पापी परिवार--8




 पापी परिवार--8





इतना कह कर शिवानी आपे से बाहर हो गयी ..तेज़ी से उसने अपना हाथ सलवार के अंदर डाला और डाइरेक्ट 2 उंगलियाँ बड़ी बेरहमी से चूत की गहराई मे उतार ली


" ऊऊऊऊऊऊओ !!!!! "


होंठ राउंड शेप्ड बना कर उसने सांसो को अंदर - बाहर खीचना शुरू कर दिया ..जैसे कोई गरम पदार्थ फूक मार कर ठंडा कर रही हो


" कोई बात नही ..मैं आँखें बंद कर लेता हूँ "


अपने प्लान का लास्ट राउंड खेलते हुए दीप बेड पर लेट गया ..यहाँ तक कि करवट भी उसने ऐसी ली जिससे शिवानी उसकी बॅक साइड मे आ जाए


बड़े अचंभे से शिवानी ने उसकी इस हरक़त पर गौर किया ..विश्वास करना उसके लिए काफ़ी मुश्क़िल था ..2 दिन पहले ही वो इस इंसान की ज़्यादती का शिकार हुई थी ..लेकिन आज .. ' क्या सिर्फ़ मेरी वजह से ..मुहब्बत '


जितनी तेज़ी से उसकी उंगलियाँ चूत पर वार कर रही थी उतनी ही गति से दीप की हर बात उसके जहेन मे भ्रमण करने लगी


" मेरा बड़ा बेटा एक धोखे - बाज़ लड़की के झूठे प्यार का शिकार हुआ था ..जानते हुए भी ..लड़की चीटर है दिलो जाने से उसे चाहा ..लेकिन दिन पर दिन वो अंदर से खोखला होता गया ..एक रोज़ घर वापस लौट - ते वक़्त उसका माइंड डाइवर्ट हुआ ..नतीजा आज वो ज़िंदा लाश बन कर रह गया है "


बोलते - बोलते दीप रुक गया ..जाने क्यों शिवानी की उंगलियों ने भी अपना काम बंद कर दिया ..हाथ सलवार से बाहर खीचने के तुरंत बाद ..वो दीप को पलटाने लगी


" ज़िंदा लाश !!!! "


पलट कर सीधा लेटने पर भी दीप ने अपनी आँखें नही खोली


" हां ज़िंदा लाश ..पिच्छले 4 सालो से पुणे के फेमस मेंटल हॉस्पिटल मे भरती है ..कल उसकी मा उसे हमेशा के लिए घर वापस लाने जाएगी ..हम आज जो भी हैं सब उसकी बदोलत है ..एक वक़्त था जब कोई नया काम मिले 6 - 6 महीने बीत जाते ..पर रघु ने एक दिन के लिए भी अपने परिवार को ग़रीबी का मूँह नही देखने दिया ..जानती हो सब उसे रघु भाई कह कर बुलाते थे ..वजह थी उसका जिगर और हर - पल सच पर टिके रहने की आदत ..शायद ऊपर वाले ने मेरे कुकर्मो का बदला मेरे बेटे से लिया ..खेर तुम्हारी हां होने के बाद ही वो यहाँ आएगा ..क्यों कि उसकी देख - भाल करने मे हम सभी असमर्थ हैं ..डॉक्टर'स का तो हमेशा से कहना रहा है वो जल्दी ही ठीक हो जाएगा ..लेकिन.... "


आख़िरी शब्द पर दीप वापस रुक गया ..महसूस करना चाहता था की शिवानी उसकी बातों मे कोई इंटेरेस्ट ले भी रही है ..या वो खुद से ही बातें किए जा रहा है


" लेकिन क्या !!!!! आगे भी तो कहिए और अपनी आँखें खोल लीजिए ..मैं अब बिल्कुल ठीक हूँ "


शिवानी के कहने पर दीप ने अपनी आँखें खोल ली ..हलाकी जब - जब वो इस हादसे के बारे मे सोचता है ..हर बार खुद को रोने से नही रोक पाता ..आज भी उसकी आँखें नम थी


शिवानी ने एक पिता के मन की पीड़ा को महसूस करते हुए ..उसका आंकलन खुद के दर्द से किया और यहाँ वो दीप से हार गयी


" उसकी बॉडी का कोई भी पार्ट काम नही करता ..ना वो बोल पाता है ..ना चल पाता है ..ना सुन सकता है ..जहाँ बिठा दो बैठ जाएगा ..लेटा . लेट जाएगा ..माफ़ करना जो मैने तुम्हारे साथ उसकी शादी की बात छेड़ी ..वैसे सही भी तो है ..ऐसे पागल इंसान के कौन अपनी ज़िंदगी बर्बाद करना चाहेगा "


दीप ने टॉपिक का एंड करते हुए अपनी गीली आँखें वापस बंद कर ली और नींद के आगोश मे जाने की कोशिश करने लगा


वहीं शिवानी उसके द्वारा कही बातों को सोचने मे व्यस्त हो गयी ..अब आख़िरी फ़ैसला उसे करना था ..हां कहे या ना कह दे ....


थका हारा दीप कब गहरी नींद मे चला गया, पता नही ..शिवानी काफ़ी हद्द तक खुमारी की पकड़ से आज़ाद हो चुकी थी, और बेहद गंभीरता पूर्वक दीप की कही हर बात को अनलाइज़ करने मे व्यस्त थी


कुछ देर बाद जब दीप की स्नोरिंग से रूम मे आवाज़ उठना शुरू हुई तो शिवानी का ध्यान अपनी सोच से हट कर उसके सोते चेहरे पर चला गया


" इतने जल्दी किसी इंसान मे चेंजस कैसे आ सकते हैं ? "


सहसा उसके मूँह से ये सवाल निकला और उसका क्वेस्चन बिल्कुल भी ग़लत नही ..इसी कमरे मे दो दिन पहले हैवानियत का ऐसा तांडव मचा था, जिस के डर से शिवानी अब तक उबर नही पाई थी और आज जब दीप ने उसे नाइट स्टे की बात कही ..उसे लगा, जैसे दीप बीते मंज़र का बदला लेने के लिए उसे बुला रहा हो ..जो बात उनके दरमियाँ उस दिन अधूरी रह गयी थी, आज पूरी करना चाहता हो ..दीप उसे रोन्द कर रख देगा, सोच - सोच कर शिवानी पागल सी हो गयी थी


फिर शॉपिंग, उसके मूँह से निकली बातें, उसके फेस एक्सप्रेशन ..सब शिवानी की घबराहट को और भी ज़्यादा बढ़ाने लगे थे


' लेकिन ये क्या ' यहाँ तो सब कुछ उल्टा हो गया


आज दीप ने एक नज़र भी उसे ग़लत भावना से नही देखा ..वो उत्तेजित हुई थी, अगर दीप अपनी तरफ से हलका सा भी ज़ोर लगाता, वो खुद को रोक नही पाती ..कामुकता के चलते अपना सब कुछ उसके हवाले कर देती


इन सब बातों से परे दीप ने अपने हाथो से उसे खाना खिलाया, उसका सर अपनी गोद मे रख कर बॉम की मालिस दी


" यहाँ मेरी ग़लती है जो मैने, इनके सामने बेशर्मो की तरह अपनी चूत खुज़ाई ..थोड़ा तो कंट्रोल कर ही सकती थी "


खुद को डाँट लगा कर उसने आगे सोचना शुरू किया


" मुझे मास्टरबेट करते देख इन्होने अपनी आँखें बंद कर ली थी ..यहाँ तक कि अपनी पीठ मेरी तरफ करते हुए करवट ली ..ये सब कैसे ? "


अब उसकी सोच दो तरफ़ा हो गयी थी ..एक तरफ दीप, दूसरी तरफ रघु ..जहाँ दीप के बदलाव ने उसके दिल को धड़काना शुरू किया ..वहीं रघु की हालत पर उसे तरस आ रहा था


गर्मी की मार्मिक पीड़ा को दूर करने के लिए उसके हाथो की उंगलियाँ, कमीज़ के निच्छले हिस्से को ऊपर उठाने की कोशिश करने लगी ..अब तो दीप भी सो चुका था


" खाना खा लो ठंडा हो जाएगा "


जिस्मानी भूख सिर्फ़ खाने से कभी मिटी है, जो आज मिट जाती ..


इस वक़्त तो शिवानी के दिल - ओ - दिमाग़ पर बस यही बात छा गयी .. ' वो दीप के लिए उत्तेजित हुई थी '


अगली पुकार सुनने के बाद वो भी बेड पर आ कर बैठ गयी ..दीप ने जान कर खाना सिंगल प्लेट मे लगाया था


" छोड़ो हाथ गंदे मत करो ..मैं खिला देता हूँ "


ना चाहते हुए भी दीप चाल पर चाल चलने को मजबूर था ..समय की माँग ही कुछ ऐसी थी ..कैसे भी कर के अगली सुबह से पहले ..उसे शिवानी को रघु की असलियत बताने के बाद भी, शादी के लिए राज़ी करवाना था


" मूँह तो खोलो ..कहाँ खो जाती हो बार - बार "


दीप नॉर्मल बन कर उसे खाना खिलाता रहा ..सिर्फ़ तब उसके चेहरे को देखता जब, कौर उसके मूँह के अंदर करना हो ..लेकिन हर बार शिवानी अल्पक उसी की आँखों मे झाँकति दिखाई देती


डिन्नर फिनिश होने के बाद दीप ने टिश्यू पेपर से पहले शिवानी के होंठ सॉफ किए और फिर उसी पेपर से अपने होंठो को पोंछने लगा


" थोड़ा रिलॅक्स कर लो ..कल सुबह नामिता की मोम तुम्हे देखने आने वाली है ..इसी लिए मैने ये साड़ी खरीदी ..मेरे दिल मे अब कोई पाप नही तुम्हारे लिए ..बल्कि मैं तो तुमसे बेन्तेहाँ मोहब्बत..... "


बात अधूरी छोड़ कर दीप बाथ - रूम की तरफ बढ़ गया ..शिवानी की हरक़तों से सॉफ ज़ाहिर था ..वो दीप के बारे मे ही सोचने मे गुम थी


थोड़ा वक़्त और बीता ..दिमाग़ पर ज़्यादा प्रेशर देने की वजह से ,शिवानी का सर दर्द से फटने लगा ..बार - बार वो अपने हाथ से सर को दबाने लगी


दीप ने बेड से उतर कर वॉर्डरोब खोला और बॉम निकाल कर वापस बेड पर बैठ गया ..पूरे हक़ के साथ उसने बैठी शिवानी के कंधे प्रेस किए और बड़े प्यार से उसका सर अपनी गोद मे रख कर, उसके फोर्हेड पर बॉम मलने लगा


" शिवानी !!!!! "


बेहद रोमॅंटिक अंदाज़ मे दीप ने उसका नाम पुकारा ..बॉम की मालिश से रिलॅक्स हो कर शिवानी ने अपनी आँखें बंद कर रखी थी ..बिना पलकें खोले उसने सिर्फ़ ' ह्म्‍म्म ' से दीप की बात का रिप्लाइ किया


" तुम्हारा बदन काँप क्यों रहा है ? "


बात बिल्कुल सच थी ..थोड़ी देर पहले हुए कयि प्रकार के मानसिक आघात सहने के बाद ..चरम कामुकता को एक दम से शांत कर लेना ..यही वजह थी जो अब तक शिवानी को महसूस हो रहा था ..सलवार के अंदर पहनी पैंटी काफ़ी तीव्र गति से गीति होती जा जा है और स्राव की मात्रा अत्यधिक होने से उसका मन बार - बार अपनी चूत को सहलाने के किए मचलने लगा ..वो मास्टरबेट करना चाहती थी ..लेकिन दीप के कमरे मे मौजूद होने से चुप - चाप लेटी रही


" क्या हुआ कोई दिक्कत तो नही है ना ? "


एक के बाद एक काम - बान छोड़ते हुए दीप उसे हक़ीक़त बताने पर विवश करने लगा ..वहीं उसकी उंगलियाँ माथे पर इस तरह का घर्षण पैदा करने लगी जैसे चूत की कोमल फांको को कुरेद रहा हो


" अंकल गर्मी बहुत ज़्यादा है ..मैं नहाना चाहती हूँ "


शिवानी मे इस बार अपनी आँखें खोलते हुए कहा ..दीप की गोद से सर उठा कर उसने ' थॅंक्स ' बोला और बेड से नीचे उतरने लगी


" लेकिन बात - रूम मे तो पानी ही नही आ रहा और फिर चेंज करने के लिए दूसरे कपड़े भी तो नही तुम्हारे पास "


कुछ देर पहले दीप ने बाथ - रूम जा कर मेन टॅप बंद कर दिया था ..जानता था शिवानी ऐसी कोई डिमॅंड ज़रूर करेगी और आज तो ए/सी भी उसके फुल सपोर्ट मे आ गया था ..यहाँ गर्मी के मारे खुद उसके भी पसीने छूट रहे थे


शिवानी एक बार फिर तड़प उठी ..कैसे भी कर के उसे अपनी चूत मे हो रही खुजली शांत करनी थी ..हाथो के पंजो से बेड की चादर मरोड़ते हुए उसने अपने होंठ चबाने शुरू कर दिए


" सही कह रही है गर्मी बहुत है आज ..इस ए/सी को भी आज ही बंद होना था "


इतना कह कर दीप ने अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए ..शर्ट निकालने के फॉरन बाद उसने वेस्ट भी उतार कर दूर फेक दी


" ओह !!!!! अब थोड़ा आराम मिला है ..तुम लेट जाओ शिवानी शायद थकान की वजह से ऐसा हो रह होगा "


दीप ने अपना कमीन्पन ज़ारी रखते हुए कहा ..दूसरी तरफ शिवानी की आत्मा उसके शरीर का साथ छोड़ने को विवश होने लगी ..इतना भयंकर कष्ट तो उसे जीवन मे पहले कभी नही हुआ था


" माफ़ कीजिएगा अंकल ..मैं अब और सहेन नही कर पाउन्गि "



अगली सुबह जब दीप की नींद खुली तो उसने खुद को शिवानी की बाहों मे जकड़ा पाया और आश्चर्य वश उसकी आँखें, अपनी होने वाली बड़ी बहू के अधनंगे जिस्म को महसूस कर बड़ी हो गयी


[ इस वक़्त शिवानी का राइट हॅंड दीप के गले से ऊपर की तरफ मुड़ता हुआ, उसके सर पर था और नीचे उसकी सीधी टाँग ने दीप की कमर को बेल की तरह लपेट रखा था ]


दीप ने फॉरन उसका हाथ अपनी गर्दन से हटा दिया और उठ कर बैठने से अपने आप, शिवानी की टाँग उसकी कमर से अलग हो गयी


[ अब दीप को करवट के बल लेटी शिवानी की चिकनी नंगी पीठ और दाहिना स्तन आधा बाहर निकला हुआ दिखाई देने लगा ]


बिना देरी किए बेड से नीचे उतर कर दीप सीधा बाथ - रूम मे एंटर हो गया ..जाने क्यों उसकी आँखों ने शिवानी के अधनंगे शरीर पर ठहेरने की, कोशिश तक नही की ..क्या वजह हो सकती है, ये तो वो खुद भी नही जान पाया, बस अनुमान स्वरूप उसे शिवानी की ' हां ' ज़रूर पता चल गयी थी


फ्रेश होने के बाद वो कमरे मे वापस लौटा ..गेट से अंदर आते ही उसके कदम जैसे वहीं जमे रह गये ..पीठ के बल लेट चुकी शिवानी के बूब्स, इस समय किसी पर्वत की नुकीली चोटी समान खड़े दिखाई दे रहे थे ..दीप ने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया


" कैसे उठाऊ इसे ? "


घड़ी उस वक़्त सुबह के 10:30 बजा रही थी ..थोड़ी देर सोचने के बाद उसने वॉर्डरोब से एक चादर निकाली और उससे शिवानी की बॉडी को ढकना चाहा ..लेकिन इस बार उसकी आँखें उसे धोखा दे गयी गयी ..माना वो सुधारना चाहता है ..लेकिन इतने जल्दी रोज़ चुदाई करने वाला मन कैसे बदल पाता


बिखरे बाल, बंद नयन और वहाँ से हट कर, नज़रें सीधा चूचियो को घूर्ने लगी ..साँस अंदर - बाहर होने से स्तनो का आकार तेज़ी बढ़ता - घट'ता जा रहा था ..बूब्स से थोड़ा नीचे, सपाट पेट पर उसकी गहरी नेवेल, दीप का मन डोलाने लगी


अपलक जाने कितनी देर तक वो उसके नगन बदन को निहारता रहा ..उसकी खुद की हालत भी बदतर से बदतर होती जा रही थी ..हाथो मे पकड़ी चादर जैसे नीचे गिरने को, तैयार ही नही हो रही थी और तभी शिवानी ने अपनी आँखें खोल ली


" ओह शिट !!!! "


वैसे तो उसे रात मे खुद से किया फ़ैसला याद था ..बट एक दम से दीप की नज़रों को अपनी न्यूड बॉडी घूरते देख, शिवानी ने उसके हाथो से चादर छीन कर ओढ़ ली


" आइ आम सॉरी "


दीप को भी ऐसी उम्मीद नही थी वो एक दम से उठ जाएगी ..हड़बड़ाहट मे उसने सॉरी कहा और रूम के मेन गेट की तरफ बढ़ गया


" मेरी शर्ट "


पलट कर अपना चेहरा नीचे झुकाए दीप वापस लौटा और बेड के पास फ्लोर पर पड़ी रात वाली शर्ट उठा कर कमरे से बाहर निकल गया


" हे हे ..रात को तो बड़ी - बड़ी बातें कर के सोई थी ..फिर अब क्या हुआ ? "


खुद से किए सवाल से शिवानी का चेहरा खिल उठा ..बाद मे उसने भी अपने कपड़े समेटे और फ्रेश हो कर कमरे से बाहर आ गयी


( वैसे भी दीप ने सुबह टॅप को रीओपन तो कर ही दिया था )


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बाहर आने के बाद शिवानी कॉरिडर के लास्ट मे पहुचि ..मिरर डोर से उसे दीप अंदर बैठा दिखाई दिया


" माजी से कब मिलना है ..फिर शाम को वो पुणे भी तो जाएँगी "


इतना बोल कर वो डोर से पीछे हट गयी ..इस वक़्त दीप के हाथो मे काग़ज़ के कुछ टुकड़े थे ..जिन्हे देखने की आड़ मे वो शिवानी के बारे मे ही सोच रहा था ..उसकी बात सुनने के बाद दीप ने उसे कॅबिन के अंदर बुलाया


" यहाँ बैठो "


उसके चेर पर बैठते ही दीप ने अपनी बात शुरू की


दीप :- " तो तुम शादी के लिए राज़ी हो ? "


शिवानी :- " जी "


" तुम्हारे घरवाले ? "


इस सवाल ने शिवानी के मूँह पर ताला लगा दिया ..वाकाई उसने इस बारे मे ध्यान नही दिया था


" नंबर दो मैं बात कर लेता हूँ "


शिवानी ने इनकार मे अपना सर हिला दिया


दीप :- " उन्हे बताए बगैर शादी कैसे होगी ? "


शिवानी :- " वो कभी नही मानेंगे "


दीप :- " क्यों ? "


शिवानी :- " हमारी कॅस्ट अलग हैं ..वैसे भी अशोक के साथ मुझे भाग कर शादी करनी पड़ती "


दीप :- " लेकिन उनकी मर्ज़ी के बिना ..अभी तुम्हारे अंदर इतनी मेचुरिटी नही है ..किसी प्रेशर मे आ कर हां मत करना ..तुम्हारी लाइफ के साथ हम सब की लाइफ भी खराब हो सकती है "


शिवानी :- " अंकल एक बात कहु "


दीप :- " बोलो "


" आप के बेटे का सच जान ने के बाद भी आप को रिश्तो की कोई कमी नही होगी ..अमीर हैं ना ..लेकिन सपने मे भी मेरा रिश्ता इतने बड़े घर मे नही हो पाता ..ये भी सच है ..4 रोटी आप खिलाओ या कोई और ..नोट खा कर तो पेट भरता नही ..तो ये मत सोचिएगा कि मैं पैसो के चक्कर मे शादी के लिए हां कर रही हूँ ..नही तो बाद मे आग लगा कर या गला दबा कर, आपको अपनी बहू की जान लेने की कोशिश करनी पड़े ..अट लास्ट, जितना रघु जी के लिए मुझसे होगा, मैं करूँगी "


शिवानी चुप हो गयी और उसकी बात सुन कर दीप को उतनी ही खुशी हुई ..जितनी कम्मो को तनवी से मिलने के बाद हुई थी


दीप :- " साड़ी पहेन कर तैयार हो जाओ ..तुम्हे किसी मंदिर मे छोड़ने के बाद मैं नामिता की मा को वहाँ ले कर आ जाउन्गा ..नॉर्मली जवाब देना ..मैने उसे बोला है तुम्हारे पेरेंट्स मेरे परिचित हैं ..बाकी मैं संभाल लूँगा "


शिवानी :- " लेकिन मुझे साड़ी पहेन ना नही आती "


दीप ;- " वो भी मुझे सीखाना पड़ेगा क्या ? "


" मैं मेच्यूर नही हूँ, अभी आप ही ने कहा था ..तो अब से मेरी सारी ज़िम्मेदारी आप के ऊपर और आप के बेटे ही देखभाल का जिम्मा मेरे ऊपर "


यहाँ शिवानी ने डबल मीनिंग बात की ..ज़िम्मेदारी वर्ड से उसका मतलब फिज़िकल नीड से था ..जो दीप को भी समझ आ गया


" ह्म्‍म्म !!!!! तुम वो पॅकेट खोलो ..मैं अभी आया "


बात को समझने के बाद भी दीप ने नॉर्मली जवाब दिया और खुश हो कर शिवानी कॅबिन से बाहर निकल गयी ..इनडाइरेक्ट वे मे अपने मन की बात उसने दीप पर ज़ाहिर जो कर दी थी


" कम्मो के बाद ये दूसरी लड़की है जो दिल मे उतर कर रह गयी ..जाने कितने दिन खुद को रोक पाउन्गा "


आख़िर दिल मे छुपि बात होंठो तक आ ही गयी ..दीप खुश भी था और दुखी भी ..जहाँ एक तरफ शिवानी उसका दूसरा प्यार बनी वहीं कुछ दिन बाद उसके घर की बड़ी बहू भी बन ने वाली थी


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" क्या पता मेरी बात का मतलब उन्हे समझ आया भी या नही "


सोचते हुए शिवानी ने पॅकेट से सारा सामान बाहर निकाल लिया ..दीप ने उसके लिए कितनी एक्सपेन्सिव साड़ी खरीदी थी ..पहली बार उसके ग़रीब बदन पर इतना महनगा कपड़ा सजने वाला है ..खुशी से सराबोर उसकी आँखों की कीनोर छलक उठी


" मैं अंदर आ जाउ "


दीप की आवाज़ सुन वो पलटी ..साड़ी को उसने अपनी छाति से चिपका रखा था


" जी "


सिर्फ़ दो शब्दो मे जवाब दे कर उसने, साड़ी को दीप के सुपुर्द करने के लिए अपने दोनो हाथ आगे कर दिए


" बिना नहाए मंदिर जाओगी ? "


दीप ने सोफे पर बैठते हुए पूछा ..खुद उसने भी अब तक नही नहाया था


" पर मेरे पास .... "


शिवानी ने बात को अधूरा छोड़ दिया


" क्या तुम्हारे पास ? "


क्वेस्चन मार्क चेहरा बना कर दीप ने रिप्लाइ किया


" जी वो मेरे पास एक जोड़ी अंडरगारमेंट हैं ..वो भी कल रात गंदे हो गये "


शिवानी लज्जित हो गयी वहीं दीप को उसकी मासूमियत पर बड़ा प्यार आया


" तो अब क्या करें ..फ्रेश साड़ी के अंदर क्या पहनोगी ? "


दीप उसे छेड़ता हुआ बोला


" आप ही की वजह से गंदे हुए हैं ..तो अब आप ही कुछ कीजिए "


शिवानी ने साड़ी ऊपर उठा कर दीप से परदा कर लिया ..उनके बीच होती बातें एक ससुर - बहू के रीलेशन से बिल्कुल अलग थी


" मैने क्या किया ..तुम ने खुद वहाँ हाथ डाला था ..ज़रा भी कंट्रोल नही तुम्हारे अंदर "


दीप ने फिर चिकोटी काटी ..पर्दे के पीछे उसकी बात सुन कर शिवानी का मूँह खुला रह गया ..हाथ नीचे कर उसने एक बार दीप से अपनी नज़रे मिलाई और फिर तुरंत परदा ज्यों का त्यों बना लिया


"आप ने मजबूर किया था ऐसा करने के लिए "


शिवानी अगली आवाज़ के इंतज़ार मे चुप हो गयी ..कल रात की बची खुमारी उसके चेहरे पर वापस लौटने लगी ..अंतर बस इतना है, आज वो इस मदहोशी से बाहर नही आना चाहती थी


" शिवानी !!!! "


उसे चुप देख दीप ने उसका नाम पुकारा


" ह्म्‍म्म्म !!!! "


कल रात की तरह इतने से जवाब के अलावा, उसके मूँह से और कुछ नही निकल पाया


" क्या मुझसे प्यार करने लगी हो ? "


सवाल पूछ्ते वक़्त दीप की वाय्स बेहद लो हो गयी ..लेकिन फिर भी शिवानी ने बिल्कुल क्लियर सुना ..उसने फॉरन अपनी आँखें बंद कर चेक किया, तो उनके अंदर उभरने वाली तस्वीर उसके ससुर की ही थी


" हां !!!! "


झटके से सारी को बेड पर फेक वो दौड़ती हुई सीधा दीप के गले से जा चिपकी


" उस दिन के बाद, आज भी मुझे मजबूर किया ..बहुत गंदे हो आप "


शिवानी ने अपना चेहरा उसकी चेस्ट से सटा लिया ..साथ ही उसकी ना रोने की कसम भी टूट गयी, क्यों कि ये उसका नया जनम था, बीते हर दुखो से मुक्ति


लगभग 15 मीं. तक कमरे मे यूँ ही सन्नाटा पसरा रहा ..शिवानी ने तो अपने दिल की बात कह दी, अब बारी थी दीप की


" जाओ नहा लो ..मैं मार्केट जा रहा हूँ "


दीप कुछ नही कह पाया ..चाहता तो था, आज ही इस दोहरे रिश्ते पर अपनी मोहर लगा दे, लेकिन नही


वो सोफे से उठने को हुआ ..शिवानी का निचला धड़ ज़मीन पर और चेहरा दीप की चेस्ट पर था ..वहीं उसके हाथो की उंगलियों ने शर्ट को बड़ी ताक़त से पकड़ रखा था ..शायद अब वो दीप से कभी दूर नही होना चाहती थी ..ना उसे होने देती


जब काफ़ी देर तक शिवानी ने कोई रेस्पॉन्स नही दिया तब दीप ने अपने दोनो हाथ सोफे से हटाते हुए उसके आर्म्पाइट्स को मज़बूती से थाम लिया ..अगले पल वो सोफे से खड़ा हुआ और शिवानी उसके बदन से चिपकी किसी फूल की तरह ज़मीन से 20 अंगुल ऊपर उठ गयी


फॉरन अपनी टांगे दीप की कमर से लिपटा कर उसने आँखें खोल दी


" आज भी नहलाओगे क्या ..मैं अब वो शिवानी नही जो आप का दिल बहलाने के लिए आई थी ..अब आप की बहू बनने जा रही हूँ ..थोड़ा तो सोचिए "


आइ कॉंटॅक्ट सटीक हुआ ..दीप भी उसकी कजरारी आँखों मे झाँक रहा था ..जो बात अभी शिवानी ने कही उसमे कयि शब्द बदले से थे ..खेर जब हालात ही बदल जाएँ तो शब्दों की क्या बिसात


" बहुत शैतान होती जा रही हो ..शरम नही आती मुझसे ऐसी बातें करते हुए "


दीप ने स्माइल दे कर कहा ..साथ ही उसकी नाक पर काटने की गर्ज से अपने दाँत बाहर निकाल लिए


" वो शिवानी तो कल रात को ही मर गयी ..आज की शिवानी सिर्फ़ आप की है और हमेशा रहेगी ..आप के अलावा मुझ पर किसी और का कोई हक़ नही होगा "


उसने दीप के काटने का इंतज़ार नही किया और अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसकी टिप, फोर्हेड से फेरती हुई नीचे आने लगी ..18 की बाली उमर ..वाकयि वो मेच्यूर नही थी


" काट लूँ "


फॉरन जीभ मूँह के अंदर करने के बाद उसने दीप की नाक पर अपने दाँत रख दिए ..फिर पलकों को ऊपर - नीचे करती हुई उसकी इजाज़त माँगने लगी ..ये सीन देख कर दीप से कंट्रोल नही हुआ और वो इतनी ज़ोर से हँसा कि एक पल के लिए शिवानी सेहेम सी गयी


" अगर मैं जवान होता ..तो पक्का तुमसे शादी कर लेता "


दीप ने उसका माथा चूम कर कहा ..शिवानी के लाल होते गाल देख कर, उसने 2 - 3 गहरी पप्पियाँ उन पर भी छोड़ दी और इसके बाद उसे नीचे उतारते हुए कमरे से बाहर जाने लगा


" तुम नहा लो मैं मार्केट से लौट कर आता हूँ ..कलर कौन सा चाहिए ? "


बिना पीछे मुड़े दीप बोला ..कलर से उसका मतलब अंडरगार्मेंट्स से था


" जिसमे आप देखना चाहते हों ..वही ले आना "


शिवानी ने अपनी कमीज़ उतारते हुए कहा ..उसकी बात से चौक कर दीप ने पलट कर देखा, वो बिल्कुल शांत थी ..समर्पण कर चुकी थी


5 सेकेंड. फिर आँखों का मिलन हुआ ..ब्रा मे खड़ी शिवानी ने अपनी सलवार का नाडा खोला ..लेकिन उसके नीचे गिरने से पहले ही दीप कमरे से बाहर निकल गया ......


दीप की कार पास के एक लाइनाये स्टोर पर रुक गयी ..पूरे रास्ते, और यहाँ तक अभी भी उसके जहेन मे सिर्फ़ शिवानी की कही बातें घूम रही थी


" बहुत मासूम लड़की है ..काश रघु ठीक होता, उसकी ज़िंदगी बना देती "


इसी सोच मे वो स्टोर के अंदर पहुच गया


" जी कहिए ? "


सुबह का वक़्त होने से स्टोर मे भीड़ ना के बराबर थी ..काउंटर सॉफ करती एक 25 - 26 साल की लड़की ने उससे से पूछा


" एक फीमेल सेट खरीदना है "


दीप ने रिप्लाइ किया


" साइज़ &; डिज़ाइन सर ? "


लड़की के सवाल पर दीप हड़बड़ा गया ..ज़िंदगी भर उसने पचासों लड़कियों को नंगा किया था ..लेकिन आज पहली बार किसी का बदन, ढकने की गरज से अंडरगार्मेंट्स खरीदने आया था


" साइज़ ..साइज़ ..साइज़ !!!! "


चाह कर भी उसके मूँह से शब्द नही फूटे ..लड़की मुस्कुरा उठी, शायद इसमे उसने दीप के सीधेपन को समझ होगा


लड़की :- " किसी ख़ास के लिए लेना है क्या ..आगे बताइए ? "


दीप :- " 18 "


लड़की :- " ज़्यादा दुबली - पतली तो नही है ना ? "


दीप :- " नही नॉर्मल है "


लड़की :- " साइज़ तो मैं कर दूँगी ..बट डिज़ाइन ? "


दीप :- " जब साइज़ पता चला गया है तो डिज़ाइन भी आप अपने हिसाब से निकाल दीजिए "


लड़की :- " रीलेशन क्या है लड़की से ? "


दीप :- " क्या ? "


लड़की :- " ये तो नॉर्मल क्वेस्चन है ..अगर बेटी के लिए ले जा रहे हैं, तो उस हिसाब से दूँगी / अगर गर्लफ्रेंड के लिए लेना है, तो उस हिसाब से ..खेर वाइफ तो आप की 18 की होगी नही "


दीप जैसे रोज़ ना जाने कितने विज़िटर्स से उसका पाला पड़ता था, तो बिना किसी झिझक के उसने कहा ..एक गर्लफ्रेंड के लिए तो एरॉटिक से एरॉटिक डिज़ाइन्स खरीदी जा सकती हैं ..बट बेटी के लिए तो कोई भी बाप सिंपल अंडरगार्मेंट्स ही लेगा


" गर्लफ्रेंड है "


आख़िर दीप को झूट बोलना ही पड़ा ..बहू के बारे मे तो कहता नही


" ओके "


मुस्कुरा कर लड़की ने ब्लॅक कलर ' लो राइज़, जी -स्ट्रिंग्स वित प्रेशियस लेस ' पैंटी और मॅचिंग ' थ्रेड ब्रा ' पॅक कर दी


" थॅंक यू "


अंडरगार्मेंट्स देखे बिना ही दीप ने पॅकेट उठा लिया और जल्दी से पेमेंट कर, स्टोर से बाहर निकल गया


" उफफफफ्फ़ !!!! कितना मुश्क़िल है ये सब "


चेहरे का पसीना पोंछ कर दीप अपने ऑफीस की तरफ बढ़ गया ..अगर उसमे बदलाव ना आया होता तो अभी खड़े - खड़े ही स्टोर वाली लड़की की चुदाई कर दी होती


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शिवानी नहा कर बेड - रूम मे बैठी दीप के लौटने का इंतज़ार कर रही थी ..नहाते वक़्त उसका मन तो बहुत हुआ, अपनी चूत मे उंगली कर के, अपनी प्यास बुझा ले ..लेकिन अब उसकी चूत उंगली नही, अपने ससुर के मूसल की माँग करने लगी थी


थोड़ी देर बाद दीप बेड - रूम मे एंटर हुआ ..शिवानी को टवल मे देख वो चौक गया ..आख़िर मेल टवल, कहाँ तक एक लड़की के जिस्म को ढक पाती


" ये बहुत छोटा है ..कोई और ऑप्षन नही था मेरे पास "


शिवानी बेड से उठ कर उसके करीब आने लगी ..बूब्स लगभग हाफ बाहर थे और लोवर पार्ट भी कुछ ख़ास नही छुप पाया, चूत की फांको से मात्र 3 - 4" नीचे आ कर टवल ख़तम हो गया था


" वो मेल टवल है ..लो ये पहेन लो "


काँपते हाथो से दीप ने पॅकेट उसके सामने कर दिया ..उसकी आँखें ज़मीन को देख रही थी ..शिवानी ने पॅकेट पकड़ लिया और वहीं पर खोल कर देखने लगी


" शिवानी प्लीज़ बाथ - रूम मे चली जाओ "


दीप दो कदम पीछे हट कर बोला ..लाइफ मे पहली बार वो किसी लड़की से घबराया था ..यहाँ तक कि बेटी निम्मी के नंगे बदन को देखने के बाद भी, उसकी पलकें यूँ ना झुकी थी ..फिर शिवानी मे ऐसा क्या है .. ' प्यार ' और सिर्फ़ ' प्यार '


सोफा क्रॉस करते ही शिवानी ने टवल खोल दिया ..बिना शरमाये उसने दीप की आँखों मे देखा और फिर बड़े ही मादक अंदाज़ मे अपने चूतड़ो को मटकाति हुई बाथ - रूम मे एंटर हो गयी


सीन देखते ही, पॅंट मे दीप का लंड मानो पत्थर हो गया ..उसे ज़रूरत महसूस हुई एक टाइट चूत की ..शिवानी के आँखों से ओझल होते ही उसने पॅंट की चैन खोल कर लंड बाहर निकाल लिया और धीरे - धीरे खाल को आगे - पीछे करने लगा


" नही सुधरेगा तू ..वो बहू है तेरी "


अंतर्मन ने कचोटा फिर भी दीप नही रुका ..उसका हाथ रफ़्तार पकड़ने लगा ..ये तक भूल गया कि शिवानी कुछ ही पॅलो मे बाथ - रूम से बाहर आ जाएगी


" तो ये है आप की चाय्स "


आवाज़ सुनते ही झटके से दीप के हाथ ने लंड को कवर किया ..लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी ..न्यू लाइनाये पहने शिवानी, उसके लंड को घूरती हुई बेहद नज़दीक आ गयी


दीप कभी उसके बदन को देखता और कभी अपने लंड मे होते कड़क पन्न को ..उसे आशा नही थी, स्टोर वाली लड़की इतने छोटे और सेडक्टिव अंडरगार्मेंट्स पॅक करेगी


" वो मैं वो..... "


दीप की आवाज़ लड़खड़ा गयी ..शिवानी से भी कंट्रोल नही हुआ और उसने दईप का वही हाथ पकड़ लिया, जिससे उसने अपने लंड को छुपाया हुआ था


पास रखे सोफे तक दीप उसके हाथो खिचता चला गया ..उसके शरीर मे बिल्कुल भी जान नही रही ..हल्का सा धक्का दे कर शिवानी ने उसे सोफे पर गिरा दिया और खुद भी अपने घुटनो पर बैठ गयी ..फॉरन उंगलियों के ज़ोर से उसने पॅंट को, बटन से खोला और बिना दीप की गांद उठवाए, पॅंट अंडरवेर सहित घुटनो से नीचे खीच कर दूर फेक दिया


" ज़बरदस्ती और प्यार मे यही अंतर है "


इतना बोल कर शिवानी ने खड़े लंड को अपनी मुट्ठी मे कसा और हौले - हौले उसे स्ट्रोक करने लगी


" ये ग़लत है शिवानी ..हमारा रिश्ता इसकी पर्मिशन नही देता "


दीप ने उसके हाथ को लंड से हटाने की कोशिश करते हुए कहा


" आप के बेटे से शादी मेरा मन कर रहा है ..लेकिन तंन का क्या करूँगी ..बाहर मूँह मारने से अच्छा है, आप के साथ खुश रहूं ..कम से कम रंडी तो नही कहलाउंगी "


इतना कह कर शिवानी ने अपना चेहरा नीचे झुकाते हुए, रस से भीगे शुपाडे को चूम लिया


" आज से मेरी मर्ज़ी इसमे शामिल हुई "


अपने हाथ को लंड की जड़ पर ला कर उसने दीप की आँखों मे देखा ..पनियानी आँखें सिर्फ़ खुशी से झूम रही थी


" तो आप की मर्ज़ी क्या कहती है पापा ..बेवफ़ाई नही करूँगी "


शिवानी ने सवाल किया ..अपने होने वाले ससुर को ' पापा ' कह कर संबोधित करना उसके लिए दोहरी खुशी समान था


" कहिए ना पापा ..आप की पर्मिशन के बगैर कुछ नही करूँगी "


सोचने मे दीप ने वक़्त लिया ..हर पहलू से गुना - भाग करने के बाद. अपनी भीगी पलकों को हिलाते हुए, उसने खुद की सहमति देती


" होने वाली बहू का पहला तोहफा क़ुबूल करें "


शिवानी ने सुपाडे को होंठो मे भीच लिया ..नीचे उसका हाथ भी लंड की जड़ पर कसने लगा


" शिवानी मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ ..वादा है आने वाली ज़िंदगी मे कोई तकलीफ़ नही होने दूँगा "


दीप ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा ..खुले बालो की एक लंबी लट दीप की जाँघ को टच कर रही थी


" रेकॉर्डिंग करनी हो तो कर सकते हैं ..मुझे कोई आपत्ति नही "


ब्लो जॉब स्टार्ट करने से पहले शिवानी ने, एक आख़िरी बार सुपाड़ा मूँह से बाहर किया और स्माइल दे कर वापस मूँह मे डाल कर चूसने लगी ..नीचे हाथ से लंड मुठियाने की गति ने भी ज़ोर पकड़ लिया


" ऊऊऊऊ !!!! अब इसकी कोई ज़रूरत नही ..मैने तुम्हे पा लिया है "


आनंद विभोर हो कर दीप की सिसकारियो का जनम होने लगा ..कमर अपने आप ही ऊपर - नीचे चलने लगी, साथ ही शिवानी के सर पर उसके हाथो ने मजबूती पकड़ ली


मूँह के अंदर शिवानी ने सुपाडे पर अपनी खुरदूरी जीभ के प्रहार देने शुरू कर दिए ..ज़्यादा से ज़्यादा मात्रा मे वो अपना थूक लंड पर छोड़ती जाती, ताकि होंठो की किनोर से बहकर उसका स्लाविया, लंड की ऊपरी खाल को चिकना कर सके


" उलुउउम्म्म्मम !!!!! "


एक मादक साउंड के साथ, आधा लंड उसके मूँह के अंदर पहुच गया ..हाथ की मुट्ठी के प्रयोग से, मूँह के अंदर सूपड़ा खाल से नीचे उतरता ..फॉरन शिवानी की जीभ उस पर गोल - गोल घूमने लगती ..फिर जैसे ही सूपड़ा खाल के अंदर जाता ..वो होंठो के ज़ोर से उसे चूसने लगती


" ह्म्‍म्म्ममममम !!!! "


दीप की उत्तेजना भरी हुंकारो से जल्दी ही शिवानी को उसकी मेहनत का फल मिलने लगा और वो दोगुनी तेज़ी से लंड चुसाइ आरंभ कर देती है


" पापा ..आज तो ये कुछ ज़्यादा ही रस छोड़ रहा है "


अचानक से शिवानी ने लंड अपने मूँह से बाहर निकाल दिया ..आइ कॉंटॅक्ट से तो वो दीप का हाल जान रही थी ..लेकिन ना जाने क्यों उसके मूँह से भी, कुछ ऐसा ही सुन ने को मचल उठी


" अपनी बहू के मूँह मे खुशी के आँसू बहा रहा है "


दीप ने उसके गाल पर थपकी दे कर कहा ..हलाकी शिवानी की बात सुन कर उसे थोड़ा अचंभा तो हुआ .. लेकिन प्यार वश वो अपनी बहू की नादान हरकतों का आदि होने लगा था


" फिर ये चुप कैसे होगा ? "


अपनी आँखों की पुतलियों को नचाते हुए शिवानी ने पूछा


" प्यार करने के "


इसके साथ ही दीप ने उसका सर वापस अपने लंड के ऊपर झुका दिया ..उसे तो ऐसे सुख की कल्पना तक नही थी ..पैसो मे तो कयि रंडियाँ चोदि, लेकिन प्यार भरा प्लेषर उसे शिवानी ने ही दिया ..यहाँ तक की आज कम्मो भी उसके आगे फीकी जान पड़ी


" फिर तो मैं इसे हमेशा प्यार करूँगी "


एक बार फिर से कमरे मे तूफान उठने लगा ..मूँह के अंदर की चुसाइ शिवानी उसे दिखा चुकी थी अब बारी आई बाहरी चटाई की


अपनी जीभ से उसने, टिप से लेकर टट्टो तक कयि राउंड लगाए ..हर आंगल से चाटा ..शुपाडे की जॉइंट स्किन ..अंदर की तरफ धासा हुआ गोल घेरा ..लंड का टोपा सूजा कर उसने एक दम पर्पल बना दिया


" उफफफफ्फ़ !!! मत तडपा शिवानी ..मेरी जान निकल जाएगी "


दीप पस्त हो कर रह गया ..शिवानी मुस्कुरा उठी, ये उसकी पहली विजय थी ..एक पक्के छिनाल बाज़ इंसान को उसने अपने काबू मे जो कर लिया था


" आप के ऊपर सिर्फ़ मेरा हक़ है ..किसी और का नही "


उसकी गंभीर बात सुन कर दीप ने उसकी आँखों मे झाँका ..लगा जैसे कोई बहुत बड़ी जंग जीत कर लौटी हो और वापस नयी जंग शुरू करने की अग्रिम चेतावनी दे रही हो


" तुम्हारे ऊपर मेरा "


इस वक़्त तो दीप के मूँह से यही निकला ..हलाकी उसने शिवानी की बात मे एक तरह का विद्रोह देखा था ..लेकिन उससे कुछ और कहते नही बन पाया


" मज़ाक कर रही हूँ पापा ..क्या मेरा इतना भी हक़ नही ? "


शिवानी खिल - खिला उठी ..दीप उसे थोड़ा घहबराया सा दिखाई दिया था


" देखा डरा दिया ना !!!! "


इतना कह कर उसने लंड को फिर से चूसना शुरू कर दिया


" आईईईईईई !!!! यू नॉटी गर्ल "


जहाँ एक पल को दीप की गांद फटी वहीं दूसरे पल लंड मे वापस से उबाल आने लगा


अगला पार्ट शिवानी ने फाइनल बनाया क्यों कि उनके पास वक़्त कम था और फिर अपनी सास से मिलने भी जाना था


बिना किसी रुकावट के उसके होंठ आधे लंड को पार कर गयी और फ्री हाथ से उसने टट्टो को मसलना शुरू कर दिया ..एक साथ तीन तरह का आनंद दीप से सहा नही गया और उसके चरम की सीमा टूटने लगी


" ओह !!!! मैं किसी भी पल आ जाउन्गा "


कमर के धक्के देते हुए दीप चिल्लाया ..शिवानी के गले को चीरते हुए लंड की नोक आख़िरी पड़ाव पर अड़ने लगी


" उलुप्प्प्प्प्प्प्प !!!! "


हल्की सी उल्टी का एहसास होते ही शिवानी की आँखों ने उसके दर्द को बयान कर दिया और उसके हाथ दीप की जाँघो को दबाने लगे


" आहह !!!! "


इसी जद्दो जेहेद मे दीप के लंड से वीर्य की फुहार निकलना शुरू हो गयी ..लेकिन इस बार शिवानी ने उसका अंश मात्र भी अपने गले से नीचे नही उतारा और जीभ की मचलाहट से सुपाडे को तंग करती हुई सारा रस, लंड पर उडेलने लगी ..धीरे - धीरे दीप की कामोत्तेजना का पूरी तरह से अंत भी हो गया


" अब आएगा मज़ा "


लंड मूँह से बाहर निकाल कर शिवानी वीर्य के कतरो को अपनी जीभ मे लपेटने लगी ..दीप बड़े आश्चर्य से उसकी हरक़त देखने लगा


" अब बस करो ..हो गया मेरा "


दीप ने उसके सर को ऊपर उठाते हुए कहा ..जो अब टट्टो के ऊपर झुकने वाला था ..हलाकी शिवानी के मन मे आया कि वो पूरा लंड चाट कर सॉफ करे ..लेकिन दीप के मना करने पर वो उठ कर खड़ी हो गयी


" अब साड़ी पहना दीजिए "


शिवानी ने बेड पर पड़ा सारा सामान समेटा और सोफे पर वापस लौट आई


" थॅंक यू बेटा ..लेकिन तुम्हारा तो कुछ हुआ ही नही "


शिवानी को बिल्कुल नॉर्मल देख कर दीप ने कहा


" मेरी फिकर छोड़िए ..मैं उस पल को यादगार बनाना चाहती हूँ ..अभी वक़्त बहुत हो गया है ..कहीं मा जी को पुणे जाने मे लेट ना हो जाए ..फिर मुझे भी तो अपने हॉस्टिल जाना पड़ेगा "


एक साथ इतनी सारी बातें करने के बाद शिवानी ब्लाउस को पहेन ने लगी ..जो बॅक लेस ज़रूर था लेकिन पल्लू लेने के बाद उसे कोई दिक्कत पेश नही आती और इसी तरह उसने पेटिकोट को भी अपनी कमर पर बाँध लिया


" क्या सोच रहे हैं ..पहनाईए ना साड़ी ..आप भी तो घर जाओगे "


दीप को खोया देख उसने टोका ..मुस्कुरा कर दीप ने उसे अपनी गोद मे बिठाना चाहा ..लेकिन वीर्य से सनी जगह को देख कर शिवानी पीछे हट गयी


" जब सॉफ कर रही थी, तब तो रोक दिया और अब मेरे नये कपड़े खराब कर रहे हो "


शिवानी का हर शब्द इतनी मासूमियत लिए था जैसे वो सच मे कोई परी हो


" इतनी बड़ी - बड़ी बातें कहाँ से सीखी ? "


दीप ने साड़ी उठा कर उसकी कमर पर लपेटनी शुरू कर दी ..शिवानी किसी मोर की तरह नाच रही थी ..गोल - गोल घूम रही थी ..उसका मन बेहद प्रसन्नता से भरा था और सबसे बड़ी बात, मात्र दो दिनो मे दीप ने उसकी वीरान ज़िंदगी को, पूरी तरह से खुशी मे बदल दिया था


" आप ने बदला है मुझे और हां अब से मैं रोज़ आप के हाथो से ही साड़ी पहनुँगी "


शिवानी की बात सुन कर दीप ने उससे बोलना तो बहुत कुछ चाहा ..लेकिन ज़ुबान खामोश हो गयी थी ..शिवानी की अठखेलियों का मज़ा लेते हुए वो साड़ी मे प्लेट्स बनाने लगा ..फिर अब तो वो लाइफ टाइम के लिए उसके पास ही रहने वाली थी ..तो दीप किसी बात की कोई जलबाज़ी नही रही


" लो हो गया "


प्लेट्स का बंच पेटिकोट से अंदर करते हुए दीप ने उसे छोड़ दिया


" अब बाकी का पार्लर मे "


तेज़ी से अपनी अनडाइस और पॅंट को उठा कर दीप उन्हे पहेन ने लगा


शिवानी :- " गंदे पापा ..कम से काम सॉफ तो कर लेते ..या मैं कर देती "


दीप :- " ता - उमर पड़ी है ..अब जल्दी चलो हमे लेट हो रहा है "


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इसके बाद दोनो पार्लर पहुचे ..अड्वान्स पेमेंट करते हुए दीप ने पास के मंदिर का रास्ता बता कर, उसे वहाँ आने का बोल दिया ..फिर जल्दी ही कम्मो को ले कर वो मंदिर लौटा ..तनवी के साथ कम्मो को शिवानी भी एक नज़र मे पसंद आ गयी


कुछ सच, कुछ झूट ..लगभग 1 घंटे तक तीनो मंदिर मे रुके रहे ..बाद मे विदा होते वक़्त शिवानी ने एक साथ दोनो का आशीर्वाद लिया और वहाँ से अपने हॉस्टिल आ गयी .....



दीप को विदा कर कम्मो घर के अंदर पहुचि, उसकी दोनो बेटियाँ तो अपने - अपने कमरो मे थी ..लेकिन निकुंज का कुछ अता पता नही चला ..उसके कमरे का गेट खुला था और बेड पर ढेर सारे पेपर्स बिखरे पड़े थे


" जहाँ भी गया है ..निक्की को ज़रूर पता होगा "


ऐसा सोच कर वो अपनी बड़ी बेटी के कमरे मे एंटर हुई, लेकिन निक्की उसे गहरी नींद मे सोती मिली


" ये तो सो रही है "


कम्मो का मन अधीरता से भरने लगा ..हालाकी घड़ी मे अभी सिर्फ़ 8:30 ही बजे थे, लेकिन निकुंज इतने बजे तक हमेशा घर लौट आता था


" फोन भी बंद आ रहा है ..जाने कहाँ गया होगा "


कम्मो ने 3 - 4 बार कॉल ट्राइ किया, लेकिन उसके बेटे के सेल ने स्विच ऑफ बताया


" देखती हूँ ..कहीं कोई नोट तो नही छोड़ा "


कम्मो द्वारा सभी बच्चो को सख़्त हिदायत थी, यदि किसी कारणवश बडो से बात ना हो पाए तो घर की किसी भी मेन जगह ..जैसे डाइनिंग टेबल, किचन रॅक या अपने कमरे मे ..जहाँ जा रहे हों उसकी डीटेल्स लिख कर छोड़ दिया करें


ऐसा विचार कर कम्मो ने नोट ढूँढने की छान - बीन शुरू कर दी ..डिन्निंग टेबल या किचन, कहीं भी उसे कोई कागज का टुकड़ा नही दिखाई दिया


" उसके कमरे मे देखती हूँ "


वो तेज़ी से निकुंज के कमरे मे जा पहुचि, उसके चेहरे पर अब घबराहट के भाव छाने लगे थे


बेड पर पड़े सभी काग़ज़ो को उसने बारी - बारी चेक किया लेकिन पेपर्स अफीशियल थे .. ' शायद घर के बाहर जाने से पहले निकुंज इन्हे देख रहा होगा '


कम्मो की सरसरी निगाह ने कमरे की बाकी जगहो का मुआईना भी किया और फिर हताश हो कर, कमरे से बाहर निकालने लगी


वो दरवाज़े तक पहुच पाती इससे पहले ही उसकी नज़र हॅंगर पर टँगे कपड़ो पर ठहर गयी ..जिसमे ख़ास वो टी-शर्ट और शॉर्ट्स था जो उसके बेटे ने आज सुबह रन्निंग के दौरान पहेना था


" हे भगवान ..ये लड़का पूरा पागल है ..कम से कम इन्हे पानी मे तो भिगो देता ..अब थोड़ी ना जाएँगे ये खून के दाग "


हॅंगर उसके काफ़ी नज़दीक था ..तभी वहीं खड़े - खड़े उसे ब्लड स्पॉट्स दिखाई दे गये


" वॅनिश मे गला देती हूँ ..शायद सॉफ हो जाएँ "


ऐसा सोच कर उसने टी-शर्ट और शॉर्ट्स हॅंगर से उतार लिया


" पॉकेट चेक कर लूँ, कोई काम की चीज़ ना रखी हो ..नही तो वापस सीढ़ियाँ उतर कर नीचे आना पड़ेगा "


( उसने ऐसा कहा तो नही, लेकिन मन मे शायद यही विचार आया होगा )


टी-शर्ट मे जेब नही थी, तो उसने अपना अपना हाथ शॉर्ट्स की पॉकेट मे डाल दिया


" रूमाल है "


कहने के बाद उसने उसे बाहर खीचा और तुरंत ही तीनो चीज़ें उसके हाथ से छूट कर नीचे ज़मीन पर गिर गयी


सीक्वेन्स वाइज़ टी-शर्ट, उसके ऊपर शॉर्ट्स और सबसे टॉप पर ' रेड पैंटी '


वैसे तो कमरे मे पहले सन्नाटा पसरा था ..लेकिन अब वहाँ कम्मो के दिल की धड़कने सुनाई देने लगी ..दोनो हाथ एक साथ उसके खुले मूँह को ढके हुए थे और आँखें इतनी बाहर आ गयी कि अगले ही पल नीचे गिर कर, कन्चो की तरह फ्लोर पर लूड़कने लगेंगी


वो अपलक पैंटी को देखती रही ..हलाकी अभी उसे अनुमान नही, किस की होगी ..लेकिन बीते हालातो के मध्ये - नज़र शक़ की सूइयां सीधी निक्की की तरफ इशारा करने लगी


नीचे झुक कर पैंटी उठाने के बाद उसने उसके कपड़े को अपनी उंगलियों पर फील किया और फिर टॅग देखा


" निम्मी सिंपल नही पेहेन्ति ..टॅग भी उसकी साइज़ से 2" ज़्यादा है ..मेरी है नही ..फिर ......... "


कम्मो पैंटी के साथ बाहर आने लगी


" अगर निकुंज को ये वापस नही मिली, तो उसे शक़ हो सकता है "


ऐसा सोच कर उसने फॉरन पैंटी को शॉर्ट्स की जेब मे डाल दिया और दोनो कपड़े ज्यों के त्यों हॅंगर पर टाँग कर फाइनली कमरे से बाहर निकल गयी


निकुंज और निक्की के कमरो मे बस बीच की दीवार का सेपरेशन था


कम्मो अपनी बड़ी बेटी के कमरे मे आ आई और बिना कोई आवाज़ किए उसने बाथ - रूम का गेट खोल कर उसके अंदर झाका


" छोटी - मोटी बात नही है ..मुझे पता करना होगा, कि आख़िर ये भाई बेहन पाप के किस मोड़ तक पहुच चुके हैं "


इतना सोचते ही कम्मो की आँखें गुस्से से भर उठी ..भले निकुंज उसका लाड़ला है, निक्की भी उतनी ही प्यारी ..लेकिन दोनो के बीच पनपे इस पापी रिश्ते को बर्दास्त करना कम्मो के बस से बाहर था


वो बाथ - रूम के अंदर पहुचि ..सीधे उसकी नज़र पहले तो हॅंगर पर टँगी ब्लॅक पैंटी पर गयी और उसे उतारने के बाद उसने फ्लोर पर पड़े कपड़ो को देखा


" हां 1 ये है "


लोवर के बगल मे पड़ी पैंटी को उठा कर उसने दोनो के टॅग मॅच किए ..साइज़ तो साइज़ कंपनी भी सेम थी


" बेशरम है दोनो "


कम्मो ने देखा फ्लोर वाली पैंटी पर सफेद धब्बे बने थे, चूत के आस - पास टच होने वाला पूरा हिस्सा कड़क था


" हे भगवान !!!! बस यही दिन बचा था देखने को "


वो रुआसी हो गयी ..दिन की सारी खुशी आँखों से पल भर मे ओझल कर, आँसुओ की धार बहने लगी ..उसके पैर जवाब देने लगे और धीर - धीरे वो बाथ - रूम के फ्लोर पर बैठ - ती चली गयी


" अब मैं क्या करूँ ..पहले रघु की बीमारी, फिर निम्मी का बच्पना और अब ये ..छ्हीई !!!! "


कम्मो सोचते - सोचते चेतना से शून्य मे जाने लगी, तभी उसके दिमाग़ मे एक और बात उठी


" निकुंज से तो इस बारे मे कुछ भी पता चलना मुश्क़िल है ..लेकिन निक्की के ज़रिए चल सकता है ..मैं भी तो देखूं आख़िर दोनो भाई - बहनो ने कहाँ तक गुल खिला लिए ..कितना नीचे गिरा दिया मेरी कोख को "


बस यहीं आ कर उसके आँसुओ का बहना एक दम से रुक गया ..वो किसी घायल शेरनी की तरह वापस खड़ी हुई और बाथ - रूम से सीधा, निक्की के बेड पर आ कर बैठ गयी


" सुधार की गुंजाइश तभी हो सकती है जब ग़लती की गति का पता चले ..मुझे जान ना होगा ..ये दोनो कितना आगे बढ़ चुके हैं "


उसने निक्की के बदन पर पड़ी चादर अलग कर दी ..छोटी सी फ्रोक मे अपनी बेटी को देख कर उसे एक और झटका लगा


" ये तो निम्मी की फ्रोक है, फिर इसने कैसे पहेन ली ..ज़रूर निकुंज ने ला कर दी होगी, चोट के कारण ये तो सीढ़ियाँ चढ़ने से रही "


एक मास्टर माइंड जासूस की तरह कम्मो ने अपने दिमागी घोड़ो को दौड़ाना शुरू कर दिया था


" मतलब बाथ - रूम मे इसके गंदे कपड़े भी निकुंज ने रखे होंगे ..पर क्या इसने निकुंज के सामने ही अपना लोवर उतारा होगा और फिर पैंटी भी ..उसी पैंटी पर इसकी जवानी के निशान हैं ..हे राम !!!!! आज मुझे क्या - क्या सोचना पड़ रहा है "


घबराहट मे कम्मो की धड़कने इतनी लो हो गयी थी, जैसे अभी तुरंत ही हार्ट - अटॅक से मर जाएगी


[ निक्की के सोने की पोज़िशन :- पीठ के बल लेटी है ..दोनो टाँगें एक दम सीधी ..फ्रोक के उपर स्ट्रॅप्स तो कंधे पर ठीक हैं ..लेकिन नीचे फ्रोक की लेंग्थ, उसकी थाइस तक ढकने मे असमर्थ है ..एक तरह से हल्का सा फ्रोक ऊपर उठते ही ..उसकी चूत या चूतड़ आसानी से दिखाई दे जाते ]


कम्मो का धेर्य जवाब देने लगा ..उसका दाहिना हाथ अपने आप ही फ्रोक को ऊपर उठाने के लिए आगे बढ़ गया ..आख़िर इस पाप के वर्तमान हालात तो तभी ज़ाहिर होंगे, जब वो अपनी बेटी की योनि का हाल जानेगी ..और दोनो से कुछ पूच्छे बिना ही उसे सत्यता का पता चल जाएगा


उसने निम्मी की चूत को कयि बार देखा था, एक बार उसे चरम पर पहुचने मे उसकी मदद भी कर चुकी थी ..लेकिन ज्यों - ज्यों उसका हाथ निक्की की फ्रोक की तरफ बढ़ता, उसमे कंपन तीव्र होता जाता


अट लास्ट उसकी उंगलियों ने फ्रोक की जड़ पकड़ ली ..एक बार गहरी साँस लेने के बाद वो भगवान से से दुआ माँगने लगी की फ्रोक के अंदर के हालात सही हों ..हालाकी यहाँ उसे सबसे बड़ा झटका लगने वाला था, क्यों कि निक्की ने इस वक़्त फ्रोक के नीचे ना तो पैंटी पहनी थी ना ही चूचियों पर ब्रा ..और इस बात से अंजान कम्मो ने बड़े आराम से फ्रोक को थाइस से ऊपर करना शुरू कर दिया


" हैं !!!!! "


जो होना था हो कर रहा ..चूत के आस - पास उगे घने जंगल की शुरूवात होते ही कम्मो बेड पर उच्छल पड़ी और फिर एक बार मे ही उसने फ्रोक को निक्की के पेट तक ऊपर उठा दिया


" इसने तो अंदर कुछ नही पहना "


बोलते ही कम्मो की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा ..उसे अहसास हुआ जैसे उसके दिमाग़ के अंदर की सारी नसें एक साथ ब्लास्ट होने वाली हों और इसी बीच निम्मी की बॉडी हिलने लगी


ए/सी की ठंडक चूत पर महसूस कर उसने अपनी टाँगो की जड़ को चिपका लिया और करवट लेने को हुई ..पर इससे पहले ही कम्मो ने उसे अपने हल्के हाथो से साधा लिया ..उसका काम अभी अधूरा जो था


अब कम्मो के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी अपनी बेटी की बंद टाँगो को वापस खुलवाना और यदि वो इसमे ज़ोर जबरदस्त करती, तो यक़ीनन निक्की नींद से बाहर आ जाती ..नींद टूटने के बाद उसके कयि तरह के सवाल होते और शायद गुस्से मे भर कर कम्मो उसे बीती सारी जासूसी के बारे मे बता भी सकती थी


टाँगो की जड़ इस वक़्त ' वी ' के आकार मे दिखाई दे रही थी ..कम्मो ने हल्के हाथ से उसकी जाँघो को सहलाया ..निक्की ज़रा भी नही हिली ..उसने दोबारा वही किया ..पर इस बार भी नतीजा सेम था


जाने कम्मो को क्या सूझा और उसने हाथ जाँघ से हटा कर, अपना चेहरा चूत की तरफ झुकाना शुरू कर दिया ..एक मा के नज़रिए से सोचा जाए तो ये कितना घ्रनित कारया था जो उसे अपने सगे बेटे और बेटी के बीच, चुदाई के पापी संबंध हैं या नही, इसकी सत्यता जान ने के लिए बेटी की चूत ( वर्जिनिटी ) का मुआईना करना पड़ रहा था ..वो भी किसी शातिर चोर की भाँति


कम्मो टाँगो की जड़ के इतने नज़दीक अपना चेहरा ले आई, जैसे अगले ही पल उसकी जीभ बेटी की चूत को चाटना शुरू कर देगी ..उसने 2 - 3 फूकों से निक्की के बदन मे हलचल करवानी चाही ..लेकिन उसकी बेटी नींद से बाहर आती भी तो कैसे ..दिन मे दो बार कम अंतराल से झड़ना ..गिरने के बाद लगी चोट का दर्द और फिर निकुंज द्वारा खिलाई गयी दर्द निवारक टॅबलेट ..तीनो चीज़ो का असर था जो निक्की दिन से ही बेहेद गहरी नींद मे सो रही थी



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