एक पुरुष और दो महिलाएं अध्याय 10
दीपा ने शरमाते हुए अपनी सलवार के नाडे को खोलना शुरू कर दिया….और फिर सोनू ने अपने सारे कपड़े उतार कर दीपा की सलवार को पकड़ कर निकाल दिया….अब नीचे दीपा के बदन पर वाइट कलर के कच्छि थी….सोनू ने फिर से चार पाई पर चढ़ते हुए दीपा की टाँगो को घुटनो से पकड़ कर फेला दिया…..”दीपा देखो तुम्हारी कच्छि तो पूरी गीली हो गई है….” सोनू ने दीपा की कच्छि के ऊपेर से दीपा की चूत को दबाते हुए कहा….
दीपा: सीईईईईईईईई सोनू प्लीज़ ऐसे मत कहो ना….?
सोनू: सच ये देखो मेरे उंगली भी कैसे गीली हो गई…..
सोनू ने अपनी उंगली जिस पर दीपा की चूत से निकला हुआ कामरस लगा हुआ था…दीपा को दिखाते हुए कहा….दीपा ने शरम कर दूसरी तरफ अपने फेस को घुमा लिया…सोनू ने दीपा के कच्छि के इलास्टिक में हाथ डालते हुए उसे नीचे की तरफ सरका दिया और फिर उसकी कच्छि को निकाल कर नीचे फेंक दिया….और फिर से दीपा की टाँगो को फेलाते हुए उसकी चूत का गुलाबी लबलबाते हुए छेद को देखने लगा….दीपा ने शरमाते हुए अपने दोनो हाथ अपनी चूत के आगे रख लिए…..
सोनू: ये क्या है….?
दीपा: तुम ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे शरम आती है…?
सोनू: अगर देखूँगा नही तो तुम्हारी चूत मैं मेरा लंड कैसे जायगा…
दीपा: धात ऐसी बात क्यों कर रहे हो….
सोनू: (दीपा के हाथो को पकड़ कर हटाते हुए) सही तो कह रहा हूँ….
और अगले ही पल सोनू ने अपने लंड को पकड़ कर लंड के सुपाडे को दीपा के दहकती हुई चूत के छेद पर लगा दिया….सोनू के लंड के गरम सुपाडे को अपनी चूत पर महसूस करते ही दीपा ने सिसकते हुए कांपना शुरू कर दिया…उसकी कमर काँपते हुए ऐसे हिल रही थी…जैसे वो अपनी चूत को खुद ही सोनू के लंड के सुपाडे से रगड़ रही हो….”सीईईईई सोनू उंह डालो ना अंदर…..” दीपा ने सिसकते हुए बुद्बुदाया…..सोनू ने अपने लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर सेट किया और फिर आगे की ओर झुकते हुए धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को चूत के छेद पर दबाने लगा….लंड का सुपाडा दीपा की पनाई हुई चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा…..
जैसे ही सोनू के लंड का मोटा सुपाडा दीपा की चूत के छेद में घुसा तो दीपा का बदन एक दम से अकड़ गया….”आइईए मम्मी दीपा ने सोनू के बालो को कस्के पकड़ते हुए चिल्लाते हुए कहा….”दर्द हो रहा है क्या…..”
दीपा: हां पर थोड़ा सा….
सोनू: अंदर करू….
दीपा: (सिसकते हुए) हाआँ पूरा अंदर कर दो…..
सोनू के लंड का सुपाडा दीपा की चूत के छेद में फँसा हुआ था….सोनू ने दीपा की टाँगो को उठा कर अपने कंधो के ऊपेर रख लिया….और फिर आगे की ओर झुकाते हुए दीपा के कंधो को पकड़ कर एक ज़ोर दार धक्का मारा……सोनू का लंड दीपा की चूत की दीवारो को चीरता हुआ उसकी बच्चेदानी से जा टकराया…..दीपा की तो मानो जैसे साँस ही रुक गई हो….उसकी आँखे ऊपेर को चढ़ गई….दीपा ने अभी चिल्लाने को मूह खोला ही था कि, सोनू ने लपकते हुए दीपा के होंटो को अपने होंटो में भर कर चूसना शुरू कर दिया….और उसके कंधो से हाथ हटा कर उसके दोनो चुचियों को ज़ोर -2 मसलने लगा….
सोनू का लंड दीपा की चूत की गहराइयों में उतर कर फँस सा गया था...सोनू ने अब दीपा के होंटो को छोड़ कर उसकी चुचियों को मसलते हुए चूसना शुरू कर दिया था..2 मिनिट में ही दीपा एक दम गरम हो गई थी….और उसने अपनी गांद को ऊपेर की ओर उठाते हुए सोनू के लंड पर अपनी चूत को दबाना शुरू कर दिया था…
सोनू समझ चुका था कि, दीपा की रस निकालने वाली मशीन अब पूरी तरह गरम हो चुकी है…..उसने दीपा की चुचियों से अपना मूह हटाया और घुटनो के बल बैठते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….दीपा मस्ती में आकर अपने सर इधर उधर पटकने लगी….जैसे सोनू के लंड का सुपाडा उसकी बच्चे दानी से जाकर टकराया तो दीपा अपनी चूत को ऊपेर की ओर उछाल देती…और उसकी चूत सोनू की जाँघो की जड़ों से टकरा कर ठप-2 के आवाज़ पैदा करती……
सोनू: अहह मेरी रानी बोल कैसा लग रहा है…
दीपा: उंह सीईईईईईई ओह हाइी सोनू बहुत मज़ा आ रहा है….
सोनू: दीपा तुम बिकुल रजनी की तरह मेरा लंड अपनी चूत में ले रही हो….
दीपा: (सोनू की बात सुन कर और गरम होने लगी) सच सोनू मम्मी भी अपनी चूत में ऐसे ही लंड पेलवाती है….
सोनू: हां दीपा ऐसे ही वो भी अपनी गान्ड को ऊपेर उछाल कर अपनी चूत को मेरे लंड पर मारती है….
दीपा: (ये सुन कर एक दम मदहोश हो जाती है…उसके दिमाग़ में एक छवि सी बन जाती है रजनी की वो कैसे अपनी गान्ड को ऊपेर उठा उठा कर सोनू के लंड को अपनी चूत में लेती है…..और यही सब सोचते हुए दीपा और मदहोश होकर अपनी गान्ड को किसी चुदेल रांड़ की तरह सोनू के लंड पर अपनी चूत को पटकने लगती है…..) ऐसे ही लेती है मम्मी तुम्हारा लंड सोनू……
सोनू: हां ऐसे ही….
और फिर तो जैसे सोनू को ऐसे जोश आया कि, जैसे वो पहली बार किसी की चूत मार रहा हो…वो अपना पूरा लंड बाहर निकाल-2 कर दीपा की चूत में ठोकना शुरू कर देता है.. दीपा सोनू के हर धक्के से सिसक उठती है….”बहुत गरमी है ना तेरी चूत में ले साली देख अपने यार के लंड का कमाल….साली अब तो तुझे रोज चोदुन्गा मैं…बोल चुदवायेगि ना मुझसे रोज…..”
दीपा: हां रोज मर्वाउन्गि अपनी चूत ओह्ह्ह्ह सोनू मुझी से शादी कर लो…मुझे सदा के लिए अपनी बना लो….रोज तुमसे अपनी चूत मरवाना चाहती हूँ…रोज आ ईज़ी सुनो ना मुझे अपनी लुगाई बनाओगे ना…
सोनू: हां मेरे जान रोज तेरी चूत को ऐसे ही अपने लंड और पानी से भरुन्गा… और तुझसे शादी भी करूँगा…
दीपा: जीए मैं भी अपनी चूत के पानी से आपके लंड को रोज नहलाउन्गि…… ह हाइी ओह माइ गेयैयी मम्मी अह्ह्ह्ह….
दीपा का बदन एक दम से काँपने लगा….सोनू भी पूरे जोश में घस्से मार-2 कर दीपा को नीचे से पानी पानी कर रहा था…और अगले ही पल सोनू के लंड ने अपनी पानी की बरसात दीपा की चूत में कर दी…जैसे ही दीपा को अपनी चूत में सोनू का उबलता हुआ लावा महसूस हुआ दीपा एक दम से तड़प्ते हुए झड़ना शुरू कर दिया. दोनो गहरी साँसे ले रहे थे एक दूसरे से चिपके हुए, अभी उनकी साँसे भी दुरस्त नही हुई थी कि रूम का दूर एक दम धडाम की आवाज़ करता हुआ खुल गया.
दीपा और सोनू एक दम हैरानी से डोर की ओर देखते है तो उनकी साँसे अटक जाती है….
सोनू और दीपा के चेहरे का रंग दरवाजे की दहलीज पर खड़े शख्स को देख कर एक दम से उड़ चुका था....डोर पर चन्डीमल खड़ा था....जो शायद घर पर किसी काम से आया था...एक नौकर को अपनी जान से भी ज़्यादा प्यारी बेटी के साथ इस हालत में देख कर उसका खून खोल उठा....उसने आगे बढ़ कर सोनू को उसकी बनियान से पकड़ कर घसीटते हुए चारपाई से नीचे गिरा दिया...."साले हराम के पिल्ले तेरी ये जुर्रत कि हम जैसे उँचे लोगो की इज़्ज़त पर हाथ डाले.....साले आज नही बचेगा तू मेरे हाथ से....चल साले पहले तो अपने कपड़े पहन..."
उधर दीपा अपने बदन को चादर से ढके हुए सहमी सी चारपाई पर बैठी थी.....चन्डीमल ने एक ज़ोर दार लात सोनू के पैट में दे मारी...."चल साले पहन अपने कपड़े....." सोनू दर्द से एक दम बिलबिला उठा....उसने जल्दी से अपना पजामा पहना....चन्डीमल ने उसे उसके बालो से पकड़ कर बाहर की तरफ घसीटा और फिर उस रूम का डोर बंद करते हुए, सोनू की तरफ मूड कर उस पर थप्पाड़ों के बरसात कर दी....
पर तीन चार थप्पड़ खाने के बाद सोनू का खून भी खोल उठा...और उसने चन्डीमल के चेहरे पर एक ज़ोर दार घूँसा दे मारा....चन्डीमल चकरा कर वही गिर पड़ा....सोनू के घूँसे से वो एक दम बोखला गया था. "ओह्ह भीमे कालू जल्दी अंदर आओ...." चन्डीमल ने अपने आप को संभाल कर खड़े होते हुए कहा....बाहर से दो पहलवान टाइप आदमी दौड़ते हुए अंदर आ गए....." क्या हुआ सेठ जी...." उन दोनो ने चन्डीमल की बिगड़ी हुई दशा देख कर पूछा....
चन्डीमल: इस हराम के जने को बाहर ले जाओ.....साले ने हमारे घर की इज़्ज़त को उछाला है....छोड़ना नही इसे...जाओ साले के हाथ पैर बाँध कर तांगे में डालो मैं अभी आता हूँ.....
उन दोनो पहलवानो के आगे अब भला सोनू की क्या चलती.....उन दोनो ने सोनू को बुरी तरह घसीटते हुए बाहर लेजाना शुरू कर दिया...उनके जाने के बाद चन्डीमल ने रूम का डोर नॉक किया...पर जब डोर ना खुला तो चन्डीमल डोर को धकेल्ता हुआ अंदर जा घुसा...अंदर दीपा अपने कपड़े पहन चुकी थी....और सहमी सी एक कोने में बैठे हुए सूबक रही थी....चन्डीमल ने उसके बालो को पकड़ कर खेंचते हुए खड़ा किया....अपनी जान से भी ज़्यादा प्यारी बेटी को....
जिस पर हाथ उठाना तो दूर चन्डीमल ने गुस्से में आकर चिल्लाया भी नही था....चन्डीमल ने एक ज़ोर दार थप्पड़ दीपा के गाल पर दे मारा... फूलों से नाज़ुक कली थी वो....थप्पड़ से उसका होन्ट कट गया...और पतली सी लकीर उसके होंटो से बहने लगी....
अपनी बेटी के चेहरे पर खून देख कर अगले ही पल चन्डीमल का दिल पसीज उठा...पर उसका गुस्सा शांत नही होने वाला था...."दीपा तुमने अपने बाबा के साथ धोखा किया....क्या कमी रह गई थी हमारी परवरिश में...." चन्डीमल और वहाँ नही रुकना चाहता था...इसलिए वो वहाँ से बाहर आ गया....
जब चन्डीमल बाहर पहुँचा तो उसके आदमियों ने सोनू के हाथ पैर रस्सी से बाँध कर उसे तांगे में नीचे लिटाया हुआ था...." क्या करना है इसका सेठ जी...." चन्डीमल ने एक बार सोनू की तरफ देखा और बोला... "चलो इसका क्या करना है....ये हम कर्नल साहब के सामने इसे लेजा कर सोचेंगे....
फिर चन्डीमल आगे वाले तांगे में बैठ गया....उसके पीछे वाले तांगे में वो दोनो आदमी और सोनू था...कुछ ही देर में वो आर्मी सेंट में पहुँच गए....वहाँ से वो सोनू को लेकर सीधा कर्नल थॉमस के पास पहुँचे....जब चन्डीमल ने ये सारी बात थॉमस को बताई..तो थॉमस ने चन्डीमल को कहा कि, इसको मारा तो नही जा सकता....पर इसे बागी साबित करके मैं काल कोठरी में सड़ने के लिए डाल सकता हूँ.....
चन्डीमल ने थॉमस से रिक्वेस्ट करते हुए कहा कि, ये लड़का फिर कभी सूरज की रोशनी ना देख पाए. तभी जाकर उसके मन को तसल्ली मिल्लेगी.... उधर घर पर जब सीमा और बेला वापिस पहुँची तो उनके पड़ोस में रहने वाली औरत भाग कर उनको घर के मुख्य द्वार पर ही रोक लिया.
औरत: रजनी क्या हुआ है तुम्हारे घर पर....?
रजनी: क्या हुआ...मैं तो अभी कांति ताई से मिल कर आ रही हूँ....
औरत: अभी कुछ देर पहले सेठ जी आए थे....वो सोनू को बाँध कर ले गए हैं....
ये बात सुनते ही दोनो की साँसे एक दम से फूल गई...दोनो दौड़ती हुई अंदर आई और जैसे ही वो दीपा के रूम में पहुची तो दीपा की हालत देखते ही उनके हाथ पैर काँपने शुरू हो गए....
सीमा: (दीपा को अपनी बाहों में भरते हुए) दीपा दीपा क्या हुआ दीपा सोनू को कहाँ लेकर गए है तुम्हारे बाबा....
दीपा: (रोते हुए) पता नही माँ....
सीमा: पर हुआ क्या था.....?
दीपा: वो बाबा ने मुझे और सोनू को....(दीपा ने ज़ोर ज़ोर से रोना शुरू कर दिया.....)
सीमा ये सुन कर और खोफ़ज़दा हो गई कि, चन्डीमल ने ये सब देख लिया है....और वो उसे ज़रूर ये सवाल करेगा कि, वो दीपा को सोनू के साथ घर में अकेला छोड़ कर क्यों गई.....
दूसरी तरफ सोनू को सेंट्रल जैल में बागी करार करते हुए काल कोठारी में डाल दिया था....चन्डीमल के दिल को जैसे सकून मिला था....अब वो जल्द से जल्द घर जाना चाहता था...पता नही अब उसके दिमाग़ में क्या चल रहा था....
चन्डीमल जैसे ही घर पहुँचा तो उसे बेला और रजनी दोनो दीपा के रूम में मिल गई…. चन्डीमल का गुस्सा सातवें आसमान पर था….उसने अंदर आते ही रजनी को पकड़ लिया. और दो तीन तमाचे उसके मूह पर दे मारे…..”साली छीनाल तेरी हिम्मत कैसे हुई दीपा को घर में अकेला छोड़ कर जाने की….बोल अगर दीपा तेरे पेट से पैदा हुई होती तो, इसे घर में उस नौकर के साथ अकेला छोड़ कर जाती……आज जो भी हुआ है सब तेरी वजह से हुआ है……
ये कहते हुए चन्डीमल बेला की तरफ पलटा…”और छिनाल तुम तू भी ध्यान से सुन ले…. अगर ये बात बाहर पहुँची तो मैं तेरे और तेरे सारे खानदान की खाल खिंचवा लूँगा…..” बेला चन्डीमल का ये रूप देख कर एक दम से डर गई….”नही नही सेठ जी….मैं भला ऐसे क्यों करूँगी…मेरे भी तो बेटी है….और बेटी की इज़्ज़त क्या होती है मैं अच्छे से जानती हूँ….”
चन्डीमल ने एक बार फिर से रजनी को घूरा और बाहर चला गया…उस दिन घर में मातम सा महॉल बना रहा….दूसरी तरफ सोनू को सेंट्रेल जैल में भेज दिया गया था…..
दिन पर दिन बीत रहे थे…..पर सोनू का रजनी और बेला को कुछ पता नही लग सका था….उन दोनो ने पता लगाने की बहुत कॉसिश की, पर कही से भी कुछ हाथ नही लग रहा था….सोनू कहाँ है ये सिर्फ़ चन्डीमल और उसके वफ़ादार दो आदमी जानते थे…..दूसरी तरफ जैल में सोनू की मुलाकात एक रवि नाम के शख्स के साथ हुई…..रवि अपने इलाक़े का नामी चोर था…..एक दो कतल के केस भी उसपर हुए थे. पर कतल के जुर्म कभी साबित नही हो पाए थे……
एक दिन सोनू से एक सिपाही ने आकर कहा कि, उससे कोई मिलने आया है…..जैसे ही सोनू ने ये सुना तो उसके दिल में एक आस सी जगी…..और वो उस सिपाही के साथ चल पड़ा…जब वो मीटिंग रूम में पहुँचा तो उसकी दूर की रिस्तेदारी में उसका चाचा वहाँ खड़ा था….उसे देखते ही सोनू के आँखे भर आई. उसके चाचा ने उसे गले से लगा लिया…..”चाचू मुझे यहाँ से बाहर निकालो…..मैं यहा नही रहना चाहता…..” सोनू रोते हुए कहा…..
मुकेश: सोनू पहले तू चुप कर…….
सोनू: माँ और बाबू जी कैसे है….? (सोनू ने सुबक्ते हुए अपने माँ बाप के बारे में पूछा..)
मुकेश: (उदास होते हुए) सोनू तुमने ये सब क्या कर दिया बेटे…..पता है तुम्हारी इस हरक़त की वजह से तुम्हारे उस सेठ ने तुम्हारी माँ बाबू जी को भी जैल में डलवा दिया है……
सोनू: (जैसे ही सोनू ने ये खबर सुनी…सोनू की आँखे गुस्से से लाल हो गई) क्या ये उसने बहुत बुरा किया है….मैं उसे छोड़ूँगा नही……
मुकेश: तुम तो चुप ही रहो सोनू…..ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है……
सोनू: हां जानता हूँ कि ये सब मेरी वजह से हुआ है…..और उसकी सज़ा भी मुझे मिल रही है….पर फिर उसने माँ बाबू जी के साथ ये सब क्यों किया…..
मुकेश: देख बेटा हम भी बहुत मुस्किल से बचे है…..हम ने तो ये सब भी बोल दिया था कि, हम लोगो को तुम्हारे और तुम्हारे माँ बाबू जी कोई लेना देना नही है……तब जाकर हमारी जान छूटी है.. और अगर हम भी जैल में बंद हो जाते….तो पीछे कोई भी कार्यवाही करने वाला नही रहता……
सोनू: तो अब आप क्या कर लोगे…..
मुकेश: देख बेटा मेरी इतनी हैसियत नही है कि, उस सेठ के सामने टिक पाऊ….पर हां मैं तुम्हारे मा बाबू जी के लिए उसे मिन्नत ज़रूर करूँगा…..
सोनू: ठीक है चाचा जी….कम से कम माँ बाबू जी को तो जैल से निकलवाइए….
उसके बाद उसका चाचा उसे झूठा सा दिलासा देकर चला गया…..वो चन्डीमल से उसकी दुकान पर जाकर मिला….बहुत समझाया बहुत मिन्नते की पर चन्डीमल की सेहत पर कोई असर नही पड़ा…उधर जैल में रवि के कारनामो से अंजान सोनू की दोस्ती उससे गहरी होती जा रही थी….रवि हट्टा कट्टा लड़का था… यहाँ तक के जैल का जेलर भी उससे डरता था….उसकी हाइट 6, 4 इंच थी…..चौड़ा सीना…..जब कभी ललकारता तो ऐसे लगता जैसे कोई शेर दहाड़ रहा हो….
रवि की सज़ा ख़तम होने के कगार पर थी……और जब से उसे पता चला था कि, सोनू उस शहर के सबसे अमीर आदमी यानी कि चन्डीमल के घर पर नौकर था….तब से वो बातों बातों में उसे चन्डीमल के बारे में जानने की कॉसिश करता था…..कि चन्डीमल कब घर जाता है….कब दुकान पर आता है….उसके साथ कॉन कोन होता है…घर पर कोन होता है….धीरे-2 ये सारी बातें उसने जैल में बैठे-2 ही सोनू से धोखे से पता कर ली थी…..फिर उसकी रिहाई का दिन भी आ गया….रवि जानता था कि, चन्डीमल अंग्रेज़ो की खुशामद करके इतना अमीर बना है…..भले ही वो बागी नही था….पर अंग्रेज़ो से उसको बहुत नफ़रत थी….
और उन आदमियों से ख़ासतोर पर जो अंग्रेज़ो का साथ देते थे….रवि ये भी जानता था कि, कैसे चन्डीमल ने सोनू को झूठे इल्ज़ाम में फँसाया है……जैसे ही वो जैल से बाहर आया…उसने चन्डीमल के ऊपेर नज़र रखनी शुरू कर दी……दूसरी तरफ चन्डीमल ने इस दौरान अपनी दुकान के पास वाली खाली दुकान को बहुत ही महँगे दामो पर बेचा था….रवि का प्लान सॉफ था….लूट करो और फरार हो जाओ…..क्योंकि इस बार वो बड़ा हाथ मारना चाहता था और इस सहर से बहुत दूर जाकर नई जिंदगी शुरू करना चाहता था. इसलिए उसने सोच रखा था…कि अपने आगे आने वाली हर रुकावट को वो जड से उखाड़ देगा…..
रवि अपना प्लान बना चुका था….उसको ये भी मालूम था कि, चन्डीमल के साथ हमेशा दो पहलवान रात को उसको उसके घर छोड़ने जाते थे….रात को रास्ता बहुत सुनसान हो जाता था….जिस दिन चन्डीमल को बेची हुई दुकान के पैसे मिले उसी दिन चन्डीमल ने दुकान की कमाई में से भी बहुत से पैसे निकाल लिए थे….और वो घर की तरफ चल पढ़ा…..जैसे दोनो तांगे सुनसान रास्ते पर आए…..उन तान्गो में से एक घोड़ा बिदक गया….जिस पर पहलवान बैठे हुए थे….वो रास्ते में ही खड़ा हो गया…..
टाँगे वाले ने उस पर बहुत चाबुक बरसाई पर घोड़ा टस से मस नही हुआ….चन्डीमल का तांगा भी रुक गया था…..चन्डीमल ने तांगे पर बैठे बैठे आवाज़ दी….”अर्रे ओह भीमा क्या हुआ रे….” भीमा तांगे से उतर कर चन्डीमल के पास आया….और बोला…”पता नही सेठ जी घोड़े को क्या हो गया है…चल ही नही रहा…..”
चन्डीमल: जाओ जल्दी देखो उसे क्या हुआ है….ये मुसबीत भी आज ही आनी थी……
भीमा फिर से पीछे वाला तांगा एक तरफ चल पड़ा….दोनो तान्गो में 20-22 फुट का फाँसला था…दूसरा पहलवान कालू भी नीचे उतर आया था..और तांगे वाला भी….अभी भीमा उस तरफ जा ही रहा था कि, उस तांगे के पीछे अंधेरे में घोड़े की टापो की आवाज़ आनी शुरू हो गई….कोई घोड़े पर सवार तेज रफ़्तार से उनकी तरफ बढ़ता चला आ रहा था….अंधेरा बहुत था….इसलिए कुछ भी ठीक से दिखाई नही दे रहा था…..तभी कुछ दूरी पर अंधेरे में से एक साया प्रकट हुआ….कोई घोड़े पर सवार बहुत तेज़ी से उनकी तरफ बढ़ रहा था….
भीमा और कालू दोनो ही उस इलाक़े के नामी पहलवानो में से एक थे…..इसलिए कभी किसी का खोफ़ नही खाते थे…..और इस बात से अंज़ान कि उनकी तरफ उनकी मौत दौड़ती हुई आ रही है,….दोनो बिना हीले वही खड़े उसे देखने लगे….जैसे ही वो घोड़ा उनसे 10 फुट की दूरी पर पहुचा…तो उस घुड़सवार ने अपने पीछे से एक मोटा सा लट्ठ निकाल लिया और लहराते हुए उन दोनो की तरफ बढ़ा. इससे पहले कि दोनो सम्भल पाते, उस घुड़सवार ने अपना मोटा लट्ठ गुजरते हुए भीमा की कॅनपॅटी पर दे मारा…..भीमा उसी पल ढेर हो गया…..वो घुड़सवार फिर आगे से पलटा…और इस बार उसके निशाने पर कालू था….पर तब तक कालू सम्भल चुका था….
उसने तांगे से अपनी लाठी निकाल ली…..अब दो पहलवान आपस मे भिड़ने के लिए तैयार थे….अपनी जान बचाने के लिए…वो घुड़सवार फिर से उसकी तरफ आया….और जैसे ही वो कालू के पास पहुचा उसने चलते हुए घोड़े से कालू के ऊपेर छलाँग लगा दी…..कालू को इस बात का अंदाज़ा नही था कि, वो शख्स घोड़े से उसपर छलाँग लगा देगा…..कालू एक दम से हड़बड़ा गया….और अगले ही पल दोनो नीचे ज़मीन पर घुथम घुथा हो चुके थे….उधर चन्डीमल की गान्ड से ये सब देखते हुए फॅट कर हाथ में आ चुकी थी…..” अर्रे तुम चलो…” उसने तांगे वाले को लात मारते हुए कहा….” तांगे वाले की तो चन्डीमल से ज़्यादा फॅट रही थी……
इसलिए उसने अपने तांगे को पूरी रफ़्तार से दौड़ा दिया…..उधर रवि कालू के ऊपेर सवार उस पर घूँसो और लातों की बरसात कर रहा था….और रवि जैसे ख़ूँख़ार और तगड़ाए इंसान के सामने कालू जैसे पहलवान की भी एक ना चल रही थी……मुक्के बरसाते हुए, रवि के हाथ में तीन चार किलो का एक पत्थर आ गया…और उसने उसकी कॅनपॅटी पर दे मारा….कालू भी वही ढेर हो गया…. कालू और भीमा दोनो बेहोश हुए थी…..मरे नही थे....
रवि अपने घोड़े की तरफ भागा और और घोड़े पर सवार होकर चन्डीमल का पीछे करने लगा…..और एक मील आगे जाते ही उसने चन्डीमल को रास्ते में घेर लिया….और अगले ही पल चन्डीमल उसके घुटने के नीचे था….चन्डीमल ने उससे मुकाबला करने के कॉसिश की….पर रवि के सामने वो कहाँ टिक पाता. रवि ने उसको मार मार कर अध मरा कर दिया….और उसके सारे पैसे लेकर फरार हो गया….
चन्डीमल बेसूध कच्ची सड़क पर पड़ा हुआ था….पर होनी को शायद कुछ और ही मंज़ूर था…. दूसरी तरफ से अंग्रोजो के केंट में रसद देने जा रहे ट्रक आ रहे थे…..रास्ते में उनकी हेड लाइट खराब हो गई थी….और इसलिए अंधेरे में उन्हे कुछ दिखाई नही दे रहा था…वो धीरे-2 ट्रक चलता हुआ हॉर्न बजाते हुए आगे बढ़ रहा था….पर बेहोश हो चुके लोगो को हॉर्न के आवाज़ कहाँ सुनाई देती है….चन्डीमल के दोनो पैरो के ऊपेर से ट्रक गुजर गया…..चन्डीमल बेहोशी की हालत में ही तड़प उठा….उधर आगे कालू और भीमा दोनो उस ट्रक के नीचे आकर शिकार हो गए….ड्राइवर दारू भी पिए हुआ था…
सुबह अपने काम पर जा रहे आदमी ने चन्डीमल को अधमरी हालत में देखा तो उसने शोर मचाया.. सड़क पर आ जाते लोगो को इकट्ठा किया….चन्डीमल को उस एरिया के सभी लोग जानते थे……इसलिए वो उसे जल्द ही केंट के हॉस्पिटल में लाया गया…कालू और भीमा रात को ही दम तोड़ चुके थे…..उधर रजनी दीपा और बेला को भी ये बात पता चल गई तो वो भी हॉस्पिटल में पहुचि….ये खबर जब सीमा को पता चली तो वो भी अपनी ससुराल से अपने माँ बाप के साथ वापिस आ गई…..अगले दो महीने तक चन्डीमल हॉस्पिटल में रहा….चन्डीमल के पैर ट्रक के नीचे आने से बुरी तरह पिस गए थे. इसलिए उन्हे काटना पड़ा…..रवि की मार ने उसके बाजू की हड्डी तोड़ दी थी…..चन्डीमल की अब उमर हो गई थी…इसलिए उस हड्डी के जुड़ने का भी कोई चान्स नही था…
2 महीनो बाद चन्डीमल हॉस्पिटल से डिसचार्ज होकर घर आया….पीछे से उसके कुछ वफ़ादार नौकरो ने दुकान की ज़िम्मेदारी अच्छे से निभाई थी…..सीमा जो अभी एक दम जवान थी…अब उसे चन्डीमल के साथ अपना जीवन बिताना बेमानी लग रहा था….इसलिए उसके भाई ने चन्डीमल से उसके डाइवोर्स की बात कर ली…..चन्डीमल ने मन पर बोझ रख कर सीमा को डाइवोर्स दे दिया…..
अब चन्डीमल की दुनियाँ उसके कमरे तक सिमट कर रह गई थी…..वो ना कही आता और ना कही जाता. बस अपने कमरे में पड़ा रहता…..रजनी शाम तक दुकान पर बैठने लगी थी…..चन्डीमल ने अपनी सारी जायदाद सीमा और दीपा के नाम कर दी थी…..
एक दिन रजनी जब दीपा को सुबह उसके रूम में उठाने गई तो उसने देखा दीपा ज़मीन पर बेहोश पड़ी हुई थी….उसके मूह से झाग निकल रहा था….उसका रंग नीला पड़ चुका था….और पास में ही चूहो को मारने वाली दवा पड़ी हुई थी……ये देख रजनी एक दम से घबरा गई….और उसने एक दम से बेला-2 चिल्लाना शुरू कर दिया….बेला जब रूम में आई तो सामने नज़ारा देख उसके भी हाथ पैर सुन्न पड़ गए….रजनी बाहर की तरफ भागी तो शोर सुन कर आस पास के लोग भी भागे चले आए….
तांगे से जल्द ही दीपा को हॉस्पिटल पहुचाया गया….जब चन्डीमल को ये बात पता चला कि, दीपा ने जहर खा लिया है…तो वो एक दम से टूट सा गया…..और बिलख-2 कर रोने लगा…..पड़ोस के कुछ लोग उसे दिलासा देने के लिए उसके पास बैठे थी……चन्डीमल मन ही मन सोच रहा था कि, मैं कैसा बदनसीब बाप हूँ….उधर मेरी बेटी के जान ख़तरे में है और मैं उसको देखने के लिए भी नही जा सकता…रह रह कर उसके दिमाग़ में बुरे-2 ख़याल आ रहे थे…..
शाम ढल चुकी थी….और चन्डीमल की बेबसी उसे अंदर ही अंदर ही खाए जा रही थी….तभी बाहर से दौड़ता हुआ एक आदमी अंदर आया….उसकी साँसे फूली हुई थी…..उसने हान्फते हुए कहा. “सेठ जी मैं अभी हॉस्पिटल से आ रहा हूँ…..सेठानी ने कहलवाया है कि, सेठ को बोलना कि दीपा अब ख़तरे से बाहर है…..फिकर करने की कोई ज़रूरत नही……”
ये खबर सुन कर चन्डीमल को राहत की साँस आई……”माँ माँ मुझे अपनी बेटी के पास जाना है…..भाइयो मुझे अपनी बेटी के पास ले चलो….” चन्डीमल ने सबके सामने हाथ जोड़ते हुए कहा….तो लोगो ने उसे बिस्तर से उठा कर बाहर लेजा कर तांगे पर बैठाया और उसके साथ हॉस्पिटल पहुचे…..रात का वक़्त हो चला था….दीपा को होश आ चुका था….चन्डीमल को दीपा से मिलने के इजाज़त भी मिल गई थी….
दो आदमी उसे उठा कर वॉर्ड में ले गए…..और उसे दीपा के पास एक चेर पर बैठाया….चन्डीमल ने सीमा को छोड़ कर सब को बाहर जाने के लिए कहा……सबके बाहर जाने के बाद, चन्डीमल ने रुन्वासि से आवाज़ में कहा….. “बेटी तुमने ये सब क्यों किया…..तुम्हे नही पता तुम्हारे पापा तुम्हे कितना प्यार करते है….अर्रे पगली मैं तो पहले से ही मरा हुआ हूँ…..और तूने ये काम करके मुझे और मार देना था…..मैं तेरे बिना नही रह सकता….अगर तुझे कुछ हो जाता तो मैं भी इस दुनिया में नही रह पाता…..”
दीपा: (दूसरी तरफ फेस करके….) और मैं उसके बिना नही रह सकती….
जैसे ही उसने ये बात सुनी, चन्डीमल एक दम से ठंडा पड़ गया….वॉर्ड में सन्नाटा सा छा गया…. छन्डीमल नज़रे झुकाए बैठा था….15 मिनिट बाद डॉक्टर अंदर आया और उसने कहा कि, अब दीपा को आराम करने देना चाहिए…..”फिर से लोगो ने चन्डीमल को उठाया और बाहर लाकर एक बेंच पर बैठा दिया….उसकी दुकान पर काम करने वाला एक आदमी भी वहाँ ही खड़ा था…..चन्डीमल ने उसको अपने पास बुलाया और कहा कि थॉमस को बुला लाए……
वो आदमी वहाँ से चला गया और थोड़ी देर बाद कर्नल थॉमस भी वहाँ आ गया…..चन्डीमल ने थॉमस से सोनू और उसके घर वालो को छोड़ने के लिए कहा…..थॉमस ने कहा कि, वो कल सुबह ही उनको रिहाः करवा देगा……थॉमस के जाने के बाद, चन्डीमल ने रजनी से बात की और बताया कि कल सोनू को जैल से रिहाः कर देंगे….तुम उसे कल जाकर जैल से ले आना….रजनी ये बात सुन कर बेहद खुस थी…. अगले दिन सुबह रजनी तांगे पर जैल पहुचि और थोड़ी देर बाद सोनू को रिहाः कर दिया गया….रजनी ने उसे अपने साथ चलने को कहा तो सोनू ने सॉफ मना कर दिया……
रजनी: क्या बात है तुम साथ क्यों नही जाना चाहते…..
सोनू: अब मेरा वहाँ कोई काम नही है….उस इंसान ने मेरे माँ बाबा को बहुत दुख दिया है…. अब मैं वहाँ जाकर उसकी शकल भी नही देखना चाहता…..
रजनी: देखो सोनू मुझे पता है कि, तुम सेठ से बहुत नाराज़ हो…..पर दीपा के बारे में तो सोचो. उसने तुम्हारे लिए जहर खा कर आत्महत्या करने की कॉसिश की है….
सोनू: मैं वो सब नही जानता…..अगर वो मुझसे इतना ही प्यार करती थी…..तो फिर उसने उस समये अपने बाप से क्यों नही कहा जब उसका बाप मुझे जनवरो की तरह पीट रहा था…..अब मैं अपने घर जाकर पहले अपने माँ बाबा से मिलना चाहता हूँ…..
ये कह कर सोनू वहाँ से निकल स्टेशन पर पहुच गया और ट्रेन पकड़ अपने सहर जा पहुँचा वहाँ पर उसके माँ बाप को पहले से जैल से बाहर निकलवा दिया गया था…..जब सोनू अपने घर पहुचा तो उसके पिता ने उसे अपने घर के अंदर नही आने दिया……कहा कि, उसने उनके नाम पर कलंक लगा दिया है. अब उसके घर में उसके लिए कोई जगह नही है….सोनू एक दम हताश हो चुका था….उसे समझ में नही आ रहा था कि, अब वो क्या करे कहाँ जाए….
जब उसे किसी तरफ कोई भी रास्ता ना मिला तो उसे बेला की याद आई……ये सोच कर कि, बेला उसे अपने घर में रहने देगे……वो फिर से ट्रेन पकड़ कर गाओं पहुचा उस समय रात का वक़्त हो चला था…रात के करीब 9 बज रहे थे……बेला सेठ के घर से काम निपटा कर आ चुकी थी….रात के 9 बजे अचानक से दूर पर नॉक हुई तो बेला डोर की तरफ बढ़ी….और बाहर पहुच कर आवाज़ दी “ कॉन है…”
सोनू: मैं हूँ सोनू……(सोनू धीरे से बोला…..)
सोनू की आवाज़ सुनते ही बेला का चेहरा एक दम से खिल उठा…उसने डोर खोला और सोनू को अंदर आने को कहा…..सोनू अंदर आ गया…..बेला ने डोर बंद किया…..और उसे पीछे कमरे में ले आई…..” कहाँ था तू…….इतनी रात को कहाँ से आ रहा है…..” बेला ने उसे चारपाई पर बैठने को कहा….
“घर गया था….”
बेला: फिर
सोनू: कुछ नही उन्होने मुझे अपने घर के अंदर नही जाने दिया…..
ये कहते हुए सोनू की आँखे भर आई…..बेला ने उसके सर को अपनी बाहों के घेरे में लेते हुए उसके सर को अपने सीने में दबा लिया……”कोई बात नही…..अभी तुमसे वो नाराज़ होंगे…..इसलिए शायद उन्होने गुस्से में कह दिया होगा….जैसे जैसे समय गुजरेगा वैसे-2 सब ठीक हो जायगा…..आज सुबह मालकिन ने बताया था कि, तुम उनके घर वापिस नही आना चाहते तो मेने ये उम्मीद ही छोड़ दी थी कि, मैं तुम्हे कभी दोबारा देख भी पाउन्गि……..चल जा हाथ मूह धो ले…..मैं तेरे लिए खाना बना देती हूँ…..”
सोनू: नही मैने खाना रास्ते में ही खा लिया था…..
बेला: अच्छा तू रुक मैं नीचे बिस्तर लगा लेती हूँ…..फिर नीचे आराम से लेट करके बात करेंगे…..
उसके बाद बेला ने नीचे दो बिस्तर बिछाए….और दोनो नीचे लेट गए……”देख सोनू अब तो सेठ भी मान गया है…..और मुझे लगता है कि, वो जल्द ही तेरी शादी दीपा से करवा भी देगा…तू भी अब मान जा….” सोनू ने बेला की तरफ करवट बदली……”नही काकी…..जिस इंसान की वजह से मेरे माँ बापू को इतनी ज़िल्लत उठानी पड़ी…..मैं उस इंसान को कभी माफ़ नही करूँगा….और मैं उस घर में कभी नही जाउन्गा…..”
ऐसे ही बातें करते हुए, दोनो कब सो गए…..पता ही नही चला….अगली सुबह बेला तैयार होकर जब सेठ के घर पहुचि तो उसने रजनी को बताया कि, सोनू रात से उसके घर पर है तो रजनी वहाँ एक पल भी ना ठहरी और बेला के साथ उसके घर आ गई…….सोनू को देखते ही उसने बाहों में भर लिया. और फिर उसके साथ चारपाई पर बैठते हुए बोली…..”देख सोनू अब गुस्सा थूक दे….और घर चल….दीपा भी हॉस्पिटल से घर आ गई है…..पर वो ना कुछ खाती और ना ही कुछ पीती है…. देख तेरे बिना वो कैसे जिंदा लाश बन कर रह गई है…..”
सोनू: नही मैं नही जाउन्गा अब उस घर में….उस इंसान ने मेरे और मेरे घर वालो की बहुत बेज़्जती की है…..
रजनी: हां मैं जानती हूँ सोनू पर उस इंसान को उसके करमो के सज़ा मिल चुकी है…..अब वो अपाहिज होकर चारपाई पर बैठा है…..
सोनू: (एक दम से चोन्कते हुए) क्या…..?
रजनी ने सारी बात सोनू को बताई रजनी और बेला के बहुत समझाने और मनाने पर सोनू मान गया...और बेला और रजनी के साथ चन्डीमल के घर आ गया....जब वो दीपा के रूम में पहुचा तो दीपा सोनू को देख कर एक दम से रोते हुए बेड से उठी और सोनू के गले आ लगी.....कुछ पल वो सोनू की बाहों में रोती रही...सोनू ने उसे दिलासा दिया कि, वो अब कही नही जायगा......पर सोनू अपने मा बाप के साथ हुई बेज़्जती नही भूला था....वो चन्डीमल को ऐसा सबक सीखाना चाहता था कि, उसके दिल का बोझ हल्का हो सके....
दीपा को खाना खिलाने के बाद सोनू बाहर आ गया....और पीछे के रूम की तरफ जाने लगा....."कहाँ जा रहे हो...." रजनी ने उसे पीछे से आवाज़ देकर रोक लिया...."वो पीछे जा रहा हूँ....."
रजनी: आज से तुम वहाँ पीछे नही रहोगे,,,,,आज से वो जगह तुम्हारी नही है....आज से तुम इस घर के अंदर रहोगे....मेरे साथ वाले कमरे में... मेने सारा प्रबंध कर रखा है.....
रजनी ने सोनू की तरफ मुस्कराते हुए देख कर कहा....और उसका हाथ पकड़ कर उसे कमरे में ली गई...."देखो आज से ये तुम्हारा कमरा है...ठीक है ना....किसी और चीज़ की ज़रूरत तो नही...." सोनू ने रूम में चारो तरफ नज़र दौड़ाई......ये कमरा घर में सबसे बड़ा कमरा था....जो पहले सीमा का था....उसमे एक नया बेड और बाकी सारा समान था....
रजनी: सोनू अब तुम खुश हो ना....देखो सेठ ने तुम्हारी और दीपा की शादी के लिए हां भी कह दी है.....शादी के बाद तुम इस घर के नौकर नही दामाद हो जाओगे....ये सारी दौलत और जायदाद तुम्हारे होगी. भूल जाओ जो हुआ.....
सोनू: नही मैं नही भूल सकता....मेरे साथ जो हुआ वो तो चाहे मैं भूल ही जाउ....पर जो ज़िल्लत मेरे माँ बाबा ने उठाई है...वो मैं कभी नही भूल सकता....
रजनी: सोनू कोई तो रास्ता होगा ही ना....तुम मुझे बताओ तुम क्या चाहते हो...किस तरह तुम्हारे दिल को ठंडक पहुचे गी.....
सोनू: उसने मुझे इस लिए पीटा था कि, उसने मुझे दीपा के साथ वो सब करते हुए देख लिया था.....अब मैं उसके सामने ही सब कुछ करना चाहता हूँ.....
रजनी: तुम पागल तो नही हो गए....देख सोनू दीपा सेठ की बेटी है....और दीपा ये सब कभी नही करेगी.....वो तुमसे प्यार करती है...और अगर तुम ही ये हरक़त करोगे तो उसके दिल पर क्या बीतेगी...कोई लड़की अपने बाप के सामने....नही सोनू तुम ठीक नही बोल रहे.....
सोनू: तो ठीक है दीपा नही तो ना सही.....तुम चुदवाओगि उसके सामने.....?
रजनी: सोनू तू तो जानता है कि, मैं पेट से हूँ....पर फिर भी मैं तुम्हारी ये ख्वाहिश पूरी ज़रूर करूँगी....पर उसके लिए मुझे कुछ वक़्त चाहिए.....
सोनू: कितना.....वरना मैं ज़्यादा दिन यहाँ नही रुक पाउन्गा....
रजनी: सिर्फ़ दो दिन दो दिन चाहिए मुझे....पर मुझसे वादा करो कि उसके बाद तुम दीपा से शादी करो गे और हमेशा हमारे पास रहोगे....
सोनू: ठीक है मैं वादा करता हूँ.....
रजनी: ठीक है तुम आराम करो...मैं तुम्हारे लिए नाश्ता भिजवाती हूँ.....
ये कह कर रजनी बाहर चली गई....अब उसके सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो चुकी थी....और अंदर ही अंदर कही ना कही...अपने ऊपेर हुई ज़्यादतियो को लेकर उसके दिल मे भी चन्डीमल के लिए नफ़रत भरी हुई थी. वो खुद भी चन्डीमल को नीचा दिखाना चाहती थी.....
घर का काम निपटा कर रजनी दीपा को लेकर सहर चली गई….क्योंकि दीपा का हॉस्पिटल में चेकप होना था….और उसके बाद उसे दुकान पर भी कुछ देर के लिए जाना था…..इधर रजनी के जाने के बाद बेला घर की सफाई के काम में लगी हुई थी. बेला जब झाड़ू लगाने सेठ चन्डीमल के रूम में पहुचि तो, उस समय उसने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी कमर मे फँसा रखा था….जब बेला ने नीचे झुक कर झाड़ू लगाना शुरू किया तो बेला की मोटी गान्ड पीछे बैठे चन्डीमल के आँखो के सामने आ गई…..
चन्डीमल का लंड उसकी धोती मे कुलाँचे भरने लगा….चन्डीमल को अपाहिज होकर इस बिस्तर पर पड़े दो महीने हो चुके थी….और तब से चन्डीमल के जिंदगी मे बस यही सुख रह गया था कि, जब बेला आकर उसके रूम मे झाड़ू पोछा करती है, तब बेला के मोटे-2 चुतड़ों और उसकी गुदाज़ चुचियों के दर्शन चन्डीमल को हो जाते थे…और चन्डीमल अपने ऊपेर ओढी चद्दर के अंदर हाथ डाल कर अपने लंड को सहलाने लगता…..फिर बेला के जाने के बाद वो मूठ मार कर अपने मन की भडास निकाल लेता….
आज जब बेला झाड़ू लगाते हुए, चन्डीमल के बेड के पास पहुचि, तो चन्डीमल अपने आप पर काबू ना रख सका…और हाथ बढ़ा कर बेला की गान्ड को पकड़ कर मसल दिया….”अहह” बेला एक दम से चोन्कते हुए सीधी हो गई….और चन्डीमल की तरफ खा जाने वाली नज़रों से देखते हुए बोली….. “ये क्या कर रहे हो सेठ जी…”
छन्डीमल: वो मैं बेला इधर आ ना….देख ना तू जब भी मेरे कमरे मे आती है….मेरा बुरा हाल हो जाता है…..देख इस ग़रीब पर कुछ तरस खा….
बेला: (गुस्से से) देखो सेठ जी नौकर हूँ आपकी गुलाम नही….आगे से मेरे साथ ऐसी वैसी हरक़त की तो मालकिन को बता दूँगी…..
छन्डीमल: अर्रे मेरी जान नाराज़ क्यों होती है…इधर तो आ…एक बार सिर्फ़ एक बार मुझे अपनी जवानी का रस चखा दे….तो जो बोलगी जितना पैसा माँगेगी वो मैं तुम्हे दूँगा.. सिर्फ़ एक बार…..
बेला: मुझे क्या रंडी समझ रखा है आने दो मालकिन आगे से मैं नही आती तुम्हारे यहाँ काम करने…..
बेला ने वही झाड़ू फेंका और रूम से बाहर आ गई…जैसे ही बेला रूम से बाहर आई तो उसने देखा कि दीवार के साथ सोनू खड़ा हुआ था….जो शायद अंदर जो भी हुआ था….उसने देख लिया था…अभी बेला ने कुछ खोलने के लिए मूह खोला ही था कि, सोनू ने उसके मूह पर हाथ रख कर चुप रहने को कहा….और फिर उसका हाथ पकड़ कर अपने रूम में ले गया…..दोनो रूम में कुछ देर बाते करते रहे…इधर चन्डीमल बेला को गालियाँ दे रहा था….
उधर बेला थोड़ी देर बाद सोनू के रूम से निकल कर चन्डीमल के रूम के तरफ चली जाती है….बेला को अपने रूम मे आता देख चन्डीमल अपना मूह दूसरी तरफ कर लेता है….”सेठ जी मैं ना जाने गुस्से मे क्या बोल गई आपको…मुझे माफ़ कर दीजिए…” बेला ने चन्डीमल की कमर के पास बेड पर बैठते हुए कहा….मैं आपकी हालत समझती हूँ मालिक…..जानती हूँ आप इस कमरे मे पड़े-2 ऊब जाते है…. पर मैं ही पागल थी कि, आपको ग़लत समझ बैठी….”
बेला ने चन्डीमल की जाँघ पर हाथ रखते हुए कहा…..तो चन्डीमल को ऐसा लगा जैसे उसने नंगी तारो को छू लिया हो…उसी पल चन्डीमल के लंड ने ज़ोर का झटका खाया. छन्डीमल की दोनो टांगे घुटनो से नीचे कट गई थी….पर लंड कभी -2 थोड़ी देर के लिए खड़ा हो जाया करता था….”अर्रे पगली तू चिंता मत कर….मुझे तुम्हारी बात का बुरा नही लगा….मैं तो तेरे हुश्न का शुरू से दीवाना हूँ….” ये कहते हुए चन्डीमल ने अपना एक हाथ बेला के ब्लाउस के ऊपेर से उसकी चुचि पर रख दिया और उसे ज़ोर-2 से दबाने लगा….”आहह सेठ जी….क्या कर रहे है….धीरे करिए ना…” बेला ने चन्डीमल के लंड को धोती के ऊपेर से पकड़ते हुए कहा…
जैसे ही बेला ने चन्डीमल के लंड को पकड़ा चन्डीमल एक दम से सिसक उठा…उसने ब्लाउस के ऊपेर से ही बेला की चुचियों को मसलते हुए चूसना शुरू कर दिया…”हाइए सेठ जी और ज़ोर से मीजिए ना मेरी चुचियों को आ आप तो सच मे बहुत अच्छा मसलते है…” बेला ने सिसकते हुए चन्डीमल के लंड को और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया….चन्डीमल तो जैसे मस्ती के सागर मे गोते खा रहा था. उसने अपने काँपते हुए हाथों से बेला के ब्लाउस के हुक्स खोलने शुरू कर दिए…
पर जल्दबाजी मे उससे एक भी हुक नही खुल पाया था….बेला एक दम से खड़ी हो गई….और खुद ही अपने ब्लाउस के हुक्स खोल कर अपनी 38 साइज़ के चुचियों को बाहर निकाल दिया….बेला के बड़ी-2 गुदाज चुचियाँ देखते ही चन्डीमल का लंड फटने को आ गया….अगले ही पल बेला ने अपनी साड़ी भी अपने बदन से अलग कर दी…अब उसके बदन पर खुला हुआ ब्लाउस और पेटिकॉट ही रह गया था…जिसके नीचे पेंटी तक नही थी…..जैसे ही बेला बेड पर दोबारा बैठी…चन्डीमल ने एक हाथ उसकी चुचि और दूसरा हाथ पेटिकॉट पर रखते हुए उसे ऊपेर उठाते हुए चुचियों को मसलना शुरू कर दिया…..
जैसे ही बेला का पेटिकॉट उसकी कमर तक आया…वैसे ही चन्डीमल का दिल ये देख कर उछल कर बाहर आने को हुआ की, बेला ने नीचे पेंटी नही पहनी हुई है….अगले ही पल चन्डीमल के हाथ मे बेला के मोटी फांको वाली फूली हुई चूत थी…जिसे देख कर वो पागलो की तरह उसकी चूत को मसल रहा था….”बेला तुम्हारी चूत तो देख कैसे पानी छोड़ रही है….मुझे तो पहले से ही पता था…तेरे जैसी गुदाज औरत की चूत इतना पानी छोड़ती ही होगी….पर तू कच्छि नही पहनती क्या….
बेला: (चन्डीमल की धोती को हटा कर उसके लंड को पकड़ते हुए) हम ग़रीब लोग है सेठ जी रोटी मुश्किल से मिलती है तो कच्छि कहाँ से ख़रीदती…
चन्डीमल: (बेला की चूत मे अपनी उंगलयों को डाल कर अंदर बाहर करते हुए) आह तू फिकर ना कर…तुझे सब कुछ मैं लाकर दूँगा….तू बस मेरा ध्यान रखा कर समझी….अपने सेठ को खुश रखेगी तो कभी किसी चीज़ कमी नही आने देगा तुझे तेरा ये सेठ……
बेला: सच कह रहे हो सेठ जी…आप मुझे लाकर दोगे ना कच्छि….?
छन्डीमल: हां मेरी जान…..और तुझे पहनाउन्गा भी मैं अपने हाथों से….चल अब जल्दी कर आज और चखा दे अपनी चूत का रस मेरे लंड को देख कब से तडप रहा है….
बेला बेड पर चढ़ि और चन्डीमल की कमर के दोनो तरफ अपने पाँव रख कर धीरे-2 नीचे की और आते हुए, चन्डीमल के लंड को पकड़ और अपनी चूत की फांको पर रगड़ना शुरू कर दिया…”आह ओह्ह बेला तेरी चूत तो बहुत गरम है….डाल ना जल्दी….” छन्डीमल को जैसे ही अपने लंड के छोटे से सुपाडे पर बेला की चूत की गरमी का अहसास हुआ चन्डीमल ने एक दम सिसकते हुए अपनी आँखे बंद कर ली और बेला की चुचियों को पकड़ कर मसलने लगा….
बेला ने चन्डीमल के लंड को पकड़ कर तेज़ी से अपनी चूत की फांको पर रगड़ना शुरू कर दिया….तभी चन्डीमल का बदन एक दम से अकड़ गया….और चन्डीमल सीसियाते हुए झड़ने लगा….चन्डीमल के लंड ने दो तीन झटके खाए…और कुछ कतरे पतले से पानी के उसके सुपाडे के छेद से बाहर आकर सुपाडे पर ही लग गए…चन्डीमल की साँसे एक दम से उखाड़ चुकी थी….उसने आँखे खोल कर अपने ऊपेर बैठी बेला की तरफ देखा और मुस्कराते हुए बोला….”बेला तेरी चूत सच मे आग का समुंदर है… देख ना मेरा लंड तो अंदर भी जा नही पाया…..”
बेला: (मूह बनाते हुए) हां देख रही हूँ…खुद तो हल्के हो लिए…अब मेरी चूत मे जो आग लगाई है उसका क्या करू….
छन्डीमल: तू घबरा क्यों रही है मेरी जान दो मिनिट रुक तो सही….फिर देखना कैसे तेरी चूत मे लंड डाल कर तेरी चूत की गरमी निकालता हूँ…
बेला: (चन्डीमल के सिकुडे हुए लंड को हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए) पर सेठ जी मुझे तो नही लगता कि ये मेरी चूत की गरमी निकाल सकता है….
छन्डीमल: तू थोड़ी देर इसे हिला कर खड़ा तो कर…फिर देखना इसका कमाल…
बेला बेड से नीचे उतर गई….और बेड के किनारे खड़े होकर झुकते हुए चन्डीमल के लंड को हिलाना शुरू कर दिया…”उफ़फ्फ़ ये नही खड़ा होगा सेठ जी….” बेला ने चन्डीमल की तरफ देखते हुए कहा…”होगा मेरे जान थोड़ा सबर तो कर….” तभी एक दम से रूम का डोर खुला और डोर पर सोनू को खड़े देख कर चन्डीमल की गान्ड तो फटने को आ गई…..”ये क्या हो रहा है….” सोनू ने अंदर आते हुए कहा….”आने दो रजनी मालकिन को…बेला मैं तुम्हारी कर्तूते बताता हूँ उसको….” सोनू ने चन्डीमल की तरफ देखते हुए कहा…..
बेला: (नाटक करते हुए) नही नही सोनू मालकिन को कुछ ना बताना….वरना वो मुझे काम से भी निकाल देंगी….देखो इसमे मेरी कोई ग़लती नही है….ये तो सेठ जी मुझसे करवा रहे थे…मत बताना….सेठ जी कहिए ना सोनू को…..
छन्डीमल: (एक दम से हड़बड़ाते हुए) हां-2 सोनू बेटा रजनी को कुछ मत कहना… देख मैने तेरे और दीपा के रिश्ते के लिए हां भी कर दी है अब तो….देख अब तू पुरानी बातें भूल जा….
सोनू: पुरानी बातें तो मैं भूल ही गया हूँ….पर अब इस नये किस्से का करना है…(सोनू ने चन्डीमल और बेला की तरफ घुरते हुए कहा….)
छन्डीमल: बेटा तू जो कहे वो मैं करने को तैयार हूँ…पर रजनी को कुछ ना कहना…..
सोनू: वो तो मैं तुम्हारी पत्नी को बताउन्गा ही…..साले तूने मुझे जैल भिजवाया तो मैं चुप रहा….पर तूने मेरे माँ बाप को जेल भेज कर बहुत ग़लती कर दी है…..
बेला: देख सोनू बेटा….
सोनू: चुप कर मैं किसी का बेटा वेटा नही हूँ…..
बेला: अच्छा-2 ठीक है सोनू मैने कुछ भी जान बूझ कर नही किया…सेठ जी तो मेरे साथ ज़बरदस्ती कर रहे थे….
छन्डीमल: (बेला की बात सुन कर चन्डीमल की और गान्ड फॅट जाती है….) ज़बरदस्ती मेने कब करी है ज़बरदस्ती तुम्हारे साथ छीनाल….साली खुद तू चुदने को तैयार हुई थी पैसे के लिए….
सोनू: तू चुप कर बाई….और तू साली ये तेरे साथ ज़बरदस्ती कर रहा था…..?
बेला: हां सोनू सच कह रही हूँ कसम से…..
सोनू: चल ठीक है…..मैं भी यही कहूँगा कि, सेठ तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती कर रहा था…पर ये बात अब तुम्हारी मालकिन तक ज़रूर पहुचेगी ….
बेला: सच सोनू ये मेरे साथ ज़बरदस्ती ही कर रहा था…..
सोनू: चुप साली रांड़….मैं देख रहा था….कि क्या ज़बरदस्ती हो रही थी तुम्हारे साथ….अब अगर भलाई चाहती है तो जो मैं कहता हूँ वही कर….
बेला: जो तुम कहो…
सोनू: चल साली अब ये बाकी के कपड़े भी उतार दे…..
बेला ने एक बार चन्डीमल की तरफ ऐसे देखा जैसे उसके पास अब और कोई चारा ना बचा हो…..उसने अपने ब्लाउस और पेटिकॉट को उतार फेंका…अब बेला एक दम से नंगी खड़ी थी….सोनू ने भी अगले ही पल अपने सारे कपड़े उतार दिए…जैसे ही सोनू का लंड बाहर आया तो उसे देख कर चन्डीमल की आँखे एक दम से फेल गई…सोनू के लंड के सामने उसे अपना लंड किसी बच्चे के लंड जैसा लग रहा था….करीब 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड देखना तो दूर चन्डीमल ने शायद कभी सुना भी नही था….
सोनू: चल साली नीचे बैठ और मेरा लंड चुस्स……
बेला चन्डीमल की तरफ देखते हुए नीचे बैठ गई….और सोनू के लंड को पकड़ कर मूह में लेकर चूसने लगी…चन्डीमल फटी आँखो से हैरत के साथ ये सब देख रहा था…सोनू का लंड मुँह मे लेने के लिए बेला ने अपना मूह बहुत ज़्यादा खोला हुआ था…और सोनू के लंड के सुपाडे को अपना सर आगे पीछे हिलाते हुए तेज़ी से चूस रही थी….5 मिनिट बाद सोनू ने अपने लंड को बेला के मूह से बाहर निकाला और उसे कंधो से पकड़ खड़ा करते हुए कहा…..
सोनू: चल अब झुक कर कुतिया बन जा और सेठ का लंड चूस…
बेला बेड के किनारे पर अपनी कोहानियों को रख कर झुक गई…और चन्डीमल के मुरझाए हुए लंड को पकड़ कर मूह में भर कर चूसना शुरू कर दिया….सोनू ने बेला के पीछे आते हुए, उसकी मोटी गान्ड को पकड़ कर फैलाया…और अपने लंड के मोटे सुपाडे को बेला की चूत के छेद पर रखते हुए एक ज़ोर दार धक्का मारा….उसी पल बेला ने चन्डीमल के लंड को मूह से बाहर निकला और एक दम से चीख पड़ी,…..”उईइ माँ मर गई अरीयी……फाड़ दी मेरे भोसड़ी तूने सोनू….धीरे आह अहह अह्ह्ह नही आह सोनू धीरे कर ना अह्ह्ह्ह धीरे पेल ना अपना यीए लौडा आह हाइए माइई री……”
जैसे -2 सोनू के लंड के झटके तेज होते जा रहे थी….वैसे-2 बेला की सिसकियाँ पूरे रूम मे गूँज रही थी…और सेठ चन्डीमल का लंड जो एक दम सिकुड चुका था…बेला की चूत मे अंदर बाहर हो रहे सोनू के मुन्सल को देख कर फिर से खड़ा होने लगा था….उसकी नज़र बेला की फूली चूत पर थी….जिसका छेद सोनू के मोटे लंड से पूरी तरह फेला हुआ था….”हाइी सेठ जी ओह्ह्ह देख ना मेरी भोसड़ी का क्या बना दिया है इस छोरे ने आह सेठ जी गजब री गजब हाइई पूरा अंदर जा रहा है….हाइए मेरी चूत…हाइी हाइए देखो ना कैसे पानी छोड़ रही है….”
बेला ने सिसकते हुए चन्डीमल के लंड को फिर से पकड़ कर हिलाते हुए चूसना शुरू कर दिया…चन्डीमल का लंड फिर से खड़ा हो चुका था….पर चन्डीमल बेबस बैठे रहने के सिवाई अब कुछ कर भी नही सकता था….5 मिनिट बाद सोनू के धक्के हद से ज़्यादा तेज हो गए….और बेला काँपते हुए झड़ने लगी….सोनू ने एक दम से अपना लंड जैसे ही बेला की चूत से बाहर निकाला……बेला उसी पल नीचे फर्श पर पैरो के बल बैठ गई….और उसकी चूत से मूत की मोटी धार तेज सीटी जैसी आवाज़ के साथ बाहर आने लगी….सोनू ने बेला के बालो को पकड़ कर अपने लंड को तेज़ी से हिलाते हुए अपना पानी उसके मूह पर छोड़ना चालू कर दिया….ये देख उधर चन्डीमल के लंड भी तेज सरसाहट हुई….और उसके लंड ने भी पानी छोड़ दिया….
नीचे फर्श पर बेला का मूत चारो तरफ फेल रहा था…सोनू ने झड़ने के बाद. अपने पयज़ामे को पहना और बाहर आ गया….बेला को जैसे ही होश आया उसने अपने कपड़े पहने और सॉफ सफाई की और बाहर आ गई,….पर चन्डीमल की गान्ड अभी भी फट रही थी कि, जब सोनू रजनी को बताएगा तो क्या होगा…..
छन्डीमल की हालत ये सोच -2 कर बुरी हो रही थी कि, अब क्या होगा….उसके बाद से ना तो बेला उसके रूम मे आई थी और ना ही सोनू….रात के 8 बज रहे थे…बेला खाना लेकर चन्डीमल के कमरे मे आई…..और बेड पर खाना रख कर जैसे ही मुड़ने लगी तो, चन्डीमल ने उसे रोक लिया….”सुनो बेला रजनी आ गई है क्या…” बेला ने चन्डीमल की तरफ देखा और हां मे सर हिला दिया…..
छन्डीमल: उस सोनू के बच्चे ने रजनी से कुछ कहा तो नही…..
बेला: नही अभी तक तो नही…..
छन्डीमल: अच्छा अब तू जा……
बेला रूम से बाहर आ गई….चन्डीमल की ऐसी हालत देख कर उसकी हँसी रुक नही रही थी…..इसलिए वो घर के पीछे की तरफ चली गई…कि कही रजनी को सच में पता ना चल जाए…….दीपा अपने रूम मे थी….और रजनी किचन मे…सोनू किचन मे दाखिल हुआ और रजनी को जो दोपहर मे हुआ सब बता दिया….रजनी भी चन्डीमल की इस हरक़त पर हँसने लगी….और फिर एक दम से चुप हो गई…जैसे बहुत ही गहरी सोच में हो….
रजनी: (थोड़ी देर सोचने के बाद) सोनू तू मुझे सेठ के सामने चोदना चाहता था ना….अब देख मैं अपने पति के सामने ही कैसे तेरा लंड लूँगी….
सोनू: पर तुम तो कह रही थी कि, पैट से हो…….?
रजनी: पैट से हूँ…और देखना उसके सामने तुम्हारा लंड लूँगी….वो भी अपनी गान्ड मे…बोल उसके सामने मेरी गान्ड मारेगा ना…..
सोनू: यही तो मैं चाहता हूँ…..
रजनी: तो ठीक है…फिर आज रात को तैयार रहना……
सोनू: मुझे कॉन सा तैयारी करनी है….तैयारी तो तुम कर लेना….गान्ड के छेद को अच्छे से तैल लगा लेना…देखना कैसे लंड पेलता हूँ तेरी गान्ड मे आज फाड़ कर रख दूँगा….
रजनी सोनू की बात सुन कर हसने लगी…..”पर दीपा का क्या करना है….उसके होते हुए तो कुछ भी नही हो सकता….”
सोनू ने थोड़ी सी चिंता दिखाते हुए कहा….”तू उसकी फिकर ना कर उसका भी इलाज है मेरे पास…...
रात को सब के खाना खाने के बाद, रजनी ने बेला से कहा कि, वो आज रात दीपा को अपने साथ अपने घर ले जाए....रजनी ने अपने प्लान के बारे मे बेला को बता दिया था कि, आज रात घर मे क्या होने वाला है....और उसके लिए दीपा को घर से दूर रखना ज़रूरी था.....दीपा को भी रजनी ने बेला के साथ उसके घर जाने को कहा...क्योंकि रजनी ने कहा था कि, जब तक तुम्हारी शादी सोनू के साथ नही हो जाती तब तक तुम बेला के घर पर रात को सोया करोगी.....
दीपा बेला के साथ उसके घर चली गई....अब रजनी को वो कदम उठाना था....जिसको उठाने के लिए उसे पूरी हिम्मत से काम लेना था...वो एक ग्लास में पानी भर कर चन्डीमल के रूम मे गई....क्योंकि चन्डीमल के दवाई लेने का टाइम हो चुका था.....चन्डीमल के रूम मे दो लॉल्ट्न जल रही थी. जिसे पूरे रूम मे काफ़ी उजाला था.....
रजनी ने चन्डीमल को दवाई दी.....और फिर खाली ग्लास चन्डीमल से लेकर टेबल पर रख कर वापिस आ कर बेड पर बैठ गई....चन्डीमल दोपहर से ही बहुत घबराया हुआ था.....और रजनी को इस तरह पास मे बैठे देख कर चन्डीमल की हालत और पतली हो गई थी....कुछ देर खामोश रहने के बाद रजनी ने चन्डीमल की ओर आँखे निकाल कर देखते हुए कहा.....
रजनी: आज तो आपने हद ही कर दी......कब सुधरोगे तुम......हाथ पैर तुड़वा कर बेड पर बैठे हो...फिर भी अपनी उँची हरक़तों से बाज़ नही आते तुम.....
चन्डीमल: (रजनी की बात सुन कर घबरा गया और हड़बाते हुए बोला. ) म म मेने क्या किया.....?
रजनी: अच्छा अब ये भी मुझे बताना पड़ेगा.....कि तुमने क्या किया.. चल ठीक है तू मेरे मूह से ही सुनना चाहता है तो सुन.....दोपहर को क्या किया तुमने बेला के साथ.....ज़बरदस्ती की उसके साथ....गाओं वाले धक्के देकर हमे बाहर निकाल देंगे.....अगर बेला ने पंचायत मे कहा तो....
चन्डीमल: मेने कोई ज़बरदस्ती नही की उसके साथ सच......
रजनी: बहुत शॉंक चढ़ा है तुम्हे चुदाई का....
चन्डीमल: नही नही ऐसी बात नही है रजनी धीरे बोलो दीपा कही सुन ना ले.....
रजनी: अब तुम्हे दीपा का ख़याल आ रहा है....उस वक़्त तुम्हे दीपा का ख़याल नही आया कि, मेरे एक जवान बेटी भी है.....
चन्डीमल: मुझसे ग़लती हो गई रजनी मुझे माफ़ कर दो...आगे से ऐसा नही होगा.....
रजनी: बहुत शॉंक चढ़ा है ना तुम्हे दूसरो की औरतों को चोदने का... और अगर कोई मेरे साथ ऐसे हरक़त करता तो....
चन्डीमल: धीरे बोल करम्जलि दीपा घर पर है....माफी माँग तो रहा हूँ तुम से.....
रजनी: तुम दीपा की फिकर ना करो...वो बेला के घर पर है उसके साथ... और तुमने जो किया है उसकी सज़ा तो तुम्हे मिलेगे ही....तुमने मुझे धोका दिया है ना....तो सुन मेने भी तुझे आज तक धोके मे रखा है.....
चन्डीमल: क्या कहा तुमने मुझे धोके मे रखा है....पर क्यों...?
रजनी: तुम्हे क्या लगता है कि, तुझ मे बच्चा पैदा करने की ताक़त है नही है ना.....ये मैं भी अच्छे से जानती हूँ और तू भी.....अर्रे औरत की कोख मे बीज डालने के लिए ताक़त होनी चाहिए....तब जाकर औरत दूध से होती है....बच्चा आसमान से नही टपकता.....
चन्डीमल मूह फाडे रजनी की बातों को हैरानी से सुन रहा था..."और तुझे क्या लगता है कि, मेरी कोख मे जो बच्चा है वो तेरा है....." चन्डीमल के चेहरे का रंग पीला पड़ चुका था....."तो किसका बच्चा है तुम्हे पैट मे...." चन्डीमल ने काँपति हुई आवाज़ मे पूछा....
रजनी: मेरी कोख मे सोनू का बीज़ है...मैं उसके बच्चे को जनम दूँगी…..
चन्डीमल: (रजनी की बात सुन कर चन्डीमल गुसे से पागल हो गया…) क्या हरामजादि तू भी उस दो टके के लड़के से चुदवाती फिर रही है…..मैं तुम दोनो को जिंदा नही छोड़ूँगी……
रजनी: हां -2 मार दो हमे…..फिर तुम्हारी बेटी खुद भी आत्म हत्या कर लेगी. और तुम इस कमरे मे तडप-2 कर मरना…….शूकर करो कि ये बात किसी और को नही पता….पूरा गाओं और समाज यही जानता है कि, मेरी कोख मे तुम्हारा बच्चा पल रहा है...और तुम्हारे वंश का नाम इस से आगे बढ़ेगा….और अगर तुम ये चाहते हो कि, सब को पता चले कि ये बच्चा तुम्हारा नही सोनू का है, तो वो भी करके देख लो. लोग मुझ पर नही तुम पर हँसे गे….तुम पर थूकेंगे……
चन्डीमल एक दम से आसमान से जामीन पर आ गिरा…उसे अपने किए हुए सभी बुरे काम अब याद आने लगे थे….”तूने मेरे साथ ऐसा क्यों किया…रजनी…बता ना आख़िर क्या कमी रखी है थी मेने जो तुमने मेरे साथ इतना बड़ा धोका किया….”
रजनी: कमी कॉन सी कमी अर्रे ये पूछ कि कॉन सा सुख दिया है तुमने मुझे….सुनो शुरू से बताती हूँ….जब ब्याह कर आई थी यहाँ पर…..
सबसे पहले मेरी शादी मेरी मरजी के खिलाफ हुई थी…तुमने उस समय मेरे माँ बाप की ग़रीबी का फ़ायदा उठाया था….दूसरी जब इस घर मे आई ही थी कि, तुमने दीपा को मेरी गोद मे थमा दिया…तीसरी जब तुम्हारी माँ जिंदा थी….तब उसने बच्चा ना होने पर मेरे ऊपेर जो ज़ुल्म किए थे….और जिसे देख तुम अपनी आँखे झुका लेते थे….और तो और खुद भी बच्चा ना होने पर मुझे कितना बार पीटा है तुमने….जानवरो की तरह….तीसरी मेरे होते हुए एक और शादी कर ली….
मैने आज तक सिर्फ़ सहा है……पर अब और नही….अब दर्द सहने की तुम्हारी बारी है…मैं कल ही पूरे गाओं मे चीख-2 कर ये बता दूँगी कि, मेरे पैट मे सोनू का बच्चा है….तुम्हारा नही…..और ये भी बता दूँगी….कि तुम शुरू से ही ना मर्द हो…इसलिए सीमा भी तुम्हे छोड़ कर चली गई है…….
छन्डीमल: नही-2 रजनी मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ…..ऐसा वैसा कुछ ना करना… मैं तो पहले से ही मरा हुआ हूँ….अब गाओं वालो के सामने और शर्मिंदा होकर मरना नही चाहता…….
रजनी: तुम्हारे इस तरह हाथ जोड़ने से कुछ नही होगा….तुम्हे तुम्हारी ग़लती के सज़ा मिलेगी…गाओं वालो के साथ-2 तुम्हारी बेटी को भी तुम्हारी करतूतों का पता चल जायगा….
छन्डीमल: नही रजनी मैं मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ…..मैं आगे से इस कोने मे पड़ा रहूँगा….तुम जो भी कहोगी वैसे ही होगा….वैसे भी मेने सब कुछ तो तुम्हारे नाम कर दिया है…..और आगे भी तुम जो करना चाहती हो करो…बस मेरी बेटी को कुछ मत कहना…..
रजनी: ठीक है…..पर सज़ा तो तुम्हे मिलेगी ही……तुमने सोनू को इसलिए जैल भेजा था ना कि तुमने सोनू और दीपा को रंगे हाथों पकड़ लिया था….अब देख तू अपनी आँखो से देखना….तुम्हारी ये पत्नी तुम्हारे उस नौकर के लंड से कैसे अपनी गान्ड चुदवाती है….और हां जो मैं कहूँ वो करना नही तो अंज़ाम बहुत बुरा होगा….
ये कह कर रजनी रूम से बाहर चली गई….चन्डीमल मन ही मन अपनी किस्मत को कोस रहा था….अब उसे अपने किए हुए बुरे कामो पर अफ़सोस हो रहा था…जब तक चन्डीमल के माँ बाप जिंदा थे….तब तक चन्डीमल ने किसी बात की परवाह नही की थी….घर समृद्ध था इसलिए चन्डीमल शुरू से ही बिगड़ चुका था…कम उमर मे ही नशे और रंडीबाजी की लत लग चुकी थी…..30 साल तक होते-2 वो अंदर से एक दम खोखला हो चुका था…..
अब जो भी था..चन्डीमल को इसी तरह जीना था…..पूरे घर मे सन्नाटा छाया हुआ था….तभी उसे रजनी के पैरो मे पहनी हुई पायल की आवाज़ अपने कमरे की तरफ बढ़ती हुई सुनाई दी….सोनू के लंड से सुबह बेला को चुदते देख चन्डीमल फिर से हार्ड हुआ था..और झाड़ा भी था…चन्डीमल को खुद पर हैरानी हो रही थी कि, जैसे ही उसने सुना था कि, रजनी भी उसके सामने सोनू से चुदवाने वाली है…उसके लंड मे उसी पल से सरसराहट शुरू हो गई थी…….
अब रजनी को अपने कमरे की तरफ आता सुन कर चन्डीमल का दिल जोरो से धड़कने लगा था….तभी रजनी रूम मे दाखिल हुई….तो चन्डीमल अपनी आँखे फाडे सामने खड़ी रजनी के हुष्ण को देखता रह गया…रजनी मरून कलर के ब्लाउस और पेटिकॉट मे उसके सामने खड़ी थी…होंटो पर लाल रंग का लिप कलर दूर से ही चमक रहा था….उसका पेटिकॉट नाभि से नीचे बँधा हुआ था…उसका पैट अब बच्चे की वजह से थोड़ा बाहर आ चुका था…और उसका बदन भी भर चुका था….
रजनी रूम मे आई, और चन्डीमल के पास जाकर बेड पर बैठ गई….दोनो कुछ नही बोल रहे थे….थोड़ी देर बाद सोनू एक दम से रूम मे आया….उसने एक बार मुस्कराते हुए चन्डीमल की तरफ देखा और फिर रज़नी की तरफ…रजनी भी सोनू की तरफ देख कर मुस्करा उठी…….सोनू ने रूम का डोर बंद किया…और डोर के पास ही खड़े होकर अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए…कुछ ही पॅलो मे सोनू एक दम नंगा हो चुका था….
उसका आधा तना हुआ लंड उसकी जाँघो के बीच मे झूल रहा था….सोनू बेड की तरफ बढ़ा तो रजनी ने सोनू की तरफ देखते हुए अपने ब्लाउस के बटन खोलने शुरू कर दिए…चन्डीमल ये सब अपनी फेली हुई आँखो से देख रहा था….जैसे जैसे रजनी के ब्लाउस के बटन खुल रहे थे….रजनी की 36 साइज़ की गुदाज़ चुचियाँ जो कि बेहद ही गोरी थी उसकी आँखो के सामने आती जा रही थी…..रजनी ने एक एक करके अपने ब्लाउस के सारे बटन खोल दिए….
रजनी की चुचियाँ बाहर उछल पड़ी…चन्डीमल बुत बना हुआ ये सब देख रहा था… सोनू बेड पर चढ़ा और रजनी के सामने जाकर खड़ा हो गया….रजनी चन्डीमल की कमर के दूसरी तरफ बैठी थी….और सोनू उसके दूसरी तरफ खड़ा था….बीच मे चन्डीमल ये सब अपनी आँखो के सामने होता देख रहा था…सोनू ने अपने दोनो हाथों से रजनी के बालो को जो कि जुड़े मे बँधे हुए थे….उसे खोल दिया…. जैसे ही रजनी के लंबे काले बाल खुले तो उसका हुष्ण और निखर कर सामने आ गया..
फिर सोनू ने उसके खुले हुए बालो मे अपने उंगलयों को फन्साते हुए उसके फेस को अपने लंड पर झुकाना शुरू कर दिया…..रजनी ने एक बार चन्डीमल की तरफ देखा और फिर मुस्कराते हुए सोनू के लंड को पकड़ कर अपने होंटो के पास ले आई…और फिर चन्डीमल की आँखो मे देखते हुए, अपनी जीभ बाहर निकाल कर सोनू के लंड के सुपाडे के चारो तरफ घूमाते हुए चाटने लगी….”अह्ह्ह्ह रजनी मेरे जान…” सोनू ने सिसकते हुए रजनी के सर को कस्के पकड़ लिया…..”आह चुस्स ना मेरी जान….” और फिर रजनी ने सोनू के लंड के मोटे सुपाडे को अपने होंटो में भर लिया और चन्डीमल की ओर देखते हुए अपने सर को आगे पीछे हिलाते हुए उसके लंड के सुपाडे को चूसना शुरू कर दिया…..
छन्डीमल की आँखो के सामने सोनू के लंड का मोटा सुपाडा उसकी पत्नी रजनी के लिपस्टिक लगे लाल होंटो के बीच दबता हुआ अंदर बाहर हो रहा था…और रजनी पूरी मस्ती मे आकर सोनू के लंड के सुपाडे को चूस रही थी….फिर रजनी ने सोनू के लंड से हाथ हटा कर सोनू के बॉल्स को पकड़ कर धीरे-2 मसलना शुरू कर दिया…फिर एक दम से सोनू के लंड को मूह से बाहर निकाला और उस पर थूका और फिर अपने थूक को उसके लंड पर अपने हाथ से फेलाते हुए लंड को मूठ मारने वाले अंदाज़ मे हिलाने लगी…..
जैसे-2 रजनी का हाथ सोनू के लंड पर हिलता….उसके हाथ मे पहनी हुई लाल चूड़ियाँ खनक उठती….ये देख कर चन्डीमल का लंड भी उसके धोती मे सर उठाने लगा था… फिर रजनी ने सोनू के लंड को ऊपेर की तरफ करते हुए उसके पैट से लगा दिया..और अपने सर को उसकी जाँघो के बीच मे झुकते हुए उसके बॉल्स को मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया…..”अहह रजनी ओह्ह्ह्ह हाआँ चुस्स्स वैसे भी बहुत दिन हो गए… तुम्हे मेरे लंड को चूसे हुए…..”
रजनी ने फिर सोनू के बॉल्स को मूह से निकाला और अपने होंटो पर लगे हुए थूक को चन्डीमल की ओर देखते हुए मुस्कराते हुए अपने हाथ से सॉफ करने लगी….सोनू अपने घुटनो को थोडा सा मोड़ कर खड़ा हो गया….और अपने एक हाथ से लंड को पकड़ कर रजनी की दोनो चुचियों के दर्मया रखा तो रजनी ने खुद ही अपनी दोनो चुचियों को पकड़ कर उसके लंड को बीच मे दबा लिया…सोनू ने रजनी के कंधो को पकड़ कर अपने लंड को उसकी चुचियों के बीच मे रगड़ना शुरू कर दिया…
जब सोनू के लंड का सुपाडा रजनी की चुचियों के बीच से ऊपेर की तरफ बाहर निकलता तो रजनी अपने होंटो से उसे चूम लेती….फिर सोनू ने रजनी की ओर देखते हुए उसे इशारा किया तो रजनी मंद-2 मुस्कुराने लगी….और अगले ही पल उसने चन्डीमल की धोती पकड़ कर खोल कर उसके बदन से अलग कर दी….चन्डीमल का लंड भी अब हार्ड हो चुका था…चन्डीमल बेड के पुस्त से पीठ टिका कर बैठा हुआ था…
रजनी चन्डीमल की जाँघो के बीच मे आई….और डॉगी स्टाइल मे आते हुए उसने चन्डीमल के लंड को मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया….सोनू जल्दी से रजनी के पीछे आया….और उसके पेटीकोत को पकड़ कर उसकी कमर पर उठा कर रख दिया.. जैसे ही सोनू की आँखो के सामने रजनी के मोटी गान्ड आई…जो पैट से होने के कारण और मोटी और फेल गई थी….सोनू के लंड ने ज़ोर का झटका खाया…और अगले ही पल सोनू ने ढेर सारा थूक लेकर उसकी गान्ड के छेद पर लगा दिया…फिर अपनी एक उंगली को धीरे-2 रजनी की गान्ड के छेद मे डाल कर अंदर बाहर करने लगा…..
क्योंकि रजनी पहले भी कई बार सोनू से अपनी गान्ड चुदवा चुकी थी….इसलिए उसे ज़्यादा तकलीफ़ नही हो रही थी….फिर सोनू एक दम से अपने घुटनो के बल बैठा और अपने लंड के सुपाडे को रजनी की गान्ड के छेद पर टिकाते हुए अंदर की ओर दबाने लगा…रजनी की गान्ड का छेद धीरे-2 फेलता हुआ सोनू के लंड के मोटे सुपाडे के चारो तरफ फेलता हुआ चढ़ने लगा….और कुछ ही पलो मे सोनू के लंड का सुपाडा रजनी की गान्ड के छेद मे था….
रजनी: (चन्डीमल के लंड को मूह से बाहर निकालते हुए) आह सोनू घुस्स गया…हाई मेरी गान्ड मा री….धीरीए करना सोनू….
जैसे ही चन्डीमल ने सुना कि सोनू का लंड रजनी की गान्ड के छेद मे घुस चुका है तो चन्डीमल के लंड ने ज़ोर से झटका खाया…अगले ही पल सोनू ने एक ज़ोर दार धक्का मारा और अपना पूरा का पूरा लंड रजनी के गान्ड मे पेल दिया…”उंघ अहह” रजनी ने एक दम मचलते हुए चन्डीमल के टट्टो को पकड़ कर मसल दिया……”अह्ह्ह्ह रजनी……धीरे….” छन्डीमल एक दम से सिसक उठा.. उधर सोनू के धक्के शुरू हो गए थे…उसकी जांघे पूरे ज़ोर-2 से रजनी की मोटी गान्ड पर टकरा कर थप-2 की आवाज़ कर रही थी….अब रजनी सिर्फ़ चन्डीमल के लंड को हाथ से पकड़े हुए थी….और अपने आँखे बंद करके मस्ती से सिसिया रही थी….
सोनू ने कुछ धक्को के बाद अपने लंड को रजनी की गान्ड के छेद से बाहर निकाला और खड़ा होते हुए रजनी को दूसरी तरफ घूमने को कहा….रजनी अपनी दोनो टाँगो को चन्डीमल की कमर के दोनो तरफ करके घूम गई…..अब रजनी की फेली हुई गान्ड और चूत चन्डीमल के आँखो के सामने थी….उसकी गान्ड का छेद सोनू के लंड से हुई ठुकाई से लाल पड़ चुका था….और अभी भी थोड़ा सा खुला था….तभी सोनू रजनी के पीछे और चन्डीमल के फेस के आगे आकर खड़ा हो गया…और रजनी के ऊपेर झुकते हुए अपने लंड के सुपाडे को उसकी गान्ड के छेद पर लगा दिया…
इस पोज़ीशन मे चन्डीमल को सोनू का लंड जो कि रजनी की गान्ड के छेद पर भिड़ा हुआ था सॉफ दिखाई दे रहा था….”चल साली अपनी गान्ड पीछे की ओर कर..” सोनू ने रजनी के खुले हुए बालो को पकड़ कर पीछे की तरफ खेंचते हुए कहा तो रजनी ने सीसियाते हुए, अपनी गान्ड को पीछे की ओर धकेलते हुए, सोनू के लंड के सुपाडे पर दबाना शुरू कर दिया….सोनू के लंड का मोटा सुपाडा फिर से रजनी की गान्ड के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा…और अगले ही पल सोनू ने फिर से ज़ोर दार धक्का मारा…..”हाइई सेठ जी मैं मरी….फाड़ दी सोनू ने मेरी गान्ड….”
रजनी ने आग मे तैल डाल दिया था….सोनू अब पूरे जोश में आकर अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा था…गान्ड टाइट होने की वजह से जब लंड अंदर जाता तो रजनी की गान्ड के अंदर हवा प्रेशर के साथ भर जाती….कुछ धक्के लगाने के बाद सोनू ने एक दम से अपने लंड को जैसे ही रजनी की गान्ड के छेद से बाहर निकाला तो रजनी की गान्ड के छेद से हवा पूरे प्रेशर के साथ बाहर आई….और बहुत तेज पर्र्ररर की आवाज़ आई…..जैसे उसकी गान्ड से पाद निकल गया हो…पर ये वो हवा थी..जो लंड के सुपाडे से अंदर भर गई थी…..
ये आवाज़ सुनते ही चन्डीमल का पूरा बदन काँप उठा….”आह मेरी रांड़ ये क्या तेरी तो अभी से….हाहाहा” सोनू ने हंसते हुए कहा…
.”नही मेरे यार ये वो नही था जो तू सोच रहा है….ये तो मेरे गान्ड ख़ुसी से ढोल बजा रही है… ले आजा चल चोद दे अपनी रांड़ की गान्ड को…..
सोनू फिर से झुका और अपना लंड रजनी की गान्ड के छेद अंदर बाहर करने लगा…” आहह ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह हाइई सोनू और ज़ोर से अह्ह्ह्ह फाड़ दे मेरी गान्ड अह्ह्ह्ह अह्ह्ह आहह उन्घ्ह्ह्ह हाइई देख मेरी चूत भी कैसे पानी छोड़ रही है….” रजनी ने अपनी गान्ड को पीछे के और धकेलते हुए कहा…
अगले ही पल सोनू ने रजनी को उसके कंधो से पकड़ा और अपना लंड गान्ड में डाले-2 ही उसे खड़ा करके चन्डीमल की तरफ घुमा दिया….अब रजनी चन्डीमल की तरफ मूह किए हुए अपनी टाँगो को खोले खड़ी थी…
पीछे से सोनू ने उसे आगे की ओर धकेलते हुए, उसकी चूत को ठीक चन्डीमल के चहरे के पास ला दिया…”उंह अह्ह्ह्ह सेठ जी देखो ना…मेरी चूत कैसे रस बहा रही है….” रजनी ने अपनी चूत की फांको के बीच अपनी उंगलियों को घुमा कर अपनी चूत के पानी से तर करके चन्डीमल को दिखाते हुए कहा….”हाइी चाटो ना….” रजनी ने चन्डीमल के सर को जैसे ही पकड़ कर अपनी चूत के पास उसके होंटो को किया…चन्डीमल ने उसकी चूत के छेद को जीभ निकाल कर चाटना शुरू कर दिया….और एक हाथ से अपने लंड को तेज़ी से हिलाने लगा….पीछे खड़े सोनू ने अपने धक्को की रफतार पूरे ज़ोर पर कर दी थी…
पूरा रूम तीनो की सिसकियों से गूँज उठा….और 10 मिनिट बाद तीनो एक साथ झाड़ गए….सोनू वहाँ एक पल और ना रुका और अपने कमरे मे चला गया….वासना का भूत अब उतर चुका था…और अब चन्डीमल शिर्मिंदगी के मारे रजनी से नज़र भी नही मिला पा रहा था….रजनी वही लेटी हुई थी….थोड़ी देर बाद रजनी उठी और चन्डीमल के लंड को पकड़ हिलाते हुए उसके आँखो मे देखने लगी….
चन्डीमल के लंड पर उसका थोड़ा सा वीर्य लगा हुआ था….रजनी ने चन्डीमल की ओर देखते हुए उसके लंड को मूह में लेकर थोड़ी देर चूसा और फिर वहाँ से उठ कर नीचे उतरते हुए बोली…..”मैं जानती हूँ कि तुम्हे ये सब कैसा लग रहा होगा… पर अब तुम इसकी आदत डाल लो….अगर तुम मेरा कहा मनोगे तो मैं तुम्हे इस बेड पर ही तुम्हारी सारी ख्वाहिशे पूरी कर दूँगी…और बेला को कह दूँगी कि सेठ के सारी बात माना करे…और सेठ की सेवा करे….और हां दीपा और सोनू की शादी कब करवानी है….”
चन्डीमल: (सर को झुकाए हुए) जब तुम कहो…..
रजनी: ठीक है वैसे मेने पंडित जी से पूछा था…परसो का शुभ महुरत है..
ये कह कर रजनी रूम से बाहर चली गई….
दो दिन बाद दीपा के शादी सोनू से करवा दी गई थी….शादी के बाद रात को सोने के लिए सोनू को बेला के घर पर बेज दिया गया था…क्योंकि सुहाग रात अगली रात को होनी थी…..रात का वक़्त था…घर मे जो कुछ मेहमान आए थी…सब खाने के बाद सोने के लिए चले गए….दीपा आइने के सामने लाल जोड़े मे बैठी हुई अपने आप को देख कर शरमा रही थी…..तभी रजनी रूम मे दाखिल हुई….” बहुत खूबसूरत लग रही हो….ऐसे अपने आप को आइने मे बार -2 देखो गी तो खुद की ही नज़र लग जायगी….”
रजनी ने दीपा के पास आकर उसके सर को बाहों मे भरते हुए अपने पैट के साथ लगाते हुए कहा….दीपा ने अपना एक हाथ रजनी के पैट पर रख दिया…..
”दीपा अब तो तू खुस है ना….?” रजनी ने प्यार से दीपा के सर को सहलाते हुए कहा…
“हां माँ मैं बहुत खुस हूँ…और ये सब आपकी वजह से हुआ है…मैं जानती हूँ कि आप मेरे सग़ी माँ नही है…..पर आप ने मुझे कभी माँ की कमी महसूस नही होने दी…..”
रजनी: चल पगली कोन कहता है कि तू मेरे बेटी नही है…..तुझे तो मेने अपनी जान से ज़्यादा प्यार दिया है…..
दीपा: (रजनी के पैट को सहलाते हुए) माँ ये कब बाहर आएगा….
रजनी दीपा के बात सुन कर हसने लगी….”तूने क्या करना है जान कर…. “
दीपा: माँ मैं इसके साथ खेलना चाहती हूँ….जल्द से जल्द…Image
रजनी: चुप कर पगली अब तो तुझे भी बच्चा पैदा करना है…और तू खुद खेलने की बात कर रही है…और वैसे भी मैं सोनू को अच्छे से जानती हूँ…अगर 10 महीनो मे तू हरी ना हुई तो मुझे माँ ना कहना……
दीपा: हां मैं जानती हूँ कि आप सोनू को मुझसे ज़यादा जानती हो…तभी तो ये पैट लेकर घूम रही हो…..(दीपा ये कह कर खिलखिला कर हसने लगी….)
रजनी: चुप कर पागल तुझे किसने कहा…और तू क्या बक रही है….Image
दीपा: (रजनी के पैट को चूमते हुए) माँ मुझसे कुछ छुपाने के ज़रूरत नही है. मैं सब जानती हूँ…मेने खुद तुम्हे सोनू के साथ कई बार देखा है….
रजनी: (हैरत से दीपा की आँखो मे झाँकते हुए) दीपा तुम्हे अगर पता है तो फिर भी तुमने सोनू से शादी करी…और तुम मुझसे नाराज़ भी नही हो क्यों…?
दीपा: माँ तुम सोनू से प्यार करती हो ना….? मैं भी करती हूँ….और मैं उसके बिना नही रह सकती…मुझे इसे कोई फरक नही पड़ता कि सोनू के और आपके के बीच मे क्या था क्या है और आगे भी रहे या ना रहे…
रजनी: तू सच कह रही है दीपा…..?
दीपा: हां माँ मैं सच कह रही हूँ….माँ मेरी एक बात मनोगी….?
रजनी: तू कुछ भी बोल तेरे लिए मेरी जान हाजिर है…..
Imageदीपा: माँ सुहागरात को मैं सोनू को क्या गिफ्ट दूं…
रजनी: पगली सबसे प्यारा गिफ्ट तो तेरे पास ही है……(रजनी ने मुस्कराते हुए कहा)
दीपा: वो तो मैं पहले भी दे चुकी हूँ….पर मैं सुहाग रात को कुछ और देना चाहती हूँ....अच्छा माँ अब जब कि तुम पैट से हो तो….तो क्या तुम अब सोनू के साथ नही करती…..सच कहना….देखो मैने तुम्हारे और सोनू के रिस्ते को भी मान लिया है इसलिए अब मुझसे झूट ना बोलना…
रजनी: करते है ना….पर वहाँ नही….पीछे वाले सुराख मे डाल कर…
दीपा: क्या….आप को दर्द नही होता…
रजनी: नही पहले हुआ था एक बार….जैसे तुम्हे पहली बार हुआ था वैसे ही थोड़ी देर के लिए फिर मज़ा आने लगता है…..
दीपा: तो क्या मैं सुहाग रात को सोनू को पीछे वाले सुराख में डालने दूं….
रजनी: (हंसते हुए) हां अगर थोड़ी देर दर्द सहन कर सको तो…..
उधर दूसरी तरफ बेला के घर मे सोनू और बेला नीचे बिस्तर बिछा कर लेटे हुए थे…Image.और बेला ने अपनी टाँगो को उठा कर सोनू के कंधो पर रखा हुआ था.. सोनू का लंड बेला की चूत के अंदर बाहर हो रहा था….”हाइए सोनू अब तो आप मालिक बन गए हो…..मुझ ग़रीब को भूल तो नही जाओगे…..”
सोनू: (बेला की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करते हुए) नही मेरी रांड़ तुझे कैसे भूल सकता हूँ….तूने ही तो पहली बार मेरे लंड को चूत का रास्ता दिखाया था….ये ले साली ले मेरा लौडा अपनी भोसड़ी मे…..
बेला: (अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछलते हुए) आह लो सेठ जी छोटे सेठ जी चोद डालो आपनी नौकरानी बेला को आह अहह हाइी….मेरा इस दुनाया मे आना सफल हो गया है….
बेला: रुक एक मिनिट….रूको ना…..
सोनू: अब किया हुआ….
बेला: दूध चूल्हेआ पर रखा है…याद है ना वही से पकड़ लाए थी आप मुझे…छोड़ो कही उबल ना जाए….
सोनू: आह साली तुझे दूध की पड़ी है…इधर मेरे टट्टो मे मेरा लावा उबाल रहा है.
बेला: छोड़ो ना एक मिनिट मे आती हूँ…
सोनू ने अपना लंड बेला की चूत से बाहर निकाला और बगल मे लेट गया…बेला ने अपना पेटिकॉट नीचे किया और बाहर बनी हुई कच्ची रसोई मे चली गई…जब थोड़ी देर तक बेला नही आई तो, सोनू उठ कर ऐसे ही बाहर चला गया…बेला रसोई मे बैठी हुई दूध की तरफ देख रही थी….सोनू को देख कर बेला मुस्कुराते हुए बोली .”बस दो मिनिट और…..”Image
सोनू: (बेला की तरफ बढ़ते हुए) मुझसे अब और इंतजार नही होता….
बेला ने दूध वाले बरतन को चूल्हेत से उतार कर नीचे रखा और उसे ढक एक साइड मे रख दिया….और फिर खड़े होते हुए सोनू की तरफ देखते हुए बोली…..”तुम अभी भी पहले की तरह बेसबरे हो…अब तो तुम्हारे पास तीन चूते है लंड पेलने को…” बेला ने सोनू के पास आकर सोनू के लंड को पकड़ कर हिलाते हुए कहा.]
सोनू: पर तुम्हारी चूत जैसे नही है…तुम्हारी तो बात ही अलग है….
ये कहते हुए सोनू ने बेला के पेटिकॉट का नाडा पकड़ कर खेंच दिया…अगले पल बेला का पेटिकॉट ज़मीन पर धूल चाट रहा था…सोनू ने बेला को वही दीवार की तरफ मूह करके घुमा दिया….और पीछे से अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया….और धानधन शॉट लगाने लगा….उस रात बेला की चूत सच मे सूज गई थी…सोनू ने उसको रसोई मे नीचे लेटा कर आँगन मे नीचे लेटा कर हर जगह रगड़ -2 कर चोदा था…Image
नेक्स्ट नाइट:-
दीपा अपने रूम मे बैठी हुई सोनू के आने का इंतजार बड़ी बेसबरी से कर रही थी…जैसे ही सोनू ने रूम मे अंदर आकर डोर को बंद किया, तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा…सोनू से तीन बार चुद चुकी दीपा को लंड का स्वाद पता चल चुका था….और शाम से उसकी चूत से पानी बह रहा था…उसने शाम 3 बार पेंटी बदल ली थी….जैसे ही डोर लॉक करने के बाद सोनू बेड की तरफ बढ़ा…दीपा बेड से नीचे उतर कर खड़ी हो गई……और आगे बढ़ कर सोनू के पाँव छूने लगी…
सोनू: (दीपा को उसके कंधो से पकड़ते हुए) ये तुम क्या कर रही हो….?
दीपा: आप मेरे पति है….और हर पत्नी को अपने पति की इज़्ज़त करनी चाहिए….
सोनू: दीपा तुम्हे ये सब करने की कोई ज़रूरत नही….तुम्हारी जगह मेरे दिल मे है.
ये कहते हुए उसने दीपा को अपनी बाहों मे भर लिया और उसके होंटो पर अपने होन्ट रख दिए….Image.सोनू के होंटो का सुखद स्पर्श अपने होंटो पर पाते ही, दीपा सोनू की बाहों मे एक दम से पिघल गई….सोनू बड़े प्यार से दीपा के दोनो होंटो को अपने होंटो मे भर-2 दबा -2 कर चूस रहा था…सोनू ने दीपा के होंटो को चूस्ते हुए उसकी साड़ी का पल्लू पकड़ कर उसकी साड़ी उतारनि शुरू कर दी…..
कुछ ही पॅलो मे दीपा की साड़ी उसके बदन से अलग हो चुकी थी…अब दीपा के बदन पर सिर्फ़ रेड कलर का ब्लाउस और पेटिकॉट था…और नीचे ब्रा और पेंटी…सोनू ने दीपा के होंटो को चूस्ते हुए, उसको अपनी बाहों में उठा लिया और बेड की तरफ ले जाने लगा….Imageदीपा ने शरमा कर अपने चहरे को उसकी चेस्ट मे छुपा लिया….सोनू ने दीपा को बेड पर लेटा दिया….और उसके सुरहीदार गर्दन पर अपने तपते हुए होंटो को रख दिया…और फिर गर्दन से होते हुए नीचे उसके ब्लाउस से ऊपेर झाँक रही चुचियों पर अपने होंटो को रगड़ने लगा…..”सीईईईईईईई” दीपा ने सिसकते हुए बेड शीट को दोनो हाथों से पकड़ लिया…..
उसकी चुचियों पर अपने होन्ट रगड़ते हुए, सोनू ने एक हाथ नीचे लेजा कर दीपा के पेटिकॉट को पकड़ ऊपेर उठाना शुरू कर दिया….दीपा को अपने पेटिकॉट के सरकने का अहसास अंदर तक हिला गया था….धीरे-2 उसकी गोल चिकनी जांघे बेपर्दा हो चुकी थी…..सोनू अपने होंटो को दीपा के बदन पर रगड़ते हुए धीरे-2 नीचे आता जा रहा था….और दीपा की नाभि के पास पहुच कर सोनू एक पल के लिए रुका और उसकी गहरी गोल सी नाभि को देखने लगा….Imageफिर अगले ही पल सोनू ने जैसे ही दीपा की नाभि पर अपने होन्ट रखे….दीपा एक दम से मचल उठी…उसने मस्ती मे सिसकते हुए बेडशीट को छोड़ अपने हाथों से सोनू के बालो को पकड़ लिया….
और अगले ही पल सोनू ने अपनी जीभ दीपा की गहरी नाभि मे डालते हुए उसे जीभ से कुरेदना शुरू कर दिया…..”सीईईईईईईई उंघह अहह आईसीए मत करिए ना….” दीपा ने मचलते हुए कहा….सोनू ने दीपा की नाभि मे अपनी जीभ घूमाते हुए उसके पेटिकॉट के नाडे को पकड़ लिया….और फिर एक दम से खेंच दिया….जैसे ही पेटिकॉट का नाडा खुला दीपा के दिल के धड़कने और तेज हो गई,….
अगले ही पल सोनू उठ कर घुटनो के बल बैठ चुका था…..उसने दीपा के पेटिकॉट को पकड़ कर नीचे सरकाते हुए उसके बदन से अलग कर दिया….दीपा ने शरमाते हुए अपनी जाँघो को भीच लिया…Image.सोनू ऊपेर की तरफ बढ़ा और दीपा के होंटो पर अपने होंटो को रख कर उसके होंटो को चूस्ते हुए उसके ब्लाउस के हुक्स खोलने लगा…धीरे-2 सोनू ने दीपा के ब्लाउस के सारे बटन खोल दिए….और दीपा को कंधो से पकड़ कर अपनी गोद मे बैठाते हुए उसके ब्लाउस को खोलने लगा….
कुछ ही पॅलो मे दोनो एक दम नंगे हो चुके थे….सोनू दीपा के ऊपेर लेटा हुआ था….और उसकी चुचियों को मसलते हुए चूस रहा था….दीपा भी गरम होकर रंग मे आ चुकी थी….वासना का नशा अब शरम हया पर हावी हो चुका था… और वो मस्ती मे सिसकते हुए सोनू की पीठ को अपने दोनो हाथों से सहला रही थी… नीचे सोनू का लंड जो एक दम तना हुआ था…..दीपा की चूत के छेद पर दस्तक दे रहा था…Imageऔर दीपा की चूत से निकल रहा कामरस उसके लंड के सुपाडे को भिगो रहा था….जैसे ही सोनू ने अपने लंड को पकड़ दीपा की चूत मे घुसाना शुरू किया. तो दीपा ने अपना हाथ नीचे लेजाते हुए सोनू के लंड को पकड़ लिया…..
सोनू मुस्कराते हुए दीपा की तरफ देखने लगा…..”क्या हुआ मेरी जान….” दीपा सोनू की तरफ देख कर मुस्कुराइ…और फिर शरमाते हुए उसने दूसरी तरफ मूह करके सोनू के लंड के सुपाडे को अपनी गान्ड के छेद पर लगा दिया….जैसे ही सोनू को अहसास हुआ कि, उसका सुपाडा दीपा की गान्ड के छेड़ से भिड़ा हुआ है….वो एक दम से चोंक गया…और दीपा के गालो पर अपने होंटो को रगड़ते हुए धीरे से बोला…. Image“ओह्ह मेरी जान तुमने मेरे डंडे को ग़लत सुराख पर लगा दिया है…..”
दीपा: (शरमाते हुए) जानती हूँ…..आप को सुहाग रात मुबारक हो….
सोनू: क्या…? देख लो बहुत दर्द होता है पहली बार….
दीपा: जानती हूँ…..माँ भी तो लेती है पीछे वाले सुराख मे…..
सोनू: उसकी बात अलग है….पर तुम सहन नही कर पाओगि…..
दीपा:आपके लिए मैं कुछ भी सह लूँगी……
सोनू: पक्का देख लो…..
दीपा ने हां मे सर हिला दिया….दीपा की चूत से कामरस बह कर उसकी गान्ड के छेद पर आ रहा था…इसलिए उसकी गान्ड का छेद पहले से चिकना हो चुका था…सोनू ने अपने लंड से दीपा का हाथ हटाया…और फिर अपने लंड को पकड़ कर दीपा की गान्ड के छेद पर रगड़ते हुए एक ज़ोर दार धक्का मारा….”फतच जैसी आवाज़ से सोनू के लंड का मोटा सुपाडा दीपा की गान्ड के कुंवारे छेद को खोलता हुआ अंदर जा घुसा….Image.दीपा की आँखे दर्द के मारे एक दम से पथरा गई….उसके आँखो के कोने से आँसुओं की धार बह निकली….सोनू एक दम से रुक गया….पर दीपा ने उसकी जाँघ पर मुक्का मारते हुए अपने दांतो को पीसते हुए बोला…” क क करो ना….. डाल दो अपनी दीपा के आख़िर बचे सुराख मे अपने डंडे को….आज मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो जाना चाहती हूँ.,…..”
सोनू ने भी अपनी ताक़त को इकट्ठा किया…और एक और ज़ोर दार झटका मारा….लंड दीपा की गान्ड के छेद को फाड़ता हुआ पूरा का पूरा अंदर जा घुसा…एक पल के लिए तो दीपा की साँसे ही रुक गई….पर कुछ देर बाद दीपा ने खुद ही अपनी गान्ड को ऊपेर की तरफ उछालना शुरू कर दिया…सोनू दीपा का ये रूप देख कर एक दम से दंग रह गया….उसने झुक कर फिर से दीपा की चुचियों को चूसना शुरू कर दिया,…Image और अपने लंड को धीरे-2 अंदर बाहर करने लगा….
कुछ और देर बाद सोनू अब अपनी पूरी रफतार पर पहुच चुका था….हैरानी की बात ये थी कि, दीपा की चूत अब भी पानी छोड़ रही थी….शायद दीपा को अब गान्ड मरवाने मे भी मज़ा आ रहा था…”आह दीपा तुम्हारी आह बहुत टाइट है…आ मैं झड्ने वाला हूँ….”
दीपा: जी वहाँ मत छोड़ना …..आगे डाल कर छोड़ना…..
दीपा ने अपना हाथ नीचे ले जाते हुए सोनू के लंड पर रखा और लंड को पकड़ कर बाहर निकाला और फिर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया,…..अगले ही पल सोनू का लंड दीपा की चूत मे अंदर बाहर होने लगा….Imageदीपा अपनी चूत की दीवारों पर लंड के रगड़ महसूस करके एक दम मस्त हो गई थी…उसकी सिसकारियाँ पूरे रूम मे गूंजने लगी थी…..” आह सीईइ ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उंह हाँ छोड़िए ना अपना पानी मेरे अंदर आह भर दीजिए मेरी चूत को अपने पानी से……” दीपा ने अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछालते हुए कहा…..
10 मिनिट की चुदाई के बाद सोनू ने अपने टॅंक की तोप को उसकी बच्चेदानी मे धंसा कर पानी छोड़ना शुरू कर दियाImage…अपनी चूत मे गरम लावा महसूस करते ही…दीपा एक दम से सिसक उठी…और उसकी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया…….
तो दोस्तो इस तरह सोनू को अब तीन तीन चूते घर मे ही मिल चुकी थी . चन्डीमल तो वैसे भी अपाहिज हो चुका था
वो बेचारा तो वैसे भी किसी काम का नही था हाँ बेला रजनी के कहने से उसके लंड को चूस कर उसे शांत कर देती थी
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