त्यागमयी माँ और उसका बेटा अध्याय 4
तभी अचानक नदीम रुक गया और राज को बोला: जा अम्मी के मुँह के पास और अपना लौड़ा चूसवा। अम्मी मस्त चूसती हैं।
राज रहमान के हाथ से लौड़े को छुड़वा कर आयशा के मुँह के पास लाया और उसने जल्दी से सुपाडे को चाटा और चूसने लगी।
अब नदीम ने फिर से चुदाई शुरू कर दी। थोड़ी देर बाद उसने अपना लौड़ा निकाला और राज को बोला: अब तू चोद,चल आजा यहाँ।
राज ने अपना लौड़ा आंटी के मुँह से हटाया और उनकी बुर के पास आ गया। उसकी खुली हुई बुर में अपना सुपाड़ा सेट करके एक ही धक्के में लौड़ा अंदर कर दिया। आयशा चिल्लाकर बोली: आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या करता है? हाऽऽऽऽऽयह्यय इतना बड़ा है तेरा ज़रा धीरे से भी डाल सकता था। आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मोटा लौड़ा है तेरा। ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म
राज: आंटी जब यहाँ से नदीम निकल सकता है तो मेरे लौड़े की क्या औक़ात?
नदीम ने अपना लौड़ा अम्मी के मुँह में डाल दिया और बोला: हाँ हाँ सही है ना अम्मी ।
आयशा कुछ नहीं बोली और बेटे का लंड चूसते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगी और अपनी गाँड़ उछालकर चुदवाने लगी।
राज भी मस्ती से भर कर धमाकेदार चुदाई कर रहा था तभी उसको लगा कि उसके चूतरों के बीच कोई ऊँगली कर रहा है। वो पलट कर देखा तो रहमान अंकल उसकी गाँड़ के छेद को सहला रहे थे। उसे अजीब लगा पर कुछ नहीं बोला। तभी रहमान ने उसकी गाँड़ में अपना मुँह डाल दिया और उसकी गाँड़ चाटने लगे। राज की सिसकारि निकल गई। उसे अब डबल मज़ा मिल रहा था और वह हैरान भी था कि अंकल ये क्या कर रहे हैं। अब चुदाई चरम सीमा पर पहुँच रही थी। नदीम आह्ह्ह्ह्ह्ह करके अम्मी के मुँह में झड़ रहा था और आयशा उसके रस को पिए जा रही थी। तभी राज भी ज़ोर ज़ोर से ह्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा और आयशा भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म आऽऽह्ह्ह्ह्ह करके झड़ गई। रहमान ने भी अपना मुँह उसकी गाँड़ से हटा लिया। राज जैसे ही हटा रहमान आयशा की बुर से दोनों की मलाई चाटने लगा। वह अब भी अपना नरम लंड हिला रहा था।
अब तीनों बिस्तर पर लिपटकर लेटे थे। और एक दूसरे को चूम रहे थे।
अब नदीम पूछा: राज मज़ा आया? कैसी है हमारी अम्मी की बुर?
राज: मस्त है यार, आंटी, बहुत मज़ा आया।
नदीम: अब जल्दी से अपनी माँ को चोद और मुझे भी दिलवा अपनी माँ की बुर। और यार मज़ा तो तब आएगा जब दोनों अम्मियाँ बिस्तर पर नंगी होंगी और हम दोनों उन दोनों को बदल बदल कर चोदेंग़े। बोल क्या कहता है?
राज: हाँ यार सच में बड़ा मज़ा आएगा , सोच कर ही सनसनी हो रही है। आंटी आपको तो कोई इतराज नहीं है ना? मेरी माँ के साथ नंगी सोने में और हम दोनों से एक साथ चुदवाने में?
आयशा: तुम दोनों बहुत कमीने हो। अभी मुझे एक साथ चोद रहे हो और पूछ रहे हो कि कोई इतराज तो नहीं होगा? अरे मेरी छोड़ो नमिता को पटाओ पहले। वह आसानी से नहीं मानने वाली!
राज: आंटी मुझे लगता है कि पट जाएँगी। आज मेरी चड्डी में फुले लौड़े को बहुत ध्यान से देख रही थी।
आयशा: तेरा लौड़ा है ही इतना मस्त कि कोई भी औरत इसको देख कर चुदाई के लिए मरने लगेगी फिर चाहे वह तुम्हारी माँ ही क्यों ना हो?
नदीम: साला दिखता तो इतना सीधा है पर इतना बड़ा हथियार लेकर घूम रहा होगा ये किसने सोचा होगा!
और तीनों हँसने लगे। तभी रहमान बाथरूम से बाहर आया और राज के पास आकर बैठ गया और उसका नरम लौड़ा सहलाने लगा।
अब राज का खड़ा होने लगा। आयशा ने भी नदीम का लंड सहलाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते लौड़े तन गए। अब रहमान राज का लौड़ा चूसने लगा और आयशा भी नदीम का लंड चूसने लगी।
नदीम ने रहमान को कहा: अब्बा, ज़रा क्रीम लाकर अम्मी की गाँड़ में लगा दो मुझे उनकी गाँड़ मारनी है।
रहमान उठकर क्रीम ले आया और अब आयशा ने अपनी गाँड़ उठा कर ऊपर कर दी ताकि रहमान क्रीम लगा सके। रहमान ने पहले गाँड़ चाटी फिर उसमें ऊँगली डालकर अच्छी तरह से क्रीम लगा दिया।
अब नदीम राज को बोला: चल लेट जा बिस्तर पर।
राज लेट गया और आयशा अपनी बुर खोलकर उसके लौड़े पर बैठ गई। अब उसने धीरे धीरे पूरा लौड़ा अंदर कर लिया।
अब वह ऊपर नीचे होकर राज को चोदने लगी। राज भी उसके मस्त मम्मों को दबा और चूस रहा था। अब नदीम अम्मी के पीछे से आकर उसकी गाँड़ में अपना सुपाड़ा सेट किया और हल्के से धक्का मारा और अपना आधा लंड अंदर कर दिया।
आयशा आह्ह्ह्ह्ह्ह बेटाआऽऽऽऽऽ कहकर डबल मस्ती से झूम उठी। हाय्य्य्य्य्य बड़ा अच्छा लग रहा है। पूरा डाल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल देएएएएएएए। आऽऽहहह कहते हुए वह ऊपर नीचे होने लगी।
दोनों लौड़े उसको मस्ती को दुगुना कर रहे थे। वह पहली बार दो लंडों से चूद रही थी।
तभी रहमान पीछे से आकर दोनों लंडों पर जीभ फेर रहा था जैसे ही वो छेदों से बाहर आते । तीनों मस्ती से चुदायी कर रहे थे। फ़च फ़चठप्प थप की आवाज़ से कमरा गूँज रहा था। रहमान की जीभ में तीनों का कामरस भर रहा था जिसको वो चाटे जा रहा था।
तभी नदीम आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कहते हुए अम्मी की गाँड़ में झड़ने लगा। उसका वीर्य गाँड़ के अंदर से बाहर आकर रहमान के मुँह में जाने लगा। नदीम के हटते ही राज भी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगा। और आयशा भी हाय्य्य्य्य्य्य मैं भी गईइइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। अब आयशा राज के ऊपर गिर गई। रहमान ने उसके चूतरों को ऊपर किया और पहले उसकी बुर चाटा और फ़िर राज का लौड़ा चाटकर साफ़ किया। उसका एक हाथ अभी भी अपने नरम लंड पर ही था। जिसे वह आगे पीछे कर रहा था।
अब तीनों आराम से पड़े थे।
उधर नमिता ऑफ़िस के लिए तय्यार होते हुए बार बार राज की चड्डी में फुले हुए हथियार का सोच रही थी।
आज उसका बदन बहुत गरम था और उसका मन चुदाई के लिए तरस रहा था। तभी मनीष का फ़ोन आया वह बोला: आंटी पापा और मैं अभी दिल्ली जा रहे हैं, शाम तक आएँगे। लो पापा से बात करो।
मनीष के पापा जिनका नाम सुधाकर था बोले: नमिता तुमको आज एक ज़रूरी काम करना होगा। तुम होटेल ताज चली जाओ और वहाँ शर्मा जी से मिलकर एक फ़ाइल ले आना और उसपर लिखी बातों को समझकर मुझे फ़ोन पर अप्डेट दे देना।
नमिता: ये वही पटना के शर्मा जी हैं ना?
सुधाकर: हाँ वहीं हैं , उनका बेटा भी साथ ही है।
नमिता: ठीक है मैं अभी जाती हूँ।
वह काफ़ी अप्सेट थी कि मनीष से आज अपनी प्यास नहीं बुझा पाएगी। उसने अपना सिर झटका और आख़िरी बार अपने आप को देखा और मुग्ध होकर सोची कि हाय अपनी जवानी तो बर्बाद ही हो रही है। आज उसने एक मस्त सेक्सी टॉप और लेग्गिंग पहनी थी जिसने वह बहुत मस्त माल दिख रही थी। पर मनीष तो दिल्ली जा रहा है। उसने अपनी बुर पर हाथ फेरा और ख़ुद से बोली : सबर कर मेरी रानी। अभी कुछ नहीं हो सकता।
नमिता ऑटो से होटेल ताज पहुँची और शर्मा जी को फ़ोन किया । वो बोले: तुम ऊपर मेरे कमरे में आ जाओ।
वह उनके कमरे की घंटी बजाई तो शर्मा जी ने दरवाज़ा खोला और बोले: आओ नमिता , कैसी हो बेटी? शर्मा जी की उम्र कोई ५५/५६ की थी और अब भी बड़े तंदूरस्त थे। उन्होंने टी शर्ट और केप्री पहनी थी जिसमें से उनकी बालों वाली जाँघें बड़ी पुष्ट और मर्दाना नज़र आ रही थी।
नमिता: जो ठीक हूँ, आपका बेटा कहाँ है?
शर्मा: वह होटेल के जिम में कसरत कर रहा है।
नमिता: अच्छा , मुझे फ़ाइल दिखा दीजिए और समझा दीजिए।
शर्मा : अरे बेटी, इतनी जल्दी क्या है? आज तो तुम्हारे ऑफ़िस में भी कोई है नहीं । मज़े से यहाँ रहो और खाओ पियो , बोलो क्या लोगी?
नमिता: जी मैं तो अभी नाश्ता करके आयी हूँ बस कॉफ़ी ले लूँगी।
शर्मा ने फ़ोन पर कॉफ़ी ऑर्डर की और अपने लिए बीयर मँगाया।
शर्मा नमिता से इधर उधर की बातें करता हुआ उसकी सुंदरता की तारीफ़ करने लगा। अब नमिता थोड़ी सी परेशान और थोड़ी सी ख़ुश भी हो रही थी।
शर्मा: अरे बेटी , तुम ४० की होगी क्योंकि तुम्हारा बेटा भी तो १८ का हो गया है। पर कोई तुमको ३० साल का ही समझेगा। उसकी छातियों की तरफ़ देख कर बोला: सच में तुमने अपना फ़िगर बहुत संभाल कर रखा है। तुम्हारी उम्र में तो बहुत सी औरतें मोटी हो जाती हैं। तुम तो अभी भी बहुत सेक्सी हो।
नमिता शर्म से लाल हो कर बोली: क्या सर आप भी? मुझे बहुत शर्म आ रही है।
शर्मा: बेटी, तुम तो परी की तरह सुंदर हो , काश मैं आज से २० साल पहले तुम्हें मिला होता तो तुम मेरी बीवी होती। और सच में तुम्हें बहुत प्यार करता।
नमिता समझ रही थी कि वह कमीना उसको पटा रहा है पर वह अपनी बुर की खुजली से मजबूर थी। उसकी बुर ये सब सुनकर गीली हो रही थी। वह जिन नज़रों से उसकी छातियाँ देख रहा था उससे उसके निपल्ज़ भी तन गए थे।
अब वह कमीना बीच बीच में बेशर्मी से अपना लौड़ा भी दबा देता था। वहाँ पर अब एक बड़ा सा टेंट भी उभर आया था।
अब शर्मा बोला: बेटी अगर तुम एक मिनट के लिए खड़ी हो जाओ तो मैं तुमहे कुछ दिखाना चाहता हूँ।
नमिता थोड़ी अचंभे से खड़ी हुई और फिर शर्मा ने उसको कहा : देखो उस दीवाल में पूरा शीशा लगा है। ज़रा चल कर बताओ। और अपने आप को शीशे में देखती रहो।
नमिता: उससे क्या होगा सर?
शर्मा: अरे चलो तो सही, इस छोर से उस छोर तक।
नमिता उठकर अपनी कुर्ते को नीचे अपनी लेग्गिंग तक खींची और चल कर दिखाई। उसने शीशे में देखा ख़ुद को- सच वह बहुत सेक्सी लग रही थी। उसकी छातियों का उभार और उसकी पतली कमर और उसके लेग्गिंग से उभरे हुए चूतर किसी को भी पागल कर सकते थे और शर्मा जी तो पागल हो चुके थे।
अचानक जब वह उनके पास से गुज़री तो उन्होंने उसको पकड़कर अपनी गोद मेंखिंच लिया और वो नमिता के चूतर उसके खड़े लौड़े से जा टकराए। नमिता की छातियों को एकदम से दबोचते हुए उसने अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और चूसने लगा।
नमिता हैरानी से थोड़ा झिझकी पर जल्द ही मस्ती की आँधीं मेंबहक गयी। अब वह उसकी छातियाँ दबाते हुए उसकी बुर को लेग्गिंग के ऊपर से ही सहलाने लगा, और नमिता की प्यासी बुर पानी छोड़ने लगी। विरोध तो कब का समाप्त हो गया था और अब तो वह मज़े से सीइइइइइइ हाऽऽऽऽऽऽऽय्यय कर रही थी।
नमिता: आपका बेटा आ सकता है, छोड़िए ना, प्लीज़।
शर्मा: अरे वह आया तो उसके साथ भी मज़ा ले लेना। जब। से उसकी माँ का देहांत हुआ है हमने कई बार उसकी गर्ल फ़्रेंड्स को साथ साथ चोदा है।
नमिता उसकी बात सुन कर हैरान हो गयी।
अब वह नमिता की कुर्ती खोलने लगा और फिर उसने उसे उतार दिया। नमिता ने भी अपने हाथ उठाकर उसको सहयोग दिया।
अब नमिता ब्रा में थी और उसकी गोरी दूधिया चूचियों को उसने दबाया और चूमा। फिर उसने नमिता की लेग्गिंग और पैंटी एक साथ निकाल दी। अब उसने नमिता को पलंग पर लिटाकर उसके ऊपर आ गया और उसके होंठ और चुचि चूसने लगा। फिर वह उसके पेट को चूमते हुए नीचे आया और उसके चूतरों के नीचे एक तकिया रख दिया जिससे उसकी बुर उभरकर दिखने लगी। अब उसने उसकी जाँघों को चूमा और चाटते हुए उसकी बुर के पास आ गया और बुर को पहले सहलाया और फिर चूमने लगा। फिर उसकी पंखुड़ियों को अलगकर उसकी छेद को ऊँगली से खोदा। नमिता आऽऽऽहहहह कर उठी अब उसने उसकी बुर को जीभ से चोदना चालू किया। नमिता हाऽऽऽऽऽऽय्य्य्य्य स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र जीइइइइइइइइ क्या कर रहे हैं आऽऽऽहहहह।
शर्मा अब उसकी जीभ से चटाई करने लगा और वह भी अपनी कमर उठकर उसका साथ देने लगी। अचानक वह झड़ने लगी और चिल्लाई: हाय्य्य्य्य्य्य मैं झड़ीइइइइइइइइइइ। उईइइइइइ ।
उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया और शर्मा ने उसे पूरा पी लिया।
तभी दरवाज़ा खुला और रतन शर्मा जी का बेटा अंदर आया वह स्विमिंग पूल से नहा कर आया था जिम करने के बाद । उसके पास डूप्लिकेट चाबी थी।
रतन को अचानक कमरे में देखकर नमिता का शर्म से बुरा हाल हो गया और वह अपने बदन पर चादर ढँकने की कोशिश की। फिर भी उसकी जाँघें पूरी नंगी थीं।
शर्मा मुस्कराया और बोला: आओ बेटा, देखो क्या माल तय्यार है हमारे लिए।
रतन ने हँसते हुए कहा: अरे नमिता आंटी आप पापा को मज़ा दे रही हो और हमारा ख़याल नहीं रख रही हो।
नमिता को बहुत शर्म आ रही थी। अब उसने उठने की कोशिश की तो रतन बिस्तर पर बैठ गया और उसको लिटाता हुआ उसके होंठ चूसने लगा। और चादर खींचकर उसकी छातियों को नंगा करके उनपर टूट पड़ा और उन्हें दबाते हुए बोला: पापा आंटी की चूचियाँ कितनी मस्त हैं। और वह उनको बारी बारी से चूसने लगा। अब नमिता की आहें निकलने लगीं। तबतक शर्मा ने अपने कपड़े खोल दिए और उसका काला मोटा लौड़ा ऊपर नीचे हो रहा था। नमिता ने बहुत दिन बाद ऐसा हथियार देखा था। अब वह उसकी जाँघों के बीच आ गया और उसकी टाँगें फैलाकर उसकी बुर में अपना लौड़ा लगा दिया और एक धक्के से आधे से भी ज़्यादा अंदर कर दिया। नमिता हाय्य्य्य्य्य मर गईइइइइइइइइइ। धीइइइइइइइइरे सेएएएएएए कहती हुई उफ़फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी।
उधर रतन भी अब खड़ा होकर अपने कपड़े खोल दिया। उसका लंड भी अपने बाप के लंड की तरह ही बड़ा और काला था। उसने नमिता के मुँह के पास अपना लौड़ा हिलाया और नमिता ने मुँह खोलकर उसका लौड़े का सुपाड़ा मुँह में ले लिया और उसको जीभ से सहलाते हुए चूसने लगी।
रतन मस्ती से अपनी कमर हिलाके उसके मुँह को चोद रहा था। अब वह भी मस्ती से कमर उछालकर शर्मा के धक्कों का जवाब दे रही थी। दोनों मर्द उसकी एक एक चुचि दबा रहे थे। तभी शर्मा मस्ती से ह्म्म्म्म्म्म्म्म करके झड़ गया। शर्मा हाँफते हुए हट गया।
नमिता अभी भी प्यासी थी। रतन मुस्करा कर बोला: आंटी, अब मैं चोदूँगा आपको, घबराओ नहीं। अब वह नीचे आकर एक तौलिए से उसकी बुर को साफ़ किया और फिर अपना लौड़ा एक ही झटके में उसके अंदर कर दिया। अब रतन ने ज़बरदस्त जवानों वाली चुदायी चालू की और नमिता भी बड़ी मस्ती से उसके धक्कों का जवाब देने लगी। कमरा अब फ़च फ़च और जाँघों की रगड़ती हुई आवाज़ों से गूँज उथा। पलंग भी धक्कों के कारण चूँ चूँ कर रहा था।
रतन ने उसकी होंठों को चूसते हुए उसके निपल्ज़ मसले और कमर को हिला हिला कर ज़बरदस्त चुदायी की। अब वह दोनों चिल्लाकर झड़ने लगे। वाह क्या स्खलन था दोनों के चरम आनंद का। दोनों जैसे सातवें आसमान में थे। फिर थक कर दोनों लेट गए।
शर्मा सोफ़े पर बैठकर उनकी चुदायी का आनंद ले रहा था और अपने नरम लंड को सहला रहा था।
नमिता बाथरूम से वापस आकर अपने कपड़े पहनी और तय्यार हो गयी। शर्मा और रतन ने उसे एक और राउंड के लिए कहा पर वह मना कर दी।
फिर वह अपनीं फ़ाइल लेकर चल दी घर की तरफ़ क्योंकि ऑफ़िस तो अब जाना नहीं था।
उधर राज अब भी आयशा से लिपट कर पलंग पर पड़ा था , अभी सिर्फ़ १० ही बजे थे। नदीम नहाने चला गया और बोला: अम्मी मेरा नाश्ता बना दो मैं दुकान जाऊँगा। राज तू चाहे तो अम्मी के साथ बाद में नहा लेना। मैं तो कई बार नहाया हूँ और बाथरूम में ही इनको चोदा भी हूँ। आयशा उठकर अपनी मैक्सी पहनने लगी तो नदीम ने कहा: अम्मी आज दोपहर तक नंगी ही रहो। साला राज भी क्या याद करेगा कि आपने उसे क्या मज़ा दिया था वह भी उसकी पहली चुदायी में ही।
आयशा: अरे ऐसा भी कहीं होता है, वह जब चाहेगा मैं फिर से उतार दूँगी ना।
नदीम: अम्मी, बस कह दिया तो कह दिया। आज आप नंगी रहोगी।
आयशा कुछ परेशान होकर: अच्छा बाबा जैसा तू कहता है।
अब वह नंगी ही किचन में चली गयी । जब वो जा रही थी तब उसके मटकते गोल गोल बाहर की ओर उभरे हुए चूतरों को देखकर राज का लौड़ा फिर से खड़ा होने लगा।
नदीम मुसकाया और बोला: मस्त माल है ना अम्मी। देख कैसे मटका कर गयी है, अपने बड़े बड़े चूतरों को। आज गाँड़ भी मार लेना अच्छी तरह से उनको बहुत मज़ा आता है गाँड़ मरवाने में।
राज ने हाँ में सर हिलाया और नदीम बाथरूम में घुस गया। अब राज ने अपनी चड्डी पहनी और उसमेंसे उसका आधा खड़ा लौड़ा उभार के साथ साफ़ दिखाई दे रहा था।
वह अब सोफ़े पर आ कर बैठ गया जहाँ रहमान बैठकर TV देख रहा था।
रहमान: मज़ा आया बेटा चुदायी में ?
राज: जी अंकल बहुत मज़ा आया।
रहमान: जाओ ना किचन में जाकर आयशा की मदद कर दो। फिर आँख मार के बोला: वह नंगी है जाओ मज़ा लो।
राज: नहीं अंकल वह नाश्ता बना रही हैं। मैं जाऊँगा तो वह काम नहीं कर पाएँगी। मैं तो उनको पकड़ लूँगा और फिर काम कैसे करेंगी।
रहमान उसकी चड्डी में खड़े लौड़े को देखकर अपनी जीभ होंठ पर फेरते हुए बोला: मैं इसकी कुछ मदद कर दूँ?
राज चड्डी में से अपने लौड़े को अजस्ट किया और बोला: नहीं अंकल अभी नहीं, अभी नाश्ता करते हैं।
रहमान निराश होकर: ठीक है कोई बात नहीं।
तभी नदीम नहा कर आया और चिल्लाया: अम्मी नाश्ता लाओ। और राज से बोला: आओ यार नाश्ता करते हैं। और यार तुमने चड्डी क्यों पहनी? ये तो अन्याय है, मैंने तुम्हारे लिए अम्मी को नंगी रखा है और तुम चड्डी पहन लिए? बड़ी नाइंसाफ़ी है भाई! चलो चड्डी उतारो ताकि अम्मी को अटपटा नहीं लगे।
राज हँसते हुए अपनी चड्डी उतार दिया और अपने आधे खड़े लौड़े को छूकर बोला: यार आज तो तूने इसकी चाँदी ही करा दी। ये साला तो बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है।
अब राज आकर टेबल पर बैठा और दोनों बातें करने लगा।
आयशा नाश्ता लाई और नदीम और राज के सामने रख दी। उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ हिलकर धमाल मचा रही थी। नदीम ने उसकी एक चुचि दबा दी और वह नदीम का गाल चूम ली। जब वह राज के पास आइ तो राज ने भी उसके चूतर दबा दिए तो वह उसका भी गाल चूमी।
आयशा रहमान को बोली: आप भी आ जाओ और नाश्ता कर लो।
रहमान आकर राज के पास बैठ गया। आयशा उसका भी नाश्ता लगा दी। नदीम जल्दी से खाकर उठा और बोला: अच्छा मैं चलता हूँ दुकान पर। और फिर राज को बोला: चल मज़ा ले अम्मी का, मैं क़रीब १ बजे आ जाऊँगा और तुझे घर छोड़ दूँगा। और अम्मी को प्यार करके उनकी बुर को अपनी हथेली में भरकर दबाया और फिर नीचे बैठ कर उसकी बुर की एक ज़ोरदार आवाज़ वाली चुम्मी लिया और बाहर निकल गया।
रहमान बोला: ये रोंज बाहर जाते हुए अपनी अम्मी की बुर की चुम्मी लेता है,वह जाने के समय अपनी अम्मी के आगे घुटनों पर बैठ जाता है और आयशा अपने कपड़े उठाकर अपनी बुर को नंगी करती है और वह उसे चूमता है।
नदीम चला गया। आयशा बोली: चाय पीयोगे?
राज ने हाँ में सर हिलाया, वह चाय बनाने गयी। तभी राज को अपने खड़े लौड़े पर अंकल का हाथ महसूस हुआ । वह उसके लौड़े को सहला रहे थे। राज ने उनका हाथ हटाया और सोफ़े पर आकर बैठ गया । रहमान भी दूसरे सोफ़े पर बैठकर TV देखने लगा।
तभी आयशा चाय लाई और राज और रहमान को दी। जब वह चाय दे रही थी झुक कर तब उसके बड़े दूध राज के मुँह पर आ गए जिसे उसने चूम लिया और दबाकर मस्त भी हो गया। फिर वह राज के पास बैठकर ख़ुद भी पीने लगी । राज उसकी नंगी जाँघें सहला कर मस्त होने लगा। उसका हाथ उसकी बुर तक भी पहुँचा पर वह जाँघें चिपका कर बैठी थी सो उसकी बुर के अंदर तक नहीं जा पाया। अब आयशा ने उसके लौड़े को पकड़ा और उसको ऊपर नीचे करने लगी और बोली: तुम्हारा हथियार बहुत मस्त है। सालों बाद ऐसा हथियार पकड़ी हूँ।
राज: आंटी आपकी चीज़ है जो चाहे करो।
आयशा चाय पीते हुए झुकी और उसकी टोपी की चमड़ी पीछे करके उसकी टोपी को चूसने लगी। वह एक चाय का सिप लेती और फिर एक सिप लौड़े का लेती। राज भी उसके गरम चाय के कारण उसकी गरम मुँह का स्पर्श अपने लौड़े पर महसूस करके मस्त हुए जा रहा था। रहमान बड़ी ही उत्सुकता से सब देख रहा था और लूँगी में हाथ डालकर अपना लंड मसल रहा था।
आयशा रहमान को बोली: आप भी नहा लो।
रहमान: पहले तुम दोनों नहा लो। मैं बाद में नहा लूँगा।
राज भी आयशा के कंधों पर हाथ रखकर उसको अपने चिपटा लिया और उसके एक मम्मे को दबा रहा था और दूसरे को चूस रहा था।
आयशा बोली: चलो अब नहा लो।
राज: आज तो मैं आपके साथ ही नहाऊँगा।
आयशा हँसते हुए बोली: चलो नहा लो , मैं कौन सा मना कर रही हूँ।
फिर दोनों खड़े हुए और राज का लौड़ा अब पूरा तना हुआ था और उसके पेट की ओर करके उसकी नाभि को छू रहा था।
आयशा अपनी गाँड़ मटका कर बाथरूम में पहुँची और राज भी उसके पिछले हिस्से को देखता हुआ उसके पीछे बाथरूम में पहुँचा।
आयशा राज से लिपट गयी और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। राज के हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसके मस्त पिछवाड़े की गोलाइयों का मज़ा ले रहे थे।
तभी राज ने शॉवर चालू किया और वह पानी में भीगते हुए एक दूसरे को चूमे जा रहे थे।
थोड़ी सी बाद आयशा ने उसको अलग किया और साबुन हाथ मेंलेकर उसकी छाती पर लगाने लगी। फिर उसने उसकी बाहों और गर्दन पर भी लगाया। उसको घुमाकर उसकी पीठ पर भी लगाया। अब वह नीचे स्टूल पर बैठकर उसकी जाँघों पर साबुन लगायी । उसके चूतरों पर भी वह साबुन लगायी और उसकी दरार मैं हाथ डालकर उसके बालोंवाली गाँड़ में भी साबुन लगाया। राज का लौड़ा मस्ती से प्रीकम छोड़ रहा था। अब वह उसको घुमायी और साबुन का झाग उसके बॉल्ज़ पर भी लगाई और गाँड़ और बॉल्ज़ के बीच के हिस्से को भी साफ़ करने लगी। आयशा की आँखों ने सुपाडे के छेद पर लगा प्रीकम देख लिया और वह जीभ निकालकर उसको चाट गयी। अब उसने पूरे लौड़े पर साबुन लगाया। और फिर खड़ी होकर बोली: चलो अब तुम्हारे मुँह मेंभी लगा देती हूँ।
राज: नहीं आंटी अभी तो मैं आपको साबुन लगाउँगा . फिर मुँह मेंलगा दीजिएगा।
आयशा हँसते हुए बोली: चलो लगाओ।
अब राज भी साबुन का झाग बनाकर उसकी गर्दन से चालू किया। फिर उसके हाँथों और उसके पेट के हिस्से पर लगाया। फिर वह उसके पीछे जाकर उसकी पीठ और पैरों पर साबुन मला। अंत में उसने खड़े होकर उसके मम्मों मो दबाते हुए उनपर साबुन मला। फिर वह भी नीचे स्टूल पर बैठा और उसको घुमाकर उसके चूतरों को मसलते हुए उनपर साबुन मला। अब उसने उसकी गाँड़ मेंसाबुन लगाया। आह्ह्ह्ह्ह क्या मक्खन सी गाँड़ थी कहीं एक बाल भी नहीं था। उसने और नीचे जाकर बुर और गाँड़ के बीच को जगह को भी मला। पूरा बदन मानो रेशम सा कोमल था कहीं एक बाल नहीं। फिर उसको घुमाकर सामने से भी बुर में साबुन लगाया और फुली हुई बुर को इतनी सुंदरता देख कर मुग्ध हो गया।
राज: आंटी आपके बदन में वक भी बाल नहीं है, ऐसे कैसे हुआ?
आयशा: अरे नदीम को बाल बिलकुल पसंद नहीं है। वह ख़ुद ही बाल साफ़ कर देता है जैसे ही बढ़ते हैं। बहुत प्यार करता है मुझे ।
अब राज खड़ा हुआ और दोनों ने एक दूसरे के मुँह मेंसाबुन लगाया और शॉवर के नीचे लिपटकर खड़े हुए और नहाने लगे।
जब साबुन निकल गया तो दोनों ने एक दूसरे के अंगों को पोंछा ।
तभी राज बोला: आंटी एक बार यहीं चोदने दो ना प्लीज़।
आयशा: ठीक है लो कर लो। अब ये कहते हुए वह दीवाल को पकड़कर झुक गई और अपने चूतरों को ऊपर की ओर कर दिया। राज को शीला और प्रतीक की ऑफ़िस वाली चुदायी याद आ गयी।
तभी राज ने देखा कि रहमान दरवाज़े पर खड़ा होकर अंदर झाँक रहा था। उसने आयशा को इशारे से बताया तो वह बोली: अब इनका खड़ा नहीं होता इसलिए इस तरह से देख कर ये अपनी वासना शांत करते हैं। बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ। पहले बहुत मस्त चोदते थे। देखने दो उनको कुछ नहीं होता।
अब राज आयशा के पीछे आकर अपने लौड़े को उसकी बुर के छेद में लगाने लगा। आयशा ने हाथ बढ़ाकर उसके लौड़े को अपनी बुर में लगा लिया और ख़ुद पीछे होकर उसका आधा लौड़ा अंदर के ली। अब राज ने धक्का मारा और पूरा लौड़ा अंदर पेल दिया। आयशा और पीछे होकर पूरा लौड़ा जड़ तक अंदर ले ली। अब राज ने चुदायी शुरू की और वह उसकी लटकती हुई चूचियों को दबाकर आयशा मी मस्ती को दुगुना कर दिया था। क़रीब १० मिनट की घमासान चुदायी के बाद आयशा भी अपनी कमर को पीछे धकेल धकेल कर चुदवा रही थी। उसकी सिसकियाँ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽ है । और ज़ोर से चोदोओओओओओओओओओ । मेरे राजाआऽऽऽऽऽऽ फाड़ दोoopooopoooo नाआऽऽऽऽऽ हाय्य्य्य्य्य्य्य्य्य मैं गईइइइइइइइइ। कहते हुए वह झड़ गयी। अब वह बुरी तरह से हाँफ रही थी। राज का स्खलन अभी बहुत दूर था । उसने आयशा की गाँड़ के छेद को देखा और उसने एक ऊँगली डाली और बोला/’: आंटी गाँड़ मारने दो ना।
आयशा: आह क्या चोदू लड़का है, मस्त चोदा तूने आज। चल वह भी मार ले।पर यहाँ नहीं पलंग पर।
अब अच्छी तरह से सफ़ाई करके दोनों बाहर कमरे में आए और आयशा ने रहमान को कहा :यह भी पीछे डालना चाहता है, आप ज़रा वहाँ क्रीम लगा दो।
अब वह उलटा लेट गई और अपनी गाँड़ को ऊँचा कर दी। रहमान ने बड़े प्यार से उसकी गाँड़ में पहले एक फिर दो और अंत में तीन ऊँगली क्रीम के साथ डालकर उसको अच्छी तरह से राज के मोटे लौड़े के लिए तय्यार करने लगा।अब राज ने आयशा के पीछे आकर उसकी गाँड़ को देखा और मस्त होकर अपना लौड़ा हिलाने लगा। रहमान ने उसका हाथ हटाया और अपने हाथ की क्रीम को राज के लौड़े पर लगाने लगा। राज ने गाँड़ पर ऊँगली फेरी और फिर एक ऊँगली अंदर डाली। उसकी गरम टाइट गाँड़ ने उसको बहुत गरम कर दिया और अब उसने सलमान के हाथ से अपना लौड़ा छुड़ाकर आयशा की गाँड़ में फ़िट किया और हल्के से धक्का मारा , लंड उसकी टाइट गाँड़ में सर्र्र्र्र से घुसता चला गया।
आयशा की आऽऽहहह निकल गयी , वह बोली: हाय्य्य्य्य्य्य जराऽऽऽऽ धीरे सेएएएएएएएए । बहुत मोटा है तुम्हारा।
अब राज ने एक आख़री झटका दिया और उसका लौड़ा गाँड़ के अंदर पूरा चला गया। अब उसने धक्के मारने शुरू किए और कमरा ठप्प ठप्प की आवाज़ से भरने लगा। आयशा की चूचियाँ हर धक्के से बुरी तरह से हिल रही थी। अब राज उसकी चूचियाँ दबाने लगा और उसके निपल्ज़ को ऐठने लगा। तभी रहमान ने उसकी बुर में दो ऊँगली डाली और उनको अंदर बाहर करने लगा।
आयशा मस्ती से भरकर ज़ोर से पीछे कमर करके चुदवाने लगी। आयशा भी मस्ती से अपनी गाँड़ फटवाने लगी। राज को पहली बार गाँड़ मारने का मज़ा मिल रहा था। थोड़ी देर में आयशा अपनी बुर और गाँड़ की रगड़ायी से मस्त होकर झड़ने लगी। उसने रहमान की उँगलियों में पानी छोड़ना शुरू कर दिया। तभी राज भी उसकी गाँड़ में झड़ना शुरू किया। अब वो बाथरूम में साफ़ सफ़ाई करके वापस आए और राज ने कपड़े पहन लिए। पर आयशा पूरी नंगी ही सोफ़े पर आ कर बैठ गयी। रहमान ने कहा: अरे यह अब और नहीं चोदेगा तुम्हें चलो अब कपड़े पहन लो।
आयशा: नहीं जब तक नदीम वापस नहीं आता तब तक मुझे ऐसे ही रहना पड़ेगा। वह मुझे नंगी रहने को बोला है।अगर मैंने कपड़े पहन लिया तो वह नाराज़ होगा। तुम कुछ खाओगे राज?
राज: जी आंटी जी भूक तो लगी है। नदीम भी आता होगा और वह मुझे घर छोड़ देगा, वहीं खा लूँगा।
तभी नदीम वापस आ गया और आयशा को पकड़ कर प्यार किया और बोला: अम्मी मज़ा दिया ना राज ने आपको?
आयशा: हाँ बहुत मज़ा आया इसके साथ।
नदीम: अम्मी आपकी गाँड़ भी मारी कि नहीं इस लल्लू ने?
रहमान: अरे बहुत ज़ोर से मारी पूरी फाड़ के रख दी है।
नदीम: दिखाईये अम्मी गाँड़ क्या सच में फट गयी?
आयशा आगे की ओर झुकी और अपने चूतरों को अलग करके अपनी गाँड़ का छेद नदीम को दिखाया। नदीम ने देखा कि गाँड़ अभी भी पूरी खुली हुई थी और पूरी लाल हो रही थी।
नदीम: यार सच तूने अम्मी की गाँड़ फाड़ दी है। अब बता अपनी माँ मुझे कब दिलाएगा।
राज: यार आज से ही मैं इस जुगाड़ मेंलग जाऊँगा कि माँ को कैसे चोदूँ।
नदीम: बस अब तूने ठान ली है तो तू चोद ही लेगा। पर यार हमें नहीं भूल जाना। हमको भी दिलवाना उनकी बुर।
राज: ज़रूर यार ये भी कोई पूछने की बात है।
नदीम: अम्मी चलो अब कपड़े पहन लो मैं इसे घर छोड़ कर आता हूँ।
फिर नदीम जब उसको घर के सामने बाइक से उतारा तब बोला।: तो आज से माँ की चुदाई की तय्यारी चालू होगी ना?
राज: बिलकुल अब बस ये करना ही है।
फिर वह अपने घर का ताला खोला और अंदर जाकर हैरान रह गया कि माँआज भी घर पर ही है। वह माँ के कमरे मेंपहुँचा और खिड़की से झाँक कर देखा और उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं-------
नमिता होटेल से निकली और ऑटो से घर के लिए चल पड़ी। उसका शरीर ज़बरदस्त चुदायी से बहुत हल्का हो चला था और वह लस्त हो रही थी, तभी उसे ध्यान आया कि कुछ राशन का सामान लेना होगा, तब वह घर के पास के दुकान पर उतरी और राशन दुकान में उसे शीला मिल गयी।
नमिता: अरे आप आज स्कूल नहीं गयी।?
शीला: गयी थी थोड़ा जल्दी आ गयी। ये आए हुए हैं ना।
नमिता: अरे वाह तब तो मज़े ही मज़े हैं।
शीला थोड़ा झेंप कर बोली: अरे आप भी ना कुछ भी कह देती हैं।
दोनों हँसने लगीं।
तभी शीला थोड़ी गम्भीर होकर बोली: आपको पता है ना ३/४ दिन में हम सब पेपर’s का टेस्ट ले रहे हैं। फिर वह विस्तार से सब बतायी टेस्ट के बारे में।
वह आगे बोली: देखिए, मेरा फ़र्ज़ है कि आपको समय रहते बता दूँ कि राज का पढ़ने में बिलकुल ही ध्यान नहीं है । अगर ये टेस्ट भी उसने ठीक से नहीं किए तो फ़ाइनल में कुछ भी उम्मीद नहीं रखिएगा।
नमिता: मैं क्या करूँ पता नहीं क्या हो गया है उसका बिलकुल पढ़ने में मन ही नहीं लगता।
शीला अपराध बोध से ग्रस्त थी, कि उसने इस लड़के का सत्यानाश कर दिया था। कल रात को उसका पति आ गया था ३ हफ़्ते की छुट्टियों में। उसने कल रात से शीला को अब तक तीन बार चोद लिया था। अब शीला को किसी की ज़रूरत नहीं थी। सो अब उसे लगा कि एक छोटी उम्र के लड़के के साथ ये सब करके उसने अच्छा नहीं किया। इसीलिए वह नमिता को समझा रही थी कि किसी तरह राज को पढ़ने के लिए प्रेरित करे। फिर नमिता उसका धन्यवाद करके राशन लेने लगी।
सारे रास्ते नमिता राज के भविष्य को लेकर चिंतित रही। फिर उसने अपना सिर झटका और सोचा कि आज राज से साफ़ साफ़ बात करनी ही पढ़ेगी। तभी उसको अपनी बुर में खुजाल मची तो वह सोची कि साली दो लोगों से चूद कर आ रही है, फिर भी खुजा रही है। वह मन ही मन मुस्कुरा उठी।
नमिता जब घर पहुँची तो सीधे अपने कमरे में गयी और अपने कपड़े उतारने लगी। अब वह ब्रा और पैंटी में थी। उसने घड़ी देखी , अभी राज को आने में एक घंटा बाक़ी था। उसने अपनी ब्रा खोली और फिर अपनी छातियों का निरीक्षण करने लगी।
तभी राज भी घर में आकर खिड़की से माँ को सिर्फ़ पैंटी में देखा और उसकी आँखें फटी रह गयीं। नमिता अब छातियों में लाल लाल निशान देखी और मुस्कुरायी कि बाप बेटा दोनों क्या चूसे हैं इनको। चूस चूस कर लाल ही कर दिया है। वह शीशे में अपना हुस्न देखकर ख़ुद पर ही मुग्ध हो रही थी। उसने अपनी गोलाइयों को सहलाया और उसे याद आया कि शायद शर्मा ने वहाँ काटा भी था। तब उसे दाँत के निशान भी मिले, वह बुदबुदायी : साला कमीना कितनी ज़ोर से काटा है। फिर उसने एक क्रीम लेकर वहाँ पर मला और फिर अपनी पैंटी भी उतार दी।
राज अपनी माँ का हुस्न देखकर जैसे दीवाना हो गया। शीला या आएशा तो इनके सामने कुछ भी नहीं है। क्या गठा हुआ जिस्म है। कमर में हल्की सी चरबी है पर बाक़ी जगह तो माशा अल्लाह एक एक अंग जैसे तराशा हुआ हो। शीशे में उनका सामने का हिस्सा और वैसे ही उनका पिछवाड़ा राज की आँखों के सामने था।
चूतरों का उभार गदरायी जाँघें और गोरी चिकनी पीठ , राज का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया। अब उसने अपने लौड़े को पैंट से आज़ाद किया और उसको मूठियाने लगा।
तभी नमिता घूमी और उसकी मादक गोरी बड़ी चूचियाँ राज के सामने थी। नमिता ने अपने बुर के ऊपर के बालों को पेड़ू के ऊपर बहुत सफ़ाई से दिल का शेप दिया हुआ था और नीचे उसकी बुर बिलकुल बिना बाल के मस्त चिकनी दिखाई दे रही थी।
अब वह मुड़कर शीशे में अपने चूतरों का मुआयना करने लगी।वहाँ भी लाल निशान थे, शर्मा और उसके बेटे ने बहुत दबाया था और शायद जोश में आकर चूमते हुए वहाँ भी काटा था। उसने वहाँ भी क्रीम लगाई। फिर वह नंगी ही बाथरूम में अपने बड़े बड़े चूतर मटकाते हुए घुस गयी।
राज कमरे में घुसा और माँ की पैंटी और ब्रा सूँघने लगा। अब उसका लौड़ा जो पैंट के बाहर हो था और ज़ोर से मस्त होकर हिलने लगा।
उसने बाथरूम के दरवाज़े में कोई छेद खोजने की कोशिश की पर उसे सफलता नहीं मिली। वह फिर अपने कमरे में जाकर बाथरूम में अपने माँ के नाम की मुट्ठ मारा और झड़ गया।
जब वह थोड़ी देर बाद अपने कमरे से बाहर आया तो देखा कि माँ किचन में खाना गरम कर रही है। उसे देखकर बोली: अरे तू कब आया?
राज : बस माँ अभी अभी हो आया हूँ। आप आज फिर ऑफ़िस से जल्दी आ गयीं?
नमिता: हाँ आज दोनों बाप बेटे टूर पर है तो मैं ऑफ़िस में क्या करती?
राज: माँ ये सुधाकर अंकल बार बार टूर पर जाते हैं।तो आज आप ऑफ़िस गई ही नहीं?
नमिता हकलाते हुए: नहीं नहीं गयी थी पर जल्दी आ गयी।
अब वह राज को कैसे बताती कि वह ऑफ़िस के काम से होटेल गयी और वहाँ शर्मा और उसके बेटे से चुदवा कर आ रही है।
राज : ओह अच्छा चलो मैं खाना लगाता हूँ आपके साथ । उसने माँ के उभारों को मैक्सी के ऊपर से घूरते हुए कहा।’
अब दोनों खाना खाने लगे तब नमिता ने पूछा: बेटा आज शीला आंटी मिली थी और तुम्हारे टेस्ट का बता रही थी। तुमने तो मुझे बताया ही नहीं?
राज: माँ वह तो हर साल होते हैं उसमें नया क्या है?
नमिता: नहीं इस बार इसमें बहुत कुछ नया है। शीला बोली कि अगर तुमने ये टेस्ट अच्छे से पास कर लिए तो तुम्हारा फ़ाइनल का रिज़ल्ट भी अच्छा आएगा। उसने मुझे यह भी बताया है कि एक दिन छोड़कर ये टेस्ट होंगे और उसका परिणाम भी उसी दिन बता दिया जाएगा ताकि तुमको ये पता चल जाए कि तुम कितने पानी मेंहो?
तुम्हें पता भी है किये टेस्ट कबसे शुरू हो रहे हैं।
राज: हाँ माँ ४ दिन बाद चालू हो रहे हैं।
नमिता : तुम्हारी तैयारी है?
राज: नहीं माँ नहीं है।
नमिता: तुमको समझ क्यूँ नहीं आ रहा है कि अगर तुम पढ़ायी नहीं कर पाए तो तुमको कोई भी नहीं पूछेगा। तुम्हारे पापा भी नहीं है और ना ही हमारा कोई बिज़्नेस है। नाहीं मेरे पास पैसा है तुम्हारे बिज़्नेस के लिए। तुम्हारा भविष्य इसी पर टिका है कि तुम्हारा परिणाम कैसा आता है?
राज हताश स्वर में बोला: माँ मैं क्या करूँ, मैं जब पढ़ने बैठता हूँ को मेरा ध्यान भटकता रहता है।
नमिता: अच्छा चलो मैं तुम्हारी मदद करूँगी। तुम एक पेज पढ़ो और मुझे सुनाओ। मैं पूरे समय तुम्हारे पास बैठूँगी।
राज सोचने लगा कि तब तो हो चुकी पढ़ाई, मैं तो सिर्फ़ आपके बदन को ही निहारता रहूँगा, पढ़ाई क्या ख़ाक होगी?
राज: माँ उससे कोई फ़ायदा नहीं होगा, चलो मैं कोशिश करता हूँ।
ये कहकर वह अपने कमरे में चला गया।
नमिता भी खाना उठाकर साफ़ सफ़ाई करके राज के कमरे में आयी तो वह किताब खोल कर सामने खिसके से आसमान को देख रहा था और उसका हाथ लोअर के ऊपर से उसके खड़े लौड़े को सहला रहा था।
नमिता बहुत परेशान हुई और अपना हाथ उसके लोअर में बने तंबू की ओर करके बोली: ये कैसी पढ़ाई कर रहा है तू, कमीने? मर क्यों नहीं जाता? बहुत ही जवानी की आग लगी हुई है? देखना एक दिन भीक माँगेगा।
ये कहते हुए वह रोने लगी और अपने कमरे में चली गयी।
राज को बड़ा धक्का लगा, वह तो माँ के जवान बदन को कल्पना में देखकर गरम होकर लौड़ा सहला रहा था, उसे क्या पता था कि माँ आ जाएगी।
उसे बड़ा दुःख हुआ और वह माँ के कमरे की ओर गया। उसने देखा कि माँ बिस्तर पर पेट के बल लेती हुईं थीं और सिसकियाँ ले ले कर रो रहीं थीं।
राज की आँखें माँ के उठे हुए मस्त नितम्बों पर पड़ीं जोकि उनके रोने से हिल रही थीं। उसे अपने आप पर ग़ुस्सा आया कि छी एक तरफ़ माँ उसके कारण रो रही है और वह उनको अभी वासना की निगाह से ही देख रहा है।
उसने माँ की पीठ पर हाथ रखा और उसका हाथ उनकी ब्रा की पट्टी पर ही आ गया। उसे फिर से झटका लगा और उसने हाथ को वहाँ से हटा कर पीठ के नीचे रखा और बोला: माँ रोने से क्या होगा? मैं कोशिश तो कर रहा हूँ ना पढ़ने की? अब थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा। आप प्लीज़ मत रोईए।
नमिता अपना मुँह उठाकर जो पूरी तरह से आँसुओं से भीगा हुआ था बोली: बेटा, तू क्यों नहीं समझता कि तेरा भविष्य बर्बाद हो रहा है।
राज: मैं कोशिश करूँगा माँ और ध्यान से पढ़ने की। यह कहते हुए वह मॉ के आँसू पोछने लगा।
नमिता: आख़िर तू ऐसा क्या सोचता रहता है हमेशा सेक्स के बारे में कि तू इतना उत्तेजित हो जाता है?
राज: पता नहीं माँ , मुझे और कुछ नहीं सूझता , मुझे किसी डॉक्टर को दिखा दो । ये कहते हुए वह भी रोने लगा।
नमिता ने उसे अपने से लिपटा लिया और प्यार करते हुए बोली: सब ठीक हो जाएगा बेटा, तू परेशान ना हो। राज भी उससे लिपट कर रो रहा था। जब दोनों के आँसूँ थमे तो राज ने देखा कि उसकी माँ ने उसे अपनी छाती में भींच लिया था और उसका मुँह उनकी चूचियों की घाटियों पर था। वह फिर से उत्तेजित होने लगा और अपने आप को माँ से छुड़ाया ताकि वह फिर उसके लंड का उभार ना देख ले।
नमिता बोली: चल मैं तेरे लिए चाय लाती हूँ , तू पढ़ने बैठ।
राज अपने कमरे में गया और किताब खोला, तभी उसको नदीम का फ़ोन आया , वो बोला: यार मेरी नानी का देहांत हो गया है। मैं और अम्मी १० दिन के लिए जा रहे हैं। तू पीछे से अपनी माँ को पटा लेना।
राज का तो जैसे दिल बैठ गया, वह तो २/३ दिन बाद फिर से आंटी को चोदने का प्लान बना रहा था। उसने कहा: ठीक है यार।
तभी माँ चाय लायी और बोली: बेटा शीला बता रही थी कि उसके पति तीन हफ़्ते की छुट्टी पर आएँ हैं। वह बड़ी ख़ुश दिखायी दे रही थीं। बड़ी भली महिला है।
राज के सिर पर जैसे किसी ने ठंडा पानी डाल दिया। तो अब शीला भी नहीं मिलने वाली चुदने के लिए। उसने एक आह भरी कि अब बेचारे लंड का क्या होगा? वह उदास हो गया।
अब ले दे कर माँ ही बची है, पर उसपर तो सिर्फ़ मेरी पढ़ाई का ही भूत सवार है।
राज अपनी ही सोच में डूबा था और उधर नमिता सोच रही थी कि इस लड़के का क्या करे?
उसने सुधाकर याने कि अपने बॉस को फ़ोन किया और बोली: आपसे कुछ व्यक्तिगत बात करनी है, आपके पास समय है क्या?
सुधाकर: हाँ हाँ बोलो क्या बात है।
नमिता ने राज के मन के भटकाव और उसके सेक्स के प्रति पागलपन के बारे में उसे बताया और उसको ये भी बताया कि कैसे उसकी पढ़ाई का सत्यानाश हो रहा है?
सुधाकर: ओह तो ये बात है? तुम क्या चाहती हो किसी मनोवेज्ञानिक को दिखाना चाहती हो?
नमिता: और क्या करूँ आप ही बोलो?
सुधाकर: तुम ऐसा करो मैं डॉक्टर गुप्ता का नम्बर भेजता हूँ वह तुम्हारी मदद करेगा । पहले तुम उससे मिल लेना कल दस बजे फिर जैसा वो बोलेगा तुम करना। ठीक है? मैं उसे तुम्हारे बारे में बता दूँगा।
नमिता: थैंक यू सर कहकर फ़ोन रख दी।
अगले दिन वह डॉक्टर गुप्ता से मिलने गयी फिर क्या हुआ-------
अगले दिन वह ऑफ़िस गयी और वहाँ का काम निपटाकर डॉक्टर गुप्ता के क्लीनिक पहुँची। डॉक्टर एक ६० साल का भारी बदन का आदमी था। उसने नमिता को देखकर कहा:बैठो बेटी, हाँ सुधाकर ने मुझे फ़ोन किया है कि तुम मुझसे मिलना चाहती हो, बोलो क्या समस्या है?
नमिता : जी मैं आपसे कैसे कहूँ बड़ी हिचक हो रही है।
गुप्ता: अरे बेटी इसमें हिचकने की क्या बात है जो कहना है खुल कर कहो?
नमिता: असल में समस्या मेरी नहीं मेरे बेटे की है।
गुप्ता: ओह क्या हुआ है उसको?
नमिता: असल में आजकल उसका ध्यान पढ़ाई में नहीं लग रहा है। ज़रा ज़्यादा ही जवानी चढ़ रही है उसको?
गुप्ता मुस्कुराते हुए बोला: कितनी उम्र है?
नमिता: जी अभी १८ का है।
गुप्ता: ओह फिर तो जवान हो गया है। अच्छा बताओ तुम्हें ऐसा क्यों लगा कि उसका ध्यान पढ़ाई से इसीलिए हटा है कि उस पर जवानी छाईं है। कोई और कारण भी तो हो सकता है।
नमिता: उसने ख़ुद से ही बताया है कि वह औरतों के बारे में सोचता रहता है।
गुप्ता: औरतें या लड़कियाँ?
नमिता: वही तो, वह कहता है कि उसको लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं है और उसे अंटियाँ ही अच्छी लगती हैं। ये तो थोड़ा अजीब बात है ना?
गुप्ता: नहीं उसने अजीब कुछ नहीं है। कई लड़के अपने माँ से इतने ज़्यादा जुड़े रहते है कि वो अपनी गर्ल फ़्रेंड में भी अपनी माँ ही ढूँढते हैं और आँटियों को पसंद करने लगते हैं।
नमिता: ओह पर इसका उपाय क्या है? कैसे उसे इस पागलपन से छुटकारा दिलाया जाए और पढ़ाई में उसका ध्यान वापस लाया जाए?
गुप्ता: यह आसान भी है और कठिन भी। पर बिना उसे मिले मैं कोई भी फ़ैसला नहीं कर सकता।
नमिता: ठीक है मैं उसको शाम को लेकर आऊँगी।
गुप्ता: उसने कभी किसी आंटी का नाम लिया?
नमिता: जहाँ तक मैं समझती हूँ किउसको अपनी क्लास की कुछ टीचर पसंद हो सकती है । उनमें से एक शीला जी हैं और वह एक दो बार अपने दोस्त नदीम की माँ के बारे में भी कुछ ऐसी वैसी बातें करता रहा है?
गुप्ता चौंकते हुए: कैसी बातें, खुलकर बताओ . छिपाओगी तो मैं शायद ही मदद कर पाऊँ?
नमिता: असल में बात ही कुछ ऐसी है, वो वो --
गुप्ता: हाँ हाँ बोलो ना।
नमिता: वह कहता था कि शायद नदीम अपनी मतलब माँ के साथ मतलब याने कि - अब मैं कैसे बोलूँ?
गुप्ता: तुम यह कहना चाहती हो कि नदीम अपनी माँ के साथ सेक्स करता है। यही ना?
नमिता सिर झुका कर बोली: जी हाँ।
गुप्ता: बेटी,दुनिया में बहुत कुछ होता है जो कि हमारे सोच के ख़िलाफ़ है। जैसे माँ बेटा या बाप बेटी या भाई बहन का सेक्स । हालाँकि इसकी संख्या कम है पर ये सब इस दुनिया में होता है।कुछ दिन पहले एक भाई बहन आए थे, उनके माँ बाप नहीं हैं। लड़के का छोटा मोटा काम है , पर उनकी जात में दहेज प्रथा है तो वह उसकी शादी करवा नहीं पा रहा था।
नमिता: ओह तो फिर?
गुप्ता: वह लड़का ख़ुद भी शादी नहीं करना चाहता क्योंकि वह चाहता है किपहले बहन की शादी हो जाए।
लेकिन एक दिन अपनी बहन को कपड़े बदलते देख कर वह उसकी तरफ़ वासना से भर गया और क्योंकि दोनों जवान थे और प्यासे थे इसलिए वासना की आँधी में बह गए।
नमिता: ओह, भाई बहन?
गुप्ता: हाँ , पर बाद में उनको शायद कुछ अपराध भाव आया होगा सो मेरे पास आए कि हम अब क्या करें?
नमिता: फिर आपने क्या बोला?
गुप्ता: मैंने पहले ये समझा कि वो दोनों सिर्फ़ सेक्स के लिए जुड़े हैं या आपस में प्यार भी करते हैं? जब मुझे लगा कि वो दोनों सच मैं एक दूसरे को प्यार करते हैं तो मैंने उनको साथ मेंपति पत्नी की तरह रहने को कह दिया और अब वो दुनिया के लिए भाई बहन हैं पर वास्तव में हैं पति और पत्नी।
नमिता का सिर चकरा गया कि ये सब क्या है?
वह बोली: ओह तो आपने उनके रिश्ते को सही ठहरा दिया।
गुप्ता: मैं कौन हूँ सही ग़लत का फ़ैसला करने वाला? मैंने तो सिर्फ़ सुझाव दिया कि फ़ालतू का टेन्शन मत लो और मज़े से रहो।
नमिता: तो क्या आप नदीम और उसकी माँ के रिश्ते को भी सही कहोगे?
गुप्ता: जब तक पूरी बात पता नहीं होगी मैं कैसे कह सकता हूँ?
नमिता: ठीक है डॉक्टर मैं राज को शाम को लेकर आती हूँ, आप उसको ही समझाइए कि पढ़ाई की तरफ़ ध्यान दे।
अब वह उठी और नमस्ते करके बाहर जाने लगी, गुप्ता ने उसको कहा: ठीक है शाम को आ जाओ उसको लेकर। नमिता के जाने के बाद गुप्ता ने सुधाकर को फ़ोन किया: यार ये नमिता तो मस्त माल है, तू इसको चोदना क्यों बंद कर दिया?
सुधाकर: यार आजकल मुझे कमसिन लौंडियों को चोदने में मज़ा आता है। तू मज़ा ले लेना इससे।
गुप्ता: वो तो मैं के ही लूँगा पर पहले इसकी समस्या का हल कर दूँ फिर उससे फ़ीस वसूलूँगा। हाऽऽऽ हाऽऽऽऽ । दोनों हँसे और फ़ोन काट दिए।
राज जब स्कूल से घर पहुँचा तभी उसकी माँ भी आ गयी।
नमिता: बेटा, आज मैं डॉक्टर गुप्ता के पास गई थी वह बड़े मनोवेज्ञानिक ( Psychologist) माने जाते हैं। वह शाम को तुम्हें बुलाए हैं। हम शाम को उनसे मिलेंगे।
राज ने बुझी आवाज़ में कहा: ठीक है माँ जैसा आप कहो।
राज बहुत उदास था क्योंकि शीला और आयशा दोनों ही चुदायी के लिए उपलब्ध नहीं थी। दोनों ने उसको चुदायी की लत लगा दी थी।
वह खाना खाकर माँ के नाम की मूठ मारा और सो गया।
शाम को माँ बेटा तय्यार होकर गुप्ता के पास पहुँचे।
गुप्ता ने कहा: राज तुम इस कमरे में बैठो और नमिता को लेकर दूसरे कमरे में चला गया।
वहाँ उसने नमिता को एक कुर्सी पर बैठाया और उसके सामने टेबल पर रखे दो TV को चालू किया। जल्द ही दोनों TV में तस्वीर आने लगी। नमिता ने देखा कि एक TV में राज बहुत ही साफ़ साफ़ दिख रहा है। और दूसरे TV में डॉक्टर की कुर्सी साफ़ साफ़ दिख रही है।
नमिता हैरान होकर बोली: ये सब क्या है डॉक्टर?
गुप्ता: बेटी, अब जब मैं राज से सवाल जवाब करूँगा तो तुम बहुत ही साफ़ साफ़ सब कुछ अच्छी तरह से देख और सुन सकोगी। इससे तुमने फ़ैसले लेने में आसानी होगी। और हाँ चाहे कुछ भी हो जाए किसी भी हालत में तुम यहाँ से कहीं नहीं हिलोगी।
नमिता को उस कुर्सी पर बैठाकर वह वापस अपने कमरे में आ गया। उसने आकर अपना लैप्टॉप खोला और उसमें नमिता की पूरी छबी आ गयी। वह बहुत ख़ूबसूरत पर चिंतित दिख रही थी और उसको यह पता नहीं था कि गुप्ता उसको देख रहा है उस कैमरा से जो नमिता वाले कमरे में लगा है।
अब वह राज को बोला: हाँ बेटा, तुम्हारी माँ का कहना है कि आजकल तुम्हारा ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता। क्या यह सही है?
राज: जी सर, सही है।
गुप्ता: मैं जान सकता हूँ कि ऐसा क्यों हो रहा है?
राज: सर मैं कोशिश तो करता हूँ पर मेरा ध्यान भटकता रहता है।
गुप्ता: वही तो पूछ रहा हूँ किक्या सोचकर ध्यान भटकता है।
राज सिर झुका लिया और चुप हो गया।
गुप्ता:बेटा, अगर तुम मुझे पूरी बात नहीं बताओगे तो मैं तुम्हारी मदद कैसे करूँगा?
नमिता बड़े ग़ौर से दोनों को अलग अलग TV में देख रही थी, और उनकी बातें सुन रही थी।
राज: सर, वह क्या है ना मतलब- याने कि--- मैं कैसे कहूँ?
गुप्ता: बेटा कहोगे नहीं तो मैं तुम्हारी मदद कैसे करूँगा। बताओ जो भी बात है? ये हम दोनों के ही बीच में ही रहेगी।
राज: आप माँ को तो नहीं बताओगे?
गुप्ता लैप्टॉप की ओर देखकर मन ही मन मुसकाते हुए बोला: कम से कम मैं तो नहीं बताऊँगा। तुम्हारी तुम जानो।
राज: फिर ठीक है, सर वह क्या है ना, किमैं बस हमेशा चु-- मतलब सेक्स का सोचता रहता हूँ।
गुप्ता: हम्म क्या सोचते हो चुदायी के बारे में ? घबराओ मत चुदायी को चुदायी बोलने मेंकोई संकोच नहीं होना चाहिए। तुम्हारी कितनी गर्ल फ़्रेंड हैं?
नमिता गुप्ता के मुँह से यह शब्द सुनकर अचम्भित रह गयी।
राज: ओह, सर , नहीं मेरी कोई GF नहीं है, मुझे आँटियाँ अच्छी लगती हैं। वह कहते हुए शर्मा सा गया।
गुप्ता: हम्म तो इसमें शर्मा क्यों रहे हो? अच्छा ये बताओ कैसी आंटी अच्छी लगती हैं भरे बदन की, दुबली पतली या मोटी आंटी?
राज: जी भरे बदन की।
नमिता गुप्ता के अगले सवाल पर चौक गई ।
गुप्ता: अच्छा यानी कि तुम्हारी माँ टाइप की भरे बदन की?
राज भी थोड़ा हड़बड़ा कर: जी जी हाँ मतलब जी हाँ।
गुप्ता: तुमको आँटियों का कौन सा अंग बहुत उत्तेजित करता है?
राज: जी जो वो--
गुप्ता: अरे बोलो ना शर्माओ मत।
राज: जी उनकी छातियाँ।
गुप्ता: हम्म तुमने कभी किसी आंटी को नंगी देखा है?
राज : जी जी जी नहीं ।
गुप्ता: देखो बेटा, मैं तुम्हारी मदद तभी कर सकूँगा जब तुम सच बोलोगे।
राज: जी देखा है।जी एक तो मेरी टीचर हैं।
गुप्ता: उनका नाम?
राज: शीला आंटी।
गुप्ता: और किसी को?
राज: जी एक मेरे दोस्त की अम्मी हैं।
गुप्ता: नाम?
राज: आयशा आंटी।
गुप्ता: और किसी को? झूठ नहीं बोलना!
राज सिर झुकाकर: जी माँ को।
नमिता का हाथ अपने मुँह पर चला गया। हे भगवान ये मुझे कब नंगी देख लिया?
गुप्ता ने लैप्टॉप पर नमिता की हैरानी देखी और मुसकराय।
गुप्ता: तुमने इन तीनों को चोदा भी है?
राज: नहीं नहीं माँ को नहीं चो- मतलब नहीं किया।
गुप्ता: ओह तो इसका मतलब तुमने शीला और आयशा को चोदा है?
राज : जी हाँ।
नमिता को तो जैसे चक्कर ही आ गया । यहाँ उसके सामने TV पर उसका बेटा ये मान रहा है कि उसने दो औरतों को चोदा है। और वह उसे भोला भाला समझ रही थी।
गुप्ता: मुझे तुम्हारा केस विस्तार से समझने के लिए यह सब और डिटेल में जानना होगा कि तुमने ये कैसे कैसे किया?
राज: मतलब?
गुप्ता: मतलब पूरे विस्तार से बताओ कि तुमने सबसे पहले किसे और कैसे चोदा?
नमिता बिलकुल हतप्रभ रह गयी इतने सीधे प्रश्न से वह भी अश्लील भाषा के साथ!!!
राज ने शुरू से प्रतीक और शीला के बारे में बताया कि कैसे उसने उसको उसके घर पर चोदा और फिर बाद में प्रतीक और शीला की चुदायी देखने की बात भी बतायी ।
गुप्ता: ओह तो तुमने क्या देखा बताओ स्कूल के ऑफ़िस में उस खिड़की से, पूरे विस्तार से बताओ।
राज: प्रतीक ने शीला आंटी को चूमा और उनकी छातियाँ दबाई और फिर आंटी ने उसका लौ-- मतलब--
गुप्ता: अरे यार लौड़े को लौड़ा ही बोलोगे ना और इसमें बुरा क्या है?
नमिता फिर से हैरान हो गयी कि यह इतने सभ्य बुज़ुर्ग डॉक्टर को आख़िर क्या हो गया है?
राज: जी आंटी फिर प्रतीक का लौड़ा चूसने लगी। बाद में उनकी ब्लाउस और ब्रा खोलकर प्रतीक ने उनके दूध चूसे और दबाए। फिर आंटी अपनी कपड़े उठाकर कमर के नीचे से नंगी होकर टेबल ओर झुक गयी और प्रतीक उनको पीछे से चोदने लगा।
ये कहते हुए राज ने अपने पैंट का आगे का हिस्सा अजस्ट किया। नमिता ने देखा कि वहाँ पर एक तंबू तन चुका था। अचानक उसका ध्यान गुप्ता की पैंट पर गया और वह भी अपने खड़े लौड़े को पैंट के ऊपर से सहला रहा था।
गुप्ता: बेटा तुम्हारी बात सुनकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है और पैंट में तंग कर रहा है।
फिर वह आगे झुक कर उसकी पैंट को देखा और बोला: ओह तो तुम्हारा भी यही हाल है, चलो हम दोनों अपने लौड़ेबाहर निकाल लेते हैं और उसे सहलाते हुए तुम अपनी बात पूरी करो।
नमिता को तो काटों ख़ून नहीं।
तभी गुप्ता खड़ा हुआ और अपनी बेल्ट खोला और पैंट की जीप खोलकर अपनी चड्डी से अपना काला मोटा लौड़ा निकाला जिसे राज और नमिता ने देखा और हक्के बक्के रह गए। अब अपने लौड़े को सहलाते हुए गुप्ता बैठ गया और नमिता का बुरा हाल हो गया। गुप्ता ने फिर राज को लौड़ा बाहर निकालने को कहा और राज भी खड़ा होकर अपनी पैंट की ज़िपर खोला और उसको नीचेकर चड्डी में से फंसा हुआ अपना मूसल बाहर निकाला। गुप्ता भी आश्चर्य से इतने बड़े लौड़े को देखा और सोचा कि सच मेंलड़के का हथियार उम्र के हिसाब से मस्त है।
उधर नमिता की तो आँख ही नहीं हट पा रही थी अपने बेटे के लौड़े पर से । वह भी सोच रही थी कि हे भगवान ये इस उम्र में ही इतना बड़ा है, आख़िर किस पर गया है, इसके पापा का तो इसके आसपास भी नहीं था। अब उसने देखा कि राज और गुप्ता दोनों अपने लौड़े सहला रहे थे। नमिता का बुरा हाल था और वह जानती थी कि गुप्ता जानता है कि वह कैमरा में ये सब देख रही है।
गुप्ता: हाँ अब मज़ा आएगा बातें करने में । बोलो फिर क्या हुआ?
राज शीला आंटी कैसे झुकी और कैसे पीछे से प्रतीक ने उसे चोदा वग़ैरह और आख़िरी में कैसे धमाकेदार चुदायी हुई ये सब बताया।
नमिता राज के बातें सुनते हुए उन दोनों को लौड़े हिलाते हुए देख कर अब गरम हो रही थी। उसके निपल्ज़ अब कड़े होने लगे और उसकी बुर में जैसे चिटियाँ रेंग रही थी।
उसके हाथ अपने आप ही अपने निपल्ज़ पर आ गए और वहाँ दबाकर वह मस्त होने लगी।
गुप्ता मस्ती से नमिता को अपनी चुचि और उसके बेटे को अपना लौड़ा सहलाते हुए देख रहा था।
वह भी मस्ती से अपना लौड़ा सहला रहा था ।
अब गुप्ता बोला: हाँ अब बताओ तुमने आयशा को कैसे चोदा?
राज ने अब नदीम और उसकी माँ की कहानी सुनायी फिर अपनी और आयशा की jचुदायी जिसने नदीम भी शामिल था, वह बात भी बतायी।
नमिता एक दम से परेशान हो गयी और हैरान होकर ये सुन कर कि कैसे यह हो सकता है कि एक बेटा ही अपनी माँ को अपने दोस्त से चुदवाएगा? उसका तो दिमाग़ ही काम नहीं कर रहा था और उधर दोनों अपने लौडों से खेल रहे थे। गुप्ता तो अपने लौड़े की टोपी की चमड़ी को ऊपर नीचे करके हो मस्त हो रहा था और वह ये देखकर अपनी बुर में भारी खुजाल महसूस कर रही थी।
राज आगे बताते जा रहा था कि कैसे उसने उस दिन पूरे समय आयशा को नंगी रखा।
और जब राज ने बताया कि कैसे उसने आयशा की गाँड़ मारी? तो नमिता को लगा कि उसको अपने बुर में ऊँगली डालनी ही पड़ेगी।
गुप्ता: हम्म तो तुमने इन दोनों आँटियों से मज़ा लिया। अब बताओ नदीम तुमसे अपनी अम्मी को क्यों चुदावाया?
राज: इसलिए ताकि वह मेरी माँ को चोद सके।
नमिता की तो जैसे साँस ही रुक गयी। हे भगवान यह मेरा बेटा है, और कैसी बातें कर रहा है ? ये कैसे इतना अजीब सा हो गया है?
गुप्ता: ओह पर क्या तुमने अपनी माँ को भी चोद लिया है?
राज: नहीं सर ।
गुप्ता: पर तुमने तो कहा ना कि उनको नंगी देख चुके हो?
राज: वह तो कल जब माँ अपने कपड़े उतारकर अपने आप को शीशे में देख रही थी तब मैंने देखा था खिड़की से छुपकर।
गुप्ता: ओह तुमने उनको पूरी नंगी देखा था , कैसा लगा तुमको उनका नंगा बदन?
राज: वह बहुत सुंदर हैं और उस दिन तो अपने छातियों में लाल दाग़ देख कर बड़बड़ा रहीं थीं कि कमीने ने काट खाया है। मैं जानता हूँ कि वह उस दिन किसी से चुदवा कर लौटी थीं।
नमिता सकते मेंआ गयी । ओह तो राज को शक है उसपर।
गुप्ता अपने लौड़े को मसलते हुए बोला: क्या नमिता और भी लोगों से चुदवाती है?
राज: हाँ मैं जानता हूँ किवह आपके दोस्त और अपने बॉस सुधाकर से भी चुदवा चुकी हैं और आजकल उनका बेटा मनीष उनको अक्सर चोदता रहता है।
नमिता और भी परेशान हो रही थी ये सब सुनकर।
गुप्ता: ओह तो तुम्हारी माँ भी मस्त चुदक्कड है, तुम्हारी तरह।
राज मुस्कुराते हुए बोला: जो हाँ। बहुत चुदक्कड हैं वह।
गुप्ता: और तुम उनको भी चोदना चाहते हो?
राज: जी हाँ मैं पागल हो रहा हूँ उनको चोदने के लिए।
नमिता की आँखें बाहर आ रही थी ये सब सुनकर। अब वह उन दोनों हिलते हुए लौडों को देखते हुए अपनी छाती दबाने लगी। और अपनी बुर भी कपड़े के ऊपर से खोदने लगी।
गुप्ता नमिता की हालत देखकर मुस्कराहट से भर गया।
अब गुप्ता बोला: देखो सामान्य परिस्थिति में कोई भी माँ अपने बेटे से चुदवाने को रही नहीं होगी। पर यहाँ हालात कुछ अलग हैं।
राज: कैसे अलग हैं हालात?
गुप्ता: तुम अपनी माँ को चोदना चाहते हो? और वो इसे ग़लत समझती है। पर क्योंकि वह तुम्हारी पढ़ाई को लेकर चिंतित रहती है इसलिए शायद वह इसके लिए मान जाए। देखो मैं कोशिश ज़ारूँगा। पर फ़ैसला तो तुम्हारी माँ ही लेंगी। अच्छा चलो अब बाथरूम में जाओ और मूठ्ठ मार लो। ऐसी हालत में तुम माँ के सामने कैसे जाओगे?
राज बाथरूम में चला गया और मूठ मारकर बाहर आ गया। तब तक गुप्ता ने अपना लौड़ा अच्छी तरह से नमिता को दिखाकर अपने पैंट में छिपा लिया।
उधर नमिता भी अपनी बुर से हाथ हटायी और गुप्ता के बुलावे का इंतज़ार करने लगी।
गिर गुप्ता कमरे मेंआया और बेशर्मी से हँसते हुए बोला: तो सब देख सुन लिया ना? और नमिता के सामने अपने लौड़े को मसल दिया। नमिता बहुत गरम थी और उसकी आँखें जैसे उसके लौड़े पर ही टिक गयी थी।
गुप्ता ने उसको कहा: चलो राज वाले कमरे में चलो। उसको थोड़े ही पता है कि तुमने सब देख और सुन किया है।
जब वो दोनों कमरे मैंने आए तो राज बाथरूम से बाहर आकर कुर्सी पर बैठा था।
नमिता तो अपने बेटे से आँखें ही नहीं मिला पा रही थी।
गुप्ता: अच्छा राज तुम घर चलो मैं तुम्हारी माँ को सब समझा कर बाद में भेज देता हूँ।
राज अच्छा कहकर चला गया और गुप्ता ने नमिता को बैठने के लिए कहा।
राज के जाने के बाद गुप्ता के कहने पर नमिता कुर्सी में बैठ गयी। गुप्ता भी उसके पास एक कुर्सी खींचकर बैठा एर लैप्टॉप को घुमाकर अपनी तरफ़ कर लिया और नमिता की विडीओ रिकॉर्डिंग को आगे बढ़ा कर वहाँ तक लाया जहाँ पर वह अपनी छातियाँ मसल रही थी।
उसने कहा: बेटी, सो अब तुमने सब सुन लिया कि तुम्हारा लड़का तो पक्का चालू हो गया है और एक नम्बर का चोदू बन गया है। और उसे ये भी पता है कि तुम भी पक्की चुदक्कड हो।
नमिता उसकी ऐसी बातें सुनकर सन्न रह गयी।
नमिता: डॉक्टर आप ऐसे कैसे एक महिला से बात कर सकते हैं? आपने मेरे बेटे से भी बहुत गंदी भाषा में बात की है। मुझे बड़ा धक्का लगा है आपकी हरकतों से।
गुप्ता हँसते हुए बोला: बेटी, अरे जब मज़े से चुदाती हो तो गंदा नहीं लगता पर जब उसकी बात होती है तो गंदा लगता है, वाह
जब हम दोनों लौड़े हिला रहे थे तो तुम क्या कर रही थी?
नमिता: छी आप कितनी गंदी बातें करते हैं? वह खड़ी होकर बोली: मैं अभी जा रही हूँ।
गुप्ता हँसते हुए बोला: अरे बेटी, ये लैप्टॉप तो देखो कि क्या कर रही थी तुम जब हम लौड़े हिला रहे थे।
ये कहते हुए उसने लैप्टॉप नमिता की तरफ़ कर दिया। नमिता ने देखा कि कैसे वह लौड़े देखते हुए अपनी छातियाँ और निप्पल्स दबा रही थी और फिर उसने देखा कि वह अपनी बुर भी रगड़ रही थी कपड़े के ऊपर से ।
वह यह सब देखकर शर्म से लाल होकर धम्म से कुर्सी पर वापस बैठ गयी। फिर धीरे से बोली: आप क्या चाहते हो?
गुप्ता: बेटी, मैं तो तुम माँ बेटे की मदद करना चाहता हूँ।
नमिता: ऐसे मदद करेंगे मेरी विडीओ बनाकर?
गुप्ता : हा हा अगर मैं विडीओ नहीं बनाता तो ये बात कैसे सिद्ध करता कि तुम भी एक सामान्य औरत हो जिसे सेक्स या चुदायी की भूक है। देखो हम सब आम इंसान हैं कोई भगवान नहीं हैं। बोलो तुम्हारी इछ्चा नहीं होती कि काश तुम्हारा कोई पति होता जो तुम्हारी सेक्स की भूक मिटाता?
नमिता: जी हाँ वो तो है।
गुप्ता: बेटी, मैं बस यही बात कहना चाहता हूँ कि समस्या से भागना समस्या का हल नहीं है।
नमिता हताश होकर बोली: तो मैं क्या करूँ? बताइए ना?
गुप्ता: अगर मैं तुमको सीधा सीधा बोल दूँ कि राज से चुदवा लो, तो तुम उछल पड़ोगी। तुमको समझदारी से काम लेना होगा। ठीक है?
नमिता: मतलब?
गुप्ता: देखो बेटी, राज को चुदाई का मज़ा मिल गया है, अब अगर उसको यह मज़ा नहीं मिला तो वह दो काम कर सकता है, एक तो वह कोई दूसरी आंटी पटाने में समय ख़राब करेगा या किसी रंडि के पास जाएगा। और दोनों ही हालातों में पढ़ाई का तो सत्यानाश होकर रहेगा।
नमिता रानी सूरत बना कर बोली: तो फिर क्या करें?
गुप्ता: बेटी, तुम्हें राज को वह देना ही होगा जो उसे तुमसे चाहिए?
नमिता: पर वह तो मेरे साथ -- मतलब- ये कैसे हो सकता है, आख़िर वह मेरा बेटा है?
गुप्ता: हाँ बेटा तो है, पर अब जवान मर्द भी है और देखा था तुमने ना, कि कैसे अपना लौड़ा हिला रहा था?
नमिता शर्म से लाल हो जार बोली: छी आपकी भाषा बार बार रिक्शे वाले जैसे कैसे हो जाती है?
गुप्ता: हा हा बेटी,देखो भाषा का मत सोचो और क्या करना है वह सोचो।
नमिता: क्या करना है?
गुप्ता: राज को जो चाहिए वह देना है ।
नमिता: मतलब मुझे उसके साथ सेक्स करना है? छी।वह मेरा बेटा है।
गुप्ता: देखो वह तुम्हारा बेटा है इसलिए उसका भला बुरा भी तुमको ही सोचना होगा बेटी।
नमिता: वह तो है सर पर मैं बहुत ही कन्फ़्यूज़्ड हूँ, कि क्या करूँ और क्या ना करूँ?
गुप्ता: एक बात तो मान ही लो कि तुम्हें उसको वह देना होगा जो वह चाहता है पर ये तुमको इस तरह से करना होगा कि वह तुमसे मज़े तभी ले पाए जब वह पढ़ाई में अच्छा करे। समझ लो किसी पुरस्कार की तरह उसे तुम्हारा बदन मिले।
नमिता हैरान होकर बोली: मतलब?
गुप्ता: देखो अगर तुमने उसे यूँ ही चोदने दिया तो वह पढ़ाई पर ध्यान नहीं देगा बस तुम्हें चोद कर मज़ा लेता रहेगा।
नमिता फिर इतनी साफ़ साफ़ शब्दों से थोड़ा सा विचलित हो गयी पर ख़ुद को सम्भाल कर बोली: फिर क्या करूँ?
गुप्ता: तुम्हें कुछ माप दंड बनाने पड़ेंगे जिनको प्राप्त करने पर ही वह तुम्हारे शरीर को पा सकेगा। और वह भी तुमको थोड़ा थोड़ा करके देना होगा।
नमिता: क्या अजीब सी बातें कर रहे हो आप? क्या मैं अपने आप को किश्तों में दूँगी?
गुप्ता: सही शब्द बोली तुम । हाँ बेटी, तुम्हें वह किश्तों में ही पाएगा।
नमिता: वह कैसे?
गुप्ता: मान लो वह कोई परीक्षा में अच्छे नम्बर लाता है, तो तुम उसको कपड़े के ऊपर से ही अपनी चूचियाँ दबाने दोगी। और अगर वह किसी अगली परीक्षा में भी अच्छे नम्बर लाता है तो शायद तुम उसको ब्रा के ऊपर से चूचियाँ दबाने देना।
नमिता सिहर कर: ओह ये मतलब है किश्तों में का। यह तो और बुरा होगा उसके साथ।
गुप्ता: क्यों बुरा क्या होगा? वह तो और भी मेहनत करेगा पढ़ायी में क्योंकि उसको तुम पहले से ही बता दोगी कि क्या नम्बर आने से उसे क्या मज़ा मिलेगा?
नमिता: अरे मेरे कहने का मतलब है कि वह तो मेरी चू-- मतलब अंगों को छूकर और उत्तेजित हो जाएगा तो आगे की पढ़ायी क्या ख़ाक करेगा?
गुप्ता: उसका भी इलाज है बेटी, तुम पहले से ही कह देना कि तुम उसका लंड सहला कर पानी निकाल दोगी ताकि वह शांत होकर पढ़ायी कर सके।
नमिता फिर से उलझ गयी कि हे भगवान क्या मैं अपने बेटे की रोज़ दो बार मूठ्ठ मारूँगी?
वह बोली: मतलब मुझे ये भी करना होगा?
गुप्ता: बेटी, जब उससे आख़री में चुदवाना ही है तो इस सब से क्या फ़र्क़ पड़ता है?
नमिता: मुझे यह सब सोचकर भी अजीब लग रहा है।
गुप्ता: बेटी, अपने इकलौते और बिना बाप के लड़के के लिए यह त्याग तो तुम्हें करना ही पड़ेगा?
नमिता: ये बहुत अजीब सा त्याग है ना सर जो कि एक माँ अपने बेटे के लिए करेगी।
गुप्ता: बिलकुल बेटी, ये एक बहुत बड़ा त्याग है जो तुम करने जा रही हो। और मुझे विश्वास है कि इससे तुम्हारा बेटा वापिस पढ़ायी में फिर से आगे निकल जाएगा।
नमिता: भगवान करे ऐसा ही हो।
गुप्ता: क्या उसके कोई इग्ज़ाम वग़ैरह पास मेंआ रहे हैं?
नमिता: जी सर , चार दिन बाद उसके टेस्ट पेपर’s हो रहे हैं जिन्मे अगर वो अच्छा कर गया तो फ़ाइनल भी अच्छा कर लेगा।
गुप्ता: वाह ये तो बढ़िया रहेगा। इनका परिणाम कब तक आएगा?
नमिता: हर एक दिन छोड़कर टेस्ट होगा और शाम को ही परिणाम आ जाएगा। कुल ६ पेपर’s होंगे।
गुप्ता ख़ुश होकर: लो बेटी, तुम्हारी समस्या का समाधान मिल गया।
फिर उसने नमिता को पूरी योजना बतायी कि कैसे किश्तों में वह अपने आप को राज को सौंपेगी और कैसे ये सब होगा।
नमिता तो सिर्फ़ मुँह खोले उसकी बात सुनती रही और बोली: ओह सर , लगता है कि आपका यह उपाय काम करेगा।
अब तक जो बातें गुप्ता ने नमिता को समझायी थीं वह इतने खुले और अश्लील शब्दों में किया था कि नमिता के निपल्ज़ खड़े हो गए और उसका अपना हाथ अपनी बुर के पास चला गया ताकि वह उसे खुजा सके।
नमिता ने देखा कि अब गुप्ता का लौड़ा भी पूरा खड़ा था और वह उसे खुलके मसल रहा था। नमिता की बुर पनियाने लगी।
गुप्ता: बेटी, एक बात बोलूँ , बुरा तो नहीं मानोगी?
नमिता: नहीं सर, आपने आज मुझे जो सहारा दिया है वह मैं जन्म भर नहीं भूलूँगी।
गुप्ता: बेटी, अभी मुझे तुम्हें चोदने की बड़ी इच्छा हो रही है, चूदाओगी क्या?
नमिता से आजतक किसी ने भी ऐसा सीधा सवाल नहीं किया था, वो हड़बड़ा कर बोली: जी जी ये क्या कह रहे हैं आप। अभी तक तो बेटी बेटी कह रहे थे अब ये सब करने को कह रहे हैं।
गुप्ता: देखो जब सचमुच के भाई बहन चुदायी कर सकते हैं और जब तुम माँ बेटे भी चुदायी करने वाले हो तो मैं अपनी मुँहबोलि बेटी को क्यों नहीं चोद सकता?
नमिता की भी बुर पनिया रही थी। वह सिर झुका कर बोली: ठीक है सर जैसा आप चाहे।
गुप्ता ख़ुश होकर बोला: चलो बग़ल के एक कमरे में बिस्तर लगा है वहाँ मज़ा लेते हैं।
वह उठकर गुप्ता के पीछे चल पड़ी।
गुप्ता ने उसको अपनी बाहों में खींचकर अपने से चिपका लिया और उसके हाथ उसकी पीठ पर फेर रहा था। अब उसने उसके होंठ चूमने शुरू किए और उसके हाथ उसके चूतरों पर मचलने लगे। नमिता भी उसके चुम्बन का जवाब दे रही थी। अब गुप्ता ने अपनी जीभ नमिता के होंठ में डाल दिया और अपनी जीभ से उसकी जीभ रगड़ने लगा।
नमिता भी अब उसकी जीभ चूस रही थी। दोनों मस्त हो कर एक दूसरे से चिपके जा रहे थे। गुप्ता के हाथ नमिता के चूतरों को दबा रहे थे।अब गुप्ता ने अपना एक हाथ चूतरों से हटाकर उसकी बड़ी छाती पर रखा और उसे मस्ती से दबाने लगा। नमिता की सिसकी निकल गयी। फिर गुप्ता ने उसका कुर्ता निकाला और ब्रा में क़ैद उसकी चूचियाँ देखकर वह उनपर टूट पड़ा और उनको दबा दबा कर मज़ा लेने लगा। अब उसकी ब्रा खोलकर उसकी चूचियाँ दबा रहा था और निपल्ज़ को उमेठ रहा था।
नरम लेकिन कसे हुए दूध पाकर जैसे गुप्ता की लोटरी ही निकल आयी थी। अब वह एक हाथ से एक चुचि दबा रहा था और दूसरे को चूस रहा था। नमिता ने भी मस्त होकर आऽऽऽहहह किया और उसका लौड़ा पकड़ कर उसको सहलाने लगी।
गुप्ता बोला: चलो अब पूरी नंगी हो जाओ और मैं भी कपड़े उतार देता हूँ।
ये कहते हुए वह पूरा नंगा हो कर बिस्तर पर लेट गया। उसका खड़ा काला मोटा लौड़ा हिल रहा था। नमिता भी अब पूरी नंगी होकर अपनी भरपूर जवानी का दर्शन कराने लगी। उसकी बड़ी छातियाँ और फूली हुई बुर जाँघों के बीच से जैसे झाँक कर उसे बुला रही थी। उसका लौड़ा ज़ोर ज़ोर से उछलने लगा।
अब गुप्ता ने उसको अपने ऊपर खींचलिया और उसके दूध चूसने लगा। नमिता हाय्य्य्य्य्य कर उठी। क़रीब दस मिनट चूसने के बाद उसने कहा: बेटी, ज़रा लौड़ा चूसो ना। नमिता मुड़कर अपना पिछवाड़ा गुप्ता की तरफ़ करके बैठी और उसका लंड सहलाकर मस्ती से उसका लंड चूसने लगी। गुप्ता भी मस्त चुसाई से ज़ोर ज़ोर से ह्म्म्म्म्म्म करने लगा। अब वह अपनी कमर उछालकर उसका मुँह चोदने लगा।नमिता भी पूरे ज़ोर से चूस रही थी और उसके बॉल्ज़ को सहलाए जा रही थी।
उधर गुप्ता ने उसके चूतरों को सहलाना चालू किया और उसकी गाँड़ और बुर में ऊँगली डालने लगा। अब वह बोला: बेटी, ज़रा अपनी बुर मेरे मुँह में दे दो और ६९ में आ जाओ।
नमिता अपने कमर को उठाकर अपनी बुर उसके मुँह पर रख कर उसके पेट पर लेटकर उसका लौड़ा चूसने लगी।
गुप्ता भी मस्त चूतरों को दबाकर चूमने और काटने लगा। फिर उसके चूतरों को फैलाके उसकी दरार में अपना मुँह डाल कर उसकी गाँड़ चाटने लगा और फिर बुर चूसने लगा।
नमिता हाय्यय्यूय करके उसके लौड़े को और ज़ोर से चूसने लगी।
अब वह बोला: बेटी रुक जाओ नहीं तो मैं झड़ जाऊँगा।
नमिता को उसने इशारा किया कि आओ मेरी सवारी करो।
नमिता मुस्कुराते हुए उसके जाँघों पर बैठी और उसका मोटा लौड़ा अपनी गीली बुर में सेट करके धीरे धीरे उसको अंदर के ली।नमिता आगे को झुकी ताकि गुप्ता उसकी बड़ी बड़ी लटकती छातियों को दबा और चूस सके। गुप्ता उसकी इच्छा पूरी करने लगा। वह एक चुचि मसल रहा था और दूसरी चूस रह था। अब नमिता उछलकर चुदवा रही थी और हाय्य्य्य्य्य्य्य आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽऽ है आऽऽऽऽऽऽऽऽह करके चिल्ला भी रही थी।
गुप्ता भी नीचे से कमर उछालकर उसकी बुर में जड़ तक अपना लौड़ा पेला और चिल्लाया : ह्म्म्म्म्म्म्म्म आह्ह्ह्ह्ह्ह बेटीइइइइइइइइ क्या मज़ाआऽऽऽऽऽ दे रही हो, ह्म्म्म्म्म।
अब नमिता बहुत गरम हो गयी वह गुप्ता पर छा गयी और अपने होंठ उसने गुप्ता के होंठों से चिपका लिए। गुप्ता नमिता के रसीले होंठ चूसते हुए उसके चूतरों को अपने लौड़े पर दबाकर चुदायी का आनंद लेने लगा। नमिता भी ज़ोर से अपने चूतरों को ऊपर नीचे करने लगी और बड़बड़ायी : आह बहुत अच्छाआऽऽऽऽ लग रहाआऽऽऽऽऽऽऽ है सर आऽऽहहहह मर गयीइइइइइइइइइ
हायय्य्य्य्यूय्य्य्य्य्य्य उईइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽऽ मैं तो गयीइइइइइइइ। अब वो अपनी बुर और जाँघों को पूरी तरह से भींच ली जैसे उसके लौड़े का पूरा रस निचोड़ लेगी। और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके गुप्ता भी झड़ गया।
नमिता उठकर बाथरूम गयी और वापस आ कर अपने कपड़े को हाथ लगायी पहनने के लिए। गुप्ता ने उसको पास आकर लेटने को बोला और वह नंगी ही आकर लेट गयी। अब गुप्ता ने उसको बाहों में भींच लिया और उसके होंठ चूमते हुए बोला: बोलो बेटी, मज़ा आया कि नहीं?
नमिता हँसते हुए बोली: हाँ सर बहुत मज़ा आया।पर आपने पूरा काम तो मुझसे ही करवाया।
गुप्ता हँसते हुए बोला: सच में तुम पक्की चुदक्कड हो क्या मज़ा देती हो? और उसकी चूचियाँ सहलाते हुए बोला: और ये तुम्हारी चूचियाँ देखो कितनी मस्त है। बेचारे राज की कोई ग़लती नहीं है जो वो इनको दबाना और चूसना चाहता है ।
नमिता: ओह अब मुझे जाना होगा वह अकेला होगा ।
गुप्ता: फिर क्या सोचा जैसा मैंने कहा है वैसा हो करोगी? ये कहते हुए वह उसकी चूचियाँ सहला रहा था।
नमिता: हाँ सर इसके सिवाय अब कोई उपाय नहीं है ।जैसा आपने कहा है मैं आज से उसके साथ एक समझौता करूँगी और एक एक करके उसको किश्तों में अपना बदन उसको दूँगी ताकि वह इसे एक प्रतियोगिता की तरह ले और मेरे बदन एक इनाम की तरह जीते।
गुप्ता उसके चूतरों को दबाकर मस्त होते हुए बोला: देखो कितने नरम और गोल गोल मस्त मोटे चूतर हैं तुम्हारे। तुम बहुत ही सेक्सी औरत हो।
नमिता:सर आप भी ना। अच्छा राज मेरी शर्तों को मान तो जाएगा ना? कहीं मना ना कर दे?
गुप्ता उसकी चूचियाँ चूसते हुए बोला: बेटी, एक बार इनको दबाएगा तो तुम्हारा ग़ुलाम हो जाएगा।
नमिता: तो आप मेरे ग़ुलाम हो गए क्या? कहते उसने गुप्ता का लंड पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी ।
गुप्ता : बेटी तुमको शक है क्या? मैं तो तुम्हारा ग़ुलाम हूँ, बोलो क्या हुक्म बजा लाऊँ?
नमिता: बस आप मेरी मदद करते रहिएगा। मैं आपको रोज़ फ़ोन करूँगी और आपसे दिशा निर्देश लूँगी।
अब नमिता ने महसूस किया कि उसका लंड तन रहा है।
वह उठी और उसको चूसने और चाटने लगी। देखते ही देखते उस साठ साल के बूढ़े का लंड खड़ा हो गया।
गुप्ता: आह बेटी चलो ना एक राउंड और हो जाए। मुझे ड़ोग्गी स्टाइल बहुत पसंद है। नमिता हँसती हुई चौपाया बन गयी और अपने चूतर ऊपर कर ली, गुप्ता उसके पीछे आया और उसकी बुर में जीभ घुसा दिया और उसके दाने को जीभ से रगड़ने लगा।
नमिता मी आऽऽऽह निकल गयी। अब उसने २ ऊँगली डाल कर अंदर बाहर किया और देखा की बुर बिलकुल गीली और तय्यार है। उसने अपना लौड़ा उसकी बुर में फ़िट किया और एक धक्के में ही क़रीब दो तिहाई लौड़ा अंदर पेल दिया। नमिता आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह क्या कर रहे हैं, धीरे डालिए ना। कितना मोटा है आपका। फट गयी होगी मेरी आऽऽह्ह्ह्ह्ह।
गुप्ता हँसते हुए उसकी लटकती हुई चूचियाँ दबाकर उसको फिर से मस्त कर के और बोला: बेटी, अब बाक़ी का लौड़ा तुम ही अंदर करो। अब नमिता बहुत गरम हो गयी थी और उसने पीछे की ओर अपनी कमर दबाई और पूरा लौड़ा अंदर कर ली। उधर गुप्ता उसके चूतरों से अपना पेड़ू पूरा चिपका दिया। और अब नमिता को पूरे मोटे लौड़े का अहसास अपनी बुर में होने लगा। अब वह दोनों मस्ती में डूब गए और दोनों चूतर हिला हिला कर चुदायी का भरपूर आनंद लेने लगे। अब कमरे में फ़च फ़च और ठप्प ठप्प की आवाज़ें गूँजने लगीं। गुप्ता उसकी चूचियाँ मसलते हुए और निपल्ज़ को ऐंठकर दबाकर चुदायी कर रहा था और नमिता भी कमर पीछे दबा दबा कर उसका भरपूर साथ दे रही थी और चिल्ला भी रही थी: आऽऽहहहह चोदोओओओओओओओओ आऽऽऽहहहह फाऽऽऽऽऽऽऽड़ दो ।गुप्ता भी हम्म आह्ह्ह्ह्ह्ह करके बुरी तरह से चोदे जा रहा था।
थोड़ी देर बाद दोनों चिल्लाकर झड़ गए। और शांत होकर पड़ गए।
अब नमिता बाथरूम से फ़्रेश होकर कपड़े पहिनी और तब तक गुप्ता भी तय्यार हो गया। अब गुप्ता ने फिर से बाहों में लेकर उसको चूमा और बोला: बेटी, दिल नहीं भरा। फिर कब मिलेगी ये? कहते हुए उसके बुर को कपड़े के ऊपर से दबा दिया।
नमिता: मुझे तो लगता है कि जो आपने प्लान बनाया है उसके कारण राज तो शांत हो जाएगा पर मैं बहुत अशांत हो जाऊँगी । फिर शांति के लिए आपके पास आ जाऊँगी।
गुप्ता: बेटी, एक बात याद रखो ये दस दिन तुम्हारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और ये जो तुम अपने बेटे के लिए त्याग करने जा रही हो वह तुम्हारे जीवन की दिशा ही बदल देगा।
नमिता: जी आप सच कह रहे हैं , मैं अभी भी अपने आप को पूरी तरह इसके लिए तय्यार नहीं कर पा रही हूँ कि अपने ही बेटे के साथ ये सब कैसे कर पाऊँगी?
राज: बेटी, आँख बंद करके सोचना कि मेरे साथ कर रही हो।
इस पर दोनों हंसने लगे। और नमिता उसको बाई करके और टच में रहूँगी कहकर अपने घर को चल दी।
रास्ते में वह सोच रही थी कि आज जो वह करने जा रही है उसका अंजाम ना जाने क्या होगा?
नमिता जब घर पहुँची तब राज सोफ़े पर बैठ कर TV देख रहा था। नमिता को देखकर बोला: कहाँ रह गयीं थीं आप? क्या कहा डॉक्टर ने मेरे बारे में?
नमिता अपने कमरे में जाते हुए बोली: अभी मैं फ़्रेश होकर आती हूँ फिर बताती हूँ।
अपने कमरे में जाकर उसने अपने कपड़े निकालकर सिर्फ़ ब्रा और पैंटी मेंआ गयी। एक नज़र अपने सेक्सी बदन पर डाली और फिर मैक्सी लेकर बाथरूम में घुस गयी। शॉवर लेने के बाद अपने नंगे बदन को देखी और मुस्करा के सोचने लगी कि गुप्ता ने बहुत मज़ा किया उसके बदन से आज। वह भी तो बहुत आनंद पायी थी उसकी चुदाई से।
अपनी छातियों को सहलाया हर उनकी पुष्टता की जाँच करके मस्त हो कर अपनी बुर का मुआयना किया और उस पर हाथ फेरकर सोची कि चलो आज तो शांत रहेगी।
तभी अचानक उसको याद आया कि राज बाहर बैठा उसका इंतज़ार कर रहा होगा जानने के लिए की डॉक्टर क्या बोला?
अब वह गम्भीर और चिंतित हो गई, कैसे सामना करेगी इन सबका?
क्या ये कर के भी राज सामान्य हो पाएगा?
वह ब्रा पैंटी पहनी , उसका मन अब अशांत हो गया था। थोड़ी देर पहले की ख़ुशी जैसे ग़ायब हो गई थी।
वह मैक्सी पहनते हुए सोचने लगी कि कैसे शुरू करेगी बात और कैसे राज को समझा पाएगी? वह शायद उसके त्याग को वासना की दृष्टि से ही देखेगा, वह कहाँ जान पाएगा कि एक माँ के लिए ये फ़ैसला लेना कितना दुःख भरा निर्णय हो सकता है। वह अपनी वासना की आँधी में उसके त्याग को देख या समझ पाएगा?
ख़ैर उसे तो अपना कार्य करना ही था जैसे कि गुप्ता ने कहा था , और कोई दूसरा उपाय भी तो नहीं था। वह अपने बेटे के भविष्य के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
अब वह बाहर आयी और देखा तो राज ग़ायब था, वह उसको आवाज़ देने ही वाली थी कि दरवाज़ा खुला और वह एक प्लास्टिक की थैली लेकर अंदर आया। नमिता ने सोफ़े पर बैठे हुए उसको सवालिया निगाह से देखा तब वह मुस्करा कर बोला: माँ समोसे लाया हूँ और अब चाय बनाता हूँ फिर बात करेंगे। नमिता के चेहरा खिल उठा , आज कितने दिनों बाद वह सामान्य भाव से व्यवहार कर रहा था।
थोड़ी देर बाद वह चाय और समोसा लाया और दोनों मुस्करा कर नाश्ता करने लगे।
राज बोला: माँ डॉक्टर क्या बोला?
नमिता: वह तो बहुत कुछ बोला, पर पता नहीं वह हो पाएगा कि नहीं हमसे?
राज: क्या नहीं हो पाएगा हमसे?
नमिता : बेटा इतना आसान नहीं है ये सब , ज़रा मुझे सोचने दो कि कहाँ से शुरू करूँ?
राज: माँ ठीक है मैं इंतज़ार करता हूँ।
नमिता: देखो तुम कहते थे ना कि तुम आजकल हमेशा सेक्स के बारे में सोचते रहते हो, और यही तुमने डॉक्टर को भी बताया है।
राज: जी माँ ।
नमिता : बेटा तुम्हें क्या लगता है कि इसका समाधान क्या है?
राज: माँ मुझे अगर पता होता तो मैं अब तक समाधान ना कर लेता।
नमिता: तो तुम आख़िर क्या सोचे हो?
राज: माँ मुझे तो कुछ सूझ ही नहीं रहा।
नमिता ने अनजान बनते हुए पूछा: सच बताओ कि क्या तुमने किसी के साथ सेक्स किया है?
राज: माँ ये क्यों पूछ रही हो?
नमिता: बता ना सबकुछ ?
राज: हाँ माँ मैंने सेक्स किया है, अब उनका नाम नहीं पूछना प्लीज़।
नमिता: ओह,तभी तू इतना सेक्स के बारे में सोचता रहता है।
राज: माँ सच तो यह है कि मैं सिर्फ़ सेक्स का नहीं सोचता हूँ बल्कि मैं और भी कुछ सोचते रहता हूँ।
नमिता: और क्या सोचता है?
राज: अब आपको कैसे बोलूँ?
नमिता: अरे बोलेगा नहीं तो मैं कैसे तेरी मदद कर सकूँगी?
राज: माँ मैं तो पहले भी बोल चुका हूँ पर आप तो सुनकर ही ग़ुस्सा हो जाती हैं।
नमिता: कौन सी बात?
राज: मैं -- मैं- अब कैसे बोलूँ?
नमिता: बोल ना क्या बोलना है?
राज : मैं आपके ही बारे में सोचता रहता हूँ।
नमिता: क्या सोचता है मेरे बारे में?
राज: वही सब जो आप सुनना ही नहीं चाहोगी?
नमिता: चल बोल दे, नहीं करूँगी ग़ुस्सा।
राज: मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ और इसमें सिर्फ़ सेक्स की ही बात नहीं है।
नमिता: अच्छा फिर क्या बात है?
राज: मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ और और --
नमिता: हाँ बोला ना और क्या?
राज: मैं आपके जीवन में एक बदलाव लाना चाहता हूँ।
नमिता: कैसा बदलाव?
राज: मैं पापा की जगह लेना चाहता हूँ। मैं आपको एक पुरुष की तरह प्यार करना चाहता हूँ।
नमिता: साफ़ साफ़ बोल ना कि तू मेरे बदन को पाना चाहता है।
राज : सिर्फ़ बदन ही नहीं आपको पूरी तरह से पाना चाहता हूँ।
नमिता: हम्म मतलब, बदन के अलावा और क्या चाहता है?
राज: माँ मैं चाहता हूँ कि आप मेरी पत्नी की तरह रहो घर पर और बाहर हम माँ बेटा ही रहें।
नमिता: हे भगवान तू पागल है क्या? कहीं ऐसा भी होता है?
राज: हाँ माँ नदीम को ही देखो ना उसकी माँ तो अब उसकी पत्नी ही है।
नमिता: ओह तो तुम मुझे भी ऐसा ही बनाना चाहते हो?
राज: जी क्योंकि उसके और हमारे घर में एक समानता है किजहाँ उसका अब्बा अपनी बीवी को चोद नहीं सकता वहीं आपके पास भी कोई आपको चोदने वाला नहीं है।
नमिता: छी कैसी गंदे शब्द का उपयोग कर रहा है तू ?
राज: माँ आज डॉक्टर भी इन्हीं शब्दों का उपयोग कर रहा था।
नमिता: तो अगर मुझे कोई चो- मतलब -करने वाला ना हो तब क्या मैं अपने बेटे से ही करवा लूँ?
राज: माँ इसमें हर्ज ही क्या है? आप जिनसे करवाती होगी वह पता नहीं आपके बारे में दूसरों को क्या क्या बोलते होंगे आपको क्या पता?
नमिता का चेहरा शर्म से लाल हो गया क्योंकि आज उसको पता चल गया था कि राज उसकी मस्ती के बारे में काफ़ी कुछ जानता है?
राज फिर बोला: माँ अब मैं आपको बताता हूँ प्रतीक शीला आंटी को चोदने के बाद मस्त माल क्या रंडि है - ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करता था उनके बारे में। क्या मनीष भय्या भी जब दूसरों को बताते होंगे आपके बारे में , तो यही सब नहीं कहते होंगे ?
बातों ही बातों में राज ने नमिता को ये बता दिया कि उसको पता है कि नमिता मनीष से चुदाती है।
नमिता ने सिर झुका कर कहा: ओह तो इसका मतलब है कि मैं अपनी बदनामी से बचने के लिए तुमसे ही चु- मतलब करवाऊँ ?
राज का लौड़ा खड़ा हो गया था इस तरह की सेक्सी बातों से । उसने अपने लोअर को अजस्ट किया और उसका लम्बा लौड़ा अब उसकी एक जाँघ के साथ सटा हुआ अलग से फूला हुआ दिखायी दे रहा था जो कि नमिता की आँखों से नहीं बच सका।
नमिता के निपल्ज़ कड़े होने लगे।
वह बोली: पर अगर हम ये सब करेंगे तो तेरी पढ़ाई का तो सत्यानाश ही हो जाएगा।
राज: माँ मुझे तो लगता है कि अल्टा होगा और मेरा पढ़ाई में ध्यान वापस आ जाएगा।
नमिता ने आह भरी और बोली: चलो फिर मुझे अपने सिद्धांतों का त्याग करना ही पड़ेगा पर मेरी एक शर्त है?
राज ख़ुश होकर: माँ आपकी सब शर्त मुझे मंज़ूर है।
नमिता : पहले सुन तो ले। मैं तुझे अपने आप को सौंप दूँगी पर टुकड़ों में ।
राज: इसका क्या मतलब?
नमिता गुप्ता की बात याद की और बोली: देखो तुम्हें मुझे पाने के लिए मेहनत करनी होगी, और अगर तुम उसने सफल हो गए तो मैं तुम्हें अपने आप को धीरे धीरे सौंप दूँगी।
राज: मैं अब भी नहीं समझा।
नमिता: अच्छा बताओ तुम्हें मेरे बदन का कौन सा हिस्सा सबसे ज़्यादा पसंद है?
राज उसकी छातियों को घूरता हुआ बोला: आपको पता ही है।
नमिता: मैं तुम्हारे मुँह से सुनना चाहती हूँ।
राज: आपकी छातियाँ।
नमिता: चलो ठीक है आज से मैं तुम्हें इनको छूने की इजाज़त देती हूँ पर इसके आगे कुछ नहीं। अगर इसके आगे कुछ चाहिए तो तुम्हें अपने आप को सिद्ध करना होगा।
राज: मतलब?
नमिता: तीन दिन बाद तुम्हारा कौन सा टेस्ट है?
राज: इंग्लिश का क्यों?
नमिता : ये बताओ कि तुम्हारे इसमें ८०% नम्बर आते थे ना २/३ महीने पहले तक ?
राज: जी आते थे।
नमिता: तो बस, तुम्हें रोज़ के टेस्ट का रिज़ल्ट तो रोज़ ही मिल जाएगा ना। अगर तुम्हें इतने नम्बर आ गए तो तुम्हें इसके आगे का मज़ा भी दे दूँगी।
राज उत्सुकता से बोला: आगे का क्या?
नमिता: मतलब आगे का यानी चलो ब्रा के ऊपर से भी छू लेना।
राज का लौड़ा झटका मारा और उसने अपने लौड़े को दबाया और नमिता की आँखें उसपर ही जैसे जम गयी।
राज: आह माँ सच ब्रा के ऊपर से, तो मैं पक्का ८०% ले ही आऊँगा।
नमिता: उसके दो दिन बाद कौन सा टेस्ट है?
राज: फ़िज़िक्स का।
नमिता: उसमें तो तुमको ९०% नम्बर भी आ चुके हैं कई बार?
राज: जी हाँ ।
नमिता: तो अगर इतने ही नम्बर आ गए तो मैं इनको बिना ब्रा के भी छूने दूँगी।
राज का बुरा हाल हो गया, बोला:सच माँ क्या मैं उनको चूस भी सकूँगा?
नमिता मुस्करा कर बोली: हाँ अगर ९५% नम्बर ले आओ तो।
राज: वो तो माँ मैं ले ही आऊँगा।
नमिता: उसके दो दिन बाद तुम्हारा केमिस्ट्रीही होगा जिसमें तुम ८५% तो पा ही लेते हो। अगर यह भी हुआ तो तुम मेरे निचले हिस्से को सिर्फ़ पैंटी में देख और छू भी सकोगे।
राज की जैसे आँखें ही फट गयी वो बोला: सच ?
नमिता ने उसके लौड़े की उछाल को देखा और बोली: हाँ सच। और अगला पेपर हिंदी है ना, उसने भी तुझे हमेशा की तरह ८०% तो लाना ही होगा। तब तू मुझे बिना पैंटी के छू सकेगा।
राज ने फिर से अपना लौड़ा पकड़ लिया और सहलाते हुए बोला: माँ आह सच कह रही हो ना?
नमिता: बिलकुल सच। और अगर आख़िरी पेपर यानी गणित में९०% आया तो मैं तेरा ये हथियार चूसूँगी।
राज: अब ज़ोर ज़ोर से लौड़ा हिलाने लगा और बोला: आऽऽऽऽहहह माँ सच इसको चूसोगी?
नमिता: हाँ और आख़री शर्त अगर तू क्लास में टॉप ३ में आ गया तो तू मेरे साथ सब कर सकता है जो तू करना चाहता है।
राज: मतलब आपको चोद सकता हूँ?
नमिता : हाँ ।
नमिता: देख मैं ये सब इसलिए कर रही हूँ ताकि तेरे अच्छे नम्बर आ सकें? ठीक है ना?
राज: नहीं माँ ठीक नहीं है। जब मैं आपको सहलाऊँगा तब मेरा ये खड़ा होगा तो मैं पढ़ाई क्या ख़ाक करूँगा? नहीं माँ ये नहीं हो सकेगा।
नमिता: इसका भी एक उपाय है, जब तू बहुत उत्तेजित हो जाएगा तब मैं तेरा अपने हाथ से कर दूँगी।
राज अपना लौड़ा अब अपनी माँ के सामने खुल्लम खुल्ला मसलते हुए बोला : आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सच में माँ ? आप मेरी मूठ्ठ मार दिया करोगी?
नमिता अपनी पैंटी में गीलापन महसूस कर उठी और बोली: हाँ बेटा मैं मार दूँगी। मैं चाहती हूँ कि तू पूरे ध्यान से पढ़ाई करे। बस और मुझे कुछ नहीं चाहिए।
राज: ओह माँ मैं आपको निराश नहीं करूँगा और आप देखना कि हर पेपर में मेरे वैसे ही नम्बर आएँगे जैसे पहले आते थे और मैं अपना इनाम भी हासिल करके रहूँगा।
नमिता मुस्कुरा कर बोली: इनाम तो तभी मिलेगा जब नम्बर आएँगे।
राज अपने माँ की छातियों को घूरते हुए बोला:माँ आपने कहा था कि मैं अभी से ही आपकी छातियाँ छू सकता हूँ, तो मैं अभी छू लूँ?
नमिता ने थोड़े से हिचक के साथ कहा: हाँ आओ छू लो।
राज सोफ़े से उठा , नमिता ने देखा कि उसका लंड मस्ती से झटका मार रहा था, और वह उसके पास आकर ,उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ जो मैक्सी में मस्त तनी हुई दिख रही थीं, को देखते हुए , बैठ गया।
अब नमिता ने राज को देखा उसके चेहरे पर बहुत ख़ुशी दिखायी दे रही थी जैसे किसी बच्चे को उसका मनपसंद खिलोना मिल गया हो।
अब राज ने नमिता की छातियों की ओर हाथ बढ़ाया----------
राज ने हाथ बढ़ाया और अपने दोनों हाथ माँ की छातियों पर रख दिया और उनको सहलाने लगा। नमिता के शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ गयी। ओह ये क्या हो रहा है,कहीं बहुत ग़लत तो नहीं होने जा रहा है। तभी उसकी नज़र राज के चेहरे पर पड़ी और उस पर ख़ुशी के भाव देखकर उसकी उलझन कम होने लगी। अब राज ने अपने दोनों पंजों में उसकी छातियाँ भर लीं और उनको सहलाकर मस्त होने लगा।
नमिता ने भी आँखें बंद कर लीं और अपने बेटे के हाथों से अपनी छातियाँ मसलवाने लगी। अब राज भी बहुत उत्तेजित हो गया था और उसने माँ की मैक्सी के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके निपल्ज़ को टटोल कर मसलने लगा।
नमिता की आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह निकल गयी। अब राज झुक कर माँ के होंठ के पास अपना मुँह लाया और नमिता ने अपना मुँह घुमा लिया और बोली: बेटा इसकी बात नहीं हुई थी। और याद रखो जितनी बात हुई है उससे आगे नहीं बढ़ सकते।
राज अब उसके निपल्ज़ को दबाकर नमिता को बहुत उत्तेजित कर दिया था। अब उसने अपनी माँ को कहा: माँ चलो ठीक है मत दो चुम्बन पर जो आपने कहा है वो तो कर दो।
नमिता उसकी तरफ़ सवालिया नज़र से देखने लगी।
राज ने अपनी टाँगें फैला दी और अपने लोअर में बने तंबू की ओर इशारा किया।
नमिता समझ गयी कि वह चाहता है कि वह उसकी मूठ्ठ मारे।
नमिता के शरीर में एक सिहरन दौड़ गयी।
उसने राज से कहा: चलो इसे बाहर निकाल दो।
राज: माँ आप ही निकाल लो ना। यह कर वह उसके सामने खड़ा हो गया। उसका लोअर अब खड़े लौड़े को एक पाइप की तरह उठा रखा था। नमिता ने कांपते हाथों से उसका लोअर नीचे किया और उसकी चड्डी में तना हुआ लौड़ा बहुत बड़ा सा लग रहा था। सबसे बड़ी बात ये थी कि उसका लौड़ा उसकी चड्डी में नहीं समा सकने के कारण आधा बाहर झाँक रहा था। नमिता उसको देखकर एकदम से हतप्रभ रह गइ। इतना मोटा सुपाड़ा और बिलकुल गुलाबी रंग का और उसकी आधी चमड़ी खुली हुई थी और जितना लंड दिख रहा था बहुत ही गोरे रंग का था।
अब उसने लोअर को पूरा नीचे किया और चड्डी भी नीचे कर दी। अब उसका गोरा लम्बा मोटा लौड़ा जिसका पेड़ू का हिस्सा घने बालों से ढका हुआ था उसकी आँखों के सामने झूल रहा था।
उसके बॉल्ज़ भी काफ़ी बड़े बड़े थे। वह सोचने लगी कि हे भगवान इसका लंड तो किसी भरे पूरे मर्द के लंड से भी बड़ा है। इसके पापा का तो इसके आसपास भी नहीं था । उसे देखकर ही नमिता की पैंटी गीली हो गयी।
नमिता ने उसके लौड़े को ऊँगली से पूरी लम्बाई में सहलाया और उसकी बुर की पूत्तियाँ फड़क उठीं। अब उसने उसको अपनी मुट्ठी में भर कर हलके से उसकी मोटायी का अहसास किया और उसे लगा कि उसके निपल्ज़ बहुत कड़े हो गए थे। अब वह लौड़े को मुट्ठी में आगे पीछे करके मूठ्ठ मारने लगी। राज भी झुककर उसकी छातियाँ दबाने लगा और उसके निपल्ज़ को मसलने लगा और उसने अपनी माँ के गाल चूम लिए।
राज: माँ कुछ तेल या क्रीम लगा लो, मैं तो थूक लगाकर मूठ्ठ मारता हूँ।
नमिता ने कुछ कहा नहीं और उसके लौड़े के सुपाडे पर थूक गिराया और उसको सुपाडे पर अच्छी तरह से मला। फिर उसने लौड़े की लम्बाई में थूका और उसको भी उसपर मला। राज की आँखें फट गयी क्या सेक्सी लग रही थी वह उस पर थूक मलते हुए। अब उसने लौड़े को आगे पीछे करना शुरू किया। उसके हाथ अब जल्दी जल्दी चलने लगे थे। राज ह्म्म्म्म्म्म्म आऽऽऽऽऽऽऽहहह करके मज़ा के रहा था । उसके हाथ अब माँ की छातियाँ ज़ोर से दबा रहे थे। उसने मैक्सी के ऊपर से गले के पास से उसकी छातियों को अंदर से छूने की कोशिश की तो नमिता ने उसके हाथ को झटक दिया और बोली: कोई भी नियम नहीं टूटना चाहिए। अब उसके हाथ ने ज़ोर से मूठ मारना शुरू किया और राज आऽऽहहहह माँआऽऽऽऽऽऽ मैं झड़ाआऽऽऽऽऽऽ ओघ्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके उसका लौड़ा झटके मारते हुए गाढ़ा सा सफ़ेद वीर्य छोड़ने लगा और नमिता के मुँह पर सीधा गिरा। नमिता की आँखें, उसके होंठ , उसकी नाक और यहाँ तक कि बालों में भी सफ़ेद वीर्य गिर गया था।
राज घबरा कर माँ से माफ़ी माँगने लगा। वह बोला: सॉरी माँ , वह मैं बिलकुल नहीं रोक पाया।
नमिता कुछ नहीं बोली और उठकर वॉश्बेसिन पर जा कर अपना मुँह देखी। उसने अपने मुँह में लगे वीर्य को अपनी उँगलियों से साफ़ किया और फिर अपनी जीभ से ऊँगली को चाटा और उसके स्वाद से मस्त हो गयी। आजतक जितने भी लौडों को उसने चूसा था उन सब में राज का रस सबसे ज़्यादा स्वादिष्ट था। अब वह अपना पूरा मुँह धोकर साफ़ की और बाहर आयी। राज अब भी नंगा सोफ़े पर बैठा था और उसका लौड़ा नरम हो कर भी कितना बड़ा लग रहा था।
नमिता: बेटा इतने बाल क्यों बढ़ा रखे हैं? साफ़ सफ़ाई रखनी चाहिए वहाँ भी, नहीं तो जुएँ आ जाएँगी।
दोनों हँसने लगे।
राज: माँ आप ही साफ़ कर दो ना, मुझे डर लगता है कहीं चोट ना लग जाए शेव करते हुए।
नमिता हँसते हुए बोली: बिलकुल अपने पापा पर गया है। वह भी बहुत डरते थे। अभी शेव नहीं करना नहीं तो बहुत खुजाएगा और तुझे पढ़ने में परेशानी होगी। अभी कैंची से काट लेना।
राज: माँ आप ही काटना मुझे तो डर लगता है।
नमिता हँसते हुए: चल मैं ही काट दूँगी कल सुबह नहाने के पहले।तेरे पापा का भी मैं ही काटती थी। चल अब क्या ऐसे ही नंगा बैठे रहेगा क्या, अब पढ़ने बैठो मैं तेरे लिए दूध लाती हूँ।
राज अपनी माँ के पास आया और उससे लिपटकर बोला: माँ आई लव यू।
नमिता ने हँसते हुए उसके नंगे चूतर पर एक चपत मारी और बोली: चल अब जा पढ़ने बैठ।
राज अपने कपड़े पहनकर अपने कमरे में चला गया।
तभी एक पड़ोस की महिला नमिता से मिलने आइ और वह दोनों बातों में लग गयीं। उसके जाने के बाद नमिता को याद आया कि वह तो राज को दूध देने वाली थी । वह किचन में गई और दूध का एक गिलास बनाकर उसके कमरे में गयी। वहाँ का दृश्य देखकर उसका मन ख़ुशी से भर गया। राज पूरी लगन से पढ़ाई कर रहा था और यहाँ तक कि उसको नमिता के अंदर आने का भी पता नहीं चला।
नमिता: वाह आज तो तुम पूरे ध्यान से पढ़ रहे हो। बहुत अच्छा लगा देखकर।
राज हँसते हुए अपने लोअर के ऊपर से अपने नरम लंड को पकड़कर माँ को दिखाया और बोला: देखो माँ आज ये भी शांत है।
नमिता उसके लोअर को देखकर हँसते हुए बोली: हाँ आज सच में हमेशा की तरह मुँह उठाकर मुझे देख नहीं रहा है।
राज ने अपनी माँ को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और बोला: माँ अब उसको पता है कि उसे कोई प्यार करता है, इसलिए वह हर समय खड़ा नहीं होगा।
ये कहते हुए उसने नमिता का गाल चूम लिया और उसकी पीठ को सहलाकर उसको अपनी बाहों में भींच लिया।
नमिता ज़ोर लगाकर उठी और उसको दूध का गिलास देती हुई बोली: चलो ये सब करोगे तो वह फिर से खड़ा हो जाएगा। अभी तुमको एक घंटा और पढ़ना है उसके बाद खाना खाएँगे। अब मैं चलती हूँ।
राज: ठीक है माँ , मैं दूध पी लूँगा आप चलो।
उसके बाद वह पढ़ाई में लग गया।
नमिता भी TV देखते हुए सब्ज़ी काटने लगी। आज उसका मन थोड़ा शांत था कि राज पढ़ाई में ध्यान दे रहा था। पर उसका बदन अशांत था क्योंकि राज के मस्त लंड ने उसके अंदर एक हलचल सी मचा दी थी। वह सोच रही थी कि राज का तो पता नहीं कहीं मैं ही अपने निश्चय से भटक ना जाऊँ!
फिर उसने अपना सिर झटका और फ़ैसला किया कि उसके लंड के बारे में नहीं सोचेगी।
तभी फ़ोन बजा , गुप्ता था , वह बोला: हाय क्या हाल है बेटी? कुछ बात बनी राज के साथ?
नमिता: जी सर, आपने जैसा कहा था मैंने वैसे ही किया। और ख़ुशी की बात ये कि उसका पढ़ाई में वापस ध्यान लग गया है
गुप्ता: वाह ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है। तो तुमने उसको अपनी चूचियाँ दबाने दीं? और उसका लौड़ा पकड़कर उसका रस निकाला या नहीं?
नमिता: छी सर, पता नहीं आपको गंदी बात करने में क्या मज़ा आता है? हाँ वह सब हो गया तभी तो वह अब शांति से पढ़ रहा है।
गुप्ता: बढ़िया, पर तुम्हारी बुर का क्या हाल है? वह तो लौड़े के लिए तड़प उठी होगी? और उसका लौड़ा हैं भी बहुत शानदार।
नमिता: आह सच कहा आपने , काफ़ी मुश्किल से मैंने अपने मन को समझाया है।
गुप्ता हँसते हुए: मन को या बुर को?
नमिता भी हँस कर: दोनों को। हा हा ।
गुप्ता: हा हा , देखो बेटी, अगर बुर ज़्यादा सताए तो ये सेवक हमेशा तय्यार मिलेगा सेवा करने के लिए। आप मेरे लौड़े की सेवाएँ ले सकती हैं।
नमिता हँसते हुए: हा हा मुझे पता है। और सेवा लेनी ही पड़ेगी जल्दी ही , मुझे लगता है जिस तरह से राज मुझे मसल रहा है।
गुप्ता: मूठ्ठ मारी कि नहीं?
नमिता: बताया ना मारी थी।
गुप्ता: बेटे की मूठ्ठ मारते हुए कैसे लगा?
नमिता: आह्ह्ह्ह्ह पागल सी हो गयी थी। वह बदमाश मेरे निपल भी तो मसल रहा था।
गुप्ता: बुर तो पनिया गई होगी?
नमिता : हाँ बुरी तरह। और उसका रस भी इतना गाढ़ा था और इतना सारा था कि क्या बताऊँ?
गुप्ता हँसते हुए बोला: अरे जवान लड़का है उसका माल तो बढ़िया होगा ही।
नमिता: चलो अब रखती हूँ ।
गुप्ता: तो कब मिलोगी?
नमिता: देखो प्रोग्राम बनाती हूँ। वैसे जब ये लड़का बहुत पागल कर देगा तो मैं ख़ुद ही भागती हुई आऊँगी आपके पास।
गुप्ता हँसते हुए: हा हा वह तो है। चलो रखता हूँ। साला लौड़ा खड़ा हो गया है तुमसे बात करके अब मूठ्ठ ही मारना पड़ेगा।
फिर वह फ़ोन काट दिया।
नमिता की भी बुर पनिया गयी थी ये सब बातें करके। उसने अपनी बुर खुजायी और फिर किचन में चली गयी खाना बनाने। शाम के सात बज चुके थे।
नमिता खाना बना रही थी और गरमी बहुत थी। उसने अपने मुँह का पसीना पोछा। तभी राज आया और अपनी माँ को पीछे से पकड़कर उससे चिपट गया। अब वह माँ के मुँह और गले में बहुत सा पसीना देखा और एक तौलिया लाया और उसके मुँह और गले का पसीना पोंछा। नमिता ने प्यार से उसके गाल चूम लिए।अब राज उसके पीछे से फिर से चिपक गया और अपना लौड़ा उसके बड़े बड़े चूतरों पर रगड़ने लगा। उसने नमिता की छातियाँ पकड़ ली और दबा कर मस्त होकर अपने खड़े होते लौड़े को माँ की गाँड़ की दरार में दबा कर मस्त हो गया।
नमिता को भी उसका लौड़ा अपनी गाँड़ में महसूस करके मस्त हो रही थी। राज उसके निपल्ज़ को भी दबाए ही जा रहा था।
अब नमिता बोली: चल छोड़ मुझे और खाना लगा मेरे साथ।
राज: जी माँ, और वह उससे अलग होकर खाना लगाने लगा। फिर खाना खाते हुए नमिता बोली: कितनी पढ़ायी हो गयी?
राज: माँ अभी दो दिन हैं ना ,पूरा कोर्स भी हो जाएगा और मैं उसे दोहरा भी लूँगा।
नमिता: शाबाश बहुत बढ़िया, बेटा।
राज: माँ मैं आज आपके साथ सो जाऊँ?
नमिता: पागल हो गया है क्या? सोना नहीं है क्या? मेरे साथ सोएगा तो ना ख़ुद सोएगा ना ही मुझे सोने देगा। और आराम नहीं करेगा तो पढ़ाई तो ही नहीं पाएगी।
राज: माँ ये तो आप सही बोल रही हो। लेकिन सोने के पहले एक बार और प्यार करूँगा आपके साथ।
नमिता: ओह एक बार और? अच्छा चलो कर लेना पर अभी तो १०/११ बजे तक पढ़ेगा ना?
राज: हाँ माँ अभी तो पढ़ूँगा।
खाना खा कर वह पढ़ने चला गया। नमिता भी थोड़ी देर TV देखने के बाद अपने कमरे में लेट गयी। और उसे एक झपकी आ गयी।
सोने से पहले राज उसके कमरे में आया और उसे सोते देखकर उसके बिस्तर में उसके पास बैठ गया। वह पीठ के बल सो रही थी और उसकी छातियाँ हल्के से ऊपर नीचे हो रहीं थीं। उसकी मैक्सी भी घुटनों से ऊपर आ गयी थी। नमिता का एक हाथ ऊपर की ओर था और उसकी बिना बालों को बग़ल पसीने से चमक रही थी।
राज ने अपनी नाक उसकी बग़ल में लेज़ाकर सूँघने लगा। वह माँ की मादक गंध सूंघकर दीवाना हो गया। अब वह उसकी छातियों को गले के अंदर से देखने की कोशिश करने लगा। उसने देखा कि आधी छातियाँ दिख रही हैं।उनके बीच की गहरी घाटी भी दिख रही थी।
उसने पैरों के पास आ कर माँ की टाँगें देखीं । उसकी बहुत इच्छा हो रही थी कि वह मैक्सी उठाकर उसकी पैंटी या बुर देख ले। पर उसने अपने आप को रोका । वह जानता था कि नियम का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
अचानक उसके मन में एक विचार आया कि माँ शायद थक गयी है , मुझे उनको तंग नहीं करना चाहिए। उसने अपने खड़े लंड को सहलाया और सोचा कि चलो आज ख़ुद ही मूठ्ठ मार लूँगा।
वह बाहर जाने लगा तभी नमिता की नींद खुली और वह बोली: ओह तू कब आया?
राज: बस अभी आया था। आप सो रही थीं तो वापस जा रहा था।
नमिता: आ पास बैठ। पढ़ाई हो गयी? कितना बज गया है बेटा?
राज: माँ पढ़ाई हो गयी और अभी ११ बजे हैं। मैं तो आपको गुड नाइट करने आया था।
नमिता ने उसके लिए बाँह फैलायी और वह उसकी बाँह में समा गया और दोनों लिपट कर थोड़ी देर प्यार करते रहे और एक दूसरे के गाल चूमे। फिर नमिता बोली: बेटा जाओ अब सो जाओ देर हो गयी है। कल कितने बजे उठोगे ? मैं उठा दूँगी।
राज: ठीक है माँ चलता हूँ और हाँ मैं ६ बजे उठ कर पढ़ाई करूँगा। आप कल ऑफ़िस जाओगी?
नमिता: हाँ बेटा ऑफ़िस तो जाऊँगी।
राज उसके गाल चूम और गुड नाइट बोलकर अपने कमरे में चला गया।वह महसूस कर रहा था कि उसके शरीर की उत्तेजना अब कम हो गयी है। वह अपनी माँ के लिए अब प्रेम की भावना को महसूस कर रहा था । ये उसके लिए एक नया अनुभव था।
वह अपने कमरे मैं आकर सो गया। नमिता भी थोड़ी हैरान थी कि राज ने उसके बदन को वासना कि दृष्टि से नहीं छुआ। वह थोड़ा ख़ुश हो गयी कि शायद राज का पागलपन अब थोड़ा सामान्य हो रहा है।
वह भी यही सोचते हुए सो गई।
अगले दिन नमिता उठकर फ़्रेश होकर किचन में जाकर चाय बनाई और अपना और राज का कप लेकर राज के कमरे में गयी। वहाँ राज को पढ़ते देखकर वह बहुत ख़ुश हो गयी और राज के गुड मोर्निंग का जवाब उसके गाल चूमकर दी। राज ने माँ को गोद में खिंच लिया और उसके गाल और बाँहें और गला चूमकर प्यार करने लगा । नमिता भी उससे चिपकी हुई थी।
राज: माँ आप घर में साड़ी पहना करो, इस मैक्सी में तो आपका पूरा बदन ही छिपा रहता है। मैं आपके पेट को छूना चाहता हूँ, प्लीज़ साड़ी पहना करो ना।
नमिता हँसते हुए: अच्छा बेटा, साड़ी ही पहनूँगी । ठीक है, अब उतार गोद से और चाय पी। नमिता को अपनी गाँड़ में उसके कड़े हो रहे लौड़े का अहसास होने लगा था।
राज ने उसको गोद से उतार दिया और वह उसके पास बिस्तर पर बैठकर चाय पीने लगी।
चाय पीने के बाद नमिता बोली: चल अब मैं जाती हूँ तू नहा कर नीचे आ फिर नाश्ता करके पढ़ने बैठना । आज स्कूल तो बंद है ना?
राज: हाँ माँ बंद है। पर अभी नहाने के पहले आप कल बोले थे कि मेरे बाल काट देंगी। प्लीज़ काट दो ना।
नमिता: ओह मैं तो भूल ही गयी थी। ऐसा कर ना इन टेस्ट के बाद कटवा लेना।
राज: नहीं माँ गरमी लगती है और खुजाते भी हैं।
नमिता: ओह चल फिर काट ही देती हूँ।
राज: तो बाथरूम में चलें?
नमिता नहीं नहीं वहाँ बहुत कम जगह है और बाल नाली में फँस कर नाली जाम कर देंगे। तू रुक मैं एक पुरानी चादर और कैंची लाती हूँ।
नमिता चादर लेकर आयी और उसको बिस्तर पर बिछा दी और अब राज को बोली: चल लोअर उतार और लेट यहाँ।
राज लोअर और चड्डी उतारकर अपना आधा खड़ा लौड़ा हिलाता हुआ लेट गया। नमिता ने उसके लौड़े को देखा तो फिर से उसके अंदर की औरत गरम होने लगी। उसने लम्बी साँस ली और उसके बाल काटने चालू किए। बड़े बड़े बालों के गुच्छे काट कर वह एक प्लास्टिक की थैली में डाल रही थी। जब उसने लौड़े को पकड़कर नीचे किया ताकि वह कैंची चला सके, तो राज का लौड़ा पूरा खड़ा होकर झटके मारने लगा। अब नमिता बोली: बेटा ये तू पकड़ ले ताकि मैं दोनों हाथ से काम कर सकूँ।
राज ने अपना लौड़ा नीचे की ओर किया ताकि वह उसके जड़ के हिस्से के बाल काट सके।
राज: माँ आप पापा का भी ऐसे ही बाल काटती थीं?
नमिता: नहीं वह कैंची से नहीं शेव से साफ़ करवाते थे?
राज: माँ आप शेव करती थीं पापा का?
नमिता : हाँ मैं ही करती थी उनको भी डर लगता था।
अब नमिता बाल को हाथ से खींचकर कैंची से काट रही थी। अब उसने नीचे के बाल काटने शुरू किया। बॉल्ज़ के पास आकर वो बोली: बेटा अब दोनों पैर उठा दे ताकि मैं नीचे के भी बाल काट दूँ।
राज ने घुटने मोड़कर दोनों पैर उठा दिए। अब वह उसके बॉल्ज़ और उसके आसपास के बाल काटी। अब नीचे उसकी गाँड़ का भूरा छेद उसको साफ़ दिख रहा था। उसने कैंची नीचे की और गाँड़ के आसपास के बाल भी काट दिए। राज का तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। तभी नमिता ने उसकी गाँड़ पर उँगलियाँ फिरायी और बोली: देखो अब कितना साफ़ हो गया है यहाँ।
राज अपनी गाँड़ मेंमाँ की ऊँगली के स्पर्श से जैसे सिहर ही गया।
अब नमिता उसको सीधे होने को बोली। वह सीधा लेट गया। अब नमिता ने उसके लौड़े को पकड़कर इधर उधर मोड़ और बोली: ले देख ले काफ़ी साफ़ हो गया है। फिर उसको प्लास्टिक की थैली में बालों के गुच्छा दिखाकर बोली: देख कितना सारा बाल निकला है।
राज मुस्कुरा कर बोला: सच माँ बहुत अच्छा फ़ील हो रहा है। वह अपने पेड़ू पर हाथ फेर कर बोला: माँ देखो कितना साफ़ साफ़ लग रहा है, सच मैंने तो जंगल ही उगा रखा था।
राज फिर बोला: माँ आप अपनी बुर कैसे साफ़ रखती हैं? शेव करती हैं क्या?
नमिता: बदमाश तुझे जानने की बड़ी जल्दी है?
राज: माँ आयशा आंटी तो क्रीम लगती है और शीला आंटी ज़रूर शेव करती होंगी ,क्योंकि उनके थोड़े कड़े बाल थे।
नमिता हँसते हुए बोली: मैं भी क्रीम लगाती हूँ। पर पेड़ूपर थोड़े से बाल रखती हूँ।
राज: माँ दिखाओ ना।
नमिता: तू देख तो लेगा ही रिज़ल्ट अच्छे लाकर दिखा।
फिर नमिता उसको उठने को बोली और उसने चादर इकट्ठा की और सब कुछ साफ़ करके उसको बोली: चल अब नहा ले नंगा बंदर।
राज: माँ आप ही नहला दो ना।
नमिता: चल हट बदमाश अपने आप नहा और नीचे आ जा। अब तो मुझे भी नहाना पड़ेगा उसके बाद ही नाश्ता बनाऊँगी।
राज: ठीक है माँ , कहता हुआ अपना लौड़ा हिलाता हुआ बाथरूम में घुस गया।
नमिता भी नहाने चली गयी। नहाते हुए वह सोच रही थी कि क्या मस्त लंड है राज का? आह उसकी इच्छा हुई कि बुर में ऊँगली कर ले। पर उसने अपने आप को रोका और नहाकर ब्रा और पैंटी पहनकर बाहर आयी। तभी उसको याद आया कि राज ने उसको साड़ी पहन्ने को कहा है, सो उसने एक गुलाबी रंग की साड़ी निकाली और ब्लाउस और पेटिकोट मैं अपने आप को देखकर ख़ुद पर ही मुग्ध हो गयी। उसका ब्लाउस काफ़ी छोटा सा था जिसमें से उसकी आधे उभार दिख रहे थे । पूरा पेट भी नंगा था। पेटिकोट से उभरे हुए चूतर बहुत ही मादक दिख रहे थे। उसने साड़ी पहनी और फिर तय्यार होकर किचन में आ गयी और नाश्ता बनाने लगी।
थोड़ी देर बाद राज आया और आकर उसके पीछे से हमेशा की तरह चिपक कर बोला: माँ साड़ी में क्या मस्त माल लग रही हो।
नमिता: नालायक अपनी माँ को माल कहता है?
राज: आप तो बहुत ही मस्त और भरी पूरी मालपुआ भी हो। ये कहते हुए उसने उसके चूतरों को दोनों हाथों में के लिया और उनको दबा दबा कर मस्ती से भरने लगा।
वह बोला: माँ आपके चूतर कितने बड़े और कोमल हैं , आह इनको छूने में क्या मज़ा आ रहा है!
नमिता: तुझे किसने इन्हें छूने की इजाज़त दी है, चल हाथ हटा ।
राज: माँ छूने दो ना बहुत अच्छा लग रहा है। और तो कुछ करने नहीं दे रही हैं आप, कमसे कम दबाने का सुख तो ले लेने दीजिए।
नमिता: अच्छा चल बहुत दबा लिया अब चल नाश्ता लगाने मेंमेरी मदद कर।
राज अब अपना हाथ वहाँ से हटा के उसकी छातियों पर रखा। और उनको दबाते हुए बोला: माँ रुको ना थोड़ी देर इनको भी दबाने दो ना। अब उसने अपना लौड़ा उसंके चूतरों से सटा दिया और उसको खुले आम अपनी कमर को आगे पीछे करके नरम चूतरों का आनंद लेने लगा।
नमिता की आह्ह्ह्ह्ह निकल गयी, वह बोली: क्या कर रहा है , आज तेरा ज़रा ज़्यादा ही चुभ क्यों रहा है?
राज: वह इसलिए कि मैंने अभी चड्डी नहीं पहनी है।
नमिता: आह तभी बदमाश तेरा इतना सीधे से चुभ रहा था।
राज: माँ आपको छातियाँ कितनी नरम है , अब दबाने में मज़ा आ रहा है , देखो ना ब्लाउस के ऊपर से कितना नरम है। वह उसकी ब्लाउस के बाहर झाँकती हुए हिस्से को सहला कर मस्त हो रहा था।
नमिता: आज नाश्ता नहीं करना है क्या?
राज: माँ थोड़ा आगे झुको ना मुझे रगड़ने दो ना अपना लौड़ा आपकी पिछवाड़े में ।
नमिता: देखो बेटा इसकी बात नहीं हुई थी , तुम चाहो तो मैं हाथ से कर दूँगी, पर पहले नाश्ता तो कर ले।
राज हाँफते हुए बोला: प्लीज़ माँ झुको ना। मैं आपके चूतरों में रगड़ कर झड़ना चाहता हूँ। नमिता पलटकर उसको बोलना चाही पर जैसे ही पलटी राज का लौड़ा बाहर था और ऊपर नीचे हो रहा था। वह कुछ बोलना चाही पर राज ने उसको घुमा कर उसकी कमर पीछे करके उसको प्लैट्फ़ॉर्म पर झुका दिया और उसकी गाँड़ की दरार में अपना लौड़ा सेट किया और उसकी दोनों छातियों को मसलने लगा। नमिता की सिसकी निकल गयी। अब राज उसकी गाँड़ में साड़ी के ऊपर से ठोकरें मार मार कर गरम हो गया था।
अब नमिता को लगा कि उसकी बुर पानी छोड़ देगी। उसका मन हुआ कि वह ख़ुद अपनी साड़ी उठा दे और उसका लंड अंदर कर ले अपनी बुर में । पर उसने अपने आप पर नियंत्रण किया और चुपचाप झुक कर खड़ी रही ।
जल्दी ही उत्तेजना से भर कर राज आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽऽऽऽ करके झड़ने लगा। उसका गाढ़ा वीर्य उसकी साड़ी में गिर गया।
नमिता राज के हटने के बाद सीधी खड़ी हुई और पलट कर राज को देखा । वह दीवाल पकड़ कर हाँफ रहा था। उसका लंड वीर्य से भीगा हुआ बहुत मस्त लगा नमिता को।
राज अपने कान पकड़कर बोला: माँ माफ़ कर दो मैंने आपकी साड़ी ख़राब कर दी।
नमिता को उस पर बहुत प्यार आया , उसने आगे बढ़कर उसको अपनी बाहों मेंभींच लिया और उसके गाल को चूमकर बोली: चल कोई बात नहीं , मैं साड़ी बदल लूँगी। ये कहते हुए वह साड़ी उतार दी।अब वह ब्लाउस और पेटिकोट में खड़ी थी। तब उसके पेटिकोट को देखकर राज बोला: माँ आपका पेटिकोट भी गीला हो गया है।
नामित ने पीछे हाथ डाल कर उसको छुआ और बोली: ओह चलो कोई बात नहीं मैं ये भी बदल लूँगी।
फिर उसने राज से टेबल पर बैठने को कहा और उसके बाहर जाते ही वह वॉश्बेसिन में हाथ धोने गयी और उसको पहले सूँघा और चाटा , फिर हाथ धोने लगी। अब उसकी बुर का पानी निकला ही जा रहा था। वह अपना हाथ बुर तक ले गयी और उसको खुजा कर शांत करने का सोची । पर फिर राज का सोचकर वह रुक गयी। और नाश्ता लेकर राज के पास आयी और दोनों नाश्ता करने लगे।
थोड़ी देर बाद राज को घर में छोड़कर वह तय्यार हुई और ऑफ़िस को चल पड़ी।राज ने उसे लिपटकर प्यार किया और फिर पढ़ने बैठ गया।
राज नमिता के जाने के बाद पढ़ने बैठ गया।क़रीब दो घंटे बाद लैंड लाइन का फ़ोन बजा।
राज: हैलो ?
नदीम: क्या हाल है ?
राज: तुम वापस आ गए क्या ?
नदीम: नहीं यार अभी समय लगेगा।
राज: ओह तो अम्मी के साथ मज़े ले रहे हो या नहीं?
नदीम: इतने दिन तो वह ग़म ही मना रही थी । कल बड़ी मुश्किल से राज़ी करके चोदा ।
राज: ओह चलो बढ़िया।
आयशा आंटी की चुदायी याद करके उसका लौड़ा खड़ा होने लगा।
नदीम: तू बता तेरी माँ को पटा पाया या नहीं?
राज ने झूठ बोला: यार मेरी तो हिम्मत ही नहीं होती। उनके सामने मेरी फट जाती है।
नदीम: साला तू भोसडी का गाँड़ू ही निकला। साले थोड़ी हिम्मत दिखा और के ले उसको अपने बस में, फट्टू कहीं का।
राज: यार ठीक है मैं कोशिश करूँगा। तुम लोग वापस कब आ रहे हो?
नदीम: क्यों कमीने अम्मी को चोदना है क्या? मैं अब उसकी बुर नहीं दिलाऊँगा तेरे को जब तक तू अपनी अम्मी की बुर नहीं फाड़ेगा ।
राज: अच्छा भाई मुझे कुछ समय दे , चल फ़ोन रखता हूँ।
राज को अच्छा नहीं लगा नदीम से बात करके। वह सोच रहा था कि नदीम चाहे कुछ कहे मैं अपनी माँ की भावनाओं का ज़रूर ख़याल रखूँगा।
उधर नमिता ऑफ़िस पहुँची और अपने काम में लग गयी। क़रीब दो घंटे के बाद ऑफ़िस ब्वाय आया और बोला: साहब बुला रहे हैं।
नमिता: कौन से साहब बड़े ( सुधाकर) या छोटे( मनीष) ?
वह बोला: छोटे साहब तो शहर में हैं ही नहीं , बड़े साहब बुला रहे हैं।
नमिता उठी और सुधाकर के कमरे में घुसकर उसे गुड मोर्निंग बोली।
सुधाकर ने मुस्कुराते हुए उसे बैठने को बोला: कहो नमिता कैसी हो?
नमिता: जी ठीक हूँ। आप कैसे हैं?
सुधाकर: मैं भी ठीक हूँ। गुप्ता ने तुम्हारे बेटे के केस में कुछ मदद की क्या?
नमिता: हाँ की है।
अब वह सोचने लगी कि पता नहीं उसने इनको क्या क्या बताया है?
सुधाकर: चलो बढ़िया है।
फिर वह आँख मारकर बोला: अपनी फ़ीस तो वसूल की होगी उसने तुमसे? तुम्हारी बड़ी तारीफ़ कर रहा था।
नमिता लाल होकर बोली: ओह सच में ?
सुधाकर: हाँ कह रहा था कि तुमसे फ़ीस लेगा , तो लिया या नहीं?
नमिता: आप भी ना, कुछ भी बोलते हैं।
सुधाकर: चलो नहीं बताना है तो ना बताओ। मुझे तुमसे एक बात पूछनी है कि क्या मनीष भी तुमको पसंद करता है?
नमिता चौंक कर बोली: आप अपने बेटे से पूछिए मुझसे क्यों पूछ रहे है। वैसे ये आपसे किसने कहा?
सुधाकर: अरे मेरे ऑफ़िस वाले कह रहे थे कि वह तुमपर मरता है।
देखो नमिता मैंने तुमको कई बार चोदा है। पर अगर तुम मनीष से भी चुदवा रही हो तो बता दो, मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
नमिता: अगर फ़र्क़ नहीं पड़ता तो पूछ क्यों रहे हैं?
सुधाकर: असल में मुझे पता चला है कि वह लड़कियों से दूर रहता है तो मुझे उसकी चिंता हुई थी। पर अगर वह तुम्हें चोद रहा है तो मुझे कोई चिंता नहीं है। यहाँ ऑफ़िस की सबसे मस्त छोकरी सविता जिसको मैंने कई बार चोदा है ,वह भी मुझे बता रही थी कि उसने भी मनीष को पटाने की कोशिश की पर वह सफल नहीं हो सकी। इसीलिए मैं चिंता करता हूँ कि कहीं उसने कोई कमी तो नहीं, वह मर्द है ना?
नमिता हँसते हुए बोली: वह पूरा मर्द है आप चिंता मत करो।
सुधाकर ख़ुश होकर बोला: ये बड़ी अच्छी ख़बर है, मैं बेकार ही चिंता कर रहा था। कबसे चुदवा रही हो उससे ?
नमिता: जब आपने छोड़ा तो उसने पकड़ लिया मुझे।
सुधाकर: हम्म तो तुमने बाप बेटे दोनों से मज़ा किया है तो ये बताओ कि कौन ज़्यादा अच्छा चोदता है?
नमिता हँसते हुए बोली: हे भगवान क्या सवाल है? हा ह हा ।
सुधाकर: अरे हँस क्यों रही हो, बताओ ना?
नमिता: मनीष का याद है कि वह तो मज़ा देता है। आपसे तो इतने दिन से करवाई ही नहीं हूँ, कि याद ही नहीं।
सुधाकर: ओह हाँ सच है पिछले दिनों मुझे छोटी उम्र की छोकरियों से ज़्यादा मज़ा मिलता रहा है। पर आज तुमको देख कर तुमको चोदने का मन कर रहा है। ज़रा पल्लू गिराओ ना, तुम्हारी चूचियाँ और बड़ी दिख रही हैं।
नमिता ने हँसते हुए पल्लू गिरा दिया, वह भी सुबह से गरम थी राज की हरकतों से और अब सुधाकर की बातें भी उसको मस्त कर रही थी।
सुधाकर उनको घूरते हुए बोला: लगता है मनीष ने चूस चूस कर बड़े कर दिए हैं। पहले से तो बड़े दिख रहे हैं। चलो उठो और बाथरूम में चलो और ब्लाउस और ब्रा खोलो और पैंटी उतार देना , मैं दो मिनट में आऊँगा अंदर, चलो रानी उठो ना।
नमिता की बुर भी गरम हो चली थी, वह मुस्कुराते हुए बाथरूम में चली गयी। उसने अपने ब्लाउस के हुक खोले और ब्रा का भी हुक खोल दी और फिर साड़ी उठाकर पैंटी भी उतार कर सामने एक तौलिए के स्टैंड में रख दिया। तभी सुधाकर अंदर आया और आकर उसकी पैंटी को देखा और उसको लेकर सूँघने लगा और बोला: आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त ख़ुशबू है । बहुत ही मस्त कर देनी वाली गंध है रानी ।
फिर उसने उसको आलिंगन में ले लिया और उसके होंठ चूसने लगा। और उसकी चूचियाँ दबाने लगा और बोला: सच मेंपहले से बड़ी हो गयी हैं।
अब वह उसकी चुचिको बारी बारी से चूसकर मस्त हो रहा था।
नमिता: आज आपको मेरी याद कैसे आ गयी ? आपको तो छोकरियाँ। अच्छी लगती हैं ना आजकल?
सुधाकर: पता नहीं क्यों आज तुमको चोदने की बहुत इच्छा हो रही है।
बहुत देर तक उसकी चुचि और निपल्ज़ चूसने के बाद वह नीचे प्लास्टिक के स्टूल पर बैठ गया और बोला: रानी साड़ी उठाओ ना बुर चूसना है।
नमिता हँसते हुए अपने साड़ी और पेटिकोट उठा दी और अपनी मस्त बुर को नंगी कर के उसके सामने खड़ी हो गयी।
अब सुधाकर उसकी फूली हुई बुर देखकर बोला: वाह क्या फूली हुई है एकदम कचौड़ी की तरह, रानी ज़रा पैर फैलाओ ना अच्छे से देख लेने दो। आजकल की पतली दुबली छोकरियों की तो बस बुर नाम पर एक फटा हुआ छेद होता है।
नमिता अपने टाँगें फैला दी। अब सुधाकर उसकी बुर पर अपनी नाक लगाके सूँघा और मादक गंध से मस्त हो कर बोला: आऽऽऽहहह क्या माल है ! फिर उसने पूरी लम्बाई में बुर को महसूस किया अपनी उँगलियों से और बोला: आह क्या रेशमी बुर है।
अब वह अपना मुँह घुसा कर उसे चूमने और चाटने लगा। नमिता की आऽऽऽहहहह निकल गयी। वह सीइइइइइइइइ करने लगी।
अब उसने जीभ से चुदायी शुरू कर दी और बीच बीच में clit याने उसके भग के दाने को भी छेड़ देता था। नमिता हाऽऽऽय्य्य्य्य मरीइइइइइइइ करके उसके सिर को अपनी बुर में दबा दी और कमर हिला कर बुर को उसके मुँह पर रगड़ने लगी।!
वह भी उसकी बुर को चूसकर अपना लौड़ा पैंट के ऊपर से रगड़ रहा था।
फिर नमिता ने उसके सिर को खींचकर अपने बुर से दूर किया और बोली: हाऽऽऽऽय मैं झड़ जाऊँगी। आप चोदो मुझे प्लीज़ आऽऽहहह।
वह हँसते हुए खड़ा हुआ और अपनी पैंट और चड्डी खोलकर नीचे गिरा दिया । उसका काला मोटा लौड़ा उसकी आँखों के सामने था । उसने नमिता को चूसने का इशारा किया और वह झुक कर उसके लौड़े को चूसने लगी। उसकी जीभ बार बार उसके सुपाडे को छेड़कर उसको मस्ती से भर रही थी। अब वो उसका मुँह हटाया और बोला: चलो रानी पीछे मुड़ो और अपनी साड़ी उठाकर झुको । नमिता ने साड़ी उठाई और दीवाल के सहारे आगे की ओर झुक गयी और अपने चूतर बाहर की ओर उठा दिए। अब वह अपने लौड़े के सुपाडे को उसकी बुर की छेद मेंरखकर एक ज़बरदस्त धक्का मारा और उसका बहुत सारा लंड उसकी बुर में समा गया। नमिता चिल्लाई: आऽऽऽऽऽऽहहहह क्या मस्त मोटा है आपका। ऐसा लगता है कि पूरा छेद ही भर गया मेरा आऽऽऽहहहह।
उसने एक और करारा धक्का मारा और अब पूरा लौड़ा जड़ तक उसके अंदर घुस गया।
नमिता हाय्य्य्य्य्य्य्य मरीइइइइइइइ करके अपनी कमर पीछे लेज़ाकर उसके मोटे लौड़े का अहसास अपनी बुर में लेने लगी।
तभी नमिता चिल्लाई: आऽऽऽहहह चोदो रजाऽऽऽऽऽऽ चोदोओओओओओओओ और ज़ोर सेएएएएएएएएएए आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फाड़ दोओओओओओओओ मेरी बुर कोओओओओओओओओ।
वह भी उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए उसकी बुर पेलने लगा। बाथरूम में ठप्प ठप्प और आऽऽहहहह की आवाज़ आने लगी।
वह बोला: आऽऽऽह क्या चूचियाँ है आऽऽऽहहह मस्त माऽऽऽल होओओओओओओ आऽऽह्ह्ह्ह्ह क्या बुर है ह्म्म्म्म्म । बहुत मज़ा आ रहा है रानी। तुम्हें भी आ रहा है ना?
नमिता हाँफते हुए बोली: हाँआऽऽऽऽ बहुत मज़ाआऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है। हाऽऽय्य्य्य्य। चोदो ओओओओओओओ। मैं झड़ीइइइइइइइइइ सीइइइइइइइइइ गयीइइइइइ। और वह झड़ने लगी। वह अपनी बुर को पीछे लेज़ाकर उसके लौड़े पर दबा रही थी और अपनी जाँघों को भींचकर उसके लौड़े का जैसे रस निचोड़ रही थी। वह भी इस हमले के सामने हथियार डाल दिया और ह्म्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ गया।
अब वह उसके अंदर अपना नरम होता हुआ लौड़ा डाले उसकी चूतरों को सहला रहा था। नमिता अब उसको धकेल कर सीधी हुई और साड़ी उठी हुई अवस्था मैं जाकर कोमोड पर बैठ गयी और सीइइइइइइइ की सीटी बजाकर मूतने लगी। वह उसके छातियों को दबा कर उसको मूतते हुए देखने लगा। फिर वह खड़ी हुई और अपनी पैंटी पहनी और अपने ब्रा और ब्लाउस को पहनी। सुधाकर भी अपना लौड़ा पकड़कर कोमोड में मूतने लगा जिसको नमिता चोरी से देख रही थी। अब वह भी चड्डी और पैंट पहना। तब तक नमिता ने अपने बाल वग़ैरह ठीक कर लिए थे। सुधाकर पीछे से उसको पकड़कर बोला: मज़ा आया रानी?
नमिता: हाँ जी बहुत।
सुधाकर: चलो अब तो बता दो कि कौन अच्छा चोदता है मैं या मनीष?
नमिता हँस कर बोली: बाप तो बाप ही होता है। आप ज़्यादा अच्छा चोदते हो पर वह रोमांटिक मूड में चोदता है आप बस चोदने के लिए ही चोदते हो। यह फ़र्क़ है।
वह हँसते हुए बोला: हा हा , बाथरूम में क्या रोमैन्स हो सकता है?
कभी होटेल में मिलो,कैंडल लाइट डिनर करेंगे।
नमिता: आपको छोकरियों से फ़ुर्सत मिलेगी तब ना?
वह बोला: आज जो मज़ा मिला है ना उसके बाद अब तुमको बार बार चोदने का मन करेगा। अच्छा बताओ बाप बेटे से एक साथ चूदाओगी ?
नमिता: छी कुछ भी बोलते हैं? नहीं ।
वह: अरे डबल मज़ा मिलेगा इसमें हर्ज ही क्या है?
नमिता: चलिए बाद में देखेंगे।
वह: हाँ एक बात और, तुम्हारा बेटा राज कुछ दिनों में कॉलेज जाएगा ना, तो तुमको पैसे की जो भी ज़रूरत होगी मुझे बोल देना मैं सब कर दूँगा। नमिता: बहुत बहुत थैंक्स सर ।
अब उसने आख़री बार नमिता के होंठ चूसे और उसके चूतरों को दबाकर अपना प्यार दिखाया।
अब दोनों एक एक करके बाहर आए और नमिता अपने कैबिन में आ गयी।
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