लॉकडाउन में मेरा परिवार Chapter 6

 




        लॉकडाउन में मेरा परिवार Chapter 6




माँ, अमृता और मैं


 मैं, माँ और अमृता उस बरगद पेड़ की छाया में बैठा।  याद दिलाने के लिए बताता हूं की अमृता ताई 50 साल की हैं और मेरी मां बिमला 46 साल की।  दोंन करीब 5'1" की है और वजन कंट्रोल में है।  अमृता सांवली है और बिमला थोड़ी गोरी है।


 अमृता ने मां से पुछा, "क्यों बिमला, अपना राहुल कैसा लगा?"

 माँ, “आप सिखो और ये ना सिखे, कैसा होगा!  अपने बाप, ताऊ और चाचा से काम तो नहीं है।”

 मुख्य, "यहाँ कितना अच्छा लग रहा है, पेड के आला।"

 मैंने अमृता का हाथ पक्का और अपनी या खिचड़ी लिया।  माँ हंसते हुई बोली, "देखो, कैसे आपको ही पहले पक्का रहा है!"

 तब मैंने मां को भी अपनी या खिचड़ी लिया।

 मां का आंचल खिंच कर हटा तो ऊपर से बिलकुल नंगी हो गई।  उसे ब्लाउज नहीं कहना था।  मैं उसकी चुचियां पकडकर सहलाने और चुनने लगा।  फिर मैंने अमृता का आंचल भी हटा।  और फिर उसे अपना ब्लाउज खोल दिया।  अमृता ने मेरा लुंगी खिचड़ी कर खोल दिया जिससे मैं पूरी तरह नंगा हो गया।

 उसे मेरा लुंड हाथ में लिया और आगे-पीछे करने लगी।  उसके बाद मां और अमृता उठी और अपनी अपनी साड़ी खोल दी।  अब हम तीन नंगे हो चुके थे।

 मैंने दोंनों की साड़ी को सुखी पट्टियों के ऊपर बिचा दिया।  और उसके ऊपर चलो गया।

 अमृता और मां दूं मेरे लुंड से खेलने लगी।  अमृता बोली, "देखो बिमला, तुम्हारा बेटा का हाथी बड़ा मस्त हो गया!  कितना खूबसूरत और तगड़ा लग रहा है!”

 ये कहकर वो मेरे लुंड को मैं में ले ली और चुनने लगी।  मेरी मां भी कहां पिछे रहती है।  बोली, “अरे दीदी, आप अकेली नहीं।  इसे मुझे भी चुन लें।”

 और दून बारी-बारी से लुंड को चुनने लगी।  कुछ डेर लुंड चुस्वाने के बाद मैं उठा और दोंनों को आला अगर बगल लिता दिया।

 मैंने अपनी थाली से कंघी और कांची निकला, जो मैंने सब घर से लाया था।  मैंने कहा, “आप दोंनों के झंझट बहुत लंबी हैं।  थोड़ा छोटी कर देते हैं।”

 अमृता, "ठीक है, काट दो।"

 मैंने पहले अमृता की झंटों को ट्रिम किया।  और फिर माँ बिमला की झोंपड़ियों को भी ट्रिम किया।  और उनसे बोला, "अब देखिये, दोंनों की चुत पहले से अच्छी लग रही है।"

 मैंने बोतल से पानी लाया और दोंनों की छुट को साफ किया।  मैं अब अमृता की चुत में जीभ दलकर चटने लगा।  कुछ डेर अमृता की चुटकी चटने के बाद मैं मां की चुत चैट लगा।  दोंनों की चुत चटने में बड़ा मजा आ रहा था।  मां की छुट के बाद मैं उसके ऊपर आया और उसके होठों को किस करना लगा।  उसे चुचुयों को सहलाने लगा।  अमृता ने मेरे लुंड को बिमला की छुट के छेद में लगा और मेरी कमर को पिच से दबया।  लुंड धीरे से मां की चुत में चला गया।  छुट के अंदर लुंड भूत ही मां ने मुझे जकाद लिया, "वाह रे, तुम्हारा लुंड तो बड़ा माजा देता है।"  अमृता मेरे और कोषों को सहला रही थी।  थोडी डेर बाद मैं कमर आगे पिछे करने लगा।  इसी तरह धीरे धीरे मां को छोडने लगा।  थोड़ी देर बाद अमृता बगल में लेटे हुई बोली, "थोड़ा मुझे भी छोड ले रे!"

 मैंने लुंड मां की चुत से निकला और लुंड को अमृता की चुत में पल दिया।  लुंड के भूत ही अमृता ने मुझे जकड लिया।  मैं कुछ डर उसे छुट की गरमी को महसूस करने के बाद धीरे धीरे हिलने लगा।  जंगल में छुडाई का आनंद अलग ही है।  वो भी 2 औरतों को एक साथ छोडने का आनंद!  वाह।  छोड भी किसको रहा था मैं !  अपनी खुद की मां को जिसी छुट से मैं चुका हुआ था और उसे बड़ी औरत जो रिश्तों में बड़ी मां लगती है।  वो दों चुदैल औरते भी मुझसे बहुत प्यार से चूड़ा रही थी।

 कुछ डेर बाद बिमला अमृता के ऊपर चिपक के ऐसे चलो गई की उसकी चुत अमृता की चुत के ऊपर आ गई।  मैंने अमृता की चुत से लुंड निकला और बिमला की चुत में कुत्ते की शैली में घुसा दिया और इस्तेमाल करने लगा।  कुछ ढकके मां की चुत में लगा के खराब मैंने फिर से अमृता की चुत में घुसा दिया।  इसी तरह कभी मां को कभी अमृता को छोडने लगा।  माँ और अमृता एक दसरे के मुंह में जीभ दाल कर चुम रही थी।


 मैंने हमें पोज दिया मैं चोदना बंद किया और आला चलो गया।  अमृता तुरंत मेरे ऊपर उलटी दिशा में मुझे देखकर लुंड को अपने बुर के दरवाजे से लगा के बैठ गई और मुझे रिवर्स काउगर्ल पोज मुझे चोदने लगी।  माँ अपनी चुत को मेरे मुंह पर रख दी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा।  मैने दोंनों की झांटों को ट्रिम कर दिया था।  इसिलिए चुत चटने में ज्यादा अच्छा लग रहा था।

 थोडी डेर उस तरह चुडने के बाद अमृता उठी।  उसके हटे उसे जगाह बिमला ने ले लिया और वो भी रिवर्स काउगर्ल पोज में मुझे छोडने लगी।  अमृता तब वही बैठक मां की छुट को सहला रही थी।  वो मेरे और कोषों से भी खेलने लगी।  माँ ने थोड़ी देर के लिए चुत से लुंड बहार किया तो अमृता ने गिली हो चुकी लुंड को चूसा और वापस माँ के बुर में दाल दिया।

 कुछ डर छोडने के बाद मैंने कहा, "मां मुझे प्यार लगी है।"

 माँ उथी।  अमृता ने पानी की बोतल दीया।  मैने पानी पिया।  माँ और अमृता ने भी थोड़ा छोटा पिया।  मैं बगल में खड़े होकर पेशब करने लगा।  ये देखर बिमला और अमृता भी मेरे पास बैठाकर पेश की।

 वही बगल में कमर की ऊंची वाला एक बड़ा चट्टान था।  मैंने बिमला और अमृता को हम पर बैठाया।  उनकी चुत मेरे लुंड की ऊंचाई पर आ गई।  सबसे पहले मैंने दोंनों को बारी बारी से चुमा।  उनकी चुचियों को सहलय।  फिर मैंने दोंनों की चुत को फिर से छटा।

 फिर मैंने बिमला की चुत में लुंड पल का छोडने लगा।  अस पोज़ मेई लुंड अनादर किसी मुलायम दीवार से तकरा रहा था।  वो बड़ा आरामदायक मुद्रा था।  मां को छोडने के बाद मैंने उसके बगला बैठी अमृता को छोडने लगा।

 कफी डेर छुडाई हो गई थी।  अब भुख भी लगाने लगी।  पर छोडने का मजा बहुत आ रहा था।  स्लो और स्टेडी जाने में लंबी छुडाई होती है।

 जब मैं मां को छोड रहा था तो मेरी नजर अमृता की चुत के आला गान पर गई।  मुझे गांड में लुंड डालने का मन किया।  मैं मां को छोड़ देता हूं अमृता की चुत को सहलाने लगा और एक उन्गली उसमेई घुसा दिया और उनगली से छोडने लगा।  फिर एक उनगली से उसकी गंद के छेद को सहालय।  अमृता ने कहा, "अच्छे से सहलो रे, पिचे भी!"

 मैं अब उसमें गंद के द्वार पर उनग्लियां फ़र्ने लगा और पुछा, "इस्मे लुंड दाल के देख!"

 अमृता, "कर ले रे, जो तेरी मर्जी है।  पर ध्यान रहे दर्द नहीं होना चाहिए।”

 मैंने अपना लुंड मां की चुत से निकला।

 और अपनी थाली से कोकोनट हेयर ऑयल लेके आया।  अमृता को हम चट्टान पर गड्ढे के बाल लिटाया।  मैंने अपने लुंड पर नारीयल तेल लगा और कुछ बुंदे अमृता की गंद पर लगा।  मैंने लुंड के सुपड़े को अमृता की गांद पर टिकाया और हल्के से घुमाने लगा।  टोपा घुस गया।  मैंने रुका और पुछा, "ठीक है बड़ी मां?"

 अमृता, "हां रे, थोड़ा और दाल।"  मैंने थोड़ा और अनार ढकेला और अंदर बहार किया।  थोडा टाइट लगा।  मैने वपस लुंड निकला और थोड़ा तेल लगा।  फिर अमृता की गांद में लुंड लगाने लगा।  इस बार लुंड आधा घुस गया था।  15-20 हलके ढाके मारा और वापस लुंड निकल के थोड़ा और तेल लगा।  गांड के छेद में भी डाला।  बिमला मेरे लुंड को अमृता की गंद में और-बहार होते देख रही थी।

 बार लुंड पुरा और चला गया।  और मैं धीरे धीरे छोडने लगा।  गंद की चुदाई का ये मेरा पहला अनुभव था।  और वकाई अलग मजा आ रहा था।  अमृता बोली, “अरे बिमला टब ही गांद में चुडवा ले।  मजा आ रहा है।"

 माँ बोली, “ठीक है दीदी।  इतना बड़ा लुंड मेरी गंद में जाएगा क्या?”

 ये कहकर मां भी अमृता के बगल में ले गई।

 मैने उसे गंद में नारीयल तेल लगा।  और उसके अंदर लुंड घुसने लगा।  3-4 कोषिश में मेरा लुंड मां की गांद में पुरा घुस गया था।  मैं मां की गांड की चुदाई का भी मस्त माजा लिया।  गांद टाइट था तो मुझे लगा मैं अब झड़ जहां जाऊंगा।

 मैंने लुंड निकला और थोड़ा बाकी लिया।

 लुंड को पानी से धोया।

 मैने कहा, “अब भुख लग रही है।  अब ज़ोर दार छुडाई करुण?'

 हम लोग वापस पैटों ने ऊपर बिछी साड़ी पर आ गए, दोंन आगल बैगल लेट गई और टंगेन फेला दी।  दो औरतों की चुते मेरे सामने थी।

 मैंने उनकी चुनौतियों को फिर से छापामार कर छटा और गीला किया।

 फिर पहले मां की चुत में लुंड दलकर छोडने लगा।  धीरे धीरे स्पीड बादया।  मैं थप्प थप्प छोडने लगा।  मैंने पुछा, "मेरा निकलने वाला है।"  अमृता बोली, "मेरे चुत में दाल दे रे।"

 मैने माँ की चुत से लुंड निकला और अमृता की चुत में घुड़दिया दिया।  और उसकी चुत में ज़ोर से ढकके मारने लगा।  कुछ डर की ज़ोरदार चुदाई के बाद मैं हंफ्ता हुआ अमृता की चुटकी में पानी छोडने लगा।  उसके बाद मैं लुंड निकलकर आला चलो गया।  मां मेरे स्थिर लुंड को चुसकर साफ करने लगी।

 ये छुडाई मस्त थी।  छुट के साथ 2 गंद की छुडाई भी मिल गई।

 थोड़ी देर हम तीनों आगल बैगल चलो गए।  अपनी सांसों को समान लगे।

 चुदाई में समय का पता ही नहीं चला।

 मैंने कहा, “आप दोंनों ने थाका दिया।  चलिये अब खाना खाते हैं।"

 बिमला, "तुमने भी बहुत डर तक छोटा हम दोंनों को।  गंद में भी छोड लिया।"

 अमृता, “बेटे से चुडवाने का मजा बाप से चुडवाने से भी ज्यादा आया बिमला।  ये जवान लुंड अपनी जवानी की याद दिला दिया।”

 मैने लुंगी पहन लिया।  माँ और अमृता ने भी साड़ी यूं ही लापेट लिया।  अमृता बोली, "चलो अब उसी गद्दे के पास जहां तुम दों सुबह नहीं द।  वही खाना खा लेंगे और दुबारा नहीं भी लेंगे।"


 हम तीन उसी पानी वाले गद्दे की या चल दिए जहान मैंने कल अमृता को छोटा था और आज बिमला को।

 

 पानी के पास पहंचकर मैंने हाथ जोड़ा धोया।  अमृता और बिमला ने भी हाथ जोड़ी धोया।  छुडाई करते करते समय का पता ही नहीं चला।  दोपहर दाल चुकी थी।

 मैंने कहा, "भुख लग रही है।"

 अमृता ने तेली से लंच बॉक्स निकला।  पैटन को साधक 3 प्लेट्स / थाली बनाया और सबके लिए खाना परोसा।  हम टिनों ने वहां पानी के पास के पत्थर पर बैठाकर खाना खाया।


 दो बार चुदाई कर चुका था।  इसिलिए आराम करना चाहता था।  मैने कहा, "इधर ही जंगल में सो जाने का मन कर रहा है।"

 बिमला बोली, "ठीक है तो जाओ पेड़ के आला छाया में।"

 मैं एक पेड़ के आला छाया में बैठा गया।  अमृता ने खाना खाकर अपने कपड़े धोई और वही सुखने के लिए फेला दिया।  दोनो मेरे पास आकार बैठा गई।  मैं अमृता की भगवान में सर रखकर सो गया।  वो मेरा सर सहलाने लगी।  कब निंद आ गई, पता नहीं चला।


 शाम को उठा दो अमृता और बिमला पानी में नहीं रही थी।  मैंने पास के एक पौधे से एक डेटा तोड़ा और दांत साफ किया।  रात के लिए ताजा होना चाहता था।  इसिलिए मैं भी अपने कपड़े खोलकर पानी में घुस गया।  अमृता और बिमला भी नंगी ही थी।  उनकी चुत अब बेहतर लग रही थी, क्यों सूबा उनकी झंटें ट्रिम कर दिया था।  दोंनों के चुत देखने मेरा लुंड फिर खड़ा हो गया।  लेकिन हमें समय छुडाई नहीं करना था।  रात की छुडाई के लिए एनर्जी बचाना था।

 नहने के बाद हम सबने पहनने और घर की या चले गए।


 घर आके अमृता और बिमला घर के काम में व्यस्त हो गई, जैसे जंगल में कुछ न हुआ हो।  लेकिन रेखा चाची और संध्या बुआ को पता चल गया था की हम टिनों ने जंगल में छुडाई किया था।

 शाम को जल्दी ही डिनर किया गया।  अमृता बोली, "आज सब एक जग सोयंगे।"

 रेखा बोली, "हां दीदी, राहुल वाले घर में सोते हैं।"

 रेखा चाची मेरे वाले घर के छोटे बिस्तर पर अपनी बच्ची के साथ सो गई।

 मैं अंदर वाले रूम में पलंग पे ले गया।  अमृता ताई ने आला चट्टई बिछया।  अपने घर से गद्दा लाया और छत्ताई पर गद्दा बिचा दिया।  और हम पर अमृता, संध्या और बिमला चलो गई।

 सबने अपने अपने ब्लाउज निकल दिए थे।

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