मेरा प्यारा परिवार अध्याय 3




                   मेरा प्यारा परिवार अध्याय 3





प्रीति -" अभी क्या बाकी है, मुझे लगा कि तेरा एंडिंग पॉइंट हुआ था जो अभी भी मुझे अपने मूँह मे फील हो रहा है". प्रीति ने अपने रूम के अंदर से ही स्लो वाय्स मे कहा


कुशल -" हाँ वो तो हुआ लेकिन अभी...."


प्रीति -" अभी क्या????"


कुशल -" अभी वो तो नही हुआ ना जो होना चाहिए इस सब के बाद यानी......... सेक्स."


प्रीति -" कुशल हम जवान है, मे भी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी हू. जोश मे आकर सब हो गया लकिन इससे आयेज कुच्छ नही होगा और प्लीज़ मुझे फोर्स मत कर."


कुशल -" तो इतना कुच्छ भी क्यू किया, क्यू मेरे जज़्बात का मज़ाक उड़ा रही है. अगर कुच्छ करना ही नही था तो ये सब किया ही क्यू". कुशल ने गुस्सा होते हुए कहा


प्रीति -" मेने कहा ना की जवानी के जोश मे ग़लती हो जाती है जो और जो मुझसे भी हो गयी. और वैसे भी जितना हुआ उतना तो चलता है."


कुशल -" वाह वाह, खुद की जो मर्ज़ी वो किया अब जो मेरे मर्ज़ी है उसमे नखरे. बन तो ऐसे रही है जैसे हमेशा अपनी चूत को सील पॅक ही रखेगी".


प्रीति -"तूने फिर से ते गंदी लॅंग्वेज शुरू कर दी ना. तू भी जानता है और मे भी कि कुँवारा कोई नही रहता. दिल हर किसी का करता है, सो मेरा भी करता है. तू अपनी किसी गर्ल फ्रेंड के साथ कर, उपर वाला जब मेरा बॉय फ्रेंड भेजेगा तो मे उसके साथ अपनी बॉडी शेर करूँगी."


कुशल -" मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है"


प्रीति - " तो बन जाएगी, अभी बूढ़ा नही हुआ है तू. मे विटनेस हू कि तू जवान है और तेरी बॉडी का हर पार्ट जवान है. हे हे हे हे" प्रीति हंसते हुए कहती है. प्रीति जैसे जैसे हंस रही थी वैसे वैसे कुशल का गुस्सा बढ़ता जा रहा था.


कुशल - " तो तू ढूंड ले अपना बॉय फ्रेंड. अब अगर तू खुद भी चाहेगी तो भी कुच्छ नही करूँगा. चलाती रह हाथ से काम. मे जा रहा हू"


प्रीति -" शुक्रिया कुशल, अगर कभी मे अपना होश खो भी दू तो अब तू कुच्छ नही करेगा. मुझे खुशी है, और अब प्लीज़ चला जा. मेरा नहाने का मूड है. कपड़े तो पहने है नही तो टाइम भी बच जाएगा." प्रीति उसे और छेड़ते हुए बोलती है.


कुशल उसके डोर से हट जाता है और अपने रूम की ओर जाकर खड़ा हो जाता है. अपने रूम मे एंट्री लेते ही उसकी नज़रे प्रीति की पैंटी पर पड़ती है जिसे प्रीति उसके रूम मे ही भूल गयी थी. उस पैंटी को देख कर कुशल की हालत और खराब हो जाती है और उसका लंड ज़ोर मारने लगता है. उसको अभी भी किस्मत पे यकीन नही हो रहा था कि अभी चन्द मिनिट पहले प्रीति उसकी बाहों मे थी और अब उससे दूर है

" ग़लती मेरी ही है, सारा ड्रामा छोड़ कर पहले चोद ही देना चाहिए था." कुशल अपने आप से कहता है. कुशल सारा सीन सोच सोच कर पागल होने लगता है, उसको अभी भी यकीन नही हो रहा था कि उसने प्रीति के जवान और नंगे बदन का दीदार किया है.


कुशल अपने ख्यालो मे खोया हुआ है और अपने हाथो से ही अपने लंड को खिला रहा है. तभी डोर ओपन होने की आवाज़ आती है, वो तुरंत समझ जाता है कि ये तो प्रीति का डोर है. उसका एग्ज़ाइट्मेंट आसमान पर पहुँच जाता है. वो अपने रूम से बाहर आता है.


प्रीति अपने रूम के गेट पर खड़ी हुई थी. कुशल उसके रूप को देख कर शॉक्ड हो जाता है, प्रीति ने एक बेहद शॉर्ट शिफ्फॉन ड्रेस पहनी है जो उसकी पुसी से बस थोड़ा सा नीचे है. अक्सर वो इस ड्रेस को लेगिंग के साथ पहनती थी लेकिन आज ड्रेस के नीचे कोई बॉटम नही था, सिर्फ़ उसकी पिंक पैंटी की मामूली झलक मिल रही थी. गीले और खुले बाल और जुवैसी लिप्स, एक सेक्सी गॉडेस लग रही थी वो. कुशल को तो जैसे कुच्छ समझ ही नही आ रहा था कि आज किस्मत ये क्या खेल कर रही है. प्रीति अपने रूम के डोर पर खड़े होकर कुशल को देख रही है और कुशल प्रीति को. कुशल प्रीति की नंगी टाँगो को देख कर पागल सा होता जा रहा है.


प्रीति अब अपने कदम टाय्लेट की तरफ बढ़ाती है जो उसी गॅलरी मे है, उसके एक हाथ मे कोई और कपड़ा भी है जो फोल्ड करके उसने पकड़ा हुआ था. उसकी चाल अभी ऐसी थी जैसे कोई सेक्सी मॉडेल रॅंप पर चल रही हो. प्रीति की निगाहे कुशल से मिली हुई है, और कुशल खड़ा हुआ बस उसे देख रहा है. प्रीति टाय्लेट के गेट पर पहुँचती है और टाय्लेट के अंदर जाती है और फिर से घूमती है. कुशल की तरफ 10 सेकेंड के लिए वो देखती ही रहती है. कुशल और उसके बीच की दूरी बस 10 कदम होगी.


प्रीति बिना गेट बंद किए अपने दोनो हाथ अपनी पैंटी पे ले जाती है.... और नीचे झुक कर एक स्लो मोशन स्टाइल मे पैंटी नीचे करने लगती है. नीचे करते हुए प्रीति की निगाहे बस कुशल पर ही है और एक सेक्सी कातिल मुस्कान भी. पैंटी नीचे करने के बाद वो फिर से सीधी खड़ी होती है और वो करती है जिसकी कुशल को उम्मीद भी नही थी. कुशल के सामने ही अपनी ड्रेस को उपर करती है और नीचे बैठ जाती है.


छ्ह्हीयीईयी......... एक जोरदार साउंड के साथ वो खुले दरवाजे मे ही कुशल के सामने पेशाब करने लगती है. कुशल अब पागल हो चुका है, उसने अपने कदम बढ़ाने शुरू किए और जैसे ही प्रीति से दो कदम की दूरी पर वो पहुँचा. "धदाम " और गेट बंद. कुशल को ऐसे लगा जैसे आज पता नही कितनी बार उसकी इज़्ज़त का रेप होगा

कुशल -" ये क्या नया ड्रामा है तेरा, गेट खोल". कुशल ने बाथरूम का गेट नॉक करते हुए कहा


प्रीति -" क्यू मुझे पेशाब करना अलाउ नही है, हे हे हे हे". प्रीति ने मज़ाक करते हुए कहा


कुशल -" क्या अब से पहले भी ऐसे ही अपनी चुल खोल कर पेशाब करती थी तू".


प्रीति -" हा हा हा हा, ऐसे नही करती थी लेकिन अब तू तो देख ही चुका है तो तुझसे क्या शरमाना. लेकिन तू क्यो टेन्षन ले रहा है, तूने तो प्रॉमिस कर ही लिया है कि अगर मे कुच्छ कहूँगी भी तो तू कुच्छ नही करेगा".


कुशल -" मेने कहा गेट खोल, मुझे पता है कि तू भी चाहती है मेरे लंड को लेना. नखरे मत दिखा नही तो ज़बरदस्ती चोद दूँगा तुझे". कुशल का गुस्सा बढ़ता जा रहा था


प्रीति -" ये गंदी लॅंग्वेज और ये धमकियाँ अपनी बीवी को दियो. ये मेरी लाइफ है और मे अपनी मर्ज़ी से जीना चाहती हू". इतने मे ऐसी आहट होती है जैसे को नीचे से उपर आ रहा हो, और कुशल की हालत खराब हो जाती है.


" क्या हुआ गॅलरी मे क्यू घूम रहा है". ये पंकज की आवाज़ थी जो स्टेर्स से उपर आ रहा था


"वो... वो डॅडी.... मुझे टाय्लेट जाना है लेकिन इसमे वो प्रीति घुस गयी है" कुशल ने अपने आप को बचाते हुए कहा.


पंकज-" तो बेटा अगर ज़्यादा परेशानी है तो नीचे के टाय्लेट मे चला जा". कुशल को उसकी बात मान नी पड़ती है क्यूंकी वो नही चाहता था कि उसे शक हो जाए और मरे मन से नीचे जाने लगता है.


" आज साली किस्मत ही खराब है नही तो डॅडी तो उपर आते भी नही है". कुशल अपने मन मे कहता है नीचे जाते हुए.


कुशल नीचे की ओर जाता है और पंकज आराधना के रूम मे एंटर करता है. कुशल जैसे ही नीचे पहुँचता है उसे फर्स्ट फ्लोर टाय्लेट के गेट खुलने की आवाज़ आती है " ऑश शिट" उसके मूँह से खुद ब खुद ये बात निकल जाती है. प्रीति टाय्लेट का गेट खोल कर बाहर देखती है और मैदान सॉफ देख कर अपने रूम मे भाग जाती है.


पंकज आराधना के रूम मे एंटर होता है. आराधना चादर ओढ़े सो रही है. पंकज उसके बेड के कॉर्नर मे जाकर बैठ जाता है और प्यार से उसके सर मे हाथ फिराने लगता है. आराधना की आँखे खुलती है और वो चोंक कर एक दम बैठ जाती है. " डॅडी, आआप". आराधना चोंक कर पूछती है.



पंकज -" आरू, नीचे बोर हो रहा था तो सोचा कि क्यू ना आज उपर घूम आउ और अपने बच्चो के देख आउ. अक्सर मे उपर आता नही हू ना, वैसे भी कल सनडे है तो सोचा की घूम आउ".


आराधना -" ये तो आपने बहुत अच्छा किया डॅडी". आराधना अपने आप को और जगाती हुई बोलती है और उठ कर वॉश रूम की ओर जाने लगती है अपना चेहरा वॉश करने के लिए. उसने ट्राउज़र और टी-शर्ट पहनी हुई है.


पंकज -" रूम को काफ़ी क्लीन रखती हो तुम". पंकज रूम के चारो ओर देखते हुए बोलता है. इतने मे आराधना वॉशरूम मे घुस चुकी थी और बिना गेट बंद किए अपना फेस वॉश करने लगती है. उसके बाद फेस को टवल से क्लीन करते करते वो बाहर आती है


आराधना -" पापा, लड़किया हमेशा सफाई पसंद करती है और बाय्स..पूछो मत बस, एक बार कुशल का रूम देखोगे तो हैरान हो जाओगे"


पंकज -" हा हा हा हा. तो कुशल का रूम डर्टी है. क्या करे लड़को के पास टाइम ही नही होता". पंकज ने स्माइल करते हुए कहा


आराधना -" क्या? लड़को के पास टाइम नही होता और गर्ल्स फ्री रहती है. कमाल है डॅडी आप भी. मेरी तारीफ करने की बजाय कुशल को फेवर कर रहे हो". आराधना ने बनावटी गुस्से मे कहा


पंकज -" तारीफ तो आज मे तुम्हारी बहुत कर चुका हू". पंकज का इशारा साड़ी वाले इन्सिडेंट की तरफ था. ये सुनकर सिमरन शरमा जाती है.


आराधना -" मोम सो गयी क्या?" आराधना बात टालते हुए बोलती है


पंकज -" आज कल तुम्हारी मोम के पास टाइम ही कहाँ है मेरे लिए. उसके पास जाता हू तो पता नही क्यू दूर भाग जाती है". पंकज ने स्माइल करते हुए कहा. अब आराधना बेड के सामने चेर पर, टाँग पर टाँग रख कर बैठ जाती है.


आराधना -" तो आप ही मम्मी को परेशान करते होंगे तभी तो आपके पास से भागती है". आराधना ने हंसते हुए कहा


पंकज -" शादी के बाद तो पति का फ़र्ज़ है परेशान करना". पंकज ने बहुत लो वाय्स मे कहा


आराधना -" क्या कहा".


पंकज -" कुच्छ नही, मे तो बस ये कह रहा था कि तुम अपनी मम्मी का फेवर क्यू कर रही हो. तुम्हारी फ्रेंड सिमरन ही अच्छी है जो मेरा फेवर करती है. वो तो मज़ाक मे कह भी रही थी अंकल कहीं आंटी को कोई और तो नही मिल गया". पंकज ने ऐसे ही कह दिया


आराधना -" आप सिमरन की बात ना सुना करे. उसके विचार हमारे घर से नही मिलते हाँ लेकिन दिल की अच्छी लड़की है"

पंकज -" हाँ उसके दो बड़े बड़े दिल बहुत अच्छे है." पंकज ने फिर से साइड मे मूँह करके बहुत लो वाय्स मे कहा


आराधना -" क्या कहा आपने अभी "


पंकज -" कुच्छ नही, मे तो बस ये कह रहा था कि वाकई मे अच्छी लड़की है तुम्हारी फ्रेंड."


आराधना -" ज़्यादा अच्छी भी नही है डॅडी. पता है उसका एक बॉय फ्रेंड भी है". आराधना ने उसे ऐसे बताया जैसे कोई सीक्रेट बता रही हो


पंकज -" सच मे". पंकज ने ऐसे रिक्ट किया जैसे कुच्छ जानता ही नही


आराधना -" हाँ डॅडी, और पता है वो उससे अकेले मे भी मिलती है". आराधना की आँखे बड़ी बड़ी हो रही थी ये बताते हुए. वो ऐसे बता रही है जैसे पता नही कितना बड़ा सीक्रेट बता रही है


पंकज -" अकेले मे यानी कहाँ". पंकज ऐसा रिक्ट कर रहा है जैसे कुच्छ समझ ही नही पा रहा


आराधना -" पता है डॅडी, वो ऐसी जगह मिलती है बॉय फ्रेंड से जैसे किसी के घर या फ्लॅट मे". आराधना उसे बहुत सीरीयस होते हुए बताती है लेकिन ये नही बताती कि कल सिमरन उनके ही घर पर अपने बॉय फ्रेंड को लाने वाली है.


पंकज -" अच्छा, ऐसा करती है वो. वो तो बहुत खराब लड़की है". पंकज ने भी उसकी बात का समर्थन करते हुए कहा


आराधना -" वो तो डॅडी स्मोकिंग, ड्रिंकिंग सब करती है. लड़कियो वाली कोई बात नही है उसमे." आराधना ने कॅरी ऑन रहते हुए कहा


पंकज -" लेकिन उसके लिप्स को देख कर नही लगता कि वो स्मोकिंग करती है. एक दम पिंक लिप्स है उसके." पंकज आराधना का रिक्षन देखना चाहता था


आराधना -" ढेर सारी लिपस्टिक पोत के रखती है अपने होंठो पे. तभी तो पिंक लगते है". आराधना ने भी थोड़ा और ज़ोर देते हुए कहा


पंकज -" लेकिन कहीं तुझे मे भी तो बुरा नही लगता क्यूंकी स्मोकिंग तो मे भी करता हू". पंकज ने फिर से उसका रिक्षन जान ने के लिए ये बात कही


आराधना -" डॅडी स्मोकिंग करना तो बना ही मर्दो के लिए है. आप तो डॅशिंग लगते हो लेकिन सिमरन पे मुझे बहुत गुस्सा आता है जब वो स्मोकिंग करती है लेकिन वो अपने आप को फिल्मी हेरोयिन से कम नही समझती".


पंकज -" आज कल तो बेटी हर दूसरी लड़की स्मोकिंग करती नज़र आती है लेकिन शुक्र है कि हमारी बेटी इन सब चीज़ो से दूर है". ये बात कहते हुए पंकज उठता है और जाकर आराधना के प्यार से गाल खींच देता है


आराधना -" डॅडी मे हमेशा घर का ख्याल रखूँगी और कोई ऐसा काम नही करूँगी जो मेरे मा बाप को अच्छा ना लगे". पंकज उसकी इस बात से बहुत इंप्रेस हुआ और उसकी सर पर हाथ फिराता हुआ बाहर जाने लगता है.


आराधना -" अरे डॅडी, कहाँ चले. बैठो ना थोड़ी देर और." आराधना चेर से खड़े होते पंकज से बोलती है


पंकज -"नही बेटा अब रात बहुत हो गयी है, अब मुझे चलना चाहिए". ये कहते हुए पंकज बाहर जाने लगता है. बाहर जाते हुए पंकज ये सोचता है कि क्यू ना प्रीति और कुशल से भी मिलता चलु और उन्हे अच्छा लगेगा. और वो बाहर निकलते हुए आराधना को इशारे मे बताता है कि वो प्रीति के रूम की तरफ जा रहा है.

पंकज प्रीति के रूम की तरफ चल देता है. प्रीति के रूम के बाहर आकर वो गेट को नॉक करता है.


" तू आ गया फिर, चाहे तू कितनी भी ट्राइ कर ले मे नही दूँगी तुझे". प्रीति का गेट अंदर से बंद था और उसे ये लगा कि शायद कुशल गेट नॉक कर रहा है इसलिए उसने ऐसा बोला.


" क्या नही देगी बेटा क्या हो गया". पंकज गेट के बाहर से ही बोलता है और गेट को फिर आए नॉक करता है.


ऊऊहह, फक्क्क डॅडी... प्रीति अपने मन मे बोलती है. दर असल वो बहुत घबरा गयी थी.


" वो...वो डॅडी कुशल बहुत परेशान करता रहता है. ज़रा रुकिये मे चेंज कर रही हू और अभी गेट खोलती हू." प्रीति की स्पीड ऐसे हो गयी थी जैसे कोई एलेक्ट्रिक मशीन. वो तुरंत पूरे कपड़े पहनती और गेट खोलती है. गेट खोलते ही वो पंकज को हेलो डॅडी बोल कर ग्रीट करती है. पंकज उसके रूम मे अंदर की ओर जाते हुए बोलता है -


पंकज -" कैसे परेशान कर रहा है ये नालयक कुशल. क्या माँग रहा है तुझसे".


प्रीति - वो वो डॅडी..... मेरा वीडियो गेम." प्रीति को कुच्छ समझ नही आता तो वो ऐसे ही बोल देती है


पंकज -" बेहद नालयक हो गया है ये कुशल. वो तेरा वीडियो गेम क्यू माँग रहा है जब उसको भी मेने दिलाया हुआ है. कुशल कुशल" वो दो तेज आवाज़ लगाता है कुशल को बुलाने के लिए. कुशल जैसे ही ये आवाज़ नीचे सुनता है उसे तो ऐसे लगता है जैसे भूचाल आ गया हो.


" कहीं प्रीति ने मेरी शिकायत डॅडी से तो नही कर दी". कुशल अपने मन मे सोचता हुआ उपर भागता है. उसे आशा थी कि डॅडी आराधना दीदी के रूम मे होंगे लेकिन जैसे ही वो उधर आता है तो देखता है आराधना दीदी तो अपने रूम मे अकेली है. उसके पाँव तले से ज़मीन खिसक जाती है. उसको कदम रुक जाते है, उसको ऐसा लगा जैसे किस्मत ने क्या खेल खेल दिया उसके साथ. " हे उपरवाले आज बचा ले, अपनी बीवी की भी चूत नही मारूँगा मे". कुशल उपरवाले से हाथ जोड़ कर प्राथना करता है. इतने मे एक बार फिर से आवाज़ आती है कुशल. ये आवाज़ उसके डॅडी की ही थी जो प्रीति के रूम से आ रही थी.


कुशल धीरे धीरे कदम बढ़ाता हुआ आगे पहुँचता है. उसके चेहरे पे पसीने आ चुके थे. और प्रीति के रूम के बाहर जाकर खड़ा हो जाता है, अंदर उसके डॅडी और प्रीति थे. डॅडी आगे के साइड खड़े थे और प्रीति उनके पीछे यानी कि पंकज की पीठ थी प्रीति की तरफ.


" जी डॅडी". कुशल मरी हुई आवाज़ मे बोलता है.


पंकज -" क्यू परेशान कर रखा है तूने प्रीति को". पंकज की ये बात सुनते ही तो कुशल का तो जैसे किसी लड़की ने रेप कर दिया हो ऐसी सिचुयेशन हो जाती है. प्रीति की भी हालत खराब थी कि कहीं कुशल कुच्छ और समझ के कुच्छ बोल ना दे


कुशल -" मेने... मेने क्या किया".

पंकज -" तो जब प्रीति अपनी कोई चीज़ नही देना चाहती तो तू क्यू ज़बरदस्ती माँगता रहता है". ये बात सुन कर कुशल का चेहरा शरम से गढ़ जाता है. उसको ऐसा लगा कि जैसे जिंदगी मे कोई भूचाल आ गया हो.


" और डॅडी मेने कई बार मना किया है कि मे अपना वीडियो गेम नही दूँगी". कुशल इससे पहले कुच्छ बोले, प्रीति ने हिंट दे दिया कि वीडियो गेम की बात चल रही है. " वीडियो गेम???" कुशल सोचने पे मजबूर हो जाता है और जैसे कि उसे सब समझ आता है वो खुशी से पागल हो जाता है.


" डॅडी, वीडियो गेम, ऑश वीडियो गेम. हाँ मे इसके पीछे पड़ा रहता हू कि दे मुझे क्यूंकी प्रीति का वीडियो गेम मुझे सबसे अच्छा लगता है". कुशल प्रीति की तरफ देखते हुए बोलता है. वो सारी सिचुयेशन समझ चुका था. जब वो ये बात बोलता है कि उसे प्रीति का वीडियो गेम सबसे अच्छा लगता है तो ये सुनकर प्रीति को ऐसे लगा जैसे वो ही मिस वर्ल्ड है.


पंकज -" लेकिन तुझे भी तो दिलाया है ना मेने वीडियो गेम".


कुशल -" पता नही क्यू मुझे डॅडी प्रीति का ही अच्छा लगता है. बस एक बार लूँगा फिर दोबारा ज़िद नही करूँगा डॅडी". कुशल ने बनावटी अंदाज़ मे प्रीति की तरफ देखते हुए कहा


पंकज -" ठीक है तो, प्रीति एक बार दे देने मे कोई बुराई नही है". पंकज प्रीति की तरफ देखते हुए बोलता है. इस बात का मतलब समझ कर


प्रीति -" डॅडी मुझे पूरा यकीन है कि एक बार अगर इसे अपना वीडियो गेम दिया तो मेरा गेम दोबारा खेलने के लायक नही रहेगा." प्रीति ने नॉटी स्टाइल मे कुशल की ओर देखते हुए कहा. इससे पहले कि पंकज कुच्छ बोलता, कुशल ही बोल पड़ता है


कुशल -" डॅडी मे प्रॉमिस करता हू कि बहुत प्यार से खेलूँगा. इसके वीडियो गेम पे खरॉच तक नही आने दूँगा. बिल्कुल अपना गेम समझ कर ही खेलूँगा".


पंकज -" ठीक है, ठीक है. अब बहुत हुआ, प्रीति जब तेरा दिल करे एक बार अपना वीडियो गेम कुशल को दे दियो". पंकज प्रीति को ऑर्डर देता हुआ बोलता है.


प्रीति कुशल की तरफ शार्प आइज़ से देखती है और पूछती है " बस एक बार हाँ???" ये बात सुनकर को तो जैसे कुशल की लॉटरी लग गयी हो. वो अपने डॅडी के फ़ैसले से बहुत हॅपी था और आइ लव यू डॅडी कह कर अपने डॅडी से चिपक जाता है.


पंकज -" और दोनो लड़ा कम करो, अब बड़े हो गये हो, ठीक है". कुशल और प्रीति दोनो जी डॅडी कह कर बात मान लेते है. अब पंकज बाहर जाने लगता है, लेकिन कुशल का बाहर जाने का इरादा नही था. प्रीति मौके का फ़ायदा उठाते हुए बोलती है कि चल कुशल अब तू भी सोने जा क्यूंकी मुझे भी नींद आ रही है. पंकज भी जाते जाते कुशल से बोलता है कि जाकर सो जा अब कल सनडे है शॉपिंग करने चलेंगे.



कुशल बाहर जाना चाहता तो नही है लेकिन अपने डॅडी के सामने उसे बाहर आना पड़ जाता है. कुशल के बाहर आते ही प्रीति अपना गेट बंद कर लेती है.


पंकज स्टेर्स की तरफ बढ़ता है, उसका चेहरा आराधना के रूम के की ओर है. आराधना भी फाइनल सोने की तैयारी कर रही थी, इसलिए नाइट गाउन पहन चुकी थी. हालाँकि नाइट गाउन पूरी बॉडी का था लेकिन मेटीरियल बहुत ही थिन था, पंकज स्टेर्स की तरफ बढ़ रहा है और आराधना अपने रूम के गेट पर खड़ी है उसे बंद करने के लिए लेकिन अपने डॅडी को जाते हुए देख कर रुक जाती है. दोनो की नज़रे मिली हुई है, पंकज की निगाहे उपर से नीचे तक जाती है, आराधना अपनी जगह से हील नही रही है और कंटिन्यू स्माइल किए जा रही है. धीरे धीरे पंकज स्टेर्स पर पहुँच जाता है और नीचे चला जाता है. आराधना भी अपना गेट बंद कर लेती है. वो बिस्तर पर लेट जाती है लेकिन उसे नींद नही आ रही है. वो अपना टीवी ऑन करती है, काफ़ी चॅनेल चेंज करती है लेकिन फिर एक जगह रोक देती है क्यूंकी मूवी अमिताभ बच्चन की है जो कि उसका फेवोवरिट आक्टर है. लेकिन मिड नाइट मूवी "निशब्द " आ रही थी.


वो मूवी मे खोई हुई है तभी उसके मोबाइल की बेल बजती है. वो एक दम चोंक जाती है, जैसे किसी सपने से जागी हो. मन मे सोचती है कि इतनी रात को किसका फोन हो सकता है. मोबाइल उठाती है और देखती है कि फोन सिमरन का है. वो फोन पिक करती है.


आराधना-" हाई सिमरन, इतनी रात को क्यू परेशान कर रही है"


सिमरन -" मेरी जान मुझे यकीन था कि तू जाग रही होगी. और क्या कर रही है?"


आराधना -" कुच्छ नही यार मूवी देख रही हू"


सिमरन -" कौन सी मूवी चल रही है इतनी रात मे. पॉर्न है क्या"


आराधना -" अपने जैसा समझ रखा है क्या, मे अमिताभ जी की मूवी निशब्द देख रही हू".


सिमरन -" ओई मेरी जान क्या मूवी है, इतनी रात को ये मूवी कैसे पसंद आ गयी तुझे. अमित जी के चुम्मे वाली"


आराधना -" मुझे नही पता इसमे क्या है क्यूंकी मेने तो अभी शुरू की है. तू बता कि क्या बात है, फोन क्यू किया है".


सिमरन -" मेरी जान तो कल का प्रोग्राम पक्का है ना तुम्हारी शॉपिंग का. मे अपने बॉय फ्रेंड से प्रॉमिस कर चुकी हू".


आराधना -" क्यूँ इतना उतावली हो रही बॉय फ्रेंड से मिलने के लिए. वैसे हम सब कल जा रहे है और तू आ सकती है"


सिमरन -" लव्ली, थॅंक यू सो मच आरू. यू आर माइ बेस्ट फ्रेंड. चल कीप डूयिंग मास्टरबेशन, हे हे हे हे. बाइ"


आराधना -" क्या कहा तूने अभी"


सिमरन -" मेने कहा बाइ"


आराधना -" नही उससे पहले"


सिमरन -" उससे पहले मेने क्या कहा"


आराधना -" तूने कुछ मास्टरबेशन के लिए कहा ना"


सिमरन -" ओह्ह्ह मास्टरबेशन, कर ले अगर दिल है तो. वैसे भी अमित जी की सेक्सी मूवी चल रही है".


आराधना -"मे ऐसी लड़की नही हू, समझी".


सिमरन -" कैसी लड़की नही है? यार कभी तो ट्रॅक पर रहा कर. मे करती हू मास्टरबेशन और डेली करती हू. तो क्या इससे मे खराब लड़की हो गयी. सब करते है, तू नही करती इसीलिए गुस्से मे रहती है. अपनी इस बॉडी पे रहम कर, मास्टरबेशन एक नॅचुरल चीज़ है जो तेरी मा और मेरी मा ने भी किया होगा" सिमरन ने आज थोड़ा स्ट्रिक्ट होते हुए कहा

आराधना -" देख तू मा बाप तक ना पहुँचा कर".


सिमरन -" मे तो बस मा तक पहुँची थी, बाप के मास्टरबेशन के बारे मे क्या पता". सिमरन ने हंसते हुए कहा


आराधना -" सिमरन, ऐसी बाते करते हुए तुझे शरम नही आती. "


सिमरन -" यार क्यू अपना ब्लड प्रेशर बढ़ा रही है, मस्त रहा कर. और फिर कह रही यही कि अपनी बॉडी पे रहम कर, इसे और कुच्छ तो नसीब नही होने देगी तू कम से कम एक बात मास्टरबेट कर लिया कर. चल अब रखती हू, बाइ"


आराधना -" बाइ" और फोन कट जाता है.


आराधना के कानो मे सिमरन का एक एक शब्द गूँज रहा था. वो आज तक अंजान थी कि ये मास्टरबेशन फील क्या चीज़ होती है. ये बात उसके दिमाग़ पे हावी होती जा रही थी, इतने मे अमिताभ का किस्सिंग सीन आ जाता है. एक जवान लड़की अपने फादर के उमर के आदमी को यूँ लीप किस करते हुए देख कर आराधना का अंग अंग भड़क जाता है.


उसका चेहरा लाल पड़ जाता है और बॉडी मे जैसे ब्लड बहुत तेज स्पीड से दौड़ने लगता है. वो नही समझ पा रही थी कि आख़िर ये क्या हो रहा है.


उसका आँखे बंद हो जाती है और हाथ धीरे धीरे नीचे की तरफ जाने लगता है. उसने अपनी चूत को कभी किसी और तरीके से टच नही किया था. बहुत धीरे धीरे वो अपने नाइट गाउन को उपर करती है. उसके दिमाग़ मे लाखो सवाल चल रहे थे कि क्या ये सही है. लेकिन फिर उसके माइंड मे सिमरन के शब्द भी गूंजते है कि हर कोई करता है और हर लड़की करती है. वो दुविधा मे थी लेकिन अब रोका नही जा सकता था क्यूंकी उसकी बॉडी उसके कंट्रोल से बाहर हो रही थी.

नाइट गाउन को उपर करके वो अपने दोनो हाथ अपनी पैंटी पे ले जाती है. और दोनो हाथो से नीचे करने लगती है, उसे ऐसा फील हो रहा है जैसे कोई लड़का नीचे कर रहा हो उसकी पैंटी. वो एग्ज़ाइटेड भी है और उसे शरम भी आ रही है. धीरे धीरे अपने सीधे हाथ को वो अपनी पुसी पे ले जाती है और पहले टच मे ही. "आहह...... उसकी आँखे बंद हो चुकी थी और वो अब जैसे धरती पे नही थी. अपनी गोरी गोरी एक फिंगर को अपनी पुसी मे थोड़ा सा अंदर घुसाती है. "ओह......." वो ऐसे इमॅजिन कर रही है जैसे ये फिंगर उसकी नही बल्कि किसी मर्द की हो. उसकी फिंगर जैसे ही अपनी पुसी मे जाती है, पुसी लिक्विड से भीग जाती है. आज आराधना के अंदर का बीस्ट जाग रहा था, वो अपनी फिंगर को अपनी पुसी से हटाती है और अपने मूँह के पास ले जाकर उस फिंगर को चूसने लगती है. वो एक इमॅजिनरी वर्ल्ड मे थी जहाँ वो फील कर रही थी कि उसकी चूत मे कोई फिंगर डाल कर उसे खुद चूस रहा हो. उसकी बॉडी की ऐसी हालत हो रही थी जैसे जल बिन मछ्ली. चूत से पानी बहने लगा था. उसको जैसे बहुत गर्मी लगने लगी थी और बदन पसीने मे भीगने लगा था. वो फिर से अपना हाथ नीचे ले जाती है, और फिंगर से एक फिंगर अंदर आंड ज़्यादा अंदर " फक......... मी.......," आराधना के होंठो से खुद ब खुद निकल गया, वो आज जैसा फील कर रही थी वैसे कभी नही किया. उसको खुद यकीन नही हो रहा था कि उसके मूँह से आज ऐसे एरॉटिक शब्द निकल रहे है. उसने अपनी फिंगर की स्पीड बढ़ा दी थी, उसका मूँह आसमान की तरफ खुल चुका था और बाल बिस्तर मे फेल गये थे. आराधना की धीमी धीमी सिसकारियो से रूम गूँज रहा था " ओह, आआअहह, नो........." फिंगर अंदर बाहर और अंदर बाहर. अब आराधना का उल्टा हाथ ऑटोमॅटिकली अपने बूब्स पे पहुँच जाता है. दूसरी तरफ फिंगर अपनी फुल स्पीड पे थी, आराधना अपने बूब्स को पागलो की तरह प्रेस करने लगती है. उसके इमॅजिनरी वर्ल्ड मे कोई मर्द है जो उसके साथ खेल रहा है. " ऐसे ही...., प्यार करो मुझे...... आराधना के मूँह से खुद ही शब्द निकल रहे थे. उसकी बंद आँखो की इमॅजिनेशन से वो और ज़्यादा एग्ज़ाइटेड होती जा रही थी. फिंगर अंदर और ज़्यादा अंदर होती जा रही थी, तभी वो अपनी दूसरी फिंगर भी ट्राइ करती है. " औचह.........." उसे पेन हुआ और वो जैसे मन ही मन कहती है कि प्लीज़ आराम से, एक प्योर् सील पॅक चूत की मालकिन थी वो. अब वो एक ही फिंगर से लगी हुई थी, उसकी उत्तेजना फुल पीक पे थी. वो मर्द उसकी बॉडी को बुरी तरह रोंदे जा रहा था, उसकी इमॅजिनरी दुनिया उसको और एग्ज़ाइटेड कर रही थी. उसको खुद भी पता था कि उसके साथ कौन है उसकी ख्यालो की दुनिया मे. " आहह........ ओह.......... और उसकी बॉडी बुरी तरह अकड़ जाती है , पहली बार आराधना को अपने एंडिंग पॉइंट का अहसास हुआ था. जैसे ही उसका एंडिंग पॉइंट हुआ , उसको वो चेहरा दिखाई दे गया जो सपनो की दुनिया मे उसकी चुदाई कर रहा था और जो उसे इतना एग्ज़ाइटेड कर रहा था. वो चेहरा देखते ही उसकी आँखे एक दम खुल जाती है और हड़बड़ा कर वो अपनी नाइटी नीचे करती है और स्लोली स्लोली अपनी पैंटी उपर करती है.... आख़िर ये किसका चेहरा था....


दोस्तो आप लोग ही सोचो आराधना किसके ख्यालो मे मस्त हो रही थी



.पता नही कौन था उसकी ख्यालो क़ी दुनिया मे जो उसके बदन के साथ खेल रहा था, पता नही कौन था जो ख्वाबो मे उसके कुंवारे भड़कते यौवन की आग बुझा रहा था, कौन था जो खवाबो मे उसके कोमल बदन को रोन्द रहा था. वो जो भी था लेकिन उसने आराधना को चोंका दिया था, एक तरफ वो एग्ज़ाइटेड थी कि आज वो मास्टरबेट करने मे सक्सेस्फुल हो गयी और उसने वो सूख देख लिया जिससे वो अंजान थी. उसके चेहरे की ग्लो बता रही थी के उसने बहुत एंजाय किया, चेहरा चमक उठा था. चेहरे की शाइनिंग देखते ही बनती थी, पहला मास्टरबेशन कुच्छ ऐसा ही अहसास है जैसे किसी इंडिविजुयल ने अंतरिक्ष मे कोई रॉकेट उड़ा दिया हो. उसको अहसास हो गया था कि फर्स्ट टाइम सेक्स कितना पेनफुल हो सकता है क्यूंकी मास्टरबेशन के दौरान उसकी पुसी मे उसकी दूसरी फिंगर एंट्री नही ले पाई.


आराधना उठती है और वॉशरूम मे जाकर अपने हाथ हो धोने लगती है. तभी उसकी नज़रे सामने वाले मिरर पे पड़ती है, अपनी नज़रो से खुद नज़रे मिलते ही वो शरमा जाती है. फिर से मिरर मे चारो और घूम घूम कर अपने आप को देखती है, वो थोड़ा सा मॅक्सी को उठाती है और फिर नीचे कर देती है. और फाइनली बिस्तर मे आकर शांति से सो जाती है. वो एक ऐसी चैन की नींद थी जिसे वो ही समझ सकती थी. जवानी मे ये बदन वैसे ही नही सोने देता है जब तक की इसकी भूख ना मिटाई जाए.


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सनडे मॉर्निंग, सबसे पहले स्मृति उठ गयी है. आज ईव्निंग मे उन्हे शॉपिंग के लिए जाना है लेकिन अभी मॉर्निंग मे स्मृति ने उठ कर घर के ग्राउंड फ्लोर को क्लीन करना शुरू कर दिया. सफाई करते करते वो मीठी मीठी आवाज़ मे सॉंग गुनगुनाती रहती है. सफाई के दौरान अपने स्मार्टफॉन को चेक करती है, जिससे पे करीब 1 घंटे पहले ही उस ट्रिपल ऐक्स_लाइयन के नोटिफिकेशन्स आए हुए थे. " क्या ये सोता भी है या नही". स्मृति अपने मन मे बॅड बड़ाती है. और फोन को साइड मे रख कर फिर से सफाई मे लग जाती है. ठीक 10 मिनिट बाद फिर से एक नोटिफिकेशन आता है, नोटिफिकेशन साउंड को सुनकर वो भाग कर फोन के पास आती है लेकिन इस बार ये एरटेल की तरफ से स्मस था. वो अपने माथे पे हाथ मारती है कि क्या हर टाइम यही लगता है कि वो लाइयन ही परेशान कर रहा होगा. और फोन को रखने ही वाली थी कि फिर से एक नोटिफिकेशन दिखाई दिया, उसने तुरंत देखा और ये लाइयन का ही था.


लाइयन - यू देअर?


लाइयन - हेलो, एनी ब्यूटिफुल लेडी ईज़ देअर?


स्मृति - क्या बात है बताओ. क्या रात को सोते नही हो क्या?


लाइयन - सो क्या जब मेरे फ्रेंड्स के पास मेरे लिए टाइम ही नही है.


स्मृति - ओह्ह्ह तो इतने गम है तुम्हारी लाइफ मे. वैसे कौन दोस्त है जिसके पास तुम्हारे लिए टाइम है.


लाइयन - है एक बहुत ब्यूटिफुल आंड स्वीट लेडी. अपने घर मे ही बिज़ी रहती है, दोस्त चाहे भाड़ मे उसे किसी का ध्यान नही है.


स्मृति समझ गयी थी कि लाइयन का इशारा खुद उसी की तरफ था.


स्मृति - ऐसा भी हो सकता है कि उस ब्यूटिफुल लेडी पे और भी रेस्पॉन्सिबिलिटीस हो. और उसे टाइम ना मिल पाता हो, क्यू?


लाइयन - क्या हमारी ही इतनी बुरी किस्मत है कि हमे दोस्त भी वो मिली जो सबसे ज़्यादा रेस्पॉन्सिबल है सबके लिए बस अपने दोस्त के लिए ही नही.


स्मृति - हा हा हा हा हा


लाइयन - मेरा दोस्त स्माइल करता है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है.


स्मृति उसकी बात पढ़ कर शरमा सी जाती है.


स्मृति - लेकिन दोस्त ने इतनी बाते बनानी कहाँ से सीखी?


लाइयन - किस्मत सीखा देती है स्मृति जी. कौन सा हम मा के पेट से सीख कर आते है

.स्मृति - तुम्हारी बाते तो बस उपर वाला जाने. खैर और बताओ अब क्या कर रहे हो.


लाइयन - कपड़े उतार रहा हू.


स्मृति - तुम फिर से शुरू हो गये.


लाइयन - स्मृति जी अगर मे सच भी बोलू तो आपको लगता है मे शुरू हो गया. पता नही आपको तो मे ही सबसे बुरा लगता हू.


स्मृति - तो सुबह के 9 बजे है और तुमने मुझसे चाटिंग शुरू कर दी, पहले नहा ही लेते ना. किसने ज़बरदस्ती करी है.


लाइयन - वो स्मृति जी मे नहाने के लिए नही बल्कि सोने के लिए कपड़े उतार रहा था.


स्मृति - हा हा हा हा. फिर से सो रहे हो. गुड, सो जाओ.


लाइयन - फिर से नही, दर असल मे रात को सो ही नही पाया. इसीलिए अब सो रहा हू, अगर रात को सो गया होता तो अब नही सोता.


स्मृति - ठीक है अब चाटिंग बाद मे करना. कपड़े उतारो और सो जाओ, वैसे भी रात को मज़दूरी करी है बेचारे ने.


लाइयन - एक ही कपड़ा था बॉडी पे वो मे उतार चुका हू. और रात को मज़दूरी नही मेहनत करनी पड़ गयी थी स्मृति जी, जो मे पूरी मेहनत से करता हू.


स्मृति उसकी एक कपड़े वाली बात सुनकर शॉक्ड रह जाती है. उसके मन मे ये ख्याल आ रहा था कि क्या अब इसने कुच्छ नही पहना है. लेकिन शरम की वजह से वो पुछ नही सकती थी. चाटिंग करते करते कुच्छ दिन हो भी गये थे तो वो और धमकिया देना नही चाहती थी उसे.


स्मृति - ऐसी क्या मेहनत कर दी इस नालयक ने. पहाड़ तोड़ दिया क्या कहीं?


लाइयन - नही स्मृति जी, कल रात एक पार्टी मे गया था. वहाँ आप की जैसी एक भाभी से मुलाकात हो गयी और पूरी रात उसी के साथ मेहनत करने मे गुजर गयी.


लाइयन ने ये बात लिख तो दी लेकिन इस बात से स्मृति का पारा सातवे आसमान पे पहुँच गया.


स्मृति - यू ईडियट, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई उसको मेरा जैसे कहने की. कई बार मुझे लगता है कि उन्मेच्योर लड़का है लेकिन दिल का सॉफ है लेकिन तुम एक बेहद गंदे लड़के हो.


स्मृति का चेहरा गुस्से मे लाल हो चुका था.


लाइयन - स्मृति जी, क्या आप अपना सारा गुस्सा मेरे लिए ही बचा कर रखती है. मेरे कहने का मतलब था कि वो भाभी आप की तरह बेहद सुंदर और अट्रॅक्टिव लग रही थी. मेरा इमॅजिनेशन ऐसा था जैसे मे आपसे ही मिल रहा हू.


अपनी तारीफ सुन कर स्मृति थोड़ा रिलॅक्स हुई और अपने आप पर इतराती है.


स्मृति - ओके. तो घुमा फिरा कर बात मत किया करो. एनी वे लेकिन उसने तुमसे मेहनत कैसे कराई?


लाइयन - क्या स्मृति जी, कहीं आप दोबारा गुस्सा ना हो जाना लेकिन आप मेरी दोस्त है तो आपसे तो मे दिल की बात शेर कर ही लेता हू. आक्च्युयली कल एक फ्रेंड की बर्तडे पार्टी मे गया था. काफ़ी कलर्फुल पार्टी थी.


स्मृति- ह्म्*म्म्मम......

लाइयन - बिल्कुल आपके जैसी एक भाभी उस पार्टी की जान थी. ब्लॅक कलर की लोंग पार्टी ड्रेस मे वो एक अप्सरा लग रही थी. ड्रेस भी बॅकलेस थी तो उसकी नेक से लेकर कमर तक बॉडी का पूरा दीदार हो रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसी स्मृति जी ही उतर कर इस पार्टी मे आ गयीं हो. क्या बला की खूबसूरत थी वो. अगर मॅरीड ना होती तो कसम से शादी का पहला प्रपोज़ल मे ही देता. वो बात अलग है कि हम जैसे ग़रीबो के नसीब मे आप जैसे यानी उस भाभी जैसी खूबसूरती नही होती.


स्मृति इनडाइरेक्ट्ली अपनी तारीफ सुनकर पागल हुए जा रही थी. लाइयन भी मँझे हुए खिलाड़ियो की तरह पेश आ रहा था.


स्मृति - ह्म्*म्म.........


लाइयन - फिर क्या स्मृति जी, अपने हज़्बेंड के साथ खड़े होकर ड्रिंक ले रही थी लेकिन निगाहे चारो और ज़्यादा उजाला फेला रही थी. जैसे ही उसकी निगाहे मुझसे मिली, आदत से मजबूर हमारी एक आँख दब गयी उसकी तरफ.


स्मृति - कितने जूते पड़े फिर. मेरी जैसी शरीफ लेडी के साथ बद तमीज़ी करोगे तो जूते ही पड़ेंगे.


स्मृति भी ऐसे पेश आने लगी थी जैसे वो खुद फील कर रही हो कि सब कुच्छ उसके साथ ही हो रहा हो.


लाइयन- बचपन से आदत है जी, खूबसूरत माल को देखते ही आँख खुद दब जाती है. ड्रिंक करते हुए जब उसने मुझे आँख मारते हुए देखा तो उसे यकीन नही हुआ यानी वो श्योर नही थी. तिरछी निगाहो से उसने फिर देखा तो फिर से एक बार आँख दबा दी.


स्मृति खूबसूरत माल जैसे शब्द सुनकर और हॅपी हो रही थी लेकिन लाइयन को दिखा नही रही थी.


स्मृति - अच्छा....


लाइयन - उसके मूँह से एक हल्की सी स्माइल निकली और उस स्माइल पे तो मे मर मिटा. आख़िर वो मुझे अपने बेस्ट फ्रेंड जैसी लग रही थी यानी आपके जैसी.


स्मृति - ज़्यादा मक्खन मत लगाओ और आगे बताओ.


लाइयन - बस नैन मिलते रहे और जितनी बार भी मिले, हमारे नैन तो अपना कमाल दिखाते ही रहे. जब खूबसूरत आपके जितनी तो एक दो बार फ्लाइयिंग किस भी दे दी.


स्मृति - अगर मे होती तो कस के थप्पड़ जमाती.


लाइयन - आपके जैसी ब्यूटिफुल, स्वीट, हॉट, सेक्सी बॉम्ब मुझे थप्पड़ मारे तो जिंदगी भर ख़ाता रहू कसम से.


स्मृति - खैर बाते बनाने मे तो तुम्हारा कोई जवाब नही है अब आगे बताओ.


लाइयन - फिर क्या था मेने इशारे मे उससे उसका फोन नंबर माँगा लेकिन उसने चारो तरफ देख कर और सही मौके पे मुझे स्माइल करते हुए मना कर दिया.


स्मृति - गुड लेडी....


लाइयन - प्लीज़ मुझे गालियाँ मत देना लेकिन उसकी खूबसूरती से पागल हो चुका था मे. वो अकेले चलते वहाँ पहुँच गयी जहाँ डीजे स्टेज लगा हुआ था. चलने मे जो बात थी क्या बताऊ, उसके ,,,,, ऐसे मटक रहे थे जिससे सॉफ पता चल रहा था कि कितनी गदराई हुई बॉडी की मालकिन है.


स्मृति - गुड बॉय, अच्छा है कि सॉफ सॉफ नही लिखा.


लाइयन - आप बताएए ना कि चलते हुए क्या मटक रहे थे.


स्मृति - हप!!!! आगे बताओ



लाइयन - तो मुझे ही बताना पड़ेगा कि क्या मटक रहे थे क्यूंकी मेरी खूबसूरत दोस्त को नही समझ आया.


स्मृति - चलते हुए उसके हिप्स मटक रहे थे. अब खुश!! वैसे तुम्हारी जान कारी के लिए बता दू कि ये नॅचुरल है, कोई लेडी आप जान के ऐसा नही करती.


लाइयन - क्या आपके साथ कभी किसी पार्टी मे ऐसा हुआ है क्या?


स्मृति - जान ना ले लू उसकी जो ऐसा कर दे. तुम आगे बताओ


लाइयन - वो धीरे धीरे चल कर वहाँ पहुँच गयी जहाँ डीजे स्टेज था. दूसरी तरफ मे भी धीरे धीरे चला और डीजे स्टेज की दूसरी साइड खड़ा हो गया. अब वो और मे आमने सामने था और बीच मे डीजे स्टेज था.


स्मृति - ओके..


लाइयन - जैसे जैसे मौका मिलता मे उसे कोई ना कोई इशारा कर देता. फोन नंबर दोबारा माँगा तो उसने मना कर दिया, फ्लाइयिंग किस दी तो हंस के टाल दिया. इशारे मे उसे ये बताया कि तेरी बॉडी नही आग की भट्टी है जिसमे कोई भी जल जाए और वो धीमे धीमे स्माइल करती रही. फिर एक बार मेने उसे अपने थंब और फिंगर को गोल करके, उसके बीच मे उंगली डाल कर इशारा किया. 


स्मृति - ओह माइ गॉड. क्या अब भी वो हँसती रही, उसने दो थप्पड़ नही जड़े तुम्हारे.


लाइयन - तो यानी आपको पता है कि वो इशारा किस चीज़ का होता है?


स्मृति - ज़्यादा स्मार्ट मत बनो. आगे बताओ.


स्मृति समझ गयी थी कि लाइयन ने उसकी बात पकड़ ली है.


लाइयन - थप्पड़ तो नही लेकिन धीरे धीरे वो मेरी तरफ चल कर आने लगी. सच कह रहा हू स्मृति जी मेरी तो फट गयी कि बेटा आज तो गया.


स्मृति - हा हा हा हा हा हा. गुड


लाइयन - वो धीरे धीरे चल कर मेरे तरफ आने लगी. मेरी तो साँसे ही अटक गयी थी, समझ आ गया था कि खूबसूरती बस धोका देती है.


स्मृति - गुड, ऐसा काम करोगे तो धोका ही मिलेगा.


लाइयन - वो आकर मेरे सामने खड़े हुए आदमी के पास आकर रुक गयी. उस आदमी की पीठ मेरी तरफ थी, और बोली के मे टाय्लेट जा रही हू. ये बात दर असल अपने हज़्बेंड को बोल रही थी जो मेरे सामने ही खड़ा था. मेरी जान मे जान आई और मेने एक बार और हिम्मत करके इशारे मे पुछ लिया कि इस पार्टी हॉल मे टाय्लेट कहाँ है. इस इशारे के टाइम उसका हज़्बेंड मुझे नही देख सकता था क्यूंकी उसकी पीठ मेरी तरफ थी.


स्मृति - फिर??


लाइयन - फिर क्या था, वो स्टाइल मे आगे बढ़ी और अपने हज़्बेंड को हग किया. अब उसका फेस मेरी साइड था और अपने हज़्बेंड के शोल्डर पे रखा हुआ था. और धीरे से अपने हज़्बेंड के कानो मे बोला कि हनी टाय्लेट सेकेंड फ्लोर पर है. ये बोलते हुए उसकी सेक्सी आइज़ मेरी साइड थी. मे समझ गया कि ये हिंट मुझे ही दिया गया है. मे ये भी समझ गया कि इस पार्टी हॉल से वो अच्छी तरह से वाकिफ़ है.


स्मृति - ओह्ह नो. शी वाज़ आ बिच.


लाइयन - वो जो भी थी लेकिन कसम से थी जबरदस्त. सच बता रहा हू कि अभी भी सोच रहा हू तो मेरा बाबू आसमान छुने की कोशिश कर रहा है.


स्मृति को भी काफ़ी टाइम हो गया था हज़्बेंड के साथ सेक्स किए हुए. ये एरॉटिक सिचुयेशन उसके चेहरे को और लाल कर रही थी.


स्मृति - बाबू?? ये क्या है?


लाइयन - समझिए ना स्मृति जी. बाबू यानी मेरा लंड.


लाइयन ने भी तुरंत मौके को देख कर टाइप कर दिया. स्मृति को पता था क़ी वो बिना कुच्छ पहने चॅट कर रहा है. इसीलिए उसकी एक फुल पिक्चर स्मृति के माइंड मे घूम गयी.


स्मृति - रहोगे जाहिल ही. अगर चॅट करनी है तो अंडरवेर पहनो और उसके बाद ऐसी बात ना करना.


लाइयन- लेकिन स्मृति जी...


स्मृति - लेकिन क्या?


लाइयन- आप तो मॅरीड है. डेली लंड को देखती ही होंगी, जब ये खड़ा होता है तो अंडरवेर मे कैसे समाएगा. वैसे भी मे फ्रेंची पहनता हू.


स्मृति ये ऐसी बाते सुन कर पता नही क्यू परेशान हुए जा रही थी. लाइयन की इस बात से उसे ये भी याद आ गया था कि वाकई मे उसे अपने हज़्बेंड से मिले हुए कुच्छ दिन ही गये थे. लाइयन की ये गंदी लॅंग्वेज उसके माइंड पे हावी हुए जा रही थी लेकिन वो शो नही कर रही थी.


स्मृति - बेशर्मी की भी हद होती है. अभी ट्राउज़र पहनो या कुच्छ भी पहनो और तभी चॅट करना. क्या तुम्हारे घर मे कोई मा या बहन नही है अगर कोई तुम्हे बिना कपड़ो के देख ले तो.


लाइयन - जी मेडम लो पहन लेता हू. लेकिन आपकी जान कारी के लिए बता दू कि मेरे घर मे मा बहन सब है लेकिन सब अपनी अपनी लाइफ मे मस्त है और सब अपने अपने रूम मे है. रही बात देखने की तो मे खुद जाकर तो दिखा नही रहा हू, अगर वो खुद ही देख ले तो उनकी अच्छी किस्मत से मे क्यू जलु.


स्मृति मन मे सोच रही थी कि ये कोई बेहद नालयक लड़का है. लेकिन दूसरी तरफ उससे चाटिंग करने की स्मृति को आदत भी पड़ गयी थी. वो रिलॅक्स थी क्यूंकी उसे ऐसा लगता था कि चाटिंग ही तो है. कुच्छ देर तक लाइयन का कोई रिप्लाइ नही था क्यूंकी शायद वो ट्राउज़र पहन रहा था या पहन ने का बहाना कर रहा था.


लाइयन - आइ आम बॅक...


स्मृति - ओके. अब बताओ अपनी उस बिच भाभी के बारे मे.


लाइयन - अगर कुच्छ नही सुन ना तो मत सुनो लेकिन मेरी उस भाभी के बारे मे कुच्छ मत कहो स्मृति जी.


स्मृति - ओह्ह हो. तो इतना लव हो गया है उस भाभी से.


लाइयन - लव की बात नही है. दर असल उसमे मुझे आपकी छवि दिखाई देती है और कोई आपके बारे मे कुच्छ बोले तो उसकी मा....


स्मृति को ये बात सुनकर अच्छा भी लगा और गुस्सा भी आया क्यूंकी उसने फिर से गंदी लॅंग्वेज यूज़ करने की कोशिश की. लेकिन स्मृति ने अब उसकी इन हर्कतो को इग्नोर करना शुरू कर दिया था ये स्पच कर कि है ही गँवार.


स्मृति - ओके ओके. सॉरी, चलो आगे बताओ.


लाइयन - सभी लोग पार्टी के लिए ग्राउंड मे थे. वो भाभी धीरे धीरे बिल्डिंग के लिए अंदर जाने लगी. लोंग ड्रेस को उसने अपने हाथो से पकड़ा हुआ था और थोड़ा सा ज़मीन से बचाती हुई चल रही थी, धीरे धीरे सबकी नज़रो से बचते हुए मे भी पीछे चल दिया.


स्मृति - ह्म्*म्म्ममम.......


लाइयन - वो मेरे आगे थी और उसकी नंगी पीठ ठीक मेरी आँखो के सामने थी. उसने पीछे मूड कर मुझे देखा और एक स्माइल दी. कसम से मुझे ऐसा लग रहा था जैसे स्मृति जी मेरे सामने हो. मे भी पागलो की तरह पीछे चला जा रहा था.


स्मृति भी ना चाहते हुए ऐसे मुकाम पर आ गयी थी जहाँ लाइयन मे उसको ऐसा फील करना शुरू कर दिया था कि वहाँ कोई भाभी नही बल्कि स्मृति खुद ही थी. स्मृति के कान गरम हो चुके थे, आँखे मॉर्निंग टाइम मे ही लाल हो रही थी. बड़ी मुश्किल से वो अपने को संभाले हुए थी.


स्मृति - ह्म्*म्म्मम.....


लाइयन - वो धीरे धीरे बिल्डिंग की तरफ बढ़ती जा रही थी. मुझे लगता है कि उसकी गान्ड आप के जितनी ही सेक्सी होगी जिसपे मेरी निगाह पूरी लगी हुई थी. सच बोल रहा हू मे उसे ऐसे देख रहा था जैसे स्मृति को देख रहा हू. मेरा लंड खड़ा होने लगा था.


वो गंदी पे गंदी लॅंग्वेज यूज़ किए जा रहा था लेकिन आज स्मृति उसे नही रोक पा रही थी बल्कि चाटिंग मे पूरा सपोर्ट कर रही थी.


स्मृति - फिर???


लाइयन - उसने बिल्डिंग मे एंट्री ली और स्टेर्स लेकर उपर चली गयी. धीरे धीरे मे बिल्डिंग मे पहुँचा और मुझे सीढ़ियाँ दिखाई दी लेकिन स्मृति दिखाई नही दी. ओह्ह सॉरी भाभी दिखाई नही दी.


स्मृति की साँसे तेज होती जा रही थी. उसे ऐसा लग रहा था जैसे लाइयन उसी की तरफ बढ़ रहा हो.


स्मृति - फिर??


लाइयन - मे फर्स्ट फ्लोर पे पहुँचा और उसके बाद सेकेंड फ्लोर पे. लेकिन वो मुझे दिखाई नही दे रही थी. मे उसे पागलो की तरह ढूंड रहा था जैसे कोई पागल प्रेमी अपनी लैला को ढूंड रहा हो.


स्मृति - ओके... मिली या नही?


लाइयन - टाय्लेट मे ढूँढा, ईवन लॅडीस टाय्लेट मे भी ढूँढा लेकिन नही मिली. बिल्डिंग मे कोई नही था, चारो तरफ भाग भाग कर पागल हो रहा था. तभी मुझे उस बिल्डिंग की किचन मे से आवाज़ कुच्छ आवाज़ आई.


स्मृति -फिर??


लाइयन - किचन मे जैसे ही मे पहुँचा. मे रिलेक्स हो गया, वो वोही थी. बड्रे रेफ्रिजरेटर से पानी की बॉटल निकाल कर पी रही थी. वो अपने बाल खोल चुकी थी. स्मृति जी ऐसे लग रही थी जैसे सेक्स की देवी हो.


स्मृति की हालत और खराब हुए जा रही थी.


स्मृति - फिर क्या हुआ???


लाइयन - उसकी और मेरी आँखे मिली, पता नही क्यू मुझे फिर से ऐसा लगा जैसे मेरे सामने स्मृति खड़ी हो. मेने उससे पुछा पानी मिलेगा? वो घूम गयी और फिर से पीठ मेरे सामने थी. मे धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ा. उसकी मस्त मोटी मोटी गान्ड मुझे इन्वाइट कर रही थी. मे उसके बहुत करीब पहुँच गया.


स्मृति - यार बहुत स्लो टाइप करते हो. जल्दी जल्दी लिखो ना.

स्मृति भी आज उतावली हो रही थी ये जान ने के लिए कि आख़िर क्या हुआ.


लाइयन - अब मे कोई रोमॅंटिक हीरो तो था नही जो टाइम लगाता. जाकर उसकी पीठ पे दोनो हाथ रख दिए, उसकी दोनो आँखे बंद हो गयी. मे समझ गया कि लोहा गरम है. मेने अपने दोनो होठ उसकी गर्दन पे टिका दिए. क्या खुसबु आ रही थी उसके बदन से. उसको गर्दन पे किस करते करते मेने अपने दोनो हाथ उसकी ड्रेस मे घुसा दिए और उसकी चुचियों को पकड़ लिया. क्या चुचियाँ थी उसकी शायद बिल्कुल आपके जैसी साइज़ 38 डी से कम नही होगा.


स्मृति तो खो चुकी थी. उसने आज तक ऐसी चाटिंग नही करी थी.


स्मृति - जी नही, मेरा साइज़ 38 डी नही है.


लाइयन - जो भी आपका साइज़ है लेकिन उसकी चुचियो को मे यही सोच कर दबा रहा था कि वो आपकी ही है.


स्मृति - लेकिन क्यू सोच रहे थे कि वो मे हू?


लाइयन - इससे मेरे लंड मे और ताक़त आ जाती है जैसे कि अभी भी ट्राउज़र से भी बाहर निकलने को तैयार हो रहा है.


स्मृति - हा हा हा हा. तो कोई ले आओ ना जो इसे शांत कर दे.


लाइयन - कभी ना कभी आएगी ही वो. मुझे अपने प्यार पे पूरा भरोसा है.


धीरे धीरे मे भी उसके पीछे पीछे चल दिया. वो सेकेंड फ्लोर के एक कॉर्नर मे मूड गयी और थोड़ा दूर चलते ही एक रूम के अंदर चली गयी. मेरी फट तो रही थी लेकिन हिम्मत करके मे भी अंदर चला गया. वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी. मेरे अंदर घुसते ही वो अपने दोनो हाथ पीछे ले गयी और अपने ड्रेस की नाट खोली और ड्रेस एक दम नीचे. अब वो बस अपनी पैंटी मे थी. क्या नज़ारा था स्मृति जी, इतनी सुंदर लेडी आज बस मेरे सामने पैंटी मे थी. लड़को के लिए तो किसी लड़की की पैंटी ही देखना काफ़ी होता है यहाँ तो पैंटी मे एक खूबसूरत बदन भी था.


स्मृति - ज़्यादा पैंटी देखने का शोक है तो घर मे देख लिया करो. किसी ना किसी की दिख ही जाएगी.


स्मृति ने उसका मज़ाक उड़ते हुए कहा.


लाइयन - हर किसी की पैंटी का कलर, साइज़ , ब्रांड सब पता है मुझे.


लाइयन ने भी बेशर्मी से जवाब दिया.


स्मृति - तुम तो हो ही निकम्मे. आगे बताओ.


लाइयन - मेने आगे एक कदम ही बढ़ाया था कि वो उसी पोज़िशन मे धीमे से बोली कि क्लोज़ दा डोर. उसके ये बोलते ही मुझे समझ आ गया कि मुझे थप्पड़ क्यू पड़ा था. मेने गेट बंद करा और आगे बढ़ा, ऐसे लग रहा था जैसे आग की तरफ बढ़ रहा हू. आगे बढ़कर मेने उसे जैसे ही बाँहो मे लिया उसके मूँह से आअहह निकल गयी. मे समझ गया कि वो प्यासी है. और मुझसे बेहतर उसकी प्यास भुजाने वाला भला कौन होता.


स्मृति को पढ़ते हुए भी डर लग रहा था कि पता नही अब क्या होगा. इमॅजिनेशन इस उस दुनिया मे ट्रिपल ऐक्स_लाइयन उसे डाल चुका था जिसमे उसे यही लग रहा था कि सब कुच्छ उसी के साथ हो रहा है.


स्मृति - फिर क्या हुआ?


लाइयन - क्या मुझे तुम्हारी, सॉरी उस भाभी की प्याअ बुझा देनी चाहिए?


स्मृति - शायद वो प्यासी है ही नही.


स्मृति का इशारा अपनी तरफ था.


लाइयन - क्या अपने हुश्न की वो दो बूँद अपने आशिक के उपर नही गिरा सकती. क्या वो यही चाहेगी कि उसका आशिक पैदा हो और मर जाए बिना उसे पाए ही.


स्मृति - देखो मेरी मजबूरी समझो.


स्मृति ने जैसे ही टाइप करके भेजा उसे अपनी ग़लती का अहसास हो गया कि उसने क्या टाइप कर दिया.


स्मृति - मेरा मतलब है कि अपनी उस भाभी की मजबूरी समझो. 



स्मृति ने जैसे ही टाइप करके भेजा उसे अपनी ग़लती का अहसास हो गया कि उसने क्या टाइप कर दिया.


स्मृति - मेरा मतलब है कि अपनी उस भाभी की मजबूरी समझो.


जैसे जैसे स्मृति कन्फ्यूज़ हो रही थी, वैसे वैसे लाइयन को अहसास हो रहा था कि उसका जादू चल रहा है.


लाइयन - खैर छोड़ो, आगे बताऊ?


स्मृति - हाँ बताओ


लाइयन - उसके नंगे बदन को पकड़े हुए मेने उसके कानो मे किस करते हुए पुछा की आए हुष्ण की ज्वालामुखी तेरा नाम क्या है. पता है उसने क्या जवाब दिया?


स्मृति - क्या?


लाइयन - उसने बोला कि मेरा नाम स्मृति है.


स्मृति - तुम झूठ बोल रहे हो. ये नाम तुम जान बुझ कर बता रहे हो.


लाइयन - उसने मुझे यही नाम बताया अब अगर आप कहो तो मे अपनी तरफ से बदल देता हू.


स्मृति - ये अहसान करना ज़रूरी नही है. आगे बको


लाइयन - स्मृति के कंधो को पकड़ मेने अपनी तरफ घुमाया, उसका गुलाब जैसा चेहरा मेरे सामने था और गुलाबी होठ भी. मेने अपने दोनो होंठ उसके गुलाबी होंठो पे रख दिए. उसकी दोनो चुचियाँ मेरे सीने मे गढ़ रही थी. स्मृति ने मेरे शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए थे. स्मृति मेरे साथ ऐसे पेश आ रही थी जैसे मुझे खा जाएगी. मेरी शर्ट उतार दी उसने.


लाइयन का इशारा स्मृति की तरफ था.

स्मृति - उसे क्या वो भाभी समझा है. वो कभी नही आएगी. लेकिन तुम आगे बताओ.


स्मृति को अपनी चूत की मूव्मेंट पता चल रही थी. सच तो ये है कि उसकी चूत सुबह सुबह ही गीली हो गयी थी.


लाइयन - फिर उसके लेफ्ट बूब्स पर से मेने हाथ हटाया और उसकी ड्रेस की नेक पर बनी नाट को खोलने लगा मे. स्मृति जी उसने वो ज़रा जिससे मुझे और लगने लगा कि वाकई मे वो आपके जैसी है. वो घूमी और कस के एक थप्पड़ दिया मेरे गाल पे.


स्मृति - हे... क्यू बच्चू मज़ा आया. बड़े आए बूब्स दबाने वाले.


स्मृति भी थोड़ा ओपन हो रही थी उसके साथ.


लाइयन - थप्पड़ मारते ही वो स्लो मोशन मे आगे की ओर चल दी और किचन के गेट पर पहुँच कर फिर से एक बार मूडी और मुझे फिर से एक स्माइल दी. थप्पड़ खाने के बावजूद मे उसके बदन का भूखा था.


लाइयन - कैसी लगी मेरी चेस्ट???


स्मृति - मुझसे क्यू पुच्छ रहे हो?


लाइयन - नही मेने लिप्स को अलग करते हुए उससे पुछा कि कैसी लगी मेरी चेस्ट और वो कुच्छ नही बोली. मे समझ गया कि उसे पसंद आई. मेने अपने आपको झुकाया और अपने लिप्स को स्मृति के बूब्स पे रख दिया, मेरा स्टाइल थोड़ा अलग है तो मे उन्हे दबा भी रहा था और चूस भी रहा था. स्मृति आअहह करे जा रही थी.


स्मृति - क्या आराम से पेश नही आ सकते थे.


लाइयन - लेकिन स्मृति जी वो बोले तो सही. वो तो ऐसे पेश आ रही थी जैसे कब से अपनी चुचियाँ मुझसे ही दब्वाने को बचा कर रखी हो. ये काफ़ी देर चला फिर मेने अपने हाथ स्मृति की पैंटी की तरफ बढ़ाए. पैंटी जैसे ही थोड़ी नीचे हुई मुझे समझ आ गया कि जितनी खूबसूरत स्मृति है उतनी ही खूबसूरत उसकी चूत है. उसकी चूत पे घने बाल थे.


स्मृति - छ्ह्हि, गंदी कहीं की.


लाइयन - क्यू तुम्हे घने बाल अच्छे नही लगते.


स्मृति - वैसे मे तुम्हे क्यू बताऊ? लकिन फिर भी हिंट दे देती हू कि मुझे क्लीन रहना पसंद है.


लाइयन - बिल्कुल क्लीन?


स्मृति - यस. और अब ज़्यादा मत पुछो. बताओ क्या हुआ.


लाइयन - उसकी पैंटी नीचे होते ही मेने उसे लेटने का इशारा किया स्मृति के लेट ते ही मेने अपना मूँह उसकी चूत पे लगा दिया.


स्मृति को ऐसा लगा जैसे वो मर ही जाएगी. 3 बच्चो की मा होने के बावजूद आज वो एक कमसिन लड़की की तरह फील कर रही थी. उसको फील होने लगा था कि बॉडी मे फीलिंग आ चुकी है.


स्मृति - फिर?


लाइयन - मे स्मृति की चूत को पागलो की तरह चाट रहा था. वो बड़बदाए जा रही थी कि क़िस्स्सस्स मी....... कभी का ही अपने लिप्स वहाँ से हटा कर अपनी 2 फिंगर उसकी चूत मे घुसा देता था. कितना पानी था पता नही उसकी चूत मे. गर्दन इधर उधर पटक रही थी. मे समझ गया था कि इसको प्यार की ज़रूरत है लेकिन बदनामी से डरती है. उसकी चूत को करीब 10 मिनिट तक मे ऐसे ही चूस्ता रहा.



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