मेरी बहन अध्याय 2
झोपड़ी के अंदर एक बाल्टी में पानी भरा हुआ था... मेरी रूपाली दीदी अपने नंगे बदन को उस पानी से साफ करने लगी... मेरी दीदी ने अपनी योनि को भी साफ किया... जुनैद की मलाई से मेरी दीदी की बच्चेदानी भरी हुई थी... जैसे तैसे करके दीदी ने अपनी योनि की अंदर से जुनैद की मलाई को साफ किया..... दूसरी तरफ असलम अपने लोड़े पर जापानी तेल लगा रहा था.... और वह भूखे शेर की तरह लग रहा था... मुझे समझ आ रहा था कि अब मेरी संस्कारी रूपाली दीदी की अच्छे से ठुकाई करेगा असलम का भूखा लोड़ा... उसका लौड़ा भी कम से कम 10 इंच बढ़ा और काफी मोटा था..... अपने लोड़े को हाथ में थामे वह मेरी दीदी के पीछे आकर खड़ा हो गया... मेरी रूपाली दीदी झुकी हुई थी.... उसका तना हुआ लोड़ा मेरी दीदी की गांड पर आकर चिपक गया... बहुत सफाई कर ली तूने मेरी रानी... चल अब अपनी बच्ची को दूध पिला... बहुत भूखी है तेरी बच्ची... मेरा लौड़ा भी भूखा है तेरी गांड के छेद में घुसने के लिए.... मादरजात.... क्या मस्त रंडी है तू... रूपाली मेरी जान.. तुझे तो अपने लोड़े पर बिठा के जन्नत दिखाऊंगा... साली छिनाल.... देख तेरा भाई कैसे देख रहा है...... चल अब जल्दी कर रंडी... वरना अभी तेरी गांड मारूंगा साली..... असलम बोल रहा था.. वह कभी मेरी तरफ देख रहा था...कभी मेरी रूपाली दीदी की गांड की तरफ......
मेरी रूपाली दीदी ने चुपचाप मुन्नी को अपनी गोद में लिया और अपनी एक चूची मेरी भांजी के मुंह में दे दिया.... मेरी संस्कारी रूपाली दीदी बिल्कुल नग्न अवस्था में झोपड़ी के अंदर सूखी घास पे बैठ के अपनी चूची से मुन्नी को दूध पिला रही थी और जालिम असलम उनके सामने बैठा अपने घोड़े जैसे लोड़े को हाथ से हिला रहा था... वह मेरी प्यारी दीदी को प्यासी निगाहों से देख रहा था... उसकी आंखों में हवस थी.... साला मेरी दीदी को ऐसे देख रहा था जैसे उसने कभी किसी औरत को अपने बच्चे को दूध पिलाते नहीं देखा हो... मेरी दीदी की निगाहें शर्म के मारे झुकी हुई थी.... पर उनकी चूचियां तनी हुई थी.... गुलाबी निपल्स अकड़ के खड़े थे... मुन्नी तो मेरी दीदी की बाई चूची को पी रही थी.... और उनकी दाई चूची हिल रही थी... दीदी के कड़क गुलाबी निप्पल्स पर दूध की बूंदे उभर आई थी.... असलम से अब बर्दाश्त नहीं हुआ.... वह मेरी दीदी की जांघों पर लेट गया और उनकी चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा.... असलम मेरी दीदी के निपल्स को चबाने लगा था... वह मेरी दीदी का दूध पी रहा था चबा चबा के काट काट के.... दीदी के चेहरा देखने लायक था.... उनके होश उड़े हुए थे.... उनके नरम मुलायम होठ सूखे जा रहे थे.... अजीबोगरीब दृश्य था ... मेरी कमसिन संस्कारी रूपाली दीदी नंगी बैठी हुई एक चूची से अपनी बच्ची को दूध पिला रही थी और दूसरी चूची से गुंडे को... असलम ने तो अपना लण्ड भी मेरी दीदी के हाथ में थमा दिया था... और मेरी दीदी के हाथ के ऊपर हाथ रख कर वह उनसे अपना लण्ड ऊपर नीचे करवा रहा था.... मेरी दीदी तो लगभग मदहोशी की अवस्था में चली गई थी.... असलम का तकरीबन नौ इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड मेरी रूपाली दीदी के मेहंदी लगे हाथों में मुठियाया जा रहा था... मेरी दीदी विवश हो कि यह सब कर रही थी.... और मैं चुपचाप देख रहा था... मुन्नी दूध पीकर सो चुकी थी..... जुनैद मेरी दीदी के पास गया और उसने मुन्नी को मेरी दीदी की गोद से उठा लिया.... उसने मुन्नी को मेरी गोद में थमा दिया.....
संभाल अपनी भांजी साले... रंडी के भाई..... अपनी दीदी को दूध पिलाते देख रहा है मादरजात.... साला कैसे हिजड़ा भाई है तू..... जुनैद मुझे बोल रहा था.... उसका मुरझाया हुआ लोड़ा मेरी आंखों के सामने हिल रहा था.... वह अभी भी नंगा ही था..... इसी लोड़े से कुछ देर पहले उसने मेरे रूपाली दीदी की योनि में नई-नई गहराइयां ढूंढ निकाली थी.... मैंने चुपचाप मुन्नी को अपनी गोद में ले लिया....
जुनैद मेरे पास ही बैठ गया और अपने मुरझाए लंड को पकड़ के मेरी दीदी को देखते हुए दारु पीने लगा.....
दूसरी तरफ असलम अब बिल्कुल पागल हो चुका था.... उसने मेरी रूपाली दीदी को घोड़ी बना दिया था..... मेरी दीदी के बाल पकड़कर उसने मेरी दीदी की गांड की छेद पर अपना लौड़ा सेट कर रखा था.... मेरी रूपाली दीदी फिर से चीखने चिल्लाने लगी......
भगवान के लिए ऐसा मत करो मेरे साथ.... आपका बहुत मोटा है ... बहुत दर्द होगा.....उफफफफ...आआहहहऽऽऽऽऽ आअहहहऽऽ... मत करो ना प्लीज..... मेरी रूपाली दीदी रोते हुए बोल रही थी...
पर असलम कहां मरने वाला था.. वह तो मेरी दीदी की गांड मारने पर उतारू था....
साली रंडी छिनाल हरामजादी.... नाटक मत कर ... तेरी मां की... बहन की लोड़ी.... कुत्तिया ... अपनी गांड ढीली कर ...... असलम दांत पीसते हुए बोला था.....
मेरी दीदी छटपटा रही थी.... पर उसने मेरी दीदी के बाल पकड़ रखे थे.... मेरी दीदी हाथ-पांव पटक रही थी.... पर असलम की मर्दाना ताकत के आगे मेरी दीदी बेबस थी.... उसने मेरी रूपाली दीदी की गांड में एक जबरदस्त धक्का मारा अपने लोड़े का.... दीदी की आंखें उबल के बाहर निकल रही थी.... उनका मुंह खुल गया पर आवाज कुछ भी नहीं निकल पा रही थी..... दीदी की आंखों में आंसू थे... क्योंकि मेरी दीदी की गांड के छल्ले में असलम के लोड़े का सुपाड़ा अटक गया था.... दो-तीन और जोरदार झटके असलम ने मेरी दीदी की गांड के अंदर दिया... पर उसका लौड़ा आगे नहीं घुस पाया.... वाकई मेरी रूपाली दीदी की करारी गांड अपने अंदर उस मुसल को लेने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी.... पर बार बार मेरी दीदी के अंदर डालने की कोशिश कर रहा था वह ... सुपारा मेरी रूपाली दीदी की गांड के छल्ले में फंसा हुआ था... मेरी दीदी छटपटा रही थी.... असलम ने कई बार प्रयास किया पर उसका लौड़ा मेरी कमसिन रूपाली दीदी की नाजुक गांड के छल्ले को पार नहीं कर पाया.... थक हार कर उसने अपना लौड़ा मेरी दीदी की गांड में से खींच लिया... और अपनी लोड़े पर थूक लगाकर फिर से मेरी दीदी की गांड के अंदर डालने का प्रयास किया... पर वह सफल नहीं हो पाया..... जुनैद अपनी मस्ती में पूरा तमाशा देख रहा था... मेरी दीदी को चीखते चिल्लाते छटपटाते देखे उसका मुसल फिर से खड़ा होने लगा था.... ऊपर से दारू का नशा....
उधर असलम बहुत गुस्से में था... उसने अपने लोड़ा मेरी दीदी के होठों पर रख दिया....
चूस रंडी ... चूस मेरा लौड़ा.... चूस चूस मेरा लौड़ा गीला कर ... रंडी छिनाल.... असलम बड़बड़ा रहा था....
दीदी ने अपना मुंह खोलकर उसके मोटे सुपारी को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी....
असलम नंगा खड़ा मेरी दीदी के बाल पकड़कर उनके मुंह में अपना लौड़ा डाल कर चुपचाप खड़ा था और मेरी दीदी कुत्तिया बनी हुई उसका चूस रही थी...
थूक लगा के पूरा मेरे लोड़े को गीला कर साली रंडी.... मेरी आंड को मुंह में ले ले.... मेरी दीदी असलम के कहे अनुसार कर रही थी.... असलम के मोटे काले लोड़े को मेरी घरेलू संस्कारी रूपाली दीदी अपनी जुबान से गिला करने का प्रयास कर रही थी.... दीदी ने उसके लोड़े को अपने दोनों हाथों में थाम रखा था और बिल्कुल किसी रंडी की तरह चूस रही थी.... पर असलम इक जालिम मर्द था.... वह मेरी दीदी की मेहनत से संतुष्ट नहीं था...... उसने मेरी दीदी के सर को मजबूती से थाम के एक जोरदार झटका मेरी दीदी के मुंह में दिया... उसका आधा लोड़ा मेरी दीदी के मुंह में समा गया.... दीदी के मुंह से कू कू कू की आवाज निकल रही थी.... पर असलम की मजबूत पकड़ के आगे दीदी बिल्कुल लाचार हो गई थी.... वह मेरी दीदी के मुंह को चोदने लगा... साली रंडी.... पूरा मुंह खोल.... ले मेरा लोड़ा बहन की लोड़ी.... कुत्तिया हरामजादी आंखें खोल साली..... आह.. चूस.. ह्म्म्म्म... तेरी मां का..... मेरी आंखों में आंखें डाल कर देख रंडी... असलम मेरी दीदी के मुंह में अपना लौड़ा अंदर बाहर करते हुए उन्हें आदेश दे रहा था.... मेरी रूपाली दीदी ने आंखें खोली और असलम की तरफ देखने लगी ... असलम मुझे हवस का दरिंदा लग रहा था..... मेरी मृगनैनी दीदी की आंखों से आंखें चार होते ही उसका लौड़ा पूरी रफ्तार से उनके मुंह के अंदर बाहर होने लगा.... दीदी ने कनखियों से मेरी तरफ देखा.... उनकी आंखों में आंसू भरे हुए थे.... और मैं एक बेचारा भाई चुपचाप यह तमाशा देख रहा था.... मैंने अपना चेहरा जमीन में गाड़ दिया था शर्म और ग्लानि के मारे... हुंकार भरता हुआ असलम मेरी दीदी के मुंह को अपने लोड़े से ऐसी तैसी कर रहा था... हां साली रंडी तेरा मुंह ..आह.. साली रंडी.. चूस मादर चोद.. क्या मस्त लंड चूसती है कुतिया.. असलम बोल रहा था...
बहन चोद कुत्ते .... मस्त लौड़ा चुस्ती है तेरी रूपाली दीदी.... साले आज तेरी दीदी की गांड का चबूतरा बना दूंगा.... तेरा जीजा गांडू है... उसने तो तेरी दीदी की गांड का छेद भी अच्छे से नहीं मारा है आज तक.... चाहे कुछ भी हो जाए आज तो तेरी दीदी की गांड में मेरा लौड़ा डालकर खूब मारूंगा..... असलम मेरी तरफ देखते हुए कह रहा था...
मुझे तो समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं.....
प्लीज असलम भाई अब हमें जाने ...बहुत कर लिया आप लोगों ने मेरी दीदी के साथ.... हमारे घर में सभी लोग परेशान हो रहे होंगे.... हम किसी को भी नहीं बताएंगे कि क्या हुआ था ... मैं आपके आगे हाथ जोड़ता रहा हूं..... मैंने हिम्मत करके कहा..... पर असलम पर इस बात का ना तो कोई असर होना था ना ही हुआ....
जाने देंगे बहन चोद तुझे भी और तेरी बहन की लोड़ी को भी.... पर साले पहले तेरी दीदी की गांड का बाजा तो बजने दे..... बिना गांड मरवाई तेरे रूपाली दीदी कहीं नहीं जाएगी.... आज तो तेरी दीदी की के छेद में फूल खिला दूंगा साले.... आज तू भी देख लेना की मर्दानगी क्या होती है.... असलम मुझे बता रहा था ...
असलम भाई एक काम करो..... इसके रूपाली दीदी की गांड का छेद बहुत छोटा है और आपका लण्ड बहुत बड़ा है..... अगर इस बहन की लोड़ी की गांड मारनी है तो आपको अपना लण्ड अच्छे से गिला करना पड़ेगा.... इस साली के दूध से अपने लण्ड को अच्छे से गिला करो.... तब जाकर इसकी संस्कारी दीदी की गांड में लौड़ा घुस पाएगा आपका..... जुनैद अपना लण्ड हिलाते हुए असलम को सुझाव दे रहा था...
तू सही कह रहा है भाई..... मुझे तो इसकी रूपाली रंडी दीदी की गांड मारनी है कैसे भी..... असलम ने दृढ़ता पूर्वक कहां और मेरी दीदी के निप्पल्स पर अपने लोड़े का सुपारा लगा दिया... मेरी दीदी की कड़क चूंचियां तो पहले से ही तनी हुई थी.... ऊपर से असलम के लोड़े का अगला भाग उनके निपल्स पर रगड़े जाने के कारण दीदी के निपल्स तो बुलेट की तरह खड़े हो गए थे....
असलम ने मेरी दीदी की दोनों चूचियों को हाथों में दबोच लिया और उन्हें दबा दबा कर दूध निकालने लगा..... मेरी रूपाली दीदी के दूध से असलम का लण्ड पूरा गीला हो के चमकने लगा... काले नाग की भांति उसका लण्ड मेरी दीदी के चेहरे के सामने हिचकोले खा रहा था...
एक बार फिर से असलम ने मेरी रूपाली दीदी को घोड़ी बनाया.... मेरी दीदी बहुत छटपटा रही थी.... इसलिए उसने मेरी दीदी के दोनों हाथ बांध दिए.... उनके ही पेटीकोट के नाड़े की मदद से.... असलम ने एक बार फिर अपना लोड़ा मेरी दीदी की गांड के छल्ले पर सेट किया.... मेरी दीदी की गांड के दोनों गोरे तरबूज हवा में ऊपर उठ लहरा रहे थे और असलम की मजबूत पकड़ में थे.... उसने मेरी दीदी की गांड को पूरी ताकत से फैला रखा था.... उसने मेरी दीदी की गांड पर थूक लगा दीया... मेरी दीदी की गांड को दोनों हाथों से दबोच कर असलम ने जोरदार झटका उनकी गांड पर दिया ...... उसका लौड़ा मेरी दीदी की गांड के छल्ले में रगड़ता हुआ घुस गया.... मेरी रूपाली दीदी ने चीख चीख के आसमान सर पर उठा रखा था..... पर बेरहम असलम मेरी दीदी की गांड में लौड़ा फसाया मस्ती में खड़ा था.... मेरी सुहागन दीदी जिनके हर अंग पर सिर्फ मेरे जीजू का हक था... उनकी गांड में पराए मर्द का लौड़ा घुसा हुआ था... मेरी आंखों के सामने... दोनों हाथ बंधे होने के कारण मेरी दीदी लाचार होकर तड़प रही थी....बड़े नाज नखरो से पाली हुई.... और अब एक बड़े घर की संस्कारी बहू.... मेरी रूपाली दीदी के चूतड़ों को पकड़ असलम अपना लोड़ा मेरी दीदी की गांड में उतारने लगा... तकरीबन 10 या 12 झटके देने के बाद उसका लौड़ा मेरी दीदी की गांड में पूरा समा चुका था.... मैं बड़ी हैरानी से देख रहा था... और दीदी सिसक सिसक के रो रही थी... वह मेरी नाजुक रूपाली दीदी की गांड पर थप्पड़ मार रहा था.... थप्पड़ खा खा के मेरी दीदी की गांड लाल हो चुकी थी.... असलम में मेरी दीदी के बाल पकड़ लिय... जैसे किसी घोड़े की लगाम पकड़ते हैं... उसका लौड़ा मेरी दीदी की गांड में घुसा और सवारी करने के लिए पूरा तैयार था...
देख बहन के लोड़े देख .... तेरी रूपाली रंडी दिदिया के गांड में मेरा लौड़ा फंसा हुआ है मादरजात....... तेरे गांडू जीजा ने तो आज तक तेरी दीदी को लोड़े का सुख नहीं दिया था गांड का.... गांड की ठुकाई कैसे होती है आज तेरी माल को अच्छे से पता चलेगा.... तू भी देख ले बहन चोद..... असलम पूरी मस्ती में बोल रहा था.... मेरी दीदी की गांड पर अपने लोड़े का परचम फहराने के बाद उसे बड़ा गर्व हो रहा था... और हो भी क्यों ना.... एक शादीशुदा घरेलू औरत की गांड में पूरा घुसाने के बाद एक गुंडे को जो गर्व होना चाहिए उसके चेहरे पर दिख रहा था..... और मैं एक बेचारा भाई अपनी प्यारी दीदी की गांड का बाजा बजते हुए देख रहा था..........
अचानक मेरे फोन की घंटी बजी थी.... मेरे जीजू का फोन था... मैं सकपका गया... मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं... एक तरफ असलम मेरी रूपाली दीदी की गांड का चबूतरा बना रखा था... और मेरी दीदी दर्द के मारे चीख रही थी... दूसरी तरफ जीतू का फोन.. मैं असमंजस में पड़ा हुआ ही था कि जुनैद पूछा .....किसका फोन आ रहा है मेरी रूपाली रंडी के भाई....
मेरे जीजू फोन कर रहे हैं.... मैंने जवाब दिया...
चल फोन उठा ले बहन के लोड़े ..... अपने जीजू को बता कि तू किसी ट्रैफिक में फंसा हुआ है... अपने जीजू को यह मत बता देना कि तेरी बहन की गांड में असलम भाई का लौड़ा घुसा हुआ है.... साले... जुनैद ने अपना लौड़ा पकड़ कर हिलाते हुए मुझसे कहा....
मैं भला क्या करता.... मैंने जीतू का फोन रिसीव कर लिया.....
कहां है साले... तेरा फोन भी नहीं लग रहा है... तेरी दीदी कैसी है... जो तुम लोग कहां फंस गए हो..... जीजू ने कहा लाउड स्पीकर ऑन था... सभी सुन रहे थे....
मैं ठीक हूं ... हम लोग बस पहुंचने ही वाले है... ट्रैफिक में अटके हुए हैं... आपको तो पता ही है यहां की सड़के कैसी है..... मैंने बहुत सहज हो उनको जवाब दीया.... जबकि दूसरी तरफ असलम मेरे रूपाली दीदी की गांड में अपना लौड़ा डाल के हचका के पेल रहा था... और मेरी दीदी चिल्ला रही थी... बड़ी बेरहमी से मेरी दीदी की गांड मार रहा था वह कमीना... मेरी दीदी की चीख-पुकार जीजू को भी सुनाई दे गई थी फोन पर शायद......... क्या हुआ साले साहब... तुम्हारी दीदी तो बड़ी चीख रही है.... मेरी बात कराओ अपनी दीदी से.... जीजू ने कहा....
उनकी बात सुनकर मैं असलम और जुनैद की तरफ देखने लगा.... असलम तो अभी भी हुंकार भर भर के मेरी दीदी की गांड में अपना लौड़ा अंदर बाहर कर रहा था.... उसे तो परवाह नहीं थी... जुनैद ने मामला संभाल लिया...... उसके कहने पर मैंने फोन अपनी रूपाली दीदी को दे दिया.... दीदी ने फोन को लेकर एक हाथ से अपने कान में सटा लिया.... उनका दूसरा जमीन पर टिका हुआ था... क्योंकि असलम ने मेरी दीदी को कुत्तिया बना रखा था....
हेलो जी हां ओह्ह… आह्ह… कैसे हो आप.... रूपाली दीदी के मुंह से बस इतना ही निकला फोन पर....
इतनी देर में असलम ने मेरी रूपाली दीदी को कुत्तिया से घोड़ी बना लिया...... एक हाथ से उसने मेरी दीदी के बाल पकड़ लिय और दूसरे हाथ से उसने मेरी दीदी की दूसरी कलाई.... वह मेरी दीदी की गांड में झटके पूरी स्पीड से दिया जा रहा था..... दीदी के मुंह से अजीबोगरीब आवाज निकलने लगी थी..... मेरे जीजू को शंका होने लगी थी....
क्या हुआ मेरी जान...ओह्ह… आह्ह… क्यों कर रही हो डार्लिंग... तकलीफ हो रही है क्या मेरी जान...... मेरे जीजू पूरे रोमांटिक मूड में थे... उन्हें क्या पता कि फोन लाउडस्पीकर पर है और सभी सुन रहे हैं... असलम को तो बड़ा मजा आ रहा था मेरी दीदी की गांड मारते हुए और जीजू की बात सुन के...
हां बहुत ट्रैफिक होने लगी ना हमारे शहर में....उह्ह… उह्ह… उह्ह्ह… मेरी रूपाली दीदी ने बात संभालने की कोशिश की.. पर असलम के तेज तेज झटकों के आगे मेरी दीदी की एक ना चली...... मेरी दीदी बड़बड़आने लगी.... दर्द से.....
असलम के धक्कों की रफ्तार भी धीरे-धीरे बढ़ रही थी, और थोड़ी ही देर में धका पेल चुदाई चालू हो गयी। ओह्ह… आह्ह… उफ्फ सटासट सटासट कभी वह जोर-जोर से आल्मोस्ट बाहर तक निकाल के पूरा एक झटके में अन्दर डाल देता और कभी पूरा अंदर घुसेड़कर वह सिर्फ धक्के देते कभी थोड़ा लण्ड बाहर निकालकर, मुठठी में पकड़कर कसकर मेरी रूपाली दीदी की गांड में गोल गोल घुमा देता..
ओह्ह… ओह्ह…उय्यी उय्यी...... कच्ची सड़क है ना.... बहुत दर्द होता है जी मेरा कचुंबर निकल गया है जी... भाई ड्राइव तो ऐसे ही करता है.........." उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह , .उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..हाँ....
असलम मेरे रूपाली दीदी की गांड में लौड़ा घुसा के बड़ी बेरहमी से आगे पीछे कर रहा था... और मेरी दीदी अपने होठों को अपने दांतों से दबा कर मुंह से निकलने वाली सिसकियां दबाने की कोशिश कर रही थी.... पर नाकाम साबित हो रही थी.... फोन की दूसरी तरफ शायद सब कुछ सुन पा रहे थे मेरे जीजाजी..
क्या कर रही हो मेरी जान... बहुत सीसीआ रही हो.... कहीं तुम्हारा छोटा भाई रास्ते में तुम्हें पटक के तुम्हारी ले तो नहीं रहा है.... हाय रे मेरी जान... तेरे भाई का लौड़ा भी टाइट हो जाता होगा तुझे देख कर.. तू है ही इतनी पटाखा साली.... मुझे लग रहा है तू अपने भाई से और ऑटो वाले से.. तुझे बहुत शौक है ना चुदाने का मेरी जान....... बोलते हुए मेरी जीजू एक कुटिल हंसी हंस रहे थे......
कैसी गंदी बातें करते हो आप भी ना...ओहहहऽऽऽ हायऽ... मैं यहां फंसी हुई हूं सड़क की मुसीबत म और आपको मजाक सूझ रहा है.......आह ओह.. उफ़ उफ़... मेरी कमर में मोच आ गई है..आह ... कितने गड्ढे हैं सड़क.....आह उफ़... बहुत दर्द हो रहा है मुझे.... मेरी दीदी कामुक सिसकी लेती हुई बोल रही थी.. उनकी आवाज के दर्द से कोई भी समझ सकता था कि क्या हो रहा है उनके साथ.....
और मेरे जीजू तो खिलाड़ी है... उन्हें शायद समझ में आ गया था... मुझे अपने भाई से बात कराओ..... अभी.... जीजू ने बड़ी कठोरता के साथ कहा... मेरी दीदी उनकी आवाज सुनकर सहम गई... अपनी गांड में असलम के लोड़े के झटके खाते हुए मेरी दीदी मेरी तरफ देख की गुहार लगाने लगी अपनी आंखों से...... भाई मेरी इज्जत बचा लो... आज तुम्हारी दीदी की इज्जत तुम्हारे हाथों में है... अगर उन्हें पता चल गया कि मेरे साथ यहां क्या हो रहा है ...कभी भी उनको मुंह नहीं दिखा सकूंगी... दीदी की आंखों में आंसू थे और असलम का मोटा लौड़ा उनकी गांड में... मैं दीदी के पास गया और उनके हाथ से फोन ले लिया....
असलम पागलों की तरह मेरी दीदी की गांड मारने लगा और मेरी रूपाली दीदी गला फाड़ के चिल्लाने लगी... ऐसा लग रहा था कि वह मेरी दीदी की गांड को चीर देगा.. बिल्कुल पागल हो चुका था वह... उसने मेरी रूपाली दीदी की पोनीटेल को मुट्ठी में पकड़ लिया और उन्हें खड़ा कर दिया.... दीदी की गांड में लौड़ा घुसा हुआ था... अब खड़े-खड़े मेरे रूपाली दीदी की गांड मारने लगा... वह मेरी दीदी को बहुत गंदी गंदी गालियां दे रहा था..... उनकी गांड पर थप्पड़ पे थप्पड़ लगा रहा था....
मैं चुपचाप खड़ा था फोन हाथ में ले कर..
मैं डर के मारे रोने की हालत में था... शायद असलम भी चाहता था कि मेरे जीजा को पता चले कि उनकी बीवी यानी कि मेरी दीदी उसके लोड़े के नीचे है...
असलम ने मेरे हाथ से फोन छीन लिया और मेरे जीजू को गालियां देने लगा..... बहन के लोड़े... गांडू... तेरी बीवी हमारे पास है... मेरा लौड़ा तेरी बीवी की गांड में घुसा हुआ है बहन की टके.... तेरी मां को चोदूं साले.... भड़वे.... तेरा साला भी यहीं बैठा देख रहा बहन की ठुकाई..तेरा साला भी बहुत बड़ा गांडू है... इस भड़वे की रूपाली दीदी गांड मरवा रही है मेरे से... और यह बहन का लौड़ा चुपचाप देख रहा है....
फोन के दूसरी तरफ जीजू पता नहीं क्या बोल रहे थे वह हमारी समझ में नहीं आ रहा था.... पर मेरी रूपाली दीदी की गांड में असलम लंबे लोड़े से तहलका मचा रखा था...
..
असलम ने परखच्चे उड़ा दिए मेरी रूपाली दीदी की गांड की... बड़ी बेरहमी से उसने मेरी दीदी की गांड के छल्ले को पूरा फैला दिया था अपने मोटे लंबे काले लोड़े से... मेरी दीदी की गांड फट के चार क्या चबूतरा बन गई थी..... मेरी दीदी रो रही थी... पर बेरहम असलम पर इसका कोई भी असर नहीं था बल्कि उसके झटके तो और भी खूंखार हो चुके थे... मेरी रूपाली दीदी उसके झटके किसी रंडी की तरह बर्दाश्त कर रही थी.... घरेलू औरत के लिए इस तरह की तूफानी ठुकाई... वह भी गांड में... मेरी दीदी के लिए बेहद मुश्किल था.. अजीबोगरीब दृश्य था... फोन पर असलम मेरे जीजू को गालियां दिए जा रहा था गंदी गंदी... और मेरी दीदी की गांड मार रहा था... सबसे अजीब बात यह थी कि मैं अपनी रूपाली दीदी की गांड ठुकाई देखकर बुरा महसूस नहीं कर रहा था बल्कि मेरा लौड़ा तन के टाइट हो गया था मेरी पैंट के अंदर......... दीदी का रोना देख के मुझे गुस्सा आना चाहिए था, जबकि ठीक इसके विपरीत हो रहा था... मैं आश्चर्यचकित था अपने लोड़े के व्यवहार पर........ सभी दीदी के प्रति जो भावना होती है उसे भूल कर मैं अपनी दीदी को एक कामुक स्त्री की तरह देख रहा था.... मेरा नजरिया बदल गया था....... असलम में मुझे कामदेव का रूप दिखाई दे रहा था.... और मेरी रूपाली दीदी रती की तरह लग रही थी....... मेरा लौड़ा मेरे काबू से बाहर था...
हाए उउफफ्फ़ … आआह मार … डाअल्ल आआअ … ईईईईई … ओह माआआअ … हे भगवान … मेरी … उफ फट गईई.... मेरी रूपाली दीदी रोते हुए चिल्ला रही थी....... शायद मेरी जीजू भी सुन रहे होंगे उनकी आवाज......... और शायद असलम भी यही चाहता था मेरे जीजू को जलील करना.... उसकी मस्ती अपने उफान पर थी... मेरी दीदी की गांड में... उसका लौड़ा तूफान मचा रहा था.........
इस बहन के लोड़े को तू समझा जुनैद... मुझे इस रांड की गांड मारने दे.... असलम ने फोन उछाल दिया जुनैद की तरह उछाल दिया.... जुनैद ने फोन लपक लिया तुरंत और मेरे जीजू को समझाने लगा...
सुन बहन के लोड़े... असलम भाई अभी तेरी बीवी की गांड मारने में लगे हुए हैं और इसका भाई भी देख रहा है सब कुछ.... साला यह तो बहुत बड़ा गांडू है... इसके बस का कुछ भी नहीं... और सुन बहन के लोड़े.. तेरे तेरे बस का भी कुछ नहीं है मादरजात... तेरी रूपाली कि हम लोग आज रात भर बजाएंगे... समझ गया ना मां के लोड़े...... तुमने अगर कुछ नाटक किया तो बहन चोद समझ ले तेरी रंडी रूपाली और इतना बड़ा गांडू तेरा साला.... इन दोनों की लाश भी नहीं मिल पाएगी तुम लोगों को..,. तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम लोग चुप रहो और रूपाली को हमारे साथ इंजॉय करने दो..... फोन मैं तेरे गांडू साले को दे रहा हूं... तू इस बहन के लोड़े को अच्छी तरह समझा देना.... वरना समझ ले तेरे साथ क्या होने वाला है....
फोन मेरी तरफ उछाल दिया जुनैद ने... मैंने लपक लिया.... मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं अब क्या बोलूं जीजू को...
.. जीजू अब मैं क्या करूं मैं तो बुरी तरह फस गया..... रोते हुए मैंने फोन पर जीजा जी को कहा.....
रो मत बेटा...... थोड़ा धीरे से काम ले.... देखी इन लोग जो भी करना है वह तो करेंगे ही.. तू अपना धीरज बनाए रखना.. कुछ भी ऐसी हरकत मत करना कि तुम्हें ,रूपाली और मेरी मुन्नी को कुछ भी नुकसान पहुंचे.... तुम्हारी दीदी भी समझदार है......... कैसे भी हालत हो जाए तुम डटे रहना.... अपनी दीदी पर भरोसा रखना... सब कुछ तुम्हारे हाथ में है ..... हमारे खानदान की इज्जत तुम्हारे हाथ में....
जीजू तो लगभग रो रहे थे बोलते हुए...... वह भी मजबूर थे मैं भी मजबूर और सबसे ज्यादा मजबूर मेरी रूपाली दीदी थी..
जीजू का फोन कट होने के बाद मैं चुपचाप जमीन पर बैठ गया मुन्नी को अपनी गोद में लेकर.... जुनेद मेरी तरफ देखकर कुटिल मुस्कान दे रहा था.... मैंने अपना सर झुका लिया था... मेरी रूपाली दीदी मेरी तरफ देख रही थी बड़ी आज से कि मेरा भाई कुछ करेगा मेरे लिए... और एक बदनसीब भाई जो कुछ भी करने की हालत में नहीं था चुपचाप दीदी की गांड का बाजा बजते हुए देख रहा था..... खूब चोदा उसने मेरी दीदी की गांड को ..तकरीबन 10 मिनट तो पागल की तरह झटके मार रहा था..... आखिर उसका भी लोड़ा थक गया और उसने मेरी दीदी की गांड मैं अपना माल भर दिया और मेरी .दीदी की पीठ पर लेट के जैसे बेहोश हो गया...
मेरी दीदी की गांड में असलम का लौड़ा फंसा हुआ था... झड़ने के बाद भी..... असलम में मेरी दीदी की गांड से बाहर निकाल लिया अपना लण्ड... पर जुनैद ने मेरी रूपाली दीदी को राहत लेने का मौका नहीं दिया.. उसका लण्ड पहले से बड़ा खड़ा और तैयार था बिना देर किए उसने मअपना लौड़ा पेल दिया मेरे रूपाली दीदी की क गांड में...... जिस गांड में असलम के लण्ड की मलाई भरी हुई थी पहले से ही..... उसने भी मेरी रूपाली दीदी की गांड को इतनी बेरहमी से ही मारा जितना असलम ने मारा था..
तकरीबन 10 मिनट तक मेरी रूपाली दीदी की गांड में जुनैद भी अपना लंड बरसाया... उसका तरीका भी असलम की तरह ही जालिम वाला था पर वह इतनी गालियां नहीं दे रहा था.. बल्कि वह मदहोश लग रहा है... मेरी दीदी अभी भी घोड़ी बनी हुई थी और उनके हाथ अभी भी पीछे बंधे हुए थे.... मेरी दीदी का प्रतिरोध अब बिल्कुल भी नहीं था.... प्रतिरोध करने का कुछ फायदा भी नहीं था.... उनकी और हमारी इज्जत जो बर्बाद होनी थी वह तो हो चुकी थी... उनकी आंखें बंद थी और हर झटके के साथ उनका पूरा शरीर आगे पीछे हो रहा था और चूचीयां हिल रही थी....
मदहोशी के आलम में जुनैद मेरी रूपाली दीदी के ऊपर सवार होकर उनकी गर्दन को चाटे जा रहा था और अपनी मनमर्जी से उनकी गांड में धक्के मारे जा रहा था....
आईईईईइ स्स्सीईईईईइ में मर गई .... ऊउईईईइ माँ... प्लीज मेरे हाथ खोल दो... बहुत दर्द हो रहा है... अचानक दीदी ने पीछे मुड़ के बड़ी मुश्किल से अपने मुंह से आवाज निकाली.... दीदी का चेहरा ठीक जुनैद के चेहरे के सामने था....
हाय मेरी जान को दर्द हो रहा है? चला खोल देता हूं तेरे हाथ... साली तू नखरे दिखा रही थी इसलिए तो तेरे हाथ बांधने पड़े थे... वरना हम बड़े प्यार से लेते हैं... मेरी छम्मक छल्लो... पहले मुझे चुम्मा तो दे देना.... जुनैद ने बड़े कामुक अंदाज में कहाा और मेरी दीदी के होठों को अपने होठों में लेकर चूसने लगा... उसने अपनी जुबान मेरी दीदी के मुंह में ठेल दी... मजबूरी में उसकी जुबान को चूसने लगी थी मेरी दीदी... दीदी ने भी अपनी जीभ बाहर निकाल लि... फिर दोनों की जुबान आपस में लड़ने लगी.... जब चुंबन का दौर खत्म हुआ ...मेरी दीदी की आंखें लाल हो चुकी थी.... जुनैद को बहुत ज्यादा जोश आ गया था... एक हाथ से उसने मेरी दीदी को अपनी बाहों में जकड़ लिया दूसरे हाथ से उसने मेरी दीदी की चुत को रगड़ने लगा, यहां तक कि उसने अपनी दो उंगलियां मेरी दीदी की चुत मे घुसा दी और अंदर-बाहर करने लगा... उसका मोटा मुसल तो पहले से ही मेरी दीदी की गांड में अंदर बाहर हो रहा था....
उईइइइइइइइइइ माँ , प्लीज लगता है ,माँ ओह्ह आह बहोत जोर से नहीईईईई बहोत दर्द उईईईईईई माँ ........ मेरी रूपाली दीदी की कामुक सिसकियां और उनके मुंह से निकल रही अजीबोगरीब आवाज सारा माहौल बयां कर रही थी... मेरे मन में अब कोई भी संदेह नहीं रह गया था कि कहीं ना कहीं मेरी दीदी भी आनंद ले रही हैं जुनैद की हरकतों का..... जुनैद भी समझ चुका था... जुनैद ने अपनी दोनों उंगलियां मेरी दीदी की चुत से बाहर निकाल कर मुझे दिखाई.. जो मेरी दीदी की चुतरस सब बिल्कुल गिरी हुई पड़ी थी... जुनैद ने आंखों आंखों में मेरी तरफ देखते हुए कहा.... साले तेरी बहन की चुत अब लौड़ा मांग रही है....
साले तेरी दीदी की चुत का भोसड़ा बनाऊंगा एक बार फिर .... तू चुपचाप देख और मजे ले.... ज्यादा नाटक किया तो तेरी भी गांड मार लूंगा.... शर्म से मेरी नजरें झुक गई फिर से....
पर उसने मुझ पर और ज्यादा ध्यान नहीं दिया बल्कि उसने मेरी रूपाली दीदी की गांड में से अपना लोड़ा निकाल लिया....
जुनैद ने एक बार फिर से मेरी दीदी को नीचे जमीन पर सूखी घास पर पटक दिया.... उसने मेरी दीदी की दोनों टांगें उठा कर अपने कंधे पर रख ली.... फिर उसने मेरी दीदी की चुत पर अपना मोटा मुसल टिका दिया.... एक जबरदस्त झटके के साथ ही उसका मोटा लौड़ा मेरी दीदी की चुत को रगड़ता पूरा का पूरा जड़ तक अंदर समा चुका था...
...उईइइइइइइइइइ माँ , प्लीज ैमाँ ओह्ह आह नहीईईईई
मैं खुद कामदेव आकर समा गए थे जुनैद के अंदर..... तकरीबन 15 मिनट तक उसने मेरी रूपाली दीदी को कामशास्त्र के सारे पाठ से परिचय करवाया...... उसने मेरी दीदी दीदी को लगभग हर आसन में चोदा..... कभी मेरी दीदी की दोनों टांगे उसके कंधों पर थी और उनकी चूचियां उसकी हाथों की मजबूत पकड़ में.... कभी मेरी दीदी की एक टांग उसके कंधे पर और दीदी की चूची उतनी ही बेरहमी से दबाई जा रही थी... उसने मेरी रूपाली दीदी को कभी घोड़ी बनाया तो कभी कुत्तिया... उसने मेरी दीदी को करवट लिटा के उनकी एक टांग हवा में उठा के पीछे से चोदा... फिर उनको दोहरी करके भी चोदा.. सच तो यह है कि उसके "लण्ड" ने मेरी रूपाली दीदी के आगे वाले छेद का कचुंबर निकाल दिया था.... पर मेरे लिए सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि मेरी दीदी भी उसका पूरा सहयोग दे रही थी... एक काम पीड़ित स्त्री की तरह मेरी दीदी सिसकियां ले रही थी... बल्कि सच कहूं तो उन्हें बेहद आनंद आ रहा था... मेरी दीदी भूल चुकी थी कि वह किस अवस्था में.... अपने यौन सुख के उन्माद में मेरी दीदी को यह भी याद नहीं रहा कि उनका भाई उनके सामने बैठा हुआ सब कुछ देख रहा है.... ना जाने कितनी बार मेरी दीदी झड़ चुकी थी.... झड़ते समय उनके मुंह से ऐसी आवाज निकलती थी कि मैं समझ जा रहा था कि मेरी दीदी झड़ रही है.... सच तो यह है कि मैं भी झड़ने की कगार पर था... अपनी सगी सुहागन दीदी की "चुदाई एक गैर मर्द से देखते हुए.... आखिरी समय में मेरी रूपाली दीदी जुनैद के बदन से बिल्कुल चिपकी हुई थी.. उनकी दोनों टांगे जुनैद के कमर से लिपटी हुई थी.. जुनैद का लंबा मोटा लण्ड मेरी दीदी की कोख में अंदर बाहर बड़ी तेजी से हो रहा था... और उसका चेहरा मेरी दीदी की चूचियों के बीच में धंसा हुआ था... मेरी दीदी की कामुक चीखे और सिसकियां... ऊपर से जुनैद की हुंकार भरी आवाज सुनके मुझे समझने में देर नहीं लगी अब समय आ गया है.... जुनैद ने अपने लण्ड का माल मेरी दीदी की कोख में फिर भर दिया.... मेरी दीदी की बच्चेदानी जुनैद के लोड़े की मलाई से भर गई... कुछ देर तक दोनों कांपते रहे... दोनों पसीने से भीग चुके थे... मेरी रूपाली दीदी के चेहरे पर संतुष्टि थी.... ऐसा लग रहा था जैसे अभी अभी उनके पति ने यानी मेरे जीजू ने मेरी दीदी को भरपूर यौन सुख दिया हो...... दीदी के चेहरे पर कोई भी ग्लानि के बाद दिखाई नहीं दे रहे थे... उनकी आंखें आधी खुली आधी बंद थी.... कामुकता की कठिन अग्नि में जलने के बाद मेरी दीदी का चेहरा शांत लग रहा था.... जुनैद के लण्ड ने मेरी दीदी को भरपूर सुख दिया था... और मेरी घरेलू संस्कारी रूपाली दीदी बिना किसी संकोच के आनंद उठा रही थी.... जुनैद अभी भी अपने आधे खड़े लण्ड से मेरी दीदी को चोदे जा रहा था..... माल गिराने के बाद भी उसका मुसल शांत नहीं हो रहा था... शायद यह मेरी रूपाली दीदी कि हुस्न का ही कमाल रहा होगा... झड़ने के बावजूद भी हार नहीं मान रहा था जुनैद.... बीच-बीच में मेरी दीदी भी चूतड़ उठा उठा के उसको सहयोग दे रही थी.... और ज्यादा से ज्यादा योन सुख लेने का प्रयास कर रही थी... कुछ ही देर में जुनैद मेरी रूपाली दीदी के ऊपर लाश की तरह लेट गया.... उसका लोड़ा मेरी दीदी की योनि के भीतर घुसा हुआ था पर उसके लोड़े में जान बची नहीं थी.... मेरी दीदी की योनि ने उसका सारा रस निचोड़ लिया था..
अचानक जंगल में ऑटो की आवाज सुनाई दी.... और मेरी फट गई..
ऑटो वाला सुरेश वापस आ चुका था.... और वह बेहद नजदीक था..
जुनेद मेरी रूपाली दीदी के नंगे बदन के ऊपर से उतरने को बिल्कुल तैयार नहीं था.. बल्कि वह तो बिल्कुल होश में नहीं था.... फिर भी इतने कम होश में भी जुनैद मेरी रूपाली दीदी की चूचियों को पिए जा रहा था... बारी-बारी से दोनों निप्पल्स अपने मुंह में लेकर.... मेरी दीदी एक दुधारू गाय की तरह दूध दे रही थी और जुनैद पिए जा रहा था... उसका मोटा लंबा मुसल लण्ड झड़ने के बाद आधा हो गया था और खुद ब खुद मेरी दीदी की योनि से बाहर निकल गया... पर वह अभी भी मेरी दीदी के ऊपर सवार था.... जंगल के सन्नाटे में ऑटो की आवाज साफ सुनाई दे रही थी और वह बिल्कुल पास आ चुकी थी. ऑटो झोपड़ी के बिल्कुल पास आकर बंद हो गई... यानी सुरेश पहुंच चुका था... और मेरी गांड भी फट गई... मुझे लगने लगा कि सुरेश अब मेरी रूपाली दीदी को इस हालत में देखेगा... वह भी इतना नीच... एक सड़क का ऑटो वाला... मेरा खड़ा हुआ लोड़ा भी बैठ गया... दोस्तों अगर मैं आप लोगों से सच बोलूं जो कि बेहद शर्मिंदगी की बात है.... मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया था मेरी रूपाली दीदी की ठुकाई देखकर ... बिना हाथ लगाए ही मैं झड़ने की कगार पर पहुंच चुका था... पर ऑटोवाले सुरेश को झोपड़ी के अंदर आने का अंदेशा पाकर मेरा लण्ड मुरझा गया.... एक बार फिर मैं बहुत ग्लानि में समा गया..
जुनैद भाई मैं हाथ जोड़ता हूं प्लीज अब मेरी दीदी को छोड़ दो... ऑटो वाला सुरेश भैया आ चुका है... प्लीज हमारी इज्जत कम से कम हो उसके सामने तो रख लो.... अपना पूरा साहस जोड़कर मैंने जुनैद से विनती की और असलम की तरफ भी देखा जो अपने लण्ड को हिला रहा था मेरी दीदी को घूरते हुए... उसका एक बार फिर से पूरा खड़ा हो गया था.... क्या फिर से मेरी दीदी को चोदने वाला था वह? मैं लगभग रो रहा था असलम की तरफ देखते हुए...
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