रिश्तो पर कालिख Chapter 5

 





         रिश्तो पर कालिख  Chapter 5




में अपनी तरफ आती उस सुरीली आवाज़ की तरफ अपनी एडियों के बल घूम जाता हूँ मेरे सामने वही लड़की खड़ी थी घूँघट में....एक दम दूध से धुला हुआ रंग....होंठ पर जैसे गुलाब रख दिए हो किसीने....



में--जी आप मुझे आवाज़ लगा रही है क्या.....



लड़की--जी ये आपकी जेब में से कुछ गिर गया था वही देने आई हूँ...


में जैसे ही उसके हाथ की तरफ देखता हूँ मुझे वो डीयेने सॅंपल वाले लिफाफे नज़र आजाते है साथ ही साथ उसकी उंगली से निकलता हुआ खून भी जो उन लिफाफो को भिगोएे जा रहा था....


आज कुछ अजीब सा लग रहा था सीने में....उसके चेहरे को देखे बिना ही....वो शक्श मुझे अपना सा लगने लगा था....कुछ तो बात है उसमें....वरना किसी को जानने की बेचेनी मेरे दिल ने कभी महसूस नही करी थी....


में बाइक आगे दौड़ाए जा रहा था उसकी उंगली से अभी भी खून बह रहा था उसके खून से...मेरा बाँधा हुआ रुमाल पूरी तरह से सन चुका था.....उस से काफ़ी ज़िद करने के बाद में उसे डॉक्टर के पास चलने को मना पाया था....


उसके होंठो पर पानी की कुछ बूंदे आ गयी थी जो ऐसा लग रहा था जैसे गुलाबो पर किसीने मोती रख दिए हो...ये बूंदे उसके आँसू थे जो उसकी आँखो से बह रहे थे....



मैने जल्दी ही एक क्लिनिक के बाहर अपनी बाइक रोक दी और लगभग उसे खिचते हुए अपने साथ वहाँ बने एमर्जेन्सी रूम की तरफ बढ़ गया....



डॉक्टर ने उसके घाव पर स्टिचिंग कर के दवा लगाकर बॅंडेज बाँध दी...


उसके बाद वहाँ की फीस भरने के बाद हम लोग फिर से बाइक पर बैठ चुके थे....उसने अपना नाम मुझे शमा बताया था....,




में--शमा जी अब आप को दर्द तो नही हो रहा.....




शमा--नही दर्द नही होता मुझे....दर्द की आदत पड़ चुकी है....




में--ऐसा क्यो कह रही है आप....क्या मुझे आप अपने बारे में कुछ बता सकती है....




शमा--मेरे बारे में जानकार आप क्या करेंगे साहब....ना मेरा कोई जीवन है और ना ही कुछ ऐसा जिसे बताने में मुझे खुशी मिले....



में--अगर आप नही बताना चाहती तो ठीक है...लेकिन सुना है दिल का दर्द बाटने से दर्द कम हो जाता है...इसलिए में आपके दर्द को कम करने की कोशिश कर रहा हूँ....




शमा--पेशे से में एक तवायफ़ हूँ....गाना सुनाकर लोगो का मन बहलाती हूँ....अभी कुछ दिन पहले ही मैने अपना अट्ठरवा साल पूरा किया है....


अब कुछ दिनो बाद में गाने के साथ साथ अपना जिस्म लोगो को देकर उन सब का मन बहलाउन्गि....कुछ दिनो बाद मेरी नथ उतराई की रस्म होने वाली है....में चाह कर भी ये सब होने से नही रोक सकती....


उसकी ये बात सुनकर मैने झटके से अपनी बाइक ब्रेक लगा कर रोक दी....हमारे पास में से काफ़ी सारी गाड़िया तेज रफ़्तार में हॉरेन बजा बजा कर निकल रही थी....लेकिन ये बात सुनके हम लोगो के दरम्यान एक बहुत बड़ी खामोशी छा गयी थी....

उसकी ये बात सुनकर में ये कहने से खुद को रोक नही पाया....



में--अगर आप नही चाहती तो कोई आपको ज़बरदस्ती इस दलदल में कैसे फेक सकता है.....आप पोलीस में कंप्लेन क्यो नही कर देती.....



शमा अपने एक हाथ अपने घूँघट में डालकर अपने बह रहे आँसू पोछते हुए कहती है....


शमा--साहब यहाँ मेरी फरियाद सुनने वाला कोई नही है...और जिन लोगो के पास अपनी दरख़्वास्त ले जाने के लिए भेजना चाहते है....हम उन्ही लोगो की महफील रोशन करते है.....



में--अगर आप चाहो तो में आपकी मदद कर सकता हूँ आपको इस दलदल में से निकालने के लिए....



शमा--मेरी मदद तो मेरा भगवान भी नही करता साहब.....और आप क्यो एक तवायफ़ के पिछे अपना वक़्त ज़ाया करेंगे....



में--में तुम्हे वहाँ से निकालने के लिए अपना पूरा ज़ोर लगा दूँगा....तुम मुझे बोलो बस में तुम्हारे लिए क्या करसकता हूँ....



शमा--साहब आज से 10 दिन बाद मुझ पर बोली लगाई जाएगी....अगर कोई मेरी बोली लगाकर मुझे जीत जाता है तो मुझे सारी उमर उसकी गुलाम उसकी रखेल बन कर रहना होगा...लेकिन अगर कोई भी बोली नही लगाता है तो....मुझे एक रंडी का जीवन जीना होगा....मुझ पर खर्च हुए बचपन से अब तक का पैसा मुझे मेरा जिस्म बेच कर देना होगा....



में--अगर में तुम्हे अभी यहाँ से गायब कर दूं तो....वो लोग तुम्हे ढूँढ नही पाएँगे.....



शमा एक दर्दभरी मुस्कुराहट अपने होंठो पर ले आती है....




शमा--साहब छुप तो परछाई भी नही सकती....उसे भी छुप्ने के लिए अंधेरे में ही जाना पड़ता है...में कही भी भाग जाउ ये लोग मुझे ढूँढ ही लेंगे.....



में--अगर तुम चाहो तो में पोलीस की मदद लेकर तुम्हे वहाँ से निकलवा सकता हूँ....मेरे संबंध काफ़ी बड़े बड़े लोगो से है.....




शमा--हन साहब ऐसा हो सकता है....लेकिन फिर भी आपको मेरी कीमत तो चुकानी ही पड़ेगी.....




में--अगर तुम उस दलदल से निकलना चाहती हो तो में तुम्हे वहाँ से निकालने के लिए कोई भी कीमत दे सकता हूँ.....




शमा--साहब आप मेरे लिए इतना सब क्यो कर रहे है....आप आज से पहले ना मुझे जानते थे ना ही अब तक आपने मेरा चेहरा देखा है....अगर मैने आपको धोका दे दिया तो....या सिर्फ़ आपसे पैसे लूटने के लिए आपका इस्तेमाल कर रही हूँ तो....आप मेरी मदद क्यो करना चाहते है....



में--तुम्हारी मदद में तुम्हे अपनी छोटी बहन समझ कर कर रहा हूँ...मेरी वो खोई हुई बहन जिसे में पता नही कैसे ढूँढ पाउन्गा....


मुझे किसी ने कहा था कि मेरी एक बहन और है जिसके बारे मे मैं नही जानता और वो तक़लीफ़ में अपना जीवन जी रही है..... इस लिए तक़लीफ़ से गुजरती हर लड़की मुझे अपनी बहन ही लगती है......



शमा--कितनी खुशनसीब होगी आपकी वो बहन जिस दिन आप उसे ढूँढ लेंगे....भगवान से में आज ही आपकी बहन के लिए प्रार्थना करूँगी....




में--शमा अगर आप बुरा ना मानो तो क्या में आपका चेहरा देख सकता हूँ......




शमा--इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है आप ने मुझे अपनी बहन बोला है....बस बुरा एक ही बात का लग रहा है....आप मुझे बार बार मुझे आप कह कर मत बुलाए....



में--ठीक है शमा में तुम्हे आप नही कहूँगा....



इसके साथ शमा अपना चेहरे पर से अपना घूँघट हटा देती है.....


उसकी बड़ी बड़ी आँखे उसकी सुंदरता को और बढ़ा रही थी उसके माथे पर एक छोटी सी बिंदी बड़ी ही मनमोहक लग रही थी.... लेकिन ये चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लग रहा था....कहाँ देखा मैने इस चेहरे को कुछ समझ नही आ रहा.....




में--शमा क्या हम पहले भी मिल चुके है....तुम्हारा चेहरा मुझे जाना पहचाना सा लग रहा है....



शमा--में तो आपको देखते ही पहचान गयी थी साहब.....



में--अब तुम भी मुझे साहब कहना बंद करो मेरा नाम जय है....तुम मुझे भैया भी बुला सकती हो....



शमा--भैया शायद आपको याद नही होगा....आप कुछ दिन पहले दुबई जा रहे थे....आप बस बैठे बैठे शराब ही पिए जा रहे थे....में उस वक़्त आपकी बगल वाली सीट पर ही बैठी थी और जानना चाहती थी कि आप ऐसा क्यो कर रहे है....आपकी आँखे दर्द से सुलग रही थी जैसे किसी ने आपकी आँखो में तेज़ाब डाल दिया हो उस वक़्त....लेकिन में आपसे बात कर पाती उस से पहले ही वहाँ की एर होस्टेस्स ने आपको संभाल लिया था....




में--तुम मेरे पास बैठी थी और में तुम्हे पहचान भी नही पाया....



शमा--आपने सिर्फ़ एक बार ही मेरी तरफ देखा था....लेकिन में आपको देखे ही जा रही थी....आपके दर्द को में अपने अंदर महसूस कर रही थी....



में--शमा तुम चिंता मत करो अब में...तुम्हे वहाँ से ज़रूर निकाल पाउन्गा....अगर में सही हूँ तो मेरी खोई हुई बहन तुम ही हो....बाकी सारी बाते में तुम्हे अपने घर लेकर आने के बाद करूँगा....क्या मुझे तुम्हारा एक बाल मिल सकता है....में कुछ पहेलियो के जवाब ढूँढ रहा हूँ....शायद कल सुबह तक सारी पहेलिया सुलझ जाएँगी.... मुझे तुम अपना अड्रेस और मोबाइल नंबर भी दे दो...




उसके बाद शमा अपना अड्रेस और मोबाइल नंबर मुझे बता देती है और वो सारी डीटेल में मेरे फोन में एड कर लेता हूँ....




शमा--भैया आप मुझे बचा तो लेंगे ना....??




में--तेरी कसम....बहन तुझे में इस दलदल से निकाल कर ही दम लूँगा....तेरी कसम.....तेरी कसम.....


शमा मेरे सीने से लग कर ज़ोर ज़ोर से रोने लग जाती है.....


शमा--भैया मुझे वहाँ से निकाल लो....वहाँ रोज मुझे नंगा करके वहाँ के आदमियो से मालिश करवाई जाती है....मुझे अपने आप से घिंन आने लग गयी है अब....या तो मुझे वहाँ आकर बचा लो या फिर में खुद खुशी कर लूँगी....मुझ से सहन नही हो रहा है ये सब कुछ....मुझे बचा लो भैया.... मुझे बचा लो.....



में--तू अब चिंता मत कर तेरे आँसुओ को देख कर भगवान ने मुझे तेरे पास भेज दिया....अब ये तेरा भाई तुझे इन सब से बचा कर अपने घर जल्दी ही ले आएगा....तू चिंता मत कर मेरी बहन तू चिंता मत कर....



उसके बाद में वहाँ से अपनी बाइक वापस नंदू के बंगलो की तरफ बढ़ा देता हूँ....वहाँ पहुँचकर में उसे अपने गले से एक बार फिर से लगा लेता हूँ और उसे वापस आने का वादा देकर में वहाँ से निकल जाता हूँ....



में अब सब से पहले कमिशनर ऑफीस की तरफ बढ़ जाता हूँ....वहाँ मुझे कमिशनर जे. प्रसाद से मिलना था....वो मुझे अच्छे से जानते थे....




प्रसाद--जय बेटा कैसे हो....आज यहाँ का रास्ता कैसे भूल गये...




में--अंकल मुझे आपकी मदद चाहिए...मुझे एक लड़की को नरक में से निकालना है....




प्रसाद--किस की बात कर रहे हो तुम बेटा....कौन जी रहा है नरक में.....




में--अंकल एक लड़की है जिसे तवायफ़ के धंधे में ज़बरदस्ती झौंक दिया गया है....मैने उसे अपनी बहन माना है....और में किसी भी कीमत पर उसे वहाँ से निकालना चाहता हूँ....



प्रसाद--कुछ सोच कर.....बेटा तुम कहाँ इन चक्करो में पड़ रहे हो....वो लड़की शायद तुम से पैसा लूटना चाहती है....इसलिए वो तुम्हे एमोशनल ब्लॅकमेन्ल कर रही होगी....


में--नही अंकल वो लड़की झूठ नही बोल रही....और मेरा दिल कहता है ये लड़की ही मेरी खोई हुए बहन है....प्लीज़ अंकल आप मेरी मदद करिए उसे वहाँ से निकालने के लिए जितना भी पैसा मुझे खर्च करना होगा में उसके लिए करूँगा....








प्रसाद--सोच लो बेटा कहीं ऐसा ना हो कि वो लड़की बाद में तुम्हे धोका देकर तुम्हारा पूरा जीवन बर्बाद कर दे....








में--मैने सोच लिया है अंकल बस आप मेरी मदद कर दीजिए....






प्रसाद--ठीक है बेटा जैसा तुम चाहो....




अंकल अपनी टॅबेल पर रखी हुई बेल बजाते है जिसे सुनकर एक चपरासी अंदर आजाता है....


उस चपरासी को इनस्पेक्टर शर्मा को बुलाने के लिए कहते है....फिर वो चपरासी. बाहर चला जाता है....


कुछ देर बाद हे दरवाजे पर दस्तक होती है....और प्रसाद अंकल उसे अंदर आने के लिए कहते है....








प्रसाद--जय बेटा ये है इनस्पेक्टर राजेश....ये तुम्हारी मदद उस लड़की को वहाँ से निकालने में करेंगे....






राजेश एक 6 फीट लंबा सुघटित जिस्म का मालिक था गोरा रंग, चेहरे पर आत्मविश्वास अच्छे से झलक रहा था उसके....






राजेश--सर किसे कहाँ से निकालना है....






पसद--राजेश....जय को तो तुम जानते ही हो....इन्होने एक लड़की को तवायफ़ के धंधे से बाहर निकालने की ज़िम्मेदारी उठाई है...और इन्होने उस लड़की को अपनी बहन भी माना है इसलिए तुम्हे जय के साथ मिलकर उस लड़की को वहाँ से आज़ाद करवाना है....






राजेश--सर....क्या इनको ये पता है कि ये धोके का शिकार भी हो सकते है उस लड़की को आज़ाद करवाने के चक्कर में....








प्रसाद--में इन्हे वो सब कुछ बता चुका हूँ लेकिन ये फिर भी उसे बचाने की रिस्क ले रहे है....इनकी नेक नियत पर भरोसा करते हुए तुम्हे उस लड़की को वहाँ से किसी भी तरह निकालना होगा...






राजेश--ठीक है सर पर जाना कहाँ है....








में--बनारस.....








राजेश--कुछ सोच कर.... लगता है उस लड़की के साथ साथ अब कुछ ज़िंदगियाँ और बर्बाद होने से बच जाएँगी....हम कल सुबह ही बनारस के लिए निकल जाएँगे सर.....मुझे खुशी है आपने मुझे इतना अच्छा काम दिया....इस भलाई के काम को में ज़रूर पूरा करूँगा....


उसके बाद में और राजेश अपना अपना मोबाइल नंबर एक्सचेंज कर लेते है और फिर में वहाँ से उठ कर सीधा डॉक्टर आलोक के क्लिनिक की तरफ अपनी बाइक मोड़ लेता हूँ.....




शाम के 7 बज गये थे....में डॉक्टर आलोक के क्लिनिक में बैठा हुआ उनसे मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था....


कितना अजीब दिन था आज का...जिसे में अपना दुश्मन समझ रहा था वो तो मेरे पापा के अहसानो से वैसे ही दबा हुआ है....और फिर शमा से मिलना....जिसे देख कर मेरा रोम रोम कह रहा है....हां ये मेरी वही बहन है जो खो चुकी है....मुझे अब अपनी बहन को वहाँ से निकालने के अलावा ये भी पता करना है...कि इसकी माँ कौन है....क्या शमा का कोई और परिवार तो नही है....??




ये ही सवाल मेरे मन में लगातार हथोडे की तरह प्रहार कर रहे थे....तभी चपरासी ने आकर मुझे डॉक्टर के कॅबिन में जाने के लिए बोल दिया और में वहाँ से उठ कर सीधा कॅबिन में घुस गया.....








डॉक्टर--मुस्कुराते हुए....तुम कभी टाइम पर क्यो नही आते....में तुम्हे सुबह बुलाता हूँ तो शाम को आते हो और शाम को बुलाता हूँ तो सुबह.....








में--सर क्या करूँ....आज कल समय भी कुछ ज़्यादा ही तेज़ भागने लग गया है....देर हो ही जाती है....








डॉक्टर--कोई बात नही बोलो चाय लोगे या कॉफी...








में--सर थॅंक्स लेकिन मुझे थोड़ी जल्दी है कॉफी आपके साथ फिर किसी दिन ज़रूर पियुंगा....








डॉक्टर--अच्छा कोई बात नही....तुम वो सम्पेल्स मुझे दे दो....






उसके बाद में वो सारे लिफाफे डॉक्टर आलोक की टॅबेल पर रख देता हूँ और डॉक्टर आलोक एक एक करके सारे लिफाफे देखने लगते है.....








डॉक्टर--क्या बात है जय आज एक लिफ़ाफ़ा और बढ़ गया....तुम तो सिर्फ़ बड़े भाई वाला लिफ़ाफ़ा लाने वाले थे ये किसका सॅंपल ले आए तुम...और इन सब लिफाफो पर खून किसका लगा है....और लिफाफो पर तुम्हारे पापा भैया का तुम्हारा नाम क्यों है बाकी 3 नामो के अलावा....






में--सर कोई कन्फ्यूषन ना हो इस लिए मैने अपने घर वालो के नाम लिख दिए इस मे....और ये खून उसका है जिसका सॅंपल दूसरे लिफाफे में है....






डॉक्टर--इंट्रेस्टिंग.... लग रहा है कुछ पहेलियाँ सुलझाने में लगे हुए हो....खेर अगर मुझे तुम ना बताना चाहो तो ना सही लेकिन कुछ तो गड़बड़ चल रही है तुम्हारे दिमाग़ में....








में--सर जिस दिन ये पहेली सुलझ जाएगी....में उस दिन आपको सब कुछ सच सच बता दूँगा....अभी में आपसे इजाज़त चाहूँगा जाने की....








डॉक्टर--ठीक है....तुम कल आकर ये रिपोर्ट्‌स ले जाना....अभी तुम जा सकते हो.,..








में--कल कब आउ सर....?






डॉक्टर--जब तुम्हारा मन करे वैसे भी तुम मेरे दिए हुए वक़्त पर तो आओगे नही....








में--सर में वैसे भी कल बाहर हूँ रूही दीदी आएँगी आपसे रिपोर्ट्‌स लेने आप उन्हे ये रिपोर्ट्‌स दे देना....








डॉक्टर-ठीक है जय जैसा तुम चाहो....






उसके बाद में वहाँ से निकलकर सीधा अपनी बाइक एक शराब की दुकान के बाहर रोकता हूँ और एक स्कॉच की बोतल ले कर घर की तरफ बढ़ जाता हूँ....






घर पहुँच कर मम्मी को में वो ज्यूयलरी वाला बॉक्स दे देता हूँ....और उनसे कहता हूँ कल कोई आएगा आप उसे ये दे देना...उसके बाद में अपने रूम में आजाता हूँ और अपने कपड़े बदलने लगता हूँ....तभी रूम के दरवाजे पर दस्तक होती है...और में उसे अंदर आने के लिए कह देता हूँ....






भाभी--क्या बात है हीरो....कहाँ घूमते रहते हो आज कल सारा सारा दिन....चल क्या रहा है तुम्हारे दिमाग़ में....मम्मी से पूछती हूँ तो वो भी तेरा ही पक्ष उठाती है....कुछ मुझे भी बताएगा....






में--भाभी आपको सब कुछ बता दूँगा बस मुझे कुछ काम और करने है उसके बाद सब कुछ पहले की तरह हो जाएगा.....






भाभी--क्या सब कुछ पहले की तरह हो सकता है....??




भाभी की आँख में आँसू आ गये थे ये बात बोलते हुए.....मैने कितनी बड़ी ग़लती करदी उनके जख्म को कुरेद कर....




में तुरंत आगे बढ़ा और भाभी को अपने गले से लगा लिया.....वो भी बिल्कुल मुझ से चिपक सी गयी थी...और मेरे कंधे पर सिर रख कर सिसकने लग गयी....


में तुरंत आगे बढ़ा और भाभी को अपने गले से लगा लिया.....वो भी बिल्कुल मुझ से चिपक सी गयी थी...और मेरे कंधे पर सिर रख कर सिसकने लग गयी....




मैने बड़ी मुश्किल से उन्हे संभाला....और थोड़ी देर बाद वो बाहर चली भी गयी...






कैसे कर पाउन्गा में ये सब....कैसे सब के जीवन फिर से खुशिया आ पाएँगी....कैसे फिर से मेरा घर फिर से खुशियो से भर जाएगा....क्या करूँ....क्या करूँ में....???




रात मेरी आँखो में ही कट गयी....बस यही सोचते सोचते कि कैसे में फिर से खुशिया ला पाउन्गा मेरे घर में....सुबह 11 बजे निकलना है और अभी सुबह के 4 बज चुके थे...




यही सोचते सोचते जाने कब मेरी आँख लग गयी....जो कुछ घंटी बाद रूही की आवाज़ से खुल गयी....








रूही--जय उठ जा....कितना सोएगा....चल जल्दी से उठ जा कॉलेज नही जाना है क्या....








में--नही दीदी में आज भी आप लोगो के साथ नही चल पाउन्गा....क्या मेरा एक काम कर दोगि....








रूही--तुझे मैने कभी किसी काम के लिए मना किया है जो पूछ रहा है....








में--दीदी डॉक्टर. आलोक के यहाँ से एक रिपोर्ट लेकर आनी है कॉलेज से आने के बाद आप मेरे मोबाइल पर उसकी एक फोटो भी भेज देना....








रूही--चल ठीक है....में कॉलेज से आते वक़्त तेरा ये काम कर दूँगी....वैसे तू आज कहाँ जा रहा है....कॉलेज में अटेंडेन्स शॉर्ट्स पड़ जाएँगी....वैसे ही छुट्टियाँ काफ़ी ज़्यादा हो गयी है....








में--दीदी ये काम कॉलेज से ज़्यादा ज़रूरी है...प्ल्ज़ आप मेरा वो काम ज़रूर याद से कर देना....भूल मत जाना...






रूही--नही भूलूंगी बाबा....








में--अच्छा नीरा उठ गयी क्या....








रूही--वो तो सुबह सब से पहले उठ गयी थी अभी भाभी के साथ किचन में है....








में--क्या बात है आज वो आलसी जल्दी कैसे उठ गयी....






रूही--पता नही सुबह से ही किचन में घुसी हुई है वो भी नहा धो कर....








तभी दरवाजे पर दस्तक होती है और दरवाजा खोल कर नीरा अंदर आजाती है....वो अपने साथ मेरे लिए कॉफी लेकर आई थी....








नीरा--आप उठ गये....ये लो में आपके लिए अपने हाथो से कॉफी बना कर लाई हूँ....






में--आज सूरज कहाँ से उगा है....आज तो मेरा बर्तडे भी नही है जो तू मुझे सुबह सुबह कॉफी पिलाने आ गयी है....








नीरा--अब से में ही आपके लिए सुबह कॉफी लाउन्गी और नाश्ता भी अपने हाथो से बनाया हुआ ही खिलाउन्गि....








में--मम्मी ने तुझे किचन में काम कैसे करने दिया....वो तो भाभी को भी बड़ी मुश्किल से किचन में घुसने देती है काम करने के लिए....इसीलिए घर में आज तक उन्होने कोई नोकर नही रखा....क्योकि वो घर का सारा काम खुद ही करना पसंद करती है....फिर तुझे कैसे घुसने दिया....








नीरा--वो क्या है ना....मैने मम्मी को एक बात बोली....इस वजह से मुझे वो काम करने से मना नही कर पाई और वैसे भी कॉफी बनाने के लिए तो मम्मी रूही दीदी को भी मना नही करती....तो मुझे क्यो करेगी....








में--चल ठीक है अब ये कॉफी का मग यहाँ रख और स्कूल जाने की तैयारी कर...










नीरा--वो मुझे आप से एक काम था....






में--कौनसा काम....








नीरा--बाद में बताउन्गी पहले आप फ्रेश हो जाओ और बाहर आ जाओ....








उसके बाद नीरा और रूही दोनो बाहर चले जाते है...तभी एक मिनिट बाद ही मेरे रूम का दरवाजा वापस खुल जाता है और नीरा भागते हुए मेरे बेडपर चढ़ कर मेरे उपर बैठ जाती है.....






में--ओये मोटी उठ....क्यो दबा रही है सुबह सुबह....






नीरा--पहले मुझे एक गुड मोर्निंग किस दो उसके बाद ही में यहाँ से जाउन्गि....








में--तुझे रोका किसने है जो चाहिए वो ले ले.. .



फिर उसके बाद नीरा मुझे पर झपट पड़ती है और मेरे पूरे चेहरे पर अपने होंठों से निशान बना देती है....और फिर लास्ट में मेरे नीचे वाले होंठ पर एक हल्का सा बाइट कर के कहती है ....






नीरा--गुड मोर्निंग जान....






और में भी कस कर उसे अपने गले से लगा लेता हूँ....उसके बाद में उसे बाहर जाने को कहता हूँ और बाथरूम में घुस जाता हूँ....




नीरा का इस तरह मेरा ख्याल रखना मुझे काफ़ी अच्छा लग रहा था....में जल्दी जल्दी फ्रेश हो कर बाहर निकल कर आ गया....बाहर सभी हॉल में बैठ कर मेरा वेट कर रहे थे नाश्ते के लिए....








कोमल--भैया क्या बात है आज कल कॉलेज की खूब छुट्टियाँ मार रहे हो आप....








में--क्यो तेरा भी स्कूल से छुट्टी मारने का मन कर रहा है क्या....






कोमल--स्कूल से छुट्टी मारने का तो नही लेकिन कहीं घूमने जाने का ज़रूर मन कर रहा है.....








में--में एक बार ये काम निपटा लूँ उसके बाद नेक्स्ट वीक हम 4 दिनो के लिए कहीं बाहर चलेंगे....






कोमल--पक्का ना भैया.....






दिखसा--अब उनसे क्या लिख कर लेगी....चुप चाप खाना खा और स्कूल जाने की तैयारी कर....








मम्मी--अरे दीक्षा बेटा बोलने दे उसे वो अपने भाई को ही बोल रही है कोई दूसरा बाहर वाला नही है....








कोमल--बड़ी मम्मी दीदी हमेशा मुझे डाँटती रहती है...






मम्मी--क्या बात है दीक्षा कुछ दिनो से तेरा बर्ताव क्यो बदला हुआ है....








दीक्षा--कुछ नही बड़ी मम्मी.. मम्मी पापा ने गाँव जा कर एक बार भी हमसे फोन करके बात नही करी....ऐसा लग रहा है जैसे एक बोझ था उनके सीने पर जिसे वो इस घर में छोड़ कर चले गये है....ये कहते कहते दीक्षा की आँखो में आँसू आ गये...और मम्मी ने वहाँ से उठ कर दीक्षा के माथे को अपने सीने में दबा लिया....


मम्मी--ऐसा नही बोलते दीक्षा ...तुम उनके लिए बोझ नही हो....वो बस तुम्हारी पढ़ाई में डिस्टर्ब ना हो इसलिए तुम्हे फोन नही कर रहे होंगे....तू कॉलेज से आजा उसके बाद तुम दोनो बहनो के साथ तेरे माँ बाप की मिल कर क्लास लगाएँगे....






उसके बाद वो सब कार में बैठ कर अपने अपने स्कूल कॉलेज की तरफ रवाना हो गये....






और में वही बैठा बैठा अख़बार पढ़ने लग गया....इसी तरह टाइम पास करते करते 10 बज गये तभी मेरे पास राजेश का फोन आ गया....






रहेश--जय रेडी हो गये ना....








में--हाँ राजेश भाई में बस आपके फोन का ही वेट कर रहा था....बोलिए कहाँ मिलेंगे आप...में अपनी कार लेकर वही आ जाता हूँ....






राजेश--ठीक है तुम मुझे ऑफीस के बाहर से ही पिक कर लो 11.15 की फ्लाइट है ज़्यादा देर मत करना....






में--में बस निकल ही रहा हूँ....10.30 आपके पास पहुँच जाउन्गा....






राजेश--ठीक है आ जाओ अब में फोन रखता हूँ....








उसके बाद में फोन अपनी जीन्स में डालकर एक छोटे से ट्रॅवेल बेग में कुछ ज़रूरी सामान भर लेता हूँ....और मम्मी से कहता हूँ जुगल किशोर अंकल की दुकान से कोई आएगा उन्हे वो बॉक्स दे देना....






मम्मी--ठीक है में वो दे दूँगी लेकिन तेरे दिमाग़ में चल क्या रहा है बताएगा मुझे....






में--बहुत जल्दी इस घर में खुशिया आने वाली है....बस मुझे थोड़ा वक़्त और दे दो....उसके बाद में सब कुछ ठीक कर दूँगा....






मम्मी--ठीक है जा जहाँ जाना है....लेकिन अपना ख्याल रखना....






में उसके बाद वहाँ से निकल कर सीधा राजेश के ऑफीस की तरफ बढ़ जाता हूँ वहाँ मुझे राजेश बाहर ही नज़र आजाता है....








उसके बाद हम तेज़ी से एरपोर्ट की तरफ बढ़ जाते है....




हम लोग वाराणसी एरपोर्ट पहुँच गये थे...वहाँ से हमे एक कार लेकर 2 घंटे के सफ़र पर निकलना था....मैने शमा को फोन करके यहाँ पहुँचने के बारे में बता दिया....उसकी आवाज़ से घबराहट काफ़ी सॉफ दिखाई पड़ रही थी....




शमा से बात करने के बाद हम लोग एक पोलीस हेडक्वॉर्टर में पहुँचे जहाँ राजेश ने कुछ मालूमात करी...






राजेश--जय भाई मामला बड़ा गंभीर है....यहाँ कुछ धर्म के ठेकेदार है जो वेश्याव्रती को सही मानते है....और ये लोग पोलिटिकली भी काफ़ी साउंड है....हमे कुछ और ही करना होगा....






में--क्या करना होगा राजेश भाई...






राजेश--तुम्हे शमा को यहाँ से खरीद कर ही ले जाना होगा....अगर में यहाँ पुलिस के साथ रेड डालता हूँ उसमें किसी को चोट भी पहुँच सकती है....और दूसरी बात ये काम बिना मीडीया के पासिबल भी नही है....और अगर मीडीया इस काम में एंवोल्व हो गयी तो तुम खुद समझ सकते हो तुम्हारे परिवार की कितनी बदनामी होगी....








में--बात तो सही है राजेश भाई....मेरे दिमाग़ में एक प्लान है अगर आप सुनना चाहे तो....








राजेश--अगर वासत्व में कोई सेफ प्लान है तो में ज़रूर सुनना चाहूँगा....








में--हमारा सब से पहला मकसद शमा को यहाँ से कोई भी कीमत देकर निकालना है....हम लोगो के निकलने के बाद अगर आप....यहाँ रेड कर दे तो शमा भी बच जाएगी और काफ़ी सारी लड़कियो की जिंदगी भी बच जाएगी....






राजेश--मेरे दिमाग़ में भी यही चल रहा है जय....






रेड के टाइम तुम्हारे दिए हुए पैसे भी बरामद हो जाएँगे....लेकिन रेड से पहले में तुम्हारे साथ उस कोठे पर नही जा सकता....








में--हम लोग जैसे ही वहाँ से निकलेंगे आपको इनफॉर्म कर देंगे आप हमारे वहाँ से निकलते ही कोठे पर रेड कर देना....








राजेश--ठीक है जय अभी....7 बज रहे है और वहाँ का महॉल भी रंगीन हो रखा होगा....मेरे ख्याल से तुम्हे वहाँ एक बार जाना चाहिए....






उसके बाद में राजेश से विदा लेकर कोठे की तरफ बढ़ जाता हूँ....


फिर उसके बाद नीरा मुझे पर झपट पड़ती है और मेरे पूरे चेहरे पर अपने होंठों से निशान बना देती है....और फिर लास्ट में मेरे नीचे वाले होंठ पर एक हल्का सा बाइट कर के कहती है ....






नीरा--गुड मोर्निंग जान....






और में भी कस कर उसे अपने गले से लगा लेता हूँ....उसके बाद में उसे बाहर जाने को कहता हूँ और बाथरूम में घुस जाता हूँ....




नीरा का इस तरह मेरा ख्याल रखना मुझे काफ़ी अच्छा लग रहा था....में जल्दी जल्दी फ्रेश हो कर बाहर निकल कर आ गया....बाहर सभी हॉल में बैठ कर मेरा वेट कर रहे थे नाश्ते के लिए....








कोमल--भैया क्या बात है आज कल कॉलेज की खूब छुट्टियाँ मार रहे हो आप....








में--क्यो तेरा भी स्कूल से छुट्टी मारने का मन कर रहा है क्या....






कोमल--स्कूल से छुट्टी मारने का तो नही लेकिन कहीं घूमने जाने का ज़रूर मन कर रहा है.....








में--में एक बार ये काम निपटा लूँ उसके बाद नेक्स्ट वीक हम 4 दिनो के लिए कहीं बाहर चलेंगे....






कोमल--पक्का ना भैया.....






दिखसा--अब उनसे क्या लिख कर लेगी....चुप चाप खाना खा और स्कूल जाने की तैयारी कर....








मम्मी--अरे दीक्षा बेटा बोलने दे उसे वो अपने भाई को ही बोल रही है कोई दूसरा बाहर वाला नही है....








कोमल--बड़ी मम्मी दीदी हमेशा मुझे डाँटती रहती है...






मम्मी--क्या बात है दीक्षा कुछ दिनो से तेरा बर्ताव क्यो बदला हुआ है....








दीक्षा--कुछ नही बड़ी मम्मी.. मम्मी पापा ने गाँव जा कर एक बार भी हमसे फोन करके बात नही करी....ऐसा लग रहा है जैसे एक बोझ था उनके सीने पर जिसे वो इस घर में छोड़ कर चले गये है....ये कहते कहते दीक्षा की आँखो में आँसू आ गये...और मम्मी ने वहाँ से उठ कर दीक्षा के माथे को अपने सीने में दबा लिया....








मम्मी--ऐसा नही बोलते दीक्षा ...तुम उनके लिए बोझ नही हो....वो बस तुम्हारी पढ़ाई में डिस्टर्ब ना हो इसलिए तुम्हे फोन नही कर रहे होंगे....तू कॉलेज से आजा उसके बाद तुम दोनो बहनो के साथ तेरे माँ बाप की मिल कर क्लास लगाएँगे....






उसके बाद वो सब कार में बैठ कर अपने अपने स्कूल कॉलेज की तरफ रवाना हो गये....






और में वही बैठा बैठा अख़बार पढ़ने लग गया....इसी तरह टाइम पास करते करते 10 बज गये तभी मेरे पास राजेश का फोन आ गया....






रहेश--जय रेडी हो गये ना....








में--हाँ राजेश भाई में बस आपके फोन का ही वेट कर रहा था....बोलिए कहाँ मिलेंगे आप...में अपनी कार लेकर वही आ जाता हूँ....






राजेश--ठीक है तुम मुझे ऑफीस के बाहर से ही पिक कर लो 11.15 की फ्लाइट है ज़्यादा देर मत करना....






में--में बस निकल ही रहा हूँ....10.30 आपके पास पहुँच जाउन्गा....






राजेश--ठीक है आ जाओ अब में फोन रखता हूँ....








उसके बाद में फोन अपनी जीन्स में डालकर एक छोटे से ट्रॅवेल बेग में कुछ ज़रूरी सामान भर लेता हूँ....और मम्मी से कहता हूँ जुगल किशोर अंकल की दुकान से कोई आएगा उन्हे वो बॉक्स दे देना....






मम्मी--ठीक है में वो दे दूँगी लेकिन तेरे दिमाग़ में चल क्या रहा है बताएगा मुझे....






में--बहुत जल्दी इस घर में खुशिया आने वाली है....बस मुझे थोड़ा वक़्त और दे दो....उसके बाद में सब कुछ ठीक कर दूँगा....






मम्मी--ठीक है जा जहाँ जाना है....लेकिन अपना ख्याल रखना....






में उसके बाद वहाँ से निकल कर सीधा राजेश के ऑफीस की तरफ बढ़ जाता हूँ वहाँ मुझे राजेश बाहर ही नज़र आजाता है....








उसके बाद हम तेज़ी से एरपोर्ट की तरफ बढ़ जाते है....




हम लोग वाराणसी एरपोर्ट पहुँच गये थे...वहाँ से हमे एक कार लेकर 2 घंटे के सफ़र पर निकलना था....मैने शमा को फोन करके यहाँ पहुँचने के बारे में बता दिया....उसकी आवाज़ से घबराहट काफ़ी सॉफ दिखाई पड़ रही थी....




शमा से बात करने के बाद हम लोग एक पोलीस हेडक्वॉर्टर में पहुँचे जहाँ राजेश ने कुछ मालूमात करी...






राजेश--जय भाई मामला बड़ा गंभीर है....यहाँ कुछ धर्म के ठेकेदार है जो वेश्याव्रती को सही मानते है....और ये लोग पोलिटिकली भी काफ़ी साउंड है....हमे कुछ और ही करना होगा....






में--क्या करना होगा राजेश भाई...






राजेश--तुम्हे शमा को यहाँ से खरीद कर ही ले जाना होगा....अगर में यहाँ पुलिस के साथ रेड डालता हूँ उसमें किसी को चोट भी पहुँच सकती है....और दूसरी बात ये काम बिना मीडीया के पासिबल भी नही है....और अगर मीडीया इस काम में एंवोल्व हो गयी तो तुम खुद समझ सकते हो तुम्हारे परिवार की कितनी बदनामी होगी....








में--बात तो सही है राजेश भाई....मेरे दिमाग़ में एक प्लान है अगर आप सुनना चाहे तो....








राजेश--अगर वासत्व में कोई सेफ प्लान है तो में ज़रूर सुनना चाहूँगा....








में--हमारा सब से पहला मकसद शमा को यहाँ से कोई भी कीमत देकर निकालना है....हम लोगो के निकलने के बाद अगर आप....यहाँ रेड कर दे तो शमा भी बच जाएगी और काफ़ी सारी लड़कियो की जिंदगी भी बच जाएगी....






राजेश--मेरे दिमाग़ में भी यही चल रहा है जय....






रेड के टाइम तुम्हारे दिए हुए पैसे भी बरामद हो जाएँगे....लेकिन रेड से पहले में तुम्हारे साथ उस कोठे पर नही जा सकता....








में--हम लोग जैसे ही वहाँ से निकलेंगे आपको इनफॉर्म कर देंगे आप हमारे वहाँ से निकलते ही कोठे पर रेड कर देना....








राजेश--ठीक है जय अभी....7 बज रहे है और वहाँ का महॉल भी रंगीन हो रखा होगा....मेरे ख्याल से तुम्हे वहाँ एक बार जाना चाहिए....






उसके बाद में राजेश से विदा लेकर कोठे की तरफ बढ़ जाता हूँ....




उस गली में एक अलग सी खुश्बू एक अलग सी मादकता का अहसास मुझे उस गली में घुसते ही हो गया....सड़क पर काफ़ी चहल पहल थी....लड़किया बाहर खड़ी हो कर ग्राहको का वेट कर रही थी....कुछ लड़कियो ने मुझे भी घेर लिया लेकिन मैने उनसे ये कह कर पीछा छुड़ाया कि में यहाँ किसी और काम से आया हूँ....और उसके बाद मैने उनसे ही शमा वाला अड्रेस भी पूछ ही लिया....






में सीधा चलता हुआ एक पतली सी गली में घुस गया....उसके बाद कुछ सीढ़िया चढ़कर एक हॉल में पहुँच गया....वाहन काफ़ी ज़्यादा सजावट करी गयी थी....खूबसूरत झामर...और कालीन उस हॉल की शोभा बढ़ा रहे थे....वहाँ साइड में कुछ गद्दे और मसंद भी रखे हुए थे....जो शाआद मेहमानो के बैठने के लिए रखे हुए थे....एक साइड में कुछ वध्य यंत्र भी रखे हुए थे तबला सारंगी सहनाई....




मेरे दिल की धड़कने मेरे पसलियो पर लगातार हथौड़े मारे जा रही थी...मेरे माथे पर घबराहट की वजह से पसीने की कुछ बूंदे भी आ गयी थी....तभी एक हाथ मुझे मेरे कंधे पर महसूस हुआ....




में हड़बड़ा कर पीछे देखता हूँ तो वहाँ एक सुंदर लड़की घाघरा चोली में खड़ी हुई मुझे देखे जा रही थी....






लड़की--क्या हुआ बाबूजी किसे ढूँढ रहे है आप यहाँ....इस कोठे की शान ही ऐसी है कि कोई भी यहाँ बेचैन हो जाता है....क्या में आपकी मदद कर सकती हूँ....








में--क्या कामली बाई का कोठा यही है....






लड़की--आप बिल्कुल सही जगह आए है बाबूजी...आप इस वक़्त कामली बाई के कोठे पर ही खड़े है.....








में--मुझे कामली बाई से मिलना था....किसी बारे में उनसे बात करनी थी....






लड़की--आप मुझे बता दीजिए आपको उन से क्या काम है....में आपका संदेशा उन तक पहुँचा दूँगी.....








में--मैने सुना है यहाँ नथ उतरने की रसम होने वाली है....में उसी रसम में बोली लगाने के लिए आया हूँ....






लड़की--बाबूजी उस रसम में तो अभी काफ़ी वक़्त है.....लेकिन फिर भी आप का संदेश में कामली बाई तक पहुँचा देती हूँ.....आप मेरे साथ आइए में आपको मेहमानो के कमरे में ले चलती हूँ...उसके बाद में कामली बाई को आपके बारे मे बता दूँगी.....






उसके बाद वो.मुझे एक खूबसूरत रूम में ले आती है जहा चार कुर्सिया और एक एक शानदार लकड़ी की टेबल रखी हुई थी....एक छोटा सा मिनी बार भी उस कमरे में बना हुआ था...






में वहाँ एक कुर्सी पर शालीनता के साथ जा बैठा....कुछ देर इंतजार करने के बाद वो लड़की फिर से आ गई और वहाँ बने मिनी बार की तरफ बढ़ गयी....








लड़की--बाबूजी आप क्या लेना पसंद करेंगे...






में--जो तुम्हे पसंद हो वो ले आओ....लेकिन कामली बाई ने क्या कहा....








लड़की--कामली बाई बस कुछ ही देर में आपसे मिलने के लिए आरहि है....जब तक आप खुद को शराब से तरोताज़ा कर लीजिए....






में--क्या में तुम्हारा नाम जान सकता हूँ....








लड़की--नज़्म....नज़्म नाम है मेरा बाबूजी....








में--तुम्हे यहाँ कितना समय हो गया नज़्म....








नज़्म--मेरा जनम यही हुआ है.....








में--क्या तुम्हारी भी नाथ उतराई.....








नज़्म--नही बाबूजी अभी उस में वक़्त है....अगले साल मेरा नंबर है....अभी में बस मेहमानो की सेवा करती हूँ..,.और नाचने गाने का अभ्यास करती हूँ.....








में--क्या तुमने पढ़ाई नही करी नज़्म....








नज़्म--जब से होश संभाला मेरे पैरो में घुंघरू पड़ गये...और पढ़ाई करके कौनसा मुझे कही नोकरि करनी थी....मैने जो भी सीखा इसी कोठे की चारदीवारी के भीतर ही सीखा....






तभी दरवाजा खुलने की आवाज़ होती है....और 50 - 55 साल की खूबसूरत औरत मेरे सामने बड़ी अदा से झुक का सलाम करती है..,.में भी तुरंत अपनी जगह से खड़ा हो जाता हूँ....वो कामली बाई थी....








कामली--लगता है आप पहली बार किसी कोठे की शान बढ़ाने निकले है घर से....








में--आपने ठीक पहचाना.....में पहली बार ही किसी कोठे पर आया हूँ....और पहली बार में ही निराश होकर नही जाना चाहता.....








कामली--अरे जनाब....यहाँ तो लोग अपनी निराशा भगाने के लिए आते है....में पहला शक्श देख रही हूँ जो यहाँ से निराश हो कर जाने की बात कर रहा है....






में--शायद मुझे यहाँ कुछ दिन बाद आना चाहिए था....लेकिन कुछ दिनो बाद में हमेशा के लिए भारत छोड़ कर जा रहा हूँ....में एक शादी शुदा मर्द हूँ....लेकिन मेरी बीवी माँ नही बन पा रही है....उसके कहने पर ही में आपके यहाँ से लड़की खरीदने आया हूँ....








कामली--माँ ना बन पाने का दर्द एक लड़की से सब कुछ करवा देता है....क्या में जान सकती हूँ आप की पत्नी माँ क्यो नही बन सकती.....








में--मेरी पत्नी की बच्चेदानी कमजोर है....अगर हम बच्चा करने की कोशिश भी करेंगे तो उसकी जान को ख्तरा भी हो सकता है....इसीलिए में आपके पास आया हूँ....,








कामली--क्या आपकी पत्नी एक सोतन बर्दास्त कर लेगी....






में--जैसा कि आपने बोला एक लड़की माँ बनने के लिए कुछ भी कर जाती है....शायद इसीलिए वो ये सब बर्दाश्त करने के लिए तैयार है....








कामली--लेकिन जनाब रस्म होने मे अभी वक़्त है...और वक़्त से पहले.....आपको कैसे में लड़की दे सकती हूँ.....






में--तो इसका मतलब जो कभी नही हुआ वो आज होगा....








कामली--आपका मतलब नही समझी में....








में अपना बना हुआ पेग एक ही साँस में ख़तम करता हूँ और वहाँ से उठ कर बोलता हूँ...








में--आज पहली बार आपके इस कोठे से कोई निराश होकर जा रहा है....






कामली ने तुरंत मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे बिठाते हुए बोली....









कामली--जनाब ये कोठा 300 साल पुराना है....आपके यहाँ से निराश होकर जाते हे....इसके 300 साल से बने हुए दबदबे पर बट्टा लग जाएगा.....मुझे थोड़ा सोचने का समय दीजिए....तब तक आप कुछ और जाम नोश फरमाइए....







उसके बाद कामली वहाँ से उठ कर चली जाती है....और तब तक नज़्म मेरे लिए एक जाम और भर देती है....









नज़्म-- क्या आपकी पत्नी बहुत खूबसूरत है......









में--वो इतनी खूबसूरत है कि चाँदनी भी शर्मा जाए....वो मेरी जान है....









नज़्म--फिर भी आप एक बच्चे के लिए यहाँ से लड़की ले जा रहे है....









में--बच्चा पैदा करने की ज़िद्द उसी की है नज़्म....में तो बस उसका दर्द कम करना चाहता हुन्न.....







नज़्म--सच में आप एक शानदार मर्द के साथ एक शानदार इंसान भी है वरना कौन अपनी पत्नी को खुश करने के लिए एक कोठे से लड़की खरीद कर ले जाता है....आप चाहते तो दूसरी किसी लड़की से शादी भी कर सकते थे...लेकिन ऐसा करना आपका आपकी पत्नी के लिए धोखा होता...मैने यहाँ जिस्मो को नोचने वाले गिद्ध देखे है....लेकिन एक देवता पहली बार देख रही हूँ....







कुछ दे की शांति के बाद कामली फिर से अंदर आजाती है....









कामली--जनाब आप यहाँ से निराश हो कर नही लौटेंगे....बल्कि खुशी खुशी अपने साथ यहाँ की कोई भी लड़की ले जा सकते है.....लेकिन कीमत देने में कोई परेशानी तो नही है ना...,







में--कीमत आप जो चाहे....लेकिन पसंद मेरी अपनी होगी....आप किसी को भी पसंद करने की ज़बरदस्ती मेरे साथ नही कर सकती है...,









कामली--जनाब अगर आप मुँह माँगा पैसा देंगे तो बगैर आपकी पसंद के ऐसे कैसे हम आप के गले से कुछ भी बाँध देंगे....







उसके बाद कामली नज़्म को बाहर भेज देती है और एक एक करके कुछ लड़कियो को अंदर भेजने को कहती है....सब से पहली ही लड़की ग़ज़ब की खूबसूरत उसका नाम सुमन था....









कामली--ये है सुमन...प्यार से हम इसे सुम्मी कहते है.....खूबसूरती के साथ साथ ये गाना गाने में भी माहरी है....





लेकिन में उस लड़की की तरफ एक हल्की सी नज़र ही उठा कर देखता हूँ और अपना जाम पीने लग जाता हूँ....शायड कामली समझ जाती है कि वो मुझे पसंद नही आई है....





और इसके बाद तकरीबन 10 लड़कियाँ और... एक के बाद एक आकर चली जाती है लेकिन में किसी की तरफ़ ज़्यादा तवज्जो नही देता.....







कामली--जनाब आप लड़की खरीदने निकले है या कोहिनूर....







में--कामली बाई में हीरो का खोट एक नज़र में पहचान लेता हूँ....वो चाहे कितना भी चमक ले.... मेरी नज़र से बच नही सकते...अगर आप के पास कुछ और है तो दिखा दो वरना में चला....में अपने साथ लाए हुए बेग में से 500 रुपये की एक गॅडी नज़्म को बुला कर दे देता हूँ....और उठ कर जाने लगता हूँ....







कामली--जनाब आप नाराज़ मत होइए....में तो बस आपको परख रही थी....लेकिन आप तो बिल्कुल पारखी नज़र के मालिक निकले....आगे जो लड़की आने वाली है उसको दिखाने से पहले मेरी एक शर्त है....







में--बोलिए क्या शर्त है आपकी....









कामली--में देखना चाहूँगी आपकी पत्नी कितनी खूबसूरत है....अगली लड़की तभी आपके सामने आएगी जब में तुम्हारी पत्नी और मेरी लड़की की सुंदरता का मिलान कर लूँ....अगर किसी भी तरह आपकी पत्नी मेरी लड़की से कम निकलती है तो तब आप यहाँ से तशरीफ़ ले जा सकते है....क्योकि में वो लड़की ऐसे ही किसी को नही दे दूँगी....









में--मुझे आपकी ये शर्त मंजूर है...लेकिन मेरी भी एक शर्त है....अगर मुझे वो लड़की पसंद आजाती है तो उसके जन्म से लेकर अभी तक का सारा हिसाब किताब चाहिए....वो कहाँ पैदा हुई कैसे आपसे मिली ये सब कुछ....







कामली--लेकिन ये सब जान कर आप क्या करेंगे....आपको लड़की चाहिए आप लड़की ले जाओ बस....







में--में एक परिवार वाला हूँ कामली बाई....मुझे पता होना चाहिए जिसे में अपने साथ ले जा रहा हूँ वो किसी इंसान की पैदाइश है या यहाँ की गंदी नाली की..,.







कामली--ठीक है जनाब....जैसे आपकी मर्ज़ी....क्या आपके पास आपकी पत्नी की कोई तस्वीर है....









में अपने मोबाइल में से नीरा की एक तस्वीर कामली को दिखा देता हूँ.....







कामली--हे मेरे श्याम....इतना खूबसूरत चेहरा....ये तो खुद एक खूबसूरती की देवी है...एक देवी की तुलना दूसरी देवी से करना मेरे बस का नही है....





नज़्म.....शमा को अंदर भेजो....







शमा जैसे ही अंदर आती है में अपनी कुर्सी से उठ कर खड़ा हो जाता हूँ....शमा ने अभी भी अपने होंठो तक अपना घूँघट कर रखा था....एक कसा हुआ कीमती बेस उसने पहना हुआ था उसकी नेट की चुनरी में से उसकी नाभि सूर्य की तरह उदित होती हुई नज़र आरहि थी....







में--तुमसे मिलकर नीरा बहुत खुश होगी....तुम बिल्कुल उसी की तरह सुंदर हो तुम दोनो की सुंदरता का कोई पैमाना नही है.....





कामली बाई मुझे ये लड़की पसंद है.,...







कामली--अरे नज़्म जल्दी से शमा का मुँह मीठा करा और बाकी सारी लड़कियो का भी....और शमा तू इन जनाब का मुँह मीठा कर दे अब से तुझे इन्ही के साथ रहना है....उसके बाद नज़्म एक मिठाई का डिब्बा ले आती है और शमा के हाथो में पकड़ा देती है....शमा धीरे धीरे चलते हुए अपनी नज़ारे नीचे झुकाए मेरे मुँह से वो मिठाई का दुकड़ा लगा देती है....आधा टुकड़ा में खुद खाता हूँ और आधा में शमा को खिला देता हूँ....उसके बाद बाकी सारी लड़किया हँसती हुई शमा को कमरे से बाहर ले जाती है....







कामली--सही में आप एक ज़ोहरी की नज़र रखते है....शमा घूँघट में थी फिर भी आपने उसकी सुंदरता को पहचान लिया....


में-- कामली बाई असली सुंदरता हमेशा छुपि हुई रहती है....एक हीरा भी अपनी सुंदरता समेटे हुए धरती की गहराइयो में रहता है....उसी तरह ये सुंदरता भी आपके यहाँ ही दबी हुई थी....में शमा को आज ही लेकर जाउन्गा अपने घर के लिए....







कामली--अरे ....अरे...जनाब थोड़ा सबर...





में--सबर....अब क्या बाकी रह गया है....









कामली--जनाब नथ उतराई की रसम आपको यही मनानी पड़ेगी....इसी कोठे मे....









में--मतलब कुछ समझ में नही आया ज़रा खुल कर बताइए....









कामली--जनाब इस कच्ची कली को फूल आपको इसी कोठे पर बनाना होगा...









में--लेकिन ये पासिबल नही है....ये तो मेरी पत्नी के लिए मेरी तरफ से धोका हुआ....अगर मुझे किसी के साथ रात ही गुजारनी होती तो मुझे किसी लड़की को खरीदने की ज़रूरत नही थी....









कामली--जनाब आप बुरा मत मानिए ये हमारी परंपरा है जब भी यहाँ की लड़की की नथ उतरती है वो इसी कोठे पर उतारी जाती है....और सबूत के तौर पर मिलन से निकले खून से सनी हुई चादर को. पूरे कोठे का चक्कर लगवाया जाता है.....







में--ये आपने मेरे लिए दुविधा वाला काम पैदा कर दिया....ये सब में अपनी पत्नी के साथ मिलकर करना चाहता था....लेकिन माफ़ कीजिए में उसके बिना ऐसा कुछ भी नही कर सकता....अब मुझे जाना होगा....







कामली--क्या जनाब आप बार बार नाराज़ होकर खड़े हो जाते है....अगर आप अपनी पत्नी को यहाँ बुलाना चाहे तो बुला सकते है....वैसे भी आप तीनो आगे से एक ही कमरे में रहोगे....तो इसमें दुविधा वाली बात कौनसी है....







में--ठीक है कामली बाई....में अभी होटेल जा रहा हूँ....आप मुझे शमा की कीमत बता दीजिए....ताकि कल सुबह आपको आपकी अमानत दे सकूँ....







कामली--आपने क्या कीमत लगाई है शमा की....









में-मेरे लिए ये अनमोल है....मैं इसकी कीमत कभी नही लगा सकता....









कामली--15 करोड़....









में--सुबह कॅश मिल जाएगा....









कामली--जनाब आप सिर्फ़ पैसो के ही धनी नही है दिल के भी धनी है....





शमा मेरे लिए भी अनमोल है....लेकिन वो आपके साए में रहेगी तो खुशिया उसके कदम चूमेंगी....आप बस 15 लाख रुपये दे देना....15 करोड़ मेने बस आपको परखने के लिए कहा था....अब कल आप अपनी पत्नी को लेकर आ जाए और बंद कमरे के अंदर जो करना चाहे कर लीजिए...बस ये रस्म पूरी होनी चाहिए......







उसके बाद में वहाँ से निकल कर बाहर आ गया और सबसे पहले राजेश को आज का प्लान कँसिल करने की सूचना दे दी और उस से होटेल में मिलने को कह दिया.....





होटेल पहुँचने से पहले में गंगा नदी के एक घाट पर पहुँच गया....कितना मनौरम दृश्य वहाँ फैला हुआ था....गंगा में टिमटिमाते हुए दीपक और मंदिर की घंटियो की आवाज़ मे एक अजब सा सुकून मुझे मिल रहा था....कहते है इस नदी मे नहाने से सारे पाप धूल जाते है...लेकिन इंसान इतने पाप करता ही क्यो है जो गंगा जैसी निर्मल नदी में उसे अपने पाप धोने पड़े....





मैने वही बैठे बैठे नीरा के मोबाइल पर कॉल लगा दिया....







नीरा--जान कहाँ हो आप... आपको देखने का मन कर रहा है....मुझे ऐसे छोड़ कर मत जाया कीजिए....









में--शादी करेगी मुझ से.....???









नीरा--क्या कहा.....????एक बार फिर से कहना....







में--नीरा तुम अभी फ्लाइट पकड़ लो वाराणसी एरपोर्ट के लिए....कल सुबह हम दोनो की शादी है.....









नीरा---लेकिन इतना जल्दी.....आप ही तो कहते थे कि कॉलेज ख़तम होने के बाद शादी करूँगा....







में--मेरे कहने से कुछ नही होता नीरा ये सब किस्मत का खेल है.....मुझे तेरी ज़रूरत है यहाँ....एक ख़ास मकसद पूरा करने आया हूँ में यहाँ....







नीरा--में अभी निकल जाती हूँ वाराणसी के लिए तो सुबह 3 बजे तक पहुँच जाउन्गी....



लेकिन घर वालो को क्या बोलूं कि कहाँ जेया रही हूँ.....









में--मम्मी को बोल देना कि मैने बुलाया है....वो तुझे रोकेंगी नही....वो जानती है में जो भी करूँगा सही करूँगा.....









नीरा--ठीक है आप परेशान मत होना में आ रही हूँ....आप मुझे एरपोर्ट लेने आजना.....







में--नीरा भाभी की कुछ हॅवी साड़ी ले आना अपने साथ....मम्मी को बोल देना वो तुझे दिलवा देंगी भाभी से.....अब तू खाना खा कर निकलने की तायारी कर और फ्लाइट में बैठने से पहले मुझे कॉल ज़रूर कर देना.....









नीरा--ठीक है में सब कर लूँगी....अब में फोन रख रही हूँ....जल्दी हे आपके सामने होउंगी में अब....







नीरा--ठीक है आप परेशान मत होना में आ रही हूँ....आप मुझे एरपोर्ट लेने आजना.....



में--नीरा भाभी की कुछ हॅवी साड़ी ले आना अपने साथ....मम्मी को बोल देना वो तुझे दिलवा देंगी भाभी से.....अब तू खाना खा कर निकलने की तायारी कर और फ्लाइट में बैठने से पहले मुझे कॉल ज़रूर कर देना.....




नीरा--ठीक है में सब कर लूँगी....अब में फोन रख रही हूँ....जल्दी हे आपके सामने होउंगी में अब....




उसके बाद नीरा फोन काट देती है....और तभी अचानक मेरा फोन बजने लगता है.....वो कॉल डॉक्टर आलोक का था....



डॉक्टर--भाई कहाँ हो....यार माफ़ करना दिन में रूही आई थी लेकिन में किसी कारण से कहीं गया हुआ था तो उसे रिपोर्ट नही दे पाया था...4 बजे मैने तुम्हे फोन भी किया था लेकिन तुम्हारा फोन बंद आरहा था.....




में--कोई बात नही सर....में उस समय फ्लाइट में था अगर रूही ने भी मुझे कॉल किया होगा तो उसे भी मेरा नंबर बंद मिला होगा....





डॉक्टर--अच्छा सुनो वो रिपोर्ट्स रेडी हो गयी है....उस में सब कुछ ठीक है.....घर के मुखिया से ही सारे बच्चे है.... और जो नया वाला सॅंपल देकर गये थे वो तुम्हारे दोस्त की सग़ी बहन है....मेरे ख्याल से अब कोई कन्फ्यूषन नही रहा होगा तुम्हारे मन में.....




में--सर आपने एक बड़ा बोझ मेरे सीने से उतार दिया है....



डॉक्टर--अब वादे के मुताबिक तुम मुझे बताओ सच क्या है.....



में--सर ये काफ़ी लंबी कहानी है....में एक बार घर आ जाऊ उसके बाद आपको सारी बाते बता दूँगा.....



उसके बाद डॉक्टर आलोक फोन काट देते है और....में गंगा का जल हाथ में लेकर उसे पी कर अपने सिर पर छिड़क लेता हूँ....



जो काम में करने जा रहा था वो काम गंगा मेँया के आशीरावाद के बिना पूरा नही हो सकता था....

एक पाप करने जा रहा था में.... जो समाज के नियमो के खिलाफ था....एक पाप करने जा रहा था में....जिसे पापी भी इसी समाज ने बनाया है..... एक ऐसा पाप जो सब कुछ बदल के रख देगा मेरे जीवन में.....


में वहाँ से उठ कर अपनी होटेल की तरफ चल पड़ा, अपने दिल में चल रहे तूफान को लेकर....होटेल में अभी राजेश नही आया था....मैने अपने लिए कुछ पीने का सामान मंगवा लिया और थोड़ी देर मे मेरे सामने एक शराब की बोतल और कुछ खाने का सामान पड़ा था....



मेने जल्दी जल्दी अपने तीन पेग ख़तम करे और एक फोन लगा दिया.....




में--सुहानी कैसी हो....??




सुहानी--क्या बात है सर आज काफ़ी दिनो बाद याद किया....सब ठीक तो है ना




में--तुम तो जानती हो सुहानी....जब में हर तरफ से मुसीबतो से घिर जाता हूँ....तब तुम्हारी याद आ ही जाती है.....



सुहानी--क्या हुआ सर....कौनसी मुसीबतो की बात कर रहे हो आप....




में--सुहानी...समझ में नही आरहा में ये बात तुम से कैसे कहूँ....



सुहानी--जहाँ तक में आपको समझ पाई हूँ सर....आपके फ़ैसले आप दिल से लेते हो....लेकिन कभी कभी दिमाग़ का इस्तेमाल भी करना ज़रूरी होता है...अगर आप किसी ऐसी उलझन में हो जो आप मुझे बता नही सकते....इसका मतलब आपने अपने दिमाग़ को यूज़ लेना शुरू कर दिया है....आप ने जो करने की सोचा है वो बिल्कुल ठीक ही होगा सर....क्योकि कभी कभी दिल और दिमाग़ दोनो का ही सही सेमाल करना ज़रूरी होता है....आपने जो भी फ़ैसला लिया है आप अपना ध्यान पूरी तरह से उसी पर रखे....क्या होगा और क्या नही उसके परिणामो के बारे में मत सोचिए....



में--सुहानी में बस यही जानना चाहता था जो में कर रहा हूँ वो सही भी है या नही....


सुहानी--सर में जानती हूँ आप किसी का बुरा नही कर सकते....लेकिन अगर आप किसी का अच्छा करने की कोशिश कर रहे है तो फिर सोचना कैसा.....आप जो भी करोगे वो अच्छा ही होगा....सोचना बंद करो और अपने काम को अंजाम तक पहुचाओ....




में--एक बार फिर तुमने मेरे भटकते हुए दिल को सही रास्ता दिखा दिया है....में जल्दी ही दुबारा अपने परिवार के साथ तुमसे मिलने आउन्गा....



सुहानी--युवर मोस्ट वेलकम सर....आपसे मिलने के लिए में भी बेकरार हूँ....जल्दी आइए....



और उसके बाद सुहानी फोन काट देती है और में अपना पेग ख़तम कर के एक और पेग बना लेता हूँ.....


मेने सारी सोच अपने दिमाग़ से निकाल दी और ऐसे ही टीवी देखने लग गया....तभी मेरा मोबाइल एक बार फिर से बजने लग गया.....ये कॉल राजेश का था.....




राजेश--जय क्या हो रहा है....




में--राजेश भाई बस आप ही का वेट कर रहा था....कब तक आओगे आप..??




राजेश--दरअसल मुझे टाइम लग जाएगा ऑफीस में ही....रेड के लिए टीम रेडी कर रहा हूँ...अभी तक ये किसी को नही बताया गया है कि ये टीम किस लिए है..,..सिर्फ़ यहाँ के कमिशनर को पता है. इस बारे में....




में--कल रात को आपको रेड करनी है वहाँ पर...और मेरी बहन नीरा आ रही है यहाँ....

इसलिए में अब आपसे दुबारा यहाँ नही मिल पाउन्गा.....




राजेश--उसे क्यो बुला लिया आपने इस काम के बीच में.....



में--उसका होना काफ़ी ज़रूरी है राजेश भाई....ये में आपको समझा नही पाउन्गा लेकिन उसके बिना में शमा को यहाँ से निकाल कर नही ले जा पाउन्गा....




राजेश--ठीक है जय भाई जैसा आप सही समझे....में अब बनारस मे आपसे नही मिलूँगा....




में--ठीक है राजेश भाई अब सीधा उदयपुर में ही मिलना होगा.....


उसके बाद में वो फोन डिसकनेक्ट कर देता हूँ और फिर से टीवी देखने लग जाता हूँ....होटेल मे मैने नीरा के आने का बता दिया था....इसलिए नीरा के रुकने में कोई परेशानी नही थी....



तभी......................


तभी एक बार फिर से मेरा फोन घनघनाने लग गया.....इस बार कॉल नीरा का था....




नीरा--जान में एरपोर्ट पहुँच गयी हूँ....आपने खाना खा लिया....




में--नही नीरा खाना नही खाया मैने अभी तक.....लेकिन तू तो कुछ खा कर निकली है ना....




नीरा--भूख तो नही थी लेकिन मम्मी ने ज़बरदस्ती खिला दिया....आप भी कुछ खा लो...



में--चल अच्छा किया....अब जल्दी से तू यहाँ मेरे पास आजा....खुद को काफ़ी अकेला महसूस कर रहा हूँ में आज.....




नीरा--आप चिंता मत करो...सब ठीक हो जाएगा.....मेरी फ्लाइट का टाइम हो गया है अब में फोन काट रही हूँ....यहाँ पहुँच कर आपको रिंग करती हूँ.....




फोन एक साइड में रखने के बाद एक बार फिर से में ख्यालो में डूब गया..और कब मुझे नींद ने अपने आगोश में ले लिया मुझे पता ही नही चला...,.




सपने मे मुझे फिर से वही साधु बाबा नज़र आने लगे....वो मुझ से कुछ कह रहे थे....





साधु--बेटा तूने बिल्कुल सही फ़ैसला लिया है.....वरना कब तक वो मासूम बच्ची भगवान के चर्नो में अपना सिर पटकती रहती....




में--बाबा ये फ़ैसला कैसे सही है.....एक बहन की कुर्बानी देकर दूसरी बहन को बचाना...,.ये कहाँ का इंसाफ़ है....




साधु--नीरा तुमसे प्यार करती है.....उसके लिए सारी दुनिया में तुम से बढ़ कर कुछ नही है....और कभी ना कभी तो ये होना ही था...ये मत सोचो कि तुम लोगो के प्यार का गवाह एक मामूली कोठा बनेगा....बस इतना सोचो कि उस कोठे में भी भगवान विराज्ते है....तुम जो कर रहे हो सही है....और जो आगे भी करोगे वो भी सही ही होगा....तुम्हे अभी काफ़ी लंबा रास्ता तैय करना है.....और ये कोठा तुम्हारी पहली मंज़ील है.....


अब उठ और अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़....उठ और जो जीते जी मर चुके है उन्हे फिर से जीवन दान दे....उठ अब और किसी बालक की भाती सोना बंद कर....समय तेरी प्रतीक्षा कर रहा है....उठ तेरा प्यार तुझे याद कर रहा है......



और इसीके साथ में हड़बड़ा के उठ जाता हूँ मेरा पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था.......में तुरंत अपने मोबाइल को उठाता हूँ और उस में समय देखने लगता हूँ....2.30 बज गये थे....में फटाफट उठा और फ्रेश होकर होटेल द्वारा मँगवाई गयी टेक्शी में बैठ कर एरपोर्ट की तरफ चल पड़ा.......


में एरपोर्ट पहुँच गया था.....मुझे नीरा वही इंतजार करती हुई मिल गयी बिल्कुल मासूम सी गुड़िया लग रही थी वो इस समय....मुझे देखते ही वो भागकर मेरे सीने से लग गयी....




नीरा--पता है कितना डर लगता है जब आप साथ में नही होते मेरे....




में--मेरे होते हुए तुझे कैसा डर चल अब होटेल चलते है....फिर बाकी की बाते वही करेंगे....




नीरा--मेरे माथे पर किस करते हुए.....आइ लव यू जान....


उसके बाद हम फिर से होटेल की तरफ बढ़ जाते है....


होटेल पहुँच कर में नीरा को फ्रेश होने के लिए कहता हूँ और एक बढ़िया साड़ी पहने ने के लिए कह देता हूँ.....



जब वो साड़ी पहन कर बाहर आजाति है तो में उसे बस देखता ही रह जाता हूँ....किसी परी से कम नही थी मेरी नीरा.....

वो मेरे सामने आकर खड़ी होगयि और में उसे अपलक निहारे जा रहा था....



नीरा--कहाँ खो गये....मुझे इस तरह देखना बंद करो शर्म आ रही है मुझे....




में--तुम्हारी खूबसूरती का कोई मुक़ाबला नही है नीरा....सच मे मैने कुछ अच्छे काम किए होंगे तभी एक पत्नी के रूप में तुम मुझे मिल रही हो.....




नीरा--अब बंद भी करो मेरी तारीफ़ करना....और मुझे जल्दी से बताओ कि क्या हुआ है जो इतना जल्दी सब कुछ कर रहे हो.....



में खुद का ध्यान नीरा की खूबसूरती से हटते हुए कहता हूँ....




में--नीरा हमारी एक बहन और भी है....में उसे ही बचाने यहाँ आया हूँ....



नीरा--क्या....??ये क्या कह रहे हो आप....एक बहन और....कहाँ है वो मुझे अभी उस से मिलना है....मेरी एक बहन और है और ये आप मुझे अब बता रहे हो....




में--नीरा में पहले खुद कन्फर्म करना चाहता था....लेकिन अब कन्फर्म हो गया है....कि शमा ही हमारी बहन है.....




नीरा--तो फिर हम अभी तक यहाँ क्यो रुके है चलो....चलके शमा को घर ले चलते है....




में--ये इतना आसान नही है नीरा....वो एक कोठे पर है....और उसको यहाँ से भगा के लेजाना काफ़ी मुश्किल है....




नीरा--तो आपने अब तक क्या सोचा है....में शमा से मिलने के लिए मरी जा रही हूँ...अब आप जल्दी उसके पास मुझे ले चलो....




में--शमा की मालकिन कामली बाई ने एक शर्त रखी है....कि शमा की नथ उतराई उसी के कोठे पर होगी....मुझे उस वक़्त कुछ समझ में नही आया इसलिए उसे मैने कह दिया ये सब कुछ मेरी पत्नी के सामने होगा....


नीरा--आपका मतलब ये है कि उस कमरे में हम तीन जने होंगे और कमरे के अंदर नथ उतरई शमा की नही बल्कि मेरी होगी......



में अपना सिर झुका कर नीरा को हाँ में जवाब दे देता हूँ.....




नीरा--मुझे कोई परेशानी नही है....अगर आपने सोच हे लिया है तो.....में आपसे इतना प्यार करती हूँ कि आप अगर मुझे किसी चौराहे पर भी नंगा होने को कहोगे तो में खुशी खुशी अपने प्यार की खुशी के लिए अपने सारे कपड़े वही उतार दूँगी....शमा तो फिर भी मेरी बहन है....



में--नीरा में जानता हूँ तू मुझ से कितना प्यार करती है....इसीलिए बिना सोचे समझे तुझे उस गंदे महॉल में ले जाने के लिए तैयार हुआ......


लेकिन अब सब ठीक है....मैने सब कुछ सोच लिया है....में तुझ से पहले शादी करूँगा.....और उसके बाद ही हम वहाँ चलेंगे....



सुबह 6 बज गये थे....हम लोगो को बाते करते करते....मैने होटेल वालो से एक कार का इंतज़ाम करने को कहा जिसे में खुद ही चलाने वाला था.....जब हम लोग अपने रूम में से निकलकर होटेल लॉबी में पहुँचे तो वहाँ मोजूद सभी लोगो की नज़रें बस नीरा पर ही टिकी हुई थी.....उसकी खूबसूरती के वार से तो वहाँ मोजूद औरते और लड़किया भी खुद को ठंडी साँस भरने से नही रोक पाई.....हम लोग सीधा गंगा नदी के किनारे बने एक मंदिर में पहुँच गये....रास्ते में एक सुनार की दुकान से हमने एक मंगल सूत्र भी खरीद लिया था और पुजारी को कुछ पैसे देकर वहाँ हमने पूरे धार्मिक रीति रिवाज से शादी कर ली.....नीरा गजब ढा रही थी ....


उसकी माँग में मेरे नाम का सिंदूर भरा हुआ था....और सीने पर लटकता . नीरा की खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था.....साक्षात रति का अवतार लग रही थी नीरा.....


हम दोनो का रिश्ता अब बदल चुका था....अब हमारे बीच भाई बहन के रिश्ते की जगह पति पत्नी के रिश्ते का मजबूत बंधन पड़ चुका था...


मंदिर से भगवान का आशीर्वाद लेकर हम वहाँ से वापस सीधा होटेल पहुँच गये....


रूम के अंदर पहुँचते ही मैने नीरा को कस कर अपनी बाहो मे भर लिया....



नीरा--अरे थोड़ा सब्र करो पहले जो काम करने आए है उस पर ध्यान दो....




में--नीरा के गालो पर हाथ फेरते हुए कहता हूँ....सही कहा नीरा तुमने....मुझे अभी बॅंक जाना है....वहाँ से कुछ पैसे भी निकलवाने है....




नीरा--ठीक है आप जाकर आओ तब तक में थोड़ा फ्रेश हो जाती हू....और शमा के यहाँ कब चलना है....




में--शमा के पास हमे 2 बजे तक पहुँचना है....अभी 10 बज रहे है....जब तक में बॅंक का काम निपटा लेता हूँ....




नीरा---ठीक है आप जाइए....में आपके आने का इंतजार करूँगी....




उसके बाद में वहाँ से निकल कर सीधा बॅंक पहुँचता हूँ....और बॅंक से पैसे निकलवाने के बाद.....में बाज़ार से कुछ फ्रूट्स और मिठाई खरीद लेता हूँ.....मुझे बाजार में घूमते हुए 12 बज चुके थे उसके बाद में वहाँ से निकल कर सीधा होटेल पहुँच जाता हूँ.,.,रूम मे नीरा मेरा इंतजार कर रही थी....जब उसने दरवाजा खोला वो कुछ इस तरह लग रही थी..


में उसकी तरफ लगातार देखे ही जेया रहा था....और उसके करीब जा कर मैने पहले उसके माथे को चूमा और फिर....उस की आँखो से थोड़ा काजल निकाल कर उसकी गरदन के पीछे एक काला टीका लगा दिया...




में--जिस जगह हम जा रहे है...वहाँ सब की नज़रे तुम पर ही होंगी....और में नही चाहता किसी की भी बुरी नज़र तुम पर पड़े.....



नीरा--इतना प्यार करते हो मुझ से....




में--हाँ मेरी जान......तेरे लिए में कुछ भी कर जाउन्गा....



नीरा--अब बातें बनाना बंद करो और जल्दी चलो में शमा को देखने के लिए बैचेन हो रही हूँ कब से....




में--नीरा शमा को यही पता है कि में अपनी वाइफ के साथ यहाँ आ रहा हूँ..,.अपने बारे में उसे कुछ नही पता........



नीरा--जब हम यहाँ से उसे ले जाएँगे तो उसे सब कुछ सच सच बता देंगे....और वैसे भी अब में आपकी पत्नी हूँ....इसलिए मुझे अब कोई डर नही है....



उसके बाद हम दोनो उसी कार में बैठकर गलियो में से होते हुए....उस कोठे के बाहर तक पहुँच गये....पूरा बाज़ार सज़ा हुआ था जैसे वहाँ कोई शादी का महॉल हो....


जब हम दोनो कार से उतरे तो हर किसी की निगाहे सिर्फ़ नीरा पर ही थी....में जल्दी जल्दी उस जगह से नीरा को उस कोठे में ले आया ....


वहाँ नज़्म पहले से ही खड़ी थी....उसके हाथो में आरती का सुंदर थाल था अंदर आते ही उसने हम दोनो की साथ में आरती उतारी....और मैने कुछ 500-500 के नोट उस थाली में रख दिए....



नज़्म--क्या किस्मत पाई है बाबूजी आपने....इतनी सुंदर बीवी हर किसी को नही मिलती....कभी किसी की बुरी नज़र ना लगे इनको....


और ये कह कर वो हम दोनो का रास्ता छोड़ देती है....कामली बाई भी हॉल में ही हमे मिल जाती है....सब से पहले कामली बाई नीरा की बालाएँ लेती है....और एक नींबू नीरा के उपर वार के नज़म को उसे चौराहे पर रख कर आने को कह देती है....



कामली--वाह जनाब इतनी खूबसूरती मैने आज तक नही देखी....अब तो आपके पास दो दो खूबसूरती की मिसाले हो गयी है....




नीरा--कामली जी अगर आप बुरा ना माने तो क्या में अब शमा से मिल सकती हूँ....




कामली--इस में बुरा मानने वाली बात कौनसी है....अब तो वैसे भी वो आप लोगो की हो चुकी है....जैसे चाहो वैसे मिलो....उसके बाद सुम्मी नीरा को एक रूम की तरफ ले जाती है वहाँ शमा बेसब्री से हमारा इंतजार कर रही होती है.


नीरा और सुम्मी के चले जाने के बाद....में और कामली बाई मिनी बार वाले रूम में चले जाते है....अंदर बैठते ही में उसे 15 लाख रुपये दे देता हूँ.....




कामली--जनाब क्या कमाल का रूप है आपकी पत्नी का....कोई बूढ़ा भी देख ले तो शेर बन जाए....




में--कामली बाई नीरा के लिए कहा गया हर बुरा शब्द....मेरे गुस्से को बढ़ा देता है...इसलिए आपसे गुज़ारिश है आप उसके लिए कुछ ग़लत ना बोले....




कामली--नही...नही....जनाब में तो तारीफ़ कर रही थी....में उस हुश्न की मल्लिका के लिए बुरा कैसे कह सकती हूँ.....

अब बताइए क्या लेंगे आप ठंडा या गर्म...



में--कुछ भी पिला दीजिए जो आपको पसंद हो....


उसके बाद कामली बाई....मेरे लिए एक चाँदी के ग्लास में शराब भर के ले आती है और पहला सीप मारने के बाद में उस से कहता हूँ.....



में--कामली बाई वादे के मुताबिक मैने आपको पैसे देकर अपना वादा पूरा कर दिया है....अब आपकी बारी है वादा पूरा करने की.....




कामली--पूछिए जनाब क्या पूछना चाहते है....अब शमा आपकी हो गयी है....और शमा के साथ जुड़ा हर राज़ भी....




में--शमा आपके कोठे पर कैसे पहुँची.... इसके माँ बाप कौन है....???




कामली--19 साल पहले मेरे पास दीनू इस बच्ची को लेकर आया था....बच्ची को देख कर लग रहा था कि कुछ दिन पहले ही ये पैदा हुई है.....पहले तो मैने उस हरामजादे को खूब पिटवाया अपने आदमियो से....इतनी मासूम बच्ची को अपनी माँ से जुदा करने के लिए....और जब उस से पुछा गया ऐसा उसने क्यो किया है तो उसने किसी का नाम लिया.....




में--किसका नाम लिया कामली बाई...याद करिए...



कामली--दीनू किसी मुंबई में रहने वाले प्रधान की बात कर रहा था....उसने इस बच्ची को ख़तम करने की सुपारी दी थी....लेकिन ज़्यादा पैसा कमाने के चक्कर में वो इसे मेरे पास बेचने के लिए ले आया.....




में अपने मन में ही प्रधान का नाम सुनकर चोन्के बिना नही रह सका....



में--क्या मुझे प्रधान या दीनू के बारे में कोई जानकारी मिल सकती है.....


कामली--जनाब जिस तरह से मैने अभी तक आपके बारे में नही पूछा वैसे ही मैने ना ज़्यादा प्रधान के बारे में पूछा और ना ही दीनू के बारे में.....लेकिन दीनू की पिटाई करवाने के बाद उसकी जेब में जो भी माल था वो सब निकाल लिया गया था....तकरीबन 20000 रुपये और कुछ कागज भी मिले थे उसकी जेबो मे से.....उन कागजो में उसका गाड़ी चलाने का लाइसेन्स भी था....




में--क्या में वो सब कागज देख सकता हूँ...



कामली--बेशक जनाब.....माना कि ये कागज मेरे किसी काम के नही थे लेकिन अमानत के तौर पर आज भी मैने संभाल कर रखे है...क्या पता वो अपने कागजात लेने वापस आता लेकिन 19 सालो में वो दुबारा कभी नही आया....में अभी वो कागजात ले कर आती हूँ....



में--मन मे ही सोचे जा रहा था....प्रधान और दीनू के बारे मे....इन दोनो का नाम मैं पहले भी कही सुन चुका था....लेकिन कहाँ सुना कुछ याद नही आ रहा था....लेकिन अगर कामली के पास दीनू का ड्राइविंग लाइसेन्स पड़ा है तो इसका मतल्ब जल्दी ही इस पहली से परदा हट जाएगा.....



तभी कामली भी वापस आचुकी थी...उसने वो कागज मेरे हाथ में पकड़ा दिए....




उन कागजो में कुछ हिसाब किताब लिखा था कुछ रसीद थी सामानों की और एक ड्राइविंग लाइसेन्स

में उस लाइसेन्स को उलट पुलट कर देखने लगता हूँ....दिनेश वर्मा....सोन ऑफ गोपाल लाल वर्मा

अथवा लाने नियर क्रिस्टल अपार्टमेंट सूरत गुजरात.....



मेरे पास दीनू का 19 साल पहले का पता आचुका था...



में--कामली बाई क्या में इसे अपने पास रख सकता हूँ....




कामली--ज़रूर जनाब....लेकिन मेरे मन में एक सवाल उठ रहा है....आप क्यो गढ़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश कर रहे है....




गढ़े मुर्दे नही में बिछड़े हुए कुछ अपनो को मिलाने की कोशिश कर रहा हूँ....कम से कम शमा जान तो पाएगी कि उसके माँ बाप कौन है....



कामली--जनाब आप सही कह रहे है....लेकिन ये कोठा है और यहाँ जो एक बार आजाता है उसे दुनिया इतनी आसानी से नही अपनाती है...



में--आपको कोई ऐतराज तो नही है अगर में शमा के माँ बाप को ढूँढने की कोशिश करूँ....




कामली--जनाब ऐतराज कैसा शमा की पूरी कीमत दी है आपने....आप जो चाहे वो करे लेकिन इस कोठे के कुछ उसूल है इन्हे आपको पूरा करना बाकी है....अब आप शमा की नथ उतराई की रसम जल्दी से जल्दी पूरा कर दीजिए....



में--कामली बाई आपसे एक चीज़ माँगूँ....




कामली--हुकम कीजिए जनाब....




में--जब हम लोग यहाँ से जाए....तो वो खून से सना हुआ कपड़ा आप मुझे वापस लौटा दीजिएगा....क्योकि में तंत्र मंत्र पर काफ़ी यकीन रखता हूँ और में नही चाहता कोई भी उस कपड़े का ग़लत यूज़ करे.....




कामली--जनाब यहाँ के रिवाज के अनुसार कोठे के चारो तरफ घुमा लेने के बाद वो कपड़ा हमारे किसी काम का नही होता वैसे तो हम उसे जला देते है लेकिन अगर आप उसे अपने साथ लेजाना चाहे तो ले जा सकते है.....


कामली--जनाब यहाँ के रिवाज के अनुसार कोठे के चारो तरफ घुमा लेने के बाद वो कपड़ा हमारे किसी काम का नही होता वैसे तो हम उसे जला देते है लेकिन अगर आप उसे अपने साथ लेजाना चाहे तो ले जा सकते है.....



अब में कामली की तरफ 2 लाख रुपये और बढ़ा देता हूँ और बड़ी अदा के साथ वो उन 2_2हज़ार के नोटो को अपने ब्लाउस की गहराईयो में दफ़न कर देती है....



कामली--अब उठिए जनाब.....वो दोनो आपकी राह देख रही होंगी....




और इसीके साथ में अपना जाम एक ही साँस में ख़तम करके नीरा और शमा के रूम की तरफ बढ़ जाता हूँ....रूम का दरवाजा खोलते ही में पलट कर जल्दी से उसे लॉक कर देता हूँ....


शमा और नीरा वहाँ मोजूद डबल बेड पर बैठी हुई एक दूसरे से बाते कर रही थी....


कमरे मे काफ़ी रोशनी थी बेड से थोड़ी ही दूरी पर लकड़ी का एक बाथ टब गर्म पानी से लबालब भरा हुआ था एक कमोड भी लगा हुआ था वही कौने में ही....यानी कि उस रूम का बाथरूम भी बिना चार दीवारी के था.....सिर्फ़ एक खिड़की पर परदा लगा हुआ था बाकी परदा रखने की कोई जगह उस कमरे में नही थी....


बेड पर बैठी हुई शमा और नीरा दोनो ही खूबसूरती मे बेमिसाल लग रही थी ऐसा लग रहा था दोनो ही के जिस्मों को भगवान ने बड़ी फ़ुर्सत में बनाया हो...दोनो की आँखे नाक बिल्कुल एक जैसे लग रहे थे....जैसे दोनो जुड़वा बहने हो....


में अब उन दोनो के पास बैठ गया उस रूम को अच्छे से देखने के बाद...




शमा--भैया अब कैसे होगा ये सब....भाभी को भी आपने यहाँ बुला लिया....कैसे सबूत दे पाएँगे हम नथ उतराई का....




नीरा--तुम चिंता मत करो शमा....सब कुछ हो जाएगा....तुम्हारी जगह आज में लूँगी इस नथ उतराई की रस्म मे....




शमा--लेकिन भाभी कैसे दे पाएँगी आप वो सबूत....आप तो कुँवारी नही है फिर कैसे होगा सब कुछ....




नीरा--किसने कहा में कुवारि नही हूँ....हम लोगो ने आज ही शादी करी है....सिर्फ़ तुझे यहाँ से निकालने के लिए....और आज पहली बार हम दोनो के जिस्म मिलेंगे....आत्मा तो कब की मिल चुकी है....




शमा--लेकिन यहाँ आप मेरे सामने सब कुछ कैसे कर पाएँगे....



में--शमा मेरी बहन मुझे माफ़ कर देना लेकिन ये सब तुम्हारे सामने ही होगा....



तभी दरवाजे पर दस्तक होती है और हम तीनो एक दूसरे की शकल देखने लग जाते है में शमा को अपनी गोद में खीच लेता हूँ शमा को अपनी गोद में बिठाने के बाद में नीरा से दरवाजा खोलने की कह देता हूँ.....


नीरा दरवाजा खोलती है और कामली बाई के साथ नज़्म एक बड़ी सी ट्रे में चाँदी के ग्लास कुछ खाने का सामान और एक बढ़िया स्कॉच की बोतल ले कर अंदर घुस जाती है....कामली बाई शमा को मेरी गोद में इस तरह बैठे देख कर हम दोनो की बालाए लेने लग जाती है...,




कामली--मुझे माफ़ करे जनाब शमा अभी बच्ची है और इसे ज़्यादा दर्द ना हो इसीलिए में ये शराब आप लोगो के लिए ले आई....अब आपको कोई तंग नही करेगा अब जब आप ये दरवाजा खोलेंगे....तभी ये दरवाजा खुलेगा,...

और ये कह कर वो दोनो बाहर चली जाती है....


कामली--मुझे माफ़ करे जनाब शमा अभी बच्ची है और इसे ज़्यादा दर्द ना हो इसीलिए में ये शराब आप लोगो के लिए ले आई....अब आपको कोई तंग नही करेगा अब जब आप ये दरवाजा खोलेंगे....तभी ये दरवाजा खुलेगा,...

और ये कह कर वो दोनो बाहर चली जाती है....



उनके जाते ही नीरा अच्छे से दरवाजा बंद कर देती है और में शमा को अपनी गोद मे से उठा देता हूँ...



शमा मेरी गोद से उठ कर जाम बनाने लग जाती है....और एक एक करके हम दोनो को दे देती है इतने में नीरा अपना जाम लेकर मेरी गोद मे आकर बैठ जाती है....हम दोनो एक दूसरे के हाथो से वो जाम पीने लगते है....शराब ख़तम होने के बाद में नीरा को कस कर अपनी बाहो में भर लेता हूँ....अचानक नीरा मेरी बाहो में से छूट कर मुझ से दूर हो जाती है लेकिन उसकी साड़ी का पल्लू मेरे हाथों में ही रह जाता है....


नीरा अपने खूबसूरत बदन को मुझ से छुपाने की कोशिश कर रही थी लेकिन एक शर्म से भरी हल्की सी मुस्कुराहट मुझे अपने पास बुलाने का संकेत दे रही थी में अपनी जगह से उठ कर नीरा को कस कर अपने सीने से लगा लेता हूँ..,


मेरे होंठ अब नीरा के होंठो का रस को चूसने में लगे थे....



अचानक नीरा मेरी बाहो मे ही पलट जाती है और में उसका ब्लाउस उसके कंधे से नीचे करके उसकी गर्दन की खुसबु सूंघने लग जाता हूँ..


खुद पर हुए इस तरह के हमले को नीरा सह नही पाती और वो मेरी बाहो मे ही तड़पने लग जाती है.....एक ख़ुसनूमा तड़प नीरा के रोम रोम मे से उठती खुश्बू से जाहिर हो रही थी....



ज़्यादा देर वो मेरा ऐसा करना बर्दाश्त नही कर पाती और मुझे बेड पर धक्का दे देती है....और बेड पर लेटते ही में अपनी शर्ट उतार देता हूँ.....मेरे इस तरह नंगे सीने को देख कर नीरा मुझ पर चढ़ बैठती है....और मेरे सीने को सहलाते हुए अपने होंठ मेरे मेरे होंठो से लगा लेती है.


नीरा--जान कितना तडपी हूँ में इस दिन के लिए....ना जाने कितना और इंतजार करना पड़ता मुझे....हमेशा अपनी नीरा को अपने दिल में बसा कर रखना....वरना में जी नही पाउन्गि एक पल भी.....



में उसके होंठो पर अपना हाथ रखते हुए कहता हूँ....




में--मरने की बात मत कर जान जी तो में भी नही पाउन्गा तेरे बिना....तेरी कसम जान दुनिया की कोई ताक़त अब हम दोनो को जुदा नही कर सकती....बस कभी मरने की बात मत करना.....तेरी कसम तेरी तरफ उठी हुई हर उंगली में जड़ से उखाड़ दूँगा....हमेशा मुझे ऐसे ही प्यार करती रहना....तेरी हर ज़िद तेरी हर बात....तेरा कहा गया हर शब्द....तेरी कसम.... में अपनी जान देकर भी पूरा करूँगा....




अब में नीरा को अपने नीचे ले चुका था और उसका ब्लाउस उसके बदन से अलग कर चुका था....एक नज़र मैने शमा पर डाली....वो ज़मीन पर हमारी तरफ पीठ करके बेड के सहारे बैठी हुई शराब पी रही थी....उसके मन की हालत में अच्छे से समझ पा रहा था....वो ना चाहते हुए भी हमारे मिलन की गवाह बन चुकी थी....



मैने अपना चेहरा नीरा के बूब्स की घाटियो में दबा लिया.. नीरा ने अपने एक हाथ से मेरे सिर को काफ़ी ज़ोर लगा कर अपने सीने में दबा दिया था...जैसे मुझे अपने अंदर समा लेना चाहती हो....



अब वो मुझे पलटते हुए हुए मेरे उपर आ गयी थी और अपनी ब्रा मे से एक बूब निकाल कर मेरे मुँह में डालने लगी....

में उसका बूब पागलो की तरह चूसने लग गया और ना जाने कब उसकी ब्रा से उसका दूसरा बूब भी मैने बाहर निकाल दिया....



नीरा की सिसकिया पूरे कमरे में फैलने लग गयी थी....मैने अपने एक हाथ से उसकी ब्रा को खोल दिया....और फिर से उसके दोनो बूब्स पर टूट पड़ा जगह जगह मैने अपने दाँतों के निशान उसके बूब्स पर बना दिए थे.....



में एक दम से नीरा से अलग हुआ और उसका पेटिकोट और पैंटी एक झटके में उतार कर खुद भी उसके सामने नंगा हो गया....और फिर से उसे अपनी बाहो में भर लिया....


अब हम एक दूसरे की बाहो में पूरे बेड पर गुलाटियाँ खाने लग गये कभी नीरा मेरे उपर आजाती और कभी में उसके उपर....


अब वो समय आ गया था जब हम दोनो को एक दूसरे मे समा जाना था....मैने नीरा की आँखो मे देखा और मेरा इशारा समझ कर वो बेड पर सीधी लेट गयी....



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