प्रेम की परीक्षा Chapter 1

 





यह कहानी एक ऐसे लड़के है जिसके मा ने इसका परित्याग इसके जन्म के समय ही कर दिया ये बचपन से अनाथ आश्रम में ही पला और इसे समज में बहुत ही हेय दृष्टि से देखा जाता था पर आज यह लड़का एक गरीब परिवार का हिषा है

इस घर मे 4 लोग है

1 हरीश उम्र 49 जो एक प्राइवेट कंपनी में काम करके अपना घर चलता है जो इसका मुह बोला बाप भी है

2 सीमा उम्र 42 एज घरेलू महिला जो कि इसके8 मुह बोली मा है

3 दिया उम्र 22 साल जो कि इस कहानी के के हिरो की बड़ी बहन है इसी के चलते ही प्रेम को घर मे प्रवेश मिला क्यूंकि प्रेम ने इसकी इज्जत बचाई थी और यह प्रेम से मन ही मन प्यार करती ह पर वह इसे अपनी बहन मानता है

प्रेम उम्र 19 साल और यह खेतो में काम करता है


प्रेम अभी तक सोया हुआ था दिन पूरी तरह से निकल आया था (मैं सीमा को माँ और हरीश को बापु ओर दिया को दीदी कहकर बुलाऊंगा आगे की कहानी प्रेम की जुबानी)

माँ• दिया जाकर देख प्रेम अभी तक सो कर् उठा कि नही नही उठा तो जा कर उठा दे

दिया •प्रेम उठ देख दिन कितना निकल आया है आज खेत पर नही जाना है क्या तुझे मा बुला रही है

मैं• दीदी अभी सोने दो ना आज काम नही है बाद ने जाऊंगा| बापू काम पर गए क्या

दिया• हा बापू गए और माँ बुला रही है तुझे चल उठ अब । रामु आया था तुझे बुलाने के लिए कहि जाना है बोल रहा था (रामु प्रेम का दोस्त है)

मैं•मन मे मैं भूल कैसे गया आज तो दीपा से मिलने जाना था कल के लिए माफी जो मागनी है कही मा से बोल दी तो मा को बहुत कष्ट होगा ।

दीदी नास्ता तैयार कर दो कहि जाना है बहुत ही जरूरी है

दिया•कहा जाना है अब तो उठ भी नही रहा था और रामु का नाम सुनते ही बड़ी जल्दी है तुझे मैं कितना बार बोली कि उस कलमुहे से दूर रहआ कर पर तुझे तो मेरी बात सुनाइ कहा देती है तू क्या सोचता है कि मुझे पता नही है क्या की कल तेरे उसी कमीने दोस्त ने दीपआ का हाथ पकड़ा था और उसे गालिया भी दी थी ।मैन किसी तरह से उसे समझा कर भेज दिया कल पर अब तुम उसके पास व गए तो वो आकर बापू से बोल देगी उसके बाद क्या होगा वो तू भी जानता है

मैं•एक बार मुझे माफ़ कर दो मई आज से उस रामु से कोई दोस्ती नही रखूंगा

दिया •चल ठीक है इस बार तुझे माफ् किया अब जल्दी से चलकर नास्ता कर लो और दीपा से जाकर माफी मांग लेना वो दिल की अछि ह वो तुझे माफ् कर देगी

मैं उठ कर सौच से निविर्त हो कर मैं मा के पास जाकर बैठ गया म

मैं•मा मुझे नास्ता दो आज बहुत जल्दी में हु कुछ काम है

मा•बेटा तेरे बापू बोल कर गए है कि बाजार जाकर राशन लेते आये और दुकान वाले का हिसाब व कर दे

मैं•ठीक ह मा।(मन मे और रास्ते मे दीपआ मिलेगी तो माफी व मांग लूंगा )।


नास्ता करने के बाद मैं घर से निकला ही था कि रामु फिर मेरे घर की तरफ आता है दिखा तो मैंने सोचा कि आज रामु से बात कर ही लेता हु की वो मेरे घर पर ना आये नही दीदी के कारण मुझे उससे अपनी दोस्ती तोड़नी पड़ेगी मैं यही सब सोच रहा था ।कि रामु तब तक मेरे पास आ गया

रामु•प्रेम कहा था सुबह से आज सुबह से ही तुम्हें खोज रहा था

प्रेम•यार आज लेट सो कर उठा हु और बताओ किस लिएखोज रहे थे

रामु •कल जो मैंने दीपा के साथ किया उस कारण से माफी मांग लेते है नही तो घर पर बोल देगी

प्रेम •अब क्या फायदा वह घर पर बोल दि है यार तेरे से एक बात बोलनी थी बुरा मत मानना

रामु•यार तेरी बात का कभी बुरा माना है जो आज मानूँगा बोल

प्रेम •यार तू मेरे घर पर मत आया कर आज दीदी तेरे बारे में न जाने क्या क्या बोल रही थी बोल रही थी कि तुमसे दोस्ती खत्म कर लूं नही तो वो बापू से मेरी शिकायत कर देंगी

रामु•ठीक है कोई बात नही वैसे कहा जा रहा है तू

प्रेम •कही नही यार बस वो लाला के दुकान पर जा रहा था वो बापू को कल वेतन मिला ना तो आज हिसाब करना है।

चल ठीक है बाद में मिलता हु तेरे से

और मैं वह से चला आया मेरे जाने के बाद रामु का एक दोस्त उसके पास आया उसका नाम गोविंद था

गोविंद •यार रामु तू तो बोलता था कि वो तेरा खास दोस्त बन गया है और जल्द ही तू उसकी बहन दिया को पटा लेगा पर वह तो तेरे से उसके घर आने से ही मना कर दिया अब क्या करोगे

रामु •यार यही तो मेरे भी समझ मे नही आ रहा लगता है कि ककल दीपा के साथ जो किया उसकी शिकायत वह दिया से कर दी है तभी तो वो प्रेम को बोल रही है मेरे से दोस्ती तोड़ने को ।

गोविंद• हा यार वैसे दीपक व मस्त माल है कैसी मस्त बड़ी बड़ी चुचिया है उसकी और गांड तो बहुत ही मस्त है मन करता है पकड़ कर साली का रेप कर दे पर क्या करे यार जो मजा मर्जी से करने में वो मजा रेप में कहा

रामु •यार अब तेरे से क्या छुपा है मैं तो बहुत पहले से दिया के पीछे पडा था ।पत नही यह साला कहा से मरने के लिए आ गया नही तो अबतक तो इसको चोद चुका होता

गोविंद •अच्छा ये सब छोड़ कहि कोउ जुगाड़ हो तो बोल यार बहुत मैन कर रहा है चोदने का

रामु•चल आजा तू भी क्या याद करेगा

इधर मैं लाला के दुकान पर पहुचा जंहा से पूरे गांव का राशन जाता है सभी यही कहते है कि लाला बहुत ठग है और वह सबके हिसाब में गड़बड़ी करता रहता है

लाला अपने दुकान पर बैठा मेरे चाचा जो कि उसके दुकान पर जाम करते है और लाला का खबरी भी है दोनों आपस मे कुछ बात कर रहे थे । मेरे को देखते ही शांत हो गए । लाला मेरे से बोला

लाला •आओ बेटा प्रेम कहा रहते हो आज कल दिखाई नही दे रहे हो

प्रेम •चाचा (मैं लाला को चाचा ही बोलता था)आज कल खतो में काम था तो इधर आना नही हुआ ।चाचा आप हिसाब कर दो आज ।

लाला अपना पोथी खोल कर हिसाब करता है ओर मैं हिशाब देकर चल दिया घर को तो रास्ते मे दीपा स्कूल जाते हुए दिखती ह तो पहले ही जा कर पूल के पास खड़ा हो गया क्यूंकि मैं जानता था दीपा को स्कूल जाने लिए ये पूल पार करना होगा यंहा बहुत सुन शान रहता ह अक्सर बहुत कम लोग ही इधर आते है ।दीपा जब पास मेंआयी तो मैं उससे बोला

मैं• दीपा मुझे माफ़ कर दो आगे से ऐसी गलती दुबारा नही होगी मैं तुम्हरे काज हाथ जोड़ता हु।

दीपा •देखो प्रेम मेरा रास्ता रोकने की कोशिश मत करो नही तो मैं तेरी दीदी से तेरी शिकायत कर दूंगी।

मैं •दीपा तुम मुझे माफ़ कर दो मैं कभी तुम्हे अपना मुंह नही दिखाऊंगा।

दीपा •ठीक है मैं तुम्हे माफ् किया अब मेरा रास्ता छोड़ दो और अपना काम करो


मैं दीपा से माफ कर देने पर उसका सुक्रिया किया और उसे जाने को कहा पर तब तक मेरी नजर उसकी उठी चुचियों पर पड़ी बहुत मस्त साइज़ था उसकी चूची की उसकी साइज एकदम नारंगी की तरह थी ।वैसे दीपा दिखने में एकदम मस्त थी ।गोरा रंग और उसकी भूरी आंखे जो बड़ी बड़ी थीउसे देख कर मन करता था कि उसकी आंखों में डूब जाए और उसके होंठ तो तो एकदम लाल गुलाबकी पंखुड़ी की तरह थी उसके शरीर पर कहि से भी ऐसा नही थी जिसे एक्स्ट्रा कहा जा सके ।मैं उसके अनकही में खोया हुआ था और वो मुझे देखे जा रही थी । मैं तो उसकी खूबसूरती में कहि खो सा गया था । तब वह मुझे हिला कर जगाई ।

दीपा •क्या देख रहे हो ऐसा लगता ह जैसे आज पहली बार देख रहे हो मुझे

दीपा को देख कर इतना खो से गया था मुझे कुछ एहसास भी नही रहा की मैं उसे क्या बोलू ।मैं बस इतना ही बोल पाया किसी तरह से

मैं • दीपा आज तुम बहुत खुबसुरुत लग रही हो । मैं तुम्हे पसन्द करने लगा हु।

दीपा •पागल हो तुम मुजजे लेट हो रहा है मैं स्कूल जा रही शाम को मिलूंगी।

फिर वो वहा से चली गयी ।जाते ह उसके गांड जब हिल रहे थे तो बहुत ही मस्त लग रहे थे ।

दीप अपने स्कूल जाकर अपनी सहेली चम्पा से बोली जो कि प्रेम की चाचा की लड़की थी जो रंडी टाइप की लड़की थी ।ना जाने कितने लंड से चुद चुकी थी ये तो इसे भी नही पता था । चम्पा का साइज़ 34d 28 36 पुरे गांव में अपनी उम्र में सबसे बड़ी गांड इसकी ही है । ये चूत से ज्यादा तो गांड मरवाती है।

दीपा• लगता है प्रेम को मुझसे प्यार हो गया है ।आज मैं बहुत खुश हूं।

चम्पा• क्या हुआ जो तू ऐसा बोल रही कहि उसने तेरी बुर में लण्ड डाल कर फाड् तो नही दीया।

दीपा •चुप कर पागल तुझे तो बस यही सूझता है।वो तेरा भाई है काम से कम तू उसे तो दे कहि ऐसा तो नही तूने उसे भी नही छोड़ा।

चम्पा •काहे का भाई वो तो बड़े पापा ने गोद लिया उसे ।मौका मिला तो पहले मैं ही उसे फाश लुंगी।ओर चुद भी जाउंगी।

दीपा वह से चली गयी ।मन में बड़बड़ाती है(तू क्या उसे फासेगी मैं आज हु जाकर उसे बोप दूंगी की मैं उससे प्यार करती हूं।)

इधर मैं घर पहुँच कर मा को बता दिया कि मैंने लाला को पैसे दे दिए ह और ननहाने के लिए कपड़ा लिया और बाथरूम में घुस गया ।वह पर मैन देखा कि दीदी ने पानी पैंटी ओर ब्रा वही पास के बाल्टी में दाल दिया है मुझे उसे देख कर उसे चूमने की इच्छा हई तो मैन पैंटी उठा लिया और जो भाग बुर के पास हो त है उसे चुम लिया फिर मैंने जीभ निकल कर छत तो मुझे उसका टेस्ट कुछ नमकीन से लगा मैं उसे चाटने लगा और अपना लण्ड निकल कर उसे हिलाने लगा मेरा लैंड जो कि 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है उसे हिलाने लगा क्क़रीब 20 मिंट हिलाने बाद मेरा पानी छूटा जो सब पानी दीदी की चढ़ी में निकल गया तो मैं दर कर उसे वही छिपा दिया और मैं नह कर निकल आया ।और खाना खाकर मैं सो गया

दीदी शक़म को मुझे उठाने आयी तो मुझे बहुत अजीब नजर से देख रही थी ।मैं दर गया और उठ कर भाग लिया नीचे जाकर चाय पी और दीपा के घर तरफ चल दिया।वहां जाकर देखा तो वो अपनी छोटे भाई के साथ बैठी थी मुझे देखी तो मुझे पोखरे पर जकने का इशारा किया और खुद वही जाने लगी । जब मैं वहा पहुचा तो बोली मुझे तुमसे कुछ बात करनी है

दीपा• तुम सुबह क्या कह रहे थे कि तुम मुझे पसंद करते हो

मैं • हा दीपा मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु पर मैं यह भी जानता कि तुम कभी भी मेरी नही हो सकती इसलिए ही मैंने आज तक अपने प्यार का इजहार तुमसे नही किया ।

दीपा • क्या बोल रहे हो तुम मुझे कुछ भी समझ ने नही आ रही है खुल कर बताओ जबसे तुम मझसे प्यार करते हो।

मैं•जब मैंने दिया दीदी की इज्जत बचाई थी उन गुंडो से तो दीदी ओर बापू ने मुझे आनाथ आश्रम से लेकर घर आये तो तुम और तुम्हारी मम्मी दीदी को देखने आए तो तुम काले रंग की सूट पहन कर आई थी और मैं तुमसे टकरा गया था तो तुमने मुझे झापड़ मार था और मैं तुम्हारी तरफ देखता रह गया था तबसे मैं तुमसे प्यार करता हु । मैं 3 सालो से लगातार जहाँ भी तुम जाती हो मैं वहाँ वहाँ तक तुम्हरा पीछा करता हु पर मैं यह भी जनतक तुम्हारे पापा इस गांव के प्रधान है और बहूत पैसा है उनके पास वो मुझ जैसे अनाथ से तुम्हारी शादी नही कराएंगे

दीपा •तो क्या हुआ मैं भी तुमसे ऑयर करने लगी हु तुम चाहो तो मैं तुम्हारे साथ भाग कर भी शादी करने को तैयार हूं

मैं •नही मैं ऐसा नही कर सकता मैं नही चाहता कि मेरे कारण इस परिवार को कोई कुछ कहे जो मुझ अनाथ को आश्रय दिया मैं अगर ऐसा करूँगा तो तुम्हारे पापा पूरे परिवार को तबाह कर देंगे मुझे माफ़ कर दो और मुझे भूल जाओ


दीपा यह सुन कर खामोश हो गयी और उसकी आँखों मे आँशु की धारा फुट पड़ी और वह रोने लगी। मुझे कुछ समझ मे नही आया कि क्या हुआ ये रो किस लिए रही है।जब मुझे कुछ समझ मे नही आया तो मैंने उससे पूछा अब तुम्हे क्या हुआ तुम किस लिए रो रही है।

दीपा•प्रेम मैं तुमसे प्यार करने लगी हु और तुम मुझे स्वीकार नही कर रहे हो तो क्या करूँ मैं। आज के बाद यह दिल सिर्फ तुम्हारे लिए ही धड़केगा अगर काल तक तुमने मुझे स्वीकार नही किया तो मैं अपने आपको खत्म कर लुंगी

अब मैं क्या बोलू मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा था ।

मैं•देखो दीपा मैं एक अनाथ हु और मुझे इतना प्यार की आदत नही है।बचपन से जब से मैन होश संभाला है तबसे मैंने खुद को लोगो द्वारा हरामी कुत्ता ओर भी ना जाने क्या क्या बोलते थे और मैं ज्यादा दिन यहा पर नही रहूंगा एक ना एक दिन चला जाऊंगा।

दीपा•तो क्या हुआ जंहा व चलोगे साथ मे ले चलो मुझे बस तुम्हारे साथ ही रहना है और मुझे कुछ व नही चाहिए।

मैं•दीपा यह सब पागलो वाली बात मत करो एशा नही हो सकता ।मैं तुझे अपने साथ नही रख सकता यह तुम समझती क्यू नही मेरी बातों को।

दीपा •मुझे जो कुछ भी कहना था मैं कह चुकी हूं और मुझे न कुछ कहना है ना ही कुछ समझना है।मैं कल शाम तक तुम्हारा इतंजार करूँगी।

मैं अभी जा रही हु मुझे देर हो रही है माँ घर पर इंतजार कर रही होगी पापा भी आने वाले होंगे ।मैं कल इनतजार करूँगी

दीपा आगे बढ़कर मेरे होंठो को चूम लिया और मैं वही पर खड़ा ठगा सा उसे देखता रह गया उसके बाद वह 1 मिनट भी रुकी और वहाँ से भाग गई।

उसके बाद मैं व घर की तरफ चल दिया कि रास्ते मे चम्पा मिल गयी वी कहि से आ रही थी वह मुझे बहुत परेशान करती रहती है बराबर मैं जल्दी जल्दी घर की तरफ जाने लगा कि वह मुझे देख ना ले पर फूटी किस्मत उसने मुझे देख लिया और दौड़ कर मेरे पास आई ।वो हांफ रही थी जीके कारण उसकी पहाड़ के माफिक चुचिया यूजर नीचे हो रही थी लगता है उसने अंदर ब्रा नही पहनी थी जिसके कारण उसके निपल कपड़े के ऊपर भी महशुस हो रहे थे उसे इस हालत में देखकर मेरे लण्ड पूरा मौसम में आ गया और वह खड़ा हो गया जो कि पैंट के ऊपर महशुस हो रहा था मैने देखा चम्पा चम्पा उसे देख कर हस रही थी

चम्पा •कहा से आ रहे हो प्रेम ।

मैं •कहि से नही बस ऐसे ही घूम रहा था।

चम्पा •झूठ मत बोल मैं जानती हूं तू दीपा से मिलने गया था

मैं• नही ऐसी कोई बात नही है मैं ऐसे ही घूम रहा था तो मील गयी थी तो थोड़ी बहुत बाते हो गयी ।

चम्पा •चल कोई बात नही ये पैंट में छुपा रखा है (इसका लण्ड तो बहुत मस्त लग रहा अगर इससे चुद लू तो मजा आजये)

मैं•कुछ भी तो नही छुपाया हु

तबतक चम्पा आगे आकर मेरे लण्ड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और दबाने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लगा और मुह से शिष्कारी फुट पड़ी।

चम्पा •कभी मुझसे भी बाटे कर लिया कर मैं तुम्हे जवानी की असली मजा दूंगी।

मैं भी जोश में आकर उसके चुचियों को काशकर दबा दिया इतना जोर से दबाया की वो दर्द से चीख उठी औऱ उसनें मेरे लण्ड को कस कर दबा डियातो मेरे भी आहे निकल गयी।

फिर मैंने उसके बाल को पकड़ कर खिंचा तो उसके होंठ खुल गए तो मैंने अपने होठ उसके होठ से जोड़ दिया और उसके नीचे वाले होठ को चूसने लगा तबतक उसने अपना जीभ मेरे मुह में अपना जीभ डाल दिया और मैं उसके जीभ को चूसने लगा और मेरे होंठो को ये किस करीब 5 मिंट तक चला जब हमने एकदूसरे को छोड़ा तो हमारी सासे उखड़ी हुई थी ।हम दोनों अपनी सांसे अव ठीक कर ही रहे थे मेरे कानों में एक आवाज पड़ी जिसे सुनकर मेरी बुरी तरह गांड फट गयी।


वो आवाज किसी और कि नही ये मेरी दीदी थी जो नजाने कबसे हमारे पीछे खड़ी थी ।मैं यह तो भूल ही गया था हम दोनों इस्टीमे रास्ते मे खड़े थे और ये सब कर रहे थे ।तो किसी की भी नजर पड़ना स्वभाविक ही था। दीदी पूरे गुस्से में खड़ी थी हमे घूर रही थी और साथ मे उनके आंखों से अश्रु की धारा भी बह रही थी ।मुझे तो कुछ समझ मे नही आ रहा था कि मैं क्या करूँ उधर दीदी पूरे गुस्से में चिलाती हुई पूछी

दीदी•प्रेम ये सब क्या कर रहा है तू तुझे मैंने एकबार माफ् किया तू फिर वही काम करने लगा और रण्डी तुझे क्या पूरे गांव का लैंड कम पैड गया जो तू अपने ही भाई के साथ ये सब करने लगी।

चम्पा • हा मैं तो रण्डी हु पर तु कौन सी दूध की धुली है और यह भाई तेरा होगा मेरा नही ।मैं कुछ भी कर तुझे क्या तू अपना काम कर औऱ जा यंहा से

दीदी इतना सुनते ही उनका पारा हाई हो गया और वी आगे बढ़कर चम्पा की गाल पर तमाचा जड़ दिया जिसके कारण उसके होठो से खून निकलने लगा।

चम्पा ने भी दीदी के गाल पर तमाचा जड़ दिया तो मेरा भी ग़ुस्सा फुट पड़ा मैन भी चम्पा के दोनों गाल पर तमाचा जड़ दिया और वह गिर गयी क्यूंकि दीदी को मैन दिल से अपनी बहन माना था क्यूंकि रिश्तो का क्या महत्व होता है ये हम जैसे अनाथ बहुत अच्छी तरह से जानते है ।

फिर मैंने दीदी के पैरों में गिर कर माफी मांगने लगा तो दीदी ने कहा कि चल घर लेट हो रहे है माँ परेशान होगी।

मैं अब और भी ज्यादा परेशान हो गया क्यूंकि दीदी जल्दी किसी से गुस्सा नही होती और अगर एकबार किसी से गुस्सा हो गयी उन्हें मनाना बहुत मुस्किल है मै भी चुपचाप उनके पीछे घर को हो लिया ।

जब मैं घर पहुचा तो अंधेरा होने को था मा हम दोनों के लिए बहुत परेशान हो रही थी ।

मा• बेटा आ गया तो चल हाथ मुह धो ले इर मैं कहना लगा देती तू खाना खा ले ।

तब दीदी ने अंदर से ही अपने रूम में बैठी थी वही से बोली

दीदी •हाँ माँ इस सांड को खाना दे खाने के लिए तभी तो पूरे गांव में मस्ती करेगा ।

माँ ने जब दीदी के मुह से ऐसी बात सुनी तो वो दीदी पर गुस्सा होने लगी पर मेरी तो फटी पड़ी थी पता नही और आज क्या क्या बुरा होने वाला है ।

पहले दीपा से माफी मांगने गया तो उसने माफ् तो कर दिया पर मुझे एक दूसरी मुसीबत में दाल दी थी कि कल तक अगर उसका जवाब नही दिया तो वो अपने आप को कुछ कर लेगी ।मैन सोचा थी कि शाम को दीदी से इस बारे में बात करके कूछ जवाब दे दूंगा पर अब तो दीदी भी गुस्सा है मुझसे ।सब मेरी ही गलती ह आगर में चम्पा के साथ बहका नही होता तो दीदी मुझसे कभी गुस्सा नही होती । पहले चलो दीदी को मनाता हु फिर खाना खाएंगे

मैं• अभी भूख नही है बाद में खाऊंगा हा बापू काम से आ गए क्या ।

माँ•नही बेटा कभी उनके आने में थोड़ा समय है

मैं• ठीक है माँ मैं बापू के साथ ही खाना खाऊंगा तबतक दीदी के पास जा रहा हूं

मैं दीदी के कमरे में गया तो देखा कि दीदी अपने बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी और शायद रो रही थी। मुझे यह देख कर बहुत बुरा लगा कि आज दीदी को मेरे कारण बहुत तकलीफ पहुची ।मैं जाकर दीदी के पास जा कर बैठ गया और दीदी से बोला

मैं•दीदी मुझसे गुस्सा ही क्या एक आखिरी बार मुझे माफ़ कर दो मई आगे से ऐसी कोउ गलती भी करूंगा

दीदी •प्रेम अभी तू यंहा से चला जा मुझे तुझसे की बात नही करनी है मैं तुझे कितना सरीफ समझती तू एसा निकलेगा मैं कभी सोच भी नही सकती थी।

मैं •दीदी प्लीज मुझे माफ़ कर दो अब ऐसी कोई गलती भी नही करूँगा ।


दीदी •मुझे तेरी कोई बात नही सुननी है चुपचाप चला जा यंहा से। तू अभी जा और खा ले जाकर ।मुझे परेशान मत कर

मैं •दीदी मैं अपनी गलती मानता हूं आप जो भी सजा देंगी मैं उसे भुगतने के लिए तैयार हू पर आप इस तरह से नाराज मत हो ।

इतना बोलते बोलते मेरे आंखों से आँशु निकल पड़े। जिसे मैंने जल्दी से पोछ लिया फिर भी दीदी ने देख लिया और वह तड़प उठी ।उन्होंने तुरंत ही मुझे गले लगा लिया और बोली

दीदी •पागल तू रोता किस लिए है मैं तुझसे इसलिए नही नाराज हु तू ये सब क्यू करता है ( मन मे मैं तो इसलिए रो रही हु की मैं तुमसे प्यार करती हूं तो यह देख कर बुरा लगा)

मैं• तो फिर आप इसतरह से रो क्यों रही थी।

दीदी•मैं तो इसलिए रो रही थी कि मैंने तुझे डांटा।

मैं •तो दीदी आप मुझसे नाराज नही हो ।

दीदी •मैं तुझसे कभी नाराज हो सकती हूं भला

मैं• चलो ना दीदी आज मैं आपको अपने हाथों से खाना खिलाऊंगा तभी मैं मानूँगा की आपने मुझर माफ् कर दिया।

दीदी • (मन मे तू अपने हाथ से मुझे जहर भी खिला दे तो मैं वो भी खुशी से खा लुंगी)नही तू जा अभी मुझर भूख नही है मैं बाद में खा लुंगी।

मैं•तब तो मुझे पक्का यकीन है कि आपने मुझे माफ़ नही किया।

दीदी •तुझे मेरव खाने से अगर यकीन हो जाएगा तो मैं खुशी से चल तेरे साथ एक ही थाली में खाते है

फिर हम दोनों बाहर आये और दीदी ने जाकर खाना लाया और हम दोनों एक दूसरे को खाना खिलाने लगे। और दीदी मुझे देख रही थी और मैं उन्हें

हम खाना खा रहे थे इसीतरह एक दूसरे को खिलाते हुए तो मुझे अपने पुराने दिन याद आ गए जब मैं इस परिवार का हिस्सा नही था और अनाथ आश्रम में रहता था वह पर हमें खाना के बदले काम करना पड़ता था एकबार मैं चोरी से रसोई से 2 रोटी चुरा लिया था तो आश्रम का रखवाली करने वाली अम्मा ने मुझे बहुत मार था। ।

अचानक दीदी नव मुझे छुआ तो मुझे लगा कि अम्मा फिर से मुझे मार रही है तो मैं दर कर चीख उठा मुझे मत मारो मैं दुबारा कभी रोटी नही चुराउंगा।

यह सुनाई दीदी तड़प उठी

दीदी •प्रेम ये तू कैसी बाटे कर रहा है को तुझे मरेगा तू ऐसा क्यों बोला की तू रोटी नही चुराएगा ।

तो मैंने दीदी को उस घटना के बारे में बता दिया क्या हुआ था मेरे साथ।

तब तक हम दोनों खाना खा चुके थे ।फिर हमने हाथ धोया और दीदी से बोला कि मुझे आपसे कुछ बात करनी है तो दीदी ने कहा कि

दीदी• अभी तो बापू के आने का समय हो गया है मैं बापू को खाना देने के बाद तेरे पास आउंगी तब बोलना जो व कहना हो अच्छा मैं जाती हु।

फिर दीदी वहाँ से चली गयी ।और में पूरे दिन के घटनाक्रम के बारे में सोचने लगा।जब भी दीपा के बारे सोचता तो मन एक अजीब से डर के मारे बैठा जा रहा था ।कही ना कही ये सच भी था मेरे यंहा रुकने का कारण दीपा ही थी मैं तो उससे पहली नजर में प्यार कर बैठा परन्तु कभी मेरी उससे कहने की हिम्मत ना हुई।


इधर बापू आये तो उन्होंने मुझे बुलाया और बोला

बापू•कल से खेतों पर नही जाएगा मैने खेतो में हरिया को बोल दिया है काम करने को वो एक तिहाई पर काम करेगा और तू जा कर काल स्कूल में दाखिला ले ले और अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करो समझे मैं नही छत कोई कल ये बोले कि हरीश ने एक लड़का को भी पढ़ा नही पाया ।

मैं बापू के सामने ज्यादा बोलता नही था तो मैंने सिर्फ हा में अपना सिर हिला कर वहां से चल दिया ।परन्तु मन ही मन मे बहुत हु खुश हुआ क्यूंकि अब मैं दीपा से स्कूल में देख सकूँगा।

फिर मैं माँ से बोला कि मैं अभी रामु के घर से आता हूं । माँ बोली जल्दी से आना लेट मत करना।

मैं जब रामु कर घर के पास पहुचा तो मैंने देखा कि रामु दबे पांव अपने घर के पीछे जा रहा था एक रूम में जा रहा था तभी मैन देखा कि उसकी बहन भी वही जा रही थी और वो भी छुप कर जा रही थी मुझे कुछ गड़बड़ लगी तो मैंने भी छुप देखने का फैसला किया।

मैं रूम के पास जाकर अंदर देखने के लिये जगह खोजने लगा तो मेरी किस्मत अच्छी थी कि खिड़की खुली हुई थी अंदर का नजारा देखकर तो मैं दंग रह गया अंदर रामु की बहन नंगी बैठ कर रामु का लण्ड चूस रही थी रमु का लण्ड मुझसे छोटा था।

रमु •अच्छे से चूस डाली पूरा अंदर ले ना जो लण्ड तू चुस्ती है वैसी तो कोई भी नही चुस्ती तू तो मेरी रण्डी बहन है

डाली•हा भाई तेरा लण्ड व मस्त है आज सुबह से ही गरम हु जबसे तूने मुझे बताया कि मुझे प्रेम को अपने जिस्म के जाल फसना है तबसे ।

रामु•तबी तो मेरा रास्ता साफ होगा कुकी वो तो लम्पट पागल है जबसे वो आया तबसे मैं दिया को पटाने में असमर्थ हो गया हूं ।वो साला कुत्ता हमेशा मेरे या दिया के पास रहता है जिसके कारण मैं कुछ कर नही पा रहा हु।धीरे चूस रण्डी साली काटती क्यों है कुतिया। चल आजा आज तेरी सारी गर्मी निकलता हु लेट जा ।

डाली•भाई अब तेरे लण्डसे मजा नही आता है।

रामु •है रण्डी साली चुदवा कर बुर का तो भोसड़ा बना ली है अब तुझे तो गधे का लैंड चाहिए

डाली •चल कुत्ते बहनचोद ज्यादा बोल मत पहले मेरी बुर को चैट कर गिला तो कर दे।

रामु •नही आज सुखा डालूंगा ठीक उसी तरह जैसे मैं दिया को पेलूंगा पहली बार

अब मुझसे सहन करना मुश्किल हो गया था मकई तुरन्त दरवाजा खटखटा दिया और बोला

मैं •रामु तू दरवाजा खोल मैं सब कुछ देख ओर सुन लिया हु आज मैं तुझे नही छोडूंगा तू साले मेरी दीदी के बारे में ऐसा बोलता है तू दोस्त कहलाने के लायक नही है


रामु और डाली तो डर गए और दोनों ने तुरंत अपने कपड़े पहने ओर बाहर आ गए और मुझसे माफी मांगने लकगे ओर कहने लगे कि मैं इस बारे में किसी से भी ना कहु डाली तो थर थर कपङे लगी ।वो बहुत ही धिरे से बोली

डाली• अगर तुम चाहो मेरे साथ कुछ कर लो पर ये बात किसी मत कहना नही तो मैं कहि मुँह दिखाने के लायक नही रहूंगी।

मैं• ठीक है मैं किसी से कहूंगा तो नही पर रमु तु सुन आज जेबद तेरा मेरे साथ किसी भी तरह कोई रिश्ता नही है काज के बाद अब मेरे घर के आस पास भी नही आना न ही दीदी के बारे में सोचना भी मत।

रामु डाली के कान में कुछ कहता है और डाली हस देती है ।तुरन्त अपने कपड़े जगह जगह से फाड् लेती बाल को बिखेर लेती है और चिलाने लगती है बचाओ बचाओ

अभी ज्यादा रात हुई नही थी तो सभी लोग जागे हुए थे सभी आवाज सुनकर इस तरफ भाग कर आये सब आये और डाली सेपूछा क्या हुआ तो डाली ने बोला कि यह प्रेम मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा था अच्छा हुआ जो रमु भईया आ गए नही तो मैं कहि भी मुह दिखाने के लायक भी नही रहती।

यह सुनकर सबका गुस्सा मुझपर फुट पड़ा मैं बोलता रह गया कि मैंने ये सब नही किया ये इसकी चाल है मुझे फसाने की।पर नेरी बात कोई सुना नही तबतक घर और भी पता चल गया कि यंहा पर क्या हुआ है तो बापू तो गुस्सा हो गए और यंहा पर आ गए उनके पीछे मा ओर दीदी भी आई।

यंहा आने पर सबने बापू को वही बताया जो डाली ने सब को बोल दिया इतना सुनने के बाद तो बापू पूरे गुस्सा हो गए और मुझे बुरी तरह मारा दीदी ओर माँ दोनों रो रही थी पर किसी की हिम्मत नही हुई मुझे आ कर बचाये। मैं बेहोश हो गया तो जाकर बापू ने मरना बन्द किया ।जब मुझे होश आया तो मैंने उठाने की कोशिश की तो पता चला कि मेरे हाथ और पैर रस्सी से बांध दिए गए है।मैन छूटने की बहुत कोशिश की पर छूट नही सका ।मुझे अब रामु के घर से उठा कर गांव के प्रधान के घर ला दिया गया था और बापू और गांव के लगभग सभी लोग वहां पर मौजूद थे । मुझे कुछ व समझ मे नही आ रहा था कि मैं क्या करूँ क्यूंकि कोई भी मेरी बात मानने को तैयार नही था ।ऊपर से मैं अनाथ था बापू तो गुस्सा में कुछ भी सुनने को तैयार नही थे ।रक़म भी मौके का फाद उठा कर मुझे गालिया देते हुए दो तीन झापड़ मार दिया पर अब जब मुझे ये एहसास हुआ कि मैं दीपा के घरके सामने हु ओर सभी लोग यही है तो मैं इस आशा में इधर उध्रदेखने लगा तो दीपा मुझे दिखी पर उसके साथ डाली बैठी थी और रो रही थी उसके कंधे पर सर रख कर।

मैं बेगुनाह होते हुए भी अपनी बेगुनाही साबित नही कर पा रहा था।और अब दीप भी मुझे नफरत की नजर से देख रही थी वो । वो भी डाली की बातों में आ गयी थी।मुझे प्यास लगी थी तो मैंने पानी मांगा तो दीपा के पापा ने उसकसे पानी लाने को बोला ।वो गयी और पानी पिलाया मुझे पर अब मुझे उसकी नजरो में प्यार नही नफरत ओर दुख दिखाई दे रहे थे



प्रधान•हरीश भाई कब आप बोलो अब इसके साथ क्या किया जाए पुलिस के पास गए तो लड़की की बदनामी होगी और गांव में इस्का रहना अब ठीक नही है ।

बौ •प्रधान जी अब मैं इससे अपने रिश्ते तोड़ता हु ऐसा बलात्कारी के लिए मेरे घर ने कोई जगह नही है मैन इसे अनाथ समझकर आने घर मे जगह दी थी मैं क्या जानता था कि ये ऐसा निकलेगा।

प्रधान•तो ठीक है कल इसे पूरे गांव ने इसके चहरे पर कालिख पोत कर पूरे गांव में घुमाया जाएगा।


मैं ये सब चुपचाप सुन रहा था क्यूंकि मैं यह तो समझ गया था किअब कोई भी मेरी बात का विस्वास नही करेगा।इसलिए मैं शांत होकर अपनी किस्मत पर रो रहा था किंतु मुझे यह विशवास था कि चाहे कोई मेरी बात का भरोसा कर या ना करे दीदी जरूर विश्वास करेंगी। बापू ने दीदी से कहा कि अब तू यंहा खड़ी हो कर क्या तमाशा देख रही ह चल घर।

दीदी •मैं इसके लिए किस लिए रोऊंगी।(भाई मैं ये जानती हूं तुम ऐसी गिरी हुई हरकत नही कर सकते इसमें जरूर कोई साजिश है मैं इसे पता लगाने के लिए मैं झूठ बोल रही हु मुझे माफ् कर दो)

और दीदी तुरन्त वंहा से चली गयी। तब प्रधान ने बोला

प्रधान•तो हरीश अब इसको कहा रखा जाए रात को।

हरीश•प्रधान जी मैं क्या बोलू अब आप ही बोले

प्रधान•ठीक है मैं इसे अपने घर के एक रूम में इसे बन्द कर देते है।

हरीश•ठीक है ।

प्रधान ने दो आदमी को बोलके मुझे अपने घर के बैठक में बने एक रूम में डलवा दिया मेरे हाथ पैर खोल दिये गए।मैं पूरी रात आने बीते हुए दिन जे बारे सोचने लगा । हमारे अनाथालय में एक लड़का थाजो बोलता था कि हम सब हरामी है दुनिया हमे कुछ दिन के लिए तो अपना सकती है पर हमारे ऊपर कोई व विश्वास नही करेगा।जब हमारे मा बाप ने हमे कूड़े में फेंक दिया तो दुनिया हमे क्या अपनाएगा। आज उसकी भक्त मुझे सच लग रही थी आज कोई भी मेरे ऊपर विश्वास नही कर रहा था बस कब केवल दीपा का सहारा था कि शायद वो मुझपर विश्वास करेगी।

अभी मैं यह सोच ही रह था कि मुझे दरवाजा खुलता हुआ दिखा शायद कोई रूम में आया था। मैंने देखा यह कोई और नही दीपा थी और वह रो रही थी। दीपा ने आकर मेरे पास बैठ गयी और बोली।

दीपा• तुमने ऐसा क्यों किया प्रेम अगर तुम्हें जिस्म की भूख थी तो एकबार मुझसे बोलकर तो देखा होता तुम जहा भी कहते मैं वहां आ जाती । जब मैंने तुम्हें शाम को बोली कि मैं तुमसे प्यार करती हूं तो बड़ी बड़ी बाटे कर रहे थे फिर ऐसा क्यू किया तुमने ।

मैं• दीपा मेरी बात का विश्वास करो मैन ऐसा कुछ भी नही किया मैं सच बोल रहा हु ।

दीपा •तुमने मेरे विश्वास की हत्या कर दी हैमेन शाम को भी दिखी थी कि कैसे तुम चम्पा से चिपके हुए क्या कररहे थे। मैं तुमसे मिलने के बाद घर गयी तुम्हारी दीदी कुछ काम से मेरे घर आई थी तो मैंने उन्हें बताया कि मैंने तुम्हें माफ् कर दिया है और मैं उनके साथ तुम्हारे घर को आरही थी तो देखा था।

मैं •दीपा माना कि मैं शाम को चम्पा के साथ बहक गया था मुझसे गलती हो गयी इस बात का तुम जो भी सजा दोगी मुझे मंजूर है पर मैं डाली के साथ कुछ भी नही किया उल्टे यह तो डाली और रामु की चाल है

दीपा•अब तुम अपना दोष दूसरे पर मत दो मैं तुम्हारे किसी भी बात का व

विश्वासW नही रहा।





04-24-2020, 12:39 PM, #11


hotaks  

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RE: Kamukta kahani प्रेम की परीक्षा

मैं•नही दीपा तुम तो ऐसा मत बोलो अगर तुम ऐसा सोचोगी तो मैं टूट जाऊंगा।अब तो सिर्फ तुम पर ही भरोसा है मुझे।

दीपा •अब मैं तुमपर भरोषा कैसे करूँ यह तुम्ही बताओ।

मैं•तुम तो मुझ पर विश्वास करो।

और मैने उसका हाथ पकड़ा तो उसने मेरी हाथ की झटक दिया और बोली दीपा•मुझे छुओ मत मैं तुमसे प्यार करती थी करती हूं और करती रहूंगी पर मैं जिस प्रेम से प्यार करती हूं उसकी हत्या तुमने कर दी है ।तुम एक हत्यारे हो और मैं किसी हत्यारे से प्यार नही कर सकती।

मैं•दीपा ऐसा मत कहो मैं मर जाऊंगा ।

दीपा •मैं तुमको कभी माफ नही करूँगी अब मैं जा रही हु शायद मैं अबसे रूम बाहर नही निकलूंगी।क्युकी अब जो तुम्हारी दुर्दशा होगी वो मैं नही देख पाऊंगी।

मैं•नही ऐसा मत करो तुम मुझेछोड कर चली गई तो मैं पागल हो जाऊंगा।मुझे जीते जी मत मारो।कम से कम तुम तो मुझ पर विश्वास करो।

दीपा•चलो मैं मान भी लू की तुमने ऐसा नही किया तो डाली ने ऐसा किस लिए उसे ये सब करके उसे क्या फायदा क्या है।

मैन उसे आज जो भी हुआ मैं उसे सब कुछ बता दिया ये भी बताया कि वो दीदी के पीछे भी पड़ा है वह उन्हें भी बरबाद करना चाहता है मैने उसे डाटा तो उन दोनों ने मिलकर मुझे ही फसा दिया।

दीपा•ओह ये तो बहुत ही बुरा हुआ । अब तो कोई भी तुम्हारा कोई भी विश्वास नही करेंगे।अब क्या करोगे।

मैं दीपा तुम अब तुम ही बताओ क्या करूँ

तभी दरवाजा खुला ओर हमने जो देखा उससे हम दोनों की होश उड़ गए।क्यूंकि सामने कोई और नही दीपा के पाप खड़े थे वो भी बहुत गुस्से में हम दोनों को वो घूर रहे थेऔर बहुत ही गुस्सामे थे

प्रधान• दीपा तू यंहा क्या कर रही है।

दीपा• कुछ भी नही पापा बस ये पानी के चिल्ला रहा था तो बस वही देने आयी थी।

प्रधान•चल ठीक है अब जा कर तू सो जा और तू सुन क्या नाम है तेरा छोड़ जाने दे तेरे नाम से मुझे कोई मतलब नही तुझे अब कुछ भी नही मिलेगा और तुमसे मैं शुबह बात करूंगा चलो दीपा

और वह दोनों वहां से चले गए।

अब हम डाली के घर पर चलते है देखे वह पर क्या हो रहा है।डाली को सभी लोग घेर कर बैठे हुए थे ।डाली ने रो रो कर अपना बुरा हाल कर लिया था गांव की कुछ औरते उसके पास बैठ कर उसे शांत कर रही थी।

1औरत •उस नासपीटे की इतनी हिम्मत की देखो गांव की लड़की पर हाथ डाल दिया।

2औरत•अरे बहन वो तो अनाथ है पता नही किसकी गंदी पैदाइश है मैन तो उसी समय सीमा को बोली थी ऐसे अनाथ लड़के अपने घर मत रख आखिर तेरी बेटी के साथ कहि कुछ कर दिया तो क्या करोगी।


अभी यह सब बाते चल ही रही थी कि तभी डाली की माँ डाली के लिए खाना लेकर आई ।डाली की माँ नाम सुमित्रा था और इनकी उम्र लगभग 45 के आस पास थी ये बहुत ही सभ्य और धार्मिक विचारों वाली महिला थी उनका पूरा। समय घर की देखभाल और पूजा पाठ में ही बीतता था ।इनकी जीवन मे एक ही बात का दुख। था कि इनका बेटा रामु इनकी बात नही मानता था और उसकी शिकायते दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी।

सावित्री •बेटी कैसी है तू ठीक तो है ना कहि दर्द तो नही ह ना बेटी।

डाली•मा मुझे बहुत दर्द हो रही है पेट मे उसने मेरे पेट मे भी मारा था।

सावित्री• ला बेटी मैं मालिश कर देती हूं तुझे बहुत आराम मिलेगा।

औरत1 सावित्री बहन मुझे तुमसे कुछ बात करनी है तुम थोड़ी देर के लिए बाहर आओगी।

सावित्री •हा बहन चलो ।

फिर वो दोनो औरते ओर सावित्री बाहर आ गयी

औरत1•बाहें देखो मैं घुमा कर नही बोलूंगी मैं यह कहना चाहती हु की उस लड़के ने डाली के साथ कहि कुछ कर न दिया हो गए जाकर अगर कुछ हुआ तो तुम किसी को मुह दिखकने लायक नही रहोगी।

सावित्री•हा बाहें मैं भी यही सोचकर परेशान हु पर मैं कैसे पुछु यह बात नही समझ मे आ रही है

औरत2 •इसका हल है मेरे पास ।

सावित्री •क्या बहन।

औरत2 •मैं अपनी बेटी शीला को भेज देती हूं वो रात भर रूक भी जाएगी और इससे पूछ भी लेगी ।

औरत1•है इसकी बात भी सही है शिला डाली की सहेली भी है जिससे उसका दर्द भी कम होगी ।

सावित्री•ठीक है जैसा तुम उचित समझो करो मुझे तो कुछ बहु समझ मे नही आ रहा है।

औरत 2 •ठीक है बहन मैं भेज दिति हु जाकर नही तो वो भी सो जाएगी।

अब हम प्रेम के घर यानी कि दिया के घर चलते है।

सीमा (दिया और प्रेम की माँ)•मुझे तो थोड़ा भी यकीन नही हो रहा है कि प्रेम ऐसा भी कर सकता है मुझे लगता है ये कोई साजिश है ।

हरीश•कोई साजिश नही है वो था ही ऐसा ।

दिया•नही बापू आप सब उसे गलत समझ रहे है अगर उसके मन मे ऐसा कुछ भी होता तो वी आज शाम को प्रधान की बेटी दीपा के साथ बहुत कुछ कर सकता था पर उसने ऐसा कुछ भी नही किया ।जब दीपा शाम को उससे अपने प्यार का इजहार कर रही थी ।वो तो उसके साथ भागने को भी तैयार थी पर उसने ऐसा नही किया बल्कि उसे अपने अनाथ होने और गरीब होने का हवाला देकर मना कर दिया ।

यह बाटे सुन कर हरीश ओर सीमा दोनो के होश उड़ गए। दिया फिर बोलना सुरु की

दिया •प्रेम को अगर कुछ करना होता तो वो डाली के साथ नही दीपा के साथ कुछ कर चुका होता। उन्हें तो छोड़ो आप सब जब से उसे घर ले कर तबसे आज तक ना जाने कितनी बार आप दोनों मुझे उसके साथ घर पर अकेले छोड़ कर बाहर गए है।पर उसने कभी भी मुझे गंदी नजरो से नही देखा वी मुझे हमेशा बड़ी बहन के रूप में देखा।

इतना बोल कर दिया रोने लगी और रट हुए अपने रूम में चली गयी ।

हरीश •हा दिया भी ठीक कह रही है अगर आज की घटना को छोड़ दे तो उसने कोई व गक्त काम नही किया है।

सीमा•मैं यह सब कुछ भी नही जानती मुझे बस मेरा बेटा वापस चाहिए।

हरीश•सीमा बात को समझो अब कुछ भी नही हो सकता बो रँगे हाथ पकड़े गया है और रामु इस बात का गवाह है जबकि पूरा गांव जानता है कि रमु और प्रेम दोस्त है तो कोई दोस्त अपने दोस्त को क्यों फ़सएगा।

सीमा•ठीक है अगर कल प्रेम के साथ कुछ हुआ तो मैं भी घर छोड़ कर चली जाऊंगी।

इतना बोल कर सीमा भी चली जाती है । इधर डाली के पास शीला आ गयी थी और उससे सब पूछ कर सावित्री को बता दिया था कि कुछ हुआ नही है रामु समय पर पहुच गया था।

अब सबको सुबह का इन्तजार था जैसे ही शुबह हुई पूरे गांव के लोग प्रधान के घर आ गए थे बस उसमे 3 लोग नही थे जो कि ये मानते थे कि प्रेम ऐसा नही कर सकता 1 तो दीपा थी जो सब जानती थी और 2 उसकी माँ और बहन दिया

अब पूरे गांव के लोगो के आ जाने बाद प्रधान ने उसे घर से बाहर निकलवाया।

मैं•चाचा जी मेरी बात का विश्वाश करे मैने ऐसा कुछ नही किया।

प्रधान •चुफो जा वरना इतना मार खायेगा की उठना भी मुश्किल हो जाएगा

तब मैंने चारों तरफ निगाह उठा कर देखा तो मुझे ना ही माँ दिखाई दी और ना ही दीदी ।फिर मेरी निगाह दीपा को ढूढने लगी पर वह नजर नही आई अब मैं पूरी तरह से टूट गया और सोचा जब किसी को मुझपर विश्वास ही नही रहा तो अब जो हो जाये सब ठीक ही है।

फिर प्रधान ने नाउ बुलवाया ओर मेरे बल मुड़वा दिया गया और मेरे चेहरे पर कालिख पोत दिया गया ।तभी मेरी निगाह डाली और रमु पर पड़ी दिया तो कुछ उदाश दिख रही थी पर रामु खुश था हो भी क्यों नही अब उसका रास्ता साफ हो गया था पर अब मैं क्या कर सकता था कब बस अपना तमाशा बनते देख रहा था तभी मैने देखा रामु प्रधान जी कुछ बात कर रहा है फिर रमु दो आदमी को बाहर लेकर गया ओर दो टोकरे उनके सर पर रख कर लाया फिर वहां पर रख दिया गया मैन देखा कि वो टमाटर था पूरा दो टोकरे और रामु हश रहा था मन ही मन।

प्रधान •इसे इस पेड़ में बांध दो और इसकी आंखों में काली पट्टी बांध दो।

मेरे साथ ऐसा ही हुआ अब ना ही मैं हिल सकता था और न ही कुछ देख देख सकता ।। तभी मेंरे कानों आवाज पड़ी

आवाज 1•प्रधान जी अब क्या सजा है इसकी

प्रधान•अब पहले इसे तो टमाटर से मारो इसे फिर गधे पर पूरा गांव घुमाया जाएगा

यह सुन कर मैं अंदर से हिल गया

तभी मेरे ऊपर एक टमाटर पड़ा अभी मैं इससे संभला भी नही था कि मेरे ऊपर टमाटर की बरसात होने लगी यह बारिश करीब 5 मिंट तक चला जब यह बारिश शांत हुई टी मुझमे इतनी भी हिम्मत नही रही कि मैं खड़ा हो सकू

फिर मुझे खोल दिया गया और उसके बाद मेरी आँखों से पट्टी भी खोल दिया गया ।जब मेरी आँखें खुली तो मेेरे सामने अंधेरा अंधेरा था मुझे कुछ भी दिखाई नही दे रहा था परंतु कुछ देर बाद मुझे दिखाई देने लगा तो मैंने देखा कि अपने घर जे चार ओर दीपा खड़ी थी और रो रही थी और हाथ जोड़कर माफी मांग रही थी पर मुझमें अब इतनी हिमंत नही थी मैं ज्यादा देर तक ऊपर देख पाता मेरी नजरे नीचे की तरफ झुक गयी तभी मुझे एहसास हुआ कि कुछ लोग मेरे पास आ रहे है तो मैंने उधर देखा तो मेरे होश उड़ गए क्योंकि उधर से लोग एक गधे को केजर आ रहे थे और उनके हाथ ने जूते चप्पल की माला थी फिर मेरी निगाह ऊपर गयी तो मुझे अब वंहा पर दीपा नही खड़ी थी शायद वह चली गयी थी मेरी दुर्दसा उसे नही देखा गया ।

फिर मुझे वो चप्पलो की माला पहना दी गयी और पूरे गांव ।के घुमाया गया।जब वी मेरे घर के सामने आए तो माँ मुझे इस हालत में देख कर बेहोश हो कर गिर गयी ।मुझे अपने ऊपर हर जुल्म कबूल था पर जब माँ बेहोश हुई तो मैं आने आपको रोक न सका और तुरन्त कूद कर मा के पास पहुच गया उसे उठा कर अंदर पहुचाया ।तभी मेरे सर पर पीछे से किसी ने डंडे स्व प्रहार किया पीछे न्यूड कर देखा तो वह कोई और नही मेरी दीदी थी मैं कुछ नही कर सका और बेहोश हो गया


इधर दीपा का रो रोकर बुरा हाल था जब उसकी माँ ने पूछा कि बेटी तुझे क्या हुआ है तो वो कछु भी नही बोली परन्तु बार बार पूछने पर उसने सारी बाते बता दिया जो भी कल रात को प्रेम ने उसे बताया था और दीपा अपनी माँ से बोली

दीपा•माँ अगर प्रेम को कुछ हुआ तो मैं व अपने आप को खत्म कर लूंगी

दीपा की माँ का नाम शीला जो प्रधान के विचारों से उलट शांतिप्रिय महिला थी जो भगवान को तो नही मानती थी पर दुसरो को इसके लिए बाध्य नही करती थी वो कर्म करने में विशवास रखने एल महिला थी।

शीला•ऐसा कु बोल रही है तू उसे अगर कुछ हुआ तो तुझे क्या फर्क पड़ेगा रुक कहि तू उससे प्यार तो नही करती ना

दीपा हॉ माँ करती तो हु पर वो मुझसे प्यार करता भी है और नही भी

शीला•मैं कुछ समझी नही

दीपा•माँ कल रात को जब मैं उससे मिली और पूछी तुमने ऐसा क्यों किया तो उसने सारी बात मुझे बताया कि वो इस गांव में सिर्फ मेरे लिए रुका था परंतु जब मैंने शाम को उससे अपने प्यार का इजहार किया तोउसने यह कह कर मना कर दिया कि मैं तुम्हारे लायक नही हु मैं एक अनाथ हु और तुम्हारे पापा मुझे कभी भी स्वीकार नही करेंगे और फिर मैं तुम्हे ले जाकर रखूंगा कहा मेरे तो कोई घर भी नही है

शीला•यह सब उसने कहा।

दीपा •हा माँ अगर वो चाहता तो आज वो सब कुछ कर सकता जो उसपर इल्जाम लगा है पर उसने ऐसा कुछ भी नही किया बल्कि जब मैंने ऐसा करने की प्रयास किया तो मुझे मना कर दिया और वहां से चला गया

तबतक चम्पा दौड़ती हाफते हुई आयी और बोली

चम्पा •दीपा प्रेम की हालत बहुत हु खराब है दिया ने उसके सर पर डंडे से मार दिया है जिसके कारण वह बेहोश हो गया है और बड़े पापा ने उसे कुछ लोगो की मदद से हॉस्पिटल में भर्ती कराया है डॉक्टर ने हालत नाजुक बताया है

दीपा •नही ऐसा नही कर सकती दिया दीदी उन्होंने ऐसा क्यों किया क्या गांव के लोगो ने सजा कम दिया था जो उन्होंने उसे मार दिया

चम्पा •बड़े पापा ने भी यही पूछा था कि तुमने ऐसा क्यों किया तो उन्होंने कुछ जवाब नही दिया बस रोते हुए घर के अंदर भाग गई औऱ बड़ी मम्मी ने जब इस बारे में सुना तो उन्होंने दिया को मारा और अभी प्रेम के पास गई है

दीपा•माँ मुझे भी प्रेम को देखने जाना है मैं जा रही हूँ

शीला•नही मैं इसकी इजाजत नही दे सकती अगर तुम्हारे पापा जान गए तो मुझे बहुत डांटेंगे।

दीपा •कम से कम दिया के पास जाने दो मैं उससे पूछना चाहती हु उसने ऐसा क्यों किया । इसकी इजाजत तो दोगी ना आप।

शीला •हा तू जा सकती है पर ध्यान से किसी भी तरह तुम्हारे पापा को ये पता ना चले कि तू उसे पसंद करती है नही तो उसे ओर भी मुसीबत उठानी पड़ सकती है।

दीपा •ठीक है माँ।

फिर चम्पा ओर दीपा दोनो दिया के घर चल दिए।दोनो घर जा कर देखती है कि दिया अपने दोनों हाथों को दीवाल पर मार रही थी और उसके दोनों हाथों से खून निकल रहा था फिर भी वो मारे जा रह थी रुकने का नाम ही नही ले रही थी दीपा जल्दी से जाकर उसके हाथ को पकड़ लेती है और उसे रोकती हुए बोलती है

दीपा• दीदी आप ऐसा क्यों कर रही है आपके हाथो से कितना खून निकल रहा है आप ओर ज्यादा चोटिल हो जाएंगी।

दिया•हो जाने दो मुझे मत रोको मैं इसी लायक हु मैने उसे मारा उसकी हालत बहुत ही नाजुक है।

दीपा •हा दीदी मैं भी यही पूछने थी कि अपने उसे क्यों मारा सबकी तरह आपको भी लगता है कि उसने डाली का रेप करने की कोशिश की है।

दिया •नही मैं जानती हूं वो ऐसा कुछ भी नही कर सकता मैं उसके साथ पिछले 4 साल हु मुझसे ज्यादा कोंन जानता है कि वो कैसा है

दीपा•फिर आपने उसे क्यों मारा ।

दिया •मेरी सहेली की बड़ी बहन रचना के कहने पर।

दीपा •उन्होंने ऐसा क्यों बोला और वी होती कौन हैं ऐसा बोलने वाली।

दिया•क्यूंकि वो पुलिस में दरोगा है और अभी कुछ देर मे वी हॉस्पिटल आयंगी


दीपा •मुझे अभी भी ये बात समझ मे नही आ रही है कि उन्होंने ऐसा करने को क्यों बोली। अगर ऐसा करने से प्रेम को कुछ हो गया तो क्या करती आप।

दिया• मैंने ज्यादा तेज नही नही मारा था पर ना जाने क्यों वह बेहोश हो गया।

दीपा•दीदी आप जानती है कि मैं उसे अपने दिलो जान से बढ़ कर चाहती हूँ अगर उसे कुछ हो गया तो मैं आपको कभी भी माफ नही कर पाऊंगी।

उधर हॉस्पिटल में डॉक्टर प्रेम को चेक करने के बाद प्रधान और हरीश जो दोनों लोग साथ मे खड़े थे उनके पास आया और बोला

डॉक्टर•मरीज के साथ कौन है।

प्रधान•हम सब उसके साथ ही है वो अनाथ है।

हरीश•क्या बात है डॉक्टर साहब कोई खतरे की बात है क्या

डॉक्टर•वैसे मरीज तो अभी खतरे से बाहर है और उसे सर पर चोट भी ज्यादा गहरी नही है फिर भी मरीज के दिमाग पर लगता है कोई गहरा सदमा पहुचा है उसे जल्द ही होश आ जाएगा पर उसे अभी देख भाल की जरूरत है और उसे दिमाग पर ज्यादा जोर नही डालने दिया जाए नही तो वो पागल भी हो सकता है।

तभी वहाँ पर एक इंस्पेक्टर अपने 4 हवलदार के साथ आती है वो कोई और नही दिया कि सहेली की दीदी थी जिनकी पोस्टिंग हाल ही में हुई थी ।इनका नाम अन्नु है और इनकी लंबाई 5फिट 6 इंच थी इनके सरीर पर कहि भी चर्बी का नमो निशान नजी था और इनका फिगर तो किसी भी हीरोइन को व मात देती थी और ये चहरे से बहुत ही मासूम दिखती थी पर गुंडो में इनके नाम का कहर चलता था गुंडे बदमाश तो इनका नाम सुन कर काँपते है।

अन्नू•यहां पर मरीज के साथ को है और यह किसके घर पर रहता था।

प्रधान•इसे मैने ही भर्ती किया है इंस्पेक्टर और हमने तो कोई रिपोर्ट तो नही लिखाया फिर आप यंहा कैसे।

अन्नू•यह तो मेरे आधे सवाल का जवाब है आधे जवाब कौन देगा।

हरीश • यह मेरे साथ रहता था।

अन्नू•तो अपने उसे गोद लिया था जहाँ तक मुझे पता चला है यह आनाथ था क्या अपने गोद लेने की कागजी कार्रवाई करवाई थी।

हरीश•नही मैने ऐसा कुछ नही किया था

तभी डॉक्टर आते हुए दिखा तो अन्नू ने उन्हें रोका और उसके हालात के बारे में पूछा।डॉक्टर•इंस्पेक्टर मुझे आपसे कुछ बात करनी है

अन्नू• हा तो बोलिये डॉक्टर

डॉक्टर •यंहा पर बात करना उचित नही होगा शायद आप मेरे केबिन में आये।

अन्नू•जरूर डॉक्टर

फिर अन्नू ओर डॉक्टर दोनो चले गए ।वहां एक खामोशी सी छा गयी।तब हरीश ने प्रधान से बोला

हरीश •प्रधान जी आप अपने दोस्त कमीश्नर से बात करे और पूछे यह इंस्पेक्टर यहा कैसे आयी है और क्या करने मे नही चाहता मेरी और बदनामी हो।

प्रधान •ठीक है हरीश मैं बात करता हु ओर देखता हूं क्या हो सकता है।

फिर प्रधान ने कमिश्नर से बात किया ।प्रधान अपनी मोबाइल निकाल कर कमिश्नर को फोन किया।उधर फोन उठा तो एक आवाज आई

प्रधान •हा त्यागी जी कैसे है आप

कमिश्नर त्यागी•हा बोलिये प्रधान जी आज हमारी याद कैसे आ गयी

फिर प्रधान ने कमिश्नर त्यागी को सब बता दिया और यह भी बता दिया कि कोई लेडी इंस्पेक्टर आयी है और डॉक्टर के पास गई है म क्या करे कुछ उपाय बताए

त्यागी•क्या नाम है उस इंस्पेक्टर का

प्रधान•नाम तो नही मालूम पर तुम्हारे लिए को से मुस्किल है पता करना है इंस्पेक्टर

त्यागी •ठीक है मैं पता करके बोलता हु ओर उस इंस्पेक्टर को भी देखता हूं।

प्रधान•ठीक है मैं 10 मिनट में काल करता हु


इधर 7इंस्पेक्टर अन्नू और डॉक्टर दोनो डॉक्टर की केबिन में पहंचते है।

अन्नू•हा तो डॉक्टर साहब ऐसी क्या बात है जो आपको मुझे अकेले में मिलकर बात करनी है।

डॉक्टर•इंस्पेक्टर जहाँ तक मुझे लगता है इस मरीज के साथ बहुत बुरा सलूक किया गया है शायद शारीरिक और मानसिक दोनो तरह से इसे टार्चर किया गया है।

अन्नू•हा इसबारे में मझे मालूम है और रही बात इसके सर पर चोट लगने की वो मेरे कहने पर ही मारी गई थी।

डॉक्टर •तभी मैं सोचु की जँहा इतना ज्यादा टॉर्चर किया गया है उसे सर पर सिर्फ हल्का चोट क्यों लागिजबकी इसके सर पर बाल भी नही है तो इस हिसाब से चोट ज्यादा लगनी चाहिए।

अन्नू •कुछ और बात हो बताए यह सब मैं जानती हूं।

डॉक्टर•हा एक जरुरी बात बतानी है आपको जहां तक मुझे पता चला है यह अनाथ है और जहाँ पर यह रहता था वहाँ से भी निकाला जा चुका है और अनाथयालय में देखभाल अछि तरह से नही हो सकती इसे इस समय देखभाल की सख्त जरूरत है क्योंकि यह जहाँ तक मुझे अनुमान हैं यह शारीरिक रुप से चाहे जितना मजूबत हो जाये पर अभी इसकी मानसिक हालात अच्छी नही रहेगी।

अन्नू•आप कहना क्या चाहते है मकई समझी नही डॉक्टर।

डॉक्टर•जहाँ तक मुझे लगता है अपने इसके सर पर मारने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का चुनाव किया जो इसके दिल के बहुत करीब था और यह वह सदमा बर्दाश्त नही कर पाया और बेहोश हो गया है परंतु मौजूदा हालात क्या है यह तो उसके होश में आने के बाद ही पता चलेगा

अन्नू• ठीक है डॉक्टर वो सब तो ठीक है पर अब इसका कुछ तो उपाय होगा।

तभी केबिन का दरवाजा खुलता है और एक नर्स आती है जिसकी ड्यूटी प्रेम के कमरे में रखी गयी थी

वह आकर डॉक्टर से बोली

नर्स•डॉक्टर मरीज को होश तो आ गया है पर वह अजीब तरह की हरकत कर रहा है

डॉक्टर •चलो देखता हूं

अन्नू•डॉक्टर मैं भी चल सकती हूं देखने

डॉक्टर•है चलिए

फिर सब लोग प्रेम के कमरे जाते और देखते है कि प्रेम बुरी तरह से रो रहा है औरकुछ बड़बड़ा रहा था फिर डॉक्टर उसकी जांच करने लगा।तो प्रेम ने उससे पूछा।

प्रेम•दीदी आपने मुझे क्यों मारा क्या आपको भी यही लगता है कि मैने डाली की रेप करने की कोशिश की है बोलो न दीदी आप कुछ बोलती क्यों नही है।

अन्नू तो जैसे प्रेम के चहरे को देख कर अपने होश ही खो बैठी थी उसे समझ मे नही आ रहा था जो वो देख रही है वो सच है या कोई ख्याब है ।ऐसा कैसे हो हो सकता है 2लोग की सकल एक जैसे कैसे हो सकती है ।तभी डॉक्टर ने अन्नू को हिलाया तो अन्नू को जैसे होश आया।ओर वो डॉक्टर से तुरन्त बोली

अन्नू•डॉक्टर मैं यह नही जानती आप क्या करोगे कैसे करोगे पर आप को जो कुछ भी करना हो कर पर यह लड़का अच्छा होना चाहिए ।आप किसी भी चीज की चिंता ना करे आप को जो करना है बेफिक्र हो कर करे जिसे चाहे उसे बुलाये इसकी कोई चिंता नही है जितने पैसे लगेंगे सारे मैं दूंगी।

डॉक्टर को भी समझ मे नही आ रहा था कि अचानक ऐसा क्या ही गया है कि अन्नू ऐसा क्यों बोल रही है

अन्नू तुरन्त रूम से बाहर आकर दो हवलदार को बुलाती है और उनसे बोलती है

अन्नू•चाहे कोई भी उसे रूम के नदव्र नही जकने देना सिर्फ 2 लोग को छोड़ कर

ओर वह डॉक्टर और नर्स को बुलाती है उन्हें दिखती है

दोनो हवलदार बोलते है ठीक है

फिर अन्नू दूसरे तरफ जा कर किसी से फोन पर बाटे करने लगती है यह बात करीब 10 मिंट तक चला और वह फोन काटने के बाद प्रधान के पास जाती है तबतक कमिश्नर तयगी कक फोन आता है वह फोन उठा कर उससे बाटे लगती है फिर फोन कट जाता है

फिर त्यागी प्रधान को फोन करता है।

त्यागी•प्रधान अब इस बारे मे आपकी कोई भी सहायता नही कर सकता।मैं ही नही कोई भी नही कर सकता ।वह एक आंधी है जिसे काबू करना किसी के लिए मुश्किल है बस आप भगवान से यही दुआ करे उस लड़की ने जो इल्जाम उस लड़के पर लगाया है वह सही हो वरना उसके कहर से कोई भी नही बच पायेगा।

प्रधान• ऐसा क्या हो गया है जो आप ऐसा बोल रहे है

तयगी•यह तो मैं भी नही जानता ऐसा क्या हो गया है पर अभी मुझे ऊपर से फोन आया था मुझे उसके किसी भी कम में दखलन्दाजी करने से सख्त मन किया गया है।

तबतक अन्नू एक आंधी की तरह हॉस्पिटल से बाहर निकल गयी और सीधे प्रेम के गांव यानी कि दिया के पास पहुच गयी ।


अन्नू जब दिया के घर पहुची तो देखती है वह वहाँ पर दिया के साथ ओर भी 2 लड़किया है और उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी पर दिया ने अपना रो

रो कर अपना बुरा हाल कर लिया था।जब उन तीनो ने गाड़ी रुकने की आवाज सुनी तो दिया ने दीपा से कहा

दिया•दीपा जाकर देखो कौन आया है।

दीपा •ठीक है दीदी

दीपा जब बाहर आकर देखती है तो उसे अन्नू दिखाई देती है वो अभी वर्दी में थी तो दीपा को पहचानने में थोड़ी भी देर नही लगी। और उसने तुरंत जाकर उन्हें बुलाकर दिया के पास ले कर गयी

अन्नू • दिया ये तुमने अपना क्या हालत कर ली है और तुम्हारे हाथ मे ये चोट कैसे आयी

दीपा•मैम इन्होंने अपने जिस हाथ से प्रेम को मारा था उसी हाथ को दीवाल पर मार के अपने को सजा दे रही थी मैं तबसे इन्हें समझा रही हु पर ये समझने को तैयार नही है

अन्नू (मन मे तब तो इसे अभी प्रेम की हालत के बारे में बताना उचित नही होगा वैसे कोई बात नही मुझे तो सच्चाई पता करनी है)अन्नू दीपा से

अन्नू•वैसे तुम कौन क्या लगती हो तुम इसकी

दीपा•मैं इस गांव के प्रधान की बेटी हु ओर प्रेम की दोस्त हु और यह दिया की छोटे चाचा की लड़की चम्पा

अन्नू•यंहा पर क्या हुआ है कोई बताएगा मुझे एक बात बता दु मुझे झूठ बोलने वालों से सख्त नफरत है और यकीन करो मेरा की मैं रेप करने वाले को नही छोड़ती तो सच बताओ मुजजे क्या हुआ है

फिर दीपा ने अन्नू को सारी बाते बता दिया जो प्रेम ने उससे बताया था यह सुनने के बाद तो अन्नू की आंखों से तो मानो लावा फुट रहे हो और वह तुरन्त दीपा से पूछी

अन्नू•इन सब बातों को तुम कैसे जानती हो अगर तुम जानती थी इसके बारे ने सबको बताया क्यू नही तुमने

दीपा •मैं प्रेम से प्यार करती हूं और प्रेम भी मुझसे प्यार करता है पर अपनी गरीबी और अनाथ जोन कारण जब मैंने कल उसे बोली कि मैं तुमसे प्यार करती हूं तो उसने मुजजे मना कर दिया फिर साम के समय जब थोड़ा अंधेरा हुआ था तब कुछ गांव के लोग प्रेम को मारते हुए हमारे घर पर ले कर आये तब हमें पता चला कि क्या हुआ है मुझे इन सभी लोग के बातो पर विश्वास तो नजी था पर मैने औऱ दिया दीदी ने सैम को प्रेम को चम्पा के साथ रास्ते मे किस करते देखा तो मुजजे लगा हो सकता है मुझे प्रेम को पहचानने कोई गलती बो गयी हो।

यह सुनते ही कि सायं के समय जो कुछ भी हुआ वो दीपा भी जानती है तो उसका मुह सरम से झुक गया

अन्नू •तो तुम ये सब बाटे जो मुझे बताया इससे तो यही सिद्ध होता है कि प्रेम ऐसा कर सकता है

दीपा •नही यह सच नही है पखले मेरी पूरी बात तो सुन ले

अबतक दिया भी शांत ही गयी थी और उठ कर सभी के लिए चाय बनाने चली गयी फिर दीपा ने बोलना सुरु किया

दीपा•जब सब बाटे पता चली तो पापा ने उसे हमारे घर के एक कमरे में बंद कर दिया इधर घर मे मेरी हालत बहुत ही खराब थी कि जब मैंने प्रेम से प्यार के बारे में बोला तो मुझे मन कर दिया फिर उसने ऐसा क्यों किया जबकि वो चाहता तो मेरे साथ उस समय सब कर सकता था जब मैंने उसे अपने तन और मन से अपना सब कुछ मान लिया था और उसे सब कुछ सौपने को तैयार भी थी मुज्जसे नही रह गया तो जब पापा सोने के लिए अपने कमरे में गए तो मैं उसके पास गई और इन सब बातों को पूछने लगी तब उसने सारी सच्चाई बताई मुझे तो मैंने सारी बात पापा को बतानी चाही तो पापा ने सुबह बात करने को बोल कर सोने के लिए चले गए।

अन्नू•तुम तो बोल रही थी कि तुम्हारे पापा सोने गए थे फिर कब बात की

दीपा•जब मैं और प्रेम बाटे कर रहे थे तो पापा पेशाब करने के लिए बाहर आये थे तो उन्हें लगा कि कोई उस रूम है तो वो वहां पर आए जब वह वहां पर मुझे देखा तो गुस्सा होने लगे तो मैंने उनसे झूठ बोल दिया कि मैं इसे पानी देने के लिए आई थी यह पानी मांग रहा था तब जाकर पापा ने गुस्सा कम किया मुझ पर जब मकई बाहर ककर बात करनी चाही तो उन्होंने मुझे बोला कि हम सुबह बात करंगे इसलिए बात नही कर पाई रात में लेट सोने के कारण मेरी नीद लेट खुली तो मैंने देखा कि अब लेट हो चुका था इसे जो सजा देनी थी बो सुरु हो चुका था तो मैं अब कुछ भी नही कर पाई सिर्फ देखने और रोने के शिवा

अन्नू यह सब बाटे सुन कर कुछ देर तक खामोश रही तबतक दिया भी चाय लेकर आ गयी तो सबने चाय पी फिर अन्नू ने कहा कि

अन्नू•देखो दिया अब जो मैं कहने जा रही हु उसे ध्यान से सुनना प्रेम की सकल मेरे एक सहेली की भाई जो कि इस सहर से सबसे बड़े उधोगपति राजेन्द्र प्रताप का इकलौता बेटा था उससे मिलती है और वह अभी कुछ ही दिन पहले एक एक्सीडेंट में मार गया है और यह बात केवल मैं और नेरी सहेली जानती है और कोई भी नही सब यही जानते है कि वह कहि ओर गया हुआ है मैन उसे फोन कर दिया है बस वह भी कभी आती होगी चलो तब तक उस लड़की से मिल जाय जो यह इल्जाम लगाई है

अन्नू दीपा से बाहर जाकर एक हवलदार को बुलाओ तो

दीपा तुरन्त बाहर गयी और बुला कर लाई।हवलदार आते ही सैलूट मार कर पूछा

हवलदार,•जी मैम आपने बुलाया

अन्नू•हा क्या इस तरफ कोई गुड़ा बदमाश या चोर है जो मेरे बारे में जानता हो

हवलदार•हा मैम वो कल्लू चोर है ना जिसकी आपने कई बार धुलाई की है उससे अच्छा और कौन जानता है

अन्नू •ठीक है जाकर उसे बुला कर लाओ ।

हवलदार यह सुनकर तुरन्त ही वहां से चला गया और कल्लू के घर पहुचा तो देखा कि वह बाहर ही सोया है तो जाकर उसे जगाया तो कल्लू गुस्सा हो गया और गुस्से में चिलाते हुआ पूछा अबे कौन है जो सुबह ही दिमाग खरक़ब् कर रहा है

हवलदार•ओ कल्लू उठ अन्नू मैडम यहां पर आई है और तुझे बुला रही है

कल्लू अन्नू का नाम सुनते ही ऐसे उठा जैसे कि किसी बहुत का नाम सुन लिया और बोला

कल्लू•क्या साहब अब तो मैंने सारे गलत काम छोड़ दिया अब वह क्यों बुला रही है।

हवलदार•यह तो मैं नही जानता पर इतना जरूर जानता हूं कजर तू नही चला तो तेरी एक भी हड्डी सही सलामत नही बचेगी क्युकी मैडम आज बहुत गुस्से में है

कल्लू •हा साहब सच ही बोलते उनसे भाग कर कोई भी जा सकता क्युकी अगर भागा तो दुगना मार पड़ेगी चलो उनसे भी मिल ही लेते है।

फिर वो दोनों दिया के घर पहुचे तो अन्नू वहां घर के बाहर ही खड़ी मिल गयी


अन्नू को देखकर तो कल्लू की हालत वैसे ही पतली हो जाती है पर आज उसे इतना भरोषा था कि मैंने लगभग 2 महीने से कोई गलत काम नही किया है तो दरोगा साहिबा कुछ करेंगी नही फिर कल्लू ने जा कर अन्नू को सलाम की या और बोला

कल्लू•मैडम मैन अभी सारी गलत कामो को छोड़ दिया है फिर अपने मुझे किस जुर्म में गिरफ्तार कर रही है मैडम अपने जो पिछली बार मारा था उससे तो मैं अभी तके उभर नही पाया और इस समय तो मैं छोटा सा सब्जी का दुकान चला रहा हु ।

अन्नू •अरे रुक जा पहले मेरी बात तो सुन ले मैने तुझे गिरफ्तार करने के लिए नही बुलाया है मैने तुम्हे इसलिये बुलाया है ताकि तू मेरे बारे में किसी को समझ सके मैं नही चाहती कि मुझे किसी पर बेवजह बल का प्रयोग करना पड़े

कल्लू •किसे समझना है मैडम

अन्नू•तूने सुना होगा कि आज एक लड़के को रेप के लिए गांव की पंचायत ने एक लड़के को सजा दी हैऔर मुजजे लगता है कि वह लड़की झूठ बोल रही है।

कल्लू•मैडम मैन भी सुना पर मुझे पक्का यकीन है कि प्रेम को झूठा फसाया गया है क्योंकि मैं रामु को बहुत अच्छी तरह से जानता हूं वो एक नम्बर का कमीना ओर घटिया लड़का है वह गांव की सभी लड़कियों पर गंदी नजर रखता है यंहा तक कि उसने अपनी बहन को भी नही छोड़ा है ।

अन्नू•यह तुम कैसे कह सकता है कि उसका सम्बन्ध अपनी बहन से भी है

कल्लू •आपसे क्या छुपा है मैं एक बार रात ने चोरी के लिए निकला था तो मैंने अपने आंखों से खुद देखा था

अन्नू दिया को बुलाती है और दिया से बोलती है कि मुझे उस लड़की के हर्ले कर चलो।दिया और दीपा दोनो सभी के साथ डाली के घर पहुचती है तोदेखती है वहा पर गांव की बहुत सारी औरते जमा थी ।अन्नू ने दिया से पूछा कि डाली को है तो दिया ने इशारा से बता दिया कि यही डाली है

गांव की सारी औरते पुलिश को देख कर एक तरफ हो गयी । तब सुमित्रा आगे आ कर अन्नू को बैठने को बोली । अन्नू बैठ गयी और सभी से वहां से जकने के लिए बोली ।अब वहां पर सिर्फ कल्लू ,दीपा,दिया, और 2 हवलदार के अलावा सुमित्रा और डाली थी । तब अन्नू बोली

अन्नू•मा जी आपका बेटा रामु नही दिख रहा है वह कहा है उसे भी बुलाकर लाये

सुमित्रा• अभी बुला कर लाती हु

तब सुमित्रा घर अंदर गयी और रामु को बुलाकर बाहर ले कर आई फिर अन्नू से बोली

सुमित्रा •दरोगा साहिबा मेरी बेटी के साथ गलत करने वाले को गिरफ्तार कर ली आप ।

अन्नू •नही अभी नही अभी वह हॉस्पिटल में उसकी हालत नाजुक है पर मैं यंहा पर डाली और रामु से पूछताछ करने के लिए आई हूं।

सुमित्रा • कैसी पूछताछ अपराधी तो वह है ना।

अन्नू •वही पता करने आई हूं बस कुछ प्रश्न है उन्ही के उत्तर चाहिए बस

तब अन्नू ने कल्लू को बुलाया उसे बोली कि रामु को अच्छी तरह से समझा दे कि मेरे हर प्रश्न कक सही उत्तर दे वरना मैं झूठ बोलने वालों की क्या हालत करती हूं

कल्लू ने जाकर रामु को सब बताया जिसे सुनकर उसकी हालत पतली हो गई और वह रोने लगा तो अन्नू ने उसे डॉट कर चुप कराया और बोली

अन्नू•देख सच बोलना क्योंकि सारी बाते मुझे पहले से ही पता है बस तेरे मुह से सुनना है तेरी बहन तो नाबालिग है वह तो बच जाएगी पर तु अपना सोच तेरे साथ क्या होगा और जब मैं अपने ओर आती हु तो मुर्दे भी बोलने लगते है।

यह सुनकर तो रामु की हालत और खराब हो गयी। फिर भी वह कुछ बोल नही रहा था वह सिर्फ रोये जा रहा था


तब कल्लू आगे आया और प्रेम को समझाते हुए बोला

कल्लू •देख रामु मैं लाख बुरा इन्शान सही पर आज मैं सुधर गया हूं और अपनी बीवी बच्चों के साथ सुख से रह रहा हु इसका पूरा श्रेय मैडम को जाता है इसलिए जो सच है वो बता दे नही तो तेरी रक्षा कोई भी नही कर पायेगा।

इतनी देर से खड़ी सुमित्रा को कुछ भी समझ मे नही आ रहा था यह हो क्या रहा है और सब रामु से किस गलती की बात कर रहे है तब वह पूछी

सुमित्रा• दरोगा साहिबा आप किस गलती की बात कर रही है मैं कुछ समझ नही पा रही हु कृपया मुझे सारी बात समझाए।

डाली जो इतनी देर से सर को नीचे करके बैठी थी कुछ बोल नही रही थी वह अन्नू की तरफ देख कर उसे अपनी माँ से कुछ भी ना बताने की गुहार की पर अन्नू ने उसे अनदेखा करते हुए उसकी मां की तरफ देखने लगी ।यह देख कर डाली को कुछ भी नही सुझा तो वो अन्नू के पैर पकड़ ली और अपने किये की माफी मागने लगी। क्योंकि डाली को यह समझ मे आ चुकी थी कि जो भी हमने किया है प्रेम के साथ वह सब इनको मालूम हो चुका है अगर यह बात माँ को पता चला कि मेरे भाई के साथ जिस्मानी सम्बन्ध है तो माँ को बहुत दुख होगा इसलिए वह अन्नू से यह बात नही बताने के लिए सिफारिश करती है और अन्नू से बोलती है कि

डाली•मैडम मुझे माफ़ करदे मुझसे गलती हो गयी अब आगे से ऐसी गलती नही करूँगी।

अन्नू• अभी शान्त हो जाओ नही अभी यंही पर सारी गर्मी उतार लुंगी तुम्हारी।तुम्हारे जैसे लड़की के कारण आज सरीफ लड़के भी बदनाम हो रहे है ।आज उस लड़के की ये हालत है कि उसके साथ कुछ भी हो सकता है वह पागल भी हो सकता है और शायद मर भी सकता है।

अभी तक शान्त रामु बोलता है कि

रामु•मैडम हमारी कोई ऐसी मनसा नही थी मैं तो सिर्फ यही चाहता था कि वह इस गांव से चला जाये ताकि मेरा रास्ता साफ हो जाये

सुमित्रा•उसकी ऐसी हालत करके तेरा कोंन सा मतलब सिद्ध हो रहा था अगर उस लड़के को कुछ भी हुआ तो ठीक नही होगा तेरे लिए और तुम दोनों ने मिलकर उस प्रेम को झूठा फसाया है।और तू बता कलमुँही तुझे ऐसा झूठ बोलते सरम नही आई

अन्नू•अभी तो आप कुछ भी नही जानती है अगर आप अपने बच्चों की करतूत सुनेंगी तो आप को बहुत दुख होगा।


सुमित्रा •ऐसा क्या कर दिया है जो आप ऐसा बोल रही है।

अन्नू•आप कुछ भी नही जानती है अगर आप जानती तो आप शर्म से अपना चहेरा किसी को नही दिखा सकती थी।

डाली•नही मैडम आप कुछ भी नही बताए नही तो माँ बर्दाशत नही कर पायेगी।

सुमित्रा•तू तो अब कुछ बोल मत नही तो मुझसे बुरा ओर कोई नही होगा।

अन्नू•आप जानती है कि रामु और डाली के जिस्मानी सम्बन्ध है और कल रात को जब ये घर के पीछे एक दूसरे के साथ सेक्स कर रहे थे तो प्रेम ने इन्हें ऐसा करते देख लिया था तो इनदोनो ने मिलकर उसे ही आरोपी शिद्ध कर दिया।

सुमित्रा तो यह सुनते ही जैसे उसके ऊपर पहाड़ ही टूट पड़ा और वह रोने लगी साथ मे डाली के गाल पर झापड़ मारने लगी जिसके कारण उसके दोनों हाथों की उंगलियों के निशान पड़ गए और बोली

सुमित्रा•डाली बोल दे कि यह सब जो बोल रहे है झूठ हैं मेरे संस्कार इतनी खराब तो नही थे

रामु•हा माँ तू सच बोल रही है यह लोग क्या कह रहे है मुझे कुछ बनी नही समझ मे आ रहा है क्या कोई भी अपनी ही बाहें के साथ ऐसी गिरी हुई हरकत कर सकता है यह सब इन लोगो की चाल है कि हम प्रेम पर लगाये हुए सभी आरोप वापस ले

यह सुनकर तो जैसे अन्नू घायल शेरनी की भांति गुस्से में उसे घूरने लगी और दहाड़ते हुए बोली।

अन्नू•तू और कितना झूठ बोलेगा अगर तू अपनी सलामती चाहता है तो तो अब सच बोल दे नही तो अब तेरा सच ओर झूठ का फैसला मसीन करेगी इस बारे में चाहे तो तू कल्लू से पूछ सक्तक है पर यह भी सोच ले अगर मैने ऐसा किया तो फिर तेरी एक भी हड्डी सही सलामत नही बचेगी।

यह सुनकर कल्लू के होश उड़ जाते है और वह तुरन्त रामु के पास जाकर बोलता है कि

कल्लू•देख रामु मैं पहले चोर था यह कहने में मुझे कोई शर्म नही ।मैं ही नही शहर के सारे गुंडे जिनके नाम सुनकर ही थर थर कापने लगते है यही है वो झूठ बोल तुझे कोई फायदा नही है उल्टा तेरी हालत और भी खराब हो जायेगी

अन्नू•कल्लू छोड़ जाने दे कहते है ना कि लातो के भूत बातो से नही मानते ।

वह हवलदार को आदेश देती है कि इसे पकड़ कर गाड़ी में दाल दो।

दो हवलदार आगे आकर उसे पकड़ने लगते है तोउसकी हालत खराब हो जाती है और वह चिल्ला उठा

रामु•यह सब सच है और वह रोने लगा

यह सुनते ही सुमित्रा बेहोश हो गयी।तब अन्नू ने हवलदार को आदेश दिया कि छोड़ दो

इतनी देर से शांत दीपा अचानक ही उठ कर आगे आकर रामु को मारने लगती है और बोलती है कि

दीपा•आज तुम्हारे कारण मैं अपने प्यार से दूर हो गयी हु अगर प्रेम को कुछ भी हुआ तो मैं तुम्हे जिंदा नही छोडूंगी।

यह सुनते ही वहां सबके पैरो ठाले जकमीं खिसक जाती है कि दीपा प्रेम से प्यार करती है यह बात तो सिर्फ दिया ही जानती थी और कोई नही ।इस लिये यह सबके लिए एक नई बात थीऔर यह कहते कहते दीपा रोने लगती है और

तब दिया उठ कर आगे आती है और उसे शांत कराति है


दिया•शांत हो जा मत रो कुछ भी नही होगा प्रेम को ।

अन्नू•अब वह मेरी जिमेदारी है उसकी चिंता तुम मत करो ।

अभी यह सब बाते चल रही थी कि सुमित्रा को होश आया जाता है क्योंकि डाली उसके चेहरे पर पानी मार रही थी ।जब होश में आई तो वह डाली को देख कर उसे अपने पास से जाने को बोलने लगी और बोली

सुमित्रा•तू मेरे सामने से अभी जा मैं तुझसे बाद में बात करती हूं पहले तो मुझे जाकर उस प्रेम से तुम दोनों की गलती की माफी मांगनी है क्योंकि तुम दोनों के कारण आज वह जिंदगी और मौत के बीच मे है और जो उसकी बेइज्जती हुई है वह छोड़ कर। वह अनाथ था बेचारा अब जाकर उसे परिवार का प्यार मिला था पर तुम दोनों के कारण अभी वह उससे भी वंचित हो गया है

अन्नू• मा जी आप उसकी चिंता ना करे अब वह मेरी जिमेदारी है

पर दीपा ने जब यह सुना कि प्रेम अन्नू की जिम्मेदारी है तो वह कुछ समझ नही पाई और अन्नू से पूछी

दीपा•मैं कुछ समझी नही मैडम आप कहना क्या चाहती है।

अन्नू •अभी मैं नही समझा सकती अभी मेरी सहेली आयगी तो वह सब समझा देगी।

तभी दिया रामु के हाथों पर कुछ देखती है तो वह कुछ सोच में पड़ जाती है अचानक उसे याद आता है कि जो कटे का निशान रामु के हाथ पर है वही निशान जो उस रात कुछ लड़को ने जो हमला किया था अन्नू पर वैसा ही था

तब वह रामु के पास जाकर उससे बोलती है कि

दिया •ये निशान जो तुम्हारे हाथ पर है वह कबसे है ।

यह सुनकर रामु की होश उड़ जाते है वो समझ भी नही पाता कि यह अचानक इस निशान के बारे में क्यों पूछ रही है

इस सवाल का जवाब रामु की माँ सुमित्रा देती है

सुमित्रा•बेटी यह निशान तो बचपन मे चोट लगने के कारण पड़े थे पर यह तुम क्यों पूछ रही हो

दिया •नही चाची कुछ भी नही बस कुछ याद आया तो पूछ ली।

सुमित्रा•नही बेटी कुछ बात तो है बताओ

दिया मन ने सोचती है मेरे पास कोई सबूत तो है नही सिर्फ निशान के कारण ही इस पर उस हमले का इल्जाम नही लगा सकती

सुमित्रा•रामु तूने दिया के साथ तो कोई हरकत तो नही की है ना क्योंकि अब तुझपर भरोसा नही है मुझे

रामु •नही माँ मैंने कुछ भी नही किया है।

दीपा फिर अन्नू से पूछती है कि

दीपा•मैडम प्रेम के बारे में आप कुछ कहने वाली थी बोलिये

अन्नू फिर एक फोन मिलाती है कुछ देर बात करती है और फिर आ कर सबसे कहती है कि अभी कुछ देर में मेरी वो सहेली आ रही है जिसके भाई का चहेरा प्रेम से मिलता है

तभी घर मे से एक औरत दौड़ती हुई आती है और कहतीहै कि

औरत1•सुमित्रा बहन मैंने डाली के कमरे की दरवाजा खुलवा रही पर वो काफी देर से पर वह नही खोल रही है मुझे डर लग रही है बहन

अन्नू•आपको ऐसा क्यों लग रहा है कि डाली अंदर कुछ कर लेगी।


सुमित्रा दौड़ती हुई घर के अन्दर जाती है औऱ दरवाजा खुलवाने की कोशिश करती है पर अंदर से कोई भी जवाब नही आ रहा था

फिर वह अन्नू के पास गई पर सारी बात बताई ।यह सुन कर अन्नू सहित सभी परेशान हो जाते है अन्नू दो सिपाही को दरवाजा तोड़ने को कहती है।

सिपाहीयो ने थोड़ी मेहनत करने के बाद दरवाजा तोड़ देते है और अंदर की नजारा देख कर सबके पैरो तले जमीन खिसक जाती है और सुमित्रा तो अंदर का नजारा देख कर ही बेहोश हो गयी

अंदर डाली अपने मुह में अपना दुपटा से कस कर बांध लिया था कि उसके मुह से आवाज ना निकलर अपने हाथ की नसे काट ली ओर खून बहुत ज्यादा निकल रही थी


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