मेरी प्रेमिका -----1

 


 मेरी प्रेमिका  -----1





दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ 

वैसे तो मेरी कई कहानियाँ अभी अधूरी पड़ी हैं और मैने आपसे वादा किया है कि

मैं उन्हे जल्द ही पूरा करूँगा तब तक आपके लिए एक कहानी और पेश कर रहा हूँ…………………


मुझे ये पहले से एहसास था कि मेरी प्रेमिका अपने भाई के काफ़ी

नज़दीक है, पर अभी मुझे ये मालूम होने वाला था कि वो आपस मे

कितने करीब है. और जब ये बात मुझे पता चली तो हमारे लिए

चुदाई के नए दरवाज़े खुल गये. इस कहानी को पढ़े कि आख़िर हुआ

क्या?


कुछ महीनो पहले की बात है, सोनाली और में नंगे बिस्तर पर लेटे

थे. हम दोनो कुछ देर पहले ही भयंकर चुदाई कर के हटे थे और

अपनी उखड़ी सांसो पर काबू पाने की चेस्टा कर रहे थे. सोनाली मेरी

छाती पर सिर रख कर मेरे बालों में उंगलिया फिरा रही थी.


में आपको सोनाली के बारे में बता दूं, सोनाली 24 साल की है, गोरा

बदन, झील जैसी नीली आँखे. काफ़ी बड़े नही पर थोड़े भरे

भरे मम्मे, पतली कमर और सबसे बड़ी बात कि उसकी चूत बड़ी कसी

हुई है, जो मुझे बहोत पसंद है. वो अपनी चूत का बड़ा ख़याल

रखती, सुग्नधित पाउडर लगाना, उसके इर्द गिर्द के बालों को तराशना

ये सब उसका शौक है.


सोनाली ने सिर उठाया और कहा, "राज में तुमसे कुछ कहना चाहती

हूँ."


उसकी इस बात ने मेरी जागृता बढ़ा दी. हम दोनो एक दूसरे से कुछ

नही छुपाते थे. फिर भी उसने ये बात मुझसे तीन महीने तक छुपा

के रखी थी, जब हमें मिले हुए करीब साल भर होने आया था. उसने

जो बताया वो कुछ इस प्रकार से था.


एक दिन सोनाली जब फिटनेस सेंटर से रात को घर पहुँची तो उसका

घर सुनसान पड़ा था. उसके माता पिता छुट्टियाँ मनाने बाहर गये थे

और वो इस समय अपने भाई विजय और छोटी बेहन प्रियंका के साथ

रहती थी. प्रियंका अपने कुछ दोस्तों के साथ पिक्चर देखने गयी हुई

थी, तो उसने सोचा कि सिर्फ़ विजय घर पर होगा.


एक्सर्साइज़ करने से वो पसीने से तर बतर थी और शवर ले नहाना

चाहती थी, पर उसने सोचा कि पहले विजय से मिल ले और खाने के

प्रोग्राम के बारे मे जान ले.


वो विजय के कमरे की और बढ़ी तो उसे जोरों से संगीत की आवाज़

सुनाई पड़ी. सोनाली ने दरवाज़ा खटखटाया पर संगीत की आवाज़ मे

विजय ने सुना नही. यही सोच वो दरवाज़ा खोल विजय के कमरे मे

दाखिल हो गयी.


कमरे मे घुसते हुई जो उसने देखा, वो देखकर वो हैरान रह गयी.

उसका भाई विजय कंप्यूटर के पीछे बैठा कोई ब्लू फिल्म देख रहा था

और साथ ही साथ अपना 9' इंची लंड मुठिया रहा था.


विजय ने जब अपनी छोटी बेहन को वहाँ देखा तो उसके लंड ने उसी

वक्त पानी छोड़ दिया. उसके वीर्य की पिचकारी हवा मे होती हुई उसकी

बेहन के कदमो के पास गिर पड़ी.


"सॉरी भैया," सोनाली पलटी और दरवाज़े के बाहर हो ली, "जब तुम

फारिग हो जाओगे तब तुमसे मिलूंगी." सोनाली ने मुस्कुराते हुए कहा.


सोनाली अपने भाई को मूठ मारते देख खुद उत्तेजित हो गयी थी और

उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी. वो दौड़ कर अपने कमरे मे पहुँची और

कपड़े उतार बाथरूम मे शवर की लिए घुस गयी. अभी भी उसके

दिमाग़ मे उसके भाई का लंड घूम रहा था. यही सोचते हुए उसने अपनी

चूत पर हाथ फिराया और अपनी दो उंगलिया चूत मे घुसा अंदर

बाहर करने लगी. उसे अपना पानी छुड़ाने मे ज़्यादा वक्त नही लगा.


विजय ने बाथरूम का दरवाज़ा खट काया, "दीदी मुझे पेशाब करना

है." और वो बाथरूम का दरवाज़ा खोल अंदर घुस गया. बदहवाशी

मे सोनाली दरवाज़ा बंद करना भूल गयी थी.


सोनाली वैसे शवर कर्टन के पीछे थी फिर भी विजय को उसके

शरीर की हर कटाव अच्छी तरह दिखाई दे रहा था. सोनाली को लगा

कि वो पकड़ी गयी फिर उसने ऐसा परदर्शित किया कि जैसे कुछ हुआ

ही ना हो.


"और भैया क्या हाल चाल है?" सोनाली ने विजय को चिढ़ाते हुए

पूछा.


विजय टाय्लेट के सामने खड़ा था, उसने अपना लंड निकाला और पेशाब

करने लगा, "हाल चाल अच्छे ही है. थॅंक्स."


"लगता है तुम्हे पेशाब करने में कुछ तकलीफ़ हो रही है, अगर

कोई मदद चाहिए तो कहो?" सोनाली एक बार फिर उसे चिढ़ाते हुए

बोली.


सोनाली हमेशा से ही अपने भाई विजय से काफ़ी प्यार करती थी, पर

उसके साथ सेक्स करने की कभी उसने सोची भी नही थी. उसने शवर

बंद किया और तौलिया उठा अपने बदन को पौंच्छने लगी. उसके निपल

तन कर खड़े थे और वो अपने आपको अपने भाई का लंड देखने से नही

रोक सकी.


विजय का लंड मुरझाया हुआ सा था, पर इस अवस्था मे भी उसे अच्छा

लग रहा था. विजय ने टाय्लेट की फ्लश खीची और अपनी बेहन की ओर

घूम गया. "उम्मीद है मेने तुम्हे ज़्यादा तो नही चौंका दिया."


"तुम उसकी चिंता मत करो मुझे लंड देखने की आदत है, याद है

मेने कहा था कि मेरा एक बाय्फ्रेंड है." सोनाली अपने बाल सुखाते

हुए बोली.


"हां तुमने कहा तो था," विजय कुछ खोई सी आवाज़ मे बोला. असल

में उसका ध्यान अपनी बेहन की कमर के नीचे के हिस्से पर था. टवल

सोनाली के बदन पर कुछ इस तरह से था कि उसके आधे चूतड़ विजय

को दिखाई दे रहे थे.


विजय ने करीब छह महीने से किसी को नही चोदा था, इसलिए इस

हल्के नज़ारे ने भी उसमे गर्मी भर दी.


पहले तो सोनाली ने अपने भाई की नज़रों पर ध्यान नही दिया, पर

देखा कि उसका भाई उसे घूर रहा है तो उसने अपना टवल ठीक कर

अपने बदन को ढांप लिया.


सोनाली अपने भाई की ओर घूम कर बोली, "विजय लगता है कि आजकल

कोई लड़की तुम्हारे साथ नही है, इसलिए मूठ कुछ ज़्यादा ही मारने

लगे हो?" उसने देखा कि विजय का लंड उसकी पॅंट मे एक बार फिर खड़ा

हो रहा था, और उसकी खुद की हालत भी कुछ ऐसी ही हो रही थी.


"अच्छा सच सच बताओ, मूठ मारते वक्त तुम क्या सोचते रहते हो?"

सोनाली ने पूछा.


विजय भी उसे मुस्कुराते देख थोड़ा शरारती हो गया और उसे कंधों

से पकड़ बोला, "में हमेशा यही सोचता रहता हूँ कि तुम्हे कुतिया

की तरह चोद रहा हूँ." ये इन्दोनो के लिए कुछ नया नही था, "फिर

तो तुम मेरी चूत से पानी भी छुड़ा देते होगे अपने ख़यालों मे."

सोनाली उसे और चिढ़ाते हुए बोली.


सोनाली ने अपने आपको छुड़ाया और बाथरूम का दरवाज़ा खोल पॅसेज

मे बढ़ गयी.


छः महीने की सेक्स की भूक ने विजय को एक तुरंत निर्णय लेने पर

मजबूर कर दिया, उसपर से अपनी बेहन के अधनंगे जिस्म ने उसके बदन

मे आग भर दी थी.


विजय ने सोनाली के टवल को पकड़ खींच लिया, जिससे सोनाली लड़खड़ा

गयी और ज़मीन पर पेट के बल गिर गयी जिससे उसकी गान्ड हवा मे हो

गयी थी.


सोनाली ने महसूस किया कि किस तरह विजय ने उसके चूतड़ पकड़े थे

और अपना खड़ा लंड उसकी चूत मे एक ही धक्के मे डाल दिया था.


"उउउइईई माआअ" वो सिर्फ़ इतना ही कह पाई. इससे पहले कि वो कुछ

कहती उसकी खुद की भावनाए उस पर हावी हो गयी और उसे विजय का

लंड अपनी चूत मे अच्छा लगने लगा.


विजय अपने लंड को सोनाली की चूत मे अंदर बाहर कर रहा था और

सोनाली को भी मज़ा आ रहा था. उसे अब इस बात की परवाह नही थी

कि विजय उसका भाई है, इस वक्त वो सिर्फ़ चुदवाना चाहती थी जोरों

से, और वो चुद रही थी.


विजय जोरों से अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था.

अक्सर उसने अपनी बेहन को चोदने के सपने देखे थे. वो हमेशा सोचा

करता था कि सोनाली की चूत कैसी होगी, पर ये नही सोचा था कि इतनी

कसी हुई होगी. उसे अपना लंड सोनाली की चूत के अंदर बाहर होता हुआ

भी अच्छा लग रहा था, उसने उसके चूतड़ पकड़े और फैला दिए और

अपने लंड को अंदर बाहर होते देखने लगा.


`ओह सोनायायाययाली तुम्हारी चूत कितनी कसी हुई है.

बहुत अच्छा लग रहा है तुम्हारी चूत मारते हुई." विजय

अपनी उखड़ती सांसो के साथ सिसका.


सोनाली को भी माज़ा आ रहा था पर उसके घुटनो मे भी दर्द होने

लगा था जो विजय के हर धक्के के साथ ज़मीन पर रगड़ खा रहे

थे.


"ओह आआआः मेरा छूटने वाल्ला हॅयाययी." विजय सोनाली के कान मे

फुसफुसाया.


"हाआअँ छोड़ दो अपना पानी भर दो मईरी चूऊत को."

सोनाली जवाब मे सिसकी.


विजय ने दो चार कस के धक्के मारे और अपने वीर्य की बौछार अपनी

बेहन की चूत, मेरी प्रेमिका की चूत मे छोड़ दी. सोनाली की चूत ने

भी तुरंत ही पानी छोड़ दिया.


विजय ने अपने लंड को उसकी गीली चूत से बाहर खींचा, उसके लंड के

साथ उसका वीर्य भी थोड़ा बाहर आ गया और ज़मीन पर चुहुने लगा.

एक बार तो उसे लगा कि उसने कोई पाप कर दिया है, पर सोनाली की

चूत से बहते रस ने फिर उसकी सोच बदल दी, "सोनाली मुझे तो

मज़ा आ गया."


सोनाली कुछ देर के लिए खामोश रही. मज़ा उसे भी आया था पर उसे

अपने आप पर शर्मिंदगी हो रही थी कि उसने अपने सगे भाई से

चुदवाया है.


सोनाली विजय की ओर घूमी और उसे अपनी बाहों मे भरते हुए

बोली, "हां विजय मज़ा तो मुझे भी आया पर ये सिर्फ़ एक बार के लिए

ही था ये याद रखना."


"हां में भी यही सोच रहा था, पर अगर राज को पता चलेगा तो

वो क्या सोचेगा." विजय ने कहा.


"उसे कुछ पता नही चलना चाहिए, ये सिर्फ़ हमारे और तुम्हारे बीच

रहेगा." सोनाली ने उससे कहा.


सोनाली अपनी गर्दन हिलाते हुए बोली, "में जाकर कपड़े पहन लेती

हूँ." विजय ने उसके होठों को चूम लिया, और उसे अच्छा लगा. वो उससे

अलग हो अपने कमरे मे आ गयी.



थोड़ी देर बाद ही विजय अपने कमरे मे चला गया. सोनाली बिस्तर पर

बैठ अपनी चूत को देख रही थी. उसके भाई का वीर्य अब भी उसकी

चूत से चूह रहा था. उसने उसके वीर्य को थोड़ा अपनी उंगलियों मे

लिया और चाटने लगी. विजय के वीर्य का स्वाद उसे अच्छा लगा, बहोत

अच्छा लगा.


जब सोनाली ने अपनी कहानी पूरी की तो मेरी तरफ डरी हुई नजर से देख रही थी.

वो मुझसे डर रही थी उसकी कहानी सुनने के बाद में उसे छोड़ दूँगा, "तुम

दोनो सिर्फ़ उसी दिन चुदाई की थी फिर कभी नही की?" मेने पूछा.


"हां राज विश्वास करो. में इस बात के लिए तुमसे माफी भी मांगती

हू, पर अगर तुम मुझे छोड़ना चाहते हो तो मेरी जिंदगी से जा

सकते हो? में कोई शिकायत नही करूँगी." सोनाली रोते हुए बोली.


"अरे बाबा तुम्हारी कहानी सुनकर में चौंक पड़ा था," मेने कहा.


"प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो." सोनाली अपने कान पकड़ते हुए बोली.


सच पूछो तो उसकी कहानी ने मुझे भी उत्तेजित कर दिया था. मेरा

लंड भी एक बार फिर खड़ा हो गया था. मेने सोनाली के चेहरे को

अपने हाथों मे लिया और उसके होठों को चूम लिया. उसने अपना मुँह

खोला और उसकी जीभ मेरे मुँह मे घुस गयी.


मेने उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया, "देखो तुम्हारी

कहानी ने मेरे साथ क्या किया है? अब तुम इसकी मदद क्यों नही

करती?'


सोनाली मुस्कुरई, जिस तरह से मेने उसकी बात को संभाला था वो

हंस दी, मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे पकड़ रगड़ने लगी और मसल्ने

लगी. फिर उसने झुक कर मेरे लंड को अपने मुँह मे ले लिया और जोरों

से चूसने लगी.


वो इतनी जोरों से और अच्छी तरह से मेरे लंड को चूस रही थी कि

मेने अपनी आँखें बंद कर ली. पर आँखे बंद होते ही मुझे ऐसा

दिखा कि वो अपने भाई से कस के चुदवा रही है और उसी वक्त मेरे

लंड ने उसके मुँह मे पानी छोड़ दिया.


* * * * * * * *


जिस दिन सोनाली ने मुझे बताया था कि किस तरह उसके भाई ने उत्तेजना

में उसे चोदा था, उसके दूसरे दिन में अपने छोटे से फ्लॅट मे

किचन मे बर्तन धो रहा था.


सही पूछो तो में सोनाली और उसके भाई विजय की बीच जो घटना कुछ

महीने पहले हुई उसके बारे में और जानना चाहता था. बर्तन धोते

हुए मैने उससे पूछा, "अच्छा एक बात तो बताओ सोनाली, अपने ही भाई से

चुदवाते वक़्त तुम्हे कैसा महसूस हुआ?"


सोनाली ने मेरी तरफ देखा और कहा, "राज में तो समझी थी कि हम

लोग इस विषय को ख़त्म कर चुके है. वो सिर्फ़ एक बार का हादसा था

डियर."


"मुझे पता है और मेरा विश्वास करो में कुछ और नही सोच रहा,

वो तुम्हारा भाई है और तुम दोनो एक दूसरे से प्यार करे हो………….."


सोनाली अजीब निगाहों से मुझे देखती रही फिर थोड़ा मुस्कुराते हुए

बोली, "तुम कितने समझदार और अच्छे इंसान हो राज."


"वो तो ठीक है, पर जब भी में तुम्हारे और विजय के बारे मे

सोचता हूँ मेरा लंड खड़ा हो जाता है. देखो ना इस वक़्त भी खड़ा

हो गया है." मेने अपना लंड पीछे से उसके चुतडो पर चुभोते

हुए कहा.


"मुझे महसूस हो रहा है, अच्छा पूछो तुम क्या पूछना चाहते हो?"

सोनाली बोली.


"मुझे सिर्फ़ इतना बताओ कि जब तुम्हारा भाई तुम्हे चोद रहा था तो

तुम्हे कैसा महसूस हुआ?" मेने कहा.


"सही बोलूं तो मुझे बहोत अच्छा लगा, मुझे लंड पसंद है और

खास तौर पर लंबे और मोटे लंड जो मेरी चूत को चौड़ा दे और

भर दे. और तुम्हारे जैसे लंड तो कुछ ज़्यादा ही पसंद है." उसने

मुस्कुराते हुए कहा.


मेने धीरे से उक्से गालों को चूम लिया और अपने लंड को उसकी गान्ड

पे ज़ोर से दबा दिया. मुझे पता है कि उसे ये सब करना अच्छा लगता

है फिर उसकी गान्ड भी तो बड़ी प्यारी है.


"ओह राअज थोड़ा ज़ोर सस्ससे दाआबाआओ ना……….अककचा तो में

कहाँ थी."


"तुम्हारे भाई का लंड तुम्हारी कसी हुई चूत मे था." मेने जोरों से

अपने लंड को उसकी गान्ड पे दबाते हुए कहा.


"तुम उन दिनो बाहर गये हुए थे या मेने कई दिन से चुदवाया नही

था इसलिए, मुझे पता नही क्या हुआ. जब विजय ने मुझे पीछे से

पकड़ अपने लंड पे खींचा तो में उसे रोक नही पाई. में खुद

इतनी उत्तेजित थी कि मुझे भी अच्छा लग रहा था." सोनाली अपनी गान्ड

को मेरे लंड से रगड़ती हुई बोली.


वो सही कह रही थी, उन दिनो में काम के सिलसिले मे बाहर गया हुआ

था और दो हफ्ते बाद ही लौटा था. सोनाली की कहानी ने मुझे काफ़ी

गरम कर दिया था.


सोनाली किचन की सिंक पर खड़ी बर्तन धो रही थी, मेने उसकी

स्कर्ट को उपर उठाया और उसकी पईण्टY को नीचे खिसका दिया. फिर मे

घुटनो के बल बैठ गया और उसके चूतड़ पर हाथ फिराने लगा.

उसके चूतड़ को चूमते हुए मेने कहा, "सोनाली मुझे और विस्तार से

बताओ."


"हे भगवान, में तो सिर्फ़ सोचकर ही गरमा रही हूँ." सोनाली बोली.


"वो तो में देख ही रहा हूँ." मेने कहा.


फिर मेने उसके चूतड़ थोड़े फैलाए और उसकी गुलाबी चूत को

देखने लगा. उसकी चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी और उसके भूरी झान्टे

पानी मे लिसडी चमक रही थी. मुझे उसकी गान्ड के छेद के चारों और

का काला हिस्सा और गरम कर गया. मैं झुक कर अपनी ज़ुबान उसकी

गान्ड के छेद पे फिराने लगा.


"ओह राआाज हहाआअँ वही चाट. ओह अपनी जुबााअँ

मेरे उस छोटे छेएएएएड मे घुस्सा दो." सोनाली सिसक पड़ी.


मेने एक बार के लिए अपने चेहरे को उसकी गान्ड पर से हटाया और

कहा, "सोनाली प्लीज़ मुझे और बताओ ना?" मेने फिर अपनी ज़ुबान उसकी

गान्ड के छेद मे घुसा दी.


"हां हां बताती थोड़ी देर रूको." सोनाली ने अपने हाथ सिंक के

किनारों पर जम कर रख दिए जिससे उसका संतुलन बना रहे.


"जब विजय मुझे जोरों से चोद रहा था तो में भी उसका साथ दे

रही थी. मेरा मन कर रहा था की वो और जोरों से मुझे चोदे, में

उसके वीर्य को अपनी चूत मे महसूस करना चाहती थी. उस समय मुझे

इस बात की परवाह नही थी कि में अपने सगे भाई से चुदवा रही

हूँ, बल्कि उत्तेजना मुझ पर इस कदर हावी थी कि में एक छिनाल की

तरह उसे और जोरों से चोदने के लिए कह रही थी. मेरे पास कोई

चारा भी नही था, उसने मुझे पकड़ ही इतनी कस कर रखा था, की

मेरे घुटनो तक उसके धक्के से छिल गये थे." सोनाली ने कहा.


उसकी गान्ड के छेद में अपनी ज़ुबान घूमाते हुए मेने अपनी दो उंगलियाँ

उसकी गीली चूत मे घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा. उसी समय

सोनाली की चूत ने पानी छोड़ दिया.


"ऊहह हाआआं ओह मेरा छूट रहाा है." उसके सिसकने

की आवाज़ कमरे माइयन गूँज उठी.


मेरा काम अभी ख़तम नही हुआ था, में अपनी ज़ुबान को उसकी गान्ड मे

घुमाता रहा और अपनी जीब से उसकी गान्ड का और कहानी का स्वाद ले

रहा था. मेरा लंड तन कर इतना कड़ा हो गया था कि लगा कि मेरी पॅंट फाड़

कर बाहर आ जाएगा.


"बताती रहो रूको मत, जहाँ तक मुझे याद है उन दिनो तुम गर्भ निरोधक

गोलियाँ भी नही ले रही थी." मेने उससे कहा.


"हां तुम सही कह रहे हो, इस बात का मुझे ख़याल ही नही आया."

सोनाली ने जवाब दिया.


"विजय तुम्हे गर्भवती भी कर सकता था." मेने सोचते हुए कहा.


"हां कर सकता था, और अगर हो जाती तो एक नई कहानी बन जाती,

पर शुक्र है भगवान का कि नही हुई." सोनाली बोली, "राज चलो ना

ड्रॉयिंग रूम मे सोफे पर चलते है."


हम लोग ड्रॉयिंग रूम मे सोफे पर आगाये. सोनाली ने अपनी स्कर्ट के

हुक खोल उसे निकाल दिया और ज़मीन पर फैंक दिया. उसकी पैंटी जो

अभी तक उसके घुटनो मे फँसी हुई थी उसे भी उतार दिया उसने. फिर

वो आकर मेरे बगल मे सोफे पर बैठ गयी.


मेने अपना लंड अपनी पॅंट से बाहर निकाला और उसे रगड़ने लगा.


"लाओ में तुम्हारे लिए कर देती हूँ." कहकर सोनाली ने मेरे लंड को

अपनी मुट्ठी मे भींच लिया. वो एक अलग अंदाज़ से लंड को मुठिया रही

थी. वो बड़ी धीरे धीरे मेरे लंड को मुठिया रही थी शायद वो

मुझे और बताना चाहती थी.


"तुमने बहोत बड़ा ख़तरा मोल लिया था उसका पानी अपनी चूत मे

छुड़वा के." मेने कहा.


"हो सकता है लिया हो, पर इससे भी बड़ा ख़तरा तो मेने बाद मे

लिया था." सोनाली मेरे लंड को मसल्ते हुए बोली.


"में समझा नही तुम क्या कहना चाहती हो?" मेने पूछा.


"राज देखों जब एक बार बात खुल ही गयी है तो में तुम्हे पूरी

कहानी सुनाती हूँ." ये कहकर उसने मेरे लंड पर अपनी गिरफ़्त बढ़ा

दी जो मुझे अच्छी लग रही थी.


उसी वक़्त में सोच रहा था कि वो क्या कह रही है. पिछली रात तो

उसने कहा था कि उसके भाई ने उसे एक बार ही चोदा था और वो किस्सा

वहीं ख़त्म हो गया था. क्या इसके आगे भी कोई बात है.


"सुनो राज, मेने तुम्हे पूरी सच्चाई नही बताई थी. मेरी बात ध्यान

से सुनो और फिर तुम फ़ैसला करना कि में ग़लत थी या सही." सोनाली

ने कहा, वो मेरे लंड को जोरों से मुठिया रही थी, और इसी अवस्था

मे मेरे लिए सोचना मुश्किल हो जाता था.


सोनाली ने बताया कि उस रात जब उसकी भाई विजय ने उसकी चूत खुद

के वीर्य से भर दी थी, उसके बाद वो अपने अपने कमरे मे चले गये

थे. सोनाली बिस्तर पर बैठ अपने भाई के वीर्य को अपनी उंगलियों मे

लेकर चाट रही थी. उसे वीर्य का स्वाद काफ़ी पसंद है.


तभी विजय ने उसके कमरे के दरवाज़े पर दस्तक दी, "दीदी क्या में

थोड़ी देर के लिए अंदर आ सकता हूँ, मुझे तुमसे कुछ बात करनी

है."


सोनाली ने सोचा कि वो अपने बदन को ढक ले, लेकिन जब उसने सोचा कि

थोड़ी देर पहले ही तो वो उससे चुदवा चुकी है तो तन ढके या ना

ढके क्या फरक पड़ता है, "हां क्यों नही अंदर आओ ना." सोनाली ने

कहा.


विजय ने कमरे मे कदम रखा. उसने अपनी शॉर्ट और टी-शर्ट पहन

रखी थी. उसके हाथ मे उसका डिजिटल कॅमरा था. सोनाली को नंगी

देख वो वहीं रुक गया, "हे भगवान सोनाली तुम कितनी सेक्सी लग रही

हो. सही मे राज नसीब वाला है."


"पर आज की रात तो तुम्हारे भी नसीब खुल गये लगता है." सोनाली

ने जवाब दिया.


विजय मुस्कुराया और उसके सामने कुर्सी पर बैठ गया, "सोनाली तुम्हारी

चूत तो अभी भी चूह रही है."


"और तुम्हारा लंड भी तो खड़ा है," सोनाली ने उसके शॉर्ट मे बने

तंबू की ओर इशारा करते हुए कहा.


"यही तो बात है जो में तुमसे करने आया हूँ. देखो सोनाली जो

मेने आज किया उसके लिए में बिल्कुल भी शर्मिंदा नही हूँ, बल्कि

मुझे बहोत अच्छा लगा. तुम्हे चोदने में मुझे बहोत मज़ा आया."

विजय ने कहा.


सोनाली ने कुछ जवाब नही दिया, और सोच रही थी उसकी बात का क्या

उत्तर दे, मज़ा तो उसे भी आया था.


"सोनाली तुम मेरी बेहन हो और में तुम्हे प्यार करता हूँ." विजय ने

कहा.


"बेवकूफ़ में ये जानती हूँ." सोनाली ने कहा.


"तुम मुझे ग़लत मत समझो. बस में तुम्हे प्यार करता हूँ."


"एक भाई की तरह जैसे में करती हूँ, तो फिर बात क्या है, तुम

मुझे क्या बताने वाले हो विजय."


सोनाली ने विजय के हाथ मे कॅमरा देखा तो कुछ कुछ उसकी समझ मे

आने लगा. उसे पता था कि विजय को पिक्चर खींचने का शौक है.

विजय जिस भी लड़की की चुदाई करता था उसकी चूत की फोटो खींच

अपने आल्बम मे लगा लेता था.


भूल से वो आल्बम एक बार सोनाली के हाथ लग गयी थी. नंगी

लड़कियों की तस्वीरें देख वो गरमा गयी थी और उस रात उसने अपने

कमरे मे मूठ मारी थी.


विजय हर लड़की की एक से ज़्यादा तस्वीरेब खींचता था, पर उसकी

सबसे पसंदीदा पिक्चर थी लड़की की चूत की जब उसका वीर्य उस

चूत से बहता था. आज वो अपनी बेहन की चूत की भी तस्वीर उतारना

चाहता था.


जब मेने सोनाली के मुँह से ये सुना तो में हँसने लगा. उसका आल्बम

देखने को मेरा भी मन करने लगा. सोनाली अब जोरों से मेरे लंड को

रगड़ मसल रही थी. मेरा झड़ने का वक़्त करीब था ये बात सोनाली

समझ गयी थी.


सोनाली ने अपनी कहानी जारी रखी. विजय ने उससे पूछा कि क्या वो उसकी

तस्वीर ले सकता है. सोनाली ये बात सुनकर ही गरम हो गयी, पर एक

समस्या थी कि उसकी चूत पूरी तरह सुख चुकी थी. अब उसकी चूत

मे ज़रा भी गीला पन या वीर्य की एक भी बूँद नही थी जो विजय के

हिसाब से फोटो के लिए ज़रूरी थी.


सोनाली पूरी तरह एक बार फिर उत्तेजित हो चुकी थी, "विजय ठीक है

मेरे एक बात सुनो. मेरी चूत मे अभी भी आग लगी हुई है, और राज

को आने मे अभी दो हफ्ते पड़े है. हम लोग आज एक बार पहले ही

चुदाई कर चुके है, और में तुम्हारे लंड का एक बार फिर मज़ा लेना

चाहती हूँ. पर विजय तुम्हे मुझे एक वादा करना होगा कि आज की रात

हमारे इस रिश्ते की आखरी रात होगी. हां आज तुम पूरी रात मेरी

चूत की धज्जियाँ उड़ा सकते हो."


विजय उसकी बात मान गया और मन ही मन बहुत खुश हुआ कि उसे अपनी

बेहन की कसी चूत एक बार फिर चोदने को मिलेगी.


"पर हमे थोड़ा जल्दी करना होगा, कारण प्रियंका कभी वापस आ

सकती है." सोनाली ने कहा.


प्रियंका उनकी बेहन थी जो अपने कुछ दोस्तों के साथ पिक्चर देखने

गयी थी. विजय सबसे बड़ा 28 साल का था, फिर प्रियंका 25 साल की

और सोनाली सबसे छोटी 24 साल की. सोनाली अपने मा बाप की काफ़ी

लाडली बेटी थी. रहने को वो अपने माता पिता के घर ही रहती थी पर

उसका ज़्यादा समय मेरे यहाँ गुज़रता था. विजय और सोनाली की आपस

में अच्छी बनती थी पर उसकी प्रियंका के साथ नही जमती थी.


"चलो अब यहाँ मेरे पास आओ और अपना लंड मेरी चूत मे घुसा दो

जल्दी से." सोनाली उत्तेजित होते हुए बोली.


में कल्पना में विजय को सोनाली को चोद्ते हुए देखने लगा और उसी

वक्त मेरे लंड से एक लावा के रूप मे मेरा वीर्य छूट गया. मेरा

वीर्य कुछ सोनाली के हाथों मे और कुछ मेरी जांघों पर गिर गया

था.


"वाउ ये कहानी तो सही में तुम्हे गरमा रही है." सोनाली ने कहा

और मेरे लंड को अपने मुँह ले चूस कर सॉफ करने लगी. उसके

मुलायम मुँह मे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. सही मे मेरी सोनाली

लंड चूसने मे माहिर थी.


"तो उस रात तुम दोनो ने दुबारा चुदाई की?" मेने पूछा.


सोनाली ने मेरे लंड को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया और मेरी

जांघों पर गिरे मेरे वीर्य को चाटने लगी.


"हां, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. मेने कल सब नही बताया क्यों की

में डर गयी थी की तुम्हे बुरा लगेगा." सोनाली ने कहा.


"तुम्हे अच्छी तरह याद है ना कि तुम्हे अपने भाई से दो बार ही

चुदवाया था." मेने सोनाली से पूछा.


सोनाली मेरी गोद मे बैठ गयी और अपनी टाँगे मेरी जांघों के अगल

बगल रख मेरी अर्ध मुरझाए लंड को अपनी चूत से रगड़ने

लगी, "हां अभी तक तो ऐसा ही याद है."


"क्या मतलब है तुम्हारा?" मेने चौंकते हुए कहा.


"अरे बाबा मज़ाक कर रही थी, मे तुमसे वादा कर चुकी हूँ कि दुबारा

ऐसा नही होगा," कहकर वो मेरे लंड को और जोरों से अपनी चूत पर

रगड़ने लगी. थोड़ी ही देर मे मेरा लंड एक बार फिर तन कर खड़ा हो

गया. सोनाली ने मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर लगाया और

बैठते हुए पूरा लंड अपनी चूत मे ले लिया.


"तुम अपनी कहानी पूरी करो? में सब कुछ सुनना चाहता हूँ." मेने

कहा.


"हां में तुम्हे सब बताउन्गि," वो जोरों से मेरे लंड पर उछल रही

थी. उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो पानी छोड़ रही थी. सोनाली के

हाव भाव देख में कह सकता हूँ कि एक तो मेरा लंड उसकी चूत मे

और दूसरा अपने भाई के साथ की हुई चुदाई उसे बहुत उत्तेजित कर रही

थी.


वो मुझे चोदे जा रही थी और अपनी कहानी भी सुना रही थी. विजय

ने अपनी शॉर्ट्स उतार दी और लगभग अपनी टी-शर्ट को फड़का उतार

फैंका. फिर वो उछल कर अपनी बेहन की टाँगो के बीच आ गया. उसने

अपना लंड अपनी बेहन की चूत के मुहाने पर लगा दिया.


"किसकी राह देख रहो हो विजय, घुसा दो अपना लंड अपनी बेहन की

चूत मे और जोरों से चोदो आज उसे इसकी ज़रूरत है." सोनाली उसके

मुँह में अपनी ज़ुबान घुसाते हुए बोली.


विजय ने हल्का सा धक्का मारा और उसका सुपाडा सोनाली की चूत मे

घुस गया, फिर थोड़ा सा बाहर खिचते हुए उसने ज़ोर का धक्का मारते

हुए पूरा लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.


"ओह विजय तुमने मेरी चूत को पूरा भर दिया,

तुम्हारा लंड मेरी बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा है." सोनाली

सिसकते हुए बोली.


विजय पागलों की तरह उसे चोदे जा रहा था. सोनाली ने अपनी टाँगे

और फैला दी और कूल्हे उछाल उसके लंड को और अंदर लेने लगी. फिर

उसने अपनी टाँगे उठा कर विजय के कंधों पर रख दी. विजय उसकी

टाँगो को पकड़ ढके पर धक्के मार रहा था.


"ओह बहहाना माआज़ एयाया गया, आअज मीईईं तुम्हारी

चूत का भोसड़ा बना दूँगा फाड़ दूँगा आअज इसे." विजय

धक्के लगाते हुए बड़बड़ा रहा था.


"हाां फाड़ दो मेरी चूऊत को ओह हाां और जूऊऊर सीई

ओह विजया और कस के माररो नाआअ." सोनाली भी सिसक रही थी.


सोनाली काफ़ी जोरों से सिसक रही थी. विजय का लंड जब उसकी चूत की

गहराइयों तक जाता तो वो मनाने लगी आज विजय रुके ही नही बस उसे

चोद्ता जाय. जब वो उसके लंड को अपनी चूत मे गायब होते देखती और

जब उसके रस से लसा हुआ बाहर आता तो उसे बहुत अच्छा लग रहा था.

आज उसे अपने भाई पर बहुत प्यार आ रहा था.


विजय ने अब उसके निपल को मुँह ले चूसना शुरू कर दिया था और

दूसरे को अपनी उंगलियों से भींच रहा था.


"ओह विजय खा जाओ मेरी चुचियो को ओह आआआः ओःःः

हाआँ." सोनाली की चूत ना जाने कितनी बार पानी छोड़ चुकी थी. एक

बार छूटता और दूसरा तय्यारी पर होता.


सोनाली ये सुनते हुए मेरे लंड पर उछल उछल कर चोद रही थी.

उसके मम्मे हर धक्के पर उछल रहे थे, मेरा भी झड़ने का समय

करीब ही था. सिर्फ़ इस ख़याल ने कि इसके भाई ने इसकी चूत को

चोदा था मेरे शरीर मे और उत्तेजना बढ़ने लगी.


"ऑश राज्ज्जज आआअज तुम मुझहीईई विजय की तरह जोर्र्र्र से

चोदो ओह."


मेने उसे कमर से पकड़ा और सोफे पर लिटा दिया. फिर उसकी टाँगो को

पूरी तरह फैला अपने लंड को एक ही धक्के मे पूरा घुसा दिया. में

उछल उछल कर जोरों के धक्के मारने लगा था. वो आज उसी तरह लेटी

थी जिस तरह उस रात अपने भाई से चुदवाते वक़्त लेती थी.


मेरी भयंकर चुदाई से उसके मुँह से शब्द नही निकल पा रहे थे,

कारण मेरे हर धक्के से उसका शरीर हिल रहा था फिर भी किसी तरह

उसने अपनी कहानी पूरी की.


विजय उसके निपल को बुरी तरह चबा रहा था जिसने सोनाली को

उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँचा दिया था. उसकी चूत कई बार

पानी छोड़ चुकी थी.

आख़िर मे विजय भी सिसक पड़ा, "ओह सूऊनाअली मेरााा छूटने

वाला हाऐी ओह."


"हाां विजाआआ चूऊद डूऊ अपनाअ पनई मेरिइइ चूऊत मे."

और वही हुआ विजय ने अपना वीर्य उसकी चूओत मे छोड़ दिया. शायद

आज से ज़यादा पानी उसके लंड ने कभी नही छोड़ा था.


"ओह भगवान माआज़ा एयेए गय्ाआ इतनी भयाअंकर चुदाइ

मईएईने आज से पहले कभी नही की." विजय उसके बगल मे निढाल

गिरते हुए बोला.


"विजय इससे पहले कि तुम्हारा वीर्य मेरी चूत से बह जाय, अपना

कॅमरा ले आओ और तस्वीरें खींच लो." सोनाली ने कहा.


विजय अपना कॅमरा ले आया और फिर उसकी वीर्य से भरी चूत की

तस्वीरें ली. जब मेने ये सुना तो मेने भी मन बना लिया कि एक

दिन उसका आल्बम और सोनाली की फोटोस ज़रूर देखूँगा.


विजय जब तस्वीरे खींच रहा था तब सोनाली ने कमरे के बाहर कुछ

आहट सुनी थी. उसने महेसुस किया कि कोई उन्हे देख रहा है पर उसे

अपना भरम समझ उसे उस ख़याल को अपने दिमाग़ से झटक दिया.


विजय ने तस्वीरे खींचने के बाद अपनी बेहन को चूम लिया. सोनाली

ने उसके मुरझाए लंड को देखा, उसका मन तो एक बार फिर मचल उठा

पर नही अब ऐसा नही करूँगी कह उसने अपने भावनाओं को वहीं दबा

लिया.

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अपनी कहानी सुनाते हुए शायद सोनाली 6-7 बार झाड़ चुकी थी. में

भी कहानी सुनते हुए इतनी कस के धक्के लगा रहा था की अब अपने आप

को रोकना मुझे मुश्किल लग रहा था.


मेने अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे डाली, "आआआआआआआआअहह." में

सिसका और मेरे लंड ने उसकी चूत मे बौछार कर दी. सोनाली ने मेरे

लंड को अपनी चूत मे जाकड़ लिया और उसे निचोड़ने लगी.


"सोनाली मेने इतनी ज़्यादा गरम कहानी कभी नही सुनी." मेने कहा.


सोनाली ने मुझे चूम लिया, "राज तुम नही जानते में कितनी खुश हूँ, आइ

लव यू में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ. तुम कितने समझदार इंसान

हो." कहकर वो मुस्कराई और एक बार फिर मुझे चूम लिया.


"अच्छा है तुमने मुझे बता दिया. तुम सही कह रही हो ना कि उस दिन

के बाद तुमने अपने भाई के साथ दुबारा नही किया.?" मेने आखरी बार

उससे पूछा.


"हां मैं कसम खाती हूँ, मेने विजय से दुबारा कभी नही

चुदवाया." सोनाली बोली.


में थका निढाल उसके बगल में बैठ गया.





सोनाली की कहानी सुनने के बाद में सोफे पर उसके बगल में बैठा

कुछ सोच रहा था.


"सोनाली एक बात अभी भी मेरी समझ मे नही आ रही है?' मेने

सोनाली से पूछा.


"और वो क्या बात है?" सोनाली ने कहा.


"तुम्हारे और विजय के बीच जो कुछ भी हुआ उस बात को करीब तीन

महीने हो गये. तुम ये बात मुझे इस वक्त क्यों बता रही हो? इसके

पहले क्यों नही बताई. और सबसे बड़ी बात तुम इसे छुपा भी सकती

थी.? मेने सोनाली से पूछा.


सोनाली तुरंत सोफे पर से खड़ी हो गयी और अपनी चूत पर हाथ रख

लिया जिससे मेरा वीर्य उसकी चूत से चूह कर नीचे कार्पेट पर ना गिर

पड़े.


वो सीधे बाथरूम मे गयी और टाय्लेट पर बैठ गयी. मुझे उसके

पेशाब करने की आवाज़ सुनाई दे रही थी.


उसने दरवाज़ा खुला रखा था जिससे मुझे सब दिखाई दे रहा था. वो

पेशाब करती हुई बड़ी अच्छी लग रही थी.


"सॉरी डार्लिंग मुझे जोरों से पेशाब आ रही थी." सोनाली ने दो

टिश्यू पेपर उठा अपनी चूत पौन्छ्ते हुए कहा.


"तुम्हे ये सब बताने के पीछे दो कारण है." सोनाली ने टाय्लेट की

फ्लश खींची और वापस लिविंग रूम मे आ गयी. वो सोफे पर आकर

मेरे बगल में बैठ गयी और अपनी सिर मेरी छाती पे रख मेरी

आँखों मे देखने लगी.


"बताओ मुझे तुमने ऐसा क्यों सोचा?" मैने फिर से सोनाली से पूछा.


"ठीक है बताती हूँ. पहली बात मुझे ऐसा लगा कि हमारा प्यार

इतना मजबूत हो गया है कि मेरी बात सुन तुम मुझे माफ़ कर दोगे,

एक बार तो मैने सोचा की तुम्हे नही बताऊ पर मुझे विश्वास सा था

कि तुम मुझे ज़रूर समझ लोगे." में मुस्कुराया मुझे उसके

आत्मविश्वास पर गर्व सा हो गया.


"और दूसरी और सबसे बड़ी बात, मुझे ऐसा लगने लगा कि तुम्हे पता

चल जाएगा इससे बेहतर है कि में ही तुम्हे बता दूं. उस रात

प्रियंका ने मुझे और विजय को चुदाई करते हुए देख लिया था.

शायद में और विजय इतनी ज़ोर से सिसक रहे थे कि अपने कमरे में

जाते हुए उसने हमारे आवाज़ें सुन ली होगी."


"तुम्हे तो पता ही है कि उसका कमरा मेरे कमरे के बगल में है.

उसने विजय को मुझे चोद्ते और मेरी चूत की फोटो खींचते हुए भी

देख लिया था." सोनाली ने बताया.


"फिर क्या हुआ?"


सोनाली ने मेरे होठों को चूमते हुए कहा, "वो कुतिया ये सब देखने

के बाद एक दम अंजान बनी रही जैसे उसे कुछ पता ही ना हो. उस दिन

के बाद में विजय से दूर रहने लगी, में नही चाहती थी कि ये सब

दुबारा हम दोनो के बीच हो."


में सोनाली के निपल से खेलने लगा. मैने देखा कि वो गर्माती जा

रही थी, उसके निपल तन कर खड़े हो चुके थे.


"तीन दिन पहले वो मेरे पास आई और मुझसे कहा कि उसे पता है कि

मेरे और विजय के बीच क्या हुआ था. उसने मुझे धमकी दी कि वो

सबकुछ तुम्हे बता देगी अगर मैने उसके लिए कुछ नही किया तो."

सोनाली ने कहा.


"इसका मतलब है कि उसने तुम्हे ब्लॅकमेल किया."


"हां कुतिया छिनाल साली." "ओह राज कितना अच्छा लग रहा है,

ज़रा ज़ोर से मेरे निप्प्प्ल को दबाओ ना."


में उसके निपल को जोरों से भींचने लगा. मैने अपना हाथ नीचे

बढ़ाया और उसकी चूत से खेलने लगा.


"वो तुमसे क्या करवाना चाहती थी?" मैने पूछा.


सोनाली मुझे बताने लगी कि किस तरह प्रियंका ने उसे फँसाया था.


सोनाली बाथरूम मे स्नान कर रही थी उसी वक्त प्रियंका बाथरूम मे

आ गयी, उसने दरवाज़ा खटखटाने की ज़रूरत नही समझी.


"प्रियंका तुम यहाँ क्या कर रही हो? देख नही सकती के में स्नान कर

रही हूँ." सोनाली गुस्सा करते हुए बोली.


"तो क्या हुआ, मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है." प्रियंका ने

कहा.


प्रियंका अपनी बेहन सोनाली के सुंदर बदन को घुरे जा रही थी.

उसे जलन और नफ़रत थी अपनी बेहन की सुंदरता और उसकी प्यारी

चुचियों से. ऐसा नही था कि प्रियंका बदसूरत थी, पर बहुत

सुंदर भी नही थी.


प्रियंका को जलन थी सोनाली के तीखे नाक नक्श से, उसे चिढ़ थी

उसके दोस्तों से जो वो अपने साथ घर लेकर आती थी. प्रियंका कभी

अपने किसी दोस्त को घर नही लाती थी.


"तुम राकेश को तो जानती हो ना?" प्रियंका ने पूछा.


सोनाली को उसकी बकवास सुनने में कोई दिलचस्पी नही थी, "कौन

राकेश."


"राकेश मेरा मालिक जिसकी दुकान पर में काम करती हूँ." प्रियंका

ने कहा.


"वो काला सांड." सोनाली बोली.


"हां वही," प्रियंका ने अपनी गर्दन हिलाते हुए कहा. फिर वो अपनी

बेहन के पीछे आ गयी और उसके कंधों पर हाथ रख दिया.


"क्यों क्या हुआ उसे?" सोनाली थोड़ा विचलित सी हो गयी थी. पता नही

क्यों उसे प्रियंका के हाथ अपने शरीर पर सुहा नही रहे थे.


प्रियंका सोनाली के थोड़ा करीब आती हुई बोली, "राकेश हमेशा से

तुमसे आकर्षित रहा है. कल उसने मुझसे कहा कि वो तुम्हे चोदना

चाहता है."


"तो में क्या करूँ इसमे, चोदने के लिए मेरा प्रेमी है मेरे पास."

सोनाली ने उससे कहा.


"सच कह रही हो! अगर ऐसा है तो फिर विजय से उस दिन क्यों चुदवा

रही थी." प्रियंका उसके कान मे धीरे से बोली.


सोनाली के तो पसीने छूट गये. डर के मारे उसका शरीर काँपने लगा,

इसका मतलब है कि प्रियंका ने सब कुछ देख लिया था, "मेरी समझ

मे नही आ रहा कि तुम क्या बकवास कर रहही हो."


प्रियंका ने सोनाली के कंधे जोरों से पकड़ते हुए कहा, "सोनाली

मुझे ज़्यादा बनाने की कोशिश मत करो. मैने तुम्हे और विजय को

चुदाई करते हुए देखा है, और विजय ने तुम्हारी वीर्य भरी छूट

की फोटो भी ली थी."


"तुम ये साबित नही कर सकती." सोनाली थोड़ी हिम्मत जुटाते हुए बोली.


"सही क्या नही कर सकती, जब राज को बताउन्गि तो वो क्या कहेगा,

पिताजी क्या कहेंगे. फिर घर मे सिर्फ़ विजय के पास ही डिजिटल कॅमरा

नही है मेरे पास भी है," उसकी ये बात ने सोनाली को सच मुच

डरा दिया था.


सोनाली समझ गयी कि उस पर मुसीबत आ गयी है, "ठीक है आख़िर

तुम क्या चाहती हो?"


प्रियंका ने सोनाली के कंधे छोड़ दिए. फिर अपना हाथ नीचे की ओर

बढ़ाते हुए उसके मम्मे पकड़ लिए और उसके निपल को भींचने लगी.


"तुम्हारे पास दो रास्ते है, एक तुम राकेश से चुदवा लो, जैसे उसका

दिल चाहे वो तुम्हे चोदेगा."


प्रियंका थोड़ी देर के लिए रुकी. उसने अपनी गिरफ़्त सोनाली की

चुचियों पर बढ़ा दी और ज़ोर से दबाने लगी, "और दूसरा रास्ता

शायद तुम्हारे लिए बेहतर हो सकता है……………"


"और वो क्या है? मेरे निपल भींचना बंद करो?"


पर प्रियंका ने उसके निपल भींचना बंद करने के बजाय और जोरों

से भींच दिया. सोनाली को दर्द तो हुआ पर साथ ही उसके शरीर मे

उत्तेजना भी दौड़ गयी.


"दूसरा तरीका है कि राज तुम्हारा प्रेमी मेरी चुदाई करे. में

चाहती हूँ कि वो अपने लंड से मेरी चूत की उतनी ही भयंकर

चुदाई करे जितनी विजय ने रात को तुम्हारी चूत की थी.


सोनाली कुछ देर तक सोचती रही, "साली कुतिया ने सब कुछ देख लिया

है और अब मेरे प्रेमी से चुदवाना चाहती है."


थोड़ी देर चुप रहने के बाद सोनाली बोली, "राज हमेशा कहता था कि

तुम्हे सुधारने के लिए तुम्हारी कस कर चुदाई होनी चाहिए, पर

तुम्हे चोदने की उसकी कभी ख्वाइश नही रही इसलिए इस बात को तो

तुम भूल ही जाओ तो अच्छा है."


प्रियंका सोनाली के निपल अब और भी जोरों से भींच रही थी,

सोनाली ज़ुबान से कबुल करे या नही पर उसे हर छन हर पल का मज़ा

आ रहा था.


"देखो मेरी प्यारी बहना, तुम्हारे पास सिर्फ़ एक हफ़्ता है सोचने के

लिए. या तो तुम राकेश से चुदवा लो. और में खुद भी देखना

चाहती हूँ कि उसका काला 10' इंची लंड तुम्हारी गोरी चिकनी चूत मे

घुसता हुआ कैसा लगता है. और या फिर मुझे राज से चुदवा दो, राज

को कैसे तय्यार करती हो ये तुम्हारी समस्या है समझी."


प्रियंका ने अब सोनाली के निपल छोड़ दिए, और अपना हाथ नीचे कर

अपनी दो उंगलियाँ अब उसकी चूत मे घुसा दी.


"हां एक बात और है, अगर राज मुझे चोद्ता है तो में चाहूँगी कि

तुम उस वक़्त वहीं रहो. मुझे अच्छा लगेगा कि तुम मुझे राज से

चुदवाते देखो." प्रियंका ने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत मे अंदर बाहर

करते हुए कहा.


सोनाली को प्रियंका के हाथों से मज़ा आ रहा था. उसकी चूत झड़ने

के कगार पर थी पर उसी वक़्त प्रियंका उठ कर खड़ी हो गयी, "याद

रखना सोनाली एक हफ़्ता है तुम्हारे पास, सिर्फ़ एक हफ़्ता."


प्रियंका बाथरूम से बाहर चली गयी. सोनाली ने तुरंत प्रियंका की

उंगलियों की जगह अपनी उंगलियाँ अपनी चूत मे डाल अंदर बाहर करने

लगी और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, "ओह आआआआआहह."


सोनाली ने जो मुझे बताया उसे सुनकर मुझे विश्वास नही हो रहा था.

सोनाली जब तक अपनी कहानी सुनाती रही मैने उसके शरीर को छुआ तक

नही था.


थोड़ी देर चुप रहने के बाद मैने कहा, "प्रियंका बड़ी छिनाल है,

उसने हम लोगो को अच्छी तरह फाँस लिया है."


"हां मुझे भी ऐसा ही लग रहा है." सोनाली ने कहा.


"क्या तुमने विजय को इस बारे में बताया है?" मैने सोनाली से पूछा.


सोनाली अपनी गर्दन ना में हिलाते हुए बोली, "नही, सबसे पहले में

तुम्हे सब कुछ बताना चाहती थी जिससे वो मुझे फिर कभी ब्लॅकमेल

ना कर सके."


"एक बात से तो तुम निस्सींत रहो, अगर उस रात को उसने तुम्हारी और

विजय की तस्वीरें खींची है तो वो उन तस्वीरों को तुम्हारे माता

पिता को दिखाने की हिम्मत नही कर पाएगी." मैने कहा.


"हो सकता है वो ना दिखाए पर हमे आगे क्या करना चाहिए?" सोनाली

ने पूछा.


"खैर मुझे तुम्हारे बारे में नही मालूम, पर अगर तुमने राकेश

से चुदवाया तो मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगेगा, उस कुत्ते को में एक

पल के लिए सहन नही कर सकता." मैने कहा.


"डार्लिंग वो हरामी का बच्चा मुझे भी अच्छा नही लगता. साला

हमेशा अपनी गंदी नज़रों से मुझे घूरता रहता है. उसका लंड अपनी

चूत मे लेने से पहले तो मरना ज़्यादा पसंद करूँगी." सोनाली मेरी

छाती के बालों के बीच हाथ फेरते हुए बोली.


मैने सोनाली के माथे को चूमते हुए कहा, "इससे तो हमारे पास

प्रियंका का बताया दूसरा रास्ता ही बचता है, है ना."




सोनाली मेरी आँखों मे झाँकने लगी, उसके चेहरे पर अस्चर्य के

भाव थे, "अब ये ना कहना कि तुम प्रियंका को वो देना चाहते हो जो

उसे चाहिए, कहीं तुम तो प्रियंका को चोदने मे ज़्यादा इंट्रेस्टेड

नही हो."


मैने सोनाली के होठों को चूम लिया, "में उसे चोदना चाहता हूँ,

नही ऐसी बात नही है."


मैने सोनाली से झूठ बोला था. माना प्रियंका एक छिनाल लड़की थी,

पर अक्सर में सोचा करता था कि वो नंगी होगी तो कैसी लगेगी. क्या

उसकी चूत भी उसकी बेहन की चूत की तरह गोरी और चिकनी है, क्या

उसकी चूत का स्वाद सोनाली की चूत से कुछ अलग है. हालाँकि सोनाली

अपने भाई से चुदवा चुकी थी फिर भी में अभी अपने विचार उसे

नही बताना चाहता था.


"समस्या एक और भी है," मैने कहा, "चलो हम प्रियंका की ख्वाइश

पूरी कर भी देते हैं और वो हमें वो सब फोटोस जो उसने खींची

है हमे वापस कर देती है, पर इस का क्या सबूत कि उसके पास उन

फोटोस की कॉपीस नही होगी."


"हां ये तो मैने सोचा ही नही था." सोनाली बोली.


"मेरा कहने का मतलब ये है," मैने अपनी बात जारी रखते हुए

कहा, "कि हो सकता है की उसने उन तस्वीरों की कई कॉपीस बना रखी

हो."


सोनाली बोली, "क्यों ना हम उसके कमरे की तलाशी ले लें."


"तलाशी तो ले सकते हैं पर क्या पता उसने वो तस्वीरें अपनी किसी

सहेली के यहाँ रखी हो?" मैने कहा.


"क्या वो ऐसा कर सकती है." सोनाली थोड़ी डरी हुई आवाज़ में बोली.


"हां हो सकता है, क्या पता उसने एक कॉपी राकेश को दे दी हो?" मैने

कहा. ये बात समस्या खड़ी कर सकती है. मेरी समझ में नही आ

रहा कि हमें क्या करना चाहिए."


"सो तो सोचेंगे, सबसे पहला सवाल ये है कि क्या तुम मेरी बेहन को

चोदना चाहते हो? सोनाली ने पूछा.


वो जिस तरह मेरी और देख रही थी उससे मेरी समझ मे नही आ रहा

था कि वो सही में पूछ रही थी या ये उसका शरारत भरा प्रश्न

था.


"हां में तुम्हारी बेहन को चोदुन्गा. अगर में उसके के साथ कुछ ना

कर पाया तो कम से कम तुम तो वहाँ रहोगी." मैने मज़ाक करते हुए

कहा.


सोनाली मेरी बात सुनकर थोड़ा मुस्कुरा दी, "ठीक है फिर इस शनिवार

को हमारे यहाँ उसके जनमदिन की पार्टी है. हम सभी वहाँ होंगे,

में उसे साइड मे लेजा कर सब कुछ तय कर लूँगी. मेरी राय तो ये है

कि तुम उसे अपने घर मे चोदने की बजाय हमारे घर में चोदो इससे हमे कोई

पकड़ नही पाएगा."


"तुम ठीक कह रही हो. तस्वीरों को हासिल करने का तरीका बाद मे

सोचेंगे." मैने कहा.


हमारे बीच सब कुछ तय हो गया था.


शनिवार की शाम को में सोनाली के घर पहुँचा. जब मुझे पता

चल चुका है कि विजय अपनी बेहन यानी मेरी प्रेमिका को चोद चुका

है, उसे देख कर मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था.


में ख़यालों में उस नज़ारे की कल्पना करने लगा जब विजय सोनाली

को चोद रहा होगा, साथ ही में उस तस्वीर को देखने के लिए मरा

ज़ा रहा था जिसमे सोनाली की चूत से विजय का वीर्य बह रहा था.

शुरू में विजय से बात करते हुए मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था.


थोड़ी देर में में और सोनाली भीड़ मे से खिसक कर विजय के कमरे

मे घुस गये.


"राज में तुम्हे विजय का आल्बम दिखाती हूँ जिसमे उसने सब लड़कियों

की चूत की तस्वीरें लगा रखी है." सोनाली बोली.


विजय ने वो आल्बम अपनी अलमारी के पीछे छुपा रखी थी. सोनाली को

मालूम था कि उसे कैसे निकाला जाता है. आल्बम नंगी लड़कियों और

उनकी चूत की तस्वीरों से भरी पड़ी थी. सभी लड़कियाँ काफ़ी

सुंदर लग रही थी.


"राज ये देखो, ये मेरी चूत की तस्वीर है." सोनाली ने एक तस्वीर

की ओर इशारा करते हुए कहा.


तस्वीर को देखते ही मेरा लंड झटके से खड़ा हो गया. मैने

तस्वीर को ध्यान से देखा, विजय का वीर्य उसके चूत से बूँद बूँद

कर टपकता महसूस हुआ. काफ़ी अच्छी तस्वीर थी.


"मैने तुम्हारे भाई से इसकी एक कॉपी माँगूंगा और फ्रेम कराकर मेरे

बेडरूम मे लगा लूँगा." मैने हंसते हुए कहा.


सोनाली और मैने एक दूसरे को देखा फिर आपस मे चूमने लगे.

सोनाली बिस्तर पर लेट गयी और में उसके उपर लेट ते हुए उसे चूम

रहा था उसके बदन को मसल रहा था.


तभी विजय ने कमरे मे कदम रखा, "क्या तुम दोनो भूल से ग़लत

कमरे मे नही आ गये हो?"


हम दोनो उठ कर खड़े हो गये, "सॉरी विजय." सोनाली ने कहा. तभी

विजय का ध्यान ज़मीन पर गिरे उसकी आल्बम पर पड़ा.


"में राज को तुम्हारी चूतो की आल्बम दिखा रही थी भाई." सोनाली

ने कहा.


"अच्छा तो ये बात है," विजय मुझे देखते हुए कहा.


"विजय राज को सब पता है." सोनाली ने अपनी गर्दन हिलाते हुए कहा.


मैने पहली बार विजय के चेहर पर मुस्कुराहट देखी.


"विजय मुझे पता है तुम्हारे और सोनाली के बीच जो कुछ हुआ, हो

जाता है यार." मैने महॉल को सामान्य बनाने की कोशिश की.


"तुम्हे बिल्कुल बुरा नही लगा राज? विजय ने पूछा.


"अभी तक तो नही लगा हां अगर तुम मुझे इन तसेवीर की कॉपी नही

दोगे तो बहुत बुरा लगेगा." मैने हंसते हुए कहा.


मेरी बात सुनकर विजय मुस्कुरा दिया.


"हां तब तक ही जब तक कि भविष्या में ये दुबारा ना हो?" मैने

कहा.


फिर हमने विजय को बताया कि किस तरह प्रियंका सोनाली को ब्लॅकमेल

कर रही है.


विजय को हमारी बात सुन बहुत गुस्सा आया और वो उसी वक्त प्रियंका

से बात करना चाहता था. पर मेरे समझाने पर वो हमारे साथ

शामिल हो गया, "राज एक आइडिया है, जब तुम प्रियंका की चुदाई कर

रहे हो, क्यों ना में वो नज़ारा कमेरे में क़ैद कर लूँ."


"मतलब तुम चुदाई की फिल्म बनाना चाहते हो?" सोनाली ने पूछा.


"नहीं चुदाई की फिल्म नही, बल्कि अपने बचाव के लिए सबूत इकट्ठा

करना चाहता हूँ. अगर वो भविश्य में फिर कभी ब्लॅकमेल करने

की कोशिश करे तो हम भी ये फिल्म दिखा कह सकते हैं कि किस तरह

उसने तुम्हारे प्रेमी को बहकाया और उकसाया था." विजय ने कहा.


मुझे विजय का आइडिया पसंद आ गया, शायद उसका सोचना सही हो.


हम सब वापस हॉल मे आ गये. हम ने बड़े धूम धाम से प्रियंका का

जनमदिन मनाया. प्रियंका का बॉस राकेश भी पार्टी में आया हुआ

था.


थोड़ी देर बाद सोनाली प्रियंका को साइड मे ले गयी और उससे सब तय

कर लिया. अगले शनिवार की शाम का टाइम तय हुआ, प्रियंका मेरे घर

आनेवाली थी अपनी ख्वाइश पूरी करने के लिए.


संजोग से सोनाली बाथरूम के बाहर राकेश से टकरा गयी, "ओह हाई

सोनाली, और कैसा चल रहा है?" उसने पूछा.


"ठीक हूँ राकेश, आप कैसे हैं?" ना चाहते हुए भी सोनाली ने जवाब

दिया. प्रियंका से जो राकेश ने कहा था वो बात अब भी उसके दिमाग़

में घूम रही थी. पता नही प्रियंका ने उसकी तस्वीर इसे भी कही

दिखा ना दी हो. ये सब सोचें उसके दिमाग़ को परेशान किए हुए थी.


"और बताओ तुम्हारे और विजय के बीच कैसा चल रहा है?' राकेश

शरारत से मुस्कुराते हुए बोला.


"हम दोनो ठीक है, पर तुम ये क्यों पूछ रहे हो?' सोनाली झल्लाते

हुए बोली.


राकेश फिर एक बार मुस्कुराते हुए बोला, "बस ऐसे ही पूछ रहा था,

कोई खास वजह नही है. तुम मेरे साथ बाहर घूमने कब चलोगि?"


"तुम्हे ये बात प्रियंका से कहनी चाहिए, वो तुम्हे शायद पसंद भी

करती है." सोनाली ने जवाब दिया.


राकेश सिर्फ़ मुस्कुराया और बाथरूम मे चला गया. सोनाली की समझ

मे नही आ रहा था कि वो राकेश को क्या समझे. जहाँ तक अभी

बातचीत का सवाल था राकेश ने एक भले इंसान की तरह उससे बात

की थी. वो कहीं से भी ग़लत इंसान नज़र नही आया था, जैसा उसने

उसके बारे में सोचा था.


जिस दिन प्रियंका मेरे घर आने वाली थी उस दिन सुबह जब में और

सोनाली बिस्तर में नंगे लेटे हुए थे. सोनाली का आधा शरीर मेरे

बदन पर था, और हम अभी एक अच्छी नींद लेकर उठे थे.


"राज आज रात मुझे एक अजीब सा सपना आया." सोनाली ने कहा.


"ऐसा क्या सपना आया सोनाली?" मैने पूछा.


"राज मैने देखा कि में प्रियंका जहाँ काम करती है, उस दुकान की

और बढ़ रही हूँ. मैं उसे वहाँ से तुम्हारे पास लाना चाहती थी

जिससे तुम उसे चोद सको. जब में दुकान में घुसी तो मुझे दुकान एक

दम सुनसान दिखाई पड़ी, पर एक शेल्फ के पीछे से कुछ आवाज़ें आ

रही थी. जब में उस शेल्फ के पास पहुँची तो देखती हूँ कि तुम

वहाँ घोड़ी बनी प्रियंका को पीछे से चोद रहे हो." सोनाली ने कहा.


"अच्छा…………फिर क्या देखा तुमने?" मैने पूछा.


"तभी मैने देखा कि दो हाथों ने पीछे से मेरे मम्मो को पकड़ लिया

है. फिर उन हाथों ने मेरी शर्ट खोल दी. मैने घूम कर पीछे

देखा तो पाया राकेश मेर पीछे खड़ा है और जैसे कह रहा हो कि वो

आज मुझे चोद के छोड़ेगा." सोनाली थोड़ी सांस लेते हुए बोली.


"मैने उसके हाथों से अपने मम्मे छुड़ाए और वहाँ से भाग ली. दौड़ते

वक़्त मेरी चुचियों मेरे नंगे सीने पर उछल रही थी. पर पता

नही इससे पहले कि में दुकान के दरवाज़े तक पहुँचती राकेश फिर

मेरे सामने था." सोनाली ने बताया.


"फिर क्या हुआ?' मैने उसके बदन को सहलाते हुए पूछा.


"मैने देखा कि राकेश मेरे सामने मदरजात नंगा खड़ा है. उसका

काला हबशी लंड जो करीब 10' इंच का होगा मेरे सामने था. उसके

खड़े लंड को देख मेरी चूत भी गीली हो गयी थी, पर में उसके

लंड को अपनी चूत मे नही लेना चाहती थी. मैने फिर वहाँ से

भागने की कोशिश की पर राकेश ने मुझे पकड़ मेरे गाल पर एक ज़ोर

का थप्पड़ मार दिया." सोनाली बोली.


"उसने तुम्हे थप्पड़ मारा, फिर?" मैने पूछा.


"फिर क्या, उसका थप्पड़ खाते ही में ज़मीन पर गिर पड़ी. उसने मेरी

टाँगे पकड़ मेरी स्कर्ट और पैंटी उतार दी. फिर मेरी दोनो टाँगे

फैला दी और मेरी गीली चूत के सामने अपना लंड कर दिया."


"फिर क्या हुआ."


"फिर उसने तुम्हे और प्रियंका को अपनी मदद के लिए आवाज़ दी. तुम

दोनो हमारे पास आए और तुम्हे कहा, "हां हम ज़रूर तुम्हारी मदद

करेंगे."


"तुम्हारा इतना कहते ही प्रियंका ने मेरा दायां पाओ पकड़ लिया और

तुमने बाया. अब तुम दोनो मेरे पैरों को फैलाने लगे, इतनी ज़ोर से तुम

दोनो ने मेरी टाँगो को फैलाया कि मेरी चूत भी फैल गयी." इतना

कहकर सोनाली थोड़ी देर के लिए रुक गयी और मेरी पयज़ामा मे बने

तंबू की ओर देखने लगी.


"सही मे, फिर क्या हुआ?" मैने पूछा.


"फिर राकेश मेरे उपर लेट गया और अपने लंड को मेरी चूत पर

रगड़ने लगा. शायद वो अपने लंड के सुपाडे को मेरी चूत के रस से

गीला कर रहा था. मेरा शरीर काँप रहा था. फिर राकेश ने अपने

लंड को मेरी चूत पे रख अंदर घुसाने की कोशिश की. उसका लंड

सही मे बहुत मोटा था, मेरे ख़याल से तुम्हारे लंड से भी ज़्यादा

मोटा था. में उसे जोरों से थप्पड़ मारना चाहती थी पर हिम्मत नही

जुटा पाई." सोनाली ने कहा.


"उसने फिर अपने लंड के सुपाडे को अंदर घुसाने की कोशिश की पर

नाकामयाब रहा, शायद मेरी चूत इतनी गीली नही हुई थी कि उसके

भारी भयंकर लंड को अंदर ले सके."


"मैने अपने लंड को तुम्हारी चूत क्यों घुसा नही पा रहा हूँ

कुतिया?" राकेश ज़ोर से चिल्लाया. तभी तुमने एक क्रीम की शीशी उसके

हाथों मे पकड़ा दी. फिर उसने थोड़ी क्रीम अपनी उंगलियों मे ली और

मेरी चूत के अंदर मलने लगा. फिर क्रीम अपने लंड पर लगा उसने

एक ही धक्के मे अपना लंड मेरी चूत मे डाल दिया." सोनाली ने कहा.


"राकेश ने जब मुझे जोरों से चोदना शुरू किया तो में दर्द से

तड़प रही थी, चिल्ला रही थी, मैने उसे रुकने के लिए कहा पर वो

था कि मुझे जानवर की तरह जोरों से चोदे ही जा रहा था. मैने

सहयता के लिए तुम्हे पुकारा पर तुम तो मेरी टाँगो फैलाने मे खोए

हुए थे." सोनाली ने कहा.


"राकेश चोदो इसे और ज़ोर से चोदो. इसकी छोटी सी चूत को

फाड़ दो आअज. तुम्हारा कााला लंड जब इसकी गोरी चूत के

अंदर बाहर हो रहा है तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. फाड़

दो इसकी चूत को खून निकलना चहािए इसकी चूत से."

प्रियंका जोरों से बोल कर राकेश को और उत्तेजित कर रही थी.


"राकेश मुझे जोरों से चोदे जा रहा था. तब तुम दोनो ने मेरी

टाँगे छोड़ दी पर मुझ में ताक़त नही थी कि में अपनी टाँगो को

सिकोड पाती. मैने अपनी टाँगे जैसी थी वैसे ही रहने दी."


"तभी प्रियंका मेरे उपर आ कर उसने अपनी जांघे मेरे अगल बगल

रख अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी, "मेरी चूत को चूस कुतिया."

उसने कहा.


"मैने अपनी जीभ उसकी चूत मे डाल दी और उसकी चूत को चूसने

लगी. अब में राकेश को नही देख सकती थी, पर उसके लंड को अपनी

चूत के अंदर बाहर होते महसूस कर रही थी. जिस तरह से वो मुझे

चोद रहा था ज़रूर मेरी चूत से खून निकल आया होगा."


"तभी प्रियंका की चूत ने मेरे मुँह मे पानी छोड़ दिया, उसने मेरी

गर्दन को इस तरह अपनी टाँगो मे जाकड़ रखा था कि उसका रस पीने के

अलावा मेरे पास कोई चारा भी नही था."


"जब प्रियंका मेरे उपर से उठ गयी तो राकेस ने मुझे पेट के बल

लिटा दिया. अब वो मुझे पीछे से चोद रहा था, और मेरे मम्मे नीचे

कार्पेट पर रगड़ रहे थे. मेरी चूत अब उसके लंड को झेलने के

लायक शायद हो चुकी थी. तभी उसने अपने लंड को मेरी चूत से

बाहर निकाला और मेरे चुतडो को थोड़ा फैला मेरी गान्ड के छेद पर

थोड़ा थूक दिया."


"जब उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला तो मैने थोड़ी राहत

की साँस ली पर उसने अपने लंड को मेरी गान्ड के छेद पर रख दबाना

शुरू किया. आख़िर उसका लंड मेरी कुँवारी गान्ड मे अंदर तक घुस

चुका था. मेरी गान्ड भी शायद फॅट चुकी थी, क्यों कि मुझे बहुत

दर्द हो रहा था."


"प्लीज रुक जाआओ मुझे बहुत दर्द हूऊ रहा है, जो तुम

कहूओगे मेंन करूँगिइइ." में दर्द मे चिल्ला रही थी, पर मेरी

चीखों का राकेश पर कोई असर नही हो रहा था.


राकेश जोरों से मेरी गान्ड मार रहा था, और उसके हर धक्के के साथ

मेरी चूत नीचे कार्पेट पर रगड़ खा रही थी. पता नही उसके

धक्कों का कमाल था या फिर मेरी चूत का कार्पट पर रगड़ने का

कमाल था, थोड़ी ही देर में चिल्ला रही थी, "ओह राकेश ःःआआआआण

माअरो मेरी गाअंड को फ़ाआद दो आाज मेरी गाअंड को आापने हबशी

लंड से, मुझे अपनी रंडी Bआना लो ओह आआअज चूऊड़ो

मुझीई."


"ओह रंडी मुझे जोर से चुदने को कह रही है,

चोदुन्गा और जोरों से चोदुन्गा मेरी छिनाल." कहकर राकेश

जोरों से मेरी गान्ड मारने लगा.


"हाां आईससे ही चूऊड़ो ओह आहह हाां और जूऊर सीई

ऑश मेरे राआजा ईीई मेराा चूऊओटा चूऊऊथा." और मेरी

चूत ने पानी छोड़ दिया.


"राकेश भी झड़ने के करीब था, उसने मेरे बालों से पकड़ मेरे

चेहरे को अपने लंड के करीब किया. उसका लंड क्रीम रस से

लिथड़ा हुआ था. उसने अपने लंड को मेरे मुँह पर दबाया और मैने

अपना मुँह खोलते हुए उसके लंड को अंदर ले लिया."


"उसने अपने लंड को मेरे गले तक डालते हुए अपना पानी छोड़ दिया.

उसका वीर्य मेरे गले से होते हुए मेरे पेट में पहुँच गया और

तभी मुझे लगा कि मैने उसकी रांड़ बन गयी हू और वो मुझे जब

चाहे मेरे किसी भी छेद मे अपना लंड घुसा सकता है."


ये वो समय था जब सोनाली ने अपने सपने की कहानी समाप्त की. जिस

तरह से सोनाली ने अपने सपने को बयान किया था में उसी में खोया

हुआ था.


"ओह्ह्ह राज पता नही मुझे क्या होते जेया रहा है. मैने ऐसा सपना

पहले कभी नही देखा." सोनाली ने कहा.


"सोनाली तुम ज़्यादा चिंता मत करो, शायद तुम्हारी बेहन के ब्लॅक

मेलिंग व्यवहार ने तुम्हारे दिमाग़ पर असर कर दिया है. ये एक

भयंकर सपना था इसे भूल जाओ. तुम्हे राकेश से चुदवाने की कोई

ज़रूरत नही है. सुबह तक सब ठीक हो जाएगा." मैने सोनाली को

समझाते हुए कहा.


हम थोड़ी देर खामोश रहे तभी सोनाली बोली., "राज एक बात कहूँ

बुरा तो नही मनोगे?"


"नही मानूँगा तुम कहो तो?" मैने कहा.


"प्रियंका के साथ आज शाम को ज़्यादा मज़े लेने की कोशिश ना

करना." सोनाली ने कहा.


"में तुमसे वादा करता हूँ." कहकर मैने सोनाली को चूम लिया.


रात के ठीक 8.00 बजे प्रियंका ने मेरे फ्लॅट की घंटी बजाई. मैने

दरवाज़ा खोला और उसे अंदर आने को कहा. आज प्रियंका कुछ ज़्यादा ही

सुन्दर लग रही थी. उसने मेकप भी अच्छा किया हुआ था. टाइट जीन्स

पहन रखी थी जिससे उसके गोल और बड़े चुतड के उभार साफ दिखाई

दे रहे थे. उसकी चुचियाँ सोनाली से काफ़ी बड़ी और भारी भारी थी.


"हाई राज क्या हाल है?" प्रियंका ने अंदर आते हुए कहा. वो हॉल मे

आ गयी. मैने देख रहा था कि सोनाली अपनी बेहन को देख कर काफ़ी

नर्वस हो गयी थी. दोनो एक दूसरे के गले मिले और हम सब फिर चाइ

पीने बैठ गये.


"जानू अब शुरू हो जाएँ." प्रियंका ने चाइ ख़त्म करते हुए कहा.

आज वो एक दम रंडी कहूँ या छिनाल उस तरह पेश आ रही थी.


"क्यों नही हम बेडरूम मे चलते है." मैने प्रियंका से कहा. विजय

ने कॅमरा बेडरूम मे छुपा कर लगाया था इसलिए हमारा बेडरूम मे

जाना ज़रूरी था.


"हां बेडरूम मे मज़ा आएगा, लेकिन पहले में टाय्लेट जाना चाहती

हूँ." कहकर प्रियंका बाथरूम मे चली गयी, में और सोनाली

बेडरूम मे आ गये और मैने कॅमरा चालू कर दिया.


"सोनाली तुम ठीक तो हो ना?" मैने कमरे मे आते हुए उससे पूछा.


"हां ठीक हूँ, बस प्रियंका जिस तरह हमे अपनी उंगलियों पर नचा

रही है वो अच्छा नही लग रहा." सोनाली ने कहा.


तभी प्रियंका ने कमरे मे कदम रखा, "और मेरी बहना क्या हाल

है, आज में राज से पूरे मज़े लूँगी. सोनाली तुम ऐसा करो वहाँ

बिस्तर के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ जाओ और वो सब देखो जो आज राज

मेरे साथ करने वाला है."


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