मेरी बहन अध्याय 5

 





                  मेरी बहन अध्याय   5



नी भाभी ने मेरी रूपाली दीदी को अपने हाथों से लाल रंग की लहंगा चोली पहनाई... मेरी दीदी के दोनों  बड़े-बड़े  रसीले  चूचक उनकी चोली में बड़ी मुश्किल से समा रहे थे.. लहंगा भी उनकी नाभि के काफी नीचे बंधा हुआ था... इस दौरान कामिनी भाभी ने मेरी रूपाली दीदी के कामुक अंगो को खूब ... मसला खासकर उनकी  गदर आई चुचियों  को.. कामिनी भाभी ने मेरी रूपाली दीदी को पीछे से दबोच लिया था और  पीछे से झटके दिए जा रही थी जैसे कि मर्द औरत को चोदता है... चंदा भाभी प्रियंका दीदी और बाकी सारी लड़कियां यह नजारा देखकर मुस्कुरा रही थी.. मेरे पेंट में भी तंबू बन गया था.

काले उमड़ते, घुमड़ते बादल, बारिश से भीगी मिट्टी की सोंधी-सोंधी महक, चारों ओर फैली हरी-हरी चुनरी की तरह धान के खेत, हल्की-हल्की बहती ठंडी हवा, मौसम बहुत ही मस्त हो रहा था। हरी, लाल, पीली, चुनरिया, पहने अठखेलियां करती, कजरी और मेले के गाने के तान छेड़ती, लड़कियों और औरतों के झुंड मस्त, मेले की ओर जा रहे थे, लग रहा था कि ढेर सारे इंद्रधनुष जमीन पर उतर आयें हो। और उनको छेड़ते, गाते, मस्ती करते, लम्बे, खूब तगड़े गठीले बदन के मर्द भी…


 चंदा भाभी , प्रियंका दीदी, रूपाली दीदी, और कामिनी भाभी और उनके साथ गांव  की लड़कियां कजरी, उसकी सहेली, गीता, पूरबी और रमा भी आ गई थीं और  उनको घेरे गांव के सारे जवान तगड़े मर्द... दिनेश, सुनील, अजय, रवि और उनके दोस्त मेले की तरफ चल दिए.... मैं अपने दोस्तों के साथ उन सब के पीछे पीछे चल रहा था.... मेरे दोस्तों की निगाहें भी मेरी दीदी  और भाभियों की तरफ ही ठीक हुई थी...

हम लोग  हँसते खिलखिलाते मेले की ओर चल पड़े। मेले का मैदान एकदम पास आ आया था, ऊँचे-ऊँचे झूले, नौटंकी के गाने की आवाज… भीड़ एकदम बढ़ गयी थी, एक ओर थोड़ा ज्यादा ही भीड़ थी।

 मेरे दोस्त ने कहा...“हे उधर से चलें…”

 मैं कुछ जवाब देता हूं उसके पहले तब तक भीड़ का एक रेला आया और हम सब लोग उस संकरे रास्ते में धंस गये। मैंने अपने दोस्त का हाथ पकड़ रखा था.. हमारे आगे मेरी रूपाली दीदी ने चंदा भाभी  का हाथ पकड़ रखा था और मेले में आगे बढ़ती हुई चली जा रही थी....


ऐसी भीड़ थी की हिलना तक मुश्किल था, तभी मेरे बगल से मर्दों का एक रेला निकला और एक ने अपने हाथ से मेरी रूपाली दीदी की चूची कसकर दबा दी।  जब तक मेरी दीदी संभलती उसके पहले ही पीछे से एक धक्का आया, और एक लड़के ने मेरी  दीदी की  गांड के बीच धक्का देना शुरू कर दिया... मैंने बगल में चंदा भाभी की तरफ देखा तो उनको तो किसी मर्द ने पीछे से अच्छी तरह से दबोच रखा था और उनकी दोनों चुचियों को अच्छे से   निचोड़ रहा था... चंदा भाभी भी जम के मजा ले  रही थी..

 मेरी प्रियंका दीदी और कामिनी  भाभी भीड़ में आगे चली गयी थीं और उनको तो दो-दो लड़कों ने पकड़ रखा था और वो मजे से अपने जोबन मिजवा, रगड़वा रही हैं।

तभी भीड़ का एक और धक्का आया और हम उनसे छूटकर आगे बढ़ गये।


भीड़ अब और बढ़ गयी थी और गली बहुत संकरी हो गयी थी।

अबकी सामने से एक लड़के ने मेरी रूपाली दीदी की चोली पर हाथ डाला और जब तक मेरी दीदी सम्हलती, उसने दो बटन खोलकर अंदर हाथ डालकर मेरी दीदी की  चूची पकड़ ली थी...पीछे से किसी के मोटे खड़े लण्ड का दबाव  साफ-साफ अपने गोरे-गोरे चूतड़ों के बीच महसूस कर रही थी मेरी संस्कारी रूपाली दीदी...वह अपने हाथों से मेरी दीदी  के दोनों दरारों को अलग करने की कोशिश कर रहा था और मेरी दीदी  ने पैंटी तो पहनी नहीं थी, इसलिये उसके हाथ का स्पर्श सीधे-सीधे मेरी दीदी  के गाण्ड पर महसूस हो रहा था।  तभी एक लड़के ने मेरी रुपाली दीदी की चूत को साड़ी के ऊपर से ही रगड़ना शुरू कर दिया था। चूची दबाने के साथ उसने अब मेरी दीदी  के खड़े चूचुकों को भी खींचना शुरू कर दिया था।  मेरी दीदी अब मस्ती से दीवानी हुई जा रही थी... चंदा भाभी की हालत भी कुछ  वैसी ही थी...

उस छोटे से रास्ते को पार करने में हम लोगों को 20-25 मिनट लग गये होंगे और मेरे रूपाली दीदी ने कम से कम 10-12 लोगों को खुलकर अपना जोबन दान दिया होगा।

बाहर निकलकर मेरी रूपाली दीदी अपनी चोली के हुक बंद कर रही थी कि   कामिनी भाभी  उनके पास आई और बोली - “क्यों मजा आया हार्न दबवाने में…”

 बड़ी बेशर्मी से मेरे रूपाली दीदी ने जवाब दिया.... हां...

 साले बहन चोद  वह देख तेरी प्रियंका दीदी और चंदा भाभी गन्ने के खेत में जा रही है.. मेरे दोस्त ने मेरे कान में कहा...

 अरे यार वह लोग शायद पेशाब करने जा रही होगी... मैंने उसे कहा.

 बहन के लोड़े  तेरी  प्रियंका दीदी और चंदा भाभी गन्ने के खेत में  चोदमपट्टी  करने जा रही है... वह देख सुनील और अजय  भी उनके पीछे-पीछे जा  रहे हैं...... तुझे आना है तो आ वरना मैं तो चला तेरी प्रियंका दीदी की ठुकाई देखने.... मेरा दोस्त गन्ने के खेत में घुस गया और मैं भी उसके पीछे पीछे...

 मैं और मेरा दोस्त उस जगह पर पहुंच गया गन्ने के खेत में जहां पर वह  कांड हो रहा था..... हम दोनों नीचे लेट गए और सामने का नजारा देखने  लगे.... हम से कुछ ही दूरी पर मेरी चंदा भाभी सुनील की गोद में बैठी हुई थी और उनके पास ही मेरी प्रियंका दीदी और  अजय खड़े थे... जैसे पहरेदारी कर रहे हो...


 सामने का  नजारा अत्यंत कामोत्तेजक था... मेरी चंदा भाभी  को सुनील अपनी गोद में उठा रखा था और झटके दे रहा ... भाभी की साड़ी उनकी कमर में थी उनकी  पेंटी उनके घुटनों के बीच... सुनील का मोटा  लोड़ा उनकी योनि के  अंदर.... चंदा भाभी उछल रही थी  सुनील के काले मोटे लोड़े पर.... मेरी प्रियंका दीदी और  अजय दोनों आंखें फाड़ फाड़ के नजारा देख रहे थे.... मैं और  मेरा दोस्त भी..... सुनील ने मेरी चंदा  भाभी को नीचे जमीन पर पटक दिया और उनके ऊपर चढ़ गया.... उसने मेरी भाभी की चोली खोल   उनका लहंगा  ऊपर उठा दिया...सुनील ने भी अपने कपड़े उतार दिये। उफ… कित्ता गठा मस्कुलर बदन था, और जब उसने अपना… वाउ… खूब लंबा मोटा और एकदम कड़ा लण्ड… सुनील ने अपना कड़ा लण्ड एक हाथ में पकड़ा और मेरी चंदा  भाभी की खुली हुई टांगों के  बीच में आ गया...

उसके लण्ड का चूत पर स्पर्श होते ही चन्दा भाभी सिहर उठी और बोली- - “आज कुछ ज्यादा ही जोश में दिख रहे हो क्या मेरी  ननद की याद आ रही है"

“और क्या… जब से उसे देखा है मेरी यही हालत है, एक बार दिलवा दो ना प्लीज…” सुनील अपने दोनों हाथों से  मेरी चंदा भाभी  के मम्मे जमकर मसल रहा था।

 साले तेरी  रूपाली दीदी को सुनील चोदने की कह रहा है... लगता है तेरी रूपाली दीदी को भी चंदा भाभी सुनील के लण्ड का  स्वाद चख आने का प्लान बना रही है... यह साला सुनील बहुत हरामी है... बहुत  बुरी तरह चोदने  वाला है तेरी रूपाली दीदी को य... तेरी दीदी का सारा दूध पी जाएगा  उसके बाद  गांड भी  मारेगा  थूक लगा लगा के... मेरा दोस्त मेरे  कान में बोला... पैंट के ऊपर से ही वह अपने लण्ड  को मसल रहा था...


  मेरी चंदा भाभी तो जोश से पागल हो रही थी.। वह चूतड़ उठाती हुई बोली-

“हां, हां… दिलवा दूंगी, चुदवा दूंगी उसको भी, पर मेरी चूत तो चोदो, नशे में पागल हुई जा रही हूं…”

सुनील ने मेरी चंदा भाभी की टांगों को उठाकर अपने कंधे पर रखा और कमर पकड़कर एक धक्के में अपना आधा लण्ड चूत में ठेल दिया। मैं अपनी आँख पर यकीन नहीं कर पा रहा था , इतनी कसी चूत और एक झटके में सिसकी लिये बिना, लण्ड घोंट गयी।

अब एक हाथ से सुनील मेरी भाभी की चूची मसल रहा था, और दूसरे से  कमर कसकर पकड़े था। 

थोड़ी देर में ही, चन्दा  भाभी फिर सिसकियां लेने लगी- “रुक क्यों गये… डालो ना प्लीज… चोदो ना… उहुह… उह्ह्ह…”

सुनील ने एक बार फिर दोनों हाथ से कमर पकड़कर अपना लण्ड, सुपाड़े तक निकाल लिया और फिर एक धक्के में ही लगभग जड़ तक घुसेड़ दिया। अब लगा रहा था कि चन्दा  भाभी को  कुछ लग रहा है..

 चंदा भाभी"- “उफ… उह फट गयी… लग रहा है, प्लीज, थोड़ा धीरे से एक मिनट रुक… हां हां ऐसे ही बस पेलते रहो हां, हां डालो, चोद दो मेरी चूत… चोद दो…”

 मेरी चंदा भाभी और सुनील दोनों ही पूरे जोश में थे। सुनील का मोटा लण्ड किसी पिस्टन की तरह तेजी से चन्दा भाभी की चूत के अंदर-बाहर हो रहा था। चन्दा  भाभी की मस्तियां देख कर मुझे ऐसा लग रहा था कि काश मेरे पास भी सुनील का ये मूसल जैसा लण्ड  रहा होता…

 गन्ने के खेत में मेरी चंदा भाभी और सुनील की मस्तियां  देख कर मैं और मेरा दोस्त दोनों काफी गर्म हो  हो चुके थे... मेरे दोस्त ने तो अपना लण्ड भी पेंट से बाहर निकाल लिया था और हाथ से पकड़ कर  हिला रहा था.. मुझे शर्म आ रही थी उसकी हरकत देखकर पर मैं कुछ भी बोल नहीं पाया उसे...


 दूसरी तरफ मेरे प्रियंका दीदी और अजय खड़े-खड़े पूरा नजारा देख रहे थे... अजय की पेंट में तो तंबू बना हुआ था... साफ पता चल रहा था कि उसकी पैंट में  एक मोटा लंबा  बंबू है.. उसने मेरी प्रियंका दीदी का हाथ पकड़ लिया और अपने लण्ड पर रख दिया पैंट के ऊपर से..

 मेरी प्रियंका दीदी अपने मेहंदी लगे हाथ से अपने यार का लण्ड मुठिया  रही थी... मेरी दीदी के हाथ में  अजय का लण्ड था और उनके हाथ के ऊपर  अजय  का हाथ.. अजय मुस्कुरा रहा था और मेरी दीदी शर्म के मारे लाल हो गई थी... अजय ने मेरी दीदी के माथे को चुम्मा फिर उनके  गालों को... फिर उसने अपने होठों को मेरी दीदी होठों पर टिका दिया और चूसने लगा... प्रियंका दीदी के होठों पर लगी हुई लिपस्टिक अजय के होठों पर भी लगने लगी.. अजय बुरी तरह चाट रहा था मेरी दीदी को... मेरी दीदी भी गर्म हो रही थी उसके लण्ड को पकड़े हुए.. दीदी ने अपनी  जीभ बाहर निकाली और अजय के मुंह में डाल दिया.... रसगुल्ले की तरह चूसने लगा दीदी के जीव को  वह.... जब चुंबन का दौर टूटा  प्रियंका दीदी की आंखें गुलाबी हो गई थी... उनकी आंखो में वासना के  लाल डोरे तैर रहे थे... अजय भी बेहद कामुक हो चुका था...

 वह मेरी प्रियंका दीदी की चोली खोलने लगा... मेरी दीदी गन्ने के खेत में अपनी चोली खुलवाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं  थी... वह आनाकानी करने  लगी.....

 प्लीज जानू ऐसा मत करो... समझो मेरी बात को... कोई भी देख लेगा... मत खोलो ना... कुछ तो समझो बात को... मेरी दीदी सिसक रही थी...

 पर हरामजादे अजय  ने मेरी प्रियंका दीदी की एक ना सुनी.. उसने मेरी दीदी की चोली को उतार कर ही दम लिया और नीचे जमीन पर  फेंक दिया... मेरी दीदी ने  ब्रा तो पहनी  ही नहीं थी सो उनकी चूचियां खुले आसमान के नीचे  आजाद हो गई... मेरी दीदी शर्म के मारे पानी पानी हो गई थी... वह अपने दोनों हाथों से अपनी दोनों चुचियों को ढकने का प्रयास कर रही थी... अजय के मुंह से लार टपक रही थी और  इस नजारे को घूरते हुए मेरे दोस्त का हाथ भी अपने औजार पर तेजी से ऊपर  नीचे होने लगा... अजय ने मेरी प्रियंका दीदी को कमर के ऊपर नंगा कर गया था और नीचे जमीन पर सुनील मेरी चंदा भाभी को चोद रहा था...

 अजय मेरी प्रियंका दीदी के लहंगे के ऊपर से उनकी चूत को रगड़ने लगा.. उसकी मोटी मोटी  उंगलियां मेरी दीदी की कुंवारी चूत पर  कहर ढा रही थी... दीदी अपने दोनों हाथों से अपनी दोनों चुचियों को ढके खड़ी लाचारी लग रही थी.... मेरी दीदी की मजबूरी को देखते हुए  आ जाएगी हिम्मत बढ़ती चली जा रही थी.. उसने मेरी प्रियंका दीदी  के लहंगे के अंदर हाथ डाल दिया.. मेरी दीदी घबरा  उठी और अपने एक हाथ से अजय के हाथ को पकड़ने की कोशिश करने लगी... यह उनकी सबसे बड़ी गलती थी.. अपनी योनि पर अजय के हाथ को  रेंगते रोकने के प्रयास में मेरी दीदी ने अपनी एक चूची पूरी खुली छोड़ दी और अजय को मौका मिल गया... उसने मेरी दीदी की चूची को मुंह में ले लिया  और चूसने लगा.... दीदी की आंखें पथरा  गई..... लहंगे के  भीतर अजय   उनकी योनि  म अपनी उंगली अंदर बाहर कर रहा था साथ ही साथ उनकी चूची को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था... दीदी की टांगें कांप रही थी खड़े-खड़े..... अजय ने मेरी दीदी के लहंगे में  से अपना हाथ बाहर निकल लिया.... उसकी उंगलियां मेरी दीदी की योनि रस से  गीली थी.....

 साली तू तो पूरी गीली हो गई है.... दीदी की चूची से अपने मुंह को आजाद करते हुए  अजय ने कहा....

 नहीं जानू प्लीज ऐसा मत करो मुझे बहुत शर्म आ रही है... मेरी दीदी ने शर्माते हुए कहा.....

 आज तो तेरी  चूत का उद्घाटन जरूर करूंगा बहन की लोड़ी... बोलते हुए अजय न मेरी प्रियंका दीदी की चूची को काट लिया दांतो से.. मेरी दीदी सेसीआने लगी... सिसक सिसक के मेरी दीदी का बुरा हाल हो गया था... अजय ने मेरी दीदी के लहंगे क नाडा खोलना शुरू कर दिया... मेरी दीदी रोने लगी....

 प्लीज जानू मैं आपके हाथ जोड़ती हूं ऐसा मत करो मेरे साथ.. दीदी    रोते हुए बोलने  लगी..

 अजय को दया आ गई... उसने कहा-   कम से कम चूस चूस के तो  मेरे लण्ड का पानी निकाल दे बहन की लोड़ी रंडी कुत्तिया...

 मेरी दीदी इसके लिए तैयार हो गई थी...

 अजय ने बिना देर किए हुए अपनी पैंट उतार दी और मेरी प्रियंका दीदी का सर पकड़ कर उन्हें नीचे झुका दिया.... अपना 10 इंच का मोटा काला  लंबा लण्ड उसने मेरी दीदी के चेहरे पर रख दिया....


 मां का भोसड़ा चोदा... रंडी चूस मेरा लौड़ा........ अजय ने जबरदस्ती घुसा दिया मेरे दीदी के मुंह में अपना लण्ड... मेरी दीदी चूसने लगी....... अचानक अजय की नजर मेरे ऊपर पड़ी... मेरे बगल में  लेटा हुआ मेरा  दोस्त   जो अपना लण्ड  हिला रहा था उसको भी अजय ने देख लिया था. अजय मुस्कुराने लगा और मेरी दीदी के मुंह में धीरे-धीरे लण्ड अंदर-बाहर करने लगा...

 शर्म के मारे मैं धरती में गड़ा जा रहा था.. मैं अब वहां से  भाग भी नहीं सकता था क्योंकि मेरे दोस्त को पता चल जाता कि अजय ने मुझको देख लिया है.... मैंने अपने मन को तसल्ली दी कि जो भी हो मेरे होने वाले  जीजु ही तो मेरी दीदी को अपना लौड़ा चूसवा रहे हैं. हर पत्नी तो अपने पति का लण्ड चुस्ती होगी.. अगर मेरी प्रियंका दीदी अपने होने वाले पति का लण्ड चूस रही है तो इसमें बुरा क्या है...

 अजय का मन इतने से नहीं भरा उसने मुझे और जलील करना था..

 उसने अपने लण्ड  को मेरी प्रियंका दीदी  के मुंह में पूरा  डाल  दीया और मेरी दीदी के मुंह को जोर जोर से चोदने लगा... मेरी दीदी के मुंह से   चुपड़चुपड़ की आवाज आना शुरू हो गई...

 अजय ने प्रियंका दीदी को नीचे जमीन पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ के उनके मुंह में कड़ा लण्ड पेल दिया.. वह पेल रहा था अपने लण्ड से मेरी दीदी के मुंह को और गंदी गंदी गालियां  दिय जा रहा था...

 साली रंडी छिनाल तेरे भाई के साथ तुझे चोदूंगा.... तेरे गांडू  भाई के सामने  मां की  लोड़ी.... अजय ने मेरी तरफ देखते हुए मेरी दीदी से कहा..

 प्रियंका दीदी ने  अजय का लण्ड मुंह से बाहर कर दिया...

 तुम कुछ भी बोलते हो... मेरे भाई को बीच में क्यों लाते हो.. वह तो बहुत शरीफ है.... जल्दी करो वरना कोई भी आ सकता है   इधर.. बोलते हुए मेरी दीदी ने एक बार फिर अजय  का मोटा लण्ड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी..

 दूसरी तरफ सुनील ने  मेरी चंदा भाभी की टांगें फिर से जमीन पर कर दीं और वह उसके ऊपर लेट गया, उसका एक हाथ, चंदा भाभी के चूचुक मसल रहा था और दूसरा उसकी जांघों के बीच, शायद उसकी क्लिट मसल रहा था। चन्दा भाभी का एक चूचुक भी सुनील के मुँह में था। अब तो चन्दा भाभी चन्दा नशे में पागल होकर अपने चूतड़ पटक रही थी। उसने फिर दोनों टांगों को उसके पीठ पर फंसा लिया।

सटासट, सटासट… सुनील का मोटा लण्ड… उसकी चूत में अंदर-बाहर… चन्दा भाभी का शरीर जिस तरह से कांप रहा था उससे साफ था कि वो झड़ रही है। पर सुनील रुका नहीं, जब वह झड़ गई तब सुनील ने थोड़ी देर तक रुक-रुक कर फिर से उसके चूचुक चूसने, गाल पर चुम्मी लेना, कसकर मम्मों को मसलना रगड़ना शुरू कर दिया और चन्दा  भाभी ने फिर सिसकियां भरना शुरू कर दिया। एक बार फिर सुनील ने उसकी टांगों को मोड़कर उसके चूतड़ों को पकड़ के जमके खूब कस के धक्के लगाने शुरू कर दिये।

क्या मर्द था… क्या ताकत… चन्दा भाभी एक बार और झड़ गयी। तब कहीं 20-25 मिनट के बाद वह झड़ा और देर तक झड़ता रहा। वीर्य निकलकर बहुत देर तक चन्दा भाभी के चूतड़ों पर बहता रहा। अब उसने अपना लण्ड बाहर निकाला तब भी वह आधा खड़ा था।

 दूसरी  मेरी प्रियंका दीदी के मुंह में  अजय ने अपने लण्ड का मक्खन    डाल दिया... ना चाहते हुए भी मेरी भोली भाली प्रियंका दीदी अजय  के लण्ड की पूरी मलाई चाट गई.... अजय ने मेरी दीदी को मजबूर कर दिया कि वह चाट चाट के उसके लण्ड खूब अच्छी तरह साफ करें... मेरी दीदी ने बिना आनाकानी किए हुए उसकी मर्जी का पालन किया.. चंदा भाभी भी उठकर खड़ी हो गई थी...  उनकी गांड पर लगी हुई मिट्टी  प्रियंका दीदी ने झाड़ के  साफ कर दिया...अगले दिन मैं अपने घर  की छत पर बने हुए कमरे में अपने दोस्त के साथ बैठा हुआ लूडो खेल रहा था... शाम का समय था और हम दोनों पूरे  मन से लूडो खेलने में व्यस्त थे... छत पर काफी  शांति  थी और हम दोनों भी चुपचाप खेल में व्यस्त  थे... अचानक किसी की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर आने की आवाज  सुनके हमारे कान खड़े हो गए.. मेरे दोस्त को समझते देर नहीं लगी कि कौन ऊपर आ रही है... उसके मन की मुराद पूरी हो गई थी... शायद इसी लालच में वह मेरे साथ लूडो खेलने मेरे घर की छत पर आया था... मेरी रूपाली दीदी  छत पर आ चुकी थी मुन्नी को अपनी गोद में लिय हुए.... हमारे कमरे का दरवाजा बंद था और खिड़कियां ऐसी बनी हुई थी कि अंदर से बाहर का नजारा  तो देखा जा सकता था पर बाहर से अंदर कुछ भी दिखाई नहीं देता था... मेरी दीदी को बिल्कुल भी पता नहीं था कि हम दोनों छत पर ही हैं.. मेरी दीदी छत की एक तरफ जहां पड़ोसी की छत थी जाकर खड़ी हो गई और दूसरी तरफ देखने लगी.... मेरे दोस्त का मन अब लूडो खेलने में बिल्कुल नहीं लग रहा था... वह तो अब  रूपाली दीदी को घूरे जा रहा था... और  क्यों ना घूरे... आज  मेरी रूपाली दीदी चिकनी चमेली बनी हुई थी बन ठन के... गुलाबी रंग की  बैकलेस और स्लीवलैस चोली  लो कट  आधी चूचियां तो चोली के बाहर ही थी... बड़ी बड़ी चूची दूध की तरह सफेद और दूध से भरी हुई कसमसा रही थी मेरी रूपाली दीदी की चोली के अंदर... उनकी सांसों के साथ ऊपर नीचे होती हुई उनकी गोलाई जो चोली  से बाहर निकलने को बेताब थे.  चेहरे पर हल्का मेकअप.... बालों में गजरा आंखों में कजरा... कानों में बड़े-बड़े झुमके... होठों पर  लाल लिपस्टिक.. चूचियो पर गुलाबी रंगत के 'अनार दाने' तन कर खड़े दूध से  भरे हुए, लेकर मेरी रूपाली दीदी छत पर खड़ी थी और उनको देखकर मेरा दोस्त ऊपर से अपने औजार को मसलने लगा तो इसमें कोई हैरत की बात नहीं थी पर मेरे लिए शर्म की बात थी... उसे कुछ बोल भी नहीं पा रहा था मैं शर्म के मारे... अपने दोस्त की हरकतें देखकर मैं शर्म से पानी पानी हो गया था..  मैंने लूडो को बंद कर दिया था... वाह टकटकी लगाकर मेरी दीदी को निहार रहा था... मैंने भी देखा उन्हें अच्छी तरह... मेरी रूपाली दीदी का लहंगा उनकी  पतली कमर के काफी नीचे बंधा हुआ था... सपाट पेट और गहरी नाभि साफ दिखाई दे रही थी उनकी गोरी गोरी चिकनी मक्खन  जैसी..... उन्होंने चुनरी भी डाल रखी थी पर वह नाम मात्र की थी ..गले में पड़ी हुई थी और कुछ भी  छुपाने ढकने में नाकाम थी मेरी दीदी की.... मैं गहरी सोच में पड़ा हुआ था कि आखिर  मेरी रूपाली दीदी क्यों छत पर आई है इतनी" छम्मक छल्लो"  बन ठन के.... मैंने सोचा शायद शादी के बाद  इसी प्रकार बन ठन के रहती  होगी घर में भी... सच कहूं दोस्तों तो मेरी दीदी स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी जिनको देखकर किसी का भी मन खराब हो जाए मेरे दोस्त का तो हो ही गया था..

. मेरे दोस्त की हरकतें काबू से बाहर हो  चुकी थी... उससे रहा नहीं गया उसने अपनी पैंट उतार दी .. वह खिड़की के सामने जाकर खड़ा हो गया और  अपना लण्ड हिलाने लगा मेरी  रूपाली दीदी को देखते हुए..... रूपाली ...रूपाली...ओह… उसके मुंह से निकल रहा था...

 साले तू  क्या कर रहा है.. यह मेरी दीदी है.... मैंने उससे कहा..

 बहन चोद मेरा निकल जाने दे पानी..ओह…ओह…  रूपाली... उसने धीरे से कहा...

 साले बंद कर हिलाना देखकर.. वरना तेरी  गांड मार लूंगा मैं.... गुस्से में मैंने कहा...

 बहन के लोड़े मैं तो बस हिला रहा हूं... तेरी रूपाली दीदी आज इसी छत पर   नंगी होने वाली है... अगर मेरा विश्वास नहीं करता तो यहां  देख ले दूसरी छत पर कौन लोग हैं.... मेरे दोस्त ने मुझसे कहा..


 पहले मुझे उसकी बात का विश्वास नहीं हुआ पर जब मैं उसके पास गया और मैंने दूसरी छत की तरफ देखा तो मुझे यकीन हो गया कि आज मेरी दीदी छत पर कोई न कोई कांड करने आई है.. मेरे बगल वाली छत पर दो मुस्टडे खड़े थे...  दिनेश और रवि... दिनेश मेरी रूपाली दीदी का पुराना यार... शादी के पहले मेरी रूपाली दीदी का टांका दिनेश से जुड़ा हुआ था... सब लोग कहते थे कि मेरी रूपाली दीदी को दिनेश दुल्हन बना के ले जाएगा.. कुछ कारणों से मेरी रूपाली दीदी की शादी नहीं हो पाई दिनेश के साथ.. इसके पीछे का कारण आपको फिर कभी बाद में बताऊंगा..


 आज तो दिनेश अपने जिगरी दोस्त रवि के साथ छत पर खड़ा था.. शायद उन्हें पता था कि मेरी रूपाली दीदी आने वाली है छत पर... मेरी दीदी उनके सामने जाकर खड़ी हो गई थी... दिनेश मेरी दीदी को कुछ कह रहा था जो हमें तो बिल्कुल भी सुनाई नहीं दे रहा था पर सुनकर मेरी दीदी मुस्कुरा रही थी... रवि जो हमारे गांव का सबसे बदनाम और ठरकी लड़का है उसके साथ  मेरी दीदी हंस हंस के बातें कर रही थी... मुझे बड़ा ही अजीब लग रहा था ऐसा देखकर..... कुछ देर तक उनकी बातें चलती रही फिर मेरी रूपाली दीदी का चेहरा एकदम  गंभीर हो गया..

 मुन्नी को अपने सीने पर टिका के खड़ी थी मेरी दीदी सर झुका के.. इसके बाद मेरी  दीदी ने जो हरकत की मैं अंदर तक हिल गया... उन्होंने मुन्नी को  साइड  किया और अपने एक हाथ को चोली के अंदर डाल के अपनी एक चूची को चोली की कैद से आजाद कर  दी.. मेरी रूपाली दीदी की एक   चूची उनकी चोली के ऊपर से बाहर निकल के दिनेश और रवि की आंखों के सामने थी.... मैं और मेरा दोस्त भी इस नजारे को आंखें फाड़ फाड़ के देख रहे थे.. मेरा दोस्त  तो मेरी रूपाली दीदी  के चूची पर जड़े मोती जैसे गुलाबी दाने  को देखकर पागल सा हो गया...


," वाह.. इसको कहते हैं चूचक.. कितना प्यारा और रसीला है.." आगे वह कुच्छ ना बोला.. वह जोर-जोर से अपने औजार को हिलाने लगा..

 दिनेश और रवि का  तो लग रहा था कपड़े फाड़ फाड़ कर बाहर आ जाएगा औजार  .. उनकी पेंट में से... दोनों बड़ी बेशर्मी से मेरी रूपाली दीदी को देखते हुए  ऊपर से ही अपने मोटे लण्ड को मसल रहे थे.. रवि की आंखों में भी साफ हवस दिखाई दे रही थी.. शादी के पहले तो वह मेरी रूपाली दीदी को भाभी भाभी बुलाता था... पर आज उसके तेवर भी बदले हुए लग रहे थे.... मैं सोच में डूबा हुआ था कि ऐसी क्या मजबूरी है मेरी रूपाली दीदी  कि जो ऐसी हरकत  कर रही है..


 उन्होंने जो अगली हरकत कि उसे देखकर तो बड़े बड़ों का ईमान डोल जाए..... उन्होंने एक हाथ से अपनी चूची को पकड़ा और उसे अच्छी तरह दबाया... मेरी दीदी के गुलाबी निप्पल पर दूध की बूंदे चमकने  लगी... उन्होंने मुन्नी को अपनी चूची पर रख लिया और उसके मुंह में अपना निप्पल ठेल उसे अपना दूध पिलाने लगी.

…. आह... साले .. बहन के लोड़े... वैसे तो तेरी रूपाली  दीदी बड़ी संस्कारी बनती है ... साली...…. आह.... पर यह तो पूरी रंडी छिनाल है....…. आह…. आह देख कैसे यारों को दिखा दिखा कर अपना दूध पिला रही है... अपनी बच्ची को..…. आह  मादरजात…. आह... जी चाहता है अभी जाकर  तेरी दीदी की चोली फाड़ के रंडी का सारा दूध पी  जाऊं... पूरा सुखा दूंगा तेरी दीदी की छातियों को चूस चूस …. आह.. साले वैसे तेरी दीदी की चूचियां है जबरदस्त.... ऐसी चूची टाइट बिल्कुल खड़ी खड़ी मैंने तो आज तक नहीं देखी...…. आह.... मेरा दोस्त अपने हवस के आवेश में बके जा रहा था और मैं चुपचाप सुन रहा था...

 और सुनने के अलावा मेरे पास चारा ही क्या रह गया था. बेशर्मी की हद पार कर दी थी मेरी रूपाली दीदी.... एक बेचारा भाई भला क्या जवाब देता मेरे दोस्त की कामुक बातें और हरकत का...

 खुले आसमान के नीचे मेरी रूपाली दीदी अपनी चोली खोल दूध पिला रही थी मुन्नी को अपने यार  और उसके दोस्त के  आगे..

 मेरी दीदी अपने सीने से चिपकाए हुए मुन्नी को मातृत्व सुख का अनुभव करती हुई आंखें बंद किए खड़ी थी... और मेरा दोस्त... वह तो अपने लण्ड  को ऐसे  हिला रहा था मानो मेरी  दीदी को अपने लण्ड पर बिठा के उछाल रहा हो....

 साले मेरा मन कर रहा है तेरी रूपाली दीदी को अभी यही छत की रेलिंग  पर  झुका की रंडी की गांड मार लू..... बोलते बोलते मेरे दोस्त ने अपने औजार को निचोड़ के रख दीया....


 बगल वाले छत पर दिनेश और रवि की हालत भी कुछ इसी प्रकार की थी... उनके मन में भी कुछ इसी प्रकार की  इच्छाएं जग गई थी... शायद इसीलिए अब  दिनेश से रहा नहीं गया और वह छत  से कूद के हमारी छत पर आ गया... मेरी दीदी को इस बात का एहसास तब हुआ जब दिनेश उनके बिल्कुल पास आ गया... दिनेश की आंखों में हवस और उसकी पैंट में खड़े मोटे लंबे  बांस को देखकर मेरी  दीदी घबरा गई और पीछे की  तरफ हटने लगी... दिनेश ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की तो मेरी दीदी भागने लगी...

 भागकर मेरी दीदी हमारे कमरे की तरफ  ही आने लगी... मेरी तो गांड फट गई कि कहीं मेरी दीदी इस कमरे में ही ना घुस जाए और मेरे दोस्त को ऐसी हालत में देख ले... पर दिनेश ने मेरी दीदी को पकड़ लिया कमरे में घुसने के ठीक  पहले हमारी खिड़की के सामने जिसके पीछे मैं और मेरे दोस्त खड़े थे...

  कहां भाग रही है बहन की लोहड़ी.... दिनेश ने मेरी दीदी का हाथ पकड़ते हुए  कहा.

 देखो कुछ ऐसी वैसी हरकत मत  करना... मुझे डर लग रहा है.. मेरी रूपाली दीदी  न सर झुका के जवाब दे दिया उसे...

 हम दोनों को अब उनकी बातें साफ-साफ सुनाई दे रही थी... बस एक खिड़की का फासला था हमारे बीच...

 मुन्नी ने मेरी दीदी का दूध पीना बंद कर दिया था .वह भी डर गई थी और दिनेश को टुकुर-टुकुर देख रही थी...... मेरी रूपाली दीदी की एक  चूची अभी भी चोली के बाहर थी दूध से लथपथ.. 

 मुझे भी तेरा दूध पीना है.... दिनेश ने अजीब सी डिमांड मेरी दीदी के सामने रख दी.. मेरी दीदी शर्म के मारे लाल हो गई...

 देखो तुम अपने वादे से मुकर रहे हो... हमारी बात तो बस दिखाने भर की हुई थी.. दीदी ने शर्माते हुए  कहा.

 हां साली मैंने वादा किया था... पर अब मेरा मूड बदल गया है देख कर.... मुझे तो बस पीना है तेरी  छाती का दूध.. दिनेश की आंखें वासना से लाल हो रही थी...

 उसने अपने एक हाथ की उंगलियों से मेरी दीदी की  गुलाबी चूचक पर लगे हुए दूध की  बूंदों को लपेटा और अपने मुंह में ले लिया..

 उसकी हरकत से मेरी दीदी  सिसक उठी....

आह , उई ई ओह्ह.... दिनेश ऐसा मत करो.... यह तो छोटे बच्चों के लिए होता है.... मेरी बात  को समझो.. रूपाली दीदी ने सिसक  के कहा...

 साली मुझे मत सिखा क्या बच्चों के लिए होता है और क्या  मर्दों के लिए.... तेरा पति भी तो पीता होगा ..रात भर .... खुद अपनी चूचियां पकड़ कर उसे पिलाती होगी  रंडी तु और मुझे नखरे दिखा रही है.. बोलते बोलते दिनेश ने मेरी रूपाली दीदी की खुली हुई चूची को अपने हाथ में  दबोच कर दबाना शुरू कर दिया... मेरी दीदी की चूची से दूध की धार निकलने लगी....

हाए राम!.... आह , उई ई मम्मी... दिनेश..... यह क्या कर  रहे हो.... आह  प्लीज छोड़ दो.... आह ... कोई देख लेगा.... मेरी रूपाली दीदी  बिलबिला उठी... गुहार लगा रही थी मेरी दीदी दिनेश से...

 पर दिनेश ने मेरी दीदी की गुहार पर ध्यान नहीं दिया बल्कि उसने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए मेरी दीदी की चूची को अपने मुंह में भर लिया  और सरप सरप दूध पीने लगा.. जितना बड़ा हो सकता था उतना बड़ा मुंह खोलकर उसमें मेरी दीदी की चूची को भर कर दिनेश पी रहा था... मेरी दीदी की आंखें बंद हो गई और वह सिसक  रही थी...…. आह... कोई देख लेगा... हाय राम..... रवि भी देख रहा है...उई ई ओह्ह मां..... दांत क्यों काट रहे हो.... बोलते हुए मेरी दीदी चीख उठी थी.... दिनेश ने दीदी के गुलाबी निपल्स पर दांत काट लिया था...

 हरामजादा रवि ना सिर्फ देख रहा था बल्कि  छत कूद के हमारी छत पर आ गया था और मेरी दीदी और  दिनेश से कुछ ही कदम की दूरी पर खड़ा था.... उसने अपना मोटा लंबा काला 10 इंच का लण्ड पैंट से बाहर निकाल रखा था और मेरी दीदी की तरफ खड़ा करके अपने हाथ में पकड़े हुए  था...

 दिनेश....आह... तुम्हें मेरी कसम.आहआह.... रुक जाओ ना...आहआह... मेरी दीदी ने  बिलखते सीसकते हुए कहा.

 दिनेश ने मेरे रूपाली दीदी की बात मान ली... और उनकी चूची को अपने मुंह से आजाद कर दिया.... उसके चेहरे और मुंह पर मेरी दीदी  का दूध लगा हुआ था ठीक वैसे ही जैसे हिरनी का शिकार करने के बाद शेर के मुंह पर खून लगा होता है....

 साली रंडी अपनी चोली खोल .. मुझे तो तेरा दूध पीना  है अच्छी तरह से... दिनेश ने कामुक तरीके से मुस्कुरा कर  कहा..

 प्लीज मेरी बात मान जाओ... आज के लिए.. घर में सब लोग हैं और छत पर कोई भी आ सकता है... मैं बर्बाद हो जाऊंगी मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी.. मेरी दीदी  लगभग  रोने ही लगी थी...

 साली  रांड... ज्यादा नखरे मत दिखा... आज अच्छे से पी लेने दे मुझे तेरा दूध... बोलते हुए दिनेश ने मेरे रूपाली दीदी की गोद में से  मुन्नी को खींच लिया और सामने पड़ी हुई खटिया पर मुन्नी को  लिटा दिया...


 मेरी दीदी खड़े-खड़े रोने लगी... जालिम दिनेश ने  मेरी दीदी के रोने की परवाह किए बिना बड़ी तेजी से उनकी चोली खोल  दी.. दिनेश को अच्छी तरह पता  था कि मेरी दीदी के  चोली के हुक कैसे खोलते हैं...

 सुनील ने मेरी रूपाली दीदी की चोली खोल के नीचे जमीन पर फेंक दी... दीदी ने  ब्रा  तो पहनी नहीं थी सो  उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां दूध की तरह सफेद और दूध से भरी हुई दिनेश के सामने  अकड़ के खड़ी थी.. गुलाबी निप्पल खड़े खड़े .... दिनेश ने बिना देर किए अपने मजबूत हाथों में मेरी दीदी के दोनों बड़े उभारों को दबोच लिया और दबाने लगा... नीचे झुककर  मेरी दीदी की दोनों चुचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर चूसने लगा दिनेश...


" उं उं ,छोड़ न हट... दिनेश....... पागल हो  क्या.... कोई आ जाएगा...…. आह , उई ई मां... रवि तुम ही समझाओ ना दिनेश को...…. आह , ... यह तुम क्या कर रहे हो... मेरी दीदी की निगाह जैसे ही रवि पड़ी वह चीख उठी...

 रवि तो मैं रूपाली दीदी के बिल्कुल पास खड़ा था... और देख रहा था दिनेश की हरकतें मेरी दीदी के साथ.... उसने अपनी पैंट की जिप खोल रखी थी और उसके हाथ में उसका मोटा खड़ा ,कड़ा खूब भूखा ,तन्नाया ,... मुसल था..जैसे संपेरा कोई पिटारा खोले और खुलते ही मोटा कड़ियल जहरीला नाग फन काढ़ कर खड़ा हो जाए। काफी बड़ा और खूब मोटा लण्ड है रवि  का.. मैंने बिल्कुल पास से देखा....... असलम और जुनैद से भी बढ़कर... मैंने मन ही मन  तुलना की....ये देख के मेरी आँखे फटी रह गयी...


आह , उई ई ओह्ह.... दांत से मत काटो ना प्लीज....आह  ओह्ह... कुछ दिनों में मेरे पति आने वाले है.ओह्ह.... उनको निशान देखकर पता चल जाएगा.......

 मेरी दीदी  बिलबिला  उठी थी... वह रोते हुए  बोली... उनकी आंखें बंद होने लगी थी... क्योंकि दिनेश ना सिर्फ मेरी दीदी का दूध पी रहा था बल्कि वह अपने दांतो से निशान भी लगा रहा था...


 साली रंडी... देखने दे उसे भी... उस गांडू को भी तो पता चले.... मैं तो उसके सामने तुझे पेलूंगा रंडी तेरा लहंगा उठा के..... दिनेश ने मेरी दीदी की चूची पर एक और  बाइट लेने के बाद  मुंह ऊपर उठा कर कहा... साथ ही साथ उसने अपना एक हाथ मेरी दीदी के लहंगे के अंदर घुसा दिया... और मेरी दीदी की फुलझड़ी को अपनी उंगलियों से  मसल  डाला..... उसने दोबारा मेरी दीदी की एक चूची को अपने दांतों में दबा लिया... उसका एक हाथ मेरी दीदी की पतली कमर पर था और दूसरा हाथ मेरी दीदी की के लहंगे के अंदर उनकी फुलझड़ी पर.........

 हाय राम... दिनेश मेरी मजबूरी को समझो...…. आह...... मेरे पति बहुत सीधे साधे इंसान है...…. आह…. आह... उनको अच्छी तरह पता है कि उस दिन जंगल में मेरे साथ  क्या-क्या किया था…. आह…. आह  असलम और जुनैद ने...…. आह..... वह मेरी मजबूरी समझ गए.. मेरा बलात्कार हुआ था.......…. आह…. आह... प्लीज मेरी कसम उनके सामने कुछ ऐसी वैसी हरकत मत करना कि डूब के मर  जाने के अलावा मेरे पास कोई रास्ता  रहे.... सिसक सिसक कि मेरी रूपाली दीदी दिनेश को अपनी मजबूरी बता रही थी..


 दिनेश तो उनकी बातें शायद सुन भी नहींरहा था... वह लगा पड़ा था मेरी दीदी को  चूसने में...

 देख  रूपाली.... उस दिन जंगल में जो हुआ था हम दोनों को भी पता है...  तूने ही बताया था.. तेरा गांडू पति भी जानता है वह ....तेरा चुटिया भाई... उसके सामने ही तो तेरी बजाई थी उन दोनों ने... वह तुझे फिर फोन करेंगे और तुझे बुलाएंगे.. उन्होंने तुम्हारी वीडियो भी तो बना लि  है.... तुझे जाना ही पड़ेगा.... तेरे गांडू पति में इतना दम नहीं है कि तुम्हें उन गुंडों के चंगुल से निकाल सके..... जब वह फोन करे तो तुम मत उठाना... बाकी सब मैं संभाल लूंगा.. मेरे पापा एमएलए हैं तुझे तो पता ही है कि मेरी पहुंच कितनी दूर तक है... बस तू भी मुझे खुश कर दे... तेरे नाम का बहुत सारा मक्खन निकाल चुका हूं आज तू भी कुछ मेहनत कर.... बोलते हुए रवि मेरी दीदी के पीछे आ गया और उनको अपनी बाहों में जकड़ लिया.. और उसका मोटा लंबा बांस सीधे मेरी दीदी की गांड की दरार के बीच....  शुक्र है कि दीदी का लहंगा अभी भी उनकी  रक्षा कर रहा था.. रवि ने गांड के ऊपर से झटके देने भी शुरू कर दिए थे...

 हाय दैया .....  रवि ना मत करो ना...... आह , उई ई मां.. प्लीज इतना जोर से नहीं..... आह .... मेरी दीदी झटपटआने लगी थी... क्योंकि रवि ने मेरी रूपाली दीदी की गांड पर झटके देने के साथ-साथ उनका लहंगा भी ऊपर उठाना शुरू कर दिया था...

 नीचे दिनेश अपने घुटनों के बल बैठ गया और उसने मेरी दीदी के लहंगे का नाड़ा खोल दिया... नाड़ा खुलते ही मेरी दीदी का लहंगा जमीन पे पहुंच गया.... एक झटके में उसने मेरी दीदी की पैंटी को उनके घुटनों तक पहुंचा दिया...

 उसने मेरी दीदी की टांगों को जबरदस्ती पकड़ के अलग-अलग किया.... उनकी गुलाबी फुलझड़ी दिनेश के चेहरे के सामने थी.... उसने अपनी लंबी जीभ बाहर निकाली और मेरी दीदी की गुलाबी चिकनी योनि पर लहरा दिया... भूखे कुत्ते की तरह चाटने लगा मेरी दीदी की गुलाबी योनि को दिनेश..... ऊपर से रवि मेरी दीदी की गांड पर अपने  मोटे काले लंबे  बांस  को टीका के खड़ा था... उसके दोनों हाथ मेरी दीदी की दोनों चूचियां  थी जिनको वह मर्दन कर रहा था.. दूध निकल के झुके हुए दिनेश  पर गिर रहा था......


 हाय मैं मर जाऊंगी.... हाय दइया ...... दिनेश.... मत करो  ना.... आह , उई ई ओह्ह... मेरा भाई भी घर में है...इशह ! क्या करते हो? ऊई माँ ! अह्ह्ह ! आहह… ओइंआ ! मान भी जाओ ना .. आहह !’...

 मेरी दीदी आंखें बंद  किए हुए बिलख रही थी सिसक रही थी चीख रही थी.....

 दिनेश तो मेरी रूपाली दीदी की 'फूल्झड़ी' में जीभ घुमा रहा था;...

 रवि मैं तुम पर भरोसा कर   रही हूं.... बोलते हुए मेरी दीदी ने हाथ पीछे किया और  अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया रवि के काले मोटे लंबे  मुसल को.... मेरा मुसल भी खड़ा हो गया दीदी की हरकत देखकर... मेरा दोस्त नीचे नंगा बैठा था...  पानी निकल गया था उसका... मुरझाया हुआ  पकड़कर वह सामने का नजारा देख रहा था...

 साले तू भी मुट्ठ मार   ले... उसने मुझसे कहा...

 नहीं यार ऐसा करना ठीक नहीं है मेरी दीदी है .... मैंने धीरे से कहा..

 हिला ले रंडी रूपाली के भाई....  तुझे आराम मिलेगा... तेरी दीदी तो मजा ले रही है.... और तू अपना छोटा चेतन पकड़ कर बैठा देख रहा है... मेरे दोस्त ने कहा...

 उसने मेरा  देख लिया था उभार...

 देख मैं तभी  हिला लूंगा जब तुम मुझसे वादा करें कि यह बात किसी को भी नहीं  बोलेगा.. तुमने तो सुना ही जंगल वाली बात.... मैंने उसे कहा...

 हां बहन चोद तू टेंशन मत ले.... मुझे समझ आ गया कि तेरे  दीदी का क्या चक्कर चल रहा है.... मैं किसी को नहीं बताऊंगा... मैं तो बस यह चाहता हूं कि तू भी शांत हो  जा....... मेरे दोस्त ने मुझे दिलासा.... दिया...

 मैं अपने छोटे से लंड को पेंट के बाहर निकाल के हिलाने लगा.. ठीक उसी प्रकार से जैसे मेरी  दीदी हाथ पीछे करके रवि के लंड को  मेहंदी लगे हाथ में ले कर ऊपर नीचे कर रही थी.... दिनेश मेरी रूपाली दीदी की फुलझड़ी  को चाट चाट के और गुलाबी बना रहा था...


 मेरी रूपाली  दीदी अपने हाथ में रवि के लंड को हिला रही थी....लेकिन हैरान करने वाली तो उनके लंड की मोटाई थी.. देखने से ऐसा लग रहा था कि शायद उसकी गोलाई दीदी के हाथ में नहीं समा पा रही थी, कम से कम मेरी कलाई जितना मोटा लंड था… एक बार तो मेरा गला सुख गया.. मेरी दीदी खूब जोर लगा रही थी... शायद उनका इरादा हिला हिला के  रवि का माल निकालने पला हिला के  रवि का माल निकालने पर था... पर मेरी दीदी गलत थी...

 एक झटके में उसने मेरी रूपाली दीदी को अपनी गोद में उठा  लिया... उसकी हरकत देखकर दिनेश भी हतप्रभ हो गया.... दीदी की फुलझड़ी में घुसा हुआ उसका  जीभ बाहर निकल गया....

 रवि ने मेरे दीदी को छत की रेलिंग के सहारे टिका दिया.... मेरी रूपाली  दीदी छत की रेलिंग पर  हाथ टीका घोड़ी बन गई थी...

 दिनेश नीचे बैठ गया था पूरा नजारा देख रहा था .... बड़ी तेजी से उसने खुद को नंगा कर दिया...

 रवि ने मेरी रूपाली दीदी की गांड को दबोच लिया... और उनकी बड़ी गांड रवि के सामने थी.... मेरी दीदी की गांड का छेद काफी बड़ा लग रहा था.... आपको तो पता ही है क्यों...... रवि को भी पता चल चुका था..... उसने बिना देर किए हुए अपना मोटा मुसल मेरी  रूपाली दीदी की गांड की छेद पर टीका  एक जोरदार धक्का मारा.... उसका आधा लौड़ा मेरी  दीदी की गांड के छेद में समा गया... मेरी रूपाली दीदी की गांड का छल्ला पार करके रवि का मोटा मूसल मेरी दीदी की गांड में समाया हुआ था..


 उसने फिर दूसरा झटका दिया... फिर तीसरा......उई ई ओह्ह फट गई...क्या करते हो? ऊई माँ ! अह्ह्ह ! आहह… ओइंआ !... मेरी रूपाली दीदी  चीख रही थी...

कितना मादक था यह नजारा ! बता नहीं सकता दोस्तो.. शब्द कम पड़ रहे हैं..

और उधर वो दोनों हाथों से दीदी के मोटे चूतड़ों  को थाम के उनकी गांड के  भीतर झटके मारे जा रहा था....

हे भगवान ! क्या लंड था उस आदमी का.. ! किसी सेक्स मूवी की तरह एक फुट लंबा और इतना मोटा..... हर झटके के साथ मेरी रूपाली  दीदी बिलख  रही थी....

‘आह.. आहह !’ क्या मस्त चूतड़ थे दीदी के ! दिल तो कर रहा था कि पूरी जिंदगी दीदी की गाण्ड ही चाटता रहूँ.. मेरा छोटा चेतन अपने हाथ में था.....

 मेरी रूपाली दीदी के मुँह से एक कामुक आहह निकल गई.. इतनी कामुक कराह थी कि मैं तो झड़ने वाला था…

दोनों के मुँह से कामुक आवाज़ें आ रही थी.. आहह म्‍म… ओह्ह…

 रवि ने अपना लंड  मेरी रूपाली दीदी की गांड में जितना हो सकता था उतना अंदर ठेल  दीया...

दूध सी गोरी चूचियाँ.. मसली जाने की वजह से लाल हो गई थी.. उनकी  घुंडियाँ एकदम कड़क हो गई थी.. फिर उसने ज़ोर ज़ोर से चूचियो को मसलना शुरू कर दिया..


अब दीदी के मचलने की बारी थी..


वो बस कसमसा रही थी.. बेचैन हो रही थी.. आहह… ओह्ह्ह… आइ… ई… यई…


और कामुक आवाज़ में कुछ कुछ बोल रही थी… अम्म आह.. और.. आउच हह.. आराम से… एम्म्म… हाँ पियो इन्हे.. दूध निकालो इनमें से.. निचोड़ लो सब कुछ आज.. आअहह…

 मेरी रूपाली दीदी अब रंडियों की तरह आवाज निकाल रही थी....

मैं भी अनायास ही मुस्कुरा दिया..


अब वो इस तरफ से दीदी पर चढ़ रहा था.. इस वक़्त उसकी पीठ मेरी तरफ थी और वो दीदी की टाँगों के बीच था.. उसने मेरी  दीदी के बालों को पकड़ रखा था अपने हाथ से... उसके झटकों ने मेरी रूपाली दीदी की गांड फाड़  के रख दी थी....

सिर्फ़ कुछ इंच की दूरी पर मेरी दीदी की पावरोटी जैसे फूली हुई चूत थी.. दोनों फांकों पर हल्के बाल थे.. चूत बहुत पनियाई हुई थी.. और लबलबा रही थी… मानो चीख चीख कर लंड माँग रही हो।

 मेरी  रूपाली दीदी की साँस अब बहुत तेज़ चलने लगी थी- ..आहह..एम्म ! चोदो मुझे.. ! प्लीज़ मुझे चोदो…आह ह्ह्ह्ह.. और मत तड़पाओ… मेरी दीदी छत  की रेलिंग पकड़कर चीख रही थी और  पीछे से झटके पे झटके दिए जा रहा था रवि.....

दीदी की गाण्ड अपने आप ऊपर की तरफ उठ कर लंड को अंदर लेने की कोशिश कर रही थी मगर रवि को उन्हें तड़पाने में मजा आ रहा था... वह मेरी दीदी की गांड में गोल गोल घुमा रहा था अपने मोटे काले लंबे मुसल को...

  अब तो मेरी रूपाली दीदी की पनियाई चूत और जोर से बहने लगी और उनका चूतरस उनकी चूत से बहता हुआ उनकी गाण्ड के छेद तक चला गया..

 मेरी दीदी के चूतरस  ने  लुब्रिकेंट का काम किया और मेरी दीदी की गांड में रवि का लोड़ा खूब तेजी से अंदर बाहर होने लगा...

चूत और गाण्ड पर चूतरस लगे होने की वजह से बहुत चमक रही थी ऐसा लग रहा था मानो मेरे आगे जन्नत की सबसे सुंदर चूत और गांड है… 

तभी रवि ने अपना मोटा मुसल मेरी दीदी की गांड  म से खींच कर बाहर निकाल लिया.... उसने अपना लौड़ा  मेरी रूपाली दीदी की चूत के मुहाने पर रख कर चूत और चूत का दाना रगड़ने लगा..


एक ही रगड़ ने दीदी के मुँह से चीख निकलवा दी.. ओइं आह्ह्हह्ह ! आअहह प्लीज़ और मत तड़पाओ मुझे ईईए ! अह.. इस…म्‍मम…


साँसें बहुत ज़ोर से चल रही थी दीदी की !


इधर उनकी गाण्ड और जोर से मचल मचल कर लंड को अंदर लेने की कोशिश कर रही थी… और तभी उसने लंड को चूत पर टिका कर एक ज़ोरदार झटका दिया.. और आधा लंड दीदी की पनियाई चूत के अंदर उतार दिया..


“आह ह्ह्ह्ह…” वो आदमी दीदी की चूत की गर्मी का एहसास पाते ही कराह उठा..


उधर दीदी भी दर्द और काम से मचल कर चीख उठी.. …उई माँ …आई ईई ई…

 फिर तो  रवि ने 2-3 झटके और मारे और पूरा लंड मेरी दीदी की नाज़ुक चूत के अंदर उतार दिया। उस वक़्त तो ऐसा लग रहा था मानो किसी ने ज़बरदस्ती यह लंड चूत में फंसा दिया और अब यह नहीं निकलेगा...


मैं त… त..तो… तो… गा… ग… गाइइ.. मेरी रूपाली दीदी  झड़ने लगी... रवि ने अपना मोटा लौड़ा मेरी दीदी दीदी की योनि से बाहर निकाल लिया और उन्हें आराम से  पूरा मौका दिया झड़ने का..... फिर उसने मेरी रूपाली दीदी को नीचे झुका दिया... बाल पकड़ के उसने मेरी दीदी के मुंह में लौड़ा  दे दिया...

 अपनी गांड से निकला हुआ लौड़ा रवि का अपनी फुलझड़ी में झटके खाने के बाद मेरी रूपाली दीदी उसे मुंह में लेकर चूस रही थी....

 रवि ने मेरी दीदी को पूरा  नीचे झुका रखा था... उसका लौड़ा मेरी दीदी के मुंह में अंदर बाहर हो रहा था......

 रवि का मोटा लौड़ा मेरी रूपाली दीदी की आलमोस्ट हलक तक धंसा था। मेरी दीदी के तालू से रगड़ता हुआ अन्दर तक , मेरी दीदी चोक हो रही थी , उनके गाल दुख रहे थे उनका मुंह फटा जा रहा था पर फिर भी मेरी रूपाली दीदी जोर जोर से चूस  रही थी...

साली ,तेरी माँ का भोसड़ा चोदूँ , क्या मस्त माल पैदा किया है , क्या चूसती है जानू ,चूस कस कस के ,... रवि मेरी दीदी को बोल रहा था..

और पल भर के लिए दुखते गालों को आराम देने के लिए मेरी दीदी ने मुंह हटाया और उसके तने लण्ड को साइड से चाटने लगी तो रवि से बर्दाश्त नहीं हुआ उसने दोबारा मेरी  रूपाली दीदी के मुंह में लौड़ा  जबरदस्ती   डाल दिया....ये देख के मेरी आँखे फटी रह गयी की  मेरी दीदी ने एकदम जड़ तक लण्ड घोंट लिया था , बेस तक लण्ड उनके मुंह में घुसा था लेकिन वो जोर जोर से चूसे जा रही थी।


मेरी रूपाली दीदी अब छत की फर्श पर अपने घुटने टीका के घोड़ी बनी हुई थी... रवि के मोटे खूंटे को अपने मुंह में भर के.. उनके गुलाबी होंठों के बीच में रवि मोटा सुपाड़ा  डाल के खड़ा था... जिसे वह  चूस रही थी... दिनेश अब रुपाली दीदी के पीछे आ गया और घुटने के बल बैठकर उनकी गांड के ऊपर अपना मोटा लण्ड  तान  के रख दिया...


 उसने मेरी दीदी के नितंबों के दोनों बड़े बड़े  भागो को पकड़ कर अपने दोनों हाथों से अलग अलग कर दिया.... मेरी  दीदी की गांड का छेद, जो एक सुरंग की भांति दिखाई दे रहा था, उसके  मुहाने पर दिनेश ने अपना  सुपाड़ा टीका किया... और एक जोरदार झटके के साथ ही उसका आधा लण्ड मेरी रूपाली दीदी की गांड के अंदर था...

 हाय दैया.....  दिनेश..... मर गई मां...


मेरी रूपाली दीदी अब छत की फर्श पर अपने घुटने टीका के घोड़ी बनी हुई थी... रवि के मोटे खूंटे को अपने मुंह में भर के.. उनके गुलाबी होंठों के बीच में रवि मोटा सुपाड़ा  डाल के खड़ा था... जिसे वह  चूस रही थी... दिनेश अब रुपाली दीदी के पीछे आ गया और घुटने के बल बैठकर उनकी गांड के ऊपर अपना मोटा लण्ड  तान  के रख दिया...


 उसने मेरी दीदी के नितंबों के दोनों बड़े बड़े  भागो को पकड़ कर अपने दोनों हाथों से अलग अलग कर दिया.... मेरी  दीदी की गांड का छेद, जो एक सुरंग की भांति दिखाई दे रहा था, उसके  मुहाने पर दिनेश ने अपना  सुपाड़ा टीका किया... और एक जोरदार झटके के साथ ही उसका आधा लण्ड मेरी रूपाली दीदी की गांड के अंदर था...

 

इस बार तो दिनेश ने हद ही कर दी...उस ज़ालिम ने बिना दर्द की परवाह किये , एक बार में पूरा मूसल पेल दिया जड़ तक , मेरी दीदी की गांड में....

उस सन्नाटे में मेरी दीदी की चीख निकल गई.. उनके मुंह में से रवि का मोटा सुपाड़ा बाहर निकल के  हिलने लगा... पर दिनेश को कोई परवाह नहीं थी... मेरी दीदी कुतिया की तरह , झुकी हुयी ,  उनके दोनों हाथों में रवि का मोटा  औजार था और दिनेश मेरी दीदी की चूंचियों को दबाते हुए ऐसे जोर जोर से निचोड़ रहे थे की क्या कोई जूस स्टाल वाला नारंगी निचोड़ेगा।

गपागप गपागप , सटासट सटासट....

वो पेल रहा था और मेरी दीदी लील रही थी , खुले आसमान के नीचे , ठीक अपने भाई की आंखों के सामने...

उह… उह्ह्ह… हां हां… मत करो ना… कब तक… ओह… मेरी गांड उह्ह्ह.... दया करो मुझ पर.... मेरी रूपाली दीदी की सिसकियों और चीखों को , सुनकर मैं तो झड़ गया... पर दिनेश....वो तो बस हचक हचक कर चोदने में जुटा था।

धक्के पर धक्के और साथ में , गालियों की झड़ी..

गदहे की जनी, जनम की चुदक्क्ड़ , तेरी सारी चुदवास मिट जायेगी , ऐसी चुदेगी...गाँव में न गिनती भूल जायेगी ,कितने लंड घुसे ,कितने निकले ,दिन रात सड़का टपकता रहेगा , किसी को मना किया न तेरी माँ बहन सब चोद दूंगा ... बोलने के साथ-साथ दिनेश मेरी रूपाली दीदी की  गांड में गोल गोल  घुमाने लगा अपना मोटा बांस...


" फाड़ दे साल्ली की बहुत बोल रही थी , दिखा दे उसे अपने लण्ड की ताकत आज। चोद ,चोद कस कस के। " इस बेवफा रंडी को.... रवि भी दिनेश को  उकसा  रहा था... उसने फिर से अपना बांस मेरी रूपाली दीदी के मुंह में बाल पकड़कर  घुसा दिया...

उयी ई ओह्ह्ह , प्लीज दिनेश थोड़ी देर के लिए गांड से निकाल लो न ओह्ह ,जान गयी उहहह , दिनेश ने एक और जोरदार धक्का मारा और मेरी रूपाली दीदी की चीख फिर गूँज गयी।

" बोल , अब दुबारा तो छिनरपना नहीं करेगी जैसे नखडा चोद रही थी  बहन की लोड़ी... रवि बोला...

नहीं बस इसको बोलो एक बार निकाल ले ,... " मेरी  दीदी दर्द से गिड़गिड़ा रही थी। मेरी दीदी रवि का  चूसना भूल गई थी...

" निकाल तो लेगा ही लेकिन हचक के तेरी गांड मारने के बाद ,तू क्या सोच रही है तेरी गांड में लण्ड छोड़ के चला जाएगा। " रवि बोला और मेरी दीदी को   फिर से  अपना मोटा लण्ड चूसने पर मजबूर कर दिया...

उईइइइइइइइइइइ माँ.... मेरी दीदी सिसकी तो बस..

“तेरी माँ की , न जाने कितने भंडुवों से चुदवा के उसने तेरा जैसे गरम माल अपने भोसड़े से निकाला , उसका भोसड़ा मारूं ,मादरचोद " दिनेश उनको गालियां देने लगा... गपा गप गपा गप गपा गप... तकरीबन 5 मिनट तक मेरी दीदी के मुंह में और गांड में घपा घप चलता रहा.....

 उसके बाद दोनों ने अपनी पोजीशन चेंज कर ली.. दिनेश अब नीचे लेट गया था..... आजा मेरे रंडी   मेरे ऊपर.... दिनेश ने मेरी दीदी की कमर थाम  अपनी गोद में बिठा  लिया... अब आसन बदल गया था , मेरी  रुपाली दीदी दिनेश की गोद में थी.. दिनेश का लण्ड एक दम जड़ तक मेरी दीदी की करारी गुलाबी चूत में घुसा ,कभी वो मेरी दीदी के गाल चूमता तो कभी उभारों को चूसता। कुछ देर में मेरी दीदी खुद ही उसके मोटे खम्भे पर चढ़ उतर रही थी ,सरक रही थी ,चुद रही थी...

 रवि सामने खड़ा था... और मेरी दीदी उसके खड़े खूंटे को उसके पगलाए बौराए लण्ड को कभी अपनी चूचियों के बीच ले के रगड़ती तो कभी मुंह में ले चुभलाती तो कभी चूसती।

और वो भी मेरी दीदी  की  चूचियों  की ऐसी की तैसी कर रहा था।

 

अब दिनेश और रवि ने मेरी रूपाली दीदी को सैंडविच बना लिया था.. और ऊपर से नीचे से मेरी दीदी के दोनों छिद्रों में गपा गप गपा गप गपा गप दिए जा रहे थे मोटा लंड .... मेरी दीदी भी ताल से ताल मिला कर उनका साथ दे रही थी.... तकरीबन 10 मिनट तक लगातार मेरी दीदी की गांड और बुर  में फुल स्पीड से तूफान   मचा डाला उन दोनों  ने....

हर धक्के में लंड सुपाड़े तक बाहर निकालते और फिर पूरी ताकत से लंड जड़ तक , गांड  और  बुर  के अंदर ...मेरी दीदी का बुरा हाल था..

जैसे कोई धुनिया रुई धुनें उस तरह ..

 साथ में मेरी रूपाली दीदी की चूंचियां उनके मजबूत हाथों में , बस लग रहां था की निचोड़ के दम लेंगे।

कुछ ही देर में दर्द मजे में बदल गया  रूपाली दीदी का...चीखों की जगह सिसिकिया... उन दोनों के हर धक्के का जवाब मेरी दीदी भी धक्के से अब दे रही थी।

आधे घंटे से ऊपर ही हो गया , धक्के पे धक्का... मेरी रूपाली दीदी तो लगभग 4 बार झड़ गई थी... और फिर दिनेश और  रवि ने भी मेरी दीदी की गांड और चूत  म एक साथ  अपना मोटा मुसल पूरी ताकत से एकदम अंदर तक ,... डाल के पिचकारी मार दी.. मेरी दीदी के दोनों क्षेत्रों को भर दिया मलाई से अपनी..... मेरी रूपाली दीदी की जाँघों पर भी गाढ़ी सफ़ेद थक्केदार मलाई  बह रही थी।...

 तीनों ही अब थक के चूर हो गए थे... छत पर बिल्कुल शांति थी... मेरी दीदी तो जैसे बेहोश हो गई थी....

 कुछ देर और उसी हालत में सुस्तआने के बाद  वह तीनों उठ के खड़े होकर छत पर ढूंढ ढूंढ कर अपने कपड़े पहनने लगे.....

 मेरी  रूपाली दीदी के खुले उभारों पर दांतों के और नाखूनों के निशान काफी ऊपर तक , साफ दिखाई दे रहे थे.... बड़ी मुश्किल से मेरी दीदी खड़ी हो  होकर लड़खड़ाते हुए अपना लहंगा और चोली पहनने लगी... उनकी टांगे  लड़खड़ा रही थी.... अपनी चोली के धागों को  बांधने के बाद मेरी  रूपाली दीदी शिकायत भरी नजरों से दिनेश को देख रही थी... और दिनेश बड़ी बेशर्मी से मुस्कुरा रहा था..

 मेरी जान ...बुरा क्यों मान गई... इतने दिनों बाद तुझे पाकर  मैं थोड़ा  बहक गया था... दिनेश ने बड़े प्यार से मेरी रूपाली दीदी को कहा..


 देखो दिनेश.. हम दोनों के बीच में जो कुछ भी था पूरा गांव जानता है. पर अब यह पुरानी बात हो चुकी है... ना सिर्फ मैं एक शादीशुदा औरत हूं बल्कि बच्ची की मां  भी हूं... मेरी कुछ मर्यादा है... अब मैं तुम्हारी नहीं हूं अब मैं किसी और की  हूं.. अपनी मर्यादा की सीमा  तोड़कर मैं तुम्हारे पास मदद के लिए इसलिए आई थी कि तुम मुझे पहले से जानते हो..... पर आज तुम दोनों ने मेरी मजबूरी का फायदा उठाया  है.... मेरी दीदी ने दोनों को ही कहा..


 रूपाली सुनो मेरी बात... हम लोग बुरे इंसान नहीं है... बस हम लोग थोड़ा बहुत इंजॉय करना चाहते है..... माना कि तुम्हारी मजबूरी का फायदा उठा कर आज हम दोनों ने तुम्हारी मारी है... पर इसके बदले में तुम्हें मजा भी तो दिया है... बार-बार पानी छोड़ रही थी तुम..... रवि ने कहा...

 रवि की बातें सुनकर मेरी रूपाली दीदी शर्म से पानी पानी हो गई..

 फिर भी उन्होंने सर उठाके  कहा -    रवि.... आज जो हुआ सो हुआ... मैं इसे भूल जाऊंगी.. तुम दोनों भी भूल जाना.. पर जिस मुसीबत में मैं हूं... जिसकी खातिर मैं तुम्हारे पास  आई... तुम दोनों को तो पता ही है ना.... बोलते बोलते मेरी दीदी रुक गई.. उनकी आंखों में आंसू आ गए...

 हां वह असलम और जुनैद वाला कांड... जो जंगल में हुआ था उसी की बात कर रही हो ना,...... रवि ने पूछा...

 हां वही कह रही हूं.... जुनैद ने मेरा जीना हराम कर रखा है... रात को फोन करता है और गंदी गंदी बातें  करता है... दीदी ने रोते हुए कहा...

 क्या गंदी गंदी बातें करता है मुझे अच्छी तरह बताओ... रवि ने गंभीरता से कहा.

 रात में वीडियो कॉल करता है... कभी-कभी तो दिन में भी करता है... मुझे नंगी होने  के लिए बोलता है... फिर कभी मूली  तो कभी गाजर .. अंदर घुसआने के लिए कहता है... आगे भी और पीछे भी.... बोलते हुए मेरी दीदी की आंखों के आंसू  रुकने का नाम नहीं ले  रहे थे...


 और तुम उसकी हर बात मानती हो... रवि ने कहा...

 तुम ही बताओ और मैं क्या कर सकती हूं.... उन कमीनों ने मेरी वीडियो बना लि है... बार-बार धमकी देते हैं कि वह वीडियो वह लोग इंटरनेट पर डालने की...... बोलो भला ...उनकी बात ना  मानने का मेरे पास कोई रास्ता  नहीं है... उस   कुत्ते ऑटो वाले सुरेश ने मेरी पूरी वीडियो निकाली थी जब वह दोनों गुंडे जंगल में मेरा रेप कर रहे थे... मेरी दीदी बोली..


 तुम्हारी बात कुछ हद तक तो सही है.... पर तुम्हारे " रेप"  का वीडियो जुनैद ने मुझे भी भेजा था... जब मैंने तुम्हारे बारे में बात की थी उससे... जिस तरह तुम जुनैद और असलम के लण्ड पर उछल रही थी.. उसे देखकर तो मुझे कुछ और ही लगा..... रवि ने कामुक लहजे में कहा...

 उसकी बातें सुनकर मेरी दीदी शर्म के मारे जमीन में गड़ी जा रही थी..

 रवि की बातें पूरी तरह गलत भी नहीं थी... क्योंकि जंगल में मेरी दीदी के साथ जो कांड हुआ था वह मेरी आंखों के सामने  हुआ था... भले ही आखिरी राउंड में मैं झोपड़ी के बाहर खड़ा था और सुन रहा था उनकी  कामुक  चीखें और सिसकियां.... पर मेरी मौजूदगी में भी दीदी ने कई बार चरम सुख का अनुभव किया था...


 शर्म के मारे मेरी दीदी की आंखें जमीन में गड़ी हुई थी पर फिर भी वह बोली.... रवि मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूंगी... मेरा बदन मेरे काबू से बाहर हो चुका था.... मैंने भी सुख लिया... पर इसका मतलब यह नहीं कि वह सारी घटना मेरी मर्जी से हुई... मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे साथ ऐसा होगा..... मेरी रूपाली दीदी  शरमाते हुए बोल रही थी..


 देख मेरी जान... मुझे तेरे बारे में सब कुछ  पता है.. तू पहले भी एक बहुत अच्छी लड़की थी... और आज भी एक बहुत अच्छी औरत और मा  है.... पर एक बात समझ कि तू बहुत बुरी हालत में फंस चुकी है... असलम और जुनैद कोई छोटे-मोटे  गुंडे नहीं है...  जुनैद तो फिर भी रवि की जान पहचान का है और इसकी थोड़ी बहुत बात भी मानता है... पर साला बहुत बड़ा हारामी है असलम.... उसने तो कितने मर्डर और ना जाने कितने रेप किए है....... तुम्हें तो पता ही होगा कि उसने  हमारे गांव की ना जाने कितनी लड़कियों को सड़क पर दौड़ा दौड़ा  कर चोदा है सब लोगों के सामने... शादी के पहले मेरी सुचिता दीदी का उसने क्या हाल किया था तुम सबको तो अच्छी  पता है...... मेरे पापा ने पुलिस में रिपोर्ट दी .. उसका क्या हुआ... पुलिस असलम का झांट भी नहीं  उखाड़  सकी...... इस बार दिनेश बोल रहा था... उसकी आंखों में भी चिंता थी...

 सुचिता दीदी से  याद आया... दिनेश की बड़ी बहन..... मेरी रूपाली दीदी से 4 साल  बड़ी... पर दोनों पक्की सहेलियां.... सुचिता दीदी वाली  कहानी आपको आगे  बताऊंगा.....

 देख यार पुरानी बातें भूल जा... इस समस्या का कुछ ना कुछ हल तो निकालना ही पड़ेगा... मुझ पर भरोसा रखो...जुनैद को मैं अच्छी तरह जानता हूं.... वह भी बुरा आदमी है पर मेरी बात को जरूर समझेगा... रूपाली तू विश्वास कर मेरा... रवि बोल रहा था..

 मुझे अब तुम दोनों की बातों का कोई विश्वास नहीं.. तुम दोनों ने आज मेरे साथ जैसा किया यहां अभी .. उसके बाद तो विश्वास करने के लिए कुछ नहीं बचा...... जुनैद ने मुझे कल धमकी दी कि  कल वह मेरे घर  आएगा और या तो मुझे उठा कर ले जाएगा यहां से या फिर सबके सामने  मेरे साथ  करेगा जो उस दिन जंगल में किया था... मुझे तभी भरोसा होगा जब तुम मेरे सामने उसे फोन करोगे... मेरी रूपाली दीदी ने अविश्वास भरी नजरों से रवि को देखते हुए   कहा...

 रवि भी लाचार हो गया मेरी दीदी की बातें सुनकर.... उसने फोन लगा दिया जुनैद को और लाउडस्पीकर ऑन कर दिया...


 हेलो कैसा है रवि.... फोन की दूसरी तरफ से जुनैद की  कड़कती आवाज गूंजी ....

 मैं अच्छा हूं जुनेद भाई आप बताओ आप कैसे हो... रवि ने जवाब दिया...

 मैं तो मस्त हूं तू बता भाई क्यों याद किया.... जुनेद बोला..

 जुनैद भाई... आपको बोला था ना हमारे गांव की  रूपाली के बारे में.... आ...ओ... उसी के बारे में बात करनी थी.... रवि बोला..


 …. आह बहन चोद..…. आह ... उस रंडी का यार नाम मत ले तू... मेरी रूपाली रांड का नाम  सुन मेरा लौड़ा टनटना जाता है... जुनैद बेहद कामुक आवाजें निकाल रहा था..


 मेरी बात तो सुन लो जुनैद भाई...  बोला  रवि

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