Meri Doctor Maa Aur Behne Chapter 2

 




Meri Doctor Maa Aur Behne  Chapter  2




रवि का घर,



 रोहित अधिकारी यही रहा था अपने खाली टाइम मी, दोफर का बक्त था और वो सो रहा था, वो राजाई ओधे हुए सो रहा था और

 "बस हो गया दीदी...बस हो गया दीदी..." बोले गा रहा था, उसकी आवाज सुनकर रवि जो की दशरे रूम में था आया और उसके बिस्तर पे बैठा के इस्तेमाल हिलाते हुए उठान लगा...

 [ख] रवि : क्या हुआ रोहित….  ऐसे निंद में क्या बोल रहे हो...

 उसकी आवाज सुनकर, रोहित की आंख खुल गई... और वो उठा कर बैठा और राजी को अपने साड़ी से अलग किया...तो क्या देखता है की उसकी पूरी पेंट गिली हो चुकी है।

 रोहित : ये क्या हुआ…..

 रवि : शायद मुझे किसी को छोड रहा था….एक मिनट….  तू क्या बोल रहा था... बस हो गया दीदी...  कौन?  दीदी।  कहीं मनीषा दीदी को तो नहीं सपने में?

 रोहित : हा यार… फिर से सपना देखा की मैंने उनकी छुडाई की…..

 रवि : सेल तू नहीं सुधरेगा... तेरे मुझे हिम्मत तो है नहीं कुछ करने की... बस सपने में ही करता रह उनकी ठुकाई...।

 रोहित : यार दीदी बहुत सख्त है… कैसे बोलु उन्हे की छोडना चाहता हूं…… अपनी छुट और गांद मारवा लो मुझसे….

 रवि : सिद्ध सिद्ध कौन बोल रहा है तुझे बोले को… मौका देख… स्थिति बना… फिर देख… बिक्री तेरी दीदी बरसो से चूड़ी नहीं है अपने पति से… चाह तो बहार किसी से चुद रही होगी तो बात वो अलग है…  होगी किसी के लुंड के लिए…

 रोहित : नहीं भाई….  मेरी दीदी किसी बाहरी आदमी से नहीं चुड़ शक्ति….

 रवि : हा.. हा... थिक है फिर, अपने से ही चुदेगी तो तुझे अपना है, उनके पति के अलाबा...।

 रोहित : वैसे मेरे सपने में तू भी छोड रहा था मनीषा दीदी को….

 रवि : क्या बात कर रहा है, साले... आह्ह्ह वो दिन कब आएगा जब मुझे उन चोदने का मौका मिलेगा... ही क्या गांद है तेरी दीदी के यार... तेरे घर में आगर ऐसी दीदी होती तो रोज उसकी गा।

 रोहित : गंद से याद आया की मैं, तेरी गांद ही मार रहा था जब दीदी ने देखा और उन्हे अच्छा नहीं लगा, फिर हमारा एलज करने के बहाने उन्होन हमारा लुंड देखा… और फिर लुंड देख के ऐसी मस्त में  ….

 रवि की आंखों में चमक आ गई उसकी बात सुनके, ऐसा लगा जैसा कुछ खास मिल गया हो का उपयोग करें

 रवि : क्या मस्त सिचुएशन क्रिएट किया यार सपने में….  सपना बहुत अच्छा देखता है तू…लेकिन मेरी गान भी मार ली…बह भाई…तो दीदी ने हम समलैंगिक समझ सही…

 रोहित : हाँ, यही समझेगी...

 रवि : चलो मिल गया एक उपाई, तेरे ट्राई के लिए… आज जा तू दीदी के पास और ये बात स्वीकार कर, सरमाते हुए की तू गे हो गया है, और तुम्हारे इलाज की जरा दीदी है… और वो इलाज तू बस दीदी  सकता है किसी और से नहीं

 रोहित : और अगर वो मम्मी को बता देगी...

 रवि : तो कोई नहीं... तुझे अपनी मम्मी को भी छोडने का मौका मिल जाएगा.. ठीक डॉक्टर मां और बहन कब काम आएंगे..

 रोहित : ठीक है... मैं कल बताता हूं दीदी को...

 रवि : अब देर मत कर, सपना आज देखा है... ये कुछ संकेत हो सकता है... मनीषा दीदी की चुदाई का... वैसा भी... कल करे तो आज कर...।

 रोहित : ओके बॉस.. आज हाय कोशिश करता हूं...

 रवि: लेकिन ये मत भूल जाना की मुझे भी इलाज की जरूरत है... और मुझे भी दीदी की गांद मरनी है...

 रोहित : ठीक है भाई….  हम दूधे छोडेंगे उनको, मैं आगे से और तू पिचे से…..

 रवि ;  ये हुई ना बात….

 फिर दो तयार होते हैं….  रवि वहा से अपने किसी काम के सिलसिले में बहार जाता है, और…..रोहित अपने क्लिनिक की तरफ।

 डॉ सौम्या राउंड पे थी, डॉ.  मनीषा भी उसके साथ थी।  डॉक्टर के ड्रेस में भी दोनो मां बेटी के चुटार और मम्मे अच्छी तरह से नजर आ रहे थे।  पुरुष रोगी के लिए तो दोंन जैसे नेत्र टॉनिक की तरह थे।

 [/बी]





 तबी कंपाउंडर आया और डॉ.  मनीषा के पास जकार बोला की रोहित बाबा ऐ है।






 डॉ मनीषा को कुछ अजीब लगा इस बक्त वो क्यों आया है.. शाम के 5 हो रहे थे।  उसने डॉ.  सौम्या पे पुछा।






 डॉ मनीषा : मॉम, रोहित आया है, मैं मिल के आती हूं।






 डॉ सौम्या: कोई बात नहीं..मैं राउंड ले लुंगी देखो वो क्यों आया है.. मुघे समय लगेगा.. तुम उसके साथ घर चली जाना




 डॉ मनीषा;  ठीक है माँ..






 फिर वो अपना फाइल जूनियर डॉक्टर को थामा कर चली जाती है...एदर सौम्या राउंड लेति हुई पवन के रूम जाती है...






 डॉ ।  सौम्या: कैसा है, अब तुम्हारा हाल... डिस्चार्ज होना है...






 पवन : वो तो आप जब चाहो मैडम कर दो….






 डॉ ।  सौम्या : क्या?




 सौम्या को बात समझ में आ गई थी की वो ऐसा क्यों बोल रहा है, लेकिन फिर भी वो अंजान बनते हुए हमें से पूछना चाहती थी।






 पवन : सब आपके हाथ में है, मैडम... मुझे तो आप ही ठीक कर सकती है... या आप ही बीमार भी...।






 डॉ ।  सौम्या : मैं तुमको बीमार क्यों करूं...






 पवन : आपके पास टाइम ही नहीं है... मुझे अच्छी तरह से टेक करने का...






 डॉ ।  सौम्या;  तुमसे बहास नहीं कर सकती मैं... अपना ख्याल रखो और कोई जरूरत पारे तो नर्स को बोल दो...






 पवन : जो आप कर सकती है.. वो नर्स कहां से करेगी...






 डॉ ।  सौम्या : चलो नेक्स्ट रूम...



 अपने जूनियर डॉक्टर को बोलता है... वो लोग भी अजीब नजर से मरीज को देखते हैं, एडहर पवन मस्कुरा भी रहा है, और चादर के अंधा से अपने लुंड को मसाला रहा है।  उसी मुराद ऐसे पूरी होने वाली नहीं है।

 डॉ ।  मनीषा, जैसे ही अपने केबिन में पाहुचती है...रोहित को वहा बैठा पति है..






 रोहित : हाय.. दीदी...




 और रोहित अपनी मनीषा दीदी से लिपट जाता है, जिससे उसे मोती मोती रोहित के सिने से दब जाते हैं...






 मनीषा दीदी: ठीक है, बैठाओ.. क्यों आए यहां पे...






 रोहित : क्यों दीदी, मैं नहीं आ सकता हूं...






 मनीषा दीदी : क्यों नहीं तुम्हारा ही क्लिनिक है.. थोड़ा पड़ा में दिमग लगा तो तुम भी हमारे साथ आ सकते हैं...






 रोहित : क्या करूं दीदी... पडई में मन नहीं लगता...






 मनीषा दीदी : ओके बाबा जो मन में आए करो...






 रोहित : दीदी गुसा मत करो… मुझे तुम्हारी जरूरत है….






 मनीषा दीदी : क्या पैसा चाहिए….






 रोहित : नहीं दीदी... मुझे आपके साथ की जरूरत है... बोलो मुझे मदद करोगी... (वो बिलकुल वही स्टाइल में अभिनय कर रहा था जैसा रवि ने हमसे कहां था)






 मनीषा दीदी: (थोड़ा नॉर्मल होते हुए) क्यों क्या हुआ….रोहित… बोलो मुझे..मैं तुम्हारी दीदी हूं…






 रोहित : तबी तो आपके पास आया.. हु.  प्रॉमिस करो मम्मी या किसी को नहीं बताउंगी...






 मनीषा दीदी: नहीं रोहित.. वादा.. किसी को नहीं बताऊंगी.. बोलो अब..






 रोहित :दीदी…वो…बात…ये…है..की… मुझे लड़कियों में दिलचस्पी नहीं है….






 मनीषा दीदी : क्या?  ये क्योन….  क्या तुम्हारा कुछ असामान्य है...






 रोहित : नहीं दीदी... वो नहीं...






 मनीषा दीदी: क्या तेरा खरा नहीं होता... बोल मुझे मैं डॉक्टर हूं.. करुंगी तुम्हारा...






 रोहित तो लगा की बात बन रही है... अभी अभिनय जारी रखना है रखना है...






 रोहित ;  खरा होता है दीदी… लेकिन लड़की को सोच के नहीं…






 मनीषा दीदी : तो फिर... किसको देख के...






 रोहित : (रोटे हुए)...दीदी मैं शायद गे हो गया हूं...




 रोहित ने अपने आपको ऐसा दिखने की भरपुर कोषिश की जिस से मनीषा दीदी को कोई शक ना हो, लेकिन उसे ये बात शायद बहुत जल्दी में बोल दी थी।






 मनीषा दीदी: (चौकते हुए) ये कैसे….कैसे हो गया..नहीं ये नहीं हो सकता…




 मनीषा को हमारे के कहे हुए बातो पर भरोसा नहीं हो रहा था, उसका भी पूरा फिट था और कोई भी लड़की उसे प्यार कर सकता है तो स्मार्ट था लेकिन फिर भी वो ऐसी बात कर रहा है।






 रोहित : ये सच है दीदी...






 मनीषा दीदी: नहीं….  कब से है ये...(गंभीर होते हुए)




 रोहित : अभी एक साल से...






 मनीषा दीदी: तब कुछ नहीं बड़ा है.. तुझे इस दल से निकलना पड़ेगा हमसे पहले की तुम पूरी तरह गे हो जाओ...






 रोहित : तुम्हारी मेरी मदद कर सकती है...






 मनीषा दीदी : मेरी एक दोस्त मनोचिकित्सक है.. मैं बात करती हूं उससे...






 रोहित : नहीं दीदी... कोई और नहीं... कबल तुम.. तब तुम्हारे पास आया हूं... मम्मी के पास भी नहीं गया...






 मनीषा दीदी: ठीक है.. पर माई मेडिसिन नहीं दे सकती...






 रोहित : मुझे दवाई नहीं तुम्हारी सपोर्ट चाहिए...






 मनीषा दीदी : कैसे...






 रोहित : तुम चेक कर के देखो दीदी की तुम्हारे चुन से मेरा खरा होता है की नहीं

मनीषा दीदी: ओके .. ये तो मैं कर सकती हूं… एक डॉक्टर के लिए कोई नई बात नहीं है… और मैं तो तुम्हारी दीदी हूं…

 रोहित मान ही मन खुश हो रहा था की मनीषा दीदी उसकी बात मन गई है और आगे भी उसके प्लान के हिसब से सब कुछ हो जाएगा और मनीषा के मन में कभी हां कभी ना बाला स्थिति था, उसका एक मन कह रहा था की रो  प्रॉब्लम को सॉल्व करें करे और दशहरा मन की कैसे वो रोहित के लुंड को टच करेगा, उसका छोटा भाई है वो।


 और रोहित लोहा गरम देख के हाथोरा मारे जा रहा था।


 रोहित : फिर आपके चुची को देखे मेरा लुंड खरा हो जाए तो हम समझ सकते हैं की नॉर्मल है...


 मनीषा दीदी समाज रही की रोहित जवान है और उसका मन लालचा सकता है अगर वो आगे बढ़े तो और शायद हम से रोहित का समस्या भी हल हो जाएगा, नहीं तो आज कल ये आम समस्या है।


 मनीषा दीदी: ओके… चलो अगर मेरी ब्रेस्ट देख कर अगर तुम नॉर्मल हो सकते हैं तो.. कोई दीकत नहीं है।


 फिर मनीषा दीदी, उसके पास आती है और उसका इस्तेमाल करते हैं अपने मम्मे को एक बटन शर्ट का खोल के दिखी है...


 फिर आगे बढ़ने उसके लुंड को पंत के ऊपर से टच करती है… लेकिन कोई हलचुल ना देख के… वो भी सोच में पर जाति की कुछ बात गंभीर जरूर है…


 असल मैं रोहित अपने प्योर कंट्रोल से लुंड को खरा नहीं होने दे रहा है.. जैसे बहुत मुश्किल हो रहा था... जैसे ही उसे दीदी की सफेद ब्रेस्ट के भाग देखा सुरसुरहत होने लगा लुंड में ...  दीदी ने उसका लुंड पकारा लगा की तन के खरा हो जाएगा लेकिन कंट्रोल किया उसने।


 एधर मनीषा दीदी ने भी सोच लिया था का उपयोग आज खरा करेगा जरूर… और वो उठाकर गई और उसे दरबाजे को ताला कर दिया और से… फिर लौट के उसे रोहित के जिप को खिचा और पंत खोलना सुरु जाइस किया…  मैं आया.फिर से लुंड को पकारा, लेकिन फिर भी लता हुआ था...


 उसे देखो मनीषा दीदी की आंख चौड़ी हो गई...


मनीषा दीदी: रोहित... कितना बड़ा लुंड है...ये कैसे लड़को के गांद में जाता है...






 रोहित : (दीदी को खुले होते देख)... चला जाता है दीदी...कोई दीकत नहीं होती है






 मनीषा दीदी: कितना लंबा है.. तुम्हारा लुंड..






 रोहित : 9.2 इंच दीदी...






 मनीषा दीदी: इतना बड़ा...सच है बिना खरा हुआ इतना लंबा है... खरा होगा तो कैसा होगा..






 रोहित: (मजे लेते हुए) दीदी जीजू का भी इतना बड़ा है...






 मनीषा दीदी: नहीं इससे बहुत छोटा है... 6 इंच के आस पास।  इतना बड़ा लुंड तो लड़की की चुत में भी मुश्किल से जाएगा..






 रोहित : तो आपने इतना बड़ा लुंड नहीं देखा है...






 मनीषा दीदी: देखा है लेकिन रियल में नहीं...






 रोहित : कहां... देखा है तब






 मनीषा दीदी : पोर्न फिल्में मुझे….




 वो लुंड उलट पलट कर देखता है और जब नहीं खरा होता तो घबड़ा जाती है






 मनीषा दीदी: ये तो खरा ही नहीं हो रहा है...






 रोहित : दीदी अगर बूरा..ना मानो तो..तो एक बात कहू...आपने कभी लुंड को मुह में लिया है...






 मनीषा दीदी: हा लिया है...लुंड खरा करने के लिए..ओह्ह्ह्ह हां...यानी अगर मैं इसे अपने मुह में लू तो खरा हो सकता है... लेकिन






 रोहित: हा दीदी मैं भी यही कह रहा था..आप सोचिए मत आपके भाई के जीवन का सवाल है






 रोहित उसे हौसला दे रहा था और मनीषा भी उसका लुंड देखके गरम गई थी, मनीषा बिना कुछ बोले उसके लुंड को अपने मुह में लिया और ऊपर आला करने लगी... अभी वो नहीं सोच रही थी की ये गलत इस्तेमाल है...  करना था..इधर रोहित पूरी तरह से रुके हुए था, खरा नहीं होने दे रहा था... बहुत मुश्किल हो रहा था उसके लिए...






 मनीषा दीदी ने लुंड को चुसा कुछ डर फिर, शुद्ध गले में उतरा लेकिन फिर भी वो वैसा ही था … क्या करे समझ में नहीं आ रहा था का उपयोग करें ..






 मनीषा दीदी: क्या करूं मैं अब... ये तो वैसा ही है...तुम बोलो कैसा खरा होगा ये..






 रोहित : दीदी आपके मम्मी कितने बड़े हैं... लोगन के तो कपड़ों के ऊपर से ही इसे देख कर लुंड खरा हो जाता है... क्या किसी ने आपके मम्मी के बीच में लुंड डालकर कुछ किया है...






 मनीषा दीदी : ची... क्या बोल रहे हैं.. मैं तुम्हारी दीदी हूं...






 रोहित : लेकिन पहले एक डॉक्टर है आप….






 मनीषा दीदी: चलो ठीक है.. तुम्हारे जिंदगी के लिए ये भी… लेकिन अगर कुछ नहीं हुआ तो तुम्हें दसरे विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखूंगी…






 रोहित : ओके दीदी... और खरा हो गया तो आप ही मेरा इलाज करेंगे..





 [बी] मनीषा दीदी: ठीक है … वादा .. [/ b]

 [बी] रोहित: दीदी, आप अपने ब्रेस्ट दिखो ना प्लीज ... शायद कुछ हरकत हो

 रोहित एक करके अपनी बात मनवा रहा था और अपने चल पे खुश भी हो रहा था कि सब कुछ वैसा ही हो रहा जैसा उसे सोचा था बाल्की कुछ जल्दी में ही सब कुछ हो गया था।


 मनीषा : तुम नहीं मानोगे क्या?


 रोहित: दीदी, अभी तो आपके कहा था की आप सब कुछ करेंगे


 मनीषा: ओके बाबा, मैंने कहां था..चलो देखती हूं


 मनीषा भी ये सब करके गरम हो गई थी, एक तो वो चाहती थी कि उसका भाई थिक हो और साथ ही ये भी चाहता था कि कुछ मजा भी मिले, बहुत समय से उसे लुंड को टच भी नहीं किया था।


 फिर मनीषा ने अपने शर्ट के ऊपर के सारे बर्तन खोल दिया और उसकी बड़ी बड़ी चुचियां ब्रा में बहुत ही सेक्सी लग रही ... रोहित के लुंड में देख के सुरसुरहत होने लगी थी ... मनीषा ने फिर अपनी ब्रा भी खोल दी  और उसके ब्रा के निकलते ही … मनीषा दीदी की 38 इंच ब्रेस्ट प्योर सबब में रोहित के आंखों के सामने थी…


 रोहित: दीदी, क्या मैं टच करुण?


 मनीषा: अब जब तुमने ऐसा नंगा करबा दिया तो पकार लो, देखो कुछ होता है की नहीं।


 रोहित ने अपने हाथों से पकारा तो मनीषा दीदी के आंखों से सिसकारी निकल गई... फिर वो घुतों के बाल बैठा और उसके लुंड को अपने स्तन के बीच में लेकर रागने लगी...अबकी बार रोहित ने ऊपर से अपना नियंत्रण हटा लिया।  धीरे उस्का लुंड

 अपने रूप में आने लगा...



 रोहित ने दीदी की चुचियों को मुह में लेना चाहा लेकिन दीदी ने रोक दिया और वो अपनी चुचियों से लुंड से रागरती रही…  रहा है और रोहित खुश था की आज ये इतने तो कुछ गया...अब जल्दी ही वो दीदी की चुदाई के लिए भी मन लेगा..



 इस तरह वो दोनो अपने काम में लगे रहे और अगले 10 मिनट तक रोहित अपने लुंड से दीदी की चुचियों को छोटा रहा..उसकी चुचियां लाल हो गई थी.. फिर उसे अपना पूरा माल निकल दिया और उसके लुंड से पिच...  चुची से लेकर उसके मुह पे भी गिरा…[/b]


 लेकिन ये देख कर मनीषा दीदी दुखी नहीं थी वो कुश थी... की वो जीत गई अपने प्रयाश में।  तबी इस्तेमाल याद आया की माँ कभी भी आ शक्ति है...



 [ख] मनीषा दीदी: चलो जल्दी कपड़े पहनो रोहित… अब अब तुम्हारा इलाज मैं घर पे करूंगी… हम घर निकालना है..माँ का दौर का समय खतम होने वाला है…रात में खाना खान एक बाद मैं चेक फिर से तुम…


 मनीषा दीदी और रोहित अपने क्लिनिक से बहार आते हैं...


 रोहित की मां डॉ. सौम्या को कुछ और समय लगता है ऑफिस में, कोई इमरजेंसी आ गई थी...उसने दो भाई बहनो को बोला की वो घर चले जाएं।

 [/बी]



 दोनो अपनी गाड़ी में बैठे हैं घर जाने के लिए...




 रोहित : दीदी आप चलेंगे गढ़ी या मैं चलाऊ?  ….




 मनीषा दीदी: तुम्हें चलाओ, मैं बहुत ठक गई हूं….




 रोहित : ओके दीदी….




 फिर रोहित अपने घर के लिए निकलता है अपने मनीषा दीदी के साथ, थोड़ी दूर जाने पे उसके फोन पे कॉल आता है...




 रोहित : दीदी जरा देखो किसका कॉल है...




 मनीषा दीदी: (फोन ले लो) क्या तुम मोहित अंकल का कॉल है...




 (फिर वो फोन पे बात करने लगती है) चाचा आप कैसे हैं...




 दुसरी तारफ से..."अच्छा हुआ बेटा"...




 मनीषा दीदी: आप इंडिया कब आ रही है...




 मोहित अंकल : मैं भारत पहुचाने वाला हुआ एक घंटे में... अभी मेरी फ्लाइट लैंड करने वाली है...




 मनसिहा दीदी: अरे वाह .. तो आप आ चुके हैं… थिक है… हम आते हैं आपको रिसीव करना…




 मोहित अंकल: (फोन पे) तुम आराम करो ठक गई होगी क्लिनिक में... हमें हीरो को भेजो एयरपोर्ट...




 मनीषा दीदी: हा..हा.. ठीक है...रोहित मुझे ड्रॉप कर के आपको रिसीव कर लेगा.




 मोहित अंकल : ठीक है... बेटा..




 मनीषा दीदी रोहित को बताती है की मोहित अंकल इंडिया आ चुके हैं और यूज एयरपोर्ट से चुनना है..रोहित बहुत ही कुश होता है ये सुन कर क्योंकि उसकी बहुत जामती थी अंकल से…लेकिन वो आदमी मैं प्लान बना रहा था की आज कैसे  दीदी को रास्ते पे ला के अपनी मन की मुराद पूरी करू यानी उसकी छुडाई करू।




 मोहित अंकल उसके नंगे चाचा थे, उसके पापा के नंगे भाई… और वो अपना बिजनेस कर रहे थे यूएसए में..दीदी की सादी उन्होन ही थिक किट हाय…उमर कोई 55 साल की थी..मोहित अंकल यूएसए में हाय सेटल हो गए थे  और उनकी पत्नी अब दुनिया में नहीं थी ... कबल एक लड़का जिस्का नाम अभिषेक था और वो 30 साल का था और वो एक आईटी कंपनी में नौकरी करता था, उसे अपनी शादी वही यूएसए में कर लिया था राहेल से ... और मोहित अंकल की लड़की  स्नेहा जो की 27 साल की थी,


 उसे अभी तक सादी नहीं किट ही और एक रिपोर्टर थी।




 जैसे ही रोहित एंपे घर के गेट पे पाहुचा...मनीषा दीदी बोली की वो जेक अंकल को ले आए और दीदी गाड़ी से बहार निकले लागी...रोहित ने दीदी का हाथ पकार लिया और बोला




 रोहित : दीदी जो कुछ भी हुआ आज हॉस्पिटल में प्लीज अपने तक ही रखना...




 मनीषा दीदी: ठीक है...मेरे प्यारे भाई...लेकिन तुम भी वादा करो की अब जब तक मैं तुम्हारा इलाज कर रही हूं...तुम अपने दोस्त के साथ ये सब नहीं करोगे..




 रोहित : दीदी गुसा मत करना...एक बार अपने ब्रेस्ट दीखा दो ना...




 मनीषा दीदी : दत्त….  चलो अभी... जकार अंकल को लेकर आओ...




 रोहित : प्लीज दीदी… एक बार अपने भाई के लिए….




 मनीषा दीदी: तुम बहुत बदमाश होते जा रहे हो… ठीक है…लेकिन कबल ब्रा में….घर पे एक गए है…




 रोहित : आपने तो मुझे अपना दीवाना बना दिया है...आप के मुमे इतने मस्त


 है की हमें देखने का मन करता है..




 मनीषा दीदी: कैसा भाषा हो गया है तुम्हारा....बदतमीज, सब समाजी हूं मैं तेरा... खैर अपने भाई के लिए कुछ भी कर सकती हूं...




 और मनीषा दीदी ने अपने शर्ट के बटन खोले और इस्तेमाल साइड किया और अपने मस्त मस्त मम्मे रोहित के सामने के लिए दिए..




 रोहित ने देखता रहा और अपने लुंड को मसाला सुरु कर दिया… और अपना एक हाथ बड़ा कर मनीषा दीदी के मुम्मे के ऊपर ले गया … तो मनीषा दीदी ने उसका हाथ पाकर लिया और अपने दसरे हाथ से रोहित पाकर कहा…




 मनीषा : आज का इलाज हो चुक्का है तुम्हारा..अब कल देखेंगे...अब तुम जल्दी से जाओ एयरपोर्ट वहां अंकल इंतजार कर रहे होंगे...



 रोहित को भी याद आया का इस्तेमाल तो एयरपोर्ट जाना है...और फिर उसे दीदी को ड्रॉप करके एयरपोर्ट की तरफ चला गया।जब वो एयरपोर्ट पाहुचा अंकल के आने में थोड़ी देर थी...वो बहार इंतजार कर रहा था तबी उसे फोन की घंटा बाजी...






 दुसरी तराफ उसका दोस्त रवि था……






 रवि : क्या साले... कुछ कम बना मेरे प्लान से...






 रोहित : हा... यार कुछ तो बात बनी... लेकिन पूरी नहीं...






 रवि : कहाँ तक पाहुचा मेरे शेर….  दीदी के मम्मे तो दबे ही होंगे या काम से काम लुंड तो पकराय ही होगा….






 रोहित: कहां यार बस मेरा लुंड देखा, कहा की बाद में टेस्ट करेंगे




 रोहित ने असल बात हमसे छुपा ली वो नहीं चाहता था कि उसका काम होने से पहले कोई और बीच में आए।  वैस दोनो अच्छे दोस्त थे और कुछ बि चुपके नहीं थे लेकिन रोहित ने फिर भी ऐसा किया।






 रवि : सेल धीरे धीरे आगे बढ़ा नहीं तो सब गुर गोबर हो जाएगा… मनीषा दीदी समझौता है… अगर उन सका हो गया तो कुछ नहीं मिलने वाला…




 रोहित को तो पता था की उसका दोस्त रवि शतीर है, लेकिन इतना शतीर है अब समझ, सच में आज वो कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गया था और ऐसा ध्यान रखना होगा।






 रोहित : ठीक है... यारी






 रवि : मेरा भी ख्याल रखना दोस्त... मुझे तो मनीषा दीदी की गन चाहिए बस एक बार..






 रोहित : बिक्री पहले मुझे तो रास्ता साफ करने दे….  फिर तेरा जुगाड़ भी होगा...






 रवि : अभी कहां है...






 रोहित : एयरपोर्ट पे अंकल यूएसए से आ रहे हैं उन्ही का इंतजार कर रहा हूं...






 फिर उसे फोन कट किया और मैं गेट पे जाकर खड़ा हो गया… अंकल की फ्लाइट आ गई थी और वो उस गेट से बहार आते…






 रोहित आंख गेट पे लगाये था...तभी इस्तेमाल मोहित अंकल नजर आए और उनके साथ एक लेडी भी थी... पहले तो रोहित को लगा की अंकल की गर्लफ्रेंड होगी क्योकी वो एक दसरे के हाथो में हाथ दाल कर आ रहे थे।  नज़र आए तो उसे पहचान की ये तो उनकी बेटी स्नेहा दीदी है….रोहित की आंखे उस पर टिकी हुई थी…






 क्या मस्त माल थी वो ….लंबा कद… बड़े बड़े मम्मे 38 इंच से काम के नहीं होंगे और उसे शायद ब्रा नहीं पहनना था उनके ऊपर में के और उनकी चुचियां हिलती नजर आ रही थी, जैसे ही वो उसकी तराफ आ रही थी  चुचियां हिचकोले खा रही थी।  जैसे ही वो चलती थी, वो हिलने लगते, और रोहित का मन बाईचैन कर रहा था... स्नेहा दीदी ने ब्लैक कलर की टाइट पंत पेहनी हुई थी और उसमे उनकी चौड़ी हिप साफ नजर आ रही थी उनकी हिप 38-40 इंच के बराबर किट  …




 रोहित तो कबल मनीषा दीदी को चुनने की बात सोच रहा था और यहां पर उसके पास अभी दो माल मौजूद ...  .





 स्नेहा दीदी कुछ ऐसी लग रही थी..


 स्नेहा दीदी किसी एक्ट्रेस से कम नहीं लग रही थी….




 स्नेहा दीदी और मोहित अंकल उसके पास आ चुके हैं और रोहित ने आगे बढ़कर अंकल के पांव चुए और जैसे ही स्नेहा दीदी के पान चुन को झुका, स्नेहा दीदी ने कांधो से उठाकर अपने लिए लगाए।  उसने भी स्नेहा दीदी को गले लगाया और उसे अपने हाथ बढ़ाकर स्नेहा दीदी के चुटार के पास ले गया और अपने साइन को स्नेहा दीदी की चुचियों से मसाला दिया।




 ऐसा करते हुए महसूस हो गया की स्नेहा दीदी ने और ब्रा नहीं पहचान हुआ है और उनके मुम्मे बहुत ही सॉलिड लगे यूज। स्नेहा को इसा एहसास हुआ और उसने रोहित को अपने से अलग किया।




 स्नेहा: रोहित हैं, तुम तो बहुत बड़े हो गए, एक पूरा आदमी




 रोहित : थैंक्स दीदी, आप आती ​​कहां है यहां पर...पिछली बार दीदी की शादी में आई थी उसके बाद आज आई है।




 स्नेहा: हां, ये तो है..मान तो मेरा भी करता है तुम लोगों के साथ ही राहु अब




 रोहित : टू आज इंडिया शिफ्ट हो जाए, मैं आप के साथ साथ रहूंगा



 रोहित की बात पे मोहित अंकल और स्नेहा दोनो हसने लगे और रोहित ने दोनो को अपने साथ लिया और गाड़ी में बैठे गए।

 रोहित ने अपनी बात फिर से सुरू की…






 रोहित : और कैसे अचानक आना हुआ अंकल...






 मोहित अंकल : मुझे भी थोड़ा बिजनेस से जुड़ा काम था... लेकिन असल वजः था स्नेह का काम..






 रोहित : कौन सा काम दीदी...






 स्नेहा: मुझे एक रिपोर्ट तयार करनी है, भारत में भ्रष्टाचार...




 स्नेहा एक अखबार के लिए काम करता है और बहुत से कॉलम भी लिखती है।






 रोहित: ये तो बहुत खतरों का काम है... यहां तो सब के सब भ्रष्ट है... कौन तुम्हारी मदद करेगा...






 स्नेहा : तुम और कौन...वैसे भी तुम कफी फ्री हो...तुम मेरे साथ रहना होगा...




 रोहित की जैसे मनकी मुराद पूरी हो गई थी, जैसा चाहता था सब कुछ वैसा ही हो रहा था.. इसका इस्तेमाल आज का दिन उसके लिए सबसे अच्छा दिन है जब एक साथ दो माल उसकी झोली में आ गया...  बहुत अच्छा होने वाला था।






 रोहित : ओके दीदी... जैसा आप ऑर्डर दो... और भैया भाभी कैसे है...






 स्नेहा : ठीक है दोनो...अगले सर्दी में आयेंगे इंडिया...






 रोहित : बहुत दर्द..भाभी भी इंडिया देख लेगी...






 मोहित अंकल : और तुम्हारी माँ तो घर पर आ चुकी होगी...






 रोहित : नहीं... क्लिनिक में कुछ इमरजेंसी आ गई थी वो वही रुक गई...






 ऐसे ही बात करते हुए सब अपने घर में गए..






 रोहित, मोहित अंकल और स्नेहा घर आ चुके हैं।  रोहित ने सुरक्षा से पोछा की मम्मी आ गई है, लेकिन उसे बताया की अभी नहीं आई है, कबल मनीषा दीदी आई है।






 रोहित: (मोहित अंकल को) एक इमरजेंसी आ गया था और मम्मी उसी बजाह से रुक गई है हॉस्पिटल में।






 मोहित अंकल : कोई नहीं...वो जब तक आएगी हमलोग फ्रेश हो जाएंगे..






 फिर वो लोग अंधा आते हैं… मनीषा दरवाजा खोलती है… और सामने स्नेह को देख कर कुश हो जाती है और इस्तेमाल गले से लगा लेते हैं….






 मनीषा दीदी: हैं मुझे तो पता ही नहीं था की तुम भी आ रही हो... अंकल आपने तो बता ही नहीं..






 मोहित अंकल : सरप्राइज था तुम्हारे लिए...






 मनीषा दीदी: चलो और आओ तुम लोग, मैं चाय बनाती हूं...






 रोहित : क्यों काका कहां है...






 मनीषा दीदी: वो खाना बने चले गए...उनकी तबियत थोड़ी खराब थी...आराम कर रहे हैं अपने क्वार्टर में।






 फिर अंकल और स्नेहा फ्रेश होने चली गई...और मनीषा चाय बनाने...रोहित भी अपने रूम चला गया...होने के लिए...






 उस बकत रात के 9 बज रहे थे...रोहित को लगा की मम्मी को पुछ लाते हु..की वो


 केबी तक आएगी…






 रोहित: (फोन पे) मम्मी...नमस्ते...






 सौम्या : हा बेटा… बोलो…






 रोहित : मोहित अंकल और स्नेहा दीदी आई है… आप कब तक रहे हो…






 सौम्या: बेटा मुझे टाइम लग जाएगा...तुम लोग खाना के आराम करना मैं केस खत्म करने के लिए सिद्ध घर आ जाऊंगी...मैं खाना आ के खा लुंगी।






 रोहित : ओके मम्मा……






 फिर रोहित अपने अटैच्ड बाथरूम में फ्रेश होने के लिए गया और वहां से सिद्ध ड्राइंग रूम में आया, मनीषा दीदी ने तब तक चाय बना लिया था और मोहित अंकल भी बहार निकल गए थे... कुछ डर में स्नेहा दीदी भी आ गई..सब लोग  बैठा के चाय पाइन लगे….रोहित ने उन्हे बता दिया की मम्मी रात में देर से आएगी…हम लोग खाना खा के सो जाए…






 मोहित अंकल : तो मनीषा बेटी, क्या अब इंडिया में ही रहने का...






 मनीषा दीदी : हा अंकल... यहां कभी अच्छा लगता है...






 मोहित अंकल : हा ये तो है... मुझे भी यहां कभी अच्छा लगता है...






 मनीषा दीदी: (स्नेहा से) और स्नेहा दी तुम कब सादी कर रही हो….






 स्नेहा: अभी कोई इरदा नहीं है… लेकिन करूंगी किसी भारतीय से ही…।






 रोहित : ये हुई ना बात... अपने देश के लोगो में कुछ अलग ही बात होती है...





 सब लोग हसने लगे… और फिर मनीषा दीदी ने खाना लगा और सब लोग खाना खाने लगे और पुरानी बात करने लगे… खाना खाने के बाद मोहित अंकल, रोहित के कामरे में सोने के लिए और...  दीदी) के काम में सोने चली गई...

 मोहित अंकल का रोहित से बहुत ही अच्छा फ्रेंडली रिलेशन था...रोहित भी उनसे कफी खुला हुआ था...






 मोहित अंकल : और रोहित मेरे शेर अब तो तू कफी बड़ा हो गया है...कोई सीकर किया या नहीं...






 रोहित : अंकल चांस नहीं मिल पा रहा...






 मोहित अंकल : चांस मिला नहीं...निकलना पड़ता है...तू जब बढ़ेगा तबी तो कोई मौका दूंगा ना..






 रोहित : हा बात तो सही है...






 मोहित अंकल : अच्छा चल किसी लड़की या औरत के नंगे बदन को देखा है….




 रोहित को लगा के अंकल को बहुत ही फ्री हो रहे हैं, लेकिन आज वो पहले से ही मूड में था और उसे भी खुलने का मान बना लिया।






 रोहित : क्या?  …अंकल….हां देखा है






 मोहित अंकल : किसकी... कौन है वो...






 रोहित : एक दो बार मम्मी और मनीषा दीदी को बाथरूम में देखा... पूरी नंगी नहीं..लेकिन थोड़ा सा..




 रोहित ने सच में नहीं बताया की उसे तो आज दीदी की चुचियां भी दबाई थी और दीदी ने उसके लुंड चुसा था।






 मोहित अंकल: (सर पे हाथ मरते हुए) चलो कोई नहीं… सुरत घर से ही सही है… तो कभी मनीषा के मुम्मे या बैक को टच किया…






 रोहित : क्या बोल रहे हैं अंकल... कैसे टच करने देंगे वो...






 मोहित अंकल : ट्राई करो तो करो...कोई दीकत नहीं है...सेफ है ये...अखिर बहन है, मौका तो मिल ही सकता है




 रोहित लग गया की अंकल को क्लोज रिलेशन में सेक्स से कोई एतराज़ नहीं है और वो भी यही चाहता था और आज का इस्तेमाल लगा की वो कुछ गलत नहीं कर रहा था।  सोचा की अंकल से भी कुछ पता किया जाए।






 रोहित : तो क्या आपने स्नेहा दीदी का टच किया है...






 मोहित अंकल : टच किया है...अबे बकवास किया है...और क्या बताता है...जब भी मन करता है चूड़वती है मुझसे...




 अंकल बिना किसी हिचक के बोल गए और रोहित चौक गया उनकी बात सुनके ….लेकिन यूज एस बात का भरोसा भी हो रात की ये संभव है..और वो जो मनीषा दीदी को चोदने का सोच रहा था वो गलत नहीं था…






 रोहित मोहित अंकल की बात सुनके पहले चौका है…लेकिन खुश भी होता है की अगर मोहित अंकल स्नेहा दीदी को छोड़ देता है तो वो भी स्नेहा दीदी और मनीषा दीदी को छोड सकता है… अब कौन पहले से देखेंगे।






 रोहित : अंकल क्या मनीषा दीदी भी चुद शक्ति है...






 मोहित अंकल : अबे जैसे लुंड को छुट की जरूरत होती है..वैसे ही छुट को भी लुंड चाहिए...जरूर चूड़ शक्ति है...






 रोहित: लेकिन मेरी हिम्मत नहीं होती कुछ भी करने की कहीं कुछ गलत हो गया तो लेने के देने पर जाएंगे...






 मोहित अंकल : सुरु सुरु मैं होता है...ये दार लगेगा लेकिन जैसे ही आगे बढ़ेंगे रास्ता खुल जाएगा चला जाएगा






 रोहित: लेकिन सुरुआत कैसे करें..(रोहित ने उनसे अस्पताल वाली बात छुपा ली)






 मोहित अंकल : लगता है...तुम्हे डेमो देखना मिलेगा...






 रोहित: (उकसते हुए) आप कैसे डेमो दिखाओगे अंकल….स्नेहा दीदी को छोड के या, मनीषा दीदी को।






 मोहित अंकल : स्नेहा को तो छोटा ही रहता हूं... अभी तो मनीषा को ही छोडूंगा... अभी उसे भी लुंड की जरूरत होगी...






 रोहित : आपको कैसे पता?






 मोहित अंकल : अरे बुद्धू... इतने समय से अपने पति से अलग रही है... और हो ना हो... वो अपने पति से कुश नहीं है...वो सही से छोड़ नहीं पाता होगा...  शक्ति….






 रोहित : लेकिन आप मनवोगे कैसे….






 मोहित अंकल : तुम्हारी मम्मी अभी आएगी तो नहीं…..






 रोहित : नहीं...उसने बताया की कफी देर से आएगी...






 मोहित अंकल : तो चल तू अपना जग पक्का ले मैं अपना सीकर सुरु कर्ता हु….






 रोहित : लेकिन मैं देखूंगा कैसे...






 मोहित अंकल : अब ये भी मैं ही बताऊंगा तुम्हें...





 रोहित अपने रूम से बहार निकला और पहले दीदी के कमरे का दरवाजा चेक किया तो वो खुला हुआ था… फिर उसे मोहित अंकल को इसरा किया… अनहोने इस्तेमाल पहले और जाने के लिए बोला… रोहित धीरे से दरवाजा खोल कर … रखी के कमरे में…  ड्रेसिंग टेबल के पिचे चुप गया… और मोहित अंकल के आने का इंतजार करने लगा….

 रोहित चुपके से दबे पांव कामरे के और गया और अपनी जगह पे जेक चुप गया, उसे देखा तो दीदी बिस्तर पर लेकर कोई उपन्यास पढ़ रही थी इस्तेमाल रात को सोने से पहले उपन्यास पढ़ने का सूक था...  हुई थी और उसे चौदी चुतर दरवाजे की तरफ थी और जिधर रोहित था उस तरह से दीदी का पूरा बट दिख रहा था...  जिस्से उसे गांद बार बार हिल रहे थे ……





 रोहित को वहन पे बैठे हुए 5 मिनट भी नहीं होंगे की… मोहित अंकल रूम में आए और उन्होन दरवाजे पर दस्तक किआ दस्तक की आवाज सुनके दीदी दरवाजे की तरफ देखी।


 दोनो की नज़र मिली और अंकल ने अपनी बात आगे बढ़ा दी।




 मोहित अंकल: मनीषा तुम सो तो नहीं गई...






 मनीषा दीदी : हैं नहीं अंकल...आये...मैं तो उपन्यास पढ़ रही थी...मैं देर से ही सोती हूं...






 मोहित अंकल (रूम के अंधेर आते हुए): मुझे भी नींद नहीं आ रही थी स्नेहा और रोहित तो गए..तुम्हारी मम्मी भी नहीं आई...सोचा तुमसे ही बात किया जाए...






 मनीषा दीदी: हां.. क्यों नहीं...आये न बैठिए...मम्मी तो अधिकार चलो ही आती है...आज कुछ ज्यादा देर हो गई...






 और मनीषा बिस्तर पर बैठ जाती है...मोहित अंकल उसके पास जाते हैं और उसी बिस्तर पर बैठे जाते हैं...






 मोहित अंकल: और तुम्हारा आदमी यूएसए में नहीं लगा...वैसे मैन तो हमारा भी नहीं लगता लेकिन क्या करें..बिजनेस की बजा से रहना पद है...






 मनीषा दीदी: यहां पापा के चले जाने के बाद मां को जरूरत थी... रोहित को देख ही रहे हैं... अगर वो हॉस्पिटल में साथ देता तो मैं जाने का सोच भी शक्ति थी।






 मोहित अंकल : कबल यही बात है... या कुछ और बात है।?






 मनीषा दीदी: और क्या बात होगी…..




 मनीषा ने अपनी आखें नीचे की और अंकल से आंखे चुराने लगे, अंकल से ये बात छुपी न रही उन्हे समझ में आ गया की कुछ अलग ही बात है एक पिचे।



मोहित अंकल : कबल इतना ही था... या बात कुछ और लगाती है..






 मनीषा दीदी ने इस बात से कोई आप नहीं जटा और बात करते रहे..रोहित वहन बैठे हुए ये सब सुन रहा था और कफी जोश में था की आज तो मनीषा दीदी उसके आंखों के अब चुदेगी ही देखने का होगा



 मनीषा को एस बात का एहसास था के अंकल ने अपने हाथ उसके जांघ पे रखे हुए हैं लेकिन उसी परवाह नहीं की थी बस उपयोग में समझ में नहीं आ रहा था की चाचा की बातों का क्या जवाब दे, अंकल ने हमें  दीया था आज.

 रोहित ने देखा की मोहित अंकल धीरे धीरे दीदी की मोती जांघो को सहलाने लगे और दीदी बस उनके साथ बातो में खोई हुई थी और इसका इस्तेमाल इस बात का सैयद ख्याल नी नहीं था की चाचा उसे जांगो को क्यों सहला रहा है...






 मोहित अंकल : देखो बेटी…मैं बहुत जिंदगी देखी है…तो तो तर्क नहीं हो सकता है…मैं थोड़ा खुल कर बोलता हूं…तू डॉक्टर हो समाधि हो…क्या वो तुम्हें खुश रख पाता था…






 मनीषा दीदी: कैसे खुश अंकल...चिजो की तो कोई कमी नहीं थी...






 मोहित अंकल : मेरा मतलब हिस्से की खुशी से है…वो तुमको संतुष्ट कर पता था….






 मोहित अंकल थोड़ा बोल्ड हो गए...और मनीषा दीदी शर्मा गई...उनका हाथ अपने जांघो से अलग कर दिया और...थोड़ा सीकुर के बैठा गई..






 मोहित अंकल इस्स के बाद और उसके और नजदीक चले गए और उसका जुका हुआ चेहरा उठा के इस्तेमाल पुचकारते हुए बोले..






 मोहित अंकल : मैंने जो कहा वो सच है ना... मुझसे क्या शर्मना बेटा, मैं तो अपना ही हूं... खुले तौर पर खो जो सच है, मैं शायद कुछ मदद करू






 मनीषा दीदी: हा..अंकल जब आप इतनी खुले तौर पर हाय जाना चाहते हैं...तो ये सही है कि वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पाता था...




 मनीषा दीदी ने नज़र आला की हुई ही कहा और अंकल के चेहरे पे एक कातिल मुस्कान तेर गई।






 मोहित अंकल : कितना बड़ा था उसका…?




 मनीषा दीदी: क्या?




 मोहित अंकल: हैं बीटा उस्का पेनिस




 मनीषा एक बार तो हिचकी कुछ बोले हुए फिर उसे बोल ही दिया






 मनीषा दीदी: बहुत पतला… और जैसे ही सुरु होता था झार जाता था… एक मिनट के अंदर






 रोहित को ये सब सुनकर अजीब लग रहा था..की दीदी अंकल से कैसे इतनी फ्री हो कर बात कर रही है..






 मोहित अंकल : तो तुम्हें… मोटा और लंबा पसंद है…(और वो मनीषा दीदी का हाथ पक्का कर सहलाने लगे)






 मनीषा दीदी: मेरा क्या...हर औरत यही चाहती है...और कुछ नहीं तो टाइम टू ले






 मोहित अंकल : मैं भी...तुम्हारी आंटी की मौत के बाद से कभी अकेला महसूस करता हूं... अगर मैं तुम्हारा दुख दूर कर सकु...




 अंकल सिद्ध लाइन पे आ गए, रोहित भी चौक गया उनकी बात सुनके






 मनीषा दीदी: ( चौकते हुए) आप कैसे?






 मोहित अंकल: (उनको दीदी का हाथ पाकर कर अपने पंत के ऊपर रखा और डबब देते हुए) जो तुम्हें चाहिए वो मेरे पास है मनीषा... और जो मुझे चाहिए वो तुम्हारे पास है...






 मनीषा दीदी: (उसने अपना हाथ नहीं हटा और बोली) लेकिन अंकल ये तो गलत है..आप मेरे अंकल है...






 मनीषा दीदी: तुम डॉक्टर होकर ऐसी बात करती हो..हम पुरुष और महिला है... पहले और एक दसरे के जरूरत को संतुष्ट कर सकते हैं...तुम्हें लंबा लुंड चाहिए जो मेरे पास है...






 फिर बोले हुए ही उन्होन अपना पायजामा आला किया और अपना लंबा मोटा लुंड दीदी के सामने के दिया।  दीदी और रोहित दोनो ही उसके लुंड को देख कर चौक गए...वैसे तो रोहित का लुंड भी कफी मोटा था लेकिन अंकल का लुंड 10 इंच से जायदा लंबा और चार इंच तक मोटा था..






 मनीषा दीदी: ओह... माय गॉड।  कितना बड़ा है...अंकल आप की उम्र में भी




 मोहित अंकल :तुमने कहां देखा इतना बड़ा लुंदो




 मनीषा दीदी : पोर्न मूवी में देखा है






 मोहित चाचा;  तो बोलो तुम्हारे लायक है ना ये...



 और उन्होन मनीषा दीदी का हाथ पक्का कर अपने लुंड पे रख दिया, मनीषा दीदी अपने हाथ को धीरे धीरे उनके लुंड के ऊपर अपने हाथ को फिर लगी... मोहित अंकल ने मनीषा दीदी के चेहरे को पक्का और उनके गर्म होना  लगे...वो खिलाड़ी आदमी थे..ये बात रोहित समाज गया और इस्तेमाल ये भी लग गया की आज अंकल दीदी को बिना पेले माने बाले नहीं है...

 ..

 [बी] मोहित अंकल: मनीषा क्या इसे अपने में मैं नहीं लोगी… ..

 [/बी]





 मनीषा दीदी: मैन तो कर रहा है...लेकिन क्या सही है..आप मेरे अंकल





 मोहित अंकल ने मनीषा दीदी के मुह पे अपना हाथ रखा और उन्हे लेकर ले गए और वो अपने लुंड को दीदी के मुह के पास लाए और जैसे ही वो लुंड की गर्मी महसूस की उसे अपना मुह खोल दिया और अंकल...  धीरे धीरे अपना लुंड उसके मुह के अंदर करने लगे और कभी बाहर निकल के फिर से अंदर कर रहे थे…

 जैसे ही मोहित अंकल ने अपना जीभ दीदी के मुह से निकला मनीषा दीदी हाफने लगी, रोहित को ये पता था कि अंकल क्या चाहते हैं लेकिन दीदी को भी सब कुछ करते देख अजीब लग रहा था।  मोहित अंकल ने मनीषा दीदी को भरोसा किया और दीदी ने झुककर उनके लुंड के सुपारे को छटा….

 मनीषा दीदी भी अब मजे से लुंड को चुस रही थी…





 फिर मोहित अंकल लेट गए बेड पे और मनीषा दीदी अपने जोड़े को दोनो तरफ रखकर उल्टे अंकल के ऊपर ले गए और लुंड चुनने लगी...  छतर पर रखा और दबने या चाटने लगे का उपयोग करें…






 मोहित अंकल : कही मेरे दमदजी ने तो कुश नहीं किया तुम्हारे साथ….




 मनीषा दीदी: (तोड़ी असमंजस में दिखी) नहीं अंकल...ऐसा कुछ नहीं...वो..ऊ.तो....






 मोहित अंकल : देखो बेटी... मैने एटनी उमर बिटा दी है... मुझसे क्या झूठ बोलना... खुल के बोलो क्या प्रॉब्लम हुआ...






 मनीषा दीदी: (अंकल ने उनके दुखती रग पर जैसे हाथ रख दिया हो) बात ये है अंकल की वो अपने काम में व्यस्त रहता था और मेरे लिए समय ही नहीं था...

0 टिप्पणियाँ