त्यागमयी माँ और उसका बेटा अध्याय 11

 त्यागमयी माँ और उसका बेटा  अध्याय 11





नमिता ने कपड़े बदले और सिर्फ़ एक नायटी डाल ली और खाना तय्यार किया। तभी राज आया और नमिता से लिपट गया। नमिता ने उसको प्यार करते हुए पूछा: आज बहुत दिन बाद स्कूल गए कैसा लगा?

राज: बहुत अच्छा लगा माँ। शीला आंटी मिली थीं वो मुझे लाइन मार रहीं थीं। 

नमिता: फिर तूने क्या किया?

राज: माँ मैंने उनकी तरफ़ ध्यान ही नहीं दिया , मुझे तो ये मिल गए हैं अब उनसे क्या काम? उसने नमिता की चूचियाँ दबाते हुए कहा। 

नमिता की बिना ब्रा की चूचियाँ उसे दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उसने नमिता की नायटी उठाकर उतारी और अपनी पैंट उतारकर चड्डी भी उतारा और वहीं नमिता को सोफ़े पर लिटाकर चुदायी करने लगा। नमिता भी मज़े से चुदवाने लगी। धमाकेदार चुदायी के बाद दोनों शांत हो गए। 

फिर दोनों खाना खाने बैठ गए।

उस दिन दोपहर की चुदायी के बाद नमिता सोने चली गयी और राज पढ़ने बैठ गया। 

शाम को नमिता ने चाय पिलाई और राज बाहर खेलने चला गया। नमिता भी सुषमा के घर गई। सुषमा अकेली ही थी। दोनों बातें करने लगीं। 

सुषमा: तो क्या सोचा ? मुझे राज से चुदवाओगी क्या?

नमिता: देखो सुषमा, मैं नहीं चाहती कि राज अब फिर से भटके। उसकी पढ़ाई बहुत ज़रूरी है और अगर उसको तुम्हारी चुदाई का चस्का लग गया तो वो जब दिल चाहेगा अपनी पढ़ाई का नुक़सान करके तुमसे मज़े लेने आ जाएगा, क्योंकि तुम बिलकुल पड़ोस में ही हो। 

सुषमा: हाँ वह तो है।

नमिता: अभी वह मुझे दिन में दो से तीन बार चोद देता है। उसे इसी में संतुष्ट रहने दो। मैं और भटकाव नहीं चाहती। स्कूल में भी शिला मैडम उसे पटाने के चक्कर में है। उसे भी रोकना होगा। 

सुषमा: ठीक है कोई बात नहीं। पर रात को कल मैंने राजन और राजू से चुदवाते हुए तुम्हारे सेक्सी बदन की तारीफ़ की। राजन बोले कि काश मैं नमिता को चोद पाता ।तब राजू भी बोला कि पापा मेरा भी नम्बर लगा देना, आंटी बहुत सेक्सी है। 

नमिता : ओह दोनों एसा बोले? तुम क्या बोलीं?

सुषमा: मैं बोली कि तुम राज की माँ को चोदना चाहते हो, अगर राज भी मुझे चोदना चाहे तो?

नमिता: ओह , फिर क्या बोले वो दोनों?

सुषमा: वो बोले तो क्या हुआ तुम भी राज से चुदवा लेना। उसमे हर्ज ही क्या है। 

नमिता: ओह तो इनको भी कोई इतराज नहीं है। 

सुषमा: एक बात बोलूँ? अगर तुम नहीं चाहती कि राज मुझे चोदे तो कोई बात नहीं,पर क्या तुम उन दोनों से चुदवा सकती हो? 

नमिता: क्यूँ तुम तो उनको मज़े दे ही रही हो, फिर मेरी क्या ज़रूरत है?

सुषमा: मेरे जब पिरीयड्ज़ आते हैं तो राजू मेरी गाँड़ मारता है । अब वह एक दिन में ४/५ बार गाँड़ मारकर मुझे बहुत त्रस्त कर देता है। राजन को तो मैं मुँह से या हाथ से भी शांत कर देती हूँ, पर राजू को तो छेद ही चाहिए। 

नमिता: ओह, ये बात है। 

इतनी देर तक चुदाई की बातें करने से नमिता की बुर गीली हो गयी थी। उसने सलवार के ऊपर से अपनी बुर को सहलाया। 

सुषमा: बुर चूस दूँ क्या? लगता है चुदासि हो रही हो?

नमिता: हाँ यार, इतनी देर से ये बातें सुनकर सच में खुजाल मच रही है। राजू कब तक आएगा?

सुषमा: अरे अभी समय है, चलो बेडरूम में, मस्ती करते हैं। 

दोनों उठकर बेडरूम में गयीं और नमिता ने अपने कपड़े खोलने शुरू किए। सुषमा भी पूरे कपड़े निकाली और बिस्तर पर लेट गयी। अब नंगी नमिता भी उसपर चढ़ गयी और उनके होंठ एक दूसरे से चिपक गए। उनकी जीभ भी एक दूसरे के मुँह में समा रही थी। फिर वो छातियाँ दबाने लगीं और मुँह में लेकर चूसने भी लगीं। नमिता ने अपनी बुर उसकी बुर के ऊपर रखा और रगड़ने लगी। 

थोड़ी देर बाद वो दोनों ६९ की पज़िशन में आ गयी और एक दूसरे की बुर चाटने लगीं। नमिता ने सुषमा की बुर में तीन उँगलियाँ डालीं और उसके clit को जीभ से सहलाने लगी। सुषमा ने भी नमिता की बुर में तीन उँगलियाँ डालीं और वह भी उसकी clit को जीभ से छेढने लगी। दोनों मज़े से हाऽऽऽऽऽऽय्यय और आऽऽऽऽहहहह करने लगीं। सुषमा ने नमिता की गाँड़ में भी एक ऊँगली डाली और नमिता उइइइइइइइइ कर उठी। नमिता ने भी सुषमा की जाँघों को उठाया और उसकी गाँड़ भी चाटने लगी। सुषमा भी आऽऽऽहहह मरीइइइइइइइ दीदीइइइइइइइ कहकर अपनी बुर को उसके मुँह में रगड़ने लगी और झड़ने लगी। नमिता भी अपनी clit में उसकी जीभ के आभास को और बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसके मुँह में झड़ने लगी। 

अब दोनों झड़कर अग़ल बग़ल लेटी हुई एक दूसरे का बदन सहला रहीं थीं। 

सुषमा: दीदी, मेरा कल या परसों पिरीयड आ जाएगा , आप चुदवाओगी क्या राजन और राजू से?

नमिता: तू क्या चाहती है?

सुषमा: दीदी मेरी गाँड़ फाड़ देता है ये राजू का बच्चा, अगर आप चुदवा लोगी तो ये मुझे शायद एक या दो बार तंग करेगा , अभी तो बस मेरी गाँड़ मार मार के दुखी कर देता है। 

नमिता: अरे पर मैं तो एक बार ही करवाऊँगी। मुझे राज को पता भी नहीं लगने देना है। 

सुषमा: कोई बात नहीं दीदी एक बार करवाओगी तो कम से कम मेरी गाँड़ एक बार तो कम मारेगा। मेरे लिए यही बहुत है। 

नमिता: ठीक है जब तेरा पिरीयड आ जाए तो बता देना, मुझे १-२ बजे दोपहर ही जमेगा। राज २:३० बजे के क़रीब आता है। 

सुषमा: राजू तो १ बजे ही आ जाता है। राजन भी लंच पर घर आ सकते हैं। 

नमिता: चल ठीक है तेरे लिए भी सही।

फिर वो फ़्रेश हुईं और नमिता वापस अपने घर आ गयी। थोड़ी देर में राज भी पसीने से भीगा हुआ घर आया और बोला: माँ आज बहुत अच्छी प्रैक्टिस हुई फ़ुट्बॉल की। 

नमिता: रोज़ खेला कर शाम को, सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है।

राज ने अपने कपड़े उतार दिए और सिर्फ़ चड्डी में आकर अपने कपड़े सुखाने लगा। नमिता ने पसीने से भरा उसका मस्कूलर बदन देखा और चड्डी में उसका मूसल अलग से बहुत मादक दिख रहा था। नमिता वहाँ से हट गयी उसे लगा कि अगर वह थोड़ी देर और खड़ी रही तो वह राज से लिपट जाएगी और अभी के अभी चुदवा लेगी। 

किचन में जाकर उसने अपनी बुर को सलवार के ऊपर से सहलाया और सोची कि उसे अभी पढ़ाई करनी है नहाने के बाद। चुदायी रात को ही होगी। 

रात को खाना खाने के बाद राज और पढ़ाई किया और जब वह वापस आया तो नमिता सो चुकी थी। पर राज बहुत उत्तेजित था , उसने नमिता की चूचियाँ दबायीं और नमिता के जागते ही उस पर टूट पड़ा, और जल्दी ही घमासान चुदायी होने लगी। आज राज का गाँड़ मारने का भी मूड था। उसने नमिता को बताया तो वह मुस्कुराती हुई पलट गयी और अपने चूतरों को ऊपर उठाके उसको अपनी गाँड़ का दर्शन कराई। राज भी क्रीम लगाके उसकी गाँड़ की ठुकाई में लग गया और पीछे से उसकी चूचियाँ भी दबाने लगा। जल्दी ही नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके चिल्लाई। 

राज ने अपनी उँगलियाँ नीचे से बुर की clit पर लगायीं और वहाँ मलने लगा। अब नमिता की मस्ती अपनी सीमा पार कर गई और वह चिल्लाई आऽऽऽऽऽऽऽऽह बेएर्रेएएएएएएटा मैं गइइइइइइइइइइ । उसी समय वह भी ह्म्म्म्म्म कहकर अपना पानी उसकी गाँड़ में छोड़ने लगा।

शीघ्र ही दोनों खलास होकर सो गए। 

सुबह नमिता चाय लेकर आयी और फिर से दोनों ने ख़ूब एक दूसरे का बदन रगड़ा, और नमिता उस पर चढ़ कर चुदायी करने लगी। आख़िर में राज ने उसको पलट कर नीचे किया और तूफ़ानी चुदायी के साथ दोनों शांत हो गए।

फिर राज स्कूल के लिए तय्यार हुआ और नमिता को चूम चाट कर नाश्ता करके चला गया। 

नमिता भी तय्यार होकर ऑफ़िस गयी। मनीष आज ऑफ़िस नहीं आया था क्यूँकि उसकी कोई मीटिंग थी। 

अचानक उसका फ़ोन बजा सुषमा बोली: नमिता, देख मेरा पिरीयड आ गया और पहले दिन मुझे बहुत तख़लीफ होती है, तू आज राजू और उसके पापा को सम्भाल लेगी क्या? 

नमिता: ओह ठीक है देखती हूँ मैं १२ बजे तक आने की कोशिश करती हूँ। उन दोनों से बात हो गयी है ना?

सुषमा: अरे वो तो कल से ही मरे जा रहे हैं। 

नमिता हँसते हुए: अच्छा चल देखती हूँ।

अब उसका काम ख़त्म होने के बाद वो मनीष के ऑफ़िस में मुझे काम है मैं जा रही हूँ कहकर १२ बजे निकल आयी और घर पहुँचकर सुषमा से फ़ोन पर बोली:मैं घर आ गयी हूँ। वो मेरे घर आएँगे या मैं तेरे घर आ जाऊँ?

सुषमा: दीदी आप यहाँ आ जाओ। 

नमिता: अच्छा आती हूँ। 

अब नमिता ने फिर से स्नान किया और एक सेक्सी ब्रा और पैंटी पहनी और उसके ऊपर से टॉप और लेग्गिंग पहनी और मेकअप करके ख़ुद पर ही मुग्ध हो गयी। वह बला की सेक्सी औरत थी। बड़े बड़े दूध और पीछे को उठी हुए नितम्ब और गोरा चिकना पेट। ना पतली और ना ही मोटी , बस भरा हुआ मस्त बदन। वह चूतड मटकाते हुए सुषमा के घर पहुँची। 

सुषमा उसको देखकर बोली: आज तो मेरा पति और बेटा दोनों गए काम से । क्या हॉट लग रही हो दीदी! 

नमिता हँसने लगी। 

तभी घंटी बजी और राजन अंदर आया । नमिता ने उसको नमस्ते की और वह तो ठगा सा देखता ही रह गया नमिता को। वो अंदर जाकर फ़्रेश हुआ और बाहर आके सोफ़े पर बैठा और नमिता से बातें करने लगा। 

राजन: भाभी आपने डॉक्टर गुप्ता के बारे में बताकर राजू को ठीक करने में हमारी बहुत मदद की। नहीं तो राजू तो हाथ से निकल ही गया था।

नमिता हँसते हुए बोली: अरे मैंने नहीं असली काम तो आपकी पत्नी ने किया है। 

राजन समझ गया कि उसका इशारा किस तरफ़ को है, तो वह सुषमा की जाँघ सहलाते हुए बोला: हाँ इसने तो बहुत त्याग किया है। पर अब मज़ा भी ले रही है। 

ये कहकर वह हँसने लगा। 

नमिता भी हँसकर बोली: हाँ मज़ा तो ले रही है, पर आप लोग बिचारि को पिरीयड्ज़ के दिनों में भी आराम नहीं करने देते, ये ठीक बात नहीं है। 

राजन झेंप कर बोला: मैं नहीं राजू तंग करता है इसको। 

सुषमा: हाँ हाँ आप तो जैसे दूध के धुले हो, अपने बेटे से एक बार भी नहीं कहते की मम्मी को तंग ना करे। बल्कि मुझसे कहते हैं दे दे ना जो वह माँगता है। 

राजन उसकी जाँघ को दबाते हुए बोला: अरे यार तुमको भी तो मज़ा ही आता है ना?

सुषमा: वाह मज़े की ख़ूब कही, कोई एक बार करे तो मज़ा भी आए , आप लोग तो मेरा पिछवाड़ा ही फाड़ देते हो।

सुषमा अब पूरी तरह से खुल गयी थी। 

नमिता: भय्या आपको सुषमा का कुछ तो ख़याल रखना चाहिए। मुझे बता रही थी कि वह बहुत कष्ट में रहती है इन दिनों। 

राजन: भाभी अब आप इसकी मदद करेंगी तो इसका कष्ट कम हो जाएगा। 

इस पर तीनों हँसने लगे। तभी बेल बजी, राजू अंदर आया और बोला: मम्मी पानी पीना है। 

अचानक उसकी दृष्टि नमिता पर पड़ी तो हड़बड़ा कर बोला: आंटी नमस्ते । 

नमिता ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया और पूछी : बेटा स्कूल कैसा था आज का?

राजू: जी आंटी ठीक था। नमिता ने देखा कि राजू की आँखें उसके टॉप के ऊपर चिपक सी गयी थीं। 

सुषमा ने सबको जूस पिलाया और बोली: राजू जा फ़्रेश हो जा , मैं अभी आती हूँ। 

राजू के जाने के बाद सुषमा बोली: इसे अभी नहीं मालूम कि तुम क्यों आयी हो यहाँ ? राजन को तो मैंने फ़ोन पर बता दिया था। 

यह कहके वो राजू के कमरे में गयी। 

सुषमा ने देखा कि वह बाथरूम से नंगा ही बाहर आ गया था और उसने सुषमा को पकड़कर अपने से चिपका लिया और बोला: आंटी को इस समय क्यूँ बुला लिया? आपको मालूम है ना ये समय मुझे आपको चोदना रहता है। 

यह कहकर उसने सुषमा के चूतरों को दबाया और बोला: ओह मम्मी आज फिर आपका पिरीयड आ गया । उसे पैंटी में फँसे पैड का अहसास हो चला था। 

सुषमा ने उसके नंगे खड़े लौड़े को दबाया और बोली: अरे इसी लिए तो नमिता को बुलाया है। मैंने कहा था ना कि तुम और राजन क्या नमिता को चोदोगे ? तो तुमने कहा था हाँ ज़रूर। तो लो आज मेरा पिरीयड आया है और मैंने उसे तुम दोनों के लिए बुला लिया है। अब कम से कम मेरी गाँड़ बार बार नहीं मारना। ठीक है?

राजू: आह मम्मी आप कितनी अच्छी हो, सच में आंटी तो मस्त माल लग रहीं हैं। 

सुषमा: चल एक बानियान और हाफ़ पैंट डालके बाहर आ जा। 

और झुकके उसके लौड़े का एक मस्त चुम्बन लेकर बाहर निकल गयी। 

थोड़ी देर बाद राजू भी बाहर आया , पर उसके हाफ़ पैंट से उसका ज़बरदस्त उभार जैसे छुप ही नहीं सकता था। 

वह भी आके अपनी मम्मी के पास बैठ गया। 

सुषमा: देखो राजू आज मेरी रिक्वेस्ट पर दीदी यहाँ आयीं है, पर तुम लोगों को इनके साथ आराम से करना होगा। जैसे मेरे ऊपर जानवरों की तरह टूटते हो वैसे नहीं चलेगा, समझे?

राजू अपने लौड़े को मसल कर बोला: जी मम्मी। 

राजन भी हाँ में सिर हिलाया। 

नमिता हँसते हुए बोली: ऐसा क्या करते हैं तेरे साथ?

सुषमा: तू देखना कैसे तेरे पीछे पड़ेंगे अभी। 

नमिता हँसते हुए बोली: चल ना जो करना है कर लेने दे इनको। 

अब राजन खड़ा हुआ और उसकी भी पैंट बुरी तरह से तनी हुई थी और वह बोला: चलो भाभी बेडरूम में चलो। अब रहा नहीं जा रहा। 

सुषमा ने नमिता का हाथ पकड़ा और बेडरूम की ओर चल पड़ी। राजू नमिता की मटकती गाँड़ देखकर मस्ती से भर कर सोचा कि चाहे मम्मी कुछ भी कहे आंटी की गाँड़ तो मारूँगा ही । आह क्या मस्त गाँड़ है। 

अब वह भी पीछे से बेडरूम में आ गया। 

सुषमा ने कहा: चलो आप दोनों अपने कपड़े उतारो। 

राजन और राजू तो जैसे पागल से हो रहे थे, वो दो मिनट में ही पूरे नंगे हो गए। उनके लौड़े ऊपर नीचे हो रहे थे। 

नमिता ने देखा की इनके परिवार में भी बड़े लंड की परम्परा ही है। उसकी बुर दो दो मस्त लौड़े देखकर गीली हो गयी। उसे अपने निपल्ज़ कड़े होते हुए महसूस हुए। 

सुषमा: चलो दीदी अब आप भी अपने मस्त बदन का दीदार करा दो। 

नमिता ने मुस्कुराते हुए अपनी साड़ी का पल्लू गिराया और उसके ब्लाउस में कसे आम देखकर राजन के लौड़े पर एक बूँद प्रीकम की आ गयी। अब उसने अपनी साड़ी उतारी और उसे घूमकर एक हैंगर में टाँगी। पेटिकोट में उसके उभरे हुए चूतरों को देखकर राजू अपने लौड़े को मसलने लगा। 

अब नमिता ने बड़ी अदा से ब्लाउस के हुक खोले और अपना ब्लाउस उतारी और ब्रा में कसी उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ जो बहुत गोरी थीं सबके सामने थीं। अब उसने पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसे अपनी टाँगों से नीचे कर के गिरा दिया। राजन और राजू आँख फाड़े उसकी मदमस्त गोरी भरी हुई जाँघें देख रहे थे और पैंटी से उसकी फूली हुई बुर साफ़ दिखाई पड़ रही थी। अब वह झुकी और पेटिकोट उठाया और उसकी पूरी गाँड़ का उभार दोनों मर्दों को जैसे दीवाना कर गया। पैंटी की पट्टी चूतरों की दरार में जैसे गुम हो गयी थी। क्या मस्त भरे हुए उभार थे।

अब सुषमा बोली: आप दोनों खड़े हो जाओ ।फिर वह ख़ुद बिस्तर पर बैठी और नमिता को भी बग़ल में बैठने का इशारा किया। वह पूरे कपड़े पहनी थी और नमिता सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी। 

अब दोनों आकर उनके सामने खड़े हो गए। उनके लौड़े हिल रहे थे। सुषमा ने अपना मुँह खोला और राजन का लौड़ा चूसने लगी। नमिता ने भी राजू का लौड़ा मुँह में लिया और चूसने लगी। राजू तो मज़े से नमिता के ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। फिर राजन झुका और उसने नमिता की ब्रा का स्ट्रैप खोला और उसकी नंगी चूचियाँ उनके सामने थी। राजन ने एक चूचि दबायी और राजू दूसरी दबाने लगा। नमिता भी मस्ती से उसके बॉल्ज़ को भी चाटने लगी। फिर राजन ने राजू को हटाया और और अपना लौड़ा उसके मुँह में डाल दिया। नमिता अब राजन का लंड चूसने लगी। सुषमा भी अपने बेटे का लौड़ा चूसने लगी। अब सुषमा बोली: चलो नमिता लेट जाओ ।



नमिता लेट गयी और राजू उसके ऊपर आकर उसकी चूचि चूसने लगा। राजन नीचे गया और उसकी पैंटी उतारने लगा। नमिता ने अपनी कमर उठाके उसकी मदद की। पैंटी उतारने के बाद राजन ने अपना मुँह वहीं उसकी बुर में घुसेड़ दिया और उसे चूसने लगा। नमिता की सिसकियाँ निकलने लगीं। राजू ऊपर और राजन नीचे उसे मस्त कर रहे थे।उसकी आऽऽऽहहह निकल रही थी। 

अचानक नमिता को लगा कि राजन उसकी टाँगें ऊपर कर रहा है। फिर उसे राजन की जीभ अपनी गाँड़ के छेद में महसूस हुआ और वह उइइइइइइइ कर उठी। नमिता ने राज़ू का सिर अपनी छाती पर दबा लिया और वह उसकी छाती चूसे जा रहा था। 

अब राजू बोला: पापा मैं तो चूत मारूँगा , आप गाँड़ मारोगे क्या?

राजन: आऽऽह क्या गाँड़ है हाँ मैं गाँड़ मारूँगा। 

अब वह नमिता को करवट में लिटा दिए और सामने से राजू उसकी ओर मुँह कर लेट गया और राजन पीछे से उसके चूतरों को दबा रहे थे। 

सुषमा: ये लो क्रीम लगा लो, सुखी गाँड़ मारोगे क्या? 

राजन ने क्रीम ली और नमिता की गाँड़ में अच्छे से डाल दी दो ऊँगलियों में क्रीम लेकर। उधर सुषमा ने राजन के लौड़े पर क्रीम लगायी। 

अब नमिता ने अपनी एक टाँग उठाके राजू की कमर पर रखा और उसका लौड़ा ख़ुद ही पकड़कर अपनी बुर में लगाया और एक हल्के से धक्के से उसका लौड़ा ३ इंच के करीब अंदर ले ली। उधर राजू भी मस्त होकर ज़ोर से धक्का मारा और बाक़ी का लौड़ा उसके अंदर करके मज़े से बोला: आऽऽऽह आंटी क्या बुर है आपकी? अभी भी बहुत टाइट है।

तभी नमिता की गाँड़ के छेद में राजन का लौड़ा दस्तक देने लगा। नमिता ने भी पीछे की ओर होकर अपनी गाँड़ में उसका लौड़ा समेट लिया। अब क्या था दोनों बाप बेटा मस्ती से भर के नमिता की चुदायी करने लगे। कमरे में फ़च फ़च और थप्प थप्प की आवाज़ आ रही थी। नमिता की सिसकारियाँ गूँज रही थीं। 

सुषमा भी उनकी चुदायी देख कर मस्त हो गयी थी और उसने राजू के बॉल्ज़ सहलाते हुए अपने बेटे का लौड़ा अपनी सहेली के अंदर बाहर होते हुए देख रही थी। फिर वह दूसरे हाथ से राजन के बॉल्ज़ भी पकड़कर सहलायी और उसके लौड़े को नमिता की गाँड़ में अंदर बाहर होते हुए देख कर मस्त हो रही थी। 

अब नमिता चिल्लायी: आऽऽऽऽहहहह बहुत अच्छा लग रहा है। हाय्य्य्य्य और जोओओओओओओर्रर्र से चोओओओओओओओओदो । आऽऽऽऽहहह मेरी गाँड़ तो फटीइइइइइइइइइइओओ। 

फिर वह मैं गयीइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। अब राजू और राजन ने भी धक्कों की गति बढ़ाईं और जल्दी ही ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगे। 

दोनों ने अपना रस उसके छेदों में डाल दिया। 

नमिता अब पूरी तरह से संतुष्ट होकर लेटी हुई थी। 

सुषमा: दीदी मज़ा आया?

नमिता: सच में ये दोनों तो साँड़ है। तू बेचारी इन दोनों को कैसे झेलती है। 

सुषमा: इसीलिए तो आपको बोला था, अब पिरीयड में भी मुझे कहाँ छोड़ते हैं । 

फिर सब सफ़ाई करके सोफ़े पर कपड़े पहनके बैठे और फिर नमिता बोली: अब जाती हूँ राज भी आने वाला होगा। 

फिर नमिता अपने घर में चली गयी।

उस दिन दोपहर को राज आया और आते ही नमिता से लिपट गया और उसे प्यार करने लगा।

नमिता : क्या बात है आज बहुत ख़ुश है?

राज: माँ आज मुझे क्लास में बेस्ट स्पोर्ट्स मैन का इनाम मिला है और मेरी फ़ीस माफ़ कर दिए हैं। 

नमिता के आँखों में आँसू आ गए और वह बोली: बेटा ऐसे ही ज़िंदगी में बहुत आगे बढ़ो। 

नमिता ने राज को अपने से लिपटा लिया। 

फिर वो दोनों खाना खाने बैठे। नमिता उसे बड़े प्यार से अपने हाथ से खिला रही थी। 

फिर वह दोनों चिपक कर सो गए। सोकर उठे तो राज ने नमिता की चूचि दबानी शुरू की और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी ही देर में वो दोनों ६९ पज़िशन में आ गाए और एक दूसरे के गुप्तांगों को बहुत देर तक चूसे और फिर नमिता उसके ऊपर आ कर चुदायी करने लगी। नमिता के उछलते चूतर राज दबाए जा रहा था और उसकी चूचि चूस रहा था। 

वह पूरी तरह से नीचे होकर पूरे लौंडे को अपनी बुर में लील रही थी। पूरे आधे घंटे की चुदायी के बाद वह चिल्ला कर झड़ने लगी और राज भी अपनी कमर उठाके अपना रस उसकी बुर में डाल दिया। नमिता आऽऽऽह करके उसके ऊपर गिर गयी। राज के हाथ माँ की पीठ और चूतरों पर घूम रहे थे। उसका लौड़ा नरम होकर उसकी बुर से बाहर आ चुका था। 

दोनों एक दूसरे को चूमते रहे और नमिता उठकर बाथरूम गयी तो राज भी पीछे से वहाँ आ पहुँचा और नमिता के सामने ही अपने लौड़े को कोमोड पर निशाना करके मूतने लगा। नमिता मुस्कुरा के उसकी धार को देख रही थी।

राज: आओ ना माँ पकड़ो इसको। 

नमिता हँसते हुए उसके लौड़े को पकड़ ली और उसके पिशाब की धार देखते रही। फिर हिला हिला के उसने उसकी आख़री बूँद भी निकाली । फिर वह फ़्लश करके ख़ुद भी कोमोड में बैठी और मूतने लगी। 

राज: माँ मुझे कुछ नहीं दिख रहा है?

नमिता हँसते हुए आधी खड़ी हुई और राज झुक कर उसे मूतते हुए देखकर मस्त हो गया। 

फिर वह दोनों एक दूसरे के अंगों को साफ़ किए और बाद में कपड़े पहनकर राज पढ़ने चला गया और नमिता चाय बनाने लगी। 

उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ। 

अगले कुछ दिन भी ऐसे ही बीते जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। 

कुछ दिनों बाद नमिता का पिरीयड आया और अगली सुबह नमिता ने राज को यह बता दिया। 

राज स्कूल चला गया और नमिता ऑफ़िस। वहाँ पता चला कि अभी भी मनीष मुंबई में ही है और सुधाकर अमेरिका में। वो अपना काम करके ३ बजे वापस आयी और राज भी क़रीब उसी समय आया था। 

राज ने नमिता का उतरा चेहरा देखा और बोला: माँ सब ठीक है ना? आप बीमार सी दिख रही हो?

नमिता: मैं ठीक हूँ बेटा, बस पिरीयड्ज़ के कारण थोड़ी कमज़ोरी लग रही है। 

राज: ओह आपने बताया था, क्या बहुत तकलीफ़ होती है?

नमिता: हाँ होती तो है, पेट दुखता है और नीचे ख़ून जमा होने के कारण वहाँ हमेशा गीलापन लगता रहता है। 

राज: ओह तो आप आराम करो। 

नमिता उसे चूमकर प्यार करती है। फिर दोनों खाना खाते हैं और राज पढ़ने चला जाता है और नमिता आराम करने लगती है। 

रात को भी नमिता सो जाती है और राज पढ़ाई करके क़रीब ११ बजे बिस्तर पर आता है। वह माँ को तंग नहीं करना चाहता। पर उसके सोने का प्रयास विफल हो जाता है और वह उत्तेजित होता चला जाता है सोयी हुई माँ की बिना ब्रा की चूचियाँ देखकर और नायटी से ऊपर उठी हुई जाँघें देखकर। 

वह अपने लौड़े को बाहर निकालकर सहलाने लगा। 

तभी नमिता की आँखें खुल गयी उसने राज को मूठ्ठ मारते हुए देखकर मुस्कुराई और बोली: बेटा मुझे उठा देना था, ये मूठ्ठ क्यों मार रहा है? 

राज: माँ आपका पिरीयड चल रहा है ना इसलिए आपको डिस्टर्ब नहीं किया। 

नमिता उठी और उसके लौड़े को अपने हाथ में लेकर वह उसे सहलायी और फिर झुककर उसके सुपाडे को चाटी और फिर पूरी ताक़त से चूसने लगी। 

दस मिनट की चुसायी के बाद राज बोला: माँ आप हाथ से मूठ्ठ मार दो अब । 

नमिता : क्यों अच्छे से नहीं चूस रही हूँ क्या? 

राज: नहीं माँ ऐसा नहीं है। मैं चाहता हूँ कि आप आराम करो। 

नमिता:कितना सोचता है मेरे बारे में ? बहुत प्यार करता है मुझे?

राज: हाँ माँ आपको बहुत प्यार करता हूँ। 

नमिता हँसते हुए बोली: तो चल पीछे डाल दे । 

राज: माँ कोई ज़रूरी नहीं है आप मूठ्ठ मार दो और आराम करो। 

नमिता: नहीं चल मेरी गाँड़ मार ले। 

वह उठी और अपनी नायटी उतार दी। आज उसने बड़ी सी पैंटी पहनी थी जिसमें से उसका सामने का हिस्सा फूला सा दिख रहा था। 

राज: माँ क्या यहीं पैड लगा रखा है? 

उसके फूलें हुए हिस्से को देखकर पूछा उसने। 

नमिता: हाँ यहीं लगाना पड़ता है। दिन भर थोड़े थोड़े से ख़ून आता रहता है और यह पैड उसे सोख लेता है। 

राज: माँ मैं आपकी बुर देखना चाहता हूँ कि पिरीयड्ज़ के समय कैसे दिखती है?

नमिता ने हँसते हुए अपनी पैंटी उतार दी और अपना पैड भी निकाला और राज ने देखा कि उसमें लाल रंग लगा था। अब नमिता उस पैड को बाथरूम में कचरे में रखकर आयी और आकर बिस्तर में लेट गयी और अपनी टाँगें मोड़कर फैलायी और उसको बुर दिखाई। राज का मन थोड़ा सा ख़राब सा हो गया काफ़ी लाल सी लग रही थी बुर । 

राज: ठीक है माँ मैंने देख ली , अब आप उलटे हो जाओ तो मैं आपकी गाँड़ मार लूँगा। 

नमिता: बेटा, आज गाँड़ मत चाटना क्योंकि बुर का ख़ून नीचे भी चला जाता है। बस क्रीम लगाके मार ले। 

राज: ठीक है माँ । ये कहकर वह क्रीम लाया और उसकी गाँड़ में दो ऊँगली डालके अच्छी तरह से क्रीम लगाया। फिर उसने अपने लौड़े पर भी क्रीम लगाया और अब उसने नमिता की चूतरों को फैलाया और उसकी गाँड़ के छेद में सुपाड़ा लगाया और उसे अंदर की ओर दबाने लगा। नमिता की गाँड़ में वह घुसता चला गया। नमिता की हाऽऽऽय्य निकल गयी । 

वह बोली: तेरा इतना मोटा है कि शुरू में तो दुखता ही है। बाद में मज़ा देता है।

अब राज ने नमिता की चुदायी शुरू की। नमिता की जल्द ही सिसकारियाँ गूँजने लगी। वह भी पीछे गाँड़ करके पूरा लौड़ा अपनी गाँड़ में निगलने लगी। और मस्ती से उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ और उइइइइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ चिल्लाए जा रही है। 

राज भी अपनी कमर हिलाके नमिता की कमर पकड़के अपनी ओर दबा कर उसकी गाँड़ का पूरा मज़ा ले रहा था। 

जल्दी ही राज हम्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। नमिता बस निढाल होकर नीचे पेट के बल गिर गयी।

राज उसके ऊपर से हट गया और बग़ल में लेट गया। 

नमिता उठी और बाथरूम गयी , राज ने देखा कि जहाँ नमिता लेटी थी वहाँ पर एक ख़ून का दाग़ था। 

नमिता बाहर आयी और उसने एक नया पैड निकाला और अपनी बुर पर रखा और उसने पैंटी पहनी। 

राज: माँ ये कितने दिन चलेगा?

नमिता: बेटा, मेरा तो चार दिन लगता है क्लीयर होने में। 

राज: ओह माँ तो चार दिन सबर करना पड़ेगा। पापा भी सबर करते थे। 

नमिता: हाँ सब मर्द करते हैं। वो भी एक दो बार गाँड़ मार लेते थे और एक दो बार चूसवा लेते थे। तेरा काम भी ऐसे ही चलेगा। 

राज: ठीक है माँ जैसे आप बोलो। 

राज भी बाथरूम से निपट कर आके सोने लगा। 

तभी नमिता का फ़ोन बजा, उसने अब ब्लाउस और पेटिकोट पहन लिया था। उसने फ़ोन उठाया, दूसरी तरफ़ सुधाकर था। वह बोला: कैसी हो मेरी जान? 

नमिता: अरे आप कब आए अमेरिका से ? 

सुधाकर: बस अभी एक घंटे पहले। और सब ठीक है?

नमिता: जी सब बढ़िया। आप कैसे हैं?

सुधाकर: मैं भी ठीक हूँ पर तुम्हें बहुत मिस किया। 

नमिता: आपको तो बहुत गोरी गोरी लड़कियाँ वहाँ मिल गयी होंगी, मेरी भला क्या याद आयी होगी आपको?

सुधाकर: हा हा ऐसा कुछ नहीं बहुत काम था वहाँ। फिर मनीष भी तो था मेरे साथ। मनीष से मिली कि नहीं? 

नमिता: बस एक दिन ही वह ऑफ़िस आया और उसके बाद से वह मुंबई में ही है। 

सुधाकर: हाँ बस दो दिन में वह भी आ जाएगा। 

नमिता: चलिए कल मिलते हैं। 

सुधाकर: कल दस बजे ऑफ़िस की जगह हमारे फ़ार्म हाउस में मिलते हैं। बहुत दिन हो गए तुमसे मिले हुए। बहुत ही इच्छा हो रही है। 

नमिता: ओह पर मेरे तो लाल दिन चल रहे हैं। कुछ हो नहीं पाएगा। 

सुधाकर: अरे फिर क्या हुआ बाक़ी दो छेद किस दिन काम आएँगे। चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर के पास वाले चौक से पीक अप कर लूँगा। 

नमिता: ठीक है । गुड नाइट। कहकर फ़ोन काट दी।

वह बिस्तर में आके लेट गयी। 



राज: माँ सुधाकर अंकल का फ़ोन था क्या? 

नमिता उसके पीठ को सहलाते हुए बोली: हाँ बेटा उन्हीं का था। 

राज: माँ वो लाल दिन का मतलब आपके पिरीयड्ज़ से है ना?

नमिता: हाँ बेटा, अब तुमसे क्या पर्दा? तुम तो जानते ही ही सब। 

राज: माँ क्या आपको चोदने की बात कर रहे थे?

नमिता: और क्या तुम सब मर्दों को और क्या चाहिए? 

राज: माँ आपकी बुर है ही मस्त, इसमे अंकल की क्या ग़लती है? फिर लाल दिन का सुन कर क्या बोले?

नमिता: वही जो तू बोलता है? उनको भी मेरे बचे हुए दो छेद चाहिए। एक छेद में गड़बड़ है तो क्या हुआ। 

राज: तो माँ कल अंकल भी आपकी गाँड़ मारेंगे, यही ना?

नमिता: हाँ वो कहाँ छोड़ने वाले हैं। 

राज: माँ,फिर उनसे शादी करने के बारे में क्या सोचा? 

नमिता: तू क्या चाहता है बता पहले?

राज: माँ मैं तो चाहता हूँ आप शादी कर लो। 

नमिता: पता है तुम्हें मनीष भी इस शादी के लिए तय्यार है। 

राज: माँ आप तो मनीष से भी सम्बंध रखती हो ना?

नमिता: देखो अब तुमसे झूठ नहीं बोलूँगी हाँ उससे भी हैं। 

राज: माँ तो अगर तुम्हारी अंकल से शादी हुई तो हम दोनों यानी आपके दोनों बेटों का क्या होगा? 

नमिता: देखते हैं क्या सीन बनता है। चल अभी सो जा, कल स्कूल भी जाना है ना। 

फिर राज नमिता को बाहों में लेकर सो गया।

अगले दिन नमिता राज को विदा करके तय्यार हुई। 

नमिता ने एक टॉप और लेग्गिंग पहना। नीचे ब्रा और बड़ी सी पैंटी पहनी । 

चौक पर सुधाकर अपनी कार में इंतज़ार कर रहा था । नमिता उसकी कार में बैठी और उसने नमिता का हाथ दबाया और बोला: कैसी हो मेरी जान?

नमिता हँसकर बोली: ठीक हूँ, आपने इस बार बहुत दिन लगा दिए वापस आने में?

सुधाकर: हाँ काम ज़्यादा था। अब कार फ़ार्म हाउस के सुनसान रास्ते में आ गयी थी। 

नमिता ने सुधाकर के पैंट के ऊपर से लौड़े को पकड़कर दबाते हुए कहा: वहाँ इसको तो बहुत खुराक मिली होगी?

सुधाकर उसके हाथ के ऊपर अपना हाथ रखा और दबाते हुए बोला: नहीं जान वहाँ कुछ नहीं हुआ। बड़ा प्यासा है यह। पर तुम तो अपनी बुर में पैड लगा ली हो। 

नमिता: मुझे क्या पता था कि आप आने वाले हो नहीं तो मैं पैड नहीं लगाती। 

सुधाकर: अच्छा तुम्हारे बस में है क्या? 

इस पर दोनों हँसने लगे। तभी फ़ार्म हाउस आ गया। गॉर्ड ने सलाम ठोका और वो अंदर पहुँचे। सब नौकरों की छुट्टी हो चुकी थी। खाना फ्रिज में रखा था। 

सोफ़े पर बैठते ही सुधाकर ने नमिता को अपनी गोद में खींच लिया और उसको अपने से लिपटा के उसके गाल चूमते हुए उसकी कान में जीभ फेरने लगा। नमिता भी उसको चूमने लगी । जल्दी ही उनके होंठ एक दूसरे से चिपक गए। अब नमिता ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी जिसे सुधाकर मस्ती से चूसने लगा। 

उसके हाथ नमिता की जाँघों पर रेंग रहे थे। वह भी अब अपने पिछवाड़े में उसके लौड़े के कड़ेपन को महसूस कर रही थी। 

सुधाकर ने नमिता के टॉप के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबायीं और नमिता ने उसका हाथ हटाया और बोली: आह आज नहीं, थोड़ी सेन्सिटिव हो जातीं हैं इन दिनों। 

सुधाकर सारी बोलकर हाथ हटा लिया और उसके चूतरों को दबाने लगा। 

अब नमिता उठी और उसके पैंट की बेल्ट खोलने लगी फिर उसने पैंट का हुक खोला और ज़िपर नीचे की। पैंट में से उसका उभरा हुआ टेंट साफ़ दिखाई दे रहा था। 

अब नमिता ने उसकी पैंट उतारी जिसमें सुधाकर ने अपनी कमर उठाके उसकी मदद की। अब चड्डी में उसका उभार बहुत साफ़ दिख रहा था और चड्डी ने एक बूँद प्रीकम साफ़ चमक रहा था । नमिता ने उस गीले हिस्से को सूँघा और मस्ती से चाटने लगी। अब उसने चड्डी भी निकाली और उसे उतारकर एक तरफ़ रख दी। उसका लौड़ा पूरा खड़ा हो गया था और अब ऊपर नीचे हिल रहा था। नमिता ने उसके सुपाडे की चमड़ी को पीछे खिंचा और बैगनी रंग का सुपाड़ा किसी पहाड़ी आलू के माफ़िक़ उसके सामने हिल रहा था। 

अब नमिता ने उसके बड़े बड़े बॉल्ज़ को अपने पंजे में लिया और उनको सहलाने लगी। फिर उसके लौड़े को लम्बे लम्बे स्ट्रोक देकर मज़े लेने लगी। 

अब नमिता ने अपना सिर सुपाडे पर रखा और उसको मुँह में लेकर जीभ से चुभलाने लगी। सुधाकर अपनी कमर उछालकर हाय कर उठा। अब नमिता पूरे ज़ोर से उसके सुपाडे को चूसने लगी। फिर वह उसके बॉल्ज़ को भी एक एक करके चाटी और अब वह हाऽऽऽऽहहय नमिताआऽऽऽ कहकर बोला: हाय्य जाऽऽऽऽऽन क्या चूसती हो!

अब नमिता ने इसका पूरा लौड़ा चूसना शुरू किया। सुधाकर अपनी कमर उछालकर उसके मुँह को जैसे चोदने लगा। नमिता भी अब डीप थ्रोट का मज़ा देने लगी। सुधाकर चिल्लाने लगा: आऽऽऽऽऽऽह राआऽऽऽऽऽऽऽऽनी क्या मज़ाआऽऽऽऽऽ दे रही हो हाऽऽऽऽऽऽय्यय कोई रँडीइइइइइइइ भी ऐसा नहीं चूस सकतीइइइइइइइइ आऽऽऽझहह ह्म्म्म्म्म्म्म्म । 

अब नमिता उसके बॉल्ज़ को दबाने लगी और एक ऊँगली नीचे खिसका कर उसकी गाँड़ में डाल दी। 

सुधाकर उछला और चिल्लाया: हाऽऽऽऽऽऽऽऽऽय्यय साआऽऽऽऽऽऽली क्या कर रहीइइइइइइ है? ह्म्म्म्म्म्म्म्म मादरचोओओओओओओओओओओद मेरीइइइइइइ गाँड़ मारेगी क्याआऽऽऽऽऽऽऽ ? 

नमिता और ज़ोर से सिर हिलाने लगी और अब सुधाकर से रुका नहीं गया और वह चिल्लाया: ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म साऽऽऽऽऽऽली क़ुतियाआऽऽऽऽऽऽऽ मैं गयाआऽऽऽऽऽऽऽऽ। लेएएएएएएएएएए मेरा रस पीइइइइइइइइइइइइइ ले और ले और ले। 

ये कहते हुए वह अपनी कमर हिलाकर उसके मुँह में अपना पूरा गाढ़ा रस पेल दिया। नमिता भी मज़े से उसका रस पी गयी और बाद में उसके सुपाडे और पूरे लौड़े को जीभ से चाट के साफ़ करने लगी। 

सुधाकर मज़े से उसको अपना रस पीते हुए देख रहा था। अब वह उठी और बाथरूम से सफ़ाई करके आयी और एक आधा गीला तौलिया लायी और उसके लौड़ेको पहले गीले और बाद में सूखे तौलिए से पोंछीं। 

सुधाकर को यह सब देखकर उसपर बहुत प्यार आया और वह बोला: रानी मैंने तुम्हें गाली दी, मुझे माफ़ कर दो। 

नमिता हँसते हुए उसके बग़ल में बैठकर बोली: अरे उत्तेजना में आप जो भी बोले मुझे बड़ा मज़ा आया। 

सुधाकर उसकी जाँघ पर हाथ फेरकर बोला: जान बहुत मज़ा दिया आज तुमने, सच क्या चूसती हो, मस्त हो गया मैं तो। 

नमिता: चलो अब आप कुछ देर शांत तो रहोगे। 

सुधाकर फिर उससे इधर उधर की बातें करने लगा। नमिता भी उसके नंगे लौड़े को बीच बीच में पकड़ कर हल्के से सहलाने लगती थी। पर लौड़ा अभी भी शांत ही था। 

फिर सुधाकर बोला: नमिता मेरे प्रस्ताव पर विचार किया क्या? 

नमिता: कौन से प्रस्ताव का?

सुधाकर: वही शादी का प्रस्ताव ?

नमिता: ओह वह बात , देखो आपको मैंने पहले ही कहा था कि मैं तो बिलकुल तय्यार हूँ बस बच्चों का सोच कर चुप हो जाती हूँ। 

सुधाकर: अरे बच्चे भी मान जाएँगे वरना कहाँ जाएँगे?

नमिता: असल में बच्चे तो मान ही गए हैं। मनीष और राज से मेरी बात हो चुकी है। 

सुधाकर: अरे तो फिर क्या समस्या है?

नमिता: समस्या बहुत बड़ी है और आपको बताने में मुझे झिझक हो रही है।

सुधाकर: अरे कैसी झिझक जान? बोल दो जो भी बात है। 

नमिता: बात ही कुछ ऐसी है। सच में बताने में भी संकोच हो रहा है। 

सुधाकर: अरे बता भी दो जान अब मेरे पेट में भी दर्द हो रहा है। 

नमिता: चलिए बता देती हूँ फिर आपको जो करना हो वह कर लीजिएगा। दरअसल जब आप मुझसे दूर हो गए थे तब मनीष से मेरे सम्बंध हो गए थे। वह पागलों की तरह मेरे पीछे पड़ गया था और मुझे उसकी ज़िद के आगे झुकना ही पड़ा। 

सुधाकर: मुझे इसका पता है , मैं जानता हूँ ये सब। 

नमिता: ओह पर आप एक और बात नहीं जानते ।

सुधाकर: वह क्या?

नमिता: कैसे कहूँ अपने मुँह से ।आपको बड़ा अजीब लगेगा। अच्छा आपको याद है डॉक्टर गुप्ता से आपने मुझे मिलवाया था?

सुधाकर: हाँ याद है , हमने तुम्हारी चुदायी भी की थी। 

नमिता हँसने लगी: हाँ उसी गुप्ता ने मेरे बेटे राज का इलाज किया और अंत में मुझे इस बात पर राजी किया कि मैं उसकी बात मान लूँ। 

सुधाकर: कौन सी बात?

अब नमिता ने उसे पूरी कहानी सुनायी कि कैसे उसने त्याग किया और अपने बेटे का ध्यान वापस पढ़ाई में लायी और इसकी क्या क़ीमत चुकाई। 

सुधाकर मुँह खोलकर बड़े ही आश्चर्य से उसकी पूरी कहानी सुना और बोला: ओह तो तुम माँ बेटे चुदायी करते हो आपस में? 


अचानक नमिता ने महसूस किया कि सुधाकर का लंड अब पूरा खड़ा था उसके हाथ में। 

वह समझ गयी कि माँ बेटे की चुदायी का सुनकर वह उत्तेजित हो चुका है। 

सुधाकर: आऽऽह ये तो बड़ी रोमांटिक बात हुई माँ बेटे का प्यार । 

नमिता: अब मैंने आपको सब बता दिया अब बोलिए कि आप शादी करने को तय्यार हो? 

सुधाकर: मेरे बच्चों को जब ऐतराज़ नहीं है तो मुझे क्या प्रॉब्लम हो सकती है? 

नमिता: पर आप जानते हैं वो मुझे छोड़ेंगे नहीं ऐसा वो दोनों बोल चुके हैं। इसका अर्थ ये है कि मुझे तीनों के साथ सेक्स करना होगा। ये बड़ी अजीब सी स्तिथि नहीं होगी? 

सुधाकर: हाँ होगी तो पर मुझे कोई ऐतराज़ नहीं होगा। 

नमिता: पर मेरा भी सोचिए ना कि इस उम्र में अब मैं क्या तीन तीन मर्दों को सम्भाल लूँगी। मुझे तो नहीं लगता। 

सुधाकर: अरे तुम सबको सम्भाल लोगी। पर एक समस्या है कि अनिक़ा मेरी बेटी ११थ में अड्मिशन यहाँ लेना चाहती है। अब तक वह अपनी नानी के घर में थी। उसके आने पर हम ये सब कैसे कर पाएँगे। 

नमिता ने उसके लौड़े को सहलाते हुए कहा: आप उससे पिछली बार कब मिले?

सुधाकर: मैं साल में दो तीन बार उससे मिलता रहता हूँ। 

नमिता: वह अच्छे से जवान हो गयी है ना?

सुधाकर चौंक कर उसको देखा और बोला: ये कैसा सवाल है?

नमिता: अरे बतायिये ना कितनी बड़ी चूचियाँ हैं उसकी? 

सुधाकर: हम्म ये कैसा प्रश्न है ? मेरी बेटी है वो?

नमिता: बताइए ना कितनी बड़ी हैं चूचियाँ?

सुधाकर: अच्छी बड़ी हैं उसके उम्र के लिहाज़ से । 

नमिता: निम्बू है संतरे या सेब या अनार ?

सुधाकर के लौड़े ने उसकी हाथ में झटका मारा और वह बोला: अनार जैसे हैं।

नमिता: मस्त हैं ना? 

सुधाकर: आह्ह्ह्ह्ह हाँ बहुत मस्त हैं।

नमिता उसके खड़े लौड़े को फिर से मुँह में लेकर चूसते हुए बोली: और क्या अच्छा लगता है उसका?

सुधाकर: उसके चूतर जींस में से बहुत गोल गोल दिखते हैं। आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या चूस रही हो रानी। 

नमिता ने लौड़ा मुँह से निकाला और बोली: आपको अच्छी लगती है वह?

सुधाकर: हाँ बिलकुल अपनी माँ पर गयी है। बहुत सेक्सी है वह । 

नमिता फिर से लौड़ा चूसने लगी। 

फिर नमिता ने सिर उठाया और बोली: चोदना चाहतें हैं अपनी अनिक़ा बेटी को ?

सुधाकर के लौड़े ने फिर से झटका मारा और उसके मुँह से निकला: आऽऽऽह हाँ , मगर ये कैसे हो सकता है? 

नमिता: क्यूँ नहीं हो सकता? जब हम माँ बेटा चुदायी कर सकते हैं तो आप बाप बेटी क्यों नहीं? 

सुधाकर: आह्ह्ह्ह्ह पर ये कैसे होगा? वो मान जाएगी?

नमिता: मैं कुछ करूँगी उसको मना लूँगी। 

अब सुधाकर का लौड़ा जैसे क़ाबू से बाहर होने लगा वह बहुत उत्तेजित हो चुका था। 

वह बोला: आऽऽऽहहह चलो अब बिस्तर पर मुझे तुम्हारी गाँड़ मारता हूँ। मैं अब रुक नहीं सकता। 

नमिता हँसते हुए बोली: लगता है बेटी को चोदने का सोच कर ही आप बहुत मस्त हो गए हैं। 

बेडरूम में जाकर वह नीचे से नंगी हुई और बाथरूम में जाकर पैड निकालीं और फिर बुर और गाँड़ को साफ़ करके बाहर आइ और आकर क्रीम सुधाकर को दे दी। 

फिर ख़ुद पेट के बल लेट गयी और अपने चूतरों को ऊपर कर दिया जैसे कल उसने अपने बेटे के लिए किया था। 

सुधाकर ने क्रीम लेकर उसकी गाँड़ में अच्छी तरह से लगाया और फिर अपने लौड़े पर भी क्रीम लगाया और नमिता के चूतरों को दबाकर उनको चूमने लगा। 

फिर उसने नमिता के चूतरों को फैलाया और उसकी गाँड़ में अपने मोटे सुपाडे को लगाया और दबाते हुए अंदर करता चला गया। नमिता की आऽऽहहह निकल गयी। फिर उसने नमिता की गाँड़ की ज़बरदस्त ठुकाई शुरू की। नमिता थोड़ी देर बाद मस्त हो गयी और उसने अपनी गाँड़ हिलाकर अपनी तरफ़ से ठुकाई में साथ देने लगे। पूरा पलंग चूँ चूँ करने लगा। नमिता की आऽऽऽहहह बता रही थी कि वह बड़ी मस्ती से फड़वा रही थी अपनी गाँड़। 

अचानक नमिता ने मस्ती में पूछा : आप आँख बंद करके सोचो कि आप मुझे नहीं अनिक़ा को पेल रहे हो। 

ये सुनते ही सुधाकर ह्म्म्म्म्म्म्म्म कहते हुए अपना रस उसके गाँड़ ने डालने लगा। 

नमिता मुस्करायी और सोचने लगी कि यह महाशय तो अपनी बेटी को चोदने के लिए मरे जा रहे हैं। 

नमिता और सुधाकर सफ़ाई करके आकर लेटे और बातें करने लगे। 

नमिता: आपको अनिक़ा को मनीष और राज से भी चुदवाने में कोई इतराज तो नहीं होगा?

सुधाकर: क्या मतलब? ये कैसा सवाल है?

नमिता: देखिए जब हम एक घर में रहेंगे तो आप अकेले तो उसको नहीं चोद सकेंगे। उसके भाई भी उसे चोदना चाहेंगे। 

सुधाकर: ओह ये तो मैंने सोचा ही नहीं। फिर क्या करें?

नमिता ने उसके नरम लौड़े से खेलते हुए बोली: मेरे हिसाब से तो इसने कोई बुराई नहीं है। आख़िर में सब घर के ही लोग होंगे। ये बात बाहर भी नहीं जाएगी। और मुझे तीन तीन साँड़ों का सामना अकेले नहीं करना पड़ेगा । अनिक़ा के कारण मुझे भी चुदायी में थोड़ा सा आराम मिल जाएगा। 

नमिता ने महसूस किया कि फिर से उसके नरम लौड़े ने उसके हाथ ने झटका मारा मानो उसको नमिता की बात बहुत पसंद आयी। 

अब सुधाकर नमिता को लिपटा कर बोला: रानी क्या ये सब सम्भव होगा?

नमिता: बिलकुल होगा और मेरा वादा है कि अनिक़ा की सील अगर टूटी नहीं होगी तो आप ही उसे तोड़ोगे। 

नमिता ने महसूस किया कि उसका लौड़ा बार बार झटके मार रहा था उसके हाथ में। जैसे कह रहा हो क्या मस्त बात कही है आपने????????? 

उसके बाद दोनों आराम किए और फिर वापस ऑफ़िस के लिए निकल गए खाना खा कर।

ऑफ़िस से नमिता उस दिन ३ बजे घर आयी तभी राज भी घर आया। नमिता की गोद में लेटकर उसने स्कूल की बातें बतायीं । फिर नमिता के पेट को चूमते हुए बोला: माँ अंकल से मिलीं ? 

नमिता: हाँ मिली थी। तुझे कैसे पता?

राज: माँ कल मैंने आपकी उनसे हुई बात फ़ोन पर सुनी थी। मैं सोने का नाटक कर रहा था। 

नमिता हँसते हुए बोली: बदमाश कहीं का । हाँ आज मेरी उनसे बात हो गयी है।

राज: माँ सिर्फ़ बात हुई या और कुछ भी हुआ?

नमिता हँसते हुए: हाँ बाबा सब कुछ हुआ । तुम मर्द लोग औरत को कहाँ चैन से रहने देते हो भले ही बिचारि का पिरीयड ही क्यूँ ना आया हो?

राज: माँ तो क्या उन्होंने भी आपकी गाँड़ मारी? 

नमिता: और क्या मारते? दूसरी जगह तो पैड लगा है ना? 

राज: ओह माँ , आपकी रात में मैंने मारी और अब दिन में अंकल ने , चलो आज मैं आपको और तंग नहीं करूँगा। 

राज ने अपने लौड़े को पैंट के ऊपर से सहलाते हुए कहा। 

नमिता हँसते हुए: थैंक यू बेटा। 

राज: माँ भूक लगी है। 

फिर दोनों खाना खाए। 

राज: माँ शादी की बात हुई ?

नमिता: हाँ हुई। मैंने उनको बता दिया है कि तुमको और मनीष को कोई अब्जेक्शन नहीं है। 

राज: पर क्या आपने बताया कि आप हम दोनों से भी लगवाती हो?

नमिता हँसते हुए: हाँ मैंने उनको जब बताया कि मैं तुमसे भी चुदवाती हूँ तो वो सकते में आ गए। मनीष का उनको पता था। 

राज: हमारे सम्बन्धों के बारे में क्या बोले?

नमिता: कुछ नहीं, बस हैरान थे। फिर मैंने उनको भी सुझाव दिया कि वो भी अपनी बेटी से मज़ा ले लें। 

राज: ओह तब क्या बोले?

नमिता मुस्कुराते हुए: बस पागल हो रहे हैं अपनी बेटी की लेने के लिए और क्या? और हाँ वह अनिका को तुमसे और मनीष से भी चुदवाने को तय्यार हैं। 

अब राज हैरान होकर बोला: क्या कह रही हो माँ, वह तो अभी छोटी है ना?

नमिता: कोई छोटी नहीं है। उसके दूध अनार जितने बड़े हो गए हैं, उसके पापा ने ही बताया है। 

राज: उसके पापा उसके अनार देखते रहते हैं क्या?

नमिता: लगता तो ऐसा ही है। 

राज: तभी आपकी ये बात उन्होंने मान लीं। 

अब नमिता आराम करने चली गयी। राज पढ़ने बैठा।

शाम को चाय पीकर राज खेलने चला गया। नमिता को फ़ोन आया मनीष का । 

नमिता: हेलो कैसे हो?

मनीष: आंटी आप कैसी हो? 

नमिता: मैं ठीक हूँ । तुम कब आए? 

मनीष: बस अभी २ घंटे पहले। अभी अभी पापा ने ख़ुशख़बरी दी कि आप दोनों शादी कर रहे हो। 

नमिता: अच्छा उन्होंने तुमको बता भी दिया। और क्या क्या बताया? 

मनीष हँसते हुए : और ये भी बताया कि मैं आपको शादी के बाद भी चोद सकता हूँ। 

नमिता: ओह ये भी बता दिया? और क्या बताया?

मनीष: एक बात ये भी बताई कि कि आप राज से भी चुदवा रही हो। ये मेरे लिए एक अजीब ख़बर थी। पर मैंने उसे भी पचा ही लिया। 

नमिता: और क्या बताया? 

मनीष: ये सब क्या कम है? और क्या रहा बताने को? 

नमिता: हा हा ये भी हो सकता है कि अभी भी कुछ ना बताया है। 

मनीष: आंटी आपने राज से बात की? 

नमिता: हाँ वह बिलकुल तय्यार है।

मनीष: आंटी फिर तो उसको ये भी मालूम होगा कि मैं और आप मज़े करते हैं। 

नमिता: ये उसको पहले से ही पता है। उसने हम दोनों के sms पढ़ लिए थे तभी। 

मनीष: आंटी जब उसे सब पता चल ही गया है तो मैं क्या आज आपसे मिलने आपके घर पर आ जाऊँ?

नमिता हैरान होकर: ऐसे कैसे आ जाओगे?

मनीष: सच आंटी बहुत दिन हो गए आपसे मिले। मैं तो मूठ्ठ मार मार के परेशान हो गया हूँ। प्लीज़ आज आने दीजिए ना अपने घर।

नमिता: पता नहीं राज क्या सोचेगा, और वैसे भी मेरा पिरीयड्ज़ आया हुआ है। 

मनीष: ओह आंटी , उससे क्या होता है, पहले भी आपने मैंने आपको पिरीयड्ज़ के समय पीछे से किया है। प्लीज़ आने दीजिए ना। 

नमिता: एक काम करो अभी राज खेलने गया है । वह एक घंटे में आएगा तब लैंड लाइन पर फ़ोन करके उससे बात करना। देखो वह क्या बोलता है?

मनीष ख़ुश होकर: मैं उसे तो मना ही लूँगा। 

नमिता: चलो मुझे खाना बनाना है, रखती हूँ। 

मनीष: आंटी मेरे लिए भी बनाइएगा , मैं भी डिनर आपके साथ ही करूँगा। 

नमिता ने हँसते हुए फ़ोन काट दिया। 

खाना बना कर पसीना पोंछते हुए वह सोफ़े पर बैठी TV देख रही थी और हमेशा की तरह वह ब्लाउस और पेटिकोट में ही थी। जब राज वापस आया तब वह भी पसीने से लाथपथ था। 

नमिता: आज लगता है मैदान में बहुत पसीना बहाया है?

राज: हाँ माँ फ़ुट्बॉल में पसीना तो निकलता ही है। 

यह कहते हुए उसने नमिता के हाथ से तौलिया लिया और उसे सूंघकर बोला: माँ इसमें से आपके पसीने की मस्त गंध आ रही है। फिर उसने नमिता की बग़ल उठाई और उसे सूँघने लगा। नमिता हँसने लगी। फिर वह तौलिए को फिर से सूंघकर मुस्कुराते हुए अपना पसीना पोंछने लगा। 

नमिता उसे प्यार से देख रही थी । आजकल लगातार खेलने के कारण उसका शरीर और भी ज़्यादा मर्दाना दिखने लगा था। 


फिर वह उठ कर बाथरूम गया, और नमिता ने वह तौलिया उठकर सूँघा और उसके मर्दाने गंध से मस्त होकर अपनी जाँघों को दबा ली। 

मुँह हाथ धोकर राज ने अपने कपड़े बदल लिए थे और आकर बोला: माँ मैं पढ़ने जा रहा हूँ।

नमिता: ठीक है बेटा। 

नमिता ने उसे नहीं बताया कि मनीष का फ़ोन आया था और शायद फिर से आएगा। 

थोड़ी देर बाद नमिता अपने कमरे में कपड़े प्रेस करने लगे। तभी लैंड लाइन की फ़ोन की घंटी बजी । नमिता उठकर बेडरूम के फ़ोन के पास आयी और इंतज़ार करने लगी कि राज आए और ड्रॉइंग रूम का फ़ोन उठाए। 

राज चिल्लाकर बोला: माँ फ़ोन सुनो ना। 

नमिता ने कुछ नहीं किया और चुपचाप खड़ी रही। 

फिर उसे राज के आने की आवाज़ सुनायी दी और राज ने ड्रॉइंग रूम में आकर फ़ोन उठाया। तभी नमिता ने भी फ़ोन उठा लिया। 

अब नमिता राज और मनीष की बातें सुन सकती थी। 

राज: हेलो कौन?

मनीष: हाय क्या हाल है राज?

राज: अरे भय्या आप? 

मनीष: हाँ भाई मैं ही बोल रहा हूँ। सुनाओ कैसे हो?

फिर उन दोनों ने कुछ इधर उधर की बातें कीं । 

फिर मनीष असली मुद्दे पर आया और बोला: आंटी ने तुम्हें बताया कि वो और मेरे पापा शादी का सोच रहे हैं? 

राज: हाँ बताया है। आपको तो कोई इतराज नहीं है ना?

मनीष: नहीं मुझे तो ख़ुशी होगी। तुमको कोई इतराज है क्या?

राज: नहीं मुझे भी ख़ुशी ही होगी। 

मनीष: चलो ये बढ़िया हुआ। हाँ एक बात और करनी है , कल पापा बताए कि तुम आंटी के साथ सेक्स करते हो? और ये बात पापा को आंटी ने ही बतायी है। 

राज एक पल के लिए चुप हो गया, फिर बोला: हाँ ये सही है। असल में मैं हमेशा माँ को चो- मतलब सेक्स करने का सोचता था और मेरी पढ़ाई बर्बाद हो रही थी तो एक डॉक्टर ने माँ को समझाया कि अगर अपने बेटे को बरबाद होने से बचाना है तो वो जो चाहता है उसे दे दो। 

मनीष: ओह तबसे तुम आंटी को चोदने लगे?

नमिता मुस्करायी ये सोच कर कि मनीष ने जानबूझकर इस शब्द का उपयोग किया है। 

राज: हाँ भय्या । 

मनीष: ओह, मुझे आंटी ने ये भी बताया था कि तुम मेरे आंटी को लिखे sms भी पढ़ते थे? सच है ना?

राज: हाँ सच है मुझे पता है कि आप भी माँ को चो- चोदते हो। 

नमिता ने नोटिस किया कि अब राज भी उसी शब्द का उपयोग कर रहा था। 

मनीष: यह सिर्फ़ तुम्हें नहीं बल्कि पापा को भी पता है कि हम दोनों आंटी को चोद रहे हैं। 

राज: ओह, फिर भी वह माँ से शादी करने को तय्यार हैं?

मनीष: वह बोले हैं कि उनको कोई आपत्ति नहीं है अगर हम शादी के बाद भी आंटी को चोदें । 

राज: ओह ऐसा क्या? 

मनीष: बल्कि वह तो चाहते हैं कि उनको हम तीनों एक साथ चोदें । 

राज: ओह ऐसा क्या? 

मनीष: हाँ ऐसा ही है। अच्छा एक बात बताओ ये सब सुनकर ये तो समझ में आ गया कि नहीं कि आंटी हम सबकी साँझी बीवी होगी? 

राज: हाँ लगता तो ऐसा ही है। 

मनीष: तो फिर क्यों ना आज से ही शुरुआत करें? 

राज: मतलब?

मनीष: मतलब यह कि अगर तुम इजाज़त दो तो मैं आज की रात तुम्हारे घर बिताना चाहता हूँ। तुम और मैं मिलकर आंटी को चोदेंगे। 

राज: ओह मगर ये तो माँ को डिसाइड करना है कि वह ये चाहती है या नहीं। 

मनीष: अरे वाह मान जाएँगी बस तुम्हारी हाँ चाहिए। 

राज का लौड़ा पूरा खड़ा हो चुका था वह उसको मसलते हुए बोला: आप माँ से बात कर लो मुझे क्या आपत्ति हो सकती है भला। 

मनीष: चलो फिर मैं उनसे बात करके आता हूँ, ठीक है ना?

राज : हाँ ठीक है, पर उनका पिरीयड चल रहा है, ये ध्यान रखना। 

मनीष हँसते हुए: अरे बाक़ी के दो छेद तो हैं ना और हम दोनों के पास कुल दो लंड ही है ना? 

राज भी हँसने लगा। 

नमिता के हाथ अपनी बुर के ऊपर चले गए क्योंकि वह बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। 

फिर उसने सुना कि फ़ोन कट गया है। उसने भी जल्दी से फ़ोन रख दिया। 

तभी अपना लौड़ा सहलाते हुए राज अंदर आया और बोला: माँ मनीष भय्या अभी आपको फ़ोन करेंगे और आज की रात यहाँ आने को बोलेंगे और वो आपको मेरे साथ चोदना चाहते हैं। 

नमिता ने हैरानी का दिखावा किया और बोली: ये क्या बात हुई? ऐसा क्यों बोल रहा है वो? 

राज: माँ उनका कहना है कि जब पापा को कोई ऐतराज़ नहीं है तो क्या फ़र्क़ पड़ता है। 

नमिता: तुम्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता?

राज: नहीं माँ बल्कि देखो मेरा लौड़ा कैसे खड़ा है उसकी बात सुनकर। 

तभी नमिता की मोबाइल की घंटी बजी। 

मनीष: आंटी राज मान गया है मैं आ जाऊँ?

नमिता: हाँ शायद तुमने उससे बात की है वह मेरे पास ही खड़ा है । ठीक है आ जाओ और खाना भी यहीं खाना। ठीक है?

मनीष: हाँ आंटी ठीक है मैं आ रहा हूँ। 

उसने फ़ोन काट दिया। 

अब राज आया और नमिता को अपनी बाँहों में लेकर बोला: माँ आज से हमारे नए परिवार कि सामूहिक चुदायी शुरू?

नमिता: हाँ लगता तो ऐसा ही है? 

और वो दोनों एक दूसरे को चूमने लगे और मनीष का इंतज़ार करने लगे।

नमिता और राज जब दीर्घ चुम्बन में गुँथें हुए थे तभी दरवाज़े के घंटी बजी। राज अपने लौड़े को अजस्ट किया और दरवाज़ा खोला , सामने मनीष खड़ा था। वह अंदर आया और दोनों एक दूसरे को गले लगकर मिले। दोनों ने अपने निचले हिस्से को एक दूसरे से दूर रखा क्योंकि दोनों के ही लौड़े तने हे थे। मनीष भी सारे रास्ते नमिता की चुदायी का सोचकर उत्तेजित था। 

अब दोनों नमिता के पास आए और वह भी आगे बढ़कर मनीष को अपने से लिपटा ली और उसके गाल चूम लिया। 

मनीष भी नमिता को चूमते हुए उसको बोला: आंटी, आज कितने दिनों बाद आपको देखा है, आप तो पहले से भी सुंदर हो गयी हो। 

नमिता: तुम भी पहले से तगड़े हो गए हो। 

नमिता ने उसकी मस्कूलर बाहों को सहलाते हुए कहा। 

फिर नमिता बोली: चलो खाना खाते हैं।

मनीष: नहीं आंटी पहले प्यार करेंगे, फिर खाना खाएँगे और फिर रात भर प्यार करेंगे। क्यों राज क्या बोलते हो?

राज: हाँ भय्या आप सही कह रहे हो। पहले मज़े करते हैं। खाना बाद ने खाएँगे। 

नमिता: चलो अब तुम दोनों यही चाहते हो तो यही सही। थोड़ा सा जूस तो ले लो। 

राज: हाँ भय्या मैं जूस लाता हूँ। 

मनीष : हाँ जूस चलेगा। 

राज किचन से तीन गिलास में जूस लाया। 

नमिता अब मनीष की गोद में बैठी थी। और वो उसे चूमे जा रहा था। 

राज ने दोनों को जूस दिया और ख़ुद भी उनके बग़ल में बैठ कर पीने लगा। 

नमिता: मनीष, तुम पापा को बता कर आए हो यहाँ?

मनीष: मैं कोई बच्चा नहीं हूँ कि पापा से पूछे बिना कोई काम नहीं करूँ। 

राज: भय्या कहीं आपके पापा आपको ढूँढेंगे तो नहीं ?

मनीष: अरे फ़ोन लगा लेंगे और मैं बता दूँगा कि मैं उनकी बीवी के साथ हूँ। 

नमिता : अभी हमारी शादी नहीं हुई है, ठीक है?

सब हँसने लगे। सबने जूस पी लिया था। 

अब मनीष बोला: आंटी एक बात बोलनी है? 

नमिता: हाँ बोलो?

मनीष: मैं आपको मम्मी बोल सकता हूँ?

नमिता: अरे क्यों नहीं? अब जल्दी ही मैं तुम्हारी मम्मी बन ही जाऊँगी। तो आज क्यों नहीं।

मनीष: थैंक यू मम्मी। आप बहुत अच्छी हैं। 

अब मनीष बोला: मम्मी अब दूध पिलाइए ना अपने दोनों बेटों को। 

राज भी बोला: हाँ माँ प्लीज़ अपना ब्लाउस उतार दीजिए ना। 

नमिता: क्यों तुम दोनों के हाथ नहीं हैं क्या? ख़ुद ही निकालो । 

मनीष ने ख़ुश होकर उसके ब्लाउस के हुक्स खोलने शुरू किया और नमिता ने उसको निकालने में उसे मदद की। 

अब नमिता के दोनों दूध बाहर आकर दोनों लड़कों के सामने थे। 

अब नमिता उठ कर मनीष और राज के बीच में बैठ गयी।

उसके बड़े बड़े गोरे दूध हिल रहे थे। उत्तेजना से उसके दोनों निप्पल्स भी तन गए थे। 

अब राज ने कहा: माँ अपने दोनों बेटों को दूध पिला दो ना। 

अब राज ने अपना मुँह नमिता के एक दूध की तरफ़ किया, और नमिता ने अपने एक दूध को पकड़कर उसके मुँह में लगा दिया। फिर उसने अपना दूसरा दूध भी उठाकर मनीष की तरफ़ बढ़ाया और मनीष ने उसे अपने मुँह में ले लिया । अब दोनों लड़के एक एक दूध पीने लगे। नमिता की आँखें मज़े से बंद होने लगी और वह सिसकारियाँ भरने लगी। राज का हाथ नमिता के पेट पर रेंगने लगा। मनीष भी नमिता की जाँघ सहलाए जा रहा था। दोनों ज़ोर ज़ोर से दूध चूस रहे थे और निप्पल को भी जीभ और दाँत से काटकर नमिता को मस्ती की ऊँचाइयों की ओर के जा रहे थे। 

राज का हाथ भी नमिता के पेटिकोट के नाड़े को खोलने लगा। मनीष ने पेटिकोट को नीचे खिसकाया और नमिता ने अपने चूतर उठाकर पेटिकोट निकालने में मदद की। अब वह एक पैंटी में थी और दोनों उसकी गदराइ जाँघ को सहलाकर मस्त हो रहे थे। 

दोनों का हाथ उसकी जाँघों की जोड़ पर पहुँचा और वो उसकी पैंटी के ऊपर से उसके पैड को महसूस किए। फिर वो उसके चूतरों को दबाने लगे। 

नमिता बोली: अरे तुमने मुझे तो नंगी कर दिया और ख़ुद कपड़े पहने बैठे हो। चलो उठो और उतारो। 

मनीष: मम्मी दूध को मुँह से निकालने की इच्छा ही नहीं हो रही है। 

नमिता हँसते हुए बोली: रात को मुँह में लेकर सो जाना। ठीक है?

मनीष: आह मम्मी सच में ऐसे ही सोऊँगा। 

राज: मैं भी कई बार ऐसे ही मुँह में लेकर सो जाता हूँ। 

अब राज और मनीष खड़े हुए और अपने कपड़े खोल दिए। उनके तगड़े बदन को देखकर नमिता की बुर इस हाल में भी खुजा उठी। फिर उन दोनों को चड्डी में देखकर वह मस्ती से अपने एक एक हाथ में उनके लौड़े को चड्डी के ऊपर से पकड़ ली। फिर वह अपने नाक को मनीष की चड्डी के ऊपर के जाके उसके लौड़े को सूंघी और फिर वह राज का भी ऐसे ही सूंघी। अब उसने मनीष की चड्डी उतारी और उसके लौड़े को सहला दी। 

फिर उसने राज की भी चड्डी खोली और उसके लौड़े को भी सहलायी। अब वह अपना मुँह खोलकर मनीष के लौड़े को चाटा और फिर उसे चूसने लगी। वह बैठे हुए मज़े से लौड़ा चूस रही थी। 

फिर उसने मनीष का लौड़ा सहलाया और राज का लौड़ा चूसने लगी। इस तरह वह बारी बारी से दोनों के लौड़े चूसे जा रही थी और सहला भी रही थी। दोनों उत्तेजना के चरम सीमा पर आ गए थे। 

मनीष: आह्ह्ह्ह्ह मम्मी चलो बिस्तर पर अब आपको चोदेंगे।

राज: हाँ माँ अब रुका नहीं जा रहा। 

नमिता: चलो बेडरूम में चलते हैं। 

मनीष ने नमिता को अपने गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। नमिता उठकर बोली: बाथरूम से आती हूँ। 

वह वहाँ जाकर पैड निकाली और फिर सफ़ाई करके वापस आयी।

तब तक दोनों बिस्तर पर लेट के अपने अपने लौड़े सहला रहे थे। नमिता को उन्होंने अपने बीच में लिटाया और फिर उसकी चूचियों पर टूट पड़े। उनका हाथ नमिता की जाँघों पर भी रेंग रहा था। फिर उन्होंने उसकी बाहें उठायीं और उसकी बग़लों को चाटने और चूमने लगे। नमिता हाऽऽऽऽय्य करने लगी थी ।

फिर वह बारी बारी से उसके होंठ भी चूसे और उसके पेट को भी चूमे और उसकी नाभि में भी जीभ फिराए। नीचे जाकर उसकी जाँघों पर भी अपनी जीभ फिर रहे थे। तभी मनीष ने नमिता को लुढ़का कर पेट के बल कर दिया। अब दोनों उसकी एक एक जाँघ को पीछे से चूम और चाट रहे थे। नामिता अब आऽऽहहह करने लगी थी। 

अब उसके एक एक चूतर को वो दबाने लगे और फिर उसे चूमने और काटने भी लगे। 

नमिता :आऽऽह्ह्ह्ह्ह क्या खा ही जाओगे मुझे आऽऽऽऽऽज?

राज: माँ आज तो सच में खाने की ही इच्छा हो रही है आपको।

मनीष: मम्मी आप चीज़ ही हो खाने लायक। 

अब मनीष ने अपना मुँह चूतरों की फाँकों के बीच डाल दिया और उसकी गाँड़ के छेद को चाटने लगा। राज अब उसकी पीठ को चूम और चाट रहा था। 

जल्दी ही नमिता आऽऽऽऽहहहह करके अपने चूतर उठा कर अपनी मस्ती को व्यक्त करने लगी। 



राज अब उसकी गर्दन को चूम और चाट रहा था, और उसकी चूचियाँ दबा रहा था। 

मनीष: मम्मी अब रहा नहीं जा रहा , गाँड़ मार लूँ?

राज: भय्या पूछ क्यों रहे हो, देखो ना माँ कैसे गाँड़ उठा उठा के मज़ा ले रही हैं । वो तुम्हारा लौड़ा ही तो माँग रही हैं। हाँ बस वह क्रीम रखी है उसे लगा कर ही मारिएगा।

मनीष उठकर क्रीम लाया और राज को बोला: राज, ज़रा मदद कर दे ना क्रीम लगाने में। 

राज उठा और बोला: माँ ज़रा चूतरों को उठाओ ना। 

नमिता ने अपने चूतरों को हवा में उठा दिया। 

अब राज अपनी माँ के चूतरों को फैलाया और गाँड़ के छेद में मनीष का थूक लगा देख कर बहुत उत्तेजित हो गया और उसका लौड़ा ऊपर नीचे होने लगा। 

राज मनीष को बोला: लो यहाँ क्रीम लगाओ। 

मनीष ये सोचकर कि सगा बेटा अपनी माँ के चूतरों को फैलाकर उसे गाँड़ में क्रीम लगाने को बोल रहा है वह बहुत उत्तेजित हो गया और उसके लौड़े ने प्रीकम छोड़ना शुरू कर दिया। उसने क्रीम लेकर अपनी दो उँगलियाँ गाँड़ में डालीं और नमिता आऽऽहहहह कहकर मस्त हो कर अपनी गाँड़ हिलाके अपनी ख़ुशी दिखायी। 

मनीष दिखावा करते हुए: मम्मी दर्द हो रहा है क्या?

नमिता: नहीं रे बहुत अच्छा लग रहा है। गाँड़ बहुत खुजा रही है। 

राज: भय्या अब अपने लौड़े में क्रीम लगाओ और माँ की गाँड़ कि खुजली मिटा दो। 

मनीष ने क्रीम लगाया और लौड़े को गाँड़ के छेद पर रख कर दबाने लगा। अब राज ने अपना हाथ चूतरों से हटा लिया और नमिता के मुँह के पास जाकर बैठ गया। नमिता ने अपने मुँह के पास राज का लौड़ा देखा तो उसको मस्ती से चूसने लगी। 

उधर मनीष को अब गाँड़ मारने में मज़ा आने लगा था। 

अब उसके मस्त धक्कों से पलंग हिलने लगा। क़रीब १५ मिनट की घमासान चुदायी के बाद वह हम्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। 

नमिता भी चिल्लाए जा रही थी: फ़ाऽऽऽऽऽऽऽऽड़ देएएएएएए मेंएएएएएएरि गाँड़। आऽऽऽऽऽहहह।वह बीच बीच में राज का लौड़ा भी चूसती थी। 

मनीष हाँफते हुए अलग हो गया। नमिता चिल्लायी: आऽऽऽहहब्ब राऽऽऽज बेटाआऽऽऽ अब तू चोओओओओओओओओद हाऽऽऽय। 

राज उठकर नमिता की गाँड़ के पास आया और वहाँ देखा कि मनीष का रस बाहर आ रहा था उसके छेद से। वह तौलिए से साफ़ किया और गाँड़ में अपना लौड़ा घुसेड़ दिया। नमिता हाऽऽऽऽऽऽयह्यय मेरे राआऽऽऽऽऽऽऽजा कहकर मस्ती से अपनी गाँड़ पीछे करके और मज़े से अपनी गाँड़ मरवाने लगी। 

अब राज भी चुदायी के मूड में आ गया और लम्बे लम्बे धक्के मारके मस्ती से चोदने लगा। जल्दी ही वह भी झड़ने लगा। अब नमिता भी आऽऽऽऽऽहहह मैं भी गइइइइइइइइइ कहते हुए हुए झड़ गयी। 

अब सब साफ़ सफ़ाई करके साथ में खाना खाए। नमिता ब्लाउस और पेटिकोट पहनी थी और वह दोनों चड्डी में थे। नमिता की आँखें बार बार उनकी मस्कूलर छातियों को देख कर ख़ुश हो रही थी। 

खाना खाकर थोड़ी देर TV देखकर वह सब सोने लगे। मनीष ने नमिता का ब्लाउस उतार दिया और बाद में दोनों एक एक दूध मुँह में लेकर सो गए। नमिता भी बहुत प्यार से अपने दोनों बेटों के बाल सहला रही थी। फिर सब नींद की आग़ोश में समा गए।


सुबह सबसे पहले नमिता की नींद खुली तो उसने देखा कि मनीष का हाथ उसकी एक चूचि पर था और राज का हाथ उसके चूतर पर था। दोनों के लौड़े सुबह सुबह ही पूरे खड़े थे। वह मुस्करायी और धीरे से उठकर बाथरूम गयी। फिर वह सबके लिए चाय बनाई और आके दोनों लड़कों को उनके लौड़े पकड़कर उठाने लगी। राज उठकर नामित को चूमा और बाथरूम चला गया। मनीष ने नमिता को ब्लाउस और पेटिकोट में देखा और बोला: मम्मी ये कपड़े क्यों पहन लिए? 

नमिता: अच्छा तो क्या मम्मी को हमेशा नंगी रखेगा?

मनीष: मेरा बस चले तो यही होगा। 

अब नमिता उसको प्यार की और बोली: चलो उठो और फ़्रेश हो कर चाय पी लो।

थोड़ी देर बाद सब अपनी अपनी चाय की प्याली के कर सोफ़े पर बैठे थे कि तभी नमिता का फ़ोन बजा। 

सुधाकर था, बोला: हाय जान कैसी हो ?

नमिता: मेरे ऊपर दो दो जवान साँड़ छोड़ दिए हैं आपने और पूछ रहें है कैसी हो?

सुधाकर: साँड़ मतलब? 

नमिता हँसते हुए बोली: रात से मनीष यहाँ है मेरे पास और राज तो दूसरा साँड़ है ही। 

सुधाकर हैरानी से: मनीष वहाँ है? मैं सोच रहा था की अब तक शायद सो रहा है। चलो कोई बात नहीं। तो फिर ख़ूब मस्ती की दोनों ने तुम्हारे साथ?

नमिता: बेचारे क्या मस्ती करते मैंने तो पैड ही बाँध रखा है। 

सुधाकर: फिर भी बाक़ी के दो छेदों का तो मज़ा लिए ही होंगे?

नमिता: क्यों आपको जलन हो रही है क्या?

सुधाकर: अरे मुझे क्यों जलन होने लगी। मस्ती करो सब , बोलो तो मैं भी आ जाऊँ? 

नमिता: नहीं नहीं, इस हालत में इन दोनों को सम्भालना ही मुश्किल है और आप भी आ गए तो मैं तो गयी काम से।

सुधाकर हँसते हुए: चलो नहीं आता , ज़रा मनीष को देना फ़ोन। 

मनीष: गुड मोर्निंग पापा।

सुधाकर: गुड मोर्निंग, अरे तुम्हें जाना था तो बता के जाते ना, मैं रोकता थोड़े ही।

मनीष: सारी पापा, आगे से ऐसा नहीं होगा। 

सुधाकर: चलो कोई बात नहीं। अब वापस आ जाओ , हमको अभी मुंबई के लिए निकलना है २ दिन के लिए। 

मनीष: ओके पापा मैं अभी आता हूँ।

मनीष जल्दी से कपड़े पहन कर आया और नमिता को गले लगाकर प्यार किया और फिर राज से भी गले मिलकर वापस चला गया। 

नमिता: चलो राज तुम भी तय्यार होकर स्कूल जाओ। 

अब नमिता भी किचन में घुस गयी। 

अगले तीन दिनों तक कुछ ख़ास नहीं हुआ। नमिता का पैड खुलते ही राज उसकी बुर की सेवा में लग गया। 

उस दिन राज और वह नंगे सो रहे थे, तभी मनीष का फ़ोन आया।

मनीष: मम्मी कैसी हैं? 

नमिता अपनी चूचि से सोए हुए राज का हाथ हटा कर बोली: ठीक हूँ, आज सुबह सुबह फ़ोन? सब ठीक है ना। 

मनीष: सब बढ़िया है मम्मी, हम कल रात को ही वापस आए हैं और पापा ने बोला था कि आपको और राज को आज दिन भर यहाँ रहने के लिए बुला लूँ। इसीलिए फ़ोन किया है , आज इतवार है ना, राज की भी छुट्टी है। 

तभी राज ने करवट ली और बोला: माँ किसका फ़ोन है?

नमिता: मनीष का , वह आज हमें दिन भर के लिए अपने घर बुला रहा है, कहता है उसके पापा ने कहा है। 

राज ख़ुश होकर : तो चलो ना माँ बहुत मज़ा आयेगा । 

नमिता हँसते हुए: हाँ तुम सबको तो मज़ा आएगा पता नहीं मेरा क्या होगा?

मनीष: अरे मम्मी आपको कुछ नहीं होगा। आख़िर हमारी मम्मी का हम ख़याल नहीं रखेंगे तो और कौन रखेगा ?

नमिता: मुझे सब पता है कि कैसा ख़याल रखने वाले हो? 

तभी मनीष बोला : लो मम्मी , पापा आपसे बात करेंगे। 

सुधाकर: क्या हाल है जान, आ जाओ ना संडे मनाएँगे साथ में मिलकर, आज तो राज की भी छुट्टी ही होगी। 

नमिता: ठीक है आते हैं हम लोग। कुछ खाने के लिए बना कर लाऊँ क्या? 

सुधाकर: अरे नहीं हम नौकरों से बनवा लेते हैं, बस तुम लोग आ जाओ। 

नमिता: अच्छा आते हैं। ये कहकर फ़ोन काट दी। 

अब राज ने नमिता को अपने ऊपर खिंच लिया और उसके होंठ चूसते हुए उसकी नंगी पीठ सहलाते हुए बोला: माँ वहाँ आज क्या होगा? 

नमिता: क्या पता तुम तीनों मुझे तंग मत करना। 

राज: माँ मैं तो नहीं करूँगा पर अंकल और भय्या का पता नहीं। वह नमिता के चूतरों को दबाते हुए बोला। 

नमिता की आऽऽह निकल गयी और वह बोली: क्या कर रहा है क्यों दुखा रहा है।

राज: सॉरी माँ बहुत ही मस्त हैं आपके चूतर । 

नमिता: मस्त है तो नोच डालेगा क्या बंदर? 

राज उससे जो से चिपकते हुए बोला: माँ आइ लव यू ।

नमिता हँसते हुए उठी और बोली: चल अब उठ और तय्यार हो जा , नाश्ता करके मनीष के घर जाएँगे। 

फिर वह दोनों तय्यार हुए। नमिता ने सेक्सी ब्रा और जाली दार पैंटी पहनी। ऊपर से एक टाइट टॉप पहन जिसमें से उसकी चूचियाँ फटी जा रहीं थीं। नीचे से उसने लेग्गिंग पहनी जिसमें से उसकी मादक और भरी हुई जाँघें बहुत मस्त दिख रहीं थीं। उसने लाल लिप्स्टिक लगाई और वह बहुत ही सेक्सी दिख रही थी। राज भी जींस और टी शर्ट में आया और उसकी आँखें नमिता को देखकर फटी रह गयी। 

वह बोला: ओह माँ आज आप क्या दिख रही हो। मस्त सेक्सी माल । 

नमिता: नालायक, अपनी माँ को माल बोलता है। शर्म नहीं आती?

राज हँसते हुए बोला: माँ मैं तो बेशर्म हो गया हूँ। 

यह कहकर उसने नमिता के टॉप के ऊपर से उसकी दोनों चूचियाँ दबायीं। और फिर नीचे झुककर उसके लेग्गिंग के ऊपर से जाँघों के जोड़ को दबाया वह आऽऽऽंह कर उठी। उसने नमिता को घुमाया और उसके चूतरों को दबाने लगा। 

नमिता: आऽऽऽह अब बस भी कर , कितना दबाएगा?

राज: आऽऽऽह माँ मन ही नहीं भरता। आज आप इतनी सुंदर दिख रही हो कि दोनों बाप बेटा आप पर चढ़ जाएँगे। 

नमिता: तू तो नहीं चढ़ेगा ना?

राज: माँ मुझे नहीं पता उस समय क्या होगा। 

नमिता: चल अब जो भी होगा देखा जाएगा। 

तभी नमिता का फ़ोन बजा। 

मनीष: मम्मी आप लोग तय्यार हो गए क्या?

नमिता: हाँ हम तय्यार है। 

मनीष: मैं अभी कार भेज रहा हूँ। आप दोनों आ जायिये। दस मिनट में कार चौक पर आ जाएगी। 

नमिता: ठीक है। 

थोड़ी देर बाद वो बाहर आए और चौक ओर खड़े हुए। राज ने देखा कि सभी लोग नमिता को घूरे जा रहे थे। उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ और उभरे हुए बड़े बड़े चूतर सबके आकर्षण का कारण थे।कई लोग तो अपना लौड़ा 

भी खुजा रहे थे नमिता को देख कर। 

तभी कार आइ और वो दोनों उसमें बैठ गए। 

सुधाकर के घर में कार रुकी। उसका घर भी फ़ार्म हाउस की तरह काफ़ी बड़ा था और शानदार बंगला था। 

घर के अंदर मनीष ने उनका स्वागत किया। वह टी शर्ट और हाफ़ पैंट में था। वह दोनों से गले मिला। 

तभी सुधाकर बाहर आया और नमिता को देखकर बोला: राज बेटा, आज कितने लोग तुम्हारी माँ को देख कर बेहोश हुए? 

राज हँसने लगा। मनीष: आप सच बोल रहे हो पापा, आज मम्मी बहुत ही सुंदर दिख रही है। 

सुधाकर: अरे तू इनको मम्मी कब से बोलने लगा?

नमिता: कल रात से ही। 

राज: अंकल मैं भी आपको पापा बोल सकता हूँ?

सुधाकर उसे प्यार से गले लगाते हुए: हाँ बेटा क्यों नहीं? ज़रूर बोल सकते हो। 

अब सब लोग सोफ़े पर बैठे और बातें करने लगे। 

मनीष: पापा आप लोग शादी कब कर रहे हो?

सुधाकर: मैं तो चाहता हूँ कि इसी हफ़्ते हम शादी के लिए कोर्ट में अर्ज़ी लगा दें। नमिता तुम्हारा क्या ख़याल है?

नमिता: ठीक है जैसे आपकी मर्ज़ी। 

मनीष: पापा अपनी शादी की पार्टी तो होगी या नहीं?

सुधाकर: हाँ जरुर देंगे किसी बढ़िया होटेल में। 

मनीष: पापा फिर अनिका और नानी भी आएँगी ना?

सुधाकर: नानी का तो पता नहीं पर अनिका ज़रूर आएगी। 

नमिता मुस्कुराते हुए बोली: और अनिका फिर यहीं हम सबके साथ रहेगी और यहीं स्कूल जॉऐन करेगी। हैं ना सुधाकर?

सुधाकर : हाँ ऐसा ही प्लान है। 

नमिता ने आँख मारी सुधाकर को और उसका लौड़ा नमिता की उस बात को याद करके झटका मारने लगा कि वह उसे अनिका की जवानी का मज़ा दिलवाएगी ।

नमिता ने सुधाकर को अपन लौड़ा अजस्ट करते देखा।

वह मन ही मन हँसने लगी ये सोचकर कि कैसे वह अपनी बेटी को चोदने के लिए बेचैन हो रहा है। 

नमिता: अनिका कब आ रही है?

सुधाकर: शायद दो दिन में आ ही जाएगी। चलो उसे फ़ोन करके पूछ लेते हैं। 

उसने फ़ोन लगाया: हाँ बेटी कैसी हो? सब पूछ रहे हैं तुम कब आ रही हो? 

अनिका: पापा आपकी शादी कि तारीख़ पक्की हो गयी क्या?

सुधाकर: अरे जब तुम आओगी उसी दिन कर लेंगे। कोर्ट में रेजिस्टर्ड शादी ही तो करनी है। नमिता भी यहीं बैठी है। 

अनिका : ठीक है पापा मैं परसों आ जाती हूँ। पापा मेरी नमिता जी से बात कराओ ना। 

नमिता ने फ़ोन लिया: कैसी हो अनिका ?

अनिका: आंटी मैं बिलकुल ठीक हूँ। बस आपसे मिलने का बहुत मन है। 

नमिता: मेरे भी तुमसे मिलने का बहुत मन है। 

अनिका: चलिए फिर परसों मिलते हैं। 

नमिता: ठीक है । वो फ़ोन बंद कर देती है।

सुधाकर: चलो कहीं घूमने चलते हैं, क्या ख़याल है? 

मनीष: पापा कहाँ जाएँगे। यहीं घर में ही रहते हैं ना? 

तभी सुधाकर का फ़ोन बजा। 

सुधाकर: अरे क़ासिम क्या हुआ बोलो?

क़ासिम उसका मुंबई ऑफ़िस का बंदा था। 

क़ासिम: सर, एक बड़ा ऑर्डर मिलने की सम्भावना है, क्या आप ऑफ़िस आ सकते हो, हम यहाँ मुंबई से आपके साथ विडीओ कोनफरेंसिंग करना चाहते हैं। 

सुधाकर: आज तो इतवार है ?

क़ासिम: सर, हमारे लिए ये ऑर्डर बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए हम सब आज भी काम कर रहे हैं। 

सुधाकर: शाबाश मुझे बड़ी ख़ुशी हुई, चलो मैं ऑफ़िस आता हूँ अभी । 

मनीष: क्या पापा आपने मम्मी को बुलाया और ख़ुद बाहर जा रहे हैं । 

सुधाकर: अरे भाई बहुत ख़ास ऑर्डर है इसीलिए जाना पड़ेगा। एक काम करना तुम लोग १ बजे मुझे हमारे ऑफ़िस के सामने वाले रेस्तराँ में मिलना , खाना साथ में खाएँगे। 

यह कहकर वह अपने कमरे में चला गया और तय्यार होने लगा। 

नमिता राज और मनीष शादी की बातें करने लगे। 

तभी कमरे से सुधाकर ने आवाज़ लगायी: नमिता ज़रा आना तो। 

मनीष: जाओ मम्मी पापा को मज़ा लेना होगा आपसे। 

नमिता हँसते हुए : चल हट बेशर्म कुछ भी बोलता है। 

नमिता सुधाकर के कमरे में घुसती है तो वह सिर्फ़ एक चड्डी में होता है और वह अपनी बग़लों पर स्प्रे लगा रहा था। 



नमिता को देखकर वह उसको अपनी बाहों में भर लेता है और उसे बेतहाशा चूमने लगता है। नमिता भी उसके चुम्बन का जवाब बराबर से देती है। वह भी उसके निपल और बालों से भारी छाती को चूमती है। 

सुधाकर उसके चूतरों को दबाकर बोला: हाय जान क्या मस्त लग रही हो आज। 

नमिता: इसीलिए छोड़ के जा रहे हो?

सुधाकर: डार्लिंग काम ही ऐसा आ गया है। लंच के बाद हम साथ रहेंगे और चुदायी करेंगे। ठीक है? 

नमिता: ठीक है देखते हैं ।

नमिता ने उसकी चड्डी के ऊपर से उसके आधे खड़े लौड़े को दबाया। फिर वह नीचे होकर उसके लौड़े को चड्डी से बाहर निकाली और उसकी चमड़ी को पीछे करके मोटे सुपाडे को चूम ली, और फिर जीभ से चाट भी ली। 

सुधाकर: आऽऽह क्या मस्त चूसती हो?

नमिता: एक राउंड पानी निकाल दूँ?

सुधाकर: नहीं डार्लिंग समय नहीं है अभी दोपहर को मज़े करेंगे। 

नमिता हँसती हुई उठी और बोली: पता नहीं आपके जाने के बाद ये दोनों साँड़ मेरा क्या हाल करेंगे? मैं तो आज आपसे मज़े लेने के मूड में आयी थी। 

सुधाकर: अरे जान खाना खाकर वापस आएँगे तो हम भी मज़ा लेंगे । 

नमिता ने उसके होंठ चूमे और बाहर आ गयी। 

थोड़ी देर में सुधाकर बाहर आया और सबको बाई कहकर ऑफ़िस चला गया।

अब नमिता दोनों लड़कों के साथ बैठी थी। 

मनीष: मम्मी , पापा तो गए, चलो हम लोग स्विमिंग करते हैं। 

राज: यहाँ भी पूल है? दिखाई तो नहीं दे रहा है। 

मनीष: पीछे साइड में है । फ़ार्म हाउस से छोटा है पर है बढ़िया।

राज: चलो ना माँ चलते हैं। 

नमिता: चलो मुझे तो पानी में तैरना बहुत अच्छा लगता है। 

मनीष: मम्मी हम लोग आज नंगे होकर तैरेंगे। 

नमिता: ये क्या बकवास कर रहे हो? मैं ब्रा पैंटी में ही रहूँगी। तुम लोग चाहो तो नंगे नहा लो। 

राज: माँ आप भी ना , क्यों ज़िद कर रही हो , प्लीज़ हम सब नंगे होंगे तो ज़्यादा मज़ा आएगा। 

मनीष ने अपनी टी शर्ट निकाल के वहीं फेंक दी और अपनी हाफ़ पैंट भी उतार के फेंक दी। नमिता ने उसके कपड़े उठाकर कहा: यहाँ ड्रॉइंग रूम में कपड़े क्यों उतार रहे हो? चलो अपने कमरे में चलो। 

मनीष के कमरे में आकर राज भी अपने कपड़े उतार दिया। अब दोनों चड्डी में थे और उनके आधे खड़े लौड़े चड्डी से फूले हुए साफ़ दिख रहे थे।

मनीष आकर नमिता के पास खड़े होकर उसकी गाँड़ में अपना लौड़ा दबाकर बोला: मम्मी अब आपका टॉप उतार दूँ?

नमिता मुस्करायी और बोली: लो उतार दो। ये कहते हुए उसने अपना हाथ ऊपर कर दिया। 

अब मनीष ने उसका टॉप उतार दिया। नमिता अब ब्रा में थी। राज भी आकर नमिता की लेग्गिंग उतारने लगा, और नमिता ने भी अपना पैर उठाकर उसे बाहर निकाल दिया। 

अब मनीष उसको ब्रा और पैंटी में देखकर मस्त हो गया और उसके सामने बैठ गया। उसका मुँह अब नमिता की पैंटी के सामने था। वह उसकी पैंटी पर मुँह डालकर सूँघने लगा। नमिता ने उसके सिर में हाथ मारा और बोली: चल हट , ये क्या कर रहा है?

मनीष: मम्मी क्या गंध है आपकी बुर की। ये कहकर वह पैंटी उतारने लगा। नमिता ने भी कोई विरोध नहीं किया। 

अब नमिता नीचे से नंगी थी। उधर राज भी उसके पीछे आकर उसकी ब्रा खोल दिया और उसे उतार दिया। अब राज ने उसके दोनों दूध को हाथ में लेकर दबाने लगा। 

उधर मनीष ने अपना मुँह उसकी बुर में घुसेड़ दिया और चाटने लगा। 

नमिता: आऽऽँहह तुम लोग तैरने का बोले थे, ये क्या हो रहा है?

राज: उठो भय्या चलो पूल में। 

मनीष ने एक चुम्मी ली उसके बुर की और खड़ा हुआ और अपनी चड्डी उतार दी। अब उसका लौड़ा ऊपर नीचे हो रहा था उत्तेजना वश। 

अब राज ने भी अपनी चड्डी उतार दी और अपना लौड़ा ख़ुद ही सहलाने लगा। 

अब नमिता ने मस्ती से दोनों के लौडों को पकड़ा और बोली: चलो अब पूल में। 

अब तीनों पूल के पास आए।

राज: वाह माँ देखो क्या शानदार पूल है।

नमिता: हाँ बहुत सुंदर है। 

अब मनीष ने उसमें छलाँग लगा दी, और तैरने लगा। राज भी उसके पीछे गया। अब नमिता भी पूल में उतर गयी। सब तैरने लगे। 

फिर थोड़ी देर तैरने के बाद नमिता बाहर आकर पास रखे हुए एक लम्बे तख़्त पर जिसमें क़ुशन था उसके उपर लेट गयी। 

राज और मनीष भी बाहर आए और अपना लौड़ा झुलाते हुए नमिता के पास आ गये।

राज और मनीष उसके अग़ल बग़ल आकर बैठ गए और झुक कर नमिता के गालों को चूमने लगे। जल्दी ही वो उसकी चूचियों को दबाकर नमिता को मस्त कर दिया। फिर वो एक एक चूचि मुँह में लेकर चूसने लगे। 

नमिता की साँसे गरम होने लगी। अब उसने हाथ बढ़ाके उनके लौड़े एक एक हाथ में ले लिया और सहलाने लगी। 

अब राज नीचे जाकर नमिता की बुर चाटने लगा। फिर उसने उसकी टाँगें उठाकर अपना लौड़ा बुर में पेल दिया और नमिता को चोदने लगा। 

अब नमिता की आह निकलने लगी। तभी राज भी उसकी चूचि दबाकर मस्त हो गया और बाद में अपना लौड़ा उसके मुँह में ठूँस दिया। 

अब नमिता राज का लौड़ा चूसते हुए मनीष से चुदवाने लगी। वह अपने चूतरों को उछाल कर चुदवाने का मज़ा के रही थी। फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी। मनीष ह्म्म्म्म्म्म करके उसे चोदे जा रहा था। नमिता राज के लौड़े को अब डीप थ्रोट देने लगी थी। 

जल्दी ही वह झड़ने लगा और ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर नमिता की बुर में अपना रस छोड़ने लगा। 

अब नमिता बोली: आऽऽऽह राज अब तू अपना लौड़ा डाल दे मेरी बुर में। 

अब राज भी मनीष को हटा कर उसकी बुर को रुमाल से साफ़ किया और नमिता की बुर में अपना लौड़ा डाला और उसे मस्ती से चोदने लगा। नमिता फिर से चूतरों को उछालके चुदवाने लगी। 

नमिता की आऽऽहहह हाऽऽय्य निकल रही थी। 

राज भी ह्म्म्म्म्म्म कहकर उसे ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। अब नमिता भी झड़ने लगी और चिल्लायी: आऽऽऽहहहह बेएएएएएएएटा मैं गयीइइइइइइइइइइ। 

राज भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म माँआऽऽऽऽऽऽऽऽ कहकर अपना रस उसकी बुर में ठेल दिया। 

अब तीनों झड़कर आराम से वहाँ पड़े थे। 

अब नमिता उठी और पूल में वापस जाकर थोड़ी देर तैरी और बाहर आकर अपने कपड़े पहन लिए। 

राज और मनीष भी पूल में तैरकर आकर अपने कपड़े पहने। 

थोड़ी देर बाद वो दोनों नमिता की एक एक जाँघ पर लेटे थे और नमिता उनके बालों में उँगलियाँ घुमा रही थीं। 

तभी सुधाकर का फ़ोन आया और वो बोला: चलो आ जाओ रेस्तराँ में , मैं अगले आधे घंटे में पहुँच रहा हूँ। 

अब नमिता झुक कर उन दोनों को चुमी और बोली: चलो अब तैयार हो जाओ। 

दोनों उठे और तय्यार होने लगे। नमिता ने भी मेक अप किया और फिर तीनों कार से सुधाकर के पास रेस्तराँ जाने के लिए निकल पड़े।

रेस्तराँ में सुधाकर पहले से उनका इंतज़ार कर रहा था। 

नमिता उसके साथ बैठी और सामने राज और मनीष बैठे थे। सुधाकर बातें करते हुए नमिता की जाँघ पर हाथ फेरने लगा। नमिता भी अपना हाथ उसके हाथ पर रख कर सहलाने लगी। राज और मनीष को दिखाई नहीं दे रहा था, पर वो सोच रहे थे कि पापा कुछ तो शरारत कर रहे हैं। 

सुधाकर ने नमिता के पेट में अपना हाथ फेरा और उसकी नाभि के छेद को छेड़ने लगा। 

अब सूप पीते हुए सुधाकर उसकी कमर सहला रहा था। नमिता भी मस्ती से उसकी जाँघ सहलाने लगी। अचानक उसका हाथ सुधाकर के खड़े लौड़े पर पड़ा जो कि उसकी जाँघ के ऊपर एक साइड में था। सुधाकर का हाथ उसकी कमर पर कड़ा हो गया। नमिता की आह निकल गयी। 

राज: क्या हुआ माँ ?

नमिता: आऽऽह कुछ नहीं इनका पैर मेरे पैर को दबा दिया। 

सुधाकर: ओह सॉरी डार्लिंग। 

नमिता उसके लौड़े को पैंट के ऊपर से दबाकर बोली: मैं ठीक हूँ। आप परेशान ना होएँ।

सुधाकर : चलो खाना खाओ। 

नमिता हँसते हुए: मुझे तो बैगन खाना है। ये बोलकर उसने लौड़े को दबा दिया। 

सुधाकर: मंगाओ भाई जो भी इनको खाना है। 

उसकी कमर को सहलाते हुए वह बोला। 

इसी तरह मस्ती करते हुए सब ने खाना खाया। 

फिर सब सामने एक माल में गए, वहाँ सुधाकर ने सबके लिए कपड़े लिए। उसने नमिता को सेक्सी टॉप और स्कर्ट भी दिलाया। राज और मनीष भी अपने लिए कपड़े लिए। 

नमिता को सुधाकर ने जब सेक्सी कपड़े दिलवाए तब वो दोनों ही थे उस दुकान पर। 

सुधाकर: डार्लिंग कोई सेक्सी नायटी और अंडर गारमेंट्स भी लो ना। 

नमिता: आपको जो दिलवाना है दिलवा दीजिए। मैं तो पहन कर आपको ही मज़ा दूँगी। 

सुधाकर ने नमिता की गाँड़ पर अपना लौड़ा रगड़ा काउंटर पर नमिता के पीछे खड़े होकर । नमिता ने मज़े से उसको महसूस किया और बोली: चलिए ना आप तो बहुत गरम हो गए हो। घर चल के आपके हथियार को शांत कर दूँगी।

सुधाकर: चलो सच में अब नहीं रुका जा रहा है। ये सब फिर कभी ख़रीद लेंगे। 


फिर वह अपनी पैंट के उभार को छुपाने के लिए उसके सामने कपड़ों के थैले रख लिया और वापस कार से घर पहुँचे। 

राज और मनीष बोले: पापा हम तो आराम करेंगे। 

सुधाकर: हाँ हम भी आराम करेंगे। !

फिर वह और नमिता बेडरूम में चले गए। 

राज और मनीष भी हाफ़ पैंट में आकर लेट गए। 

मनीष: पापा आज मम्मी को छोड़ेंगे नहीं ।

राज: हाँ दोनों बहुत अधीर लग रहे थे ।

मनीष: उनकी चुदायी देखनी है क्या?

राज: क्या हम देख सकते हैं?

मनीष: हाँ , मैंने इंतज़ाम किया हुआ है। पापा रात को कई बार ऑफ़िस की लड़की लाते थे, और चुदायी करते थे। मुझे देखने में बहुत मज़ा आता था। 

राज: तो चलो ना देखते हैं। 

अब मनीष उसे पूल की तरफ़ ले गया। वहाँ पर एक छोटा सा कमरा था, जिसके अंदर जाकर वह एक स्टोर रूम में पहुँचे और वहाँ एक दरवाज़ा था जो की पापा के कमरे में खुलता था। उसकी चाबी मनीष के पास थी। उसने धीरे से दरवाज़ा खोला और स्टोर रूम में अंदर जाकर उसके दरवाज़े में से अंदर झाँका। वहाँ से अंदर का दृश्य बहुत साफ़ दिख रहा था। पर्दा हटा कर दोनों अंदर का दृश्य देखे और उनका मुँह खुला रह गया। 

उधर नमिता और सुधाकर जैसे ही कमरे में पहुँचे सुधाकर ने अधिरता दिखाकर उसे अपनी बाहों में ले लिया और बेतहाशा चूमने लगा। नमिता भी उसका साथ देने लगी। 

अब सुधाकर उसके होंठों को चूसने लगा। वह भी मज़े से उसका साथ दे रही थी। 

सुधाकर: आऽऽह जाऽऽन कितने दिन हो गए तुम्हें चोदे हुए? मेरा लौड़ा मरा जा रहा है तुम्हारी बुर के अंदर जाने में लिए। 

नमिता ने पैंट के ऊपर से उसको दबाते हुए कहा: हाँ मैं भी देख रही हूँ, कितना मोटा हो गया है बेचारा प्यासा लौड़ा आपका? 

वह भी लेग्गिंग के ऊपर से उसकी बुर को अपने पंजे में दबा कर बोला: ये भी तो गीली हुई जा रही है अपने यार की याद में। 

अब दोनों हँसने लगे। 

सुधाकर ने नमिता का टॉप उतारा और ब्रा में ऊपर से उसकी चूचियों को चूमने लगा। नमिता ने भी उसकी टी शर्ट निकाल दी और वह उसके निप्पल चूमने लगी। 

अब नमिता पलंग पर बैठ कर अपनी लेग्गिंग निकालने लगी। और सुधाकर ने भी अपनी पैंट और चड्डी निकाल दी और अपना लौड़ा हिलाते हुए बाथरूम में घुस गया। 

नमिता ने भी अपनी ब्रा और पैंटी उतारी और वह भी बाथरूम में घुसी। सुधाकर अपना लौड़ा धो रहा था। नमिता भी कोमोड पर बैठी और मूतने लगी। फिर वह भी भी हैंड शॉवर से अपनी बुर और गाँड़ धोने लगी। 

सुधाकर: आज तो लगता है कि ओरल सेक्स की पूरी तैयारी है हम दोनों की तरफ़ से । 

नमिता: इतने दिनों बाद मज़े लेंगे तो पूरे दिल से लेंगे, है ना?

सुधाकर: बिलकुल जान आज तो मस्त चुदायी करेंगे । 

अब नमिता और सुधाकर एक दुसरे से लिपटकर कमरे में आकर बिस्तर पर एक दूसरे की ओर करवट लेकर लिपट गए। अब सुधाकर उसकी चूचि मुँह में लेकर चूसने लगा। नमिता भी उसका लौड़ा सहलाए जा रही थी। 

थोड़ी देर बाद सुधाकर बोला: जान ६९ करें?

नमिता: हाँ क्यों नहीं, उसमें ही तो मज़ा है असली। 

अब सुधाकर पीठ के बल लेट गया और नमिता उसके ऊपर उलटा होकर लेट गई। नमिता का मुँह उसके लौड़े पर था उसकी बुर सुधाकर के मुँह के पास थी। नमिता ने लौड़े पर जीभ फेरनी शुरू की। सुधाकर भी उसकी बुर को फैलाकर चाटने लगा। 

जब वो दोनों ऐसी स्तिथि में थे तभी राज और मनीष अंदर झाँके। वो जहाँ थे वहाँ से उनको पूरी लम्बाई में दोनों दिख रहे थे ।

राज अपनी माँ को इस तरह से सुधाकर से ओरल सेक्स करते देख कर बहुत उत्तेजित हो गया। मनीष का भी लौड़ा पूरा खड़ा था। 

अब नमिता जीभ से पूरे सुपाडे को चाटी और फिर एक एक आँड मुँह में लेकर चूसने लगी। 

मनीष: पापा के आँड बहुत बड़े है ना? देख मम्मी क्या मज़े से चूस रही है। 

राज: हाँ माँ को आंड चूसना बहुत पसंद है, मेरे भी चूसती है। 

उधर अब नमिता उसके लौड़े को चूसने लगी थी। 

सुधाकर भी उसकी बुर की फाँकों में जीभ डालकर चाट रहा था और फिर वह उसके clit को जीभ से छेड़ने लगा, और दो उँगलियाँ बुर में डालकर अंदर बाहर करने लगा। 

दोनों मज़े में डूबे जा रहे थे। सुधाकर उसके चूतरों को दबाए जा रहा था। अब वह उसकी गाँड़ की दरार में भी अपना मुँह डाला और उसकी गाँड़ को चूसने और चाटने लगा ।

नमिता भी अपनी कमर को उसके मुँह में हिला रही थी और उसके लौड़े को पूरी तरह से मस्ती से भर कर चूस रही थी। अब वह उसको डीप थ्रोट भी देने लगी। 

अब सुधाकर आऽऽऽऽऽह कर उठा। वह अपना चूतर उछलकर उसके मुँह को नीचे से ही चोदने की कोशिश करने लगा। 

अब नमिता बोली: आऽऽऽहहह बस करिए मेरी clit को छेड़ना नहीं तो मैं अभी ही झड़ जाऊँगी। हाऽऽऽऽऽयय्यय । 

अब सुधाकर ने अपना मुँह हटाया और बोला: आऽऽह क्या चूस रही हो , ऐसा ही चूसोगी तो मैं भी अभी झड़ जाऊँगा।

अब नमिता ने भी उसका लौड़ा अपने मुँह से बाहर निकाल लिया। 

फिर वह उठी और उलटा होकर सुधाकर के ऊपर आ गयी और वह उसकी मोटी छातियों को दबाते हुए चूसने लगा। 

मनीष: मम्मी की छातियाँ कितनी मस्त हैं जितना भी चूसो दिल नहीं भरता। 

राज: हाँ भय्या मैं तो मुँह में लेकर भी सोता हूँ फिर भी मेरा दिल नहीं भरता। 

अब मनीष ने अपना लौड़ा पैंट से बाहर निकाला और उसे हिलाने लगा। राज ने भी वैसा ही किया। 

नमिता ने अपनी कमर उठा कर उसके लौड़े को पकड़ा और सुधाकर से बोली: थोड़ा बुर को खोल दीजिए ना। 

सुधाकर ने उसकी बुर की फाँकों को अलग किया और नमिता ने उसका मोटा सुपाड़ा वहाँ लगाया और धीरे से उस पर बैठती चली गयी और लौड़ा उसके बुर में समाता चला गया। 

राज: माँ कितने मज़े से चुदवाती हैं ना?

मनीष: सच भाई मैंने ऐसे मज़े लेने और देने वाली औरत नहीं देखी। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह देख क्या उछल उछल कर चुदवा रही है ? 

राज: आऽऽहहहह सच में वह बहुत मज़ा ले रही है। 

अब नमिता चूतरों को उछाल कर भरपूर चुदायी कर रही थी। 

सुधाकर भी उसकी छातियों को दबाते हुए नीचे से कमर को उछालके धक्के मार रहा था 

अब नमिता बोली: आऽऽऽहहहह मैं ही चोदूंग़ी या आप भी कुछ करोगे? 

सुधाकर हँसते हुए: आऽऽहहह मज़ा तो बहुत आ रहा है। पर चलो अब तुम नीचे आ जाओ और मैं इसे ख़त्म करता हूँ। 

नमिता ऊपर से उठ कर सीधे लेट गयी और अपनी टाँगें फैलाकर सुधाकर को जैसे बोल रही हो कि आओ मुझे चोदो । सुधाकर उसके पैरों के बीच में आकर अपना लौड़ा उसकी बुर में डाला और नमिता ने अपनी टाँगें उसकी कमर में फँसाकर नीचे से अपनी गाँड़ उछाली और पूरा लौड़ा अपने बुर में ले ली। 

अब सुधाकर ने ज़बरदस्त चुदायी शुरू की और पलंग भी बुरी तरह से हिलने लगा। और नमिता की आऽऽऽऽऽहहह और जोओओओओओओओओओर से चोओओओओओओओओदो फ़ाऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओ मेरीइइइइइइइइइ बुर कोओओओओओओओ हाऽऽऽयय्यय मज़ाआऽऽऽऽऽऽ। आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है। 

अब वह भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म कहकर बोला: मैं अब गयाआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽहहहह।

नमिता भी चिल्लायी: आऽऽऽऽऽऽहहह मैं भी गयीइइइइइइइइइइइ । 

अब वह उसकी बुर के अंदर तक पूरा रस डाल दिया और फिर उससे चिपक कर लेट गया। बाद में वह साइड में लेटा और बहुत देर तक दोनों एक दूसरे को चूमते रहे। 

फिर बाथरूम से वापस आकर एक दूसरे की बाहों में लेट कर बातें करने लगे। 

राज और मनीष का बुरा हाल हो गया था इस ज़बरदस्त चुदायी को देखकर। 

दोनों मनीष के कमरे में गए और मनीष बोला: आऽऽह मम्मी क्या माल है भाई। आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या चुदायी हुई आज। 

राज: एक काम करो भय्या, आप माँ को मेसिज करो मोबाइल पर और यहाँ आने को कहो अभी के अभी। वह आ जायेंगी और हमारे लौडों को भी शांत कर देंगी। 

मनीष : ठीक है करता हूँ। फिर उसने SMS भेजा। 

नमिता सुधाकर से नंगी लिपटी हुई पड़ी थी। उसके मोबाइल में मेसिज आया और वह धीरे से अलग होकर SMS पढ़ी- मम्मी जल्दी से मेरे कमरे में आओ आपसे काम है और हाँ कपड़े मत पहनना प्लीज़। 

नमिता ने देखा कि अब सुधाकर दूसरी तरफ़ करवट लेट कर खर्राटे भरने लगा था। 

वह धीरे से उठी और एक तौलिया लपेटकर मनीष के कमरे में पहुँची। वहाँ दोनों बिस्तर पर बैठे थे और अपने अपने लौंडे को मूठिया रहे थे। 

वह मुस्करायी और बोली: ये क्या हो रहा है?

दोनों बिस्तर से उठे और मनीष आगे से उसका तौलिया खींचकर निकाल दिया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा। पीछे से राज उसके चूतरों पर अपना लौड़ा दबाने लगा। फिर दोनों ने उसकी चूचियाँ चूसीं और नमिता भी उनके लौड़े एक एक हाथ में लेकर दबाने लगी। 

अब मनीष बोला: मम्मी आऽऽहहहह आपको अभी चोदना है। ये कहते हुए उसने नमिता को बिस्तर पर ऐसे लिटाया की उसके चूतर बिस्तर के किनारे पर थे । अब उसने नमिता की टाँगें उठायी और अपने कंधों पर रखकर नीचे खड़ा होकर , अपना लौड़ा उसकी खुली हुई बुर में पेला और जल्दी से चोदने लगा। 

नमिता: आऽऽऽह क्या कर रहा है, क्यों इतना उतावला हो रहा है ? मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या? आह्ह्ह्ह्ह्ह ।

मनीष: आऽऽहहह मम्मी पागल हो रहा हूँ आऽऽऽऽऽऽह आपको चोओओओओओओओदने के लिए हाऽऽऽऽऽऽयह। 

वह बुरी तरह से धक्का मारे जा रहा था , नमिता की चूचियाँ दबाते हुए। उसके चूतर पिस्टन की तरह चल रहे थे। राज भी उसकी बग़ल में बिस्तर पर बैठा अपनी माँ को चुदवाते देखकर और गरम हो गया था। 

तभी मनीष ह्न्म्म्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा। और फिर नमिता से चिपक कर अपना रस उसकी बुर में छोड़ दिया। फिर वह अलग हुआ और आऽऽह कहकर साइड में लेट गया। 

अभी नमिता पैर नीचे करने हो वाली थी कि राज झपट कर उसकी टांगों के बीच आ गया और एक तौलिए से उसकी बुर को पोंछा जिसमें से मनीष का वीर्य बाहर आ रहा था। फिर उसने वहाँ अपना लौड़ा डाल दिया और इससे पहले की नमिता कुछ समझ पाती वह उसे चोदने लगा। 

नमिता: हाऽऽऽय्यय आज तुम दोनों पागल हो गए हो क्या? हाऽऽय्यय इतनी बुरी तरह से क्यों चोद रहा है? मार ही डालेगा क्या?

राज हाँफते हुए: आऽऽऽहहह माँ चुदायी से कोई नहीं मरता । आऽऽऽऽऽप ही तो बोलती होओओओओओओओओओ ह्म्म्म्म्म्म्म्म। 

अब वह नमिता की बुर में पूरे गहरायी तक लौड़ा डालके मस्ती से चोदने लगा।

नमिता भी चिल्लायी: आऽऽऽहहहह आऽऽऽऽऽज्ज क्याआऽऽऽऽऽऽ सवाआऽऽऽऽऽर है तुम दोनों पर हाऽऽऽयाय्य इतनी जल्दी क्योंओओओओओओओओ । 

नमिता को कहाँ पता था की दोनों लड़के उसकी चुदायी देखकर ही बावरे से हुए बैठे हैं। 

मनीष भी उसकी एक चूचि चूसने लगा। राज के ज़ोरदार धक्के जारी थे। अब नमिता भी अपने कमर को नीचे से उछालकर उसके धक्कों का जवाब बराबरी से देने लगी। राज भी ज़मीन पर खड़े खड़े ही पूरा लौड़ा उसकी बुर में ठूँस कर नमिता को मस्ती से भर रहा था। 

नमिता चिल्लाने लगी: आऽऽहहहह बेएएएएएएएएटा और जोओओओओओओर से चोओओओओओओद । फ़ाऽऽऽऽऽऽऽड़ दे मेरीइइइइइइइइओ बुउउउउउउउउर कोओओओओओओओ।

राज:: हाम्म्म्म्म्म्म्म्म माँआऽऽऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽ बुर है आऽऽऽऽऽऽपकी। 

फिर दोनों एक दूसरे से चिपक कर झड़ने लगे। 

मनीष माँ बेटे की चुदायी को बड़ी ही हैरानी और उत्सुकता से देख रहा था। 

फिर राज नमिता के ऊपर से हटा और बिस्तर पर बैठ गया और नमिता की जाँघें सहलाने लगा। 

नमिता: आऽऽह मैं बिलकुल थक गयी हूँ। तुम लोगों ने मेरी जान ही निकाल दी। अब तो मैं बाथरूम भी नहीं जा सकती , इतना थक गयी हूँ। 

राज: अरे माँ मैं हूँ ना , चलो आपको गोदी में उठाके ले जाता हूँ। 

फिर राज ने उसने नमिता को अपनी बाँहों में उठाया और उसको बाथरूम में ले जाकर कोमोड पर बिठा दिया। नमिता भी बेशर्मी से मूतने लगी। मनीष भी पीछे पीछे आ गया। 

राज: भय्या मैं माँ को खड़ी करता हूँ आप उनकी बुर की सफ़ाई कर दो। 

राज ने नमिता को उठाकर सहारा देकर खड़ा किया और मनीष नीचे बैठ कर शॉवर और साबुन से नमिता की बुर और गाँड़ की अच्छी तरह से सफ़ाई किया। 

फिर उसने तौलिए से पोंछा और फिर से राज नमिता को गोद में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। 

मनीष जाकर नमिता के लिए बिस्कुट और जूस लाया। नमिता ने ये सब लिया और बोली: आऽऽऽहब अब जान में जान आयी। सच में मैं बिलकुल ही पस्त हो गयी थी। 

उसने मनीष और राज को प्यार किया और बोली: चलो अब मैं थोड़ा सा आराम करती हूँ, तुम्हारे पापा के पास जाकर। फिर वह तौलिया लपेटी और बाहर निकल गयी। फिर वह एक गाउन पहनी और सुधाकर के बग़ल में लेटी और सो गयी। 

उधर राज बोला: भय्या आपने माँ को नहीं बताया कि हमने उनको पापा से चुदते हुए देखा है। 

मनीष: जानबूझकर नहीं बताया। अभी तो हमें अनिका और पापा की चुदायी भी देखनी है, मम्मी कह रही थीं ना कि पापा उसकी सील तोड़ेंगे। 

राज अपना लौड़ा दबाकर बोला: हाँ यार क्या मज़ा आयेगा वो दृश्य देखने में। अच्छा किया जो माँ को नहीं बताया।

मनीष: इसीलिए तो नहीं बताया। ताकि असली मज़ा ले सकें। 

अब दोनों अपने लौड़े दबाए और आराम से सो गए।


शाम को नमिता की नींद खुली तो वह कपड़े पहनकर सबके लिए चाय बनाई और सबको आवाज़ दी। 

सबने साथ में चाय पी और फिर नमिता ने कहा: अब हमें जाना होगा, कल राज का स्कूल है और उसे होम वर्क भी होगा। 

सुधाकर: परसों अनिका आएगी तो तुम उससे मिलने आओगे नहीं ? 

नमिता: मैं तो उसे स्टेशन पर रिसीव करने जाना चाहती हूँ। 

सुधाकर: हाँ हाँ क्यों नहीं । मैं तुम्हें चौक से पीक अप कर लूँगा। 

फिर नमिता और राज सबसे गले मिल कर अपने घर चले गए। 

घर पर राज ने आकर पढ़ाई शुरू की और नमिता किचन में व्यस्त हो गयी। रात को खाना खाने के बाद राज फिर से अपने पढ़ाई में लग गया। 

नमिता गहरी नींद में थी जब रात के १२ बजे राज सोने आया और उसने नींद से नमिता को उठाया और उसकी ज़बरदस्त चुदायी की, फिर दोनों सो गए। 

अगले दिन राज के स्कूल जाने के बाद नमिता ऑफ़िस के लिए तय्यार हो रही थी, तभी मनीष का फ़ोन आया। 

मनीष: मम्मी मैं और पापा अभी मुंबई जा रहे हैं और शाम को वापस आएँगे। पापा ने कहा है कि आप ऑफ़िस मत आओ और शादी के लिए कपड़े वग़ेरह ख़रीद लो। उन्होंने आपके अकाउंट में अभी २ लाख ट्रान्स्फ़र किए हैं। 

नमिता: ठीक है। कहकर फ़ोन रख दी। 

नमिता सोची कि अकेली क्या शॉपिंग करूँगी, देखती हूँ शायद सुषमा का साथ मिल जाए। 

उसने सुषमा को फ़ोन लगाया। 

नमिता: कैसी हो?

सुषमा: ठीक हूँ आज बहुत दिन बाद याद आयी। 

नमिता: नहीं यार बिज़ी थी, क्या कर रही है?

सुषमा: आज राजू स्कूल नहीं गया है, आज अपने पापा के साथ वह डेंटिस्ट को दाँत दिखाएगा क्योंकि उसके दाँत में दर्द है। 

नमिता: ओह मैं तो तुमको बाज़ार जाने के लिए बोल रही थी क्योंकि मुझे शॉपिंग करनी थी। 

सुषमा: ओह अभी तो राजू घर पर है, थोड़ी देर में जब वह जाएगा तब मैं चल सकती हूँ। 

नमिता: ठीक है ना एक घंटे बाद चलते हैं। राजू घर में है तो ठोक ही रहा होगा तुमको। 

सुषमा: हाँ सुबह से एक राउंड तो बाप बेटा कर लिए हैं। अब कोई भरोसा नहीं है इन लोगों का। 

नमिता: हा हा चलो मज़े है तुम्हारे। फिर मिलते हैं। 

क़रीब १२ बने दोनों एक माल के निकलीं। नमिता ने आज साड़ी पहनी थी जिसमें से उसका सुंदर भरा बदन बहुत ही सज रहा था। सुषमा ने लेग्गिंग और टॉप पहना था और वह भी बहुत सेक्सी दिख रही थी। क़रीब ४० साल की दोनों औरतें जहाँ से भी गुज़रते लोग मुड़कर देखने को मजबूर हो जाते थे। 

नमिता ने एक ऑटो लिया, दोनों माल पहुँची। वहाँ जब वह पैसे दे रही थी, तभी उसने देखा कि एक दूसरा ऑटो भी रुका और उसमें से दो लड़के उतरे क़रीब २३/२४ साल के होंगे। उन्होंने टी शर्ट और जींस पहनी थी। उनके बाहों के मस्कूलर बल्ज बता रहे थे कि वह कसरती बदन के लड़के हैं। 

तभी नमिता का पर्स छिनकर एक देहाती सा लड़का भागने लगा। इसके पहले कि नमिता चिल्लाती , वो दोनों लड़के चीते की तरह उस चोर पर झपटे और क़रीब ५ मिनट की दौड़ के बाद उसको पकड़ा और उसको एक तो थप्पड़ लगाकर वापस हाँफते हुए आए और नमिता को पर्स दे दिए। 

नमिता: आपका बहुत बहुत धन्यवाद। 

पहला लड़का: अरे दीदी इसमें धन्यवाद की क्या बात है ये तो हम मिलिटेरी वालों का फ़र्ज़ है। 

नमिता: आप आर्मी में हैं?

दूसरा लड़का: हाँ जी। हम कुछ दिन की छुट्टियों में आए हैं। 

नमिता: मेरा नाम नमिता है और ये सुषमा है मेरी दोस्त। 

पहला लड़का: जी मैं राहुल हूँ और यह नज़ीर है। 

नज़ीर: दीदी चलिए आपके पर्स मिलने की ख़ुशी में हमारे साथ कॉफ़ी पीजिए। 

नमिता: ओह, अच्छा चलो। 

सुषमा: इस उम्र के लड़के तो हमको आंटी बोलते हैं ये दीदी बोले अच्छा लगा ना?

नमिता: हाँ सच अच्छा लगा। वो दोनों आगे चल रहीं थीं और लड़के उनके पीछे उनके उठे हुए नितम्बों को देखकर एक दूसरे को आँख मारे। 

राहुल: क्या माल हैं दोनों? मस्त भरी हुई। 

नज़ीर: मेरा तो खड़ा हो रहा है इनकी मटकती गाँड़ देख कर। ये कहते हुए उसने अपनी पैंट में लौड़े को अजस्ट किया ।

राहुल: यार कोई रास्ता निकाल, इनको पटाके तेरे घर ले चलते हैं और मज़े करते हैं।

नज़ीर: चलो देखते हैं। 

कॉफ़ी शॉप में चारों कॉफ़ी पी रहे थे।

नमिता: आप लोगों की पोस्टिंग बॉर्डर पर है?

राहुल: जी हाँ हम लोग कश्मीर बॉर्डर पर पोस्टेड हैं। 

सुषमा: आप लोगों को डर नहीं लगता?

नज़ीर: दीदी डर नहीं लगता, एक दिन सबको हो मरना है। पर एक बार ग़लत है कि हम आपसे चाहिए छोटे हैं हमें आप नहीं तुम बोलिए। 

नमिता हँसते हुए: चलो ठीक है , अच्छा ये बताओ कि तुम्हारी शादी हुई की नहीं?

नज़ीर: दीदी अभी तो हम बच्चे हैं अभी से शादी?

सुषमा उनके मस्कूलर बाहों को देखकर बोली: बच्चे तो नहीं हो तुम, ज़रा अपनी बाहों को देखो कितने तगड़े हैं। 

राहुल: हाँ दीदी अब हम बड़े हो गए हैं पर अभी शादी से डर लगता है। 

नमिता: डर क्यों?

नज़ीर: दीदी आप नाराज़ नहीं होगी तो बोलूँ?

नमिता: नहीं होऊँगी बोलो?

नज़ीर: दीदी हमको वो वो- मतलब-- याने - 

नमिता: अरे साफ़ साफ़ बोलो ना जो भी बोलना है। 

नज़ीर: मतलब हमें सुहागरात से डर लगता है ।

सुषमा: वह क्यों ? 

राहुल: असल में हमने कभी सेक्स नहीं किया है ना , इसलिए बड़ा डर लगता है। किसी भी लड़की को कैसे मतलब सुहाग रात में मतलब कैसे यानी कि । आऽऽह दीदी आप समझ गयी ना?

नमिता हँसते हुए: इतना बड़ा शरीर है और ऐसी बात करते हो। 

नज़ीर: दीदी आप हंस रही हो, हम सच में डर रहे हैं। 

सुषमा: तो कोई गर्ल फ़्रेंड तो होगी उसके साथ रिहर्सल कर लो ना। 

नज़ीर: दीदी गर्ल फ़्रेंड कहाँ से बनेगी हम तो कुछ दिनों के लिए ही घर आते हैं। अच्छा दीदी ये तो बताईये कि आपके घर में कौन कौन हैं?

नमिता: मैं और मेरा बेटा बस ,वह १२ थ में पढ़ता है। 

नज़ीर: क्या कह रही हैं आप दीदी? आपका बेटा १२ थ में है, आप इतनी उम्र की तो बिलकुल ही नहीं लगती। मैं तो आपको ३०/ ३२ की सोच रहा था। आपके फ़िगर को देखकर कोई नहीं मानेगा कि आप एक जवान बेटे की माँ हो। 

नमिता: धत्त तुम भी बस ऐसे ही मुँझे चढ़ा रहे हो। 

नज़ीर: दीदी वह सच ही कह रहा है। 

राहुल: और दीदी आपके परिवार में कौन कौन है?

सुषमा: मैं मेरा बेटा जो १० थ में है और मेरे पति। 

नज़ीर: आपका भी एक जवान बेटा है? कमाल है आप दोनों ने अपनी उम्र को मानो रोक लिया है। कितनी छोटी दिखती हैं आप दोनों। 

नमिता ने देखा कि सुषमा के टॉप से उसकी चूचियों का उभार दिख रहा था और दोनों लड़के उसकी क्लिवेज़ को देख रहे थे। 

नमिता मन ही मन मुसकायी। उसकी चूचि कड़ी होने लगी और निपल्ज़ भी कड़े हो गए। क्या मस्त जवान कड़क लड़के हैं। 

उसने चुपके से अपनी साड़ी का पल्ला एक चूचि के ऊपर से हटा दिया। फिर उसने कनख़ियों से देखा कि सुषमा भी आगे की ओर होकर बात कर रही थी और अपने चूचियो की गहरायी को दिखा रही थी। 

नमिता : सुषमा कॉफ़ी ख़त्म करो, शॉपिंग नहीं करनी?

तभी नमिता ने देखा कि अब दोनों लड़कों की आँखें जैसे उसकी ब्लाउस में कसे एक चूचि से चिपक ही गयी थी। वास्तव में ब्लाउस में से वो इतने बड़े और ऊपर से आधे नंगे दिख रहे थे कि बिचारे लड़कों को दोष देना भी ग़लत होता। 

अब नमिता मन ही मन मुस्करायी। उसने नोटिस किया कि दोनों के हाथ अपने पैंट के ऊपर चले गए। 

नमिता सोचने लगी कि क्या सच में इन्होंने सेक्स का अनुभव नहीं किया होगा क्या? फिर वह सोची कि नहीं ये दोनों इनको बातों में फंसा रहे हैं। वो अच्छे खासे अनुभवी लग रहे हैं।अचानक उसके मन में एक विचार आया कि क्यों नहीं आज इनसे मज़े किए जाए। 

तभी वह सुषमा से बोली: चलो मेरे साथ ज़रा वाशरूम चलो। 

नमिता और सुषमा बाहर निकलीं। अब नमिता बोली: मज़ा करना है इनके साथ?

सुषमा: दीदी, क्या बोल रही हो? किसी को पता चल गया तो? 

नमिता: अरे किसी को कैसे पता चलेगा? हम इनके साथ २/३ घंटे ही तो बितायेंगीं। 

सुषमा अपनी बुर खुजाते हुए बोली: है तो मस्त मर्दाने लड़के। क्या मछलियाँ है उनके बाहों की। पर डर लगता है। 

नमिता: अरे डरने की कोई बात नहीं है। चल उनको पटाते हैं। 

फिर दोनों बाहर आए तो वो दोनों उठकर कॉफ़ी शाप से बाहर आकर उनका इंतज़ार कर रहे थे। 

नमिता: देख उनके पैंट, कैसे सामने से फूले हुए हैं। 

सुषमा: हाँ सच दीदी मस्त लौंडे हैं ।

उनके पास पहुँचने पर राहुल बोला: दीदी आपको आते हुए देख कर लग रहा था जैसे फ़िल्म की हीरोइन आ रहीं हैं। सच में आप दोनों बहुत ही सेक्सी हो। 

नमिता: अच्छा अब हम सेक्सी हो गयीं? अभी तक सुंदर थीं। 

नज़ीर: दीदी आप लोग सुंदर तो हो ही साथ में सेक्सी भी हो। 

नमिता: अच्छा चलो बहुत मक्खन मार लिया । अब हम शॉपिंग करें। 

नज़ीर: दीदी मैं बहुत अच्छा खाना बनाता हूँ, चलिए ना मेरे घर आपको ऐसी बिरयानी खिलाऊँगा आप उँगलियाँ चाटती रह जाओगी। 

नमिता: कौन कौन है तुम्हारे घर में?

नज़ीर: दीदी कोई नहीं, सब अचानक एक डेथ के कारण बाहर गए हैं। पूरा घर ख़ाली है। 

नज़ीर ने ये बात नमिता की चूचि को घूरते हुए और अपना लौड़ा खुजाते हुए कहा। 

अब नमिता की पैंटी भी गीली होने लगी थी। 

तभी राहुल सुषमा को घूरते हुए बोला: दीदी चलो आप भी शॉपिंग किसी और दिन कर लेना ।

अब नमिता ने सुषमा को देखा और बोली: क्या कहती हो? बिरयानी खानी है?

सुषमा: जैसे आप कहो। 

अब नमिता बोली: ठीक है चलो देखें कैसी बिरयानी बनाते हो? कितनी दूर है तुम्हारा घर?

नज़ीर: बस दीदी १५ मिनट लगेंगे ऑटो से । 

नमिता: चलो पर हम २ बजे तक वापस अपने घर जाएँगे। हमारे बच्चे स्कूल से वापस आ जाते हैं। 

राहुल: हाँ दीदी कोई बात नहीं , हो जाएगा। 

अब चारों माल से बाहर आए और उन्होंने दो ऑटो किए। एक ऑटो में दोनों लड़के बैठे और पीछे से दूसरे ऑटो में ये दोनों बैठी। और उनके पीछे पीछे चल पड़े। 

राहुल: यार चुदवाने आ रही हैं या सच में बिरयानी खाने आ रही हैं ?

नज़ीर: अरे फ़िकरना कर ,वो दोनों हमारे लंड लेने ही आ रही है ।

थोड़ी देर में एक घर के सामने वो रुके, और अंदर गए। अच्छा घर था नज़ीर का। उसके पापा का कपड़े का व्यवसाय है जो अच्छा चलता है। 

अब सब सोफ़े पर बैठे और नज़ीर सबके लिए पानी लाया। सबने पानी पिया। 

नमिता: नज़ीर तुम्हारा घर बहुत सुंदर है। 

राहुल: दीदी इसका बेडरूम भी बहुत सुंदर है । 

सुषमा: बेडरूम तो सुंदर है मगर सुंदर बहु कब लाएगा?

नमिता भी हँस कर बोली: बिना बहु के बेडरूम का क्या मज़ा ?

राहुल: दीदी आपको तो बताया ना अगर बहु लाएँगे तो भी टेन्शन ही होगा कि कोई अनुभव तो है नहीं। 

नज़ीर: दीदी आप चाहो तो हमारा जीवन बन सकता है।

नमिता सब कुछ समझकर भी अनजान बनते हुए बोली: वो कैसे? हम क्या कर सकती हैं?

नज़ीर: दीदी आप हमको ट्रेनिंग दे दो ना कि कैसे सुहागरात मनायी जाती है? 

सुषमा: धत्त बदमाश कहीं के। ऐसी भी ट्रेनिंग कहीं होती है?

राहुल: दीदी सच में प्लीज़ हमारी मदद कर दीजिए ना ताकि हम लोग शादी की हिम्मत जुटा सकें। 

ये कहकर वह सुषमा के पास आके बैठा और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर उसे दबाने लगा। 



नज़ीर भी नमिता के पास आके बैठा और बोला: दीदी हमारी क़िस्मत बदल दीजिए ना प्लीज़। और वह भी उसका हाथ पकड़कर दबाने लगा। 

नमिता की निगाह उसकी पैंट के उभार पर पड़ी और वह मस्त होकर उसके हाथ को दबाने लगी और बोली: अच्छा चलो जैसा तुम चाहो।

उधर सुषमा भी राहुल के मर्दाने बदन की गंध से मस्त होकर बोली: अच्छा जैसा तुम चाहो। 

अब दोनों लड़के ख़ुश हो गए। 

नज़ीर नमिता को बोला: चलिए ना हम दोनों मेरे बेडरूम में चलते हैं। और ये दोनों मेरे पापा के बेडरूम में जा सकते हैं। 

अब नमिता मुस्कुराते हुए उठी और नज़ीर के साथ उसके बेडरूम में जाकर बिस्तर पर बैठ गयी। 

उधर सुषमा भी राहुल के साथ दूसरे बेडरूम में चला गया। 

नमिता के पास आकर उसके बग़ल में बैठा और फिर नज़ीर बोला: दीदी एक बात बोलूँ? 

नमिता: हाँ बोलो। 

नज़ीर: मुझे बचपन से अपनी अम्मी अच्छी लगती हैं। क्या मैं आपको अम्मी बुला सकता हूँ? 

नमिता प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरी और बोली: हाँ हाँ क्यों नहीं बेटा ज़रूर। 

फिर नज़ीर ने अपना सिर नमिता की छातियों पर रखा और नमिता ने उसके सिर को अपनी छातियों में दबा लिया । नज़ीर नमिता की छातियों की चुम्मी लेने लगा। फिर नमिता ने भी अपनी साड़ी का पल्लू गिराया और अपनी तनी हुई ब्लाउस में क़ैद छातियाँ नज़ीर के सामने कर दीं। अब तो नज़ीर पागल सा हो गया और वह नमिता की छातियाँ खुल कर दबाकर चूमने लगा। नमिता भी उसके गालों को चूमने लगी। अब जल्दी ही नज़ीर अपने हाथों में नमिता की चूचियाँ लेकर दबाते हुए नमिता के होंठ चूसने लगा। 

नमिता समझ गयी कि वह अनुभवहीन तो नहीं है। सिर्फ़ नाटक कर रहा था। 

वह मुस्करायी और सोची कि चलो अनुभव वाला होगा तो ज़्यादा ही मज़ा देगा। 

अब नज़ीर उसको चूमते हुए उसका ब्लाउस खोलने लगा, और नमिता भी उसकी ब्लाउस उतारने में मदद की। ब्रा में नमिता की बड़ी गोरी चूचियाँ देखकर वह उनको चूमने लगा और बोला: अम्मी आपके दूध कितने बड़े हैं , मुझे पिलाएँगीं ना?

नमिता: हाँ बेटा ज़रूर पिलाऊँगी। 

नमिता ने ख़ुद अपनी ब्रा खोली और अपने दूध बाहर निकाले और वह उन्हें दबाकर मस्ती से भर गया और फिर नमिता ने अपने हाथ ने अपने एक दूध को पकड़कर उसके मुँह में दे दिया। नज़ीर उसे चूसने लगा और म्म्म्म्म्म करके मस्त हो गया। उसका दूसरा हाथ उसकी दूसरी चूचि के निपल को मसल रहा था और नमिता की बुर में आग लग गयी थी। जी भर के दूध पीने के बाद वह उठा और अब उसने अपना कपड़ा निकाल दिया। 

उसकी बालों से भरी हुई छाती और उसकी चड्डी में फँसे हुए लौड़े को देखकर नमिता भी अपना पेटिकोट निकाली और फिर अपनी गीली पैंटी भी निकाल दी। 

नज़ीर ने ज़मीन से उसकी पैंटी उठायी और उसे सूँघने लगा। 

नमिता भी नीचे उसकी चड्डी के सामने बैठी और वहाँ अपना मुँह रगड़ने लगी। फिर वह उसकी चड्डी उतारी और उसके काली झाँटों के बीच से उसका कटा हुआ लौड़ा अपने फूले हुए सुपाडे के साथ उसके सामने झूल रहा था। लौड़ा कम से कम ८ इंच का था। 

नमिता की बुर लौड़े को देखकर पानी छोड़ने लगी। 

बीमा देर किए वह उसके सुपाडे को चूसने लगी और फिर वह नीचे उसके बड़े आँड को भी दबाकर मस्ती से भर गयी। नमिता ने जीभर के उसका लौड़ा चूसा और फिर नज़ीर ने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी जाँघों को फैलाकर उसकी बुर देख कर बोला: अम्मी क्या मस्त बुर है आपकी, जी करता है खा जाऊँ। यह कहकर वह उसे चूमते हुए चाटने लगा। 

नमिता भी अपनी बुर को उसके सिर को दबाकर मज़ा लेने लगी। 

फिर वह उसकी बुर में अपना मोटा लम्बा लौड़ा घुसाया और उसे चोदने लगा। नमिता भी आऽऽऽह करके चुदवाती हुई बोली: आऽऽऽऽहहह तुम तो पक्के चोदू हो। हाऽऽऽऽऽय्यय क्या नाटक कर रहे थे। 

नज़ीर: अम्मी आपको पटाने के लिए नाटक तो करना ही था। हम्ममनन क्या मस्त बुर है आपकी अम्मीइइइइइइइ। 

नमिता: आऽऽऽहहब मज़ाआऽऽऽऽऽ। आऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ और जोओओओओओओओर से चोओओओओओओओओदो।

अब नमिता अपने चूतर उछालकर चुदवाने लगी।

जल्दी ही दोनों चिल्लाकर झड़ने लगे। 

उधर राहुल और सुषमा भी ज़बरदस्त चुदायी में लगे थे। 

वह भी सुषमा की टाँगे उसकी छाती तक उठाकर उसको पूरे ज़ोर से चोद रहा था। जल्दी ही चिल्ला चिल्ला कर वो भी झड़ गए। 

अब बाथरूम से सफ़ाई करके वो दोनों नंगे ही नज़ीर के कमरे में पहुँचे तो वहाँ भी वो दोनों चुदायी के बाद आराम कर रहे थे। 

नज़ीर: मज़ा आया राहुल? 

राहुल: हाँ यार सुषमा दीदी को मम्मी बनाकर ख़ूब चोदा। 

नज़ीर: मैं भी इनको अम्मी बनाकर मस्ती से चोदा। 

नमिता: देखा सुषमा, ये दोनों बोलते थे कि ये अनुभवहीन है। जबकि सच में पक्के चुद्दड़ हैं। 

सुषमा: सच दीदी ये भी बहुत ज़बरदस्त चुदायी किया और देखो इसका लौड़ा भी कितना बड़ा है। 

नमिता ने हाथ बढ़ाकर राहुल का लौड़ा पकड़ा और बोली: बेटा ८ इंच का है या उससे भी बड़ा है?

राहुल: हाँ क़रीब ८ इंच ही है। 

नमिता: दोनों लड़के साँड़ हैं। 

राहुल अपने लौड़े को लेटी हुई नमिता के मुँह के पास ले जाकर बोला: मम्मी चूसो ना प्लीज़। 

नमिता: दीदी से मम्मी हो गयी मैं? 

राहुल ने अपना लौड़ा उनके मुँह में डाला और बोला: आऽऽह मम्मी कहकर चोदने में जो मज़ा है दीदी कहकर चोदने में कहाँ?

अब नमिता भी उसके नरम लौड़े को चूसकर मस्ती से भरने लगी और उसका आकार उसके मुँह में बड़ा होते जा रहा था नज़ीर ने भी सुषमा के मुँह पर अपना नरम लौड़ा रखा और वह भी उसके कटे लौड़े को बड़े प्यार से चूसने लगी। जल्दी ही दोनों के लौड़े अपने पूरे आकार में आ गए और फिर उन्होंने उनको पेट के बल लिटाया और उनको चूतर उठाने को बोला। 

वो दोनों अब चौपाया बन गयीं । उनके मोटे गोरे चूतरों को दबाकर वो दोनों मज़े से भर के उनको काटने भी लगे। फिर वो उनकी बुर को चाटने लगे और गाँड़ में भी जीभ फिराए। दोनों औरतें आऽऽऽह कर उठीं। अब उन्होंने अपने लौड़े उनकी बुर में डाले फ़र्क़ इतना था कि पार्ट्नर बदले हुए थे। और एक बार से पलंग डबल चुदायी से हिलने लगा और वो औरतें भी चुदासि होकर अपनी गाँड़ पीछे दबाकर चुदाई करवा रहीं थीं।

थप्प थप्प की आवाज़ से कमरा गूँज रहा था और हाऽऽऽऽय्य मरीइइइइइइइइ आऽऽऽऽऽऽहहहह और जोओओओओओओर सेएएएएएएए। चोओओओओओओओओदो जैसी आवाज़ें कमरे में भरी हुई थीं। 

फिर वो सब आऽऽहहहह ह्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगे। 

बाद में सब लेटे और सुस्ताने के बाद नमिता बोली: बहुत मस्त बिरयानी खिलायी। 

सब हँसने लगे। 

फिर नमिता बोली: अब हमें जाना होगा। 

सब तय्यार हुए और फिर राहुल एक ऑटो लाया और नमिता और सुषमा उसमें बैठ कर अपने घर को चल दिए। 

रास्ते में नमिता फुसफुसाकर बोली: मज़ा आया?

सुषमा: बहुत , क्या मस्त लौंडे थे। आह निचोड़ दिया उन्होंने। 

नमिता: सच में बड़े हलकट मर्द थे बहुत मज़ा आया। 

सुषमा: ये ग़लत नहीं है क्या?

नमिता: ज़िंदगी मज़ा करने के लिए है, हम कोई रँडी तो है नहीं , क्या हमने पैसे लिए? इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है। बुर और लौड़े मज़े के लिए ही बनाए गए हैं। इसलिए कोई गिल्ट फ़ीलिंग मत रखना। समझी?

सुषमा: हाँ सच कह रही हो आप। 

वो ये बातें फुसफुसाकर कर रही थीं ताकि कहीं ऑटो सुन ना लें। 

फिर वो दोनों अपने अपने घर चली गयीं।


अगले दिन राज के स्कूल जाने के बाद नमिता नहा कर आयी तभी सुधाकर का फ़ोन आया: अनिका को लेने जाना है ना?

नमिता: हाँ हाँ क्यों नहीं, बिलकुल जाना है। मैं १० बजे तक चौक पर आ जाऊँगा, तुम वहीं मिलना। 

नमिता: ठीक है। 

अब नमिता बहुत अच्छी तरह से तय्यार हुई और अपने आप को शीशे में देख कर मस्त हो गयी। साड़ी में से उसके उभार ग़ज़ब ढा रहे थे, फिर वह मुड़ी और शीशे में अपने नितम्ब देख कर मुस्करायी क्योंकि यही तो उसके बहुत ख़ास हथियार थे मर्दों को घायल करने के लिए। गोरा पेट और गहरी नाभि उसके मादक रूप को और भी मस्त बना रही थी। गहरी लाल लिपस्टिक में उसका बदन जैसे खिला जा रहा था। 

आज उसने एक ख़ास ब्लाउस पहना था जिसमें से उसकी क़रीब आधी क़्लिवेज नंगी दिख रही थी। 

जब वह चौक पर पहुँची तो शायद ही कोई मर्द ऐसा होगा जिसने उसे देख कर आहें ना भरी हो या अपना लौड़ा ना मसला हो। 

दो लड़के तो उसके पास आकर उसकी चूचियों को घूरते हुए बोले: आंटी जी नमस्ते , ऑटो लाऊँ क्या आपके लिए? बताइए कहाँ जाना है?

नमिता मुस्कुराती हुई बोली: नहीं चाहिए बेटा। 

लड़का : आंटी जी अगर समय हो तो हम आपको घुमा सकते हैं। ये कहकर खुले आम उसने अपना लौड़ा दबाया और नमिता को आँख मार दी। 

नमिता: कहा ना मुझे कहीं नहीं जाना है। 

तभी उसे सुधाकर की कार आती दिखाई दी। 

वह बोली: वो मेरी कार आ रही है। 

वो लड़के चुपचाप चले गए। 

सुधाकर की कार में बैठते ही वह बोला: आऽऽह क्या दिख रही हो। आज ख़ास तय्यार हुई हो अपनी बेटी के लिए?

ये कहते हुए उसने नमिता की जाँघ दबा दी। 

नमिता: हाँ जब उसको आपसे चुदवाना है तो तय्यारी तो करनी होगी ना।

अब दोनों हँसने लगे। 

सुधाकर : सच में मुझे अनिका के साथ ये सब सोचकर घबराहट होती है। अभी छोटी है वो। 

अब वह नमिता की जाँघ से हाथ ऊपर लेज़ाकर उसकी बुर के हिस्से को साड़ी के ऊपर से दबाने लगा। 

नमिता: आऽऽह क्या कर रहे हैं? पैंटी गीली हो जाएगी। वैसे उसका साइज़ छोटी या बड़ी है मुझे डिसाइड करने दो। आप परेशान ना हो । क्या पता उसकी सील टूट ही चुकी हो? आजकल की लड़कियों का कुछ भरोसा नहीं। 

सुधाकर: लगती तो नहीं वो ऐसी लड़की, पर अब तुम मिलोगी तो फ़ैसला करना। 

नमिता: सील टूटी हुई होगी तो पटाना और भी आसान हो जाएगा। 

अब नमिता ने उसके पैंट के उभार को दबा दिया 

सुधाकर: आऽऽहहह , हाँ वो तो है। मनीष और राज भी उसे चोदना चाहते हैं?

नमिता: हाँ वो दोनों भी मरे जा रहे हैं, ख़ासकर मनीष। 

मनीष नहीं आया अनिका को लेने? 

सुधाकर: वो तो अभी सोकर उठा था सो मैं उसे घर में ही छोड़ आया। 

तभी स्टेशन आ गया और वह दोनों अंदर जाकर ट्रेन का इंतज़ार करने लगे।

स्टेशन में बहुत भीड़ थी। तभी नमिता को लगा कि कोई उसके चूतरों को दबाकर निकल गया है। 

तभी ट्रेन आयी और ac वाले डिब्बे से अनिका अपने सामान के साथ बाहर आयी। उसने एक टाइट सा टॉप और जींस पहनी थी। उसमें से उसके संतरों सी मस्त चूचियाँ और मस्त गोरा पेट और जींस में फँसे चूतर कमाल के दिख रहे थे। 

सुधाकर ने उसका सामान ले लिया और वह नीचे उतरी और अपने पापा की बाहों में समा गयी। नमिता भीड़ में फँसी थी तभी किसी ने उसके चूतरों को दबा दिया और एक हाथ उसकी चूचि भी मसल कर ग़ायब हो गया। 

नमिता ने देखा कि अनिका की चूचियाँ अपने पापा के चौड़े सीने में दबी थीं और सुधाकर उसकी नंगी कमर को भी सहला रहा था। 

नमिता मुस्करायी और उनके पास पहुँची तो सुधाकर उससे अलग हुआ और नमिता का परिचय कराया। अनिका नमिता के भी गले लग गयी और बोली: मैं आपको मम्मी बुला सकती हूँ ना?

नमिता: हाँ बेटा क्यों नहीं? 

फिर नमिता ने उसके गाल चूम लिए। नमिता उसके कड़े संतरों का अहसास अपने बड़े आमों पर महसूस की और उसकी लेज़्बीयन प्रवृत्ति ज़ोर मारने लगी और उसकी पैंटी गीली हो गयी। वह सोचने लगी कि शायद सुधाकर से पहले वह ख़ुद ही इस स्वीट बेबी का मज़ा ले लेगी। 

यह सोचकर वह मुस्कुरा उठी।

अब सुधाकर अनिका का हाथ पकड़ा और क़ुली के साथ साथ आगे बढ़ने लगा। नमिता भी उनके पीछे पीछे चलने लगी। भीड़ ज़्यादा ही थी। फिर से नमिता को अपने चूतरों पर किसी के हाथ का अहसास हुआ और वह मुड़कर देखी तो एक अधेड़ सा आदमी दूसरी तरफ़ देखने लगा। 

आगे सुधाकर अब अपनी बेटी से सटकर उसकी कमर में हाथ डाल कर चल रहा था। बीच बीच में उसका हाथ उसके उभरे हुए नितम्बों के पास भी चला जाता था। नमिता ये सब देखकर मुस्कुरा रही थी। 

कार में अनिका नमिता के साथ पीछे बैठी। 

अब नमिता ने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और बोली: बेटा सफ़र में कोई तकलीफ़ तो नहीं हुई?

अनिका: मम्मी वैसे तो सब ठीक था पर दो लड़के थोड़ा बदतमिजी कर रहे थे। 

नमिता धीरे से : क्या किए?

अनिका ने अपने दूध की ओर इशारा किया और फूसफुसाइ : इनको दबा दिए जब मैं बाथरूम जा रही थी। 

नमिता: ओह बेटा दुखा तो नहीं?

अनिका : थोड़ा सा दुखा था। 

सुधाकर: अरे क्या फुसफुसा रही है दोनों ?

नमिता: कुछ नहीं ये माँ बेटी की बात है, आपको क्या?

नमिता फिर धीरे से बोली: और कुछ तो नहीं किया?

अनिका: जी वो पीछे भी दबाए थे। 

नमिता: चल बस इतना ही या और कुछ?

अनिका: नहीं बस इतना ही। 

नमिता : चलो कोई बात नहीं। अरे ये बदमाश लड़के ये सब तो करते रहते हैं।

तभी वो घर पहुँचे और मनीष आकर अनिका से लिपट गया और वह भी अपने सीने पर उसके मस्त संतरों को अहसास कर के मस्त हो गया ।

फिर वह भी उसकी नंगी कमर को सहलाया और बोला: अनिका , मम्मी पसंद आयी ?

अनिका: हाँ ये तो बहुत सुंदर हैं। बहुत अच्छी हैं। 

अब अनिका और नमिता सोफ़े पर बैठी और सामने सुधाकर और मनीष बैठे। 

अनिका के जींस में कसी जाँघें ग़ज़ब ढा रही थीं। 

नौकर ने पानी और जूस पिलाया। सब उसकी पढ़ाई की बातें करने लगे। 

नमिता: बेटा आप चलो अपने कमरे में और नहा लो और फिर बातें कर लेना। 

अनिका उठी और अपनी मस्त गाँड़ मटकाते हुए अपने कमरे में चली गयी। 

सुधाकर: नमिता, देख लो ना जाकर उसे किसी चीज़ की ज़रूरत ना हो?

नमिता उठते हुए बोली: ठीक है मैं देखती हूँ। 

नमिता उसके कमरे में पहुँची तो वह अपना सूटकेस खोल रही थी। 

नमिता: कोई मदद चाहिए बेटा?

अनिका: आइए ना मम्मी यहाँ बैठिए। 

नमिता वहीं अनिका के पास बिस्तर पर बैठ गयी। 

अनिका के समान में काफ़ी कपड़े थे। वह बोली: मम्मी मैं घर पर अभी क्या पहनूँ?

नमिता ने उसके कपड़ों में से एक छोटा सा टॉप और स्कर्ट निकाला और बोली: ये बहुत अच्छा है इसको पहन लो। 

अनिका: ठीक है मम्मी। फिर वह अपने लिए ब्रा और पैंटी भी निकाली। 

नमिता: अरे बेटी ये ब्रा तो बड़ी छोटी दिख रही है, तुम्हारे तो काफ़ी बड़े दिख रहे हैं। 

अनिका शर्मा कर: नहीं मम्मी ये मेरे साइज़ के ही हैं। 

नमिता: लगता तो नहीं। चलो अभी चेक कर लेते हैं। 

यह कहते हुए वह उठी और दरवाज़े को अंदर से बंद किया और अनिका को टॉप उतारने को बोली। अनिका ने हिचकते हुए टॉप निकाल दिया। अब उसके संतरे ब्रा में बहुत सेक्सी दिख रहे थे। 



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