पापी परिवार--9





 पापी परिवार--9





इसके पहले कम्मो कोई अगला कदम उठा पाती, उसे एहसास हुआ जैसे कमरे के दरवाज़े पर खड़ा कोई साया उसके इस शर्मनाक कार्य को देख रहा हो ..आँखों की पुतलियाँ घुमा कर उसने चेक किया तो दरवाज़े पर उसका लाड़ला बेटा निकुंज, किसी पत्थर की भाँति जड़ बना अपनी मा की करतूत देखता हुआ दिखाई दिया


शरम से कम्मो की आँखें बंद हो गयी ..अब सर ऊपर उठाने से क्या लाभ जब उसके पुत्र ने देख ही लिया कि उसकी मा अपनी बेटी की चूत को चाट रही है ..उसकी बहेन की टाँगो की जड़ मे अपना मूँह घुसाए हुए है


निकुंज फॉरन होश मे आया और दरवाज़े से हट कर अपने कमरे मे चला गया ..गेट बंद होने की आवाज़ से ज़ाहिर था कि वो किस कदर अपनी मा से खफा हुआ है ..आहत हुआ है


हालाकी इतनी दूर से निकुंज ये नही जान पाया कि आक्चुयल मे कम्मो कर क्या रही थी ..उसकी जीभ उस वक़्त निक्की की चूत से सटी थी या नही ..बस अनुमान स्वरूप अपने मन मे बीज बोने के बाद वो दरवाज़े से हट गया था


वहीं कम्मो इस सोच मे डूब गयी कि उसके बेटे के मन मे इस सीन को देखने के बाद क्या चल रहा होगा ..उसकी सोच तो इस वक़्त यही कह रही होगी कि उसकी मा कितनी बड़ी छिनाल है ..जो अपनी सग़ी बेटी के साथ अन - नॅचुरल रीलेशन ( लेज़्बीयन ) बनाने की चाह रखती है ..क्यों कि निक्की का सोना वो देख चुका था, और यहाँ उसे एक तरफ़ा कम्मो ही दोषी दिखाई दी होगी


" मैं अभी जा कर बता देती हूँ, मुझे ऐसा क्यों करना पड़ा ..ग़लती ये करें और बदनामी मेरी हो "


इतना कह कर कम्मो ने अपना झुका चेहरा चूत से ऊपर उठा लिया .. लेकिन उसके बेड से नीचे उतरते ही निक्की ने अपनी उस टाँग को मोड़ लिया जो चोटिल नही थी और एक बार फिर उसकी बालो से भारी योनि का दीदार कम्मो की आँखें करने लगी


" सबूत के साथ बताउन्गि "


नाराज़ कम्मो ने वापस वही किया जो उसका बेटा थोड़ी देर पहले देख कर, गुस्से से अपने कमरे मे चला गया था ..अपने हाथ की कोमल उंगलियों से झाटें छूते ही कम्मो का चेहरा फीका पड़ गया ..क्यों कि उसकी बेटी की योनि इस वक़्त बड़े गर्व से अपने होंठो को चिपकाए आराम फर्मा रही थी और दोनो फांको का फुलाव इतना ज़्यादा था, कि कोई पागल ही उसे चुदि हुई कहता


कम्मो ने फ्रोक को नीचे सरका दिया और अपने पैर रगड़ती हुई कमरे से बाहर जाने लगी ..उसे तो इसी वक़्त शरम से ज़मीन मे धस्स जाना चाहिए था ..वो खुद को कोस्ती हुई किसी ज़िंदा लाश की तरह सीढ़ियों तक जा पहुचि ..एक आख़िरी बार निकुंज के कमरे के बंद दरवाज़े को देखा और यहीं जनम हुआ ' उसका और उसके अंतर्मंन के बीच द्वंद युद्ध का '


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अपने कमरे मे जाने से पूर्व आदत - अनुसार, वो निम्मी के कमरे मे झाक कर अंदर के हालात पर गौर करती थी ..लेकिन इस वक़्त क्षण मात्र के लिए भी अपना चेहरा उसके कमरे की तरफ नही मोड़ा ..बल्कि सीधे अपने कमरे मे एंटर हो गयी और बेड पर बैठ-ते ही उसके अंदर की आवाज़ बाहर चली आई


" फिर ग़लती कर रही है, दरवाज़ा खुला छोड़ कर "


उसके अंतर्मंन ने उसे टोका


" तुम कौन ? "


कम्मो ने चौके हुए जवाब दिया ..इस तरह की आवाज़ उसने जीवन पर्यंत कभी नही सुनी थी


अंतर्मंन :- " मैं तेरा अंतर्मंन हूँ "


कम्मो :- " लेकिन इससे पहले तो कभी नही मिली ..ना टोका, ना ही कुछ कहा "


अंतर्मन :- " जब इंसान की सोच दो - तरफ़ा हो जाए और भयवश उसका दिमाग़ काम करना बंद कर दे ..तब मैं प्रकट हो जाता / जाती हूँ ..मदद करने के लिए "


कम्मो :- " अच्छा !!!! तो क्या अभी मेरी सोच दो - तरफ़ा हा ..हां ये ज़रूर है, मैं डरी हुई हूँ ..लेकिन तुम मेरी क्या मदद कर पाओगि ? "


अंतर्मन :- " बिल्कुल करूँगी !!!! लेकिन इससे पहले कमरे का दरवाज़ा लगा दे "


कम्मो :- " पर क्यों ..मैं अभी ऐसा कौन सा ग़लत काम कर रही हूँ ..जिसके चलते कमरे का दरवाज़ बंद करना पड़े "


अंतर्मन :- " नादान हो ..हर बार सिर्फ़ इसी वजह से मात खाई हो ..ना आज निक्की के कमरे का दरवाज़ा खुला होता, ना निकुंज तुझे ऐसी हालत मे देखता, ना तू शर्मिंदा होती और ना ही मुझसे तेरा मिलन हो पाता ..तेरे बगल वाला कमरा निम्मी का है ..सोच अगर वो तुझे गहरी सोच मे डूबा देख ले, चिंता मे खोया देख ले और यहाँ तक मुझसे बातें करते भी ..फिर तेरा क्या होगा ..बेटा तो कभी ना कभी माफ़ कर ही देगा, या किसी को कुछ नही बताएगा ..लेकिन निम्मी क्या कर सकती है, इस बात को नज़र अंदाज़ मत कर "


कम्मो :- " सही कह रही हो ..जाना मत मैं अभी आई "


निम्मी का ख्याल आते ही कम्मो और भी ज़्यादा घबरा गयी और दौड़ कर अपने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया


वापसी मे भी उसके कदम रफ़्तार से वापस लौटे और फिर से बेड पर बैठते हुए उसने, अपने अंतर्मंन को पुकारा


अंतर्मन :- " मैं यहीं हूँ तेरे पास ..हां अब ठीक है "


कम्मो :- " मेरी मदद करो ना ..मैं इस मुसीबत से बाहर कैसे आउन्गि ? "


आंतर्मन :- " बेटे को मना ले "


कम्मो :- " लेकिन कैसे ..मैं तो उससे नज़रे तक मिलाने लायक नही रही "


अंतर्मन :- " सब सच - सच बता दे ..शुरूवात से "


कम्मो :- " नही होगा मुझसे ..कुछ और सोचो ..अपने पति को ( दीप ) बता दूँ, वो मेरा साथ ज़रूर देंगे "


अंतर्मन :- " पागल पन मत कर ..दीप तुझे पहले ही निम्मी के साथ ऐसी हरक़त करते हुए देख चुका है ..हां तूने उसे इसकी वजह बताई थी ..लेकिन निक्की के मॅटर मे तेरी सफाई कौन सुनेगा ..वो सीधी है ये सब जानते हैं, उल्टा तू फस जाएगी ..सब सोचेंगे तू अप्राक्रातिक संबंध बनाने की इक्छुक हो गयी है, वो भी अपनी सग़ी बेटियों के साथ "


कम्मो :- " ये ग़लत है ..मैं ऐसी नही हूँ "


अंतर्मन :- " कोई नही मानेगा ..जिन हालातों मे तू दो बार पड़की जा चुकी है, उसे देख कर तो बिल्कुल नही "


कम्मो :- " फिर क्या करूँ ..तुम तो मुझे और डरा रही हो "


अंतर्मन :- " अब चुप-चाप सुन ..जिस शक़ के चलते तूने ये सब किया वो तेरे नज़रिए से एक दम ठीक माना जा सकता है ..लेकिन अगर तू निकुंज को अपने शक़ की हक़ीक़त बताती है, तो उसका तेरे ऊपर से विश्वास उठ जाएगा, और हमेशा नफ़रत और तिरस्कार की नजरो से तुझे देखेगा ..कैसे मान लेगा कि तुझे अपने सगे बच्चो पर शक़ हुआ "


कम्मो :- " लेकिन उसके शॉर्ट्स मे से निक्की की पैंटी का निकलना ..इसका जवाब है तुम्हारे पास "


अंतर्मन :- " बोला था ना चुप रहना ..खेर छोड़ अब इस का जवाब देती हूँ ..जिस वक़्त की ये बात है, उस वक़्त तू इस कमरे मे अपने पति से चुद रही थी ..और वहाँ नीचे तेरी बेटी के पास निकुंज के अलावा कोई और मौजूद नही था ..निक्की की चोट तो तेरे सामने की है, बेचारी अपने घुटने के दर्द के चलते एक कदम भी नही चल पाती, और तभी निकुंज उसे गोद मे उठा कर घर लाया था, सब तेरी आँखों के सामने हुआ ..मान ले अगर दोनो उस वक़्त घर अकेले मे होते और निक्की दर्द से तड़पति, तो क्या निकुंज तेरे आने का वेट करता, नही करता ..चोट घुटने की थी और निक्की शॉर्ट्स वगेरा कभी नही पेहेन्ति है, तुझे भी पता है ..और शायद इसी वजह से निकुंज ने उसे निम्मी वाला ड्रेस ला कर दिया होगा ताकि उसकी बहेन के घुटने पर फुल कपड़े की रगड़ ना पड़े ..साथ ही वो अपना घुटना मोड़ भी सके "


कम्मो बड़े ध्यान से एक - एक लफ्ज़ पर गौर कर रही थी ..हलाकी उसे पता चल गया, कि सुनाई देने वाली आवाज़ खुद उसकी है, और सारी सोच भी, ये सब उसका मन उसे सुना रहा है, सोचने पर मजबूर कर रहा है कि इस बुरे हालात से बाहर कैसे निकला जाए ..लेकिन इन सब से परे उसे खुद से घृणा महसूस हो रही थी, शायद अपनी औलादो को खुद से बढ़ कर चाहने का नतीजा था, जो वो बदनामी के इस कलंक को सह नही पा रही थी, ख़ास कर अपने लाड़ले निकुंज से नज़रें मिलाना तो दूर, अब वो कहीं की नही रही थी


अंतर्मन :- " ड्रेस का मॅटर क्लियर हुआ, अब बात पैंटी की करते हैं ..हो सकता है ड्रेस पहेन - ने के बाद निकुंज बाथ - रूम से उसके लिए सॉफ पैंटी भी लाया हो ..इसकी वजह शायद उतरे कपड़ो मे उसने निक्की की गंदी पैंटी शामिल देखी होगी ..अब हक़ीक़त मे तो तुझे पता नही कि बहेन ने भाई के सामने अपने कपड़े बदले या कोई आड़ ले कर ..लेकिन यहाँ ये ज़रूर कह सकते हैं कि शरम्वश दोनो एक दूसरे से पैंटी वाली बात नही कर पाए होंगे ..और इसके बाद वही हुआ जो तूने देखा ..निकुंज की शॉर्ट्स मे बहेन की पैंटी होने का रीज़न इसके अलावा कुछ और नही हो सकता "


कम्मो :- " ये सब तो मैने सोचा ही नही था ..और अब तो निकुंज से अपने शक़ का जिकर भी नही कर सकती "


कम्मो डर गयी अब निकुंज उसे कभी माफ़ नही करेगा ..कल को उसके बेटे की शादी होगी ..अगर तनवी को अपनी सास की करतूत पता चली तब वो क्या करेगी, बेटे के साथ - साथ बहू की नज़रों मे भी गिर जाएगी ..फिर निक्की तो शुरू से अपने भाई की प्यारी रही है ..' इसके बाद अपने ही घर मे कम्मो की हालत एक कुतिया से बदतर हो जाएगी '


( पॉज़िटिव सोच से अब उसका दिमाग़ नेगेटिव होने लगा था )


" नही - नही मुझे कैसे भी कर के निकुंज को मनाना होगा, उसे विश्वास दिलाना होगा, उसकी मा इतनी नीच नही जो अपनी बेटियों के साथ अपना मूँह काला करे "


कम्मो के गले से शब्दो का बाहर निकलना हुआ और उसके अंतर्मंन ने उसे वापस अपनी मौजूदगी का एहसास करवा दिया


अंतर्मन :- " अब आगे सुन ..सबसे पहले अपनी घबराहट और डर पर काबू कर, भूल जा तेरे साथ ऐसा कुछ हुआ भी है ..निकुंज के लिए वक़्त निकाल, शायद पुणे टूर इसमे तेरी मदद करे ..फ्लाइट की जगह बाइ रोड जाना, बेटे के साथ वक़्त बिताने का अच्छा मौका मिल जाएगा ..निक्की की चोट के चलते वो तुम्हारे साथ जा नही पाएगी, ये भी एक प्लस पॉइंट है ..घर से सफ़र पर निकलने का टाइम ऐसा चुनना, जिससे पुणे पहुचने के बाद बाकी की सारी रात तुम्हे होटेल के कमरे मे बितानी पड़े, कमरा सिंगल हो, तो और भी अच्छा ..सुन कम्मो !!!!! तू उसके करीब जाए, या वो तेरे करीब आए ..फ़ायदा तुझे ही मिलेगा ..सफ़र के दौरान प्यार भरी बातें, थोड़ी मस्तियाँ तुम्हे नज़दीक लाएँगी ..और दूरियाँ मिट-ते ही सारी ग़लतफहमियों का अंत भी हो जाएगा ..फिर देखना मेरा शुक्रिया अदा करने का वक़्त नही रहेगा तेरे पास ...... "


कम्मो :- " अगर फिर भी कोई बात नही बनी तो ? "


इतना सब सोचने के बाद भी कम्मो बैचैन थी, तो उसने खुद की बात को बीच मे काट कर सवाल किया


" फाइनली, फॉरन नंगी हो कर बेटे के कमरे मे चली जा ..और उसके लंड पर जम कर उछल्ना ..अब भी तेरे अंदर इतनी कशिश बाकी है, जिसके दम पर तेरा बेटा ..अपनी होने वाली पत्नी, बहेन, और यहाँ तक की पूरी दुनिया को भूल कर ता-उमर तेरा गुलाम बन कर रहेगा ..याद रख !!!!! एक औरत के पास उसका सबसे बड़ा हथियार होता है उसका जिस्म, जिस पर तूने अभी जंग लगा रखी है ..बात ख़तम, मैं चली "


कम्मो :- " क्य्ाआआआआअ !!!! "


एक दम से कमरे मे सन्नाटा पसर गया ..अंतर्मंन गायब, सोच ख़तम, रह गयी ' अकेली ' कम्मो ..पर एक नये बदलाव के साथ


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कुछ देर बाद उसके दरवाज़े पर दस्तक हुई ..जिसे सुन कर कम्मो ने अपनी बंद आँखें खोली, लेकिन अब उनमे डर नाम की कोई चीज़ शेष नही थी


" मोम आज खाना नही मिलेगा क्या ? "


दरवाज़े को पीट-ते हुए निम्मी ने चिल्लाया


" क्यों नही मिलेगा ..तू नीचे जा मैं अभी आई "


कम्मो ने जवाब मे कहा और बेड से उतर कर सीधे ड्रेसिंग-टेबल के सामने आ कर खड़ी हो गयी


" धात्ट !!!! "


मिरर मे अपना अक्स निहारते ही उसके गालो पर लाली छाने लगी ..आज इस एक दिन मे कितने रंग देखे थे उसने


दिन मे पति से साथ संसर्ग, पूरे 15 साल बाद ..फिर सास बनने की खुशी ..बेटे रघु के घर वापस लौटने का इंतज़ार ..अट लास्ट, लाड़ले निकुंज को मनाने की खातिर हद से गुज़रने की लालसा


कम्मो का रोम-रोम पुलकित था, लगा जैसे अभी जा कर अपने बेटे को, अपने सीने से चिपका ले ..कह दे ' तू मुझे सबसे प्यारा था, है और हमेशा रहेगा ' ..कह दे .. ' तेरी मा तुझे वापस पाने के खातिर मचल रही है, उसे मत तडपा और अपना ले '


कम्मो के सीने मे दर्द होने लगा, लगा जैसे ममता वश उसके स्तनो मे दूध भरने लगा हो, जिसे अगर हॉल मे नही निचोड़ा गया ..तो उसकी छाती फट पड़ेगी ..और पूरा दूध व्यर्थ मे बह जाएगा


" बच्चे अब बड़े हो गये हैं ..फिर कॉन मदद करेगा इन्हे खाली करने मे ? "


एक सवाल से उसका परिचय हुआ और आँखों के सामने वही द्रश्य घूम गया ..जब बचपन मे वो घंटो अपने छोटे बेटे को अपनी छाती से चिपकाए रहती थी, शायद तभी उसे निकुंज से सबसे ज़्यादा लगाव था


" एक मा के लिए उसका बेटा कभी बड़ा नही होता ..हां कभी - कभी हालात ज़रूर बदल जाते हैं ..पर ममता का अंत कभी नही होता "


उसके हाथ स्वतः ही अपने स्तनो को मसलने के लिए ऊपर उठने लगे ..लेकिन उन्हे छुते ही कम्मो और भी ज़्यादा अधीर हो उठी


" हक़ नही छीनुन्गि ..जिसका है उसे ज़रूर मिलेगा "


बस इसके आगे ना तो उससे कुछ बोला गया ना ही शीशे के सामने खड़ी रह पाई ..एक आनंदमयी स्फूर्ति और ताक़त से उसका परिचय हुआ ..और वो दौड़ती हुई दरवाज़ा खोल कर नीचे हॉल मे आ गयी


शैतान निम्मी अपनी बड़ी बहेन के नज़दीक बैठी उससे बातें कर रही थी ..तभी कम्मो ने उस कमरे मे परवेश किया


" उठ गयी बेटा ..बस आधे घंटे मे खाना तैयार हो जाएगा "


इतना कह कर वो किचन मे पहुचि ..जिस थकान का जिकर आज उसने अपनी पति से किया था, वो उसमे झूठी साबित होने लगी ..और कुछ ही अंतराल के पस्चात चहु-ओर सुगंधित खुसबू का फैलना शुरू हो गया ..भोजन स्वादिस्त तभी बनता है, जब तंन की मेहनत के साथ उसे बनाने वाले शॅक्स के मन की प्रसन्नता का जुड़ाव भी उसमे शामिल हो ..100 की सीधी एक बात ..कम्मो बदल रही थी, अपनी जवानी को महसूस कर रही थी


आज रात का खाना निक्की के कमरे मे लगाया गया ..निकुंज भी वहाँ आया, बात का बतंगड़ ना बने इसके चलते उसने जल्दी - जल्दी 2 - 3 रोटियाँ अपनी गले से नीचे उतारी और अपने कमरे मे उठ कर जाने लगा ..ना तो एक नज़र उसने अपनी बहेन निक्की को देखा था ना मा कम्मो को


" भाई आपने तो कुछ खाया ही नही "


ये आवाज़ निकली निक्की के गले से ..जो सिर्फ़ निकुंज की जल्दबाज़ी पर गौर फर्मा रही थी ..और इसकी वजह से वो बेख़बर भी तो नही थी


" हां बेटा थोड़ा और खा ले "


कम्मो भी बीच मे बोल पड़ी ..जानती थी इस तरह निकुंज की नाराज़गी कम होने के बजाए, और बढ़ती ..लेकिन बेटे से बात करने का इससे अच्छा टॉपिक उसे नही सूझा


" मैने खा लिया है, ऑफीस के पेपर्स रेडी करूँगा "


निकुंज कमरे से बाहर जा पाता इससे पहले कम्मो फिर से बोल पड़ी


" कल शाम तुझे मेरे साथ पुणे निकलना है, रघु को वापस लाने "


कम्मो ने नॉर्मली कहा ..लेकिन उसकी इस बात से कुछ पल के लिए कमरे मे सन्नाटा पसर गया ..यहाँ तक निम्मी को खाते - खाते थस्का लगा और खाँसते हुए वो पानी का ग्लास उठाने लगी


" हे हे हे हे ..देखा मोम, देखा भाई ..बड़े भैया का नाम सुनते ही इसकी वाट लग गयी "


निक्की ने निम्मी की हालत पर हँसते हुए कहा ..उसे बीता वो थप्पड़ याद आ गया जो निम्मी की नादान हरक़त पर रघु ने उसे मारा था ..जब वो उसकी पिस्टल लेकर अपने स्कूल चली गयी थी ..वो तो अच्छा हुआ स्कूल स्टाफ मे रघु का ख़ौफ़ था, वरना पक्का पोलीस केस बनता और निम्मी को स्कूल से बाहर निकाल दिया जाता


" म ..म ..मैं क्यों डरने लगी ..भैया से ..अब मैने कोई ग़लती नही की "


निम्मी को इस तरह हक़लाता हुआ देखा कर ..निकुंज तक अपनी हसी नही रोक पाया और एक आख़िरी नज़र अपनी बेशरम मा पर डालने के बाद कमरे से बाहर चला गया ..वहीं कम्मो उसके हंसते चेहरे मे खो गयी, लगा जैसे उसके बेटे के दिल से भादास का लेवेल थोड़ी देर के लिए ही सही, मगर कम तो हुआ


खाना निपटने के बाद निम्मी भी कमरे से बाहर चली गयी ..अब बचे निक्की और कम्मो, तो उनकी साधारण बातचीत का नतीजा रहा जो कम्मो ने उसके कमरे ही सोने का निर्णए लिया ..और कुछ देर पश्चात मा - बेटी दोनो नींद के आगोश मे चले गये


दूसरे दोनो कमरो मे नींद आँखों से कोसो दूर थी ..जहाँ निकुंज को अपनी मा के चरित्र पर आश्चर्य होने लगा था, वहीं निम्मी अपने बड़े भैया के घर लौट आने के डर से सारी रात सो नही पाई ....



निकुंज के कमरे मे :-


रात के 3 बज गये, पर निकुंज सिर्फ़ करवटें बदलता रहा ..नींद क्या, इस वक़्त तो उसकी आँखें अंगारों सी लाल थी ..रह - रह कर उसके जहेन मे वही नज़ारा घूम रहा था, जब उसकी ' बदचलन ' मा अपने सग़ी बड़ी बेटी की चूत चाटने मे व्यस्त थी ..हलाकी अब भी वो कम्मो के लिए अपनी ज़ुबान पर इस तरह का घिनोना शब्द प्रयोग मे नही ला पाता ..लेकिन उसकी सोच तो बार - बार यही कह रही थी .. ' उसकी मोम लेज़्बीयन बन गयी है '


बरसो बीत गये, कम्मो कभी घर से अकेली बाहर नही गयी, जाती भी थी तो अपने पति या बच्चो को साथ ले कर, यहाँ तक कि हर बार बाहर जाने से पहले उसका तर्क होता ' मुझे भीड़ - भाड़ पसंद नही आप लोग चले जाओ ' ..फिर उस पर ' बदचलन ' होने का आरोप लगाना तो स्वयं ब्रम्‍हा के लिए असंभव था ..निकुंज की क्या औक़ात


" मोम पहले ऐसी नही थी ..फिर अब क्यों ? "


बस इसी सवाल पर आ कर उसका दिमाग़ काम करना बंद कर देता ..बचपन से ले कर आज तक उसे कम्मो से कोई शिक़ायत नही रही थी ..लेकिन आज वो चाहता था, अभी और इसी वक़्त अपनी मोम के कमरे मे जाए ..और जी भर के उससे लड़े ..अपने सवाल का जवाब पूच्छे .. ' आख़िर क्यों ? "


" डॅड की ग़लती भी कम नही ..पैसे कमाने के चक्कर मे उन्होने अपनी बीवी और बच्चो पर कभी ध्यान नही दिया ..मुझे तो लगता है मोम के इस अन-नॅचुरल बिहेवियर के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार वही हैं "


अकेली कम्मो पर उंगली उठाना निकुंज से नही हो पाया ..आज जो कुछ उसने देखा, प्रेमवश वो सब कुछ भुला देता ..लेकिन सही वजह पता चलने के बाद


लेटे लेटे उसे प्यास लगने लगी ..रात के खाने के बाद से उसने एक घूट पानी भी, गले से नीचे नही उतारा था


" आज तो बॉटल भी साथ नही रख पाया "


वो बेड से उठा ..ज़मीन पर पग धरते ही उसके सर मे तीव्र गति से दर्द महसूस होने लगा ..हलाकी दर्द सर मे नही उसके दिल मे है ..बस गेहन चिंतन मे डूबने से उसकी टीस, दिमाग़ की नसो पर वार कर रही थी


जैसे - तैसे वो अपने कमरे से बाहर आया और किचन मे रखे फ्रिड्ज से बॉटल निकाल कर एक बार ही मे अपने प्यासे गले को तर करने लगा ..पानी से पेट भरना कितना मुश्क़िल होता है जब आप के सामने अन्न का अथाह भंडार रखा हो ..लेकिन सुबह निक्की के बदलाव और रात मे कम्मो की शर्मनाक हरक़त को देख कर उसने ठीक से खाना तक नही खा पाया था


वापसी मे उसके मन मे लालसा उठी .. ' क्यों ना अपनी बहेन के मासूम चेहरे को देखा जाए, दिन मे वो चोटिल हुई थी ..लेकिन बाथ-रूम के हादसे के बाद से निकुंज ने अब तक अपनी बहेन से कोई बात नही की थी '


" कम से कम मैने खाने पर तो उससे पूछा होता ..' अब तेरा दर्द कैसा है ? ' "


उसके कदम निक्की के कमरे की तरफ बढ़ गये ..हल्के ज़ोर से उसने कमरे का दरवाज़ा खोला, जो अक्सर उसे खुला ही मिलता था .. ' जब मन पापी ना हो तब पर्दे की कोई एहमियत शेष नही रहती '


कमरे की लाइट जलाने के बाद उसने बेड की तरफ अपनी नज़रें घुमाई


" मोम !!!! "


उसके मूँह से ये शब्द बाहर आते - आते बचा ..निक्की को अपनी बाहों मे समेटे कम्मो उसे, उसके साथ बेड पर लेटी दिखाई दी


क्षन्मात्र मे निकुंज ने लाइट ऑफ कर दी ..और तेज़ी से दरवाज़ अटका कर अपने कमरे मे लौट आया


उसके दिल मे लगे घाव को इस सीन ने और भी ज़्यादा ज़ख़्मी कर दिया ..वो तो भला हो उसके उसके शांत स्वाभाव और सैयम का जो उसने चीखा नही ..नही तो अभी हाल कम्मो को अपनी प्यारी बहेन के बिस्तर से अलग करवा देता


" लेकिन किस हक़ से ..वो मा है उसकी "


एक पल को निकुंज पॉज़िट्व सोचता और दूसरे पल उसकी थिंकिंग नेगेटिव मे बदल जाती


" वो अब मा नही रही उसकी ( निक्की ) ..प्रेमिका बन गयी है ( लेज़्बीयन ) "


सहसा उसकी आँखों की किनोर छल्छला उठी ..इज़्ज़त बनाने मे ता-उमर बीत जाती है, लेकिन गवाने मे पल भर शेष नही लगता ..मा की ममता की सारी छवि धूमिल हो कर, कम्मो उसे अपनी बहेन की सबसे बड़ी दुश्मन दिखाई देने लगी ..जिसकी वजह से उसकी बहेन का जीवन किसी अंधे कुँए मे दफ़न हो कर रह जाता


" भाड़ मे जाए शादी ..रघु को घर लाने के बाद मैं निक्की को अपने साथ कहीं दूर ले जाउन्गा ..माना पैदा उसे मोम ने किया है ..लेकिन डॅड की जगह पाला मैने है ..मैं कतयि अपनी बहेन के साथ इस तरह का घिनोना कार्य होते नही देख सकता "


इसके साथ ही निकुंज अपने घर से बग़ावत करने को राज़ी हो गया और कम्मो के साथ पुणे टूर पर जाने की मोहर भी लग गयी


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वहीं 1स्ट फ्लोर पर निम्मी का कमरा शांत ज़रूर था, लेकिन उसका मन शांति से कोसो दूर


" भैया के घर आने के बाद मेरी क्या हालत होगी ..फक !!!! "


घबराहट, नाराज़गी, डर ..केयी तरह के रंग उसके चेहरे पर इस वक़्त देखे जा सकते थे


1) शॉर्ट ड्रेसस ( बॅन ) :- सिर्फ़ सलवार - कमीज़ से काम चलाना पड़ेगा


2) रात को जल्दी सोना ..सुबह जल्दी उठना


3) फ्रीली घूम नही पाएगी ..घर के अंदर हो / या बाहर


4) बार बार जो ये दाँत बाहर आ जाते हैं ..यक़ीनन इन्हे टूटने मे ज़्यादा वक़्त नही लगेगा


5) एलेक्ट्रॉनिक गॅडजेट्स का मिनिमम युजिज


6) सबसे बड़ी बात उसकी आज़ादी छिन कर कमरे की चार दीवारी मे क़ैद हो कर रह जाएगी ..हो सकता है उसके भैया उसके इन्स्टीत्यूट के पन्गो को भी जान ले


" नही नही, भैया इस वक़्त पागल हैं ..उनका दिमाग़ काम नही करता "


निम्मी ने भयवश अपना थूक निगल कर, सूखे गले को तर किया ..लेकिन अगले ही पल उसे बीता वो थप्पड़ याद आ गया, जिसका दर्द आज भी याद कर वो सेहेम जाती है


" पागल तो वो पहले भी थे, जब जमाने भर की लड़कियों का बचाव किया तो मेरी तो खटिया खड़ी कर देंगे ..भाभी तक को गोली मार दी, निम्मी !!!! तेरी आने वाली ज़िंदगी के लोड्‍े लगने वाले हैं "


इसी के साथ ही उसने अपनी आँखों को ज़ोर से भींच लिया और झूट - मूट सोने का नाटक करने लगी ..रघु से डरने की मेन वजह थी .. ' उसका कॅरक्टर, उसके उसूल, और सबसे बड़ा उसका जिगर '


" रिलॅक्स निम्मी !!!! ये दो दिन तो हैं ही तेरे पास ..जी ले जितना जी सकती है ..सारी मस्ती इन्ही दो दिनो मे पूरी कर ले ..क्या पता इसके बाद तुझे आज़ादी की साँस तक लेना नसीब ना हो "


खुद का साहस बढ़ा कर उसने सोने की कोशिश की और थोड़ी देर बाद इसमे कामयाब भी हो गयी


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अगली सुबह अपने टाइम से हुई ..लेकिन आज ' चावला ' परिवार के हर शॅक्स ने एक बड़े बदलाव के साथ अपनी पलकें खोली


किसी ने खुशी से ( निक्की ) ..किसी ने तड़प से ( कम्मो ) ..किसी ने दुखी मन से ( निकुंज ) ..तो किसी ने डर से ( निम्मी ) ..मात्र दीप ही ऐसा सदस्य रहा, जिसने एक साथ इन सारे बदलाओं को महसूस किया और स्वीकारा भी


नाश्ते की टेबल आज भी वैसी ही सजी, बस सन्नाटा ज़्यादा छाया रहा ..हर सदस्य कुछ ना कुछ सोचते हुए जुगाली करने मे व्यस्त था ..आँखें बार - बार कुछ देखने की कोशिश करती ..लेकिन ज़ुबान साथ नही दे पाती, खामोश रह जाती


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कुछ देर बाद दीप, कम्मो को शिवानी से मिलवाने ले गया और वापसी मे घर लौट-ते वक़्त कार मे उनकी सामान्य बातचीत होने लगी


" तो कैसा लगा बड़ी बहू से मिल कर ? "


दीप ने स्माइल करते हुए पूछा, वो शिवानी को अपने घर लाने मे सफल जो हो गया था ..साथ ही ससुर - बहू दोनो अपने प्यार कर इज़हार भी कर चुके थे


" अच्छी है ..लेकिन रघु के हिसाब से आप को छोटी नही लगती ..मेरा मतलब है वो ध्यान तो रख लेगी ना हमारे बेटे का ? "


कम्मो ने जवाब दिया, इस वक़्त उसके चेहरे पर मिश्रित भाव थे


" ये तो तुमने बिल्कुल सही कहा, रघु की बीमारी के मद्देनज़र उसे संभाल पाना बेहद मुश्क़िलों भरा होगा ..लेकिन कम्मो ये लड़की छोटे शहर की है, मुझे यकीन है ख़ास कर तुम्हे तो शिक़ायत का मौका देने से रही ..फिर जिन घरो मे शुरू से ही अभाव रहे हों, उन घरो की लड़कियों मे त्याग की भावना ज़्यादा रहती है ..उदाहरण स्वरूप .. ' मेरा पेट भरे या नही ..बाकी परिवार का भरना चाहिए ' "


दीप ने अपनी बात पूरी भी नही कर पाई, और कम्मो फटी आँखों से उसके होंठो को हिलता देखने लगी


" क्या हुआ !!!! मैने कुछ ग़लत कह दिया क्या ? "


दीप उसके रियेक्शन से चौक सा गया ..इस तरह आश्चर्य से उसकी बीवी ने उसे पहले कभी नही देखा था


" नही नही - कुछ नही ..मुझे शिवानी पसंद है ..कहना तो ग़लत होगा, लेकिन तनवी से ज़्यादा लगाव महसूस किया मैने शिवानी से मिल कर "


ये शब्द कम्मो के नही, उसके अंदर की ईर्ष्या बाहर निकल आई थी ..कल रात के हादसे ने उसे अपने बेटे से मीलों दूर जो कर दिया था, इतनी दूर कि वापस उसके पास जाने मे कम्मो को तनवी और यहाँ तक कि अपनी बेटी निक्की तक से सामना करना पड़ता ..बेटी तो पराया धन है, एक ना एक दिन घर से रुखसत होना ही पड़ेगा ..लेकिन बीवी मिलने के बाद निकुंज सच मे उससे कट सा जाता और जो दूरियाँ मा - बेटे के दरमियाँ आई हैं, उन्हे मिटाना असंभव हो जाएगा


" क्या हुआ - क्या सोचने लगी ? "


दीप के सवाल से कम्मो यथार्त मे लौट आई


" जी कुछ नही ..आप कहिए - क्या कह रहे थे "


कम्मो ने खुद को नॉर्मल करते हुए कहा


" पता है तुम्हे शिवानी से ज़्यादा लगाव क्यों महसूस हुआ ..वो इस लिए, कि कहीं ना कहीं अपनी जवानी मे तुम भी बिल्कुल उसके जैसी ही थी ..घर से भागने के बाद हम ने कितने बुरे दिन देखे, अब तो याद करने मे भी रोना आ जाता है ..छोटा सा स्टोर रूम, और अपने दोनो जुड़वा बच्चो को छाती से चिपकाए, सामने की दीवार मे तुम्हारे पैर अड़ा करते थे ..रात - रात भर मैने तुम्हारी टाँगो मे उठते दर्द को महसूस किया, जो सीधी ना हो सकने की वजह से हमेशा मूडी रहती थी ..मुझे लगता, मैं तुम्हे कोई सुख नही दे पाया ..यहाँ तक, दो नीवाले प्यार तक के...... "


दीप ने कार की स्पीड को लो करते हुए कहा ..जाने क्यों उसे लग रहा था कि अपने व्यवाहिक जीवन मे उसने कम्मो को कभी शामिल ही नही होने दिया


" बस करो जी ..वक़्त - वक़्त की बात है ..उस टाइम मेरा संसार उस छोटे से स्टोर मे सिमटा हुआ था और आज मैं इतने बड़े घर की मालकिन हूँ, कि घर का पूरा चक्कर लगाने मे मेरे पैर जवाब दे जाते हैं ..बस इसके आगे और कोई लफ्ज़ नही, मुझे समझ आ गया, आप पैसे कमाने मे इतने व्यस्त क्यों रहे ..ताकि आप का परिवार किसी भी तरह के अभाव को क्षन्मात्र के लिए भी महसूस नही कर सके "


इसके साथ ही कम्मो ने अपना सर दीप के कंडे पर टिका लिया


" चलो ठीक ..तुम्हे घर ड्रॉप करने के बाद मैं शाम की फ्लाइट की दो टिकेट्स बुक करवा दूँगा "


दीप ने कहा ..फॉरन कम्मो की आँखों की पुतलियाँ नाचने लगी ..बीती रात अंतर्मंन से की गयी सारी बातें याद आते ही उसने कहा


कम्मो :- " बाइ रोड जाना ज़्यादा कंफर्टबल रहेगा "


" बाइ रोड !!!! लेकिन फ्लाइट से तुम जल्दी पहुचोगे "


दीप का जवाब सुन कर कम्मो कुछ देर के लिए चुप हो गयी, कैसे अपनी बात मनवाई जाए इसके लिए उसने सोचना शुरू किया, लेकिन उसे जो भी करना था बेहद गति से ..और कुछ ही पलो मे उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान तैर गयी ..शायद यही बदलाव आया था उसके अंदर कल रात के हादसे के बाद ..जो वो अपना दिमाग़ चलाने लगी थी


" देखो जी !!!! माना फ्लाइट से हम जल्दी पहुच जाएँगे ..लेकिन वापसी मे मेरे बच्चे को देख कर ये ज़ालिम दुनिया हसेगि, तरह - तरह के मूँह बानएगी ..और ये मुझसे बर्दास्त नही होगा ..कुछ भी हो मैं मा हूँ उसकी, कैसे सह लूँगी ..आप घर जा कर ' सफ़ारी ' को चेक करने भेज दें ..लौट-ते मे रघु का सर अपनी गोद मे रख कर, उसे सुलाते हुए ले आउन्गि "


इतना कह कर कम्मो चुप हो गयी, उसे अचंभा हुआ ..कितनी चतुराई से उसने अपनी बात को कह दिया .. ' हे राम !!!! ये निकुंज मुझसे और क्या - क्या करवाएगा ? '


दीप को उसकी बात जच गयी और उसने घर जाते ही पार्किंग मे खड़ी सफ़ारी को गॅरेज पर छोड़ दिया ..ये उनकी फॅमिली कार थी, जो पूरे परिवार को एक साथ टूर पर ले जाने के वक़्त काम आती ..क्यों कि मुंबई की सड़को पर बड़ी गाड़ियों को चलाना बेहद मुश्क़िल होता है


.


.


घर आते ही कम्मो सीधी निक्की के कमरे मे एंटर हो गयी, निकुंज इस वक़्त उसके कमरे मे ही था ..लेकिन दोनो भाई-बेहन के बीच डिस्टेन्स गॅप को आज निकुंज कम नही कर पाया ..निक्की बेड पर बैठी थी और वो उससे काफ़ी दूर चेर पर


" बेटा !!!! अब कैसी तबीयत है ? "


कम्मो ने बेड पर उसके नज़दीक बैठते हुए पूछा, जिसे देख कर निकुंज की थियोरियाँ चढ़ गयी


" मोम अब बेटर है ..थॅंक्स टू भाई, जो मेरी कितनीईीईईईई केर करते हैं "


निक्की ने अपने भाई के चेहरे को देख कर स्माइल पास किया .. ' कितनी ' शब्द पर ज़ोर देने का मतलब निकुंज को हाल समझ आ गया और वो चेर से उठने लगा


" बैठो ना भाई, फिर आज तो आप दोनो पुणे जा रहे हो ..मुझे बहुत याद आएगी "


निक्की ने फिर से कहा, तो निकुंज के लिए कमरे से बाहर जाना नही हो पाया ..वो खुद भी परेशान था ..जाने कैसे अपनी बहेन के बगैर वो 2-3 दिनो तक रह पाएगा


" चल गिव मी आ हग ..मुझे भी तेरी बहुत याद आएगी "


इतना कह कर कम्मो ने अपनी बेटी को, अपनी छाति से चिपका लिया और यहीं निकुंज की झातें सुलगने लगी


" मोम कितना वक़्त बीत गया ना आप के साथ सोए हुए ..आइ मीन बचपन के बाद पहली रात थी जो आपने मुझे इस तरीके से अपने पास सुलाया "


निक्की के लिए तो ये बात नॉर्मल खुशी की थी ..लेकिन दोनो मा - बेटों की नज़रें, उसकी बात से आपस मे मिल गयी ..जहाँ कम्मो ने अपने दाँत बाहर निकाल दिए, वहीं निकुंज का चेहरा शरम से नीचे झुक गया ..हलाकी कम्मो इससे थोड़ा विचलित हुई, लेकिन उसे इस बात की खुशी भी थी कि अपने रूठे बेटे को मनाने के लिए काफ़ी वक़्त आ गया है उसके पास ..पुणे टूर को वो एक चॅलेंज की नज़र से देख रही थी, जिसमे कुछ भी कर के उसे निकुंज को वापस पाना था ..' कुछ भी कर के '


" बेटे तू अपना समान पॅक कर ले ..हम बाइ रोड जाएँगे ..जिससे वापसी मे रघु को साथ लाने मे दिक्कत नही होगी "


कम्मो ने कहा


" मोम कितने दिनो के लिए जा रहे हो आप दोनो ? "


निक्की ने सवाल किया


" शायद एक ही दिन मे वापस आ जाएँ ..या 2-4 दिन भी लग सकते हैं ..एक दम से प्लान बना तो हॉस्पिटल की फॉरमॅलिटीस पूरी होने मे वक़्त तो लगेगा ना "


कम्मो ने निक्की को जवाब दिया


" 2-4 दिन ..नो मोम, जल्दी आने की कोशिश करना ..मैं यहाँ अकेले बोर हो जवँगी ..यू नो, अभी तो मैं ठीक से चल भी नही सकती "


निक्की की असली तड़प थी अपने भाई से दूर हो जाना ..पर अब वो भाई कहाँ रहा, वो तो उसका पहला प्यार बन गया है


निक्की का सॅड चेहरा देख कर निकुंज को बेहद कष्ट हुआ ..जहाँ एक ओर उसके दिल मे कम्मो के लिए नफ़रत पैदा हुई थी ..वहीं दूसरी तरफ मा के गंदे मंसूबों को जान ने के बाद, अपनी बहेन के लिए एक्सट्रा केर का जनम


कम्मो :- " डोंट वरी !!!! निम्मी और तेरे डॅड तेरा ध्यान रख लेंगे ..मैने इनसे कह दिया है, 2-3 दिनो तक घर से बाहर कम ही जाएँ "


निक्की :- " निम्मी ने तो रख लिया मेरा ख़याल ..देखना मोम, यहाँ आप दोनो गये और उसकी शैतानियों मे कितना इज़ाफ़ा हो जाना है "


" वो तेरी छोटी बहेन है निक्की, उसे वक़्त देना सीख ..अगर तू ही उससे बात नही करेगी तो वो मेच्यूर कैसे होगी ..कहने को तो तुम बहने हो, बट दोनो मे ज़मीन - आसमान कर अंतर है "


अब कम्मो के लेक्चर से निकुंज का सर्द दर्द होने लगा .. ' क्या एक आप का काला साया कम पड़ता है, जो मेरी बहेन को निम्मी के सुपुर्द कर रही हो, वो कितनी बिगड़ी है मैं जानता हूँ ..बस शरम के लिहाज़ से कुछ कह नही पाता ..अब तो मुझे लगता है उसे बिगाड़ने मे भी आप हाथ होगा ..और डॅड का ब्लाइंड सपोर्ट तो उसे है ही "


निकुंज अब अपने पूरे परिवार का दुश्मन बनने को तैयार था ..सिर्फ़ निक्की के खातिर


" मैं पॅकिंग करने जा रहा हूँ ..जब चलना हो आवाज़ दे देना "


इतना कह कर निकुंज कमरे से बाहर चला गया


" मोम एक बात पूच्छू ..भाई इतना नाराज़ क्यो हैं ? "


बीते विषय से अंजान निक्की ने सवाल किया ..हलाकी उसे पता था उसका भाई खुद उसकी वजह से परेशान है, नाराज़ है ..लेकिन फिर भी वो कम्मो के मूँह से अपनी बेगुनाही सुनना चाहती थी ..एक झूट .. ' हां निक्की तेरी सोच सही है ..निकुंज तेरा प्यार है '


" हां मुझे भी थोड़ा टेन्षन मे दिख रहा है ..लेकिन तू फिकर मत कर, मैं उसका माइंड रेफ्रेश कर दूँगी ..प्रॉमिस "


कम्मो के स्माइलिंग रिप्लाइ पर निक्की ने उसे ज़ोरदार हग किया और इसी के साथ उसकी फ्रोक ऊपर उठ गयी ..कल से उसने ड्रेस चेंज नही किया था और यहाँ तक ' पी ' करने के बाद भी उसने पैंटी नही पहनी ..रीज़न कुछ भी हो बस उसका मन नही हुआ अपनी आज़ाद जवानी को वापस क़ैद करने का


" बेटा मैं अभी आई "


चूत विज़िबल होते ही कम्मो ने गेट की तरफ देखा, कहीं वापस उसे निकुंज की आँखों से सामना ना करना पड़े, ऐसा सोच कर वो तेज़ी से दरवाज़े की तरफ दौड़ पड़ी ..वहीं शरम्वश निक्की ने तुरंत फ्रोक को नीचे खीचा, जिसका दीदार उसकी मोम चन्द सेकेंड. के लिए कर चुकी थी


वापसी मे उसने कम्मो की आँखों मे कयि तरह के सवाल देखे और डर के मारे सेहेम गयी


" बेटा अभी तूने..... "


बिना पूरी बात कहे कम्मो ने पूछा ..निक्की के होश उड़ गये, जानती थी उसकी मोम का पहला सवाल यही होगा


" वो ..वो मोम मुझे याद नही रहा ..आक्च्युयली जब मैं बाथ-रूम मे चेंज करने गयी थी ..तब, तब घुटने मे दर्द इतना था कि मुझे ध्यान नही रहा "


हड़बड़ाहट मे निक्की के मूँह से टूटे - फूटे शब्द निकलने लगे ..उसने चोर नज़रो ने कम्मो के चेहरे को देखा जो ज़रा सा भी नाराज़ नही दिखाई दिया ..जान मे जान आते ही निक्की ने चैन की साँस ली और चुप हो गयी


" कोई बात नही कभी - कभी ऐसा हो जाता है ..लेकिन ध्यान रखा कर, निकुंज तेरे कमरे मे दिन - रात आता जाता है ..कहीं उसने देख लिया तो ..और फिर तेरी फ्रोक इतनी बड़ी भी नही जो हर बार ' उसे ' छुपा सके "


कम्मो ने अपनी उंगली का इशारा बेटी की टाँगो की जड़ पर करते हुए कहा ..निक्की शर्मा गयी, अगर कम्मो नाराज़ हुई होती तो निक्की के एक्सप्रेशन भी उसी हिसाब के होते


" अब आप को कैसे बताऊ मोम ..भाई के लिए ही तो मैने पैंटी नही पहनी ..मैं तो चाहती हूँ वो बार-बार मेरी पुसी को देखें ..अपनी उंगलियों से उसी तरह रब करें जैसे उन्होने पार्क मे किया था ..पर वो मेरी बात को समझते ही नही, फालतू रिश्तों का हवाला देते रहते हैं "


निक्की ने अपने मन मे कहा ..भाई की पार्क वाली हरक़त को याद कर वो फिर से मचल उठी


" मैं ला देती हूँ ..कहाँ रखी है ? "


कम्मो ने हाथ के इशारे से पूछा तो निक्की ने बाथ-रूम की तरफ इशारा कर दिया


" अच्छा वो सब तो ठीक है ..ये बता तू शेव क्यों नही करती ? "


जाने कम्मो को कल रात से क्या हो गया था, मिनट - मिनट पर वो खुलती जा रही थी, बोल्ड होती जा रही थी ..ऐसे टॉपिक पर निम्मी से उसकी कॉन्वर्सेशन अक्सर होती ..बट आज पहली बार हुआ जो उसने निक्की से इस तरह का सवाल पूछा था


" वो वो मों वो !!!! "


निक्की घबरा गयी, उसके हलक से आवाज़ आना बंद हो गयी


" चल रहने दे ..तूने आज तक अपनी मोम से इस तरह की बातें शेर नही की, तभी घबरा रही है ..लेकिन बेटा अब वो वक़्त गया ..सेक्स एजुकेशन का नालेज होना बेहद ज़रूरी है, ख़ास कर तेरी उमर की लड़कियों को ..निम्मी रेग्युलर शेव करती है, ईवन मैं भी ..जब की मेरी एज तुझसे डबल से भी ज़्यादा है ..ये तो सॉफ सफाई रखने वाली रोज़मर्रा की बातें हैं ..सो ग्रो अप माइ चाइल्ड ..अगर फिर भी तुझसे ना हो, मुझे बता देना मैं सॉफ कर दूँगी "


इतना कह कर कम्मो बाथ-रूम मे चली गयी ..वहीं निक्की का मूँह खुला रह गया, ये सोच कर कि उसकी मोम आज भी शेव करती है ..यानी डॅड .. ' नो वे ..नोट अगेन यार '


दीप का चेहरा याद आते ही उसकी चूत पनिया गयी ..निकुंज के प्यार की चिंगारी को कम्मो ने आगे बढ़ा कर आग जो बना दिया था ..सेकेंड. मे निक्की ने अपना हाथ चूत पर घुमाया और बेखोफ अपनी उंगली उसमे एंटर कर दी


" ह्म्‍म्म्मममम !!!! रिलॅक्स निक्की मोम बाथ-रूम मे हैं "


फॉरन उसने खुद को संभाला ..लेकिन इस सिचुयेशन से बाहर आने मे उसे वक़्त लगना ही था ..नयी - नयी जवानी संभाले नही सम्हल्ती ..फिर अभी तो उसने कुछ भी नही जाना था ..जिस भाई के लिए वो तड़प रही है, प्यार का नाम समझ कर ..वो प्यार नही उसकी चूत की खुजाल है और सही मायने मे इसकी शुरूवात हो चुकी थी


वहीं बाथ-रूम के अंदर जा कर कम्मो ने अपने दिल पर हाथ रख लिया, जो किसी जेनरेटर के माफिक हिल रहा था, धड़क रहा था ..विश्वास से परे कि उसने निक्की से झूट बोला .. ' आज भी शेव करती हूँ '


" कल तो बड़ा समझाया था आज कहाँ गयी ? "


थक - हार कर कम्मो ने अपने अंतर्मंन को आवाज़ दी ..लेकिन अब उससे मिलन हो पाना ज़रा मुश्क़िल था ..ये बदलाव तो कम्मो ने खुद अपने अंदर लाया है ..बेटे को वापस पाने की तड़प का नतीजा था जो उसकी ज़ुबान इतनी ज़्यादा खुल गयी थी ..दिमाग़ के घोड़े एक दम सटीक दौड़ रहे थे ..पर इन सब बातों के अलावा जो सबसे बड़ा अंतर उसने खुद के अंदर महसूस किया, वो था .. ' पिच्छले 15 बरसों मे पहली बार उसकी चूत मे हलचल पैदा हुई थी, हाथ लगाए बगैर '


" मोम फ्रेश हो रहे हो क्या ? "


काफ़ी देर से कम्मो बाथ-रूम मे घुसी थी ..निक्की ने नॉर्मल होते ही उससे सवाल किया


" अभी आई !!!! "


सिर्फ़ इतने बोल मूँह से बाहर निकाल कर उसने पल्लू से अपना चेहरा सॉफ किया, जो पसीने से तर हो चुका था ..फिर 2-3 गहरी साँसे लेने के बाद, हॅंगर पर टँगी पैंटी उतार ली ..और फाइनली बाथ-रूम से बाहर आ गयी


" अच्छा बेटा मैं भी कुछ पॅकिंग कर लूँ ..थोड़ी देर मे आती हूँ "


कम्मो से खड़ा रहना मुश्किल हो गया ..हलाकी उसकी चूत मे अभी सिर्फ़ हलचल पैदा हुई थी ..ऐसा नही कि उसे मास्टरबेट करने की इक्च्छा हो ..बस थोड़ी देर का सूना पन चाहती थी ..ठंडी हवा मे कुछ देर सोना चाहती थी


" ओक मों "


स्माइल करते हुए उसने कम्मो के हाथ से फ्रेश पैंटी ले ली ..और मा अपनी बेटी का माथा चूम कर कमरे से बाहर निकल गयी


.


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शाम के 7 बजे गॅरेज से सफ़ारी ले कर बंदा घर लौट आया ..दीप ने अपना क्रेडिट कार्ड कम्मो को देते हुए कुछ ज़रूरी पेपर्स भी थमा दिए


निम्मी की आँखों मे इस वक़्त सिर्फ़ मस्ती ही मस्ती छाई थी ..जबकि निक्की की पलकें आँसू बहाने को तरसने लगी ..उसने सभी के सामने निकुंज को इतनी ज़ोर से हग किया, कि एक लम्हे के लिए निकुंज की धड़कने रुक गयी, डर की वहज से नही ..बिछड़ने की वजह से ..बहेन का साहस बढ़ने के लिए उसने 2-3 बार उसकी पीठ पर नरम हाथ से सहलाया और फिर बिना पीछे मुड़े सफ़ारी की ड्राइविंग सीट पर बैठ गया ..शायद निक्की के चेहरे को ना देखने का मेन रीज़न, खुद की आँखों से आँसुओं के बह जाने का ख़तरा था


" सुन शैतान दीदी का ख्याल रखना और हां आप भी 2-3 दिनो के लिए ऑफीस अवाय्ड कर दो ..बच्चियाँ अकेली रहें ठीक नही लगता "


इतना कह कर कम्मो भी सफ़ारी की फ्रंट सीट पर बैठ गयी ..लेकिन एक बहुत बड़ी चूक के साथ ..उसका मेन बॅग हॉल मे ही रखा रह गया और हाथो मे पकड़े हॅंड बॅग मे सिवाए काग़ज़ो के कुछ भी नही था ..एक कपड़ा तक नही


उनके जाते ही निम्मी आइस-क्रीम खाने को उतावली हो गयी और थक हार कर दीप वहीं से घर का मेन गेट लॉक कर, दोनो बेटियों के साथ मार्केट निकल आया ......


बहुत जल्द ही उनकी कार ' यशवंतराव छवन मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे ' पर दौड़ने लगी


निकुंज काफ़ी फास्ट जा रहा था, शायद मा का गुस्सा और बहेन से बिछड़ना इसका कारण हो ..लेकिन अगल - बगल से निकलती गाड़ियाँ, ख़ास कर ट्रक वगेरा जैसे ही सफ़ारी को छु कर निकलते, कम्मो सेहेम जाती ..आख़िरकार उसने बात की शुरूवात करते हुए निकुंज को टोक दिया


" किसी और का गुस्सा खुद पर मत निकाल ..हर बात का सल्यूशन होता है ..मैं तेरे हर सवाल का जवाब दूँगी ..स्पीड डाउन कर "


कम्मो ने नाराज़ होते हुए कहा ..रिटर्न मे निकुंज ने भी एक नज़र गुस्से से उसके चेहरे को देखा और फिर से अपनी आँखें सामने की रोड पर जमा दी


" आप जवाब नही दे पाओगि मोम ..आप ने मुझे हर्ट किया है ..अपने बेटे के दिल पर गहरी चोट की है ..आइ रियली हेट यू फॉर दट "


हलाकी कार स्पीड तेज़ी से कम होने लगी लगी थी पर निकुंज उसकी बात से सन्तुस्ट नही हुआ ..बात करते वक़्त उसकी आवाज़ मे होता कंपन कम्मो को सॉफ नज़र आया


" मैं सारे जवाब दूँगी ..तू सवाल तो कर "


कम्मो ने उस वक़्त बोल तो दिया, पर वो काफ़ी नर्वस थी, जानती थी उसके बेटे का पहला सवाल क्या होगा ..पर उसके जवाब मे वो क्या कहेगी, बस इसी सोच मे डूब गयी


" आप निक्की के रूम मे, उसके पास क्या कर रही थी ? "


निकुंज ने कार की स्पीड और भी स्लो करते हुए पूछा ..उसे देखना था, उसकी मोम की बात और चेहरे के एक्सप्रेशन मॅच करते हैं या नही ..कहीं बात को टालने का वो कोई बहाना तो नही ढूँढ रही, झूट तो नही कह रही


वहीं कम्मो अब भी रिलॅक्स बनी रही ..ज़रा भी ज़ाहिर नही होने देना चाहती थी, सच मे उसका दिल बहुत ज़ोरों से धड़क रहा है


" मैं वहाँ उसकी वर्जिनिटी चेक कर रही थी "


इतना बोल कर कम्मो ने थोड़ी देर के लिए अपनी आँखें बंद कर ली ..पहली बार अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द से उसका सामना हुआ था, भले वो उसका लाड़ला बेटा निकुंज ही क्यों ना हो


" व्हाट !!!! "


निकुंज चीखा ..उसके कानो को विश्वास ही नही हुआ कि उसकी मोम अपनी बेटी की चूत चेक करने की ग़र्ज़ से उसके कमरे मे मौजूद थी, देखने आई थी कि निक्की ने अब तक अपना मूँह काला किया या नही ..हलाकी कम्मो की बंद पलकें उसे सच बयान करने को काफ़ी थी, कि वो झूट नही कह रही ..पर फिर भी क्या रीज़न है जो उसे ऐसा कदम उठना पड़ा ..निकुंज अब ये जान ना चाहता था


" लेकिन क्यों ? "


निकुंज ने दूसरा सवाल किया ..जो पहले से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक और शर्मिंदगी से भरा हुआ था ..वो पूच्छना चाहता था कि आख़िर निक्की जैसी सीधी-साधी लड़की पर उसकी मा को शक़ क्यों हुआ


" एक मा हूँ - मेरा हक़ है "


कम्मो शांत हो गयी पर इस बार उसकी आँखों ने बंद होने की कोई कोशिश नही की


" ये कैसा हक़ जता रही हो आप ..ये तो अपनी औलाद पर शक़ करने जैसा हुआ ..फिर निक्की के चेहरे से उसकी मासूमियत का पता नही चलता आप को, जो आप उसकी ( पॉज़ ) ' वो ' चेक कर रही थी "


निकुंज थोड़ा हकला गया, इस वक़्त हालात चाहे जो भी हों ..बात तो आख़िर वो अपनी मोम से ही कर रहा था ..तो उसका झेपना लाज़मी था, हां नाराज़गी स्वरूप वो थोड़ा क्रोधित भी था


" मैने कहा ना - मेरा हक़ है "


कम्मो ने वही बात दोहरा दी ..आक्चुयल मे जो वो कहना चाह रही थी ..उसमे उसका दिमाग़ तो उसका साथ दे रहा था, लेकिन ज़ुबान खामोश थी


" कैसा हक़ - ज़रा बताना "


निकुंज ने रिटर्न मे कहा ..अब उसकी उत्सुकता बढ़ने लगी थी ..ये जान ने के लिए, क्या वाकाई उसकी मोम को निक्की पर शक़ होता है, ' लेकिन क्यों ? '


" मैं नही चेक करूँगी तो कौन करेगा, आख़िर मा हूँ उसकी ..मुझे पता होना चाहिए कि मेरी बेटी का कौमार्य अब तक सेफ है या नही "


जहाँ निकुंज की जिग्यासा बढ़ती जा रही थी ..वहीं कम्मो की सेहेन्शक्ति टूटने लगी ..उसे लगने लगा जैसे आज मा-बेटे के बीच की सारी मर्यादाओं का अंत निश्चित है ..लेकिन उसका दिमाग़ उसे बार-बार यही कहता रहा .. ' रुकना मत, बोलती रह ..अगर अपने पुत्र की नज़रों मे वापस उठना है तो कुछ भी कर ..लेकिन बातों का सिलसिला ख़तम मत होने देना ..फिर चाहे सच बोल या झूट, कोई फरक नही पड़ता ..कम से कम निकुंज तुझे वापस तो मिल जाएगा '


" लेकिन कोई तो वजह होगी, जो आप को मेरी प्यारी बहेन पर इतना घिनौना इल्ज़ाम लगाना पड़ा "


निकुंज की बात से बग़ावत की बू आई, जिसे कम्मो ने जल्द ही सूंघ लिया ..एक पल को उसके दिल मे आया सारा किस्सा शुरूवात से सच-सच बता दे, और अपना पीछा छुड़ा ले ..लेकिन सच जान ने के बाद निकुंज उसे कभी माफ़ नही करेगा ये तय था, पूरी ज़िंदगी वो अपने लाड़ले के मूँह से अपना नाम ' मोम ' सुनने को तरस जाएगी


" देख निकुंज, मैं तेरी मा हूँ ..अब तुझे विस्तार से तो सब नही बता सकती ..पर अगर तू जान-ना ही चाहता है, तेरी मा ने ऐसा क्यों किया ..तो प्लीज़ पहले ये लाइट बंद कर दे ..फिर चाहे जो सवाल पूच्छ लेना मुझसे, मैं इनकार नही करूँगी "


आख़िर-कार कम्मो का सबर टूट गया ..जो बात वो कहना चाहती है, और उसकी जुवान इसमे उसका साथ नही दे पा रही थी ..शायद अंधेरे मे तो उसकी हिम्मत हो भी जाती, पर रोशनी मे अपने जवान बेटे से आँख मिलाते हुए, सब कुछ कहना ..उसे मंज़ूर नही हुआ


" तो क्या हुआ मोम ..मैं अब अडल्ट हो गया हूँ ..और आप भी मोम होने से पहले एक ' औरत ' हो ( पॉज़ ) ..म ..म ..मेरा मतलब है मेरी टीचर रही हो, स्टार्टिंग से ..फिर आज भी उसी हक़ से समझा दीजिए "


ग़लती से निकुंज के मूँह से खुद के लिए ' औरत ' शब्द सुन कर कम्मो गुस्से से फट पड़ी, लेकिन ज़ाहिर ना करते हुए अपना मूँह साइड व्यू की तरफ मोड़ लिया ..उसे शॉक लगा जान कर कि उसके बेटे ने उसे, मा के दर्ज़े से मुक्त करते हुए एक आम औरत कैसे मान लिया


वहीं निकुंज का चेहरा फीका पड़ा था, ग़लतिवश उसके मूँह से काफ़ी निम्न स्तर की बात जो निकल गयी थी ..लेकिन उसके मन मे अब भी बहुत से प्रश्न थे, और उनके उत्तर जाने बागेर उसे चैन नही मिलता ..माथे पर आए पसीने को पोंछ कर उसने कम्मो के कंधे पर अपना लेफ्ट हंड रख दिया और हल्के प्रेशर से उसे सीधा बिठाने की कोशिश की ..लाइट बंद करने को राज़ी वो कभी नही होता ..शायद इसकी मैं वजह थी सत्यता को जड़ से पता करना, कम्मो अंधेरे मे जो कुछ कहती ..उसमे झूट के कणों का मिक्स्चर ज़रूर होता


" क्या है ? "


कम्मो ने अपना कंधा उच्छालते हुए कहा ..उसकी आवाज़ बेहद नाराज़गी जता रही थी


" आप अब बात को टालना चाह रही हो ..ग़लती चाहे लाख छुपाओ मोम, मैं आप का बेटा हूँ ..कभी ना कभी सच जान ही जाउन्गा "


निकुंज ने जैसे चॅलेंज ..अब वो अपनी मोम को भड़काने के मूड मे भी आने लगा था


" ह्म्‍म्म्म !!!! "


एक गहरी साँस खीच कर कम्मो सीधी हो कर बैठ गयी ..लेकिन इतनी देर मे उसने फ़ैसला कर लिया, अब वो जो भी कहेगी अपने बचाव मे कहेगी ..फिर चाहे सिर्फ़ झूट ही क्यों ना बोले ..निकुंज के चॅलेंज को एक्सेप्ट करते हुए उसने बोलना शुरू किया


" हां तू अडल्ट है, और मैं भी ..एक मा होने के नाते मैने जो किया वो सही है या ग़लत, अब इसका फ़ैसला मैने तुझ पर छोड़ा ..लेकिन याद रख निकुंज, अगर मैं सही साबित हुई तो जीवनपर्यंत का एक वचन लूँगी तुझसे "


इतना बोल कर वो चुप हो गयी


" हां ठीक है ..आप की कसम खा कर कहता हूँ ..उस एक वचन मे आप मुझे जो आदेश दोगि, मैं नही टालूँगा ..प्रॉमिस मोम प्रॉमिस "


और इसके तुरंत बाद उसने अपना हाथ कम्मो के सर पर रख दिया ..रात का समय था, अब हाइवे पर सिर्फ़ इक्का - दुक्का वाहन ही सफ़ारी के आगे पीछे चल रहे थे और रोड इतनी चौड़ी की, निकुंज को बात करते हुए ड्राइव करने मे कोई दिक्कत पेश नही आती


" तो ठीक है सुन ..मैने निक्की की वर्जिनिटी इसलिए चेक की ताकि उसका फ्यूचर सेफ देख सकूँ ..तुम लड़कों का कुछ नही जाता, अफेर करते हो और लड़की को यूज़ कर के पतली गली से निकल जाते हो ..लेकिन सोचो उस लड़की पर क्या बीत-ती होगी जो शादी के बाद अपने पति के सामने, अपने कुंवारे पन के नष्ट होने की झूठी दलीले देती फिरती है ..लेकिन फिर भी उसका पति उस पर बदचलन होने का आरोप लगा कर, अपने घर से बाहर निकाल देता है ..निक्की हो या निम्मी, इस उमर मे लड़कियों को बहुत से तनावो से गुज़रना पड़ता है, कदम - कदम फूक - फूक के रखना पड़ता है ..ज़रा सी चूक हुई और सारा भावी जीवन अंधकार मे ..मैं निक्की के साथ ऐसा पहली बार करने गयी थी .. लेकिन निम्मी के स्वाभाव के चलते मुझे हर साप्ताह उसकी ' V ' को चेक करना पड़ता है ..एक मा के नज़रिए से सोच, अगर मैं कुछ ग़लत करती हूँ तो, अपनी ग़लती मान लूँगी "


बोलते-बोलते कम्मो रुक गयी और निकुंज उसकी इस बात से सिर्फ़ चौका ही नही, वरण इस सच को उसने एक्सेप्ट भी किया ..वो खुद अब तक 3 लड़कियों की वर्जिनिटी भंग कर चुका था, और आज पता तक नही कि उसकी पुरानी गर्लफ्रेंड्स ज़िंदा भी हैं, या मर चुकी


चेहरा टर्न करके 2 सेकेंड. के लिए उसने कम्मो के फेस को देखा जो अब शरम से लाल हुआ जा रहा था, एक स्ट्रेंज टाइप की खुशी उसने अपने अंदर महसूस की ..शायद कम्मो को हाफ तो उसने माफ़ कर ही दिया


" ओके मोम ये बात आप की सही है ..बट आप सिर्फ़ देख रही होती तो कोई बात नही थी ..लेकिन आप ने वहाँ अपना .... "


ओवरऐक्साइटमेंट मे निकुंज ने फिर से उल्टा बोल दिया और जब तक दोनो इस बात का मीन समझ पाते, बहुत देर हो चुकी थी ..हड़बड़ाहट मे दोनो ने अपने फेस फ्रंट कर लिए और दूर - दूर तक फैले अंधकार को देखने लगे


जहाँ कम्मो के बदन मे फूरफ़ुरी उठने लगी, वहीं निकुंज के हाथ स्टियरिंग-व्हील पर काँपने लगे


बड़ा अजीब माहॉल क्रियेट हो चुका था ..अंजाने मे ही सही निकुंज ने उससे चूत चाटने वाली बात पूछ ही ली ..कम्मो हैरान, परेशान ..क्या कहे ..क्या ना कहे


तभी उसके अंतर्मंन ने उसे टोक दिया


" सोच क्या रही है ..वचन तुझे मिल ही चुका है ..बस अब रुकना मत ..कर दे धमाल, पा ले अपने पुत्र को ..छोड़ दे मा का दामन और बन जा औरत "


कम्मो ने अपने होंठ चबाने शुरू कर दिए ..अंतर्मंन की समझाइश मानने के अलावा उसके पास कोई चारा नही बचा ..उसकी आँखें लाल होने लगी, चेहरे पर कामुकता के लगातार हमलों से वो आहत सी हो गयी ..' इसका निवारण अब शीघ्र ही करना पड़ेगा ' ..ऐसा मन मे विचार कर उसने मा-बेटे के बीच की मर्यादा तोड़ने का निश्चय कर लिया


" हां मैने अपना मूँह वहाँ लगाया था ..मैं उसकी योनि चाट रही थी "


कम्मो के मूँह से निकले शब्दो ने जैसे विस्फोट कर दिया ..लगा जैसे उनकी कार पर कोई आटम बॉम्ब आ कर गिरा हो ..तुरंत निकुंज ने ब्रेक पर अपने पैर का दबाव दिया और कार कुछ पल के लिए अनबॅलेन्स हो गयी


" व्हाट आर डूयिंग !!!! साइड मे कर गाड़ी "


घबराहट मे कम्मो ने अपना हाथ निकुंज की जाँघ पर रख दिया ..और एक के बाद दूसरा झटका महसूस कर निकुंज सीट पर उच्छल पड़ा


" म ..मोम .. मैं ठीक हूँ "


निकुंज ने फॉरन अपनी मा का हाथ जाँघ से हटाने की कोशिश की और उसके चेहरे की हवाइयाँ उड़ी देख कर कम्मो मुस्कुरा दी ..इस वक़्त अगर वो भी अपने दिल की सही हालत शो कर देती तो उसका सर शरम से झुक जाना तय था


" सो मिस्टर. अडल्ट ..क्या हुआ ? ..इतने मे ही पस्त हो गया ..या आगे भी सुनने का इरादा है ..बिलीव मी बेटा, ये सब कोई मज़ाक नही, सब हक़ीक़त की बातें हैं "


कम्मो ने अपने हाथ के पंजे से उसकी थाइ को ताक़त से दबाया और निकुंज के मूँह से ज़ोर की सिसकारी छूट गयी ..अब वो आह मादक थी या दर्द भरी, ये तो खुद निकुंज भी नही जान पाया ..पर इससे कम्मो का मन मयूर नाच उठा, बेटा काफ़ी हद्द तक उसकी गिरफ़्त मे जो आ चुका था


" शादी के बाद जब तेरी बेटियाँ, तेरी बहनो के बराबर हो जाएँगी ..तब यक़ीनन तनवी को भी यही कदम उठाना पड़ेगा, जो मैने उठाया "


कम्मो ने उसे रिलॅक्स करते हुए कहा ..जो हाथ इस वक़्त उसने अपने बेटे की थाइ पर सिर्फ़ रखा हुआ था ..अब उसमे मूव-मेंट होना शुरू हो गया


" तू गाड़ी चला ..मैं हूँ तेरे पास "


हाथ की सेहलन से निकुंज के काँपते बदन मे जैसे भूचाल आ गया ..लेकिन चाह कर भी वो उसके हाथ को वापस नही हटा पाया, और इसके साथ फिर से सफ़ारी रोड पर दौड़ने लगी


" कुछ बोल तो सही ..सवाल बंद कर देगा तो मैं जवाब क्या दूँगी "


बेटे की दुखती रग अब कम्मो के हाथ मे थी ..अगर निकुंज चुप हो गया तो पक्का उसकी मा उसे ग़लत समझ लेगी, यही सोच कर उसने शॉर्ट मे सारी डीटेल्स पूछि


" लेकिन कोई ठोस वजह तो होगी इसके पीछे "


निकुंज की आवाज़ मे कोई दम नही बचा ..और उसने कम्मो से अपनी हार स्वीकार कर ली


" लड़की जब 18 के पार निकल जाए तो मा को उसकी चिंता करनी चाहिए ..उसकी बेटी क्या करती है, क्या सोचती है, उसके मन मे क्या विचार चल रहे हैं ..मा को पता होना चाहिए ..बदलाव की इस उमर मे लड़की का मन बहुत कोमल हो जाता है ..और उसे सहारे की ज़रूरत महसूस होने लगती है ...तुझे तो पता ही होगा, लड़को से ज़्यादा संवेदनशील अंग लड़की के होते हैं, स्ट्राव बहने की मात्रा दोगुनी हो जाती है ..और इसी कारण जनम होता है मास्टरबेशन का ..खेर लड़के तो इस से सन्तुस्ट हो भी जाएँ परंतु लड़की की योनि निरंतर आग पकड़ने लगती है, लगता है जैसे अभी किसी के साथ ग़लत संबंध बना लिए जाएँ, सेक्स कर लिया जाए ..दिमाग़ कुछ भी कहे पर योनि की माँग चाह कर भी कम नही हो पाती ..अब अगर ऐसे मे मा को उसकी हालात पर गौर नही हुआ, तो कब होगा ..बस फिर मजबूरन वो कुछ ऐसा करने लगती है जिससे कम से कम शादी से पहले तक तो उसकी बेटी का कौमार्य भंग ना हो ..हां निकुंज मैं इसीलिए निक्की की योनि को ठंडा करने आई थी ..लेकिन मेरे योनि पर मूँह लगाते ही तेरा वहाँ आना हो गया ..अब उस वक़्त तूने जो भी कयास अपने मन मे लगाए हों, मुझे फ़र्क नही पड़ता ..अगर कल भी मुझे ये सब दोबारा से करना पड़े, मैं ज़रूर करूँगी ..फिर चाहे कोई सही माने या ग़लत "

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