पापी परिवार--4

 



पापी परिवार--4






निकुंज ने जान कर उँची आवाज़ मे अपनी बात कही ताकि निक्की को अपनी हालत का अंदाज़ा हो सके ..हुआ भी यही भाई की आवाज़ कान मे पड़ते ही निक्की होश मे आ गयी ..तुरंत ही उसने सर ऊपर उठा कर निकुंज की तरफ देखा तो उसे दूसरी तरफ देखता पाया ..निक्की ने उसी तेज़ी से हाथ पीछे ले जा कर टॉप को भी ठीक कर लिया


" कितनी डिप्स लगाई भाई ? "


अपनी हालत पर कंट्रोल कर निक्की ने उसके भाई का ध्यान अपनी तरफ खीचा


" 50 के 3 सेट मारूँगा ..देख मेरे डोले शोले "


निकुंज ये कहता हुया हँसने लगा ..शायद ये हँसी बनावटी थी जिससे वो थोड़ी देर पहले हुई ग़लती को भूलना चाह रहा था


" हे हे हे हे ..मस्त हैं "


निक्की भी सेम इसी हालत मे मुस्कुराइ


" चल लेट हो रहा है ..तू लेट जा मैं पैर मोड़ता हूँ "


इतना कह कर निकुंज ज़मीन पर अपने घुटने के बल बैठ गया ..निक्की ने एक गहरी साँस ली और लॉन की नरम घास पर अपनी पीठ के बल लेट गयी ..वो बड़ी मुश्किल से घुटनो को पेट के ऊपर ला पाई थी ..रह - रह कर लगता कि लोवर फॅट जाएगा ..शरमाहट और घबराहट का मिला जुला संगम महसूस कर उसने अपनी आँखों को बुरी तरह भीच लिया


वहीं निकुंज को जब तक उसे कुछ समझाने का मौका मिल पाता निक्की अपनी पोज़िशन मे आ चुकी थी ..हालाकी ये पोज़िशन अगर किसी लड़के की होती तो निकुंज को स्ट्रेच हेल्प देने मे कोई दिक्कत नही थी पर यहाँ वो चाहता था निक्की अपनी पीठ के बल लेट ती तो अच्छा रहता ..निकुंज की नज़र वापस निक्की के जिस्म पर गयी ..मोटी जांघे ..बड़े - बड़े गोल चूतड़ और उसकी टाँगो की जड़ पर फूली चूत का उभार देख पहली बार निकुंज के लंड मे हरकत हुई ..ये चुदाई करने वाली उसकी सबसे फावोरिट पोज़ीशन थी ..लड़की अपने घुटने पेट पर जमाए नंगी लेटी हो और उसे चोदने वाला अपना लंड चूत के मूँह पर टिका कर लड़की के ऊपर लेट जाए ..निकुंज ने इसी पोज़िशन मे 50सो बार चुदाई की थी ..निक्की ने जिस बुरी तरह से अपनी आँखों को बंद किया हुआ था उसे देख कर निकुंज को लगा जैसे उसकी बहेन दर्द से वाकई तड़प रही हो ..उसने अपने पापी दिमाग़ को उसी पल झंझोर दिया ..कुछ भी हो निक्की उसकी बहेन थी और वो ऐसी नीच पने की हरकत उसके लिए कैसे सोच सकता है


" मैं प्रेशर देता हूँ जहाँ तुझसे सहेन ना हो बता देना "


पार्क मे बढ़ती हलचल देख कर निकुंज तुरंत हरकत मे आया जिससे ये सब जल्दी ख़त्म हो सके ..उसने अपने कप - कपाते हाथो से निक्की की सुडोल जाँघो को पकड़ा और इसके लिए उसे अपनी बहेन पर झुकना पड़ा ..साथ ही वो बड़ा केर्फुल था कि हाथो के अलावा उसकी बॉडी का कोई भी पार्ट निक्की के जिस्म को टच ना करे ..खास कर उसका लंड तो कतयि नही जो अब सेमी एरॉटिक कंडीशन पा चुका था


यहाँ निकुंज हाथो के ज़ोर से उसकी जाँघ को प्रेस करता और वहाँ निक्की के मूँह से दर्द की सिसकी निकल जाती ..निकुंज लगातार बोलता भी जा रहा था क्यों कि बोलने के ज़रिए उसने अपने लंड को खड़ा से रोक भी रखा था


अपनी भाई की बदलती आवाज़ जब निक्की के कानो मे जाती तो उसे खुद पर बड़ी शरम आती ..लगता है भाई ने भी वही देखा लिया होगा जो अभी थोड़ी देर पहले वो खुद देख रही थी ..चूत का फुलाव लोवर पर सॉफ दिखाई भी तो दे रहा था ..क्या हो जाता अगर वो आज रन्निंग के लिए घर से नही निकलती ..कम से कम इस ज़िल्लत से तो बचती ..लेकिन अब अफ़सोस क्या करना बस कैसे भी कर के इस हालात से बाहर निकलना था


इमॅजिनेशन से कोई कितना भी बचना चाहे नही बच सकता ..निकुंज भले ही अपने दिमाग़ को कितना भी समझा लेता लेकिन उसका लंड ये सोच कर खड़ा ही होता जा रहा था कि उसके सामने उसकी फावोरिट इंटरकोर्स पोज़िशन लिए एक कम्सीन लड़की लेती है और लड़की की चूत के क्या कहने ..एक दम ताज़ी फूली - फूली



आख़िर कार वो वक़्त आ गया जब लोवर ने अपनी सहन - शक्ति खो दी


" चर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर "


एक आवाज़ के साथ दोनो होश मे आ गये ..लेकिन तब तक लोवर की पूरी बॅक थ्रेड उधड चुकी थी ..यानी कि निम्मी का सोचा प्लान पूरी तरह से सक्सेस हो गया ....




लोवर की सिलाई उधड़ते ही निक्की का शरीर अपने आप ही बिल्कुल ढीला पड़ गया ..निकुंज ने जो प्रेशर अपनी बहेन पर डाल रखा था ..ढीले पन की वजह से उसका बॅलेन्स बिगड़ा और अगले ही पल निक्की की ज़ोरदार चीख निकल गयी


" भाईईईईईईईईईईईई............ "


निकुंज के खड़े लंड की चोट पूरी ताक़त के साथ सीधी निक्की की कुँवारी चूत पर पड़ी और जब तक निकुंज सम्हल पाता वो अपनी बहेन के ऊपर गिर चुका था ..नीचे चूत पर कड़क लंड का दबाव और ऊपर ब्रा लेस छातियों के कड़े निपल ..दोनो की हालत खराब हो गयी जिसमे निक्की तो बुरी तारह से काँप गयी थी ..कुँवारी चूत पर पहली चोट वो भी किसी गैर मर्द की नही अपने सगे भाई निकुंज की ये सोच कर तो उसकी आत्मा शरीर का साथ छोड़ने को तैयार लगी


" सॉरी सॉरी सॉरी "


निकुंज अपनी बहेन से पहले होश मे आ गया क्यों कि वो उसके ऊपर लेटा था ..उनके आस पास होती चहल - पहेल को महसूस कर निकुंज तुरंत ही निक्की के ऊपर से हट गया ..अपने घुटनो पर बैठ उसने उतनी ही तेज़ी से निक्की की चौड़ी टाँगो को भी सीधा किया ताकि किसी और को उसके लोवर फटने का एहसाह ना हो सके ..लेकिन इस वक़्त निक्की बिल्कुल बेजान हो कर घास पर लेटी थी


एक सेक्स एक्सपीरियेन्स्ड मॅन होने से निकुंज को भली भाती पता था कि जिस तेज़ी से उसके लंड की ठोकर निक्की की चूत पर हुई है अगर बीच मे ये कपड़ो की दीवार ना होती तो पूरा 8" का लंड एक झटके मे चूत के अंदर चला जाता


" निक्की आर यू ऑलराइट ? "


लगभग 2 -3 मिनट के गॅप के बाद निकुंज ने उसके पैर की उंगलियों पर अपने हाथ का स्पर्श दिया ..लोवर की थ्रेड इतनी ज़्यादा उखड़ी थी कि अंदर पहनी नीली पैंटी की हल्की सी झलक लोवर के उधडे हिस्से के ऊपेर से दिख रही थी


" आँखें खोल निक्की "


निकुंज ने फिर से उसके पैर की उंगलियों को छुआ और इस बार निक्की ने होश मे आ कर अपनी आँखें खोल दी


" भाईईईईईई...... "


होश मे आते ही उसके भर्राये गले से निकली रुआसी आवाज़ सुन निकुंज का दिल बैठ गया ..हाथ का सहारा दे कर उसने निक्की को बैठाया और प्यार से उसके गाल पर आए आँसुओ को पोंछने लगा


" कुछ नही ..सब ठीक है "


झूठी मुस्कान से उसने निक्की को साहस देने की कोशिश की लेकिन इस बार निक्की फूट - फूट कर रोने लगी


" कुछ नही हुआ ..बी ब्रेव गुड़िया "


ना जाने क्यू इस घटना का दोषी खुद को मान कर निकुंज को भी रोना आ रहा था लेकिन अगर वो इस वक़्त रो देता तो निक्की को सम्हाल पाना उसके बस से बाहर हो जाता ..खड़ा लंड अब तक बैठ चुका था और निकुंज खुद की ग़लती के लिए बहुत शर्मिंदगी फील कर रहा था


निक्की की पीठ पर अपना हाथ फेर कर उसने काफ़ी हद तक उसे दिलासा दी और कुछ देर बाद निक्की के बहते आँसू तो थम गये लेकिन उसका सुबकना नही रुका ..हिचकी के ज़रिए उसकी सिसकियाँ अभी भी ज़ारी थी


" वैसे मेरी ये बिल्ली रोते हुए किन्नी सोहनी लगती है ..आए - हाए ये टमाटर से लाल गाल और अभी तो नाक भी रेड - रेड हो गयी है ..रो ले थोड़ी देर और ..बिल्लीइीईईईई "


इस मज़ाक की वजह से निक्की ने अपनी आँखें निकुंज के चेहरे पर डाली तो वो बड़े गौर अपनी बहेन के रोते चेहरे को देख रहा रहा था


" हाए मर जावां कूडीए "


इतना बोल कर निकुंज घास पर पीठ के बल लेट गया और अपने हाथ पूरी तरह से फैला दिए जैसे सच मे मरने वाला हो ..रोते चेहरे पर आती मुस्कान देख निकुंज को बड़ा संतोष हुआ ..शायद इस मज़ाक ने कुछ पल के लिए निक्की के जहेन से बीती बात भुला सी दी


" क्या देख रही है बिल्ली ..थोड़ा और मुस्कुरा देगी तो तो तेरा क्या बिगड़ जाएगा "


निकुंज खिल - खिला कर हँसने लगा और इस बार निक्की ने शरम से वशी - भूत हो अपना चेहरा हाथो से ढक लिया


" भाई चिढ़ाना बंद करो ..वरना मैं फिर से रो दूँगी "


माना कुछ पल के लिए निकुंज उसे बहलाने मे कामयाब रहा था पर इतने जल्दी अपने दिल इस से बात को निकालना ना तो निक्की के बस मे था ना ही उसके भाई के बस मे


" ना ना रोना नही ..तुझे पता है ना मैं अपनी बहनो को कभी रोते नही देख सकता ..ख़ास कर तुझे ..निम्मी पर तो मैं हमेशा झूठा गुस्सा करता रहता हूँ लेकिन तुझ से तो मैने आज तक उँची आवाज़ मे बात तक नही की "


इस बार निकुंज की आवाज़ मे भी भारी पन आ गया


[ ये एक दम सच था ..निकुंज कभी निम्मी को डाटने से नही चूकता था ..उसकी हरकत ही ऐसी थी जो वो रोज़ घर के किसी ना किसी मेंबर से डाँट खाती ..लेकिन नाराज़गी मे भी हमेशा प्यार ही छुपा होता था ..वहीं निक्की के केस मे निकुंज हमेशा उस से मुस्कुरा कर बात करता ..दोनो के नेचर हेल्पिंग होने से आपस मे पटरी भी बहुत खाती ..यही एक कारण था कि दोनो के कमरे भी आजू - बाजू मे ग्राउंड फ्लोर पर ही थे ]


" देखो जनाब की सूरत ..ऐसा लगता है मुझे चुप करने मे खुद भी रो देंगे "


निक्की ने थोड़ा सोच कर जवाब दिया ..अब जो हो चुका उसे भूल जाना ही ठीक था


" अरे मैं बहुत स्ट्रॉंग हूँ ..आवें आँसू नही निकलते मेरे "


निकुंज जवाब देते हुए वापस बैठ गया ..थोड़ी देर तक सब शांत रहा और दोनो काफ़ी नॉर्मल हो गये


" घर कैसे जाउन्गि भाई ..ये तो...... "


निक्की ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी ..बैठने के बाद उसने अपनी टाँगो को आपस मे बिल्कुल सटा रखा था ..लेकिन लोवर के बहुत ज़्यादा खुल जाने से कितनी भी कोशिशो के बाद भी वो अपनी पैंटी को छुपाने मे नाकामयाब थी ..रह - रह कर उसे ये भी डर लगता कि कहीं उसकी झांतो के बाल लोवर से बाहर ना निकले हों ..अगर वो अपना सर झुका कर चेक करती तो शायद निकुंज की नज़र भी उसकी टाँगो की जड़ मे जा सकती थी ..इस लिए उसने एक बार भी अपने नीचे का हाल नही देखा और जल्दी घर जाने का सोचने लगी ..घर जाने के लिए उसे चलना पड़ता और इस वक़्त पार्क मे इतनी भीड़ थी कि ये बात हर किसी को पता चल जाती


" नो टेन्षन ..मैं हूँ ना ..अपनी गुड़िया रानी को गोद मे उठा कर ले जाउन्गा "


निकुंज ने जवाब दिया और बिना किसी देरी के उठ कर निक्की को अपने हाथो से पकड़ ने लगा ..एक हाथ उसके घुटनो के नीचे डाल और दूसरे से उसकी पीठ को सपोर्ट देते हुए निकुंज ने किसी फूल की तरह उसे अपनी गोद मे उठा लिया


" भाईईईईई ......ये क्या कर रहो हो उतारो मुझे "


निक्की अपने भाई के इस कदम से घबरा गयी और उसकी गोद से नीचे उतरने की कोशिश करने लगी


" अरे तू बिल्कुल भी भारी नही है ..आज जिम नही जा पाउन्गा तो ऐसे ही मेरी एक्सर्साइज़ हो जाएगी "


निकुंज ने उसकी बात को अनसुना किया और पार्क के मेन गेट की तरफ चलने लगा ..आते - जाते लोगो की नज़र और मुस्कुराते चेहरे देख निक्की शरम से पागल हुई जा रही थी ..लेकिन ना जाने क्यों आज उसे अपने भाई का इस तरह से प्यार करना बहुत अच्छा भी लग रहा था


" भाई सब देख रहे हैं "


निक्की ने खुद की शर्माहट दिखाते हुए निकुंज से कहा ..उसके गाल पर छाई लाली देखते ही बनती थी ..ना तो उसका कोई बॉय फ्रेंड रहा था ना ही वो इस प्यार भरे एहसास को पहले कभी महसूस कर पाई थी ..निकुंज की मज़बूत बाहों मे आने के बाद आज उसे दुनिया की हर खुशी ..दौलत फीकी जान पड़ी


" तो देखने दो ना ..मैने अपनी बहेन को गोद मे उठा रखा है ..दुनिया देखे तो देखती रहे "


निकुंज का जवाब सुन निक्की ने प्यार से उसके गले मे अपनी बाहें डाल दी ..निकुंज को उसकी बहेन के अंदर आए इस बदलाव से हैरानी भी हुई और खुशी भी ..कहाँ कभी सड़क चलते उसने एक बार भी निकुंज का हाथ नही थामा था और आज कैसे खुले -आम अपनी बाहें अपने सगे भाई के गले मे डाले उसकी गोद मे टन्गि थी ..दोनो मेन गेट के काफ़ी नज़दीक पहुच गये


" लेकिन भाई लोगो को क्या पता कि हम भाई - बहेन है "


अचानक ही ज़्यादा खुश होने की वजह से निक्की के मूँह से ये बात निकल गयी ..बाद मे अपनी ही बात पर उसने गौर किया तो एक अजीब एहसाह से उसका रोम - रोम खिल उठा ..वहीं इस बात से निकुंज के कदम चलते - चलते रुक गये ..दोनो मेन गेट पार कर चुके थे लेकिन अभी भी कार तक पहुचने के लिए निकुंज को 20 कदम और चलना पड़ता


" बस अब उतर जा ..हम पार्क के बाहर आ गये हैं "


निकुंज ने उसे अपनी गोद से उतार कर ज़मीन पर खड़ा किया और बिना उसके चेहरे को देखे कार की तरफ बढ़ गया ..निक्की को इस बात पर एक झटका सा लगा ..शायद निकुंज को उसकी बात सुन अपनी करनी का दुख हुआ है ऐसा मंन मे सोच वो भी धीमे - धीमे कदमो से कार तक पहुचि और पहला गेट खोल अंदर बैठने लगी


" आइ'म सॉरी भाई ..वो सडन्ली मेरे मूँह से....... "


निक्की की बात बीच मे काट कर निकुंज ने कार का सेल्फ़ डाल दिया


" बैठ जा ..चलते मे बात करेंगे "


निक्की उदास मंन से ड्राइविंग सीट के बगल मे बैठी और गियर डाल निकुंज कार को रोड पर दौड़ाने लगा ..शांत अट्मॉस्फियर तोड़ते हुए निकुंज ने ही बात आगे स्टार्ट की


" ऐसी फिटिंग का लोवर कैसे ले लिया तूने ? "


निकुंज की निगाह इस वक़्त रोड पर जमी थी लेकिन मंन पूरा निक्की पर


" भाई ये लोवर मेरा नही है ..वो कल रात निम्मी की बच्ची दे गयी थी और शायद ये उसने जान कर किया है "


इतना बोल कर निक्की ने थोड़ी देर पहले का गुस्सा अपनी छोटी बहेन निम्मी पर निकाल दिया


" आज तुझे कॉलेज जाना है ? "


निकुंज ने उससे पूछा तो निक्की ने ना मे अपनी गर्दन हिला दी


" मैं तो 12 के बाद ही ऑफीस जाउन्गा ..थोड़ी देर वहाँ रुकते हैं "


निकुंज के हाथ की उंगली पर गौर किया तो उसका इशारा सी व्यू पर था


" हां ठीक है लेकिन मैं कार से नीचे नही उतरुँगी "


निक्की ने जवाब दिया और निकुंज ने रोड के लेफ्ट साइड मे कार को रोक दिया


" हां तो ये लोवर निम्मी का है ..और तुझे लगता है उसने जान कर तेरे साथ ऐसा मज़ाक किया "


निकुंज की बात और चेहरा दोनो काफ़ी सीरीयस हो गये


" मैं फुल्ली शुवर नही हूँ ..लेकिन उसकी हरकतें हमेशा दूसरो को परेशान करने मे लगी रहती हैं ..इसलिए मैने बोला "


निक्की के चेहरे पर आया गुस्सा और भी बढ़ गया जब निकुंज की ज़ुबान पर निम्मी का नाम आया


" अगर निम्मी ने जान कर तेरे साथ मज़ाक किया है तो मैं समझता हूँ उसने कोई ग़लती नही की "


निकुंज ने अपनी बात पूरी की तो निक्की भौचक्की हो कर उसके चेहरे को देखने लगी ..उसकी आँखें बड़ी हो गयी और इस वक़्त उसे अपनी बैठने की पोज़िशन का भी ध्यान नही रहा


" ये आप क्या कह रहे हो भाई ..क्या ये सही है कि कोई सरे बाज़ार अपनी बहेन को इस तरह से जॅलील करे "


निक्की ने तैश मे आ कर अपनी जुड़ी टाँगो को खोल दिया और उसका हाथ उसके फटे लोवर की तरफ इशारा करने लगा ..हलाकी ये सब उसने गुस्से मे आ कर किया था लेकिन जब तक वो वापस खुद को संभाल पाती निकुंज ने खुद ही उसे अपनी टांगे जोड़ने को बोल दिया


" निक्की ठीक से बैठ जा ..ये वक़्त नाराज़ होने का नही है "


निकुंज ने अपना चेहरा ओप्पोज़िट डाइरेक्षन मे घुमा कर कहा


" तो क्या प्यार करू ..एक तो मेरी इतनी बेज़्ज़ती करवा दी और आप भी उसी की साइड ले रहे हो "


निक्की की बातें अपनी छोटी बहेन के लिए आग उगल रही थी ..कल तो कितने प्यार से उसके रूम मे आई थी और अगले दिन ही उसे अपनी साज़िश का शिकार बना लिया


" मैं उसकी साइड नही ले रहा निक्की ..मेरे लिए तो तुम दोनो ही बराबर हो ..बस एक अंतर बता रहा हूँ जो तुम दोनो को एक दूसरे से बहुत जुदा करता है "


निकुंज बोलने लगा पर अभी भी उसका चेहरा सी व्यू की तरफ घूमा हुआ था


" कैसा अंतर भाई ? "


निक्की को उसके जवाब समझ नही आया तो उसने पूछा


" यही कि वो तुझसे 80% ज़्यादा अड्वान्स है ..आज की बदलती दुनिया के साथ अड्जस्ट कर सकती है ..वो भी बिना किसी दिक्कत के "


निकुंज उसे अंतर समझाने लगा


" भाई हम दोनो बहुत डिफरेंट हैं ...वो कुछ भी करे लेकिन मैं उसके जैसी नही बन सकती और बन ना भी नही चाहती ..बेशार्मो जैसे नंगा घूमना मेरे बस के बाहर है "


बात बढ़ कर इतने आगे पहुच गयी की टॉपिक ख़तम होने का नाम ही नही ले रहा था


" ये बात ग़लत है जो तू कह रही है ..माना वो काफ़ी फैशनेबल है लेकिन जो सबसे बड़ा अंतर है तुम दोनो मे ..तू जानती है वो क्या है ? "


आज हुई पार्क की घटना से दोनो बहेनॉ के आपसी संबंधो मे खटास आना कन्फर्म था इसी लिए निकुंज लगातार निक्की को समझा रहा था


" क्या अंतर है ..आप ही बता दो "


निक्की ने उसके चेहरे को अपनी तरफ घुमा कर कहा ..निकुंज ने पहली बार निक्की को इतने गुस्से मे देखा


निकुंज :- " कॉन्फिडेन्स ..जो शुरू से ही उसके खून मे है "


" कैसा कॉन्फिडेन्स भाई ज़रा मैं भी तो सुनू "


निक्की ने एक व्यंग छोड़ कर कहा ..कहीं ना कही उसके मन मे ये बात भी उठ रही थी कि शायद निम्मी उससे ज़्यादा क्लोज़ है अपने भाई से


" आज अगर तेरी जगह पार्क मे निम्मी होती ..तो मुझे यकीन है वो ज़रा भी नही रोती ..बल्कि इस सिचुयेशन से बाहर कैसे निकला जाए सिर्फ़ इसी बात पर उसका ध्यान रहता ..माना वो चुलबुली है ..हम मे से किसी की बात पर ध्यान नही देती ..लेकिन अपना रास्ता कैसे बनाया जाता है ..ये उसे बखूबी पता है ..और तो और अगर सच मे ये निम्मी की शैतानी थी तो तू इस बात से सबक ले ..ना कि नाराज़ हो कर खुद का खून जला "


निकुंज इतना बोल कर चुप हो गया ..निक्की को उसकी बात से इतना तो समझ आ गया कि वो कुछ भी ग़लत नही कह रहा


निक्की :- " लेकिन भाई ..वो हमेशा झूट बोलती है ..दूसरो से लड़ती है ..काम के वक़्त किसी गधे को भी अपना बाप बनाने से नही चूकती ..क्या ये सही है "


निकुंज :- " तूने उसके माइनस पायंट्स तो नोट किए पर क्या कोई प्लस पॉइंट नोट किया ..क्या कभी ये सोचा कि वो ऐसा क्यों करती है ..क्यों कि उसे पता है कि इस दुनिया मे जीना कितना मुश्किल है ..यहाँ अपना हक़ छीन ना पड़ता है ..हर वक़्त ये बात काम नही आएगी कि तुम मशहूर गुंडे रघु की बहनें हो ..जमाना बदल रहा है ..तेरा ऐम तक तो तुझे याद नही ..क्या बन ना चाहती थी और क्या बनती जा रही है ..मैं तुम दोनो के बीच कॉंपिटेशन का अखाड़ा नही बनाना चाहता ..बस इतना बता रहा हूँ कि ग्रो अप माइ स्वीटी ..दुनिया को समझ ..उसके हिसाब से चलना सीख ..आज अगर तुझे किसी सड़क पर छोड़ दिया जाए तो तू उस सड़क को पार भी नही कर पाएगी ..सच को मान और हमेशा खुश रह ..आज जो कुछ भी पार्क मे हुआ उसमे मेरी भी ग़लती थी ..लेकिन मेरी जगह अगर वहाँ डॅड भी होते तो वही होता जो मेरे साथ हुआ ..इसकी वजह मैं तुझे फिर कभी समझाउन्गा ..अभी अपना गुस्सा थूक और घर चलते हैं ..होप मेरे लिए तो तेरे दिल मे कोई भडास नही होगी और अगर हो तो माफ़ कर देना "


इतना बोल कर निकुंज ने गियर डाला और दोनो घर जाने के लिए निकल पड़े ..आज हुई कॉन्वर्सेशन के ज़रिए निकुंज ने उसे बिना कहे ही बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया था ..रास्ते मे फिर निक्की ने उससे कोई और बात नही की ..शायद अपने भाई के द्वारा बताई गयी कुछ बातों का उस पर काफ़ी गहरा असर हुआ था ..लेकिन डॅड कहाँ से बीच मे आ गये इस बात ने उसका ध्यान सबसे ज़्यादा खीचा


घर पहुच कर दोनो भाई - बहेन अपने - अपने कमरो मे चले गये ..लेकिन दोनो के मंन आज अशांत थे ..निक्की के दिल मे अपनी बहेन के लिए नफ़रत और भाई के लिए प्यार बढ़ा वहीं निकुंज के दिल मे इस बात का दुख कि आज उसने अपनी बहेन पर ही बुरी नज़र डाली ..माना ये सब सिर्फ़ एक हादसे की वजह से शुरू हुआ लेकिन इस हादसे की चपेट मे उन दोनो के अलावा और भी काई लोग आ गये .....


जब दोनो भाई बहेन पार्क मे थे उसी बीच दीप भी घर लौट आया ..कम्मो जो रात भर ठीक से सो नही पाई थी ..दीप के घर आने पर उसने चैन की साँस ली और उसे हल्की सी डाँट भी लगाई


" कहाँ थे रात भर ..कल से मैं कितनी परेशान थी ..कम से कम एक कॉल ही कर दिया होता ..कल पहली बार मैने आप को इतना परेशान देखा था ..क्या निम्मी से कुछ बात हुई ? "


कम्मो ने उसके हॉल मे बैठते ही अपने सवालो की झड़ी लगा दी ..दीप वैसे ही कयि प्रॉब्लम्स मे फसा हुआ था ..अचानक से उसे कम्मो पर गुस्सा आ गया


" तुम क्या पागल हो गयी हो ..मैं कोई छोटा बच्चा नही हूँ जो तुम मेरे लिए इतनी परेशान हो रही हो ..एक कप चाइ बनाओ और मुझे अकेला छोड़ दो "


दीप ने चिल्ला कर कहा और अपना सर सोफे के बॅक पर लिटा कर रिलॅक्स हो गया ..कम्मो 2 मिनट. तक उसके पास ही खड़ी रही ..आख़िरी बार उसने दीप को इतना परेशान तब देखा था जब वो शादी कर के घर से भागे थे ..लेकिन आज तो उनके पास किसी चीज़ की कोई कमी नही ..फिर क्यों दीप इतना परेशान है ..कम्मो पर भी चिल्ला दिया ..आख़िर - कार खुद से ऐसे अनगिनत सवाल करते हुए वो किचन मे चल दी


निम्मी अपनी आदत अनुसार अभी गहरी नींद मे थी ..कल रात जो कुछ भी उसने सोचा था ..शायद उसी का सपना उसकी नींद मे चल रहा था ..रह - रह कर कुछ ना कुछ बड़बड़ाती भी जा रही थी


3 कप चाइ बना कर पहला कम्मो ने दीप के सामने लगी टेबल पर रख दिया और दूसरा 2 कप ले कर वो सीढ़ियाँ चढ़ती हुई निम्मी के रूम की तरफ बढ़ गयी ..जानती थी गेट अनलॉक होगा ..हलका ज़ोर लगाते ही दरवाज़ा पूरा खुल गया और कम्मो उसके बेड के सिराहने पहुच गयी


" शायद ये निम्मी की वजह से इतने परेशान हैं ..इसी से पूछना पड़ेगा कि कल जब दोनो बाप - बेटी कमरे मे बंद थे तब ऐसी क्या बात हुई जो दीप कल रात भर गायब रहा और अभी भी उसका मूड ठीक नही है "


इतना सोच कर उसने दोनो कप बेड के स्टॅंड पर रख दिए और निम्मी को नींद से जगाने लगी


" उठ निम्मी ..देख कितनी सुबह हो गयी है "


कम्मो ने प्यार से उसके सर पर हाथ फेर कर कहा ..निम्मी ने उसे कोई जवाब नही दिया और कुछ बड़बड़ाती हुई करवट से सीधे पीठ के बल लेट गयी


" उठ जा राक्षस ..इस लड़की ने तो नाक मे दम कर रखा है "


कम्मो ने उसके बड़बड़ाने पर तो कोई गौर नही किया ..लेकिन उसके रूम की हालत देख उसे बहुत गुस्सा आया ..जगह - जगह फैले कपड़े ..कपड़े भी ऐसे जिसे देख कर तो दीप और निकुंज कतई उसके रूम मे नही घुसते ..बेड के बगल की स्टडी टेबल पर रखा लॅपटॉप चालू हालत मे था और स्क्रीन पर फ़ेसबुक का लोगिन पेज दिखाई दे रहा था


अचानक से निम्मी की बॉडी मे हलचल हुई और उसकी एक टाँग जाँघ तक चादर से बाहर निकल आई ..काम्मो की नज़रें उसकी नंगी टाँग पर गयी तो उसे कल की अपेक्षा आज कुछ बदलाव नज़र आया


कल जब निम्मी ने क्रॉच लेस पैंटी के ज़रिए कम्मो को परेशान किया था तब उसकी टाँगो पर हल्के - हल्के बाल थे ..लेकिन आज पूरी जाँघ एक दम चिकनी दिख रही थी और स्वतः ही कम्मो का हाथ उसकी जाँघ पर घूमने लगा ..आज पहली बार वो उसकी जाँघ को इतने गौर से देख रही थी


" कितना माँस भरा हुआ है इस लड़की मे ..उमर मे निक्की से छोटी है लेकिन इस भराव के चलते उससे बड़ी ही दिखाई देती है "


इतना कह कर कम्मो के हाथ उसकी सुडोल जाँघ को सहलाने लगे ..ये कम्मो का अपनी बेटी के लिए प्यार था या जलन ..या शायद आज कयि सालो बाद कम्मो को इस नज़ारे से बड़ी बेचेनी हो रही थी


" हां हां चूसो ..ऐसे ही अंदर तक चाटो ..प्लीज़ "


सपने मे अपनी जाँघ पर रेंगते हाथ महसूस कर निम्मी के मूँह से काँपते हुए शब्द निकले ..कम्मो ने उन शब्दो को सुनते ही अपना हाथ जाँघ से हटा लिया और उसके सोते चेहरे को देखने लगी


निम्मी कल रात को पूरा मेक - अप कर के सोई थी ..मास्कारा से उसकी पॅल्को पर नीले रंग के शेड्स ..गालो पर लस्टर जो बड़ा ही शाइन कर रहा था और होंठो पर इतनी लालामी जिसे देख कम्मो की आँखें उसके चेहरे की खूबसूरती मे लगभग खो सी गयी


" उउउम्म्म्ममम ..खा जाओ इसे "


निम्मी के मूँह से एक हिचकी निकली और उसने अपनी टाँगो को काफ़ी स्प्रेड कर लिया ..शायद सपने मे भाई और बहेन की जगह अब दीप ने ले ली थी


जब कोई ताज़ी घटना वो भी ऐसी जिसे आपने पहली बार महसूस किया हो ..शुवर है कि वो कयि दिन तक आपके जेहेन मे घूमती रहती है ..यही इस वक़्त निम्मी के साथ हो रहा था ..कल जो पल उसने अपने डॅड के साथ बिताए थे वो पल निम्मी शायद लाइफ टाइम नही भूल पाती ..एक बाप के सामने उसकी बेटी का बे परदा होना और उत्तेजना मे बाप द्वारा उसके कोमल अंतरंग अंगो को चूमना ..उनसे छेड़ छाड़ करना ..यहाँ तक की दीप ने निम्मी की चूत और आस होल को अपनी जीभ से चाटा भी था ..ख़ास कर कल जो बात उनके दरमिया अधूरी रही इस वक़्त निम्मी उसे अपने ख्वाब मे पूरा करने को मचल रही थी


कम्मो उसके मूँह से निकली हिचकी सुन घबरा गयी और जब तक वो कुछ और सोच पाती निम्मी ने हाथ के ज़ोर से अपने शरीर पर पड़ी चादर को अलग कर दिया


कम्मो के नज़रिए से ये तो तय था कि चादर के नीचे उसकी बेटी ने कुछ नही पहना होगा लेकिन जिस बात ने उसके दिमाग़ मे घर किया वो थी उसकी बेटी का बुरी तरह से मचलना और ऐसे उत्तेजक शब्दो से बड़बड़ाना


निम्मी की चूचियाँ इस वक़्त ब्रा मे क़ैद थी लेकिन उस ब्रा के अलावा उसने कुछ और नही पहना था ..जाने क्यों कम्मो की नज़र उसके चेहरे से होती हुई उसकी चूत पर आ कर ठहर गयी ..वैसे तो उसकी बेटी ने कयि बार अपनी चूत का दीदार बड़ी बेशर्मी से उसे करवाया था लेकिन आज निम्मी ने नींद मे जो व्यू अपनी चूत का दिया वो देख कर कम्मो सकपका गयी ..कल रात हेर रिमूवर का यूज़ निम्मी ने अपनी पूरी निच्छली बॉडी पर किया ..तभी आज वो नीचे से एक दम चिकनी नज़र आ रही थी


" आआईयईईईईईईईईई ..मर गयी "


निम्मी फिर बड़बड़ाई और इस बार उसने अपने हाथ से चूत को मसल कर रख दिया ..हाथ मे आए उसके चूत रस को देख कर कम्मो को चक्कर आने लगे


" हे भगवान ..ये तो सपने मे ..छ्ह्हीईईई "


कम्मो ने तेज़ी दिखा कर उसका हाथ चूत से हटाया लेकिन निम्मी ने अगले ही पल वापस उसे वहीं रख लिया ..इसी तरह 2 - 3 बार और हुआ तो कम्मो के दिमाग़ की बत्ती जली


" कहीं ये मेरे साथ नाटक तो नही कर रही "


अक्सर निम्मी के नेचर से घर के दूसरे मेंबर्ज़ को यही शक़ होता कि वो नाटक कर रही होगी और तभी हर बंदा उससे जल्दी पीछा छुड़ाने के लिए उसकी बात को मान जाता था


" हाथ हटा निम्मी ..नही तो एक जड़ दूँगी "


कम्मो ने सोचा कि उसकी बात सुन कर निम्मी अपनी आँखें खोल देगी और ये नाटक भी ख़तम हो जाएगा ..लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी बेटी ने तो अपने सपने मे चुदना भी शुरू कर दिया ..वो भी अपने डॅड से


" नही मानेगी तू "


जब कयि बार उसका हाथ हटाने पर भी निम्मी ने वही क्रिया दोहराई तो कम्मो ने सख्ती से उसका एक हाथ चूत से हटा कर अपने पैर के नीचे दबा लिया लेकिन इसका ये नतीज़ा हुया कि निम्मी ने अपने दूसरे हाथ से कम्मो का हाथ पकड़ कर अपनी रस छोड़ती गरम चूत रख दिया


" उफफफफफ्फ़........ "


दोनो मा बेटी के मूँह से एक साथ सिसकी निकल गयी ..वाकई चूत इस वक़्त लावा उगल रही थी ..कम्मो ने तुरंत ही अपना हाथ चूत से हाटना चाहा लेकिन अब उसका ध्यान किसी और बात पर लग चुका था


" ये सपने मे ही है ..तभी इतनी गीली हो ....... "


कम्मो ने पूरी बात सोच भी नही पाई कि निम्मी का बदन अकड़ गया ..उसने अपने दूसरे हाथ को ब्रा के अंदर डाला और बेतहासा अपना बूब भीचने लगी ..साथ ही पूरी ताक़त से कम्मो के पैर के नीचे दबा हाथ खीचना शुरू कर दिया


" हाए मेरी बच्ची "


कम्मो जान गयी कि निम्मी का ऑर्गॅज़म नज़दीक है ..पैर के नीचे दबा निम्मी का हाथ आज़ादी चाहने लगा ..लेकिन कम्मो ने अभी भी उसे अपनी गिरफ़्त मे रखा हुआ था ..जब निम्मी झड़ने के बिल्कुल नज़दीक पहुचि और मन मुताबिक अपना हाथ कम्मो से नही छुड़ा पाई तो सहसा उसके मूँह से एक शब्द फूटा


" मोममम्ममममम....... "


ये जग वीदित है कि जब कोई बच्चा किसी मुसीबत मे फँसता है तो उसकी ज़ुबान पर मदद के लिए सिर्फ़ एक ही नाम आता है " मा "


यहाँ निम्मी ने जिस तरह से अपनी मा को मदद की गुहार लगाई ..कम्मो का दिल उसकी तकलीफ़ से पासीजने लगा और उसके दिल ने सच का साथ दिया


" वैसे तो ये सरासर ग़लत है ..एक मा हो कर मुझे ऐसा नही करना चाहिए ..लेकिन अगर इस वक़्त इसका झड़ना ज़बरदस्ती रोका गया तो शायद बाद मे अंजाम बहुत ही घातक हो सकता है "


अपने मन मे ऐसा विचार कर उसने तुरंत ही अपने हाथ की पकड़ चूत पर कस दी ..निम्मी को तो जैसे जन्नत का नज़ारा दिखाई देने लगा ..उसने अपने चूतडो को हवा मे उछाला और अगले ही पल एक चीख के साथ उसका ऑर्गॅज़म होने लगा


" आहह......... "


निम्मी के चीखने पर कम्मो तेज़ी से अपने हाथ को चूत के दाने पर रगड़ने लगी ..ना जाने उसका दिल इतना क्यों बैठ गया कि उसकी आँखों से आँसुओ की बरसात शुरू हो गयी


" आजा आराम से ..तेरी मा है तेरे पास "


अपने आँसुओ की परवाह ना करते हुए कम्मो अपनी बेटी को झड्वाये जा रही थी ..एक के बाद एक ..7 - 8 बार निम्मी के जिस्म ने लावा बाहर फेका ..कम्मो का हाथ उस लावे की गर्मी को महसूस कर जल रहा था लेकिन एक पल को भी उसने अपना हाथ चूत से हटाने की कोशिश नही की ना ही हाथ को ढीला छोड़ा


कुछ वक़्त बीतने पर निम्मी का बदन शांत पड़ गया ..कम्मो ने अपना हाथ चूत से हटाया जो उसकी बेटी की जवानी से भिड़ा हुआ था ..वो हैरान थी कि निम्मी ने इतना हेवी फॉल क्यों किया ..जाने कब से उसकी बेटी अपने सैलाब को अपने जिस्म मे समेटे हुए थी ..चूत रस से फैली खुश्बू पूरे कमरे को महकाने लगी ..कम्मो ने देखा रस निक्की की चूत से बहता हुआ उसकी गांद के छेद को पार कर ..बेड शीट को भी भिगो रहा था


" सुधर जा निम्मी ..वरना एक दिन तुझे खुद पर बहुत पछ्तावा होगा "


कम्मो ने उसके सोते चेहरे को देख कर एक डाँट लगाई और अपनी साड़ी के आँचल से चूत को सॉफ करने लगी ..उसकी टाँगे फैला कर कम्मो ने आस होल और जाँघो पर से भी सारा पानी पोंछ दिया


" जब तू उठेगी तब मैं तुझसे बात करूँगी "


इतना कह कर कम्मो ने उसके माथे को चूमा और बेड से नीचे उतरने लगी ..अपने कदम ज़मीन पर रखते ही उसे एक और झटका लगा ..कमरे का पूरा गेट खुला हुआ था ..वो तेज़ी से दौड़ कर बाहर आई और हॉल मे झाक कर दीप को देखने लगी ..लेकिन दीप वहाँ नही दिखाई दिया


पलट कर कम्मो ने निम्मी के रूम का गेट बाहर से लॉक कर दिया और शंकित मन से अपने कमरे की तरफ जाने लगी


दरवाज़े से अंदर झाका तो दीप अपने सर पर हाथ रखे कुछ सोचने की मुद्रा मे बेड पर बैठा था ..कम्मो की साँसे रुक गयी


" इसका मतलब इन्होने ...... "


मूँह से निकले आधूरे वाक्य को उसने कयि बार अपने मन मे दोहराया ..बात ही कुछ ऐसी थी ..घर की बनावट के अनुसार अगर दीप अपने कमरे मे जाता तो उसे निम्मी के कमरे के सामने से गुज़रना पड़ता ..कम्मो का पूरा बदन इस बात से दरवाज़े की ओट लिए जम गया ..अब वो क्या जवाब देगी अपने पति को ..एक तो दीप पहले से ही परेशान था और तो और एक मा को अपनी बेटी के नंगे बदन से खेलते भी देख चुका था ..जाने वो क्या सोच रहा होगा कम्मो के बारे मे


" ज़रूर ये सोच रहे होंगे कि मैं अपनी सेक्स की भूख अपनी बेटियों के साथ मिटाती हूँ ..नही नही मैने ऐसा कुछ नही किया ..हे भगवान ये कहाँ फसा दिया मुझे ..क्या जवाब दूँगी "


कम्मो इसी कशमकश मे थी कि उसके दिमाग़ ने कुछ सोचा और अगले ही पल अपनी उखड़ी सांसो को संभालते हुए वो कमरे मे एंटर हो गयी


" आप हॉल से कमरे मे कब आए ? "


कम्मो ने रूम का गेट अनलॉक कर कहा ..साथ ही तेज़ी दिखाते हुए अपनी सारी का पल्लू ज़मीन पर गिरा दिया


" अभी थोड़ी देर पहले ही आया हूँ "


बात सच थी कि जब दीप सीढ़ियाँ चड़ते हुए अपने कमरे की तरफ आ रहा था तब उसने निम्मी के कमरे मे चल रही सारी घटना देखी और जब कम्मो अपने पल्लू से निम्मी के चूत रस को सॉफ कर रही थी तब दीप अपने कमरे मे आ गया


इस समय दोनो पति - पत्नी घबराए हुए थे लेकिन वक़्त की नज़ाकत के चलते चेहरे पर कोई भाव नही आने दिया


" आज गर्मी कितनी है "


ये बोल कर कम्मो ने अपनी साड़ी को उतार फेका ..साड़ी उतारते वक़्त उसने जो अदायें अपने पति को दिखाई उससे दीप तुरंत समझ गया कि या तो उसकी बीवी गरम हो गयी है या उसे पता चल गया है कि दीप ने कमरे मे चलता सारा घटना क्रम देखा था और शायद तभी वो अपनी अदाओ से इस बात पर परदा डालना चाहती है


" ए/सी तो ओं है ..फिर भी गर्मी लग रही है "


दीप ने कम्मो की बात का जवाब दिया और बेड पर लेट गया ..उसने जो कपड़े पहने थे वो अब तक उसके बदन पर थे


" हां ऑन है लेकिन आप नही समझोगे "


इतना बोल कर कम्मो अपनी गांद मतकाती हुई दीप के नज़दीक आई और बेड पर उसके बगल मे लेट गयी


" क्या बात है आज बड़ी खुश हो ? "


दीप ने उसके चेहरे को देख कर कहा जिसमे उसे उस वक़्त की कम्मो नज़र आने लगी जब उसने अपने घरवालो से बग़ावत कर दीप के प्यार को कुबूला था ..ये तो मजबूरी थी कि वो अपनी बीवी से बेवफ़ाई कर बैठा ..जब कि अपनी औलादो से भी ज़्यादा प्यार था उसे कम्मो से


" आप कितना ख्याल रखते हो घर का लेकिन..... "


लेकिन शब्द पर बात अधूरी छोड़ कम्मो ने अपना पेटिकोट धीरे - धीरे ऊपर उठाना शुरू कर दिया ..जब वो घुटनो से ऊपर पहुचि तब उसने अपने चेहरे को दीप की तरफ घुमाया ..जानती थी ये दीप के लिए किसी झटके से कम नही होगा ..आज पूरे 10 - 12 सालो बाद दोनो इस तरह से आमने सामने थे


वैसे तो कम्मो ने चुदाई मे दीप का साथ कभी नही दिया ..जब भी दोनो सेक्स करने के लिए तैयार होते ..कम्मो हमेशा अपनी चूत खोल कर लेट जाती और दीप झटके मार कर असन्तुस्त रह जाता ..ना तो बात कभी चूमने पर बढ़ी ना ही कम्मो ने कभी ओरल का साथ दिया ..यहाँ तक कि उसकी गान्ड भी अभी कुँवारी थी


एक बार जब दीप ने ज़बरदस्ती लंड को उसकी गान्ड के सुराख पर टीकाया तो कम्मो बुरी तरह रोने लगी थी ..बस तब का दिन है और आज का दिन दीप ने फिर कभी अपनी तरफ से कोई फर्माहिश नही की ..डेली सेक्स ..वीक्स मे बदला और बढ़ते - बढ़ते बात सालो पर पहुच गयी ..तभी बाहर की मलाई खाने का चस्का दीप को इतना चढ़ा था कि उसने तनवी तक को नही छोड़ा ..खेर ब्लोवजोब सीन तो दोनो की मर्ज़ी से हुआ था ..लेकिन अब दीप की परेशानी की असली वजह निम्मी ना हो कर तनवी बन गयी


जब जीत ने उससे उनकी दोस्ती को रिश्तेदारी मे बदलने की बात की तब दीप बहुत खुश हुआ लेकिन जब इस बात से परदा हटा कि तनवी ही जीत की बेटी है तब उसे झटका भी लगा और साथ ही एक बात उसके दिमाग़ मे ठहर गयी


" अगर तनवी दीप के घर की बहू बनी तो ज़्यादा वक़्त तक दोनो ससुर - बहू खुद को रोक नही पाएँगे ..एक बार यदि दोनो मे संबंध बन गया तो उसका एफेक्ट घर के बाकी सदस्यों पर पड़ना निश्चित था और तो और दीप को ये बात भी अंदर ही अंदर खाए जा रही थी कि निम्मी का नेचर बिल्कुल तनवी से मॅच करता है ..अगर दोनो मिल गयी फिर तो घर का कल्याण ही हुआ समझो "


" कहाँ खो गये ? "


कम्मो ने दीप को किसी सोच मे डूबा देख पूछा


" नही कुछ नही "


दीप ने उसे जवाब दिया और तभी उनके गेट पर किसी ने नॉक किया


" मोम बाथरूम मे पानी नही आ रहा ..मुझे ऑफीस जाना है "


आवाज़ निकुंज की थी जिसे सुन कर दोनो मिया बीवी चौंकते हुए बेड पर उठ कर बैठ गये ..कम्मो ने तुरंत दौड़ लगाई और अपनी साड़ी को वापस पहेन ने लगी


" खोल रही हूँ "


घबराने मे कम्मो ना तो ठीक से साड़ी लपेट पाई ना ही अपनी चढ़ती सांसो को कंट्रोल ..उसके चेहरे पर शरम के भाव थे


गेट खोल कर देखा तो निकुंज टवल लिए बाहर खड़ा था ..अपनी मा का ये रूप देख वो एक पल मे समझ गया कि उसके आने से पहले कमरे मे क्या चल रहा होगा


" क्या हुआ ..बाथरूम मे पानी नही आ रहा क्या ? "


कमरे के अंदर से आई दीप की आवाज़ सुन वो थोड़ा झिझका और पलट कर वहाँ से जाने लगा ..शायद बीच मे आ कर उसने दोनो का गेम बिगाड़ दिया था और फिर कम्मो को भी समझते देर नही लगी कि निकुंज क्यों वापस जा रहा है


" मैं छत का बाथरूम यूज़ कर लूँगा "


इतना बोल कर वो बिना पीछे मुड़े तेज़ी से छत की स्टेर्स चढ़ने लगा और कम्मो के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान उतर आई


" कितना भोला है मेरा बेटा "


मन मे ऐसा सोचते हुए कम्मो भी किचन की तरफ बढ़ गयी ....


''''' Tring Tring ''''''

Deep ko halki si jhapki lagi tabhi uska mobile baj utha ..Usne No. Check kiya to jeet ka call tha ..Uska naam padhte hi Deep ke jehen me uth rahi adheerta aur bhi jyada badh gayi ..Usne phone silent par kar ke wapas sona chaaha lekin isi tarah jab chauthi baar cell ring hua to use call pick karna hi pada

" Saale itna busy ho gaya hai ki apne dost ka phone uthana bhi gawara nahi tujhe "

Jeet ne use daat lagaayi

" Nahi yaar wo thoda jhapki lag gayi thi "

Deep ki awaaz waise bhi bata rahi thi ki wo neend me hai

" Kitna soyega ..Teri tabiyat to theek hai ..Kal raat bhi sote mila tha aur abhi bhi "

Jeet ne is baar narmi se poocha

" Haan yaar thoda sar me dard hai ..Bed se utha nahi jaa raha "

Deep ne jo sach tha bata diya

Jeet :- " Doctor ki dikha le "

Deep :- " Zaroor "

" Achha sun Tanvi ko Nikunj pasand hai ..Badhaayi ho ..Shayad is khabar se teri tabiyat sahi ho jaayegi "

Jeet ne Deep ke maze le kar kaha ..Wo do cheezo se achhi tarah waakif tha ..Apne dost se aur use nature se

" Tujhe bhi yaar ..Kher maine abhi Nikunj se koi baat nahi ki is baare me "

Deep ne dhukhi mann se apni baat kahi ..Jeet turant samajh gaya ki maazra kya hai

" Koi baat nahi ..Main aaj Tanvi ko hotel royal inn bhej doonga ..Tu Nikunj ko phone kar ke bata de is baare me ..Dono aapas me mil lenge to theek rahega "

Jeet ne rishta thopne jaisi baat kahi to Deep ke chehre par naraazgi ke bhav aa gaye

" Yaar hum koi jaldbaazi to nahi kar rahe ..Mera matlab hai jab dono bachhe apne pairo par khade ho jaaye tab shadi par vichaar karen to kaisa rahega ? "

Deep ko baat taalne ki wajah mil gayi ..Nikunj abhi struggle hi to kar raha tha

" Jaisi teri marzi lekin dono aaj mil lenge to aage ka rasta saaf ho jaayega ..Sach baat to ye hai ki mujhe isi mahine Tanvi ki shadi karni hai "

Jeet ne jawaab diya

" Chal main baat karta hoon Nikunj se "

Jeet ke zor dene par Deep ko uski baat maan ni hi padi

" Ok bhai 3 baje Hotel royal inn "

Itna keh kar Jeet ne call cut kar diya

" Ajeeb chutuyaai hai ye to ..Bhenchod us raand ko banaunga apne ghar ki bahu ..Poora satyanaash ho jaayega mere ghar ka lekin ab fas gaya hoon to baat kaise taalu "

Deep gusse se aag baboola ho raha tha ..Kahan kal tak wo khud Tanvi ke peeche buri tarah pagal tha aur aaj jab wo uske itne kareeb aa chuki hai tab Deep ko aisi baatein soojh rahi thi

" Nikunj ka mann dekhta hoon "

Deep tezi se utha aur neeche hall ki taraf badh gaya ..Nikunj office jaane ke liye bilkul ready nazar aaya

" Aap bhi nasta kar lijiye "

Kammo ne Deep ke sofe par baithe hi poocha

" Nahi ab to seedha lunch karoonga ..Nikunj beta tujhe deri na ho to kuch baat karni hai "

Deep ne use main gate ke paas rok diya ..Nikunj ke kadam jaise uski baat se wahin jam gaye aur uske dimaag ne sheedha subah ki baat par strike kar diya

" Kya ho gaya time nahi hai kya ? "

Deep ne doosri baar use awaaz di aur is baar Nikunj main gate se chalta hua uske kareeb aa gaya ..Bina chehra oopar utaaye wo Deep ke saamne khada tha ..Ek galti jo kahin se kahin tak uski nahi thi jaane kyon apraadhi bodh ke tale wo daba ja raha tha ..Paas khadi Kammo ne apne bete ki manodasha ko bhaapte huye uske kandhe par haath rakh kar use dhaadhas bandhaaya

" Baith ja beta khada kyon hai "

Kammo ki baat sun Nikunj ne ek pal ko uske chehre par nazar daali aur agle hi pal chehra jhuka kar sofe par baith gaya

" Haan to beta main jo kehna chaahta hoon wo shayad is waqt ki maang hai "

Deep ne uska mann bhaapne ke liye shuruwaat kar di

" Ji boliye Dad "

Nikunj ne jawaab diya par uski awaaz me pehle jaisa dum nahi tha

" Beta ab main aur teri maa boodhe ho chale hain ..To mujhe lagta hai is ghar ko samhaalne ke liye jawaan haatho ki zaroorat padegi "

Deep ne ye baat Kammo ke chehre ko dekh kar kahi aur samajhdaar aurat ko saari baat ek pal me samajh aa gayi ..Usne apni palken jod kar haan me ishara kiya ki wo bhi aisa hi chaahti hai

" Dad main apni taraf se poori khoshish karunga ..Lekin mujhe apna business khud khada karna hai ..Fir bhi aap boliye main kya kar sakta hoon "

Deep ko laga Dad fir se wahi purana topic le kar baith gaye hain ..Jisme wo katayi interested nahi tha

" Beta baat kuch aur hai ..Mere dost Jeet ke baare me to tujhe pata hi hoga "

Deep ek ek shabd ko tol - tol kar bol raha tha

" Ji jaanta hoon "

Nikunj ko puraane topic se mukti mili aur wo mann hi mann muskuraane laga

" Beta wo isi shehar me hai ..Kal uska call aaya tha ..Humaari dosti ko rishte me badalne ko keh raha tha "



Deep fir ruk gaya ..Jaise hi Nikunj ko matter samajh aaya wo buri tarah sharma gaya aur ye haqiqat me hota bhi hai ..Aksar bachho ki shadi ki baat un tak pahuchaane ki jimmedaari ghar ki mahilaaye jaise bhabhi ..Chachi ..Mausi inhi logo ki hoti hai ..Lekin yahan to aisa koi maujood tha nahi tabhi Deep ko khud hi baat ko aage badhana pada ..Kammo bhi khush huyi apne bachho ki shadi se kaun khush nahi hota

" Jo aap logo ko theek lage mujhe manzoor hoga "

Itna bol kar Nikunj sofe se khada ho gaya

" Kisi aur ladki ki baat ho to bata de ..Humen khusi hogi jaan kar "

Kammo ne ye baat badi chutki le kar kahi aur saath hi apne pair ko uske joote par daba diya ..Nikunj ke sharmaane ki ada se Kammo pagal si thi ..Tabhi wo har baar use kachot ne lagi thi

" Nahi asia khuch bhi nahi hai ..Mujhe deri ho rahi hai "

Nikunj ne kaha aur dono miya biwi zoron se hasne lage ..Hall me hota hasi mazaak sun Nikki ne darwaaze par apne kaan laga diye ..Aaj usne Nimmi ke pehle gun ko sweekaar kiya tha

" Are chale jaana ..Janta hai jab teri maa se maine love marriage ki thi tab wo itna nahi shamaayi jaise tu abhi sharma raha hai "

Deep ne is baar Kammo ki haalat patli kar di aur zoro se khil - kilaane laga

" Chhodiye na aap bhi bachho ke saamne...... "

Kammo apni poori baat nahi bol paayi aur saree ke pallu se apna moonh chhupaane lagi ..Tabhi use us maadak khusboo ka ehsaas hua jo kisi ki jawaani ka ras tha ..Pallu se usne thodi der pehle apni choti beti ka orgasm saaf kiya tha ye baat sochte hi uski choot par cheetiyaan rengne lagi

" Madam us waqt agar aap mera saath nahi deti to shayad main kuch bhi nahi hota "

Deep ne ek aur teer chhoda aur Kammo use apni ungli dikhaati huyi kitchen me chali gayi ..Wajah thi uski choot me machti khujaal ..Jise jagaane me Nimmi ki bahut badi bhumika rahi ..Kitchen me pahuch kar usne turant apne haath ko apni tango ki jad par masla aur dabi - dabi sanse lene lagi ..Wiahin kamre me Nikki ko samajh aa gaya ki baat uske bhai ki shadi ki chal rahi hai aur Bhai ki yaad aate hi uske jehen me wo pal ghoom gaya jab Nikunj ke khade lund ki chhot uski kunwaari choot par lagi thi

" To main jaau dad ? "

Nikunj ne ek shant lehje me poocha

" Haan theek hai ..Ye le mera mobile isme uski beti Tanvi ki photo hai Aur haan wo aaj 3 baje tera intzaar Hotel royal inn me karegi "

Itna bol kar Deep ne use apna cell thamaya aur apne kamre ki taraf badh gaya ..Chaahta to wo wahin baitha reh sakta tha lekin aisa karne se use Nikunj ke chehre par aate bhaav nahi pata pad paate

Deep ke jaate hi Nikunj ne apni ukhdi saanso ko samhaala aur pic folder open karne laga ..Folder me sirf do hi pic thi ..Pehli pic dekh kar uske moonh me paaai aa gaya ..Tanvi ka muskuraata chehra bahut khoobsurat dikaayi de raha tha ..Nikunj ki khushi ki to koi seema hi nahi rahi ..Jaisi raj kumaari ka sapna wo aaj tak dekhta aaya tha usme ab use Tanvi ki chhav dikaayi dene lagi

Deep uski nazar se bachkar saare haalaat par nazar rakhe tha ..Nikunj ne agli pic open ki to use ek current sa laga ..Doosri pic Kammo ki thi ..Wo bhi us waqt ki jab uska husn poore shabaab par tha ..Wo uske sundar mukhde me kho sa gaya ..Nikunj ne is photo ko kabhi nahi dekha tha wo bilkul anjaan tha ki uski maa apni jawaani me kitni sundar thi ..Achanak se usne apni nazren idhar - udhar daudaayi jaise kisi galti ko karne ka soch raha ho aur agle hi pal usne wo kar diya jise dekh Deep turant apne kamre me chala gaya

Nikunj bade pyar se cell ko apne hontho tak laaya aur bina kisi granit mann ke us tasveer ko choom liya ..Is waqt uske jehen se Tanvi gaayab thi wo bas apni maa ki khubsoorti me kho gaya tha ..Deep ne use tasveer choomte to dekha par use ye nahi pata chal paya ki tasveer uski biwi Kammo ki thi ya chhinaal Tanvi ki ..Bas dil me lage ek aur ghaav ko halka karne ke liye wo bed par let gaya

" Jaanta tha ye raand Nikunj ko pasand aayegi ..Jab baap nahi bach paaya to beta kaise bach sakta hai ..Ab is ghar ki laaj ko koi nahi bacha sakta aur shayad ye mere hi ku - karmo ka phal hai "

Itna keh kar Deep khud ko kosne laga ..Aaj use khud ki rangeen zindagi se nafrat ho rahi thi ..Kahan hal pal khada rehne waala uska 8" lauda poore din se baitha tha aur to aur uske dil ka haal samjhne waala aaj koi uske kareeb nahi tha

Nikunj ne cell ko wahin table par rakha aur khade hote hi use Kammo dikhaayi di ..Wo haath me ek plate liye uske nazdeek chali aa rahi thi

" Kitna badlaav aa gaya hai Mom ke andar ..Lagta nahi wo tasveer unki hogi ..Khush - haal chehra sookh kar murjha sa gaya hai ..Dad ko waakayi kamaane se fursat nahi ..Agar meri biwi itni pyari hoti to....... "

Nikunj iske aage kuch soch paata is se pehle Kammo ne apna haath uske chehre ke saamne kar diya

" Moonh meetha kar ke ja beta ..Main aaj bahut khush hoon ..Intzaar rahega bahu ke ghar aane ka "

Kammo ne haath me pakda mithaayi ka tukda uske moonh me daal diya ..Nikunj is pyar bhare ehsaas se pighalne laga aur kas kar apni maa ko apne aagosh me le liya ..Halaaki wo aksar aisa karta aaya tha lekin aaj ehsaas badal chuke the ..Kahin na kahin Kammo ko bhi laga ki aaj Nikunj kuch jyada buri tarah se usse chipka hai ..Lekin anyatha na lete huye usne khud ko samhaala aur uska maatha choom liya ..Nikunj ke haath apni maa ki peeth ko sehla bhi rahe the ..Kaamo ki badi - badi choochiyaan nikunj ki chaati me dhasti ja rahi thi ..Ek pal ko laga jaise aaj wo apno maa ko apne andar samaa lena chaahta ho ..Achanak Kammo ko current laga aur usne jhat se apna kasa badan dheela chhod diya ..Wajah thi Nikunj ke haatho ka uski nangi kamar par ghoomna ..Badan dheela padte hi Nikunj hosh me aaya aur Tezi se use apni baahon se alag kar Ghar se baahar chala gaya ..Kaamo bhi uske peeche dauti aayi thi lekin is baar ek pal ko bhi Nikunj nahi ruka aur bina peechhe dekhe car start kar office ke liye nikal gaya

[ Dosto yahan ye baat katayi nahi thi ki dono maa bete kaam vasna me ek doosre me lipte the ..Balki Kammo to bilkul bhi isme shaamil nahi thi ..Nikunj to kaayal hua tha Kammo ke pyar par ..Ghar ka khayal rakhne me wo itni busy ho gayi ki apni har khawhish ka gala ghot diya ..Kitna chahti hai maa apne bachho ko aur doosri taraf papa ..Unhe to is baat ka ehsaas tak nahi ki maa ne khud ko apni umar se pehle hi bhoodha maan liya ..Khila chehra kaisa lagne laga hai ..Kher aaj jab usne Kammo ko jis haalat me kamre se baahar aate dekha tha us waqt ke baad abhi 3 ghante bhi nahi beete paaye ki maa ke chehre ki lalaami badhi gayi thi ..Nimmi ke kamre me huyi gatna se Nikunj anjaan tha tabhi usne andaza lagaya ki is khushi ki wajah maa ka apne bete se aseem prem hai Jisme vasna ka ratti maatra kan shesh nahi ..Kammo hi is sach se waakif thi ki kyon uske chehre par khushi lauti aur uske badan ki khoyi ka

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Office pahuchne ke baad bhi Nikunj ke mann me baichaini thi ..Reh - reh kar uska dhyaan old Mobile pic aur aaj ki Kammo ke oopar ja raha tha

" Waakayi me bahut saare changes aa gaye hain mom ke andar ..Kitna sukoon bhara chehra tha photo me aur aaj itne saalo baad sirf ek chalti phirti machine reh gayi hain ..Mom ye kaam kar do ..Wo kaam kar do ..Yahaan bachho ki farmaashisho ko poora karo wahan apne pati ki ........ "

Achanak se Nikunj bolte - bolte ruk gaya ..Ye kya nikal gaya uske moonh se ..Are Mom - dad ke private pal hain wo kuch bhi karen ..Waise maa use gate ke baahar khada dekh kar ghabra zaroor gayi thi ..To kya hua wo khud bhi to bheegi billi bann kar chhat par bhaag gaya tha

Aisi hi kayi socho me dooba reh kar Nikunj ab tak 10 - 12 cup coffee pee chuka tha ..Office staaf bhi hairaan tha ki ise kya ho gaya jo itna gambheer hua ja raha hai

2:30 baje Nikunj ka cell ring hua aur uski saari soch dhaarashaayi ho gayi

Call ghar se tha

" Hello Nikunj beta ..Wo bahu se milne zaroor chale jaana ..3 baje hotel royal inn ..Tanvi naam hai bahu ka "

Aur itna bol kar Kammo ne call cut kar diya

" Hello hello hello Mom mom hello "

Nikunj chillata reh gaya jab tak call dismiss ho gaya

" Ye mom ko kya hua ..Itni jaldi call kyon cut kar diya ..Haan yaar us item se bhi to milne jaana hai "

Itna bol kar usne cell me time set kiya aur fresh hone cabin washroom chala gaya ....

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Deep ghar se kisi kaam ka bahaana maar kar baahar ja chuka tha ..Ab ye bataana zaroori nahi lagta ki wo kahan gaya hoga ..Fir bhi bata dete hain ..Wo gaya tha Hotel royal inn ..Jahan Nikunj aur Tanvi milne waale hain ..Is hotel me usne khoob aiyaashi bhi ki hai tabhi yahan ka lagbhag poora staaf uska parichit tha ..Waise bhi Catering waale se to hotel waalo ke relation's bahut hi strong hote hain ....

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Nikki apne kamre me gumsum padi aaj huyi baaton me khoyi huyi thi ..Nikunj ne use jo kuch bhi samajhaaya wo kahin se kahin tak galat nahi tha ..Wakayi wo vaijayanti mala hi hai ..Ghadi - ghadi dupatte se apne ubhaaron ko samhaalna ..Unhne chhupaana ..Chaahe hall me ho ya apne kamre me ..24 ghante ye dupatta uska saath deta hai ..Wahin Nimmi kitni free hai in sab baaton se ..Maana wo fashion ke chalte khud ko explore karti hai lekin ghar me chor hai kaun jo apni hi betiyon ya behno par buri nazar daalta ho

Na hi Deep ne kabhi uski taraf buri nazar se dekha tha ..Na hi Nikunj ne ..Fir kyon wo itna ghabraati hai ..Kya wajah hai

" Aaj se no dupatta at home "

Nikki ne khud se vada kiya

" Nimmi ko dekhti hoon wo kya kar rahi hai ..Aaj ka badla bhi to lena hai kameeni se aur Hair remover..... "

Jaane in ladkiyon ke gaal har waqt laal kyon rehte hain ..Apni hi soch par muskuraakar wo kamre se baahar aa gayi ..Lekin jo vada kiya tha uske mutaabik ' No dupatta '

Seedhiyaan chadti huyi wo 1st floor par pahuchi aur Nimmi ke room ka gate knock karne hi waali thi ..Uske kaano me kamre ke andar hoti conversation sunaayi padi ..Jahir hai Kammo aaj subah ki baat ko le kar use daat rahi thi ..Ab jab apni behen jaisa banna hi hai to kyon na chhup - chhup ke inki baatein suni jaayen ..Nikki bina aahat kiye kamre ke baahar khadi ho gayi

" Tu ye bata poore kapde pehen na kab seekhegi ? "

Kammo baat ki shuruwaat karte huye boli

" Mom subah - subah mat chhedo ..Mera badan waise hi toot raha hai "

Nimmi ki neend to khul gayi thi lekin wo ab bhi ankhen band kiye leti thi

" Ye subah hai teri ..Dopahar ke 3 baj rahe hain ..Sharam nahi aati ..Paraaye ghar ja kar naak kataana humaari ..Chal uth fatafhat "

Kammo ne ye bol kar uske badan par padi chaadar alag kar di ..Nimmi kewal Bra me leti hai ye baat Kammo janti thi

" Mom ..Aap jaao yaar ..Mujhe sone do aur main kahin nahi jaane waali ..Dad khilaayenge mujhe life time "

Nimmi ne kheej kar kaha

" Ek lagaaungi keech ke to sahi ho jaayegi ..Achha ye bata ..Aaj kal tere dimaag me chal kya raha hai ..Mujhse jhoot mat bolna mujhe sab pata hai "

Kammo ne apni agli baat poori ki aur Nimmi turant hi bed par uth kar baith gayi

" K ..K ..Kya pata hai aap ko ? "

Nimmi ka chehra feeka pad gaya ..Wo haklaane lagi ..Kammo ne apne chehre par gusse ke bhaav aur bhi jyada badha liye ..Wo chaahti thi ki Nimmi hi apni galti ko kuboole

Kammo :- " Tu itna ghabra kyon rahi hai ? "

" Nahi pehle ye batao aap ko kya pata hai ? "

Nimmi ko neend me orgasm waali baat to yaad hi nahi thi use laga ki Kammo ko Deep aur uske beech huyi ghatna ki jaankaari lag gayi hai

" Tu khud bolegi yaa main bolu "

Kammo ke ye shabd sun kar to Nimmi ki jaan hi nikal gayi ..Ek maa usse ye poochna chaah rahi thi ki bata toone mere pati ko apne jaal me kyon fasaaya ..Sharam nahi aayi apne baap ke saath aisi ghinauni harkat karte huye

Wahin Nikki ne band darwaaze par zor daal tak use itna khol diya tha ki baaton ke saath andar hote kriya - kalaapo par bhi uski nazar pad sake ..Nimmi ko aise besharmo ki tarah nanga dekh kar use hairaani bhi huyi aur Kammo par gussa bhi aaya ..Ek maa kaise apni beti ko nanga hote dekh chhup - chaap baith sakti hai ..Doosri baat ye ki use Nimmi ki Choot ke darshan to halke - halke ho rahe the lekin us par kaala pan nazar nahi aaya ..' Iska matlab ye ki Nimmi apni jaatein uda chuki hai '

" Jyada banne ki koshish mat kar ..Main teri tarah behaya nahi jo aisi baatein tere saamne bol saku ..Tu khud soch ..Kya tu ye sahi kar rahi hai ? "

Kammo bed par padi chaadar ki ghadi banaate huye boli

" Mom mujhe maaf kar do aage se aisa koi galat kaam nahi karoongi "

Ghabraahat me Nimmi ne aaj pehli baar apni maa se kisi baat ke liye maafi maangi thi

" Maafi waali baat nahi hai Nimmi ..Na hi main tujhe sharminda kar rahi hoon ..Main jaanti hoon umar ke hisaab se aisa aksar hota hai ..Soch agar tere Dad..... "

Kammo iske aage kuch bhi bol paati isse pehle hi Nimmi ne uske moonh par apna haath rakh diya ..Wo confirm ho gayi ki mom ko haqiqat pata hai

" Mom poori galti meri nahi hai "

Nimmi ne ruaasi ho kar kaha

" Beti jab main teri umar ki thi tab mere mann me bhi aisi baatein aati thi ..Har ladki ke mann me aati hain ..Lekin khud par kaabu rakhna bhi zaroori hai ..Main mana nahi karti ..Tu rok bhi kitna paayegi khud ko ..Lekin control karna seekh "

Kammo ki is baat par Nimmi ka moonh aashcharya se khul gaya


" Mom aap bhi ..Yakeen nahi hota ..To kya didi bhi ? "

Nimmi ko to jaise jhatke par jhatke lagte ja rahe the

" To kya hua ..Ye umar ka khel hai ..Nikki ke saath bhi hota hoga ..Par ab se kam - kam karna aur jahan tak ho band kamre ka dhyaan rakhna ..Kher main to salaah dungi ki aisi baatein jehen me la hi mat to jyada achha hai ..Chal ab fata - fat taiyaar ho ja ..Main coffee bana deti hoon "

Itna bol kar Kammo bed se neeche utarne lagi aur Nikki tezi se seedhiyaan utar kar apne room me laut aayi

Kammo ke kamre se baahar jaate hi Nimmi bed par uchhal padi

" Oh god ..Kya mom bhi Dada ji ke saath aur Didi bhi ..Yakeen nahi hota ..Sab se badi baat mom ko isse koi problem nahi ki main aur dad ya didi aur dad aapas me ..Fuck ..Kher dad smart bhi to khoob hain Aur unka...... "

Nimmi masti me aa gayi jab usne Deep ke khade lund ke baare me socha ..Pant ke oopar ka fulaav dekh kar to yahi anumaan lagaaya ja sakta hai ki bahut hi solid hoga

Wo jaldi se nighty pehen kar hall me jaane lagi ..Phir dhayan aaya panty to usne pehni hi nahi

" Kya fark padhta hai ab to mom bhi raazi hain "

Muskurakar Nimmi hall me aa gayi

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" Ye kya baatein chal rahi thi Mom aur Nimmi ke beech ..Mom ne mera naam kyon liya ..Jo bhi ho mujhe pata karna hoga ..Nimmi ghabraayi si lag rahi thi ..Kuch na kuch to baat hai "

Nikki me mann me faltu ka fitoor jaagne laga ..Jab insaan ko koi kaam na ho to aksar aisi bekaar ki baaton se uska time pass ho jaata hai ..Kahan hamesha kitaabo me ghusi rehne waali ladki aaj kaan lagaa kar doosro ki baatein sunne me interested hone lagi thi

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Hotel royal inn :-

Deep waqt se pehle yahan aa chuka tha ..Restaurant ke staff se pata chala ki Tanvi Roy ke naam se Table booked hai ..Deep ne ek aisi jagah chuni jahan se wo us table par nazar rakh sakta tha ..lekin aapas me hone waali baat - chit na sun paane ka malaal uske chehre par saaf nazar aaya

Kuch waqt baad hi Tanvi Restaurant me daakhil huyi ..Deep ki nigaahen usse takraayi aur agle hi pal uske moonh se nikalti gaaliyon ka ambaar lag gaya

" Saali chhinaal ..Aaj to aise bann ke aayi hai jaise badi sati saavitri ho ..Haraamzaadi ..Mera bas chale to zamaane bhar se chudwaau ise "

Tanvi ne is waqt ek cream colour ka full sleeve kurta aur Patiyaala salwaar pehen rakhi thi ..Dupatte se usne khud ke ubaaro ko itna cover kiya tha jaise restaurant me baitha har sahaks balaat kaari ho

Maathe par chhoti si bindiya ..Hothon par skin match lipstick ..Kajal se sajaayi ankhen ..Halka make - up ..Kul mila kar Pakka wo Nikunj ko impress karne ke mood me yahan aayi thi

Waiter ne uske liye chair offer ki aur wo Nikunj ka intzaar karne lagi ..3:30 ho gaye lekin Nikunj ka koi pata nahi chala ki wo kahan tha ..Deep mann hi mann khush hua ..Use Tanvi ka naraaz chehra dekh kar bada sukoon Aya

" Bas aaj Nikunj yahan na aaye to mera kaam aasaan ho jaayega "

Deep ne aisa soch hi tha ki Nikunj restaurant ke gate se andar daakhil ho gaya

" Iski maa ki choot ..Saala pakka meri hi aulaad hai ..Ladki dekhi nahi ki laar tapak gayi "

Halaaki Deep ne aisa kuch socha to nahi tha lekin uske murjhaaye chehre ko dekh kar koi bhi andaaza laga sakta tha ki kuch der pehle is chehre par 50 jute pade honge

" Tanvi !!!!!!!!! "

Tanvi akeli hi ladki thi poore restaurant me to Nikunj ko jyada waqt nahi laga use pehchhanne me aur waise bhi wo subah uski tasveer se to roobaroo ho hi chuka tha

" Nikunj ..Aap 30 min. Late hain "

Tanvi ne uske chair par baithte hi tok diya

" Wo actully ..Traffic "

Nikunj jawaab deta isse pehle hi Tanvi ne fir se taana maara

" Abhi se excuse ..Jaane aage kya hoga "

Haalaki ye baat usne behad low voice me kahi thi lekin Nikunj ke kaano me chali hi gayi

" I'm sorry ..Aap ko wait karna pada ..Uncle kaise hain ? "

Nikunj ne ek achhe bachhe ki tarah use dad ke haalaat poochhe

" Fine "

Tanvi ne starting se apna face expression thoda anger rakha tha ..Nikunj ki haalat to uske pehle sawaal se hi palti ho gayi thi ..Bas ab wo Tanvi se nazre ferne laayak hi bacha tha

" Wanna lunch ? "

Nikunj ko koi baat nahi soojhi to usne use lunch offer kar diya

" Sure why not "

Tanvi bhukhi thi lekin kisi aur cheez ke liye ..Shayad aap sab samjh gaye honge ..Nikunj ne to waise bhi subah se sirf coffee aur meethe ka ek piece hi khaaya tha ..Usne waiter ko bula kar Tanvi ki pasand ka khana order kiya aur dono intzaar karne lage

" Tasveer se bhi khoobsoorat hai ye to ..Jal jaayenge mere saare dost ..Mujhe rishta kubool hai "

Nikunj ke dil me wo utar chuki thi

" Thoda bhondu sa hai ..Lekin lund iska Deep uncle ke baraabar hi hona chaahiye ..Aisa hua to maza hi aa jaayega ..Din me sasur ke saath aur raat me piya ke saath "

Tanvi ki panty to waise bhi har waqt hi geeli rehti thi

" Achha aap ki hobbies kya hain ? "

Sannaate ko todte huye Nikunj bola

" Hobbies ..Thodi strange hain "

Tanvi ne jawaab diya aur Nikunj ki ankhon se apni ankhon ka contact bana liya

" Phir bhi "

Contact sateek hone se Nikunj nervous ho gaya ..Lekin mard ko dard nahi hota ..Ye soch kar usne khud ko majboot kiya aur Tanvi ki ankhon me dekhta raha

" Mujhe Porn dekh kar masturbate karna pasand hai ..Khana banana nahi aata lekin banana khana aata hai and haan ..Chhodo aaj ke liye itna hi kaafi hai "

Tanvi ne jawaab diya aur Nikunj ki gaand dhua le gayi ..Use thaska aaya aur zoro se khaasne laga ..Tanvi samajh gayi ki teer nishaane par laga hai

" Lijiye paani pee lijiye "

Tanvi ne uske haath me glass dete huye kaha ..Nikunj ki nazren neeche jhuk kar table par bichhe design cloth par jam gayi

Wahin apne bete ki is haalat se Deep ki bhi gaand fat gayi use laga jaise Tanvi ne Nikunj ko bata diya ho ki usne ' Bete ke baap ka lund choosa tha '

" Bhagwaan ye tu kya pange kar raha hai ..Baksh de mere pariwaar ko ..Saari saza main bhugatne ko taiyaar hoon "

Deep ooparwaale se dua karne laga

Kaafi der tak jab Nikunj shant raha to Tanvi khil - khila kar hass di

" I'm kidding ..Hope you dont mind "

Nikunj ko to kaato khoon nahi ..Wo kabhi paani ke glass me hoti halchal dekhta aur kabhi shaitaani se bhara Tanvi ka chehra

" Its Ok ..But tumhaara andaaz bada strange hai "

Wo itna hi bol paya ki Tanvi ne uske haath par apna haath rakh diya

" Nikunj main tumse shadi karne ko taiyaar hoon lekin zaroori nahi tumhaari bhi haan ho ..But ye life sirf ek baar milti hai to kyon na ise khul kar jiya jaaye ..Tum samajh rahe hoge main kisi slut type ki aurat ki tarah baatein karti hoon ..lekin maano ya na maano main har waqt doosro ko khush dekhna chaahti hoon ..Bhale mujhe takleef me rehna pade par mere saath jude log sukoon bhari neend soyen "

Itna bol kar Tanvi ne sad sa face bana liya ..Nikunj ne uske jhuke chehre ko uski chin se pakad kar apne haath se oopar uthaaya aur Muskura kar apne dil ki baat keh di

" Muhje tum manzoor ho ..Chahe jeet uncle ki marzi ho ya na ho ..Utha kar le jaaunga ghar se "

Tanvi aise apni nazren churaane lagi jaise sharmaahat ki ganga uske chehre se hi beh kar nikli ho

Wahin Deep utha aur doosre gate se restaurant ke baahar nikal gaya sirf ek shabd ke saath ' satyaanaash ' ....


ऑफीस पहुचने के बाद भी निकुंज के मन मे बैचैनि थी ..रह - रह कर उसका ध्यान ओल्ड मोबाइल पिक और आज की कम्मो के ऊपर जा रहा था


" वाकाई मे बहुत सारे चेंजस आ गये हैं मोम के अंदर ..कितना सुकून भरा चेहरा था फोटो मे और आज इतने सालो बाद सिर्फ़ एक चलती फिरती मशीन रह गयी हैं ..मोम ये काम कर दो ..वो काम कर दो ..यहाँ बच्चो की फरमायशो को पूरा करो वहाँ अपने पति की ........ "


अचानक से निकुंज बोलते - बोलते रुक गया ..ये क्या निकल गया उसके मूँह से ..अरे मोम - डॅड के प्राइवेट पल हैं वो कुछ भी करें ..वैसे मा उसे गेट के बाहर खड़ा देख कर घबरा ज़रूर गयी थी ..तो क्या हुआ वो खुद भी तो भीगी बिल्ली बन कर छत पर भाग गया था


ऐसी ही कयि सोचो मे डूबा रह कर निकुंज अब तक 10 - 12 कप कॉफी पी चुका था ..ऑफीस स्टाफ भी हैरान था कि इसे क्या हो गया जो इतना गंभीर हुआ जा रहा है


2:30 बजे निकुंज का सेल रिंग हुआ और उसकी सारी सोच धाराशायी हो गयी


कॉल घर से था


" हेलो निकुंज बेटा ..वो बहू से मिलने ज़रूर चले जाना ..3 बजे होटेल रॉयल इन ..तनवी नाम है बहू का "


और इतना बोल कर कम्मो ने कॉल कट कर दिया


" हेलो हेलो हेलो मोम मोम हेलो "


निकुंज चिल्लाता रह गया जब तक कॉल डिसमिस हो गया


" ये मोम को क्या हुआ ..इतनी जल्दी कॉल क्यों कट कर दिया ..हां यार उस आइटम से भी तो मिलने जाना है "


इतना बोल कर उसने सेल मे टाइम सेट किया और फ्रेश होने कॅबिन वॉशरूम चला गया ....


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दीप घर से किसी काम का बहाना मार कर बाहर जा चुका था ..अब ये बताना ज़रूरी नही लगता कि वो कहाँ गया होगा ..फिर भी बता देते हैं ..वो गया था होटेल रॉयल इन ..जहाँ निकुंज और तनवी मिलने वाले हैं ..इस होटेल मे उसने खूब ऐय्याशि भी की है तभी यहाँ का लगभग पूरा स्टाफ उसका परिचित था ..वैसे भी केटरिंग वाले से तो होटेल वालो के रीलेशन'स बहुत ही स्ट्रॉंग होते हैं ....


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निक्की अपने कमरे मे गुम्सुम पड़ी आज हुई बातों मे खोई हुई थी ..निकुंज ने उसे जो कुछ भी समझाया वो कहीं से कहीं तक ग़लत नही था ..वाकाई वो वैजयंती माला ही है ..घड़ी - घड़ी दुपट्टे से अपने उभारों को संभालना ..उन्हे छुपाना ..चाहे हॉल मे हो या अपने कमरे मे ..24 घंटे ये दुपट्टा उसका साथ देता है ..वहीं निम्मी कितनी फ्री है इन सब बातों से ..माना वो फॅशन के चलते खुद को एक्सप्लोर करती है लेकिन घर मे चोर है कौन जो अपनी ही बेटियों या बहनो पर बुरी नज़र डालता हो


ना ही दीप ने कभी उसकी तरफ बुरी नज़र से देखा था ..ना ही निकुंज ने ..फिर क्यों वो इतना घबराती है ..क्या वजह है


" आज से नो दुपट्टा अट होम "


निक्की ने खुद से वादा किया


" निम्मी को देखती हूँ वो क्या कर रही है ..आज का बदला भी तो लेना है कमीनी से और हेर रिमूवर..... "


जाने इन लड़कियों के गाल हर वक़्त लाल क्यों रहते हैं ..अपनी ही सोच पर मुस्कुराकर वो कमरे से बाहर आ गयी ..लेकिन जो वादा किया था उसके मुताबिक ' नो दुपट्टा '


सीढ़ियाँ चढ़ती हुई वो 1स्ट फ्लोर पर पहुचि और निम्मी के रूम का गेट नॉक करने ही वाली थी ..उसके कानो मे कमरे के अंदर होती कॉन्वर्सेशन सुनाई पड़ी ..जाहिर है कम्मो आज सुबह की बात को ले कर उसे डाट रही थी ..अब जब अपनी बहेन जैसा बनना ही है तो क्यों ना छुप - छुप के इनकी बातें सुनी जाएँ ..निक्की बिना आहट किए कमरे के बाहर खड़ी हो गयी


" तू ये बता पूरे कपड़े पहेन ना कब सीखेगी ? "


कम्मो बात की शुरूवात करते हुए बोली


" मोम सुबह - सुबह मत छेड़ो ..मेरा बदन वैसे ही टूट रहा है "


निम्मी की नींद तो खुल गयी थी लेकिन वो अब भी आँखें बंद किए लेटी थी


" ये सुबह है तेरी ..दोपहर के 3 बज रहे हैं ..शरम नही आती ..पराए घर जा कर नाक कटाना हमारी ..चल उठ फटाफट "


कम्मो ने ये बोल कर उसके बदन पर पड़ी चादर अलग कर दी ..निम्मी केवल ब्रा मे लेटी है ये बात कम्मो जानती थी


" मोम ..आप जाओ यार ..मुझे सोने दो और मैं कहीं नही जाने वाली ..डॅड खिलाएँगे मुझे लाइफ टाइम "


निम्मी ने खीज कर कहा


" एक लगाउन्गि खीच के तो सही हो जाएगी ..अच्छा ये बता ..आज कल तेरे दिमाग़ मे चल क्या रहा है ..मुझसे झूठ मत बोलना मुझे सब पता है "


कम्मो ने अपनी अगली बात पूरी की और निम्मी तुरंत ही बेड पर उठ कर बैठ गयी


" क ..क ..क्या पता है आप को ? "


निम्मी का चेहरा फीका पड़ गया ..वो हकलाने लगी ..कम्मो ने अपने चेहरे पर गुस्से के भाव और भी ज़्यादा बढ़ा लिए ..वो चाहती थी कि निम्मी ही अपनी ग़लती को कुबूले


कम्मो :- " तू इतना घबरा क्यों रही है ? "


" नही पहले ये बताओ आप को क्या पता है ? "


निम्मी को नींद मे ऑर्गॅज़म वाली बात तो याद ही नही थी उसे लगा कि कम्मो को दीप और उसके बीच हुई घटना की जानकारी लग गयी है


" तू खुद बोलेगी या मैं बोलू "


कम्मो के ये शब्द सुन कर तो निम्मी की जान ही निकल गयी ..एक माँ उससे ये पूछना चाह रही थी कि बता तूने मेरे पति को अपने जाल मे क्यों फ़साया ..शरम नही आई अपने बाप के साथ ऐसी घिनौनी हरकत करते हुए


वहीं निक्की ने बंद दरवाज़े पर ज़ोर डाल तक उसे इतना खोल दिया था कि बातों के साथ अंदर होती क्रिया - कलापो पर भी उसकी नज़र पड़ सके ..निम्मी को ऐसे बेशर्मो की तरह नंगा देख कर उसे हैरानी भी हुई और कम्मो पर गुस्सा भी आया ..एक मा कैसे अपनी बेटी को नंगा होते देख चुप - चाप बैठ सकती है ..दूसरी बात ये कि उसे निम्मी की चूत के दर्शन तो हल्के - हल्के हो रहे थे लेकिन उस पर काला पन नज़र नही आया ..' इसका मतलब ये कि निम्मी अपनी झान्टे उड़ा चुकी है '


" ज़्यादा बनने की कोशिश मत कर ..मैं तेरी तरह बेहया नही जो ऐसी बातें तेरे सामने बोल सकु ..तू खुद सोच ..क्या तू ये सही कर रही है ? "


कम्मो बेड पर पड़ी चादर की घड़ी बनाते हुए बोली


" मोम मुझे माफ़ कर दो आगे से ऐसा कोई ग़लत काम नही करूँगी "


घबराहट मे निम्मी ने आज पहली बार अपनी मा से किसी बात के लिए माफी माँगी थी


" माफी वाली बात नही है निम्मी ..ना ही मैं तुझे शर्मिंदा कर रही हूँ ..मैं जानती हूँ उमर के हिसाब से ऐसा अक्सर होता है ..सोच अगर तेरे डॅड..... "


कम्मो इसके आगे कुछ भी बोल पाती इससे पहले ही निम्मी ने उसके मूँह पर अपना हाथ रख दिया ..वो कन्फर्म हो गयी की मोम को हक़ीक़त पता है


" मोम पूरी ग़लती मेरी नही है "


निम्मी ने रुआसी हो कर कहा


" बेटी जब मैं तेरी उमर की थी तब मेरे मन मे भी ऐसी बातें आती थी ..हर लड़की के मन मे आती हैं ..लेकिन खुद पर काबू रखना भी ज़रूरी है ..मैं मना नही करती ..तू रोक भी कितना पाएगी खुद को ..लेकिन कंट्रोल करना सीख "


कम्मो की इस बात पर निम्मी का मूँह आश्चर्य से खुल गया


" मोम आप भी ..यकीन नही होता ..तो क्या दीदी भी ? "


निम्मी को तो जैसे झटके पर झटके लगते जा रहे थे


" तो क्या हुआ ..ये उमर का खेल है ..निक्की के साथ भी होता होगा ..पर अब से कम - कम करना और जहाँ तक हो बंद कमरे का ध्यान रखना ..खेर मैं तो सलाह दूँगी कि ऐसी बातें जहेन मे ला ही मत तो ज़्यादा अच्छा है ..चल अब फटा - फट तैयार हो जा ..मैं कॉफी बना देती हूँ "


इतना बोल कर कम्मो बेड से नीचे उतरने लगी और निक्की तेज़ी से सीढ़ियाँ उतर कर अपने रूम मे लौट आई


कम्मो के कमरे से बाहर जाते ही निम्मी बेड पर उच्छल पड़ी


" ओह गॉड ..क्या मोम भी डॅड जी के साथ और दीदी भी ..यकीन नही होता ..सब से बड़ी बात मोम को इससे कोई प्राब्लम नही कि मैं और डॅड या दीदी और डॅड आपस मे ..फक ..खेर डॅड स्मार्ट भी तो खूब हैं और उनका...... "


निम्मी मस्ती मे आ गयी जब उसने दीप के खड़े लंड के बारे मे सोचा ..पॅंट के ऊपर का फुलाव देख कर तो यही अनुमान लगाया जा सकता है कि बहुत ही सॉलिड होगा


वो जल्दी से नाइटी पहेन कर हॉल मे जाने लगी ..फिर ध्यान आया पैंटी तो उसने पहनी ही नही


" क्या फ़र्क पड़ता है अब तो मोम भी राज़ी हैं "


मुस्कुराकर निम्मी हॉल मे आ गयी


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" ये क्या बातें चल रही थी मोम और निम्मी के बीच ..मोम ने मेरा नाम क्यों लिया ..जो भी हो मुझे पता करना होगा ..निम्मी घबराई सी लग रही थी ..कुछ ना कुछ तो बात है "


निक्की के मन मे फालतू का फितूर जागने लगा ..जब इंसान को कोई काम ना हो तो अक्सर ऐसी बेकार की बातों से उसका टाइम पास हो जाता है ..कहाँ हमेशा किताबो मे घुसी रहने वाली लड़की आज कान लगा कर दूसरो की बातें सुनने मे इंट्रेस्टेड होने लगी थी


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होटेल रॉयल इन :-


दीप वक़्त से पहले यहाँ आ चुका था ..रेस्टोरेंट के स्टाफ से पता चला कि तनवी रॉय के नाम से टेबल बुक्ड है ..दीप ने एक ऐसी जगह चुनी जहाँ से वो उस टेबल पर नज़र रख सकता था ..लेकिन आपस मे होने वाली बात - चीत ना सुन पाने का मलाल उसके चेहरे पर सॉफ नज़र आया


कुछ वक़्त बाद ही तनवी रेस्टोरेंट मे दाखिल हुई ..दीप की निगाहें उससे टकराई और अगले ही पल उसके मूँह से निकलती गालियों का अंबार लग गया


" साली छिनाल ..आज तो ऐसे बन के आई है जैसे बड़ी सती सावित्री हो ..हरामज़ादी ..मेरा बस चले तो ज़माने भर से चुदवाऊ इसे "


तनवी ने इस वक़्त एक क्रीम कलर का फुल स्लीव कुर्ता और पटियाला सलवार पहेन रखी थी ..दुपट्टे से उसने खुद के उभारो को इतना कवर किया था जैसे रेस्टोरेंट मे बैठा हर सख्स बलातकारी हो


माथे पर छोटी सी बिंदिया ..होठों पर स्किन मॅच लिपस्टिक ..काजल से सजाइ आँखें ..हल्का मेक - अप ..कुल मिला कर पक्का वो निकुंज को इंप्रेस करने के मूड मे यहाँ आई थी


वेटर ने उसके लिए चेर ऑफर की और वो निकुंज का इंतज़ार करने लगी ..3:30 हो गये लेकिन निकुंज का कोई पता नही चला कि वो कहाँ था ..दीप मन ही मन खुश हुआ ..उसे तनवी का नाराज़ चेहरा देख कर बड़ा सुकून आया


" बस आज निकुंज यहाँ ना आए तो मेरा काम आसान हो जाएगा "


दीप ने ऐसा सोच ही था कि निकुंज रेस्टोरेंट के गेट से अंदर दाखिल हो गया


" इसकी मा की चूत ..साला पक्का मेरी ही औलाद है ..लड़की देखी नही की लार टपक गयी "


हलाकी दीप ने ऐसा कुछ सोचा तो नही था लेकिन उसके मुरझाए चेहरे को देख कर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था कि कुछ देर पहले इस चेहरे पर 50 जूते पड़े होंगे


" तनवी !!!!!!!!! "


तनवी अकेली ही लड़की थी पूरे रेस्टोरेंट मे तो निकुंज को ज़्यादा वक़्त नही लगा उसे पहचानने मे और वैसे भी वो सुबह उसकी तस्वीर से तो रूबरू हो ही चुका था


" निकुंज ..आप 30 मिनट. लेट हैं "


तनवी ने उसके चेर पर बैठते ही टोक दिया


" वो ऐक्चुअली ..ट्रॅफिक "


निकुंज जवाब देता इससे पहले ही तनवी ने फिर से ताना मारा


" अभी से एक्सक्यूस ..जाने आगे क्या होगा "


हालाकी ये बात उसने बेहद लो वाय्स मे कही थी लेकिन निकुंज के कानो मे चली ही गयी


" आइ'म सॉरी ..आप को वेट करना पड़ा ..अंकल कैसे हैं ? "


निकुंज ने एक अच्छे बच्चे की तरह उसे डॅड के हालात पूच्छे


" फाइन "


तनवी ने स्टार्टिंग से अपना फेस एक्सप्रेशन थोड़ा ऐंगर रखा था ..निकुंज की हालत तो उसके पहले सवाल से ही पतली हो गयी थी ..बस अब वो तनवी से नज़रे फेरने लायक ही बचा था


" वाना लंच ? "


निकुंज को कोई बात नही सूझी तो उसने उसे लंच ऑफर कर दिया


" शुवर वाइ नोट "


तनवी भूखी थी लेकिन किसी और चीज़ के लिए ..शायद आप सब समझ गये होंगे ..निकुंज ने तो वैसे भी सुबह से सिर्फ़ कॉफी और मीठे का एक पीस ही खाया था ..उसने वेटर को बुला कर तनवी की पसंद का खाना ऑर्डर किया और दोनो इंतज़ार करने लगे


" तस्वीर से भी खूबसूरत है ये तो ..जल जाएँगे मेरे सारे दोस्त ..मुझे रिश्ता क़ुबूल है "


निकुंज के दिल मे वो उतर चुकी थी


" थोड़ा भोंडू सा है ..लेकिन लंड इसका दीप अंकल के बराबर ही होना चाहिए ..ऐसा हुआ तो मज़ा ही आ जाएगा ..दिन मे ससुर के साथ और रात मे पिया के साथ "


तनवी की पैंटी तो वैसे भी हर वक़्त ही गीली रहती थी


" अच्छा आप की हॉबीस क्या हैं ? "


सन्नाटे को तोड़ते हुए निकुंज बोला


" हॉबीस ..थोड़ी स्ट्रेंज हैं "


तनवी ने जवाब दिया और निकुंज की आँखों से अपनी आँखों का कॉंटॅक्ट बना लिया


" फिर भी "


कॉंटॅक्ट सटीक होने से निकुंज नर्वस हो गया ..लेकिन मर्द को दर्द नही होता ..ये सोच कर उसने खुद को मजबूत किया और तनवी की आँखों मे देखता रहा


" मुझे पॉर्न देख कर मास्टरबेट करना पसंद है ..खाना बनाना नही आता लेकिन खाना आता है आंड हां ..छोड़ो आज के लिए इतना ही काफ़ी है "


तनवी ने जवाब दिया और निकुंज की गान्ड धुआ ले गयी ..उसे थास्का आया और ज़ोरो से ख़ासने लगा ..तनवी समझ गयी कि तीर निशाने पर लगा है


" लीजिए पानी पी लीजिए "


तनवी ने उसके हाथ मे ग्लास देते हुए कहा ..निकुंज की नज़रें नीचे झुक कर टेबल पर बिछे डिज़ाइन क्लॉत पर जम गयी


वहीं अपने बेटे की इस हालत से दीप की भी गान्ड फट गयी उसे लगा जैसे तनवी ने निकुंज को बता दिया हो कि उसने ' बेटे के बाप का लंड चूसा था '


" भगवान ये तू क्या पंगे कर रहा है ..बख़्श दे मेरे परिवार को ..सारी सज़ा मैं भुगतने को तैयार हूँ "


दीप ऊपरवाले से दुआ करने लगा


काफ़ी देर तक जब निकुंज शांत रहा तो तनवी खिल - खिला कर हंस दी


" आइ'म किडिंग ..होप यू डोंट माइंड "


निकुंज को तो काटो खून नही ..वो कभी पानी के ग्लास मे होती हलचल देखता और कभी शैतानी से भरा तनवी का चेहरा


" इट्स ओके ..बट तुम्हारा अंदाज़ बड़ा स्ट्रेंज है "


वो इतना ही बोल पाया कि तनवी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया


" निकुंज मैं तुमसे शादी करने को तैयार हूँ लेकिन ज़रूरी नही तुम्हारी भी हां हो ..बट ये लाइफ सिर्फ़ एक बार मिलती है तो क्यों ना इसे खुल कर जिया जाए ..तुम समझ रहे होगे मैं किसी स्लट टाइप की औरत की तरह बातें करती हूँ ..लेकिन मानो या ना मानो मैं हर वक़्त दूसरो को खुश देखना चाहती हूँ ..भले मुझे तकलीफ़ मे रहना पड़े पर मेरे साथ जुड़े लोग सुकून भरी नींद सोएँ "


इतना बोल कर तनवी ने सॅड सा फेस बना लिया ..निकुंज ने उसके झुके चेहरे को उसकी चिन से पकड़ कर अपने हाथ से ऊपर उठाया और मुस्कुरा कर अपने दिल की बात कह दी


" मुझे तुम मंज़ूर हो ..चाहे जीत अंकल की मर्ज़ी हो या ना हो ..उठा कर ले जाउन्गा घर से "


तनवी ऐसे अपनी नज़रें चुराने लगी जैसे शरमाहट की गंगा उसके चेहरे से ही बह कर निकली हो


वहीं दीप उठा और दूसरे गेट से रेस्टोरेंट के बाहर निकल गया सिर्फ़ एक शब्द के साथ ' सत्यानाश ' ....



लंच के साथ कुछ प्यार भरी बातें करने के बाद निकुंज अपनी भावी पत्नी को शॉपिंग करवाने माल ले गया ..दोनो वहाँ एक दूसरे का हाथ थामे घूमते रहे


" मुझे तो कोई गिफ्ट समझ नही आ रहा मेडम ..आप ही बता दीजिए जो मंन मे हो "


निकुंज एक बड़ी सी ज्यूयलरी शॉप के बाहर रुकते हुए बोला ..इस शॉप पर वो पहले भी कयि बार आ चुका था ..खानदानी सुनार जो था चावला परिवार का


" नही जान मुझे कुछ नही चाहिए ..तुम मिल गये बस अब मेरी ज़िंदगी पूरी हो गयी "


तनवी लगातार अपनी बातों से उसे घायल करने मे लगी थी ..वैसे भी जीत के पास पैसो की क्या कमी ..तनवी उसकी एक लौति लड़की थी वो चाहे जो खरीद सकती थी


" नही ऐसे नही ..कुछ तो मूँह दिखाई बनती है ..तनवी इनकार मत करो "


निकुंज नही माना और दोनो ज्यूयलरी स्टोर के अंदर चले गये


" नमस्ते सोनी अंकल "


काउंटर पर बैठे अधेड़ मालिक को निकुंज ने ग्रीट किया साथ ही तनवी ने भी अपने हाथ जोड़ लिए


" अरे निकुंज बेटा ..इंडिया वापस कब आए ? "


मोटा चश्मा उतार कर सोनी जी उसे पहचानते हुए बोले ..आख़िरी बार निकुंज इस दुकान पर कम्मो के साथ आया था ..जब रघु की होने वाली वाइफ के लिए उन्होने गहने ऑर्डर किए थे


" बस अंकल 1 महीना हुआ है ..आप का स्वास्थ्य कैसा है ? "


निकुंज ने काउंटर से लगी चेर पर बैठते हुए कहा ..साथ ही तनवी भी उसकी बगल वाली चेर पर बैठ गयी


" ठीक हूँ अपनी बाकी की उमर जी रहा हूँ ..खेर घर मे सब कैसे हैं ..काफ़ी दिन हुए ना तो तुम्हारे डॅड से मिल पाया ना ही मोम से "


कुछ इसी तरह की कॅषुयल बातें कर निकुंज मुद्दे पर आने लगा


" अंकल इनसे मिलिए ..ये हैं तनवी रॉय ..डॅड के चाइल्ड हुड फ्रेंड जीत अंकल की बेटी ..और बहुत जल्द आप की होने वाली बहू भी "


निकुंज शरमाता हुआ बोला जैसे कोई लड़की हो


" बधाई हो बेटा ..और अखंड सौभाग्य वती रहो बहू रानी "


माथे पर दुपट्टे का पल्ला डाले बैठी तनवी भी बूढ़े की बात पर मुस्कुरा गयी ..लेकिन तभी उसे शरारत सूझी और उसने निकुंज से नज़र बचा कर अपने होंठो पर दो बार जीभ फिराई ..जैसे जन्मो की प्यासी हो ..बूढ़ा भी कोई दूध का धुला थोड़ी था ..वो एक नज़र मे ताड़ गया आइटम चालू है


" तो बहू के लिए कोई गिफ्ट लेने आए हो "


बुड्ढे ने अपने दाँत बाहर निकालते हुए कहा


" जी अंकल ..लेकिन समझ नही आ रहा क्या गिफ्ट दू "


निकुंज ज्यों का त्यों शरमाने मे बिज़ी था ..शायद ये आज तक सोनी को अपने डॅड की तरह मानने का असर था


" कोई बात नही ..मैं बहू से पूछ लेता हूँ "


निकुंज से नज़रें हटा कर बूढ़े ने तनवी पर अपनी लार टपका दी


" तो बहूरानी कोई ख़ास पेशकश आप की ..हर तरह से आप की सेवा मे हाज़िर है सोनी ज्यूयेलर'स "


वहीं निकुंज को महसूस हुआ जैसे उसे बाथरूम जाना हो ..वो उठ कर शॉप के वॉशरूम मे घुस गया ..निकुंज के वहाँ से दूर होते ही तनवी हरक़त मे आई और अपने दुपट्टे को माथे से हटा कर दोनो कोहनियाँ काउंटर पर रख दी ..बूब्स पर लगता टेबल का प्रेशर बढ़ गया और क्लीवेज दोगुना हो गया ..ऐसा लगा जैसे दोनो चूचे किसी भी वक़्त आज़ादी की जीत का जशन मना सकते हैं


तनवी के चेहरे के अंदाज़ इतने नॉटी थे कि बूढ़े के लंड ने पाजामे मे सलामी ठोक दी


" वैसे अंकल मुझे शो ऑफ करने मे ज़्यादा इंटेरेस्ट तो नही है ..लेकिन आज की डिमॅंड को भी नज़र अंदाज़ नही किया जा सकता ..खेर मेरे पास हर तरह की ज्यूयलरी है पर आज मैं चाहती हूँ मेरे कलेक्षन मे कर्धनि भी आ जाए "


तनवी ने अपना सर नीचे कर बाहर को निकले बूब पर जीभ से चाटते हुए कहा ..बूढ़े को लगा जैसे वो पाजामे मे ही झाड़ जाएगा ..एक बात और जो उसके दिमाग़ मे आई वो थी दीप का नेचर और सेक्स के प्रति लगाव ..अक्सर कमसिन लड़कियों के साथ आ कर वो भी तो उन्हे शॉपिंग करवाता था


" बहू जी आप के ससुर आप से बहुत खुश रहेंगे ..उन्हे मैं काफ़ी अच्छे से जानता हूँ "


बूढ़े को कहाँ पता था कि तनवी और दीप तो पहले से ही मज़े कर चुके हैं


" अंकल आप भी तो मेरे ससुर समान है ..धात शरम नही आती बहू की चूचियाँ देखते हुए "


ये बोल कर तनवी ने बूढ़े को उसकी सीट से उच्छल दिया ..वो इधर उधर नज़रे घुमाता हुया अपनी उखड़ी सानो को नॉर्मल करने लगा


" डोंट वरी ..ससुर होने से आप का हक़ बनता है ..आप देख सकते हैं "


तनवी की रांड़ पने की हद देख बुड्ढे ने सोचा ..जब ये खुद चुदने को मचल रही है तो वो क्यों घबरा रहा है


" मैं कर्धनि दिखा देता हूँ ..बाकी पहेन कर तुम मुझे दिखा देना "


बूढ़े ने ड्रॉयर से 4 - 5 सेट निकाले और टेबल पर रख दिए ..वहीं निकुंज अब तक वॉश रूम मे गिफ्ट के बारे मे ही सोच रहा था


" ज़रूर अंकल "


तनवी ने देखा निकुंज वॉशरूम से बाहर आ रहा है उसने झट अपना रंडी पना ख़तम किया और सम्भल कर जैसे थी वैसे बैठ गयी ..लेकिन जल्दबाज़ी ने माथे का पल्ला उससे करते नही बन पाया


" बहू को कर्ध्नी पसंद आई है ..बेटा उस कॅबिन मे जा कर चेक कर लो "


बूढ़े ने सारे पीस निकुंज के आगे सरका कर कहा


" अंकल मुझे पता नही कैसे पेहेन्ते है ..मैने सिर्फ़ अपनी सोच से इसे पसंद किया है "


तनवी ने एक और तीर छोड़ कर कहा


" बेटा इसे कमर पर नाभि के ऊपर या नीचे कहीं भी पहेन सकते हैं ..यहाँ खुले मे तुम चेक नही कर पाओगि तो उस कॅबिन का यूज़ कर लो "


बूढ़े ने तनवी को मेतड समझाया


" निकुंज बेटा बहू की हेल्प के लिए तुम भी साथ चले जाओ ..पहनने वाले से ज़्यादा देखने वाले को चीज़ पसंद आनी चाहिए ..खामोखा वापसी चक्कर लगाने से तो अच्छा यही है ट्राइ कर लो "


बूढ़े ने बोल तो दिया लेकिन वो तो चाहता था कि तनवी हर बार उसकी दुकान पर आए


" जी अंकल ..चले "


बिना निकुंज के चेहरे को देखे तनवी कॅबिन की तरफ बढ़ गयी


" बेटा जाओ शरमाना कैसा ..अब दोनो पति पत्नी बनने वाले हो "


बुड्ढे की बात सुन निकुंज भी अपनी चेर से उठा और सारी कर्ध्नी ले कर कॅबिन लॉक कर दिया


" अब आएगा मज़ा ..कम से कम साली का नंगा पेट तो देख ही सकता हूँ "


थूक निगल कर बूढ़े ने बगल मे रखी छोटी टीवी स्टार्ट कर दी और कॅबिन के अंदर के सारे हालात उसकी नज़रो के सामने आ गये


कॅबिन के अंदर आ कर तनवी ने शरमाहट दिखाते हुए अपना दुपट्टा बदन से हटा दिया ..निकुंज ने इतने तने बूब्स बहुत कम लड़कियों के देखे थे ..तनवी ने नाटक करते हुए दुपट्टा ज़मीन पर गिराया और वापस उठाने के लिए झुक गयी ..नज़ारा बेहद गरम कर देने वाला था ..कमीज़ के ऊपरी हिस्से से झाँकति उसकी चूचियाँ देख कर निकुंज की हवा टाइट हो गयी और सहसा उसका ध्यान आज सुबह पार्क मे हुई घटना पर चला गया जब उसकी बहेन निक्की के तने बूब्स इसी तरह उसकी नज़रों के सामने आए थे


" इसे पहनते कैसे हैं ? "


तनवी ने भोले पन का नाटक ज़ारी रखा और कर्ध्नी उठा कर अपने गले से नीचे उतारने लगी ..बूब्स के ठीक ऊपर जा कर वो फस गयी


" हे हे हे हे ..इसे ऐसे नही पहना जाता "


निकुंज को उसके भोले पन पर बहुत प्यार आया


" तो बैठे क्यों हो ..मज़ाक उड़ाने से तो अच्छा है मेरी हेल्प करो "


तनवी की बात सुन निकुंज अपनी चेर से उठ कर उसके नज़दीक आ गया


" इसे बाहर निकालो "


निकुंज ने उसके बूब्स पर फसि कर्ध्नी की तरफ इशारा किया


" अब मैं किसी और मज़ाक का पात्र नही बनना चाहती ..आप खुद निकाल दो "


इतना कह कर तनवी ने अपनी साँस को बाहर की तरफ छोड़ा ताकि कर्ध्नी अच्छी तरह से उसके बूब्स पर सेट हो जाए ..हुआ भी यही वो उसके निपल'स के ऊपर आ कर फस गयी ..अब बारी आई गुब्बारो मे हवा भरने की ..पूरी ताक़त से साँसे अंदर खीच कर तनवी ने अपने उभारो को कुछ ज़्यादा ही उभार लिया ..अब वो निश्चिंत थी ..कर्ध्नी इतनी आसानी से बाहर नही निकल पाती


" ये तो फँस गयी लगता है "


तनवी की पूरी आशाओ पर पानी फेरते हुए निकुंज उसके पीछे गया और कर्ध्नी के हुक को बड़ी आसानी से खोल कर उसके बूब्स से आज़ाद कर दी


" निरा चूतिया है ये तो "


तनवी ने अपने मंन मे सोचा और पलट कर निकुंज की तरफ चेहरा कर लिया


" इसे ऐसे पेहेन्ते है जान "


कमीज़ और सलवार के ठीक किनारो पर कर्ध्नी लपेट ते हुए निकुंज बोला


" लेकिन मैने औरतों को इसे कपड़ो ने अंदर की तरफ से पेहेन्ते हुए देखा है ..हमारे रीलेशन की एक आंटी पेहेन्ति हैं "


इतना बोल कर तनवी ने कोई देर नही की और अपना कमीज़ पकड़ कर धीरे - धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी ..सलवार तो साँस लेने - छोड़ने की वजह से पहले ही उसकी पैंटी लाइन तक सरक चुका था ..वो यही तक रुक जाती तो क्या बात थी ..हद तोड़ते हुए उसने कमीज़ को अपने ब्रा की निचली स्ट्रॅप तक उठा लिया


" अब जल्दी पहना कर देख लो ..मुझे शरम आती है "


वाह जी वाह ..यही तो कुछ अदायें होती हैं लड़कियों मे जिससे वो लड़को को किसी कुत्ते की तरह अपने आगे पीहे दौड़ाती रहती हैं


निकुंज अब अपने घुटनो पर बैठ चुका था ..एक नज़र ऊपर उठा कर उसने तनवी के चेहरे को देखा ..इस वक़्त तनवी की आँखें पूरी तरह से बंद थी ..वापस नज़रें नीचे लाते हुए उनसे कुछ वक़्त उभारो को दिया और उतरते हुए उसके मुलायम पेट पर नज़रें गढ़ा दी


" ओह....... ये क्या कर रहे हो निकुंज "


कंट्रोल खोते हुए निकुंज का कप्कपाता हाथ उसके मुलायम पेट पर रेंग रहा था ..ठीक उस चिंटी की तरह जो मौका देख कर चौका मारते हुए कयि बार काट भी लेती है


" बिल्कुल भी एक्सट्रा फॅट नही है तनवी "


उसकी जवानी मे खोते हुए निकुंज सिर्फ़ इतना ही बोल पाया और अगले ही पल उसने मुलायम पेट को अपने होंठो से छू लिया ..तनवी की हिचकी और बढ़ी साँसे निकुंज के कान से जा टकराई


" धत्त बेशरम ..जल्दी करो निकुंज ..बाहर अंकल क्या सोच रहे होंगे ..इतनी देर क्यों लग रही "


तनवी के बोल बाहर बैठा बुड्ढ़ा बखूबी सुन रहा था ..इतना सटीक फिगर देख उसके हाथ पाजामे से अपने लंड को सहलाने लगे


" तो क्या हुआ अपनी होने वाली बीवी से प्यार करना कोई गुनाह थोड़ी ही है "


इतना कह कर निकुंज उसकी नेवेल मे अपना अंगूठा घुमाने लगा ..तनवी की ससकारियो से पता चलता था वो कितनी गरम लड़की है


" नही जान ..बाकी शादी के बाद ..प्लीज़ मुझे शरम आ रही है "


तनवी ने उसके सर को पकड़ कर अपनी नेवेल से चिपका दिया ..जान कर अब वो कुछ भी नही कर रही थी ..लड़की के गरम होने के बाद जो भी उसकी हरकतें होती हैं वो अपने आप ही होने लगती हैं


मौका देख निकुंज ने अपनी जीभ बाहर निकाल कर नेवेल मे डाल दी और एक चुस्की के साथ उसका स्वाद लेने लगा


" उफफफफ्फ़ निकुंज ..ये ग़लती मत करो प्लीज़ ..लीव मी "


यहाँ एक तरफ मना करना और दूसरी तरफ अपने मे समेट लेना ..निकुंज भी सेक्स का खिलाड़ी था ..वो आगे बढ़ा और उसके हाथो ने तनवी की नंगी कमर पर अपनी पकड़ बना ली


लेकिन अगले ही पल तनवी को अहसास हुआ निकुंज ने खुद के अंदर आए सैलाब को कंट्रोल कर लिया है और कर्ध्नी कमर मे लपेट ते हुए निकुंज उसके पीछे आ कर खड़ा हो गया


दोनो की सोच मे ये सही कदम था ..अगर एक बार तनवी खुद पर बनाया काबू खो देती तो शायद निकुंज उसकी असलियत से वाकिफ़ हो जाता दूसरी तरफ निकुंज ने सोचा कि अगर वो शादी से पहले ऐसी ज़ोर ज़बरदस्ती करेगा तो शायद तनवी की नज़रों मे उसकी इज़्ज़त के फालुदे बन सकते थे


" आँखें खोलो मेडम "


तनवी जो अब भी अपना कुर्ता हाथो से थामे आँखें बंद किए खड़ी थी ..निकुंज की बात मान कर अपनी बंद पॅल्को को खोल दिया


" स्वर्ग से उतरी अप्सरा भी फीकी है तुम्हारे सामने तनवी "


निकुंज उसे पीछे से अपनी बाहों मे क़ैद करता हुआ बोला ..सामने लगे मिरर मे तनवी कभी अपनी कमर पर लिपटी कर्ध्नी देखती कभी निकुंज का हाथ ..जो बराबर उसके नंगे सपाट पेट पर घूम कर उसकी तारीफ़ के पुल बाँधे जा रहा था


" धात्त बेशरम "


तनवी को अपनी गान्ड पर निकुंज के हाफ एरॉटिक लंड का एहसाह हुआ और उसने फ़ैसला कर लिया कि अब ज़्यादा देर कमरे मे रुकना ग़लत होगा ..बाहर निकल जाने मे ही भलाई है


" चलें "


इसी के साथ ही तनवी ने कमीज़ पर अपने हाथो की पकड़ छोड़ दी और हाथ अंदर डाल कर कर्ध्नी का हुक खोलने लगी


" अरे अभी तो और डिज़ाइन'स बाकी हैं "


निकुंज उसकी गले को चूमते हुए बोला


" मुझे ये वाला पसंद आया "


इतना बोल कर तनवी ने स्टॅंड पर रखा अपना दुपट्टा पहना और एक नॉटी स्माइल देती हुई कॅबिन का गेट खोलने लगी


बाहर आ कर निकुंज ने क्रेडिट से पेमेंट करने के लिए कार्ड सोनी के आगे कर दिया


" बेटा कोई जल्दी नही है ..अभी रहने दो "


बूढ़े के ज़्यादा ज़ोर देने पर निकुंज भी मान गया


" बहू कर्ध्नी पसंद आई तुम्हे ? "


बूढ़े ने सारा सीन तो देखा था लेकिन फिर भी पूछना ज़रूरी समझा


तनवी :- " जी "


जाते वक़्त निकुंज के ख्याल मे आया क्यों ना मोम के लिए भी कुछ लिया जाए


" अंकल ..जब से जॉब जाय्न की है ..मोम - डॅड को एक बार भी कोई उपहार नही दिया ..आप एक काम करिए एक सेट कर्ध्नी और निकाल दीजिए ..उन्हे खुशी होगी ..शादी से पहले तो ज्यूयलरी बनना ही है "


निकुंज ने सोचा मोम के चेहरे पर खुशी लौटाने की शुरूवात इसी से की जाए तो ठीक रहेगा ..वैसे भी डॅड के पास तो वक़्त की शॉर्टेज शुरू से ही रही है ..तो अब एक वही तो है जो मोम का ख्याल रख सकता है


" हां हां क्यों नही ..माता - पिता के लिए तो ये बच्चो का फ़र्ज़ है ..मैं साइज़ बढ़ा कर दे देता हूँ फिर भी कोई दिक्कत पेश आए तो बदल लेना "


सोनी ने दोनो गिफ्ट रॅप किए और उन्हे बाहर छोड़ने के लिए काउंटर से निकल आया


दुकान छोड़ने से पहले जाने तनवी को क्या शरारत सूझी और वो नीचे झुक कर सोनी के पैर छुने लगी ..इसी के साथ जब उसके मूँह के ठीक सामने बुड्ढे का लंड आया वो उसने खुद को निकुंज की आँखों से कवर करते हुए एक गहरी किस उसके लंड पर चिपका दी ..हलाकी लंड पाजामे के अंदर छुपा होने से सोनी को मज़ा तो नही आया लेकिन तनवी के बोल्ड पने की दाद उसका दिल ज़रूर देने लगा


" खुश रहो ..अखंड सौभाग्य वती रहो "


और इससे ज़्यादा बुड्ढ़ा कहता भी क्या ..बस खड़े रह कर ललचाई नज़रों से तनवी के मटकते चूतडो को निहारता रहा


वहीं निकुंज की नज़रों मे इस घटना से तनवी टॉप पर पहुच गयी और दोनो जैसे हाथ पकड़े माल मे आए थे ..बाहर जाने लगे ....


Parking me jaate waqt Nikunj ke dimaag me aaya kyon na apni behno ke liye bhi kuch shopping kar li jaaye ..Nikki ke lower phatne waali baat se wo thoda maayoos tha ..Agar kuch achhe kapde le lega to shayad Nikki - Nimmi dono ke chehre par bhi khushi dekh sake

" Kya sochne lage ..Chalna nahi hai kya ? "

Tanvi ne use soch me dooba dekh poochha

" Nahi main soch raha tha waakayi maine kuch achhe karam kiye honge jo is janam me tumhaare jaisi biwi mil paayi hai ..Pata hai jab tum Soni uncle ke pair chhu kar unka aashirwaad le rahi thi tab mujhe bahut sukoon pahucha ..Jeet uncle ne tumhe sach me kaafi achhe sanskaar diye hain ..Lagta nahi USA me tumne apni previous life spend ki hai "

Nikunj ne uska haath thaam kar kaha ..Tanvi jo chaahti thi ye uska hi asar tha ..Halaaki budde ko chhed kar uska koi fayada nahi hona tha lekin Nikunj ke ghar uska bahu bann kar jaana taye ho gaya

" Pata hai Nikunj jab mom hum dad - daughter ko chhod kar is duniya se gayi ..Tab humaari zindagi bahut sooni ho gayi thi ..Aisa laga jaise humse humaari saari khushiyaan chheen li gayi ho ..Par Dad ne himmat nahi haari aur mujhe Dad - mom dono ka pyar diya ..Aaj bhi wo akele me chhup - chhup kar rote hain ..Ab jab maine apna ghar basaane waali hoon to khush hone ke saath dukh bhi hota hai ..Kahin papa se bichhad na jaau "

Apna sar Nikunj ke kandhe se tika kar Tanvi ki aankhen namm ho gayi ..Maa ko bhool paana kisi bhi bachhe ke bas se baahar hota hai ..Ek tees to Tanvi ke dil me hamesha rehne waali thi ' Maa ka maut ka khud ko jimmedaar samajhna '

Halaaki kuch yon sukh paa lene se mard ki sharirik poorti to ho jaati hai ..Lekin patni ke bichhdne ka gum sada se Jeet ke dil me raha

" Pagal ladki ..Main tujhe bhaga kar thodi na le ja raha hoon ..Humaare pariwaar isi sheher me hain ..Vada karta hoon saptaah ke do din tum apne maayke me bitaaogi ..Lekin ab ghar jamaanyi banne ka mat bol dena ..Jaise tumhe apne Dad se sneh hai ..Main bhi apne pariwaar se bahut pyar karta hoon "

Nikunj ne senti maahol ko hasi mazaak me badalne ki koshish ki aur kaafi hadd tak safal bhi raha ..Tanvi ka maatha chhoom kar usne use saahas diya aur dono usi hotel ki taraf chal pade jahan unke pyar ka izhaar hua tha

Vidaayi ke waqt dono ki ankhen namm thi jaise aaj se nahi sadiyon se dono ek doosre ki tadap ko mehsoos kar rahe hon ..Tanvi ne apni car li aur ghar nikal gayi ..Wahin Nikunj ne socha agar shopping karni hi hai to kal dono shaitaano ko saath me mall le jaayega ..Jis se dono dil khol kar apni pasand ki khareed - daari kar saken

Yahi sochta hua wo bhi apne ghar pahuch gaya ..Kammo ka gift samhaal kar usne wardrobe me rakh diya taaki akele me mom ke chehre par aayi khushi mehsoos kar sake

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Doosri taraf Deep apne office me baitha mann hi mann Tanvi ko kos raha tha ..Shayad ye uske utaavle pann ki galti thi jiske chalte usne Tanvi ko rasta dikha diya apne khush - haal ghar ka

" Chaahe kuch bhi karna pade ..Wo chhinaal mere ghar ki bahu nahi banegi ..Lekin kaise ..Agar Nikunj ko rokta hoon to 10 sawaal uth sakte hain ..Halaaki ghar ka aakhiri faisla mere hi haatho me rehta hai ..Par wajah kya doonga ..Tanvi kyon ghar ki bahu nahi bann sakti ? "

Sochte - sochte uska sar ghoomne laga aur iska ilaaj wo apne saath le kar baitha tha ..Poore do din se sharaab hi thi jiski madad se wo khud par kaabu banaaye hua tha

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At Jeet office :-

Tanvi khush hoti huyi Jeet ke chamber me enter huyi

" Dad I love you so much "

Tanvi ne Jeet ki baahon me haath daal kar kaha ..Wo laptop par kuch kaam kar raha tha ..Uske peechhe khadi ho kar Tanvi uske gaalo ko chhomne lagi

" Love you too beta ..Kaisa laga Nikunj ..Hope tere type ka hoga "

Jeet ne Laptot se haath hata kar Tanvi ko apni god me bitha liya aur baari - baari kayi baar uske hontho ko apni jeebh se tar karne laga

" Dad aaj to maza aa gaya ..I'm so happy ..But...... "

Itna bol kar Tanvi chhup ho gayi aur kas kar Jeet ko apni baahon me jakad liya ..Jeet bhi hairaan hua ek ek dum se Tanvi ke badle reaction se

" What happened baby ..Udaas kyon ho gayi ..Main bhi bahut khush hoon tere liye "

Jeet ne uski peeth par haath pherte huye kaha ..Shayad wo jaanta tha ki Tanvi ke dukhi hone ka kaaran kya hai

" Dad aap akele reh jaaoge ..Fir aap ka khayal kaun rakhega ? "

Tanvi ne apne dil ki baat use bataayi aur Jeet ko apni gardan par uske ansoo feel hone lage

" Hey hey hey ..Champ tu roti achhi nahi lagti ..Main kuch na kuch hal nikaal lunga ..Mujhe bhi to dukh hoga apni beti se bichhadne ka ..Chal uth aur ghar chalte hain "

Use rota dekh Jeet ko laga jaise wo bhi ro dega ..Isse pehle bhi jab - jab dono is situation se guzre saath me dono ne ek doosre ko rone se roka tha ..Apna dil halka kiya tha

" Ok ..Main face wash kar ke aati hoon "

Tanvi uski god se utar kar wash room ki taraf jaane lagi ..Jeet furti me apni chair se utha aur Tanvi ke haath ko pakad kar use apni baahon me kaid kar liya ..Agle hi pal ek beti ke ansoon uske Dad ke gale se neeche utarne lage ..Jeebh baahar nikaal kar usne Tanvi ke mulaayam gaalo ko chaahtna shuru kar diya ..Tanvi ko jaane kyon sharam ka ehsaas hua aur wo uski mazboot pakad se azaad hoti huyi wash room ki taraf daud gayi

" You naughty aap bahut bigad gaye ho ..Aaj ghar chal kar aap ki khabar leti hoon "

Itna keh kar Tanvi ne wash room ka gate lock kar diya

Baahar parking se car nikal kar Jeet ne Office main gate se Tanvi ko pick kiya aur Car me gear daalne laga

" Dad 1 min. "

Tanvi ke kehne par usne gear nutral kar diya

" Haan bolo "

Jeet ne Tanvi ke chehre par aati sharaarat dekh kar kaha

Tanvi :- " Aaj ek shart lagaate hain "

Jeet :- " Shart ..Kaisi shart beta "

Tanvi :- " Haar - Jeet ki "

Jeet :- " Par shart hai kya ..Bataaogi tabhi to lagaunga "

Tanvi :- " No dad pehle haan kahiye "

Tanvi apni zid par ad kar boli

Jeet :- " Achha lekin Jeetne waale ko kya milega "

Tanvi :- " Promise me ..Baat se nahi paltoge "

Jeet :- " Ok done "

Jeet ne vada kar diya

Tanvi :- " Agar main jeeti to aap meri ek khaawhish ko poora karoge aur haari to main aap ko ek gift doongi "

Tanvi ke baahar aate daant dekh Jeet ko samajh aa gaya ki ye Tanvi ki nayi nautanki hai

Jeet :- " Karna kya hoga aur teri khwaahish kya hai ? "

Jeet ne poochha to Tanvi kisi gehri soch me pahuch gayi ..Bahut sochne ke baad uske moonh se nikla

Tanvi :- " Intercourse "

Jeet :- " No way Tanvi ..Main nahi khelunga "

Jeet ne turant na main apna sar hila diya ..Oral sex ke liye usne Tanvi ko kabhi nahi roka tha lekin chudaayi wo kisi haal me nahi karta

Maana controling ki ek seema hoti hai ..Nanga janaana jism agar roz aap ke saamne pada ho tab bhi aap pichhle 5 saalo se khud par sabar rakhe hon ye bahut badi baat hai ..Jeet chaahta to Tanvi ka kunwaara pann enjoy kar sakta tha lekin apni beti ke future ka soch kar khud par kaabu banaaye rakhe tha

Tanvi :- " Oh c'mon Dad ab aap mukar nahi sakte "

Tanvi ne sad sa chehra bana liya ..Ziddi to wo bachpan se thi

Jeet :- " To bataao shart kya hai ? "

Bet lagaane se pehle ye to pata chal jaana chaahiye ki akhir khel kaun sa khelna hoga

Tanvi :- " Pehle isi baahar nikaalo "

Tanvi ne khush hote huye turant hi uske pant par haath rakh diya ..Jeet bhochhaka ho kar uski shaqal dekhne laga

" Tu karna kya chaahti hai ..Beta hum ghar par nahi open me hain "

Jeet ne uska haath apne pant ke button se hataya jise Tanvi unlock kar chuki thi

" Dad highway se chaliye ..Kisi ko kuch pata nahi chalega ..Waise bhi front mirror ko chhod kar to poore sheeshe kaale hain "

Tanvi ne pant ki zip neeche kheech kar kaha ..Is waqt wo office main gate par the ..Jeet driving seat par aur Tanvi uske bagal ki seat par apne ghuton ke bal baithi thi aur uska face Jeet ki taraf tha

" Haan lekin tu karna kya chaahti hai meri maa "

Ghabra kar Jeet ne uske haath apne pant se hata diye

" Dad main aap ka lund choosungi ..Aap car chalaana ..Agar aap bina cum kiye ghar tak pahuch gaye to aap jeete aur aap ka gift aap ko mil jaayega ..Lekin agar main jeet gayi aur aap ko ghar pahuchne se pehle jhadwa diya to shart ke mutaabik aap aaj mere saath intercourse karoge "

Tanvi ne phir se pant par apna haath rakh kar kaha

" Tanvi paaglo jaisi zid mat kar ..Agar kisi ko pata chal gaya ki car ke andar kya chal raha hai to gadbad ho jaayegi ..Ek aur baat accident bhi ho sakta hai "

Jeet ne use samjaane ki koshish ki

" Dad isi liye to keh rahi hoon highway se chalte hain ..Main city se jaane par 13 km ka rasta cover karna padta hai ..Highway se 17 km + 1 km city ka ..Kisi ko kuch pata nahi chalega "

Tanvi ne uski brief par se baithe lund ko tatol kar kaha

" Maan Tanvi..... "

Jeet ne jaise hi bola Tanvi roothne ke andaaz me seat par seedhi baith gayi

" Haar se bachhne ke 10 bahaane hain aap ke paas ..Seedha - seedha kyon nahi kehte main jeet jaungi ..Dad itna bhi control nahi bachha aap ke andar ki shart laga sako ..Max 15 min ki to baat hai "

Tanvi ne Jeet ki dukhti rag par haath rakh diya ..Kuch bhi ho ek mard ko uski mardaangi sab se pyari hoti hai ..Chaahe har ilzaam sehen kar sakta hai lekin ye katayi nahi ki ' Wo ab mard nahi raha '


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