाता है, और उसकी चुत का बंद टूट जाता है, और उससे ढेरसारा कामरस निकलने लगता है...
सतीश की तो हालत ही ख़राब हो गई थी ये सब देख कर, एक पल को उसका मन किया की अभी अंदर जाकर अपनी माँ की चुत में अपना मुह घूसा दे और उसका सारा रस पि जाए, पर उसने अपने आपको रोक लिया क्योकि वो जल्दवाजी करके काम बिगाडना नहीं चाहता था...

अंदर सोनाली का जिस्म अब शांत पड़ गया था और वो अपनी साँसे कण्ट्रोल कर रही थि, जिसके कारन उसकी चूचियां ऊपर निचे होने लगी थी... सतीश का तो दीमाग ही ख़राब हो रहा था वो समझ गया की अब अंदर कुछ स्पेशल नहीं होने वाला है, इस्लिये वो शार्ट को ऊपर करके तेजी से अपने रूम की तरफ बढ़ जाता है..


सतीश अपने रूम में पहुच कर तुरंत अपना शार्ट और अंडरवियर उतार कर फेक देता है, और अपने बेड पर लेटकर अपनी आँखे बंद करके अपनी माँ के बारे में सोचते हुए मुट्ठ मारने लगता है, आज उसे मुट्ठ मारने में इतना मज्जा आया जितना की कभी उसे चुत मरके भी नहीं आया था... और थोड़ी देर में ही उसका लंड उलटी कर देता है, आज उसके लंड ने जितना माल गिराया था उतना तो कभी चुदाई करके भी नहीं निकला था, और अब थकन के कारन सतीश की आँखे भारी होने लगती है और वो नंगा ही सो जाता है और खो जाता है खवाबो की हसीं दुनिया में...

सूबह ६ बजे सोनाली की आँख खुलती है, वो अपने बिस्तर से उठती है तो उसका ध्यान अपनी नग्न अवस्थ पर जाता है, वो तुरंत नाइटी उठा कर पहनती है और फिर टाइम देखति है...
सोनाली- है भगवान् ६ बज गये, आज तो मैं बहुत लेट हो गई... और वो तुरंत फ्रेश होने चलि जाती है, और फ्रेश होकर किचन की तरफ बढ़ जाती है... आज नहाने का टाइम उसके पास नहीं था क्योकि उसे सतीश और शिप्रा को जगाना था और उनके लिए लंच भी रेडी करना था...

सोनाली चाय बनाती है और उन्हें कप में डालकर शिप्रा और सतीश के कमरो की तरफ चल देती है,..

सीढ़ियां चड़ते ही पहला रूम शिप्रा का पडता है, फिर उससे लगा हुआ रूम सतीश का और सतीश के रूम के सामने श्वेता का रूम था, पर उस पर अभी टाला लगा हुआ था... क्योकि श्वेता मुम्बई में रहकर अपनी स्टडी कर रही है...
ओर शिप्रा के जस्ट सामने एक कॉमन बाथरूम है, श्वेता के रूम से सटा हुआ,..

सोनाली शिप्रा के रूम में जाकर उसको जगाती है, शिप्रा थोड़ी देर तो कसमसाती है फिर उठ कर अपनी माँ को गुड़ मॉर्निंग बोल कर फ्रेश होने चलि जाती है.
.. सोनाली उसका कप टेबल पर रखकर सतीश के रूम की तरफ बढ़ जाती है...

सतीश अपने रूम में हसीन सपनो की दुनिया में खोया हुआ था... सोनाली सतीश का गेट खोलकर जैसे ही अंदर घुसती है उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती हे... सामने सतीश पीठ के बल पूरा नंगा सोया हुआ था... और उसका लंड अपनी पूरी औकात में खड़ा हुआ था.... सोनाली तो उसका मूसल जैसा लंड देख कर अपने मुह पर हाथ रख लेती है उसे तो अपनी आँखों पर विस्वास ही नहीं हो रहा था...

सोनाली- “हे भगवान् किसी का इतना बड़ा भी होता है क्या”...?
लंड को देख कर उसकी साँसे फूलने लगती है और उसकी चुत गिली होने लगती है...
सोनाली- अपनी साड़ी( जो की उसने फ्रेश होने के बाद पहन ली थी ) पर से अपनी चुत को मसलते हुये- हे भगवान् ये मुझे क्या हो रहा है मेरी चुत, अपने बेटे का लंड देखके ही पाणी बहा रही है, ये सब गलत है ऐसा नहीं होना चहिये...

ओर इसी के साथ वो उसके रूम के डोर को बंद करके बाहर आ जाती है... और फिर उसके डोर को नॉक करती है, २ मीनट. तक डोर नॉक होने पर सतीश की आँख खुलती है और उठ कर जब वो अपनी हालत देखता है तो तुरंत अपने कपडे उठाकर पहनता है और फिर गेट खोलता है...
सोनाली गुस्सा दिखाते हुये- कितनी गहरी नींद सोता है पता है मे कितनी देर से गेट नॉक कर रही हु...
सतीश- वो माँ में गहरी नींद में था इसलिये पता नहीं चला... पर माँ आप रोज की तरह मुझे उठाने क्यों नहीं आई...

सोनाली- वो मैंने तेरे गेट को खोला पर ये खुला नहीं तो मैंने सोचा की तूने अंदर से बंद करा होगा,.. इसलिए सतीशने तेरा गेट नॉक किया, चल अब तू फ्रेश होजा मे तेरे लिए दूसरी चाय भिजवाती हु, ये तो पूरा पानी हो गई...
सतीश-“ओके मोम... और वो फ्रेश होने चला जाता है...
सोनाली किचन में आकर दूसरी चाय बनाने रख देती है पर उसके दिमाग में तो अभी भी वही सीन चल रहा था, और वो सतीश के लंड के ख़याल में खो जाती है...
मोँ... माँ कहा खो गई हो आप... और तभी किसी के हिलाये जाने से सोनाली अपनी ख्यालो की दुनिया में से बाहर आ जाती है... सोनाली होश में आती है तो देखति है की सामने शिप्रा तैयार खड़ी है और उसे हिला रही थी...
शिप्रा- कहा खो गई थी माँ अभी सारी चाय निकल जाति, वो तो मे सही टाइम पर आ गई...
सोनाली- “ऊह्ह्... कही भी तो नहीं बेटा, वो बस ऐसे ही कुछ सोचने लगी थी... चल अब तू आ ही गई है तो अपने भाई को चाय दे आ”.,
ओर सोनाली एक कप में चाय डाल कर शिप्रा को दे देती है...

शिप्रा चाय का कप लेकर सतीश के रूम की तरफ अपनी गांड मटकाते हुए चल देती है...
जबकि दूसरी तरफ सतीश सोनाली के जाते ही फ्रेश होने चल देता है... और जल्दी से फ्रेश होने के बाद बाथ लेने लगता है... सारे टाइम सतीश के दिमाग में कल रात वाले सीन किसी मूवी की तरह चल रहे थे, अब सतीश की सोच अपनी माँ को लेकर बदल गई थी और इस बात की गवाही उसका खड़ा लंड दे रहा था... बाथ लेते समय सतीश के दिमाग में एक ख़याल आता है और वो अपने आप से.....
सतीश- यार एक बात समझ नहीं आई, डोर तो खुला था फिर माँ ने ये क्यों कहा की डोर खुला नाहि, वैसे तो वो रोज मुझे उठाने आती थी....
ह.दी.- अबे साले वो तेरा पोपट बना गई, झुट बोल रही थी ओ... जरूर वो चाय लेकर अंदर आई होगी तू घोड़े बेच के सो रहा होगा और उन्होंने तेरा खड़ा लंड देख लिया होगा तो उन्होंने बाहर जाकर गेट नॉक करा होगा...
सतीश- आओ भाई तेरी कमी ही रह गई थी साले हमेशा लंड से ही सोचता है,.. हो सकता है की वाकई में उनसे डोर न खुला हो...

ह.दी.- साले लोडू हो गया है क्या आज से पहले ऐसा हुआ है कभी की वो तुझे उठाने आई हो और डोर न खुला हो तूने तो डोर खोला ही था कितनी आसानी से खुल गया था, कोई तुझ जैसा चूतिया नंदन ही उनकी बात का यकीन करेगा की गेट न खुला हो...
सतीश- पर...
ह.दी.- “पर...वर छोड़ और अब माँ की चुदाई का प्लान बना... अब तो उन्होंने भी लंड देख लिया है... और तू तो जनता ही है की अपने लंड को देख कर तो हर कोई इसे अपनी चुत में लेना चाहता है...

सतीश- तू सच कह रहा है भाई... अब जब वो मेरा लंड देख ही चुकी हैं तो ज्यादा दिनों तक इसे लिए बिना नहीं रह सकती.... अब जलद ही मेरा लंड उनकी चुत की गहराई नापेगा...
ओर इसी के साथ वो अपनी माँ को ख्यालो में ही तरह तरह से चोदते हुए अपना पानी निकाल देता है...

दूसरी तरफ शिप्रा, सतीश के रूम में आती है, सतीश को रूम में न पाकर वो समझ जाती है की सतीश वाशरूम में है, शिप्रा चाय का कप बेड के पास रखी टेबल पर रख देती है, तभी उसकी नजर बेडशीट पर पड़े दाग पर पड़ती है, वैसे निशान कई जगह थे... शिप्रा उन्हें ध्यान से देखति है और फिर उसके चेहरे पर एक अर्थपुर्ण मुस्कान आ जाती है, तभी सतीश का मोबाइल रिंग करता है, शिप्रा मोबाइल उठाती है तो उसे स्क्रीन पर एक मेसेज फ़्लैश होते दिखाइ देता है, जो किसी प्रियंका नाम की लड़की का था... शिप्रा मोबाइल को टेबल पर रख देती है तभी उसके दिमाग में न जाने आता है वो मोबाइल उठकर मेसेज ओपन करती है...

मेसेज- “गुड़ मॉर्निंग जानु आई मिस यु टू”.

मेसेज पढ़कर शिप्रा के फेस पे एक शरारती मुस्कान आ जाती है, और वो इन्बॉक्स में चलि जाती है और मेसेज पड़ने के लिये, पर तभी बाथरूम के गेट खुलने की आवाज सुनकर वो मोबाइल रख देती है...

तभी बाथरूम से सतीश बाहर आता है...उसने इस समय केवल एक टॉवल पहनी हुई थी...उसकी चौडी छाती एक दम चिकनी थी जिस पर पानी की बुँदे साफ़ दिखाइ दे रही थी... सतीश रूम में शिप्रा को देख कर चौक जाता है...

शिप्रा- गुड़ मॉर्निंग सतीश भइया...

सतीश- वेरी गुड़ मॉर्निंग टू यु वैसे तू मेरे रूम में क्या कर रही है....

शिप्रा- मुझे तेरे रूम में आने का कोई शौक नहीं है... वो तो मुझे माँ ने कहा था तुझे चाय देके आने को तो मे आई थी... वैसे बॉडी अच्छी बनाई है तुमने...

सतीश-आई नो बट थँक्स फ़ॉर दी कॉम्प्लिमेंट...

शिप्रा- मुझे पता है तुझे इंग्लिश आती है इस्लिये ज्यादा अंग्रेज बनने की जरुरत नहीं है... और हा बॉडी अच्छी है इसका ये मतलब नहीं है की तू घर में नंग धड़ंग अपनी बॉडी दीखाता फिरेगा...
सतीश- “मे कब नंग धड़ंग घुमता हु....

शिप्रा- “तो इस समय तू क्यों नंगा घूम रहा है...

सतीश- आरे वह तो मैंतो..
ह.दी- अबे लवडू, ये भी तेरा पोपट बना रही है, ये तेरा रूम है तू यहाँ जैसा चाहे घूम सकता है....

शिप्रा- रुक क्यों गया बोल-बोल...

सतीश को ह.दी. की बात समझ मे आ गई थी...
सतीश- “ओये शिप्रा की बच्ची ये मेरा रूम है मे यहाँ जैसे चाहे वैसे घूम सकता हु....

शिप्रा मुह बनाते हुये- हाँ तो घूम ना मैं तुझे कौन सा रोक रही हु... और हाँ चाय पिले वरना फिर कोल्ड टी बन जाएगी....



सतीश जल्दी से कप उठा कर चाय पिने लगता है...
शिप्रा- वैसे एक बात बता ये तेरी बेड शीट पर दाग कैसे पड़े हे....?
सतीश को एकदम फन्दा लग जाता है...
सतीश- आरे ए.. ये तो ओ.. चाय के दाग है, कल चाय इस पर गिर गई थी...
शिप्रा- “तो इसे धुलने को दे दियो... ऐसे गन्दी ये अच्छी नहीं लगती...
सतीश- “दे दूंगा धुलने को अब ये पकड़ कप और मेरा पीछा छोड़ मेरी माँ, मुझे तैयार भी होना है...
शिप्रा कप लेकर चल देती है... और ड़ोर के पास पहुच कर- अरे हाँ छछुन्दर, किसी प्रियंका नाम की बन्दरिया का मेसेज था कह रही थी- गुड़ मॉर्निंग जानु एंड मिस यु टू... ह..ह..ह

सतीश- तूने मेरा सेल छुवा, मे तुझे नही छोडूंगा ...

ओर सतीश शिप्रा के पीछे भगता है, और शिप्रा हस्ते हुए निचे की तरफ भाग जाती है...

सतीश- रुक भगति कहा है छिपकली कही की...

शिप्रा पीछे मुड़कर उसे जीभ दिखाते हुये-“चल... हट छछूंदर कही का....

ओर इसी के साथ शिप्रा भाग कर किचन मे सोनाली के पास पहुच जाती है... और सतीश भी अपने रूम मे पहुच जाता है और तैयार होकर निचे आ जाता है...

निचे डायनिंग टेबल पर शिप्रा बैठि हुई थि, सतीश उसे घुरता हुआ उसके सामने की चेयर पर बैठ जाता है...

शिप्रा अभी भी मुस्कुरा रही थी.. तभी उसके दिमाग मे ना जाने क्या खुराफ़ात सूझती है...

शिप्रा सतीश को चिड़ाते हुये- गुड़ मॉर्निंग जाणु... और हॅसने लगती है...

सतीश- देख शिप्रा मान जा वरना आज तू पिट जायेगी मेरे हाथ से...

शिप्रा- “और मारेगा कौन छछुंदर तू मारेगा मुझे...

सतीश- “आज तू तो गई, आज नहीं छोडूंगा तुझी... आज देखता हूँ तुझे कौन बचायेगा मेरे से...

ओर इसी के साथ वो शिप्रा की तरफ भागता है, और शिप्रा उठकर किचन की तरफ भागति है... और किचन मे सोनाली के पीछे जाकर खड़ी हो जाती है...

शिप्रा- “माँ देखो भाई मुझे मार रहा है...

सोनाली- “सतीश क्यों मार रहा है शिप्रा को...

सतीश- “माँ अब तक तो नहीं मारा पर अब जरूर मारूंगा....

सोनाली- कब सुधरोगे तुम दोनों अब तुम बड़े हो गए हो, अब तो ये शैतानियाँ बंद करो.. सतीश जाओ डायनिंग टेबल पर, मे अभी नास्ता ला रही हु...

सतीश शिप्रा की तरफ देखता है तो वो जीभ दिखा रही थि, जैसे कह रही हो की तू मेरा कुछ नहीं बिगाड सकता... सतीश ग़ुस्से में दिंनिंग टेबल की तरफ बढ़ जाता है...

सतीश के जाते ही शिप्रा सोनाली के गले में हाथ डालकर उसे किस करते हुये- “थैंक यु माँ एंड लव यु टू, यु आर दी बेस्ट माँ ऑफ़ दी वर्ल्ड़...

सोनाली- “ज्यादा मस्का मारने की जरुरत नहीं है, और उसे ज्यादा मत छेड़ा कर वरना फिर मे तुझे रोज नहीं बचा पाउँगी...

ओर फिर वो दोनों नाश्ता लेकर आ जाते हैं और फिर डायनिंग टेबल पर लगा देते हे...

सतीश और शिप्रा नास्ता करने लगते हैं और सोनाली एक कुरसी पर बैठ कर कॉफ़ी पीने लगती है...

शिप्रा- “माँ आप नाश्ता नहीं करोगी...?

सोनाली- “नहीं बेटा वो कल रात देर से सोइ थी इस्लिये आँख जरा लेट खुली तो आज मैं नहा नहीं पाई....

सतीश जानता था की उसकी माँ रात को क्यों लेट सोइ थि, और उसकी आँखों में फिर से रात वाले सीन चलने लगते हे... और उसका लंड जीन्स के अंदर ही अपना सर उठाने लगता है....

अब सतीश सोनाली को तिरछी नजर से देखता है तो उसे अपनी माँ दुनिया की सबसे हसीन औरत लगती है... वो उसके खूबसूरत चेहरे को देखते हुए जब थोड़ा निचे देखता है तो बस देखता ही रह जाता है... येलो कलर के डीप कट ब्लाउज से उसका क्लीवेज साफ़ दिखाइ दे रहा थे... उसकी चूचियां ब्लाउज में बहुत कसी हुई थि, ऐसा लग रहा था की अभी ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आ जाएंगी...

सतीश बहुत मुस्किल से अपने को रोकता है और नाश्ता ख़तम करके शिप्रा के साथ कॉलेज के लिए अपनी बाइक से निकल जाता है, पुरे रस्ते उसका लंड उसे परेशान करता रहा... कॉलेज पहुच ते ही शिप्रा उतर कर अपने क्लास की तरफ बढ़ जाती है, और सतीश पार्किंग( बाइक स्टैंड ) की तरफ बढ़ जाता है, पर आज वो बहुत बेचैन था उसे चुत चाहिए थी.... इसलिए वो अपने जेब से मोबाइल निकाल कर एक नम्बर. डायल करता है...

दूसरी तरफ से कॉल रिसीव होते ही- कहाँ है...
दूसरी तरफ से फीमेल की आवाज आती है- “घर पर हूँ क्यों क्या हुआ”?
सतीश - हाँ सुन आज कॉलेज कैंसिल कर दे, मे आ रहा हुन ५ मीनट. में..
ओर इतना कहकर वो कॉल डिसकनेक्ट कर देता है और अपनी बाइक कॉलेज से बाहर निकाल कर तेजी से चल देता है.....
ओर बाइक सीधे एक घर के आगे जाकर रूकती है... सतीश बाइक को लॉक करके तुरंत आगे बढ़ कर डोर बेल्ल बजाता है, उसकी जीन्स में एक उभार बना हुआ था, जिससे अन्दाजा लगाया जा सकता था की उसका लंड अभी भी खड़ा है...

तभी डोर खुलता है और सामने खड़े शख्स को देख कर उसका मुह खुला का खुला रह जाता है....


दोस्तो अब समय आ गया है कहानी के २ नये कैरेक्टर से आपको इंट्रोडुस करने का....

प्रियंका- उम्र- २० फिगर- ३४-२८-३४
एक बेहद ही खूबसूरत लडकि, पिछले एक महीने से प्रियंका और सतीश रिलेशनशिप में है... सतीश ने एक महीने में ही प्रियंका को अपने लंड की दासी बना लिया है...

नलिनी- उम्र- ४० फिगर- ३८-३२-३८
एक खूबसूरत और हॉट milf, और प्रियंका की माँ, पति विदेश में ही किसी कंपनी में जॉब करते हे, और साल में मुस्किल से २०-३० दिन के लिए आते हे, बेचारी अपनी चुत की आग नकली लंड की सहायता से बुजाति है...

चलिये अब कहानी की तरफ बढ़ते हे...

डोर ख़ुलते ही सतीश की आँखें आश्चर्य की अधिक्ता के कारन खुली की खुली रह जाती है...

उसके सामने एक औरत साड़ी में खड़ी थी जो की पारदर्शी थी और साथ में मैचिंग ब्लाउज जिसे केवल डीप कट कहना गलत होगा क्योकि वो हैवी डीप कट टाइप ब्लाउज था...

सतीश की नजर तो उसके उरोजों पर ही टिक जाती है, वो ब्लाउज कुछ छुपाने के लिए नहीं बल्कि एक्सपोस करने के लिए डिज़ाइन करा गया है, ब्लाउज में से उसका आधे से ज्यादा क्लीवेज और चूचियां दिखाइ दे रही थि, ब्लाउज को ऐसा डिज़ाइन करा गया था की निप्पल के ऊपर के बॉब्स पूरी तरह से एक्सपोस रहे....

सतीश का मुह खुला का खुला रह जाता है और वो एकटक उस औरत के ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने की कोशिश करते बॉब्स को घुरता रह जाता है...
तभी उसके कान में एक जानि पहचानी आवाज सुनाइ देती है...

नलिनी- “आरे सतीश बेटा तुम बाहर क्यों खड़े हो... अन्दर आओ”

सतीश का मुह तो खुला का खुला रह जाता है, जिस औरत को वो इतने देर से घुर रहा था वो कोई और नहीं बल्कि प्रियंका की माँ थी...

सतीश बिना कुछ बोले अंदर आ जाता है, नलिनी गेट बंद कर देती है, उसके होंठो पर भी एक विजयी मुस्कान थी क्युकी इस उम्र में भी उसने एक जवान लड़के के तोते उड़ा दिए थे.....

नलिनी अपने मन में- “कैसे घुर रहा था मेरे बॉब्स को जैसे की अभी अपने हाथो में लेकर निचोड देगा और अपने मुह में लेकर साबुत चबा जायेगा”...
ये सोचते ही नलिनी की चुत पनिया जाती है...

नलिनी- “तुम बैठो में अभी तुम्हारे लिए कॉफ़ी लेकर आती हु”...

ओर नलिनी अपनी हैवी गांड मटकाते हुये किचन की तरफ चल देती है... सतीश का तो उसके चुत्तड़ देख कर और बुरा हाल हो जाता है, उसका लंड जो पहले से ही स्टैंड मोड़ पे था अब जीन्स में उसे परेशानी दे रहा था...

ह.दी.- साला क्या माल है बे, अब तक इसपर नजर क्यों नहीं पड़ी मेरी... आये हाय क्या गांड मटकाती है यार मन कर रहा है की अभी जाकर इसकी गांड में अपना लंड पेल दु...

सतीश- “तुझे ऐसा नहीं लगता की तू आज कल मुझे कुछ ज्यादा ही परेशान करने लगा है”...

ह.दी.- “सतीश परेशान करने नहीं बल्कि तेरे दिमाग में उठ रहे खयालो से तुझे अवगत करने आता हु”....

सतीश- “मेरे दिमाग में ऐसा कोई ख़याल नहीं है, और हाँ ये प्रियंका की माँ है इन्हे चोदने का तो सतीश सपने में भी नहीं सोच सकता”....

ह.दी.- “क्यों बे जब अपनी माँ को चोदने की सोच सकता है तो ये तो फिर भी प्रियंका की माँ है”...

सतीश- “बात तो तू सही कह रहा है”....

ह.दी.- “बात तो मे हमेशा सही कहता हूँ बस तेरे दिमाग मे थोड़ी देर से घुसती है”....

तभी सतीश को एक हाथ अपने कंधे पर मह्सुश होता है और एक अवाज उसके कान में पड़ती है...
“क्या सोच रहे हो सतीश”?
सतीश पीछे मुद कर देखता है... पीछे प्रियंका अपने चेहरे पर एक खूबसूरत सी स्माइल लिए ब्लैक टॉप और स्कर्ट पहने खड़ी थी... उस ब्लैक टॉप में जो की उसकी नैवल से काफी ऊपर ही ख़त्म हो गया था, प्रियंका काफी सेक्सी लग रही थि, उसका गोरा चिकना पेट् और सेक्सी नैवल देख कर तो किसी का भी खड़ा कर देती फिर सतीश तो वैसे ही काफी बड़ा ठरकी था... फिर सतीश की नजर निचे जाती है, प्रियंका ने मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी जिससे उसकी गोरी मांसल जांघे दिखाइ दे रही थी...

सतीश अपने लंड को एडजस्ट करते हुये अपने मन में- “साला आज ये माँ बेटी तो मेरा झड़वा कर ही रहेगी”....

अब प्रियंका सतीश के बारबार में आकर बैठ जाती है, और उसके जिस्म की भीनी खुशबू सतीश के दिमाग में बस जाती है....

प्रियंका- “तुमने जवाब नहीं दिया, क्या सोच रहे थे”?...

सतीश उसे कोई जवाब नहीं देता बस उसके पिंक होंठो की तरफ देखता रहता है...

प्रियंका- “ऐसे क्या देख रहे हो”?..

ओर आगे की बात उसके के होंठो में घुट जाती है, सतीश ने एक दम से प्रियंका के सर को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खिंच लिया और अपने जलते हुए लब प्रियंका के लबो पे रख देता है और उसके होठो को चुस्ने लगता है..... प्रियंका सतीश की इस हरकत से चौक जाती है, उसकी आँखे आस्चर्य से फ़ैल जाती हे... आज सतीश पर तो एक अलग ही भुत सवार था वो जंगलियों की तरह प्रियंका के होंठो को चुस रहा था तभी सतीश प्रियंका के होंठो को बाईट करता है, प्रियंका के शरीर में एक दर्द की लहर दौड जाती है.... और प्रियंका उसको पीछे धकेल देती है...

प्रियंका अपने होंठ पर निकल आये खुन को पोछते हुये- “पागल हो गये हो क्या? थोड़ी देर कण्ट्रोल नहीं कर सकते क्या, माँ देख लेती तो”...

सतीश- “क्या करू तुम्हारे जूसी होठ देख कर कण्ट्रोल नहीं हुआ”...

तभी नलिनी कॉफ़ी लेकर आ जाती है...
नलिनी- “क्या बातें हो रही हैं आपस में”...?

सतीश- “कुछ खास नहीं आंटी, बस ऐसे ही नार्मल बात चित हो रही थी... वैसे आप कही बाहर जा रही हैं क्या”...?

नलिनी- “नहीं तो क्यों तुम्हे ऐसा क्यों लगा”...?

सतीश- “नहीं बस ऐसे ही लगा तो पूछ लिया, वैसे आज आप इस साड़ी में काफी स... सुन्दर लग रही है”...

नलिनी- “कहा बेटा अब में बूढी हो गई हु”...

सतीश- “ये आपसे किसने कहा आंटी आप तो इतनी सेक्सी लग रही हो की कोई भी आपको २८ से ज्यादा नहीं कह सकता”...

उसकी बात सुनकर जहा नलिनी के चेहरे पर स्माइल आ जाती है वहि प्रियंका सतीश को घुर कर देखने लगती है...

नलिनी- “हट झूटा कही का शर्म नहीं आती तुझे मेरा मजाक बनाते हुये”....

सतीश- “कसम से आंटी मैं सच कह रहा हु... और आपको यकीन ना हो तो आप ऐसे ही बाहर घुमने चले जाओ, देख लेना हर एक नजर बस आप पर ही टिक जाएगी”....

वैसे ये बात तो नलिनी को पता थी की जिस रोड से वो गुज़रती है वहा पर सब की निगाहें बस उसी पर टिक जाती है पर सतीश के मुह से उसे अपनी तारीफ सुन्ना काफी अच्छा लग रहा था...

सतीश तो पता नहीं अभी नलिनी को कितने चने के झाड़ पर चढाता पर तभी प्रियंका बीच में ही बोल पड़ती है...

प्रियंका- “माँ हम दोनों ऊपर स्टडी करने जा रहे हैं प्लीज् हमे डिस्टर्ब मत करना”...

नलिनी- “ठीक है बेटा तुम जाकर स्टडी करो.... और सतीश थँक्स फॉर दी कम्प्लीमेंट”...

प्रियंका सतीश का हाथ पकड़ कर उसे अपने रूम में ले जाती है... और डोर को अंदर से लॉक करके सतीश की पीठ और हाथ पर घुसे मारते हुये...

प्रियंका- “बेशरम इंसान शर्म नहीं आई तुम्हे मेरी माँ से फ़्लर्ट करते हुये”....

सतीश प्रियंका का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खिंच लेता है जिससे प्रियंका के बॉब्स सीधे सतीश की छाती से जा टकराते हे, और उसके निप्पल सतीश की कठोर छाती से लग दब जाते हैं जिससे प्रियंका के मुह से एक मस्ती भरी आह निकल जाती है...

सतीश प्रियंका की पीठ पर अपने हाथ फेरते हुये
सतीश- “क्या करू यार तेरी माँ लग ही इतनी सेक्सी रही थी, की मे अपने आप को उनकी तारीफ करने से, रोक ही नहीं पाया”....

प्रियंका- “बहुत बड़ा कमीना है तू मेरी माँ पे अपनी बुरी नजर रखता है... तभी तो साला ये आज पहले से ही खड़ा हुआ है”...
प्रियंका सतीश के खड़े लंड को जो की उसे अपनी चुत पर स्कर्ट पे से मह्सुस हो रहा था, अपने हाथ से सहलाने लगती है...

सतीश अब अपने हाथ से उसके चूतडो को मसलते हुये
सतीश- “वैसे इसके खड़े होने के पीछे का राज केवल तेरी माँ ही नही, बल्कि तू भी है, आज तो तू भी गजब का माल लग रही है”...
ओर इसी के साथ सतीश उसके चूतडो को अपने हाथो में लेकर बुरी तरह मसल देता है, जिससे प्रियंका के मुह से एक चीख निकल जाती है....

प्रियंका- “एआइइइ... थोड़ा आराम से सतीश में कही भागे थोड़ी जा रही हु”...

सतीश- “साली भाग के जायगी भी कहा”...
और इसी के साथ सतीश प्रियंका के होठो को अपने होठो में लेकर चुस्ने लगता है....
सतीश आज बहुत बुरी तरह से प्रियंका के होठो को चुस रहा था...

सतीश आज सुबह से ही बहुत उत्तेजित था और उसे अब अपने आपको कण्ट्रोल करना मुस्किल था, सतीश किस तोड़कर पीछे हटता है और फिर टॉप को पकड़ कर निकाल देता है और फिर उसकी स्कर्ट को भी प्रियंका की बॉडी से अलग कर देता है... प्रियंका भी उसका पूरा साथ दे रही थी...

अब प्रियंका केवल रेड कलर की ब्रा और पेन्टी में सतीश के सामने थी... उसके उन्नत वक्ष रेड ब्रा में बहुत ही आकर्षक लग रहे थे... उस समय अगर कोई संन्यासी भी उसे देख लेता तो अपना लंड उसकी चुत में डाल कर उसकी चुदाई कर देता... उसकी नंगी मांसल जांघे बहुत ही सेक्सी लग रही थी... प्रियंका का एक एक अंग प्यार करने लायक था...


पर अभी सतीश का मूड ओरल सेक्स करने का बिलकुल भी नहीं था वो तो बस अपने लंड को चुत में डालकर चुदाई करना चाहता था...

ओर वो करता भी ऐसा ही है... सतीश तेजी से उसके ब्रा का हुक खोल कर ब्रा को प्रियंका के बदन से अलग कर देता है... और फिर निचे आकर उसकी पेन्टी को भी निचे खिसका देता है प्रियंका भी अपने पैर उठा कर उसे पेन्टी निकालने में हेल्प करती है... अब प्रियंका सतीश सामने पूरी नुड थी और उसका संगेमर्मर से तराशा गया बदन बहुत ही मादक था... सतीश अब भी उसके किसी अंग को हाथ तक नहीं लगाता...

प्रियंका सतीश के इस रूप से बहुत आस्चर्य चकित थि, सतीश हमेशा ओरल सेक्स करते हुए उसके कपडे उतरता था फिर उसे फ़क करता था पर आज सतीश ओरल सेक्स बिलकुल नहीं कर रहा था...

पता नहीं आज सतीश पर कैसा जुनून सवार था वो प्रियंका को पूरा नंगा करने के बाद अब तेजी से अपने कपडे उतारने सुरु कर देता है....

सतीश अब फुल नुड प्रियंका के सामने था, और उसका लौडा पूरी तरह से खड़ा अब खुली हवा में सांस ले रहा था...

प्रियंका का सबसे प्यारा खिलौना और उसकी सबसे लजीज लोलीपोप अब उसके सामने थी... प्रियंका की आँखों में चमक आ जाती है और वो आगे बड़कर अपने लोलीपोप को पकड़ लेती है....

सतीश- “प्लीज् प्रियंका अभी इस सब का टाइम नहीं है, मैंने अगर अभी चुदाई नहीं की तो मे मर जाऊंगा”...

प्रियंका उसकी बात को समझ कर अपने हाथ बेड के किनारे पर रख कर झुक जाती है, और उसके सामने घोड़ी बन जाती है.... अब प्रियंका की चुत सतीश के सामने थी सतीश आगे बढ़ कर लंड के सुपाडे को उसकी चुत के मुह पर टीका कर एक जोर का धक्का मारता है...

लंड प्रियंका की चुत को फैला कर आधा अंदर चला जाता है और इसी के साथ प्रियंका के मुह से एक दर्द भरी चीख़ निकल जाती है...

प्रियंका- “आआईईईइ.... बहुत दर्द हो रहा है सतीश प्लीज् थोड़ा आराम से... आअह्ह्ह”

प्रियंका की चुत चुदाई का सोच कर और सतीश का लंड देख गिली तो हुई थि, पर इतनी गिली नहीं हुई थी की सतीश का लंड ले सके, और ऊपर से सतीश का लंड भी चिकना नहीं था जिससे वो बहुत कसा हुआ चुत में अंदर गया था..

सतीश प्रियंका के दर्द की परवाह न करते हुए अपना पूरा लंड अंदर पेल देता है.. प्रियंका के मुह से दर्द भरी चीख़ निकल जाती है... पर सतीश तो अब ताबड़तोड़ धक्के मारते हुये प्रियंका की चुदाई करने लगता है...

प्रियंका को अपनी चुत में जलन हो रही थि, और उसकी आँखों से दर्द की अधिक्ता के कारन आँसु निकल आये थे, पर वो सतीश को रुकने को नहीं कहती है....

सतीश अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाल कर अंदर पेल रहा था... इसी तरह वो अपने लंड को तेजी में अंदर बाहर कर रहा था...

आज तो सतीश दरिन्दा बन गया था वो प्रियंका के दर्द की परवाह किये बिना उसे बुरी तरह से चोद रहा था... सतीश प्रियंका में अपनी माँ सोनाली को देख कर उसकी इतनी ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था...

सतीश प्रियंका के बाल पकड़ लेता है और अपने लंड को पूरी तेजी में अंदर बाहर करने लगता है.... पूरे कमरे में प्रियंका की दर्द भरी चीखें गुंज रही थी...

पर वो चीखें तो सतीश के लिए आग में घी जैसा काम कर रही थी और उसके धक्के में तेजी आ जाती है और १० मीनट की चुदाई करने के बाद उसका लंड चुत में ही अपना माल गिरा देता है...

सूबह से फ़टने को तैयार लंड अब फट पडता है और अपना सारा लावा उगल कर शांत हो जाता है... प्रियंका लंड के चुत से निकलते ही बेड पर पीठ के बल लेट जाती है... सतीश की तो जैसे जान ही निकल गई हो वो भी जाकर प्रियंका के सीने पर अपना सर रख कर लेट जाता है...
सतीश प्रियंका के सीने पर सर रख कर लेट जाता है, प्रियंका और सतीश अपनी उखड़ी हुई साँसों को कण्ट्रोल करने में लगे हुए थे, प्रियंका सतीश के बालों में हाथ फिरा रही थी..... सतीश अब बहुत अच्छा महसुस कर रहा था और अब उसे फील होता है की उसने प्रियंका को कितना दर्द दिया है....


सतीश गर्दन उठकर प्रियंका की तरफ देखता है, प्रियंका की आँखें अभी भी लाल थी जोकि बता रही थी की दर्द की बजह से वो काफी आँसु बहा चुकी हें..... सतीश थोड़ा ऊपर बढ़ कर प्रियंका के होंठो पर एक किस करता है.....

सतीश किस तोड़कर- “आई एम सॉरी”...

प्रियंका बस मुस्कुरा देती है, और सतीश के होंठो को अपने होंठो में लेकर चुस्ने लगती है.... थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे के होंठ चुस्ने के बाद वो दोनों अलग होते हे....

प्रियंका- “एक बात पुछु”....?

सतीश-“ह्म्मम्”

प्रियंका- “आज तुम्हे हुआ क्या था.... आज से पहले तो तुमने ऐसे सेक्स कभी नहीं किया, पर आज तो ऐसा लग रहा था जैसे, तुम नहीं कोई और ही मेरे साथ सेक्स कर रहा है”...

सतीश कोई जवाब नहीं देता और प्रियंका के दोनों चूचियों को अपने हाथो में लेकर मसलने लगता है और एक निप्पल को अपने मुह में लेकर चुसना स्टार्ट कर देता है..... प्रियंका के मुह से एक दम से सिसकारी फ़ुट पड़ती है....

प्रियंका- “इस्स्स्सस्छ्हःह”

प्रियंका सतीश के सर को अपने चूचि पेर दबाने लगती है और सतीश भी तेजी में उसकी दोनों चूचियों को मसल रहा था और एक एक करके चुस और काट रहा था और इसी के साथ प्रियंका की सिसकारियां भी तेज हो जाती हे.......

प्रियंका- “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्..... उफ्फ्”

अब सतीश उसके पेट् पर से अपनी जीभ फिराते हुए नीचे की तरफ बढ्ने लगता है... और उसकी नैवल(नाभि) के पास पहुँच कर थोड़ी देर उसकी गहरी नाभि के चरो तरफ जीभ फिराता है और फिर उसमे अपनी जीभ दाल कर उसे चुस्ने लगता है.... सतीश प्रियंका की नाभि को ऐसे चुस राह था जैसे वो नाभि न होकर चुत को चुस रहा हो....

थोड़ी देर तक नाभि को चुस्ने के बाद सतीश नीचे बढ़ता है और फिर उसकी चुत के सामने आकर रुक जाता है.... थोड़ी देर तक चूत को देखने के बाद वो उसकी क्लीट को अपने मुह में लेकर चुस्ने लगता है..... अब तो प्रियंका का बुरा हाल हो जाता है वो अपना सर इधर उधर पटकने लगती है और अपने दोनों हथेलियों में बेडशीट को पकड़ कर मचलने लगती है.......

सतीश कभी अपनी जीभ उसकी क्लीट पर फिराता और कभी उसे मुह में लेकर चूसता और काटने लागत, प्रियंका की चुत से दरिया बह रहा था.... अब प्रियंका से कण्ट्रोल नहीं होता और वो अपने हाथ से सतीश के बालों को पकड़ कर अपनी चुत पर दबा देता है पर सतीश उसकी चुत को नहीं चुस्ता, प्रियंका ग़ुस्से में सतीश के मुह को अपनी चुत पर घीसने लगती है....

प्रियंका- “ओहः.... सतीश प्ल्ज़ सक इट.... चुसो इसे....

सतीश अब अपनी जीभ निकल कर उसकी चुत पर फिराता है चुत का टिट मिलते ही सतीश अपने होठो में उसकी चुत को लेकर चुस्ने लगता है... प्रियंका की बॉडी अकड जाती है और एक चीख़ के साथ प्रियंका का बांध तूट जाता है.... सतीश प्रियंका के सरे कामरस को पि जाता है....

अब प्रियंका का शरीर शांत पड़ गया था, उसे बहुत मजा आया था इस चुत चूसाई में, वो अब अपनी साँसे कण्ट्रोल कर रही थी....

ईधर सतीश प्रियंका की चुत से एक एक बून्द चाट जाता है..... और फिर अपने हाथो से चुत की दोनों फाकों को फैला कर उसमे अपनी जीभ दाल देता है और अपनी जीभ को अंदर बाहर करने लगता है.... सतीश अपनी जीभ निकल कर अपनी दो उंगलियाँ उसकी चुत में दाल देता है....

प्रियंका- “आह”....

सतीश तेजी से ऊँगली अंदर बाहर करने लगता है और चुत के दाने को अपने होंठो से चुस्ने लगता है....

प्रियंका भी अब गरम होने लगती है.... अब सतीश उठ कर प्रियंका को बेड के किनारे ले आता है.... अब प्रियंका पीठ तक तो बेड पर थी पर उसके पैर बेड से नीचे लटक रहे थे, सतीश जमीन पर खड़े होकर उसके पैरों को ऊपर कन्धो की तरफ फोल्ड कर देता है, प्रियंका अपने पैरों को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर सतीश की हेल्प करती है, अब प्रियंका की कामरस बहति चुत सतीश के सामने थी... प्रियंका की गुलाबी चुत की दोनों फाकें एक दूसरे से चिपकी हुई थि, सतीश अपने लंड का टोपा उसकी चुत पर रख कर उसपर घीसने लगता है...

प्रियंका- “श्... अब और मत तडपाओ जान प्लीज् फ़क मि”...

सतीश- “हिंदी मे बोलो ना डार्लिंग, थोड़ी गालियों के साथ”.....

प्रियंका- “अब लंड चुत मे दाल भी दे भोसडी के, ऐसे खड़े खड़े क्यों अपनी माँ चूदा रहा है”....

सतीश- “तेरी माँ की चोदुं, साली रंडी कही की.... ले मेरा लौडा लंच कर रहा है”....

ओर इसी के साथ सतीश एक ही धक्के मे अपना लंड खुट्टो तक अंदर पेल देता है.... और इसी के साथ प्रियंका की एक दर्द भरी चीख़ निकल जाती है... पर सतीश उसके दर्द की परवाह किये बिना अपना लंड अंदर बाहर करने लगता है.... प्रियंका को दर्द हो रहा था पर वो सतीश को रुक्ने को कहने की जगह उसे और भडकाने लगती है....

प्रियंका-“आह......यमः.... थोड़ा जोर लगा झानटू गांड मे दम नहीं रहा क्या अभी तो बहुत बड़ा चड़ा कर बोल रहा था की मेरी माँ चोद देगा... साले तेरे में दम नहीं की तू मेरी माँ चोद सके.....

सतीश- “साली रंडी आज तेरी चुत का भोसडा न बनाया तो मेरा नाम भी सतीश नहि”...

ओर इसी के साथ सतीश प्रियंका की गर्दन को अपने दोनों हाथो मे पकड़ कर अपने धक्को की स्पीड बड़ा देता है.... “ये ले साली, और ले”......

प्रियंका की चीखे और सिसकियाँ कमरे मे गूँजने लगती है.... सतीश प्रियंका के होंठो को अपने होंठो मे लेकर उन्हें चुसना सुरु कर देता है.... थोड़ी देर होंठ चुस्ने के बाद सतीश जब अपनी गर्दन ऊपर उठता है तो अक्समात उसकी नजर विंडो पर पड़ती है जोकि थोड़ी सी खुली हुई थि, सतीश को वहा पर किसी की परछाई मेहसुस होती है, जब वो ध्यान देता है तो देखता है की खिड़की पर प्रियंका की सेक्सी माँ खड़ी हुई उनकी चुदाई को देख रही थि, पहले तो सतीश की गांड फट जाती है पर जिन नजरो से वो सतीश और प्रियंका की चुदाई देख रही थी उससे सतीश को अन्दाजा हो जाता है की वो काफी प्यासी हे....


सतीश वहा से अपनी नजरें हटा लेता है और ऐसा शो करता है जैसे उसने कुछ देखा ही नहीं हो और वो अपनी चुदाई जारी रखता है....

प्रियंका- “आह.... आई एम कमिंग......आह”

प्रियंका इतनी हार्ड चुदाई बरदास्त नहीं कर पाती और थोड़ी देर मे ही वो
पाणी छोड़ देती है........

सतीश- “क्या हुआ मेरी रंडी इतनी जल्दी झड गयी, अभी तो बहुत ताव दिखा रहि थी की मेरे में दम नहि, साली में तो तेरी माँ की चुत का भोसडा बनाने लायक दम रखता हुन, चल उठ और
लौडा चाट कर साफ़ कर मेरा.....

ओर इसी के साथ सतीश अपना लंड बाहर निकाल लेता है, वो कनखियों से
प्रियंका की माँ की हर हरकत पर नजर रखे हुए था, और उसने जानकार
अपणा लंड बाहर निकाला था ताकि अपना
मुसल लंड उसको दिखा कर उसकी चुत की आग और बड़ा सके.... और उसका
सोचना सही था प्रियंका की माँ की नजर
उसके मुसल पर ही अटक गई थि, वो उसको किसी भूखी पर पींजरे में कैद
शेरणी की तरह घुर रही थी जिसका
मन तो कर रहा था की वो अपने शिकार को झपट कर कच्चा चबा
जाये पर पींजरे की सलाख़ों के कारन वो ऐसा करने मे असमर्थ थी....

प्रियंका तुरंत उठ कर उसका मुसल जैसा लंड अपने हाथ मे ले लेती है,
ओर फिर अपनी जीभ निकालकर उसे ऊपर से निचे तक चाट कर उसपर से
अपणे चुत का रस साफ़ कर देती है, फिर
४-५ बार अपने हाथ से स्ट्रोक मारने के बाद फिर से अपने मुह मे
ले लेती है, और उसकी चूसा ई करना शुरू कर देती है.... ये सब देख कर
प्रियंका की माँ के आँखे फटी की फटी रह जाती हैं की कैसे उसकी बेटी इस
मुसल को पूरा अपने मुह में लेकर चूस रही थी.....

सतीश प्रियंका के सर पर हाथ रख कर उसको अपने लंड की तरफ
दबाते हुये- “आह.... क्या चुस्ती है तू साली”....
“ईस मामले में तो तूने प्रोफ़ेशनल रंडी को भी फेल कर दिया”....
चल अब बस कर और बेड पर चढ़ कर घोड़ी बन जा, अब मे तेरी पीछे से लुंगा....

प्रियंका घोड़ी बन जाती है, सतीश उसके पीछे आ जाता है और
पहले प्रियंका की गांड को अपने हाथो से मसलने लगता है....
ओर फिर चटाक से एक झन्नाटे दार थप्पड़
उसकी गांड पर लगा देता है....

प्रियंका-“आई.... क्या कर रहा है हरामि”.....?

सतीश-“हरामी कहती है साली.... अब देख मेरा हरामीपण”....

ओर फिर एक के बाद एक जोरदार थप्पड़ वो उसकी
गांड पर मारते चला जाता है और प्रियंका चिखती जाती है,
प्रियंका की गांड पूरी लाल करने के बाद वो थप्पड़ मारना
बन्द कर देता है... प्रियंका की गांड में दर्द के कारन जलन होने लगती है....

प्रियंका-“आई...उफ...मार डाला कुत्ते”....

सतीश- “देख कैसे बन्दरिया की तरह तेरा पिछवाडा लाल हो गया है”....

पहले सतीश झुक कर अपना मुह प्रियंका की चुत पर लगा
देता है, और उसे चाटने लगता है.... सतीश ये सब
जानकर कर रहा था क्योकि उसे पता था की खिड़की पर खड़ी नलिनी
ये सब देख रही है...

सतीश प्रियंका की क्लीट अपने मुह मे लेकर उसे चुस्ने लगता
ही और फिर अपनी जीभ उसकी चुत से लेकर गांड तक फिराता
हि, गांड के छेद पर सतीश की जीभ पड़ते हि, प्रियंका के मुह
से सिसकि निकल जाती है, इतना दर्द होने के बावजूद
ओ इस चूसाई से मस्ती में आ गई थी....

अब सतीश अपनी जीभ उसकी गुदा-द्वार पर फिराता है और फिर उसके छेद पर
थुक गिरा कर उसके छेद में अपनी जीभ डालकर उसे ढीला करने लगता है
शायद आज उसका मूड कुछ और ही था.... जिसकी भनक प्रियंका को भी लग गई थी....

प्रियंका- “ओह नो.... नहीं सतीश मे वहां पर नहीं करने दूँगी, वहां बहुत दर्द होता है”....

सतीश- “डोन्ट वरि डार्लिंग में वहा पर नहीं करूँगा”
मै तो बस तुम्हे मजे दे रहा था, क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा क्या????.....

प्रियंका-“श्.... बहुत अच्छा लग रहा है सतीश”....
सक इट...सक माय अस्स.......ओह्ह यस लाइक टिट......यमः

सतीश कुछ देर तक और उसकी गांड सक करता है,
उसके बाद वो अपनी पोजीशन ले लेता है और अपने
लंड को प्रियंका की चुत के छेद पे सेट करके एक धक्का
लागता है उसका आधा लंड इस धक्के से प्रियंका की चुत को
खोलते हुए अंदर चला गया था... और बाकि का आधा दूसरे धक्के में
अंदर चला जाता है... और फिर तो एक के बाद एक ताबड़तोड़ धक्के लगने शुरु हो जाते हे....

प्रियंका- “आह.....यमः........फासटर....

सतीश धक्के लगाते हुए अपनी एक ऊँगली से प्रियंका की
गांड को कुरेदने लगता है, थोड़ी देर तक गांड कुरेदने के बाद वो अपनी आधी ऊँगली को उसकी गांड में घुसेड़ देता है,
ओर फिर पूरी ऊँगली उसकी गांड में घुसेड़ कर अंदर बाहर करने लगता है....

प्रियंका इस हमले से चौंक जाती है- आह....”क्या कर रहा है हरामि”....
“हरामी.... मुझे तेरी नियत आज सही नहीं लग रही साले.... आह”
“जाकर अपनी माँ की गांड मारियो मे तुझे अपनी गांड मे लंड नहीं
डालने देणे वाली”........

अपनी माँ के बारे मे सुनकर सतीश की आँखों के सामने सोनाली की सुडोल गांड आ जाती है, और वो अपना लंड चुत में से
निकाल कर प्रियंका की गांड के छेद पे लगा देता है- “साली माँ के बारे मे कहती है”....
“वैसे तो तेरी गांड ना भी मारता पर साली अब तो तेरी गांड जरूर मारूंगा”.....

प्रियंका- “नहीं सतीश.... प्लीज् गांड मे नहि.......आई....ओह…मर गई साले कुत्ते”

प्रियंका की बात ख़तम होने से पहले ही सतीश अपना आधा लंड उसकी गांड मे पेल देता है, दर्द के कारन प्रियंका की चीख़ निकल जाती है वो तो सतीश ने कस कर उसकी
कमर को पकड़ लिया था, क्योकि उसे मालूम था की दर्द के कारन प्रियंका उसकी गिरफ़्त से छूटने का प्रयास करेगि..... और प्रियंका ऐसा कर भी रही थी उसने बहुत कोशिश करी
सतीश की गिरफ़्त से निकलने की पर सब बेकार, आखिर कार सतीश अपना लंड टोपे तक
बाहर निकल कर एक और जोरदार धक्का मारता है और इस बार पूरा लंड उसकी गांड
को चिरता हुआ जड़ तक अंदर घुस गया था... प्रियंका एक जोरदार चीख मारि और छट पटा कर अपने हाथ इधर उधर फेकने लगी...... और सतीश ने धक्के लगाने सुरु कर दिये....

सतीश पर उसके दर्द का कोई असर नहीं हो रहा था उसकी आँखों के
सामने तो उसकी माँ की गांड थी जिसमे लंड दाल कर वो खूब तेजी से पेल रहा था.....
सतीश को परम आनंद की अनुभुति हो रही थी.... उसका लंड बहुत कसा हुआ प्रियंका की
गांड मे अंदर बाहर हो रहा था.... वो टोपे तक अपने लंड को बाहर निकालता और फिर
तेजी मे जड़ तक अंदर पेल देता, अब प्रियंका को मजे आने लगे थे..... और उसकी दर्द भरी
चीख़ें अब सिस्कियों मे बदल गई थी..
खिड़की पर खड़ी नलिनी को तो अपनी आँखों पर विस्वास ही नही हो रहा था की कैसे उसकी फूल जैसी नाजूक बेटी इतना बड़ा मुसल अपनी गांड
मै लेकर मजे कर रही है... और उसके हाथो की स्पीड और ज्यादा बढ़ जाती है,
जी हाँ नलिनी अपनी चुत में उँगलियाँ घुसेड कर अपनी चुत की आग को ठण्डी
करने मे लगी हुई थि, नलिनी को शक तो बहुत समय से था इन दोनों पर की ये
दोनो बंद कमरे मे स्टडी ही करते है या कुछ और पर वो कभी पता न कर
सकी क्योकि उसे कभी कोई जगह ही न मिली जिससे वो अंदर झाँक सके और रूम भी
साउंड प्रूफ था जिससे आवाज भी बाहर नहीं आती थि, और आज भी वो यही चेक करने
आई थी और किस्मत से उसे आज खिड़की खुली मिल गयी, और जब नलिनी ने वहा से अंदर झांका तो उसके
पेरों तले से जमीन खिसक गई अंदर उसकी बेटी चुद रही थि, उसका शक
सही था, नलिनी को बहुत गुस्सा आता है और वो इन दोनों की क्लास लेने की सोचती है....
नलिनी वहा से हटणा तो
चाहति है, पर अंदर की जबरदस्त चुदाई देख कर वो गरम होने
लगति है और वो वहां से हट्ने की जगह लाइव शो देखने लगती है,
उसकी बर्षो से प्यासी चुत से तो जैसी झरना सा फुट पडता है... और वो
अपनी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठा
कर अपनी चुत मे ऊँगली दाल कर अंदर का सिन देखते हुए अपनी चुत
की आग को ठण्डा करने लगती है.... और वो अंदर की चुदाई को देखते हुए
४-५ बार झड भी चुकी थि, और अब वो इमेजिन कर रही थी जैसे की सतीश उसकी बेटी
की नहीं बल्कि उसकी चुदाई कर रहा है.....



सतीश वहा से अपनी नजरें हटा लेता है और ऐसा शो करता है जैसे उसने कुछ देखा ही नहीं हो और वो अपनी चुदाई जारी रखता है....

प्रियंका- “आह.... आई एम कमिंग......आह”

प्रियंका इतनी हार्ड चुदाई बरदास्त नहीं कर पाती और थोड़ी देर मे ही वो
पाणी छोड़ देती है........

सतीश- “क्या हुआ मेरी रंडी इतनी जल्दी झड गयी, अभी तो बहुत ताव दिखा रहि थी की मेरे में दम नहि, साली में तो तेरी माँ की चुत का भोसडा बनाने लायक दम रखता हुन, चल उठ और
लौडा चाट कर साफ़ कर मेरा.....

ओर इसी के साथ सतीश अपना लंड बाहर निकाल लेता है, वो कनखियों से
प्रियंका की माँ की हर हरकत पर नजर रखे हुए था, और उसने जानकार
अपणा लंड बाहर निकाला था ताकि अपना
मुसल लंड उसको दिखा कर उसकी चुत की आग और बड़ा सके.... और उसका
सोचना सही था प्रियंका की माँ की नजर
उसके मुसल पर ही अटक गई थि, वो उसको किसी भूखी पर पींजरे में कैद
शेरणी की तरह घुर रही थी जिसका
मन तो कर रहा था की वो अपने शिकार को झपट कर कच्चा चबा
जाये पर पींजरे की सलाख़ों के कारन वो ऐसा करने मे असमर्थ थी....

प्रियंका तुरंत उठ कर उसका मुसल जैसा लंड अपने हाथ मे ले लेती है,
ओर फिर अपनी जीभ निकालकर उसे ऊपर से निचे तक चाट कर उसपर से
अपणे चुत का रस साफ़ कर देती है, फिर
४-५ बार अपने हाथ से स्ट्रोक मारने के बाद फिर से अपने मुह मे
ले लेती है, और उसकी चूसा ई करना शुरू कर देती है.... ये सब देख कर
प्रियंका की माँ के आँखे फटी की फटी रह जाती हैं की कैसे उसकी बेटी इस
मुसल को पूरा अपने मुह में लेकर चूस रही थी.....

सतीश प्रियंका के सर पर हाथ रख कर उसको अपने लंड की तरफ
दबाते हुये- “आह.... क्या चुस्ती है तू साली”....
“ईस मामले में तो तूने प्रोफ़ेशनल रंडी को भी फेल कर दिया”....
चल अब बस कर और बेड पर चढ़ कर घोड़ी बन जा, अब मे तेरी पीछे से लुंगा....

प्रियंका घोड़ी बन जाती है, सतीश उसके पीछे आ जाता है और
पहले प्रियंका की गांड को अपने हाथो से मसलने लगता है....
ओर फिर चटाक से एक झन्नाटे दार थप्पड़
उसकी गांड पर लगा देता है....

प्रियंका-“आई.... क्या कर रहा है हरामि”.....?

सतीश-“हरामी कहती है साली.... अब देख मेरा हरामीपण”....

ओर फिर एक के बाद एक जोरदार थप्पड़ वो उसकी
गांड पर मारते चला जाता है और प्रियंका चिखती जाती है,
प्रियंका की गांड पूरी लाल करने के बाद वो थप्पड़ मारना
बन्द कर देता है... प्रियंका की गांड में दर्द के कारन जलन होने लगती है....

प्रियंका-“आई...उफ...मार डाला कुत्ते”....

सतीश- “देख कैसे बन्दरिया की तरह तेरा पिछवाडा लाल हो गया है”....

पहले सतीश झुक कर अपना मुह प्रियंका की चुत पर लगा
देता है, और उसे चाटने लगता है.... सतीश ये सब
जानकर कर रहा था क्योकि उसे पता था की खिड़की पर खड़ी नलिनी
ये सब देख रही है...

सतीश प्रियंका की क्लीट अपने मुह मे लेकर उसे चुस्ने लगता
ही और फिर अपनी जीभ उसकी चुत से लेकर गांड तक फिराता
हि, गांड के छेद पर सतीश की जीभ पड़ते हि, प्रियंका के मुह
से सिसकि निकल जाती है, इतना दर्द होने के बावजूद
ओ इस चूसाई से मस्ती में आ गई थी....

अब सतीश अपनी जीभ उसकी गुदा-द्वार पर फिराता है और फिर उसके छेद पर
थुक गिरा कर उसके छेद में अपनी जीभ डालकर उसे ढीला करने लगता है
शायद आज उसका मूड कुछ और ही था.... जिसकी भनक प्रियंका को भी लग गई थी....

प्रियंका- “ओह नो.... नहीं सतीश मे वहां पर नहीं करने दूँगी, वहां बहुत दर्द होता है”....


सतीश- “डोन्ट वरि डार्लिंग में वहा पर नहीं करूँगा”
मै तो बस तुम्हे मजे दे रहा था, क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा क्या????.....

प्रियंका-“श्.... बहुत अच्छा लग रहा है सतीश”....
सक इट...सक माय अस्स.......ओह्ह यस लाइक टिट......यमः

सतीश कुछ देर तक और उसकी गांड सक करता है,
उसके बाद वो अपनी पोजीशन ले लेता है और अपने
लंड को प्रियंका की चुत के छेद पे सेट करके एक धक्का
लागता है उसका आधा लंड इस धक्के से प्रियंका की चुत को
खोलते हुए अंदर चला गया था... और बाकि का आधा दूसरे धक्के में
अंदर चला जाता है... और फिर तो एक के बाद एक ताबड़तोड़ धक्के लगने शुरु हो जाते हे....

प्रियंका- “आह.....यमः........फासटर....

सतीश धक्के लगाते हुए अपनी एक ऊँगली से प्रियंका की
गांड को कुरेदने लगता है, थोड़ी देर तक गांड कुरेदने के बाद वो अपनी आधी ऊँगली को उसकी गांड में घुसेड़ देता है,
ओर फिर पूरी ऊँगली उसकी गांड में घुसेड़ कर अंदर बाहर करने लगता है....

जबकि अंदर प्रियंका मजे मे अपनी गांड हिला हिला कर अपनी गांड मे लंड
ले रही थी-“आअह्हह्ह्ह्हह.....बहुत बड़ा मादरचोद है रे तु... आखिरकार
तूने गांड मे लंड पेल ही दिया,..... ऊम्म्ह.... बहुत मजा आ रहा जान और तेज,......
फ़क माय अस्स...ओहह येस.....हारडर.....यमः”

सतीश तो जैसे सातवे आसमान पर था, वो अपने धक्को की स्पीड और
बढा देता है..... और १० मिनट की चुदाई के बाद सतीश- “मे झरने वाला हूँ प्रियंका”....

प्रियंका- “मे भी सतीश......आंह्’......

ओर फिर सतीश अपना लास्ट शॉट लगा कर अपना लंड गांड मे
पुरा अंदर दाल कर उसमे ही झड़ने लगता है... और इसी के साथ प्रियंका भी अपनी
गंद मे सतीश के माल को मह्सुश कर झड़ने लगती है.......

सतीश अपना सारा माल उसकी गांड मे गिराने के बाद अपना
लंड प्रियंका की गांड से निकाल लेता है और साइड मे बेड पर लुडक जाता है,
ओर अपनी आँखे मुंदकर अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगता है.... प्रियंका भी
सतीश के सीने पर अपना सर
रखकर अपनी उखड़ी साँसे कण्ट्रोल करने लगती है....

थोड़ि देर मे जब सतीश की साँसे क़ाबू मे आती है तो उसे नलिनी का ध्यान आता
ही और वो तिरछी नजर से खिड़की की तरफ देखता है, पर नलिनी तो इनदोनो के
झडने के साथ ही झड गई थी और जब ये दोनों अपनी साँसे कण्ट्रोल करने मे
लगे हुए थे तभी वो वहा से अपने चुत से निकले रस को साफ़ करके निकल लेती है....

सतीश के होंठो पर कुछ सोच कर मुस्कान फैल जाती है.... इधर प्रियंका को जब होश
आता है तो वो अपने सर को सतीश के सीने से हटा कर उसके होंठो पर एक छोटा सा कीस करके- “बहुत गंदे हो तुम्, हमेशा अपने मन की करते रहते हो मेरी तो कोई चिंता ही नहीं है तुम्हे”....

सतीश- “क्यों तुम्हे मजा नहीं आया”....

प्रियंका-“मजा तो बहुत आया पर पहले दर्द भी बहुत हुआ”....

सतीश- “अरे जान इस खेल मे जितना ज्यादा दर्द शुरु मे मिलता है उतना ही मजा बाद मे आता है..... वैसे कल का क्या प्लान है,...
मै सोच रहा था की कल भी एक राउंड हो जाये तो”.....

प्रियंका-“भूल जाओ”....

सतीश- “क्यों क्या हुआ..... नाराज हो मुझसे”...

प्रियंका- “ऐसी बात नहीं है, वो कल मुझे अपनी कजिन की बर्थडे
पार्टी मे जाना है, कल सुबह निकलूँगी और फिर २-३ दिन बाद ही आउंगी”....

सतीश-“२-३ दिन बाद, तो २-३ दिन तक मे क्या करुन्गा”....

प्रियंका-“वही जो पहले करते थे- हस्तमैथुन.... ह... ह.... ह”

सतीश-“अच्छा बहुत मजा आ रहा है न मेरी हालत पर हसले पर जब लौट कर आएगी तो तेरी माँ-बहन एक कर दूँगा”...

पहले दोनों अपने-अपने कपडे पहनते हे, और प्रियंका सतीश को
गुड बाय किस देती है... और सतीश निचे चल देता है और प्रियंका ऊपर जो
धमाचौकडी हुई थी उसके सबुत मिटाने मे लग जाती है....

सतीश जब निचे पहुँचता है तो नलिनी को सोफ़े पर बैठा
पाता है वो कोई मैगज़ीन पड़ रही थी... सतीश को निचे आता
देख नलिनी अपनी मैगज़ीन निचे रखते हुये....

नलिनी- “हो गई स्टडी बेटा”...

सतीश- “जी औंटी”....

नलिनी- “काफी मेहनत कर रहे हो”...

सतीश- “जी वो कुछ प्रॉब्लेम्स काफी टफ थी जिन्हे सोल्व करने मे टाइम लग गया”...

नलिनी- “हु... वो तो मे देख ही रही हूँ की तुम काफी तन्न मन
लगा कर स्टडी कर रहे हो”....
तन पर काफी जोर दिया था नलिनी ने....

सतीश- “क्या करे आंटी अच्छे रिजल्ट के लिए तन्न मन तो लगाना ही पडेगा”...

नलिनी-“हमं....तब तो काफी थक भी जाते होगे, और अब तो और मेहनत करने का दम भी नहीं रहा होगा और न ही तुम्हारी कलम में इतनी इंक़”...

सतीश- “अब इतनी मेहनत करेंगे तो थोड़ी थकन तो होगी ही,....
पर मेहनत करने के लिए मे हमेशा तैयार रहता ह, अभी भी ५-६ घंटे बिना रुके मेहनत कर सकता हु....
और कलम की चिंता मत कीजिये, उसमे इंक की कभी कोई कमी नहीं होति,
ओर अगर इंक निकल भी जाये तो, ५-१० मिनट मे दुबारा भर जाती है”....
नलिनी- “काफी स्टैमिना है तुममे”.....
सतीश- “वो तो आप देख ही चुकी हे.....
नलिनी एक दम शॉक होते हुये- “क्या??? सतीशने कब देख....
सतीश- अरे आज देखा नहीं आपने की आज सतीशने नॉन-स्टॉप २.३० घंटे तक
आपकी बेटी के साथ स्टडी की है”....
नलिनी- “तो कल तो तुम आ ही रहे हो न मेरी बेटी को स्टडी करने”....
सतीश-“कल लेकिन”.....
नलिनी-“लेकिन वेकिन कुछ नहीं कल तुम आ रहे हो, मे चाहती हु की तुम
मेरी बेटी को, एक दम एक्सपर्ट बना दो”....

सतीश- “लेकिन औंटी”....
इससे पहले की सतीश कुछ बोलता उसका हरामी दिमाग उसे चेतने आ जाता है....

ह.दी.- “अबे भोसडी के कब तुझे अकल आयगी, साले जब देखो अपने लंड पे
कुल्हाड़ी मारता रहता है”....

सतीश-“अरे यार अब तू कहा से आ गया, दिमाग चाटने”...

ह.दी.- “दिमाग तेरे पास हो तो चाटूँगा ना, पर भोसडी के तेरे ऊपर के माले मे,
भूसा ही भुसा भरा हुआ है,...... मे तो तुझे ये बताने आया हु, की ये साली तुझे
खुली दावत दे रही है की कल आओ और मेरी फुद्दी मार लो और तू साले लोडुपंती
दिखा रहा है”....

सतीश- “तुझे साले यही सब सूझता है क्या...
ओ मुझसे कल प्रियंका के साथ पढ़ने आने के लिए बोल रही हे, जब्कि वो कल बाहर अपनी कजिन के यहाँ जा रही है”....

ह.दी.- “साले चूतिया, चुतीया नंदन है तु....
अबे लोडु, ये उसकी अम्मा है इसे नहीं पता होगा क्या की इसकी बेटी कल बाहर जा रही है, और वैसे भी ये तुम दोनों को
स्टडी करते हुए देख चुकी की तुम कैसी स्टडी करते हो...
इसलिए लोडु ये तुझे अपनी लौंडिया को पड़वाने नहीं बल्कि अपनी फड़वाने के लिए बुला रही है,... क्योकि कल घर पर कोई
नही होगा, और इससे अच्छा मौका और नहीं हो सकता, इस रंडी के लिए अपनी
चुत मरवाने का”.....

सतीश- “ऊह्ह्ह्हह्ह्.... हाँ ये तो सतीशने सोचा ही नहीं था”....

ह.दी.- “मादरचोद तू सोचता ही कब है”....

नलिनी- “क्या हुआ बेटा क्या सोच रहे हो.... ?
कल आ रहे हो ना मेहनत करने के लिए??
ये बात उसने बहुत ही सेक्सी आवाज मे कही थी

सतीश- “जी मे कल इसी टाइम पर आ जाऊंगा”......


ओर फिर सतीश वह से निकल जाता है, बाहर आकर टाइम देखता है तो
कॉलेज छूटने मे अभी भी टाइम था.... और वैसे भी वो चुदाई के बाद
काफी थकान मह्सुश कर रहा था, इस्लिये वो बाइक उठाकर सीधा घर की तरफ
चल देता है.....

१५ मिनट मे सतीश की बाइक उसके घर के बाहर पहुँच जाती है....
सतीश के द्वारा की गई मेहनत(चुदाई) के कारन उसके पेट् मे बहुत जोर से
चुहे कुद रहे थे, इस्लिये वो बाइक को स्टैंड पर लगा कर तेजी से गेट की तरफ
बढ़ता है और वो डोर बेल्ल बजाने
ही वाला था की उसकी नजर गेट पर पड़ती है, गेट लॉक नहीं था ये देख सतीश
थोड़ा चौकता है क्योकि अक्सर सोनाली जब भी कोई घर पर नहीं होता था तो गेट
लॉक ही रखती थी......

सतीश अपने मन में हो सकता है की आज ध्यान न दिया हो....

ओर वो गेट को लॉक करके अंदर आ जाता है... वो अपने बैग को सोफ़े
पर पटकता है और अभी वो अपनी माँ को आवाज लगाने ही वाला था की
उसे किसी की सिसकारियों की आवाज सुनाइ पड़ती है... वो इस सिसकि को पहचान सकता था ये सिसकि किसी और की नहीं वल्कि उसकी माँ की ही थी उसे तो अपने कानो पर यकीन ही नहीं होता....
सतीश मन सतीश-तो सब के जाने के बाद माँ किसी गैर मर्द के साथ रंग रलिया करती है, तभी मे कहु की आज गेट कैसे खुला छूट गया,
चुत की आग बुजाने के चक्कर मे गेट भी लॉक करना भूल गई

सतीश ग़ुस्से मे सोनाली के कमरे की तरफ बढ़ता है, सोनाली के मुह से निकलि
सिस्कियाँ उसके अंदर ग़ुस्से की आग को और भड़का रही थी वो सिसकियाँ उसके कानो मे पिघले लोहे की तरह मह्सुश हो रही थि, आज लाइफ मे पहली बार उसे इतना गुस्सा आया था आज उसकी माँ
के साथ जो कोई भी हो उसका क़त्ल होना तय था....... पर रूम के पास पहुँचते ही उसकी आँखें
फ़टी की फटी रह जाती हे....

सामने उसकी माँ पूरी नंगी बेड से अपने दोनों पैर निचे लटकाये लेटी हुई
थी और अपने दोनों हाथो मे अपने बॉब्स को लेकर मसल रही थी और बेड के निचे
उनकी दोनों टांगो के बीच माँ की चुत मे मुह डाले.....??

कहानी अब तक्....

दोस्तो आपने अब तक पडा की कहानी की हीरोइन सोनाली जोकि एक सेक्सी जिस्म की मालिक है और बहुत चुदककड भी पर उसके पति को पिने की बहुत बुरी आदत पड़ गई जिस के कारन अविनाश ने सोनाली के साथ बहुत समय से सेक्स नहि किया था और सेक्स की आग में जलती सोनाली को अपनी आग अपने आप ही शांत करणी पडति, ऐसे ही एक रात जब सोनाली अपने चुत को ठण्ड करने में ब्यस्त थी तब उसका बेटा सतीश उसे अपनी चुत में डिलडो करता हुआ देख लेता है...

सोनाली का सेक्सी जिस्म.देखकर उसका ईमान डोल जाता है और अपनी माँ के नाम की.मुठ लगा कर नंगा ही अपने कमरे में सो जाता है...

कल सुबह जब सोनाली सतीश को चाय देणे आती है तब वो उसका लंड देख कर चौक जाती है उसे यकीन नहि होता की लंड इतना बड़ा भी हो सकता है, उसकी चुत पानी छोड़ने लगती है पर वो अपने पर कण्ट्रोल करती है और फिर डोर को बंद करके फिर से नॉक करती है सतीश अपने कपडे पहनकर डोर खोलता है, सोनाली उसे हाथ मुह धोकर तैयत होने को कहकर शिप्रा अपनी छोटी बेटी को उठाने चलि जाती है और उसे चाय देकर नीचे आ जाती है और फिर सतीश की चाय गरम होने के लिए रख देती है उसका दिमाग सतीश के लंड के ख्यालो म खो जाता है पर शिप्रा के आवाज देणे पर वो होश सतीश आती है और शिप्रा के हाथ सतीश की चाय भिजवा देती है....
सतीश बाथरूम में नहा रहा था और वो अपनी माँ को चोदने का निच्छय कर लेता है उधर सतीश के कमरे में शिप्रा उसकी चादर पर निशान पडे देखति है जिसे देख कर उसके चेहरे पर अर्थपुर्ण मुस्कान आ जाती है तभी सतीश के मोबाइल की टोन बजती है वो उठा कर देखति है किसी प्रियंका नाम की लड़की का मेसेज था...

इतने म सतीश बाथरूम से निकल आता है और फिर उन दोनों की.हलकी फुल्की झडप.होती है फिर शिप्रा सतीश को चिड़ाते हुए भाग जाती है सतीश कपडे पहनकर निचे आता है यहा फिर से शिप्रा से झड़प होती है जिसे सोनाली खतम कर देती है... और नाश्ता लगा देती है नाश्ते के समय भी सतीश अपनी माँ को.ही घूर रहा था फिर नास्ता करके सतीश और शिप्रा कॉलेज के लिए निकल जाता है....

शिप्रा को कॉलेज छोड़कर सतीश प्रियंका के यहां चल देता है जहाँ उसका सामना एक और हॉट milf से होता है जोकि प्रियंका की माँ थी सतीश का लंड तो वैसे ही कल रात वाली बात से जोर मार रहा था और नलिनी को देख कर तो वो और तन गया नलिनी उसे अंदर ले जाती है और फिर प्रियंका आती है प्रियंका भी मस्त हॉट आइटम थी सतीश प्रियंका के सामने ही उसकी माँ से फ्लिर्टिंग करता है प्रियंका उसे अपने कमरे में ले जाती है जहाँ सतीश उसकी धमाके दार चुदाई करता है, नलिनी भी उनकी चुदाई खिड़की में से देख रही थी जिसे सतीश देख लेता है....

नलिनी अपनी बेटी को इतने बड़े मूसल से चुदता देख गरम हो जाती है और अपनी चुत में ऊँगली करके उसे शांत करने लगती है... शांत होने के बाद वो वहाँ से निचे आ जाती है...

उपर सतीश भी प्रियंका की गांड मारने के बाद झड जाता है और प्रियंका से अगले दिन के बारे में पूछता है पर वो मना कर देती है क्युकी उसे बाहर जाना था २-३ दिन के लिये....

सतीश निचे आता है तो नलिनी उसे अगले दिन भी आकर प्रियंका के साथ स्टडी करने के बहाने खुदको चुदवाने का खुला ऑफर देती है जिसे सतीश एक्सेप्ट कर लेता है और अपने घर चल देता है....

विस्तार से पढ़ने के लिए आप पिछले अपडेट पड़ सक्ते है, मैंने आपको काफी संछेप में बताने की कोशिश की पता नहि इसमें मे कितना सफल हुआ और कोई ग़लती हो तो माफ़ करना...
पर रूम के पास पहुँचते ही उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती हे....

सामने उसकी माँ पूरी नंगी बेड से अपने दोनों पैर निचे लटकाये लेटी हुई थी और अपने दोनों हाथो मे अपने बॉब्स को लेकर मसल रही थी और बेड के निचे उनकी दोनों टैंगो के बीच में उनकी चुत मे मुह डाले उनके घर की नौकरानी बसंती थी जोकि पूरी तरह से नंगी थी....

बसन्ती उम्र ३५ साल सांवला कलर ३८ के ब्रैस्ट और चौडी काली गांड़....

सतीश का तो बुरा हाल हो गया बसंती अपनी जीभ से उसकी माँ की चुत कुरेद रही थी... और सोनाली की मादक सिसकारी पूरे कमरे म गुंज रही थी... सोनाली अपने होंठो को अपने दाँतो में दबाये अपनी सिसकारियों रोकने की भरपूर कोशिश कर रही थी पर वो ऐसा करने में असमर्थ थी....
ओ अपने दोनों हाथो से अपने दूध मसल रही थी और कभी अपनी उंगलियो में अपनी निप्पल्स को दबा कर मसल देती....

अब सतीश की नजर बसंती पर जाती है उसके दूध निचे लटक रहे थे और उसकी बड़ी गांड पर जाकर सतीश की नजर रुक जाती है उसकी गांड काफी चौडी थी और उसका काला छेद सतीश को साफ़ नजर आ रहा था... सतीश का लौडा पूरी तरह अकड कर तन गया था, वो उसे बाहर निकाल कर मुट्ठ मारना शुरू कर देता है और फिर उसकी नजर गांड से थोड़ी निचे जाती है तो उसे बसंती की चुत दिखाइ देती है, उसकी चुत काले बालो से घिरि हुई थी और एक दम काली.... अंदर दो मस्त घोडियों को इस तरह देख कर उसका लंड लावा उगलने को तैयार हो जाता है सतीश तुरंत अपना रुमाल निकाल कर अपने लौडे पर लगा देता है और उसका लंड सारा माल उसके रुमाल में गिरा देता है... आज ३ बार झड़ने के बाद वो थक गया था इस्लिये वो अपने लंड को वापस अंदर दाल कर जीप बंद करता है, तभी उसकी नजर घडी पर पड़ती है कॉलेज छूटने का टाइम हो गया था उसका मन तो नहि था ये नजारा छोड़कर जाने का पर उसकी मज़बूरी थी क्युकी शिप्रा उसका वेट कर रही थी... वो तुरंत अपना बैग उठाता है और बाहर निकल कर धीरे से दरवाजे को बंद करके निकल जाता है...
ओर थोड़ी देर मे ही वो कॉलेज पहुंच जाता है और शिप्रा का वेट करने लगता है, थोड़ी देर मे ही उसे शिप्रा किसी लड़के के साथ आती दिखाइ देती है उस लड़के को देखते ही सतीश की आँखों मे खून उतर आता है वो सतीश के क्लास का ही लड़का प्रिंस था और इस कॉलेज का सबसे हरामी लड़का भी वो अक्सर भोलि भाली लड़कियों को पटा कर उनके साथ सेक्स करता और फिर उनकी वीडियो बना कर उन्हें ब्लैकमेल करके अपने दोस्तों के आगे भी परोस देता और इस कारन उसकी और सतीश की कई बार लड़ाई भी हो चुकी थी इस कॉलेज में केवल सतीश ही था जिससे प्रिंस नहि उलझना चाहता था, और प्रिंस उससे बदला लेना चाहता था इस्लिये उसने जानकर शिप्रा से दोस्ती की थी.... और शिप्रा ने इसी साल इस कॉलेज मे एडमिशन लिया था इस्लिये उसे उसके बारे में कुछ भी नहि पता था....

सतीश को देख कर प्रिंस शिप्रा से बाई बोल कर चला जाता है.... शिप्रा सतीश के पास आ जाती है,

शिप्रा- “क्या हुआ भैय्या ऐसे मुह फुलाये क्यों खड़े हो?

सतीश- “तू उस लड़के के साथ क्या कर रही थी?
शिप्रा- “वो प्रिंस था भाईया बहुत अच्छा लड़का है, आपकी क्लास में ही तो पडता है वह”

सतीश- “मे जानता हूँ की कितना अच्छा लड़का है वह, तू बस उससे दूर ही रहा कर”....

शिप्रा- “पर भेया”...

सतीश- “पर-वर कुछ नहि सतीशने कहा ना की उससे दूर रहना मतलब उससे दूर रहना”..

सतीश का ख़राब मूड देख कर शिप्रा उससे कुछ नहि कहती और चुप-चाप बाइक पर बैठ जाती है, सतीश घर की तरफ वापस चल देता ह...

शिप्रा मूड चेंज करने के लिये

शिप्रा- “वैसे भाईया आज आप कहा थे?

सतीश- “थे का मतलब? क्लास मे ही था”....

शिप्रा- “झूठ मत बोलो भाईया मे जानती हूँ की आप कॉलेज में नहि थे... अब आप खुद बताते है की मे घर पर माँ को बताऊ”...

सतीश के पास अब कोई ऑप्शन नहि था पर सच तो वो बता नहि सकता था...

सतीश- हाँ वो आज मे दोस्तों के साथ मूवी देखने गया था”....

शिप्रा- “कोण सी?

सतीश को शिप्रा से इस बात की उम्मीद नहि थी वो उसके इस क्वेश्चन से हडबडा जाता है”....

सतीश- “ओ..वह..सतीश..वह”

शिप्रा- “रहने दो भाईया मे जानती हूँ की आप प्रियंका के साथ थे”...

सतीश की तो फट ही गई थी...

सतीश- “तू कुछ ज्यादा ही नहि बोलने लगी है आज कल, चल आज तुझे कॉफ़ी पिलवाता हूँ तू भी क्या याद करेगी की किसी रईश से पाला पड़ा था”....

शिप्रा- “हमं... मुह बंद रखने के लिए रिश्वत पर ऐसा नहि लगता की ये मामला आप कुछ सस्ते मे निपटा रहे हो”...

सतीश- “तो तू बोल मेरी माँ तुझे क्या चाहिये”...

शिप्रा- “अभी तो कॉफ़ी पिलाओँ बाकी बाद मे बताऊंगी”....

शिप्रा सोच रही थी की सतीश उसे डर की वजह से कॉफ़ी पीला रहा है जबकि सतीश चाहता था की सोनाली अपनी प्यास आराम से मिटवा ले और शिप्रा को इस बात का पता भी न चले ....

सतीश कैफ़े कॉफ़ी डे पहुँच कर बाइक स्टैंड पर लगाता है और फिर शिप्रा के साथ अंदर चला जाता है...

अंदर काफी कपल बैठे हुए थे पर सतीश और शिप्रा के एंटर होते ही सबकी नजरे उनपर ही टिक जाती है...
सतीश और शिप्रा के एंटर होते ही सबकी नजरे उनपर टिक जाती है, और टीके भी क्यों न वो दोनों एक खूबसुरत कपल लग रहे थे....

सतीश और शिप्रा जाकर अपनी जगह ग्रहण करते है”

सतीश- “कब से जानती है तू उस लड़के को?

शिप्रा जोकि अपने मोबाइल मे लगी हुई थी....

शिप्रा- “कोण से लड़के को?

सतीश- “प्रिंस को, कब से जानती है उसको?

शिप्रा अभी भी मोबाइल मे लगे हुये- “ह्म्म्म... हो गये ३-४ हफ्ते”...

सतीश-“और तुम मुझे अब बता रही हो”...

शिप्रा कोई जवाब नहि देती और मोबाइल मे लगी रहती है....

सतीश उसके हाथ से मोबाइल छीनते हुये- “मे तुझसे कुछ पूछ रहा हु??

शिप्रा मुह बनाते हुए थोड़े ग़ुस्से मे- “तो क्या मुझे तुम्हे अपनी हर बतानी पडेगी... जब मे तुमसे तुम्हारी प्राइवेट लाइफ के बारे मे नहि पूछती, तो तुम्हे क्यों जलन हो रही है, मेरी भी एक प्राइवेट लाइफ है, और मैं नहि चाहती की कोई मेरी प्राइवेट लाइफ मे इंटरफेर करे”....

शिप्रा ने ये बात इतने जोर से कही थी की सभी लोग उनकी तरफ देखने लगते है...

सतीश को तो यकीन ही नहि हो रहा था की उसकी छोटी बहन उससे इस तरह से बात कर सकती है...

थोड़ी देर तक टेबल पर शान्ति हो जाती ह, इतने मे ही उनकी कॉफ़ी भी आ जाती है...

शिप्रा भी अब अपनी ग़लती पर पछता रही थी....

सतीश- “सॉरी सतीश भूल गया था की तुम्हारी एक प्राइवेट लाइफ भी है”...

सतीश अपनी सीट से उठता है और रूपये टेबल पर रख कर बाहर की और निकल जाता है...

शिप्रा उसे जाते हुये देखति है और फिर ग़ुस्से मे बड़बड़ाते हुये वो भी उसके पीछे तेज कदमो से चलि जाती है....

शिप्रा बाहर निकल कर सतीश को आवाज देती है... पर सतीश बिना सुने अपनी बाइक निकालने के लिए चल देता है...

शिप्रा उसके पीछे चल देती है- “भइया.., भाईया मेरी बात तो सुनो, आई एम सॉरी” उसे जाते हुए देखति रहती है, सतीश थोड़ी आगे जाकर बाइक रोक देता है,

शिप्रा के चेहरे पर हलकी सी स्माइल आ जाती है, और वो भगति हुई सतीश के पास पहुंच कर बाइक पर बैठ जाती है...

शिप्रा- “आई ऍम सॉरी भाई... वो पता नहि अचानक मुझे क्या हुआ, आई डीड नोट वांट तो हार्ट यु”....

सतीश उसे कोई भी जवाब दिए बिना आगे बढ़ जाता है...

शिप्रा पूरे रस्ते उसे मनाती रहती है, पर सतीश उसकी बात का कोई जवाब नहि देता...

सतीश घर के बाहर बाइक को खड़ी करके डोर बेल्ल बजाता है, डोर सोनाली खोलती है, सतीश एक नजर सोनाली को देखता है वो काफी फ्रेश नजर आ रही थि, ऐसा लग रहा था जैसे की वो अभी अभी नहा कर आई हो....

पर तुरंत ही सतीश ग़ुस्से मे अपने कमरे की और चल देता है....

सोनाली उसे आवाज लगाती है पर वो सीधे अपने कमरे मे चला जाता है....

सोनाली अब शिप्रा की तरफ देखति है तो वो भी अपना सर झुकाए अपने कमरे की तरफ बढ़ रही थी....

सोनाली शिप्रा को आवाज देकर रोकती है और शिप्रा के सामने जाकर खड़ी हो जाती है- “ये सतीश को क्या हुआ और तू इतनी उदास क्यों है?

शिप्रा कोई जवाब नहि देती बस मुह लटकाये कड़ी रहती है....

सोनाली- “लगता है आज फिर तुम दोनों ने झगड़ा किया है, तुम लोग कब सुधरोगे, मुझे तो समझ नहि आता”....

शिप्रा चुपचाप अपने कमरे मे चल देती है,

सोनाली- “है भगवान् कब अकल आयेगी इन दोनों को”...

सतीश अपने कमरे मे ग़ुस्से से आग बबूला हो रहा था आज शिप्रा ने उस दो कोडी के लड़के के लिए उससे इतनी बदतमीज़ी से बात करी थी....
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उधार शिप्रा अपने रूम मे तकिये मे मुह छुपाये सुबक रही थी उसे अब तक अपनी हरकत का बहोत अफसोश हो रहा था....
ओ जाकर भाई से माफ़ी माँगना चाहती थी पर उसकी हिम्मत नहि हो रही थी....

सतीश फ्रेश होकर अपने कपडे चेंज करता है और फिर नीचे आ जाता है... सोनाली किचन मे थी...

सतीश- “माँ मे अपने दोस्त के यहां जा रहा हूँ अब शाम को आऊंगा”....

सोनाली किचन से बाहर निकलते हुये- “पर लंच तो करता जा”....

पर सतीश नहि रुकता और बाइक निकाल कर बाहर निकल जाता है....

सोनाली- “आखिर हुआ क्या है इस लड़के को”....

सतीश अपनी बाइक से चला जा रहा था.कहा ये उसे भी नहि पता था.... आज उसका मूड पहली बार इतना ऑफ हुआ था....
सतीश १ घंटे तक बाइक को सडको पर युही दौडता रहता है, अब उसके पेट् मे चुहे कुदने लगे थे, पर वो घर भी नहि जाना चाह रहा था.... वो कहि बाहर खाना खा भी लेता पर फिर भी शाम तक का टाइम भी तो पास करना था...

सतीश अपना मोबाइल निकाल कर अपने फ्रेंड सागर को कॉल करता है...

सतीश- “कहा हो बेटा?

सागर- “कहा होंगे बे इस दोपहरी मे, घर पर ही मरा रहे है”...

सतीश- “चल ठीक है मे आ रहा हूँ तेरे पास”...

सागर- “ये भी कोई पुछने की बात है”...

सतीश- “ओके पहुचता हूँ १० मीनट में”

सतीश बाइक सागर के घर की तरफ मोड़ देता है, थोड़ी देर मे ही वो उसके घर पहुच जाता है...

बाइक खड़ी करके सतीश डोर बेल्ल बजाता है, गेट खुलता है और सतीश की सारी टेंशन जैसे काफूर हो गई...

सामने भारती खड़ी थि, सतीश को देखते ही उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है एक प्यारी सी स्माइल देख कर सतीश का मूड फ्रेश हो जाता है,

ओ दोनों एक दूसरे मे खो जाते है, सतीश और भारती एक दूसरे को बचपन से ही पसंद करते थे, दोनों ही एक दूसरे को टूट कर चाहते थे पर दोनों ने कभी इस बात का जिक्र एक दूसरे से नहीं किया था...

सागर- “अब सतीश को अंदर भी बुलाएगी या फिर उसे बाहर ही खड़ा रखने का ईरादा है”...

भारती और सतीश दोनों का ध्यान सागर की तरफ जाता है वो भारती के पास खड़े खड़े मुस्कुरा रहा था...

भारती- “ओह्ह्ह सॉरी ओ... वो सतीश”...

ओर वो शरमाकर अंदर की तरफ भाग जाती है... सतीश के चेहरे पर स्माइल आ जाती ह....

सागर- “अबे हमसे भी मिल ले कमीने”...

सतीश- “क्यों नहि भाई तुझसे ही तो मिलने आया हु”...

ओर वो आगे बड़कर सागर के गले लग जाता है...

सागर- “मे अच्छे से जानता हूँ की तू किस्से मिलने आया था”...

सतीश-“नहि भाई तू गलत समझ रहा है”....

सागर- “हरामखोर रग रग से वाकिफ हूँ मैं तेरी”...

सतीश सागर की बात पर मुस्कुरा देता है और दोनों सोफ़े पर बैठ जाते है...

सागर- “ह्म्मम्, तो इतने समय बाद तुझे हमारी याद आ ही गयी”....

सतीश- “भाई तुम्हे भुला ही कब था जो तुम्हारी याद आयगी”

सागर- “तो साले इतने समय बाद यहा का रास्ता कैसे भूल गया”....

सतीश- “आरे नहि यार मिलने का मन किया तो चला आया”...

सागर- “चल अच्छा किया जो तू आ गया”....

सतीश- “आंटी नजर नहि आ रही है, कही बाहर गई है क्या???

सागर- “हाँ दूर के रिलेशन मे चाचा है उनके यहा कोई फंक्शन है तो उन्ही के यहाँ गई है डैड के साथ्”...

सतीश-“ओ के”...

सागर- “और घर बार सब कैसे हैं?

सतीश- “सब बढ़िया हैं भाई”...

पहले वो दोनों नॉर्मली बात चित करने लगते है....

थोड़ी देर मे ही भारती कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स लेकर आ जाती है, और टेबल पर रख कर जाने लगती है...

सतीश- “भारती”...

भारती रुक कर सतीश की तरफ देखति है...

सतीश- “तुम भी बैठो ना हमारे साथ”...

भारती सागर की तरफ देखति है सागर हाँ मे गर्दन हिला देता है....
भारती सागर के पास जाकर बैठ जाती है,


ओ अभी भी अपनी नजरे झुकाए हुए बैठि थि, और उसके चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल थी....
ड्रिंक के साथ स्नैक्स खाते हुए वो नोर्मल्ली बातें करने लगते है पर भारती अभी भी चुप थी और कनखियों से सतीश को देख रही थी सतीश की नजरे भी बार बार उसकी तरफ चलि जाती...

सागर उन दोनों की हरकतों को देख रहा था...

सागर अपनी कोल्ड ड्रिंक खत्म.करने के बाद...

सागर उठते हुये- “भाई मुझे जरुरी काम से जाना है तू बैठ मे आधे घंटे मे आता हु”...

सतीश- “मे भी साथ चलता हु”..

सागर- “तू बैठ और बाइक की की मुझे दे”.....

सागर सतीश से बाइक की की लेकर बाहर निकल जाता है, अब घर मे केवल भारती और सतीश ही थे....

पूरे घर मे एकदम सन्नाटा फैल गया था... दोनों ही कुछ बोलना चाह रहे थे पर हिम्मत किसी की नहि हो रही थी....
सतीश हिम्मत करके अपनी जगह से उठता है और भारती के पास जाकर बैठ जाता है...

इससे पहले की सतीश कुछ कहता भारती अपनी जगह से उठ कर आगे बढ़ जाती है, सतीश उठ कर पीछे से उसका हाथ पकड़ लेता है....

सतीश- “जान अभी तक नाराज हो क्या?

भारती पलट कर सतीश की तरफ देखति है....

“चटाकककक..... एक थप्पड़ की गुंज से पूरे कमरे मे फैला सन्नाटा ख़तम होता है....

ये थप्पड़ भारती ने सतीश के बाए गाल पर जड़ा था... थप्पड़ की गुंज ख़तम होते ही कमरे मे एक बार फिर से सन्नाटा हो जाता है...

भारती के चेहरे पर अब काफी गुस्सा था जिसे देखकर सतीश के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, और वो अपना दाया गाल आगे बड़ा देता है....

“चटाककक... एक बार फिर से थप्पड़ की आवाज से घर गुंज उठता है....

सतीश भारती की और देखता है, उसकी आँखों मे आँसु थे सतीश अपना बाया गाल फिर से आगे कर देता है....

भारती ग़ुस्से से उसके छाती मे एक के बाद एक कई घुसे मारती है, और फिर उसके सीने से लग कर सुबकने लगती है... सतीश भी उसे अपनी बाँहों मे जकड लेता है...

भारती सुबकते हुये- तुम बहुत बुरे हो सतीश, मुझसे मिलने के लिए भी टाइम नहि है तुम्हारे पास... पता है आज पुरे ५ महीने और ११ दिन और ४ घंटे बाद मिले हो... तुम्हे एक पल को भी मेरी याद नहि आई”...

सतीश- ५ महीने ११ दिन ४ घंटे २० मीनट. और ४० सेकंद. एक्साक्ट्ली.... और मेरी लाइफ का एक भी मिनट ऐसा नहि गया जब मैंने तुम्हे याद न किया हो....

भारती सतीश की आँखों मे देखते हुए – “झुठ मत बोलो अगर तुमने मुझे इतना याद किया तो मिलने क्यों नहि आये ???

सतीश- “यही बात अगर मे तुमसे कहु तो.... अगर इतना ही तुम मुझे.मीस कर रही थी मिलने तो,तुम भी आ सकती थी”.....

भारती अभी भी सतीश के सीने से लगी खड़ी थी और भारती की सांसे उसे अपने चेहरे पर महसूश हो रही थि, अगर भारती की जगह कोई और लड़की सतीश के इतने करीब होती तो बेशक उसका लंड खड़ा हो चुका होता पर भारती के इतने करीब होने के बावजूद भी उसमे कोई हलचल नहि थी... और ये सब प्यार के कारन था सतीश के मन मे भारती के लिए कभी भी कोई गलत ख्याल नहि आया.... बिना एक दूसरे को आई लव यु बोले वो एक दूसरे को बेइन्तेहा प्यार करते थे....

दोनो एक दूसरे के आँखों मे खो गए थे....

भारती- “तो ठीक है अब मैं ही तुमसे मिलने आ जाया करुँगी”....

ओर इतना कहकर भारती वापस अपना चेहरा सतीश की छाती मे छुपा लेती है...

सतीश- “एक बात कहु भारती”...

भारती- “ह्म्म्म”

सतीश- “तुमने थप्पड़ बहुत जोर से मारे थे... अभी तक कान झनझना रहे है”....

भारती हस् देती है...

भारती- “देख लो बच्चू अगर तुमने दोबारा ऐसी ग़लती करी न तो तुम्हारा बैंड बजा दूँगी”....

सतीश- “जब मे आया था तो मुझे गेट पर लगा की तुम मुझे देख कर काफी खुश हो और शायद मुझसे नाराज नहि हो”....

भारती- “हमम, खुश तो मे बहुत.थी पर नाराज भी बहुत थी वो तो उस समय सागर भाईया थे वरना उसी समय तेरा मोड़ देती”....

सतीश- “कोई बात नहि उस समय नहि तो अब तो तोड़ ही दिया ना”....

भारती सतीश से अलग होते हुये- “क्या वाक़ई मे बहुत तेजी से पड़ गया हाथ”....

सतीश अपने चेहरे पर मासुमियत लाते हुये- “बहुत तेज”....

भारती उसके करीब आते हुये- “तो क्यों दिलाते हो मुझे इतना गुस्सा पता है ये तेरे गाल पर पड़ा ६० वा थप्पड़ था”...

ओर भारती अपने पंजो पर खड़े होकर सतीश के लेफ्ट गाल पर अपने होंठ रख देती है, और फिर राईट गाल पर भी अपने होंठ रख देती है...

कब वो अपने होंठ सतीश के होंठो के पास लाती है, दोनों एक दूसरे की आँखों मे झाकते है.... और फिर भारती की पलके बंद हो जाती है और वो अपने होंठ सतीश के होंठो की और बड़ा देती है, दोनों के होंठ किसी भी समय एक हो सकते थे.....
पर इससे पहले की भारती अपने होंठो को सतीश के होंठो पर रख देति, सतीश झटके से पीछे हट जाता है... और उसकी इस हरकत से भारती जोकि सतीश के सहारे खड़ी हुई थि, लडखडा जाती है पर इससे पहले की वो गिर जाती सतीश उसे थाम लेता है और भारती अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लाकर उसकी तरफ देखति है....



भारती अपने होंठ सतीश के होंठो के पास लाती है, दोनों एक दूसरे की आँखों मे झाकते है.... और फिर भारती की पलके बंद हो जाती है और वो अपने होंठ सतीश के होंठो की और बड़ा देती है, दोनों के होंठ किसी भी समय एक हो सकते थे.....
पर इससे पहले की भारती अपने होंठो को सतीश के होंठो पर रख देति, सतीश झटके से पीछे हट जाता है... और उसकी इस हरकत से भारती जोकि सतीश के सहारे खड़ी हुई थि, लडखडा जाती है पर इससे पहले की वो गिर जाती सतीश उसे थाम लेता है और भारती अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लाकर उसकी तरफ देखति है....

सतीश उसके चेहरे के एक्सप्रेशन से समझ जाता है की वो क्या कहना चाहती है...

सतीश उसे छोड़ते हुये- देखो भारती ये गलत है”....

भारती हैरत से- “पर”

सतीश- “नहि मे अपने दोस्त के विश्वास को नहीं तोड़ सकता, उसने मुझे तुम्हारे साथ अकेला छोडा क्युकी वो जानता है की हम प्यार करते हैं और हम अकेले मे अपने गीले सिक्वे मिटा सकें पर हमे दूरि बनाकर रखणी होगी जब तक की हमारी एंगेजमेंट नहि हो जाति”...

भारती- “सॉरी सतीश वो मैं”....

सतीश- “तुम्हे सॉरी बोलने की कोई जरूरत नहि है भारती”...

भारती थोड़ी नर्वस हो जाती है इस्लिये भारती के मूड को फ्रेश करने के लिये...

सतीश- “वैसे एक बात तो है तुम्हारे मल्हम ने काम कर दिया अब मेरे गाल दर्द नहि कर रहे..... थोड़ा और मल्हम लगाओगी क्या??

भारती हस्ते हुए उसकी तरफ बढ़ती है- “अब तुम मार खाओगे मेरे हाथ से”...

सतीश- “मारलो जितना मारना है बाद मे मल्हम भी तो तुम्हे लगाना पड़ेगा मेरे जख्मो पर”.....

भारती सतीश के गले लगते हुये- “तुम न बहुत बुरे हो”...

सतीश- “हाँ वो तो मे हु”...

तभी डोरबेल बजती है भारती सतीश से दूर हटके गेट खोलने के लिए बढ़ती है, और सतीश अपनी जगह पर बैठ जाता है....

गेट पर सागर था सागर अंदर आते हुये- “तूने ज्यादा परेशान तो नहि किया ना मेरे दोस्त को”...

भारती- “क्या भाई आप भी ना?

सागर सतीश की तरफ बढ़ जाता है और भारती गेट बंद करके किचन की तरफ...

सतीश-“कहा मराने गया था बे??

सागर- “आरे गया था कहि मराने तुझे इससे क्या? हाँ तुझे मरानी हो तो मुझे बता”...

सतीश सागर के कंधे पर मुक्का मारते हुये-बड़ा हरामी हो गया है तु.”..

सागर- “सब तेरी संगत का असर है”....

ओर दोनों हस देते है....

सागर- “छोड़ इन बातों को और ये बता की तू किस बात को लेकर परेशान था”...

सतीश- “मे और परेशान, भाँग पीकर तो नहि आया है रे छोरे”....

सागर- “बेटा मुझे लौंडिया चोदना मत सिखा, चुपचाप बता की बात क्या है”...

सतीश- “चल तो तेरे कमरे मे चलकर बात करते है”...

सागर- “चल...

दोनो उठकर सागर के कमरे की और चल देते है...

सतीश- सिगरेट है...

सागर सतीश को एक सिगरेट देता है और एक खुद लेता है और दोनों उसे लाइट करके कश लगाने लगते है...

सागर- अब बतायेगा या फिर पैक भी बनाऊ.

सतीश- नहि यार बताता हु...

ओर सतीश उसे शिप्रा और प्रिंस के बारे मे और फिर कैफ़े मे हुई बात के बारे मे बताता है...

बात पूरी होने के बाद कमरे मे शान्ति हो जाती है दोनों एक एक और सिगरेट जला कर कश लगाने लगते है...

सागर- बात तो ये वाकई मे चिंता की है....

सतीश- साले अगर चिंता की बात न होती तो मे इतनी टेंशन क्यों लेता...

सागर- अबे तू कहे तो ठिकाने लगा देते हैं उसके दिमाग को साले के हाथ पैर तोड़ देंगे....

इससे पहले की सतीश कुछ कहता रूम का गेट खुलता है और भारती रूम मे एंटर होती है..

सागर जोकि अभी सिगरेट का कश लगा रहा था उसको देख कर इतना शॉकेड हो जाता है की अपने मुह से सिगरेट निकालना भी भूल जाता है जबकी दूसरी तरफ सतीश भारती को देखते ही उठ कर खड़ा हो जाता है और अपनी सिगरेट पीछे छुपाने की असफल कोशिश करता है....

रूम फ्रेशनर के बावजूद सिगरेट की स्मेल पुरे कमरे मे फैल गयी थी....

भारती ग़ुस्से से सागर की तरफ देखति है और फिर अपनी नजरे सतीश पर टीका देती है और उसे घुरने लगती है... भारती के देखने के तरीके से ऐसा लग रहा था की जैसे वो अभी सतीश को कच्चा चबा जाएगी....

सतीश उसके ऐसे घुरने पर चुतियों की तरह अपनी बत्तीसी दिखा कर हॅसने लगता है...

सतीश- ओ... वो भारती तुम गलत समझ रही हो. .

इससे पहले की वो कुछ और कहता भारती ट्रे को टेबल पर रख कर...बलकी पटक कर कहना ज्यादा बेहतर रहेगा, कप्स मे से थोड़ी कॉफ़ी बाहर छलक कर ट्रे मे गिर गई थी....

ओर ट्रे को रखने के बाद वो ग़ुस्से मे तेजी से रूम से निकलती और गेट को इतनी तेजी से बंद करती है की गेट के बंद होने की आवाज पूरे रूम मे गुंज जाती है....

गेट इतनी तेजी से बंद हुआ था की थोड़ी देर तक सागर और सतीश गेट की तरफ ही देखते रह्ते है...


ओर फिर सतीश सागर की तरफ बढ़ता है और उसके सर पर एक थपकि लगाते हुये- “भोसडी के तू एक काम भी ठीक से नहि कर सकता ना”,

सागर- सॉरी भाई मे गेट करना भूल गया था....

सतीश- हरामखोर लौंडिया चोदते समय तो ४-४ बार चेक करते हो... तब क्यों नहि भूलते गेट खुला छोड़ना...

सागर- अब ग़लती हो गई भाई, अब क्या जान लेगा मेरी..

सतीश- साले तेरी ग़लती की वजह से मेरी तो बज गई ना... इतनी मुस्किल से तो मनाया था उसे और तूने फिर से अपनी गांड मरा ली.... अब पता नहि कितने खाने पडेंगे....

सागर- खाने तो मुझे भी पडेंगे....

सतीश उसकी बात पर उसकी तरफ देखता है...

सतीश- मतलब तुझे भी उसके हाथ से...

सागर- भाई जब वो ग़ुस्से मे होती है तो किसी को नहि छोड़ती....

ओर फिर दोनों हॅसने लगते है...

सागर- छोड़ वो मान जाएगी... तू प्रिंस का बता, ठोंक दू उसे क्या...

सतीश- अबे अकल क्या तूने बेच दी है.. अगर तू उसके हाथ पैर तोड़ेगा तो शिप्रा को उससे और सिम्पथी हो जायेगी और वो मुझे ही गलत समझेगी...

सागर- बात तो तेरी सही है, तो तू ही बता क्या करना है....

सतीश- यार अभी तो हम कुछ नहीं कर सकते सिवाए उसपर नजर रखने के, हमे बस ये ध्यान रखना है की प्रिंस उसके साथ कोई गलत हरकत न करे...

सागर- ठीक है पर ऐसा हम कब तक करेंगे....

सतीश- जब तक की मे उसके सामने प्रिंस की असलियत ना ला दु... या फिर वो उससे खुद बा खुद दूर न हो जाए...

सागर- चल ठीक है... पर अगर उसने कुछ गलत करने की कोशिश की शिप्रा के साथ तो मे उसे नहीं छोडूंगा....

सतीश- हमं... तब अगर तूने कुछ नहि करा तो मे तुझे नहि छोडूंगा....
ईधर सतीश और सागर अपनी आगे की योजनओं के बारे मे बातें कर रहे थे उधर दूसरी तरफ सतीश के घर मे शिप्रा जोकि बेड पर अपने आँसु बहाते हुए ही नींद के आग़ोश मे चलि गई थि, अपनी नींद से जागति है वो अपने बेड से उठकर वाशरूम मे जाकर फ्रेश होती है और फिर अपने रूम से निकल कर सतीश के रूम की तरफ बढ़ती है....

शिप्रा मन मे सोचते हुये- मुझे भाई से अपनी ग़लती के लिए माफ़ी माँगनी ही होगी कुछ भी हो मुझे उनसे इस तरह बेहेव नहि करना चाहिए था, पर मे उन्हें मना कर ही रहुंगी.....

यहि सब सोचते हुये.जब वो सतीश के रूम तक पहुचती है तो देखति है की रूम का गेट खुला हुआ है और रूम मे कोई नहि है.....

शिप्रा- भाई जरूर निचे होंगे...

ओर वो तेजी मे सीढियाँ उतरते हुए निचे आती है तो देखति है की उसकी माँ सोनाली सोफ़े पर बैठे टीवी देख रही थी....

शिप्रा अपनी माँ के गले मे पीछे से हाथ डालते हुए उनके गाल पर किस करती है....

सोनाली प्यार से उसके बालों मे हाथ फिराते हुये- उठ गई महारानी तुम्...

शिप्रा अपनी माँ के पास आकर बैठते हुये- माँ भाई कहा है कही नजर नहि आ रहा?

सोनाली- वो तो कॉलेज से आने के १५ मीनट. बाद ही निकल गया था खाना भी नहि खाया.... वैसे खाना तो तूने भी नहि खाया.. मैंने तुझे कितनी आवाज लगाई पर तू गेट अंदर से लॉक करके सो गई थी.....

शिप्रा- माँ भाई बता कर गए है की वो कहा गये है?

सोनाली- तू तो जानती है की वो कहा मुझे कुछ बताता है हमेशा अपने मन की करता है.. कहकर गया है की दोस्त के यहाँ जा रहा है शाम को आयेगा.... पता नहि कुछ खाया भी होगा की नहि इस लड़के ने, फ़ोन भी तो उसका स्विच ऑफ जा रहा है...

शिप्रा अपनी माँ की बात से और परेशान हो जाती है... क्युकी वो जानती थी की सतीश उससे नाराज होने के कारन ही घर से बाहर चला गया है...

सोनाली- मे खाना लगा देती हु तू कुछ खा ले, सुबह से तूने भी कुछ नहि खाया...

पर शिप्रा ने तो जैसे कुछ सुना ही न हो और वो अपनी सोचो मे गुम अपने कमरे की तरफ बढ़ जाती है...

सोनाली उसे पीछे से आवाज लगाती रह जाती है, पर वो नहि सुनति...

सोनाली- क्या हो गया है आज दोनों को...

शिप्रा अपने रूम मे पहुच कर सतीश का नम्बर मिलाती है पर वो स्विच ऑफ था, फ़ोन रखते हुये- पता नहि कहा गया होगा भाई... सुबह से भूखा है मेरी वजह से.... पता नहि कोण से दोस्त के यहाँ गया होगा....

ऎसे ही काफी देर तक वो अपने विचारों मे खो जाती है फिर अचानक उसकी आँखों मे एक चमक आ जाती है और वो तुरंत अपना मोबाइल उठा कर एक नम्बर. डायल करती है...

दूसरी तरफ सागर के घर मे भारती अपने रूम मे बैठि हुई थी और वो अभी भी सतीश और सागर के सिगरेट पिने से ग़ुस्से मे थी...

तभी उसका मोबाइल बजने लगता है वो जब उसे उठा कर देखति है तो उसके चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है... और वो फ़ोन पिक करके

भारती- तो इतने समय बाद राजकुमारी को इस गरीब की याद आ ही गयी...

दूसरी तरफ से- आरे यार तुझे भूलि ही कब थी जोकि तुझे याद करति... वैसे एक बात बताओ महारानी जी याद तो आप को भी नहि आई इस नाचीज की...

ये फ़ोन किसी और का नहि बल्कि शिप्रा का ही था, शिप्रा और भारती काफी अछि फ्रेंड थी और शिप्रा जानती थी की सतीश और भारती एक दूसरे को प्यार करते है और उसका बेस्ट फ्रंड सागर भारती का ही भाई है इस्लिये वो ज्यादातर इन्ही के यहां आता था क्युकी इस तरह वो अपने बेस्ट फ्रंड से और अपने प्यार दोनों से मिल लेता था, और उसका गेस सही भी था...

भारती उसकी बात सुनकर हस्ते हुये- दोनों भाई बहन एक ही डायलॉग मारते है.... इसके अलावा कोई और डायलॉग नहि आता क्या?

शिप्रा- अरे डार्लिंग आते तो बहुत है पर हर बन्दे के हिसाब से डायलॉग मारे जाते है ताकि उस बन्दे को अपनी बातो से झांसे मे लिया जा सके... अब तू ही देख मेरा भाई भी तुझे यहि डायलॉग मारके पटाता है और मे भी और तू एक ही डायलॉग से दो लोगो के झांसे मे आ गयी....

भारती- मैं किसी के झांसे मे नहि आई और तू यहां होती तो तुझे ये बात अच्छे से समझ आ जाती जब मेरा हाथ की उँगलियाँ तेरे गालो की शोभा बढाती...

शिप्रा- बड़ी आई मेरे गालो की शोभा बढ़ाने वाली.... मैं क्या फिर तुझे छोड़ देती...

ओर फिर दोनों हस् देती है

भारती- वैसे आज कैसे याद आ गई हमारी...

शिप्रा- क्यों ऐसे ही याद नहि कर सकते क्या?

भारती- कर तो सकती है पर तेरी आवाज से से चिंता झलक रही है जल्दी बता क्या बात है

शिप्रा- वो यार मैंने ये पुछने के लिए फ़ोन किया था की भाई तेरे यहाँ है क्या?

भारती- हाँ है तो, क्यों क्या हुआ?

ओर फिर शिप्रा उसे सारी बात बताती है....

शिप्रा- ... और फिर वो बिना कुछ खाए घर से निकल आये इस्लिये थोड़ी टेंशन थी की पता नहि उन्होंने कुछ खाया भी होगा की नहि...

भारती- अब तुझे टेंशन लेने की कोई जरुरत नहि है और थँक्स यार मुझे बताने के लिए की सतीश ने कुछ खाया नहि है....

शिप्रा- थँक्स तो मुझे बोलना चाहिए तुझसे की तूने मेरी प्रोबलम सोल्वे कर दि...

भारती- चल ठीक है मे थोड़ी देर मे तुझसे बात करती है....
ओर फिर भारती कुछ सोच्ने लगती है, उसके माथे पर शिकन थि, जिससे पता चल रहा था की वो किसी बात से परेशान है, फिर वो अपने सर को झटका देकर किचन की तरफ बढ़ जाती है....

दूसरी तरफ शिप्रा भी अब थोड़ा टेंशन फ्री हो गई थी... क्युकी उसे पता था की जितनी केयर वो अपने भाई की करती है उतनी केयर ही भारती करती है और वहां पर सतीश का मूड भी फ्रेश हो जायेगा...

थोड़ी टेंशन कम होते ही अब शिप्रा को भूक लगने लगी थी वो खाना खाने निचे चलि जाती है...


इस तरफ शिप्रा भी अब थोड़ा टेंशन फ्री हो गई थी... क्युकी उसे पता था की जितनी केयर वो अपने भाई की करती है उतनी केयर ही भारती करती है और वहां पर सतीश का मूड भी फ्रेश हो जायेगा...

थोड़ी टेंशन कम होते ही अब शिप्रा को भूक लगने लगी थी वो खाना खाने निचे चलि जाती है...

इधर सतीश को भूक तो बहुत तेज की लगी थी पर वो करता भी क्या आज फर्स्ट टाइम था जब वो सागर से कुछ कहने मे झिजक रहा था...

ओर सागर को लग रहा था की उसे शिप्रा की चिंता सता रही है... दोनों ही अब नॉर्मली बात चीत कर रहे थे...

तभी भारती सागर को आवाज लगाती है... और सागर सतीश से वेट करने को कहकर निचे आ जाता है...

सागर की फट रही थी वो सोच रहा था की भारती ने उसकी क्लास लेने के लिए उसे बुलाया है....

ओ भारती के पास पहुचता है तो भारती उसे घुरने लगती है, सागर अपनी नजरे चुराने लगता है..

भारती- तुम्हे कुछ पता भी है की नहि,

सागर- क्या?

भारती-यही की तुम्हारा दोस्त आज सुबह से भूखा है, और तुमने उससे खाने को पूछा भी नही...

सागर- अब मुझे कैसे पता चलता उसे कुछ चाहिए होता है तो वो खुद ही मांग लेता.. पर तू इतने यकीन से कैसे कह सकती है...

भारती- शिप्रा ने बताया मुझे फ़ोन करके... मे खाना लगा देती हु तुम सतीश को बुला लो....

सागर अपने कमरे मे जाकर पहले तो सतीश को सुनाता है क्युकी उसने सागर से ये छुपाया की वो आज सुबह से भूखा है.... और फिर उसे लेकर डायनिंग टेबल पर आकर बैठ जाता है....

सतीश के बैठते ही भारती उसे खाना लगाती है और वो भारती को ही देख रहा होता है, उसे भारती की आँखों मे ग़ुस्से की जगह अपने लिये प्यार और केयर के मिले जुले भाव नजर आ रहे थे...

सतीश के जिद करने पर सागर और भारती न चाहते हुए भी खाना खाने बैठ जाते है...

खाना ख़तम करके सतीश और सागर अपने हैंड वाश करने चले जाते है और भारती बर्तन समेट्ने लगती है....

पहले भारती बर्तन साफ़ करने के बाद सागर के पास आकर बैठ जाती है और फिर तीनो हसि मजाक करने लगते है और अपने बचपन की यादो को ताजा करने लगते है...

टाइम धीरे धीरे कटता जाता है और कब ८ बज जाते है पता ही नहि चलता...

भारती- सतीश अब काफी लेट हो गया है मेरे ख्याल से अब तुम्हे घर जाना चाहिये....

सागर कुछ बोलने को होता है पर भारती उसे इशारे से चुप रहने को कहती है... अब सतीश का मूड भी फ्रेश हो गया था और अब वो अच्छे से सोचने समझने लायक हो गया था, ग़ुस्से ने तो जैसे उसके दिमाग को जाम कर दिया था...

ओर वो जानता था की भारती उससे उसके भलाई के लिए कह रही थी.... वो जाने के लिए खड़ा हो जाता है....

भारती- और सतीश अपना मोबाइल ऑन कर लेना...

सतीश भारती की तरफ देखता है और फिर एक स्माइल के साथ अपने मोबाइल को निकालकर ऑन करता है और फिर उसे अपनी जेब के सुपुर्द करता है...

अब सतीश भारती और सागर को फिर मिलने का कहकर अपने घर की तरफ निकल देता है...

तीस मिनट्स मे सतीश अपने घर पहुच जाता है, बाइक कड़ी करके वो डोर बेल्ल बजाता है... डोर शिप्रा ने ओपन किया था...

शिप्रा कुछ कहने के लिए मुह खोलती है, पर सतीश उसके साइड से होते हुए अपने रूम की तरफ बढ़ जाता है...

शिप्रा डोर लॉक करके- आरे भय्या सुनो तो...

शिप्रा सतीश के पीछे पीछे उसके रूम मे पहुंच जाती है....

शिप्रा- आई एम सॉरी भइया...

सतीश- मे थक गया हूँ मुझे आराम करने है...
शिप्रा- पर भेया...
सतीश-पर वर कुछ नही...

शिप्रा वहि खड़ी रहती है उसकी आँखे अब नम हो चुकी थी.... और उसकी आँखों से आँसु बहने लगते हैं वो सतीश से बहुत कुछ कहना चाहती थि, पर कुछ कह नहि पाती और वहि खड़े आँसु बहाने लगती है....

सतीश जब गेट की तरफ देखता है तो शिप्रा को रोता हुआ देख वो तुरंत उसके पास आकर उसके कन्धो को पकड़ते हुये

सतीश- अरे पगली तू रो रही है....
शिप्रा उसके गले लगते हुये- प्लीज् भाई मुझे माफ़ कर दो मे जानती हूँ की मैंने आपका दिल दुखाया है, पर आगे से ऐसा नहि होगा और अब मे प्रिंस से भी नहि मिलूँगी पर प्लीज् आप मुझसे नाराज मत होना......

सतीश ने तो सोचा भी नहि था की प्रिंस नाम की प्रॉब्लम से इतनी जल्दी छुटकारा मिल जाएगा,

सतीश- अरे पगली मे तुझसे नाराज नहि हु... वो तो मे थक गया था इस्लिये तेरे से बात नहि कर रहा था.......

शिप्रा सुबकते हुये- सच कह रहे हो ना...

सतीश- एकदम सच्... भला मे तुझसे झुट क्यों बोलूंगा... चल अब टेसुए बहाने बंद कर और अपना मुह धोले जाकर....

शिप्रा उससे अलग होकर अपने रूम मे चलि जाती है और सतीश भी अपना लैपटॉप खोल कर बैठ जाता है.... थोड़ी देर मे ही सोनाली उनको खाने के लिए बुला लेती है.. सतीश जब निचे पहुचता है तो खाने की टेबल पर सोनाली और शिप्रा उसका वेट कर रही थी....
सतीश जैसी ही वह पहुचता है सोनाली उससे सवालो की झड़ी लगा देती है वो चुपचाप उनके जवाब देता है और फिर सब लोग भोजन करके अपने अपने रूम मे चले जाते है...

आज सतीश की आँखों मे नींद नहि थी वो तो बस शिप्रा के सोने का वेट कर रहा था क्युकी उसे आज रात का हॉट लाइव शो देखना था और उस पल के बारे मे सोच कर उसका लंड अभी से जोर मार रहा था......

पर तभी उसके डोर पर नॉक होती है जिससे वो ख्ययालो की दुनिया से बाहर आ जाता है...

सतीश घडी की तरफ देखता है जिसमे १० बज रहे थे- इस समय कोण होगा....

ओर सतीश बेड से उठ कर डोर खोलने के लिए बढ़ जाता है और गेट खोलते ही उसे अपना प्लान चोपट होता हुआ नजर आता है....
गेट खोलते ही सतीश का सारा प्लान चोपट हो जाता है, सामने शिप्रा खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी....

सतीश- तू सोयी नहि अभी तक्...

शिप्रा- आपको मे सोयी हुई लगती हूँ क्या...

सतीश- मेरे कहने का मतलब है की तू इतनी रात को यहा क्या कर रही है, जा जाकर सोजा...

शिप्रा- क्या भाई मे आपसे बात करने आई हूँ और आप मुझे भगा रहे हो...

सतीश- हाँ बता क्या बात करनी है...

शिप्रा- क्या भाई अब गेट पर खड़ा रखोगे क्या अंदर नहि बुलाओगे...

सतीश अपने रूम को देखता है की कहि कुछ उल्टा सीधा तो नहि है फिर अपना पूरा गेट खोल कर उसे अंदर बुलाता है...

शिप्रा आकर सतीश के बेड पर टाँगे फैलाकर लेट जाती है और पास मे पड़े रिमोट को उठा कर टीवी ऑन कर लेती है, सतीश भी उसके पास आकर लेट जाता है...

सतीश- तू क्या टीवी देखने आई है यहां पर...

शिप्रा- नहि भाईया मे तो आपसे बात करने आई थी....

सतीश- बता तुझे क्या बात करनी है...

शिप्रा- भाई आप तो भारती से प्यार करते हो न...

सतीश उसकी तरफ देखता है पर शिप्रा अपनी नजरे टीवी पर टिकाये हुए थी...

शिप्रा- बताओ न भाई...

सतीश- हम्म बहोत प्यार करता हु...

शिप्रा- फिर ये प्रियंका कौन है भाई....

सतीश एक बार फिर से उसे देखता है पर वो अभी भी नजरे टीवी पर टिकाये हुए थि, सतीश उसकी बात का कोई जवाब नहि देता...

शिप्रा- आप भारती को कही चीट तो नहि कर रहे..

सतीश उसकी बात से बौखलाते हुये- तू पागल है क्या तू जानती है की मे उसे चीट नहि कर सकता...

शिप्रा- तो फिर प्रियंका कोण है....

सतीश- फ्रेंड है...

इस बार शिप्रा सतीश की तरफ देखति है पर वो ऐसे बिहेव करता है जैसे की कितने ध्यान से टीवी देख रहा हो... शायद अब वो शिप्रा से नजरे नहि मिला रहा था...

शिप्रा- तो भारती को तो पता ही होगा ना प्रियंका के बारे मे... क्यों भाईया?

सतीश- नहि... उसे नहि पता...

शिप्रा- यानी की आप उसे चीट कर रहे हो...

सतीश- तू आज कुछ ज्यादा ही सवाल जवाब नहि कर रहि...

शिप्रा- वो तो मे बस ऐसे ही जनरल नॉलेज के लिए ही पूछ रही थी...

सतीश उसके बालो को पकड़ कर धीरे से खीचते हुये- मे बढ़ाऊ तेरी जनरल नॉलेज.

शिप्रा- नही छोड़ो दर्द हो रहा है भाई, आपको नहि बताना तो मत बताओ इसमें इतने नाराज होने की क्या बात है...

सतीश उसके बाल छोड़ते हुये- चल भाग अपने रूम में...
शिप्रा बेड से उठते हुये- अगर आप नहि बता पा रहे है तो मे बात दू भारती को प्रियंका के बारे मे....

सतीश अपने बेड से उठ कर शिप्रा का हाथ पकड़ते हुये- तुझे मेरी कसम है शिप्रा तू भारती को कुछ भी नहि बतायेगि, तुझे पता है मे उसके बगैर नहि जी सकता....

ये बात सतीश ने बहुत सीरियसली कहि थी...

शिप्रा- डोंट वरि भाई मे उसे कुछ नहि बताऊंगी...

सतीश- थँक्स फ़ॉर धिस

शिप्रा- तो अब बताओगे की ये प्रियंका कौन है,

सतीश- सही टाइम आने पर बता दूँगा... अब तू जाकर सोजा मुझे बहुत जोर की नींद आ रही है, और जाते समय लाइट ऑफ कर जाना...

ओर सतीश आँखे बंद करके ऐसे रियेक्ट करता है जैसे उसे कितनी तेज नींद आ रही हो...

शिप्रा सतीश को देख कर मुस्कुरा देती है और फिर रूम की लाइट ऑफ करके वो गेट को बंद करके बाहर निकल जाती है....


गेट के बंद होने की आवाज सुनकर सतीश तुरंत अपनी आँखे खोल देता है... और बेड से उठ कर गेट लॉक करता है, और लैपटॉप खोलके उसपर लिसा अन्न की पोर्न मूवी देखने लगता है और शिप्रा के सोने का वेट करने लगता है...

सतीश उस मूवी को देख कर काफी एक्ससिटेड हो गया था क्युकी लिसा अन्न की उम्र सोनाली के उम्र की ही थी और जो लड़का उसको घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चुत मे अपना मूसल पेल रहा था वो उसके बेटे की उम्र का लग रहा था, वो मूवी मे लिसा अन्न की जगह सोनाली को इमेजिन करने लगता है... और उस लड़के की जगह खुद को इमेजिन करते हुए अपनी माँ की कल्पनिक चुदाई का आनंद लेने लगता है....

अब सतीश इमेजिन करता है की कैसे वो अपनी मम्मी को घोड़ी बना कर अपना लंड पीछे से उसकी चुत मे कर रहा था.... सतीश अपना लंड टोपे तक बाहर निकाल कर वापस अंदर पेलकर उसकी चुदाई कर रहा था और साथ ही साथ उसके चूतडो को अपने पंजे से मसल रहा था.... फिर वो उसके चूतडो पर जोर जोर से थप्पड़ मारने लगता है और थप्पड़ मार कर उसके चूतडो को लाल कर देता है उसके हर थप्पड़ पर सोनाली के मुह से दर्द भरी सिसकारी फुट्ने लगती है...

अब सतीश धक्को को रोक कर अपने हाथ बड़ा कर सोनाली के बड़े बड़े बॉब्स दबाने लगता है... और उसकी पीठ पर अपनी जीभ फेरने लगता है....

थोड़ी देर तक उसके बॉब्स के साथ खेल्ने के बाद सतीश अपना लंड उसकी चुत से बाहर निकाल लेता है....

सोनाली तुरंत सीधी होकर उसके लंड को अपने मुह मे लेकर चुसना सुरु कर देती है... और थोड़ी देर मे ही चूसकर उसके लंड को साफ़ कर देती है...

सतीश उसके मुह से लंड को निकालता है और उसे धक्का देकर पीठ के बल लिटा देता है... और उसकी दोनों टांगों से पकड़ निचे की तरफ खीचता है अब सोनाली की चुत बिलकुल बेड के किनारे पर थी और उसके पैर बेड से निचे लटक रहे थे सतीश उसके एक पैर को उठा कर सीधा कर लेता है और उसकी चुत मे अपना लंड पेलकर उसकी धमाकेदार चुदाई करने लगता है... थोड़ी देर मे वो झड़ने के करीब आता है तो वो अपना लंड उसकी चुत से निकलता है और अपना लंड का सारा माल उसके दूध और पेट् पर झाड देता है.... सोनाली उसके माल को अपने दूध से उठा कर अपने मूह मे डालकर चाट लेती है और बाकी माल को अपने दूध पर रगड़ने लगती है..... सोनाली के दूध अब चमकने लगे थे....

उधर मूवी ख़तम हुई इधर सतीश का लंड जिसे वो अपने हाथ से हिला रहा था, ने भी अपना लावा उगल दिया जोकि उसकी बेडशीट पर गिरा... पर सतीश तो आनंद मे खोया हुआ था और जब उसे होश आता है तब वो देखता है की उसका माल उसके बिस्तर पर पड़ा हुआ था... वो तुरंत अपने रुमाल से उसे साफ़ करता है पर बेडशीट पर निशान पड़ चुका था...

सतीश- शीट यार आज ही तो नई बेडशीट डालि थी और आज ही...
सतीश अपना माल झड़ने के बाद जोकि उसकी बेडशीट पर ही गिरा था को अपने रुमाल से बेडशीट साफ़ करता है और फिर अपने लौडे को साफ़ करके उसे अपने शार्ट मे वापस दाल देता है, अब सतीश थोड़ा हल्का महसूश कर रहा था वो घडी की तरफ देखता है जोक ११:३० बजा रही थी

सतीश- ४० मीनट. हो गये शिप्रा को गए हुए यानी की शिप्रा अब तक सो गई होगी....

ओ बेड से उठता है और फिर धीरे से अपना डोर खोल कर बाहर आ जाता है नीचे जाने से पहले वो शिप्रा का डोर चेक करता है जोकि अंदर से लॉक्ड था...

सतीश- लगता है सो गयी...

ओर फिर वो सीडियों से निचे उतरता है तो देखता है की उसके माँ के कमरे की लाइट ओपन थी...

सतीश- लगता है माँ चालू हो गये...

ओर वो धीरे धीरे उनके गेट की तरफ बढ्ने लगता है... जैसे ही वो गेट के नजदीक पहुचता है उसे सिसकारियों की आवाज आने लगती है...

ओर गेट पर पहुचते ही उसके सामने जन्नत का नजारा था....

उसकी माँ यानी की सोनाली बेड पर अपना सर तकिये पर टिकाये नंगी लेटी हुई थी और उसका एक हाथ अपने बॉब्स को मसल रहा था और दूसरे हाथ से वो डिलडो को अपनी चुत मे अंदर बाहर कर रही थी...

उसका बदन एकदम संगेमरमर की तरह चमक रहा था और उसके सेक्सी बदन को और उसकी एक्टिविटी को देख कर सतीश का लंड फिर से उसके शार्ट मे खड़ा हो जाता है....

उधर अब सोनाली अपना हाथ दूध से हटा कर अपनी क्लीट को सहलाने लगती है... सोनाली अपनी सिस्कियों को रोक्ने की भरपूर कोशिश करती है ताकि सतीश और शिप्रा तक उसकी आवाज न पहुचे.... पर फिर भी उसके मुह से सिसकारी फुट रही थी....

सतीश अपने लंड को बाहर निकालकर सहलाते हुये.... आह माँ आप क्या माल हो ये आपको भी नहि पता तभी आप इतना तड़प रही हो वरना आपको इतना तडपना नहि पडता अपनी प्यास बुजाने के लिये....

ह.दी.- भोसडी के यहि खड़ा अपना हिलाते रहियो तु... और तेरी माँ किसी और से चुदवा बैठेगी...

सतीश- नही यार फिर से नहि,

ह.दी.-क्या फिर से नहि बे...

सतीश- तू ऐसे बार बार मुझे डिस्टर्ब नहि कर सकता...
ह.दी.- हरामखोर मे तुझे डिस्टर्ब नहि करता हूँ बल्कि तुझे सच्चाई से और लंड की ख्वाहिश तुजसे जाहिर करता हु... और तेरा लंड इस समय इसकी चुत की गहराई नापना चाह रहा है.... और तू भोसडी के यहा अपना लंड हिला रहा है....

सतीश- तो कर भी क्या सकता हूँ सतीश....

ह.दी.- जाकर अपना लंड पेल दे अपनी माँ की चुत मे और बनजा मादरचोद और इस समय वो इतनी गरम है की बड़ी आराम से तेरा लंड ले लेगी....

सतीश- भोसडी के तू सोचता कहा से है...

ह.दी.- जहा से तू नहि सोचता...

सतीश- जरूर तू लंड से ही सोचता है... पर मुझे तेरी इस बकवास से कोई मतलब नहि...

ह.दी.- ह...

इस पहले की ह.दी. कुछ कह पता सतीश- और हाँ अब मुझे डिस्टर्ब मत कर और मुझे लाइव शो देखने दे...

ओर सतीश वापस अपने लौडे को हिलाते हुए अपनी माँ का लाइव शो देखने लगता है....

सोनाली अपने एक हाथ से अपनी क्लीट को सहलाते हुये अपने दूसरे हाथ से डिलडो अंदर बाहर करती है... और धीरे धीरे उसकी स्पीड बढ्ने लगती है और थोड़ी देर मे ही उसका शरीर अकड जाता है और उसकी कमर बेड से ऊँची उठ जाती है और उसकी चुत सारा पानी बहा देती है... और उसकी कमर वापस बेड से टिक जाती है उसकी चुत अभी भी रस बहा रही थी....

थोड़ी देर मे ही सोनाली बेड से उठती है और बाथरूम मे चलि जाती है... इधर पता नहीं सतीश को क्या सूझता है वो सोनाली के बाथरूम मे जाते ही अंदर उसके बेड के पास पहुच जाता है और बेड पर पड़े सोनाली की चुत के रस के पास अपनी नाक ले जाकर उसे सूंघता है...

सतीश जैसे ही सांस अंदर खीचता है उसके चुत के रस की खुशबू उसके नथुनो से होते हुए अंदर तक पहुच जाती है और वो मदहोश होने लगता है

सतीश- आह... क्या मदहोश कर देणे वाली खुसबू है, ऐसी खुसबू तो मैंने आज तक नहि सुंघी....

ओर सतीश अपनी जीभ निकाल कर उस बेड शीट पर पड़े रस को चाटने लगता है, उसकी मधहोशी पल पल बढ़ती जा रही थी...

सतीश- क्या स्वाद है माँ की चुत के रस का....

ओर वो किसी कुत्ते की तरह अपनी जीभ निकालकर ज्यादा से ज्यादा रस बेडशीट से चाटने की कोशिश करने लगता है....

तभी उसके कान मे बाथरूम का गेट खुलने की आवाज आती है सतीश हडबडा जाता है उसके पास बाहर निकलने का वक़्त नहि था वो हड़बड़ाहट मे बेड के निचे छुप जाता है....


सतीश की धड़कने बहुत तेज हो गई थी वो बेड के निचे से झांक कर देखता है की सोनाली नंगी ही बाथरूम से बाहर आ गई थी और फिर वार्ड रॉब से अपनी नाइटी जोकि रेड कलर की थी को निकाल कर पहन लेती है, नाइटी पूरी तरह से पारदर्शी थी और उसके थाय तक ही आ रही थी और ऊपर उसके आधे से ज्यादा दूध नाइटी से बाहर झलक रहे थे...

डर के मारे सतीश का जो लंड सिकुड गया था अब वो पूरी तरह से खड़ा हो चुका था...

ओर उधर सोनाली नाइटी पहनकर लाइट्स ऑफ करती है और नाईट लैंप ऑन करके अपने बिस्तर पर लेट जाती है...
ओर इधर बेड के निचे सतीश बेचारा बुरी तरह फास गया था...

सतीश- यार कहा फस गया आज, वो तो अच्छा हुआ माँ की नजर नहि पड़ी मुझ पर वरना आज तो लौडे लग जाने थे...
ओर अब तो मे जा भी नहि सकता जब तक माँ नहि सो जाती...

सतीश निचे पड़े पड़े ही सोनाली के सोने का वेट करने लगता है... ३० मीनट. बाद सतीश बेड के निचे से निकलता है... अभी वो बाहर की तरफ निकलने वाला था की उसकी नजर सोनाली पे पड़ती है, सोनाली पीठ के बल सो रही थी और सोटे हुए बहुत सेक्सी लग रही थी उसकी नंगी चिकनी टाँगे देख कर सतीश का मन डोलने लगता है वो वापस बेड के किनारे आकर बैठ जाता है और नाईट लैंप की हलकी रौशनी मे अपनी आधी नंगी सोती माँ को देखने लगता है....

सोनाली की नंगी चिकनी टाँगे देख कर उसका लंड पूरी तरह अकड जाता है और उसका मन सोनाली की टाँगो को छूने को मचलने लगता है....

ओर सतीश हिम्मत करके अपना हाथ सोनाली की टाँगो पर रख देता है और फिर अपने हाथ को वहि रख कर अपनी माँ की तरफ देखता है, वो गहरी नींद मे थी उसे सोता देख सतीश की हिम्मत बढ़ जाती है और वो अपने हाथ को अपनी माँ की टांगो पर नीचे से ऊपर की तरफ बडाने लगता है अपनी माँ के मख़मली टांगो पर हाथ फिराते हुए उसके पूरे बदन मे सिहरन सी दौड जाती है वो सोनाली की टाँगो पर हाथ फिराते हुए घुटने तक ले आता है... घुटने पर अपने हाथ को रोक कर वो फिर से सोनाली की तरफ देखता है वो अभी भी नींद मे थी... अब सतीश की हिम्मत और बढ़ गई और सतीश अपने दोनों हाथ उसके पैरो पर रख कर उनके घुटनो को.सहलाने लगता है और फिर अपने होंठ उसकी नंगी टाँग पर रख कर निचे से घुटनो तक उसकी टाँग को चूमता है अब वो अपने हाथो को घुटने से आगे बड़ा कर उसकी जाँघ पर रख देता है....
उसे बहोत सुखद अनुभव हो रहा था उसकी मख़मली जाँघो को छूते हुये, सतीश अपनी माँ के शरीर की गर्मी को उनकी जाँघो से ही महसूश कर रहा था....

सतीश अपने माँ की जाँघों पर अपने होंठ रख देता है... और फिर उसे किस करते हुए ऊपर की और बढ्ने लगता है.... और ऐसा ही वो दूसरे को किश करते हुये ऊपर बढ़ता है....

अब सतीश बेड पर अपनी माँ के पैरो के दोनों और अपने घुटने टेक कर बैठे हुये था और उनकी जाँघो को सहला रहा था... अब उसके दोनों हाथ जाँघो पर फिसलते उसकी नाइटी तक पहुंच गए सतीश वहा पर अपनी माँ की चुत की गर्मी को महसूश कर सकता था यानी की उसकी माँ की चुत उससे थोड़ी दूरि पर ही थी पर बीच मे नाइटी दिवार बनकर खड़ी थी उसने हिम्मत करके नाइटी को कमर तक खिसका दिया और अब उसके सामने जन्नत का द्वार था उसकी माँ की चिकनी चुत उसकी आँखों के सामने थी जिसे वो नाईट लैंप की रौशनी मे अच्छे से देख सकता था, जिस चुत ने उसे पागल बना दिया था अब वो उसके सामने थी उसके थोड़ी ही दूरि पर....
सतीश अपने चेहरे को उसके चुत के करीब ले जाता है बहुत करीब और फिर एक गहरी सांस लेकर उसकी चुत की स्मेल को अपने अंदर खींचता है, सतीश का लंड झटके मारने लगता है...

सतीश अपनी माँ की चुत की गर्मी को अपने चेहरे पर अच्छे से महसूश कर रहा था उसका मन तो कर रहा था की वो आगे बड़कर अपनी माँ की चुत को अपने मुह मे भर ले पर वो बड़ी मुस्किल से अपने पर कण्ट्रोल करके अपने चेहरे को जाँघो के बीच से हटा लेता है और ऊपर सोनाली के चेहरे की तरफ बढ़ जाता है, सोनाली गहरी नींद मे थी सतीश उसके चेहरे को देखता है वो किसी एंजेल.की तरह लग रही थी सतीश उसके होंठो की तरफ देखता है बिना किसी लिपस्टिक के ही उसके होंठ काफी गुलाबी थे सतीश अपने पर कण्ट्रोल नही कर पाता और उसके होंठो पर अपने होंठ रख देता है और तुरंत ही हटा लेता है...
सतीश सोनाली के गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख देता है और तुरंत ही अपने होंठ हटा लेता है, सतीश का मन तो कर रहा था की उसके होंठो को अपने होंठो मे लेकर चुस लु पर उसकी हिम्मत नहि हो रही थी क्युकी उसकी इस हरकत से सोनाली जाग सकती थी...

सतीश सोनाली के होंठो पर २-३ छोटी किस करता है, और फिर उसकी गर्दन पर किश करते हुए नीचे आता है अब सतीश की नजर सोनाली के नाइटी से बाहर झलकते हुए चूचियों पर पड़ती है सतीश का मन सोनाली की चूचियों को नंगा देखने को मचलने लगता है, सतीश हिम्मत करते हुए उसकी नाइटी मे अपनी उँगलियाँ फसा देता है और उसकी नाइटी को चूचियों पर से निचे खिसकाने लगता है ये सब करते हुए सतीश की नजर सोनाली पर ही टीकी हुई थी...

उसकी मेहनत रंग लाती है और थोड़ी देर मे ही सोनाली की चूचियां सतीश के सामने नंगी थि, सतीश तो उन्हें देखते ही रह जाता है सोनाली की चूचियां वेल शेप्ड और एकदम गोरी थी.... इस उम्र मे भी सोनाली ने अपने फिगर को काफी अच्छे से मेन्टेन कर रखा था.... सतीश उसकी चूचियों पर अपने हाथ रख देता है अपनी माँ की मख़मली चूचियों के एहसाश से उसके मुह से सिसकि निकल जाती है....

सतीश- आह्हः माँ क्या माल हो आप, दिल तो करता है की आपकी चूचियों को अपने हांथो मे लेकर मसल दू और आपकी निप्पल्स को मुह मे लेकर चुसू और काटु....

सतीश अपनी माँ की चूचियों पर अपने हाथ हलके हलके फेरने लगता है इस समय सतीश जैसे जन्नत की सैर कर रहा था....
अब वो उसकी दोनों चूचियों पर अपने होंठो से चूमने लगता है और अपने अंगूठो से निप्पल्स को रब करने लगता है और ये सब वो बहुत ही आराम से कर रहा था और बीच बीच मे सोनाली की तरफ भी देखता की कही उसकी माँ की नींद न तूट जाए....

काफी देर तक किश करने के बाद सतीश अपनी जीभ से उसकी दोनों चूचियां बारी बारी से चाटने लगता है... और चूचियों चाटने के बाद वो सोनाली के निप्पल्स को अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगता है थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद वो दूसरे निप्पल को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है सतीश इतना एक्ससायटेड हो जाता है की वो भूल जाता है की वो कहा और किसके साथ ये सब कर रहा है और निप्पल को हलके से बाईट कर लेता है, उसकी इस हरकत से सोनाली कसमसा उठती है सतीश तुरंत ही बेड से निचे उतार कर उसके निचे छुप जाता है जबकि ऊपर सोनाली हलकी सी कसमसा कर अपनी करवट बदल कर लेट जाती है उसकी नींद अभी भी नहि टुटी थी ऐसा लगा था जैसे आज वो काफी समय बाद इतने सुकून की नींद ले रही हो....

बेड के निचे छुपे सतीश की तो फट कर मुह को आ गई थी उसने सोचा की आज तो उसकी वाट लगनी तय है और डैड तो उसे घर से ही निकल देंगे अगर उन्हें पता चला तो... पर जब वो काफी टाइम तक बेड पर कोई हरकत नहि देखता तो बेड के निचे से बाहर निकल कर देखता है तो उसे अपनी माँ को सोता देख सुकून मिलता है और सोनाली का चेहरा उसकी तरफ ही था और उसके दोनों चूचियां लटक रही थी... और निचे से उसकी नाइटी कमर से भी ऊपर हो गई थी.... ये सीन देख कर सतीश की आँखों मे फिर से हवस के कीड़े रेंगने लगते है, और वो उठ कर सोनाली के नंगे पैरों पर हाथ फिराते हुए ऊपर की तरफ बढ़ते हुए उसकी गांड तक पहुच जाता है सोनाली की मोटी गांड अब उसकी आँखों के सामने थी सतीश उसकी गांड देख कर पागल हो जाता है, मोटी और बड़ी गांडो का तो दीवाना था सतीश, वो बेतहाशा सोनाली की गांड को चूमने लगता है और उसकी गांड को हलके हाथ से मसलने लगता है... उसकी गांड को नंगी देख कर उसपर एक पागलपन सवार हो गया था और उसका लंड उसके शार्ट मे खड़े खड़े दर्द करने लगा था सतीश अपने लंड को बाहर निकाल कर सोनाली के पीछे लेट जाता है और अपना लंड उसकी गांड के पट्टो के बिच मे फसा देता है और धीरे धीरे घस्से मारने लगता है... सतीश अब जन्नत की सैर कर रहा था वो अपना एक हाथ आगे बड़ा कर उसके बॉब्स पर रख देता है और धीरे धीरे उन्हें सहलाने लगता है....
धीरे धीरे सतीश की स्पीड बढ्ने लगती है और वो अपनी कमर को तेजी से आगे पीछे करना लगता है उसका मुसल लंड गांड के बीच मे से होते हुए उसकी चुत से टकरा रहा था...
सतीश को ऐसा लग रहा था जैसे वो सच मे अपनी माँ की गांड मे लंड दाल के तेजी मे पेल रहा है, उसके आनंद की तो कोई सीमा ही नहि थी....

उसका लंड अब तेजी से गांड के बिच मे से होते हुए उसकी माँ की चुत पर ठोकर मार रहा था जिससे उसकी चुत पनिया गई थि, सोनाली की चुत इतना पानी बहा रही थी की सतीश का लंड टोपे तक उसके चुत के पानी से भीग गया था.... सतीश अपने लंड को गांड मे घस्से मारते हुए उसकी चूचियों को अपने हाथ से मसल रहा था
सतीश को ऐसा लग रहा था जैसे वो सच मे अपनी माँ की गांड मे लंड दाल के तेजी मे पेल रहा है, उसके आनंद की तो कोई सीमा ही नहि थी....

उसका लंड अब तेजी से गांड के बिच मे से होते हुए उसकी माँ की चुत पर ठोकर मार रहा था जिससे उसकी चुत पनिया गई थि, सोनाली की चुत इतना पानी बहा रही थी की सतीश का लंड टोपे तक उसके चुत के पानी से भीग गया था.... सतीश अपने लंड को गांड मे घस्से मरते हुए उसकी चूचियों को अपने हाथ से मसलने लगता है....

इधर सोनाली अपने सपने मे – आह आह उफ़्फ़फ़ डार्लिंग और जोर से हाँ ऐसे ही करते रहो बहोत अच्छा लग रहा है और जोर से दबाओ आह्ह्ह्ह....

सतीश को समझते देर नहि लगती की उसकी माँ सपने मे डैड से चुद रही है जबकि हक़ीक़त ये थी की उसका बेटा खुद उसे पेल रहा था....

सतीश अब अपनी स्पीड और तेज कर देता है उसका लंड तेजी मे उसकी गांड के बीच से होता हुआ उसकी चुत से टकरा रहा था...

अनजाने मे ही सही पर सोनाली भी इस सबका मजा ले रही थी....

अब सतीश के धक्के और तेज होने लगे थे और वो झड़ने के करीब पहुच गया था की तभी डोर बेल्ल बजती है,

सतीश हडबडा कर अपनी माँ से अलग होता है और तेजी से अपने शॉर्ट्स को ऊपर चड़ा कर गेट की तरफ बढ़ जाता है क्युकी वो दर रहा था की डोरबेल के बार बार बजने से उसकी माँ की आँख खुल सकती थी जोकि वो नहि चाहता था.... वो समझ गया था की गेट पर डैड हैं क्युकी इस समय किसी और के होने का तो चांस ही नहि बनता....

ओ तेजी मे गेट पर पहुच कर गेट को ओपन करता है... बाहर उसके डैड जोकि पूरी तरह नशे मे धुत्त थे और उनका दोस्त दुश्यंत रोज की तरह उन्हें छोड़ने आया था पर आज सतीश को गेट खोलता देख कर उसके सोनाली से मिलने और उसकी एक सेक्सी झलक पाने के अरमाओ पर पानी फिर चुका था वो अविनाश को सतीश को सौपते हुये- हेलो बेटा हाउ आर यु??

सतीश-ठीक हु अंकल और आप?
दुश्यंत- मि टू बेटा और आज मम्मी नहि आई तुम्हारी?

सतीश- माँ की तबियत ठीक नहि है इस्लिये आज वो जल्दी सो गयी...

फिर दुश्यंत उसको गुड नाईट बोलकर चला जाता है और सतीश अपने डैड को उनके बैडरूम मे ले आता है और एंटर होते ही देखता है की उसकी माँ ने फिर से करवट बदल ली है और अब वो पीठ के बल लेट कर सो रही थी...

सतीश अपने डैड को जोकि बेहोषी की हालत मे थे बेड पर साइड पे लीटा देता है और लाइट ऑन करके अपनी माँ के सुन्दर बदन को निहारने लगता है काफी टाइम तक अपनी माँ का चक्षु चोदन करने के बाद सतीश अपने डैड के शूज और शॉक्स उतार देता है...

ओर फिर लाइट्स ऑफ करने के बाद अपने खड़े लंड को हल्का करने के लिए वो वापस बेड पर आ जाता है और अपनी माँ के पैरो को थोड़ा सा फैला देता है अब सोनाली की चूत खुल कर उसके सामने आ जाती है.... सतीश देर न करते हुए उसकी चुत पर एक किस्स करता है और फिर अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके चुत पर रख कर मिशनरी पोजीशन मे उसके ऊपर आता है पर उसकी बॉडी पर अपना वेट नहि ड़ालता और ऊपर से ही उसकी चुत पर घिसाई करने लगता है थोड़ी देर मे ही सोनाली की चुत पानी बहाना सुरु कर देती है और सतीश को धक्के लगने मे आसानी हो जाती है इस समय उसका मजा दोगुना था क्युकी वो अपनी माँ की चुत पर लंड से धक्के लगा रहा था और उसका बाप उसकी माँ के बगल मे लेटा हुआ था इस बात से एक अलग ही रोमाँच आ रहा था उसके अंदर.... और वो इसको ज्यादा बरदास्त नहि कर पाता और झड़ने के करीब पहुच जाता है झड़ने से पहले ही वो अपने लंड का टोपा सोनाली की चुत मे अंदर कर देता है और टोपे के चुत मे घुसते ही वो अपना सारा रस उसमे उडेल देता है....

हल्का होने के बाद सतीश अपना टोपा जोकि चुत के होंठो मे फसा हुआ था को बाहर निकलता है और उसे अपनी माँ की थाय पर रगड कर साफ़ करके अपने शार्ट मे दाल कर रूम बाहर निकल जाता है और अपने कमरे मे चला जाता है उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की उसने ये सब किया तो किया कैसे....

ओ इस बात के बारे मे ज्यादा न सोचते हुए फुल नुड हो जाता है और जानबूझकर अपना दरवाजा खुला छोड़ देता है ताकि अगर उसका शक सही है की उसकी माँ ने उसका लौडा देख लिया है तो वो फिर से देखेंगी... वो अपने मोबाइल मे सुबह ६ बजे का अलार्म लगता है ताकि वो उठ कर अपनी माँ के एक्सप्रेशन देख सके सोने की एक्टिंग करते हुये....

सतीश बेड पर लेट जाता है और थोड़ी देर मे ही नींद के आग़ोश मे चला जाता है....
सूबह जब सोनाली की आँख खुलती है तो वो अपनी हालत देख कर शॉकेड रह जाती है, वो अपने पास अपने पति को लेटा देख कर....

सोनाली अपने आप से बुड़बुड़ाते हुये- ये किस टाइम आ गए इन्होने तो आने को मना कर दिया था इस्लिये मे स्लीपिंग पिल्स लेकर सो गई थि, जरूर इन्होंने मेरी ये हालत होगी क्युकी अपने आप तो बॉब्स नाइटी से बाहर आ नहि सकते....

सोनाली अब अपनी चुत की तरफ देखति है उसे चुत के निचे की चादर पर पड़े निशान दिखाइ देते है....

सोनाली अपने आप से- लगता है कल मेरी चुत ने काफी पानी बहाया है पर ये निशान तो वीर्य के लग रहे है, जरूर अविनाश ने ट्राय करा होगा और हर बार की तरह चुत की गर्मी से बाहर ही अपना माल झाड़ दिया होगा, इस नशे की लत ने तो इन्हे कही का नहि छोडा पहले हम साथ मे कितना एन्जॉय करते थे और अब तो ये आते ही बिस्तर पर लेट जाते है और कभी ट्राय भी करते है तो कुछ करने से पहले ही झड जाते है....

सोनाली बिस्तर से उठ कर बाथरूम मे फ्रेश होने चलि जाती है... आज उसने काफी अच्छी नींद ली थी जिसका असर उसके चेहरे से पता चल रहा था वो काफी फ्रेश लग रही थि, थोड़ी देर मे ही सोनाली फ्रेश होकर वाशरूम से बाहर निकलती है और सबके लिए टी बनाने के लिए किचन मे चलि जाती है....
ईधर सतीश के रूम मे ६ बजे अलार्म बजता है, अलार्म की आवाज से सतीश की नींद तूट जाती है और वो उठ कर अलार्म बंद करता है और फिर बिस्तर पर लेट जाता है, सतीश बेसब्री से अपनी माँ का इन्तजार कर रहा था... और थोड़ी देर मे ही उसके इन्तजार की घडी ख़त्म होने वाली थी क्युकी सोनाली कप्स मे चाय डालकर उसके रूम की तरफ ही बढ़ रही थी...

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